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‘ऑक्सीजन की कमी से मरीज को कुछ हुआ तो हॉस्पिटल जिम्मेदार नहीं… परिवार वाले’ – दिल्ली में अस्पतालों ने खड़े किए हाथ

दिल्ली में कोरोना के कारण हालात लगातार भयावह होते जा रहे हैं। अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के कारण हर दिन सैकड़ों जानें जा रही हैं। दिल्ली में लगातार पाँचवे दिन ऑक्सीजन की आपूर्ति में भारी कमी आई है। हालात ये हैं कि इसकी वजह से मरीजों की साँसे उखड़ने लगी हैं और अस्पताल प्रशासन ने अपने हाथ खड़े कर लिए हैं। कई अस्पताल उनके यहाँ भर्ती मरीजों को छुट्टी देने के लिए परिजनों से भी संपर्क कर रहे हैं तो कुछ ने अपने यहाँ बेड्स की संख्या घटा दी है।

शनिवार को भी दिल्ली के दो अस्पताल सरोज सुपर स्पेशियलिटी और बत्रा हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च ने ऑक्सीजन खत्म होने का रेड अलार्म बजा दिया है।

हालात ये है कि ऑक्सीजन की कमी के चलते सरोज अस्पताल ने शनिवार (24 अप्रैल 2021) को 27 मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया। 200 मरीजों की क्षमता वाले सरोज हॉस्पिटल में 121 मरीज हैं, जिनमें से 116 कोरोना संक्रमित हैं।

इससे पहले शनिवार (24 अप्रैल 2021) को जयपुर गोल्डन हॉस्पिटल ने दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की। न्यायालय में हॉस्पिटल की ओर से वरिष्ठ वकील सचिन दत्ता ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार की अक्षमता पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि दिल्ली सरकार के अधिकारी उस समय नदारद रहे, जब अस्पताल में मरीज ऑक्सीजन की कमी से मर रहे हैं। कोर्ट ने इसे संक्रमण की सुनामी बताते हुए कहा था कि यदि कोई भी अधिकारी ऑक्सीजन की आपूर्ति में बाधा डालता है तो उसे फाँसी पर चढ़ा देंगे।

वहीं सरोज अस्पताल प्रबंधन ने एक बयान जारी कर कहा, “ऑक्सीजन सप्लाई की अनिश्चितता के कारण हम ये घोषणा करते हैं कि अब हम लोगों को ऑक्सीजन नहीं दे सकते हैं। क्योंकि ऑक्सीजन सप्लायर हमारी जरूरतों के हिसाब से इसकी सप्लाई करने को तैयार ही नहीं है। इसलिए, आप अपने मरीज को अपनी पसंद के अस्पताल में शिफ्ट कर सकते हैं। अगर ऑक्सीजन की कमी से कोई मरीज पीड़ित है, तो यह रोगी के रिश्तेदारों की जिम्मेदारी होगी न कि अस्पताल की।​​”

अस्पताल के डायरेक्टर पीके भारद्वाज ने कहा, “हालाँकि, अस्पताल को शनिवार (24 अप्रैल 2021) दोपहर 3:30 बजे ऑक्सीजन आपूर्ति की गई है। हमने पहले कभी इस तरह की स्थिति नहीं देखी। हमने लोगों को भर्ती करना बंद कर दिया है, जो भर्ती हैं उन्हें छुट्टी दी जा रही है। हालाँकि, घोषणा पत्र जारी करने के बाद भी कोई भी मरीज या परिचारक अस्पताल से बाहर नहीं निकला है। हम सभी मिलकर इस लड़ाई को लड़ेंगे।”

बत्रा अस्पताल ने भी बंद की नई भर्तियाँ

इसी तरह, बत्रा अस्पताल ने भी शनिवार (24 अप्रैल 2021) को एक भी नए मरीज को भर्ती नहीं किया। अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ एससीएल गुप्ता ने कहा, “हमारे पास 350 मरीजों को भर्ती करने की क्षमता है और मौजूदा वक्त में हमारे पास 300 भर्ती हैं। हमने नई भर्तियों को बंद कर दिया है। ऑक्सीजन की सप्लाई शनिवार की शाम 5 बजे फिर से शुरू कर दी गई थी, लेकिन लगातार आपूर्ति नहीं होने से रविवार को संकट एक बार फिर से गहराएगा।

दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भी ऑक्सीजन की कमी हो गई है। अस्पताल बोर्ड के अध्यक्ष डॉ डीएस राणा ने कहा, “हर कुछ घंटों में, हमारे पास ऑक्सीजन का संकट शुरू हो जाएगा और पूरा प्रशासन केवल कॉल करने में पागल हुआ जा रहा है। लोगों को खुद से ऑक्सीजन सिलेंडर लाते देख हमें दुख होता है। वर्तमान में, हमारे पास 516 कोरोना मरीज हैं, जिसमें से 128 को अधिक से अधिक ऑक्सीजन की जरूरत है। यह अधिक समय तक नहीं चल सकेगा। हमारे कर्मचारी भी थकावट के शिकार हो रहे हैं। एक तरफ उन्होंने कोविड बेड बढ़ाए हैं, दूसरी तरफ वे पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं कर सकते हैं। हम कैसे काम करें? अगर यह एक कोविड सुनामी है और सरकार ने आपदा अधिनियम लागू किया है, तो उन्हें आपदा अधिनियम के अनुसार काम करना चाहिए। हमें तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत है।”

दिल्ली के जीटीबी अस्पताल ने भी कोरोना संकट के चलते अपने बेड्स की संख्या को 900 से घटाकर 700 कर दिया है। अस्पताल के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने कहा, “अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत है। हमें पूरी स्थिति की समीक्षा करनी थी। कई स्वास्थ्यकर्मी भी संक्रमित हुए हैं। सभी बातों पर विचार करने के बाद बेड की संख्या कम करने का निर्णय लिया गया है।”

शनिवार (24 अप्रैल 2021) को एम्स के आपातकालीन विभाग में भी एक घंटे के लिए सभी प्रवेश रोक दिया गया था। अस्पताल ने एक बयान में कहा कि आपातकालीन विभाग में प्रवेश को एक घंटे के लिए इसलिए रोक दिया गया था, क्योंकि कोरोना मरीजों की ऑक्सीजन की जरूरतों को देखते हुए पाइपालइनों को दुरुस्त किया जा रहा था। मौजूद वक्त में एमरजेंसी वार्ड में करीब 100 कोविड पेशेंट का इलाज चल रहा है। ये एम्स के अलग-अलग सेंटर्स में भर्ती 800 से अधिक मरीजों के अतिरिक्त हैं।

दिल्ली में संक्रमण की दर 30%, 3 मई तक बढ़ा लॉकडाउन: ऑक्सीजन पर फँसने के बाद CM केजरीवाल का अब कोटा पर रोना

कोरोना वायरस के कहर के बीच दिल्ली के बिगड़ते हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज फिर से दिल्ली में एक सप्ताह के लिए लॉकडाउन बढ़ाने का ऐलान किया है। ये लॉकडाउन 26 अप्रैल से 3 मई सुबह 5 बजे तक प्रभावी रहेगा।

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सभी चाहते हैं कि लॉकडाउन को और अधिक बढ़ाया जाना चाहिए। कोरोना से निपटने का यही एक आखिरी हथियार है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में ऑक्सीजन की खासी किल्लत है। राजधानी के लिए 490 टन ऑक्सीजन अलॉट किया गया है, लेकिन अभी तक पूरा कोटा नहीं मिल पाया है। कल केंद्र सरकार ने 10 टन और बढ़ाई है। लेकिन, फिलहाल दिल्ली में अभी केवल 335 मीट्रिक टन तक ही ऑक्सीजन पहुँच रही है। दिल्ली में अभी भी कोरोना का कहर जारी है, लेकिन यह कम होने का नाम नहीं ले रहा है।

पहले की तरह ही जारी रहेंगी आवश्यक सेवाएँ

लॉकडाउन का ऐलान करते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि राजधानी में कोविड संक्रमण की दर 37 प्रतिशत तक पहुँच गई है। आज संक्रमण की दर घटकर 30 फीसदी पर पहुँच गई है, लेकिन हम ये नहीं कह रहे हैं कि यह कम हो रहा है। यह बढ़ भी सकती है। इसीलिए हम सतर्कता के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में बाकी आवश्यक सेवाएँ जस की तस चलती रहेंगी।

केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हमने एक पोर्टल बनाया है, जिस पर सभी ऑक्सीजन सप्लायर्स, अस्पताल और मैन्युफैक्चरर को 2-3 घंटे में अपना स्टेटस अपडेट करना होगा। ताकि समुचित कदम उठाए जा सकें।

इससे पहले दिल्ली के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने केजरीवाल सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कोरोना की दूसरी लहर को सुनामी बताया और कहा था कि यदि कोई भी अधिकारी ऑक्सीजन की आपूर्ति में बाधा डालता है तो उसे हम फाँसी पर चढ़ा देंगे। न्यायालय ने दिल्ली सरकार से कहा कि यदि स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों की गलती है तो उनकी शिकायत केंद्र से करें, जिससे उन पर कार्रवाई की जा सके।

कोरोना के खिलाफ जंग में एकजुट भारत, वैक्सीन को लेकर किसी भी अफवाह से बचें: ‘मन की बात’ में पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से कोरोना वायरस वैक्सीन को लेकर जारी किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है। पीएम ने कहा कि भारत कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में एकजुट है।

पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 76वें एपिसोड में देश में जारी कोरोना संकट से निपटने पर जोर देते हुए लोगों से अपील की कि वे इस संकट के बारे में सही स्रोत से ही जानकारियाँ जुटाएँ।

कोरोना वैक्सीन को लेकर अफवाहों से बचें: पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिए अपने पुराने मंत्र को दोहराते हुए कहा, ”वैक्सीन लगवाएँ और सावधनी बरतें और ‘दवाई भी, कड़ाई भी’ के मंत्र को कभी न भूलें।”

पीएम ने कोरोना के खिलाफ जंग में वैक्सीन के महत्व को रेखांकित करते हुए लोगों से किसी भी अफवाह से बचने को कहा। पीएम मोदी ने कहा, ”कोरोना के इस संकट काल में वैक्सीन की अहमियत सभी को पता चल रही है। इसलिए मेरा आग्रह है कि वैक्सीन को लेकर किसी भी अफवाह में न आएँ।”

केंद्र करा रहा राज्य सरकारों को मुफ्त वैक्सीन मुहैया: पीएम मोदी

पीएम ने कहा कि केंद्र सरकार की तरफ से सभी राज्य सरकारों को मुफ्त वैक्सीन भेजी गई है और अब देश की कॉर्पोरेट सेक्टर कंपनियाँ भी अपने कर्मचारियों को वैक्सीन लगाने के अभियान में भागीदारी निभा पाएँगी।

पीएम ने कहा, “भारत सरकार की तरफ से सभी राज्य सरकारों को मुफ्त वैक्सीन भेजी गई है, जिसका लाभ 45 साल की उम्र के ऊपर के लोग ले सकते हैं। अब तो 1 मई से देश के 18 साल के ऊपर के हर व्यक्ति के लिए वैक्सीन उपलब्ध होने वाली है।”

उन्होंने कहा, ”भारत सरकार की तरफ से मुक्त वैक्सीन का जो कार्यक्रम अभी चल रहा है, वो आगे भी चलता रहेगा। मेरा राज्यों से भी आग्रह है कि वो भारत सरकार के इस मुफ्त वैक्सीन अभियान का लाभ अपने राज्य के ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुचाएँ।”

पीएम ने कोरोना के खिलाफ जंग में लोगों की मदद करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं की तारीफ की। पीएम मोदी ने कोरोना के खिलाफ जंग में देश के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के योगदानों को रेखांकित करते हुए कहा, ”दोस्तो, देश के डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी कोरोनावायरस के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं। पिछले एक साल के दौरान उनके पास इस बीमारी को लेकर हर तरह के अनुभव हैं।”

मर चुके कोरोना मरीज की Remdesivir इंजेक्शन को नर्स आबिद और अंकित ₹32000 में बेच रहा था, UP पुलिस से गिरफ्तार

देश में कोरोना के कहर के बीच कुछ ऐसी घटनाएँ भी सामने आ रही हैं, जो मानवता को शर्मसार करने वाली हैं। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के एक चर्चित अस्पताल में सामने आया, जहाँ के दो वॉर्डबॉय (पुरुष स्टाफ नर्स) को एक मरीज के लिए आवंटित रेमडेसिविर इंजेक्शन को कथित तौर पर 32000 रुपए में बेचने की कोशिश करने के लिए शनिवार को गिरफ्तार किया गया।

रेमडेसिविर इंजेक्शन की कीमत 900-2000 रुपए है लेकिन इसे नीलामी के लिए रखा गया था और इसे 25000 रुपये की बोली लगाकर खरीदा गया। हालाँकि बोली एक मरीज का रिश्ता बनकर एक पुलिसवाले द्वारा लगाई गई थी।

मरीज के इंजेक्शन को अस्पताल स्टाफ ने की बेचने की कोशिश

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, मेरठ के एक प्रमुख अस्पताल में भर्ती एक कोविड शोभित जैन की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाए जाने थे। उन्हें इसके तीन डोज लगाए गए लेकिन चौथी डोज को अस्पताल के इन दो वार्डबॉयों ने अपने पास रख लिया। जब जैन की मौत हो गई तो वे इस इंजेक्शन को बेचने के लिए ग्राहकों की तलाश में जुट गए।

मेरठ के एसएसपी अजय साहनी ने कहा कि इस मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस की सर्विलांस टीम और पुलिसकर्मी इस मामले की जाँच में जुटे थे। उन्होंने वॉर्डबॉय ने 32000 रुपए की बोली रखी थी। पुलिस ने वॉर्डबॉय आबिद खान और अंकित शर्मा को गिरफ्तार कर लिया है। अस्पताल के छह सिक्योरिटी गार्ड्स ने इन दोनों को बचाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस टीम द्वारा उन पर काबू पाते हुए दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, इन सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 147 (दंगा करना), 342 (गलत तरीके से कैद करना), 353 (सार्वजनिक बल पर अपने कर्तव्य का निर्वहन करने से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल), और 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मामला दर्ज किया गया है। उनके खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट और महामारी रोग अधिनियम की धाराएं भी लगाई गईं हैं।

अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया। इस अस्पताल को चलाने वाले चैरिटेबल ट्रस्ट सुभारती केकेबी के ट्रस्टी डॉ. अतुल कृष्णा ने पुलिस के दावे को गलत बताते हुए कहा कि यहाँ ऐसा नहीं होता है और यह एक अलग मामला था। उन्होंने कहा कि पुलिसवाले सादे कपड़ों में हथियार लेकर जा रहे थे, इसीलिए ड्यूटी पर मौजूद गार्डों ने उन्हें रोकने की कोशिश की।

कोरोना लॉकडाउन में 6 लड़कों के साथ क्रिकेट खेल रहा था कुरैशी, पुलिस को भी किया घायल… कोर्ट ने कहा- ‘जमानत नहीं’

महाराष्ट्र के मुंबई में कोरोना संकट के बीच सख्ती और गाइडलाइंस को दरिकनार करते हुए कुरैशी नाम का युवक 6 अन्य लड़कों के साथ सड़क पर क्रिकेट खेलकर कोरोना गाइडलाइंस का उल्लंघन कर रहा था। इस मामले में गिरफ्तार आरोपित कुरैशी (20 वर्ष) को निचली अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया है।

निचली अदालत के जज अभिजीत नंदगाँवकर ने कहा कि कुरैशी ने 6 लड़कों के साथ मिलकर कोरोना कर्फ्यू का उल्लंघन किया और कानून को तोड़ा। कोर्ट ने जमानत देने से इनकार करते हुए कहा, “यदि आरोपित को कड़ी शर्तों के साथ जमानत भी दी जाती है तो ये आम जनमानस के लिए गंभीर खतरा बनेगा। क्योंकि आरोपित ने महामारी के इस दौर में अथॉरिटी के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया है।”

जस्टिस नंदगाँवकर ने कहा, “राज्य में कोरोना ने तबाही मचा रखी है। ऐसे में लड़कों का बिना मास्क के बीच सड़क पर क्रिकेट महामारी अधिनियम का उल्लंघन है, सरकारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।”

अदालत ने कहा कि आवेदक 20 साल का है और उसे इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि कोरोना के कारण हालात बहुत ही खराब है। उसे पुलिस और स्थानीय प्रशासन के नियमों का पालन करना चाहिए।

पुलिस ने बताया कि कुरैशी समेत 6 अन्य लड़के कर्फ्यू के बीच सड़क क्रिकेट खेल रहे थे। जब उन्होंने पुलिस को आते देखा तो वो वहाँ से भाग गए, लेकिन उनके मोबाइल फोन वहीं छूट गए थे। बाद में मोबाइल वापस लेने आए लड़कों में से कुरैशी के एक दोस्त ने पुलिसकर्मी से मोबाइल छीनने की कोशिश की। इसमें पुलिसकर्मी घायल भी हुआ। इसके बाद पब्लिक सर्वेंट को ड्यूटी करने से रोकने और कोरोना नियमों को तोड़ने के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस के साथ छीना-झपटी करने वाला तो नाबालिग होने के कारण छूट गया, लेकिन कुरैशी को कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया।

हालाँकि, कुरैशी ने पुलिस पर मनगढ़ंत कहानी के आधार पर उसे फँसाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। उसने दावा किया है कि उसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। उसने दलील दी है कि बाकी आरोपित फरार हैं, इसलिए उसकी जमानत को खारिज नहीं किया जा सकता है।

बता दें कि बीते 24 घंटे के दौरान अकेले महाराष्ट्र में कोरोना के 67,160 मामले सामने आए हैं। वहीं 676 लोगों की मौत भी हुई है।

राजस्थान के कैबिनेट मंत्री ‘श्री सलमान खान’ के ‘श्री बॉडीगार्ड जी’ से मिले, बिना मास्क लगाए… पूरे राज्य में लगा है कर्फ्यू

राजस्थान में एक कैबिनेट मंत्री हैं। नाम है – डॉ. रघु शर्मा। सलमान खान के बड़े फैन हैं शायद! शायद इतने बड़े कि उनसे मिलने की चाहत रखते हैं, न मिल सके तो उनके बॉडीगार्ड से मिल कर दिल को खुश कर लेते हैं।

पहले तो उनका ट्वीट देखा जाए। पढ़ा भी जाए। एक-एक शब्द कैसे चासनी में डूब कर लिखा गया है – ध्यान से पढ़िए।

“फ़िल्म अभिनेता श्री सलमान खान के अंगरक्षक शेरा के नाम से प्रसिद्ध श्री गुरमीत सिंह जॉली जी ने निवास पर मुलाकात की।” – यह लाइन डॉ. रघु शर्मा ने लिखी है।

ध्यान दीजिए – श्री सलमान खान, श्री गुरमीत सिंह जॉली जी… बॉडीगार्ड फिल्म में सलमान खान खुद को भी शायद इतना इज्जत नहीं दिए होंगे, जितना उनके बॉडीगार्ड को राज्य के एक कैबिनेट मंत्री से मिल रहा है।

राजस्थान से सलमान का रिश्ता

काला हिरण सलमान को बहुत पसंद है। पसंद न होती तो सैकड़ों मीडिया रिपोर्ट आपने अब तक पढ़ी न होती। आश्चर्य यह कि जब-जब काला हिरण और सलमान की चर्चा मीडिया में होती है, राजस्थान उसमें जुड़ ही जाता है। शायद इसी कारण से लोग ऐसे ट्वीट कर रहे हैं। ‘श्री मंत्री जी’ जो काम कर रहे हैं, उसे खुल कर बता रहे हैं शायद!

कुछ लोग मर्यादा लाँघ कर ‘श्री मंत्री जी’ के साथ औकात शब्द का प्रयोग कर रहे हैं, जो सर्वथा अनुचित है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुन कर आए हुए जनप्रतिनिधि भले कुछ करें लेकिन लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने वाले वोटर हमेशा संसदीय भाषा और मर्यादा का ख्याल रखें, यह राजनाति शास्त्र की किताब में कहा गया है। वरना ‘श्री मंत्री जी’ न्यायिक प्रक्रिया में जाकर मानहानि का केस ठोंक सकते हैं।

ऑक्सीजन टैंकर नहीं हैं तो व्यवस्था करें, आपके पास चलकर नहीं आएँगे: केजरीवाल सरकार को दिल्ली हाईकोर्ट ने फटकारा

कोरोना संकटकाल में देश की राजधानी दिल्ली में हालात बहुत भयावह हैं। स्वास्थ्य व्यवस्था दम तोड़ चुकी है, अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की भारी कमी देखने को मिल रही है। वहीं, दिल्ली के जयपुर गोल्डन अस्पताल में शुक्रवार रात ऑक्सीजन की कमी को लेकर 20 मरीजों की मौत हो गई और 200 से अधिक मरीजों की साँसों पर संकट अभी भी बना हुआ है। 

इसी बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑक्सीजन की कमी को लेकर केजरीवाल सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। जयपुर गोल्डन हॉस्पिटल के सॉलिसिटर जनरल एसजी मेहता और कोर्ट की ओर से पेश वकील सचिन दत्ता ने दिल्ली सरकार को अन्य राज्यों की तुलना में लापरवाह बताया है।

दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के ओएसडी आशीष वर्मा को कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि अन्य राज्य ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए कई बड़े कदम उठा रहे हैं, इसलिए ऐसा कोई कारण नहीं है जो दिल्ली सरकार नहीं कर सकती थी।

कोर्ट ने दिल्ली सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील राहुल मेहरा से यह भी कहा कि ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए व्यवस्था की हुई है, लेकिन जब तक दिल्ली सरकार खुद पहल नहीं करती, तब तक चीजें आगे नहीं बढ़ेंगी।

कोर्ट ने वर्मा से कहा, “हर राज्य अपने लिए ऑक्सीजन टैंकरों की व्यवस्था कर रहे हैं, अगर आपके पास अपने टैंकर नहीं हैं, तो उनकी व्यवस्था करें। आपको यह करना होगा, केंद्र सरकार के अधिकारियों से संपर्क करें। हम अधिकारियों के बीच संपर्क की सुविधा के लिए यहाँ नहीं बैठे हैं।”

कोर्ट ने मेहरा से कहा, “अगर आवंटन 3 दिन पहले किया गया था, तो आपने टैंकरों के लिए कोई और विकल्प क्यों नहीं तलाशा? आपकी पार्टी के प्रमुख खुद एक प्रशासनिक अधिकारी रह चुके हैं, वह जानते हैं कि यह काम कैसे किया जाता है।”

दिल्ली हाईकोर्ट ने आगे कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि आशीष वर्मा चीजों को गंभीरता से नहीं ले रहे थे। समस्या यह है कि आपको लगता है कि आवंटन हो चुका है। इसलिए सब कुछ आपके दरवाजे पर चलकर आ जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं है। आवंटन के बाद आपने ऑक्सीजन टैंकरों को लेने के लिए कोई प्रयास किया है?

जब वकील मेहरा ने कोर्ट को बताया कि वे कोशिश कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा, “यह क्या है? आप इस स्थिति को भी हलके में ले रहे हैं। क्या आपने प्लांट से संपर्क किया है? कोर्ट ने यह भी कहा कि आवंटन के बाद से सभी राज्य ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए इंतजाम कर रहे हैं। दिल्ली सरकार को भी ये सब करने की आवश्यकता है।”

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि राउरकेला से टैंकर तैयार थे, लेकिन इसे लेने के लिए कोई नहीं था। उन्होंने कहा, “अन्य सभी राज्य ऑक्सीजन के टैंकरों के लिए रेलवे से संपर्क कर रहे हैं। दिल्ली को तो बनी बनाई थाली पसंद है। हम राज्यों की मदद कर रहे हैं। दिल्ली के अधिकारियों को भी ऐसा करने की जरूरत है।”

वहीं, एसजी मेहता ने इस बात पर जोर दिया कि ऑक्सीजन की सप्लाई सुचारू ढंग से हो इसके लिए दिल्ली में कोई व्यवस्था नहीं थी। ऐसी समस्याओं का किसी अन्य राज्य ने सामना नहीं किया था। दिल्ली एक अपवाद है।

बता दें कि जयपुर गोल्डन अस्पताल के डॉक्टर डीके बालुजा ने बताया है कि अस्पताल में अब सिर्फ आधे घंटे की ऑक्सीजन बची है। इतना ही नहीं, ऑक्सीजन की कमी के कारण यहाँ 200 से ज्यादा लोगों की जिंदगी दॉँव पर लगी है। हमने कल रात ऑक्सीजन की कमी के कारण 20 लोगों को खो दिया। यहाँ शाम 5 बजे ऑक्सीजन की सप्लाई आनी थी, लेकिन रात 12 बजे ऑक्सीजन मिली और वो भी आधी।

वैक्सीन की कीमत ₹600 क्यों?- फरहान के सवाल पर लोगों ने जमकर किया ट्रोल: याद दिलाए पॉपकॉर्न, टिकट के दाम

देश में तेजी से फैल रही कोरोना महामारी को रोकने के लिए वैक्सीनेशन एक मात्र उपाय की तरह है। लेकिन, कई लोग ऐसे हैं जो वैक्सीन के संबंध में तरह-तरह का सवाल खड़ा कर आम जनता के मन में शंका पैदा कर रहे हैं। बॉलीवुड अभिनेता फरहान अख्तर ने भी आज वैक्सीन संबंधी एक प्रश्न पूछा, जिसके बाद सोशल मीडिया पर तमाम यूजर उन्हें जवाब देने में जुट गए। कंगना रनौत ने भी इस दौरान फरहान को उनके सवाल का जवाब दिया।

दरअसल, हाल में एक खबर आई थी कि सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ने प्राइवेट अस्पतालों में कोविशील्ड वैक्सीन की एक खुराक की कीमत 600 रुपए करने का ऐलान किया है। यह वैक्सीन 18 साल से अधिक उम्र वालों को सरकारी अस्पताल में 400 और प्राइवेट अस्पताल में 600 रुपए की मिलेगी, जबकि केंद्र को पहले की तरह 150 रुपए में वैक्सीन बेची जाएगी।

इसी बात पर आपत्ति उठाते हुए फरहान ने एक पेपर की कटिंग शेयर की। अख्तर ने लिखा, “ये कहने के बावजूद कि एक वैक्सीन के 150 रुपए लेने पर भी फायदा हो रहा है। देश के प्राइवेट अस्पतालों को वैक्सीन के लिए 600 रुपए चुकाने पड़ेंगे। ऐसा क्यों है सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया, हमें बताएँ।”

इस ट्वीट के बाद लोगों के अलग-अलग रिएक्शन आए। बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत ने रिप्लाई देते हुए लिखा- “दूसरे देश हमें वैक्सीन के लिए कच्चा माल मुहैया करा रहे हैं, वे इसे किस कीमत पर खरीदते हैं और किस कीमत पर बेचते हैं, ये उनकी अर्थव्यवस्था और आबादी के हिसाब से होता है, हमने फेक प्रोपेगेंडा की वजह से कई टन टीके बर्बाद कर दिए और अब अमेरिका ने हमारे कच्चे माल को रोक दिया है।”

एक यूजर ने फरहान से पूछा कि क्या उन्होंने कभी 200 रुपए की मूवी टिकट या फिर 400 के पॉपकॉर्न, 100 रुपए का कोकाकोला और 50 रुपए के पानी का विरोध किया है।

सैयद हिदायत हसन ने लिखा, “600 रुपए देना अस्पताल में लाख रुपए और आईसीयू बेड से ज्यादा ठीक है। आज की जरूरत ये है कि कच्चा माल मिले जिसे यूएस ने बैन कर दिया है।”

एक यूजर ने कहा, “अच्छी शुरुआत है फरहान। एक बार महामारी खत्म हो जाए। अपनी आवाज को मूवी थिएटर में मिलने वाले पॉपकॉर्न की कीमत के लिए भी उठाना।”

पूर्वेश मेहता ने लिखा, “भाई हम आपके परिवार के लिए पैसे दे देंगे। इसे मुद्दा मत बनाओ। मैंने तुम्हारी फिल्म कभी थिएटर में नहीं देखी तो ये मौका है अल्पसंख्यकों की मदद के लिए और मैं जरूर करूँगा।”

सीरम इंस्टिट्यूट इंडिया का बयान

गौरतलब है कि फरहान जैसे लोगों के मन में वैक्सीन की बढ़ी कीमतों को लेकर तमाम सवाल हैं। ऐसे में सीरम इंस्टिट्यूट ने आज इस पर बयान जारी किया। बयान में कंपनी ने वैक्सीन को लेकर कहा कि इसकी शुरुआती कीमत दुनिया भर में कम थी, क्योंकि यह उन देशों के अग्रिम वित्त पोषण पर आधारित थी, जिसमें वैक्सीन निर्माण का जोखिम शामिल था। बयान में कहा गया, ‘‘भारत सहित सभी सरकारी टीकाकरण कार्यक्रमों के लिए कोविशील्ड की शुरुआती कीमत सबसे कम थी।’’

कंपनी ने आगे कहा, ‘‘मौजूदा स्थिति एकदम अलग है, वायरस लगातार रूप बदल रहा है, जबकि जनता पर जोखिम बना हुआ है। अनिश्चितता की पहचान करते हुए, हमें स्थिरता सुनिश्चित करनी होगी, क्योंकि हमें महामारी से लड़ने के लिए क्षमता विस्तार में निवेश करना है और लोगों की जान बचानी है।’’ कंपनी के मुताबिक वैक्सीन के थोड़े से हिस्से को निजी अस्पतालों को 600 रुपए प्रति खुराक की दर पर बेचा जाएगा और यह कीमत अभी भी कई दूसरे चिकित्सकीय उपचारों की तुलना में कम है।

रमजान में आलिम-ए-इस्लाम आमिर लियाकत हुसैन के ‘नागिन डांस’ पर भड़के पाकिस्तानी: देखें Video

इस्लामी स्कॉलर और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) पार्टी के नेता आमिर लियाकत हुसैन ने सोमवार (19 अप्रैल) को रमजान के महीने में टीवी पर नागिन डांस करके विवाद खड़ा कर दिया। विवाद इसलिए क्योंकि यह इस्लाम में ‘हराम’ है।

पाकिस्तान में टीवी पर रमजान के दौरान कई विशेष कार्यक्रम चलाए जाते हैं। इन्हें ‘रमजान ट्रांसमिशन’ कहा जाता है। इन कार्यक्रमों में अश्लील चुटकुले, बेहूदा शायरियाँ और मनोरंजक गेम शो होते हैं जिससे दर्शकों का रमजान का महीने भर का समय कट सके। आमिर लियाकत दशकों से ‘रमजान ट्रांसमिशन’ के प्रमुख सदस्य रहे हैं। लियाकत पाकिस्तान के पूर्व धार्मिक मामलों के मंत्री भी रह चुके हैं।  

सोमवार (19 अप्रैल) को रमजान ट्रांसमिशन के प्रसारित एपिसोड में लियाकत बॉलीवुड की अभिनेत्री माधुरी दीक्षित की नकल करते और नागिन डांस करते देखे गए। शो के दौरान लियाकत फर्श पर लोटने लगे और अपनी जीभ बाहर निकाल कर साँप की तरह व्यवहार करने लगे।

सोशल मीडिया यूजर्स ने आमिर लियाकत हुसैन को नागिन डांस के लिए लताड़ा

पाकिस्तानी, जो अक्सर आमिर लियाकत की सराहना करते रहते हैं वो भी इस बार लियाकत से नाराज दिखे। उन्होंने लियाकत की रमजान के महीने में इस नौटंकी के लिए निंदा की।

एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “लेडीज एण्ड जेन्टलमैन, आपके सामने पेश है तीन बार के सबसे इंफ्लुएंट मुस्लिम, नेशनल असेंबली के सदस्य और जाने-माने मीडियाकर्मी ‘बैड बॉय’ आमिर लियाकत का नागिन डांस। मैं उन्हें सलाह दूँगा कि वो राजनीति छोड़ कर मीम बनाना शुरू कर दें।“

एक और यूजर ने कहा, “क्या आमिर लियाकत हुसैन मानसिक रूप से बीमार हैं अथवा वह अटेन्शन के भूखे हैं? मुझे याद है कि कैसे मैं उनके रमजान ट्रांसमिशन को उत्सुकता से देखता था लेकिन अब उन्होंने पूरी इज्जत मिट्टी में मिला दी।“

अज़्का नूर ने कहा, “क्या कोई आलिम-ए-इस्लाम एक शैतान के रूप में रमजान ट्रांसमिशन कर सकता है?”

आमिर लियाकत ने शो के दौरान एथलीट नसीम हमीद के साथ रेस भी लगाई। 20 मीटर की रेस में लियाकत गिरते-गिरते जीत गए। इस पर एक ट्विटर यूजर अरहाम ने पूछा, “रोजे की हालत में ख्वातीन (महिला) के साथ रेस लगाना जायज है?” 

एक अन्य यूजर ने कहा कि टीवी शो रमजान ट्रांसमिशन के दौरान लियाकत का नागिन डांस उसे डराता है।

मलीहा हाशमी ने लियाकत का नागिन डांस देखकर एक फोटो पोस्ट की और कहा कि उन्हें अपना दिमाग साफ करने के लिए ऐसा ही कुछ करना चाहिए। फोटो में एक व्यक्ति अपना दिमाग साफ कर रहा है।

आमिर लियाकत हुसैन की प्रतिक्रिया

नागिन डांस के कारण उत्पन्न हुए विवाद पर पाकिस्तान के नेता आमिर लियाकत हुसैन ने कहा कि जो भी उन पर मीम बना रहे हैं वह ऐसा करते रहें। उन्होंने कहा कि यदि उनके मीम बनाकर किसी का पेट चलता है तो चले। लियाकत ने यह भी कहा कि जो भी मीम बनाकर पैसे कमाते हैं उन्हें अपनी माँ से जाकर कहना चाहिए कि उन्होंने यह पैसे हराम से कमाए हैं। लियाकत ने यह भी कहा कि वह जो भी करते हैं अपनी मर्जी से करते हैं।

हिन्दू विरोधी कृत्य के लिए माँग चुके हैं माफी

इसी साल फरवरी में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज का मजाक उड़ाने के लिए आमिर लियाकत हुसैन ने हिन्दू देवी की तस्वीर का उपयोग किया था। इसके बाद हिन्दू समुदाय, सिविल सोसायटी और दूसरे पाकिस्तानी नेताओं ने लियाकत की आलोचना की। आलोचना के बाद लियाकत ने माफी माँगते हुए कहा था कि उन्हें पता है कि इससे हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँची है। उन्होंने कहा कि वह सभी धर्मों का सम्मान करते हैं और उनके मजहब ने उन्हें यही सिखाया है।

कोविशील्ड की कीमत पर विपक्षी प्रोपेगंडा का SII के CEO अदार पूनावाला ने दिया जवाब, कहा- सबसे कम रेट में दे रहे वैक्सीन

कोरोना वायरस संकट के बीच विपक्षी नेताओं लिबरल बुद्धिजीवियों द्वारा कोविशील्ड वैक्सीन को दामों को लेकर हायतौबा मचाने के बाद सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के सीईओ अदार पूनावाला ने वैक्सीन की कीमत पर एक बयान जारी किया है। पूनावाला ने कहा कि यह बयान पारदर्शिता के उद्देश्य से जारी किया गया है।

अदार पूनावाला ने कहा, “भारत सहित सभी देशों में देशव्यापी टीकाकरण कार्यक्रमों के लिए सरकारी खरीद काफी कम कीमत पर हुई है क्योंकि इसका क्षेत्र बहुत बड़ा है। उदाहरण के लिए, बाजार की परिस्थितियों के आधार पर कई वैक्सीनें, यहाँ तक कि हमारी न्यूमोकोकल वैक्सीन निजी बाजार में इकोनॉमी मूल्य पर बेची जाती हैं, जबकि सरकार के लिए यह मूल्य निजी बाजार मूल्य का लगभग एक तिहाई है।”

SII के सीईओ अदार पूनावाला ने कोविशील्ड की कीमत को लेकर जारी किया गया बयान

उन्होंने आगे कहा, “कोविशील्ड वैक्सीन आज बाजार में उपलब्ध सबसे सस्ती COVID-19 वैक्सीनों में से है। शुरुआती कीमतों को वैश्विक स्तर पर बहुत कम रखा गया था, क्योंकि यह देशों द्वारा कम से कम वैक्सीन निर्माण के लिए दिए गए एडवांस फंडिंग पर आधारित था। भारत सहित सभी सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम के लिए कोविशील्ड की शुरुआती आपूर्ति कीमत न्यूनतम है।”

अदार पूनावाला के मुताबिक, “कोविशील्ड वैक्सीन की कीमत फिर भी Covid-19 और अन्य गंभीर बीमारियों के दूसरे उपलब्ध ईलाजों की तुलना में काफी कम है।”

बता दें कि विपक्षी पार्टियाँ कोविशील्ड वैक्सीन की कीमत को लेकर रोना रो रही हैं जो राज्य सरकारों के लिए प्रति खुराक 400 रुपए है। जबकि, केंद्र सरकार के लिए भी यही कीमतें तय की गई हैं, जो कि शुरुआती 110 मिलियन खुराक देने के बाद लागू की जाएंगी।

यह झूठा दावा किया जा रहा है कि राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के लिए वैक्सीन की कीमत में अंतर है। निजी अस्पतालों के लिए 600 रुपए का मूल्य निर्धारित किया गया है। कंपनी पहले नुकसान सहते हुए भी टीकों को कम कीमत पर बेच रही थी।