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‘योग करने से हिंदुत्व के बढ़ने का खतरा’: कट्टरपंथियों के दबाव में अमेरिका के अलबामा में ‘योग पर बैन’ जारी

अमेरिका के अलबामा राज्य में बीते 28 साल से योग पर लगा प्रतिबंध आगे भी जारी रहेगा। इस पर लगे बैन को हटाने के लिए लाया गया विधेयक कट्टरपंथियों के दवाब के कारण पारित ही नहीं हो सका।

अलबामा प्रतिनिधि सभा ने योग विधेयक को 17 के मुकाबले 84 मतों से पारित करा लिया। मंजूरी के लिए इसे राज्य की सीनेट में लाया गया था। ताकि इस पर से प्रतिबंध को हटाया जा सके। लेकिन, कट्टरपंथी ईसाइयों के चलते ऐसा नहीं हो सका।

अलबामा हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव जेरेमी ग्रे ने कट्टरपंथियो को जवाब देते हुए कहा कि वो खुद बीते 10 साल से योग कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैंने खुद 5 साल तक कक्षाओं में योग सिखाया है और हर रविवार बैप्टिस चर्च जाता हूँ।”

आपको बता दें कि जेरेमी ग्रे 2019 से योगा पर बैन हटाने के लिए प्रयासरत हैं। वह कहते हैं कि इस विधेयक का उद्देश्य केवल अलबामा के सरकारी स्कूलों में योग को ऐच्छिक विषय के तौर पर चुनने का विकल्प देना था।

हिंदूफोबिया के शिकार हैं कट्टरपंथी ईसाई

कट्टरपंथी ईसाइयों के कारण ही अलबामा की स्कूलों में 1993 से योग पर बैन लगा हुआ है। कट्टरपंथी समूहों का आरोप था कि सरकारी स्कूलों में सम्मोहन विद्या के लिए योग का इस्तेमाल किया जाता है। इस कारण चरमपंथियों के दवाब में आकर अलबामा शिक्षा बोर्ड ने सम्मोहन और ध्यान को प्रतिबंधित करने के पक्ष में वोट किया था। तभी से यहाँ योग बैन है। इन ईसाइयों को इस बात का डर सता रहा है कि योग करने से लोग धर्मांतरण कर हिंदू बन सकते हैं।

योग सनातन संस्कृति का है अहम हिस्सा

योग सदियों से हिंदू संस्कृति का एक अहम हिस्सा रहा है। इसके कई चिकित्सकीय फायदे हैं। आध्यात्मिक तौर पर आत्मा को परमात्मा से मिलाने की क्रिया योग है और वैज्ञानिक दृष्टि से यह स्वस्थ जीवन का आधार है। यही कारण था कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर संयुक्त राष्ट्र संघ ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित कर दिया था।

पकड़ी गई सचिन वाजे के साथ 5-स्टार होटल में दिखी ‘मिस्ट्री वुमन’: NIA ने लिया हिरासत में, कालाधन को करती थी सफेद

समय के साथ ही एंटीलिया केस और भी पेंचीदा होता जा रहा है, लेकिन एक-एक कर इस मामले में मुख्य आरोपित व निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की करतूतों की परतें उधड़ती जा रही हैं। पिछले दिनों खबर आई थी कि मुंबई के एक फाइव स्टार होटल में सचिन वाजे के साथ एक महिला भी दिखी थीं। अब इस ‘मिस्ट्री वुमन’ के राज़ से पर्दा उठ गया है क्योंकि उस महिला को NIA ने हिरासत में ले लिया है।

NIA ने गुरुवार (अप्रैल 1, 2021) की शाम को ये कार्रवाई की। वो मार्च 16 के एक वीडियो फुटेज में ट्राइडेंट होटल में सचिन वाजे के साथ दिखी थीं। पुलिस अब तक इस मामले में 8 गाड़ियाँ बरामद कर चुकी हैं और सभी के तार सचिन वाजे से ही जुड़े हैं। इसी मामले में NIA ने दक्षिण मुंबई के एक होटल और क्लब में तलाशी ली। ठाणे की एक फ्लैट से उस महिला को हिरासत में लिया गया। महिला सचिन वाजे की करीबी सहयोगी है।

हिरासत में लिए जाने से पहले महिला से पूछताछ भी की गई थी। वो महिला सचिन वाजे के काले धन को सफ़ेद करने का काम कर रही थी। दो आईडी का उपयोग कर के वो ऐसा करती थी और वाजे की मर्सिडीज से जो नोट गिनने की मशीन मिली थी, वो भी उसकी ही थी। उस दिन वाजे अपने साथ 5 काले बैग भी लेकर होटल में घुसा था। पता चला है कि उन सबमें कैश भरा था। होटल वाला वो इलाका गामदेवी थाने में पड़ता है।

सचिन वाजे से जुड़े बरामद हुई हैं 8 कारें

जहाँ NIA की एक टीम सचिन वाजे को लेकर बाबुलनाथ इलाके में गई थी, वहीं दूसरी टीम ने ठाणे के मीरा रोड स्थित एक फ़्लैट की तलाशी ली। वो महिला इसी फ्लैट में रहती थी। कुछ दिनों पहले ही NIA ने एक लैपटॉप, एक प्रिंटर, दो हार्ड डिस्क, दो वाहन नंबर प्लेट, दो डीवीआर और दो सीपीयू को गोताखोरों की मदद से मीठी नदी से बरामद किया था। एंटीलिया के बाहर विस्फोटक वाली कार मिलने के कुछ दिनों बाद उस कार के मालिक मनसुख हिरेन की हत्या हो गई थी।

मनसुख हिरेन की हत्या से 3 दिन पहले सचिन वाजे और विनय शिंदे नामक निलंबित पुलिस अधिकारी एक काले रंग की ऑडी में एक साथ दिखे थे। इस मामले में एक हरे रंग की स्कॉर्पियो, एक सफ़ेद इनोवा, 2 मर्सिडीज बेंज, एक ब्लैक वॉल्वो और एक मित्सुबिशी आउटलैंडर बरामद की गई है। यही ऑडी मुंबई पुलिस मुख्यालय में कई बार पार्क की हुई देखी गई थी। ब्लैक ऑडी इस मामले में बरामद हुई 8वीं कार है।

हत्या के आरोपित विनायक शिंदे के घर से एक डायरी भी मिली है। डायरी से खुलासा हुआ है कि विनायक शिंदे ठाणे शहर के बार और पब से प्रोटेक्शन मनी के नाम पर वसूली करता था और यह वसूली सचिन वाजे के नाम पर होती थी। इस डायरी में उन बार और पब का नाम है और उनके नाम के सामने हर महीने की वसूली गई तय राशि है, जो प्रोटेक्शन मनी के तौर पर वसूली जाती थी। उसने तकरीबन 30 बार और क्लब से प्रोटेक्शन मनी के तौर पर वसूली की थी।

‘सुषमा और जेटली की मौत का कारण PM मोदी’: स्टालिन के बेटे को दोनों की बेटियों ने दिया करारा जवाब

तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी DMK के अध्यक्ष MK स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने दिवंगत पूर्व केंद्रीय मंत्रियों सुषमा स्वराज और अरुण जेटली को लेकर कुछ ऐसी टिप्पणी की, जिससे दोनों के परिजन दुःखी हो गए और उन्हें तगड़ा जवाब दिया। उदयनिधि स्टालिन ने दावा किया था कि सुषमा स्वराज और अरुण जेटली की मृत्यु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उन्हें प्रताड़ित किए जाने और उन पर दबाव बनाए जाने के कारण हुई।

गुरुवार (अप्रैल 1, 2021) को उदयनिधि स्टालिन ने पीएम मोदी पर हमला बोलते हुए कहा, “सुषमा स्वराज नाम की एक महिला हुआ करती थी। पीएम मोदी द्वारा बनाए गए दबाव के कारण उनकी मृत्यु हुई। अरुण जेटली नाम के एक व्यक्ति हुआ करते थे। पीएम मोदी द्वारा प्रताड़ित किए जाने के कारण उनकी मृत्यु हुई।” उन्होंने प्रधानमंत्री पर वेंकैया नायडू को भी साइडलाइन करने का आरोप लगाया। नायडू फ़िलहाल भारत के उप-राष्ट्रपति हैं।

उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि वो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई पलानिस्वामी नहीं हैं कि पीएम मोदी के सामने झुक जाएँगे, वो ‘कलैन्गर (करूणानिधि)’ के पोते हैं। उदयनिधि के आरोपों का जवाब सुषमा स्वराज की बेटी बाँसुरी स्वराज और अरुण जेटली की बेटी सोनाली जेटली बख्शी ने दिया। बाँसुरी स्वराज ने उदयनिधि को हिदायत दी कि वो चुनावी प्रोपेगंडा के लिए उनकी माँ के नाम का इस्तेमाल न करें। बाँसुरी ने कहा कि उनका बयान एकदम गलत है।

बाँसुरी स्वराज ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा मेरी माँ सुषमा स्वराज को अधिक से अधिक आदर और सम्मान दिया है। यहाँ तक कि सबसे कठिन क्षणों में भी प्रधानमंत्री और भाजपा हमारे साथ मजबूती से खड़ी रही। उदयनिधि, आपके बयान से हमें बहुत ठेस पहुँची है।” सुषमा स्वराज की मृत्यु अगस्त 6, 2019 को कार्डियक अटैक के कारण हुई थी। AIIMS दिल्ली में उनका इलाज चल रहा था। वो प्रथम मोदी सरकार में विदेश मंत्री थीं।

वहीं सोनाली जेटली बख्शी ने उदयनिधि पर पलटवार करते हुए लिखा, “मैं जानती हूँ कि आप पर (उदयनिधि स्टालिन) चुनावी दबाव है, लेकिन अगर आप झूठ बोलेंगे और मेरे पिता की यादों का अपमान करेंगे तो मैं चुप नहीं बैठूँगी। पीएम मोदी और मेरे पिता (अरुण जेटली) के बीच ऐसा समन्वय था, जो राजनीति से परे है। काश! आप इतने भाग्यशाली होते जो इस दोस्ती को समझ पाते।” भारत के वित्त मंत्री रहे अरुण जेटली की मृत्यु अगस्त 24, 2019 को हुई थी। उन्हें कई बीमारियाँ थीं।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (मार्च 30, 2021) को तमिलनाडु के धारापुरम में एक चुनावी सभा में मार्च 25, 1989 को हुए जयललिता के अपमान का मुद्दा उठा कर DMK के महिला-विरोधी रवैये की बात की थी। उस दिन DMK नेताओं ने भरी सभा में उनकी साड़ी खींचकर, बाल नोचकर उन्हें चप्पल मारी थी। जयललिता तमिलनाडु की 6 बार मुख्यमंत्री रही थीं। उससे पहले वो तमिल अभिनेत्री थीं।

उदयनिधि स्टालिन राजनेता होने के साथ-साथ तमिल फिल्म इंडस्ट्री में बतौर अभिनेता व निर्माता भी सक्रिय हैं। तमिल के कई बड़े फिल्मों में उन्होंने पैसे लगाए हैं। 2012 में उन्होंने बतौर लीड अभिनेता एक रोमांटिक फिल्म से डेब्यू किया था। वो 15 फिल्मों में दिख चुके हैं। DMK ने उन्हें पार्टी के यूथ विंग का सेक्रेटरी बना रखा है। उनकी पत्नी कीरुथीगा ‘इनबॉक्स 1305’ नामक लाइफस्टाइल मैगजीन चलाती हैं।

दूसरी सीट से नहीं लड़ेंगी ‘दीदी’ से ‘बेटी’ बनीं ममता: हिंदुत्व की लहर के बीच ‘विक्टिम कार्ड’ कितना कारगर?

पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव 2021, कई मायनों में अलग है। इसे काफी समय तक याद रखा जाएगा। इस चुनाव में एक ओर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजनैतिक महत्वाकांक्षा है तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता, अमित शाह की रणनीति और बीजेपी की सांगठनिक क्षमता के साथ-साथ हिंदुत्व की लहर है। इस बीच ममता बनर्जी के नंदीग्राम के अलावा किसी और सीट से लड़ने की संभावनाओं को टीएमसी ने खारिज कर दिया है।

बंगाल के चुनावों को लेकर चुनावी विद्वान कुछ भी आकलन करते रहें, किन्तु ममता बनर्जी का व्यवहार उनकी पराजय के भय की कहानी कहता है। चाहे वो ‘जय श्री राम’ के नारे से खीझने की बात हो अथवा मुस्लिम तुष्टिकरण की, पीएम मोदी के विरुद्ध उनकी कड़वी भाषा हो अथवा बंगाल की राजनैतिक हिंसाओं पर उनकी चुप्पी, सभी इसी बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि ममता बनर्जी अपनी पराजय के भय को महसूस कर रही हैं। अपने शुरुआती राजनैतिक जीवन से ही एक राजनैतिक योद्धा के रूप में पहचान बनाने वाली ममता बनर्जी अचानक से पीड़ित कैसे बन गईं? क्या सच में बंगाल की ‘दीदी’ कमजोर हो रही है अथवा यह उनकी रणनीति का हिस्सा है?

इसका उत्तर तो उनके चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ही दे सकते हैं, जिन्होंने ममता बनर्जी को बंगाल की ‘दीदी’ से ‘बेटी’ में बदल दिया।

इंडियन एक्सप्रेस के आइडिया एक्सचेंज कार्यक्रम में प्रशांत किशोर ने बताया कि ‘दीदी’ एक सशक्त व्यक्तित्व को दर्शाता है, किन्तु ‘बेटी’ इस बात पर जोर डालता है कि लोगों को साथ खड़े होने की आवश्यकता है। इसलिए स्लोगन दिया गया, ‘बांग्ला निजेर मेये-केइ चाए’ जिसका अर्थ है कि बंगाल अपनी बेटी को चाहता है। बंगाल में भाजपा की बढ़ती लहर का सामना करने के लिए तृणमूल कॉन्ग्रेस ने प्रशांत किशोर की इसी रणनीति को अपनाया।    

प्रशांत किशोर की इस रणनीति का अर्थ था कि बंगाल में ममता बनर्जी को ‘दीदी’ के स्थान पर एक ऐसी ‘बेटी’ के रूप में प्रदर्शित किया जाए जो बाहरी लोगों से लड़ रही है। लक्ष्य साफ था ममता बनर्जी को एक ‘विक्टिम’ के रूप में दिखाना। नंदीग्राम में ममता बनर्जी के साथ धक्का-मुक्की का जो ड्रामा रचा गया वह इसी रणनीति का एक हिस्सा हो सकता है।  

ममता का नंदीग्राम वाला एपिसोड

पिछले महीने ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि उनके साथ चार-पाँच लोगों ने धक्का-मुक्की की जिससे उनके पैरों में चोट आ गई थी। ममता ने कहा कि उस समय वहाँ पुलिस भी नहीं थी। ममता ने इसे एक साजिश कहा था जिससे उन्हें चुनाव प्रचार से दूर रखा जा सके। हालाँकि प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पूरी घटना एक छोटा सा एक्सीडेंट था और वहाँ धक्का-मुक्की जैसा कुछ हुआ ही नहीं था। साथ ही ममता पुलिस से घिरी हुईं थी।

ममता का यह विक्टिम कार्ड बुरी तरह से असफल रहा। बंगाल में ममता बनर्जी का ‘दीदी’ से ‘बेटी’ तक का सफर एक रणनीति का ही हिस्सा था जो बंगाल में ममता को ‘विक्टिम’ बताकर वोट लेने के तरीके पर आधारित थी। प्रशांत किशोर ने यही तय किया था कि ममता को बंगाल की एक ऐसी ‘बेटी’ के रूप में दर्शाया जाए जो अपने ही राज्य में ‘बाहरी’ लोगों से लड़ रही है और बंगाल की जनता को उसके साथ खड़े होने की आवश्यकता है।

‘या मूत्र! गौ मूत्र’: इस्लामिक आतंकियों की जुबान में स्वरा भास्कर ने BJP का उड़ाया मजाक

बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने गुरुवार (अप्रैल 1, 2021) को इस्लामी आतंकियों की भाषा में भाजपा का मजाक उड़ाने का प्रयास किया। स्वरा ने अहाना पाठक नाम की एक ट्विटर यूजर के ट्वीट पर गौ मूत्र को लेकर टिप्पणी की।

अहाना ने अपने ट्वीट में भाजपा के चुनाव चिह्न कमल को निशाना बनाते हुए लिखा, “कमल उसी के दिमाग में खिलता है जिसमें गोबर भरा हो।” इसी ट्वीट पर रिप्लाई देते हुए स्वरा ने बताया कि गोबर के अलावा उनके दिमाग में “या मूत्र! गौ मूत्र!” भी हो सकता है।

गौरतलब है कि स्वरा भास्कर ने भाजपा को निशाना बनाने के लिए जैसे गौ मूत्र शब्द का इस्तेमाल किया, उसी प्रकार इस्लामी आतताई भी हिंदुओं पर हमला बोलने से पहले इस शब्द का इस्तेमाल करके हिंदुओं के प्रति अपनी घृणा दिखाते रहे हैं।

साल 2019 में पुलवामा हमले के आतंकी ने भी गौ मूत्र का नाम लेकर हिंदुओं को निशाना बनाया था। अपने आखिरी वीडियो में उसने कहा था, “गौमूत्र पीने वाले भद्दे लोग उनके आक्रमणों का सामना नहीं कर पाएँगे।”

बता दें कि हिंदू धर्म में गौ के पूजनीय होने के कारण उसके दूध, गोबर, मूत्र को हर कर्मकांड में बेहद पवित्र माना जाता है। ऐसे में वामपंथी और कट्टरपंथी अक्सर हिंदू धर्म को नीचा दिखाने के लिए इसे घृणा और उपहास की नजरों से देखते हैं। अक्सर गाय के गोबर और गौमूत्र को लेकर इनकी उलटी-सीधी बयानबाजी सामने आती रहती है। 

पिछले दिनों वामपंथियों, कट्टरपंथियों और आतंकियों से हटकर एक आईपीएस महिला अधिकारी ने गौ मूत्र पर तंज कसा था। उस समय तजिंदर सिंह ने वामपंथियों को कैंसर बताया था, जिसके बाद असलम खान नाम की महिला आईपीएस ने तजिंदर सिंह बग्गा के एक ट्वीट पर लिखा कि क्या उन्हें गौ मूत्र से सही नहीं किया जा सकता।

‘जान पर खेलकर गया… फिर भी कहा केस वापस लो’: मुख्तार अंसारी पर कार्रवाई को लेकर मुलायम सरकार ने कैसे डराया, पूर्व DSP ने बताया

साल 2004 में उत्तर प्रदेश एसटीएफ के वाराणसी यूनिट के प्रभारी रहे पूर्व डीएसपी शैलेंद्र सिंह फिर से चर्चा में हैं। इसकी वजह यह है कि योगी सरकार ने उन पर किए गए केस वापस ले लिए हैं। सिंह पर मुलायम सरकार के जमाने पर केस हुआ था और उन्हें जेल भी भेजा गया था।

उस समय इस मामले पर काफी हंगामा हुआ था। असल में सिंह ने माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए POTA (आतंकवाद निरोधक अधिनियम, 2002) लगाया था। इसे वापस लेने के लिए उन पर इतना दबाव डाला गया कि उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के कुछ महीने बाद ही उन पर केस दर्ज किया गया था।

17 साल पुरानी इस घटना को लेकर एक टीवी चैनल से बात करते हुए सिंह भावुक हो गए और बताया कि उन पर किस कदर दबाव बनाया गया था। उन्होंने कहा कि उस समय में उन्होंने अपनी जान पर खेलकर मशीनगन बरामद किया था। कोई जाने को भी तैयार नहीं था। सबको डर था कि लाइटगन है पता नहीं कितनी फायर एक बार में हो। कौन बचेगा कौन मरेगा। उसके बाद भी ऐसा कहा गया कि आप लोग केस वापस लो नहीं तो आप लोगों को जेल में डाल देंगे। ऐसी धमकियों में कोई कैसे काम करता।

अपने इस्तीफे पर बात करते हुए वह बोले कि इन्हीं धमकियों के कारण उन्होंने सर्विस से बाहर होना चुना। आम नागरिकों की तरह जीना चुना। वह बोले कि उन्होंने अपने इस्तीफे से जनता को ये दिखाया कि उनके चुने हुए नेता किस तरह से काम करते हैं। इसलिए सोचें कि दोषी कौन है।

संघर्षों पर बात करते हुए शैलेंद्र ने कहा कि 17 साल हम किस परिस्थिति में थे, ये कोई नहीं पूछता है। नौकरी छोड़ने का दर्द नहीं है। लेकिन ये सोचते हैं कि हम लोग कैसी परिस्थितियों में जीते हैं। कैसे हमारी जान बची है। परिवार वाले चिंता करते हैं।

इस्तीफे के समय शैलेंद्र ने सिर्फ़ 10 साल की ड्यूटी की थी। 20-21 साल उनकी नौकरी के बचे थे। लेकिन बीच में ऐसे हालत पैदा हो गए कि उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। वह बताते हैं कि वह जब जेल गए तो योगी आदित्यनाथ ने उनके परिवार को फोन करके कहा था, ‘जब मैं आऊँगा तो न्याय करूँगा।’ आज उन्होंने वही किया। वह कहते हैं, “मेरा परिवार उनका आभारी है। आगे किसी के साथ ऐसा न हो इसका मैं अनुरोध करूँगा”

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश का खूँखार माफिया नेता मुख्तार अंसारी इस समय पंजाब जेल में बंद है। पिछले दिनों वह मोहाली की कोर्ट में पेश हुआ। लेकिन उसे लेकर आई एंबुलेंस पर विवाद हो गया है। दरअसल जिस एम्बुलेंस से पुलिस ने उसे मोहाली कोर्ट में पेश किया, उसका रजिस्ट्रशन तो बाराबंकी जिले का है, लेकिन अब यह एंबुलेंस पंजीकृत ही नहीं है। इसके अलावा वह अस्पताल भी फर्जी है, जिसका नाम एंबुलेंस पर लिखा था।

न्यूज 18 के अनुसार, जिस अस्पताल के नाम से एंबुलेंस नंबर UP41 AT 7171 का रजिस्ट्रेशन बताया जा रहा है, वह असल में है ही नहीं। इसकी मियाद साल 2015 में खत्म हो चुकी है। एंबुलेंस की फिटनेस भी साल 2017 में एक्सपायर हो चुकी है। बाराबंकी स्वास्थ्य विभाग के पास भी इसकी कोई जानकारी नहीं है।

माओवादी लिंक को लेकर वकीलों-एक्टिविस्ट्स के ठिकानों पर रेड, आंध्र-तेलंगाना में NIA की बड़ी कार्रवाई

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कई बड़े वकीलों और विभिन्न संस्थाओं के कार्यकर्ताओं के घरों और कार्यालयों पर छापेमारी की। छापेमारी 22 ऐसे लोगों पर की गई जिन पर माओवादियों के साथ संबंध का संदेह था। हैदराबाद में एनआईए ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर तेलंगाना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता वी रथुनाथ और जन नित्या मंडली के पूर्व सदस्य दप्पू रमेश के घरों पर छापा मारा।

आंध्र प्रदेश में भी कई व्यक्तियों पर माओवादी के साथ संबंध के संदेह में छापे मारे गए। इनमें मानव अधिकार मंच के समन्वय समिति के सदस्य वीएस कृष्णा, आंध्रप्रदेश सिविल लिबर्टीज कमेटी (APCLC) के महासचिव चिलिका चंद्रशेखर, रिवोल्यूशनरी राइटर्स एसोसिएशन की वरलक्ष्मी, APCLC के अध्यक्ष सी बाबू, अधिवक्ता के. पद्मा और के. चेलम, रिवोल्यूशनरी राइटर्स एसोसिएशन के जी. पिनाकपाणी और ‘रायलसीमा विद्यावंथुला वेदिका’ के अध्यक्ष सोमशेखर शर्मा शामिल हैं।

रिवोल्यूशनरी राइटर्स एसोसिएशन, सिविल लिबर्टीज कमेटी, प्रजा कला मंडली और चैतन्य महिला संगम जैसी संस्थाओं के अन्य सदस्यों और कार्यकर्ताओं के घरों पर भी एनआईए द्वारा छापेमारी की गई।

OpIndia पहले भी सिविल सोसायटी, सीआरपीपी और माओवादियों के संबंधों पर आधारित रिपोर्ट दे चुका है।

APCLC और चिलिका चंद्रशेखर के माओवादी संबंध

हथियारों से लैस माओवादियों के साथ संबंध रखने और जिला पंचायत के वाइस चेयरमैन समिदा रविशंकर की हत्या में माओवादियों का साथ देने के जुर्म में APCLC के कई कार्यकर्ता पकड़े जा चुके हैं। 2012 में माओवादियों की सांस्कृतिक संस्था चेतना नाट्य मंच के 18 सदस्यों के साथ APCLC के 2 सदस्य गिरफ्तार हुए थे। 2003 में मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर हमले के आरोप में आंध्रप्रदेश पुलिस ने APCLC के 3 सदस्यों को गिरफ्तार किया था।

2014 में वारवरा राव और APCLC के महासचिव चिलिका चंद्रशेखर समेत 50 लोग हैदराबाद में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए थे। दरअसल उच्च न्यायालय ने प्रतिबंधित माओवादी पार्टी के प्रमुख संगठन ‘फोरम फॉर पॉलिटिकल अल्टरनेटिव’ को मीटिंग की अनुमति नहीं दी थी और उसके बाद भी इस मीटिंग का आयोजन किया जा रहा था। APCLC के संबंध वारवरा राव के साथ रहे हैं जो 2017 में गढ़चिरौली में मारे गए माओवादी के अंतिम संस्कार में शामिल हुआ था और माओवादी कमांडर कपुका प्रभाकर के मौत की बरसी पर भी गया था।  

सीआरपीपी और भीमा-कोरेगाँव हिंसा

CRPP एक अन्य संगठन है जिसके विरुद्ध पुणे पुलिस द्वारा जाँच की जा रही है। इस संगठन पर भीमा-कोरेगाँव की हिंसा और प्रधानमंत्री मोदी की हत्या की साजिश का आरोप है। पुणे पुलिस द्वारा एक अन्य कार्यकर्ता वर्नोन गोंसाल्विस पर छापेमारी की गई जो सीआरपीपी का एक कार्यकारी सदस्य है। जून में गिरफ्तार किए गए लोगों में से एक रोना विल्सन है, जो सीआरपीपी का जनसंपर्क सचिव है। सीआरपीपी का अध्यक्ष एसएआर गिलानी है जो 2016 में राजद्रोह के लिए गिरफ्तार किया गया था। गिलानी स्वतंत्र कश्मीर का समर्थक रहा है।

जिस सीआरपीपी के सदस्यों पर पुणे पुलिस द्वारा की गई छापेमारी का कॉन्ग्रेस विरोध करती रही है, उसे कॉन्ग्रेस ने ही 2011 में एक माओवादी संगठन के रूप में प्रतिबंधित किया था। 5 मार्च को आंध्रप्रदेश द्वारा फाइल किए गए मंचिंगपुट केस को एनआईए ने अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया था। इस केस में 80 लोगों के विरुद्ध UAPA के अंतर्गत केस दर्ज किया गया है। नवंबर 2020 में पुलिस ने स्थानीय पत्रकार पी. नागन्ना के यहाँ छापेमारी करके माओवादी साहित्य जब्त किया, जिसके आधार पर केस दर्ज हुआ। इसके बाद ही 80 लोगों का नाम दर्ज किया गया और जाँच प्रारंभ हुई।

मंदिर की दानपेटी में कंडोम रखा, घर की दीवार पर सिर मार-मार मरा नवाज: रहीम-तौफीक गुनाह कबूलने भगवान की शरण में पहुँचे

कर्नाटक के मंगलुरू में स्वामी कोरगज्जा को लेकर स्थानीयों के मन में असीम आस्था है। लोग उन्हें भगवान शिव का अवतार मानते हैं। पिछले दिनों कोरगज्जा के मंदिर में कई अभद्र घटनाएँ हुईं। मंदिर की दानपेटी में कंडोम तक डाल दिया गया।

ऐसे घृणित वाकये के बावजूद पुलिस आरोपितों को ढूँढने में असमर्थ थी। निराश श्रद्धालु लगातार कोरगज्जा भगवान से ऐसे विधर्मियों को सजा देने के लिए प्रार्थना कर रहे थे। कुछ दिन पहले भगवान ने अपने श्रद्धालुओं की सुनी और ऐसी स्थिति पैदा हो गई कि विधर्मी स्वयं मंदिर में आकर माफी माँगने लगे।

ये बिलकुल वास्तविक घटना है। इसी साल जनवरी में मंदिर की दानपेटी से एक कंडोम निकला था, जिसके बाद से वहाँ हड़कंप था। लेकिन तीन दिन पहले अचानक दूसरे समुदाय के दो लड़के मंदिर में आए और पुजारी के सामने माफी के लिए गिड़गिड़ाने लगे।

मंदिर की दानपेटी में कंडोम
मंगलुरु में मंदिर की दानपेटी में मिला कंडोम (साभार: Public TV)

पहले पुजारी को लगा कि वह मजाक कर रहे हैं। लेकिन नहीं! वह गंभीर थे। उन दोनों ने पुजारी को बताया कि अपने साथी नवाज के साथ मिल कर उन्होंने ही कुछ दिन पहले मंदिर की दानपेटी में कंडोम डाला था।

नवाज माफी माँगने के लिए जिंदा नहीं था। दानपेटी में कंडोम डालने के बाद उसे एक दिन खून की उल्टियाँ हुईं और फिर पेचिश से उसके मल से खून निकला। अंत में वह अपने घर की दीवारों पर सिर मारते हुए मर गया। मरते समय उसने उन्हें बताया कि कोरगज्जा उन सब पर नाराज हैं।

अब सिर्फ़ वही दोनों यानी अब्दुल रहीम और अब्दुल तौफीक ही जिंदा हैं। लेकिन वक्त बीतने के साथ रहीम को भी खून की उल्टियाँ शुरू हो गई हैं। बिलकुल वैसे ही जैसे नवाज को हुई थी। उसके बाद दोनों अपनी जान जाने के डर से घबराकर पुजारी की शरण में जाकर माफी की भीख माँग करने लगे। भगवान के सामने खड़े होकर दोनों ने सब स्वीकार कर लिया और दया की भीख माँगने लगे।

पुलिस ने कहा है कि दोनों को हिरासत में ले लिया गया है। दोनों अब भी डरे हुए हैं। मीडिया से बात करते हुए पुलिस ने भी कहा कि ये एक रहस्यमयी केस था। आरोपितों के जुर्म कबूलने के बाद सबूत जुटाने की कोशिश हो रही है। हालाँकि, कृत्य के पीछे का उद्देश्य साफ नहीं हो पाया है। जाँच चल रही है। अभी तक की जाँच में आरोपितों ने बताया कि उन्होंने 3 जगह ऐसा किया था।

उल्लेखनीय है कि इस पूरे विषय के ऊपर ट्विटर पर चीरू भट्ट नाम के यूजर ने एक थ्रेड डाला है। इसके मुताबिक कोरगज्जा भगवान को लेकर लोगों का मानना है कि वह अपने न्याय के लिए जाने जाते हैं। उनके पास से जल्द से जल्द फैसला आता है और दोषी को 100% सजा मिलती है।

बता दें कि ये पहली दफा नहीं है जब स्वामी कोरगज्जा की शरण में इस तरह कोई माफी माँगने पहुँचा हो। 4 साल पहले मनोज पंडित नाम के एक आदमी ने स्वामी कोरगज्जा को लेकर अभद्र टिप्पणी की थी। लेकिन बाद में उसकी हालत ऐसी हो गई कि वो गुरपुर के वज्रदेही मठ में माफी माँगने चला आया। मनोज ने स्वीकारा की उसे कोरगज्जा की आस्था के बारे में नहीं पता था।

मध्य प्रदेश: लव जिहाद पर 10 साल तक की सजा, जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए नया कानून लागू

मध्य प्रदेश में लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण रोकने का नया कानून लागू हो गया है। राज्य सरकार ने शनिवार (27 मार्च 2021) को ‘मध्य प्रदेश फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट, 2020’ का नोटिफिकेशन जारी किया। इस धर्मांतरण विरोधी कानून में शादी के बाद बलपूर्वक धर्म-परिवर्तन को गंभीर अपराध माना गया है और इसके लिए 10 वर्षों की सजा का प्रावधान किया गया है। मध्यप्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को बिल पर अपनी सहमति दी और अगले ही दिन आधिकारिक गैजेट में अधिनियम का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया।

अधिनियम की प्रस्तावना में लिखा हुआ है कि यह अधिनियम धर्मांतरण के विरुद्ध धर्म की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है। इसके साथ ही विवाह, धमकी अथवा बलपूर्वक, लालच जैसे अवैध माध्यमों से धर्मांतरण को रोकता है।

अधिनियम की ‘धारा 3’ के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति बहलाकर, धमकी के माध्यम से, बलपूर्वक, विवाह के द्वारा एवं ऐसे ही अन्य माध्यमों से किसी अन्य व्यक्ति का धर्मांतरण नहीं करेगा। ‘धारा 5’ में धर्मांतरण के अपराध के लिए सजा का प्रावधान है जो कि कम से कम एक वर्ष और अधिक से अधिक 5 वर्ष है। नाबालिग, महिला तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति के व्यक्तियों के संबंध में धर्मांतरण के लिए सजा की अवधि 10 वर्ष तक की हो सकती है। सामूहिक धर्मांतरण के लिए भी इस कानून में 10 साल तक की सजा तथा कम से कम एक लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान है।

मध्य प्रदेश के अतिरिक्त हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश भी धर्मांतरण विरोधी कानून लागू कर चुके हैं। उत्तर प्रदेश में नवंबर 2020 में धर्मांतरण विरोधी अध्यादेश लाया गया था। उत्तर प्रदेश में भी व्यक्तिगत एवं सामूहिक धर्मांतरण पर 10 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है।

गुजरात विधानसभा में कॉन्ग्रेस MLA इमरान खेडावाला ने फाड़ी जबरन धर्मांतरण विरोधी बिल की कॉपी

गुजरात विधानसभा में बजट सत्र के अंतिम दिन कॉन्ग्रेस विधायक इमरान खेडावाला ने जबरन धर्मांतरण विरोधी विधेयक ( Anti forced religious conversion bill) की प्रति फाड़ डाली। कॉन्ग्रेस MLA ने कहा कि यह बीजेपी का नया हथकंडा है, जिसे बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

इमरान खेडावाला ने यह भी दावा किया कि उन्होंने विधेयक को इसलिए फाड़ा, क्योंकि इसमें जिहाद शब्द का इस्तेमाल है और ये एक समुदाय को निशाना बनाने वाला है। उन्होंने कहा, “राज्य के गृह मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा ने केवल इसमें ये बताया है कि हिंदू समुदाय की बेटियों को एक विशेष समुदाय के पुरुषों द्वारा लक्षित किया जाता है। बेटियाँ, किसी भी धार्मिक समुदाय से हों, हमेशा हमारी बेटियाँ रहेंगी।”

खेडावाला ने बाद में मीडिया से बात करते हुए कहा कि वह शादी से पहले या धोखे से करवाए गए जबरन धर्मांतरण को बढ़ावा नहीं देते। उनके अनुसार इस कृत्य के लिए विधेयक में जितनी सजा लिखी है उससे ज्यादा मिलनी चाहिए। आगे उन्होंने कहा कि ऐसे अपराध के लिए सऊदी अरब के शरिया कानून जैसी सजाएँ होनी चाहिए।

इस घटना के बाद गुजरात के भाजपा विधायक प्रदीप सिंह जडेजा ने विधानसभा में इतना आक्रमक होने के लिए इमरान के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की माँग की है।

बता दें कि गुजरात विधानसभा में इमरान खेडावाला द्वारा फाड़ा गया विधेयक, जबरन धर्म परिवर्तन के बढ़ते मामलों के खतरे को रोकने का प्रयास करता है। विशेषकर जहाँ मुस्लिम पुरुष हिंदू होने का दिखावा करते हैं या शादी के बहाने हिंदू महिलाओं के साथ संबंध बनाने के लिए अपनी धार्मिक पहचान छिपाते हैं। आप ऐसे तमाम मामले यहाँ पढ़ सकते हैं

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश में लागू लव जिहाद विरोधी कानून की तर्ज पर गुजरात विधानसभा में यह विधेयक राज्य के गृह मंत्री प्रदीप सिंह ने पेश किया था। इसके मुताबिक युवा महिला का धर्मांतरण करवाने पर 5 साल की सजा और 2 लाख जुर्माना हो सकता है। वहीं नाबालिग के साथ ऐसा करने पर 7 साल की सजा और 3 लाख जुर्माने का प्रावधान किया गया है।