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‘बार-बार मना करने के बावजूद जबरन ऊपर ले गए घोड़े वाले, तमाशा देख रहे थे कश्मीर पुलिस के जवान’: पहलगाम के मृतक के परिजनों ने सुनाया पूरा वाकया

पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों के दुःख में पूरा देश गमगीन है। वहीं, दूसरी ओर इस हमले में शामिल और आतंकियों को नेस्तनाबूत करने की कार्रवाई भारतीय सशस्त्र बलों ने शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश के कानपुर से कश्मीर घूमने गए शुभम द्विवेदी की मौत के बाद परिवार उनके शव के साथ कानपुर आया। उनकी पत्नी ऐशान्या समेत परिजनों को सांत्वना देने के लिए यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ भी पहुँचे।

सीएम योगी से मुलाकात करते ही ऐशान्या के सब्र का बाँध भी टूट गया। उन्होंने रोते-रोते सीएम को सारी घटना बताई। साथ ही उन्होंने कुछ ऐसी बातें भी कहीं जिसके बाद पहलगाम आतंकी हमले में कुछ स्थानीय स्लीपर सेल के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है।

अमर उजाला‘ की रिपोर्ट के अनुसार, ऐशान्या ने बताया कि शुभम और वो घोड़े से ऊपर की ओर जा रहे थे। हालाँकि उन्हें दूर तक जाने का मन नहीं था। इसलिए घोड़ेवाले से ऊपर ले जाने से मना भी किया। ऐशान्या ने कहा कि वे लोग थक गए हैं और इससे ऊपर नहीं जाना चाहते। इसके बावजूद घोड़े वाले ने रुकना जरूरी नहीं समझा और कहा ऊपर तक तो चलना पड़ेगा। शुभम ने ये भी कहा कि चाहे तो पूरे पैसे ले लो पर हमें नीचे लेकर चलो। फिर भी घोड़े वाले ने उनकी बात नहीं मानी।

परिजनों ने भी सीएम को बताया कि पर्यटकों को टट्टू वाले ऊपर पहाड़ी पर बैठा के ले जा रहे थे। पर वे अपनी मर्जी से चल रहे थे। इसी तरह जब गोलियाँ चलने लगीं तो लोग इधर उधर भाग रहे थे। उस दौरान वहाँ पर तीन स्थानीय पुलिस कर्मी खड़े दिखाई पड़े थे। लेकिन उन्होंने किसी तरह की मदद नहीं की। लोग चिल्ला रहे थे कि उन्हें सुरक्षा दीजिए, कैंप तक ले चलिए लेकिन किसी ने भी उनकी मदद नहीं की।

शुभम के पिता ने बताया कि पहलगाम के जिस होटल में वे लोग रुके थे वहाँ पर कुछ लोग थे जो पर्यटकों के निवास स्थान और उनकी संख्या आदि की पूछताछ कर रहे थे। इन सभी बातों से ऐसा लग रहा था कि वे लोग हमारी रेकी कर रहे थे।

परिजनों से मिलकर आने के बाद सीएम योगी ने मीडिया से कहा कि आतंकवाद का जड़ से सफाया होगा। शुभम के परिजनों से जो जानकारी मिली है उससे ऐसा लगता है कि वहाँ टट्टुओं से सफर कराने वालों समेत कुछ अन्य स्थानीय आतंकी संगठनों से जुड़े हो सकते हैं। इन सभी को मुँहतोड़ जवाब मिलेगा।

उधर एक अन्य महिला पर्यटक ने बताया कि एक घोड़े वाला बार-बार उनके डिटेल्स पूछ रहा था, कुरान को लेकर बोल रहा था। महिला पर्यटक ने ये भी बताया कि घोड़े वाला ये भी पूछ रहा था कि उनके साथ आए लोग हिन्दू हैं या मुस्लिम, महिला ने उसके इरादे भाँप लिए थे इसीलिए उसे बता दिया कि वो सब मुस्लिम हैं। साथ ही वो ये भी कह रहा था कि अभी अमरनाथ आइए तो वो बिना रजिस्ट्रेशन यात्रा करा देगा। महिला ने उसकी तस्वीर दिखाते हुए बताया कि उसने फोन निकाला, वो 35 बंदूकों की बात भी कर रहा था।

क्या है शिमला समझौता, कैसे इसके टूटते ही पाकिस्तान को घर में घुस कर मारने को स्वतंत्र हो जाएगा भारत: कारगिल में इसके कारण ही LOC पार नहीं गई सेना

कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में मंगलवार (22 अप्रैल, 2025) को एक बड़ा आतंकी हमला हुआ। इसमें 26 भारतीय और दो विदेशी पर्यटकों की हत्या कर दी गई थी। हमले के बाद एक्शन लेते हुए भारत ने सिंधु जल समझौता स्थगित करने, अटारी-वाघा बॉर्डर बंद करने, पाकिस्तानियों की तत्काल वापसी समेत पाँच बड़े फैसले ले लिए।

इन फैसलों से बौखलाया इस्लामी मुल्क़ पाकिस्तान जवाबी कार्रवाई करने की कोशिश कर रहा है। इसीलिए, उसने आनन-फानन में शिमला समझौता रद्द करने की धमकी दे डाली। हालाँकि, ये धमकी महज एक गीदड़भभकी है। अगर पाकिस्तान ऐसा करता भी है तो फिर भारत भी पाकिस्तान को घर में घुसकर मरने को स्वतंत्र हो जाएगा, क्योंकि इसी समझौते का मान रखते हुए भारतीय सेना ने कारगिल युद्ध के दौरान LOC (लाइन ऑफ कन्ट्रोल) को पार नहीं किया था।

1972 में हुआ था शिमला समझौता

भारत पाकिस्तान के 1971 के युद्ध के बाद 2 जुलाई, 1972 को दोनो देशों के बीच शांति कायम करने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी और पाकिस्तान के पीएम जुल्फिकार अली भुट्टो ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसे शिमला समझौता कहा जाता है। इसका उद्देश्य भारत और पाकिस्तान के बीच शांति कायम करना और रिश्तों को सुधारना था। इसके तहत युद्ध विराम के समय की स्थिति के हिसाब से कश्मीर में LOC (लाइन ऑफ कंट्रोल) की व्यवस्था की गई, और दोनों देशों ने इसका सम्मान करने का वचन दिया।

इसके अलावा युद्ध में बंदी बनाए गए 90,000 पाकिस्तानी सैनिकों को वापस उनके देश को सौंप दिया गया, और पाकिस्तानी से भारतीय सैनिक यहाँ वापस भेजे गए। व्यापार फिर से शुरू किया गया। इसी समझौते के तहत पूर्वी पाकिस्तान अलग होकर स्वतंत्र मुल्क़ बांग्लादेश बन गया।

शिमला समझौते में कुछ बड़ी बातें तय की गईं। दोनों देशों ने तय किया कि हर विवाद को आपसी बातचीत के जरिए सुलझाया जाएगा। कश्मीर के मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर नहीं ले जाया जाएगा। ये मसला भी दोनों देशों की आपसी बातचीत से हल होगा। नियंत्रण रेखा को कोई भी देश अकेले नहीं बदल सकेगा और दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ दुष्प्रचार, हिंसा और युद्ध नहीं करेंगे।

समझौता कायम रखने में नाकाम पाक

भले ही समझौते पर दोनों देशों ने हस्ताक्षर किए हों लेकिन तय सीमाओं को सिर्फ भारत की ओर से ही निभाया गया। पाकिस्तान ने कई बार इस समझौते की खिल्ली उड़ाई। पाक ने 1999 में कारगिल में घुसपैठ से साथ ये समझौता ताक पर रख दिया। लागातार सीजफायर का उल्लंघन किया। कई बार अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पाक ने कश्मीर का मुद्दा उठाया। विवाद सुलझाने के बजाए आतंकी संगठनों को पाला-पोसा और उनका सहारा लेकर भारत में अशांति फैलाई।

इसके बावजूद भारत ने शिमला समझौते का अब तक सम्मान किया और अपने दायरे में रहकर ही विरोध किया।

पाकिस्तान को उल्टा पड़ेगा दाँव

अब जब पाकिस्तान ने सामने से शिमला समझौता रद्द करने की धमकी दी है तो भारत के लिए कई मुद्दों पर अपनी राह को मंजिल तक पहुँचाने में आसानी होगी। भारत कभी भी कश्मीर मसले के अंतरराष्ट्रीयकरण का समर्थक नहीं रहा है और इसे द्विपक्षीय बातचीत के जरिए सुलझाने का प्रयास करता रहा है। शिमला समझौता रद्द करने की धमकी देने वाले पाकिस्तान UN से लेकर इस्लामी मुल्क़ों तक के मंच पर कश्मीर का रोना रोता रहा है।

अगर पाकिस्तान शिमला समझौते को रद्द करता है तो ये उसके लिए अपने ही पाँव पर कुल्हाड़ी मारने के समान होगा, क्योंकि इस समझौते का अबतक सम्मान करते आ रहे भारत के लिए भी तब LOC को पार करने में कोई मुश्किल नहीं होगी।

‘मेरे परिवार को कहे जा रहे अपशब्द, मेरे लिए देश पहले’: अरशद नदीम को आमंत्रण पर नीरज चोपड़ा की सफाई, बोले – पहलगाम हमले से मैं भी दुःखी

2020 के टोक्यो ओलंपिक में भाला फेंक (जेवलिन थ्रो) में स्वर्ण पदक और 2024 के पेरिस ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद हो रही आलोचनाओं पर सफाई दी है। असल में भारतीय एथलीट ने ‘नीरज चोपड़ा क्लासिक्स’ आयोजन में पाकिस्तानी जेवलिन थ्रो खिलाड़ी अरशद नदीम को आमंत्रित किया था। इसके बाद उनकी आलोचना हो रही थी। पहलगाम आतंकी हमले में 28 निर्दोषों की जान गई है, जिसके बाद पूरे देश में शोक व आक्रोश का माहौल है।

नीरज चोपड़ा ने बयान जारी करके कहा कि वो सामान्यतः कम बोलते हैं, लेकिन इसका अर्थ ये नहीं है कि उन्हें कुछ गलत लगता है तो वो उसके विरुद्ध नहीं बोलेंगे – ख़ासकर के जब मामला उनके देशप्रेम पर सवाल उठाए जाने और परिवार के सम्मान व आदर की बात हो। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा आयोजित किए जा रहे टूर्नामेंट ‘NC क्लासिक्स’ में हिस्सा लेने के लिए अरशद नदीम को आमंत्रण भेजने के उनके फ़ैसले को लेकर काफ़ी कुछ कहा जा रहा है। नीरज चोपड़ा ने कहा कि आलोचना करते हुए उनके ख़िलाफ़ घृणा फैलाई जा रही है, उन्हें अपशब्द कहे जा रहे हैं।

उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनके द्वारा नीरज चोपड़ा को आमंत्रण भेजा जाना एक खिलाड़ी द्वारा दूसरे खिलाड़ी को आमंत्रण भर था – न इससे कुछ अधिक, न कम। नीरज चोपड़ा ने कहा कि उनलोगों ने उनके परिवार को भी नहीं छोड़ा। उन्होंने बताया कि ‘NC क्लासिक्स’ का उद्देश्य है कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी यहाँ आएँ और भारत विश्वस्तरीय खेल प्रतियोगिताओं का हब बने। उन्होंने बताया कि सोमवार (21 अप्रैल, 2025) को ही सभी खिलाड़ियों को आमंत्रण भेज दिया गया था, आतंकी हमले से 1 दिन पहले ही।

नीरज चोपड़ा ने कहा, “पिछले 48 घंटों में जो कुछ भी हुआ है, उसके बाद अरशद नदीम का नीरज चोपड़ा क्लासिक में शामिल होना पूरी तरह से असंभव था। मेरे लिए मेरा देश और उसके हित सबसे पहले हैं। जिन परिवारों ने अपने अपनों को खोया है, उनके लिए मेरी प्रार्थनाएँ और संवेदनाएँ हैं। आपके साथ, और पूरे देश के साथ, मैं भी जो घटना हुई है उसे लेकर दुःखी हूँ और गुस्से में हूँ। मुझे पूरा भरोसा है कि हमारे देश की प्रतिक्रिया हमारी एकजुटता और ताक़त को दिखाएगी – एक राष्ट्र के रूप में, हम न्याय सुनिश्चित करेंगे।”

नीरज चोपड़ा ने कहा कि उन्होंने इतने वर्षों तक देश का प्रतिनिधत्व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया है, ऐसे में जब उनकी नीयत पर सवाल उठाई जाती है तो उन्हें तकलीफ होती है। उन्होंने ख़ुद को और अपने परिवार को बेवजह निशाना बनाए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें दुःख हो रहा है कि सफाई देनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि कुछ मीडिया संस्थानों ने जो ख़बरें फैलाई हैं, वो सिर्फ़ इसीलिए सच नहीं हो जातीं क्योंकि वो चुप रहते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि वो और उनका परिवार बहुत साधारण हैं, उन्हें कुछ और न बनाया जाए।

साथ ही नीरज चोपड़ा ने इसपर भी आश्चर्य जताया कि लोग कैसे पाला बदल लेते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि जब उनकी सीधी-सादी माँ ने 1 वर्ष पूर्व एक मासूम टिप्पणी की थी तब उनके लिए तारीफों के ढेर लग गए थे। बता दें कि नीरज चोपड़ा की माँ ने कहा था कि अरशद नदीम भी उनके लिए बेटे की तरह ही है। नीरज चोपड़ा ने कहा कि आज वही लोग उसी टिप्पणी के लिए उनकी माँ को निशाना बना रहे हैं। नीरज चोपड़ा ने आश्वासन दिया कि वो और कड़ी मेहनत करेंगे, ताकि दुनिया भारत को याद रखे और इसे अच्छे सकारात्मक कारणों से गर्व व ईर्ष्या के भाव से देखे।

उधर अरशद नदीम ने नीरज चोपड़ा का आमंत्रण ठुकरा दिया है। असल में ‘एनसी क्लासिक्स’ का आयोजन 24 मई, 2025 को होना है, जबकि इससे 2 दिन पहले ही उन्हें एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए निकलना है। वो उस समय दक्षिण कोरिया में होंगे, ऐसे में भारत नहीं आ पाएँगे। 27 से 31 मई तक वहाँ इस टूर्नामेंट का आयोजन होना है। ‘NC क्लासिक्स’ बेंगलुरु में आयोजित हो रहा है, जिसमें 2 बार के विश्व चैंपियन एंडरसन पीटर्स, रियो 2016 ओलंपिक में गोल्ड मेडल अपने नाम करने वाले जर्मनी के थॉमस रोलर और 2015 वर्ल्ड कप चैंपियन केन्या के जूलियस यगो जैसे खिलाड़ी हिस्सा लेने आ रहे हैं।

अजमेर, ब्यावर के बाद अब भोपाल… ‘मुस्लिम गैंग’ ने हिंदू छात्राओं को फँसाकर किया रेप, वीडियो से ब्लैकमेल कर ऐंठे पैसे: इस्लाम कबूलने का बना रहे थे दबाव

मध्य प्रदेश के भोपाल में हिंदू लड़कियों के साथ रेप करने का मामला सामने आया है। पीड़िताओं का कहना है कि आरोपित लड़कों ने उन्हें अपना झूठा नाम बताकर प्रेम के जाल में फँसाया और फिर उनकी अश्लील वीडियोज बनाकर उन्हें पैसों और धर्मांतरण के लिए ब्लैकमेल करने लगे।

आरोपितों की पहचान फरहान खान, साहिल खान और अली खान के तौर पर हुई है। पुलिस ने इस मामले में 18 अप्रैल को केस दर्ज किया था, लेकिन मीडिया में ये लगभग एक हफ्ते बाद आया है। शिकायत में बताया गया है कि तीनों आरोपित उसी कॉलेज के MBA छात्र हैं जिससे पीड़िताएँ ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रही थीं।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे पहले फरहान खान ने अपने कॉलेज में ग्रेजुएशन कर रही छात्रा को फँसाया था। इसके बाद उसने पीड़िता के साथ संबंध बनाए और वीडियो में सब रिकॉर्ड करके उसे धमकाने लगा। आगे चलकर फरहान ने ही पीड़िता पर दबाव बनाया कि वो साहिल और अली से अपनी सहेलियों की दोस्ती करवाए।

जब डरकर पीड़िता ने ऐसा किया तो साहिल और अली ने बाकी दो लड़कियों को अलग-अलग जगह मिलने बुलाया और पहली मुलाकात में ही उनके साथ संबंध बनाकर उनकी वीडियो बना ली। इसके बाद तीनों आरोपित पीड़िताओं पर धर्म बदलने का दबाव डाल रहे थे और बार-बार निकाह करने को कह रहे थे।

इसके अलावा आरोपित कॉलेज में पढ़ने वाली छात्राओं से आए दिन पैसे भी माँगते थे। जब ये डिमांड और ब्लैकमेलिंग ज्यादा बढ़ने लगी, तब एक पीड़िता ने पुलिस में शिकायत देने का निर्णय लिया। वह बागसेवनिया थाने पहुँची। उसने पुलिस को बताया कि उसकी दो अन्य सहेलियाँ भी इसी तरह से शिकार बनाई गई हैं।

पुलिस ने जाँच शुरू करने के दौरान उन दोनों लड़कियों की भी काउंसलिंग कराई और बाद में पूछताछ में दोनों पीड़िताओं ने बताया कि अली खान ने अशोका गार्डन के एक होटल में युवती के साथ संबंध बनाए थे और साहिल खान ने जहाँगीराबाद के एक कमरे में।

पुलिस ने पुलिस ने आगे की जाँच के लिए केस को अशोक गार्डन और जहाँगीराबाद थाने भेजा, जिसके बाद पुलिस ने फरहान खान और साहिल खान को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है जबकि अली खान की तलाश जारी है। इस केस के खुलने के बाद पुलिस को संदेह है कि जाँच में और खुलासे हो सकते हैं। तीन आरोपितों और तीन पीड़िताओं के अलावा केस में और भी पीड़िताओं का पता चल सकता है।

अभी तक की जाँच में पुलिस को फरहान के मोबाइल से कई अन्य लड़कियों की तस्वीरें मिली हैं। पुलिस ने बताया कि तीनों आरोपित मध्य प्रदेश से नहीं हैं। इनमें दो बंगाल के हैं। पुलिस इस मामले में हर एंगल से जाँच कर रही है। इस केस को रेप, पॉक्सो एक्ट समेत धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। साथ ही निष्पक्ष जाँच के लिए SIT भी गठित की गई है।

बता दें कि कुछ समय पहले ऐसा ही पैटर्न अजमेर और ब्यावार से देखने को मिला था। उस समय भी मुस्लिम युवकों द्वारा हिंदू लड़कियों को इसी तरह निशाना बनाया गया था। आरोपित, स्कूल जाती पीड़िताओं को झाँसे में लेते थे, उनके साथ अश्लील हरकतें करते थे और फिर वीडियो वायरल करके उन्हें और प्रताड़ित करते थे।

पाकिस्तानी हिंदुओं को नहीं छोड़ना पड़ेगा भारत, विदेश मंत्रालय ने किया क्लियर- जारी रहेगा वीजा: ‘आतंकी मुल्क’ को पत्र लिख मोदी सरकार ने बताया- रोक रहे सिंधु जल समझौता

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार (22 अप्रैल, 2025) को हुए आतंकी हमले में 28 निर्दोष लोगों की जान चली गई। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना सॉरी अरब दौरा बीच में छोड़कर भारत लौटना पड़ा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ख़ुद घटनास्थल पर पहुँचे। इसके बाद भारत ने CCS (कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी) की बैठक के बाद न केवल सिंधु जल समझौता को निलंबित कर दिया, बल्कि पाकिस्तानियों का वीजा भी रद्द कर दिया। साथ ही पाकिस्तान के रक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों को दूतावास छोड़ने का आदेश दिया गया। अटारी-वाघा सीमा को भी बंद कर दिया गया है।

अब भारत सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा सेवा निलंबित किए जाने के संबंध में नया बयान जारी किया है। इसमें बताया गया है कि ये फ़ैसला ‘लॉन्ग टर्म वीजा’ पर आए लोगों पर लागू नहीं होता है। ये वो वीजा (LTV) हैं, जिन्हें उन पाकिस्तानी हिन्दू शरणार्थियों को दिया गया है जो प्रताड़ना के कारण भारत में आकर लंबे समय से रह रहे हैं। उन्हें देश नहीं छोड़ना होगा। बता दें कि पड़ोसी इस्लामी मुल्क़ों से प्रताड़ित हिन्दुओं के लिए CAA (नागरिकता संशोधन क़ानून) के तहत भारत की नागरिकता दिए जाने की भी व्यवस्था है। केंद्रीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर साफ़ किया कि पाकिस्तानी हिन्दुओं का वीजा रद्द नहीं होगा।

उधर जल शक्ति मंत्रालय के सचिव देवश्री मुखर्जी ने पाकिस्तान के जल संसाधन मंत्रालय को पत्र लिखकर सूचित कर दिया है कि हम सिंधु जल समझौते को निलंबित करते हैं। पत्र में कहा गया है कि पहले से अभी के समय में बहुत बुनियादी बदलाव आ गए हैं, जिनमें डेमोग्राफी परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और जल बँटवारे को लेकर पहले जो सोच थी उसमें अब परिवर्तन आया है। पत्र में स्पष्ट लिख दिया गया है कि किसी भी संधि को निभाने के लिए भरोसे और ईमानदारी की ज़रूरत होती है, लेकिन हाल के वर्षों में जिस तरह से पाकिस्तान ने सीमापार आतंकवाद को पोषित किया है, खासकर के जम्मू कश्मीर को निशाना बनाकर – उससे ये भरोसा टूटा है।

पत्र में आगे लिखा गया है, “सुरक्षा को लेकर बनी अनिश्चितता की वजह से भारत अपने अधिकारों का पूरा उपयोग नहीं कर पा रहा है, जो इस संधि के तहत उसे मिले थे। ऊपर से, जब भारत ने आपसे बातचीत का प्रस्ताव भी रखा, तो पाकिस्तान की तरफ से कोई ठोस जवाब नहीं आया। इन्हीं सब वजहों से भारत सरकार ने अब तय किया है कि Indus Water Treaty को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जा रहा है।”

इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ देश एकजुट: पहलगाम अटैक पर सर्वदलीय बैठक का संदेश, पाकिस्तान पर मोदी सरकार के एक्शन का विपक्ष ने किया समर्थन

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हिंदुओं पर आतंकी हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ साफ है। हमले के बाद केंद्र की मोदी सरकार एक्शन मोड में आ गई है। गुरुवार (24 अप्रैल 2025) को दिल्ली में सर्वदलीय बैठक बुलाई गई, जिसमें कॉन्ग्रेस नेता राहुल गांधी समेत सभी विपक्षी दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में इस हमले की एकजुट होकर निंदा की गई और सभी नेताओं ने सरकार के हर कदम का समर्थन करने का भरोसा दिया।

बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि रक्षा मंत्री ने पहलगाम हमले और कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) के फैसलों की जानकारी दी। रिजिजू ने कहा कि यह घटना बहुत दुखद है और पूरा देश चिंतित है। सरकार ने साफ कर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रहे हैं। सभी नेताओं ने सरकार के अब तक के कदमों और भविष्य की कार्रवाइयों का समर्थन किया। भारत ने साफ कर दिया कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद नहीं करता, सख्ती जारी रहेगी।

सरकार ने बताया कि पहलगाम रूट आमतौर पर जून में अमरनाथ यात्रा के लिए खोला जाता है, क्योंकि उस दौरान वहाँ तीर्थयात्री रुकते हैं। लेकिन इस बार स्थानीय टूर ऑपरेटर्स ने बिना प्रशासन को सूचित किए 20 अप्रैल 2025 से टूरिस्ट बुकिंग शुरू कर दी। इसकी वजह से वहाँ सुरक्षा बलों की तैनाती नहीं हो पाई, जो हर साल जून में होती है। इस सुरक्षा चूक ने हमले का रास्ता आसान कर दिया। सरकार अब ऐसी लापरवाही रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की तैयारी में है।

पाकिस्तान ने भारत की कार्रवाइयों का जवाब देते हुए शिमला समझौता रद्द करने और अपने एयरस्पेस को बंद करने की गीदड़भभकी दी है। लेकिन भारत में सभी दल एकजुट होकर सरकार के साथ खड़े हैं और आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम की माँग कर रहे हैं।

गीदड़भभकी पर उतरा भिखमंगा पाकिस्तान, कहा- पानी रोका तो इसे जंग मानेंगे, रद्द कर देंगे शिमला समझौता: चीन के भरोसे अब्दुल बासित ने बुने खून बहाने के ख्वाब

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में फिर तनाव बढ़ा दिया है। पहलगाम में हिंदुओं को निशाना बनाकर किए गए हमले के तार सीधे तौर पर पाकिस्तान से जुड़ रहे हैं। इस हमले के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया, अटारी-वाघा बॉर्डर बंद किया और पाकिस्तानी नागरिकों को 48 घंटे में देश छोड़ने का आदेश दिया। पाकिस्तान में इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया है। उसने जवाब में वाघा बॉर्डर और अपना एयरस्पेस बंद कर दिया। साथ ही शिमला समझौते को रद्द करने और खून बहाने की गीदड़भभकी दे रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान की नेशनल सिक्योरिटी कमेटी (एनएससी) ने भारत के पानी रोकने के फैसले को युद्ध की कार्रवाई माना है। एनएससी का कहना है कि सिंधु नदी का पानी पाकिस्तान की 24 करोड़ जनता की जिंदगी की रीढ़ है। अगर भारत ने पानी रोका, तो इसे युद्ध माना जाएगा और पूरा दम लगाकर जवाब दिया जाएगा। बैठक में पाकिस्तान ने भारत के साथ सभी व्यापार बंद करने और भारतीय दूतावास के स्टाफ को 30 तक सीमित करने का भी ऐलान किया।

इस बीच, पाकिस्तान के पूर्व राजदूत अब्दुल बासित ने ‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ से कहा कि भारत जल्द ही सैन्य कार्रवाई कर सकता है। बासित ने 2016 के उरी और 2019 के पुलवामा हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत नियंत्रण रेखा पार हमला कर सकता है और आतंकी ठिकानों को नष्ट करने का दावा करेगा। बासित ने सिंधु जल संधि के निलंबन को ‘प्रतीकात्मक’ बताया, क्योंकि भारत के पास अभी पानी रोकने का ढाँचा नहीं है।

अब्दुल बासित ने डर जताया है कि बलूचिस्तान में आतंकी हमले बढ़ सकते हैं और पाकिस्तान को कानून-व्यवस्था की चुनौतियों के लिए तैयार रहना चाहिए। बासित ने यह भी कहा कि चीन इसमें पाकिस्तान का साथ दे सकता है।

पाकिस्तान की धमकियों के बावजूद भारत ने 20 देशों को हमले की जानकारी दी और साफ कहा कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, संधि निलंबित रहेगी। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान अलग-थलग पड़ रहा है, लेकिन वह चीन के भरोसे गीदड़भभकी दे रहा है।

जनरल मुनीर ने पहलगाम अटैक के लिए उकसाया: अपने ही प्रोफेसर ने पाकिस्तान की खोल दी पोल, कहा- चीन में इस्लाम खत्म किया जा रहा और हम हिंदू घृणा से ग्रस्त हैं

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान की पोल खोलने का काम पाकिस्तान के ही प्रोफेसर इश्तियाक अहमद ने किया है। उन्होंने पाकिस्तान के फौज के प्रमुख जनरल असीम मुनीर की सोच पर भी गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि मुनीर यह बयान कि ‘हम हिंदुओं से अलग हैं’ बेहद भड़काऊ है। उनके बयान के कुछ दिन बाद ही मासूम लोगों की आतंकियों ने हत्या कर दी।

प्रोफेसर इश्तियाक ने कहा कि जनरल मुनीर ने ‘टू नेशन थ्योरी’ को एक बार फिर हवा दी है। यह बयान आंतरिक बवाल से जनता का ध्यान भटकाने के लिए फौज के मुखिया द्वारा दिया गया है। इश्तियाक अहमद ने कहा कि पाकिस्तान पड़ोसी मुल्क भारत के साथ संबंध नहीं रखना चाहता, लेकिन चीन के हमारा कौन सा रिश्ता है। क्या वो हमारा मामा लगता है? चीन तो वैसे भी नास्तिक है और वहाँ इस्लाम को खत्म किया जा रहा है।”

उन्होंने पाकिस्तान के फौजी जनरल से पूछा, “वहाँ (चीन के मामले में) तो आप चुप हैं। पाकिस्तान को आपने (मुनीर ने) फिर से मुसीबत में डाल दिया है।” भारत के बँटवारे पर सहित विभिन्न मामलों को पर कई किताबें लिखने वाले प्रोफेसर इश्तियाक ने कहा कि उनके जैसे कई लोगों भारत के साथ पाकिस्तान के हालात बेहतर करने में लगे हैं, ताकि व्यापार शुरू हो सके और पाकिस्तान के हालात बेहतर हो सकें।

कश्मीर को लेकर भी उन्होने पाकिस्तान के हुक्मरानों को लताड़ लगाई। उन्होंने कहा कि कश्मीर को लेकर पाकिस्तानी के हुक्मरान और फौजी ऐसी-ऐसी दलीलें दे रहे हैं, जो पहले ही पिट चुकी हैं। उन्होंने पाकिस्तान की सैन्य और कूटनीतिक असफलताओं की बात करते हुए कहा, “हम भारत से चार जंगें हार चुके हैं और भारत का एक इंच जमीन नहीं ले पाए, उल्टे अपना मुल्क ही तुड़वा लिया (बांग्लादेश)”।

प्रोफेसर ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की दुनिया में फिर से बदनामी होगी और उसे अराजकता फैलाने वाला देश कहा जाएगा। तहव्वुर राणा को भी भारत वापस ले लाया है और उससे वह चीजें उगलवाई जाएगी, जिससे पाकिस्तान को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने पाकिस्तान की शहवाज शरीफ की पोल खोलते हुए कहा कि मुल्क में असली पावर तो सेना प्रमुख के पास है।

प्रोफेसर ने कहा कि बलूचिस्तान के बाद अब सिंध के लोग भी बगावत के लिए उठ खड़े हुए हैं। नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर वैसे ही आतंकवाद की आग में जल रहा है। इसलिए जनरल मुनीर ने पाकिस्तान के लोगों का ध्यान इनकी तरफ की चीजों से हटाने के लिए टू-नेशन थ्योरी को फिर से रिवाइव करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का विदेश विभाग भी बेवकूफ है, वहाँ कोई काबिल व्यक्ति नहीं है।

प्रोफेसर इश्तियाक अहमद ने आगे कहा कि भारत में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की यात्रा जब भारत आए हुए थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब सऊदी अरब में मौजूद होने के दौरान कश्मीर में हमले से पाकिस्तान की बदनामी हो रही है। उन्होंने पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख को लताड़ते हुए कहा कि ‘खुदा का खौफ होना चाहिए’।

पहलगाम के इस्लामी आतंकियों को ‘मिलिटेंट्स’ बता रहा था NYT, अमेरिकी संसद की कमेटी ने रगड़ा: ‘बंदूकधारी-चरमपंथी’ की खाल में पहचान छिपा रहा विदेशी मीडिया

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हिंदुओं को निशाना बनाकर किए गए आतंकी हमले पर वैश्विक मीडिया की कवरेज ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बीच, अमेरिकी संसद की हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के बहुमत पक्ष (House Foreign Affairs Committee Majority) ने न्यूयॉर्क टाइम्स को आड़े हाथों लिया है। कमेटी ने ट्वीट करके कहा कि न्यूयॉर्क टाइम्स ने पहलगाम में हुए हमले को आतंकी हमला कहने के बजाय ‘मिलिटेंट्स’ यानी उग्रवादियों द्वारा हमला बताया, जो पूरी तरह गलत है।

हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी ने साफ कहा कि चाहे भारत हो या इजरायल, आतंकवाद को लेकर न्यूयॉर्क टाइम्स हकीकत से कोसों दूर है। कमेटी ने न्यूयॉर्क टाइम्स की हेडलाइन को ठीक करते हुए लिखा, “यह साफ-साफ आतंकी हमला था।”

बता दें कि पहलगाम में आतंकियों ने 28 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी, जिसमें से अधिकतर पर्यटक थे। पीड़ितों ने बताया कि हमलावरों ने पुरुषों की पैंट खोलकर यह चेक किया कि उनका खतना हुआ है या नहीं। जिनका खतना नहीं हुआ, उन्हें हिंदू समझकर गोली मार दी गई। आईडी कार्ड चेक किए गए और पूछा गया कि ‘मुस्लिम हो?’

इस हमले में 28 लोग मारे गए, जबकि न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में 24 लोगों के मारे जाने की बात कही। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हमले को क्षेत्र में नागरिकों पर सालों में सबसे खराब हमला बताते हुए इसे ‘आतंकी हमला’ करार दिया और दोषियों को सजा दिलाने का वादा किया।

लेकिन इस घटना को वैश्विक मीडिया ने जिस तरह से पेश किया, उसने कई सवाल खड़े कर दिए। ऑपइंडिया पहले ही अपनी रिपोर्ट में बता चुका है कि किस तरह से अल जजीरा, बीबीसी, न्यूयॉर्क टाइम्स, वाशिंगटन पोस्ट और पाकिस्तानी मीडिया डॉन जैसे बड़े संस्थानों ने आतंकियों को आतंकी कहने से परहेज किया। अल जजीरा ने आतंकियों को ‘सशस्त्र व्यक्ति’ और ‘बंदूकधारी’ कहा। उसने “आतंकी हमला” शब्द को डबल कोट में लिखा, जैसे कि उसे इस शब्द पर भरोसा ही न हो।

पाकिस्तानी मीडिया डॉन ने भी आतंकियों को ‘बंदूकधारी’ लिखा और जम्मू कश्मीर को ‘भारत अधिकृत कश्मीर’ कहकर भारत का हिस्सा मानने से इनकार किया। डॉन ने पहलगाम को ‘मुस्लिम बहुसंख्यक क्षेत्र’ करार दिया और हमले की जिम्मेदारी लेने वाले आतंकी संगठन ‘कश्मीर रेजिस्टेंस’ को ‘लिटिल नोन ग्रुप’ कहकर छोटा दिखाने की कोशिश की।

वाशिंगटन पोस्ट ने भी आतंकियों को ‘बंदूकधारी’ कहा और लिखा कि हमला ‘बिना किसी भेदभाव’ के किया गया, जबकि पीड़ितों ने साफ बताया कि हमला धर्म के आधार पर किया गया। वाशिंगटन पोस्ट ने यह भी लिखा कि भारत सरकार ने मुस्लिम बहुल इलाकों में असहमति को दबाने के लिए सख्त कार्रवाई की, जो इस हमले से ध्यान हटाने की कोशिश लगती है।

बीबीसी ने भी जम्मू कश्मीर को ‘भारत प्रशासित कश्मीर’ लिखा और आतंकवाद को ‘अलगाववादी विद्रोह’ कहकर हल्का करने की कोशिश की। बीबीसी ने यह भी दावा किया कि जम्मू कश्मीर में 5 लाख भारतीय सैनिक तैनात हैं, जो अतिशयोक्ति लगता है। बीबीसी ने आतंकियों को ‘चरमपंथी’ और ‘बंदूकधारी’ कहकर संबोधित किया। जर्मन मीडिया डीडब्ल्यू ने भी ‘भारत प्रशासित कश्मीर’ और ‘बंदूकधारी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।

यह पहली बार नहीं है जब वैश्विक मीडिया ने आतंकवाद को हल्का दिखाने की कोशिश की हो। भारत में आतंकवाद को लेकर पहले भी कई बार ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, जो आतंकियों का बचाव करते नजर आते हैं। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान आतंकवाद को सही तरीके से पेश करने से पीछे हटते हैं और सिर्फ अपने हितों को ध्यान में रखकर काम करते हैं।

पहलगाम आतंकी हमले और गुजरात में पकड़े गए ₹21000 करोड़ के ड्रग्स के बीच कनेक्शन: हमले के लिए लश्कर जुटा रहा था फंडिंग, NIA ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने पहलगाम हमले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक बड़ा खुलासा किया है। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने बताया है कि पहलगाम में जो आतंकी हमला हुआ है, उसका सीधा संबंध गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पकड़े गए 21,000 करोड़ रुपए के ड्रग्स के जखीरे से है। एजेंसी ने सितंबर 2021 में तकरीबन 3,000 किलोग्राम हेरोइन पकड़ी थी।

NIA ने कहा है कि पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा (LeT) नाम का आतंकी संगठन ड्रग्स बेचकर जेहाद के लिए पैसा जुटा रहा था। एजेंसी का कहना है कि लश्कर-ए-तैयबा उन पैसों का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा एवं अंजाम देने के लिए करना चाह रहा था। इसके साथ ही वह देश के युवाओं को नशे का आदी बनाकर भारत को कमजोर करना चाहता था।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट में कहा, “देखिए पहलगाम में उन्होंने (आतंकी) पर्यटकों के साथ क्या किया? उन्होंने मासूम पर्यटकों पर गोली चलाई।” उन्होंने आगे इस खेप के जरिए भी वह ऐसा ही करना चाह रहा था। पहले भी इसी तरह से ड्रग्स की खेप अफगानिस्तान से भारत लाई गई थी। यह खेप वैध कागजात के साथ लाया गया था, जिनमें टाल्क स्टोन होने की बात कही गई थी।

एनआईए का कहना है कि ड्रग्स बेचकर जो भी पैसा मिलता था, उसे दिल्ली के कुछ गोदामों में रखा जाता था और फिर वहाँ से एलईटी तक पहुँचाया जाता था। एनआईए ने साफ कहा कि यह भारत में पकड़ी गई ड्रग्स की सबसे बड़ी खेप है। एजेंसी ने हरप्रीत सिंह तलवार उर्फ कबीर तलवार नाम के एक व्यक्ति को भी इस ड्रग्स के धंधे में शामिल बताया है, जो फिलहाल जमानत माँग रहा है।

एनआईए ने कोर्ट में कहा है कि अफगानिस्तान में बैठे ड्रग्स तस्करों ने 2,999.2 किलोग्राम की बड़ी मात्रा में हेरोइन भारत भेजी थी। इसमें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और ईरान के कुछ लोगों ने मदद की थी। इसकी कीमत 21,000 हजार करोड़ रुपए थी। इसे ईरान के रास्ते लाया गया था और टाल्क स्टोन बताकर मुंद्रा पोर्ट पर उतारा गया था।

एजेंसी ने यह भी कहा कि इस मामले में गवाह ने एक व्यक्ति ने बयान दिया था कि लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) के मारे गए गुर्गे लतीफ राथर ने उसे बताया था कि दिसंबर 2021 में मोहम्मद इकबाल अवान और अफगानिस्तान/पाकिस्तान स्थित ड्रग तस्करों ने उसके साथ कश्मीर मुद्दे, अनुच्छेद 370 पर चर्चा की थी।

उस गवाह ने NIA को आगे कहा था कि लतीफ ने अपने कोड नाम मलिक को हरियाणा के एक व्यक्ति से 10 और 15 लाख वसूलने के लिए दिल्ली/हरियाणा सीमा पर भेजा था। एजेंसी ने अदालत को बताया, “इस पैसे का इस्तेमाल लश्कर-ए-तैयबा के नए रंगरूटों के लिए हथियार और गोला-बारूद खरीदने के लिए किया गया था।”