‘प्रख्यात बुद्धिजीवी’ और पीआईएल एक्टिविस्ट वकील प्रशांत भूषण ने कानूनी गतिविधियों में कई असफलताओं के मिलने के बाद अब अपनी मौजूदगी दिखाने के लिए नया पैंतरा आजमाया है। रोहिंग्या मामले में प्रशांत भूषण द्वारा दायर की गई याचिका में उनके पक्ष में फैसला न आने के बाद एंटी-मास्क को लेकर ट्वीट किया।
ऐसे समय में जब डॉक्टर और हेल्थकेयर विशेषज्ञ लोगों को कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर के कारण मास्क लगाने की सलाह दे रहे हैं, भूषण ने मास्क के उपयोग के खिलाफ षड्यंत्रकारी सिद्धांतों का सहारा लिया है।
प्रशांत भूषण ने मास्क विरोधी षड्यंत्र फैलाए
उनकी साजिश की वजह से बोर्ड की आलोचना हुई। भूषण की इस बयानबाजी से दुखी डॉ. अमित थडलानी ने उनसे पूछा कि क्या उन्हें पता है कि परिकल्पना (hypothesis) का क्या मतलब है। एक परिकल्पना एक प्रस्ताव है जो एक अध्ययन या प्रयोग का विषय है जो अभी तक सच नहीं पाया गया है।
Do you understand the meaning of the word “hypothesis”, nutcase?
This man has no credibility to he a lawyer anymore. He has completely lost it after getting repeatedly thrashed by public and courts ? https://t.co/kahCVNpRAf
Dozens of studies have shown masks to be significantly protective against #Covid . And he picks up one which is a hypothesis. Don’t do this Sir. https://t.co/GqyWwfQa12
Disappointing. Anti vaxer. Now anti masker also. You can cherry pick any data to suit your beliefs. There are 100 studies which tell you otherwise. And an overworked exhausted medical community which is begging you to wear masks. This is irresponsible. https://t.co/0HHhKDEzrt
अपने प्रोपेगेंडा ट्वीट के लिए सोशल मीडिया पर कई लोगों द्वारा लताड़े जाने पर प्रशांत भूषण ने माफी माँगने के बजाय बेशर्मी का उदाहरण दिया।
Without reading this very detailed meta study on the efficacy of masks,you continue to peddle establishment views on Covid,masks,Lockdowns&Vaccine.There is clear evidence on the many harmful effects of Lockdowns. The jury is still out on untested Vaccines under emergency approval https://t.co/NbxPjGJBsO
इससे पहले फरवरी में, पीआईएल कार्यकर्ता ने दावा किया था कि कोविद -19 देश में स्वाभाविक रूप से खत्म हो रहा था और उनका कहना था कि सरकार टीकों में निवेश करने से परहेज करे।
पश्चिम बंगाल में चौथे चरण के मतदान से पहले तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की नेता सुजाता मंडल खान ने दलितों को लेकर आपत्तिजनक बातें की है। इसका वीडियो भाजपा अनुसूचित मोर्चा ने शेयर किया है।
न्यूज18 बांग्ला से चर्चा करते हुए सुजाता खान ने कहा कि भले ही ममता बनर्जी ने अनुसूचित जातियों (SC) के लिए बहुत कुछ किया हो, लेकिन फिर भी उनको कमी बनी ही रहती है। खान ने कहा, “एक कहावत है कि कुछ स्वभाव से भिखारी होते हैं तो कुछ परिस्थितियों के कारण। अनुसूचित जाति के लोग स्वभाव से भिखारी होते हैं।”
खान ने दलित समुदाय को कृतघ्न बताते हुए कहा, “ममता बनर्जी ने उनके लिए काफी कुछ किया लेकिन उन्होंने पैसे के लिए खुद को बीजेपी के हाथों बेच दिया। और अब वे हम पर अत्याचार कर रहे हैं।”
Sujata Mandal of Trinamool, close to Mamata Banerjee, blatantly accuses the Scheduled Caste community of Bengal as “beggars by nature”.
Can the people of Bengal give TMC a befitting reply and throw them out of power? Dalit Samaaj (Rajbanshi, Matuas, Namasudras) deserves better. pic.twitter.com/lssFDk8PVL
— BJP SCMORCHA भाजपा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति मोर्चा (@BJPSCMorcha) April 9, 2021
बीजेपी ने इस बयान को लेकर टीएमसी की आलोचना की है। पार्टी की प्रदेश ईकाई ने ट्वीट कर कहा है, “ममता बनर्जी की करीबी तृणमूल नेता सुजाता मंडल ने अनुसूचित जाति के लोगों को ‘स्वभाव से भिखारी’ बताया है। क्या बंगाल के लोग टीएमसी को करारा जवाब देकर उन्हें सत्ता से बाहर करेंगे। दलित समाज (राजबंशी, मातुआ, नमशुद्र) बेहतर के हकदार हैं।”
ग्रामीणों पर सुजाता और उनके समर्थकों का हमला
हाल ही में सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें टीएमसी लीडर सुजाता मंडल खान और उनके समर्थकों पर गाँव वालों के घर में घुसकर उनके साथ मारपीट का आरोप लगाया गया था। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया था कि टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने एक ग्रामीण का हाथ तोड़ दिया। इसके बाद ग्रामीण भी बड़ी संख्या में टीएमसी नेताओं के विरूद्ध लामबंद हो गए और उन्हें टीएमसी के सदस्यों को खदेड़ दिया। इसे कई मीडिया पोर्टल्स ने सुजाता मंडल खान पर भाजपा सदस्यों के हमले के तौर पर प्रचारित किया था।
कुछ दिनों पहले दिल्ली के ओखला से आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान द्वारा ईशनिंदा के आरोप में डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती का सिर काटने के भड़काऊ बयान का असर यूपी के बरेली में देखने को मिला है।
यहाँ शुक्रवार की नमाज के बाद लाखों कट्टरपंथी मुसलमान इकट्ठा हुए और यति नरसिंहानंद सरस्वती का सिर कलम करने की माँग की। बता दें कि डासना देवी के महंत ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पैगम्बर मुहम्मद के बारे में टिप्पणी की थी। इसके बाद आम आदमी पार्टी के विधायक ने यह बयान दिया था।
इसी मामले को लेकर 9 अप्रैल को जुमे की नमाज के बाद बरेली के इस्लामिया ग्राउंड में बड़ी संख्या में मुसलमान इकट्ठा हुए और यति नरसिंहानंद के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। डासना देवी मंदिर के महंत का सिर काटने को लेकर मौलवियों-इमामों ने तकरीरें की।
Slogans asking for beheading of @NarsinghVani raised in a protest in Bareilly, UP
This was organized by mosques after Friday prayers
गौरतलब है कि बीते दिनों यति नरसिंहानंद सरस्वती ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए इस्लाम और पैगंबर मुहम्मद की मीमांसा करने की बात कही थी। इसके साथ ही उन्होंने हिंदुओं से पैगंबर मुहम्मद की विशेषताओं को उजागर करने में निडर बनने की अपील की थी।
स्वामी नरसिंहानंद ने कहा था, “अगर इस्लाम की वास्तविकता, जिसके बारे में मौलाना कहते हैं कि अगर मुहम्मद के बारे में बोलते हैं, तो हम तुम्हारा सिर काट देंगे। हिंदुओं को इस डर से बाहर निकलना चाहिए। हम हिंदू हैं। अगर हम भगवान राम, और अन्य हिंदू देवताओं की मीमांसा कर सकते हैं, तो मुहम्मद हमारे लिए कुछ भी नहीं है। हम मुहम्मद के बारे में और सच क्यों नहीं बोल सकते थे?”
इसी मामले में आप विधायक अमानतुल्लाह खान ने दिल्ली पुलिस में यति नरसिंहानंद सरस्वती के खिलाफ शिकायत की थी। वहीं, दिल्ली पुलिस ने भी स्वत: संज्ञान लेते हुए धार्मिक भावनाएँ आहत करने के मामले में महंत के खिलाफ केस दर्ज किया था।
इसके बाद 4 अप्रैल को दिल्ली पुलिस ने अमानतुल्लाह खान के खिलाफ भी यति नरसिंहानंद सरस्वती को धमकी देने के लिए एफआईआर दर्ज की थी।
पश्चिम बंगाल चुनाव जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, अनुमानों और प्रश्नों का वातावरण गझिन होता जा रहा है। कौन जीत रहा है? किस दल को कितनी सीटें मिलेंगी? क्या भारतीय जनता पार्टी (BJP) भारी बहुमत से सरकार बनाएगी? क्या ममता बनर्जी के लिए अपना गढ़ बचाना असंभव हो गया है?
चुनाव के मौसम में नेता और विशेषज्ञ सार्वजनिक मंचों पर ऐसे प्रश्नों से बचते हैं। सामान्यतया दलों के लिए काम करने वाले प्रबंधक भी नहीं चाहते कि पत्रकार या कोई और उनसे इस तरह के प्रश्न पूछने जिसके उत्तर में उन्हें कुछ ऐसा कहना पड़े जो आने वाले परिणामों से भिन्न हो।
पर ऐसे माहौल में भी एक व्यक्ति इस तरह के प्रश्न का उत्तर देने के लिए जगह-जगह न केवल तैयार दिखता है, बल्कि कई बार लगता है जैसे वे ख़ुद चाहते हैं कि उनसे ऐसे प्रश्न पूछे जाएँ। ये व्यक्ति हैं प्रशांत किशोर, हाल के वर्षों में भारतीय चुनावों में चुनावी प्रबंधकों की लम्बी होती जा रही सूची में शीर्षस्थ प्रबंधक।
बंगाल चुनाव के दूसरे चरण की वोटिंग के बाद ही इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक ख़ासे लम्बे साक्षात्कार में प्रशांत अपने तमाम फ़ैसलों और चुनावी रणनीतियों के बारे में विस्तार से बोलते और उनका बचाव करते दिखे। प्रश्न यह उठता है कि बहुचर्चित बंगाल विधानसभा चुनाव के आठ चरणों में से मात्र दो चरणों की वोटिंग के बाद ही ऐसा साक्षात्कार देने की जल्दी क्यों आन पड़ी थी? एक ऐसा साक्षात्कार जिसमें प्रशांत बहुत छोटी-छोटी रणनीतियों पर भी विस्तार से बोले। यहाँ तक कि दशकों से ‘दीदी’ के नाम से प्रसिद्ध ममता बनर्जी को इन चुनावों में बंगाल की ‘बेटी’ के रूप में उन्होंने क्यों प्रस्तुत किया, इस पर भी विस्तृत चर्चा की।
कौन प्रबंधक अपनी हर छोटी-बड़ी रणनीति की चर्चा इस तरह से सार्वजनिक तौर पर करता है? जिस प्रशांत किशोर की रणनीतियों के बारे में जानने के लिए लोग उत्सुक रहते हैं, जो प्रशांत किशोर निज को एक पहेली की तरह प्रस्तुत करते रहे, वही प्रशांत किशोर अचानक चुनावी प्रबंधन के अपने कैरियर के सबसे महत्वपूर्ण चुनाव की एक-एक रणनीति पर विस्तार से चर्चा करते हुए क्यों बरामद हुए? अचानक क्या हुआ कि उन्हें ऐसा करना पड़ा?
उनके इस साक्षात्कार के बाद राजनीतिक हलकों और सोशल मीडिया पर यह प्रश्न उठा कि क्या प्रशांत किशोर अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार कर रहे कि बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी हार रही हैं? यहाँ बात तृणमूल कॉन्ग्रेस के संभावित हार की भी नहीं हो रही थी, बल्कि ममता बनर्जी के हार की हो रही थी क्योंकि प्रशांत किशोर ने अपनी ढाई साल की मेहनत में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) को आगे न रखकर हमेशा ममता बनर्जी को ही आगे रखा था। एक प्रश्न यह भी उठा कि क्या प्रशांत किशोर अपने इस साक्षात्कार के माध्यम से किसी और को कोई संदेश देना चाहते हैं? यदि ऐसा है तो वे किसे संदेश देना चाहते हैं और वह संदेश क्या हो सकता है?
पश्चिम बंगाल चुनावों में वोटिंग की शुरुआत से पहले ही पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह प्रशांत किशोर को आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अपना प्रबंधक नियुक्त कर चुके हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि बंगाल चुनावों के संभावित परिणामों की चर्चा से होने वाले नुक़सान को रोकने के लिए प्रशांत किशोर ऐसे साक्षात्कार दे रहे हैं? उन्हें क्या डर है कि बंगाल चुनावों के परिणामों का असर उनके पंजाब असायनमेंट पर होगा?
इन प्रश्नों को तब और बल मिला जब प्रशांत किशोर ने अपने मित्र पत्रकारों के साथ क्लबहाउस पर बातचीत की, जिसमें उन्होंने उन मुद्दों पर तो चर्चा की ही जिनके बारे में वे इंडियन इक्स्प्रेस वाले साक्षात्कार में विस्तार से बोल चुके थे, नए विषयों पर भी विस्तृत चर्चा की जिनके बारे में उस साक्षात्कार में चर्चा नहीं हुई थी। प्रश्न पूछने वाले पत्रकारों में लगभग वे सभी पत्रकार थे जिन्होंने लम्बे समय से भाजपा और नरेंद्र मोदी को कोस कर अपनी पहचान बनाई है। क्लबहाउस के इस रूम में उपस्थित लोगों और उनके द्वारा किए गए प्रश्नों को सुन कर ऐसा लगा कि क्लबहाउस का यह साक्षात्कार एक विस्तृत योजना का परिणाम है।
इसमें प्रशांत किशोर और पत्रकारों के बीच की चर्चा की कई रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। हालाँकि इस चर्चा में प्रशांत किशोर ने कई बार भाजपा की लहर, नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और बंगाल चुनावों के संभावित परिणामों को स्वीकार किया पर उन्होंने बहादुरी का एक मुखौटा भी चढ़ाए रखा। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बंगाल के मतदाताओं के बीच नरेंद्र मोदी की बड़ी लोकप्रियता को स्वीकार तो किया पर उसके साथ ही उन्होंने तुरंत यह कहा कि नरेंद्र मोदी और ममता बनर्जी की लोकप्रियता एक समान है।
क्लबहाउस की इस चर्चा के बाद एक प्रश्न और उठा कि उन्होंने ऐसी चर्चा या अपने संदेश के लिए क्लबहाउस को ही क्यों चुना? इस प्रश्न का एक उत्तर इस बात में जान पड़ता है कि क्लबहाउस पर ख़ालिस्तानी प्रोपेगेंडा के वाहक भारी मात्रा में हैं और सम्भवतः प्रशांत अपने पंजाब असयानमेंट के लिए समर्थकों के एक झुंड की तलाश में यहाँ पहुँचे हों। इसका एक संभावित उत्तर यह भी है कि बंगाल चुनावों के परिणाम को लेकर कोई संदेश बंगाल से पंजाब गया हो, जिसके कारण प्रशांत के ऊपर किसी तरह का दबाव बना हो।
यह बात स्थापित राजनीतिक मान्यताओं का हिस्सा है कि अलग-अलग दल और विचारधाराओं के वाहक होने के बावजूद नेता एक-दूसरे के साथ अपरोक्ष चैनल के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान करते रहते हैं और ऐसे ही किसी चैनल के माध्यम से बंगाल से चलकर कोई संदेश पंजाब पहुँचा हो जिसमें प्रशांत किशोर के लिए किसी तरह की मुश्किल खड़े करने की क्षमता है।
ख़ैर, कारण चाहे जो हों, आने वाला समय बड़ा राजनीतिक दृष्टिकोण से बहुत रोचक जान पड़ता है और बंगाल चुनावों के परिणाम इसे और रोचक बनाने वाले हैं।
पश्चिम बंगाल में शनिवार (अप्रैल 10, 2021) को विधानसभा चुनाव के चौथे चरण में 44 सीटों पर मतदान हो रहे हैं। मतदान के बीच राज्य में कई जगह से हिंसा की खबरें आई हैं। कूच बिहार में फायरिंग में 4 लोग मारे गए हैं। कूच बिहार के सीतलकुची में वोटिंग करने के लिए मतदान केंद्र पर लाइन में खड़े एक 18 साल के युवक की हत्या कर दी गई है। मृतक की पहचान आनंद बर्मन के तौर पर हुई है।
कूच बिहार जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) देबाशीष धर ने कहा, “मृतक आनंद बर्मन, 18 वर्ष का हो चुका था। वह पहली बार मतदान करने आया था। हमने मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है।” बीजेपी का दावा है कि बर्मन पार्टी समर्थक था, जबकि टीएमसी ने उसे गोली मारने का आरोप भाजपा समर्थकों पर लगाया है। यह भी आरोप है कि CISF ने फायरिंग की जिसमें लोगों को गोली लगी। फिलहाल मौके पर भारी फोर्स तैनात है।
जानकारी के अनुसार, सीतलकुची स्थित बूथ संख्या 285 पर यह घटना हुई है। बीजेपी की ओर से आरोप लगाया गया है कि आनंद जब वोट देने के लिए कतार में खड़ा था, उसी समय टीएमसी के गुंडों ने उस पर बंदूक और बम से हमला किया। चुनाव आयोग ने इस मामले पर संज्ञान लिया है और प्रशासन से एक्शन रिपोर्ट माँगी है।
एक चुनाव अधिकारी ने कहा, “हमें जानकारी मिली है कि कूच बिहार जिले के सीतलकुची में एक मतदान केंद्र के बाहर एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। हमने जल्द से जल्द रिपोर्ट माँगी है और स्थिति के बारे में जानने के लिए रिटर्निंग अधिकारी को बुलाया गया है।”
बीजेपी उम्मीदवार लॉकेट चटर्जी की गाड़ी पर हमला
वहीं हुगली में भाजपा नेता और चुंचुरा से प्रत्याशी लॉकेट चटर्जी के काफिले पर हमला हुआ। जब वे इलाके से गुजर रही थी तब भीड़ में किसी ने पत्थर फेंका जिससे उनकी कार का शीशा टूट गया। इसी तरह बंगाल चुनाव को कवर कर रही मीडिया की गाड़ियों पर भी हमला हुआ है। इस हमले से कई गाड़ियों के शीशे टूट गए। लॉकेट चटर्जी के हाथ में चोट लगी है। हमले का आरोप टीएमसी समर्थकों पर लगा है। घटना के बाद से चुंचुरा के 66 नंबर बूथ के आसपास तनाव है।
इस घटना के बाद चटर्जी ने घटनास्थल से ही चुनाव आयोग को फोन कर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने कहा, “मेरा गाड़ी तोड़ दिया गया है। लोगों ने पूरी टीम लेकर पत्रकारों से भी मारपीट किया है। हमारे बहुत सारे लोग वहाँ फँसे हुए हैं। सीआरपीएफ का फोर्स पर्याप्त नहीं है। मीडिया के लोग भी वहाँ फँसे हुए हैं। मुझे भी चोटें आई हैं। तुरंत अतिरिक्त फोर्स भेजिए। ये माइनॉरिटी लोग बहुत मारे हैं मीडिया वालों को भी।”
#WATCH West Bengal: BJP leader Locket Chatterjee speaks to an Election Commission official over phone, says that she was attacked by locals at polling booth no.66 in Hooghly. She also says that journalists have been attacked too and demands that additional forces be sent here. pic.twitter.com/rrgGpFxfHT
लॉकेट चटर्जी हुगली में रह कर ही बूथों का दौरा कर रही थीं। वे टीएमसी समर्थकों द्वारा वोटिंग में घपले की खबर पाकर बूथ नंबर 66 के पास पहुँचीं और वहाँ के हालात का जायजा लिया। उनके बाहर आते ही कथित स्थानीय लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। चटर्जी का कहना है कि उन्होंने टीएमसी की महिला कार्यकर्ताओं को फर्जी वोटिंग करते पकड़ लिया था, इसलिए उन पर हमला हुआ है।
पश्चिम बंगाल राज्य में चल रहे विधानसभा चुनावों के बीच, शनिवार (अप्रैल 10, 2021) को लुटियंस के पत्रकारों और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (PK) के बीच बातचीत का ऑडियो क्लिप ट्विटर पर वायरल है। यह बातचीत एक्सक्लूसिव ऑडियो मैसेजिंग ऐप क्लब हाउस पर हुई।
साक्षी जोशी, आरफ़ा खानम शेरवानी, रोहिणी सिंह, स्वाति चतुर्वेदी, रवीश कुमार और अन्य कई लुटियन पत्रकार समूह इस चैट का हिस्सा थे। इन्हें इस बात का बिल्कुल भी आभास नहीं था कि इनकी बातचीत सार्वजनिक तौर पर सुनी जा रही है। इस बातचीत के दौरान ‘स्वतंत्र पत्रकार’ साक्षी जोशी ने ममता बनर्जी की शौचालय की दिनचर्या के बारे में उनके चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर से पूछताछ की। सत्ता के लिए सच बोलने का दावा करने वाली स्वतंत्र पत्रकार साक्षी जोशी ने ममता बनर्जी के कंट्रोल करने की क्षमता पर आश्चर्य जताया।
— Tajinder Pal Singh Bagga (@TajinderBagga) April 10, 2021
उसने पूछा, “मैं एक महिला होने के नाते काफी हैरान हूँ कि ममता बनर्जी हेलीकॉप्टर से उतरती हैं, स्टेज पर जाती हैं। वो वहाँ पर कम से कम 1 घंटा बोलती हैं, फिर हेलीकॉप्टर पर चढ़ जाती हैं और दूसरी जगह पर उतरती हैं। वो वॉशरूम कब जाती हैं? यह मेरा सवाल है।”
लुटियंस पत्रकार ने आगे कहा, “मैं सोच रही थी कि हमें (पत्रकारों को) अधिक गर्मी और अधिक मात्रा में पानी के सेवन के कारण बार-बार (वॉशरूम) जाना पड़ता है। हमें कहीं न कहीं जाना होता है। मैंने कभी उन्हें कोई ब्रेक लेते नहीं देखा।” जोशी के सवाल पर शर्मिंदा प्रशांत किशोर ने मजाकिया लहजे में कहा, “क्या मुझसे इस सवाल का जवाब देने की उम्मीद की जा रही है?”
साक्षी जोशी ने आगे कहा, “उनका (बाथरूम) शेड्यूल क्या है? इसे किस तरह से बनाया गया है? मेरा मतलब है कि वह क्या करती हैं। वह जहाँ भी जाती है, मैंने उन्हें कभी किसी और के घर में ठहरते या ब्रेक लेते हुए नहीं देखा है। वह सीधे कार्यक्रम स्थल पर आती है और फिर चली जाती है।” किशोर ने हँसते हुए इस सवाल को टाल दिया।
बता दें कि पश्चिम बंगाल में आज (अप्रैल 10, 2021) चौथे चरण के तहत 44 विधानसभा सीटों के लिए वोट डाले जा रहे हैं। इसके तहत दक्षिण बंगाल के हावड़ा (भाग दो), दक्षिण 24 परगना (भाग तीन), हुगली (भाग दो) और उत्तर बंगाल के अलीपुरद्वार तथा कूच बिहार में 1,15,81,022 मतदाता 373 उम्मीदवारों के भविष्य का फैसला करेंगे।
आज होने वाले मतदान में हावड़ा की नौ, दक्षिण 24 परगना की 11, अलीपुरद्वार की पाँच, कूच बिहार की नौ और हुगली की 10 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं। जिन प्रमुख उम्मीदवारों की किस्मत इस चरण में दाँव पर लगी है उनमें बंगाल रणजी के पूर्व कप्तान मनोज तिवारी (शिबपुर सीट, तृणमूल कॉन्ग्रेस) और राज्य के शिक्षा मंत्री और बेहला पश्चिम सीट से वर्तमान विधायक पार्थ चटर्जी, टॉलीगंज सीट पर भाजपा के केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो, बेहला पूर्व सीट पर भाजपा की उम्मीदवार पायल सरकार, दोमजुर सीट पर हाल ही में भाजपा का दामन थामने वाले पूर्व वन मंत्री राजीव बनर्जी शामिल हैं। इसके अलावा हुगली के चिन्सुराह सीट पर भाजपा सांसद और अभिनेत्री लॉकेट चटर्जी की किस्मत भी इस चरण में ईवीएम में लॉक होगी।
पश्चिम बंगाल में छापा मारने गए बिहार के किशनगंज थानाध्यक्ष की पीट-पीटकर हत्या करने का मामला सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, थानाध्यक्ष अश्विनी कुमार को पता चला था कि अपराधियों का कनेक्शन सीमावर्ती पश्चिम बंगाल के क्षेत्र से जुड़ा है।
इसके बाद उन्होंने पश्चिम बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर जिले के पांजीपाड़ा थाने को सूचना देने के बाद वहाँ छापेमारी शुरू की। इसी दौरान उनकी हत्या कर दी गई है। आरोप है कि पश्चिम बंगाल की पुलिस ने सूचना के बावजूद बिहार पुलिस की टीम को कोई सहयोग नहीं किया।
घटना के बाद से पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है। सूचना मिलते ही वरीय पुलिस अधिकारी पूर्णिया आईजी सुरेश चौधरी और एसपी कुमार आशुतोष मौके पर पहुँचे। आईजी सुरेश चौधरी ने बताया कि चोरी के एक मामले में पुलिस छापेमारी करने सीमावर्ती पांजीपड़ा (पश्चिम बंगाल) गई थी। उन्होंने बताया कि भीड़ द्वारा घेरकर थानाध्यक्ष की हत्या कर दी गई।
WB: SHO of Kishanganj Police Station in Bihar, Ashwini Kumar beaten to death by a crowd in a village in Goalpokhar police station area of Uttar Dinajpur. IG Purnia Range says, “He had come for a raid in connection with a bike theft. Islampur SP with us. We’ll raid & make arrests” pic.twitter.com/lwUEodPDWr
बताया जा रहा है कि किशनगंज के थानेदार की हत्या शनिवार (9 अप्रैल 2021) की सुबह करीब 4 बजे की गई थी। छापेमारी करने गई टीम पर भीड़ ने अचानक हमला बोल दिया। इस दौरान बाकी पुलिसकर्मी तो बच निकले, लेकिन अंधेरे में थानाध्यक्ष अश्विनी अपराधियों के हाथ लग गए। अपराधियों ने पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी। उनके शव को पोस्टमाॅर्टम के लिए पश्चिम बंगाल के ही इस्लामपुर ले जाया गया है।
इस मामले को लेकर भाजपा के पाटलिपुत्र सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव ने पश्चिम बंगाल सरकार और वहाँ के प्रशासन पर हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि यह घटना बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति को उजागर करने के लिए काफी है। वहाँ पूरी तरह से गुंडों का राज है।
पश्चिम बंगाल में चौथे चरण के मतदान के बीच कुछ ऑडियो क्लिप वायरल हुए हैं। ये क्लिप लुटियंस मीडिया और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (PK) के बीच बातचीत के हैं। प्रशांत किशोर इन चुनावों में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के लिए रणनीति तैयार कर रहे हैं और कई दिग्गज नेता उनका विरोध करते हुए पार्टी छोड़ चुके हैं।
मैसेजिंग एप क्लबहाउस की इस बातचीत में लुटियंस मीडिया के कई चेहरे शामिल हैं। मसलन, रवीश कुमार, साक्षी जोशी, आरफा खानम शेरवानी, रोहिणी सिंह, स्वाति चतुर्वेदी वगैरह। यानी मोदी और बीजेपी से घृणा करने वाला पूरा कुनबा इसमें शामिल है।
इस बातचीत में PK बता रहे हैं कि तृणमूल कॉन्ग्रेस के आंतरिक सर्वेक्षणों में भाजपा जीत रही है। प्रशांत किशोर से पूछा जाता है कि मोदी पश्चिम बंगाल में इतने लोकप्रिय क्यों हैं और क्या उनके खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी नहीं है?
प्रशांत किशोर ने इसका जवाब देते हुए कहा, “मोदी के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी नहीं है। मोदी का पूरे देश में एक कल्ट बन गया है। 10 से 25 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिनको मोदी में भगवान दिखता है। चाहे वो सही दिखे या गलत, वो एक अलग बहस का मुद्दा हो सकता है। यहाँ का हिंदी भाषी मोदी का कोर बेस सपोर्ट है और मोदी काफी पॉपुलर हैं। अगर आप इधर सर्वे कर कर रहे हैं तो मोदी-ममता समान रूप से पॉपुलर हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “यहाँ पर मोदी इसलिए भी पॉपुलर है, क्योंकि बंगाल ने बीजेपी का स्वाद अभी चखा नहीं, तो वो एक फैक्टर है कि जो लोगों ने 30-35 सालों से नहीं देखा उसे ऐसा लग रहा है कि बीजेपी एक ऐसा चीज है, जो कुछ ऐसा कर देगी, जो हमलोगों को पहले नहीं मिला है। लोग उस लड्डू को टेस्ट करना चाहते हैं। मोदी का भाषण सुनने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। मोदी पॉपुलर है। इसमें कोई दोमत नहीं है। तृणमूल के खिलाफ गुस्सा है। वो एक फैक्टर है। ध्रुवीकरण एक फैक्टर है और मोदी की पॉपुलैरिटी भी एक फैक्टर है। ये तीनों चीज बेसिक चीजें हैं।”
आगे प्रशांत किशोर ने कहा, “अगर वोट है तो मोदी के नाम पर है। वोट है तो हिंदू होने के नाम पर। ध्रुवीकरण, मोदी, हिंदीभाषी, ये फैक्टर्स हैं। शुभेंदु चले गए, प्रशांत आ गए, इसका कोई फैक्टर नहीं है। वो यहाँ मुद्दा है ही नहीं। मोदी यहाँ पॉपुलर है। हिंदीभाषियों का एक करोड़ से ज्यादा वोट है। दलित यहाँ पर 27% है और वो पूरी तरह से बीजेपी के साथ खड़ा है।”
In a public chat on Club House, Mamata Banerjee’s election strategist concedes that even in TMC’s internal surveys, BJP is winning.
The vote is for Modi, polarisation is a reality, the SCs (27% of WB’s population), Matuas are all voting for the BJP!
वहीं मतुआ समुदाय के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उनका सारा वोट बीजेपी को जा रहा है। उनका मानना था कि मतुआ का 75% वोट बीजेपी को जाएगा, जबकि 25% वोट तृणमूल कॉन्ग्रेस को। उन्होंने माना कि उन लोगों के सर्वे में भी यही बात सामने आ रही है कि बीजेपी की सरकार बनेगी। ऐसा इसलिए कि बीजेपी को वोट करने वालों के अलावा लेफ्ट के लोगों का भी मानना है कि बीजेपी की सरकार बन रही है।
उन्होंने कहा पहले माना जाता था कि बीजेपी के ग्राउंड पर वर्कर नहीं है। लेकिन ऐसा नहीं है, बीजेपी के ग्राउंड पर बहुत वर्कर हैं। पश्चिम बंगाल के एक-दो जिलों को छोड़ दें तो ऐसा कोई भी क्षेत्र नहीं है, जहाँ बीजेपी का मजबूत कैडर नहीं है।
Another candid admission by Mamata Banerjee’s election strategist – all that the Left, Congress and TMC ecosystem have done in the last 20 years is Muslim appeasement.
Implication? It has resulted to resentment on ground. The speakers had not realised that the chat was public! pic.twitter.com/2kyLsQXYyi
ममता बनर्जी के चुनावी रणनीतिकार यह बात भी कह रहे थे कि वाम दलों, कॉन्ग्रेस और टीएमसी ने हालात के हिसाब से पिछले 20 सालों में मुस्लिम तुष्टिकरण किया है। उन्होंने कहा कि इसे लेकर लोगों में बहुत ही गुस्सा है।
प्रशांत किशोर ने वायरल हो रहे इस चैट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वो इस बात से खुश हैं कि बीजेपी उनके क्लब हाउस चैट को अपने नेताओं के शब्दों से अधिक गंभीरता से ले रही है।
Prashant Kishor also knows that Modi Ji is the best and a ‘sonar Bangla’ will be made under his leadership. But to fool the people he got associated with TMC: BJP leader Locket Chatterjee, in Hoogly pic.twitter.com/YlVuFFNSoT
वहीं हुगली से भाजपा नेता लॉकेट चटर्जी ने कहा, “प्रशांत किशोर भी जानते हैं कि पीएम मोदी सर्वश्रेष्ठ हैं और उनके नेतृत्व में ‘सोनार बांग्ला’ बनाई जाएगी। लेकिन लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए वह टीएमसी से जुड़े।”
अपने शांत स्वभाव के लिए मशहूर टीम इंडिया की दीवार पूर्व क्रिकेट दिग्गज राहुल द्रविड़ ने क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान प्लेटफॉर्म CRED के विज्ञापन में अपने नए अंदाज से इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है। विज्ञापन में एक व्यक्ति CRED के ऑफर को घटिया बताते हुए कहता है, “यह वैसा ही है जैसे कि राहुल द्रविड़ को गुस्सा आना।”
इसके बाद कैमरा राहुल द्रविड़ की ओर घूमता है, जो कि ट्रैफिक जाम में फँसे होते हैं। वह जाम के कारण गुस्से में चीखते-चिल्लाते दिखाई देते हैं। इतना ही नहीं वह अपने बैट से बगल में खड़ी गाड़ियों में तोड़-फोड़ भी करते हैं। विज्ञापन में द्रविड़ शुरू में एक जेंटलमैन की तरह रहते हैं, लेकिन ट्रैफिक में फँसने के कारण उनका धैर्य जवाब दे जाता है और वह लड़ाई पर उतारू हो जाते हैं।
बगल में खड़ी कार का मिरर तोड़ते हुए वह चिल्लाते हैं, “इंदिरानगर का गुंडा हूँ मैं।”
राहुल के इस अवतार ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस पर कई क्रिकेटरों समेत लोगों ने प्रतिक्रियाएँ दी हैं। द्रविड़ अपने शांत स्वभाव के लिए प्रसिद्ध हैं। ऐसे में उनका यह अवतार लोगों का खूब मनोरंजन कर रहा है। आईपीएल में द्रविड़ राजस्थान रॉयल्स से जुड़े हैं। रॉयल्स ने इस ऐड पर चुटकी लेते हुए कहा कि यह उनके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में से एक था।
द्रविड़ के इस अवतार का भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने भी मजे लिए। कोहली ने ट्वीट किया, “राहुल भाई का ये अंदाज कभी नहीं देखा।” इसके कोहली ने लॉफिंग इमोजी भी शेयर की है।
भारतीय संस्कृति के हिसाब से नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाते हैं और इस बार मंगलवार (अप्रैल 13, 2021) से नए हिन्दू नवसंवत्सर 2078 की शुरुआत भी हो रही है। भारतीय काल गणना में ‘विक्रम संवत’ का बड़ा महत्व है और शादी-विवाह से लेकर अन्य शुभ मुहूर्त व पर्व-त्यौहार इसी से तय होते हैं। हिन्दू नववर्ष के साथ ही सारे मांगलिक कार्य आरंभ हो जाएँगे। हिन्दू ग्रंथों में 60 संवत्सरों के हिसाब से हर संवत्सर का नाम तय किया जाता है।
भारतीय कालगणना का विवेचन अनेक ग्रंथों में किया गया है। मय के सूर्यसिद्धांत आदि प्रत्यक्ष ज्योतिष ग्रंथों से लेकर मनुस्मृति जैसे धर्मशास्त्रों तथा भागवत जैसे आख्यान माने जाने वाले पुराणों तक में कालगणना के विज्ञान की विवेचना और विश्लेषण प्राप्त होता है। भारतीय विज्ञान की यह विशेषता है कि वह हमेशा प्रत्यक्ष और प्रकृति से समन्वय बनाकर चलता है। इसलिए काल की गणनाएँ भी इससे ही जुड़ी हुई हैं।
हमारे शास्त्रों में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि ब्रह्मांड में भिन्न-भिन्न लोकों में काल की गति भी भिन्न-भिन्न होती है। आप देखेंगे कि महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टाइन ने भी ‘टाइम एंड स्पेस’ की थ्योरी में यही पाया। यहाँ हम देखेंगे कि पृथ्वी पर हमने काल की कैसी और कितनी सूक्ष्म गणनाएँ की थीं। काल की सबसे छोटी ईकाई भारतीय शास्त्रों में परमाणु की मानी गई है। दो परमाणु के बराबर एक अणु होता है और तीन अणु काल के बराबर एक त्रसरेणु काल होता है।
एक त्रसरेणु काल की माप बताते हुए भारतीय मनीषियों ने लिखा है कि किसी द्वार के सूक्ष्म छेद में से आ रहे सूर्य के प्रकाश में जो कण उड़ते हुए दिखते हैं, उसे ही त्रसरेणु कहते हैं। प्रकाश को इसे पार करने में जितना समय लगता है, उसे ही एक त्रसरेणु काल कहते हैं। तीन त्रसरेणु काल को एक त्रुटि कहा गया है। त्रुटि से काल की गणना को बढ़ाते हुए परार्ध तक ले जाया गया है। इसकी गणनाएँ कुछ इस प्रकार हैं:
1 लघु अक्षर उच्चारण
1 निमेष
2 निमेष
1 त्रुटि
10 त्रुटि
1 प्राण
6 प्राण
1 विनाडिका
60 विनाडिका
1 नाडिका
60 नाडिका
1 मुहूर्त
30 मुहूर्त
1 अहोरात्र
श्रीमद्भागवतपुराण में लिखा है कि जिसका और विभाजन नहीं हो सकता तथा जो कार्यरुप में प्राप्त नहीं हुआ है और जिसका अन्य परमाणुओं के साथ संयोग नहीं हुआ है, उसे परमाणु कहते हैं। वर्ष की गणना को आगे बढ़ाते हुए भारतीय मनीषियों ने पूरे ब्रह्मांड की आयु की भी गणना की। उन्होंने सौर वर्ष के बाद दिव्य वर्ष से लेकर परार्ध तक की गणना की है। कलियुग चारों में सबसे छोटा युग है। ये कुछ इस तरह से किया गया:.
कलि युग
4,32,000 वर्ष
द्वापर युग
8,64,000 वर्ष (2 कलि)
त्रेता युग
12,96,000 वर्ष (3 कलि)
कृत युग
17,28,000 वर्ष (4 कलि)
1 चतुर्युग = 43,20,000 वर्ष (10 कलि। इसे ही धर्म भी कहा है।) दशलक्षणयुक्त होने के कारण धर्म दश संख्या का भी द्योतक है। इसीलिए सूर्यसिद्धान्त में कहा गया है कि कृत् या सत् युग में धर्म के चार चरण होते हैं, त्रेता में तीन, द्वापर में दो और कलि में केवल एक। उल्लेख मिलता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने पृथ्वी छोड़ते समय माँ गंगा से कहा था कि पहले 10,000 वर्षों के बाद कलियुग में स्थिति एकदम खराब होने लगेगी।
71.42857143 चतुर्युग (x 43,20,000)
= 1 मन्वन्तर (30,85,71,428.5776 वर्ष)
14 मन्वन्तर (x 30.85.71,428.5776)
= 1 कल्प अर्थात ब्रह्मा का एक दिवस (4,32,00,00,000 वर्ष
ब्रह्मा के सौ वर्ष
= दो परार्ध (31,10,40,00,00,00,000 वर्ष )
अर्थात, 31 नील 10 खरब 40 अरब वर्ष की एक संपूर्ण प्रक्रिया होती है। ब्रह्मा के इस सौ वर्ष की आयु को दो परार्धों में बाँटा गया है। इसमें से वर्तमान ब्रह्मांड का पहला परार्ध बीत चुका है। भारतीय पंचांग में मासों, सप्ताहों और दिनों का निर्धारण एक वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत किया गया है, ग्रिगोरियन कैलेंडर की तरह किसी मनमाने तरीके से नहीं। सर्वप्रथम वेदों में ही बारह मासों के नाम आते हैं। यानी, भारतीय परंपरा के अनुसार संवत्सर का बारह मासों में विभाजन मानवी कार्य नहीं है।
यह एक प्रकार से पूर्वनिर्धारित नियम है कि पृथ्वी के सूर्य की ओर लगाए गए एक चक्र को कुल बारह भागों में ही बाँटा जाएगा। इसके लिए वेदों में दो स्थानों पर निर्देश प्राप्त होते हैं। भारतीय ज्योतिषियों ने इन मंत्रों के आधार पर ही गणनाएँ कीं। ऋग्वेद में वर्णित है:
इन दो मंत्रों में यह स्पष्ट किया गया है कि संवत्सर में बारह प्रविधियाँ हैं। 360 शंकु यानी दिन अथवा 729 जोड़े रात-दिन हैं। यहाँ इसे एक चक्र के रूप में निरूपित किया गया है, जो कि पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर की चक्राकार गति तथा काल की चक्रीय होने दोनों का ही प्रतीक है। इससे स्पष्ट है कि संवत्सर यानी एक वर्ष में 360 दिन और बारह मास होने की संकल्पना भारत में एकदम प्रारंभ से ही है। परंतु इस सामान्य आधार को आगे बढ़ाते हुए भारतीय ज्योतिषाचार्यों ने पृथ्वी की गति को जाना और इसके बाद उन्होंने वर्ष की वास्तविक गणना की।
मासों की गणना या निर्माण पृथ्वी की अपनी कक्षा से नहीं की गई, इसका निर्धारण चंद्रमा के पृथ्वी के चारों ओर की कक्षा से किया गया। इसलिए इसे चांद्रमास भी कहते हैं। चंद्रमा का एक मास 30 चंद्र तिथियों का होता है, परंतु वह सौर मास से लगभग आधा दिन छोटा होता है। दोनों मासों में सामंजस्य बैठाने के लिए भारतीय ज्योतिषाचार्यों ने मलमास या अधिमास का विधान किया। अब प्रश्न उठता है, जो आज के ग्रिगोरियन कैलेंडर के सभी समर्थक अधिक जोर-शोर से उठाते भी हैं कि सौर मास की उपस्थिति और उसकी गणना की सरलता के बाद भी चांद्र मासों की गणना क्यों की जाए?
वास्तव में चंद्रमा से मासों का निर्धारण केवल गणना का एक प्रकार मात्र नहीं है, बल्कि इसका वैज्ञानिक आधार भी है। यह आज हमें ठीक से ज्ञात हो चुका है कि चंद्रमा ही पृथ्वी पर वातावरण संबंधी अनेक बदलावों को लाने का कारण है। वेदों में इस सृष्टि को अग्निसोमात्मकं यानी अग्नि तथा सोम से निर्मित तथा संचालित कहा गया है। सूर्य अग्नि है और चंद्रमा सोम है। कृषि में हम इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देख सकते हैं।
चंद्रमा के कारण पौधों की बालियों में रस भरता है, सूर्य के कारण वे पकती हैं। मानव की पूरी सभ्यता आदि काल से कृषि आधारित रही है और चांद्र मास की गणना कृषिकार्य में सहायक है। यही कारण है कि सौर मासों की गणना करने के बाद भी भारतीय आचार्यों ने चांद्रमासों की भी गणना की। ‘विक्रम संवत्’ विश्व का सर्वश्रेष्ठ सौर-चांद्र सामंजस्य वाला संवत् है। आज उस गणना को भुलाने के कारण ही कृषि में इतनी बाधाएँ आ रही हैं।
वैज्ञानिक शोध में पता चला है कि चन्द्रमा का प्रकाश पेड़-पौधों के लिए न सिर्फ सूर्य की किरणों की तरह महत्वपूर्ण है, बल्कि स्टार्च स्टोरेज और उनके प्रयोग पर भी असर डालता है। पेड़-पौधों को इससे जो न्यूट्रिशन मिलता है, वो बायो-इलेक्ट्रिक एक्टिविटी होती है। दिन में फोटोसिंथसिस होता है। प्राकृतिक उपग्रह के बिना पृथ्वी पर जीवन एकदम से बदल जाएगा। पेड़-पौधों में जल के संचार पर भी चन्द्रमा का असर पड़ता है।
भारतीयों ने मासों का नाम यूरोपीयों की तरह मनमाने ढंग से नहीं रखा। वेदों तथा उनके ब्राह्मणों में 12 मासों के नाम दिए गए थे। लेकिन, हमारे ज्योतिषाचार्यों ने सिर्फ उनसे संतोष नहीं किया। वैदिक नामों में भी एक सार्थक मिलती है। उदाहरण के लिए मधु नामक मास में ही वसंत ऋतु होती है। वसंत ऋतु का मादकता से कितना संबंध है, ये छिपा नहीं है। इसी प्रकार अन्या नाम भी सार्थक हैं। परंतु बाद में इन मासों का नाम उन नक्षत्रों के नाम पर रखा गया, जिनसे इनका प्रारंभ होता है।
चित्रा नक्षत्र में प्रारंभ होने वाले मास का नाम चैत्र, विशाखा नक्षत्र में प्रारंभ होने वाले मास का नाम वैशाख… और इसी क्रम में सभी मासों के नाम निर्धारित किए गए। किस मास में कितनी तिथियाँ होंगी, यह चंद्रमा और सूर्य की चाल से निर्धारित किया गया और आज भी किया जाता है, मनमाने ढंग से नहीं। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए भारतीय ज्योतिषाचार्यों ने प्रत्येक अहोरात्र को 24 होराओं में बाँटा और हरेक का नामकरण भी किया।
यहाँ तक कि भारत में सप्ताह के 7 दिन की गणना और नामकरण भी प्राचीन काल से होता आ रहा था। आर्यभट्ट ने तभी सातों दिन के नाम और महत्ता पर प्रकाश डाला था। इसका विश्लेषण बड़े विद्वानों ने भी किया है। “सप्तैते होरेशा: शनैश्चराद्या यथाक्रमं शीघ्रा:| शीघ्रक्रमाच्च्तुर्था भवन्ति सूर्योदयाद् दिनपा:।।” नामक श्लोक इसका साक्ष्य है। इतना ही नहीं, ‘सूर्य सिद्धांत’ में भी इसका जिक्र आता है। संभव है कि बाद में इसे अन्य जगहों पर कॉपी किया गया हो।