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हैकर्स ने लीक किया मार्क जुकरबर्ग का फोन नंबर, 53 करोड़ Facebook यूजर्स का डेटा खरीददारी के लिए उपलब्ध

फेसबुक पर यूजर्स का व्यक्तिगत डेटा लीक करने या फिर उनका इस्तेमाल कारोबारी हितों के लिए किए जाने पर चर्चा तो कई महीनों से चल रही है, लेकिन अब कंपनी के CEO मार्क जुकरबर्ग का ही फोन नंबर लीक होने के बाद लोग पूछ रहे हैं कि जब कंपनी के संस्थापक का ही डेटा सुरक्षित नहीं है तो फिर आम यूजर्स का क्या? एक लोकल हैकिंग फोरम ने फेसबुक पर कई लोगों के पर्सनल डेटा को लीक किया है।

हैकिंग फोरम ने ऑनलाइन जिन लोगों के डेटा लीक किया है, उसमें ‘फेसबुक इंक’ के संस्थापक और CEO मार्क जुकरबर्ग का नाम भी शामिल है। उनका नाम, लोकेशन, शादी से जुड़े डिटेल्स, जन्मदिन और फेसबुक यूजर आईडी सहित कई डेटा लीक हो गए। उन्हें मिला कर कुल 53 करोड़ फेसबुक यूजर्स का डेटा लीक हुआ है। इनमें 106 देशों के लोग शामिल हैं। फेसबुक के सह-संस्थापकों क्रिस ह्यूज और डस्टिन मॉस्कोविट्ज के डेटा भी सुरक्षित नहीं बचे।

अमेरिका के 3.2 करोड़, यूके के 1.1 करोड़ और भारत के 60 लाख लोगों के डेटा लीक किए गए हैं। फेसबुक आईडी, नाम, लोकेशन, बायो और ईमेल एड्रेस को ऑनलाइन डाल दिया गया है। इजरायली साइबर क्राइम फर्म ‘हडसन रॉक’ के सह-संस्थापक अलोन गल ने इसका खुलासा करते हुए बताया कि ये डेटा 2 साल पुराने हो सकते हैं। हैकर्स के बीच फेसबुक से जुड़े फोन नंबर्स पहले से ही सर्कुलेट हो रहे थे।

आशंका जताई गई कि ये वही डेटाबेस हो सकता है। जबकि फेसबुक के अधिकारियों का कहना है कि जिस तकनीकी खामी की वजह से ये डेटा लीक हुए थे, उसे कंपनी ने 2019 में ही दूर कर लिया था। एक बोट उसे बेच रहा था। इसके बदले कुछ यूरो माँगे जा रहे थे। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोगों को फेसबुक पर ‘सोशल इंजीनियरिंग अटैक्स’ से बच कर रहना चाहिए और नंबर वगैरह प्राइवेट कर के रखना चाहिए।

महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ CBI जाँच की मंजूरी: परमबीर सिंह के आरोपों पर बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला

मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे के जरिए मुंबई के प्रतिष्ठानों से प्रति महीने 100 करोड़ रुपए की वसूली का आरोप लगाया था। अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले में CBI को प्रारंभिक जाँच करने को कहा है। उन्होंने ट्रांसफर-पोस्टिंग में भी धाँधली के आरोप लगाए थे।

बॉम्बे उच्च-न्यायालय ने कहा कि 15 दिनों के भीतर CBI अपनी प्रारंभिक जाँच ख़त्म कर सकती है। प्रारंभिक जाँच के बाद ये CBI के निदेशक के ऊपर होगा कि वो इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करना चाहते हैं। कोर्ट ने ये भी कहा कि सरकार द्वारा कमिटी बनाने के निर्णय के बाद लगता है कि इसमें न्यायिक हस्तक्षेप की ज़रूरत नहीं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा:

“हम जानते हैं कि अनिल देशमुख राज्य के गृह मंत्री हैं, जो पुलिस के ऊपर होते हैं। एक स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए। जाँच कानून के हिसाब से होनी चाहिए।”

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हालाँकि कहा कि CBI को इस मामले में तुरंत FIR दर्ज करने की ज़रूरत नहीं। ऐसा इसीलिए कहा गया क्योंकि महाराष्ट्र की सरकार ने पहले ही जाँच के लिए एक उच्च-स्तरीय कमिटी के गठन का निर्णय लिया है।

इससे पहले बॉम्बे HC ने पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह को फटकार लगाते हुए कहा था कि अगर पुलिस ऑफिसर होने के बावजूद किसी अपराध को लेकर FIR दर्ज नहीं कर रहे हैं तो इसका अर्थ है कि वो अपने कर्तव्यों के निर्वहन में असफल रहे हैं। कोर्ट ने परमबीर सिंह से पूछा था कि उन्होंने FIR क्यों नहीं दर्ज किया, जबकि ये उनका कर्तव्य है? कोर्ट ने कहा था कि सिर्फ CM को पत्र भेजने से कुछ नहीं होता, इसके लिए परमबीर सिंह से जवाब माँगा जा सकता है।

अक्षय कुमार के बाद अब फिल्म ‘राम सेतु’ से जुड़े 45 कलाकार कोरोना+: रुकी शूटिंग, सभी को किया गया क्वारंटाइन

फिल्म ‘राम सेतु’ की शूटिंग के लिए कुछ ही दिनों पहले उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और फिर अयोध्या पहुँचे अभिनेता अक्षय कुमार कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। मुंबई के मढ द्वीप पर इस फिल्म की शूटिंग होनी थी। अभिनेत्री नुसरत भरूचा और जैकलीन फर्नांडिस भी इस फिल्म की शूटिंग कर रही थीं। अब इस फिल्म से जुड़े 45 जूनियर आर्टिस्ट कोरोना वायरस संक्रमण से पीड़ित हो गए हैं।

सोमवार (अप्रैल 5, 2021) को 100 जूनियर कलाकारों की एक टीम शूटिंग में शामिल होने वाली थी। फिल्म के मुख्य अभिनेता अक्षय कुमार और निर्माता विक्रम मल्होत्रा ने फिल्म की शूटिंग में शामिल होने वाली सभी कलाकारों का कोरोना टेस्ट अनिवार्य कर रखा है। ‘ET’ की खबर के अनुसार, 100 की टीम में से 45 का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव निकला। ‘फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्पलॉईज (FWICE)’ ने इस खबर की पुष्टि की है।

संगठन के महासचिव अशोक दुबे ने कहा कि ‘राम सेतु’ की शूटिंग के दौरान पूरी सावधानी बरती जा रही है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि सभी 45 कोरोना पॉजिटिव कलाकारों को क्वारंटाइन कर दिया गया है। अब शूटिंग को भी रोक दिया गया है। अगले 15 दिनों में इस फिल्म की शूटिंग फिर से शायद ही शुरू हो पाए। हर दो दिन पर सावधानी के लिए सेट पर सबका कोरोना टेस्ट किया जाता है।

बताया गया है कि पॉजिटिव आने वालों को आइसोलेट करने के साथ ही उनका खर्च भी ‘राम सेतु’ की टीम ही वहन करती है। अगर किसी को कुछ तकलीफ महसूस होती है तो उसे तुरंत आइसोलेट किया जाता है। अक्षय कुमार ने खुद कई बार टेस्ट कराया है। महाराष्ट्र में पहले से ही कोरोना के रोज 50,000 से अधिक मामले सामने आ रहे हैं। पिछले 1 दिन में देश में 1 लाख मामले सामने आए, जो अब तक का सर्वाधिक है।

अक्षय कुमार ने सोशल मीडिया पर लिखा, “आप सभी की शुभकामनाओं और प्रार्थनाओं के लिए आभार। ऐसा लग रहा है जैसे उनका असर हो रहा है। मैं ठीक हूँ, लेकिन सावधानी के तौर पर मेडिकल सलाहों को मान कर मैं अस्पताल में हूँ। मैं जल्द ही घर वापस लौटूँगा।” इससे पहले अक्षय कुमार होम क्वारंटाइन में थे। उन्होंने पिछले कुछ दिनों में अपने संपर्क में आए सभी लोगों को कोरोना टेस्ट कराने की सलाह दी थी।

हाल ही में नुसरत ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कुछ तस्वीरें शेयर की थीं, जिसमें वह ‘राम सेतु’ की स्क्रिाप्ट पढ़ते हुए नजर आ रही थीं। उन्होंने लिखा था, “Let’s do this!!”। इसी के साथ उन्होंने अक्षय कुमार, जैकलीन फर्नांडीज और फिल्म के डायरेक्टर अभिषेक शर्मा को भी टैग किया था। उन्होंने इस फिल्म में मौका मिलने के लिए खुद को ‘सौभाग्यशाली’ करार दिया था। अक्षय, नुसरत और जैकलीन यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ से भी मिले थे।

4 महीने की बच्ची का अपहरण… 4 लोगों के हाथों बिकते हुए मुंबई से बेंगलुरु: शारमीन, सिद्दीकी, फरजाना गिरफ्तार

मुंबई के देवनार क्षेत्र में रविवार (अप्रैल 4, 2021) को एक शिशु के अपहरण के मामले में 4 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 3 महिलाएँ हैं। गुरुवार को ही 4 महीने की बच्ची गायब हो गई थी, जिसके बाद परिजनों ने पुलिस से संपर्क किया था। शारमीन और उसके शौहर सिद्दीकी खान पर अपहरण के आरोप लगे थे। पुलिस ने इस सूचना के आधार पर शारमीन और सिद्दीकी से पूछताछ की, जिसके बाद एक और महिला का नाम सामने आया।

पता चला कि बच्ची को एंटोप हिल क्षेत्र में रहने वाली महिला फरजाना सैय्यद शेख को दे दिया गया है। फिर फरजाना ने उस छोटी सी बच्ची को चेम्बूर की रहने वाली आशा पवार को दे दिया था। पवार ने उस बच्ची को फिर से बेच दिया। अबकी माटुंगा की रहने वाली जूलिया फर्नांडिस ने उसे खरीदा। पुलिस ने अंततः बेंगलुरु से बच्ची को बरामद करने में कामयाबी पाई। बच्ची को उसके परिजनों को सौंप दिया गया है।

शारमीन, सिद्दीकी, फरजाना और आशा को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले में अभी और गिरफ्तारियाँ होनी हैं। ये सभी मिल कर शिशुओं की तस्करी का रैकेट चला रहे थे। शारमीन और सिद्दीकी पीड़ित परिजनों के पड़ोसी ही थे। जूलिया फर्नांडिस की 10 दिनों पहले ही डिलीवरी हुई थी। बेंगलुरु में उसकी मुलाकात एक ऐसे जोड़े से हुई थी, जिसका कोई बच्चा नहीं था। वो लोग किसी बच्चे को गोद लेना चाहते थे।

जूलिया ने उनसे कहा कि ये बच्ची उसकी है और ख़रीदे गए शिशु को बेच डाला। पुलिस अब तक उसे गिरफ्तार नहीं कर पाई है लेकिन आश्वासन दिया है कि उसे जल्द ही धर-दबोचा जाएगा।

नक्सलियों ने बनाया था ‘U व्यूह’, 15 दिन किया इंतजार: हत्या से पहले काटे इंस्पेक्टर के हाथ, टीम लीडर पर जवानों से अधिक हमले

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में हुए नक्सली हमले में 22 जवानों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। सशस्त्र बलों को गुप्त सूचना मिली थी कि एक बड़ा माओवादी कमांडर वहाँ छिपा हुआ है, जिसके बाद वो इलाके में पहुँचे थे। बीजापुर में हुए इस हमले में नक्सलियों ने ‘U’ शेप का व्यूह बनाया हुआ था। यहाँ तक कि सशस्त्र बलों तक वो ‘गुप्त सूचना’ भी उन्होंने ही पहुँचवाई थी। इसके बाद वो जैसे ही इलाके में पहुँचे, माओवादियों ने अपना जाल बिछा कर हमला बोल दिया।

इस माओवादी हमले का नेतृत्व प्रतिबंधित संगठन के ‘बटालियन नंबर 1’ का कुख्यात कमांडर माडवी हिडमा कर रहा था, जिसकी तलाश पुलिस को कई वर्षों से है। उसने अपने साथ 300 की संख्या में नक्सलियों को जुटाया और आसपास के 3 गाँवों को खाली करा लिया। जानबूझ कर जवानों को जंगल वाले इलाके में ले जाया गया। जब तक जवानों को इसका पता चलता, वो फँस चुके थे और भौगोलिक रूप से भी सही स्थिति में नहीं थे।

वो जगह ऐसी थी, जहाँ दोनों तरफ से पहाड़ियाँ थीं और माओवादियों की फायरिंग चालू थी। जवान न भाग सकते थे और न उनके पलटवार का ज्यादा असर होता। जब जवानों ने वहाँ से लौटने की कोशिश की तो उन्हें घेर लिया गया। ‘U शेप व्यूह’ के बारे में बता दें कि इसमें भागने के लिए एक ही जगह होती है – वो रास्ता, जहाँ से आपने एंट्री ली हो। जीरागाँव 3 ओर से पहाड़ियों से घिरा है और लौटते हुए जवानों पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई।

जब वो वापस उसी रास्ते से लौटने लगे, तब माओवादियों ने उन्हें घेर लिया। बता दें कि महाभारत युद्ध के तीसरे दिन जब भीष्म पितामह ने दुर्योधन के साथ मिल कर ‘गरुड़’ के आकार की व्यूह रचना की थी, तब पांडवों ने ‘U शेप’ का व्यूह बना कर ही उसे ध्वस्त करने में सफलता पाई थी। इसी ‘U शेप’ एनकाउंटर का सामना जवानों को बीजापुर में करना पड़ा। माडवी हिडमा ने बस्तर के विभिन्न इलाकों से नक्सलियों को बुलाया था।

उसकी साजिश काफी पुरानी थी, लेकिन सशस्त्र बलों ने 15 दिनों तक क्षेत्र में जाना उचित नहीं समझा। वो बौखलाता जा रहा था क्योंकि इतने दिनों तक इतनी बड़ी संख्या में नक्सलियों के रहने और राशन-पानी की व्यवस्था में खासा खर्च आ रहा था। शुक्रवार (अप्रैल 2, 2021) को 1700 जवानों ने सुकमा और बीजापुर में तलाशी अभियान शुरू किया था। 11 बजे अभियान शुरू हुआ और 45 मिनट बाद 450 जवानों का एक दल जोनगुडा, जीरागाँव और टेकलगुड़ुम से अपने कैम्प लौट रहा था।

तीनों गाँव पहले ही नक्सलियों द्वारा खाली करा लिए गए थे। जंगलों और पत्थरों के कारण ये नक्सलियों का गढ़ है और वो उसी का फायदा उठा कर छिपे हुए थे। ये भी माना जा रहा है कि पुलिस-प्रशासन ने माओवादियों की क्षमता को कम कर के आँका। माओवादियों की संख्या के बारे में उन्हें पता था लेकिन रणनीतिक योजना नहीं बनाई गई। नक्सलियों ने पहले ही सारी प्रैक्टिस कर ली थी। टीम का नेतृत्व कर रहे जवानों पर अधिक हमले किए गए।

फील्ड कमांडरों को निशाना बनाया गया। CRPF कोबरा और ‘डिस्ट्रिक्ट रिज़र्व गार्ड (DRG)’ के फील्ड कमांडरों को निशाना बनाया गया। सिल्गेर गाँव में छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा कैम्प स्थापित करने के फैसले से माओवादी भड़के हुए थे। इस कैम्प के बनने से बीजापुर और सुकमा के बीच माओवादियों का ‘सेफ रूट’ ख़त्म हो जाता। मार्च से जुलाई के बीच हर साल नक्सलियों के खिलाफ वार्षिक ऑपरेशन चलाया जाता है।

इस हमले में 31 जवान घायल हुए हैं और कई अभी भी गायब बताए जा रहे हैं। माओवादियों की एक टुकड़ी ने एक इंस्पेक्टर की हत्या से पहले उनका हाथ काट डाला और फिर हथियार लूट कर फरार हो गए। उन्होंने बुलेटप्रूफ जैकेट्स और बंदूकें भी लूट ली। कुछ जवान डिहाइड्रेशन की वजह से बलिदान हो गए। डेढ़ दर्जन के करीब नक्सलियों की लाशें भी मिली हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह असम में चुनावी अभियान बीच में छोड़ कर दिल्ली लौटे और बैठकें की।

माडवी हिडमा की उम्र लगभग 40 वर्ष है। वह सुकमा जिले के पुवर्ती गाँव का रहने वाला है। 90 के दशक में वह नक्सली बना था। नक्सल कमांडर माडवी हिडमा कई नामों से जाना जाता है। मसलन, संतोष उर्फ इंदमुल उर्फ पोडियाम भीमा। बताया जाता है कि छत्तीसगढ़ पुलिस समेत कई नक्सल प्रभावित राज्यों की पुलिस इस मोस्टवांटेड नक्सली की तलाश में है। हिडमा पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGa) बटालियन नंबर 1 का प्रमुख है और ऐसे घातक हमले करने के लिए जाना जाता है।

‘नहीं मानी तो निकिता तोमर की तरह मार देंगे’: हमजा, परवेज और शाहिद ने नाबालिग को निकाह की नीयत से अगवा करने की कोशिश की

हरियाणा में नूँह के तावड़ू में लव जेहाद का मामला सामने आया है। घर से कोचिंग के लिए जा रही 12वीं की छात्रा का जबरन धर्मांतरण और निकाह के इरादे से अपहरण का प्रयास किया गया। घटना 2 अप्रैल की है। तीन मुस्लिम युवकों पर नाबालिग लड़की को अगवा करने के प्रयास का आरोप है।

रिपोर्टों के मुताबिक अपहरण करने में नाकाम रहने पर आरोपितों ने लड़की से छेड़खानी की।लड़की के विरोध करने उसे जान से मरने की धमकी भी दी। लड़की के शोर मचाने के बाद लोगों ने छेड़खानी कर रहे युवकों को पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। आरोपितों की पहचान हमजा, परवेज और शाहिद के रूप में की गई है।

पुलिस से की शिकायत में लड़की ने बताया कि 2 अप्रैल को वह विजय चौक के पास अपने ट्यूशन जा रही थी। तभी आरोपितों में से दो ने उसका पीछा करना शुरू किया और छेड़खानी की। लड़की ने बताया कि उनमें से एक आरोपित कह रहा था कि यदि वह अपना धर्म बदल कर उसके साथ निकाह नहीं करेगी तो वो उसके साथ वही करेंगे जो निकिता तोमर के साथ हुआ था। इसके बाद उसने लड़की को खींचकर मोटरसाइकिल पर बैठाने का प्रयास किया।

लड़की के विरोध करने के बाद उसने अपने 6-7 और दोस्तों को बुला लिया और उसे खींच कर मोटरसाइकिल पर बैठाने का प्रयास किया। लड़की ने शोर मचाया जिससे वहाँ के लोग उसकी सहायता के लिए आए। कई युवक भागने में सफल रहे किन्तु लोगों ने तीन युवकों हमजा, परवेज और शाहिद को पकड़ लिया। इसके बाद उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया गया। जैसे ही इलाके के लोगों को इस बात की खबर मिली वे थाने पहुँचे और आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। लड़की के परिवार वालों ने आरोप लगाया है कि हमजा का परिवार अवैध गतिविधियों में लिप्त है।

बहरहाल पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

क्या हुआ था निकिता तोमर के साथ

हरियाणा के फरीदाबाद स्थित बल्लभगढ़ में दिनदहाड़े एक हिंदू लड़की निकिता तोमर की 27 अक्टूबर 2020 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसके घरवालों ने आरोप लगाया था कि निकिता पर तौसीफ धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहा था। तीन साल पहले इस संबंध में पंचों के सामने फैसला भी हुआ था। तौसीफ बार-बार निकिता पर दवाब बना रहा था कि ‘मुस्लिम बन जा हम निकाह कर लेंगे’ मगर जब निकिता ने उसकी बात नहीं सुनी तो उसकी गोली मार कर हत्या कर दी गई। तौसीफ और एक अन्य को इस मामले में हाल ही में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।

40 साल का हिडमा मास्टरमाइंड, 400 नक्सली, LMG और देसी रॉकेट: बीजापुर में घात लगाकर ऐसे हुआ हमला

छत्तीसगढ़ के बस्तर डिवीजन के बीजापुर जिले में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में 22 जवानों के बलिदान ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। 21 जवान लापता बताए जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मुठभेड़ में बड़ी संख्या में नक्सली हताहत हुए हैं। शनिवार को हुए इस हमले का मास्टरमाइंड माडवी हिडमा बताया जा रहा है।

कौन है माडवी हिडमा?

माडवी हिडमा की उम्र लगभग 40 वर्ष है। वह सुकमा जिले के पुवर्ती गाँव का रहने वाला है। 90 के दशक में वह नक्सली बना था। नक्सल कमांडर माडवी हिडमा कई नामों से जाना जाता है। मसलन, संतोष उर्फ इंदमुल उर्फ पोडियाम भीमा। बताया जाता है कि छत्तीसगढ़ पुलिस समेत कई नक्सल प्रभावित राज्यों की पुलिस इस मोस्टवांटेड नक्सली की तलाश में है।

हिडमा पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGa) बटालियन नंबर 1 का प्रमुख है और ऐसे घातक हमले करने के लिए जाना जाता है। वह महिलाओं सहित लगभग 180 से 250 माओवादियों के दस्ते का नेतृत्व करता है। माओवादी दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZ) का सदस्य है। वह सीपीआई (माओवादी) की 21 सदस्यीय सेंट्रल कमेटी का युवा सदस्य है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार उसे माओवादियों के मिलिट्री कमीशन का चीफ भी नियुक्त किया गया है, लेकिन अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हिडमा हमेशा छिपकर रहता है। यही कारण है कि हाल की उसकी कोई भी तस्वीर उपलब्ध नहीं है। पुलिस ने उसके सिर पर 40 लाख का इनाम घोषित किया हुआ है। बीजेपी विधायक भीम माडवी की हत्या के मामले में एनआईए ने उसके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से जून के बीच में नक्सली टैक्टिकल काउंटर अफेंसिव कैंपेन (TCOC) चलाते हैं। इस दौरान वह अपने खतरनाक हमलों के जरिए सुरक्षाबलों को निशाना बनाते हैं। दरअसल, इन दौरान पेड़ों से पत्ते गिर चुके होते हैं। ऐसे में सुरक्षाबलों की गतिविधियॉं नक्सलियों को दूर बैठे भी नजर आ जाती हैं।

बता दें कि पहले भी कई बार नक्सलियों ने इन महीनों में टीसीओसी ऑपरेशन किए हैं। मार्च 2020 में नक्सलियों ने सुकमा में 17 लोगों की जान ली थी। अप्रैल 2019 में बीजेपी विधायक भीमा माडवी, उनके ड्राइवर और तीन सुरक्षाकर्मियों को नक्सलियों ने मौत के घाट उतारा था। वहीं, अप्रैल 2010 में तडमेटला में 76 जवानों की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी।

किन हथियारों का इस्तेमाल

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के अधिकारियों के अनुसार, छत्तीसगढ़ के बीजापुर में शनिवार को सुरक्षाबलों पर घातक हमला करने के लिए माओवादियों ने लाइट मशीन गन (LMGs), अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (UBGL) और देसी रॉकेट का इस्तेमाल किया था।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों ने कहा कि ऑपरेशन में शामिल जवानों ने बीजापुर-सुकमा सीमा पर मुठभेड़ में जो कुछ भी सामने आया था उसका ब्यौरा दिया है। बताया गया है कि करीब 400 नक्सलियों के समूह ने सुरक्षाकर्मियों पर घात लगाकर हमला किया था। 

CRPF के महानिदेशक (DG) कुलदीप सिंह, जो छत्तीसगढ़ में हैं, उन्होंने 22 जवानों के बलिदान की पुष्टि की है। अधिकारियों ने News18 से बात करते हुए कहा कि इस हमले में लाइट मशीन गन (LMGs) का अधिक उपयोग किया गया था, जिसके कारण यह हमला ज्यादा भयावह था।

सिंह ने कहा कि फोर्स कमांडर ने मुझे बताया कि नक्सलियों ने एक एलएमजी को कहीं छिपा दिया था। उस स्थिति से उन्होंने अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गोलीबारी की। यूबीजीएल, देसी रॉकेट इनका प्रयोग पहले से किया जाता रहा है, लेकिन इस बार इन्हें अधिक उपयोग किया गया। इससे निपटने के लिए हमारे जवानों ने बहुत संघर्ष किया। तीन ट्रैक्टरों में नक्सली अपने मृतक और घायल साथियों को ले गए।

10 दिन में नक्सलियों का दूसरा बड़ा हमला

बीते 10 दिन में नक्सलियों ने जवानों पर यह दूसरा बड़ा हमला किया है। इससे पहले 23 मार्च को नारायणपुर में नक्सलियों ने पुलिस जवानों की बस को आईडी ब्लास्ट से उड़ा दिया था। इस हमले में भी 5 जवान बलिदान हो गए थे, जबकि 14 अन्य जख्मी हुए थे। बस में 24 जवान सवार थे।

बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपना चुनावी कार्यक्रम छोड़कर दिल्‍ली लौट आए हैं। वह इस हमले को लेकर आईबी और सीआरपीएफ के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं। अमित शाह ने रविवार को कहा कि वीरगति पाने वाले जांबाज जवानों को हमारी श्रद्धांजलि है। हम उनके परिजनों और देश को विश्वास दिलाते हैं कि बहादुर जवानों ने देश के लिए जो खून बहाया है वह व्यर्थ नहीं जाएगा।

इस हमले के बाद कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। हमले के बावजूद असम में चुनाव प्रचार में व्यस्त रहने को लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की आलोचना हो रही है। साथ ही आईपीएस अधिकारी नलिन प्रभात की दक्षता और उन पर मेहरबानी को लेकर भी सवाल किए जा रहे हैं। इंटेजिलेंस फेल्योर के भी आरोप लग रहे हैं। यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या सूचना तंत्र विफल रहा जिसके कारण नक्सलियों के मूवमेंट की सही जानकारी नहीं मिल पाई अथवा नक्सलियों द्वारा सुनियोजित तरीके से जानकारी देकर जवानों को फँसाया गया है।

11 साल पहले 76 जवान बलिदान, DIG थे नलिन; आज 22 जवान बलिदान, IG नक्सल ऑपरेशन हैं नलिन

छत्तीसगढ़ के बस्तर डिवीजन के के बीजापुर जिले में नक्सली हमले के बाद CRPF के एक अधिकारी का नाम चर्चा में है। ये हैं, नलिन प्रभात। नलिन इस समय IG नक्सल ऑपरेशन हैं। 11 साल पहले जब छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सली हमला हुआ था तो वे DIG थे। उस हमले में 76 जवान बलिदान हो गए थे। बीजापुर जिले में शनिवार (3 अप्रैल 2021) को हुए हमले में 22 जवानों के बलिदान होने की पुष्टि हो चुकी है। 21 लापता हैं।

इस हमले के बाद कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। हमले के बावजूद असम में चुनाव प्रचार में व्यस्त रहने को लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की आलोचना हो रही है। साथ ही नलिन प्रभात की दक्षता और उन पर मेहरबानी को लेकर भी सवाल किए जा रहे हैं। इंटेजिलेंस फेल्योर के भी आरोप लग रहे हैं। यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या सूचना तंत्र विफल रहा जिसके कारण नक्सलियों के मूवमेंट की सही जानकारी नहीं मिल पाई अथवा नक्सलियों द्वारा सुनियोजित तरीके से जानकारी देकर जवानों को फँसाया गया है।

इन सवालों के ठोस जवाब तो जाँच के बाद ही मिलेंगे। लेकिन यह तथ्य है कि 2010 में दंतेवाड़ा में हुए नक्सली हमले के बाद प्रभात समेत दो अन्य अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया गया था। इन सभी पर लापरवाही और बिना पर्याप्त सुरक्षा के जवानों को जंगल में भेजने का आरोप लगा था। दंतेवाड़ा के ताड़मेटला में हुए इस नक्सली हमले में 76 जवान बलिदान हो गए थे।

ताड़मेटला का नक्सली हमला

6 अप्रैल 2010 को सुकमा जिले के ताड़मेटला में चिंतलनार कैंप के 150 जवान डीआईजी नलिन प्रभात के ऑर्डर पर एरिया सैनिटाइजेशन के लिए निकले थे। सैनिटाइजेशन के बाद वापस लौट रही टुकड़ी पर घात लगाकर नक्सलियों ने हमला कर दिया था। इस हमले में 76 जवान बलिदान हो गए थे। ऐसा अनुमान था कि लगभग 1000 नक्सलियों ने जवानों को घेरा था। यह भारत में नक्सल समस्या के इतिहास का सबसे बड़ा हमला माना जाता है।

सीआरपीएफ और गृह मंत्रालय की जाँच

ताड़मेटला के इस भयानक हमले के बाद सीआरपीएफ ने कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी बैठाई और गृह मंत्रालय ने मामले की जाँच के लिए ई. राममोहन कमेटी गठित की। जाँच कमेटी की रिपोर्ट में बताया गया था कि नक्सलियों के पास सीआरपीएफ का वायरलेस मौजूद था, जिससे उनके पास जवानों के मूवमेंट की पूरी खबर थी। जाँच कमेटी की रिपोर्ट में प्रभात एवं अन्य अधिकारियों को ‘कमांड एण्ड कंट्रोल’ के फेल होने और ‘स्टैन्डर्ड ऑपरेशन प्रोसिजर’ के उल्लंघन का दोषी पाया गया था। सीआरपीएफ की कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी और राममोहन कमेटी की जाँच के बाद डीआईजी नलिन प्रभात और दो अन्य अधिकारियों एके बिष्ट और संजीव बांगड़े को पद से हटा दिया गया था एवं उनका तबादला भी कर दिया गया था।

इस बार क्या हुआ

शनिवार को हुई मुठभेड़ के बाद भी भी मीडिया रिपोर्टों में बताया जा रहा कि नक्सलियों ने अपनी मूवमेंट की जानकारी जान-बूझकर अधिकारियों के पास पहुँचाई थी। ताड़मेटला हमले के बाद इन्क्वायरी में प्रभात ने कहा था कि जिस डिप्टी कमांडेंट को साथ भेजा गया था, वह अपना कार्य ठीक से नहीं कर पाया। लेकिन अब वे खुद ही नक्सल ऑपरेशन के आईजी हैं। ऐसे में इंटेलिजेंस की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं के ऊपर थी।

नलिन प्रभात आंध्र प्रदेश कैडर के 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी है। उनको राष्ट्रपति का गैलेन्टरी अवॉर्ड भी मिल चुका है। यह अवॉर्ड जम्मू कश्मीर में 2008 के दौरान एक मुठभेड़ में चार आतंकियों को गिराने के लिए दिया गया था। लेकिन, दिलचस्प तथ्य यह है कि उस वक्त भी उनके पिछले रिकॉर्डों का हवाला देते हुए उन्हें यह अवॉर्ड देने पर सवाल उठाए गए थे।

AAP विधायक अमानतुल्लाह खान के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR, नरसिंहानंद सरस्वती का गला काटने की दी थी धमकी

आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक अमानतुल्लाह खान के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। आज तक की रिपोर्ट के अनुसार एफआईआर यति नरसिंहानंद सरस्वती का गला काटने की बात पर दर्ज की गई है।

पत्रकार दीपक चौरसिया ने ट्वीट कर बताया है कि दिल्ली पुलिस ने आप विधायक के खिलाफ IPC की धारा 153A/506 के तहत मामला दर्ज किया है। इससे पहले दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में गाजियाबाद के डासना मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी

दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कथित तौर पर पैंगबर मोहम्मद के खिलाफ टिप्पणी कर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में महंत के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। दिल्ली पुलिस ने बताया था कि इस वीडियो पर संज्ञान लेते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 153-A और 295-A के तहत पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यति नरसिंहानंद की टिप्पणी वाला यह वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है।

नरसिंहानंद सरस्वती पर एफआईआर से पहले अमानतुल्लाह ने जामिया नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने ट्विटर पर वीडियो शेयर कर इसकी जानकारी दी थी। शिकायत से पहले अमानतुल्लाह खान ने ट्विटर पर लिखा था, “हमारे नबी की शान में गुस्ताखी हमें बिल्कुल बर्दाश्त नहीं, इस नफ़रती कीड़े की ज़ुबान और गर्दन दोनों काट कर इसे सख़्त से सख़्त सजा देनी चाहिए। लेकिन हिंदुस्तान का कानून हमें इसकी इजाज़त नहीं देता, हमें देश के संविधान पर भरोसा है और मैं चाहता हूँ कि दिल्ली पुलिस इसका संज्ञान ले।”

रविवार (अप्रैल 4, 2021) को अमानतुल्लाह खान के ट्वीट को ट्विटर ने डिलीट कर दिया था। साथ ही भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने दिल्ली के ओखला से विधायक अमानतुल्लाह खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए यूपी पुलिस के समक्ष शिकायत दर्ज करवाई थी।

मंदिरों की सफाई का देशव्यापी अभियान: कपिल मिश्रा के हिंदू इकोसिस्टम का पहला ‘ग्राउंड एक्शन’

नवंबर 2020 में भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने देश के अंदर हिंदुओं के हित से संबंधित मुद्दों को महत्व दिलाने के लिए ‘हिन्दू इकोसिस्टम’ की पहल की थी। यह वॉलेंटियरशिप पर आधारित है। अभी तक सोशल मीडिया के क्रियाकलापों में सीमित रहने वाले हिन्दू इकोसिस्टम ने जमीनी स्तर पर अपना पहला कार्य प्रारंभ किया। यह कार्य है देशभर में मंदिरों की सफाई का।

3 अप्रैल 2021 को कपिल मिश्रा ने सभी हिंदुओं से आह्वान किया था कि वे 4 अप्रैल की सुबह को अपने निकट के मंदिरों में जाएँ और वहाँ सफाई करने के लिए अपनी ‘सेवा’ प्रदान करें। उनके आह्वान के बाद वॉलेन्टियर्स ने बताया कि इस पहल के अंतर्गत लगभग 300 मंदिरों की सफाई की गई है। अपने वीडियो मैसेज में कपिल मिश्रा ने कहा कि इकोसिस्टम का पहला जमीनी क्रियाकलाप ‘क्लीन टेंपल, क्लीन नेशन’ है। इसके अंतर्गत इकोसिस्टम के सदस्य अपने नजदीक के मंदिर में जाकर उसकी सफाई के लिए अपने ‘सेवा’ देंगे।

मिश्रा के इस आह्वान पर 4 अप्रैल की सुबह से ही हिन्दू इकोसिस्टम के सदस्य अपने नजदीकी मंदिरों में पहुँच गए और वहाँ साफ-सफाई की। सोशल मीडिया में #CleanTempleCleanNation हैशटैग चलता रहा और सदस्यों द्वारा मंदिरों की सफाई की फोटो और वीडियो से भरा रहा।

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कपिल मिश्रा ने बताया कि हिन्दू इकोसिस्टम के सदस्य हर महीने ‘सेवा’ के लिए मंदिरों में जाएँगे और साफ-सफाई, मेंटेनेंस इत्यादि कार्यों में मंदिरों की सहायता करेंगे।