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जम्मू-कश्मीर में बनेगा भगवान वेंकटेश्वर का भव्य मंदिर, TTD को 62 एकड़ जमीन लीज पर देने के प्रस्ताव पर लगी मुह​र

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में भगवान वेंकटेश्वर के भव्य मंदिर बनने का रास्ता साफ हो गया है। तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को जमीन देने के प्रस्ताव पर प्रशासनिक परिषद ने मुहर लगा दी है। परिषद की श्रीनगर में हुई बैठक में टीटीडी को मंदिर एवं अन्य सुविधाओं के निर्माण के लिए 496 कनाल 17 मरले (लगभग 62 एकड़ अथवा ढाई लाख वर्ग मीटर) जमीन देने का फैसला हुआ है। जम्मू में यह जमीन 40 साल के लीज पर दी जाएगी। बैठक की अध्यक्षता जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने की।  

इस भूमि पर टीटीडी मंदिर के अलावा वेद पाठशाला, आध्यात्म केंद्र और आवास जैसी अन्य सुविधाओं का निर्माण करेगा। निकट भविष्य में स्वास्थ्य एवं शिक्षा सुविधाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इसका उद्देश्य जम्मू में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना है। जम्मू और कटरा के बीच बनने वाला यह मंदिर तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर की प्रतिकृति होगा। टीटीडी ने वैदिक स्कूल और अस्तपाल के साथ दो वर्षों में मंदिर निर्माण की बात कही है।

तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड का गठन सरकार ने टीटीडी एक्ट 1932 एक्ट के तहत किया था। यह ट्रस्ट आंध्र प्रदेश के तिरुपति में स्थित भगवान वेंकटेश्वर के भव्य मंदिर की प्रशासनिक जिम्मेदारी देखता है।

जम्मू में टीटीडी के इस प्रोजेक्ट के पूरा हो जाने के बाद धार्मिक पर्यटन एवं क्षेत्र में आर्थिक अवसरों में भी वृद्धि होगी। जम्मू में बाबा अमरनाथ और माता वैष्णो देवी के बाद भगवान वेंकटेश्वर का मंदिर भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र बन सकता है। जम्मू-कश्मीर प्रशासन इसी वर्ष फरवरी में श्रीवारी मंदिर के निर्माण के लिए भी 100 एकड़ भूमि दे चुका है।

जम्मू-कश्मीर के अलावा टीटीडी ने भगवान वेंकटेश्वर का भव्य मंदिर वाराणसी और मुंबई में भी बनाने की योजना बना रखी है। चेन्नई, विशाखापत्तनम और भुवनेश्वर में मंदिरों का निर्माण जारी है। टीटीडी हैदराबाद, कुरुक्षेत्र और कन्याकुमारी में पहले ही श्री वेंकटेश्वर स्वामी का मंदिर बना चुका है और ये आस्था के बड़े केंद्र बनकर उभरे हैं।

ओडिशा: भगवान जगन्नाथ की ‘मौसी माँ’ मंदिर में चोरी, स्थानीय नाराज

अराजक तत्वों ने पुरी के ‘मौसी माँ’ मंदिर में बुधवार (31 मार्च 2021) की रात चोरी कर चार हजार रुपए नगद और अन्य बहुमूल्य वस्तुएँ ले गए। रिपोर्ट्स के अनुसार चोरों ने दान पात्र का ताला तोड़कर चोरी की। ‘मौसी माँ’ मंदिर पुरी के जगन्नाथ मंदिर से मात्र 500 मीटर की दूरी पर स्थित है। रथ यात्रा की परंपराओं में इस मंदिर का बहुत महत्व है।

स्थानीय निवासियों ने मंदिर में हुई चोरी के प्रति आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र में अपराध और अवैध नशे का व्यापार बढ़ता जा रहा है। ‘मौसी माँ’ मंदिर के भीतर चोरी होना एक गंभीर बात है। निवासियों ने शहर के सीसीटीवी कैमरों की खराबी पर भी आक्रोश व्यक्त किया।

हालाँकि पुरी एसपी विशाल सिंह ने कहा कि चोरों ने दान पात्र से चार हजार रुपए नगद चुराए हैं। इसके अतिरिक्त अन्य बहुमूल्य वस्तुओं की चोरी की खबर सही नहीं है। सिंह के अनुसार कुछ संदिग्धों की पहचान की गई है और उनसे पूछताछ जारी है। मंदिर के मुख्य पुजारी के अनुसार चोरों ने दानपात्र में कुछ भी नहीं छोड़ा। मूर्ति के आभूषण चोरी होने से बच गए हैं, क्योंकि रात्रि में मंदिर के कपाट बंद होने से पहले मूर्ति से आभूषण उतार लिए जाते हैं।

इस साल जनवरी में लुटेरों ने पुरी जिले के पिपिली क्षेत्र के काकुड़िया स्थित 13वीं शताब्दी के श्री गोपीनाथदेव मंदिर का ताला तोड़कर पुरानी धातु की मूर्तियों को चुरा लिया था। पिछले महीने उन लुटेरों को गिरफ्तार किया गया था।

‘मौसी माँ’ मंदिर भगवान जगन्नाथ की मौसी को समर्पित है। प्रत्येक वर्ष होने वाली रथ यात्रा में इस मंदिर का विशेष स्थान है। ‘बहुड़ा यात्रा’ के दौरान भगवान जगन्नाथ का रथ ‘मौसी माँ’ मंदिर के सामने रुकता है और भगवान वहाँ से ‘पोड पिठा’ ग्रहण करते हैं।  

ना-हाँ-ना: भारत के साथ व्यापार पर दबाव में पलटा पाकिस्तान, खुद ही प्रतिबंध हटाकर फिर लगाया

पाकिस्तान की सरकार वहाँ की इस्लामी कट्टरवादियों के सामने झुक गई है। वहाँ की केंद्रीय कैबिनेट ने ‘इकोनॉमिक कोआर्डिनेशन कमिटी (ECC)’ के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, जिसमें भारत से कॉटन और शुगर इम्पोर्ट करने की बात कही गई थी। 1 दिन पहले ही पाकिस्तान ने भारत से होने वाले व्यापार पर से पाबंदी हटाई थी। 2019 में अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद पाकिस्तान ने बौखलाहट में ये निर्णय लिया था।

पाकिस्तान को डर था कि टेक्सटाइल प्रोडक्शन के इनपुट में काफी कमी आ सकती है, इसलिए उसने बुधवार (मार्च 31, 2021) को भारत से कॉटन इम्पोर्ट किए जाने पर पाबंदी हटाने का फैसला लिया था। इसके बाद पाकिस्तान में विभिन्न हलकों से विरोध के स्वर उठने लगे थे। वहाँ के कट्टरपंथियों और विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया था कि इमरान खान सरकार भारत के साथ रिश्ते बेहतर करने में लगी हुई है।

उनका कहना था कि जम्मू-कश्मीर पर भारत ने एक कदम भी पीछे नहीं खींचा है, ऐसे में पाकिस्तान द्वारा अपने कदम पीछे लेना ठीक नहीं है। जम्मू-कश्मीर पर भारत ने पाकिस्तान या किसी भी बाहरी ताकत के सामने न झुकते हुए अपने निर्णय का बचाव किया, जबकि पाकिस्तान की मीडिया ही वहाँ की सरकार की ‘हाँ-ना’ पर तंज कस रही है। इससे पता चलता है कि इमरान सरकार कन्फ्यूज्ड है और खुद ही उछाल-कूद कर इधर-उधर के फैसले ले रही है और पलट रही है।

केंद्रीय कैबिनेट ने निर्णय लिया है कि व्यापार पर से प्रतिबंध नहीं हटाया जाएगा, भले ही पाकिस्तान में आर्थिक संकट चाहे कितना भी गहरा हो जाए। पहले पाकिस्तान ने कहा था कि भारत अपने कदम वापस लेगा, तभी व्यापार खुलेगा। इसी तरह मई 2020 में पाकिस्तान ने भारतीय दवाओं पर लगा प्रतिबंध हटाया था। कोरोना के कारण मात्र एक साल बाद ही उसे ये प्रतिबंध हटाने को मजबूर होना पड़ा। अब पाकिस्तान ने 24 घंटे में फिर अपना फैसला पलटा है।

कश्मीर: BJP नेता अनवर खान के घर आतंकी हमला, पुलिसकर्मी की मौत; आतंकियों की तलाश जारी

जम्मू-कश्मीर के नौगाम के अरीबाग में भाजपा नेता अनवर खान के घर पर आतंकी हमला हुआ। इसमें पुलिस के एक जवान रमीज राजा की मौत हो गई। हमले को अंजाम देने के बाद आतंकी पुलिसकर्मी की एके-47 भी लेकर फरार हो गए। आतंकियों की तलाश में सेना और पुलिस टीम सर्च ऑपरेशन चला रही है।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक आतंकियों की गोली से जवान घायल हो गया था। बाद अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में उसकी मौत हो गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि जिस वक्त ये हमला हुआ उस दौरान भाजपा नेता अनवर खान उत्तरी कश्मीर में कैंपेन कर रहे थे। इस कारण वह अपने घर पर नहीं थे।

अनवर खान भाजपा के बारामुला जिले के सचिव और कुपवाड़ा जिले के इंचार्ज हैं। 2018 में भी पुलवामा में उन पर आतंकियों ने गोली चलाई थी। उस दौरान उन्हें बचाने के चक्कर में एक पुलिस अधिकारी बुरी तरह से घायल हो गए थे।

जम्मू-कश्मीर के आईजीपी विजय कुमार ने कहा कि गर्मी के मौसम में संदिग्ध हमलों के बढ़ते ग्राफ को देखते हुए विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेताओं की सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है। दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक बीते चार दिन में यह दूसरा बड़ा आतंकी हमला नेताओं पर हुआ है। बीते सोमवार को सोपोर में हुए आतंकी हमले में दो काउंसलरों की मौत हो गई थी। वहीं जम्मू-कश्मीर पुलिस का एक पीएसओ वारगति को प्राप्त हो गया था। आतंकी संगठन द रेजिस्टेंट्स फ्रंट ने इसकी जिम्मेदारी भी ली थी।

‘दीदी को जय श्रीराम से दिक्कत, भगवा-तिलक से दिक्कत’: जयनगर में बोले PM मोदी- बंगाल में 200 के पार जाएगी BJP

पश्चिम बंगाल की 30 विधानसभा सीटों पर गुरुवार (1 अप्रैल 2021) को वोट डाले जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राज्य के जयनगर में रैली की। उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए ममता सरकार को घेरा। पहले चरण में हुई भारी वोटिंग का हवाला दे कहा कि भाजपा की जीत का आँकड़ा 200 भी पार कर जाएगा। दूसरे चरण में भी उन्होंने भाजपा का बोलबाला बताया।

उन्होंने शोभा मजूमदार को भी श्रद्धांजलि दी, जिनकी पिछले दिनों तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों की पिटाई की वजह से मौत हो गई थी। उन्होंने कहा, “शोभा जी, बंगाल की उन अनगिनत माताओं, उन अनगिनत बहनों का चेहरा थीं जिन पर तृणमूल के लोगों ने अत्याचार किया। शोभा जी का वो चेहरा मेरी आँखों से उतरता नहीं है।”

ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “धमकी और गालियाँ देने वाली दीदी कह रही हैं- Cool Cool! दीदी, तृणमूल, कूल नहीं, बंगाल के लोगों के लिए शूल है। बंगाल को असहनीय पीड़ा देने वाला शूल है तृणमूल। बंगाल को रक्तरंजित करने वाला शूल है तृणमूल। बंगाल के साथ अन्याय करने वाला शूल है तृणमूल।”

पीएम ने कहा कि बंगाल की राजनीति का ओपिनियन पोल और एग्जिट पोल, सब कुछ ममता दीदी के फैसले बन गए हैं। वह भवानीपुर छोड़ नंदीग्राम गईं। वहाँ जब उन्हें लगा कि उनसे गलती हुई तो वह लोगों के अपमान पर उतर आईं। उन्होंने कई नेताओं से मदद की अपील की है। जो लोग उनकी नजर में बाहरी हैं, टूरिस्ट हैं, जिन्हें वो कभी मिलने तक का समय नहीं देती थीं, अब उनसे समर्थन माँग रही हैं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “ममता दीदी जिस तरह यूपी और बिहार के लोगों के खिलाफ दुश्मनी की भाषा बोल रही हैं, वो उनकी राजनीतिक समझ पर सवाल पैदा कर रहा है। दीदी आप ये भूल रही हैं कि आपने सीएम के नाते संविधान की शपथ ली हुई है। भारत का संविधान आपको इसकी इजाजत नहीं देता कि आप दूसरे राज्यों का इस तरह अपमान करें।”

पीएम ने कहा कि दीदी को जय श्रीराम के आह्वान से दिक्कत है, दुर्गा जी की प्रतिमा के विसर्जन से दिक्कत है, ये पूरा बंगाल पहले से जानता है। लेकिन अब दीदी को तिलक से दिक्कत है। अब दीदी को भगवा वस्त्र से दिक्कत है और तो और अब दीदी के लोग चोटी रखने वालों को राक्षस कहने लगे हैं।

पीएम ने कहा कि दीदी की समस्या क्या है। वो पूरा क्षेत्र जानता है। सुंदरबन का इलाका जानता है। घुसपैठियों को खुश करने के लिए दीदी बंगाल के लोगों को भूल गईं। यहाँ उन्नयन के नाम पर उन्होंने 10 साल में क्या किया, इसका कोई ठोस जवाब दीदी के पास नहीं है।

किसानों को हुए नुकसान पर बात रखते हुए प्रधानमंत्री ने कटमनी जैसे मुद्दे को उठाया। भाजपा द्वारा की गई मदद और योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि उन्हें जशोरेश्वरी काली माता मंदिर जाता देख दीदी को क्या आपत्ति है। उनके ओरकांडी के पुण्य भूमि जाने से उन्हें क्यों गुस्सा आ रहा है।

बंगाल में मतदान के बीच BJP कार्यकर्ताओं की हत्या, मुस्लिमों पर वोट डालने से रोकने के आरोप: खुद पोलिंग बूथ पर डटीं ममता

पश्चिम बंगाल में गुरुवार (अप्रैल 1, 2021) को दूसरे चरण की 30 विधानसभा सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं। इनमें TMC और भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का विषय बना नंदीग्राम भी है। यहाँ मुख्य लड़ाई सीएम ममता बनर्जी और अधिकारी परिवार के शुभेन्दु के बीच है। इस बीच नंदीग्राम में एक भाजपा कार्यकर्ता का शव लटकता हुआ मिला है। पूर्वी मेदिनीपुर के चाँदीपुर में भी एक भाजपा कार्यकर्ता की हत्या हुई है।

हत्या के आरोप तृणमूल के गुंडों पर ही लगे हैं। मृत भाजपा कार्यकर्ता का नाम गुरुपद प्रधान है। भाजपा नेताओं ने चुनाव आयोग को टैग कर इस घटना के बारे में बताया। जगह-जगह पोलिंग बूथ पर दोनों दलों के कार्यकर्ताओं में झड़प की भी खबर है। नंदीग्राम के एक बूथ पर आरोप लगा कि वहाँ के मुस्लिम लोगों को वोट नहीं डालने दे रहे थे, जिसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं से उनकी नोकझोंक हुई और सशस्त्र बलों को तैनात करना पड़ा।

पश्चिम मेदिनीपुर के केशपुर मे TMC के गुंडों ने ‘Zee 24 घंटा’ की महिला रिपोर्टर को निशाना बनाया और उसकी गाड़ी पर लाठी-डंडों से वार किए। महिला रिपोर्टर की गाड़ी को चारों तरफ से घेर कर ताबड़तोड़ प्रहार किया गया, जिससे गाड़ी के कई हिस्से टूट-फूट गए। नंदीग्राम के गोकुलनगर में खुद मुख्यमंत्री ममता पहुँच गईं और पोलिंग बूथ के भीतर बैठ गईं। इससे वहाँ के TMC कार्यकर्ता उग्र हो गए और मारपीट की।

जवाब में भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए। गोकुल नगर इलाक़े में ही नंदीग्राम आंदोलन के समय किसानों पर गोली चली थी, ऐसे में ये इलाका खास संवेदनशील है। गाँव के बूथ पर ममता बनर्जी के होने के कारण तृणमूल के कार्यकर्ता काफी उग्र होकर विचरने लगे। वहाँ ममता बनर्जी के सामने ही ‘जय श्री राम’ के नारे लगे। ममता ने मीडिया के सामने ही राज्यपाल जगदीप धनखड़ को फोन कॉल कर इसकी शिकायत की।

ममता बनर्जी ने पोलिंग बूथ से गवर्नर को फोन कर आरोप लगाया कि वहाँ पर उनकी पार्टी के समर्थकों को वोट नहीं डालने दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वो सुबह से ही इलाके में हैं और देख रही हैं कि स्थानीय लोगों को वोट नहीं डालने दिया जा रहा है, इसीलिए वो राज्यपाल से अपील करती हैं कि वो संज्ञान लें। पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण की 30 सीटों पर 19 महिलाओं सहित 171 उम्‍मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में हमेशा से अधिकाधिक मतदान का रेकॉर्ड बनता रहा है, ऐसे में इस बार भी दोपहर 3:30 बजे तक 71% से अधिक मतदान हुआ है और उम्मीद है कि पहले चरण की तरह इस बार भी प्रतिशत 80 के पार जाएगा। नंदीग्राम से भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि हार के डर से ममता बनर्जी  परेशान हैं और डर के मारे अब वे लोग बूथ कैप्चरिंग पर उतर आए हैं। शुभेंदु ने कहा कि टीएमसी के लोगों ने बूथों पर कैप्चरिंग की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने उन्हें धर-दबोचा।

शुभेन्दु ने आरोप लगाया कि टीएमसी वालों ने दूसरे बूथों पर फेक आईडी से वोट डालने की कोशिश की, लेकिन वहाँ भी पकड़े गए। ममता बनर्जी ने आज की रैलियों को रद्द कर रेयापारा क्षेत्र में बने अपने वॉर रूम में कैंप करने का फैसला किया है और वो दिन भर नंदीग्राम में ही डटी रहेंगी। इससे पहले बंगाल पुलिस ने देबरा में भाजपा के मंडल अध्यक्ष मोहन सिंह को हंगामा करने के आरोप में हिरासत में लिया।

तृणमूल कॉन्ग्रेस को राज्य में चुनाव संपन्न कराने आए CRPF के जवानों से भी शिकायत है। पार्टी का कहना है कि CRPF की वर्दी में भाजपा के लोग घूम रहे हैं। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए अदालत जाने की धमकी दी है। उनका कहना है कि सुबह से पार्टी ने 63 शिकायतें दायर की हैं। केशपुर के भाजपा उम्मीदवार तन्मय घोष की गाड़ी पर भी हमला हुआ और तोड़फोड़ की गई।

‘भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने में लगा है RSS’: सिखों के संगठन ने कहा- कृषि कानून वापस लो, संघ को बैन करो

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC) ने एक प्रस्ताव पास किया है। इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भारत को ‘हिन्दू राष्ट्र’ बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है। संघ पर प्रतिबंध लगाने और कृषि सुधार कानूनों को वापस लेने की माँग की गई है।

प्रस्ताव में एसजीपीसी ने आरोप लगाया है कि आरएसएस दूसरे पंथों और अल्पसंख्यकों की स्वतंत्रता का हनन कर भारत को ‘हिन्दू राष्ट्र’ बनाना चाहता है। उसके ‘हिन्दू राष्ट्र’ निर्माण की योजना के कारण अल्पसंख्यकों को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से निशाना बनाया जा रहा है।

अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह लगातार आरएसएस के विरोध में बोलते आए हैं और आरएसएस को बैन करने की माँग भी उन्होंने कई बार की है। जून 2020 में ऑपरेशन ‘ब्लू स्टार’ की बरसी पर कहा था कि प्रत्येक सिख खालिस्तान चाहता है और यदि सरकार खालिस्तान की माँग स्वीकार करती है तो हमें और कुछ नहीं चाहिए। 2019 में सिंह ने कहा था कि आरएसएस देश के हित में नहीं है। यह देश को बर्बाद कर देगा। सरकार को इसे बैन करना चाहिए, क्योंकि आरएसएस के कार्य देश को विभाजित करते हैं, न कि संगठित।

30 मार्च 2021 को पास प्रस्ताव कहा गया है कि भारत एक बहुधर्मी, बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक देश है। प्रत्येक धर्म का स्वतंत्रता में योगदान है और विशेषकर सिखों का। किन्तु कुछ समय से आरएसएस के ‘हिन्दू राष्ट्र’ की योजना के कारण अल्पसंख्यकों की स्वतंत्रता का हनन हो रहा है। एसजीपीसी की वेबसाइट पर उपलब्ध इस प्रस्ताव में आरएसएस की जमकर आलोचना की गई है और सरकार से यह माँग की गई है कि वह अल्पसंख्यकों के हितों को सुरक्षित करे।

आरएसएस के विरुद्ध एसजीपीसी का प्रस्ताव

एसजीपीसी ने कृषि कानूनों के विरुद्ध भी प्रस्ताव पास किया है। इसमें कृषि सुधार कानूनों को ‘काला कानून’ कहा गया है। प्रस्ताव के माध्यम से सरकार से माँग की गई है कि इन कृषि कानूनों को खत्म किया जाए।

कृषि सुधार कानूनों के विरुद्ध प्रस्ताव

प्रस्ताव में 26 जनवरी के मार्च दौरान हुई हिंसा की जाँच और इस मामले में गिरफ्तार लोगों की तत्काल रिहाई की भी माँग की गई है।

‘असम को प्यार करने वाला हर व्यक्ति आहत है’: अजमल को PM मोदी ने घेरा, गमोसा का अपमान करते दिखे थे AIUDF के मुखिया

असम में विधानसभा चुनावों के बीच एक चुनावी रैली में ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने असम के सांस्कृतिक प्रतीक ‘गमोसा’ का अपमान किया। रैली में अजमल गमोसा को फेंकते नजर आए। इसके बाद AIUDF मुखिया की हर जगह आलोचना शुरू हो गई। आज प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस हरकत पर अजमल को घेरा। उन्होंने कहा कि इससे लोगों की भावनाएँ आहत हुई है और उनमें गुस्सा है।

बता दें कि कल मौलाना बदरुद्दीन अजमल, नगरबेरा में एक रैली के दौरान अपने ही पार्टी कार्यकर्ता पर नाराज होते दिखाई दिए। इस दौरान उन्होंने गमोसा को कार्यकर्ता पर फेंका। यह उन्हें अभिवादन में दिया गया था, मगर कार्यकर्ता से नाराज होते ही वह सार्वजनिक तौर पर इसका अपमान करने से नहीं चूके।

रिपोर्ट्स के अनुसार, रैली में हो रही बेवजह की देरी से अजमल अपने कार्यकर्ता से नाराज थे। उन्हें चिंता थी कि अगर रैली में ही देर हो गई तो उनका हेलीकॉप्टर मौसम के कारण टेक ऑफ नहीं कर पाएगा।

बता दें कि गमोसा असम के लिए लोगों के लिए सिर्फ़ कोई कपड़े का टुकड़ा नहीं है। इससे उनकी सांस्कृतिक पहचान जुड़ी हुई है। हाल में पीएम मोदी इसे धारण किए नजर आए थे। उनके कारण इसे राष्ट्रीय प्रसिद्धि भी मिली। 

इस गमछे के तीन किनारे लाल रंग के होते हैं और चौथे किनारे पर स्थानीय और प्राकृतिक कलाकृतियाँ बनी होती हैं। इसमें चित्रकारी लाल रंग की होती है। इसे खास त्योहारों पर पहना जाता है।

गमोसा की इतनी महत्ता के कारण ही अजमल की हरकत को असमिया संस्कृति का अपमान कहा जा रहा है। भाजपा ने भी इसे शेयर कर AIUDF और कॉन्ग्रेस के गठबंधन पर सवाल उठाया है। मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने ट्वीट करके कहा कि ये गठबंधन असम की संस्कृति और धरोहर को अपमानित करने के लिए हुआ है।

केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने भी गमोसा के निरादर पर अजमल को घेरा। वहीं पीएम मोदी ने आज कोकराझार में कहा, “कल पूरे असम ने देखा है कि कैसे असम की पहचान, असम की बहनों के श्रम के प्रतीक, गमोसा का सरेआम अपमान किया गया। असम को प्यार करने वाला हर व्यक्ति, इन तस्वीरों को देखकर बहुत आहत है, गुस्से में है। इस अपमान की सजा कॉन्ग्रेस को तो मिलेगी ही, पूरे महाझूठ को मिलेगी।”

उल्लेखनीय है कि ये पहली बार नहीं है जब बदरुद्दीन अजमल को इस तरह गुस्से में देखा गया हो। इससे पहले वह रिपोर्टर पर बूम माइक फेंकते नजर आए थे। 

‘TDP के घटते जनाधार से घबरा चंद्रबाबू नायडू ने पार्टी का BJP में किया विलय’: आंध्र की मुख्य विपक्षी पार्टी ‘अप्रैल फूल’ से भड़की

आज गुरुवार (अप्रैल 1, 2021) को ‘अप्रैल फूल’ बनाने के लिए एक पत्रकार ने कुछ ऐसा लिख दिया, जिससे आंध्र प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी TDP नाराज़ हो गई। ये लेख ‘डेक्कन क्रॉनिकल’ के रेजिडेंट एडिटर श्रीराम कर्री ने शेयर किया था, जिस पर चंद्रबाबू नायडू की पार्टी भड़क गई। दरअसल, इस ‘खबर’ में लिखा है कि 3 बार मुख्यमंत्री रहे नायडू ने अपनी लड़खड़ाती पार्टी का भाजपा में विलय करने का निर्णय लिया है।

इस पर बौखलाती हुई TDP ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि केवल मूर्ख ही ‘अप्रैल फूल’ मनाने के लिए ख़बरों का इस्तेमाल करते हैं। TDP ने लिखा कि ‘अप्रैल फूल डे’ का फायदा उठा कर श्रीराम कर्री ने फेक न्यूज़ फैलाने का काम किया है, जिससे न सिर्फ उन्होंने पत्रकारिता को नीचे धकेला है, बल्कि पाठकों को भी निराश किया है। तेदेपा ने लिखा कि उस पत्रकार ने ‘अपने मालिकों के साथ खुद के विलय’ का खुलासा किया है, जिससे उसे इनाम मिलेगा।

DC के उस लेख में लिखा है, “TDP के नेताओं को ऐसा लगता है कि पार्टी के भीतर जोश की भारी कमी है और सत्ताधारी YSRCP से अगले 3 वर्षों में सत्ता छीनने की छोटी सी उम्मीद ही बची है। लोगों के घटते समर्थन और हर जिले में कैडर और नेताओं के अलग होने के बाद नायडू ने ये फैसला लिया है। चिरंजीवी ने इसी तरह अपनी पार्टी का कॉन्ग्रेस में विलय किया था। अभी ये साफ़ नहीं है कि क्या TDP से भाजपा में गए किसी पूर्व राज्यसभा सांसद ने बिचौलिए की भूमिका निभाई।”

लेख में आगे लिखा है, “करार के अनुसार, नायडू ने बिना शर्त अपनी पार्टी का भाजपा के साथ विलय कर केंद्रीय राजनीति में जाने की योजना बनाई है। TDP ने शर्त रखी थी कि चंद्रबाबू नायडू को केंद्रीय कैबिनेट में एक बड़े विभाग का मंत्री बनाया जाए, जिसे भाजपा ने ठुकरा दिया। लेकिन, उन्हें जल्द ही केंद्रीय कैबिनेट रैंक मिल सकता है। MLC, TDP सचिव और नायडू के बेटे नारा लोकेश के भविष्य को लेकर भी भाजपा ने कोई वादा नहीं किया है।”

खबर के अंत में लिखा था कि ये ‘अप्रैल फूल जोक’ है। आंध्र प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष सुनील देवधर ने भी इस खबर का स्क्रीनशॉट शेयर किया और पूछा कि क्या ये ‘अप्रैल फूल जोक’ है? बता दें कि TDP कभी राजग का हिस्सा हुआ करती थी, लेकिन 2018 में पार्टी भाजपा नीत गठबंधन से अलग हो गई थी। इसके बाद नायडू ने कई बड़े नेताओं से मिल कर तीसरे मोर्चे की तैयारी शुरू कर दी थी।

लेकिन पार्टी को धरातल पर आते समय नहीं लगा क्योंकि अगले ही साल हुए लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उसे जगन मोहन रेड्डी की पार्टी से कड़ी पटखनी मिली। इसके बाद नायडू की पार्टी के मंत्रियों सहित 50 बड़े नेताओं ने भाजपा का दामन थामा। कहा जाता है कि एक रैली में नायडू ने NDA से अलग होने पर अफ़सोस भी जाहिर किया था। फ़िलहाल नायडू और उनकी पूर्ववर्ती सरकार भ्रष्टाचार के कई आरोपों से जूझ रही है।

BJP विधायक अरुण नारंग पर हमले के आरोपितों का 20 वकीलों ने किया समर्थन, मुफ्त कानूनी मदद की पेशकश

पंजाब के अबोहर से बीजेपी विधायक अरुण नारंग के साथ मारपीट करने वाले कथित प्रदर्शनकारियों के समर्थन में वकील उतर आए हैं। बठिंडा और मुक्तसर जिले के कम से कम 20 वकीलों ने नारंग पर हमले के आरोपितों का समर्थन करते हुए मुफ्त कानूनी सहायता की पेशकश की है।

इससे पहले पुलिस ने इस मामले में भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू सिधुपुर) की मुक्तसर ईकाई के अध्यक्ष सुखदेव सिंह और 26 अन्य के खिलाफ मालौट शहर में भाजपा विधायक नारंग की हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया था।

नांरग से साथ यह घटना उस वक्त हुई, जब वे राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार की नाकामियों को उजागर करने के लिए आयोजित संवाददाता सम्मेलन में भाग लेने जा रहे थे। प्रदर्शनकारी पहले से ही भाजपा कार्यालय पर थे। नारंग पहुँचे तो इन लोगों ने उन पर स्याही फेंकी और उनकी कार को भी गंदा किया। जब वे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बाहर निकले तो प्रदर्शनकारियों ने उनके कपड़े फाड़कर बीच सड़क पर उन्हें नंगा कर दिया था।

नारंग ने ऑप इंडिया को बताया कि ये स्पष्ट नहीं है कि कौन लोग किसानों को भड़का रहे हैं। ऐसा लगा जैसे उनकी योजना मेरी हत्या करने की थी। हालाँकि, उन्होंने किसान संघ के झंडे लिए थे। लेकिन वह गुंडे थे। उनके खिलाफ जाँच होनी चाहिए और जल्द से जल्द उन्हें पकड़ा जाना चाहिए।

अरुण नारंग से मारपीट करने वालों को मुफ्त कानूनी सहायता देने के ऐलान करने वाले 20 वकीलों में से एक रामपुर फूल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अजीतपाल सिंह मंदर ने कहा कि भीड़तंत्र पूरे देश में है। ये प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी है कि वो ये पक्का करें कि संवेदनशील जगहों पर भीड़ इकट्ठी न हो। पुलिस ने सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए थे। अगर भीड़ वहाँ इकट्ठा हुई थी तो उसे पुलिस को हटाना चाहिए था। उन्होंने बीजेपी नेताओं को भी नसीहत देते हुए कहा कि भाजपा के नेताओं को पहले से तैयार रहना चाहिए था, जब वो जानते थे कि उनके खिलाफ नफरत का वातावरण है।

वकील ने मारपीट के मामले में हत्या की कोशिश का केस दर्ज करने को गलत ठहराया और कहा कि इस केस में धारा 355 के तहत एफआईआर होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि किसी के कपड़े फाड़ने का अर्थ हत्या की कोशिश नहीं है।

वहीं वहीं नारंग ने पुलिस पर अपनी सुरक्षा के लिए कुछ नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अबोहर की जनता और उनके परिवार की दुआओं ने उन्हें भीड़ से बचाया। उन्होंने मानसिक तौर पर मेरी हत्या की कोशिश की, ताकि भावनात्मक रूप से मुझे खत्म किया जा सके। लेकिन, आप सभी का समर्थन देखकर मुझे पूर्ण विश्वास हो गया है कि नारंग को मिटाना इतना आसान नहीं है।अबोहर के विधायक अरुण नारंग ने पुलिस पर आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी सुरक्षा के लिए कुछ नहीं किया। उन्होंने कहा कि अबोहर की जनता और उनके परिवार की दुआओं ने उन्हें भीड़ से बचाया। उन्होंने मानसिक तौर पर मेरी हत्या की कोशिश की, ताकि भावनात्मक रूप से मुझे खत्म किया जा सके। लेकिन, आप सभी का समर्थन देखकर मुझे पूर्ण विश्वास हो गया है कि नारंग को मिटाना इतना आसान नहीं है।