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गुरुग्राम और फरीदाबाद के अस्पतालों में दिल्ली के 70% मरीज, अनिल विज ने कहा- सभी का हो रहा उपचार

देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना की दूसरी लहर बेहद घातक साबित हो रही है। अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की कमी से बड़ी संख्या में कोरोना के मरीज दम तोड़ रहे हैं। वहीं झूठे दावे करके दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने वाली केजरीवाल सरकार यह सब देखने के बाद भी मूक है।

राज्य में अव्यवस्था से तंग आकर यहाँ के स्थानीय निवासी हरियाणा और यूपी के अस्पतालों में अपना इलाज कराने को मजबूर हो रहे हैं। यहाँ उनका बिना किसी भेदभाव के इलाज हो रहा है। इसके अलावा बहुत से लोग दिल्ली छोड़कर कहीं और चले गए हैं।

हरियाणा के गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि कई जिलों के अस्पतालों में दिल्ली के कोरोना मरीजों का उपचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गुरुग्राम और फरीदाबाद के अस्पतालों में उपचार करा रहे 70% से ज्यादा लोग दिल्ली के रहने वाले हैं। राजधानी में भीड़ ज्यादा होने की वजह से ये लोग हरियाणा में आ रहे हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अब रोहतक, करनाल और अंबाला तक भी दिल्ली के मरीज आ रहे हैं। हरियाणा सरकार उनका इलाज कर रही है। इसको देखते हुए हमने सभी जिलों के उपायुक्तों को हर जिले में अतिरिक्त बेड की व्यवस्था करने को कहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मौजूदा समय में दिल्ली में कोरोना की वजह से हाहाकार मचा हुआ है। सभी अस्पताल पूरी तरह से कोरोना मरीजों से भर चुके हैं, जिसके चलते लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का सामना भी करना पड़ रहा है। ऐसे में हरियाणा सरकार ने दिल्ली वालों के लिए मदद का हाथ आगे बढ़ाया है, वे यहाँ आने वाले कोरोना मरीजों का उपचार कर रहे हैं।

हालाँकि, हरियाणा में भी कोरोना संक्रमितों के मामलों का लगातार आने का सिलसिला बना हुआ है। हरियाणा के शहर अंबाला में मंगलवार को 332 नए कोरोना मामले दर्ज किए गए हैं और 9 लोगों की मृत्यु हुई है। अकेले अंबाला में ही अप्रैल में अब तक 55 लोगों की कोरोना की वजह से जान जा चुकी है।

वहीं, दिल्ली में पिछले 24 घंटे में सोमवार को कोरोना वायरस के 20,201 नए मामले सामने आए, जबकि 380 लोगों की मौत हुई है। केजरीवाल सरकार की नाकामियों के कारण दिल्ली में कोरोना का पॉजिटिविटी रेट बढ़कर 35.02 प्रतिशत पहुँच गया है।

रेमडेसिविर की कालाबाजारी में न्यूरो सर्जन मो. अल्तमश समेत 3 को यूपी पुलिस ने दबोचा: 70 इंजेक्शन, ₹36 लाख बरामद

गाजियाबाद पुलिस और अपराध शाखा की टीम ने कोरोना काल में दिल्ली-एनसीआर में रेमडेसिविर (Remdesivir) इंजेक्शन की कालाबाजारी करते देश के प्रख्यात न्यूरो सर्जन मोहम्मद अल्तमश और उनके दो साथियों को गिरफ्तार किया है। हजरत निजामुद्दीन का रहने वाला डॉ. अल्तमश लंबे समय तक एम्स में अपनी सेवाएँ दे चुका है और उसके देश के कई बड़े नेताओं के साथ अच्छे संबंध हैं। पुलिस ने इसके कब्जे से 70 रेमडेसिविर इंजेक्शन के अलावा दो अक्टेमरा इंजेक्शन व 36 लाख दस हजार रुपए नकद और एक लग्जरी कार भी बरामद की है।

अपराध शाखा प्रभारी इंस्पेक्टर संजय पांडेय ने बताया कि डॉक्टर के इस गिरोह की सूचना तीन दिन पहले पुलिस को मिली थी। एक पीड़ित व्यक्ति ने बताया था कि उसने इस गिरोह से 48 हजार रुपए में एक इंजेक्शन खरीदा है। इस सूचना के बाद पुलिस टीम गिरोह के पीछे पड़ गई और कैला भट्ठा में रहने वाले डॉक्टर के साथी कुमैल अकरम को दबोच लिया। इससे पूछताछ में पता चला कि उसे इंदूवाड़ा दिल्ली का रहने वाला जाजिब इंजेक्शन उपलब्ध कराता है। इसके बाद पुलिस ने जाजिब को भी गिरफ्तार कर लिया और उसी की निशानदेही पर डॉ. अल्तमश को गिरफ्तार किया गया।

डॉक्टर ने दिखाई अपने पहुँच की धौंस

पुलिस टीम ने जब डॉ. अल्तमश को पकड़ा तो आरोपित डॉक्टर ने पहले तो अपनी ऊँची पहुँच की धौंस दिखाई। बताया कि देश के तमाम बड़े नेताओं और केंद्र सरकार के मंत्रियों से उसके संबंध हैं, लेकिन जैसे ही पुलिस ने थोड़ी कड़ाई की, आरोपित डॉक्टर की सारी हेकड़ी निकल गई। उसने न केवल गुनाह कबूल कर लिया, बल्कि अपनी गाड़ी में से इन जीवन रक्षक दवाओं की खेप भी बरामद करा दी। पुलिस ने गाड़ी समेत सारा माल कब्जे में ले लिया है।

गाजियाबाद में 40 से 50 हजार में बेचते थे इंजेक्शन

नगर कोतवाल संदीप कुमार सिंह ने बताया कि डॉक्टर अपने नाम पर एम्स से दवाओं को निकलवा कर अपने साथियों को देता था। इसके बाद आरोपित जाजिम अपने साथी कुमैल के साथ मिलकर इसे गाजियाबाद, नोएडा, फरीदाबाद और गुरुग्राम में ले जाकर बेचते थे। उन्होंने बताया कि यहाँ पर आरोपित एक इंजेक्शन 40 से 50 हजार रुपए में बेचता था। 

एक दिन में कमाए 36 लाख रुपए

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, डॉक्टर ने केवल रेमडेसिविर की कालाबाजारी कर महज एक दिन में 36 लाख 10 हजार रुपए कमाए थे। इसके अलावा करीब 50 लाख रुपए आरोपित डॉक्टर ने कुछ अन्य लोगों को भी दिए हैं। यह सारे रुपए कालाबाजारी से ही जुटाए गए हैं। पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह में एम्स के कुछ अन्य अधिकारी व कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं। पुलिस उनकी पहचान का प्रयास कर रही है। आरोपितों से पूछताछ की जा रही है।

दिल्ली: पैरोल पर बाहर आई गैंगस्टर की गर्भवती पत्नी शाइना को वसीम ने गोलियों से भूना, साली के साथ थे प्रेम संबंध

दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में मंगलवार (27 अप्रैल 2021) को दिन दहाड़े एक गर्भवती महिला की उसके पति ने गोली मारकर हत्या कर दी गई। वहीं, एक अन्य व्यक्ति को घायल कर दिया। बताया जा रहा है कि शफात नाम के गैंगस्टर की पत्नी और नौकर को गोली मारी गई है।

पुलिस ने बताया कि मृत महिला का नाम शाइना है, वो 8 महीने की गर्भवती थी। एक साल पहले ही वसीम नाम के युवक से उसकी शादी हुई थी। वसीम के शाइना की सगी बहन से भी प्रेम संबंध थे। जेल से बाहर आने के बाद वसीम ने शाइना से मुलाकात भी नहीं की, इस बात को लेकर दोनों में झगड़ा हुआ था। इसको लेकर आज वसीम ने शाइना की हत्या कर दी। पुलिस ने वसीम को गिरफ्तार कर हत्या में प्रयोग किया गया हथियार भी जब्त कर लिया है। घटना में रेहाना की भूमिका भी संदेह के घेरे में है

दरअसल, घर के पास लगे सीसीटीवी कैमरे में यह पूरी घटना कैद हो गई है। इसका वीडियो टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार राज शेखर झा ने ट्विटर पर शेयर किया है। राज शेखर झा ने बताया कि शाइना की पहली शादी शफात नाम के एक गैंगस्टर से हुई थी। एक साल पहले ही उसने वसीम से शादी की थी। वसीम शाइना का तीसरा पति है।

बताया जा रहा है कि शाइना एनडीपीएस एक्ट (ड्रग्स के मामले में) के तहत पकड़ी गई और उसे जेल भेज दिया गया था। इस दौरान वसीम की दोस्ती शाइना की बड़ी बहन के साथ हो गई और और दोनों साथ में रहने लगे थे। बेल मिलने के बाद जब शाइना जेल से छूट कर बाहर आई तो वसीम उससे मिलने नहीं आया। शाइना को वसीम और उसकी बहन के रिश्ते के बारे में भी पता लग गया था।

इसी बात पर शाइना और वसीम का झगड़ा हुआ था। मंगलवार की सुबह निजामुद्दीन इलाके में दोनों के बीच झगड़ा हो रहा था। तभी अचानक से वसीम ने पिस्टल निकाली और एक के बाद एक चार गोली कुर्सी पर बैठी अपनी गर्भवती पत्नी को मार दी। वसीम ने साथ में खड़े एक शख्स को भी एक गोली मार दी, जिससे वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा।

गोली लगने से शाइना की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं उसके नौकर को घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। शाइना दो दिन पहले ही पैरोल पर जेल से बाहर आई थी। गर्भवती होने की वजह से ही उसे बेल मिली थी।

कोरोना संकट में पैट कमिंस के बाद ब्रेट ली ने डोनेट किए ₹42 लाख, कहा- भारत मेरे लिए दूसरा घर

भारत इस वक्त कोरोना के कहर से जूझ रहा है। देश के ज्यादातर अस्पतालों में इस वक्त कोरोना की वजह से ऑक्सीजन की भारी किल्लत हो गई है। हजारों लोग ऑक्सीजन की कमी से अपनी जान गँवा रहे हैं। ऐसे में देश और विदेश के तमाम लोग मदद का हाथ बढ़ाने के लिए आगे आए हैं।

इस बीच ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज ब्रेट ली ने मंगलवार (अप्रैल 27, 2021) को भारतीय अस्पतालों में ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए 1 बिटकॉइन (करीब 42 लाख रुपए) डोनेट करने का ऐलान किया है। आईपीएल के कारण ब्रेट ली इस वक्त भारत में हैं। इससे पहले ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज पैट कमिंस में भारत की मदद के लिए 50,000 डॉलर (करीब 37 लाख रुपए) डोनेट करने का ऐलान किया था।

ब्रेट ली ने ट्विटर पर भारतीय लोगों के लिए एक भावुक मैसेज भी शेयर किया है। ब्रेट ली ने अपने ट्विटर पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “भारत हमेशा मेरे लिए दूसरे घर जैसा रहा है। यहाँ पर मुझे लोगों से जो प्यार अपने प्रोफेशनल करियर और रिटायरमेंट के बाद भी मिला उसके लिए मेरे दिल में एक स्पेशल जगह है। मैं इस महामारी से जिस तरह लोग जूझ रहे हैं, उसको देखकर काफी दुखी हूँ। मुझे इस बात की खुशी है कि मैं इस पोजिशन में हूँ कि कुछ हद तक अंतर पैदा कर सकता हूँ और इसको ही ध्यान रखते हुए, मैं एक बिटकॉइन (लगभग 42 लाख रुपए) क्रिप्टो रिलीफ में डोनेट करना चाहता हूँ, जिससे देश के अस्पतालों में ऑक्सीजन की सप्लाई में मदद हो सके। यह समय है एकजुट होने का और यह तय करने का कि हमसे जितना हो सके हम जरूरतमंदों की उतनी मदद करें। मैं सभी हेल्थ कर्मचारियों को धन्यवाद कहना चाहता हूँ जो इस मुश्किल समय में काम कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे लिखा, “मैं सभी लोगों से विनती करता हूँ कि वह अपना ध्यान रखें, घर के अंदर रहे, अपने हाथ अच्छे से धोए और तभी बाहर निकले जब बहुत जरूरी हूँ, मास्क पहनें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। शाबाश पैट कमिंस तुमने जो कल पहल की उसके लिए।”

बता दें कि भारत में कोरोना के चलते लगातार बिगड़ रहे हालातों की वजह से कई ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी आईपीएल 2021 से अपना नाम वापस ले चुके हैं। एंड्रयू टाय, एडम जाम्पा और केन रिचर्ड्सन उन ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी में शामिल हैं, जिन्होंने मौजूदा सीजन से अपना नाम वापस ले लिया है। जाम्पा और रिचर्डसन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर की तरफ से खेलते हैं। हालाँकि, इन दोनों खिलाड़ियों के टूर्नामेंट से हटने के बावजूद ग्लेन मैक्सवेल, डैन क्रिस्टियन और डैनियल सैम्स के रूप में तीन और ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर्स हैं, जो आरसीबी टीम से जुड़े रहेंगे।

खुद मास्क न पहनने के बावजूद, राजस्थान के ट्रांसजेंडर कॉन्ग्रेस पार्षद ने दो हिंदू साधुओं को पीटा: वीडियो वायरल

राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के पीलीबंगा क्षेत्र में मंगलवार (अप्रैल 27, 2021) की सुबह कॉन्ग्रेस के एक पार्षद को दो हिंदू साधुओं की पिटाई करते हुए देखा गया।

रिपोर्ट के अनुसार, आरोपित की पहचान पूनम महंत के रूप में की गई है। वह वार्ड नंबर 35 की पार्षद हैं और इस साल जनवरी में कॉन्ग्रेस के टिकट पर चुनी गई थीं। वायरल हुए वीडियो में ट्रांसजेंडर कॉन्ग्रेस पार्षद दो हिंदू संतों को थप्पड़ मारते और उन्हें एक कोने में ढकेलते हुए दिखाई दे रही है। इसके बाद उन्होंने उनसे पूछा, “कोरोना वायरस महामारी के समय आपके मास्क कहाँ हैं?” यहाँ पर यह उल्लेख करना आवश्यक है कि कॉन्ग्रेस पार्षद ने खुद न तो मास्क पहना था और न ही किसी चीज से चेहरा ढँका था।

“तुम्हारा मास्क कहाँ है?” पूछने पर एक साधु ने गर्दन में लपेटे कपड़े के टुकड़े की तरफ इशारा किया (बताने की कोशिश की कि यह उनका मास्क है)। इसके बाद उसने साधु से छड़ी छीन कर धमकी देते हुए मास्क लगाने के लिए कहा और मारने के लिए आगे बढ़ी। अपने बचाव में, उसने दावा किया है कि उसने साधुओं को केवल इसलिए रोका क्योंकि वे बिना मास्क के घूम रहे थे।

सोशल मीडिया पर आलोचना के बाद कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता ने ‘डैमेज कंट्रोल’ करने की कोशिश की। आरोपित द्वारा वायरल किए गए एक अन्य वीडियो में एक साधु को पार्षद के घर के पास जाते देखा गया। इसके बाद ‘ट्रांसजेंडर’ घर से बाहर निकलती है और साइनबोर्ड की तरफ इशारा करती है।

उसे पढ़ते हुए वह कहती है, “कृपया मास्क पहनें।” इसके बाद पूनम महंत अंदर जाती है और मास्क लेकर आती है। उसने साधु को मास्क दिया और कोरोना वायरस संकट के बीच खुद की देखभाल करने का आग्रह किया।

सोशल मीडिया पर आलोचना से बचने और खुद को एक वास्तविक राजनीतिक नेता के रूप में चित्रित करने की उसकी तमाम कोशिशों के बावजूद नेटिजन्स को उसके इस कारनामें पर यकीन नहीं हुआ।

85 वर्षीय COVID+ RSS स्वयंसेवक ने दूसरे के लिए छोड़ा हॉस्पिटल में अपना बेड: जान देकर भी कायम रखी सेवा की मिसाल

पूरा देश कोरोना महामारी के बुरे दौर से गुजर रहा है। देश में कोरोना की दूसरी लहर ने कहर बरपाया है। इस विकट और भयानक समय में दयालुता, निस्वार्थता और बलिदान की कहानियाँ लोगों के जीवन में आशा की किरण लेकर आती है।

ऐसी ही एक घटना में, एक आरएसएस सेविका, शिवानी वाखरे, ने नागपुर के 85 वर्षीय आरएसएस कार्यकर्ता नारायण दाभदकर द्वारा किए गए अनोखे बलिदान की कहानी साझा की। इसके बाद स्वयंसेवक राहुल कौशिक ने भी इस घटना को ओरिजिनल पोस्ट की तस्वीर के साथ ट्विटर पर शेयर किया।

आरएसएस कार्यकर्ता नारायण दाभदकर की यह कहानी फेसबुक पर मूल रूप से मराठी में बताई गई है। इसमें बताया गया है कि नारायण दाभदकर आरएसएस के एक कार्यकर्ता हैं जिन्होंने अपना पूरा जीवन समाज की सेवा करने में बिताया, वो कोरोना महामारी की दूसरी लहर से संक्रमित थे। जैसे ही उनका SPO2 स्तर गिरा, उनकी बेटी ने उन्हें शहर के अस्पताल में ए़डमिट कराने की कोशिश की।

घटना को बयाँ करता फेसबुक पोस्ट

काफी प्रयासों के बाद वह इंदिरा गाँधी अस्पताल में उनके लिए बेड रिजर्व कराने में कामयाब रहीं। वाखरे ने लिखा कि दाभदकर को साँस लेने में तकलीफ होने लगी, जिसके बाद उन्हें उनके पोते अस्पताल लेकर आए। अस्पताल की औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए दोनों इंतजार कर रहे थे कि तभी दाभदकर काका ने 40 की उम्र की एक महिला को अपने बच्चों के साथ रोते हुए देखा और अस्पताल के अधिकारियों से अपने पति को एडमिट के लिए बेड की भीख माँगते हुए देखा, जिसकी स्थिति काफी गंभीर थी।

घटना को बयाँ करता फेसबुक पोस्ट

बिना कुछ सोचे-समझे दाभदकर काका ने आराम से मेडिकल टीम को सूचित किया कि उनका बिस्तर महिला के पति को दे दिया जाए। उन्होंने कहा, “मैं अब 85 वर्ष का हो चुका हूँ, मैंने अपना जीवन जी लिया है। आपको मेरे बदले इस आदमी को बेड ऑफर करना चाहिए, क्योंकि उसके बच्चों को उसकी जरूरत है।”

इसके बाद उन्होंने अपने पोते से फोन करके उनकी बेटी को इस फैसले के बारे में बताने के लिए कहा। उनकी बेटी यह फैसला सुनकर हैरान रह गई, हालाँकि कुछ देर बाद वह भी इस पर सहमत हो गई। दाभदकर काका ने तुरंत सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करते हुए कहा कि वह युवक के लिए अपना बिस्तर छोड़ रहे हैं और उसने अपने पोते को वापस घर ले जाने के लिए कहा। अगले तीन दिनों तक बहादुरी से वायरस से लड़ने के बाद उनका स्वर्गवास हो गया।

हमने किसी को बेहतर जीवन देने के लिए समय और आर्थिक बलिदानों को देते हुए देखा है, लेकिन दूसरे के लिए लंबा जीवन सुनिश्चित करने के लिए अपने स्वयं के जीवन का बलिदान करना निश्चित रूप से एक ऐसा कार्य है जिसे समझ पाना नामुमकिन है। इसके साथ ही हमें अपने फ्रंटलाइन वर्कर्स, मेडिकल स्टाफ और ऐसे व्यक्तियों को धन्यवाद देना चाहिए जो महामारी के इस दौर में समाज की निस्वार्थ और अथक सेवा कर रहे हैं।

यूपी में रिटायर्ड डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ देंगे सेवा, कोविड मरीजों को फ्री में लगेगा रेमडेसिव‍िर इंजेक्‍शन: CM योगी

कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर से देश भर में अफरा-तफरी का माहौल है। इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद संयम से काम ले रहे हैं। उन्होंने कोरोना संकट से निपटने के लिए एक और बड़ी घोषणा की है। मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति पटरी पर लाने के बाद योगी सरकार अब कोरोना के मरीजों को मुफ्त में रेमडेसिविर इंजेक्शन उपलब्ध कराएगी। इससे वे जल्द से जल्द स्वस्थ हो सकेंगे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य सरकार सभी सरकारी अस्पतालों के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन की व्यवस्था कर रही है। यहाँ पर इलाज करा रहे लोगों को इंजेक्शन मुफ्त मे दिया जाएगा। हालाँकि, प्रदेश के निजी अस्पतालों को कंपनियों और बाजार से ही रेमडेसिविर खरीदना होगा।

सीएम योगी ने मंगलवार को सभी सरकारी और साथ ही राज्य के निजी अस्पतालों में सरकारी अस्पताल से रेफर होने के बाद भर्ती कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों को नि:शुल्क रेमडेसिविर इंजेक्शन देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री योगी ने यह भी कहा कि यदि किसी निजी अस्पताल में इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है और वहाँ पर उपचार करा रहे संक्रमित की जीवन रक्षा के लिए बहुत जरूरी है, तो वहाँ के जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को उस अस्पताल को रेमडेसिविर इंजेक्शन उपलब्ध कराना होगा। 

मुख्‍यमंत्री ने विभिन्‍न जिलों में जरूरत के मुताबिक रेमडेसिविर की पर्याप्‍त सप्‍लाई करवाई करवाने का आदेश दिया है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि जो लोग कोविड दवाओं की कालाबाजारी में संलिप्‍त पाए जाएँगे उनके खिलाफ NSA के तहत कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, इसी कड़ी में सीएम योगी ने डॉक्टरों, सुरक्षा कर्मियों, पैरामेडिकल स्टाफ की जिलावार सूची तैयार करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है। सूची में वही लोग शामिल होंगे, जो हाल ही में कोरोना से संक्रमित होने के बाद ठीक हुए हैं और अपनी सेवाएँ देने को इच्छुक हैं। सीएम ने आवश्यक होने पर इन लोगों को अस्पतालों में तैनात करने का निर्देश दिया है। साथ ही, उन्होंने यह भी आदेश दिया है कि राज्य के सभी जिलों में COVID अस्पतालों में बेडों की संख्या को तत्काल दोगुना करने के प्रयास किए जाएँ।

इसके अलावा यूपी में कोरोना की रोकथाम के लिए वैक्सीनेशन पर भी पूरा जोर दिया जा रहा है। यूपी सरकार ने एक मई से शुरू हो रहे टीकाकरण अभियान को लेकर तैयारियाँ तेज कर दी हैं। रविवार को सीएम ने बताया था कि दोनों स्वदेशी वैक्सीन निर्माता कंपनियों Covishield को 50 लाख और Covaxin को 50 लाख डोज का ऑर्डर दिया गया है। वहीं इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार भी उत्तर प्रदेश को वैक्सीन की डोज उपलब्ध कराएगी।

बता दें कि प्रदेश का चिकित्सा विभाग अभी हर रोज जिलों में 5 से 6 हजार वॉयल रेमडेसिविर इंजेक्शन उपलब्ध करा रहा है। इसका वितरण महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण और उत्तर प्रदेश चिकित्सा आपूर्ति निगम लिमिटेड के माध्यम से हो रहा है।

महाराष्ट्र में एक एम्बुलेंस में ठूँसकर श्मशान भेजे गए 22 कोरोना मरीजों के शव: तस्वीरें देखकर भड़के लोग, पुलिस ने छिना मोबाइल

महाराष्ट्र में कोरोना का कहर जारी है। इसी बीच बीड से एक अमानवीय तस्वीर सामने आई है। यहाँ एक एंबुलेंस में 22 शवों को एक दूसरे के ऊपर रखकर श्मशान लाया गया और फिर एक चिता पर 2 से 3 लाशों को रखकर अंतिम संस्कार किया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिला प्रशासन ने दलील है कि उसके पास एंबुलेंस नहीं है। इसलिए बीड जिले के अंबाजोगाई में स्वामी रामानंद तीर्थ अस्पताल में कोरोना से मरने वाले 22 मरीजों के शवों को रविवार (25 अप्रैल 2021) को एक ही एंबुलेंस में भरकर श्मशान में ले जाया गया।

अस्पताल प्रशासन ने कहा कि पिछले साल कोविड-19 के पहले दौर में उनके पास 5 एंबुलेंस थीं। उनमें से 3 को बाद में वापस ले लिया गया और अब अस्पताल में दो ही एंबुलेंस बची हैं, जिसमें कोरोना मरीजों को लाया और ले जाया जाता है। वहीं मेडिकल कॉलेज के डीन डॉक्टर शिवाजी शुक्रे ने कहा, ”अस्पताल प्रशासन के पास पर्याप्त एंबुलेंस नहीं होने के कारण ऐसा हुआ है।”

अस्पताल ने दी सफाई, हमने एंबुलेंस मुहैया कराने के लिए लिखा था पत्र

एक अन्य अधिकारी ने कहा, ”कभी-कभी, मृतकों के संबंधियों को ढूँढने में समय लग जाता है। लोखंडी सवारगाँव के कोविड-19 केंद्र से भी शवों को हमारे अस्पताल में भेजा जा रहा है, क्योंकि उनके पास कोल्ड स्टोरेज नहीं है।” उन्होंने कहा कि तीन और एंबुलेंस मुहैया कराने के लिए हमने 17 मार्च को जिला प्रशासन को पत्र भी लिखा था।

उन्होंने आगे कहा, ”अव्यवस्था से बचने के लिये हमने अंबाजोगाई नगर परिषद को पत्र भी लिखा था कि सुबह 8 से बजे से रात 10 बजे तक अंतिम संस्कार कराए जाएँ और अस्पताल वार्ड से ही शवों को श्मशान भेजा जाए।”

इस मामले पर बीड के जिला कलेक्टर रवींद्र जगताप ने कहा किया, “मैंने अंबाजोगाई एडिशनल कलेक्टर को मामले की जाँच करने का आदेश दिया है। हम दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।”

अंबाजोगाई नगर परिषद के मुख्य अधिकारी अशोक साबले का कहना है कि शवों को मांडवा रोड पर स्थित श्मशान (कोविड-19 मरीजों के अंतिम संस्कार के लिए तय श्मशान) में ले जाना मेडिकल कॉलेज की जिम्मेदारी है। इस बीच, भाजपा नगर पार्षद सुरेश ढास ने आरोप लगाया कि अस्पताल और स्थानीय नगर निकाय एक दूसरे पर आरोप लगाने में व्यस्त हैं। इस अमानवीय तस्वीर के सामने आने के बाद लोगों में काफी गुस्सा है।

बताया जा रहा है कि जब एक मृतक के दो रिश्तेदार एंबुलेंस की वीडियो बना रहे थे और बोरियों में बंद शवों की तस्वीरें ले रहे थे, तभी पुलिस ने उनके फोन जब्त कर लिए। उन्होंने कहा कि शवों के अंतिम संस्कार के बाद ही आपके फोन वापस किए जाएँगे। सोशल मीडिया पर इस घटना के फैलने के बाद एक टीम को बीड जिला प्रशासन द्वारा तुरंत अंबाजोगाई भेजा गया।

बता दें कि बीड जिले में कोरोना मरीजों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। अंबाजोगाई में स्थिति गंभीर है। 27 अप्रैल तक महाराष्ट्र में कोरोना के कुल 67,6647 एक्टिव मामले और कुल 65,284 मौतें हुई हैं।

‘ये आदेश हमें खुश करने के लिए दिया है’: जजों के लिए 5 स्टार होटल पर केजरीवाल सरकार की हाईकोर्ट ने लगाई क्लास

दिल्ली के 5 सितारा अशोक होटल को जजों, न्यायिक अधिकारियों और उनके परिजनों के लिए कोविड केयर के तौर पर रिजर्व करने के मामले में आज (अप्रैल 27, 2021) दिल्ली हाईकोर्ट ने अपना पक्ष रखा। कोर्ट ने दिल्ली सरकार के आदेश पर संज्ञान लेते हुए वरिष्ठ वकील राहुल मेहरा से कहा कि उन्होंने मीडिया में जो पढ़ा, वो बहुत भ्रामक है। कोर्ट ने ऐसी कोई अपील नहीं की कि उन्हें होटल में 100 बेड रिजर्व दिए जाएँ।

बार एंड बेंच के ट्वीट के अनुसार, कोर्ट ने स्पष्ट बताया कि उनकी ओर से न्यायाधीशों और अन्य न्यायिक अधिकारियों और उनके परिवारों के लिए अशोक होटल परिसर को प्राथमिकता के आधार पर कोविड-19 सुविधा में बदलने का कोई अनुरोध नहीं किया।

कोर्ट ने कहा, “हमने ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया है कि आप इसे इस होटल या उस होटल में स्थापित करें। बैठक का उद्देश्य था कि न्यायपालिका विशेष रूप से अधीनस्थ अदालत… हम पहले ही दो न्यायिक अधिकारियों को खो चुके हैं…. हमें बस ये चाहिए कि अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता हो, तो वह सुविधा दी जानी चाहिए।”

कोर्ट ने आगे कहा, “आप आदेश को बिना किसी मतलब के इधर उधर घुमा रहे हैं। हमने ऐसा कुछ नहीं कहा।” हाईकोर्ट ने पूछा, “आपको लगता है कि जब लोगों को बेड नहीं मिल रहा है, तो हम फाइव स्टार होटल में 100 बेड्स माँगेंगे।” कोर्ट ने दिल्ली सरकार से ये भी पूछा कि आखिर वो कहना क्या चाहते हैं।

कोर्ट ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा, “कौन सी सुरक्षा?…. आपने ऐसा खुद को लाभ पहुँचाने के लिए किया या फिर हमें खुश करने के लिए।” कोर्ट के मुताबिक दिल्ली सरकार ने आदेश में कहा कि कोर्ट के अनुरोध पर… जबकि कोर्ट का अनुरोध यह था ही नहीं।

अदालत ने कहा, “क्या हम ऐसी फैसिलिटी के लिए बोल सकते हैं कि हमें इतने इतने बेड दो? क्या ये पक्षपात नहीं होता।” बता दें कि इस दौरान दिल्ली सरकार की ओर पेश हुए राहुल मेहरा ने मीडिया पर हर चीज का ठीकरा फोड़ना चाहा। हालाँकि कोर्ट ने कहा कि मीडिया गलत नहीं है। आदेश गलत है। कोर्ट ने कहा, “यह सोच से परे है कि हम एक संस्थान होने के नाते ऐसी प्राथमिकता लेंगे वो भी उस समय जब लोग सड़कों पर मर रहे हैं।”

दिल्ली सरकार ने जारी किए थे आदेश

गौरतलब है कि सोमवार को मीडिया में हर जगह बताया गया था कि दिल्ली हाई कोर्ट के निवेदन के बाद सरकार ने ये फैसला लिया कि अशोका होटल दिल्ली उच्च न्यायालय के जज और अन्य न्यायिक कर्मचारियों के लिए आरक्षित होगा। इस बाबत एडीएम ने नोटिफिकेशन भी जारी किया। इसमें बताया गया था कोविड फैसिलिटी को प्राइमस हॉस्पिटल द्वारा संचालित किया जाएगा।

वहाँ जो भी बायोमेडिकल वेस्ट होंगे, उन्हें ठिकाने लगाना होटल की जिम्मेदारी होगी। होटल के कर्मचारियों को सुरक्षा के सभी उपकरण दिए जाएँगे और उनकी विशेष ट्रेनिंग भी होगी। अगर होटल में कर्मचारियों की कमी है तो हॉस्पिटल से स्वास्थ्यकर्मी बुलाए जाएँगे।

कमरों, हाउसकीपिंग, सैनिटाइजेशन, मरीजों के लिए भोजन इत्यादि की व्यवस्था होटल ही करेगा। इसमें जो भी खर्च आएगा, वो हॉस्पिटल को बताया जाएगा और हॉस्पिटल ही होटल को पूरे खर्च का वहन करेगा। हॉस्पिटल अतिरिक्त खर्चे पर अलग से डॉक्टर्स और पैरामेडिकल कर्मचारियों को वहाँ भेज सकता है। 

‘गिद्ध मत बनिए… आपसे दिल्ली नहीं सँभल रही तो हम केंद्र को कहेंगे’: केजरीवाल सरकार को HC ने फिर फटकारा

कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली में ऑक्सीजन सिलेंडरों और दवाओं की कालाबाजारी पर हाई कोर्ट ने केजरीवाल सरकार को फटकार लगाई है। हाई कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार की व्यवस्था विफल हो गई है, क्योंकि ऑक्सीजन सिलेंडरों और दवाओं का कालाबाजारी जारी है।

दिल्ली के शांति मुकुंद अस्पताल ने हाई कोर्ट में बताया कि उसे जितनी पर्याप्त ऑक्सीजन मुहैया नहीं कराया गया। अब अस्पताल के पास ऑक्सीजन नहीं है। इस पर दिल्ली सरकार ने कहा कि वह अपनी ओर से पूरी कोशिश कर रही है। शांति मुकुंद अस्पताल ने बताया कि उसे रोजाना 3 मीट्रिक टन ऑक्सीजन चाहिए, पर मिला सिर्फ 2.69 मीट्रिक टन। हाई कोर्ट ने अस्पताल से पूछा कि अब क्या स्थिति है, इस पर उन्होंने जवाब दिया कि मरीज मर रहे हैं।

यह वक्त ‘गिद्ध’ बनने का नहीं: HC

अस्पताल का जवाब सुनकर दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि आखिर सरकार कर क्या रही है, हम तो इस सरकार से तंग आ गए हैं, आखिर ऑक्सीजन कहाँ पर है। कोर्ट ने केजरीवाल सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि ऑक्सीजन रिफिलर्स के खिलाफ कार्रवाई की जाए। कोर्ट का गुस्सा सुनवाई में आए एक सप्लायर पर भी फूटा और बेहद सख्त लफ्जों में नसीहत देते हुए कहा कि यह वक्त ‘गिद्ध’ बनने का नहीं है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट में मुल्तान नाम का एक सप्लायर भी पेश हुआ। अदालत ने उससे कहा कि दिल्ली सरकार के आदेशों के मुताबिक वह अस्पतालों को ऑक्सीजन की सप्लाई कर रहे हैं क्या? कोर्ट ने इसके बाद सप्लायर को नसीहत देते हुआ कहा कि यह वक्त गिद्ध बन जाने का नहीं है। क्या यह कोई अच्छी मानवीय भावना है?

दिल्ली सरकार को HC की फटकार

देश की राजधानी में ऑक्सीजन की कमी और मरीजों को हो रही दिक्कत पर दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने कहा, “आप का सिस्टम किसी काम नहीं है। आपका सिस्टम पूरी तरह से फेल है। कालाबाजारी पर लगाम तक नहीं लगा पा रहे हैं आप।” हाई कोर्ट ने सवाल किया कि कैसे लोग इस वक्त पर भी जरूरी दवाइयों की जमाखोरी कर पा रहे हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि वे उन प्लांट को टेकओवर कर ले जो हमारे आदेशों के बावजूद सुनवाई में शामिल नहीं हुए।

हाई कोर्ट ने इनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई को नोटिस भेजे जाने की चेतावनी दी। हाई कोर्ट ने सरकार से कहा कि वह इन्हीं प्लांट के स्टाफ से उन प्लांट को चलाएँ और ऑक्सीजन का आवंटन करें। दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि सरकार तुरंत शांति मुकुंद अस्पताल को आवश्यक ऑक्सीजन मुहैया कराए।

इसके साथ ही दिल्ली हाई कोर्ट ने केजरीवाल सरकार से कहा कि यदि आप से स्थिति नहीं सँभल रही तो हमें बताइए, हम केंद्र को सँभालने के लिए कहेंगे। हम इस तरह से लोगों को मरने नहीं दे सकते। हाई कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार को ऑक्सीजन के डिस्ट्रीब्यूशन के लिए ही नहीं, ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए भी कमर कसनी चाहिए।

दिल्ली HC ने 5 कंपनियों के खिलाफ जारी किया अवमानना का नोटिस

दिल्ली हाई कोर्ट ने पाँच ऑक्सीजन रिफिलर्स कंपनियों के खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी किया है। ये कंपनियाँ हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद सुनवाई के दौरान मौजूद नहीं थी। कोर्ट ने एक सप्लायर तरुण सेठ से कहा कि हम आपको अभी कस्टडी में ले लेंगे। आप अस्पतालों को ऑक्सीजन सप्लाई क्यों नहीं कर रहे हैं? आप हमें बेवकूफ समझते है? 

बता दें कि सुनवाई के दौरान सप्लायर तरुण सेठ ने दावा किया कि उन्हें सिर्फ 4 अस्पतालों को ऑक्सीजन सप्लाई के लिए कहा गया है। लेकिन कोर्ट ने इस झूठ को पकड़ लिया। जिसके बाद दिल्ली सरकार को सेठ एयर को टेकओवर करने के निर्देश दिए।

रेमडेसिविर को लेकर बिफरा हाई कोर्ट

केजरीवाल सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में कहा कि उनके पास रेमडेसिविर की सीमित सप्लाई है। जिस पर कोर्ट ने पूछा कि क्या सप्लाई की समस्या पर केंद्रित पोर्टल बनाया जा सकता है जिससे इस समस्या से निपटने में मदद मिले? कोर्ट ने कहा कि घर पर रह रहे मरीजों को रेमडेसिविर ना देने के दिल्ली सरकार का आदेश गलत है, इससे आप पीड़ित की जान ले रहे हैं। अगर आपके अस्पताल में बेड उपलब्ध होते तो अलग बात होती, लेकिन आपके पास नहीं है तो फिर आप ऐसा कैसे कह सकते हैं कि आप अस्पताल में एडमिट नहीं हैं तो आपको रेमडेसिविर नहीं दी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि यह काफी मुश्किल समय है। लोग घर पर ही खुद अपना इलाज कर रहे हैं तो सरकार को भी सहयोग करना चाहिए।