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21 साल की कॉलेज स्टूडेंट का रेप-मर्डर: बंगाल में राजनीतिक हिंसा के बीच मेदिनीपुर में महिला समेत 3 गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद हो रही हिंसा के बीच पश्चिम मेदिनीपुर जिले से बलात्कार और हत्या की एक घटना सामने आई है। एससी/एसटी समुदाय से आने वाली कॉलेज छात्रा संध्या कुमारी (बदला हुआ नाम) का कथित तौर पर बलात्कार कर उसकी निर्दयता पूर्वक हत्या कर दी गई। घटना मेदिनीपुर जिले के खड़गपुर उपखंड में पिंगला ब्लॉक के जमना गाँव की है।

स्थानीय समाचार रिपोर्टों के अनुसार, पश्चिम मेदिनीपुर के डेबरा कॉलेज की 21 वर्षीय छात्रा सोमवार (3 मई 2021) दोपहर को लापता हो गई थी। जब वह शाम तक घर नहीं लौटी तो उसके घर वालों ने तलाश शुरू कर दी। काफी तलाश करने के बाद परिजनों को लड़की का शव एक मिट्टी के खंडहर हो चुके घर में मिला। रिपोर्टों के मुताबिक, मृतका का शरीर अर्धनग्न अवस्था में मिला था।

मृतक लड़की के परिजनों का आरोप है कि बेरहमी से बलात्कार करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। मामले की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुँची पिंगला पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।

पिंगला पुलिस स्टेशन में पीड़ित परिजनों द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर स्थानीय पुलिस ने दो राजमिस्त्री और उनकी महिला सहयोगी को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने कच्चे घर के पीछे निर्माण कार्य किया था। तीनों आरोपितों की पहचान बेल्दा से विकाश मुर्मू, झारखंड से छोटू मुंडा और सबांग से तापती पात्रा के रूप में की गई है।

खबरों के मुताबिक, खड़गपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राणा मुखर्जी ने जानकारी दी है कि आरोपियों ने अपना अपराध कबूल कर लिया है। जब विकास और छोटू लड़की का रेप कर रहे थे, तापती दरवाजे के बाहर खड़ी होकर पहरा दे रही थी। ऑटोप्सी रिपोर्ट में बलात्कार की पुष्टि हुई है। आईपीएस अधिकारी ने आगे कहा कि पुलिस मामले की जाँच के लिए अपराध स्थल का रीक्रिएशन कर रही है।

यह घटना सामने आने के बाद से स्थानीय स्तर पर लोगों ने लड़की को न्याय दिलाने के लिए प्रदर्शन किया। युवाओं ने हाथों में प्लाकार्ड और बैनर लेकर धरना और विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें जस्टिस फॉर संध्या कुमारी (बदला हुआ नाम) लिखा था।

घटना के बाद, कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया कि संध्या कुमारी (बदला हुआ नाम) एक भाजपा समर्थक थी। इसलिए उसका बलात्कार और हत्या भाजपा और अन्य विपक्षी दलों के खिलाफ चल रही टीएमसी हिंसा का हिस्सा थी। हालाँकि, अभी तक इस दावे का समर्थन करने वाले कोई सबूत सामने नहीं आए हैं।

मुरादाबाद: अश्लील हरकत का विरोध करने पर नाबालिग से मारपीट, Video वायरल होने पर सक्रिय हुई पुलिस

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में छेड़खानी का विरोध करने पर नाबालिग लड़की के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए सीसीटीवी फुटेज में युवक को एक लड़की के साथ मारपीट करते हुए देखा जा सकता है।

घटना मुरादाबाद के मझौला इलाके की है। वीडियो में स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है कि एक युवक, लड़की के साथ बेरहमी से मारपीट कर रहा है। युवक ने लात-घूंसों से लड़की की पिटाई की और उसे जमीन पर भी पटक दिया।

घटना के बाद नाबालिग लड़की को अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के संबंध में यह ज्ञात हुआ है कि नाबालिग ने अश्लील हरकतें करने वाले लड़के से इसका विरोध किया था। इसके बाद युवक ने नाबालिग के साथ बेरहमी से मारपीट की।

हालाँकि इस मामले में पहले पुलिस ने एनसीआर दर्ज की लेकिन घटना के वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने नाबालिग के पिता को बुलाकर दूसरी रिपोर्ट लिखवाई। घटना के बाद से ही आरोपित फरार है।

दिल्ली में ऑक्सीजन संकट, कोरोना की तीसरी लहर पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- ‘क्या कोई इमरजेंसी प्लान है?’

कोरोना की मार झेल रही देश की राजधानी दिल्ली में पिछले एक माह से जारी ऑक्सीजन संकट पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (6 मई) को सुनवाई की।

दिल्ली में ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर सॉलिस्टर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र का पक्ष रखते हुए कहा कि दिल्ली के अस्पतालों में इस समय पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन उपलब्ध है। आज भी ऑक्सीजन ट्रेन से 280 मीट्रिक टन ऑक्सीजन आ रही है। तुषार मेहता ने कहा कि राजस्थान, जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्य अधिक ऑक्सीजन की माँग कर रहे हैं।

केंद्र ने ऑक्सीजन की खरीद और विभिन्न राज्यों को आपूर्ति की अपनी विस्तृत योजना सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत की।

कोर्ट ने केंद्र से दिल्ली को प्रतिदिन 700MT ऑक्सीजन की सप्लाई सुनिश्चित करने को कहा। इस दौरान दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील राहुल मेहरा से कोर्ट ने पूछा कि आपको ऑक्सीजन की आपूर्ति हुई लेकिन आपने इसे लिया नहीं? इस पर राहुल मेहरा ने कहा दिल्ली सरकार को सिर्फ 555MT ऑक्सीजन मिली है। केंद्र सरकार के दावों के मुताबिक 730 MT उन्हें नहीं मिली।

दिल्ली सरकार की ओर से अदालत में ये शिकायत भी की गई कि राजधानी के अधिकतर अधिकारी सीधे एलजी को रिपोर्ट करते हैं, ऐसे में केंद्र को पता है कि उन्हें (दिल्ली सरकार) कितनी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

SC ने जताई तीसरी लहर पर चिंता, पूछा ‘इमरजेंसी प्लान’

बता दें कि मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के सामने तीसरी लहर को लेकर चिंता जाहिर की। अदालत ने पूछा कि अगर इस लहर में बच्चे संक्रमित हुए तो वह क्या करेंगे? अगर हालात बिगड़े तो क्या सरकार के पास कोई इमरजेंसी प्लान है? कोर्ट ने कहा कि ऑक्सीजन की पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

मालूम हो कि कोर्ट की ओर से केंद्र को ऑक्सीजन उत्पादन बढ़ाने और दिल्ली को 700MT ऑक्सीजन देने को कहा गया था। ऐसे में केंद्र ने कहा है कि दिल्ली को यदि जरूरत से ज्यादा सप्लाई मिलेगी तो अन्य राज्यों की हिस्सेदारी प्रभावित होगी। स्वास्थ्य मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव सुमिता दावरा ने अदालत से कहा कि कुल टैंकर के 53 फीसदी को दिल्ली में सप्लाई के लिए ही लगाया गया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के सभी अस्पताल कोविड स्पेशल नहीं हैं और छोटे अस्पतालों में ऑक्सीजन स्टोर करने की क्षमता नहीं है।

अदालत ने कहा कि ऑक्सीजन के आवंटन का केंद्र सरकार का फॉर्म्युला दिल्ली के लिए ठीक नहीं है और इसमें बदलाव किया जाना चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि आपको सिर्फ राज्यों को ऑक्सीजन का आवंटन करने की ही जरूरत नहीं है बल्कि उसे पहुँचाने की भी व्यवस्था की जानी चाहिए।

बंगाल में अब दलित RSS कार्यकर्ता की हत्या, CM ममता बनर्जी की घोषणा – मृतकों को मिलेंगे 2-2 लाख रुपए

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हत्याओं का दौर मतगणना के 4 दिन बाद भी थमता नहीं दिख रहा है। अब राज्य में ममता बनर्जी के शपथ ग्रहण के साथ ही फिर से तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सरकार तो है ही, साथ ही आते-आते 29 IPS अधिकारियों का तबादला भी किया गया है। उधर गुरुवार (मई 6, 2021) को एक RSS कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई। ये घटना ईस्ट बर्दवान के केतुग्राम की है, जहाँ 22 वर्षीय दलित बलराम मांझी की हत्या कर दी गई।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने बलराम मांझी की हत्या पर आक्रोश जताया है। उन्होंने बताया कि बलराम के साथ बुधवार को TMC के गुंडों से बेरहमी से मारपीट की थी, जिसमें वो काफी घायल हो गए थे। आज इलाज के दौरान ही उनकी मृत्यु हो गई। दिलीप घोष ने इसे पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी का ‘राजनीतिक आतंकवाद’ करार दिया। अन्य भाजपा नेताओं ने भी इस हत्याकांड पर दुःख जताया।

पश्चिम बंगाल की सरकार ने ही वहाँ चुनावी नतीजों के बाद हुई राजनीतिक हिंसा में 16 लोगों के मारे जाने की बात स्वीकार की है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ऐलान किया है कि नतीजे आने के बाद हुई राजनीतिक हिंसा में जिनकी भी जानें गई हैं, उनके पीड़ित परिजनों को ‘बिना किसी भेदभाव के’ 2-2 लाख रुपए बतौर मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि 16 मृतकों में से आधे तो उनकी ही पार्टी के थे।

उन्होंने दावा किया कि इनमें से 8 भाजपा के थे। जबकि, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा का दावा है कि उनकी पार्टी के 14 कार्यकर्ताओं की जान गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, एक मृतक संयुक्त मोर्चा का भी है। इस दौरान वो चुनाव आयोग को दोष देना भी नहीं भूलीं। उन्होंने दावा किया कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने की ये घटनाएँ तब हुईं, जब प्रशासन ECI के नियंत्रण में था। लोगों का ये भी सवाल है कि जब 16 मृतकों में आधे-आधे TMC व भाजपा के हैं तो बाकी का एक कहाँ से आया?

बता दें कि आज ही बिस्वजीत महेश नामक भाजपा कार्यकर्ता की हत्या की खबर भी आई। पश्चिमी मेदिनीपुर के घटल संगठन जिले में वो भाजपा के ‘शक्ति केंद्र प्रमुख’ के रूप में कार्यरत थे। आरोप है कि तृणमूल के गुंडों ने काफी बेरहमी से उनकी हत्या की। उनकी लाश क्षत-विक्षत अवस्था में मिली। उनके शरीर से आसपास काफी खून बह चुका था। मतगणना बाद लेफ्ट और कॉन्ग्रेस ने भी TMC पर हिंसा का आरोप लगाया।

बंगाल हिंसा के ये कैसे जख्म: किसी ने नदी में लगाई छलांग तो कोई मॉं का अंतिम संस्कार भी नहीं कर सका

आपबीती ऐसी कि आप सिहर जाएँ। जख्म ऐसे कि शायद ही भरें। उनका दोष केवल इतना था कि वे बीजेपी के कार्यकर्ता थे। या फिर वोटर। ऐसे ही लोगों में से एक हैं 40 साल के मेघु दास। वे उन हजारों लोगों में से एक हैं जो पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजों के बाद भड़की हिंसा के कारण अपना घर छोड़ भागने को मजबूर हुए। उन्होंने असम के धुबरी जिले में ऐसे लोगों के लिए बनाए गए एक शिविर में शरण ले रखी है।

नेत्ररोग से पीड़ित दास ने न्यूज 18 को बताया कि 6 दिन पहले ही कोरोना से उनकी माँ की मृत्यु हुई थी। अब उन्हें समझ नहीं आ रहा कि मॉं का अंतिम संस्कार कैसे होगा। उन्होंने बताया, “मंगलवार (4 मई 2021) की सुबह कुछ लोग मुझे खोजते आए। वे मेरी हत्या करना चाहते थे। उनका कहना था कि मैंने बीजेपी को वोट दिया है, अब उसका बदला लिया जाएगा। मैं किसी तरह अपनी जान बचाकर भागा और असम आने में कामयाब रहा।”

दास कूच बिहार जिले के तूफानगंज विधानसभा क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं। वे फिलहाल धुबरी के रंगपागली गाँव के क्लब हाउस में बनाए गए शिविर में करीब 250 लोगों के साथ ठहरे हुए हैं।

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में 2 मई को तृणमूल कॉन्ग्रेस की जीत के बाद से ही भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा शुरू हो गई थी। तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों पर हत्या, मारपीट, तोड़फोड़ और आगजनी के आरोप हैं। हिंसा से जान बचाकर भागे सैकड़ों लोग असम पहुँचे हैं।

असम के मंत्री और भाजपा नेता हेमंत बिस्वा सरमा ने ट्वीट कर बताया है कि बंगाल के कूच बिहार से 21 लोग असम के श्रीरामपुर पहुँचे। सरमा ने 45 वर्षीय धीरेन साहा के बारे में जानकारी दी जो घायल हैं। सरमा ने कहा कि ममता बनर्जी की तृणमूल कॉन्ग्रेस मासूमों के साथ अत्याचार कर रही है जो अपनी जान बचाकर असम आ रहे हैं।

सरमा ने बताया कि बंगाल के फलिमारी और रामपुर से असम पहुँचे लोगों को श्रीरामपुर के एमजीआर स्कूल में रखा गया है जहाँ उन्हें सभी आवश्यक सहायता मुहैया कराई जा रही है। इसके अलावा पिछले कई दिनों से बंगाल से असम पहुँच रहे भाजपा कार्यकर्ता धुबरी के राहत शिविरों में रह रहे हैं।

धुबरी के ही राहत शिविर में न्यूज 18 के संवाददाता को बीजेपी के एक बूथ अध्यक्ष मिले। अपनी पहचान जाहिर नहीं करने की शर्त पर उन्होंने बताया कि 05 मई को वे बाजार में थे तभी दूसरी तरफ से तृणमूल कॉन्ग्रेस का जुलूस आ रहा था। इससे पहले वे कुछ समझ पाते जुलूस ने उन पर पत्थर बरसाना शुरू कर दिया। भीड़ यह चिल्लाते हुए उन्हें मारने दौड़ी कि ‘वो बूथ प्रेसीडेंट है, पकड़ो उसे’। भाजपा कार्यकर्ता ने बताया कि उनके पीछे लगभग 50 लोग थे जिनमें से अधिकांश ‘मुस्लिम’ थे। उन्होंने बताया कि जान बचाने के लिए उन्हें नदी में छलाँग लगानी पड़ी। इसके बाद वे असम पहुँचे।

मेघू दास या भाजपा के अनाम बूथ अध्यक्ष जैसे ही आपबीती कई और की हैं। ऐसे ही लोगों में बीजेपी के दलित नेता भास्कर मंडल भी शामिल हैं। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ है। इसमें वह फूट फूटकर रोते हुए जान बचाने की गुहार लगा रहे हैं। उन्हें कहते हुए सुना जा सकता है कि सुनियोजित तरीके से हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। उनके घर को लूटा जा रहा है। आग के हवाले कर दिया जा रहा है। वे यह भी कह रहे हैं कि केवल पार्टी कार्यकर्ताओं को ही निशाना नहीं बनाया जा रहा है। उनके परिवार को भी गुंडे नहीं छोड़ रहे हैं।

इस बीच बंगाल हुई हिंसा की जाँच के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 4 सदस्यीय टीम राज्य में भेजी है। अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारी के नेतृत्व वाली यह टीम हिंसा की घटनाओं और ताज़ा परिस्थिति की जाँच करेगी। टीम में CRPF के एक वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं।

कोरोना संक्रमित आसाराम की तबीयत बिगड़ी, ICU में कराया गया भर्ती

जोधपुर जेल में सजा काट रहे आसाराम को तबीयत बिगड़ने के बाद आईसीयू में भर्ती कराया गया है। कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद आसाराम को साँस फूलने और बेचैनी की शिकायत थी, जिसके बाद इलाज के लिए उसे महात्मा गाँधी अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया गया है।

84 वर्षीय आसाराम को बुधवार (5 मई 2021) को कोरोना संक्रमित पाया गया था और उसका SPO2 स्तर 90 से नीचे चला गया था, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। आसाराम के कोरोना संक्रमित होने की खबर के बाद कथित तौर पर उनके समर्थक बड़ी संख्या में अस्पताल पहुँच गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वहाँ बड़ी संख्या में पुलिस बलों की तैनाती की गई।

इससे पहले इस साल फरवरी में आसाराम को सीने में दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

नाबालिग लड़की से रेप के मामले में आसाराम को मिली है सजा

आसाराम को अप्रैल 2018 में नाबालिग लड़की से रेप का दोषी ठहराया गया था। उन पर जोधपुर के मनई गाँव स्थित उनके आश्रम में 16 वर्षीय एक लड़की के साथ बलात्कार करने का आरोप लगा था। यूपी के शाहजहाँपुर की रहने वाली लड़की ने आरोप लगाया था कि आसाराम ने उसे अपने परिसर में बुलाया और 15 अगस्त 2013 की रात उसके साथ बलात्कार किया।

आसाराम पर गुजरात की दो बहनों ने रेप के आरोपों में एक और मुकदमा चल रहा है। साथ ही उनके बेटे नारायण साई पर भी रेप और अवैध रूप से बंद करके रखने का आरोप है। आसाराम के मामले से जुड़े कई गवाहों और प्रमुख व्यक्तियों पर कथित तौर पर हमला किया गया है और कुछ लापता हो गए हैं।

राजस्थान में कोरोना के हालात

राजस्थान कोरोना वायरस के कहर के बीच बुधवार को 16,815 नए संक्रमित मिले। वहीं, 17,022 लोग स्वस्थ भी हुए।

राजस्थान सरकार 18 साल से अधिक उम्र के लोगों का मुफ्त टीकाकरण करने के लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों, दाताओं और समाज के अन्य वर्गों से डोनेशन माँग रही है। इसके लिए एक नए बैंक खाते- Raj CMRF COVID VACCINATION ACCOUNT – के लिए स्वीकृति दी गई है।

इससे मिलने वाली धनराशि का इस्तेमाल नि: शुल्क टीकाकरण के लिए करने का दावा करते हुए मुख्यमंत्री ने योगदानकर्ताओं से नकद, चेक या इलेक्ट्रॉनिक रूप से सहायता राशि स्थानांतरित करने का आग्रह किया है।

80 साल की महिला से लेकर पशु प्रेमी तक… बंगाल के वे लोग जो TMC की जीत के बाद हिंसा की भेंट चढ़ गए

पश्चिम बंगाल में मतगणना के बाद शुरू हुई चुनावी हिंसा में कई भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या हुई। कइयों के घर और पार्टी दफ्तर को तहस-नहस कर दिया गया। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा द्वारा दिए गए आँकड़ों की मानें तो राज्य में अब तक 14 भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है। साथ ही हजारों की संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं ने असम में जाकर भी शरण ली है। यहाँ हम इसी तरह की कुछ घटनाओं पर नजर डालते हैं।

शोभा रानी मंडल

पश्चिम बंगाल में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने जिन मृत कार्यकर्ताओं के परिजनों से मुलाकात की, उनमें से शोभा रानी मंडल का परिवार भी था। शोभा रानी मंडल के बेटे कमल मंडल नॉर्थ 24 परगना के भाटपारा स्थित जगद्दल विधानसभा क्षेत्र के बूथ संख्या 177 पर भाजपा के बूथ अध्यक्ष हैं। आरोप है कि TMC के गुंडों ने कमल पर हमला कर दिया और बेटे को बचाने के चक्कर में जख्मी हुईं माँ की मौत हो गई।

कमल मंडल और उनकी पत्नी को छड़ी से पीटा गया था। 80 साल की शोभा रानी मंडल की हत्या से उन्हीं की हमनाम 85 वर्षीय शोभा मजूमदार की हत्या की खबर लोगों के जेहन में फिर से ताज़ा हो गई। शोभा मजूमदार के बेटे भाजपा में सक्रिय थे, इसीलिए उनके परिवार पर हमला हुआ था। हमले में जख्मी होने के बाद वो चल बसी थीं।

उत्तम घोष

उत्तम घोष भी भाजपा के कार्यकर्ता थे। पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में एक जगह है रानाघाट। यहीं के गंगनापुर इलाके में उत्तम घोष भाजपा के लिए काम कर रहे थे। उन्हें मतगणना के दिन ही आधी रात को मार डाला गया। उनकी हत्या का आरोप भी तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों पर लगा।

अभिजीत सरकार

अभिजीत सरकार की व्यथा को पूरी दुनिया ने सुना क्योंकि हत्या से कुछ ही देर पहले किए गए फेसबुक लाइव में उन्होंने TMC के गुंडों की करतूतों के बारे में बताया था। अभिजीत सरकार ने एक कुत्ते की तरफ इशारा करते हुए कहा था कि गुंडों ने इसके बच्चों को भी नहीं बख्शा और उन सभी को मार डाला। कुत्तों के 5 बच्चों को मार डाला गया। उन्होंने बताया कि कोलकाता के बेलिहाता में वॉर्ड संख्या 30 से हिंसा की शुरुआत हुई।

अभिजीत ने नाम लेते हुए स्पष्ट कहा कि परेश पॉल व स्वप्न समंदर जैसे तृणमूल नेताओं के नेतृत्व में ये सब हुआ। उन्हें पता भी नहीं था कि फेसबुक पर लाइव कैसे आते हैं, लेकिन उन्होंने किसी तरह वीडियो बनाया और बताया कि TMC के गुंडे लगातार बमबारी कर रहे थे और उन्होंने उनके घर और दफ्तर को तहस-नहस कर डाला। उन्होंने कहा कि उनकी एक ही गलती है कि वे भाजपा कार्यकर्ता हैं।

होरोम अधिकारी

होरोम अधिकारी पश्चिम बंगाल में भाजपा के कार्यकर्ता थे। वे साउथ 24 परगना के सोनारपुर दक्षिण इलाके में कार्यरत थे। उनकी हत्या कर दी गई। उनकी हत्या को लेकर मीडिया या सोशल मीडिया में ज्यादा कुछ नहीं है। भाजपा ने अपनी जिन कार्यकर्ताओं की हत्या की बात कही थी, उनमें उनका नाम भी शामिल है।

मोमिक मोइत्रा

पश्चिम बंगाल का सीतलकूची आपको याद होगा, जहाँ चुनाव के दौरान ही अर्धसैनिक बलों को घेर लिया गया था और आत्मरक्षा में जब CISF ने गोली चलाई तो 4 हमलावरों की मौत हो गई थी। ममता बनर्जी का एक कथित ऑडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें वो लाशों की राजनीति की बातें कर रही थीं। उसी इलाके में माइक मोइत्रा नाम के भाजपा कार्यकर्ता भी सक्रिय थे, जिनकी मतगणना के बाद हत्या कर दी गई।

गौरव सरकार

पश्चिम बंगाल के बीरभूम का एक इलाका है बोलपुर। यहाँ गौरव सरकार नामक भाजपा कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई। सोशल मीडिया पर उनके शव की तस्वीर खूब वायरल हुई और लोगों ने पूछा कि आखिर उनकी गलती क्या थी? भाजपा कार्यकर्ताओं ने सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया। उनके शव पर कमल निशान का झंडा भी डाला गया था।

हराधन रॉय, चन्दन रॉय

पश्चिम बंगाल के कूच बिहार में भी तृणमूल कार्यकर्ताओं ने जम कर हिंसा की। यहाँ भाजपा के कार्यकर्ता हराधन रॉय की हत्या कर दी गई। ये वो इलाका है, जहाँ भाजपा ने मात्र 69 वोटों से जीत दर्ज की है। हराधन रॉय के साथ-साथ यहाँ एक और भाजपा कार्यकर्ता चन्दन रॉय की भी हत्या कर दी गई। उनके सिर में गंभीर चोटें आई थीं।

मिंटू बर्मन

कूच बिहार में ही मिंटू बर्मन नामक भाजपा कार्यकर्ता की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। मिंटू बर्मन को जल्दी-जल्दी में उनके साथी अस्पताल लेकर गए, जहाँ इलाज के दौरान ही उनकी मौत हो गई।

अरुप रुईदास

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हत्याओं के ताज़ा मामले में बाँकुड़ा में भाजपा कार्यकर्ता अरुप रुईदास के गायब होने की बात सामने आई थी। बुधवार की सुबह पूर्वी बर्दवान के खंडोघोष में उनकी लाश मिली। उनकी गर्दन से रस्सी बँधी हुई थी। उनकी लाश एक पेड़ से लटकी हुई मिली। उनकी हत्या का आरोप TMC के गुंडों पर लगाया गया है। वे इन्दस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के बूथ एजेंट थे।

बिस्वजीत महेश

बिस्वजीत महेश की हत्या की खबर गुरुवार (मई 6, 2021) को आई। पश्चिमी मेदिनीपुर के घटल संगठन जिले में वो भाजपा के ‘शक्ति केंद्र प्रमुख’ के रूप में कार्यरत थे। आरोप है कि तृणमूल के गुंडों ने काफी बेरहमी से उनकी हत्या की। उनकी लाश क्षत-विक्षत अवस्था में मिली। उनके शरीर से आसपास काफी खून बह चुका था।

हिंसा की अन्य घटनाएँ भी, कॉन्ग्रेस-लेफ्ट-ISF भी बना निशाना

तृणमूल कॉन्ग्रेस का कहना है कि उसके कार्यकर्ताओं को भी इस हिंसा में निशाना बनाया गया। हुगली के खानखुल में देबू प्रामाणिक को कथित तौर पर कुछ लोगों ने पीटा, जिसके बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। TMC का कहना है कि हमलावर भाजपा के लोग थे। इसी तरह पूर्वी बर्धमान में बिभास बाग़ और शाहजहाँ शाह नामक अपनी महिला कार्यकर्ता की मौत का जिम्मेदार भी TMC ने भाजपा को बताया है। पार्टी ने रैना के समसपुर में गणेश मलिक नामक कार्यकर्ता की हत्या का आरोप भी भाजपा पर मढ़ा।

दत्तपुकर में हसनूर जमान नाम के एक ISF कार्यकर्ता की भी हत्या कर दी गई। उनकी हत्या का आरोप तृणमूल कार्यकर्ताओं पर लगा। परिवार का कहना है कि TMC के गुंडों की बमबारी में उनकी मौत हुई। इन घटनाओं के अलावा महिलाओं को भी जम कर निशाना बनाने की ख़बरें सामने आई हैं। एक वायरल वीडियो में देखा जा सकता था कि कैसे दो महिलाओं को सड़क पर घसीट-घसीट कर पीटा जा रहा था।

कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने बीरभूम में पार्टी के दो पोलिंग एजेंट्स के गैंगरेप का भी आरोप लगाया, जिसे वहाँ की पुलिस ने साफ़ नकार दिया है। ननूर विधानसभा क्षेत्र में इस घटना के होने की बात कही गई थी लेकिन पुलिस का कहना है कि किसी भी स्थानीय नेता को इस बारे में कुछ पता ही नहीं है। पुलिस ने इसे फेक न्यूज़ बताया और कहा कि स्थानीय भाजपा नेताओं से जानकारी ली गई तो ऐसी कोई बात सामने नहीं आई।

इसके अलावा सोशल मीडिया में एक लड़की की तस्वीर वायरल हो रही थी, जिसके बारे में बताया गया कि भाजपा का समर्थन करने पर गैंगरेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई। पश्चिमी मेदिनीपुर के खड़गपुर के पिंगला थानांतर्गत हुई ये घटना सच्ची निकली, लेकिन पुलिस ने कहा कि इसका कोई राजनीतिक या सांप्रदायिक कारण नहीं है। मृतका और आरोपित SC/ST समुदाय थे। परिवार ने भी राजनीतिक कारण होने को नकार दिया।

बंगाल में अब विदेश मंत्री (MoS) पर हमला: लुंगी पहने लोगों ने लगातार बरसाए डंडे-पत्थर, देखें Video

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा अब भयावह रूप ले चुकी है। भाजपा समर्थक और आम जनता के बाद अब तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों ने केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधरन पर भी हमला बोल दिया। मुरलीधरन ने अपने ट्विटर पर घटना की वीडिया जारी करके यह जानकारी दी।

वी मुरलीधरन ने अपने ट्वीट पर लिखा, “TMC गुंडों ने पश्चिम मिदनापुर में मेरे काफिले पर हमला किया, गाड़ी के शीशे तोड़े और पर्सनल स्टाफ को भी निशाना बनाया।”

58 सेकेंड की वीडियो में देख सकते हैं कि वी मुरलीधरन के काफिले पर लुंगी पहने लोगों ने लगातार डंडे-पत्थर बरसाए। ड्राइवर ने इस बीच गाड़ी पीछे की, लेकिन काफिले को चारों ओर से घिरा देख गाड़ी में बैठे सब लोगों को अपने बचाव में नीचे झुकना पड़ा। वीडियो में गाड़ी के काँच टूटने की आवाज और गाड़ी में पेड़ की मोटी छाल स्पष्ट रूप से देख सकते हैं। 

घटना में क्षतिग्रस्त हुई गाड़ी

समाचार एजेंसी एएनआई ने भी इस घटना की वीडियो को शेयर किया है। पूरा मामला वेस्ट मिदनापुर के पंचखुड़ी का है, जहाँ स्थानीय लोगों ने केंद्रीय मंत्री के काफिले पर हमला बोला। जानकारी के अनुसार, यह घटना आज दोपहर 1 बजे के आसपास की है। विदेश राज्यमंत्री (Union Minister of State for External Affairs) वी मुरलीधरन के ड्राइवर राहुल सिन्हा को घटना में चोट आई है। इसके अलावा काफिले के साथ चल रहे 2 और लोगों के घायल होने की खबर है।

याद दिला दें कि ये पहली दफा नहीं है जब किसी मंत्री या नेता पर इस तरह बंगाल में हमला बोला गया हो। पिछले वर्ष भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर हमला हुआ था। उस समय भी उपद्रवियों ने इसी प्रकार उनके काफिले पर डंडे पत्थर लेकर अटैक किया था। उस समय बाद में गृह मंत्रालय ने इसमें कार्रवाई करते हुए 3 अधिकारियों के विरुद्ध एक्शन लिया था।

घटना के बाद की तस्वीरें

बता दें कि चुनावी नतीजों के बाद बंगाल से लगातार आ रही हिंसा की खबरों के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय इस बार भी एक्शन में आ गया है। जाँच के लिए 4 सदस्यीय टीम बनाकर कोलकाता भेजी गई है। मंत्रालय ने इनसे रिपोर्ट तलब की है। ये टीम बंगाल में हिंसा की घटनाओं और ताजा परिस्थिति की जाँच करेगी। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को पत्र लिख कर कहा था कि अगर HMO को रिपोर्ट नहीं मिलती है तो इसे काफी गंभीरता से लिया जाएगा।

पंजाब: 32 किसान संगठन करेंगे लॉकडाउन का ‘विरोध’, सड़कों पर उतर खुलवाएँगे दुकानें

पूरा देश कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से जूझ रहा। पंजाब उन राज्यों में है जहाँ संक्रमण से मृत्यु दर देश में सबसे ज्यादा है। बावजूद पंजाब के किसान संगठनों ने राज्य में लॉकडाउन के खिलाफ सड़क पर उतरने का फैसला किया है। किसान संगठनों ने बुधवार (5 मई, 2021) को इसकी घोषणा की। इसके मुताबिक 8 मई को किसान संगठन लॉकडाउन के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे। उन्होंने लोगों से भी इसका विरोध करने का आह्वान किया है।

दिल्ली के सिंघू बॉर्डर पर संयुक्ता किसान मोर्चा (एसकेएम) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने आरोप लगाया है कि कोरोना संकट को नियंत्रित करने की अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए ही सरकार ने लॉकडाउन लगाया है। ये किसानों की आवाज को दबाने की साजिश है।

उन्होंने कहा, “पंजाब के 32 किसान यूनियनों ने 8 मई को पंजाब में लॉकडाउन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है, जहाँ हमारे क्षेत्र के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरेंगे और लोगों से अपनी दुकानें खोलने के लिए कहेंगे और लॉकडाउन का पालन नहीं करेंगे।” रिपोर्ट के अनुसार, किसान नेता दुकानदारों को दुकानें खोलने और लॉकडाउन का उल्लंघन करने के लिए बाध्य करने की कोशिश कर सकते हैं।

राजेवाल ने दावा किया कि कोरोना से निपटने के लिए लॉकडाउन कोई समाधान नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार पर कृषि कानूनों को पारित कराने के लिए लॉकडाउन लगाने का आरोप लगाया और कहा, “पिछले साल लॉकडाउन के दौरान ही तीन काले कानून भी बनाए गए थे। लॉकडाउन कोई समाधान नहीं है। इससे केवल अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा और बेरोजगारी बढ़ेगी। सरकार लॉकडाउन की आड़ में अपनी विफलताओं को छिपा रही है – जैसे कि वे किस तरह से मरीजों को ऑक्सीजन, बेड और अन्य चिकित्सा सुविधाएँ देने में विफल रहे हैं।”

ध्यान देने वाली बात यह है कि पंजाब में कोरोना वायरस का संक्रमण काफी तेज फैल रहा है। इसी कारण संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए 15 मई तक लॉकडाउन और नाइट कर्फ्यू को बढ़ाने का ऐलान मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने किया था।

एक हजार से ज्यादा किसानों का दिल्ली मार्च

रिपोर्टों से पता चला है कि अमृतसर के पास स्थित ब्यास कस्बे से एक हजार से अधिक किसानों ने दिल्ली की ओर मार्च शुरू कर दिया है। ये सभी अमृतसर, तरनतारन और गुरदासपुर जिलों के विभिन्न गांवों से ब्यास में इकट्ठे हुए थे। किसान संघर्ष समिति के राज्य सचिव गुरबचन सिंह चब्बा ने कहा कि वह अन्य किसान नेताओं, बच्चों और महिलाओं समेत कई किसानों के साथ दिल्ली की ओर बढ़ रहे हैं।

बताया जा रहा है कि 15,000 से अधिक किसान, किसान प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए हाल ही में दिल्ली की ओर मार्च कर चुके हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने लोगों से किसान आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया है। चब्बा ने कहा, “हम किसानों और खेतिहर मजदूरों के परिवार के कम से कम एक सदस्य को हमारे साथ विरोध में शामिल होने के लिए कह रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि 10 मई से बड़ी संख्या में लोग आएंगे। ”

पंजाब में कोरोना और किसान आंदोलन में है आपसी कनेक्शन

यह देखा जा रहा है कि पंजाब में कोविड -19 के कारण मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से बहुत अधिक है। कोरोना से राष्ट्रीय मृत्यु दर 1.1% है, जबकि यह पंजाब में 2.3 फीसदी है। इसका मुख्य कारण यूके वैरिएंट को माना जाता है। आँकड़ों के मुताबिक, कटाई के मौसम में किसान दिल्ली से बड़ी संख्या में घर को लौटे थे, जिससे संक्रमण के मामलों में तेजी आई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दावा किया है कि पंजाब के ग्रामीण इलाकों में होने वाली मौतों का कारण लोगों का खुद से ही इलाज करना और झिझक है। ज्यादातर कोविड अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीज ग्रामीण इलाकों से आ रहे हैं, जिनके बचने की संभावना कम रहती है और स्थिति गंभीर होती है।

सितंबर 2020 में पारित हुआ था कृषि कानून

सितंबर 2020 में, भारत सरकार ने बिचौलियों को खत्म करने, निजी बाजारों सहित अधिक बिक्री के विकल्प प्रदान करने और देश में भंडारण सुविधाओं में सुधार के लिए तीन कृषि कानूनों को पारित किया। हालाँकि, किसानों ने दावा किया कि सरकार ने कॉरपोरेट की मदद के लिए कानून पारित किए है। किसान नवंबर से दिल्ली के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच अब तक 11 दौर की वार्ता बिना किसी समाधान के पूरी हो चुकी है। सरकार ने जनवरी में 12-18 महीने के लिए कानूनों को निलंबित करने की पेशकश की थी, लेकिन किसान नेता तीनों कानूनों को निरस्त करने की माँग पर अड़े हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले का समाधान ढूँढने के लिए इस कानून पर रोक लगा दी था। साथ ही एक कमेटी गठित की थी, जिसने कोर्ट में अपनी रिपोर्ट दाखिल की थी।

कृषि कानून के विरोध में किसान संगठनों ने बीती 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर रैली भी आयोजित की थी, जो बाद में हिंसक हो गई थी। हाल ही में एक आरटीआई से पता चला कि दंगाइयों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प में 300 से अधिक पुलिस कर्मी घायल हुए थे और करोड़ों की संपत्ति का नुकसान हुआ था।

उत्तर प्रदेश के 37 जिलों में ऑक्सीजन प्लांट लगाएगी योगी सरकार, केंद्र से मिली इजाजत

देश में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच भारत सरकार ऑक्सीजन की कमी दूर करने और उसकी सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने के लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में केंद्र ने उत्तर प्रदेश सरकार को 37 जिलों में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने को मँजूरी दे दी है।

केंद्र सरकार से मँजूरी मिलने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को शीघ्रता से इन संयंत्रों की स्थापना करने का निर्देश दिया है। सीएम आदित्यनाथ ने कहा है कि हमारा लक्ष्य ऑक्सीजन उत्पादन को 743 टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 800 टन से अधिक करना है। उन्होंने बताया कि आईआईटी कानपुर, बीएचयू, एकेटीयू, एमएमटीयू गोरखपुर और प्रयागराज का मोतीलाल नेहरू रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज सभी जिलों में ऑक्सीजन की माँग तथा आपूर्ति की ऑडिट करेगी ताकि ऑक्सीजन की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव हो सके।

इसके अलावा सीएम आदित्यनाथ ने यह भी बताया कि रेलवे और वायु सेना के माध्यम से ऑक्सीजन के खाली टैंकरों का परिवहन किया जा रहा है। ऑक्सीजन एक्सप्रेस के माध्यम से भरे हुए टैंकर राज्य में लाए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि सभी जिलों में 4370 ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को 20 ऐसे ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर मिले हैं।   

मेडिकल ऑक्सीजन उत्पादन में वृद्धि

कोरोना वायरस संक्रमण की पहली लहर के दौरान पीक में भी भारत में ऑक्सीजन की माँग 3000 टन प्रतिदिन थी, जबकि दूसरी लहर में इसमें अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। ऑक्सीजन की इस बढ़ी हुई माँग से निपटने में रिलायंस, टाटा, अडानी और जिंदल जैसे औद्योगिक घराने सहायता कर रहे हैं।

भारत सरकार ने अप्रैल के अंत में, 551 समर्पित प्रेशर स्विंग एडसॉरप्शन (PSA) (PSA) मेडिकल ऑक्सीजन जेनरेशन संयंत्रों को स्थापित करने और देश भर के सबसे ज्यादा माँग वाले राज्यों को 1 लाख ऑक्सीजन कॉन्स्ट्रेटर्स की खरीद के लिए पीएम केयर्स से फंड आवंटित करने को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इन प्रयासों के बाद देश में मेडिकल ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़कर 9,200 टन हो गई है और इसे और बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।