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Remdesivir का जो है सप्लायर, उसी को महाराष्ट्र पुलिस ने कर लिया अरेस्ट: देवेंद्र फडणवीस ने बताई पूरी बात

महाराष्ट्र में कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ कारगर दवा रेमडेसिविर (Remdesivir) पर राजनीति गरमा गई है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता देवेंद्र फडणवीस ने आरोप लगाया है कि रेमडेसिविर सप्लायर को महाराष्ट्र पुलिस परेशान कर रही है।

देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि राज्य की पुलिस दमन स्थित रेमडेसिविर सप्लायर को सिर्फ इसलिए परेशान कर रही है क्योंकि वहाँ के सप्लायर ने बीजेपी नेताओं के अनुरोध पर राज्य को एंटी वायरल ड्रग रेमडेसिविर का स्टॉक देने पर राजी हो गए थे। हालाँकि महाराष्ट्र पुलिस ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा है कि वह बस स्टॉक की जाँच के लिए निकले थे ताकि कालाबाजारी ना हो।

देवेंद्र फडणवीस ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “चार दिन पहले, हमने ब्रुक फार्मा को महाराष्ट्र में रेमडेसिविर इंजेक्शन के स्टॉक की आपूर्ति करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि वे अनुमति नहीं दे सकते थे। मैंने केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया से बात की और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) से रेमडेसिविर सप्लाई के लिए अनुमति ली, जिसके बाद आज रात (अप्रैल 17, 2021) लगभग नौ बजे, पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।”

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) मंजूनाथ सिंगे ने उन्हें बताया कि उनके पास इनपुट थे कि कुछ निर्यातकों के पास 60,000 रेमडेसिविर की शीशियाँ थीं और वे केवल उसी की जाँच के लिए जा रहे हैं। लेकिन वहाँ जाकर उन्होंने गिरफ्तारी कर ली।

फडणवीस ने बताया कि (फार्मा कंपनी के मालिक से) बात करने पर पता चला कि उन्हें धमकी दी गई है। इस बारे में देवेंद्र फडणवीस ने डीसीपी और एडिशनल सीपी से बात कर उन्हें तुरंत छोड़ने की माँग की। फडणवीस ने महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार में एनसीपी (NCP) कोटे से मंत्री नवाब मलिक (Nawab Malik) पर महाराष्ट्र में रेमडेसिविर  की मौजूदा स्थिति को लेकर झूठ बोलने का आरोप लगाया। फडणवीस ने कहा कि नवाब मलिक को सिर्फ कोरी राजनीति करना और नैरेटिव सेट करना आता है, उन्हें राज्य के लोगों की जान से कोई लेना-देना नहीं है।

देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि उन्होंने डीसीपी मंजूनाथ सिंगे को अनुमति पत्र दिखाया और बताया कि रेमडेसिविर की सप्लाई के लिए उन्होंने बोला है। लेकिन डीसीपी ने कहा कि इससे पहले उन्हें (पुलिस को) सूचित नहीं किया गया था। देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि ये जो भी कुछ राज्य की सरकार पुलिस के साथ मिलकर कर रही है, वो गलत है।

देवेंद्र फडणवीस के आरोपों को डीसीपी मंजूनाथ सिंगे ने गलत बताया है। उन्होंने कहा है कि पुलिस ने किसी भी रेमडेसिविर सप्लायर को गिरफ्तार नहीं किया है बल्कि उन्हें बस पूछताछ के लिए बुलाया था, क्योंकि एंटी वायरल दवा की व्यापक कालाबाजारी के इनपुट्स मिले थे।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने रेमडेसिविर इंजेक्शन और उससे जुड़े सभी प्रकार के इनग्रेडिएंट्स के निर्यात पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच सरकार ने यह निर्णय लिया है कि जब तक देश में कोविड-19 की स्थिति नहीं सुधरती है, तब तक रेमडेसिविर के निर्यात पर रोक लगी रहेगी।

बमबारी, अपहरण, मारपीट और वोटर्स को धमकाने की 7 घटनाएँ: पश्चिम बंगाल में पाँचवे चरण के चुनाव में हिंसा का लेखा-जोखा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अब तक हुई हिंसा को देखते हुए चुनाव आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था को और भी चाक-चौबंद करने का निर्णय लिया। इसके बाद भी शनिवार (17, अप्रैल) को संपन्न हुए पाँचवे चरण के मतदान के दौरान हिंसा की कई घटनाएँ देखी गईं।  

भाजपा नेता के घर पर बमबारी :

शुक्रवार की रात को कल्याणी विधानसभा के सुगुना में भाजपा के बूथ अध्यक्ष के घर पर कुछ उपद्रवियों ने बम से हमला किया जिसके कारण भाजपा नेता के घर की दीवार नष्ट हो गई। Zee 24 घंटा में इसकी जानकारी दी गई। घटना के 12 घंटे बीत जाने के बाद भी जिंदा क्रूड बम वहीं पड़े हुए थे। हालाँकि, स्थानीय लोगों ने पुलिस प्रशासन को इसकी सूचना दे दी थी।

वीडियो : यूट्यूब /24 घंटा

भाजपा का पोलिंग एजेंट लापता, तृणमूल कॉन्ग्रेस के सदस्यों पर आरोप :

शनिवार को उत्तरी 24 परगना के मिनखान तहसील में भाजपा के पोलिंग एजेंट भानू भुईया के लापता होने की खबर आई। भाजपा के अनुसार भानू जब सुबह पोलिंग स्टेशन जा रहा था तब उसे तृणमूल कॉन्ग्रेस के सदस्यों द्वारा बूथ में प्रवेश करने से रोका गया। उसके बाद से ही पार्टी भानू को खोज नहीं पा रही है। भाजपा ने टीएमसी के सदस्यों पर अपने पोलिंग एजेंट के अपहरण का आरोप लगाया है और चुनाव आयोग से हस्तक्षेप करने की माँग करने का निर्णय लिया है।

वीडियो : एबीपी न्यूज

भाजपा के पोलिंग एजेंट के साथ तृणमूल कॉन्ग्रेस के सदस्यों द्वारा मारपीट :  

रिपब्लिक टीवी की रिपोर्ट के अनुसार उत्तरी 24 परगना जिले के हरोआ विधानसभा क्षेत्र में टीएमसी के सदस्यों द्वारा भाजपा के पोलिंग एजेंट अजीत धर के साथ मारपीट की गई। रिपोर्ट के अनुसार भाजपा को वोट करने के लिए टीएमसी के सदस्यों ने धर को धमकाया। भाजपा ने आरोप लगाया है कि अजीत धर के साथ लाठी-डंडों से मारपीट की गई है जिससे उनके सिर पर गहरी चोट लगी है। धर को बर्धमान मेडिकल कॉलेज में ईलाज के लिए भर्ती किया गया है। टीएमसी के सदस्यों ने भाजपा के पोलिंग एजेंट धर को रुकवाया और पूछा कि धर ने अम्फान के दौरान तृणमूल सरकार से पैसे क्यों लिए। एक दूसरे भाजपा एजेंट सुब्रत घोष ने भी घटना की पुष्टि की।  

भाजपा कार्यकर्ता की दुकान में तोड़फोड़, एजेंट पर हमला :

News 18 बांग्ला की रिपोर्ट के अनुसार कल्याणी विधानसभा क्षेत्र के गयेशपुर में एक भाजपा कार्यकर्ता की दुकान में तोड़फोड़ की गई। भाजपा का आरोप है कि टीएमसी के सदस्यों ने ही दुकान पर हमला किया है। इसके अलावा एक भाजपा एजेंट को भी पोलिंग बूथ में घुसने से रोका गया। कल्याणी से भाजपा प्रत्याशी अंबिका राय ने बताया कि उनके पोलिंग एजेंट को बूथ में घुसने से रोका गया और उसके साथ मारपीट की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि टीएमसी के गुंडे बूथ कैप्चरिंग के माध्यम से लोकतान्त्रिक प्रक्रिया को रोकना चाहते हैं।

वीडियो : न्यूज 18

टीएमसी सदस्यों पर वोटर्स को धमकाने का आरोप, केन्द्रीय बल मामले में हुए सक्रिय :

शनिवार को भाजपा और लेफ्ट-कॉन्ग्रेस-आईएसएफ के गठबंधन ने आरोप लगाया कि टीएमसी के सदस्य मतदाताओं को डरा रहे हैं और उन्हें वोट डालने से रोक रहे हैं। मामला सान्तिपुर विधानसभा के हरिपुर क्षेत्र का है।

इस मामले के सामने आने के बाद केन्द्रीय सुरक्षा बलों की एक टीम को चुनाव संपन्न कराने के लिए भेज गया। ABP न्यूज के द्वारा शेयर किए गए विजुअल में देखा गया कि सुरक्षा जवान पोलिंग बूथ की सुरक्षा के लिए डटे हुए हैं। सितलकुची की घटना को देखते हुए केन्द्रीय सुरक्षा बलों की अतिरिक्त टुकड़ियों को सुरक्षा व्यवस्था में तैनात किया गया था।

वीडियो : एबीपी न्यूज

भाजपा और टीएमसी के सदस्यों में झड़प, महिला को जमीन पर पटका गया :

शांतिनगर के साल्ट लेक क्षेत्र में तृणमूल कॉन्ग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ताओं में भारी झड़प हुई। टीएमसी ने कहा कि भाजपा के प्रत्याशी सब्यसाची दत्ता के आने के बाद वहाँ माहौल तनावपूर्ण हुआ जबकि भाजपा ने आरोप लगाया कि टीएमसी के सदस्य उन्हें वोट डालने से रोक रहे थे। झड़प में दोनों गुटों ने एक-दूसरे पर पत्थर और ईंट चलाए। एक महिला के साथ भी बुरी तरह से मारपीट की गई।

वीडियो : यूट्यूब/24 घंटा

निर्दलीय प्रत्याशी ने टीएमसी सदस्यों का बंदूक लेकर पीछा किया :

पश्चिम बंगाल में पाँचवे चरण के मतदान के दौरान चकदहा विधानसभा क्षेत्र में एक निर्दलीय प्रत्याशी ने बंदूक लेकर टीएमसी सदस्यों को दौड़ा लिया। आरोपित की पहचान कौशिक भौमिक के रूप में हुई है। हालाँकि, भौमिक ने यह आरोप लगाया कि तृणमूल कॉन्ग्रेस के सदस्यों ने भाजपा एजेंट पर हमला किया था और उस पर यह बंदूक फेंकी। उसने दावा किया कि वह यह बंदूक पुलिस थाने में जमा करने जा रहा था।

टीएमसी के सदस्यों का पीछा करते हुए बंदूक नीचे गिर गई और पुलिस द्वारा जब्त कर ली गई। ABP न्यूज के द्वारा शेयर किए गए वीडियो में भौमिक को उसके घर से गिरफ्तार करते हुए देखा जा सकता है।

वीडियो क्रेडिट : एबीपी न्यूज

राजस्थान, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र में रेप के कई आरोप… लेकिन कॉन्ग्रेसी अखबार के लिए UP में बेटियाँ असुरक्षित?

दुष्कर्म जैसी घटनाओं को आधार बनाकर अक्सर योगी सरकार को घेरना अब जैसे कॉन्ग्रेस की आदत हो गई है। अभी बीते दिनों कॉन्ग्रेस पार्टी के अखबार नेशनल हेराल्ड ने अपनी खबर छापी जिसमें 7-8 रेप की घटनाओं के साथ शीर्षक में लिखा था- ‘योगी के उत्तर प्रदेश में बेटी सुरक्षित नहीं है।’ इस खबर में अंदर बताया गया कि योगी आदित्यनाथ प्रदेश में राम राज्य की बात करते हैं लेकिन 4 साल में नतीजे आपके सामने हैं।

नेशनल हेराल्ड की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

नेशनल हेराल्ड की यह खबर, योगी सरकार पर सवाल उठाने के लिए कितनी सटीक थी या नहीं, बहस आज उस पर नहीं है। प्रश्न ये है कि जब सामाजिक कुकृत्यों पर किसी एक प्रदेश की सरकार को इतनी छानबीन करके सवालों के कटघरे में खड़ा किया जा सकता है तो फिर कॉन्ग्रेस शासित राज्यों में हो रही घटनाओं पर पार्टी सवालों से अछूती क्यों है।

आज मुंबई, जहाँ शिवसेना और एनसीपी के साथ कॉन्ग्रेस महागठबंधन में एक बड़ी पार्टी है, वहाँ एक महिला अधिकारी ने एक पुलिसकर्मी के खिलाफ बलात्कार की शिकायत लिखवाई है। अभी मामला ताजा है इसलिए केस में जाँच हो रही है।

लेकिन, मालूम हो कि पिछले कुछ समय में ये अकेला केस नहीं है, जहाँ प्रशासन से जुड़ा कोई व्यक्ति महिला की इज्जत से ख़िलवाड़ करता नजर आया और कॉन्ग्रेस इस पर पूरी तरह चुप रही। राजस्थान में भी कॉन्ग्रेस की सरकार है। यहाँ पिछले माह ही कैलाश बोहरा नाम के एक पुलिस अधिकारी पर रेप करने का आरोप लगा। 

कैलाश बोहरा के पास एक महिला अपने साथ हुए दुष्कर्म की शिकायत करने आई लेकिन वहाँ सुनवाई करने की जगह बोरा ने 50 हजार रुपए की रिश्वत माँगी और जब महिला उसे देने में असमर्थ नजर आई तो वह उससे शारीरिक संबंध बनाने को कहने लगा।

मामले में महिला की थोड़ी समझदारी के कारण बोहरा पकड़ा गया। एंटी करप्शन ब्यूरो और विभाग ने उसे रंगे हाथ पकड़ा। हर जगह खबर चली। बोहरा को सस्पेंड किया गया। लेकिन किसी भी पार्टी नेता ने अपने प्रशासन या उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाए? नहीं।

मामला यही खत्म नहीं होता राजस्थान के ही अलवर में खड़ेली थाना में एक महिला 2 मार्च को शिकायत लिखवाने गई। मगर, मामला सुनने की बजाय वहाँ के एसआई ने उसका फायदा उठाया और थाना परिसर में ही उसके साथ कई दफा रेप किया। बाद में जब महिला अपनी पहली परेशानी की जगह एसआई के ख़िलाफ़ शिकायत लेकर पहुँची तो टालमटोल करके उन्हें भगा दिया गया।

इससे पहले रावली विहार थाने में पोस्टेड एएसआई रामजीत गुर्जर के खिलाफ भी एक महिला ने रेप का मामला दर्ज कराया था, जिसके बाद उसे लाइन हाजिर तो किया गया लेकिन गिरफ्तारी का कुछ पता नहीं चल।

फिर साल 2019 की बात करें तो राजस्थान के ही चुरु जिले में एक दलित युवक की पुलिस हिरासत में हुई संदिग्ध मौत के मामले में भी पुलिस पर रेप के आरोप लगे थे। मृतक की 35 वर्षीय भाभी और परिजनों ने आधा दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों पर सामूहिक बलात्कार का आरोप लगाया था।

इसी तरह छत्तीसगढ़ में भी हाल में एक सब इंस्पेक्टर के खिलाफ़ रेप और धमकाने का मामला दर्ज हुआ था। कृष्ण कुमार साहू पर आरोप लगा था कि उसने पीड़िता की मदद के बहाने उसके साथ दुष्कर्म किया और बाद में लगातार पीड़िता को धमकाता रहा।

ये केवल चंद मामले हैं। ऐसे न जाने कितने केस हों, जहाँ राज्यों की पुलिस पर तमाम तरह के दाग लगे और राज्य से रेप की घटनाएँ भी नियमित तौर पर आई। लेकिन तब भी पार्टी के अखबर ने सवाल उठाया तो दूसरे प्रदेश पर। शायद, सच्चाई यही है कि कॉन्ग्रेस के लिए दुष्कर्म, एक अपराध तभी तक है जब तक वह उत्तर प्रदेश या भाजपा शासित प्रदेश में हो। उनका इससे कोई सरोकार नहीं है कि उनके राज्यों में स्वयं वही लोग औरतों की अस्मत से खिलवाड़ करने में लगे हैं जिन्हें उनकी सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया।

जिसके लिए लॉजिकल इंडियन माँग चुका है माफी, द वायर के सिद्धार्थ वरदाराजन ने फैलाई वही फेक न्यूज: जानें क्या है मामला

हरिद्वार का कुंभ मेला कई लोगों के लिए चिंता का विषय है। ये वही लोग हैं जिन्होंने एक समय में तबलीगी जमात की मस्जिदों में छिपने, जगह-जगह थूकने, पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंकने जैसी हर हरकत का समर्थन किया था और आज यही लोग हिंदुओं के ख़िलाफॉ प्रोपगेंडा फैलाने के लिए तथ्यों से भी खेल रहे हैं। इसी क्रम में सिद्धार्थ वरदाराजन ने फिर से फेक न्यूज फैलाई है। ये वही फेक न्यूज है जिस पर एक दिन पहले द लॉजिकल इंडियन सार्वजनिक रूप से माफी माँग चुका है। 

सिद्धार्थ वरदाराजन ने ट्विटर पर भाजपा नेता सुनील भराला को निशाने पर लेते हुए द वायर का आर्टिकल ट्वीट करके लिखा, “गोदी मीडिया वॉरियर्स NDMA और महामारी अधिनियम एवं IPC के तहत इसकी (सुनील भराला) गिरफ़्तारी की माँग क्यों नहीं कर रहे थे?”   

सिद्धार्थ वरदाराजन के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

ट्वीट में दिखाई देने वाली हेडलाइन से यह पता चलता था कि कुम्भ मेला की यात्रा के समय भाजपा विधायक भराला कोरोना वायरस से संक्रमित थे। हालाँकि यह सही खबर नहीं थी क्योंकि यही झूठी खबर फैलाने के लिए लॉजिकल इंडियन ट्विटर पर माफी माँग चुका है।

अपने बयान में लॉजिकल इंडियन ने कहा कि उन्होंने खबर दी कि उत्तर प्रदेश के भाजपा विधायक सुनील भराला ने कोविड-19 से संक्रमित होने के बाद भी कुम्भ की यात्रा की, जबकि एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में भराला ने कहा कि उन्होंने कुम्भ की यात्रा की और फिलहाल वे कोरोनावायरस से संक्रमित हैं। भराला के इस वक्तव्य को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करने के लिए लॉजिकल इंडियन ने कल माफी माँगी थी।

हालाँकि लॉजिकल इंडियन के द्वारा माफी माँगने के बाद भी सिद्धार्थ वरदाराजन ने ट्विटर पर इसी मामले पर फेक न्यूज फैलाई और दूसरे मीडिया समूहों से भी यह माँग की कि वो भी फेक न्यूज फैलाएँ। लॉजिकल इंडियन के द्वारा माफी माँगने के बाद द वायर में छपा लेख भी अपडेट किया गया लेकिन वरदाराजन ने अपने ट्वीट को डिलीट भी नहीं किया।

एक ट्विटर यूजर ने उन्हें कहा कि यदि उत्तरप्रदेश सरकार फेक न्यूज फैलाने के लिए केस दर्ज करेगी तब वरदाराजन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का रोना रोएँगे।

एक अन्य यूजर ने लॉजिकल इंडियन का माफीनामा दिखाते हुए कहा कि वरदाराजन के पास इतना IQ होगा कि वह समझ सकें कि वह फेक न्यूज फैला रहे हैं।

एक यूजर ने तो उत्तर प्रदेश पुलिस से वरदाराजन को गिरफ्तार करने की माँग की।

मगर, बावजूद इन सबके लेख लिखे जाने तक वरदाराजन ने ट्वीट डिलीट नहीं किया।

सिद्धार्थ वरदाराजन की फेक न्यूज और उत्तर प्रदेश सरकार

अप्रैल 2020 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ फेक न्यूज फैलाने के जुर्म में सिद्धार्थ वरदाराजन के खिलाफ 2 एफआईआर दर्ज की गईं थी। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा चेतावनी दिए जाने के बाद भी वरदाराजन ने न तो गलत लेख डिलीट किया और न ही माफी माँगी।

इसके अलावा जनवरी 2021 में भी सिद्धार्थ वरदाराजन के खिलाफ IPC की धारा 153B और धारा 505 के तहत एफआईआर दर्ज की गई। वरदाराजन ने किसान आंदोलन के समय ट्रैक्टर रैली में ट्रैक्टर के पलटने से नवरीत सिंह नाम के प्रदर्शनकारी की मृत्यु पर फेक न्यूज फैलाने और भीड़ को उकसाने का काम किया था।

द वायर के संस्थापक और संपादक सिद्धार्थ वरदाराजन लगातार उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री और वहाँ की सरकार के विषय में फेक न्यूज फैलाते रहते हैं। ऐसा नहीं है कि वह यह सब गलती में करते हैं बल्कि फेक न्यूज फैलाने के बाद वह न तो उसे डिलीट करते हैं और न ही उस पर माफी माँगते हैं। लगातार फेक न्यूज फैलाने के बाद सरकार द्वारा कार्रवाई किए जाने पर यही सिद्धार्थ वरदाराजन और उनके स्व-घोषित सत्यवादी पत्रकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का रोना रोते हैं।  

साबरमती रिवरफ्रन्ट रोड के फुटपाथ पर अचानक से बनी दरगाह, लोगों ने की अवैध निर्माण हटाने की माँग: वीडियो वायरल

सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें साबरमती रिवरफ्रन्ट रोड के फुटपाथ पर अचानक से बनाई गई एक दरगाह दिखाई दे रही है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि अहमदाबाद में रिवरफ्रन्ट रोड के किनारे फुटपाथ पर एक दरगाह बना दी गई है।

ट्विटर पर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने गुजरात सरकार और नगर प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाते हुए इस बात पर प्रकाश डाला है कि यह दरगाह पहले यहाँ नहीं थी लेकिन अचानक से बना दी गई।

एक यूजर ने वीडियो पोस्ट करते हुए कहा कि उसने हाल ही में रिवरफ्रन्ट के पास एक दरगाह देखी। यूजर ने सरकार से माँग की कि ऐसे अवैध निर्माणों को हटाया जाना चाहिए अन्यथा एक दिन पूरे रिवरफ्रन्ट में मस्जिद और दरगाह बना दिए जाएँगे।

एक ट्विटर यूजर ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि यह क्षेत्र अभी ही विकसित हुआ, लेकिन फिर भी इस पर दरगाह बना दी गई है। यूजर ने अहमदाबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन को टैग करते हुए आरोप लगाया कि संस्था द्वारा ऐसे अवैध निर्माणों को रोकने के लिए कोई काईवाई नहीं की गई।

एक अन्य यूजर ने अहमदाबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन, मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और गुजरात भाजपा ईकाई को टैग करते हुए प्रश्न किया कि किस आधार पर रिवरफ्रन्ट में दरगाह निर्माण को अनुमति प्रदान की गई।  

बता दें कि अहमदाबाद में साबरमती नदी के किनारे साबरमती रिवरफ्रन्ट का निर्माण किया गया है। 1960 में इस परियोजना की आधारशिला रखी गई थी लेकिन इसका निर्माण 2005 में शुरू हुआ। साबरमती रिवरफ्रन्ट से जुड़ी हुई कई अन्य परियोजनाएँ भी निर्माणाधीन हैं।  

ईसाई युवक ने मम्मी-डैडी को कब्रिस्तान में दफनाने से किया इनकार, करवाया हिंदू रिवाज से दाह संस्कार: जानें क्या है वजह

कोरोना महामारी की बढ़ती रफ्तार देखते हुए एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जैसा कि हम जानते हैं कि ईसाई समुदाय में मृत्यु के बाद दफनाने की परंपरा होती है लेकिन मध्य प्रदेश के छतरपुर में एक ईसाई युवक ने जन कल्याण के लिए अपने माता-पिता का दाह संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से करवाया।

दरअसल, युवक का मानना है कि इस प्रकार अंतिम संस्कार से वायरस जल जाएगा, और इसकी वजह से कोई संक्रमित नहीं होगा। बेटे के निवेदन पर स्थानीय प्रशासन ने ईसाई दंपत्ति का दाह संस्कार कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के महोबा में 65 वर्षीय ईसाई बुजुर्ग अपनी 61 साल की पत्नी के साथ रहते थे। जब उनके बेटे को पता चला कि उसके माता पिता कोरोना संक्रमित हैं तो वह दोनों को महोबा से रेफर कराकर छतरपुर इलाज के लिए उसी रात ले गया। लेकिन संक्रमण पूरे शरीर में फैलने के कारण दंपत्ति की हालत बिगड़ गई। 

नतीजन, माँ की मौत, छतरपुर पहुँचने से पहले हो गई। मगर, बेटे को तब भी लगा कि वह बीमार है। उसने उन्हें ईसाई अस्पताल में भर्ती करवा दिया। पहले अस्पताल ने माँ को मृत घोषित किया और उसके बाद देर रात पिता की भी मृत्यु हो गई। जब युवक से ईसाई दंपत्ति को कब्रिस्तान में दफन करने की बात हुई तो उसने मना कर दिया और उनका संस्कार हिंदू रिवाज से करने की इच्छा जताई। बाद में नगर पालिका प्रबंधन की गाइडलाइन का पालन करते हुए सागर रोड स्थित भैंसासुर मुक्तिधाम में हिंदू संस्कृति के तहत दोनों शवों का दाह संस्कार हुआ।

इस दौरान छतरपुर के ईसाई समाज के अध्यक्ष जयराज ब्राउन ने इस पर कहा कि छतरपुर मसीही समाज की ओर से अंतिम संस्कार करने से किसी को नहीं रोका गया। जिन कोरोना पॉजिटिव बुजुर्ग दंपति का देहांत हुआ था, उनके बेटे ने ही सुरक्षा की दृष्टि से हिंदू रीति से अंतिम संस्कार करने का फैसला किया था। उनके पार्थिव देह ताबूत में रखकर दफनाने के बजाए अग्नि में जला देना उसे कोरोना सुरक्षा की दृष्टि से ज्यादा ठीक लगा।

10 नए ऑक्सीजन प्लांट, रेमडेसिविर की पर्याप्त उपलब्धता, औद्योगिक इकाइयाँ रहेंगी चालू: CM योगी ने दिए कई निर्देश

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना संक्रमण के कारण शनिवार को रात आठ बजे से राज्य में होंने वाले कर्फ्यू के दौरान औद्योगिक इकाईयाँ चालू रहने के अलावा अन्य कई निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी शनिवार को टीम 11 के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद अधिकारियों को लॉकडाउन के साथ ही 35 घंटे के कर्फ्यू को लेकर कुछ निर्देश दिए हैं। योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा ​कि प्रदेश में डीआरडीओ के सहयोग से अलग-अलग स्थानों पर अति शीघ्र 10 नए ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए जाएँगे। इनकी स्थापना के संबंध में स्थान का चिन्हांकन कर आज से ही युद्धस्तर पर कार्यवाही प्रारंभ की जाए।

उन्होंने कहा, लखनऊ स्थित अवध शिल्प ग्राम में एच.ए.एल. के सहयोग से एक नया सर्व सुविधायुक्त कोविड हॉस्पिटल तैयार किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग एच.ए.एल. से समन्वय स्थापित कर इस अतिमहत्वपूर्ण कार्य को तत्काल क्रियाशील करे।

सीएम ने कहा कि रविवार को घोषित साप्ताहिक बंदी की अवधि में पूर्व निर्धारित परीक्षाएँ हो सकेंगी। अभ्यर्थी प्रवेश पत्र दिखाकर आवागमन कर सकेंगे। सार्वजनिक परिवहन आधी क्षमता के साथ संचालित किए जाएँ। इस दौरान औद्योगिक इकाइयों को बंदी से छूट होगी। वहीं, साप्ताहिक बंदी के दौरान शादी-विवाह आदि के पूर्व निर्धारित कार्य कोविड प्रोटोकॉल का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए संपन्न होंगे। बंद हॉल में अधिकतम 50 एवं खुले मैदान में अधिकतम 100 लोग ही उपस्थित हो सकते हैं। इस आदेश का सख्ती से पालन कराया जाए।

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग रेमडेसिविर की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करें। सभी अस्पतालों में अगले 36 घंटों के लिए अनुमानित ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। रेमडेसिविर सहित किसी भी प्रकार की जीवनरक्षक दवाओं की कोई कमी नहीं है। सभी जिलों में इनकी उपलब्धता सुनिश्चित रखी जाए। इस कार्य में किसी प्रकार की शिथिलता स्वीकार्य नहीं है। राज्य मंत्री श्री अतुल गर्ग जी इस कार्य की सतत मॉनिटरिंग करें।

योगी ने कहा निजी मेडिकल कॉलेजों में जहाँ ऑक्सीजन सिलेंडरों की कमी के कारण ICU बेड उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, ऐसे संस्थानों को राज्य सरकार द्वारा सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा। डीजी, मेडिकल एजुकेशन इस व्यवस्था को सुनिश्चित करें। साथ ही उन्होंने बताया कि किसानों के हितों को सुनिश्चित करते हुए अब तक 29 लाख 50 हजार क्विंटल गेहूं क्रय किया जा चुका है। क्रय केंद्रों पर कोविड प्रोटोकॉल का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। कृषि उत्पादन आयुक्त इसकी सतत मॉनिटरिंग करेंगे। किसानों को भुगतान में विलंब न हो।

बता दें कि मुख्यमंत्री ने लखनऊ स्थित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को अपनी पूरी क्षमता से कार्य करने को कहा। साथ ही संबंधित अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि यह सेंटर जनता के लिए उपयोगी हो।

कोरोना संकट में कोविड सेंटर बने मंदिर, मस्जिद में नमाज के लिए जिद: महामारी से जंग जरूरी या मस्जिद में नमाज?

कोरोना के प्रकोप देश में जो बर्बादी का मंजर दिखाई दे रहा है। उससे मुंबई में तो स्थिति हर बीतते दिन के साथ बिगड़ती जा रही है। मरीजों की बढ़ती संख्या के चलते बीएमसी के प्रमुख अस्पतालों में बेड मिलना एक बड़ी चुनौती बन गई है। मृतकों का आँकड़ा भी डरा रहा है। 

इस बीच कई धार्मिक स्थल मदद को आगे आ रहे हैं और मुश्किल समय में इस बात पर जोर दे रहे हैं कि मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। इसी कड़ी में अब मुंबई में जैन समुदाय ने मंदिर को कोविड -19 सेंटर में परिवर्तित कर एक अद्भुत उदाहरण स्थापित किया है।

इस कोविड सेंटर में 100 बिस्तरों वाले पैथोलॉजी लैब के साथ सामान्य और डिलक्स वार्ड शामिल हैं। आज ही इसमें ऑक्सीजन सुविधा का उद्घाटन किया गया। 10 डॉक्टरों सहित 50 से अधिक चिकित्सा कर्मचारी सुविधा में तैनात हैं। बता दें कि पिछले साल महामारी के दौरान भी इस मंदिर को कोविड सेंटर में बदल दिया गया था और 2000 से अधिक मरीजों का इलाज किया था।

ये एकमात्र उदाहरण नहीं है, ऐसे ही कई मंदिर है, जो इस विपत्ति काल में खुलकर मदद के लिए सामने आ रहे हैं। मुंबई के श्री स्वामी नारायण मंदिर ने परिसर को कोविड अस्पताल में बदल दिया है। मंदिर प्रमुख ने कहा है कि उपचार लागत का ध्यान मंदिर समिति द्वारा रखा जाएगा।

इससे पहले खबर आई थी कि महाराष्ट्र के सबसे बड़े धार्मिक केंद्रों में से एक संत गजानन मंदिर सेवा के लिए सामने आया है। महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के शेगाँव के संत गजानन महाराज मंदिर को भक्तों के लिए भक्तों द्वारा सेवा के अपने अद्वितीय मॉडल के लिए जाना जाता है। उन्होंने कोरोना संदिग्धों और रोगियों के लिए 500-बेड के अलग-अलग आइसोलेशन परिसर बनाए हैं। वहीं सामुदायिक रसोई 2,000 लोगों के लिए दोपहर और रात का भोजन तैयार कर रही है। ज्यादातर प्रवासी मजदूर बुलढाणा जिले के विभिन्न स्कूलों / कॉलेजों में शरण लिए हुए हैं। खाना मुफ्त में दिया जाता है। यानी इन मंदिरों के घरों के दरवाज़े हर धर्म के लोगों के लिए इन दिनों खुले हुए हैं।

इन मंदिरों की इमारतों में हिंदुओं के साथ मुसलमान ही नहीं बल्कि दूसरे देशों के नागरिकों को भी शरण मिली हुई है। इसके अलावा गुजरात, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश कई अन्य राज्यों में भी मंदिर को कोविड सेंटर बनाया गया है।

एक तरफ जहाँ कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए मंदिर मदद के लिए सामने आ रही है, वहीं दूसरी तरफ मस्जिद को खोलने और नमाज पढ़ने के लिए अनुमति दिए जाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की जा रही है। रमजान के महीने में मस्जिदों में नमाज पढ़ने को लेकर बुधवार (अप्रैल 14, 2021) को बॉम्बे हाईकोर्ट ने जुमा मस्जिद ट्रस्ट की याचिका पर सुनवाई की। इस याचिका में ट्रस्ट ने 50 लोगों के साथ 5 वक्त नमाज पढ़ने की अनुमति मांँगी थी। हालाँकि कोर्ट ने मामले में सुनावई करते हुए कहा कि भले ही धार्मिक प्रथाओं को फॉलो करने का अधिकार महत्वपूर्ण है लेकिन कोविड महामारी के दौरान लोगों की सुरक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है।

वहीं दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात का मरकज एक बार फिर से खुल गया है और वहाँ नमाज जैसे मजहबी कार्यक्रम शुरू हो गए हैं। 2020 में भारत में कोरोना वायरस संक्रमण का विस्फोट दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज से किस तरह से हुआ था, ये लोगों के जेहन में अब भी ताज़ा है। सरकारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर के हजारों लोग मजहबी गतिविधियों में लिप्त थे और मीडिया का एक वर्ग इनके महिमामंडन में लगा था। अब 1 साल बाद मरकज की इमारत फिर से खुली है और वहाँ नमाज जैसे मजहबी कार्यक्रम शुरू हो गए हैं।

पिछले साल यहाँ से जमाती भाग कर देश के कई मुस्लिम बहुल इलाकों में छिप गए थे और पुलिस जब उन्हें खोजने जाती थी तो पुलिसकर्मियों व मेडिकल टीम पर हमले किए जाते थे। रविवार (मार्च 28, 2021) को शब-ए-बरात के मौके पर मरकज का दरवाजा खोला गया। हालाँकि, इस बार पुलिस-प्रशासन ज्यादा सतर्क था और बड़ी संख्या में जवानों को तैनात किया गया था। पहले से अनुमति लिए हुए सिर्फ 50 लोगों को ही भीतर जाने दिया गया।

हैरत की बात है कि एक तरफ जहाँ देश भर के ऐतिहासिक मंदिरों को बंद किया जा रहा है, प्रसिद्ध धार्मिक यात्राओं को स्थगित किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ मस्जिदों में नमाज पढे जाने को लेकर बहस जारी है। किसी बड़ी मस्जिद या धर्मगुरु ने घरों से इबादत करने का भी कोई ऐलान नहीं किया है। इस बीच आम मुसलमानों के बीच भी इस बात को लेकर बहस छिड़ गई है कि क्या इस वक्त मस्जिदों में जमा होकर नमाज पढ़ना सही है? इसके पक्ष और विपक्ष में तर्क दिए जा रहे हैं।

हालाँकि, सवाल अब भी यही है कि क्या ऐसे समय में मस्जिद में जाकर सैकड़ों लोगों का एक साथ नमाज पढ़ना सही है? क्या घर पर बैठ कर अल्लाह की इबादत नहीं की जा सकती? सोशल मीडिया पर भी इस तरह के तमाम सवाल पूछे जा रहे हैं, लेकिन लोग इसका विरोध कर रहे हैं, हालाँकि वो अपनी बातों को लेकर ज्यादा जज्बाती तर्क ही दे पा रहे हैं। उनके पास इसका कोई तार्किक जवाब नहीं है। 

सवाल उठाने वाले यह भी कह रहे हैं कि देश में कई मंदिरों और चर्च को बंद करने का ऐलान कर दिया गया है तो ऐसे में मुस्लिम धर्मगुरुओं को भी आगे आना चाहिए और लोगों से घर पर रह कर नमाज पढ़ने की अपील करनी चाहिए। पिछले साल भी जब मरकज कोरोना का हॉटस्पॉट बन कर उभरा था तो मीडिया में कहा गया कि महामारी की आड़ में मुस्लिम विरोधी भावनाएँ फैलाई जा रही हैं, मगर एक बार फिर से मस्जिदों में जाकर नमाज पढ़ने की अनुमति माँगने को क्या कहेंगे आप? वो भी ऐसे वक्त में जब कोरोना की दूसरी लहर अपने चरम पर है और एक दिन में रिकॉर्ड मामले सामने आ रहे हैं।

अभी भी आपको तमाम मीडिया रिपोर्ट में मुस्लिमों के महिमामंडन की खबर पढ़ने को मिल जाएँगी। देश में एक तरफ कोरोना वायरस की महामारी फैल रही है तो दूसरी तरफ मुसलमानों ने ईद में नमाज अदा करने के लिए मस्जिद खोलने की माँग की है। आखिर मस्जिद में भीड़ की गारंटी कौन लेगा। इस वक्त कोरोना से जंग जरूरी है या मस्जिद में नमाज? क्या मस्जिद में नमाज पढ़ने से ही दुआ कबूल होगी?

किसान महापंचायत: पंडाल खाली देख निराश हुए BKU अध्यक्ष नरेश टिकैत, धरनास्थल हुआ खाली

कोरोना महामारी के फैलते प्रकोप के बीच यूपी गेट पर हुई एक मासिक पंचायत ने भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के अध्यक्ष नरेश टिकैत को निराश कर दिया है। दरअसल, किसान पंचायत के दौरान जैसे ही टिकैत मंच पर बोलने आए उन्होंने देखा कि प्रदर्शनकारियों की संख्या धरनास्थल पर बहुत कम हो गई है। पंचायत का पंडाल भी खाली पड़ा है।

दैनिक जागरण की खबर के अनुसार भारतीय किसान यूनियन की हर महीने 17 तारीख को मुजफ्फरनगर के सिसौली में मासिक बैठक यूपी गेट पर हो रही है। पिछले माह भी 18 मार्च को भी ये बैठक यूपी गेट पर हुई थी, लेकिन इस बार की तरह तब भी भीड़ की संख्या कम देखकर बीकेयू अध्यक्ष नरेश टिकैत निराश हुए थे। मालूम हो कि एक तरफ हर राज्य में कोरोना की बढ़ती रफ्तार है वहीं दूसरी ओर यूपी गेट पर भारी लापरवाही हो रही है। मंच के सामने बैठे लोगों के मुँह से मास्क गायब है।

गौरतलब है कि कोरोना के बढ़ते प्रभाव ने पूरे देश में पाबंदियाँ बढ़ा दी हैं। हर कोई कोशिश कर रहा है कि भीड़-भाड़ वाले इलाके में जाने से बचे। मगर, किसान नेता राकेश टिकैत ऐसी गंभीर स्थिति में भी अपनी हरकत से बाज नहीं आ रहे। उनका कहना है कि जैसे वह अपने गाँव में रहेंगे वैसे ही यूपी गेट, सिंघु बॉर्डर और टीकरी बॉर्डर पर भी रहेंगे। उन्होंने कहा है कि आंदोलन खत्म नहीं होगा, ये चलता रहेगा।

राकेश टिकैत ने कहा कि यूपी गेट, सिंघु बार्डर और टीकरी बार्डर पर 5 माह से किसान डटे हैं। एक तरह से यहाँ किसानों ने अपना गाँव बसा लिया है। लॉकडाउन लगेगा, तो क्या गाँव में लोग नहीं रहेंगे। टिकैत ने यह भी कहा कि लाकडाउन लगेगा, तो उसके नियमों का पालन किया जाएगा। गाँवों से किसान यहाँ नहीं आएँगे। मगर जो यहाँ पर है वह यहीं पर रहेंगे। आंदोलन चलता रहेगा।

यहाँ बता दें कि यूपी गेट पर नए कृषि कानून के विरोध में किसान आंदोलन 28 नवंबर से हो रहा है। यही वजह है कि दिल्ली जाने कई वाली लेन बंद है। कई वाहनों को इसके कारण दिक्कत का सामना भी करना पड़ रहा है।  लेकिन टिकैत व अन्य प्रदर्शनकारियों को आमजन की समस्या से कोई खासा फर्क नहीं पड़ रहा। वह अपनी मनमानी पर अड़े हुए हैं और कम भीड़ देख कर निराश हो रहे हैं।

‘Covid के लिए अल्लाह का शुक्रिया, इसी ने मुसलमानों को बचाया’: इंडियन एक्सप्रेस की पूर्व पत्रकार इरेना अकबर

इंडियन एक्सप्रेस के साथ काम कर चुकी ‘पत्रकार’ इरेना अकबर ने कोविड-19 महामारी के लिए खुदा का शुक्रिया कहा है और यह दावा किया है कि यदि कोरोनावायरस नहीं होता तो भारतीय मुसलमान डिटेन्शन कैंप में होते। उनका यह बयान उस दौरान आया जब लिबरल्स यह चर्चा कर रहे थे कि कोविड-19 से लड़ने में किसी ‘संघी’ की सहायता करनी चाहिए अथवा नहीं।  

इरेना अकबर ने कहा, “यदि कोरोनावायरस नहीं होता तो भारतीय मुसलमान डिटेन्शन कैंप में होते। हालाँकि मैं वायरस की शुक्रगुजार नहीं हूँ जिसने मेरी आंटी की जान ली, जिसने मेरे अब्बू को आईसीयू में पहुँचा दिया और कई घरों में ट्रेजेडी का कारण बन गया। मैं इस तथ्य पर बात कर रही हूँ कि जब ‘फासीवादी’ अपने प्लान बना रहे थे तब अल्लाह ने अपना प्लान बना दिया।“

अकबर ने आगे कहा, “भारतीय मुसलमानों के लिए यह कुआँ और खाई की स्थिति है। या तो वो कोविड-19 के डर से मरें या फिर राज्य व्यवस्था की मुस्लिम विरोधी हिंसा के डर से। हालाँकि कोविड-19 हमें चुनकर निशाना तो नहीं बना रहा क्योंकि दूसरे केस में जनता इसका (राज्य आधारित मुस्लिम विरोधी हिंसा) आनंद लेगी।

इरेना अकबर का बयान

ऐसा ही एक बयान राहुल गाँधी के सहयोगी अब्बास सिद्दीकी ने पिछले साल कोरोनावायरस की महामारी के दौरान दिया था। सिद्दीकी ने अल्लाह के वायरस से 50 करोड़ भारतीयों की मौत की दुआ माँगी थी।  

न तो भारत में कोई डिटेन्शन कैंप बनाया गया है और न ही मुस्लिमों के खिलाफ कोई राज्य आधारित हिंसा हो रही है लेकिन तथाकथित पत्रकारों द्वारा संकट के समय में ऐसे बयान देना उनकी विषाक्त मानसिकता को जरूर बताता है।

इरेना अकबर हमेशा से ही ऑनलाइन मंचों पर घृणास्पद बयान देने के लिए जानी जाती रही है। फरवरी 2020 में अकबर ने दलितों पर यह आरोप लगाया था कि उन्होंने गुजरात दंगों के दौरान मुस्लिमों का गैंगरेप और उनकी हत्या की थी। अकबर हिंदुओं के द्वारा चलाए जा रहे व्यापार के बहिष्कार की बात भी कर चुकी है। उसने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा जामिया के पक्ष में आवाज न उठाने पर घोर निराशा भी व्यक्त की थी।