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AAP ने चाँदनी चौक को लेकर फैलाया झूठ, यूजर्स ने कहा- ‘दो अलग जगह की तस्वीरों से केजरीवाल जनता को बना रहे उल्लू’

हर सरकार अपने काम-काज का प्रचार करती है। दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने भी यही किया। केजरीवाल सरकार ने दिल्ली का विकास कितने अच्छे तरीके से किया है यह दिखाने के लिए आम आदमी पार्टी ने ‘अप्रैल फूल’ की पूर्व संध्या पर दो अलग-अलग स्थानों की तस्वीर को चाँदनी चौक का बताकर लोगों को मूर्ख बना दिया।

दरअसल, आम आदमी पार्टी ने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से दो तस्वीरों को मिक्स करके ट्वीट किया, जिसमें दिल्ली के चाँदनी चौक को पहले और बाद के तौर पर दिखाया गया था। पहली इमेज में सँकरी गलियाँ और भीड़-भाड़ वाली गली को दिखाया गया है। दूसरी तस्वीर में चौड़ी और साफ सुथरी सड़क और चारों तरफ हरियाली दिखाई गई थी।

आप के समर्थकों के लिए यह पिक्चर बहुत ही मनमोहक रही होगी कि किस तरह से केजरीवाल दिल्ली के लिए आशा की किरण बनकर आए हैं। लेकिन, ध्यान से देखने पर स्पष्ट तौर पर पता चलता है कि दोनों इमेज अलग-अलग स्थानों की है।

आप के इस फ्रॉड को दिल्ली वासियों ने पकड़ लिया और ट्विटर पर आम आदमी पार्टी की क्लास लगाते हुए एक यूजर ने लिखा, “अगर यह सच्चा बदलाव है तो इसके लिए सरकार को धन्यवाद, लेकिन मुझे पूर्ण विश्वास है कि केजरीवाल ने इसमें भी कोई झोल किया है। दाई और बाईं तस्वीर दोनों एक ही जगह की नहीं है।”

एक अन्य ट्वीट में अस्वत्थामा लिखते हैं, “अगर केजरीवाल ने इसका आधा भी बदलाव किया होता तो वह टीवी, रेडियो, न्यूज पेपर से दुनियाभर में इसका प्रचार करते। केजरीवाल ने वैक्सीनेशन को लेकर खुद का प्रचार किया, जिसमें उनका शून्य प्रतिशत भी योगदान नहीं था।”

दिल्लीवासियों को अच्छी तरह से पता है कि केजरीवाल केवल क्रेडिट लेने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि उसमें उनका कोई योगदान नहीं है।

एक अन्य यूजर ने आम आदमी पार्टी की तस्वीर को लेकर लिखा, “दोनों तस्वीरें अलग-अलग जगहों की हैं। केजरीवाल जनता को उल्लू बना रहे हैं।”

नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर हमला, मीडियाकर्मियों को भी बनाया निशाना

पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम से बीजेपी उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर हमला करने की खबर सामने आ रही है। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक सतेंगबाड़ी क्षेत्र में शुभेंदु के काफिले को निशाना बनाया गया। बंगाल की जिन 30 सीटों पर दूसरे चरण में आज (अप्रैल 1, 2021) मतदान हो रहा है, उनमें एक नंदीग्राम भी है। इस हमले में अधिकारी के काफिले में मौजूद कुछ गाड़ियों को नुकसान हुआ। घटना के बाद अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में जंगलराज है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, नंदीग्राम के कमलपुर के बूथ नंबर 170 पर मीडियाकर्मियों पर हमला हुआ है। शुभेंदु अधिकारी ने हमले को लेकर कहा, “ये पाकिस्तानियों के काम हैं। ‘जय बांग्ला’ बांग्लादेश का स्लोगन है। एक निश्चित पार्टी के वोटर ऐसे कार्यों को अंजाम दे रहे हैं।”

इंडिया टीवी के अनुसार, घटना में उनका कैमरामैन जख्मी हो गया। मीडिया चैनल ने एक वीडियो शेयर की है, इसमें उपद्रवी उनकी गाड़ी पर पत्थर फेंकते दिख सकते हैं।

इसके अलावा पश्चिम बंगाल के केशपुर में भाजपा उम्मीदवार प्रीतीश रंजन कोनार के काफिले पर भी हमला हुआ है। रंजन की भी गाड़ियों पर पथराव किया गया। इधर, वेस्ट मिदनापुर में बीजेपी के तन्मय घोष ने आरोप लगाया कि उनकी कार पर टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने हमला किया है। इतना ही नहीं बीजेपी की महिला एजेंट को भी मारा गया है। बीजेपी नेता का कहना है कि जब वो पुलिस स्टेशन गए तो उनकी शिकायत भी दर्ज नहीं की गई।

वहीं आज ही नंदीग्राम के एक नंबर ब्लॉक में एक भाजपा कार्यकर्ता का फंदे से लटकता शव मिला। तृणमूल कॉन्ग्रेस पर उसकी हत्या कर शव को फंदे से लटकाने का आरोप लगा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि TMC के गुंडों ने उदय दुबे को मार कर लटका दिया, जबकि तृणमूल ने भाजपा पर लाशों की राजनीति खेलने का आरोप मढ़ा है।

बता दें कि पश्चिम बंगाल और असम में आज दूसरे चरण के लिए मतदान हो रहा है। बंगाल की 30, असम की 39 सीटों पर वोट डल रहे हैं। गुरुवार सुबह से ही कई सीटों पर ईवीएम में गड़बड़ी और हिंसा की खबरें आ रही हैं। इस दौरान तृणमूल कॉन्ग्रेस और भारतीय जनता पार्टी ने एक दूसरे पर वोटरों को धमकाने का आरोप भी लगाए हैं।

झारखंड: टॉफी का लालच देकर 7 साल की बच्ची को अपनी दुकान पर ले गया राशन दुकानदार मोहम्मद इक़बाल, फिर किया रेप

झारखंड की राजधानी राँची में टॉफी का लालच देकर एक 7 साल की बच्ची के साथ रेप का मामला सामने आया है। ये घटना डोरंडा की है, जहाँ 28 वर्षीय मोहम्मद इकबाल उर्फ़ विक्की ने मंगलवार (मार्च 30, 2021) को इस वारदात को अंजाम दिया। आरोपित रोजमर्रा की चीजों की दुकान चलाता है। उसने बच्ची को टॉफी का लालच दिया और उसे अपने साथ अपनी दुकान पर ले गया। वहाँ उसने बच्ची के साथ रेप किया।

मामला संज्ञान में आने के बाद राँची की डोरंडा पुलिस ने छापेमारी शुरू की और टॉफी का लालच देकर रेप करने के आरोपित मोहम्मद इकबाल को रिसालदार नगर से धर-दबोचा। बच्ची की मेडिकल जाँच कराने के बाद इस मामले में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012, (POCSO ) के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपित अविवाहित है। उसकी कोरोना टेस्टिंग करा ली गई है। पुलिस ने तेज़ी से कार्रवाई करते हुए गुरुवार को आरोपित को जेल भी भेज दिया।

FIR के अनुसार, पीड़ित बच्ची अपने खेत के पास खेल रही थी। इस दौरान राशन दुकानदार मोहम्मद इक़बाल की उस पर बुरी नजर पड़ी और उसने टॉफी का लालच देकर उसे अपनी दुकान पर ले गया। रेप के बाद डरी-सहमी बच्ची रोते हुए अपने घर पहुँची, जहाँ माँ के पूछने पर उसने सब कुछ बताया। बच्ची ने कहा कि मोहम्मद इक़बाल ने उसे धमकी दी है कि अगर उसने किसी को इस बारे में कुछ बताया तो वो उसकी माँ-बाप को मार डालेगा।

इसके बाद परिजनों ने डोरंडा थाने में जाकर मामला दर्ज कराया। आरोपित के खिलाफ रेप के साथ-साथ आपराधिक धमकी देने के आरोपों के तहत भी FIR दर्ज की गई है। बच्ची का अस्पताल में इलाज चल रहा है।

रजनीकांत को सिनेमा का सर्वोच्च दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, PM मोदी ने ‘थलाइवा’ को दी बधाई: इससे पहले इन्हें मिल चुका है ये सम्मान

सुपरस्टार रजनीकांत को भारत सरकार ने 51वें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित करने का निर्णय लिया है। इससे पहले 2018 में ये अवॉर्ड अमिताभ बच्चन को और 2017 में विनोद खन्ना को दिया गया था। 2016 में इस प्रतिष्ठित सम्मान से फिल्म निर्देशक के विश्वनाथ को नवाजा गया था। इसी तरह 2015 में मनोज कुमार व के विश्वनाथ, 2014 में शशि कपूर, 2013 में गुलजार और 2012 में प्राण को ये सम्मान मिला था।

भारतीय सिनेमा के जनक धुंदीराज गोविंद फाल्के के सम्मान में उनके बाद राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार को भारतीय सिनेमा का सबसे गौरवपूर्ण तथा प्रतिष्ठित पुरस्कार का नाम दिया गया। यह वह व्यक्ति हैं जिन्होंने पहली भारतीय फीचर फिल्म वर्ष 1913 में ‘राजा हरिश्चंद्र’ का निर्माण किया था। दादासाहेब फाल्के ने 19 वर्ष की अवधि में 95 फिल्में तथा 26 लघु फिल्में बनाई थीं। दादा साहेब फाल्के पुरस्कार भारतीय सिनेमा के विकास में फिल्मी हस्तियों के योगदान को सम्मान देने के लिए सरकार द्वारा वर्ष 1969 में शुरू किया गया था।

इस पुरस्कार की पहली विजेता देविका रानी थीं। दादा साहेब फाल्के पुरस्कार फिल्मी हस्तियों को भारतीय सिनेमा के विकास में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाता है। इस पुरस्कार में एक स्वर्ण कमल, 10 लाख रुपए का नकद पुरस्कार, प्रमाणपत्र, सिल्क स्क्रोल तथा एक शॉल दिया जाता है। रजनीकांत की उम्र 70 से अधिक हो चुकी है और वो इस उम्र में भी ‘2.0’, ‘पेट्टा’ और ‘दरबार’ जैसी सुपरहिट फ़िल्में दे रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घोषणा पर ख़ुशी जताते हुए कहा, “वो कई पीढ़ियों के बीच लोकप्रिय हैं। उन्होंने अपने क्षेत्र में ऐसा कार्य किया है, जैसा विरले ही कर पाए हैं। उनका व्यक्तित्व काफी प्यारा है और उन्होंने पर्दे पर विभिन्न प्रकार के किरदार निभाए हैं। ये रजनीकांत हैं। ये काफी ख़ुशी की बात है कि ‘थलाइवा’ को दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है। उन्हें बहुत-बहुत बधाई।”

हालाँकि, कई लोगों ने इसे तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनाव से भी जोड़ा। रजनीकांत भी राजनीतिक दल बना कर चुनाव में हिस्सा लेने वाले थे, लेकिन स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं के कारण उन्होंने अपने फैसले को बदल दिया। जब केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय प्रकाश जावड़ेकर से ये सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि 5 लोगों की ज्यूरी नाम तय करती है, इसमें राजनीति कहाँ से आ गई?

उन्होंने कहा कि रजनीकांत पिछले 5 दशक से फ़िल्मी दुनिया पर राज कर रहे हैं और लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं। रजनीकांत के प्रशंसकों की एसोसिएशन रजनी मक्कल मण्ड्राम (Rajini Makkal Mandram) की तमिलनाडु में 65,000 इकाइयाँ हैं, जो उनके राजनीति में जाने के बाद पार्टी का हिस्सा बनने वाली थीं। अब तमिलनाडु में सभी पार्टियाँ उन्हें रिझाने में लगी हुई है। अभिनेता से राजनेता बने कमल हासन ने भी उन्हें बधाई दी है। इससे पहले दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड विजेताओं की सूची इस प्रकार है:

वर्ष (समारोह)नामफिल्म इंडस्ट्री
2018 (66 वां)अमिताभ बच्चन हिन्दी
2017 (65वां)विनोद खन्नाहिन्दी
2016 (64वां)कसिनाथुनी विश्वनाथतेलुगू
2015 (63वां)मनोज कुमारहिन्दी
2014 (62वां)शशि कपूरहिन्दी
2013 (61वां)गुलजारहिन्दी
2012 (60वीं)प्राणहिन्दी
2011 (59वां)सौमित्र चटर्जीबंगाली
2010 (58वां)के. बालचन्दरतमिलतेलुगू
2009 (57वां)डी. रामानायडूतेलुगू
2008 (56वां)वी. के. मूर्तिहिन्दी
2007(55वां)मन्ना डेबंगालीहिन्दी
2006 (54वां)तपन सिन्हाबंगालीहिन्दी
2005 (53वां)श्याम बेनेगलहिन्दी
2004 (52वां)अडूर गोपालकृष्णनमलयालम
2003 (51वां)मृणाल सेनबंगाली
2002 (50वां)देव आनन्दहिन्दी
2001 (49वां)यश चोपड़ाहिन्दी
2000 (48वां)आशा भोसलेहिन्दीमराठी
1999 (47वां)ऋषिकेश मुखर्जीहिन्दी
1998 (46वां)बी. आर. चोपड़ाहिन्दी
1997 (45वां)कवि प्रदीपहिन्दी
1996 (44वां)शिवाजी गणेशनतमिल
1995 (43वां)राजकुमारकन्नड़
1994 (42वीं)दिलीप कुमारहिन्दी
1993 (41वां)मजरूह सुल्तानपुरीहिन्दी
1992 (40वां)भूपेन हजारिकाअसमिया
1991 (39वां)भालजी पेंढारकरमराठी
1990 (38वां)अक्कीनेनी नागेश्वर रावतेलुगू
1989 (37वां)लता मंगेशकरहिन्दी, मराठी
1988 (36वां)अशोक कुमारहिन्दी
1987 (35वां)राज कपूरहिन्दी
1986 (34वां)बी. नागी. रेड्डीतेलुगू
1985 (33वां)वी. शांतारामहिन्दीमराठी
1984 (32वां)सत्यजीत रेबंगाली
1983 (31वां)दुर्गा खोटेहिन्दीमराठी
1982 (30वां)एल. वी. प्रसादहिन्दीतमिलतेलुगू
1981 (29वां)नौशादहिन्दी
1980 (28वां)पैडी जयराजहिन्दीतेलुगू
1979 (27वां)सोहराब मोदीहिन्दी
1978 (26वां)रायचन्द बोरालबंगालीहिन्दी
1977 (25वां)नितिन बोसबंगालीहिन्दी
1976 (24वां)कानन देवीबंगाली
1975 (23वां)धीरेन्द्रनाथ गांगुलीबंगाली
1974 (22वां)बोम्मीरेड्डी नरसिम्हा रेड्डीतेलुगू
1973 (21वां)रूबी मयेर्स (सुलोचना)हिन्दी
1972 (20वां)पंकज मलिकबंगाली एवं हिन्दी
1971 (19वां)पृथ्वीराज कपूरहिन्दी
1970 (18वां)बीरेन्द्रनाथ सिरकरबंगाली
1969 (17वां)देविका रानीहिन्दी

रजनीकांत मुख्यतः तमिल फिल्मों में काम करते हैं लेकिन किसी जमाने में उन्होंने डेढ़ दर्जन से भी अधिक हिंदी फिल्मों में भी काम किया था। बॉलीवुड में उनकी ‘अंधा कानून’, ‘हम’ और ‘चालबाज’ जैसी फ़िल्में हिट रही थीं। रेखा और श्रीदेवी जैसी अभिनेत्रियों के साथ उनकी जोड़ी को खासा पसंद किया जाता था। उन्होंने तमिल में कई ब्लॉकबस्टर दिए हैं। साथ ही वो तेलुगु, बांग्ला और अंग्रेजी फिल्मों का हिस्सा भी रहे हैं।

नंदीग्राम में लटकती मिली BJP कार्यकर्ता की लाश, परिजनों ने कहा- मिथुन की रैली में शामिल होने पर TMC के गुंडों ने कर दी हत्या

नंदीग्राम के एक नंबर ब्लाक में एक भाजपा कार्यकर्ता का फंदे से लटकता शव मिला। तृणमूल कॉन्ग्रेस पर उसकी हत्या कर शव को फंदे से लटकाने का आरोप लगा है। डेबरा में भाजपा प्रत्याशी पूर्व आइपीएस अधिकारी भारती घोष का तृणमूल कार्यकर्ताओं ने घेराव किया। विधानसभा क्षेत्र में सियासी बवाल के आरोप लग रहे हैं। भारती घोष ने आरोप लगाया है कि TMC के गुंडे मतदाताओं को धमका रहे हैं।

इन सबके बीच 50 साल के भाजपा कार्यकर्ता की लाश मिलना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। मृतक की बेटी ने आरोप लगाया है कि पिछले कुछ दिनों से TMC के गुंडों द्वारा उसके पिता को लगातार धमकियाँ दी जा रही थीं। ये वारदात नंदीग्राम के पूर्वी भकूटिया में हुई। मृत भाजपा कार्यकर्ता का नाम उदय दुबे है। परिजनों ने कहा है कि उन्होंने मार्च 30 को नंदीग्राम में अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती के रोड शो में हिस्सा लिया है, इसीलिए धमकियाँ मिल रही थीं।

जहाँ भाजपा नेताओं का कहना है कि TMC के गुंडों ने उदय दुबे को मार कर लटका दिया, वहीं तृणमूल ने भाजपा पर लाशों की राजनीति खेलने का आरोप मढ़ दिया। TMC का कहना है कि दुबे ने पारिवारिक समस्याओं की वजह से आत्महत्या की है। पुलिस ने इस मामले में अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज किया है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई होगी। क्षेत्र में केंद्रीय बलों को तैनात किया गया है।

ये घटना तब सामने आई है, जब पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण की सीटों के लिए मतदान हो रहा है। नंदीग्राम राज्य की सबसे महत्वूर्ण सीट मानी जा रही है क्योंकि यहाँ से खुद ममता बनर्जी मैदान में हैं और TMC छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए अधिकारी परिवार की साख भी दाँव पर है। शुभेंदु अधिकारी हिंदुत्व और क्षेत्र से अपने परिवार के जुड़ाव के मुद्दे को लेकर जनता के बीच गए। 8 चरण के मतदान के नतीजे 2 मई को आने हैं।

पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के मतदान से पहले ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि नंदीग्राम में परेशानी खड़ी करने और मतदाताओं को धमकाने के लिए दूसरे राज्यों से गुंडे आए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से इस मामले में कार्रवाई करने की माँग की थी। ममता बनर्जी ने आरोप लगाते हुए कहा था कि दूसरे राज्यों के गुंडे मतदाताओं को धमकाने के लिए नंदीग्राम में दाखिल हो गए हैं। इलाके के ग्रामीणों को भगाया जा रहा है। वे मतदाताओं को धमकाया जा रहा हैं।

न्यू ईयर पार्टी में 2 लड़कियों के साथ अंतरंग हुआ था आरोपित श्री, एक की हो गई हत्या, एक बनी आरोपित: जाह्नवी हत्याकांड का खुला राज़

मुंबई के खार में नए साल की पार्टी के दौरान जाह्नवी कुकरेजा (Janhavi Kukreja) नामक युवती की हत्या ने सनसनी मचा दी थी। अब इस मामले में पुलिस ने चार्जशीट पेश की है। चार्जशीट में बताया गया है कि जाह्नवी के शरीर पर जख्म के कुल 48 निशान थे, जहाँ से ब्लीडिंग हुई थी। उसकी खोपड़ी में भी चोटें थीं। उसके ही दोस्त श्री जोगधनकर और दीया पडलकर को इस हत्याकांड में आरोपित बनाया गया है।

खार पुलिस ने दिसंबर 31, 2020 की रात हुई इस वारदात के मामले में मंगलवार (मार्च 30, 2021) को 600 पन्नों की चार्जशीट पेश की। पार्टी में उपस्थित जाह्नवी के दोस्तों से लेकर पुलिस ने 74 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं। पुलिस ने कहा कि श्री और दीया 8वें फ्लोर पर एक-दूसरे के साथ आपत्तिजनक अवस्था में थे, जिस पर जाह्नवी ने आपत्ति जताई थी। फिर तीनों के बीच लड़ाई हुई। रात 1:45 बजे जाह्नवी नीचे उतर रही थी तो दोनों से उसे खदेड़ा और झगड़ा किया।

उसे सीढ़ियों पर धक्का दिया गया, उसके बाल खींचे गए और उसे तब तक पीटा गया, जब तक वो दूसरे फ्लोर तक नहीं पहुँच गई। इसके बाद श्री और दीया ने 19 वर्षीय जाह्नवी कुकरेजा के सिर को सीढ़ी की रेलिंग पर दे मारा। इसी बीच जाह्नवी ने आत्मरक्षा में कुछ वार किए। पुलिस का कहना है कि इसी कारण श्री भी चोटिल हुआ। पुलिस को 5वें फ्लोर से पीली चूड़ी और चौथे फ्लोर से एक सैंडल भी मिला। जाह्नवी कुकरेजा हत्या मामले में श्री और दीया – दो ही आरोपित हैं।

इसी सैंडल का दूसरा जोड़ा ग्राउंड फ्लोर पर जाह्नवी की लाश के पास से मिला। पुलिस को दूसरी और तीसरी मंजिल पर कान के झुमके और हेयरबैंड भी मिले। पुलिस ने कहा कि ये चीजें जाह्नवी और दीया पडलकर की थीं। दूसरे फ्लोर की रेलिंग पर जाह्नवी के बाल के सैम्पल भी बरामद हुए थे। साथ ही तीसरे फ्लोर की सीढ़ियों पर कुकरेजा के खून के निशान मिले। जाह्नवी साइकोलॉजी की छात्रा थी। श्री उसके करीबी मित्र था।

इस मामले में कोई प्रत्यक्ष गवाह नहीं है लेकिन पुलिस ने कहा है कि उसके पास मजबूत परिस्थितिजनक सबूत हैं। ये घटना ‘भगवती हाइट्स बिल्डिंग’ में हुई थी। पुलिस ने श्री जोगधनकर के शर्ट और घटना के बाद दीया जिस बिस्तर पर सोई थी उस पर मिले खून के सैम्पल भी कुकरेजा से मैच हुए। श्री के एक दोस्त ने बताया कि वो उस रात जख्मी अवस्था में आया था, जिसके बाद उसे सिनो हॉस्पिटल लेकर जाया गया।

गवाहों में से कुछ ने बताया है कि उन्होंने श्री को जाह्नवी के साथ अंतरंग अवस्था में देखा था, जबकि कुछ का कहना है कि वो दीया के साथ भी काफी अंतरंग व्यवहार कर रहा था। जाह्नवी ने एक दोस्त को फोन कॉल करके बताया था कि श्री उसका अच्छा दोस्त है और दीया के साथ उसका करीब होना उसे पसंद नहीं। साथ ही उसे कहा था कि वो एक दोस्त के रूप में न ही श्री को और न ही दीया को खोना चाहती है।

ये पार्टी यश आहूजा नामक युवक ने दी थी। उसने बताया कि जब वो रात को बिरयानी लेने अपने फ़्लैट में गया तो उसने वहाँ दीया को बिस्तर पर पड़े हुए देखा। उसके होठों से खून बह रहा था और तकिए पर भी खून के धब्बे लगे थे। यश ने बताया कि जब श्री को जाह्नवी की लाश मिलने की सूचना दी गई, तो उसने कोई रिएक्शन नहीं दिया। पूछने पर पडलकर ने कहा कि उसे कुछ भी याद नहीं। श्री के वकील ने गवाहों के बयानों को विरोधाभासी बताते हुए कहा कि पुलिस से गलती हुई है।

जाह्नवी कुकरेजा की माँ निधि का कहना था कि उनकी बेटी और दीया 13 सालों से दोस्त थीं और पड़ोसी भी थीं। हत्या के अगले कुछ दिनों में उन्होंने दीया के इस हत्याकांड में शामिल होने पर अनिश्चितता जताई थी। उन्होंने बताया था कि उनके पति का जन्मदिन मना कर ही जाह्नवी न्यू ईयर पार्टी में दीया के कहने पर गई थी। ये पार्टी 16वीं मंजिल पर चल रही थी। जाह्नवी कुकरेजा सांताक्रुज की रहने वाली थी।

वाराणसी के सरैया में होली के दिन हिंदुओं पर पत्थरबाजी, कई घायल: रंग पड़ने का मामला – अजीम, आसिम गिरफ्तार

वाराणसी के जैतपुरा थाना क्षेत्र के मुस्लिम बहुल सरैया इलाके में होली (मार्च 29, 2021) के दिन दो पक्षों में विवाद होने के बाद पत्थरबाजी का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि होली के दिन होली खेल कर नहाने गए हिन्दू समुदाय के बच्चे आपस में एक दूसरे पर कपड़ा फेंक रहे थे, तभी पास से गुजर रहे एक मुस्लिम व्यक्ति पर रंग का छींटा पड़ गया। जिसने बड़ा विवाद का रूप ले लिया। मामले में हिन्दू पक्ष द्वारा कहा जा रहा है कि मुस्लिमों ने पहले छतों से पत्थरबाजी शुरू कर दी। जिसमें कई लोग घायल बताए जा रहे हैं।

घायल लोग

वहीं ट्विटर पर रामभक्त वैदिक द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो में एक व्यक्ति खून से लथपथ नजर आ रहा है। वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा गया है, “वाराणसी के सरैया में होली खेलते समय हिन्दुओं पर हिंसा, मुस्लिम महिला-पुरुषों ने होली खेलने वालों पर पत्थरबाजी की।” वीडियो में कोई कह रहा है कि घायल लड़के को कई टाँके लगे हैं।

मामले के तूल पकड़ते ही हिन्दू युवा वाहिनी के लोग भी हिन्दू पीड़ितों से मिलने पहुँचे तो परिवार ने चौंकाने वाले खुलासे किए। रामभक्त वैदिक और एक फेसबुक पर पोस्ट किए गए वीडियो में हिन्दू परिवार की एक महिला सदस्य का कहना है, “लड़कन नाचे गावे लगिहन त जरती के मारे, ईंटा-पत्थर चलावे लगिहन, लड़किन तक छेकले हइन भैया, इ लोग मारे-पिटे लगिहन, एक हल्ली क बात ना हाउ 4-5 हल्ली क बात हौ। इहाँ हिन्दू कम हउवन, या त घरवे गिरा द भैया, या कुर्की लगवा दा, उ हस्पताले पड़ल हउअन।”

ऊपर जो स्थानीय बोली में महिला ने कहा है, उसकी सामान्य हिंदी यह है – “लड़के नाचने-गाने लगते हैं तो जलन के कारण ये लोग (मुस्लिम) ईंट पत्थर चलाने लगते हैं। लड़की तक हमला की है, छत से मुस्लिम लोग पत्थर चला रहे थे। ऐसा एक बार नहीं बल्कि चार-पाँच बार हो चुका है। यहाँ हिन्दू कम हैं, अब क्या करें या तो घर गिरा के कहीं चले जाएँ या कोई कुर्की ही करा दे। वो घायल होकर अस्पताल में पड़ा है।”

ऑपइंडिया ने इस मामले में सरैया चौकी इंचार्ज मनोज सिंह से बात की तो उन्होंने बताया, “मोहम्मडन और हिन्दू का आस-पास घर है। वहीं पर एक खुला स्थान है, जहाँ दुर्गा माता का छोटा सा मंदिर है। वहीं होली खेलने के बाद हिन्दू बच्चे सबमर्सिबल चालू कर नहा रहे थे और उसी में जो कपड़ा पहने थे, उसी से एक दूसरे को मार रहे थे। इसी दौरान वहीं रास्ते से जा रहे एक मोहम्मडन पर छींटा पड़ गया। जिसके बाद मुस्लिमों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी।” उन्होंने जानकारी दी कि मामले में दो लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।

इस पूरे मामले पर ऑपइंडिया ने जाँच अधिकारी से भी बात की, जिन्होंने बताया कि मामले में छतों से मुस्लिमों की तरफ से ही पत्थरबाजी हुई है। पुलिस के पास वीडियो भी है। और इस मामले में जाँच कर विधिक कार्रवाई की जा रही है।

पीड़ित हिन्दू पक्ष द्वारा जहाँ इस मामले में FIR की गई है, वहीं मुस्लिमों की तरफ से कोई FIR नहीं है। फिर भी कुछ मीडिया रिपोर्ट और फेसबुक पोस्ट में हिन्दुओं द्वारा दरवाजे पर लात मारने और करघे को नुकसान पहुँचाने की बात की जा रही है। जिस पर पुलिस का कहना है कि यह बाद का है, पहले मुस्लिमों ने ही पत्थरबाजी की है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जैतपुरा में पंजीकृत मुकदमा संख्या 69/21 धारा-147, 149, 323, 504, 336, 352 आईपीसी व 3(1) द, 3(1)ध, 3(2)v ए एससीएसटी एक्ट से सम्बन्धित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। साथ ही वाराणसी पुलिस ने मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए अजीम उम्र-52 पुत्र अजीमुल्ला व आसीम पुत्र शमीम अहमद निवासीगण लाट भैरव सरैया थाना जैतपुरा जनपद वाराणसी के दो लोगों को गिरफ्तार किया है।

गौरतलब है कि इलाके के लोगों ने जैसा बताया कि वाराणसी का वह मुस्लिम बहुल इलाका पहले से भी संवेदनशील है। पहले भी कभी शिव बारात तो कभी होली को लेकर मुस्लिमों के इलाके में तनाव और पत्थरबाजी करने की खबरें आ चुकी हैं। फ़िलहाल अभी पुलिस ने मामले को सांप्रदायिक न कह कर बच्चों के बीच झगड़ा कहा है।

मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में वैक्सीन को लेकर खौफ, मस्जिदों-मौलवियों की ली जा रही मदद: इमामों ने कहा – ‘हमारा विश्वास जीतो’

देश के कई इलाकों में अल्पसंख्यक समुदाय के बीच कोरोना के टीके को लेकर कोई रुचि नहीं दिख रही है, जबकि ये महामारी फिर से दूसरी लहर लेकर भारत में आ गई है। बात देश की हाईटेक सिटी बेंगलुरु की करें तो यहाँ के स्वास्थ्य कर्मचारियों का कहना है कि मुस्लिम समाज में वैक्सीन को लेकर जागरूकता नहीं है और सरकार को इस मुद्दे को देखना पड़ेगा। मुस्लिम बहुल इलाकों में लोग वैक्सीन नहीं लगवा रहे हैं।

ये सब तब हो रहा है, जब सरकार टीकाकरण को ज्यादा से ज्यादा व्यापक बनाने में लगी हुई है और अब तक 6.31 करोड़ लोग इसका लाभ ले चुके हैं। BBMP (बृहत् बेंगलुरु महानगरपालिका) के कर्मचारियों का कहना है कि कई वार्डस में लोग वैक्सीन लगवाने के लिए पहुँचे ही नहीं। उन्होंने बताया कि कई बार मनाने के बावजूद लोगों ने वैक्सीन नहीं ली। ऐसे वार्डस में जागरूकता कार्यक्रम की आवश्यकता जताई गई है।

अधिकारियों का कहना है कि ये ट्रेंड न सिर्फ राजधानी बेंगलुरु, बल्कि पूरे कर्नाटक राज्य में देखने को मिल रहा है। वरिष्ठ महामारी विषेशज्ञ डॉक्टर गिरिधर आर बाबू ने कहा कि टीकाकरण के लिए मजहबी नेताओं और धर्मगुरुओं के साथ समन्वय बनाना पड़ेगा, क्योंकि भारत एक विभिन्न समुदायों वाला देश है। मौलानाओं का कहना है कि फेक न्यूज़ और साइड इफेक्ट्स के डर से मुस्लिम वैक्सीन नहीं लगवा रहे और सरकार ने इसे लेकर कुछ नहीं किया है।

शिक्षाविद अमीन ए मुदस्सर ने माना कि अल्पसंख्यक समुदाय से कोरोना का टीका लगवाने वालों की संख्या काफी कम है और फेक न्यूज़ के कारण लोग डरे हुए हैं, लेकिन मुल्ला-मौलवी लगातार लोगों से अपील कर रहे हैं कि वो वैक्सीन लगवाएँ। अप्रैल 11 से 45 वर्ष से ऊपर के सभी लोग कोरोना वैक्सीन लगवा सकते हैं। जामा मस्जिद के इमाम मक़सूद इमरान रश्दी ने कहा कि सरकार को मौलवियों को साथ लेकर टीकाकरण अभियान चलाना चाहिए।

उन्होंने पूछा कि सरकार फेक न्यूज़ से निपटने और टीकाकरण अभियान को बढ़ावा देने के लिए क्या कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि महामारी की शुरुआत से ही स्वास्थ्य सिस्टम, नेताओं और मीडिया ने मिल कर मुस्लिमों को जम कर बदनाम किया है, इससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ा है और उनका विश्वास खोया है। उन्होंने कहा कि मीडिया और नेताओं को अब उनका विश्वास फिर से जीतना चाहिए।

गुजरात जैसे संपन्न राज्य में भी इस मामले में स्थिति ठीक नहीं है। अहमदाबाद में मुस्लिम बहुल इलाकों में लोग वैक्सीन नहीं लगवा रहे हैं। AMC (अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन) ने अब तक 3.2 लाख लोगों को टीके लगवाए हैं। इनमें से तीन इलाकों में स्थिति ठीक नहीं है। साउथ-वेस्ट जोन में 28,383 (8.84%), ईस्ट जोन में 29,201 (9.1%) और सेंट्रल जोन में 38,944 (12%) लोगों को वैक्सीन लगवाई गई है।

ध्यान देने वाली बात ये है कि ये तीनों ही क्षेत्र 60-70% मुस्लिम आबादी वाले हैं। मुस्लिम बहुल मकदमपुरा वार्ड के कॉन्ग्रेस पार्षद हाजी असरतबेग ने माना कि जिस तरह कोविड टेस्ट कराने के लिए मुस्लिम राजी नहीं थे, ठीक उसी तरह टीकाकरण को लेकर भी माहौल ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम लोग कही-सुनी बातों पर वैक्सीन को लेकर डर रहे हैं। AMC नमाज के द्वारा जागरूकता फैलाने में लगा हुआ है।

साथ ही मुस्लिम प्रतिनिधियों को आगे आकर वैक्सीन लगवाने के लिए बोला जा रहा है। सूरत और गोधरा में भी ऐसी ही स्थिति होने के कारण मुस्लिमों के बीच अभियान चलाया गया। AMC का कहना है कि कई प्रयासों के बावजूद मुस्लिम बहुल इलाकों से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है। गोधरा में तो जुमे की नमाज पर 50 मस्जिदों से वैक्सीन को लेकर पॉजिटिव घोषणा करवाई गई। मस्जिदों से लोगों को बताया जा रहा है कि वैक्सीन लगवाना शरिया कानून के खिलाफ नहीं है।

साथ ही मुस्लिमों को सोशल मीडिया पर टीके के खिलाफ वायरल संदेशों पर विश्वास न करने को कहा जा रहा है। मुस्लिम समाज अच्छे से समझे, इसीलिए उर्दू में घोषणा हो रही है। गोधरा के एक कोविड सेंटर के संचालक जुबैर मामजी ने कहा कि घोषणा से पहले मुस्लिम डॉक्टरों के साथ बैठक की है, जिसमें वैक्सीन के सुरक्षित होने चर्चा हुई। मौलानाओं और मुस्लिम नेताओं की मदद वहाँ भी ली जा रही है।

भारत में पहला कोरोना विस्फोट भी दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज से हुआ था। हजारों जमाती देश के अलग-अलग मुस्लिम बहुल इलाकों में छिपे हुए थे और वहाँ मेडिकल टीम और पुलिस पर हमले किए जाते थे। कई मौलवियों ने मस्जिदों में भीड़ इकट्ठी करने से मना करने पर उलटा सरकारी दिशा-निर्देशों का ही विरोध जताया था। आजम खान जैसे नेताओं ने वैक्सीन पर विवादित बयान दिया। कई विपक्षी दल भी नकारात्मकता फैलाने में आगे थे।

पश्चिम बंगाल, असम में दूसरे चरण के लिए वोटिंग शुरू: नंदीग्राम के अलावा 2 पूर्व IPS अफसरों की लड़ाई भी है दिलचस्प

विधानसभा चुनाव 2021 के दूसरे चरण के लिए मतदान आज शुरू हो गया है। इसमें पश्चिम बंगाल की 30 और असम की 39 सीटों के लिए वोटिंग हो रही है। बंगाल की 30 सीटों पर 191 प्रत्याशियों के भाग्य का 75 लाख से अधिक मतदाता फैसला करेंगे। असम में 73,44,631 मतदाता हैं, जिसमें 37,34,537 पुरुष व 36,09,959 महिलाएँ और 135 थर्ड जेंडर मतदाता हैं।

पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा हाई प्रोफाइल सीट नंदीग्राम है, जहाँ टीएमसी से बीजेपी में आए शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ चुनावी मैदान में हैं। यह सीट शुभेंदु अधिकारी का गृह जिला है। इसके अलावा यहीं से सीपीएम की मीनाक्षी मुखर्जी भी चुनावी मैदान में हैं। इसके तहत पश्चिमी मेदिनीपुर की 9, बाकुड़ा की 8, पूर्व मेदिनीपुर की 9 और दक्षिण 24 परगना की 4 सीटों के लिए मतदान शुरू हो चुका है।

पश्चिम बंगाल की हाई प्रोफाइल सीट

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सबसे हाई प्रोफाइल सीट नंदीग्राम है, जहां शुभेंदु अधिकारी और ममता के बीच काँटे की टक्कर है। अधिकारी इस सीट पर ममता को 50 हजार से अधिक वोटों से हराने का दावा कर चुके हैं। उन्होंने कहा है कि अगर वह ममता को नहीं हरा पाए तो राजनीति छोड़ देंगे। इसके अलावा डेबरा सीट भी हाई प्रोफाइल सीट मानी जा रही है।

इस सीट से बीजेपी की नेता और पूर्व आईपीएस भारती घोष चुनावी मैदान में हैं तो दूसरी ओर भी पूर्व आईपीएस और टीएमसी के उम्मीदवार हुमायू कबीर हैं। यहां दो आईपीएस अधिकारी आमने-सामने हैं। ऐसे में टक्कर काँटे की होने वाली है। वहीं क्रिकेटर से राजनेता बने अशोक डिंडा और टीएमसी के संग्राम डोलाई चुनाव लड़ रहे हैं।

असम में 39 सीटों के लिए 345 उम्मीदवार मैदान में

असम में दूसरे चरण की 39 सीटों के लिए 345 उम्मीदवार चुनावी किस्मत आजमा रहे हैं। इसमें 26 महिलाएँ भी हैं। यहाँ बीजेपी 34 सीटों पर कॉन्टैस्ट कर रही है।

बांग्लादेश की सीमा से सटी सीटों पर हो रहा मतदान

असम में जिन 39 सीटों पर मतदान हो रहा है, उनमें से 25 सीटें बराक वैली में हैं, जिसकी सीमाएँ बांग्लादेश से लगी हुई हैं। 2016 के चुनाव में बीजेपी ने यहाँ पर 8 सीटें जीती थीं। उस दौरान विधानसभा चुनाव में 126 में से 86 सीटें जीतकर अपनी सरकार बनाई थी।

WhatsApp वॉइस नोट से फिल्मी हस्तियों को ड्रग्स बेचता था एजाज खान, फिर करता था डिलीट: शादाब के सामने होगी पूछताछ

ड्रग्स मामले में ‘NCB (नारकोटिक्स नियंत्रक ब्यूरो)’ ने विवादित अभिनेता एजाज़ खान को गिरफ्तार कर के कोर्ट में पेश किया, जिसके बाद उसे रिमांड पर भेज दिया गया। 8 घंटे की पूछताछ के बाद उसे बुधवार (मार्च 31, 2021) को मुंबई की NDPS कोर्ट में पेश किया गया।

NCB को पिछले सप्ताह ड्रग्स मामले में गिरफ्तार शादाब बटाटा और एजाज खान के बीच संबंध मिले हैं। दोनों को आमने-सामने बिठा कर भी पूछताछ होगी। अदालत ने एजाज़ खान की 3 दिन की कस्टडी माँगी थी, जिसके लिए कोर्ट ने अनुमति दे दी। अब वो 3 अप्रैल तक NCB की हिरासत में रहेगा।

NCB को पता चला है कि शादाब अभिनेता एजाज़ खान तक ड्रग्स पहुँचाता था और एजाज़ खान उन ड्रग्स को बॉलीवुड और टीवी जगत की कई हस्तियों को उपलब्ध कराता था। इस मामले में जल्द ही एजेंसी बॉलीवुड और टीवी जगत के कुछ लोगों पर शिकंजा कस सकती है।

NCB के एक अधिकारी के हवाले से ‘दैनिक भास्कर’ की खबर में बताया गया है कि एजाज़ खान के अधिकतर क्लाइंट्स TV इंडस्ट्री से जुड़े हुए लोग थे। उन तक ड्रग्स पहुँचाने के लिए व्हाट्सएप्प के ‘वॉइस नोट्स फीचर’ का इस्तेमाल किया जाता था। जैसे ही ऑर्डर मिल जाता था, उसे डिलीट कर दिया जाता था। कस्टमर के साथ सीरियल और फिल्म के नाम पर कोडवर्ड्स में बात की जाती थी। फिर रिकॉर्डिंग को डिलीट कर दिया जाता था।

NCB ने मुंबई की अदालत को जानकारी दी कि उसके पास एजाज खान और शादाब बटाटा के बीच हुई बातचीत का CDR, व्हाट्सएप्प के चैट और वॉइस रिकॉर्ड हैं, जिसमें एजाज ड्रग्स का ऑर्डर देने और रुपए को ट्रांसफर करने की बातें कर रहा है। बटाटा पहले ही कबूल कर चुका है कि वो एजाज़ तक ड्रग्स पहुँचाता था।

लॉकडाउन के नाम पर एजाज़ ने कई कलाकारों को ज्यादा मात्रा में ड्रग्स की खरीददारी करने को कहा था। ये भी पता चला है कि अपनी हैसियत का फायदा उठा कर एजाज़ खान अपनी सोसाइटी से ही ड्रग्स डीलिंग कर रहा था।

कोर्ट में उसके वकील अयाज खान ने दावा किया कि उनके मुवक्किल के यहाँ से ड्रग्स नहीं, Troika नामक एक दवा बरामद हुई है, जो एजाज़ की पत्नी की है। साथ ही वकील ने NCB की रिकॉर्डिंग्स को भी 1 साल पुराना करार दिया। वकील का कहना है कि एजाज़ ने अपने बयान में भी ड्रग्स के खरीद-फरोख्त की बात कबूल नहीं की है।

एजाज़ खान 2018 में भी गिरफ्तार हुआ था। तब वो रंगे हाथों पकड़ा गया था और नशे में भी था। उसके पास से 8 आपत्तिजनक टेबलेट्स भी मिले थे। उनकी कीमत 2.2 लाख रुपए आँकी गई थी। उस दौरान उसका मोबाइल फोन भी जब्त हुआ था। वो नवीं मुंबई में पार्टी करते हुए धराया था। एजाज़ खान मुंबई की भायखला से विधानसभा चुनाव भी लड़ चुका है, लेकिन उसे तब NOTA से भी कम वोट मिले थे और उसकी जमानत जब्त हो गई थी।

एजाज़ खान का विवादों से रहा है पुराना नाता (वीडियो साभार: News24)

एजाज़ खान हिंदी और तेलुगु की कई फिल्मों में नजर आ चुका है। ‘रक्त चरित्र 2’, ‘डुकुडु’ और ‘हार्ट अटैक’ जैसी फिल्मों में उसे छोटे-मोटे रोल मिले थे। हाल ही में वो मलाला युसुफजाई की बायोग्राफिकल फिल्म ‘गुल मकाई’ में दिखा था। टीवी की दुनिया में वो ‘बिग बॉस 7’, ‘फियर फैक्टर: खतरों के खिलाड़ी 5’ ‘कॉमेडी क्लासेस’ और ‘कॉमेडी नाइट्स बचाओ’ जैसे रियलिटी शो के अलावा कई सीरियल्स का भी हिस्सा रहा है।

एजाज खान का कहना है कि उसके घर से मात्र 4 नींद की गोलियाँ ही मिली थीं। उसने दावा किया था कि उसकी बीवी का गर्भपात हो गया था, जिस कारण वो ‘एंटी-डेप्रेसेंट्स’ के रूप में उन गोलियों का प्रयोग करती थी। इससे पहले जुलाई 2019 में भी उसे मानहानि और हेट स्पीच मामलों में गिरफ्तार किया गया था। 2019 में एजाज खान एक विवादित वीडियो की वजह से गिरफ्तार हुआ था, जब उसने ब्राह्मणों के खिलाफ हिंसा की बात की थी।