Home Blog Page 3901

पॉर्न फिल्म में दिखने के शौकीन हैं जो बायडेन के बेटे, परिवार की नंगी तस्वीरें करते हैं Pornhub अकॉउंट पर शेयर: रिपोर्ट्स

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन के बेटे हंटर बायडेन अपनी एक गलती के कारण विवादों में हैं। दरअसल, साल 2019 में उन्होंने अपना खराब लैपटॉप ठीक कराने के लिए रिपेयर शॉप पर दिया था, लेकिन बाद में वह उसे कभी वापस लेकर नहीं आए। अब उसी लैपटॉप में मौजूद कंटेंट की फॉरेंसिक जाँच हुई है।

साल 2020 में चुनाव के समय इस लैपटॉप को लेकर ट्रंप के वकील रूडी गुलियानी ने सवाल उठाए थे। गुलियानी ने आरोप लगाया था कि उस लैपटॉप में नाबालिग लड़कियों की नग्न तस्वीरें और कुछ संदेश थे। अब उसी लैपटॉप को लेकर ब्रिटिश रिपोर्ट्स ने दावा किया है कि लैपटॉप की हार्डड्राइव से 2000 फोटो, 1 लाख 54 हजार ईमेल, 1,03,000 संदेश बरामद हुए हैं। फॉरेंसिक टीम ने भी इनकी पुष्टि कर दी है।

डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें हंटर के लैपटॉप के हार्ड ड्राइव की कॉपी मिली थी, जिसके बाद मैरीमैन एंड एसोसिएट्स नाम की फर्म से साइबर एक्सपर्ट्स को इकट्ठा करके उसकी प्रमाणिकता की जाँच करवाई गई। जाँच में यही सामने आया कि लैपटॉप में मौजूद अप्रैल 2019 से पहले का डेटा हंटर बायडेन का है, जिस पर लगे टाइम स्टैम्प को देख लगता है कि उसके साथ कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है।

बता दें कि मैरीमैन एंड एसोसिएट्स फर्म के संस्थापक ब्रैड मैरीमैन FBI के अनुभवी सुपरवाइजरी स्पेशल एजेंट हैं। कंपनी अपनी जाँच में उन्हीं फोरेंसिक उपकरणों का इस्तेमाल करती है जिसका उपयोग संघीय कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने एक आपराधिक जाँच में किया था। ऐसे में इस रिपोर्ट पर संदेह खड़ा करना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन मालूम हो कि इस फर्म द्वारा जारी की गई ये रिपोर्ट और जो बायडेन के बेटे के समर्थन में दिया गया बयान एक दूसरे से मेल नहीं खाते

बायडेन ने अपने बेटे के लैपटॉप से वायरल हुई चीजों को लेकर कहा था कि ये कूड़े का ढेर है। कुछ डेमोक्रेट्स व हंटर बायडेन ने खुद भी इस हरकत के लिए रूसी खुफिया एजेंसी को जिम्मेदार ठहराया था। हालाँकि, 4 अप्रैल को हंटर ने स्वीकार कर लिया कि वह मिला लैपटॉप उनका हो सकता है। उन्होंने कहा, “वह वो लैपटॉप हो सकता है जिसे मुझसे चुराया गया था। हो सकता है कि मुझे हैक किया गया। इसके पीछे रूसी खूफिया एजेंसी हो सकती है, जिसने या तो मुझसे ये चुराया हो या फिर उस लैपटॉप को चुराया हो जो मेरे पास था। “

अश्लील वीडियो और वेश्यावृत्ति के शौकीन हैं हंटर बायडेन

फॉरेंसिक एजेंसी को बायडेन के लैपटॉप से कई तस्वीरें मिली हैं। एक तस्वीर में वह घुटनों पर झुकी एक महिला के बाल खींचते नजर आ रहे हैं। पॉर्न वेबसाइट पॉर्नहब पर उनका अकॉउंट RHEast नाम से है। उनके अकॉउंट को 66 badge मिले हुए हैं। वेबसाइट पर एक बैच 50 सब्सक्राइबर होने, 500 वीडियो देखने और एचडी में पॉर्न देखने पर मिलता है।

वेबसाइट से लिया गया स्क्रीनशॉट

एक वीडियो में उनके ऊपर दो वैश्याओं को भी अर्धनग्न अवस्था में बैठे देखा जा सकता है। इसके अलावा लैपटॉप की हार्ड ड्राइव में पॉर्न फिल्म भी हैं जिसमें वह खुद मुख्य रूप से नजर आ रहे हैं। रिपोर्ट बताती है कि हंटर पहले अपने लैपटॉप से वीडियो शूट करते थे, फिर अपने आईपैड और फोन में भी उसकी फुटेज लेते थे और बाद में लैपटॉप का वेबकैम खुला छोड़ कर वह अपने सेक्स सीन को दोबारा से देखते थे।

वेबसाइट से लिया गया स्क्रीनशॉट

हंटर बायडेन के पास सैंकड़ों महिलाओं की नग्न तस्वीरें हैं। बिजनेस डॉक्यूमेंट्स के नाम बायडेन ने अपनी परिवारिक तस्वीरों के साथ उस डॉक्यूमेंट में सेक्स टेप, नंगी तस्वीरें और वैश्याओं की फोटो भी मिलाई हुई थीं। इतना ही नहीं, एक तस्वीर में हॉलीवुड लोकेशन मिली है जबकि एक और तस्वीर है जिसमें महिला सिर्फ अपने नितंब दिखा रही है। द गेटवे पंडित के मुताबिक, ये तस्वीर बायडेन परिवार की किसी सदस्य की है।

बरामद हुए संदेशों से ये भी पता चला है कि हंटर बायडेन अपने होटल में ड्रग मंगवाते थे और सेक्स से पहले या सेक्स के बाद में पार्टनर के साथ उसे लेते थे। तस्वीर में वियाग्रा पिल की 100mg की बोतल भी दिखी है। इसके अलावा संदेशों से ये भी पता चला है कि वह एक डायना नाम की महिला से होटल में औरतों को बुलवाते थे और वही महिला उन्हें ड्रग भी ऑफर करती थी। ये डायना नाम की महिला नवंबर 2019 में घर से ड्रग रैकेट चलाने के आरोप में गिरफ्तार हुई थी। लेकिन बाद में अपनी जान पहचान का इस्तेमाल करके छूट गई। जो बायडेन के साथ हुई हंटर की बातचीत से भी यह पता चलता है कि उन्हें हंटर की ड्रग्स वाली बात का पता था।  

यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ समेत 51 हिन्दू मंदिर होंगे सरकारी नियंत्रण से मुक्त: CM तीरथ सिंह रावत

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने राज्य के 51 हिन्दू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने का निर्णय लिया है। CNN News 18 की रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने यह निर्णय उस विरोध के चलते लिया है जो सरकार द्वारा मंदिरों के प्रबंधन को अपने अधिकार क्षेत्र में लेने के फैसले के बाद शुरू हुआ था।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल में जनवरी 2020 में राज्य के मंदिरों के प्रबंधन के लिए उत्तराखंड चार धाम देवस्थानम बोर्ड के गठन का निर्णय लिया गया था। राज्य सरकार ने चारधाम श्राइन मैनेजमेंट बोर्ड ऐक्ट 2019 भी पारित किया था जिसके अंतर्गत यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ समेत 51 मंदिरों का प्रबंधन सरकार के अधिकार क्षेत्र में आ गया था।

सरकार के इस निर्णय के बाद पुजारियों द्वारा इसका भारी विरोध शुरू हो गया था जो अभी भी चल रहा था। सीएम तीरथ सिंह रावत का निर्णय ऐसे समय आया है जब पूरे देश में हिन्दू मंदिरों को सरकार के नियंत्रण से मुक्त कराने की माँग उठ रही है।

तीरथ सिंह रावत ने कहा कि वो पूरे अधिनियम की जाँच करेंगे और 51 मंदिरों को इस अधिनियम के अधिकार क्षेत्र से बाहर लाने के लिए कदम उठाएँगे। भाजपा ने तमिलनाडु चुनावों में भी यह वादा किया है कि राज्य में उनकी सरकार बनने के बाद मंदिरों के प्रबंधन के लिए एक अलग बोर्ड का गठन किया जाएगा।

उत्तरखंड के सीएम तीरथ सिंह रावत का यह निर्णय विश्व हिन्दू परिषद के दल से उनकी मुलाकात के बाद आया है। संयोग से 9, अप्रैल सीएम रावत का जन्म दिवस भी है।

ओवैसी के पीएम मोदी पर तंज का शाह ने दिया जवाब, कहा- आप भी किसी हिंदू के साथ फोटो खिंचवा लें

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक मुस्लिम युवक के साथ फोटो वायरल हुई थी। इसको लेकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पीएम मोदी पर तंज कसा था। अब गृहमंत्री अमित शाह ने ओवैसी पर पलटवार किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शाह ने ओवैसी को किसी हिंदू के साथ फोटो खिंचवाने की बात कही है। कहा जा रहा है कि यह फोटो पश्चिम बंगाल में एक चुनावी रैली के दौरान की है।

ओवैसी ने गुरुवार को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक वीडियो शेयर किया था। वीडियो में वे एक जनसभा को संबोधित करते हुए नजर आ रहे हैं। इस दौरान ओवैसी वायरल फोटो का जिक्र करते हुए ट्रिपल तलाक समेत कई मुद्दों पर पीएम पर निशाना साधते हुए दिखाई दिए। वहीं, सोशल मीडिया पर पीएम मोदी की वायरल फोटो लोगों द्वारा काफी पसंद की जा रही है।

ओवैसी ने कहा, “अभी कुछ दिन पहले अखबार में और सोशल मीडिया पर एक तस्वीर आई थी, जिसमें मोदी जी के पास एक युवक खड़ा है, उसके सिर पर टोपी है। मोदी जी खड़े हैं और वह उनके कान में कुछ कह रहा है। मीडिया के लोगों ने इसको लेकर मुझसे सवाल किया कि उसने क्या बोला होगा। इस पर मैंने कहा कि उसने मोदी जी के कान में कहा है कि मोदी जी मैं बांग्लादेशी नहीं हूँ।”

पश्चिम बंगाल में शनिवार को चौथे चरण का चुनाव है। चुनाव से ठीक एक दिन पहले गृहमंत्री अमित शाह कोलकाता पहुँचे। इस दौरान उन्होंने बंगाल में तीन चरणों के हुए चुनाव में 91 में से 68 सीटों पर जीतने का दावा किया है। साथ ही ममता बनर्जी और असदुद्दीन ओवैसी को आड़े हाथों लिया।

शाह ने कहा कि बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं पर लगातार हमला हो रहा है। हमारे प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष पर विगत दो-तीन दिनों में हमला हुआ। इन हमलों के खिलाफ TMC के एक भी नेता की टिप्पणी नहीं आई। ये लोग मौन इशारा कर रहे हैं कि आप हिंसा करिए।

उन्होंने कहा कि दीदी बंगाल की जनता आपके खिलाफ है, क्योंकि बंगाल में कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। बंगाल की जनता आपके खिलाफ है, क्योंकि यहाँ पर बिना रोकटोक के घुसपैठ हो रही है। बता दें कि 294 सीटों वाले बंगाल में 8 चरणों में मतदान होना है। मतगणना 2 मई को होगी।

रश्मि सावंत को हिन्दू होने पर ऑक्सफोर्ड के अभिजीत सरकार ने किया प्रताड़ित: पीएम बोरिस जॉनसन से कार्रवाई की अपील

यूनाइटेड किंगडम में भारतीय प्रवासी संगठनों ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय विवाद के संबंध में प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को पत्र लिखकर हिंदुओं के विरुद्ध बढ़ रहे द्वेष पर चिंता व्यक्त की है। संगठनों ने रश्मि सावंत के प्रति अभिजीत सरकार के कट्टर विचारों पर भी चिंता व्यक्त की है।

पत्र में कहा गया है, “डॉ. अभिजीत सरकार द्वारा सोशल मीडिया के ट्रोल्स को रश्मि सावंत के विरुद्ध भड़काया गया जिससे सावंत को अंततः देश छोड़ना पड़ा। डॉ. सरकार लगातार रश्मि सावंत की सोशल मीडिया स्टॉकिन्ग कर रहे थे और उनकी हिन्दू पहचान के लिए उन्हें एवं उनके परिवार पर हमले कर रहे थे। इस कारण सावंत अवसाद की शिकार हो गईं थी और अंततः उन्हें अस्पताल में भी भर्ती होना पड़ा।”

पत्र में यह भी कहा गया है कि थेम्स वैली पुलिस को हेट क्राइम के लिए डॉ. सरकार की जाँच करनी चाहिए और उन पर मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। डॉ. सरकार एक्सेप्शनल टैलेंट वीजा पर यूके आए हैं और पत्र में यह माँग की गई है कि होम ऑफिस को सोशल मीडिया पर डॉ. सरकार के भेदभावपूर्ण और घृणास्पद क्रियाकलाप के कारण उनके वीजा स्टेटस को रिव्यू किया जाना चाहिए।

इस पत्र पर 119 संगठनों ने हस्ताक्षर किए हैं जिनमें फ्रेंड्स ऑफ इंडिया सोसायटी इंटरनेशनल (FISI), अक्षय पात्र फाउंडेशन यूके, हिन्दू काउंसिल यूके, हिन्दू फोरम ऑफ यूरोप, विश्व हिन्दू परिषद यूके और नेशनल काउंसिल ऑफ हिन्दू टेम्पल (NCHT) जैसे संगठन शामिल हैं।

वहीं ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रवक्ता ने कहा है कि हम किसी पर कोई बयान जारी नहीं करते हैं किन्तु एक निजी और गैर-विश्वविद्यालयीन एकाउंट के द्वारा हैरेसमेंट और सोशल मीडिया पर कमेंट किए जाने के केस की स्वतंत्र जाँच की जा रही है। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय किसी भी आपत्तिजनक बयान का समर्थन नहीं करता है।  

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के छात्र संघ के अध्यक्ष के तौर पर रश्मि सावंत के इस्तीफे के बाद डॉ. अभिजीत सरकार के हिन्दूफोबिक कमेंट सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। ऐसे ही एक वायरल पोस्ट में डॉ. सरकार ने माता सरस्वती की फोटो शेयर की और लिखा, “मुझे याद है कि जब मैं बच्चा था तब मैंने सरस्वती की कई मूर्तियों को तोड़ा था। मैं बचपन से ही गैर-धार्मिक हूँ। कई अन्य पोस्ट में डॉ. सरकार को सावंत पर भी टिप्पणी करते हुए देखा जा सकता है। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने डॉ. सरकार के निलंबन की माँग भी की।

क्षणे नेत्री, क्षणे अभिनेत्री… वाह! जया ‘बच्चन’ जी मजा आ गया, सॉरी जया ‘भादुड़ी’

चुनाव अकेला नहीं आता। अपने साथ मंच, प्रपंच, स्क्रीनशॉट, ह्वाट्सऐप चैट, ऑडियो, वीडियो, पिक्स, लीक्स, प्रचार, अधिकार, नमस्कार, आभार, स्ट्रैटेजी, ट्रैजेडी, नारे, वादे, इरादे, आरोप, प्रत्यारोप, चुनावी विचारक, सिलेब्रिटी प्रचारक… और प्रशांत किशोर लेकर आता है।

इसी संस्कृति के लिए सिलेब्रिटी प्रचारक जया बच्चन भी ममता बनर्जी के समर्थन में मुंबई से चलकर कोलकाता आईं। आती भी न कैसे? ममता बनर्जी ने देश भर के नेताओं से मिलकर लड़ने की अपील जो की थी।

जया जी ने आते ही प्रेस कॉन्फ्रेन्स किया। बोलीं: मैं आज जया बच्चन हूँ, पर कल जया भादुड़ी थी और मेरे पिता तरुण कुमार भी भादुड़ी ही थे। अर्थात्; न समझना कि मैं उत्तर प्रदेश या मुंबई से आई हूँ। मैं बंगाली हूँ। ऐसे में ममता बनर्जी के ‘यूपी, बिहार वाले बाहर से आकर बंगाल पर कब्जा करना चाहते हैं’ वाली बात के जवाब में मुझे बाहर वाला नहीं बताया जा सकता।

वे बताती हैं कि मेरे पार्टी के नेता ने ममता जी के प्रति उनके समर्थन की अभिव्यक्ति के लिए मुझे चुना। अखिलेश ने उन्हें भेज कर अच्छा किया। ख़ुद आते तो क्या पता ममता दीदी उन्हें भी यूपी से आया बाहर वाला बता बैठती। वे तो एक पार्टी के मालिक भी हैं। कहीं ये बात न फैल जाती कि उत्तर प्रदेश से बंगाल आए समाजवादी पार्टी के नेता बंगाल पर कब्जा करना चाहते हैं।

भला हो जया जी का जिन्होंने एक बंगाली के रूप में आकर अखिलेश यादव और ममता जी, दोनों को धर्मसंकट से बचा लिया!

प्रेस कॉन्फ्रेन्स में जया बच्चन चिंतित दिखीं। उन्होंने बताया वे यहाँ अभिनय करने नहीं आईं। अब यह बताने की क्या बात हुई? सबको पता है राजनीति करने आईं हैं। अब राजनीति में अभिनय हो जाए तो वो अलग बात है। आगे बताया कि लोकतंत्र खतरे में है इसलिए आवश्यक है कि उसकी रक्षा की जाए। अब इसमें कौन सी नई बात है? पिछले सात वर्षों में चुनावी दिनों में संभावित परिणामों की आड़ में अक्सर लोकतंत्र खतरे में चला जाता है। कहीं वोटिंग मशीन के नाम पर तो कहीं अंतर्मन की आवाज के नाम पर। जनता को समझ नहीं आता कि लोकतंत्र ख़तरे में है, इसलिए जया जी जैसी सिलेब्रिटी विचारक जनता को बताते हैं। ये इधर बताते रहते हैं और जनता उधर बार-बार अपने मूड से इनके लिए लोकतंत्र को खतरे में डालती रहती है।

जया जी समाजवादी पार्टी की सांसद हैं पर उन्हें अपनी पार्टी के नेताओं के बयान और आचरण से आज तक लोकतंत्र खतरे में जाता नहीं दिखा। बंगाल में चुनाव के पहले साढ़े तीन वर्षों से सैकड़ों राजनीतिक विरोधियों की हत्या के बावजूद खतरे में नहीं दिखा। अब उन कर्मों के संभावित परिणाम का समय आया तो लोकतंत्र खतरे में चला गया।

जया जी अपने साथ ढेर सारी सीख भी ले आई हैं। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने ऐसी ही एक सीख का पिटारा खोला और पत्रकारों से बोलीं; आप सब तो इसी बंगाल की मिट्टी के हैं। जो भी लिखें यहाँ के अनुसार (हमारे अनुसार पढ़ा जाए) लिखें। अपने बॉस के अनुसार न लिखें।

बताइए, लोकतंत्र की रक्षा के अपने इस महायज्ञ में वे पत्रकारों को भी शामिल कर लेना चाहती हैं; कि जो मंत्र पढ़कर हम स्वाहा बोल रहे हैं, वही मंत्र पढ़कर आप भी स्वाहा बोल दें तो बस मजा ही आ जाए। लोकतंत्र का महायज्ञ पूर्ण हो जाए। नेता खुलेआम पत्रकारों को बता रहे हैं कि क्या लिखना है और कैसे लिखना है! अर्थात्; फ़िलहाल तो आप पर विश्वास नहीं है। हाँ, यदि हमारे अनुसार रिपोर्ट कर दें तो शायद यह विश्वास लौट आए।

संसद से लेकर सार्वजनिक मंचों तक पर जया जी के अपने आचरण का एक पूरा इतिहास रहा है। और वे इस इतिहास में अक्सर एक नया अध्याय जोड़ देती हैं। कह सकते हैं उसे रेन्यू कर डालती हैं। जैसे वोट की अपील करते हुए तो नेत्री का आचरण करती हैं पर जब उसी अपील के समय कोई वोटर फोटो वग़ैरह लेना चाहे तो वे तुरंत अभिनेत्री बन जाती हैं। इसी क्रम में उन्होंने हावड़ा में सेल्फ़ीरत एक उत्साहित समर्थक को धक्का दे दिया। क्षण भर में नेत्री से अभिनेत्री बन लेना भी एक कला ही है। अब यह राजनीतिक कला है या कलात्मक राजनीति, यह शोध का विषय हो सकता है।

हो सकता है शोध के इस विषय पर शायद कोई उत्साही छात्र किसी दिन जेएनयू में पीएचडी कर ही ले। वैसे ममता बनर्जी के लिए जया बच्चन द्वारा गठरी बाँधकर लाया गया समर्थन दीदी की जीत के लिए काफी है या नहीं, इसकी जानकारी 2 मई को ही होगी।

ममता बनर्जी को अर्धसैनिक बलों पर आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए चुनाव आयोग का नोटिस: जवाब न देने पर होगी कार्रवाई

पश्चिम बंगाल में चुनावी संग्राम के बीच केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को लेकर राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आपत्तिजनक बयानों को लेकर चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस जारी किया है। चुनाव आयोग ने उनके बयानों को ‘पूरी तरह से गलत और भड़काऊ’ बताते हुए उन्हें शनिवार सुबह 11 बजे से पहले अपना पक्ष रखने के लिए कहा है।

अगर ममता बनर्जी खुद के रुख को स्पष्ट करने में विफल रहती हैं, तो उनके खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के साथ-साथ आईपीसी की धारा 186, 189, 505 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

आयोग ने जोर देकर कहा है कि उसने 7 अप्रैल को TMC सुप्रीमो द्वारा दिए गए बयानों को चुनावी प्रक्रिया के दौरान “केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों को संगठित और सशक्त बनाने” के प्रयास के रूप में समझा। लेकिन, आयोग ने कहा कि इस तरह की टिप्पणी इन फोर्सेज को हतोस्ताहित करता है।

इससे पहले गुरुवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के कूच बिहार में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों पर ग्रामीणों को परेशान करने और महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया था। उन्होंने केंद्रीय बलों पर केंद्र सरकार के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया था। अलीपुरद्वार जिले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए, TMC सुप्रीमो ने चुनाव आयोग पर CRPF, CISF, BSF और ITBP की “ज्यादतियों” पर ऑंखें मूँदने का आरोप लगाया था।

उन्होंने ये भी कहा था कि भाजपा बाहर से लाखों गुंडों को लाकर बंगाल पर कब्जा करना चाहती है। लेकिन, ये इतना आसान नहीं है। पहले दिल्ली के बारे में सोचो उसके बाद बंगाल की तरफ ध्यान दो।

विधानसभा चुनावों के बीच ममता को चुनाव आयोग का दूसरा नोटिस

राज्य में विधानसभा चुनावों के दौरान ममता बनर्जी को चुनाव आयोग का यह दूसरा नोटिस है। 7 अप्रैल को, बनर्जी को अल्पसंख्यक मतदाताओं को विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच अपने वोटों को विभाजित नहीं करने की अपील के साथ आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) के उल्लंघन के लिए नोटिस दिया गया था।

सबसे ज्यादा वैक्सीन मिली-5 लाख बर्बाद किया, अब केंद्र से रार: उद्धव सरकार का कोरोना कुप्रबंधन, विरोध में कारोबारी भी

महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने केंद्र से कोरोना वैक्सीन की खेप की माँग की है और इन सबके बीच उस पर वैक्सीन की बर्बादी के भी आरोप लग रहे हैं। राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जो बैठक हुई, उसमें उद्धव ठाकरे फोन पर व्यस्त दिखे। ‘महा विकास अघाड़ी (MVA)’ गठबंधन के सूत्रधार NCP सुप्रीमो शरद पवार कह चुके हैं कि केंद्र सरकार की तरफ से कोई दिक्क्त नहीं है और पूर्ण सहयोग मिल रहा है।

सबसे पहले आँकड़ों की जुबानी राज्य के मौजूदा हालात की बात कर लेते हैं। महाराष्ट्र में फ़िलहाल कोरोना के 5,21,317 सक्रिय मरीज हैं, जो देश के कुल सक्रिय कोरोना संक्रमितों का 53.32% है। पिछले 1 दिन में राज्य में 56,286 नए केस सामने आए हैं। मृतकों की संख्या 57,028 पहुँच गई है, जो देश का 34% है। भारत में पिछले 1 दिन में कोरोना के 1,31,878 नए मामले सामने आए। जैसा कि आप देख सकते हैं, उनमें से 43.44% अकेले महाराष्ट्र से आए।

महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड आने वाली ट्रेनों में जगह नहीं है। नाइट कर्फ्यू व लॉकडाउन लगने के कारण वहाँ उन्हें काम नहीं मिल रहा है। ये प्रवासी मजदूर जब लौटेंगे तो वे यूपी-बिहार में भी संक्रमण का कैरियर बन सकते हैं। इन राज्यों में भी मेडिकल सलाहों को दरकिनार कर लोग मास्क और सैनिटाइजर का प्रयोग नहीं कर रहे हैं।

अब रमजान का महीना भी आने वाला है। मुस्लिम नेताओं ने सीएम को पत्र लिख कर कहा है कि उन्हें इस महीने में ढील दी जाए, ताकि वो मजहबी गतिविधियाँ पूरी कर सकें। रमजान ख़त्म होने के बाद ईद आएगा और बाजारों में चहल-पहल इतनी बढ़ जाएगी कि उसे नियंत्रित करना मुश्किल होगा, खासकर एक ‘सेक्युलर’ सरकार के लिए। पिछली बार भी ईद के दौरान मुंबई के बाजारों की स्थिति बदतर हो गई थी।

राज्य में कोरोना के दौरान दी जाने वाली Ramdesivir इंजेक्शन की भी ब्लैक मार्केटिंग चालू है। मुंबई पुलिस ने अँधेरी की एक दुकान से ऐसे 272 इंजेक्शन जब्त किए। इन्हें ब्लैक मार्केटिंग के लिए रखा गया था। इसी तरह अँधेरी ईस्ट के सरफराज हुसैन नामक युवक को ऐसे 12 शीशी के साथ धरा गया था। सरकार ने चेताया है कि ब्लैक मार्केटिंग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इससे पता चलता है कि राज्य में ऐसी गतिविधियाँ धड़ल्ले से चालू हैं।

महाराष्ट्र में कोरोना वैक्सीन की बर्बादी

एक समय था जब विपक्षी पार्टियाँ वैक्सीन को लेकर अफवाह फैला रही थी। तरह-तरह के ऐसे बयान आ रहे थे, जिससे जनता के मन में भी शंका हो जाए। दुनिया के 70 से अधिक देशों ने भारत की वैक्सीन लगवाई और अब जब देश में टीकाकरण की रफ़्तार तेज़ करने के लिए सारे प्रयास किए जा रहे हैं, तब ये नेता कह रहे हैं कि देश के लोगों को वैक्सीन में प्राथमिकता नहीं दी गई। जिन राज्यों में इन दलों की सरकारें हैं, वहाँ स्थिति और बदतर है।

राजधानी मुंबई में 51 वैक्सीनेशन सेंटर बंद कर दिए गए हैं। उनका कहना है कि वैक्सीन उपलब्ध ही नहीं है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे का कहना है कि उनके राज्य को हर सप्ताह 40 लाख वैक्सीन की डोज चाहिए। पुणे में भी 100 वैक्सीन सेंटरों को बंद कर दिया गया है। उनका कहना है कि 7 लाख से बढ़ा कर राज्य को 17 लाख डोज दी जा रही है, लेकिन ये पर्याप्त नहीं है और आधी जनसंख्या वाले गुजरात को कहीं अधिक डोज मिले हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा कि राज्य की सरकार कोरोना के कुप्रबंधन को छिपाने के लिए भटका रही है। महाराष्ट्र सरकार के नेता अमेरिका की तर्ज पर 18 वर्ष से ऊपर के सभी लोगों को वैक्सीन लेने की अनुमति देने को कह रही है। वहीं केंद्र सरकार का कहाँ है कि कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित महाराष्ट्र में 5 लाख से अधिक वैक्सीन की डोज बर्बाद कर दी गई।

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर का कहना है कि महाराष्ट्र को अब तक कोरोना वैक्सीन की 1,06,19,190 डोज सप्लाई की गई है, जिसमें से 90,53,523 का प्रयोग किया गया और 5 लाख बर्बाद हो गए। उन्होंने कहा कि 7,43,280 डोज पाइपलाइन में हैं और 23 लाख अभी भी उपलब्ध हैं, जो एक सप्ताह चल सकता है। उन्होंने कहा कि योजना के अभाव में वैक्सीन की बर्बादी हुई। अब इसे लेकर राज्य में सत्ता पक्ष और विपक्ष में बयानबाजी तेज़ है।

महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान को कोरोना वैक्सीन की सबसे अधिक डोज

अब तक जिन राज्यों को सबसे ज्यादा वैक्सीन दी गई गई है, उनमें महाराष्ट्र नंबर एक पर है। दूसरे नंबर पर गुजरात है, जिसे 1,05,19,330 वैक्सीन की डोज दी गई, जबकि तीसरे नंबर पर राजस्थान को कोरोना वैक्सीन की 1,04,95,860 डोज दी गई। महाराष्ट्र और राजस्थान में भाजपा विरोधी दलों की सत्ता है। वैक्सीन की डोज देने का राष्ट्रीय औसत 37,11,856 है। इन राज्यों को इससे लगभग 3 गुना अधिक दिया गया।

कारोबारी कर रहे हैं लॉकडाउन का विरोध

महाराष्ट्र के कारोबारी अब वहाँ फिर से लगाए गए कड़े लॉकडाउन का विरोध कर रहे हैं। व्यापारियों और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लोगों ने इस लॉकडाउन का विरोध किया है। ये सभी उन क्षेत्रों के लोग हैं, जिनका कारोबार देश भर में चले लंबे लॉकडाउन के बाद हुए अनलॉक के कारण अभी फिर से चालू होना शुरू ही हुआ था, लेकिन फिर से बंदी की मार ने इन्हें बेहाल कर दिया है। महाराष्ट्र के इस लॉकडाउन से न सिर्फ 40,000 करोड़ रुपए का नुकसान होगा, बल्कि भारत का GVA (Gross Value Added) विकास भी 0.32% गिरेगा।

इसका असर देश पर ज़रूर पड़ेगा, क्योंकि महाराष्ट्र GSDP (Gross State Domestic Product ) के मामले में देश में सबसे ज्यादा योगदान देता है। सरकार ने प्राइवेट सेक्टर पर फिर से तमाम तरह की पाबंदियाँ लगा दी हैं। व्यापारियों की कई संस्थाओं ने सड़क पर आकर विरोध-प्रदर्शन किया। इसी तरह की एक ‘बोरीवली ईस्ट व्यापारी एसोसिएशन’ के दुकानदारों ने ‘मत छीनो हमारा कारोबार, हमारा भी है घर-बाड़’ लिखे पोस्टर लगाए।

उन्होंने ‘लॉकडाउन को हटाओ, व्यापारियों को बचाओ’ और ‘कोरोना से मरेंगे कम, लॉकडाउन से मरेंगे हम’ लिखे पोस्टर्स भी लगवाए। मुंबई के रेस्टॉरेंट्स, बार और कैफे ने इंस्टाग्राम पर ‘मिशन रोजी-रोटी’ ट्रेंड चलाया। उनका पूछना है कि IPL से लेकर फिल्म शूट और चुनावी रैलियाँ तक जारी हैं, फिर उन्हें ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है? मुंबई के 100 से अधिक ऐसे प्रतिष्ठानों ने इसमें हिस्सा लिया।

स्थिति इतनी खराब हो गई है कि क्षेत्र में 20% से अधिक रेस्टॉरेंट्स हमेशा के लिए बंद हो गए हैं, क्योंकि उन्हें भारी हानि हुई है। deGustibus हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड के CEO और नेशनल रेस्टॉरेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के अध्यक्ष अनुराग कटरियार का कहना है कि नाइट कर्फ्यू से रेस्टॉरेंट्स पर भारी मार पड़ रही है, क्योंकि 8 बजे के बाद या यही वो समय है, जब डिनर टाइम होता है और उनका 75% कारोबार यहीं से आता है।

अस्पतालों का हाल बेहाल, चिता जलाने के लिए लकड़ी नसीब नहीं

महाराष्ट्र की सरकार ने हड़बड़ी में राज्य की प्राइवेट अस्पतालों को अपने ICU को कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित रखने का आदेश दे दिया, जिससे त्वरित मेडिकल आवश्यकताओं वाले अन्य मरीजों को दिक्कत आ गई। कोरोना के कारण स्थिति इतनी खराब है कि औरंगाबाद में 8 हिन्दुओं के शवों को एक ही चिता पर जला डाला गया। चिता जलाने के लिए अस्थायी श्मशानों में जुगाड़ लगाया जा रहा है। सूखी लकड़ियाँ तक नहीं मिल रही।

अस्पतलों को 80% बेड्स कोरोना मरीजों के लिए ही खाली रखने का आदेश दिया गया है। कोविड सेंटर में शराब-गाँजा की पार्टी का वीडियो वायरल होने से भी किरकिरी हुई है। महाराष्ट्र के अस्पतालों की स्थिति का अंदाज़ा इसी से लगा लीजिए कि वहाँ के मरीज हैदराबाद जाकर इलाज करा रहे हैं। हैदराबाद के हर अस्पताल में 20-30% तक बेड्स पर महाराष्ट्र के मरीज हैं।

इतना ही नहीं, महाराष्ट्र के अस्पतालों में कोरोना के नाम पर कई टेस्ट्स करा कर रुपए भी वसूले जा रहे हैं। खुद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने इस बात को स्वीकार किया है। उन्हें अस्पतालों को चेतावनी देनी पड़ी है। एक-एक कोरोना मरीज का बिल 50 हजार से 1 लाख रुपए या उससे भी ज्यादा बना दिया जा रहा है। Remdesivir इन्जेक्शन के ज्यादा दाम वसूले जा रहे हैं। सरकार द्वारा सेलिंग प्राइस कम करने के बावजूद ऐसा किया जा रहा है।

सरकार के भीतर भी आपाधापी

जून 2020 में जब भारत में कोरोना की लहर तेज़ हो रही थी, तभी सुशांत सिंह राजपूत की मौत ने सभी को चौंका दिया। इस ‘आत्महत्या’ को लेकर कई सवाल खड़े हुए और तब CBI जाँच का विरोध करते हुए इसी महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई पुलिस की तुलना ‘स्कॉटलैंड यार्ड’ से की और अब इसी पुलिस के अधिकारी उसके दावों की पोल खोल रहे हैं। खुलासों के बाद राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख को इस्तीफा देना पड़ा।

सुशांत वाले मामले के बाद इस साल एंटीलिया के बाहर कार में बम रख कर खड़े करने का मामला सामने आया। पुलिस अधिकारी व पूर्व शिवसेना नेता सचिन वाजे इस प्रकरण में गिरफ्तार हुआ। मनसुख हिरेन की हत्या में भी उसका ही नाम आ रहा। IPS संजय पांडे और मुंबई के पुलिस कमिश्नर रहे परमबीर सिंह के पत्रों के बाद ट्रांसफर-पोस्टिंग में दलाली व रैकेट की बात पता चली। अब पुलिस अधिकारी और सरकार कोर्ट में आमने-सामने हैं।

पिछले साल खबर आई थी कि उद्धव ठाकरे से कोरोना प्रबंधन नहीं सँभलने के कारण अनुभवी शरद पवार ने मामला अपने हाथ में ले लिया है और बैठकें की हैं। यहाँ तक कि कॉन्ग्रेस भी अब शिवसेना और NCP को निशाना बना रही है, जिनके साथ वो सत्ता में साझीदार है। पार्टी ने पूछा कि अहमदाबाद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उनसे क्या बात हुई, इसका खुलासा हो। कॉन्ग्रेस के एक नेता ने आदित्य ठाकरे की आलोचना की, जिन्होंने शिवसेना पार्षदों के बंगलों के लिए फंड्स जारी किए थे।

ऐसे में कोरोना पर चर्चा तो एकदम गौण ही है। सीएम उद्धव ठाकरे राज्य को सम्बोधित करते हैं, सोशल मीडिया पर कुछ सेलेब्रिटीज उसे कोट कर के वाहवाही करते हैं और ‘सामना’ में भाजपा को गाली देते हुए एक लेख आ जाता है- हो गई कोरोना के खिलाफ लड़ाई। कोरोना को लेकर केंद्र सरकार की योजनाओं में भ्रष्टाचार की बातें पहले ही उठ चुकी हैं। सवाल पूछने वालों को सुनैना होली और समित ठक्कर की तरह पुलिस उठा ले जाती है।

‘अगले 108 घंटे भारी, 15 अप्रैल तक 50 हजार मौतें; 19 अप्रैल तक लॉकडाउन’: कोरोना के नाम पर वायरल किए जा रहे 9 दावों का फैक्टचेक

देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर के अफवाहों का कारोबार भी चरम पर है। सोशल मीडिया से लेकर मीडिया तक में कोरोना के नाम पर झूठी बातें फैला कर लोगों के बीच दहशत फैलाने की कोशिश हो रही। बीते कुछ दिनों में पुराने वीडियो शेयर करने से लेकर वैक्सीन और अस्पताल तक पर लोगों को गुमराह करने की कोशिशें हुई है।

हाल में पीआईबी के फैक्ट चेक ने एक ऐसी ही एक खबर को फर्जी बताते हुए भ्रामक वीडियो या फॉरवर्ड शेयर करने से बचने की अपील की। इस वीडियो में ब्रेकिंग न्यूज के नाम पर हवाला दिया जा रहा था कि WHO ने कहा कि भारत के लिए आने वाले 72 से 108 घंटे बहुत ज्यादा भारी हैं। इस बीच में 50 हजार लोगों की मौत हो सकती है। इस दावे के हर जगह वायरल होने के बाद WHO को इस पर संज्ञान लेना पड़ा। बताया गया कि WHO ने ऐसी कोई चेतावनी जारी नहीं की है जिसमें 15 अप्रैल से पहले 50 हजार से ज्यादा मौतें होने की आशंका जताई गई हो।

इसी प्रकार इंडिया टुडे ने हाल में केंद्र का हवाला देते हुए अपनी रिपोर्ट में ये दावा किया कि कुम्भ मेला, सुपर स्प्रेडर इवेंट बनता जा रहा है, उम्मीद है एसओपी को फॉलो किया जाएगा। इस न्यूज पर खुद स्वास्थ्य मंत्रालय ने संज्ञान लिया और बताया कि इंडिया टुडे के द्वारा पब्लिश की गई ये जानकारी गलत और झूठी है।

इसके बाद एक ट्वीट है जिसमें ICMR के नाम से कुछ गाइडलाइन्स जारी हैं, जिसमें नागरिकों से कहा जा रहा है कि वो अपनी दो साल की यात्रा रद्द करें, एक साल बाहर खाना न खाएँ, बेवजह शादी के फंक्शन न अंटेंड करें, भीड़भाड़ वाले इलाके से दूर रहें, आदि-आदि। इन गाइडलाइन्स को लेकर पीआईबी के फैक्ट चेक में पता चला कि इसे ICMR ने जारी नहीं किया है।

ये दावा भी बिलकुल गलत है कि कोरोना वायरस कोई बैक्टीरिया है और इसे एस्पिरिन से ठीक किया जा सकता है। सच्चाई ये है कि कोविड 19 एक वायरस है जिससे बचाव के लिए वैक्सीन आ गई है। लेकिन उसे जड़ से खत्म करने के लिए कोई दवाई नहीं है।

एक अफवाह पिछले दिनों व्हॉट्सएप के जरिए वायरल हुई। इसमें ग्रुप एडमिन्स को ग्रुप 2 दिन के लिए बंद करने के लिए कहा जा रहा था। मैसेज में दावा था कि अगर गलती से किसी ने भी कोरोना पर जोक पोस्ट किया तो सब मुश्किल में पड़ सकते हैं। इसलिए ग्रुप के एडमिन ध्यान दें।

बता दें कि कोरोना के बढ़ने के साथ लॉकडाउन को लेकर भी अफवाहें बढ़ रही हैं। एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर हो रहा था जिसमें बताया जा रहा था कि दिल्ली में लॉकडाउन लगेगा। लेकिन वास्तविकता में ये वीडियो पिछले साल का है। इस वीडियो को बिन संदर्भ के शेयर किया जा रहा है।

इसी तरह एक तस्वीर एडिट करके ये भी कहा जा रहा है कि भारत सरकार 9 से 19 अप्रैल के लिए लॉकडाउन लगाने वाली हैं, लेकिन सच ये है कि प्रशासन ने ऐसी कोई घोषणा नहीं की है। कल पीएम मोदी बैठक में भी कह चुके हैं कि अभी लॉकडाउन की जरूरत नहीं है।

इन सबके अलावा, कोविड दौर में अस्पतालों में मिलने वाली सुविधाओं पर भी झूठी खबरें चलाई जा रही हैं। खबरों में दावा किया गया कि पेंशनरों द्वारा पैनल के निजी अस्पतालों में कोविड टीकाकरण कराने पर बिल की प्रतिपूर्ति सीजीएचएस द्वारा की जाएगी। इस दावे को पीआईबी ने फर्जी करार दिया और कहा निजी अस्पतालों में कोविड टीकाकरण कराने पर सीजीएचएस द्वारा बिल की प्रतिपूर्ति नहीं की जाएगी।

एक ऑडियो शेयर हो रहा है जिसमें लोगों को डराने के लिए कहा जा रहा है कि सरकारी अस्पताल में बाँटें जा रहे मुफ्त मास्क से लोग बेहोश हो रहे हैं और उन्हें कोविड वार्ड में शिफ्ट किया जा रहा है, जबकि पीआईबी ने कहा है कि ये क्लेम निराधार है और ऐसे मैसेजों को आगे बढ़ाने से पहले उसके तथ्यों को जाँच लें।

‘रामसेतु को घोषित करें राष्ट्रीय धरोहर स्मारक’: SC में 26 अप्रैल को सुनवाई, मनमोहन सरकार ने तोड़ने पर दिया था जोर

रामसेतु को राष्ट्रीय धरोहर स्मारक घोषित करने की याचिका पर 26 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। यह याचिका बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने दायर कर रखी है। चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यन की पीठ से इस पर तत्काल सुनवाई का आग्रह करते हुए इस संबंध में केंद्र सरकार को निर्देश देने की अपील की गई थी।

लाइवलॉ की रिपोर्ट के अनुसार सीजेआई ने कहा कि इस पर सुनवाई में कुछ वक्त लग सकता है। बेहतर होगा इस मामले में अगले मुख्य न्यायाधीश फैसला लें। उल्लेखनीय है कि सीजेआई बोबडे 23 अप्रैल को रिटायर होने वाले हैं। उनकी जगह जस्टिस वी रमणा लेंगे।

इससे पहले भाजपा नेता ने 23 जनवरी 2020 को सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि रामसेतु करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़ा मामला है। इसलिए इसे तोड़ा न जाए, बल्कि इसे राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए। इस पर कोर्ट ने केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने और स्वामी की याचिका पर 3 महीने बाद विचार करने को कहा था। लेकिन कोरोना महामारी के कारण पैदा हुए संकट की वजह से इसकी सुनवाई में देरी हुई।

बताते चलें कि तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी तट पर रामेश्वरम और श्रीलंका के मन्नार द्वीप के बीच चट्टानों की श्रृंखला है। रामायण के अनुसार रावण की कैद से सीता को छुड़ाने के लिए भगवान राम की वानर सेना ने रामसेतु की निर्माण किया था। 2005 में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने सेतुसमुद्रम परियोजना का ऐलान किया। इसके तहत कुछ इलाके को गहरा कर समुद्री जहाजों के लायक बनाने के नाम पर रामसेतु को तोड़ना जरूरी बताया गया था। इसका हिंदू संगठनों के साथ साथ पर्यावरणविदों ने भी विरोध किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने साल 2007 में रामसेतु के आसपास इस परियोजना के काम पर रोक लगा दी थी। साल 2008 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने शीर्ष अदालत में हलफनामा दायर कर राम के अस्तित्व को ही खारिज करते हुए रामसेतु को तोड़ने की जरूरत पर जोर दिया था। हालाँकि हंगामे के बाद इस हलफनामे को वापस ले लिया गया था और सरकार ने कहा था कि वह रामसेतु को किसी प्रकार का नुकसान पहुॅंचाए बगैर ही इस परियोजना के लिए वैकल्पिक मार्ग की संभावना तलाशेगी।

सैकड़ों शिकायतों के बाद भी बांग्लादेशियों के अवैध अतिक्रमण को नहीं हटा रही उद्धव सरकार: नवी मुंबई में चार स्थानों पर है कब्जा

नवी मुंबई के सानपाडा क्षेत्र में बांग्लादेशी प्रवासियों के अवैध कब्जे के विषय में सैकड़ों शिकायतें करने के बाद भी नवी मुंबई नगर पालिका द्वारा किसी भी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। बांग्लादेशियों के कब्जे के विषय में शिकायत करने वाले व्यक्ति ने नवी मुंबई नगर पालिका पर लापरवाही का आरोप लगाया है। कहा जा रहा है कि सैकड़ों शिकायतों के बाद भी बांग्लादेशियों के अवैध अतिक्रमण पर उद्धव सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।

ट्विटर यूजर कृष्णा ने सानपाडा में बांग्लादेशियों के अवैध कब्जे को लेकर पिछले वर्ष ही नवी मुंबई नगर पालिका में शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में बांग्लादेशियों द्वारा बनाई गई अवैध झुग्गियों और कब्जे से संबंधित फोटो और विजुअल शेयर किए गए थे। कृष्णा ने नगर पालिका से उस अवैध कब्जे को हटाने की माँग की थी।

सानपाडा में कम से कम चार ऐसे स्थान हैं जहाँ बांग्लादेशियों ने अवैध कब्जा किया हुआ है। ये स्थान हैं, 1. केसर सोलिटेयर, प्लॉट 88, 5, सेक्टर 19, 2. शिव दर्शन अपार्टमेंट, संत ज्ञानेश्वर रोड सेक्टर 16, 3. जयपुरियर स्कूल, 4. MSEDL सोनखार सबस्टेशन। इन स्थानों पर बांग्लादेशियों ने अवैध कब्जा कर रखा है।

शिकायतकर्ता के अनुसार नवी मुंबई नगर पालिका कमिश्नर अभिजीत बांगर ने इस शिकायत को संज्ञान में लिया लेकिन जब भी शिकायत पर की गई कार्रवाई की स्थिति जानने का प्रयास किया गया तब शिकायतकर्ता को यही कहा गया कि कार्रवाई की जा रही है। हालाँकि नगर पालिका में शिकायत दर्ज कराने के महीनों के बाद भी बांग्लादेशियों का अवैध कब्जा बना हुआ है।

कृष्णा ने नवी मुंबई नगर पालिका के कमिश्नर अभिजीत बांगर से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया। उन्होंने कई ईमेल, लेटर और ट्विटर पोस्ट लिखे लेकिन अभिजीत से कोई संपर्क नहीं हो पाया। कृष्णा के अनुसार उन्होंने कमिश्नर बांगर के कार्यालय से भी संपर्क करने का प्रयास भी किया लेकिन यही जवाब मिला कि मामला उचित कार्रवाई के लिए आगे बढ़ा दिया गया है लेकिन अभी तक कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है।

नवी मुंबई नगर पालिका द्वारा नहीं की गई कोई कार्रवाई : शिकायतकर्ता

ऑपइंडिया ने ट्विटर यूजर कृष्णा के एकाउंट पर नजर दौड़ाई तो नगर पालिका कमिश्नर, जिम्मेदार संस्था और अधिकारियों को लिखे गए उनके कई संदेश दिखाई दिए। शिकायतकर्ता कृष्णा लगातार ही बांग्लादेशियों के अवैध अतिक्रमण के विषय में ट्विटर पर लिखते रहे हैं और कार्रवाई की स्थिति के विषय में पूछते रहे हैं। लगभग 100 बार कार्रवाई की माँग करने के बाद भी यही उत्तर प्राप्त हुआ कि मामला संबंधित अधिकरणों को स्थानांतरित कर दिया गया है और उचित कार्रवाई की जा रही है। कार्रवाई की कोई भी उम्मीद न दिखाई देने के बाद शिकायतकर्ता ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री कार्यालय और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी को भी मामले से अवगत कराया लेकिन इसके बाद भी नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों ने किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की। 

बांग्लादेशियों के अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए शिकायतकर्ता द्वारा कमिश्नर अभिजीत बांगर को 100 से अधिक ईमेल लिखे जा चुके हैं।

शिकायतकर्ता का दावा है कि कमिश्नर बांगर के पीए विजय इस पूरे मामले से परिचित हैं और उन्होंने कई बार इस पर कार्रवाई का भरोसा भी दिलाया किन्तु इसके बाद भी इन अवैध बांग्लादेशी अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हुई। महीनों तक इस मामले को लटकाने के बाद नगर पालिका के अधिकारियों ने इस मामले से पल्ला झाड़ लिया और शिकायतकर्ता को CIDCO के माध्यम से अतिक्रमण हटाने की सलाह दी क्योंकि बांग्लादेशी अतिक्रमणकारी CIDCO की जमीन पर कब्जा किए हुए हैं।

आखिरकार नवी मुंबई नगर पालिका के अधिकारियों ने इस मामले से अपना पल्ला झाड़ लिया और शिकायतकर्ता को CIDCO से संपर्क करने की बात कही।

नगर पालिका द्वारा कब्जा हटाने के लिए CIDCO के साथ कार्य करने के बावजूद विजय शिकायतकर्ता से CIDCO के समक्ष ही शिकायत दर्ज कराने पर जोर देते रहे। इस पर शिकायतकर्ता ने विजय से लिखित में यही बात कहने का आग्रह किया लेकिन अभी तक नवी मुंबई नगर पालिका से कोई संपर्क नहीं हो पाया है।

महीनों तक अवैध अतिक्रमण को हटाने के मुद्दे पर जिम्मेदार अधिकारियों को फोन करने, ईमेल लिखने और ट्विटर पर मुद्दा उठाने के बाद भी शिकायतकर्ता कृष्णा को कार्रवाई की झूठी उम्मीदें ही मिलती रहीं। कृष्णा ने यह दावा किया है कि कमिश्नर बांगर उनकी शिकायतों को अपने उपायुक्त अमरीश पतिनिगेरे को स्थानांतरित कर देते थे लेकिन उन्होंने कभी भी अतिक्रमण को हटाने की इच्छा जाहिर नहीं की।

यहाँ यह ध्यान देने योग्य बात है कि पतिनिगेरे 2010 में सिविक फंड में हुई धाँधली के आरोपित रहे हैं। नवी मुंबई नगर पालिका के कई अधिकारी जिनमें पतिनिगेरे भी थे, HB Bhise & Co. को 1.38 करोड़ रुपए के अतिरिक्त भुगतान के आरोपित रहे हैं। नवी मुंबई नगर पालिका ने HB Bhise & Co. को अवैध अतिक्रमणों को नष्ट करने का ठेका दिया था।  

हालाँकि, शिकायतकर्ता कृष्णा के ट्विटर पोस्ट्स को देखने के बाद एक पत्रकार ने कमिश्नर बांगर से मामले के संबंध में जानकारी लेने के लिए संपर्क किया। इस पर कमिश्नर बांगर ने साफ कह दिया कि अभी तक उन्हें इस मामले में लिखित शिकायत नहीं मिली है।

ऑपइंडिया ने भी शिकायतकर्ता के दावों के आधार पर कमिश्नर बांगर और उनके विभाग से संपर्क करने का प्रयास किया। हालाँकि कई प्रयासों के बाद भी उनसे संपर्क नहीं हो पाया है। कमिश्नर बांगर के कार्यालय से लगातार यही जवाब मिल रहा है कि कमिश्नर मीटिंग में व्यस्त हैं। उनसे संपर्क हो जाने के बाद यह रिपोर्ट अपडेट कर दी जाएगी।