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‘वे हमें मुर्गियों की तरह मार रहे हैं’: 91 लोगों को भून डाला, म्यांमार की सेना ने सिर और पीठ में दागी गोलियाँ

म्यांमार के विभिन्न कोनों में शनिवार को ‘ऑर्म्ड फोर्सेज़ डे’ के मौके पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर सेना ने ओपन फायरिंग कर दी। घटना में कुल मिलाकर 91 लोग मारे गए। इनमें एक बच्चा भी शामिल है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों के सिर और पीठ पर गोलियाँ मारी गईं। इसी के साथ तख्तापलट के बाद शुरू हुए प्रदर्शनों में मारे गए लोगों की संख्या कम से कम 328 हो गई है।

म्यांगयान के मध्य शहर में थू हाँ ज़ॉ ने कत्लेआम पर कहा “वे हमारे घरों में भी हमें पक्षी या मुर्गियों की तरह मार रहे हैं। लेकिन हम तब तक लड़ेगें जब तक वे झुक नहीं जाते।”

म्यांमार में शनिवार को हुई हिंसा की अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपियन यूनियन के अधिकारियों ने निंदा की है। ब्रिटेन के राजदूत डेन चग ने एक बयान में कहा है ”सुरक्षाबलों ने निहत्थे नागरिकों पर गोलियाँ चलाकर अपनी प्रतिष्ठा खो दी है।” अमेरिकी दूतावास ने भी कहा कि म्यांमार में सुरक्षाबल ‘निहत्थे आम नागरिकों की हत्या’ कर रहे हैं। म्यांमार के लिए यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल ने ट्विटर पर कहा, ”76वाँ म्यांमार सशस्त्र बल दिवस आतंक और असम्मान के दिन के तौर पर याद किया जाएगा। बच्चों समेत निहत्थे नागरिकों की हत्या ऐसा कृत्य है जिसका कोई बचाव नहीं है।”

गौरतलब है कि इससे पहले 14 मार्च 2021 को 38 लोगों का सेना की बर्बरता का शिकार होना पड़ा था। तख्तापलट का विरोध करने वालों के ख़िलाफ़ सेना ने अपना  खूँखार रूप दिखाते हुए 22 लोगों को गोलियों से भूना था। वहीं 16 लोगों की मांडले (Mandalay) और बागो ( Bago) जैसी जगहों पर संघर्ष में जान गई थी।

बता दें कि म्यांमार में 1 फरवरी की आधी रात तख्तापलट कर दिया गया था। वहाँ की लोकप्रिय नेता और स्टेट काउंसलर आंग सान सू की और राष्ट्रपति विन मिंट समेत कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद से ही पूरे देश में इसके खिलाफ विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं।

यह जोगेंद्रनाथ का आँगन है, यहीं 60 लोगों को लाइन में खड़ा कर मारी थी गोली… नीवा, काली, रानी आज भी उन जख्मों संग जिंदा हैं

बांग्लादेश की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगॉंठ। राजधानी ढाका के नेशनल परेड ग्राउंड में राष्ट्रीय दिवस कार्यक्रम। इसमें गुरुवार (26 मार्च 2021) को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बांग्लादेश की अपनी समकक्ष शेख हसीना के साथ मौजूद थे। समारोह को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा था, “यहाँ के लोगों पर पाकिस्तानी सेना के अत्याचार हमें व्यथित कर देता था, कई दिनों तक इन तस्वीरों ने हमें सोने नहीं दिया।”

शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर्रहमान, जिन्हें ‘बंगबंधु’ के नाम से भी जाना जाता है। उनके नेतृत्व में ही बांग्लादेश ने पाकिस्तान के अत्याचार से मुक्ति पाई थी। लेकिन, मुक्ति की यह लड़ाई आसान नहीं थी। अथक संघर्ष और प्रताड़नाओं के एक लंबे सिलसिले के बाद यह मिली थी। इस दौरान पाकिस्तानी सेना ने जिस तरीके से स्थानीय लोगों का दमन किया वह आज भी रूह कँपा देती है।

इन्हीं कहानियों में से एक नीवा पाल की कहानी है। नीवा उन 35 औरतों में से एक हैं जिनके न केवल पतियों को पाकिस्तानी सेना ने मारा बल्कि उनका रेप कर उन्हें प्रताड़ित भी किया। आज नीवा 70 साल पार कर चुकी हैं। लेकिन वह उनकी आँखों से उस समय की तस्वीरें धूमिल नहीं होतीं। वह कहती हैं, “ये बयान नहीं किया जा सकता। मैं कह ही नहीं सकती। तुम्हें मालूम हैं उन्होंने औरतों के साथ क्या किया?”

बकौल नीवा, “बात 25 अप्रैल 1971 की है। पंजाबियों ने हमारे गाँव को घेर लिया था। मैं अपने पति के साथ थी। तीन लोगों ने दरवाजा तोड़कर मेरे पति को उठाया। उस समय मैं दो बच्चों की माँ थी। उन्होंने मुझे कस कर पकड़ा कि मैं भाग नहीं पाई। काश मैं वहाँ से निकल पाती।”

इसी तरह, काली रानी पाल बताती हैं, “पाकिस्तानियों ने मेरे पति को मारा। मैं उस समय प्रेगनेंट थी। उन्होंने मेरे पेट पर मारा। जिसके बाद मुझे एक मृत बच्चे को जन्म देना पड़ा।” सुजोला रानी पाल भी एक ऐसी वीरांगना हैं जिन्हें आज भी अपने लिए पहचान नहीं मिल पाई है। वह एक नौकर के तौर पर घरों में काम करती हैं। वह बताती हैं, “नरसंहार के कुछ दिन बाद का समय बहुत मुश्किल था। हमें कई दिन बिना खाने के रहना पड़ा। हम अपने घरों में खाना नहीं बना सकते थे।”

स्थानीय लोग 1971 के उस दौर को याद करते हुए बताते हैं कि कैसे अटायकुला में 6 नावों पर बैठकर 150 पाकिस्तानी नदी पार कर आए और जोगेंद्रनाथ पाल के आँगन में 60 पुरुषों को खड़ा किया। इसके बाद सारे पुरुषों को दो पंक्ति में बाँटा गया। एक जो अपना पैसा और सोना मर्जी से देने को तैयार हो गए और दूसरे वो जिन्होंने मना कर दिया।

सेना ने पहले उन पर गोली चलाई जिन्होंने सब देने से मना किया फिर उन पर जो अपनी जान बचाने को सब देने को तैयार हो गए थे। 60 पुरुषों में से कुल 8 बचे। लेकिन चोटें उनकी भी कम नहीं थी। बाकी सारे शवों को जोगेंद्रनाथ के घर के पास दफनाया गए। शायद तब संभव नहीं था कि हिंदू रीति-रिवाजों से उनका दाह संस्कार हो।

प्रद्युत्त पाल उस नरसंहार के समय जीवित बचे लेकिन उन्होंने अपने पिता, चाचा और तीन भाई सबको खो दिया। गोली उन्हें भी लगी थी, लेकिन बहुत हल्के से। प्रद्युत्त कहते हैं, “सैंकड़ों गोलियाँ मेरे सिर के ऊपर से गईं। घायल मेरे ऊपर गिर रहे थे। वह मुझे चुप रहने को कह रहे थे। मैं देख पा रहा था छोटो जमुना खून से लाल हो गई थी। वहाँ बस खून ही खून था।”

स्थानीय बताते हैं कि पुरुषों को मारने से पहले पाकिस्तानी सेना ने औरतों को उनसे अलग कर दिया था। पुरुष जानते थे कि हमारी कोई महिला नहीं बचेगी। लेकिन खुद को बचाने के लिए कई महिलाओं ने आत्महत्या कर ली और कई लड़कियाँ कुँवारी भी मर गईं।

कोहिनूर विला

अटायकुला गाँव की तरह देशवाली पारा के कुश्तिया में बना कोहिनूर विला भी नरसंहार की तमाम कहानियाँ समेटे हुए है। स्वतंत्रता सेनानी रफीकुल इस्लाम कहते हैं कि 1971 में जो यहाँ पर हुआ वह बताने योग्य नहीं है। जानकारी के अनुसार ये घर रबिउल हक मलिक और अरशद हक नाम के दो भाइयों का था। 1947 के विभाजन के बाद दोनों पश्चिम बंगाल के हुगली के पंचपीरतला से कुशतिया आए थे और अपना बेकरी का कारोबार करते थे।

रबिउल और अरशद का भतीजा बताता है कि कैसे उनके पूरे मलिक परिवार को मारा गया। कुल 16 लोग उस नरसंहार में मरे। हलीम के अनुसार, कुछ की हत्या कर दी गई और अन्य को काट दिया गया। हत्यारों ने सबको मारते हुए एक कैसेट प्लेयर पर जोर से संगीत बजाया ताकि पड़ोसियों को पीड़ितों की चीख की आवाज सुनाई न दे। अगले दिन किसी का शव बाथरूम में, किसी का किचन में तो किसी का घर के कॉरिडोर में पड़ा मिला।

‘मार कर गड्ढे में दफन कर दो’: बंगाल में भारी मतदान के बीच एक और ऑडियो, बीजेपी MP ने कहा- ममता बनर्जी मर्डर का दे रहीं ऑर्डर

पश्चिम बंगाल के बैरकपुर से भाजपा सांसद अर्जुन सिंह ने एक ऑडियो क्लिप जारी किया है। उन्होंने दावा किया है कि इसमें राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सामने वाले व्यक्ति को एक भाजपा नेता की हत्या कर दफन कर देने का आदेश दे रही हैं। ममता बनर्जी का यह कथित दूसरा ऑडियो क्लिप है, जो शनिवार (27 मार्च 2021) को सामने आया है।

राज्य में शनिवार को ही पहले चरण की 30 सीटों पर वोट भी डाले गए हैं। आठ चरणों में मतदान होना है। पहले चरण में हिंसा के बिच राज्य में करीब 80 फीसदी मतदान हुआ है। साथ ही असम की 47 सीटों के लिए भी वोट डाले गए। वहाँ करीब 73 फीसदी मतदान की खबरें हैं।

अर्जुन सिंह द्वारा जारी ऑडियो क्लिप में कथित तौर पर ममता बनर्जी को सामने वाले व्यक्ति से यह कहते हुए सुना जा सकता है कि वह ब्लॉक अध्यक्ष आलोक को बताए कि उसे बीजेपी नेता दिलीप जटुआ से खतरा है। टीएमसी सुप्रीमो ने आरोप लगाया कि जटुआ ने आलोक की हत्या के लिए किसी को 60 हजार रुपए दिए हैं। वह सामने वाले व्यक्ति से इसकी सूचना आलोक को देने को कहती हैं ताकि वह अपनी सुरक्षा बढ़ा सके।

इसके बाद ममता बनर्जी ने दिलीप के बारे में पूछताछ की तो उन्हें बताया गया कि चुनाव में दो बार हारने के बाद वह भाजपा में शामिल हो गया है। उसके बाद उन्होंने कथित तौर पर सामने वाले व्यक्ति को दिलीप जटुआ की हत्या कर उसे गड्ढे में दफन करने के निर्देश दिए ताकि बाद में वह ‘पेड़ के रूप में पैदा हो’।

ऑपइंडिया इस ऑडियो की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है। अर्जुन सिंह ने इसे जारी करते हुए ट्वीट किया है, “अपने राजनीतिक विरोधियों के प्रति ममता बनर्जी क्या व्यवहार करती हैं, यह इस ऑडियो टेप में स्पष्ट हो जाता है। विरोधी को जमीन में दफन करने का आदेश दे रही हैं मुख्यमंत्री। ये ऑडियो टेप किसने लीक किया, इसका जवाब तो मथुरापुर के सांसद सीएम जटुआ दे सकते हैं या ममता बनर्जी।”

इससे पहले जो ऑडियो सामने आया था उसमें ममता बनर्जी कथित तौर पर नंदीग्राम में जीत के लिए बीजेपी कार्यकर्ता प्रलय पाल से मदद माँग रही हैं। नंदीग्राम में ममता का मुकाबला बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी से है, जो कुछ महीने पहले तक उनकी सरकार में मंत्री थे। यह इलाका अधिकारी परिवार का गढ़ माना जाता है।

प्रलय पाल ने दावा किया कि ममता बनर्जी ने उन्हें फोन कर नंदीग्राम में अपने लिए समर्थन जुटाने को कहा। रिपोर्ट के अनुसार, पाल ने कहा, “वह चाहती हैं कि मैं टीएमसी में जाकर उनके साथ काम करूँ, लेकिन मैं शुभेंदु अधिकारी और उनके परिवार के साथ लंबे समय से हूँ। मैं अब भारतीय जनता पार्टी के लिए काम करता हूँ।”

पंजाब में किसान प्रदर्शनकारियों ने BJP नेता पर किया हमला, बीच सड़क पर फाड़े कपड़े: Video वायरल

पंजाब में कृषि कानून विरोधी प्रदर्शनकारियों ने अबोहर से भाजपा विधायक अरुण नारंग पर हमला करते हुए बीच सड़क पर उनके कपड़े फाड़ दिए। सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो वायरल हो गया है। वीडियो में नारंग को बिना कपड़ों के साथ देखा जा सकता है।

जानकारी के मुताबिक, प्रेस वार्ता के लिए जाते समय अरुणा नारंग के साथ यह घटना मलोट में हुई। कहा जा रहा है कि भाजपा कार्यालय पर प्रदर्शनकारी पहले से ही उनका इंतजार कर रहे थे। नारंग के पहुँचते ही सभी प्रदर्शनकारी उन पर हमलावर हो गए।

पहले उन पर इंक फेंकी गई और कार को भी गंदा किया गया। उस समय तो किसी तरह भाजपा कार्यकर्ता और पुलिस मिल कर उन्हें एक दुकान के अंदर ले गई। लेकिन वह जैसे ही बाहर आए उन पर दोबारा हमला हुआ। बर्बरता से उनके साथ खींचतान की गई। उनके कपड़े फाड़े गए। उन्हें बीच सड़क पर नंगा कर दिया गया।

पंजाब भाजपा नेता वरुण पुरी ने बताया, “भाजपा के अबोहर के विधायक अरुण नारंग जी के साथ पार्टी के दो अन्य नेताओं के साथ मलोट कस्बे में मारपीट की गई। लोकतांत्रिक राज्य के तहत लोगों के प्रतिनिधि पर हमला दंडनीय और बेशर्म अपराध है। मैं सख्त कार्रवाई की माँग करता हूँ।”

बता दें कि प्रदर्शनकारियों के बर्ताव पर हैरानी इसलिए भी है क्योंकि अरुण नारंग भाजपा पार्टी द्वारा लाए कृषि कानून का विरोध कर रहे थे। यानी वह किसानों के समर्थन में थे। उन्होंने दिसंबर में ही कहा था कि मोदी सरकार को जल्द से जल्द इसका समाधान खोजना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि कानून के साथ खिलवाड़ किसान विरोध-प्रदर्शन का हिस्सा बनता जा रहा है। 26 जनवरी के दिन दिल्ली की सड़कों पर हुई हिंसा में भी यह दिखा था। इसके अलावा प्रदर्शनस्थल पर भी कई महिला पत्रकारों ने अपने साथ बदसलूकी की बात को सोशल मीडिया पर उजागर किया था।

चूल्हे पर फूँक दिए 20 लाख, 16 बैंक अकाउंट: पुलिस अफसरों को भी घंटों खड़े रखता था राजस्थान का भ्रष्टाचारी तहसीलदार

पिछले दिनों राजस्थान के सिरोही के पिंडवाड़ा तहसीलदार कल्पेश जैन की किचन में नोटों की गड्डियाँ जलाते हुए वीडियो वायरल हुई थी। कल्पेश ने एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की छापेमारी से घबराकर घर के चूल्हे पर लाखों रुपए में आग लगा दी थी। इस दौरान एसीबी की टीम घर के बाहर ही थी और लगातार किचन की ख़िड़की से वीडियो बनाते हुए उसे नोट जलाने से मना कर रही थी।

तहसीलदार की काली करतूत का खुलासा बुधवार (मार्च 24, 2021) को हुआ था जब देर शाम सिरोही के भाँवरी में रेवेन्यू इंस्पेक्टर पर्बत सिंह एक लाख रुपए लेते पकड़ा गया था। पूछताछ में उसने बताया कि यह रिश्वत पिंडवाड़ा तहसीलदार कल्पेश जैन के लिए ली है। इसके बाद टीम तहसीलदार के घर पहुँची। आनन-फानन में कल्पेश ने बीवी के साथ खुद को कमरे में बंद कर लिया और दोनों 500 के नोटों की गड्डी जलाने लगे। 1 घंटे की मशक्कत के बाद दरवाजा कटर से काटा गया और टीम अंदर घुसने में कामयाब रही। देर रात तक चली कार्रवाई के बाद तलाशी में 1 लाख 31 हजार रुपए बरामद हुए थे।

तहसीलदार कल्पेश जैन और भांवरी के रेवेन्यू इंस्पेक्टर परबत सिंह राजपूत काे एसीबी, पाली ने शुक्रवार काे विशेष अदालत में पेश किया था। पड़ताल में पता चला है कि तहसीलदार ने बैंक में लाॅकर भी ले रखा है। उस लाॅकर में घूस लेकर जमा किए रुपए और जेवरात हाे सकते हैं। एसीबी आराेपित तहसीलदार से पूछताछ कर बैंक का लाॅकर भी खुलवाएगी। इसके अलावा टीम को पता चला है कि आरोपित ने अपने और पत्नी के नाम से कई बैंकाें में 16 से अधिक खाते खुलवा रखे हैं। इन सभी बैंक खातों काे एसीबी ने फ्रिज करवा दिया है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट बताती है कि आरोपित तहसीलदार कल्पेश जैन की कार्यप्रणाली शुरू से विवादाें में रही। तहसीलदार काे न्यायिक मजिस्ट्रेट की शक्तियाँ होती है और छाेटे-माेटे अपराध में आरोपितों को पुलिस तहसीलदार के सामने पेश करती है। इस दौरान जैन आरोपितों के साथ पुलिस अफसराें काे भी घंटाें खड़े रखता था। घूस के लिए पटवारियों के काम में भी दखल देता था।

दो माह पूर्व ही पटवारी मंडल और वकील मंडल ने उसके विरोध में प्रदर्शन किया था। जिसके बाद उसे अवेटिंग पोस्टिंग ऑर्डर मिला। हालाँकि, तहसीलदार ने पद का फायदा उठाते हुए अपने एपीओ आदेश पर स्टे ले लिया और पिंडवाड़ा में तैनात रहा।

बुधवार को रंगे हाथ पकड़े जाने के बाद एसबीपी की ओर से पिंडवाड़ा थाने में राजकार्य में बाधा पहुँचाना तथा राष्ट्रीय मुद्रा के अपमान के आराेप में केस दर्ज कराया गया है। पुलिस ने उसके घर से अधजले नोट बरामद किए हैं। संभव है कि इस केस में तहसीलदार की पत्नी भी नामजद की जाए। अभी कल्पेश जैन और पर्बत सिंह से ही पूछताछ हो रही है।

गौरतलब है कि राजस्थान से हाल में भ्रष्टाचार को लेकर कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। पिछले दिनों राजस्थान के बांदीकुई की SDM रहीं पिंकी मीणा  के खिलाफ 4000 पन्नों की चार्जशीट दायर की गई थी। चार्जशीट में बताया गया है कि हाइवे बनाने वाली कंपनियों से प्रति किलोमीटर 1 लाख रुपए की घूस पिंकी मीणा ने माँगी थी। पहली क़िस्त में उसने 6 लाख रुपए रिश्वत माँगी थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 10 लाख रुपए कर दिया था।

बांग्लादेश में PM मोदी के भाषण पर ट्वीट कर फँसे कॉन्ग्रेस के MP शशि थरूर, कहना पड़ा ‘सॉरी’

कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने अपने एक ट्वीट को लेकर माफी माँग ली है। यह ट्वीट उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बांग्लादेश दौरे के दौरान दिए गए एक भाषण को लेकर किया था। ट्वीट में उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्लादेश की स्वतंत्रता में पूर्व पीएम इंदिरा गाँधी के योगदान को स्वीकार नहीं किया।

गलत सूचना फैलाने को लेकर हुई छीछालेदर के बाद थरूर ने एक और ट्वीट कर अपनी गलती मानी। उन्होंने लिखा, “जब मैं गलत होता हूँ तो उसे स्वीकार करने में मुझे बुरा नहीं लगता। कल, त्वरित खबरों की हेडलाइंस और ट्वीट्स के आधार पर मैंने ट्वीट किया था कि हर कोई जानता है कि बांग्लादेश को किसने आजादी दिलाई थी। इसका अर्थ यह था कि नरेंद्र मोदी ने इंदिरा गाँधी के योगदान को स्वीकार नहीं किया था। लेकिन, उन्होंने इसका जिक्र किया था। सॉरी!”


थरूर ने अपने ट्वीट में एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए पीएम नरेंद्र मोदी को कोट किया, जिसमें बांग्लादेश की स्वतंत्रता में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की भूमिका की उन्होंने सराहना की थी। इससे पहले शुक्रवार को थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण पर टिप्पणी करते हुए ट्वीट किया था, “अंतरराष्ट्रीय ज्ञान: हमारे प्रधानमंत्री बांग्लादेश को भारतीय ‘फर्जी खबर’ का स्वाद चखा रहे हैं। हर कोई जानता है कि बांग्लादेश को किसने आजाद कराया।”


थरूर ने गलत सूचनाएँ फैलाने और प्रोपेगेंडा के सरताज NDTV का हवाला देते हुए आरोप लगाया था कि पीएम मोदी ने बांग्लादेश के लिए स्वतंत्रता संग्राम में पूर्व पीएम इंदिरा गाँधी के योगदान को स्वीकार नहीं किया था।

प्रधानमंत्री ने भाषण में क्या कहा था

ढाका के नेशनल परेड ग्राउंड में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश की मुक्ति युद्ध के नायकों को नमन करते हुए अपनी बात रखी थी। बांग्लादेश की आजादी को लेकर भारतीयों की भूमिका का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा था, “मेरी उम्र 20-22 साल रही होगी जब मैंने और मेरे कई साथियों ने बांग्लादेश के लोगों की आजादी के लिए सत्याग्रह किया था। बांग्लादेश की आजादी के लिए संघर्ष में शामिल होना, मेरे जीवन के भी पहले आंदोलनों में से एक था।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि आज बंगबंधु के योगदान को याद करने का दिन है। बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के लिए भारत के कोने-कोने से समाज के हर वर्ग ने समर्थन दिया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के प्रयास और उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को पूरी दुनिया जानती है। उसी दौर में छह दिसंबर 1971 को अटल बिहारी वाजपेयी जी ने कहा था कि हम इतिहास को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं।

25 साल की दिव्यांग दलित को गन्ने के खेत में घसीट कर ले गया फरमान, बलात्कार के बाद धमकाया

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक दिव्यांग दलित महिला के साथ बलात्कार का मामला सामने आया है। जिले के रामराज थाना क्षेत्र में घटना शुक्रवार (मार्च 26, 2021) को घटी। शनिवार (मार्च 27, 2021) को पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार किया।

पुलिस ने बताया कि फरमान नाम के आरोपित ने 25 साल की दिव्यांग दलित महिला को गन्ने के खेत घसीट कर ले गया और दुष्कर्म किया। बाद में उसे डराया-धमकाया कि अगर उसने इस बारे में किसी को बताया तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, सर्कल ऑफिसर शकील अहमद ने बताया कि पीड़िता की शिकायत पर आरोपित के ख़िलाफ़ आईपीसी की धाराओं और एसटी कानून के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है। आरोपित गिरफ्तार कर लिया गया है।

बता दें कि अभी कुछ दिन पहले यूपी के ही सहारनपुर के देहात कोतवाली क्षेत्र की एक महिला के साथ रेप करने और अश्लील वीडियो बनाकर वसूली करने का मामला उजागर हुआ था। महिला ने आरोप लगाया था कि रेप के बाद उसका जबरन धर्म परिवर्तन करवाया गया और बाद में उसकी वीडियो इंटरनेट पर अपलोड कर दी गई।

पीड़िता ने बताया था कि वह पैन कार्ड बनवाने जनसेवा केंद्र पर गई थी। वहीं उसे अहमद मिला। बहुत कहने के बावजूद कई दिनों तक अहमद ने उसका पैन कार्ड नहीं बनवाया। फिर एक दिन सहारनपुर के किसी होटल ले गया। वहाँ उसने उसे नशीला पदार्थ देकर दुष्कर्म किया और उसकी वीडियो भी बनाई। बाद में वसूली के लिए ब्लैकमेल करने लगा। जब महिला कहीं से 50 हजार रुपए का इंतजाम करके उसे रुपए देने गई तो उसे बंधक बना लिया गया और मस्जिद में ले जाकर धर्मपरिवर्तन भी करवाया।

बरसों से जर्जर था बांग्लादेश का जशोरेश्वरी काली मंदिर, जानिए PM मोदी के दर्शन से पहले कैसे लौटा वैभव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय यात्रा ने बांग्लादेश के कई मंदिरों को चर्चा में ला दिया है। इन्हीं में से एक है, जशोरेश्वरी काली मंदिर। आज (27 मार्च 2021) को पीएम मोदी सतखिरा स्थित जशोरेश्वरी काली मंदिर पहुँचे। यहाँ काली माता के दर्शन कर विधिवत तरीके से पूजा-अर्चना की। चाँदी का बना मुकुट और चरणों में साड़ी अर्पित किए।

बांग्लादेश के सतखिरा के इश्वरीपुर ग्राम में स्थित मशहूर जशोरेश्वरी काली मंदिर 51 शक्तिपीठ में से एक सुगंधा शक्तिपीठ है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, यहाँ देवी सती की हथेलियाँ और तालु गिरे थे। इसके बाद वह माँ जशोरेश्वरी के रूप में यहीं रहने लगीं और महादेव का भैरव रूप स्वयं चाँद बनकर उनकी रक्षा करने लगा।

12वीं सदी में इस पवित्र स्थान की महत्ता समझते हुए अनाड़ी (Anari) नाम के एक ब्राह्मण ने यहाँ विशाल मंदिर का निर्माण कराया। ब्राह्मण ने माता के मंदिर में 100 दरवाजे बनवाए। बाद में इसका जीर्णोद्धार 13वीं सदी में लक्ष्मण सेन द्वारा करवाया गया और 16वीं शताब्दी में इसे दोबारा राजा प्रतापादित्य ने बनवाया।

जशोरेश्वरी माँ का प्रतिमा (साभार: ट्विटर)

जशोरेश्वरी पीठ को लेकर मान्यता है कि यहाँ माता अभय मुद्रा में कमल जैसे हाथों के साथ विराजमान हैं, जो अपनी शक्तियों से डर और अंधकार को दूर करती हैं। इस मंदिर का इतिहास बताता है कि आखिरी बार इसे लगभग 400 साल पहले बनवाया गया था।

बांग्लादेश में आज भी जशोरेश्वरी माँ को लेकर अटूट विश्वास है। कई श्रद्धालु हर साल यहाँ माथा टेकने, माँ के दर्शन करने, मन्नत माँगने, आत्मा शुद्धि के लिए आते हैं। नवरात्रि में यहाँ पूजा-अर्चना भी होती है। बावजूद इसके यह मंदिर लंबे समय तक जर्जर हालत में था।  

2 साल पुरानी वीडियोज में दिखाया गया मंदिर का प्रवेश द्वार

बांग्लादेश सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से पहले ही जशोरेश्वरी मंदिर का जीर्णोद्धार किया है। उससे पहले तक ये मंदिर निर्माण के नाम पर लंबे समय से बंद था और धीरे-धीरे पृथक स्थान बन गया था। यूट्यूब पर मौजूद मंदिर की पुरानी वीडियोज में स्थिति देख सकते हैं। 

पुरानी वीडियोज में मंदिर को देखकर साफ पता चलता है कि वहाँ सालों से जीर्णोंधार पर कार्य नहीं हुआ। दीवारें बदरंग और आसपास लकड़ियाँ लगी हुई हैं। कई जगह तो केवल पत्थर ही पत्थर हैं और उनके बीच से घास निकलती साफ दिख रही है।

यूट्यूब पर अपलोड वीडियो से लिया गया स्क्रीनशॉट

अब पीएम मोदी के दौरे से पहले बांग्लादेश सरकार ने इस मंदिर का कायाकल्प कर दिया है।

बता दें कि बांग्लादेश की स्वतंत्रता के समय साल 1971 के युद्ध के बाद मंदिर का बड़ा हिस्सा नष्ट हो गया था। इसलिए अब जो इस पीठ के दर्शन को जाता है उसे सबसे प्रमुख संरचना स्तंभ ही देखने को मिलती है। पहले मंदिर की संरचना का एक बड़ा हिस्सा आयताकार था, जो नाथ मंदिर का निर्माण करता है और जो मुख्य मंदिर के बिलकुल समीप है। इस बिंदु से माँ के दर्शन आसानी से होते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा में माँ जशोरेश्वरी के मंदिर जाने को बंगाल चुनाव से जोड़कर भी देखा रहा है। दरअसल, इस मंदिर और ओरकांडी स्थित मंदिर में मतुआ समुदाय के लोगों की अटूट आस्था है और दिलचस्प बात ये है कि इसी समुदाय के दो करोड़ लोग बंगाल में रहते हैं। 

बंगाल में 70 विधानसभा सीटों पर मतुआ समुदाय का असर है। ऐसे में आज ओरकांडी मंदिर में प्रधानमंत्री ने बांग्लादेश में रह रहे इस समुदाय के लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ओरकांडी में भारत सरकार लड़कियों के मिडिल स्कूल को अपग्रेड करेगी और भारत सरकार द्वारा यहाँ एक प्राइमरी स्कूल भी स्थापित किया जाएगा। ये भारत के करोड़ों लोगों की तरफ से हरिचंद ठाकुर जी को श्रद्धांजलि है।

पीएम ने मतुआ समुदाय के बीच  पश्चिम बंगाल में बनगाँव से सांसद शांतनु ठाकुर की तारीफ की। उन्होंने कहा, “मेरा सौभाग्य है कि हरिचंद देव की विरासत को सँभाल रहे शांतनु ठाकुर संसद में मेरे सहयेगी हैं। मुझसे छोटे हैं पर उनसे भी हमें बहुत कुछ सीखने का मौका मिलता है वो बहुत कर्मठ हैं।” वह बोले कि आज वैसा ही महसूस कर रहा हूँ, जो भारत में रहने वाले ‘मतुआ समुदाय’ के मेरे हजारों-लाखों भाई-बहन ओरकांडी आकर महसूस करते हैं।

रेड कॉरिडोर से ग्राउंड रिपोर्ट: पूर्व माओवादियों के भरोसे TMC, झारग्राम और जंगलमहल में खिलेगा कमल?

कोलकाता से करीब 160 किलोमीटर का सफर तय कर हम झारग्राम/झाड़ग्राम शहर पहुँचे। लोधासुली जंगल से गुजरते वक्त पेड़ों के ताजा पत्ते न केवल वसंत की गवाही दे रहे थे, बल्कि यहाँ की 4 सीटों पर बदलती सियासी हवा का भी इशारा कर रहे थे। इन 4 सीटों सहित पश्चिम बंगाल की 30 विधानसभा सीटों पर पहले चरण में 27 मार्च को वोट पड़े।

झारग्राम (Jhargram) छोटा नागपुर के पठार में बसा बिहार और झारखंड की सीमा से सटा भौगौलिक दृष्टि से सूखा और शुष्क क्षेत्र है। इस इलाके में वर्षों तक माओवादियों का कब्जा रहा। यह रेड कॉरिडोर आंध्र प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ तक फैला था। यहाँ पहुँचने के बाद ठेले चाय की चुस्कियाँ ले हम अपनी मंजिल की ओर बढ़े।

स्थानीय लोगों से बातचीत में हमें ‘इलाका बंदी’ का पता चला। जिसका मतलब होता है कि अपनी अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता के हिसाब से गाँव के लोगों के इलाके बँटे हुए हैं। लोगों में आपसी फूट इतनी अधिक गहरी है कि स्थानीय पत्रकार भी अपने हितों के हिसाब से जर्नलिज्म कर रहे हैं। अगर कभी कोई यहाँ का दौरा भी करता है तो उसे यहाँ के लोग नुकसान पहुँचाने की कोशिश करते हैं।

झारग्राम पहुँचने पर हमने एक होटल व्यवसायी से मुलाकात की, जो सभी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं की मेजबानी करता है। पहचान सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर, क्योंकि इससे उन्हें और उनके परिवार को खतरा हो सकता था, वे बातचीत को राजी हुए। होटल संचालक ने बताया कि क्षेत्र के लोगों के बीच वर्तमान राजनीतिक पार्टी के खिलाफ असंतोष भरा हुआ है। वह एक भाजपा कार्यकर्ता था, जो पार्टी के लिए चुपचाप काम कर रहा था। उसने बताया कि भाजपा ने उसे दरिकनार कर दिया था। उसे अपनी जिंदगी प्यारी है, इसलिए वह चुपचाप काम कर रहा है। वह टीएमसी से बीजेपी में आने वाले कार्यकर्ताओं को जमीनी स्तर पर एकत्रित कर रहे हैं, ताकि टीएमसी को हराकर बंगाल में कमल खिलाया जा सके।

हालाँकि, अच्छी सड़कों से लोग संतुष्ट हैं, जिनकी 34 साल के वामपंथी शासन के दौरान कल्पना भी नहीं की जा सकती। लेकिन ममता के शासनकाल में रोजगार की कमी के कारण लोगों में काफी असंतोष है। इसी कारण ममता बनर्जी ने झारग्राम और जंगलमहल में सबसे ज्यादा सबसे ज्यादा लामबंदी की है। यहाँ लोगों से जब हमने उनका नाम और वो किसे वोट देंगे का सवाल पूछा तो अधिकतर लोगों ने बताने से इनकार कर दिया। सब के अलग-अलग मत थे। लेकिन, एक चीज सभी को एक सूत्र में पिरो रही थी और वो ये कि सभी टीएमसी के खिलाफ एकजुट थे। स्थानीय लोगों का एक सुर में कहना था कि तृणमूल ने उनके साथ दोहरा खेल खेला है।

चुनाव में इस बार टीएमसी ने मेदिनीपुर से हाल ही में पार्टी में शामिल हुईं जून मलैया को उतारा है। वह बांग्ला फिल्मों का लोकप्रिय चेहरा हैं। कभी यह सीट सीपीआई का गढ़ मानी जाती थी, सीपीएम ने यहाँ से इस बार पूर्व विधायक कामाख्या घोष के बेटे तरुण कुमार घोष पर दांव खेला है। भाजपा ने पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष समित कुमार दास को उतारा है। वहीं, झारग्राम सीट से संथाली फिल्मों की अभिनेत्री और पूर्व विधायक चूनीबाला हांसदा की बेटी बिरबा तृणमूल कॉन्ग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। सीपीएम नेता मधुजा सेनोरॉय का मुकाबला बीजेपी के सुखमय सतपथी से है।

2000 के दशक के अंत में, जब झारग्राम और जंगलमहल माओवादी हिंसा का पर्याय बन चुका था, उस दौरान टीएमसी ने उन्हें आत्मसमर्पण कर अपनी पार्टी में शामिल होने या फिर गोली खाने अथवा झूठे केसों में फँसाने की धमकी दी थी। बातचीत के दौरान एक नाम विशेष तौर पर सामने आया जो इस क्षेत्र में शांति प्रकिया को बहाल करने और माओवादियों को मौका देने में काम कर रही थी। वह नाम भारती घोष का है। भारती घोष कभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चहेती पुलिस अफसर थीं। उन्होंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान ममता को माँ कहा था।

आईपीएस अधिकारी भारती घोष पहले पश्चिम बंगाल सीआईडी में तैनात थीं। वह हार्वर्ड विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से स्नातक हैं। घोष ने 2019 में अपनी सर्विस से वीआरएस लेकर बीजेपी ज्वाइन कर ली थी। पार्टी ने 2019 के चुनाव में उन्हें घाटल निर्वाचन क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतारा था।

2021 विधानसभा चुनाव में घोष कोलकाता से 103 किलोमीटर दूर पश्चिम मेदिनीपुर जिले की डेबरा विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी की उम्मीदवार हैं। यहाँ उनके खिलाफ इसी साल फरवरी में टीएमसी में शामिल पूर्व आईपीएस अधिकारी हुमायूँ कबीर चुनावी मैदान में हैं। माओवादी नेता किशनजी के मारे जाने के बाद निचले स्तर के माओवादियों के साथ आंतरिक साँठगाँठ कर तृणमूल कॉन्ग्रेस ने बंगाल में कथित शांति लाने में कामयाब रही थी। इसी का फायदा उठाते हुए ममता ने माओवादी कमांडर रहे छत्रधर महतो को 2020 में TMC में शामिल कराया था। महतो, लालगढ़ में 2008-2011 के माओवादी समर्थित आदिवासी आंदोलन का चेहरा था। लगभग 11 साल तक जेल की सलाखों के पीछे बिताने के बाद कुछ महीने पहले ही वह रिहा हुआ है।

महतो के पार्टी में शामिल होने के बाद पश्चिम बंगाल चुनाव में टीएमसी बड़ी आबादी का ध्यान अपनी ओर खींचने में सफल रही है। ग्रामीण भी इस क्षेत्र में माओवादियों की उपस्थिति को स्वीकार करते हैं। लेकिन उनका मानना है कि यहाँ पर कोई भी नेतृत्वकर्ता नहीं है। बाँकुरा के एक होटल में विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ताओं से बातचीत हुई। इस दौरान अधिकांश का कहना था कि क्षेत्र में सड़कों और प्रकाश की व्यवस्था में सुधार हुआ है। लेकिन, एक बुजुर्ग ने स्थानीय प्राइमरी हेल्थ केयर सेंटर को लेकर अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि यहाँ पर पीएचसी तीन नर्सों और एक डॉक्टर के साथ शुरू हुई थी, लेकिन अब यहाँ केवल एक नर्स बस बची है। आपातस्थिति में लोगों को बलकुरा ​​मेडिकल कॉलेज या कोलकाता जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

चाय पीते हुए एक युवक ने बताया कि तृणमूल ने 2018 में पंचायत चुनावों के दौरान किसी भी विपक्षी दल को नामांकन दाखिल करने से रोकने के लिए ‘अनावश्यक हिंसा’ की थी। इसी कारण यहाँ टीएमसी निर्विरोध जीती थी। युवक ने कहा, “यहाँ के लोग अपनी गाढ़ी कमाई को लेकर डरे हुए हैं, जिसे उन्होंने शारदा, नारद और रोज वैली चिट फंड घोटालों में खो दिया था। लेकिन नौकरी के अवसरों की कमी ने हम में से अधिकांश को अपना मूल स्थान छोड़ने और निजी क्षेत्र में अच्छी नौकरी पाने के लिए कोलकाता जाने के लिए मजबूर कर दिया है। उद्योगों की कमी के कारण यहाँ किसे नौकरी मिलेगी?”

बीजेपी समर्थक जतिन लाहिड़ी इस बार ‘पसंदीदा मोदी सरकार’ की जीत को लेकर शर्त लगाने को तैयार हैं। उनका आकलन 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान 42 लोकसभा सीटों में से भाजपा को मिली 18 सीटों पर आधारित था। हालाँकि, जतिन के ही गाँव के एक व्यक्ति ने मोदी सरकार की नीतियों और किसान आंदोलन पर उसके रुख की आलोचना भी की।

EwokeTV के साथ राज्य के पश्चिमी जिलों की यात्रा से यह तो अंदाजा लग ही जाता है कि नतीजों को लेकर कोई भी अनुमान लगाना मुश्किल है। मौसमी चुनावी पंडित भी इससे बच रहे। लिहाजा स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है कि अंतिम क्षणों में बंगाल का चुनाव किस ओर झुकेगा। जहाँ ममता बनर्जी के लिए यह चुनाव ‘करो या मरो’ जैसा है, वहीं 2019 के चुनाव में जीत का स्वाद चख चुकी बीजेपी ‘सोनार बांग्ला’ के सुनहरे अवसर को हाथ से जाने नहीं देना चाहेगी।

(यह ग्राउंड रिपोर्ट ऑपइंडिया आपके लिए Ewoke.tv के सहयोग से लेकर आया है)

कश्मीर में हिंसा बंद न हो… गिलानी के दामाद को महबूबा मुफ्ती के करीबी पारा ने दिए थे ₹5 करोड़

बुरहान वानी को मार गिराए जाने के बाद कश्मीर घाटी में हिंसा जारी रखने के लिए हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेता सैयद अली शाह गिलानी के दामाद अल्ताफ अहमद शाह उर्फ अल्ताफ फंटूश को पाँच करोड़ रुपए दिए गए थे। पैसे जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के करीबी और पीडीपी नेता वहीद उर रहमान पारा ने दिए थे। मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने इसका खुलासा विशेष अदालत में हाल ही में दायर की गई चार्जशीट में किया है।

आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का पोस्टर ब्वाय बुरहान वानी 2016 में मारा गया था। पारा को जनवरी में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैय्यबा जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के साथ संपर्क रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों और आतंकवादी समूहों को धन मुहैया कराने के रैकेट में शामिल होने के आरोप में जुलाई 2017 में एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद शाह पहले ही न्यायिक हिरासत में है।

चार्जशीट में कहा गया है कि पारा जुलाई 2016 में मुठभेड़ में वानी के मारे जाने के बाद अल्ताफ अहमद शाह के संपर्क में था और उसे यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि कश्मीर घाटी पूरी तरह अशांत रहनी चाहिए। पथराव और हिंसात्मक घटनाएँ व्यापक पैमाने पर होनी चाहिए। 

अपने वकील के माध्यम से पारा इन आरोपों से इनकार कर रहा है और दावा कर रहा है कि उसे राजनीतिक कारणों से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद अदालत ने पूरक चार्जशीट में नाम न होने पर उसे जमानत दे दी थी। इसके बाद कश्मीर में काउंटर इंटेलिजेंस विंग द्वारा उसे फिर गिरफ्तार किया गया था और तब से वह जेल में है। श्रीनगर में एनआईए अदालत ने उनकी जमानत खारिज कर दी थी। पीडीपी ने पहले दावा किया था कि केंद्र सरकार पारा पर एक रणनीति के तहत दबाव बना रही थी कि वह पाला बदल कर भाजपा में शामिल हो जाए।

गौरतलब है कि इससे पहले एनआईए की चार्जशीट से यह बात सामने आई थी कि पारा कश्मीर में पत्थरबाजों का गैंग चलाता था। आतंकियों के लिए हथियारों का भी इंतजाम करता था। वहीद उर रहमान सहित 3 लोगों के खिलाफ दायर एक चार्जशीट में बताया गया है कि पीडीपी नेता ‘पत्थरबाजी’ का रैकेट चलाता था और दक्षिण कश्मीर में हथियार की तस्करी का काम भी करता था।

चार्जशीट के अनुसार, पारा ने दक्षिण कश्मीर में पत्थरबाजी का रैकेट चलाया, जिसे उसने साल 2010-11 में संगठित किया था। उसने पॉलिटिकल माइलेज पाने के लिए पुलवामा में ऐसे 20-25 लड़कों को इकट्ठा किया था जो पत्थरबाजी में शामिल थे। इसके अलावा चार्जशीट में बताया गया है पारा ने पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैय्यबा के आतंकी कमांडर अबू दुजाना को 10 लाख रुपए की फंडिंग उपलब्ध कराई थी। वह नियमित रूप से आतंकियों और अलगाववादियों कि फंडिंग कर रहा था, ताकि घाटी में स्थिति खराब बनी रहे। साथ ही चार्जशीट में PDP द्वारा आतंकियों और अलगगववादियों के तुष्टीकरण की नीति के बारे में भी खुलासा किया गया है।

बता दें कि ये पूरा मामला हिजबुल कमांडर नवीद बाबू के साथ पकड़े गए डीएसपी दविंदर सिंह व अन्य की गिरफ्तारी से जुड़ा है। जाँच में येपाया गया है कि इरफान शफी मीर, दविंदर सिंह और सैयद नवीद मुश्ताक के साथ पारा इस अपराधिक साजिश में शामिल था।