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‘मोदी-शाह कर रहे सीधी निगरानी’: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया- कोरोना की दूसरी लहर को रोकने के लिए कब, क्या, कैसे किया

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर निपटने के लिए जो भी करना आवश्यक था या फिर जिन भी चीजों की ज़रूरत थी, उसने पेशेवर तरीके से अपना दायित्व निभाते हुए वो सब किया है। मोदी सरकार ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर से पहले भी तैयारियाँ की गई थीं। मंगलवार (अप्रैल 27, 2021) को सुप्रीम कोर्ट में दायर 106 पन्नों के एफिडेविट में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ये बातें कही।

इसके अनुसार, केंद्र सरकार ने सभी राज्यों की सरकारों के साथ कई बार बैठक की और उनसे बार-बार आग्रह किया कि वो अपने-अपने राज्यों में सार्वजनिक स्थलों पर कोविड-19 के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराएँ। MHA के एडिशनल सेक्रेटरी द्वारा तैयार किए गए इस एफिडेविट में सर्वोच्च न्यायालय के सामने कई तथ्य रखे गए हैं, क्योंकि कोरोना से जुड़े कई मामलों की सुनवाई वहाँ चल रही है।

केंद्र सरकार का कहना है कि संक्रमण चरम पर पहुँचने के बाद से गलत नैरेटिव चलाया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने इससे निपटने के लिए कुछ नहीं किया और इससे अनभिज्ञ बनी रही। जस्टिस DY चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली एक नवगठित पीठ ने इस एफिडेविट पर संज्ञान लिया। इसमें मोदी सरकार ने बताया है कि किस तरह कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित 15 राज्यों में ऑक्सीजन सप्लाई के लिए फैसले लिए गए।

सभी राज्यों में सक्रिय कोरोना मामलों को लेकर भविष्य के आँकड़ों का अनुमान लगाया गया था और उसी हिसाब से उन्हें ऑक्सीजन का कोटा मिला। बताया गया है कि दिल्ली और उत्तर प्रदेश में मात्र 5 दिनों के भीतर माँग 100% बढ़ गई। केंद्र ने बताया है कि 7 कंपनियों को 74-90 लाख रेमेडेसिविर इंजेक्शन के निर्माण के लिए स्वीकृति दी गई थी। ये गंभीर या सामान्य कोरोना स्थिति में दिया जाता है, जो कुल सक्रिय मामलों का 20% ही है।

जहाँ तक Tocilizumab ड्रग की बात है, केंद्र सरकार ने कहा है कि भारत में इससे पहले ये दवा बनती ही नहीं थी। हालाँकि, भारत में इसके कई विकल्प मौजूद हैं जो उतने ही प्रभावशाली हैं। इस एफिडेविट में राज्यों के साथ हुई केंद्र की बैठक की सूची तारीख़ के साथ दी गई है और किस बैठक में क्या निर्देश दिए गए, ये भी है। सभी राज्य सरकारों को ज़रूरत के आधार पर निर्णय लेने को कहा गया था।

महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, केरल और पश्चिम बंगाल की सरकारों को 5-7 जनवरी 2021 के बीच ही पत्र लिख कर कोरोना के बढ़ते मामलों पर कड़ी नजर रखने को कहा गया था। इसी दौरान केंद्र की एक उच्चस्तरीय समिति ने केरल जाकर स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की। केरल और महाराष्ट्र में फिर से ऐसी टीम भेजी गई। 24-25 फरवरी को सभी राज्यों/UTs में ऐसे टीमें भेजी गईं और उन्हें कोरोना मामलों पर नजर रखने को कहा गया।

सभी राज्यों को सर्विलांस के साथ-साथ प्रभावशाली रणनीति बनाने को भी कहा गया था। साथ ही ऐसे कार्यक्रमों को चिह्नित करने को कहा गया था, जिससे कोरोना के फैलने की आशंका हो। केंद्र ने एक बड़ी बात कही है कि कोरोना की दूसरी लहर से निपटने से जुड़ी तैयारियों को लेकर उसने 9 बैठकें पहले ही की थीं। इन बैठकों में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या PMO की तरफ से कोई प्रतिनिधि शामिल होते थे।

इस एफिडेविट में बताया गया है कि किस तरह ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर हो रही तैयारियों में खुद पीएम मोदी और HM अमित शाह शामिल थे। साथ ही कहा गया है कि सभी राजनीतिक दल इसमें सहयोग कर रहे हैं। गैस निर्माताओं को ऑक्सीजन के उत्पादन के लिए लाइसेंस दिए गए। स्टील प्लांट्स में ऑक्सीजन उत्पादन शुरू किया गया। ऑक्सीजन के औद्योगिक प्रयोग को कम किया गया और टैंकरों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई।

केंद्र सरकार ने बताया है कि किसी त्रासदी की स्थिति में बनी राष्ट्रीय योजना में चरण दर चरण विवरण नहीं होते और रोजाना की कार्यवाही को एजेंसियाँ और स्थानीय प्रशासन सुनिश्चित करता है। केंद्र ने कहा है कि हमारे स्वास्थ्य सिस्टम पर अभूतपूर्व संकट आया है, जिससे निपटने के लिए त्वरित और ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। केंद्र ने हाई कोर्ट में चल रहे मामलों को भी SC में स्थानांतरित करने का निवेदन किया, ताकि अलग-अलग आदेशों से तैयारियों पर असर न पड़े।

दीवारों में दरार, झुकीं इमारतें और जमीन से निकलता पानी: असम में भूकंप के झटकों के बाद सामने आई भयावह तस्वीरें

असम के गुवाहटी समेत पूर्वोत्तर में बुधवार (अप्रैल 28, 2021) सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर ऑफ सीस्मोलॉजी के मुताबिक इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.4 थी। केंद्र बिंदु असम का सोनितपुरा था।

सुबह 7:51 पर आए भूकम्प की तीव्रता का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि प्रभावित क्षेत्रों की इमारतों में दरारें आ गई और करीब 30 सेंकेंड तक सभी बिल्डिंग हिलती रहीं। 5 सितारा होटल तक की सीलिंग टूट गई और खेतों में पानी धरती से फूट पड़े।

सोशल मीडिया पर भूकंप के बाद हुए नुकसान की कई तस्वीरें सामने आई हैं। गुवाहटी में सबसे ज्यादा नुकसान की खबर है। हालाँकि, राहत ये है कि अभी तक इस प्राकृतिक आपदा के कारण किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। यहाँ एक के बाद 4 भूकंप के झटके महसूस किए गए।

सीस्मोलॉजी सेंटर के अनुसार, पहला झटका सुबह 7:51 बजे महसूस किया गया। इस बड़े झटके के बाद करीब 7:55 बजे एक और इसके कुछ मिनटों बाद दो और झटके महसूस किए गए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस खबर के बाद असम सीएम सोनोवाल से बात की। पीएम ने कहा, “राज्य में आए भूकंप के संबंध में असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल से बात की। उन्हें केंद्र की तरफ से हरसंभव मदद का वादा किया है। मैं असम के लोगों की भलाई की कामना करता हूँ।” वहीं अमित शाह ने भी सबकी कुशलता की कामना की और प्रभावित लोगों के साथ खड़े होने का आश्वासन दिया।

इस बीच असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “असम में भूकंप का बड़ा झटका महसूस किया गया है। मैं सभी के कुशल होने की कामना करता हूँ, साथ ही लोगों को अलर्ट रहने की सलाह देता हूँ, बाकी जिलों से अपडेट ले रहा हूँ।”

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री हिमंत बिस्वा ने ट्विटर पर गुवाहटी में हुए नुकसान की तस्वीर साझा की है। तस्वीर में देख सकते हैं कि बिल्डिंग में लगी टाइल्स जमीन पर गिरकर चकनाचूर हो गई है। वहीं दूसरी तस्वीर में दीवार ढह गई है।

स्वास्थ्य मंत्री के इस ट्वीट के नीचे कई अन्य यूजर्स ने भूकंप से हुए नुकसान की तस्वीर बताकर कुछ वीडियो साझा की है। इसमें एक वीडियो में जमीन में आई दरार देख सकते हैं। वहीं दूसरी वीडियो में एक बिल्डिंग में बीच से दरार आ गई है। ऑपइंडिया इन वीडियो की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, इस भूकंप के बाद नगाँव से भी कुछ डराने वाली तस्वीर आई हैं। वीडियो में देख सकते हैं कि वहाँ एक बिल्डिंग झुक गई है।

बता दें कि असम में इस माह की शुरुआत में भी भूकंप आया था। 6 अप्रैल को वहाँ 2.7 तीव्रता का भूकंप आया था और उससे 1 दिन पहले 5.4 तीव्रता का एक और भूकंप सिक्किम नेपाल सीमा पर आया था। उस दौरान झटके बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्से में महसूस किए गए थे।

30 अप्रैल तक ‘कड़ी निगरानी’ में रहेंगे ममता बनर्जी के करीबी TMC नेता अनुब्रत मंडल, चुनाव आयोग का निर्देश

चुनाव आयोग (EC) ने तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के नेता अनुब्रत मंडल को ​कड़ी निगरानी में रखने का निर्देश दिया है। वे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी हैं। आयोग ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए यह निर्देश दिया है। मंडल 27 अप्रैल की शाम 5 बजे से 30 अप्रैल की सुबह 7 बजे तक कार्यकारी मजिस्ट्रेट और सीएपीएफ को कड़ी निगरानी में रहेंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह निर्णय मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने ‘मंडल के खिलाफ कई शिकायतें’ मिलने के बाद लिया है। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजे पत्र में कहा गया है, “विभिन्न स्रोतों से प्राप्त फीडबैक और डीईओ तथा एसपी, बीरभूम की रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने निर्देश दिया है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए AITC, बीरभूम के जिलाध्यक्ष मंडल को कार्यकारी मजिस्ट्रेट और सीएपीएफ की कड़ी निगरानी में रखा जाए।”

इसके अवधि के दौरान ‘तिथिके साथ’ वीडियोग्राफी की जाएगी। बीरभूम में गुरुवार को विधानसभा चुनाव के आठवें और अंतिम चरण में मतदान होगा।

यह पहली बार नहीं है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान अनुब्रत मंडल को निगरानी में रखा गया है। उन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव और 2016 के विधानसभा चुनावों के दौरान भी निगरानी में रखा गया था। 2019 में मंडल को मतदान के दौरान एक बूथ से दूसरे बूथ जाने पर कर्मियों को खतरा होने की आशंका के चलते निगरानी में रखा गया था।

गौरतलब है जुलाई 2013 में मंडल ने बीरभूम में एक सार्वजनिक सभा में समर्थकों को पुलिस पर बम फेंकने और पंचायत चुनावों में टीएमसी के बागी उम्मीदवारों के घरों को जलाने के लिए उकसाया था। सितंबर 2018 में वह कैमरे में कथित तौर पर टीएमसी कार्यकर्ताओं को पार्टी के एक बागी नेता और एक महिला भाजपा नेता को भांग रखने के झूठे मामले में फँसाने का निर्देश देते हुए पकड़े गए थे।

दोस्त की जिंदगी के लिए 1400 किमी का सफर: ऑक्सीजन सिलेंडर ले बोकारो से नोएडा आए देवेंद्र शर्मा

पूरा देश कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से जूझ रहा है। हर राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खुल रही है। मरीज को अपने परिजनों के अलावा किसी से उम्मीद नहीं है। ऐसे में कुछ लोग वे भी हैं जो कोरोना संक्रमित अपनों को सड़क पर छोड़ गायब हो रहे हैं, तो कुछ देवेंद्र कुमार शर्मा जैसे भी हैं। 1400 किमी का सफर तय कर शर्मा अपने दोस्त के लिए बोकारो से ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर नोएडा नोयडा आ गए।

बोकारी निवासी देवेंद्र कुमार शर्मा पेशे से शिक्षक हैं। उनका दोस्त रंजन गाजियाबाद में रहता है और नोएडा की किसी आईटी कंपनी में कार्यरत है। कुछ दिन पहले दोनों के एक कॉमन फ्रेंड का देहांत हुआ। उसके बाद जब रंजन संक्रमित हुए तो उनका ऑक्सीजन लेवल नीचे जाने लगा। बहुत प्रयास के बाद भी कहीं से ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं हो पाई। डॉक्टर लगातार दोहराते रहे कि मरीज की जान बचाने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत पड़ेगी।

24 अप्रैल को राजन के परिचित ने बड़ी घबराई आवाज में देवेंद्र को सारी स्थिति बताई। एक दोस्त को पहले ही खो चुके देवेंद्र इस दुविधा में थे क्या करें। फिर वह बाइक से 150 किमी का सफर तय कर राँची से बोकारो आए। यहाँ वे ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था में लग गए।

वह बोकारो में कई प्लांट और सप्लायर के पास गए, लेकिन खाली सिलेंडर के बिना कोई ऑक्सीजन देने को तैयार नहीं हुआ। देवेंद्र कोशिश करते रहे। इस बीच एक अन्य मित्र भी मदद को आगे आया और अंत में देवेंद्र का बियाडा स्थित झारखंड इस्पात ऑक्सीजन प्लांट के संचालक से संपर्क हुआ।

देवेंद्र की सारी बात सुन वह ऑक्सीजन सिलेंडर देने को तैयार हो गए। संचालक ने उन्हें कुछ सिक्योरिटी मनी जमा करने को कहा। जंबो सिलेंडर के लिए देवेंद्र ने 10 हजार रुपए दिए। इसमें ऑक्सीजन की कीमत 400 रुपए थी और 9600 रुपए सिलेंडर की सिक्योरिटी थी।

देवेंद्र ने सिक्योरिटी मनी थमा कर सिलेंडर लिया और अपने दोस्त की जान की खातिर रविवार को कार से नोएडा के लिए निकल गए। मात्र 24 घंटे में वह नोएडा पहुँच गए। देवेंद्र ने बताया कि उन्हें राज्यों की पुलिस ने बॉर्डर पर रोककर पूछताछ जरूर की, लेकिन वह दोस्त की जान बचाने के लिए ज्यादा देर कहीं रुके नहीं।

मात्र 24 घंटे के अंदर देवेंद्र को दिल्ली में देख रंजन भावुक हो गए। रंजन ने कहा, ऐसे दोस्त के होते हुए कोरोना मेरा क्या बिगाड़ेगा। वहीं रंजन के परिचितों ने कहा कि भगवान ऐसा दोस्त सभी को दे।

बता दें कि इस संकट की घड़ी में दोस्ती की मिसाल पेश करने वाले देवेंद्र शर्मा ने समाज में एक सकारात्मक छाप छोड़ी है। उनके कारण उनके दोस्त को जो हिम्मत मिली उसकी हर जगह चर्चा है। आज यही सकारात्मकता इस समय की सबके बड़ी माँग है। एक तरफ कोरोना का कहर जहाँ नौजवानों को लील रहा है, उस समय ये भी सच है कि 105 साल के बुजुर्ग और उनकी 95 साल की पत्नी महाराष्ट्र में कोरोना से ठीक होकर लौटे हैं।

कोरोना से बेहाल दिल्ली में आधी रात बदली ‘सरकार’, केंद्र ने जारी किया नोटिफिकेशन: जानिए क्या कुछ बदलेगा

कोरोना संक्रमण से बेहाल दिल्ली में केंद्र सरकार ने ‘Government of National Capital Territory of Delhi(Amendment) Act 2021’ नोटिफाई कर दिया। यह 27 अप्रैल 2021 की आधी रात से प्रभावी हो गया है। इसमें दिल्ली के उप राज्यपाल के अधिकारों को परिभाषित किया गया है। अब इस केंद्र शासित प्रदेश में सरकार का मतलब ‘उप राज्यपाल’ होगा। ‘दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राजक्षेत्र अधिनियम शासन (संशोधन) अधिनियम, 2021’ के लागू होने के बाद हर फैसले पर LG का विचार लेना होगा।

दिल्ली सरकार अथवा कैबिनेट द्वारा कोई भी फैसला लिया जाता है तो उससे पहले उसे LG के साथ सलाह-मशविरा करना होगा। ये नोटिफिकेशन ऐसे समय में आया है, जब दिल्ली में प्रदेश और केंद्र की सरकार अदालत से लेकर ग्राउंड जीरो तक एक-दूसरे के सामने खड़ी है। केजरीवाल सरकार पर दिल्ली में ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए लापरवाही बरतने का आरोप है, जिसके कारण कई मरीजों की जान गई।

इस अधिनियम में ‘GNCT ऑफ दिल्ली एक्ट, 1991’ को फिर से परिभाषित किया गया है, जिसके हिसाब से चुनी हुई सरकार और LG की शक्तियों को फिर से परिभाषित किया गया है। अब दिल्ली की विधानसभा या इसकी समितियाँ दिल्ली की NCT की रोजमर्रा के मुद्दों पर फैसला नहीं ले पाएगी और साथ ही प्रशासनिक मामलों में जाँच का आदेश नहीं दे पाएगी। विपक्षी दलों ने इस बिल का जम कर विरोध किया था।

हालाँकि, केंद्र सरकार का कहना है कि यह कोई संशोधन नहीं है बल्कि पहले से ही बने-बनाए अधिनियम को और स्पष्ट किया गया है। इससे न तो चुनी हुई सरकार का कोई अधिकार छीना गया है और न ही उप-राज्यपाल को विशेषाधिकार दिए गए हैं। केंद्र के अनुसार, बजट, बिल इत्यादि दिल्ली सरकार के ही अधीन हैं, लेकिन डे-टू-डे प्रशासन पर निर्णय वो नहीं लेगी क्योंकि दिल्ली सरकार की कमिटी आपराधिक मामलों को देखने लगी तो फिर एग्जीक्यूटिव पुलिस क्या करेगी?

सेक्शन 24 में लिखा है कि विधानसभा द्वारा पास किए गए कानून उप-राज्यपाल के पास हस्ताक्षर के लिए जाएँगे। साथ ही प्रशासनिक जाँच बिठाने जैसे अधिकारों में कटौती की गई है। बता दें कि दिल्ली पुलिस पहले से ही वहाँ की सरकार के अधीन न होकर केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत काम करती है, ऐसे में चीजों को लिखित में और स्पष्ट किया गया है। सरकार के फैसलों के लिए उप-राज्यपाल का मत लिए जाने की बात भी कही गई है।

बता दें कि नई दिल्ली देश की राजधानी है, ऐसे में वहाँ हर घटना का सम्बन्ध देश की सुरक्षा से जुड़ता है। लिहाजा, दोनों सरकारों के अधिकारों की स्पष्ट व्याख्या ज़रूरी है। ‘नेशनल कैपिटल टेरिटरी एक्ट’ में संशोधन कर उसमें सिर्फ एक चीज जोड़ी गई है, कुछ भी हटाया नहीं गया है। 1991 एक्ट में बस इतना जोड़ा गया है कि दिल्ली में सरकार का तात्पर्य उप राज्यपाल से होगा।

‘OMG! तुम्हारे बट इतने बड़े क्यों हैं’: 12 साल की उम्र से बॉडी शेमिंग झेल रही हैं इलियाना डिक्रूज

बॉलीवुड अभिनेत्री इलियाना डिक्रूज ने बॉलीवुड बबल को दिए इंटरव्यू में एक चौंकाने वाला खुलासा किया। 33 साल की डिक्रूज ने बताया कि वे 12 साल की उम्र से बॉडी शेमिंग का सामना कर रही हैं और आज भी इसकी शिकार होती हैं।

उन्होंने कहा, “मुझे याद है जैसे कल की ही बात हो। ये सब बहुत अजीब था क्योंकि इसने मेरे मन पर असर छोड़ा। मैं बॉडी शेमिंग का सामना 12 साल की उम्र से कर रही हूँ। मेरी युवावस्था शुरू हुई और जब मैं बढ़ने लगी, तभी ऐसी अजीब टिप्पणियाँ सुनने को मिलीं। लोगों ने बॉडी पर कमेंट करके पूछा ‘ओह माय गॉड, तुम्हारे बट इतने बड़े क्यों हैं? और मैं बस यही कह पाई, ‘आखिर क्या कहना चाहते हो।’’

इलियाना ने आपबीती साझा करते हुए बताया, “आपको लगता है कि आप ठीक हैं और फिर आपको ऐसे लोग मिल जाते हैं। आप उनकी बातों पर यकीन करने लगते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि ये एक गहरा डर है, क्योंकि इसे आप इतने सालों से झेल रहे हैं। आपको आंतरिक तौर पर बहुत मजबूत होना पड़ता है ये कहने के लिए कि कोई बात नहीं। आपके बारे में आपकी राय सबसे जरूरी है। ये एक ऐसी चीज है जिसे मैं रोज अपने आपको कहती हूँ।”

अभिनेत्री ने बताया कि उन्हें बॉडी शेमिंग का सामना आज भी करना पड़ता है। वह कहती हैं, “मैं इन सबसे हर रोज गुजरती हूँ। मेरे पास कम से कम 10 मैसेज होंगे जिसमें बॉडी शेमिंग की गई होगी। हमेशा आपके आमने-सामने कोई न कोई ऐसा होता है जो आपके बारे में बुरा-भला कहे। मैं बस लोगों से यही कहना चाहती हूँ कि दूसरे लोगों से बात करते हुए संवेदनशील रहें, क्योंकि आपको नहीं पता आपकी बातें उसके मन पर कैसा असर छोड़ रही हैं।”

डिक्रूज कहती हैं, “दुनिया में सिर्फ़ आप अपने बारे में बनाई गई धारणा को नियंत्रित कर सकते हैं। इसलिए मैं लोगों को हमेशा कहती हूँ कि आपके बारे में आपकी राय महत्व रखती है। दुनिया को भाड़ में जाने दो, मत सोचो वे क्या सोचते हैं। सिर्फ़ आपकी राय अपने लिए जरूरी है। आप अकेले हैं जो अपनी बॉडी के साथ रहेंगे। ऐसे भी दिन थे जब मैंने सोचा कि नहीं, मुझे ये नहीं पसंद, मेरा पेट तो फूला हुआ है?  लेकिन अब मैं कहती हूँ ठीक है। इसके अंदर गर्भाशय है तो ठीक है सब। ये कभी फ्लैट नहीं होगी।”

बता दें कि इलियाना हाल में अभिषेक बच्चन के साथ ‘द बिग बुल’ में नजर आईं थीं। फिल्म में उन्होंने पत्रकार का रोल अदा किया था। आगे इलियाना, रणदीप हुड्डा के साथ ‘अनफेयर एंड लवली’ में नजर आने वाली हैं। फिल्‍म की कहानी हरियाणा की एक लड़की लवली की जिंदगी पर आधारित है। लवली साँवली है और समाज में वह रंग को लेकर भेदभाव का श‍िकार होती है।

‘गिरफ्तार हुए महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती, अब तुम्हारी बारी है हिन्दुओं’: पुराना वीडियो वायरल, जानिए हकीकत

सोशल मीडिया पर गाजियाबाद के डासना स्थित शिव-शक्ति पीठ के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती का एक पुराना वीडियो वायरल हो रहा है। इसके आधार पर दावा किया जा रहा है कि फायरब्रांड हिन्दू संत को गिरफ्तार कर लिया गया है। हालाँकि, यति नरसिंहानंद सरस्वती ने खुद इसका खंडन करते हुए कहा है, “हर-हर महादेव! किसी ने मेरी गिरफ़्तारी की झूठी खबर फैला दी है। कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई है।”

उन्होंने ये भी बताया कि वो बिलकुल ठीक हैं और चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है। एक व्यक्ति ने महंत यति का पुराना वीडियो शेयर करते हुए लिखा था, “उन्हें शाहजहाँपुर से गिरफ्तार कर लिया गया है। हिन्दुओं, अब आपकी बारी है। समय कोई दयालुता नहीं दिखाता। दूसरा मौका नहीं आएगा। पीछे जाने के भी रास्ते बंद होंगे।” वीडियो में भी महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती अपनी गिरफ़्तारी की बात करते दिख रहे हैं।

दरअसल, जो वीडियो शेयर हो रहा है वो जुलाई 2020 के अंतिम हफ्ते का है। उस समय वे ‘राष्ट्रीय मुस्लिम मंच’ से जुड़े छत्तीसगढ़ निवासी फैज के अयोध्या में भूमि पूजन समारोह में हिस्सा लेने का विरोध करने के लिए निकले थे। उन्हें हिरासत में लेकर वापस गाजियाबाद भेज दिया गया था। तब चौक सीता की मठिया स्थित उदासीन पंचायती अखाड़ा में ठहरे महंत यति ने अयोध्या कूच का ऐलान किया था, लेकिन उन्हें ससम्मान वहाँ से गाजियाबाद पहुँचाया गया था।

उन्होंने ये वीडियो भी उसी समय बनाया था, लेकिन वो अब शेयर हो रहा है। लोगों ने इस वीडियो के आधार पर सवाल दागना शुरू कर दिया कि जहाँ उनका गला काटने की बात करने वाले दिल्ली के AAP विधायक अमानतुल्लाह खान बाहर हैं, वहीं एक हिन्दू संत को गिरफ्तार कर लिया गया। देश के कई हिस्सों में हाल ही में महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती पर पैगंबर मुहम्मद के अपमान का आरोप लगाते हुए ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाए गए थे।

हाल ही में एक इंटरव्यू में यति नरसिंहानंद सरस्वती ने कहा था, “इस्लाम और कट्टरवादी इस्लाम में कोई अंतर है ही नहीं। इस्लाम कट्टरपंथी ही है। सॉफ्ट इस्लाम जैसा कुछ होता ही नहीं है। इस्लाम सिर्फ मुहम्मद के बताए रास्ते पर चलता है। मुस्लिमों को मुहम्मद के विचार और शिक्षाओं का अनुसरण करना होता है। इस्लाम इस दुनिया के सभी धर्मों के लिए एक खतरा है। पिछले 1400 वर्षों में इस्लाम में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। बल्कि यह आज और खतरनाक हुआ है।”

कोरोना पर रिपोर्टिंग ही बनी ‘त्रासदी’, संक्रमण से जीतने के जज्बे को मार रही ‘भय’ की ये पत्रकारिता

घटना, दुर्घटना या त्रासदी को रिपोर्ट करने की कुछ स्थापित मान्यताएँ हैं जो रिपोर्टिंग के लिखित या अलिखित नियमों के साथ-साथ एक लंबे समय में मीडिया के क्रमिक विकास की गवाही भी देती हैं। साथ ही ये मान्यताएँ देश, समाज या काल के अनुसार अलग-अलग जगहों के लिए लागू होती हैं।

यदि रिपोर्टिंग अपने आप में एक त्रासदी बन जाए तो?

राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्टिंग की विवेचना हो तो ऐसे निष्कर्ष सामने आते हैं जिनसे पता चलता है कि ये स्थापित मान्यताएँ किसी बिंदु पर या तो नहीं मानी जातीं या फिर जान-बूझकर ध्वस्त कर दी जा रही हैं। कम्युनिकेशन में अधिकतर विज्ञापन एजेन्सियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले अपराध बोध, भय और शर्मिंदगी एक समय के बाद मीडिया में रिपोर्टिंग तक पहुँचे और अब मीडिया इसका इस्तेमाल केवल रिपोर्टिंग के लिए ही नहीं, बल्कि अपने या किसी और के उद्देश्यों के लिए कर रहा है। पिछले लगभग ढाई-तीन दशकों में त्रासदी की रिपोर्टिंग में कई ऐसे उदाहरण मिलते हैं जिनसे यह बात साबित होती है कि मान्यताएँ बदल चुकी हैं।

तस्वीरों के सहारे एक बहुत बड़े वर्ग के भीतर अपराध बोध पैदा करने का काम मीडिया के लिए कुछ नया नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की बात करें तो द ग्रेट डिप्रेशन से लेकर द्वितीय विश्व युद्ध तक ऐसे उदाहरणों से भरे पड़े हैं। पर मीडिया के इस पहलू की सबसे अधिक चर्चा उस तस्वीर से हुई थी जो केविन कॉर्टर ने खींची थी। सूडान के एक सूखा-ग्रस्त गाँव में उसने एक बच्चे की तस्वीर खींची जिसके पीछे एक बड़ा सा गिद्ध बैठा था। वैसे तो कहा जाता है कि कॉर्टर ने वहाँ रूक कर उस गिद्ध के उड़ जाने का इन्तज़ार किया था या उसने गिद्ध को भगाने की कोशिश भी की थी, पर प्रकाशित हुई तस्वीर के परिप्रेक्ष्य में गिद्ध के उड़ने का इन्तज़ार शायद कोई मायने नहीं रखता। कॉर्टर को इस तस्वीर के लिए भले ही पुरस्कार मिला पर खुद अपराध बोध से परेशान कॉर्टर ने आत्महत्या कर ली थी।

उसके बाद जो सबसे बड़ा उदाहरण मिलता है वह है अलयान कुर्दी का। 2015 में सीरिया के गृहयुद्ध से बचकर अवैध रूप से यूरोप में घुसने की कोशिश करने वाले लगभग चार हजार अवैध शरणार्थी मरे। पर पूरी दुनिया को केवल एक नाम याद रहा और वह था, तीन वर्षीय बच्चा अलयान कुर्दी। इसका कारण बनी वह प्रसिद्ध तस्वीर जिसने विश्व समुदाय को ‘झकझोर’ कर रख दिया था और उससे उपजने वाले अपराध बोध ने तमाम यूरोपीय देशों को एशिया और अफ़्रीका के अलग-अलग देशों से आए अवैध शरणार्थियों को शरण देने के लिए बाध्य कर दिया।

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में देखें तो भारत में फोटो को आगे रखकर अपराध बोध या भय फैलाने का सबसे बड़ा उदाहरण 2002 के गुजरात दंगे रहे हैं। मीडिया ने गुजरात दंगों के जिन दो चेहरों को लेकर अपराध बोध और भय का माहौल बनाया वे चेहरे क्रमशः कुतुबुद्दीन अंसारी और अशोक परमार के थे। जिस अंसारी की हाथ जोड़कर रोते हुए ली गई फोटो ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि धूमिल की, बाद में पता चला कि वो तस्वीर बड़ी प्लानिंग के बाद ली गई थी। जिस अशोक परमार को सिर पर लाल कपड़े बाँधकर हाथ में तलवार लेकर हमला करने की तैयारी के साथ दिखाया गया, उससे भी कैमरा के सामने पोज देने के लिए तैयार किया गया था।

अपराध बोध या भय पैदा करके अपनी बात मनवा लेने की इस सोच ने अंतराष्ट्रीय मीडिया के लिए नए-नए रास्ते खोल दिए हैं। इस समय भारत में चल रही कोरोना की दूसरी लहर से पैदा होने वाली परिस्थिति को ही देखा जाए तो कभी तस्वीरों के सहारे अपराध बोध पैदा करने की तो कभी विशेषज्ञों से अपने मतलब की बात कोट करवा, भय पैदा करने की लगातार कोशिश की जा रही है।

पिछले वर्ष जब कोरोना को भारत में घुसे हुए महीना भर ही हुआ था तभी किसी तथाकथित विशेषज्ञ को अपने चैनल पर लाकर बरखा दत्त ने ऐसी भविष्यवाणियाँ प्रसारित की जिन्हें सुनकर किसी भी आम भारतीय का भयग्रस्त हो जाना साधारण बात थी। यह अलग बात है। फिर इस रिपोर्ट को आधार बनाकर बार-बार यह प्रश्न पूछा गया कि संक्रमण और उससे होनेवाली मृत्यु के भारत सरकार के आँकड़े सच हैं या नहीं? उन्हीं भविष्यवाणियों को आधार बनाकर अंतराष्ट्रीय मीडिया और उनके प्रतिनिधियों ने यहाँ तक प्रश्न कर डाला कि भारत में लोग मर क्यों नहीं रहे?

यह बात अलग है कि बाद में पता चला कि वह तथाकथित विशेषज्ञ कोरोना या ऐसी वैश्विक स्तर की महामारी पर एक विशेषज्ञ की तरह वक्तव्य देने के योग्य नहीं था।

जबसे दूसरी लहर आई है अस्वाभाविक रूप से बढ़ते संक्रमण, अचानक दबाव में आई स्वास्थ्य व्यवस्था और उससे परिणाम स्वरूप बनी परिस्थिति को राज्यों द्वारा सही तरीके से मैनेज न कर पाने के साथ तमाम और समस्याओं पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्टिंग अधिकतर श्मशान और लाशों तक सीमित रह गई है। कहीं कोई श्मशान में जलती लाशों की तस्वीरें दिखा रहा है तो कहीं कोई श्मशान में पड़ी बाल्टी के ऊपर लैपटॉप रख कर रिपोर्टिंग कर रहा है ताकि वैश्विक स्तर पर एक लहर बनाई जाए और भारतीयों के मन में एक तरह का अपराध बोध पैदा किया जाए। ऐसा करने के पीछे उद्देश्य चाहे जो हो पर यह अवश्य है कि अपराध बोध और भय ग्रसित एक पूरा देश सामान्य प्रतिक्रिया नहीं देगा।

यह भय का ही असर है जो एक आम भारतीय को संक्रमण होते ही अस्पताल में बेड पर कब्जा कर लेने के लिए मजबूर कर रहा है। यह भय का ही असर है जो भारतीयों को आवश्यकता न होने के बावजूद ऑक्सीजन सिलेंडर और इंजेक्शन रखने के लिए उकसा रहा है। यह रिपोर्टिंग से उपजे उस भय का ही परिणाम है कि लगातार श्मशान और जलती लाशें देखने वाला आम भारतीय किसी भी स्थिति में संक्रमण होने पर स्वस्थ होने की उम्मीद को कम कर आँक रहा है।

ऐसे में आवश्यक है कि इन उद्देश्यों के साथ की जाने वाली ऐसी रिपोर्टिंग को लेकर बहस हो और मीडिया खुद इस पर अंकुश लगाए। 

महाराष्ट्र के एक और अस्पताल में आग, 4 की मौत: हादसे के वक्त नींद में थे अधिकतर मरीज

महाराष्ट्र के अस्पतालों में हादसों का सिलसिला थमता नहीं दिख रहा है। ताजा घटना ठाणे के मुंब्रा स्थित प्राइम क्रिटी केयर अस्पताल में बुधवार (अप्रैल 28, 2021) तड़के हुआ। आग लगने के दौरान मरीजों को शिफ्ट किए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई और इसी दौरान 4 लोगों की मौत हो गई। आग तड़के 3:40 में लगी, जब अधिकतर मरीज सो रहे थे।

बाकी मरीजों को आनन-फानन में दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किया गया। बचाव अभियान अभी भी चल रहा है। ठाणे महानगर पालिका ने अपने बयान में कहा, “आज लगभग 3:40 बजे ठाणे के मुंब्रा में प्राइम क्रिटिकेयर अस्पताल में आग लग गई। दो दमकल गाड़ी और एक बचाव वाहन घटनास्थल पर मौजूद है। आग बुझाने का काम चल रहा है। दूसरे अस्पताल में मरीजों की शिफ्टिंग के दौरान चार लोगों की मौत हो गई।”

ये अस्पताल मुम्ब्रा के कौसा इलाके में स्थित है। ये एक नॉन-कोविड अस्पताल है, जहाँ आग लगने की घटना के वक़्त कम से कम 20 मरीज भर्ती थे। अस्पताल के मीटर रूम में शॉर्ट सर्किट हुआ, जिस वजह से आग लगी। इसके बाद एक आवासीय इमारत में चल रही ‘ग्राउंड प्लस वन फैसिलिटी’ में भी आग फ़ैल गई। तत्काल 3 फायर इंजन और 5 एम्बुलेंस बुलाई गई। मुम्ब्रा-कलवा के विधायक जितेंद्र अव्हाड भी घटनास्थल पर पहुँचे।

उन्होंने इस घटना की जाँच कराने की बात कही। साथ ही बताया कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को इस घटना के सम्बन्ध में सूचित कर दिया गया है। NCP नेता और राज्य में आवासीय मामलों के कैबिनेट मंत्री अव्हाड ने मृतकों में से प्रत्येक के परिजनों को 5 लाख रुपए और घायलों को 1-1 लाख रुपए के मुआवजे की घोषणा की। मृतकों का नाम यास्मीन जफ़र सैयर (70), नवाब माजिद शेख (47), हलीमा बी सलमानी (70) और मिस्टर सोनवणे है।

ये घटना तब हुई है, जब पिछले ही हफ्ते मुंबई के विरार के एक अस्पताल में आग लगने के कारण 13 कोरोना मरीजों को अपनी जान गँवानी पड़ी थी। इस मामले में अस्पताल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (CAO) को लापरवाही और अग्नि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है। उक्त अस्पताल ने न ऑडिट कराया था, न उसके पास अग्निशमन विभाग का NOC था। मुंब्रा की घटना से पहले पिछले चार महीने में महाराष्ट्र के अस्पतालों में चार हादसों में कम से कम 57 मौतें हो चुकी है।

18 से ऊपर के लिए COVID-19 टीकाकरण के लिए ऐसे होगा रजिस्ट्रेशन: 12 AM, 28 अप्रैल से होगी शुरू

चौथे चरण का टीकाकरण एक मई से शुरू होगा। 28 अप्रैल से इसके लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो जाएगा। 28 अप्रैल को 12 AM यानि आज रात 12 बजे से रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। इसमें 18 वर्ष और उससे अधिक उम्र के सभी लोगों को टीका लगाया जाएगा। इसके लिए कोविन (Co-WIN) पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। टीकाकरण के लिए पात्र लोग स्वयं कोविन प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।

कुछ दिन पहले, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने एक ट्वीट के माध्यम से सूचित किया था कि 18 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों के लिए रजिस्ट्रेशन 28 अप्रैल को कोविन प्लेटफॉर्म पर शुरू हो जाएगा।

19 अप्रैल को, भारत सरकार ने घोषणा की थी कि 18 वर्ष से 45 वर्ष की आयु तक का कोई भी व्यक्ति दुनिया में सबसे बड़े टीकाकरण अभियान में कोविड -19 वैक्सीन प्राप्त कर सकता है। सरकार ने वैक्सीन निर्माताओं को राज्य और निजी अस्पतालों को सीधे 50% उत्पादों की आपूर्ति करने की अनुमति दी। विशेष रूप से, संघ सरकार केवल उन्हीं लोगों को टीके प्रदान करेगी जो 45 वर्ष से अधिक आयु के हैं। जिनकी आयु 18-45 वर्ष के बीच है, वे अपने संबंधित राज्यों या निजी अस्पतालों से टीकाकरण प्राप्त करेंगे।

ऐसे करें रजिस्ट्रेशन

गूगल में कोविन पोर्टल सर्च करें। क्लिक करने के बाद सेल्फ रजिस्ट्रेशन का विकल्प दिखेगा। उसे क्लिक करें। अपना मोबाइल नंबर भरें। इसके बाद वन टाइम पासवर्ड (OTP) आएगा। उसे भरने के बाद फार्म खुल जाएगा। उनमें माँगी गई सारी जानकारियाँ भरकर रजिस्टर पर क्लिक करना होगा। इसके बाद रजिस्ट्रेशन हो जाएगा।

रजिस्‍ट्रेशन करने का लिंक – http://selfregistration.cowin.gov.in/

तीसरे चरण में दिया जा रहा टीका

स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तीसरे चरण में टीकाकरण का कार्य किया जा रहा है। पहले फेज में 16 जनवरी से स्वास्थ्य कर्मियों को टीका दिया गया। दूसरे फेज में फ्रंट लाइन वर्कर को टीका दिया गया। तीसरे फेज में 45-59 वर्ष के आयु वर्ग के बीमार व्यक्ति और 60 वर्ष से उपर के सभी बुजुर्ग का टीकाकरण चल रहा है। इसके बाद अब 18 साल से 45 साल के बीच के लोगों का टीकाकरण होना है।