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महाराष्ट्र: अहमदनगर में एक के ऊपर एक रखकर जलाए गए शव, नागपुर के कोविड अस्पताल में आग से 4 की मौत

महाराष्ट्र में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच हैरान करने वाली तस्वीर अहमदनगर से सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक गुरुवार (8 अप्रैल 2021) की देर रात शहर के अमरधाम श्मशान घाट में एक साथ 42 मरीजों का अंतिम संस्कार किया गया। इनमें 20 का अंतिम संस्कार विद्युत शवदाह गृह में और 22 का लकड़ी की चिता पर हुआ।

इनमें से 6 शव एक के ऊपर एक रखकर जलाए गए। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के कमिश्नर शंकर गोरे ने कहा कि एक साथ 6 शवों को जलाना अमानवीय है। मामले की जाँच कराकर दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पूर्व मंत्री और BJP नेता ​​​राधाकृष्ण विखे पाटिल ने भी इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। अहमदनगर जिला कोरोना पॉजिटिव मरीजों के मामले में टॉप-10 में है। जिले में हर रोज 2000 से ज्यादा केस सामने आ रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र के नागपुर में शुक्रवार रात वेल ट्रीट कोविड अस्पताल में आग लगने से एक महिला समेत 4 लोगों की मौत हो गई है। पुलिस का कहना है कि अस्पताल में कुल 27 मरीजों का इलाज चल रहा था। सभी मरीजों को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है। अस्पताल को खाली करा लिया गया है।

पीएम मोदी ने ट्वीट कर हादसे पर शोक जताया है। उन्होंने कहा, ”नागपुर के अस्पताल में आग लगने की घटना से दुखी हूॅं। मेरी संवेदनाएँ इस घटना में जान गँवाने वाले परिजनों के साथ हैं। इस घटना में घायल लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूॅं।”

गृहमंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी ट्वीट कर इस हादसे पर दुख जताया है। गृहमंत्री ने लिखा, ”नागपुर के एक अस्पताल में आग लगने के समाचार से अत्यंत दुखी हूँ। मैं दुख की इस घड़ी में मृतकों के परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करता हूँ व ईश्वर से घायलों के शीघ्र ही स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूँ।”

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कोविड अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती मरीजों की मौत को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि मेरी सहानुभूति मृतकों के परिजनों के साथ है। नागपुर GMC के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. अविनाश ने बताया कि रात 8 बजकर 10 मिनट पर आग लगी। अभी तक आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है।

बता दें कि महाराष्ट्र में कोरोना के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। पिछले 24 घंटे में राज्य में 58,993 नए मामले सामने आए, जबकि 301 मरीजों की मौत हो गई। राज्य में एक्टिव केस की संख्या 5 लाख के पार पहुँच गई है। अभी यहाँ एक्टिव मरीजों की संख्या 5,34,603 हो गई है। वहीं नागपुर में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 6,489 नए मामले सामने आए, जबकि 64 मरीजों की मौत हो गई। जिले में एक्टिव केस 49,347 हो गए हैं, जबकि कुल 5,641 लोगों की मौत हो चुकी है।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में प्रतिदिन 50 हजार से अधिक कोरोना के नए मामलों की पुष्टि की जा रही है। इसके चलते महाराष्ट्र सरकार ने वीकेंड लॉकडाउन और नाइट कर्फ्यू की घोषणा की है।

बंगाल की 44 सीटों पर डाले जा रहे वोट, कूच बिहार में बीजेपी वर्करों पर हमला; EC से टीएमसी ने की शिकायत

पश्चिम बंगाल में आज (अप्रैल 10, 2021) चौथे चरण के तहत 44 विधानसभा सीटों के लिए वोट डाले जा रहे हैं। इसके तहत दक्षिण बंगाल के हावड़ा (भाग दो), दक्षिण 24 परगना (भाग तीन), हुगली (भाग दो) और उत्तर बंगाल के अलीपुरद्वार तथा कूचबिहार में 1,15,81,022 मतदाता 373 उम्मीदवारों के भविष्य का फैसला करेंगे।

आज होने वाले मतदान में हावड़ा की नौ, दक्षिण 24 परगना की 11, अलीपुरद्वार की पाँच, कूच बिहार की नौ और हुगली की 10 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं। जिन प्रमुख उम्मीदवारों की किस्मत इस चरण में दाँव पर लगी है उनमें बंगाल रणजी के पूर्व कप्तान मनोज तिवारी (शिबपुर सीट, तृणमूल कॉन्ग्रेस) और राज्य के शिक्षा मंत्री और बेहला पश्चिम सीट से वर्तमान विधायक पार्थ चटर्जी, टॉलीगंज सीट पर भाजपा के केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो, बेहला पूर्व सीट पर भाजपा की उम्मीदवार पायल सरकार, दोमजुर सीट पर हाल ही में भाजपा का दामन थामने वाले पूर्व वन मंत्री राजीव बनर्जी शामिल हैं। इसके अलावा हुगली के चिन्सुराह सीट पर भाजपा सांसद और अभिनेत्री लॉकेट चटर्जी की किस्मत भी इस चरण में ईवीएम में लॉक होगी।

इस बीच कोलकाता के टॉलीगंज से भाजपा उम्मीदवार बाबुल सुप्रियो ने कहा, “ममता दीदी और टीएमसी को पश्चिम बंगाल से हटाना सबसे बड़ी चुनौती है। अरूप बिस्वास (निर्वाचन क्षेत्र से टीएमसी उम्मीदवार) उनके सभी कार्यों में उनका दाहिना हाथ रहे हैं। इसलिए यहाँ आतंक का माहौल बदलना एक चुनौती है।” 

बता दें कि टॉलीगंज दक्षिण कोलकाता का विधानसभा क्षेत्र है। यह सीट टीएमसी का अभेद्य दुर्ग मानी जाती है। टीएमसी यह सीट 2001 से लगातार जीतती आई है। तीन बार से तो अरूप बिस्वास ही जीतते रहे हैं। वे पीडब्ल्यूडी मंत्री भी हैं। भाजपा ने उनके सामने बाबुल सुप्रियो को उतारा है।

चौथे चरण का मतदान शुरू होते ही राज्य से हिंसा की भी खबरें आने लगी है। कूच बिहार जिले के सीतलकुची निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा कार्यकर्ताओं पर कथित रूप से हमला किया गया। भाजपा के एक कार्यकर्ता को चोटें आईं हैं। बीजेपी ने इसके लिए टीएमसी को जिम्मेदार ठहराया है।

वहीं टीएमसी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि सीतलकुची, नटबरी, तुफानगंज और दिनहाटा में कई बूथों पर उसके एजेंटों को बूथ में प्रवेश करने से रोका जा रहा है। टीएमसी ने चुनाव आयोग से आवश्यक कार्रवाई की माँग की है। 

प्रदेश की मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने ‘मतदाताओं को प्रभावित’ करने के लिए केंद्रीय बलों का ‘जबरदस्त दुरूपयोग’ किए जाने का आरोप तक लगा दिया। जिसके बाद चुनाव आयोग ने उनको दूसरी बार नोटिस भेजा। इससे पहले चुनाव आयोग ममता बनर्जी को सभी मुसलमान एकजुट होने वाले बयान पर भी नोटिस जारी किया था। चुनाव आयोग ने कहा कि बीएसएफ देश की बेहतरीन फोर्स में से एक है इस पर टीएमसी की ओर से आरोप लगाना दुर्भाग्यपूर्ण है। 

बता दें कि बंगाल में इससे पहले तीन चरणों में मतदान हो चुका है। 8 चरणों में वोटिंग होनी है। पश्चिम बंगाल में तीसरे चरण में 6 अप्रैल को 31 विधानसभा सीटों पर 84.61 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। राज्य में पहले और दूसरे चरण में क्रमश: 84.13 और 86.11 फीसदी मतदान हुआ था। राज्य में विधानसभा की 294 सीटों में से 91 पर चुनाव संपन्न हो गया है और आज 44 सीटों के लिए वोट डाले जा रहे हैं। नतीजे दो मई को पाँच राज्यों के परिणाम के साथ ही घोषित होंगे।

‘एक और मस्जिद के विध्वंस की तैयारी’: वाराणसी कोर्ट के फैसले के बाद वामपंथी-कट्टरपंथियों के निकले आँसू

ज्ञानवापी मस्जिद के परिसर में ASI को सर्वेक्षण की मंजूरी मिलने के बाद तमाम वामपंथी, कट्टरपंथी सब बिलबिला गए हैं। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने बयान जारी करके वाराणसी की स्थानीय कोर्ट के फैसले की निंदा की।

सीपीआईएम ने बयान में कहा , “वाराणसी की सिविल कोर्ट ने यह पता लगाने के लिए कि ज्ञानवापी मस्जिद में हिंदू मंदिर था या नहीं, जो ASI को पुरातात्विक सर्वेक्षण के लिए मंजूरी दी है, वो कानून का उल्लंघन है।”

सीपीआईएम ने सभी धार्मिक स्थलों में यथास्थिति को बनाए रखने में सक्षम धार्मिक स्थल (विशेष प्रावधान) 1991 का हवाला देकर उच्च न्यायपालिका को निचली अदालत के आदेश पर तुरंत हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।

हमेशा की तरह इस बार भी रो रहे इस्लामी कट्टरपंथी और वामपंथी

CPI (M) के अलावा कई वामपंथी, कट्टरपंथी भी वाराणसी कोर्ट के फैसले के बाद उस पर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। इस्लामी पत्रकारिता के लिए पहचानी जाने वाली राणा अयूब ने लिखा, “भारत में एक और मस्जिद के विध्वंस के लिए तैयारी हो रही है, न्यायपालिका से इसे मंजूरी मिली है, सत्ता इसे समर्थन दे रही है… मुस्लिम अल्पसंख्यक को अपमानित करने का एक और दिन है। है कहीं लोकतंत्र? ”

लिबरल गिरोह के वकील प्रशांत भूषण इस पर लिखते हैं कि काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मस्जिद विवाद पर वाराणसी कोर्ट ने ASI सर्वेक्षण को मंजूरी दे दी है। ये बिलकुल धार्मिक स्थल (विशेष प्रावधान) 1991 के विरुद्ध और हानिकारक है। इसपर हाईकोर्ट को फौरन रोक लगानी चाहिए।

एक अन्य वामपंथी कपिल कोमिरेड्डी इस फैसले से आहत होकर कहते हैं, हिंदू राष्ट्रवादी अतीत के साथ सामंजस्य नहीं रखना चाहते, वे इसे हथियार बनाना चाहते हैं। कपिल ने आगे जोर देकर कहा कि अयोध्या में जो हुआ वह दर्जनों अन्य स्थानों पर दोहराया जाएगा।

बता दें कि इससे पहले काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद केस में सर्वेक्षण के लिए वाराणसी जिला अदालत से मंजूरी मिलने के बाद AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कोर्ट के फैसले की वैधता पर संदेह जताया था।

ओवैसी ने कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और मस्जिद कमेटी को इस आदेश पर तुरंत अपील करके इसपर सुधार करवाना चाहिए। ओवैसी ने ASI पर भी आरोप लगाया कि वो हिंदुत्व के हर प्रकार के झूठ के लिए दाई की तरह काम कर रही है।

बनारस के ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का होगा ASI के सर्वे को कोर्ट की मंजूरी

उल्लेखनीय है कि वाराणसी कोर्ट ने 8 अप्रैल को अपना फैसला सुनाते हुए ज्ञानवापी परिसर में ASI को सर्वेक्षण करने की मंजूरी दी है। कोर्ट ने कहा कि सर्वेक्षण का सारा खर्चा सरकार करेगी। कोर्ट ने ASI को भी यह सुनिश्चित करने को कहा है कि मस्जिद को कोई नुकसान न हो।

इस मामले में वाराणसी फार्स्ट ट्रैक कोर्ट में मामले को लेकर बहस 2 अप्रैल को पूरी हुई थी। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। कोर्ट में काशी विश्वनाथ मंदिर पक्ष के वकील विजय शंकर रस्तोगी, सुनील रस्तोगी और राजेन्द्र पांडेय ने पक्ष रखते हुए कहा था कि पुरातात्विक साक्ष्य के लिए ऐसा करना न्यायोचित है।

कोर्ट का फैसला पक्ष में आने के बाद अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने इसका स्वागत किया। रस्तोगी ने कहा कि पुरातात्विक सर्वेक्षण के बाद ये साफ हो जाएगा कि विवादित स्थल कोई मस्जिद नहीं, बल्कि आदि विशेश्वर महादेव का मंदिर है।

मालूम हो, इस संबंध में रस्तोगी ने दिसंबर 2019 में सिविल जज की अदालत में स्वयंभु ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर की ओर से एक आवेदन दायर किया था, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संपूर्ण ज्ञानवापी परिसर का सर्वेक्षण करने का अनुरोध किया गया था

असम: AIUDF के 20 प्रत्याशी लाए गए जयपुर, कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन में परिणाम से पहले ही मची खलबली

असम में होने वाला तीन चरणों का मतदान 6 अप्रैल को संपन्न हुआ। चुनावों का परिणाम 2 मई को घोषित किया जाएगा। हालाँकि, चुनाव परिणाम घोषित होने से पहले ही कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन ‘महाजोत’ में खलबली मची हुई है। गठबंधन को अपने प्रत्याशियों के पाला बदल कर भाजपा के खेमे में जाने का डर सता रहा है। इससे बचने के लिए गठबंधन कॉन्ग्रेस की पुरानी रणनीति अपना रहा है, होटल या रिसॉर्ट में प्रत्याशियों या विधायकों को शिफ्ट कर देना। एआईयूडीएफ के 20 प्रत्याशियों को जयपुर के एक रिसॉर्ट भेज दिया गया है।

न्यूज एजेंसी एएनआई की खबर के अनुसार कॉन्ग्रेस के सूत्रों ने बताया कि महाजोत के प्रत्याशियों को जयपुर भेज दिया गया है। गठबंधन में शामिल एआईयूडीएफ के कई प्रत्याशी जयपुर पहुँच चुके हैं और जल्दी ही कॉन्ग्रेस के कुछ प्रत्याशी भी जयपुर के रिसॉर्ट में शिफ्ट किए जाएँगे।

राजस्थान में कॉन्ग्रेस के मुख्य व्हिप महेश जोशी ने कहा कि भाजपा द्वारा खरीद-फरोख्त के डर से प्रत्याशियों को राजस्थान लाया गया है। उन्होंने कहा कि जब तक भाजपा केंद्र में है तब तक विधायकों की खरीद-फरोख्त की संभावना बनी रहेगी। जोशी ने बताया कि 20 लोग आज आए हैं लेकिन किस पार्टी के हैं यह ज्ञात नहीं है। प्रत्याशियों को फेयरमाउंट होटल लाया गया है।

गुवाहाटी से जयपुर जाने वाली फ्लाइट के मैनिफेस्ट में एआईयूडीएफ के 20 ऐसे प्रत्याशियों की सूची है जिन्हें जयपुर भेजा गया है।


एआईयूडीएफ के 20 प्रत्याशियों को गुवाहाटी-जयपुर फ्लाइट से जयपुर भेजा गया।

गठबंधन ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब गठबंधन में शामिल बीपीएफ के तामुलपुर से प्रत्याशी रंगजा खुंगूर बासुमतरी 1 अप्रैल को भाजपा में शामिल हो गए थे और मतदाताओं से यह अपील की कि वो भाजपा प्रत्याशी को वोट करें। ऐसा इसलिए क्योंकि नामांकन वापस लेने की तारीख बीत जाने के बाद रंगजा अपना नामांकन वापस नहीं ले सके।

असम में कॉन्ग्रेस, बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ, बोड़ोलैंड पीपुल्स फ्रंट और अन्य क्षेत्रीय पार्टियों के साथ चुनाव लड़ रही है। असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव हो चुके हैं। चुनाव आयोग के अनुसार असम चुनावों में कुल 82.04 फीसदी मतदान दर्ज किया गया है।

पहले उठाए भारतीय वैक्सीन पर सवाल, अब वैक्सीन फॉर ऑल: राहुल गाँधी और उनके नेताओं के प्रोपेगेंडा का सच

महीनों तक कॉन्ग्रेस के नेताओं के द्वारा भारत बायोटेक की कोविड-19 की वैक्सीन ‘कोवैक्सीन’ के खिलाफ कैम्पेन चलाने के बाद वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा और वैक्सीन को जरूरतमंदों को उपलब्ध कराने एवं वैक्सीन का निर्यात रोकने की माँग की। अपने पत्र में गाँधी ने वैक्सीन खरीद और वितरण में बिना किसी भेदभाव के राज्यों की भूमिका को बढ़ाने और कोरोनावायरस संक्रमण से प्रभावित लोगों को आय सहायता उपलब्ध कराने की बात कही। 

गाँधी ने अपने पत्र में यह भी कहा कि केंद्र सरकार वैक्सीन निर्माताओं को वित्तीय सहायता मुहैया कराए और वैक्सीन खरीद के लिए दुगुना भुगतान करे। गाँधी ने वैक्सीन निर्यात किए जाने पर केंद्र सरकार को घेरा और कहा कि जब हमारे देश में वैक्सीन की कमी हो रही है तब 6 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन के डोज निर्यात कर दिए गए। गाँधी ने वैक्सीन सर्टिफिकेट पर एक व्यक्ति की फोटो लगाने के स्थान पर सार्वभौमिक वैक्सीनेशन कार्यक्रम शुरू करने पर जोर दिया।

राहुल गाँधी का मेड इन इंडिया वैक्सीन विरोधी कैम्पेन :

भले ही राहुल गाँधी पत्र लिखकर ‘वैक्सीन फॉर ऑल’ की वकालत कर रहे हों और कथित रूप से वैक्सीन की कमी को लेकर केंद्र सरकार को घेर रहे हों लेकिन ध्यान देने योग्य बात यह है कि जनवरी 2021 में ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) द्वारा भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के आपात उपयोग को अनुमति दिए जाने पर यही राहुल गाँधी और उनके समर्थक वैक्सीन विरोधी प्रोपगंडा चला रहे थे। महीनों तक गाँधी और उनकी पार्टी के सदस्य वैक्सीन पर प्रश्न उठाते रहे।

कॉन्ग्रेस के बुद्धिजीवी सदस्य शशि थरूर ने भी कोवैक्सीन को लेकर लोगों में यह भ्रम फैलाया था कि वैक्सीन का तीसरे फेज का ट्रायल नहीं हुआ है। ऐसा करके उन्होंने न केवल वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की मेहनत पर सवाल उठाए थे बल्कि लोगों में कोरोनावायरस की स्वदेशी वैक्सीन को लेकर डर भी पैदा किया।

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ सदस्य राशिद अल्वी थोड़ा और आगे निकले और कहा कि जैसे भाजपा और नरेंद्र मोदी विपक्षी नेताओं के खिलाफ विभिन्न संस्थाओं का उपयोग करते हैं वैसे ही वैक्सीन का उपयोग भी कर सकते हैं। अल्वी ने वैक्सीनेशन कार्यक्रम का बहिष्कार करने की माँग की और समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव की इस बात का समर्थन किया कि यह भाजपा की वैक्सीन है।  

वरिष्ठ कॉन्ग्रेस सदस्य आनंद शर्मा ने भी स्वदेशी कोवैक्सीन की क्षमता पर प्रश्न उठाया था और आरोप लगाया था कि वैक्सीन के फेज तीन के ट्रायल को नजरअंदाज किया गया है और डीसीजीआई ने कोवैक्सीन को अप्रूवल देने में आवश्यक प्रोटोकॉल्स के साथ समझौता किया है। कॉन्ग्रेस के निष्ठावान सदस्य साकेत गोखले ने भी डीसीजीआई पर प्रश्न उठाए और वैक्सीन के बारे में गलत और भ्रामक खबरें फैलाई।

राहुल गाँधी की वैक्सीन फॉर ऑल की माँग :

राहुल गाँधी भले ही केंद्र सरकार पर हमला करने के लिए वैक्सीन का सहारा ले रहे हों और वैक्सीन फॉर ऑल की माँग कर रहे हों लेकिन इससे यह साबित होता है कि उन्हें वैक्सीन और उसके वितरण संबंधी प्रक्रिया की कोई जानकारी नहीं है।

वैक्सीन बनाने वाले लगभग सभी देश एक ‘प्राथमिकता रणनीति’ पर काम करते हैं जिसका उद्देश्य होता है वैक्सीनेशन कार्यक्रम में प्राथमिकता का एक क्रम तय करना। भारत भी इसी रणनीति पर काम कर रहा है। वैक्सीन फॉर ऑल तब तक संभव नहीं है जब तक कि जनसंख्या के हिसाब से वैक्सीन निर्माण क्षमता को संतुलित न कर दिया जाए। भारत जैसी विशाल जनसंख्या वाले देश में वैक्सीन फॉर ऑल जैसी रणनीति पर काम करने से ऊहापोह की स्थिति निर्मित हो सकती है और जिन्हें सबसे पहले वैक्सीन की आवश्यकता है वो छूट सकते हैं।

शायद राहुल गाँधी को यह भी पता नहीं होगा कि 2020 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड-19 से संबंधित एक रणनीति जारी की थी जिसमें वैक्सीनेशन की प्राथमिकता के विषय में पूरी जानकारी दी गई थी। इस रणनीति में यह कहा गया था कि वैक्सीनेशन कार्यक्रम में दो समूहों को प्राथमिकता दी जाएगी। पहला समूह वह होगा जो कोरोना वायरस के संक्रमण के सबसे ज्यादा खतरे में होगा और उस आयु समूह से होगा जिसकी मृत्युदर सर्वाधिक है और दूसरा वह समूह होगा जो वैक्सीनेशन के बाद वायरस के प्रसार को न्यूनतम करेंगे।

इस रणनीति के तहत सरकार ने सबसे पहले फ्रंटलाइन वर्कर्स और वृद्ध लोगों को वैक्सीन देने की योजना बनाई। इसके साथ उन लोगों को भी वैक्सीनेट किया गया जो गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे। वैक्सीनेशन की अगली रणनीति में 45 वर्ष से ऊपर की आयु के सभी व्यक्तियों के लिए वैक्सीनेशन को शुरू किया गया।

वैक्सीनेशन की यह रणनीति न केवल भारत बल्कि यूके, जर्मनी, यूएस और कई अन्य देश भी अपना रहे हैं।

EC ने ममता बनर्जी के OSD अशोक चक्रवर्ती को तत्काल प्रभाव से हटाया, 3 जिला चुनाव अधिकारियों का भी ट्रांसफर

पश्चिम बंगाल में चौथे चरण के मतदान से पहले चुनाव आयोग ने राज्य की मुख्यमंत्री व तृणमूल कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी के सेक्योरिटी ऑफिसर अशोक चक्रवर्ती को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। चक्रवर्ती वर्तमान में सुरक्षा निदेशालय में पुलिस अधीक्षक पद पर (एक पूर्व कैडर पद पर) विशेष ड्यूटी अधिकारी के रूप में तैनात थे।

चुनाव आयोग ने मतदान के चौथे चरण से पहले 3 जिला चुनाव अधिकारियों को भी गैर चुनाव पोस्ट पर ट्रांसफर किया है। चुनाव आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को लिखा है कि जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) – पुरबा बर्धमान के एनर रहमान, पश्चिम बर्धमान के पूर्णेंदु कुमार माझी और दक्षिण दिनाजपुर के निखिल निर्मल को ‘तत्काल प्रभाव’ से स्थानांतरित किया जा रहा है। पोल-पैनल ने अपने पत्र में आगे कहा कि इन अधिकारियों को चुनाव संबंधी कोई भी पोस्टिंग नहीं दी जानी चाहिए।

इन तीनों अधिकारियों की जगह शिल्पा गौरीसरिया, सी मुरुगन और अनुराग श्रीवास्तव को लाया गया है। तीन जिला चुनाव अधिकारियों के अलावा, कई अन्य अधिकारियों को भी चुनाव आयोग द्वारा स्थानांतरित किया गया है।

याद दिला दें कि विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही तृणमूल कॉन्ग्रेस लगातार चुनाव आयोग पर केंद्र का साथ देने का आरोप लगा रही थी। उनका कहना था कि केंद्र के हिसाब से चुनाव आयोग ने तारीखों को तय किया है। ऐसे में जाहिर है चुनाव आयोग का यह ताजा फैसला सीएम ममता को आग बबूला करेगा।

अभी हाल की बात करें तो ममता बनर्जी ने चुनावी रैली को संबोधित करते हुए सुरक्षाबल पर सवाल उठाए थे और उनके विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिसकी वजह से भी चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी पर कार्रवाई की और उन्हें नोटिस भी भेजा। 

इससे पहले चुनाव आयोग ने आचार संहिता लागू होने के साथ ही हिंसा और लॉ एंड ऑर्डर को लेकर कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी थी। तारीखों के ऐलान के दूसरे दिन ही चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में एडीजी लॉ एंड ऑर्डर जावेद शमीम को हटा दिया था। 

शमीम की जगह डीजी फायर सेवा जगन मोहन को नया एडीजी बनाया गया था। वहीं जावेद शमीम को डीजी फायर सेवा बनाया गया। मालूम हो एडीजी (कानून-व्यवस्था) चुनाव आयोग के साथ नोडल एजेंसी के रूप में काम करता है।

बता दें कि पश्चिम बंगाल में तीन चरणों की वोटिंग हो चुकी है। चौथे चरण के तहत 44 सीटों पर कल वोटिंग होगी। 5वें चरण के तहत 6 जिलों की 45 सीटों पर 17 अप्रैल, छठे चरण के तहत चार जिलों की 43 सीटों पर 22 अप्रैल, 7वें चरण के तहत 5 जिलों की 36 सीटों पर 26 अप्रैल और 8वें चरण के तहत चार जिलों की 35 सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान होगा। 2 मई को नतीजे आएँगे।

किसान आंदोलन से जुड़े कई एक्टिविस्ट पर यौन शोषण के आरोप, ‘ढोंगी’ योगेंद्र यादव के संगठन ने कहा- केस बंद हो चुका है

पिछले कुछ दिनों से किसान आंदोलन से जुड़े हुए कुछ कार्यकर्ताओं पर यौन शोषण के आरोप लग रहे हैं। 7, अप्रैल को हमनें रिपोर्ट में बताया था कि कई पीड़ितों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने साथ हुई घटनाओं को बताया। आरोपों की यह श्रृंखला मोहम्मद जुबेर (_emmzedd, Instagram) के खिलाफ लिखी गई पोस्ट के साथ शुरू हुई। इसके बाद किसान आंदोलन से जुड़े कई कार्यकर्ताओं के नाम सामने आ रहे हैं। इनमें वरुण चौहान (ट्रॉली टाइम्स का सदस्य), अंतरप्रीत सिंह (स्टूडेंट फॉर सोसायटी का नेता) और स्वराज फॉर यूथ का अध्यक्ष मनीष कुमार भी शामिल है।

वरुण चौहान के खिलाफ पाँचवा यौन शोषण का आरोप :

हमने अपनी रिपोर्ट में चार पीड़ितों के द्वारा वरुण चौहान पर लगाए गए यौन शोषण के आरोपों की रिपोर्ट दी थी। अब वरुण चौहान के खिलाफ यौन उत्पीड़न का पाँचवा मामला सामने आया है। ‘द कौर मूवमेंट’ नाम की एक पहल के तहत इस पाँचवे आरोप को सामने लाया गया है।

पीड़िता ने बताया कि वह वरुण चौहान से 2019 में इंस्टाग्राम के माध्यम से मिली। तब वह 19 वर्ष की थी। उसने बताया कि वरुण ने उससे 2-3 लाख रुपए ऐंठे जो उसने अभी तक नहीं लौटाए। पीड़िता ने यह भी बताया कि वरुण ने उस पर ‘थ्रीसम’ में शामिल होने का दबाव बनाया और कहा कि ‘थ्रीसम’ में शामिल होना सामान्य है और अपनी ‘सेक्सुएलिटी’ को एक्सप्लोर करने से संबंधित है।

वरुण चौहान पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली पीड़िता का बयान (इमेज सोर्स : द कौर मूवमेंट)

पीड़िता ने आगे बताया कि वरुण ने अपने इंस्टाग्राम का उपयोग करके बिना उसकी जानकारी के आपत्तिजनक तस्वीरों को उन लोगों को भेजा जिन्हें वह समझता था कि वो थ्रीसम में रुचि लेंगे। पीड़िता ने कहा कि वह यह मानने लगी थी कि वरुण उससे प्यार करता है लेकिन बाद में उसे पता चला कि वरुण उसे धोखा दे रहा है। इन सब घटनाओं के चलते वह अवसाद से ग्रसित हो गई थी। इसके बाद पीड़िता ने वरुण के बारे में जानने का प्रयास किया तब उसे पता चला कि ऐसी कई पीड़िताएं हैं जो वरुण का शिकार हुई हैं। पीड़िता ने यह भी दावा किया कि वह निजी तौर पर चार पीड़िताओं को पहचानती है और कई ऐसी भी हैं जिन्हें वह बिल्कुल भी नहीं जानती। वरुण पर निजता के हनन का आरोप लगाते हुए पीड़िता कहती है कि वरुण के पास उसके और अन्य पीड़िताओं के कई फोटो और वीडियो हैं। पीड़िता का कहना है कि इस पहल के तहत उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।  

वरुण चौहान पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली पीड़िता का बयान (इमेज सोर्स : द कौर मूवमेंट)
वरुण चौहान पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली पीड़िता का बयान (इमेज सोर्स : द कौर मूवमेंट)

ट्रॉली टाइम्स का कार्रवाई से इनकार :

ट्रॉली टाइम्स ने वरुण चौहान पर कार्रवाई करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें वरुण पर लगाए गए आरोपों के बारे में पूरी जानकारी है किन्तु किसी भी आधिकारिक शिकायत के अभाव में वरुण पर कार्रवाई नहीं की जा सकती है।

एक अन्य पीड़िता द्वारा स्वराज इंडिया और योगेंद्र यादव पर मनीष कुमार को बचाने का आरोप:

7 अप्रैल की हमारी रिपोर्ट में एक और पीड़िता का केस बताया गया था। इस केस में योगेंद्र यादव के स्वराज इंडिया संगठन के यूथ विंग यूथ फॉर स्वराज के अध्यक्ष मनीष कुमार पर भी ऐसे ही आरोप लगे थे।  

पीड़िता ने अपनी पोस्ट में बताया कि उसने यौन उत्पीड़न की जानकारी योगेंद्र यादव और अन्य सदस्यों को दी लेकिन उसकी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। उसने कहा कि वरुण के केस को जानने के बाद उसे लगा कि उसे भी अपनी बात सबके सामने रखनी चाहिए। उसने आरोप लगाया कि उसे स्वराज इंडिया से उत्पीड़न के चलते इस्तीफा देना पड़ा।

एक अन्य पीड़िता द्वारा मनीष कुमार पर लगाए गए यौन शोषण के आरोप, पीड़िता की पहचान नियमों के तहत गुप्त रखी गई है।

पीड़िता ने ट्विटर के माध्यम से यह आरोप लगाया कि स्वराज इंडिया और योगेंद्र यादव, आरोपित मनीष कुमार पर कार्रवाई का मात्र ढोंग कर रहे हैं। पीड़िता ने लिखा कि “अगर एक निष्पक्ष जाँच की गई है, तो यह उनकी जिम्मेदारी है कि वे पारदर्शी बयान के साथ सामने आएँ और उत्पीड़न करने वाले पर अपना पक्ष रखें।” पीड़िता ने योगेंद्र यादव को सार्वजनिक जीवन से सन्यास लेने की बात कही।

स्वराज इंडिया ने कहा कि यौन उत्पीड़न के इस केस में हुई जाँच :

मामले पर तीन-चार दिनों तक चुप्पी साधने के बाद स्वराज इंडिया ने बयान जारी किया और कहा कि यौन उत्पीड़न के इस केस की आंतरिक शिकायत कमेटी के द्वारा जाँच हुई है और जाँच में यह पाया गया कि आरोपित के खिलाफ लगाए गए आरोप ‘गलत और भ्रामक’ हैं। स्वराज अभियान ने अपने बयान में कहा कि जाँच कमेटी ने 18 अप्रैल 2021 को जाँच रिपोर्ट दी जिसकी सिफारिशों को मंजूर किया गया और उसके बाद केस को बंद कर दिया गया है।

‘नरसिंहानंद की जुबान-गर्दन काट कर सजा देनी चाहिए’ – अमानतुल्लाह खान के पोस्ट पर फेसबुक मौन, दोहरे मापदंड पर उठा सवाल

ओखला के आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक अमानतुल्लाह खान ने पिछले दिनों डासना के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती को सोशल मीडिया पर खुलेआम सिर कलम करने की धमकियाँ दी थी। ट्विटर, फेसबुक हर जगह अमानतुल्लाह खान ने लिखा कि नरसिंहानंद का सिर काट देना चाहिए।

इस हिंसक पोस्ट को देख तमाम लोगों ने उसकी रिपोर्ट की, जिसके बाद ट्विटर ने अमानतुल्लाह खान के ट्वीट को डिलीट कर दिया, लेकिन फेसबुक ने अब भी उस पोस्ट पर कार्रवाई नहीं की है।

अमानतुल्लााह खान का यह पोस्ट 3 अप्रैल को किया गया था। खान ने यति नरसिंहानंद की एक वीडियो को शेयर कर लिखा था, “हमारे नबी की शान में गुस्ताखी हमें बिल्कुल बर्दाश्त नहीं, इस नफ़रती कीड़े की ज़ुबान और गर्दन दोनो काट कर इसे सख़्त से सख़्त सजा देनी चाहिए। लेकिन हिंदुस्तान का क़ानून हमें इसकी इजाज़त नहीं देता, हमें देश के संविधान पर भरोसा है और मैं चाहता हूँ कि दिल्ली पुलिस इसका संज्ञान ले।”

इसके बाद अमानतुल्लाह खान ने एक वीडियो भी शेयर की। इसमें उसने कहा,

“यति नरसिंहानंद ने जो पैगंबर मोहम्मद की शान में गुस्ताखी की है, उसके लिए हुक्म है कि उसका सिर कलम कर दिया जाए या उसकी जुबान काट ली जाए। लेकिन संविधान पर हमें भरोसा है। उम्मीद है कि उसके ऊपर कार्रवाई करके उसे जेल भेजा जाएगा। हम सारे धर्म के गुरुओं- श्रीराम, श्रीकृष्ण सभी का सम्मान करते हैं। इसलिए हम नहीं चाहते हैं किसी भी धर्म को मानने वाला हमारे धर्म गुरु… की शान में गुस्ताखी करे। शरीयत अगर यहाँ होता तो इस शख्स को सरेआम गर्दन काट कर, जुबान काटकर लटका दिया जाता। पर हम कानून का सम्मान करते हैं और वो इसकी इजाजत नहीं देता, इसलिए मैं यहाँ आया हूँ। आला अधिकारी से अपील करता हूँ कि इस शख्स ने मुल्क के माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की है। मुसलमानों के दिल को ठेस पहुँची है, तकलीफ हुई है क्योंकि हम किसी भी हाल में ये गुस्ताखी बर्दाश्त नहीं कर सकते।”

बता दें कि नरसिंहानंद की जिस वीडियो पर ये सारा बवाल हुआ, उस वीडियो में नरसिंहानंद प्रेस क्लब में कह रहे थे,

“अगर इस्लाम की असलियत, जिसके लिए मौलाना कहते हैं कि अगर मोहम्मद के बारे बोला तो सिर काट देंगे… हिंदू ये भय अपने दिमाग से निकाल दें। हम हिंदू हैं। हम राम के चरित्र की मीमांसा कर सकते हैं, हम परशुराम के चरित्र की मीमांसा कर सकते हैं, तो हमारे लिए मोहम्मद क्या चीज है? हम मोहम्मद की मीमांसा क्यों नहीं करेंगे और क्यों सच नहीं बोलेंगे?”

नरसिंहानंद की इन्हीं बातों को सच साबित करते हुए अमानतुल्लाह खान ने उन्हें पहले सिर कलम की धमकी दी। बाद में 4 अप्रैल को उनके ख़िलाफ़ शिकायत कर दी। इस दौरान उसके पोस्ट सोशल मीडिया पर फैलते रहे। काफी शिकायत के बाद ट्विटर ने इस पोस्ट को 4 अप्रैल की शाम तक हटा दिया लेकिन हैरानी की बात है कि फेसबुक पर अब तक ये पोस्ट वैसा का वैसा ही है।

यहाँ मालूम हो कि दक्षिणपंथियों पर कार्रवाई करने के लिए फेसबुक अक्सर कम्युनिटी स्टैंडर्स का हवाला देता रहा है। उसके मुताबिक ऐसे भड़काऊ बयान जो समुदाय को उकसाते हों, उसे वह अपने पोस्ट में जगह नहीं देता। लेकिन, इस बार देखने को मिल रहा है कि तमाम लोगों की शिकायत के बाद वह इस पोस्ट को प्लैटफॉर्म से नहीं हटा रहा।

CM योगी का मुरीद हुआ हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, कोरोना प्रबंधन के लिए जमकर की सराहना: विश्व को दी सीखने की सलाह

देशभर में कोरोना वायरस के कहर के बीच जनसंख्या के मामले में देश का सबसे बड़ा राज्य होने के बाद भी उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने कोरोना का बेहतर प्रबंधन किया।

संक्रमण काल और लॉकडाउन के दौरान प्रवासियों की प्रदेश वापसी कुशल तरीके से कराने के कार्यों की तारीफ सात समंदर पार भी होने लगी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इसी कुशल प्रबंधन की तारीफ अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने की है। विश्वविद्यालय ने संकट के इस समय में प्रवासियों की घर वापसी के साथ उनको समायोजित करने के मैनेजमेंट पर स्टडी की है।

विश्विद्यालय ने अपने अध्ययन में दिखाया है कि कोरोना संकट की इस घड़ी में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार के हर कर्मचारी से बहुत ही बेहतर ढंग से काम लिया। स्टडी में पाया गया है कि कोरोना के इस दौर में भी सीएम ने सभी कार्यों को अच्छे तरीके से अंजाम देने पर अपना ध्यान लगाया।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक, “जब कोरोना संक्रमण से सारा विश्व परेशान था, तो योगी आदित्यनाथ सरकार ने सभी चुनौतियों को सहर्ष स्वीकारने के साथ ही प्रत्येक नागरिक को इस संकट से उबारने के लिए कार्य किया। सरकार ने प्रवासियों को परिवहन सुविधा देने के साथ ही उन्हें राशन किट भी बाँटे। दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों को मुफ्त राशन देने के साथ ही उनके कौशल के अनुसार घर में ही उन्हें काम भी उपलब्ध कराया।”

रिपोर्ट में लिखा गया है कि संकट की इस घड़ी में राज्य ने केंद्र सरकार के साथ मिलकर लोगों को संक्रमण से बचाने, रोजगार सुनिश्चित करने के लिए सभी दृष्टिकोण को अपनाया। सरकार ने बेहतर प्रबंधन के जरिए मुश्किल कार्य को भी काफी आसानी से निपटा दिया। सीमित संसाधनों के बावजूद सरकार ने न केवल लोगों की महामारी से सुरक्षा की, बल्कि उन्हें काम भी दिया।

हार्वर्ड विश्वविद्यालय का कहना है कि कोविड संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने तीन स्तरों पर काम किया। थर्मल स्क्रीनिंग के बाद आईसोलेशन की प्रकिया को अपनाकर संक्रमण की रफ्तार को धीमा कर दिया गया। स्वास्थ्य विभाग ने प्रवासियों, अन्य व्यक्तियों और उनके परिवारों की स्क्रीनिंग के लिए 90 हजार से भी ज्यादा टीमें गठित कर लोगों की जाँच की।

नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक 18,140 क्वारंटीन सेंटर बनाकर इसमें 15.15 लाख लोगों को रखा गया और संक्रमितों का इलाज किया गया।

आर्थिक अवसर पैदा किए

रिपोर्ट में योगी सरकार की सराहना करते हुए कहा गया है कि संकट के इस दौर में भी सरकार ने मौजूदा योजनाओं का उपयोग करने के साथ ही नए-नए एमओयू साइन कर प्रवासियों के लिए उनके घर के पास ही दीर्घकालिक रोजगार प्रदाय योजनाएँ तैयार कीं। इससे पहले नवंबर 2020 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी योगी सरकार के कार्यों की सराहना की थी। उत्तर प्रदेश सरकार ने आपदा में भी अवसर ढूँढा।

योगी सरकार ने रेलवे के साथ सहयोग कर 1604 ट्रेनों की व्यवस्था की और 21 लाख प्रवासियों की सकुशल वापसी कराई गई। रिपोर्ट के मुताबिक यह अपने राज्य में लौटने वाले प्रवासियों की संख्या का 80 फीसदी था। इसके अलावा सरकार ने प्रवासियों के लिए राज्य स्तरीय सुविधाओं की भी व्यवस्था की और सरकार की योजनाओं को प्रचारित करने का प्रयास किया। विश्वविद्यालय ने कोरोना प्रबंधन के लिए जमकर की सराहना करते हुए विश्व को उनसे सीखने की सलाह दी है।

हिंदुओं को हजारों साल क्यों गुलाम रखा गया, समझना मुश्किल नहीं है: कंगना रनौत ने सदगुरु के समर्थन में ट्रोल्स को लताड़ा

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने सदगुरु जग्गी वासुदेव का समर्थन करते हुए वामपंथी और दक्षिणपंथी ट्रोल्स को लताड़ लगाई है। कंगना ने अपनी पोस्ट में कहा, “वामपंथी ये कहकर सदगुरु को परेशान कर रहे हैं कि वे हिंदू संस्कृति योग और राष्ट्रवाद को बढ़ावा देते हैं। दक्षिणपंथी उन्हें यह कहकर तंग और ट्रोल कर रहे हैं कि वे लिबरल हैं और हिंदू देवताओं और धर्मग्रंथों का सम्मान नहीं कर रहे हैं।”

अपने अगले ट्वीट में कंगना ने लिखा,  “यह समझना ज्यादा मुश्किल नहीं है कि हिंदुओं को हजारों साल गुलाम क्यों रखा गया। कोई रणनीति नहीं, कोई योजना नहीं, कोई अलाइनमेंट नहीं। बेवकूफ लोग। क्या आप उन्हें कावेरी को बचाने, ग्रामीण बच्चों की पढ़ाई कराने या मंदिरों को बचाने में सपोर्ट कर सकते हैं? अगर नहीं तो चुपचाप रहिए।”

बता दें कि इस समय कृष्ण और यशोदा के रिश्ते को माँ-बेटे के रिश्ते से ऊपर बताने के कारण सदगुरु को ट्रोल किया जा रहा है। इसी बाबत कंगना ने अपने दोनों ट्वीट किए हैं। इससे पहले भी कंगना रनौत सदगुरु को ट्रोल करने वाले लोगों को पहले भी करारा जवाब दे चुकी हैं। 8 मार्च को जब उन्होंने स्त्री को एक आयाम बताया था तो सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें उलटा-सीधा कहना शुरू कर दिया था।

उस समय भी कंगना ने सदगुरु के लिए लिखा था, “जिन इडियट्स को चूहों का आईक्यू और कीड़ों का अस्तित्व मिला है, वे स्त्री को एक लिंग नहीं बल्कि आयाम बताने पर सदगुरु को निशाना बना रहे हैं। वे यह जानकर हैरान रह जाएंँगे कि उनके पास सूर्य और चंद्रमा हैं, उनकी माँ और पिता, मर्द और स्त्री दोनों उनमें हैं। बेवकूफ अपने आपकों शर्मिंदा करना बंद करें।”

उल्लेखनीय है कि सदगुरु वासुदेव कुछ दिन पहले अपनी एक पुरानी वीडियो वायरल होने के बाद विवादों में आए। इसमें उन्होंने कहा था:

यशोदा, कृष्ण की पालक माँ। वो अपने पुत्र के साथ गहरे प्रेम में थीं। वो कृष्ण को सिर्फ़ बेटा नहीं, उससे बढ़कर मानती थीं। जब कृष्ण छोटे थे, तो ये सब (प्यार) उस छोटे से बच्चे के लिए था। लेकिन जब वो (कृष्ण) बड़े हुए तो काफ़ी तेज़ी से बढ़े। उनका विकास अभूतपूर्व था। कोई भी माँ अपनी ममता को इस तरह के विकास के साथ समायोजित नहीं कर सकती। इसलिए कृष्ण के 5-6 साल के होते-होते यशोदा का मातृत्व कहीं खो गया। उसके बाद वो उनकी माँ नहीं रह सकती थीं। वह एक तरह से उनकी प्रेमिका बन गईं। उन्होंने बस उनसे प्रेम किया। तो यशोदा का कृष्ण के साथ संबंध इस तरह से बढ़ा कि वो भी गोपियों में से एक बन गईं। वो भी रास का हिस्सा थीं। वो राधा को पसंद नहीं करती थीं क्योंकि उन्हें लगता था कि ये लड़की बहुत तेज है।”

अपने इस बयान के लिए सदगुरु हाल में माफी माँग चुके हैं। उन्होंने एक अन्य कार्यक्रम की वीडियो को साझा करते हुए उसमें कहा था कि उनके कहने का वो अर्थ नहीं था जो ले लिया गया। वह बस कहना चाहते थे कि कृष्ण प्रेम हैं, प्रेम का अवतार हैं और लोगों के पास उन्हें प्रेम करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है। लेकिन बावजूद इसके यदि किसी को दुख हुआ तो वह माफी माँगते हैं।