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‘6 दिसंबर को काला दिवस मनाएगी शिवसेना’: BJP को हराने के लिए ओवैसी की AIMIM से गठबंधन, फिर भी अमरावती में नहीं मिली जीत

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की एक खासियत ये भी है कि इसे हराने के लिए ऐसे दल साथ आ जाते हैं, जिनकी विचारधारा दो अलग-अलग ध्रुवों पर खड़ी होती है और जो एक-दूसरे के कट्टर प्रतिद्वंद्वी होते हैं। उत्तर प्रदेश में मायावती और अखिलेश यादव और बिहार में लालू यादव और नीतीश कुमार इसके उदाहरण हैं। अब महाराष्ट्र के अमरावती में शिवसेना ने भाजपा को हराने के लिए असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के साथ गठबंधन किया, फिर भी हार गई।

कॉन्ग्रेस केरल में CPI(M) को उखाड़ फेंकने की लड़ाई लड़ती हैं और पश्चिम बंगाल में उसके साथ गठबंधन बनाती है। तेजस्वी यादव बिहार में कॉन्ग्रेस के साथ चुनाव लड़ते हैं और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की TMC को समर्थन देते हैं। इसी तरह, अमरावती म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की स्टैंडिंग कमिटी अध्यक्ष पद के लिए शिवसेना ने AIMIM को अपने साथ लिया, लेकिन चेयरमैन का पद भाजपा की झोली में आ गया

भाजपा के शिरीष रासने ने स्थायी समिति के सभापति पद पर जीत दर्ज की। विधायक रवि राणा के युवा स्वाभिमान पक्ष के एक सदस्य ने भाजपा के रासने का समर्थन किया। इसने रासने की जीत का मार्ग प्रशस्त किया। कॉन्ग्रेस, शिवसेना, AIMIM और बसपा ने मिलकर भाजपा को सत्ता से बाहर रखने की कोशिश की थी। लेकिन, बसपा के नेता चेतन पवार चुनाव में अनुपस्थित थे। इससे विरोधियों की संख्या कम हो गई।

AIMIM ने अफजल हुसैन मुबारक हुसैन को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया था। चुनाव में, शिरीष रासने को 9 वोट मिले, जबकि AIMIM के अफज़ल हुसैन मुबारक हुसैन को 6 वोट। लेकिन, शिवसेना ने जिस तरह हिंदुत्व की विचारधारा त्याग कर कट्टरपंथी कही जाने वाली पार्टी के साथ गठबंधन किया, उससे उसकी आलोचना हो रही है। पत्रकार अमन चोपड़ा ने पूछा, “अब शिवसेना 6 दिसंबर को विवादित ढाँचा विध्वंस पर शौर्य दिवस मनाएगी या AIMIM के साथ काला दिवस?”

महाराष्ट्र भाजपा के ‘उत्तर भारतीय मोर्चा’ के अध्यक्ष संजय पांडेय ने कहा, “उद्धव ठाकरे ने सत्ता की लालच में हिन्दूद्वेषी AIMIM के साथ अमरावती मे समझौता किया। इसी पार्टी के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने कहा था के 15 मिनट के लिए देश से पुलिस हटा दो फिर हिन्दुओं का जो हाल होगा वो पूरा देश देखेगा। हिन्दू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे के विचारों को तिलांजलि देकर शिवसेना अब सत्तामोही शवसेना बन गई है।”

ये राजस्थान पुलिस है: रेप पीड़िता से रिश्वत में अस्मत माँगता है ACP, थाना परिसर में ही बलात्कार करता है सब इंस्पेक्टर

राजस्थान में खाकी के दामन पर एक और दाग लगा है। ACP कैलाश बोहरा को एक रेप पीड़िता से रिश्वत माँगने और उसका यौन उत्पीड़न करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले एक सब इंस्पेक्टर द्वारा शिकायत दर्ज कराने आई महिला का तीन दिन तक थाना परिसर में ​ही रेप करने का मामला सामने आया था।

ताजा मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने RPF अफसर कैलाश बोहरा को रविवार (मार्च 14, 2021) को उनके ऑफिस में पीड़िता के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ा। खबरों के अनुसार, पीड़िता ने जवाहर सर्कल थाने में किसी युवक के खिलाफ दुष्कर्म और धोखाधड़ी समेत 3 मामले दर्ज करवा रखे हैं। इसी केस की जाँच का हवाला देकर अधिकारी बार-बार युवती को अपने ऑफिस बुलाता और कई बार ड्यूटी पूरी होने के बाद भी मिलने के लिए दबाव बनाता। 

युवती लंबे समय से अधिकारी के बर्ताव से परेशान थी। उसने एसीबी के डीजी बीएल सोनी से इसकी शिकायत की। डीजी ने बताया कि आरोपित अधिकारी महिला अत्याचार अनुसंधान यूनिट में बतौर प्रभारी सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) तैनात है। 

युवती ने 6 मार्च को कैलाश बोहरा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में युवती ने कैलाश पर रिश्वत माँगने और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इसी के बाद एसीबी ने अधिकारी के ख़िलाफ़ उपयुक्त एक्शन लिया।

जानकारी के मुताबिक, अधिकारी को रंगे हाथ रविवार को पकड़ा गया। उसने छुट्टी वाले दिन युवती को कार्यालय बुलाया था। जब युवती ऑफिस में पहुँची तो उसने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। इसके बाद एसीबी ने कैलाश बोहरा को महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ा और गिरफ्तार कर लिया।

गौरतलब है कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी इस घटना के सामने आने के बाद राज्य की पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जयपुर जिले में पुलिस अफसर ही पीड़ित महिला के साथ दुष्कर्म का प्रयास करता है। बारां जिले में दंपत्ति को रोककर महिला के साथ गैंगरेप होता है। ये राजस्थान की कानून-व्यवस्था का एक छोटा सा दृश्य है, लेकिन अफसोस कि मुख्यमंत्री जी को यह दृश्य दिखाई नहीं देते!

पिछले दिनों अलवर के खड़ेली थाना में अपने पति के खिलाफ FIR लिखवाने गई महिला से बलात्कार का मामला सामने आया था। 26 वर्षीय पीड़िता का पति के साथ विवाद चल रहा है। 2 मार्च 2021 को वह ति के खिलाफ FIR दर्ज करवाने खेड़ली थाना पहुँची थी। आरोप है कि खेड़ली थाने में तैनात सेकेंड ऑफिसर भरत सिंह ने पीड़िता को पति से विवाद के निपटारे का झाँसा दिया। इसके बाद वो थाना परिसर में ही बने आवास में पीड़िता को लेकर गया और वहाँ उसके साथ रेप किया। महिला का आरोप है कि सब-इंस्पेक्टर इतने पर ही नहीं रुके। उसने अगले दो दिन भी पीड़िता को बुलाया और उसके साथ रेप किया।

गौरतलब है कि 2019 में राजस्थान के चुरु जिले में एक दलित युवक की पुलिस हिरासत में हुई संदिग्ध मौत के मामले में भी पुलिस पर रेप के आरोप लगे थे। मृतक की 35 वर्षीय भाभी और परिजनों ने आधा दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों पर सामूहिक बलात्कार का आरोप लगाया था।

पीड़िता के पति ने कहा था, “30 जून को चोरी के एक केस में पुलिस मेरे 22 वर्षीय भाई को पकड़ कर ले गई। 3 जुलाई को पुलिस उसे वापस घर ले आई मगर उसी दिन फिर से उठाकर ले गई। पुलिस मेरी पत्नी को भी साथ ले गई। बाद में 6-7 जुलाई की रात पुलिस ने मेरे भाई पर खूब अत्याचार किए और उसकी हत्या कर दी। मेरी पत्नी जो इस अत्याचार की गवाह थी, उसके साथ पुलिस ने गैंगरेप किया। उसके नाखून उखाड़ दिए। उसकी आँखों और उंगलियों को चोट पहुँचाई।”

लड़कियों के अंडरगार्मेंट्स चोरी में नाम मो. रोमिन और अस्साक के… ‘तंत्र-मंत्र’ शब्द के साथ मीडिया रिपोर्ट में निशाना हिंदुओं पर

मीडिया के प्रपंच को समझने के लिए यह खबर आदर्श है। मीडिया रिपोर्टिंग में अगर कोई मौलवी अपराध करता हुआ पकड़ा जाए तो अंग्रेजी में उसे ‘Godman’ लिखा जाता है और प्रतीकात्मक चित्र किसी भगवाधारी बाबा का होता है। जब कोई फ़क़ीर अपराधी निकलता है तो उसे तांत्रिक कहा जाता है। जब कोई अपराधी किसी मस्जिद में छिप जाता है तो उसे धर्मस्थान लिखा जाता है।

ऊपर बताए गए प्रपंचों को संपादकीय आदेश मान कर मेरठ में लड़कियों का अंडरगार्मेंट्स चुराने वालों की खबर भी उसी अंदाज में लिखी गई। रिपोर्ट में ‘तंत्र-मंत्र’ शब्द का प्रयोग किया गया।

मीडिया के गिरोह विशेष की पोल खोलने से पहले बता दें कि मामला क्या है। यूपी के मेरठ स्थित कबाड़ी बाजार क्षेत्र में कुछ युवक लड़कियों के अंडरगार्मेंट्स चुराते हुए CCTV फुटेज में कैद हो गए। गिरफ्तार आरोपित का नाम मोहम्मद रोमिन है। फरार आरोपित का नाम मोहम्मद अस्साक है।

CCTV फुटेज के हवाले से बताया गया कि स्कूटी से आए आरोपितों ने बाहर सूख रहे युवती के अंडरगार्मेंट्स चुरा लिए और उनमें से एक मस्जिद में चला गया।

मस्जिद में किस तरह का तंत्र-मंत्र होता है? शायद किसी को नहीं पता… लेकिन मीडिया वालों को है। तभी ‘आज तक’ ने लिखा, “इलाके के लोगों ने आशंका जताई कि यह तंत्र मंत्र का हिस्सा हो सकता है।” ‘हिंदुस्तान’ ने लिखा, “आशंका जताई कि युवती के वस्त्रों का इस्तेमाल वशीकरण या तंत्र मंत्र क्रिया में हो सकता है।” ‘अमर उजाला’ ने लिखा, “व्यापारियों ने अंदेशा जताया है कि दूसरे समुदाय के युवक तंत्र मंत्र क्रिया करने के लिए परिधानों की चोरी करते हैं।” मतलब कई मीडिया संस्थानों ने इस नैरेटिव को आगे बढ़ाया।

‘आज तक’, ‘लाइव हिंदुस्तान’ और ‘अमर उजाला’ ने किया ‘तंत्र-मंत्र’ शब्द का प्रयोग

वहीं वनइंडिया ने लिखा, “इस घटना को लेकर लोगों का कहना है कि यह करतूत तंत्र-मंत्र की तरफ इशारा कर रही है।” अब सवाल उठता है कि क्या मीडिया नमाज पढ़ने को वेद-पाठ कह सकता है? अगर नहीं, तो फिर भला फकीरों द्वारा किए जाने वाले जादू-टोने या मुल्ला-मौलवियों की प्रक्रियाएँ हिन्दू धर्म की कैसे हो गईं? क्या यह सब जानबूझ कर नहीं किया जाता, ताकि सब यही समझें कि ये हिन्दुओं की करतूत है।

मेरठ में जिस व्यापारी के घर ये चोरी हुई, वहाँ पहले भी इस तरह की घटनाएँ हो चुकी हैं। उनकी एक नाबालिग बेटी के अंडरगार्मेंट्स भी गायब हो गए थे। CCTV फुटेज खँगालने पर इन दोनों का पता चला, तब पुलिस में मामला दर्ज कराया गया। ‘तंत्र-मंत्र’ जैसे शब्दों का मूल संस्कृत में है और इनका इस्तेमाल अपराध की ख़बरों में कर-कर के इन्हें नकारात्मक बना दिया गया है। ऐसे मामलों में मीडिया वही शब्द इस्तेमाल करे, जो इस्लाम में है।

खाद-पानी साझा, अब फसल काटने को मारामारी: ‘किसान आंदोलन’ का तंबू न उखाड़ दे लेफ्ट के तेवर

12 मार्च 2021: कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान का जोधपुर। जोधपुर के भोपालगढ़ उपखंड के खारिया खंगार में एक स्वयंभू किसान नेता ट्रैक्टर चलाते दिखे। ट्रैक्टर पर वरिष्ठ कॉन्ग्रेसी और पूर्व सांसद बद्रीराम जाखड़ का बैनर लगा था।

13 मार्च 2021: चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल का नंदीग्राम। वहीं स्वयंभू किसान नेता अपने साथियों के साथ ‘महापंचायत’ कर बीजेपी को चेता रहा था।

यह स्वयंभू नेता कोई और नहीं, बल्कि भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राकेश टिकैत हैं। कथित किसान आंदोलन के अगुआ में से एक राकेश टिकैत की चुनावी सक्रियता से भले बीजेपी की संभावनाओं को फर्क न पड़े, लेकिन किसान आंदोलन की फसल काटने को लेकर विवाद शुरू हो चुका है। कारण वह बंगाल में उस तृणमूल कॉन्ग्रेस के लिए बिगुल फूँक रहे हैं, जिससे कॉन्ग्रेस और वामपंथियों का गठबंधन मुकाबिल है। यह सब तब हो रहा है कि जब किसान प्रदर्शनकारी दिल्ली की सीमाओं पर पक्के आशियाने बना रहे हैं।

अब जरा केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के विरोध के नाम पर शुरू किए हुए बखेड़े की पृष्ठभूमि में चलते हैं। राकेश टिकैत और योगेंद्र यादव के अलावा दो नाम इसमें काफी प्रमुख रहे हैं। ये हैं – हन्नान मोल्लाह और दर्शन पाल। दर्शन पाल को आपने कई प्रेस कॉन्फ्रेंस में देखा होगा, वहीं मोल्लाह आंदोलन में लोगों को मोबिलाइज करते और नेटवर्क बनाते पाए गए थे। दोनों के बीच समानता ये है कि ये वामपंथी दलों से ताल्लुक रखते हैं। एक कट्टरवादी तो एक चुनावी से।

हन्नान मोल्लाह ‘ऑल इंडिया किसान सभा’ के महासचिव हैं। साथ ही वो उस CPI (M) की पोलित ब्यूरो के सदस्य हैं, जिसका मुकाबला पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस के साथ हो रहा है। वे हावड़ा के उलूबेरिया से 8 बार सांसद रहे हैं, वो भी लगातार। दर्शन पाल की बात करें तो वो PDFI नामक संस्था के संस्थापकों में से एक रहे हैं, जो हिंसक नक्सली आंदोलन से निकल कर सामने आया। नक्सलियों की हिंसा के अतीत के बारे में विवरण देने की ज़रूरत नहीं है।

आप देख सकते हैं कि किस तरह वामपंथियों ने न सिर्फ इन आंदोलन को सींचा, बल्कि इसमें खाद भी डालते रहे। 5 राज्यों में चुनाव आने थे, ऐसे में इस तरह के नाटक काम देते हैं। 2019 लोकसभा चुनाव से पहले राफेल का रट्टा लगाया गया था। दिल्ली चुनाव से पहले शाहीन बाग़ हुआ। उसी तरह 2015 में बिहार चुनावों से पहले अवॉर्ड वापसी हुई थी।

सभी जानते हैं कि गणतंत्र दिवस के दिन जो हिंसा हुई, उसके बाद इन किसान नेताओं की आंदोलन की रही-सही विश्वसनीयता भी खत्म हो गई थी। खालिस्तानियों ने इसे हाइजैक कर लिया और किसी तरह राकेश टिकैत ने रो-धो कर किसी तरह बॉर्डर से डेरा उखड़ने से बचाया। फिर ऐलान किया कि अब वो सभी चुनावी राज्यों में भाजपा के खिलाफ प्रचार करेंगे। अब यही विवाद की वजह बन गया है।

इसी क्रम में किसान नेता नंदीग्राम पहुँचे, जहाँ से खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मैदान में हैं और उनका मुकाबला दिग्गज भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी से है। लेकिन, राकेश टिकैत और योगेंद्र यादव जैसों की इस ‘महापंचायत’ में हन्नान मोल्लाह नहीं पहुँचे। वामपंथी इस बात से नाराज़ हैं कि किसान नेताओं के इन करतूतों का फायदा सीधा TMC को हो सकता है। मोल्लाह अब कह रहे हैं कि ये तो गुरुद्वारा कमिटी का कार्यक्रम था, जिसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं।

वो कहते हैं कि पश्चिम बंगाल में सभी किसान संगठनों का समर्थन तो CPI (M) को ही है। लेफ्ट के किसान संगठन ‘कृषक सभा’ ने भी इस कार्यक्रम में उपस्थिति दर्ज नहीं कराई। इसके नेता अमल हलदर ने कहा कि किसान नेताओं के भाजपा के खिलाफ अभियान चलाने से उन्हें कोई दिक्कत नहीं, लेकिन उनकी पार्टी ने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं और प्रचार में व्यस्त होने के कारण वे कार्यक्रम में नहीं गए।

एक CPM नेता का तो यहाँ तक कहना है कि ये किसान नेता TMC के साथ संपर्क में हैं। याद कीजिए, ममता बनर्जी ने भी डेरेक ओब्रायन को अपने प्रतिनिधि के रूप में दिल्ली की सीमा पर चल रहे आंदोलन में भेजा था और फोन कॉल पर नेताओं से बात कर उन्हें समर्थन दिया था। मेधा पाटेकर ने जिस तरह से अस्पताल में जाकर ममता बनर्जी से मुलाकात की, उससे भी लेफ्ट छला हुआ महसूस कर रहा है।

लिहाजा अब आपस में मारामारी हो रही है। राजस्थान में कॉन्ग्रेस के ट्रैक्टर पर घूमने वाले टिकैत बंगाल में ममता के लिए अप्रत्यक्ष रूप से बंगाल में वोट माँग रहे हैं। अब लोगों को भी एहसास हो रहा कि इस सारे फसाद का किसानों से कुछ लेना-देना नहीं है। 5 राज्यों के चुनाव में बीजेपी की संभावनाओं को प्रभावित करने के मकसद से ये पूरा बखेड़ा खड़ा किया गया था।

वैसे चुनाव को प्रभावित करने राकेश टिकैत की क्षमताएँ भी सवालों के घेरे में है। राजनीति की पिच पर वे घर में ही बुरी तरह ढेर रहे हैं। उनकी एकमात्र जमा पूँजी महेंद्र टिकैत का पुत्र होना है, जिसके दम पर वे किसानों के रहनुमा होने का दंभ भरते रहते हैं। उनकी अति सक्रियता से भले भाजपा की चुनावी उम्मीदों को झटका न लगे, लेकिन जिस तरह उनके चुनावी दौरों को लेकर वामपंथियों और अन्य विपक्षी दलों के बीच मतभेद उभरे हैं, उससे इन चुनावों के बाद किसान आंदोलन का तंबू उखड़ना तय ही लगता है।

बेस्ट CM, केरल मॉडल और ‘किसान आंदोलन’: देश के कुल सक्रिय कोरोना मामलों का 77% सिर्फ इन 3 राज्यों में

भारत में क्या अब कोरोना वायरस की दूसरी लहर आ रही है? ये प्रश्न इसीलिए पूछा जा रहा है क्योंकि पिछले 3 महीनों में पहली बार देश में 1 दिन में 26,513 मामले सामने आए हैं। इसमें सबसे ज्यादा 16,620 कोरोना संक्रमण के मामले अकेले महाराष्ट्र में सामने आए हैं। केरल में 1792 नए मामले सामने आए। इस तरह से देखा जाए तो अगर भारत में कोरोना एक बार फिर से खड़ा होता है तो इसकी वजह इन दोनों राज्यों के आँकड़े होंगे। पंजाब की स्थिति भी बदतर होती जा रही है।

कोरोना वायरस संक्रमण के फ़िलहाल देश में 2,16,297 केस मौजूद हैं। इनमें 1,26,231 महाराष्ट्र में हैं और 29,474 केरल में। इस तरह से देश में कुल सक्रिय कोरोना संक्रमितों की संख्या का 58.36% हिस्सा महाराष्ट्र में और 13.62% हिस्सा केरल में मौजूद है।

मृतकों की बात करें तो कोरोना के कारण देश में 1,58,762 लोगों की जान गई, जिनमें 52,861 अकेले महाराष्ट्र के हैं। ध्यान देने वाली बात ये है कि इसके एक तिहाई लोगों की मौत भी किसी अन्य राज्य में नहीं हुई है।

एक और राज्य है, जो केरल के साथ इस मामले में प्रतिस्पर्धा करने निकल पड़ा हो, वो है ‘किसान आंदोलन’ का गढ़ बना पंजाब। पंजाब में पिछले 1 दिन में कोरोना संक्रमितों की संख्या 1492 बढ़ गई है। इस तरह 11,550 सक्रिय कोरोना मरीजों के साथ इस सूची में महाराष्ट्र और केरल के बाद तीसरे स्थान पर आ गया है।

तीनों राज्यों की बात करें तो देश के 77.32% सक्रिय कोरोना मामले यहीं मौजूद हैं – तीन चौथाई से भी ज्यादा।

आप याद कीजिए। किस तरह से मीडिया में हर जगह कभी ‘केरल मॉडल’ ही चलता था। केरल की जनसंख्या भारत के कई राज्यों से अपेक्षाकृत कम है। वहाँ के वामपंथी सरकार की कोरोना मैनेजमेंट के लिए जम कर तारीफ की जाती थी और यहाँ तक कि भारत सरकार को उससे सीखने की नसीहत दी जाती थी। अब जब वहाँ संक्रमितों की संख्या नियंत्रण से बाहर होती जा रही है, मीडिया के उस वर्ग में गजब की चुप्पी है।

इसी तरह महाराष्ट्र सरकार के पक्ष में जम कर PR हुआ था। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के भाषण को CMO ने थ्रेड के जरिए ट्विटर पर क्या डाला, कई सेलेब्स से उसका प्रचार-प्रसार करवाया गया था। चूँकि वहाँ भाजपा विरोधी शिवसेना, कॉन्ग्रेस और NCP की सरकार है, सोशल मीडिया में तब ‘बेस्ट सीएम’ की उपलब्धियाँ गिनाने वाले आज गायब हैं।

अब फिर से लॉकडाउन लगाने की बातें हो रही है, कुछ शहरों में तो लगा भी दिया गया है। नए सिरे से नियम लगाए जा रहे हैं। आखिर ये नौबत कैसे आई?

नागपुर, नासिक, परभणी और पुणे में फिर से लॉकडाउन की घोषणा की जा चुकी है। पंजाब के कई जिलों में नाइट कर्फ्यू लगाया जा रहा है। लुधियाना, पटियाला, फतेहगढ़ साहिब, जालंधर, नवाँशहर, कपूरथला और होशियारपुर में नाइट कर्फ्यू लगाया जा रहा है।

केरल से लगने वाले सभी राज्यों में वहाँ से आने वाले लोगों को लेकर तमाम तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं। जनवरी 2021 में लक्षद्वीप में कोरोना का पहला मामला तभी सामने आया, जब केरल से आए एक यात्री ने 40 को संक्रमित कर डाला।

एक तरफ जहाँ केंद्र सरकार टीकाकरण के मामले में सख्त है और भारत अब अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा लोगों को कोरोना वैक्सीन लगवाने वाला देश बन गया है, सरकार के सहयोग की बजाए इस पर राजनीति करते हुए वैक्सीन को लेकर अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जबकि केरल की वामपंथी सरकार, पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार और महाराष्ट्र की MVA सरकार से वहाँ बढ़ते मामलों को लकर सवाल नहीं पूछे जा रहे।

कहाँ हैं भारत के सबसे ज्यादा सक्रिय मामले? (साभार: Covid19India.Org)

मुंबई में कोरोना ने अब तक 11,535 लोगों की जान ली है। आपको ये जान कर आश्चर्य होगा कि महाराष्ट्र की राजधानी में कोरोना से जितने लोग मरे हैं, उससे ज्यादा मौतें सिर्फ केरल और तमिलनाडु में हुई हैं (महाराष्ट्र के अलावा)। पिछले 1 दिन में भी यहाँ 740 सक्रिय मामले सामने आए। पुणे में भी कोरोना ने 8144 लोगों की जान ली है। नागपुर में 3584 लोग मरे। ठाणे में 5873 लोग कोरोना की वजह से मरे।

भारत में अब तक 2.73 करोड़ लोगों को कोरोना वैक्सीन की डोज दी जा चुकी है। 5 राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में इन तीन राज्यों की लापरवाही भारी पड़ सकती है। पिछले 1 दिन में कोरोना के नए मामलों के 75.07% मामले यहीं से सामने आए हैं। तीन राज्यों से रोज कोरोना के तीन चौथाई मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में बेस्ट सीएम, केरल मॉडल और ‘किसान आंदोलन’ की याद तो आएगी ही।

मंदिर जलाया, ‘जिरगा’ किया… और Pak के हिन्दू समुदाय ने ‘माफ’ भी कर दिया: सभी 50 अब हो जाएँगे जेल से आजाद

पाकिस्तान के हिन्दू समुदाय ने वहाँ के एक मंदिर पर हमला करने वाले आरोपितों व इस्लामी भीड़ को माफ करने का फैसला लिया है। अर्थात, अब उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की जाएगी।

मामला पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा का है, जहाँ 100 वर्ष पुराने एक मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था। इस्लामी भीड़ ने मंदिर को जला डाला था। इस मामले में स्थानीय मौलानाओं और प्रभावशाली मुस्लिमों ने हिन्दू समाज के साथ बैठक की।

इस बैठक में हुए समझौते, जिसे वहाँ ‘जिरगा’ भी कहते हैं, उसके तहत आरोपितों ने हिन्दू मंदिर को ध्वस्त करने और उसे जलाने को लेकर माफी माँगी। 1997 में भी इसी तरह की घटना हुई थी, जिसे लेकर माफी माँगी गई।

मौलानाओं ने हिन्दू समुदाय को आश्वासन दिया है कि पाकिस्तान के संविधान के हिसाब से हिन्दू परिवारों और उनके अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा की जाएगी। इस मामले में कुछ आरोपित फिलहाल हिरासत में हैं।

अब इस बैठक में हुए समझौते के बाद पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में इस सहमति के विवरण रखे जाएँगे, जिसके बाद उन आरोपितों को रिहा किया जाएगा।

पाकिस्तान हिन्दू काउंसिल के रमेश कुमार ने उलेमाओं के साथ बैठक के बाद कहा कि उस घटना से दुनिया भर के हिन्दू समाज की भावनाएँ आहत हुई थीं। रमेश तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के नेता भी हैं। उन्होंने बताया कि खैबर पख्तूनख्वा (KPK) के मुख्यमंत्री महमूद खान ने समझौते की पूरी प्रक्रिया की अध्यक्षता की।

उन्होंने मामले को सुलझाने के लिए सीएम को धन्यवाद भी दिया। महमूद खान ने बैठक को संबोधित करते हुए इस घटना की नींद की और इसे प्रांत की शांति को भंग करने की साजिश बताया।

सुप्रीम कोर्ट ने उस मंदिर के पुनर्निर्माण का आदेश दिया हुआ है। इस मामले में 50 आरोपितों की गिरफ़्तारी हुई थी। भारत ने भी कड़ी आपत्ति जताई थी। 1997 तक यहाँ परमहंस जी महाराज की समाधि पर हिन्दू दर्शन के लिए आते थे।

गौरतलब है कि साल 2020 के दिसंबर महीने में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत स्थित एक मंदिर के मरम्मत कार्य का विरोध कर रहे मुस्लिमों की भीड़ ने मंदिर में तोड़-फोड़ की थी और आग लगा दी थी। सैंकड़ों मुस्लिमों की भीड़ वहाँ मौजूद थी।

मंदिर तोड़ते वक्त आस-पास अल्लाह-हू-अकबर के नारे लग रहे थे। इस्लामी झंडा लहरा कर मंदिर को तोड़ा जा रहा था। जगह जगह से धुआँ उठ रहा था। गोले दागने की आवाजें भी वीडियो में साफ सुनाई दे रही थी।

इस मंदिर का निर्माण जुलाई 1919 में कराया गया था, जब गुरु श्री परमहंस दयाल उस जगह पर विश्राम के लिए ठहरे थे। क्षेत्र में रहने वाले मुस्लिम लोगों ने 1947 में विभाजन के बाद मंदिर बंद कर दिया था।

कुछ महीनों पहले स्थानीय मुस्लिमों ने आरोप लगाया था कि जीर्णोद्धार की आड़ में हिन्दू समुदाय के लोगों ने ग़ैरक़ानूनी रूप से मंदिर की इमारत का आकार बढ़ा दिया। आरोपितों में अधिकतर जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम से जुड़े हुए थे।

सचिन वाजे की गिरफ्तारी पर शिवसेना तिलमिलाई, सामना में लिखा- ‘BJP को आनंद आ रहा, उसे श्राप दे रहे थे’

देश के सबसे अमीर लोगों में शुमार मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के सामने विस्फोटक मिलने के मामले में मुंबई पुलिस के असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वाजे की गिरफ्तारी के ख़िलाफ़ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई है। इस याचिका में वाजे ने अपनी गिरफ्तारी को अवैध करार दिया है।

उनका कहना है कि NIA ने सिर्फ शक के आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया है और गिरफ्तारी के समय नियमों का पालन नहीं किया गया। इस संबंध में हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली है, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मामले में सुनवाई कब होगी।

इस बीच शिवसेना ने वाजे की गिरफ्तारी से आहत होकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी के मुखपत्र सामना में जाँच एजेंसियों की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। लेख में वाजे के विरुद्ध हुए एक्शन को बदले की कार्रवाई कहा गया है।

सामना के हालिया लेख में एटीएस से मामला एनआईए को सौंपे जाने पर भी शिवसेना ने सवाल उठाए हैं। उनका मत है कि इस गिरफ्तारी से भाजपा को ऐसा आनंद मिला है, जिसके वर्णन में शब्द कम पड़ जाएँगे। अपने तर्क को साबित करने के लिए इसमें अर्णब गोस्वामी का उदाहरण दिया गया है।

इसके मुताबिक, “कुछ माह पहले रायगढ़ पुलिस की मदद से अर्णब गोस्वामी को हथकड़ियाँ लगाई गईं थीं। उस समय ये लोग (बीजेपी) गोस्वामी का नाम लेकर रो रहे थे और वाजे को श्राप दे रहे थे। ‘रुकिए, देख लेंगे, केंद्र में हमारी ही सत्ता है, ऐसा कह रहे थे’ वह मौका अब साध लिया है।”

सामना के लेख के मुताबिक, सचिन वाजे बहुत समय से भाजपा की हिटलिस्ट में थे। इसलिए मुंबई पुलिस की जाँच पूरी होने तक केंद्रीय दस्ता रुकने को तैयार नहीं था। उनके अनुसार, देश में कश्मीर जैसी जगहों पर विस्फोटक मिलते हैं लेकिन क्या कभी जाँच एजेंसी का दस्ता वहाँ गया।

शिवसेना के मुखपत्र में प्रकाशित लेख के अनुसार, अगर वाजे से कोई गलती हुई होगी और 20 जिलेटिन छड़ों के मामले में वे अपराधी होंगे तो उन पर नियमानुसार कार्रवाई करने में मुंबई पुलिस व आतंकवादी निरोधी दस्ता सक्षम था। लेकिन केंद्रीय जाँच दस्ते ने यह नहीं होने दिया।

शिवसेना का कहना है कि एजेंसी ने वाजे को गिरफ्तार करके महाराष्ट्र पुलिस दल का अपमान किया है। यह सब सुनियोजित ढंग से किया जा रहा है। वाजे को गिरफ्तार करके, इसकी खुशी जो मना रहे हैं, वे राज्य की स्वायत्तता पर आघात कर रहे हैं। उन्हें आशा है कि सत्य जल्द ही बाहर आएगा।

गौरतलब है कि शिवसेना के इस लेख से पहले भाजपा नेता किरीट सोमैया ने वाजे और शिवसेना नेताओं के बीच व्यवसायिक संबंधों का खुलासा किया था। बीजेपी नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने बताया कि वाजे के आधा दर्जन से ज्यादा बिजनेस हैं, जिसमें उनके पाटर्नर शिवसेना के नेता हैं।

वहीं संजय राउत ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा वाजे का बचाव किया था। उनका कहना था, “मेरा मानना है कि सचिन वाजे एक बहुत ही ईमानदार और सक्षम अधिकारी हैं। उसे जिलेटिन की छड़ें पाए जाने के मामले में गिरफ्तार किया गया है। एक संदिग्ध मौत भी हुई। मामले की जाँच करना मुंबई पुलिस की जिम्मेदारी है। किसी केंद्रीय टीम की जरूरत नहीं थी।”

केजरीवाल के कट्टर विरोधी BJP नेताओं ने ‘जय श्री राम’ कह जताया उनका आभार, आखिर क्या कर दिया दिल्ली CM ने!

दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार ने हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की बातें करनी शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जहाँ एक तरफ अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद बुजुर्गों को मुफ्त में वहाँ तीर्थाटन की बात कही है, वहीं दूसरी तरफ छात्रों को ‘कट्टर राष्ट्रभक्त’ बनाने का वादा भी किया है।

दिल्ली में भाजपा के नेताओं कपिल मिश्रा और तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने उनके इस वादे को लेकर वीडियो बनाया और उन्हें ‘जय श्री राम’ कहा। दोनों नेताओं ने कहा कि वो दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल का आभार व्यक्त करते हैं क्योंकि उन्होंने अयोध्या में ‘बाबरी मस्जिद को तोड़ कर बनाए जा रहे’ राम मंदिर पर ऐलान किया है कि वहाँ पर दिल्ली के बुजुर्गों को मुफ्त में दर्शन कराया जाएगा।

कपिल मिश्रा ने कहा कि जब बाबरी मस्जिद को गिराया गया और वहाँ भव्य राम मंदिर बन रहा है, ऐसे में दिल्ली सरकार सरकारी खर्च से हिन्दुओं को वहाँ का दर्शन कराएगी। उन्होंने कहा कि साथ ही दिल्ली सरकार हिन्दुओं को ये याद भी दिलाएगी कि औरंगजेब ने कितना पाप किया था और कैसे हिन्दुओं ने उस पाप की निशानी को मिटा कर भव्य मंदिर बनाया है।

तजिंदर बग्गा ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सीएम केजरीवाल इस तरह के फैसले लेते रहेंगे और उन लोगों के मुँह पर करारा तमाचा मारते रहेंगे, जो बाबरी मस्जिद का समर्थन करते हैं। इसके बाद दोनों नेताओं ने कहा, “अरविंद केजरीवाल को जय श्री राम। जय श्री राम… जय श्री राम।”

दरअसल, AAP सुप्रीमो ने वादा किया है कि अयोध्या में राम मंदिर बन कर तैयार हो जाने के बाद दिल्ली सरकार प्रदेश के वरिष्ठ नागरिकों को वहाँ न सिर्फ दर्शन के लिए लेकर जाएगी, बल्कि वहाँ जाने-आने, रुकने और भोजन-पानी का खर्च भी वहन करेगी।

इस तीर्थयात्रा योजना पर दिल्ली के बजट स्तर में भी चर्चा हुई थी। तीर्थ यात्रा विकास समिति के अध्यक्ष कमल बंसल ने कहा भी था कि इसके लिए तैयारियाँ पूरी हैं। उन्होंने ये भी कहा कि बुजुर्गों के लिए फंड की कोई कमी नहीं है।

जुलाई 12, 2019 से ही दिल्ली में तीर्थयात्रा का कार्यक्रम चल रहा है और पहले 8 रूटों के अलावा इसमें 4 और रुट जोड़े गए हैं। इसमें अयोध्या भी जुड़ गया है, जो 13वाँ रूट होगा। अब तक 36 ट्रेनें चलाई जा चुकी हैं और 35,000 बुजुर्गों ने इसका लाभ लिया है।

कोरोना के कारण बंद ये यात्रा अब फिर शुरू होगी। AAP के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा था कि दिल्ली सरकार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता के माता-पिता को भी निःशुल्क तीर्थयात्रा कराएगी।

दिल्ली के हालिया बजट में 75 सप्ताह के ‘देशभक्ति’ कार्यक्रमों के दौरान भगत सिंह के जीवन से जुड़े कार्यक्रमों के लिए 10 करोड़ आवंटित किए गए थे। इस दौरान बाबा साहेब आंबेडकर से जुड़े कार्यक्रमों के लिए 10 करोड़ आवंटित किए गए थे।

ऐलान किया गया कि दिल्ली में 75वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 500 स्थानों पर उँचे ध्वज-स्तंभों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा। इसके लिए 45 करोड़ रुपये आवंटित हुए।

हाल ही में दिल्ली सीएम ने कहा था कि वे भगवान राम के भक्‍त हैं। विधानसभा में केजरीवाल ने कहा था कि वे हनुमान के भक्‍त हैं और हनुमान रामचंद्र जी के… तो इस नाते वे रामचंद्र जी के भी भक्‍त हुए।

उन्होंने कहा था कि कहा कि उनकी सरकार ने पिछले 6 सालों में दिल्‍ली के भीतर ‘राम राज्‍य’ लाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा था, “राम राज्य से एक अवधारणा है रामचंद्र जी भगवान थे। हम उनके सामने एक विचित्र प्राणी है।”

छात्राओं को पकड़ उनके कपड़ों में हाथ डालता था, नर्सिंग इंस्टिट्यूट का डायरेक्टर परवेज आलम गिरफ्तार

झारखंड के खूँटी जिले में एक नर्सिंग इंस्टिट्यूट में छात्राओं के यौन शोषण का मामला सामने आया है। एक गैर सरकारी संगठन (NGO) द्वारा संचालित इस इंस्टिट्यूट के निदेशक पर आरोप लगा है कि उसने संस्थान में पढ़ने वाली कई छात्राओं का यौन शोषण किया।

पीड़ित छात्राओं के मुताबिक, इंस्टिट्यूट का डायरेक्टर परवेज आलम छात्राओं को पकड़ कर उनके कपड़ों में हाथ डालता था और यह काम वह पिछले काफी समय से कर रहा था। खबरों के अनुसार, आलम की घटिया हरकत का खुलासा उस समय हुआ, जब कुछ छात्राओं ने अपनी पीड़ा एक सामाजिक कार्यकर्ता से शेयर की।

छात्राओं की शिकायत पर सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मी बखलों ने इस संबंध में राज्यपाल को चिट्ठी लिखी। बाद में ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) के अधीन जाँच शुरू की गई और स्थानीय महिला थाने से एक टीम को इंस्टिट्यूट में भेजा गया। 

मामले की पुष्टि होने पर रिपोर्ट, खूँटी एसपी आशुतोष शेखर को भेज दी गई है। वहीं एनजीओ के डायरेक्टर को गिरफ्तार कर लिया गया है। पड़ताल में पता चला कि नर्सिंग इंस्टिट्यूट में परवेज छात्राओं के सब्र का इम्तिहान लेने के नाम पर उनका यौन शोषण करता था।

गौरतलब है कि कुछ साल पहले ऐसा ही आरोप लखनऊ के वजीरगंज इलाके स्थित मशहूर केके नर्सिंग संस्थान में डिप्लोमा का कोर्स कर रहीं लड़कियों ने संस्थान के प्रबंधन पर लगाया था। यौन शोषण के उस मामले का खुलासा करने के लिए एक लड़की ने स्टिंग ऑपरेशन किया था, जिसमें प्रबंधन से जुड़े एक अधिकारी की करतूतें सामने आईं थी।

लड़कियों ने बताया था कि उनके साथ डिग्री हासिल करने के लिए जोर-जबरदस्ती की जाती थी। मजबूरी के चलते कुछ लड़कियाँ प्रबंधन के दबाव में आ जाती थीं, लेकिन जिसे ये शर्त मंजूर नहीं होती, उसे इस हद तक परेशान किया जाता कि उसके पास समर्पण करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता था।

सचिन के नाम पर चुप्पी, मुबारक पर हंगामा: राँची में चोरी के आरोप में 2-2 मॉब लिंचिंग, हेमंत सरकार से सवाल क्यों नहीं?

झारखंड की राजधानी राँची में बाइक चोरी के आरोप में मॉब लिंचिंग की वारदात सामने आई है। बीते एक सप्ताह में वहाँ ये उस तरह की दूसरी घटना है। ताजा मामला अनगड़ा स्थित सिरका गाँव का है। महेशपुर निवासी मुबारक खान नाम के 26 वर्षीय युवक पर चोरी का आरोप लगा और स्थानीय लोगों ने पीट-पीट कर उसकी हत्या कर दी। ये घटना शनिवार (मार्च 13, 2021) देर रात की है। इसके बाद थाने पर परिजनों व लोगों की भीड़ जुट गई।

पुलिस ने दोषियों की गिरफ़्तारी का आश्वासन देकर किसी तरह आक्रोशित लोगों को शांत कराया। मृतक के भाई तबारक खान ने इस मामले में FIR दर्ज कराई है। ये भी बताया गया है कि मुख्य आरोपित ने कुछ दिनों पहले मृतक को जान से मार डालने की धमकी भी दी थी। FIR के अनुसार प्लानिंग करके सिरका गाँव के एक बिजली के खंभे में बांधकर मॉब लिंचिंग की घटना को अंजाम दिया गया। पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है।

सभी आरोपित इस घटना के बाद फरार हो गए थे। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि मुबारक खान एक स्थानीय व्यक्ति के घर में घुस गया था और बाइक का चक्का खोल कर चोरी की फिराक में था। लेकिन, पड़ोसियों के जग जाने के कारण वो भागने लगा और सड़क किनारे गिर गया, जहाँ लोगों ने उसकी पिटाई की। मृतक के शव के पास बाइक की रिम, बैटरी और जैक मिला था।

राँची में 8 मार्च को भी इसी तरह की घटना सामने आई थी, जहाँ काफी चहल-पहल वाले क्षेत्र अपर बाजार में सचिन वर्मा नामक एक मजदूर की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी। नवाटोली भुताहा तालाब के पास के निवासी 22 वर्षीय युवक के शरीर को लोहे के गर्म रोड से भी दागा गया था। एक ट्रक की चोरी के आरोप में उसे बाँध कर पीटा गया था। पुलिस ने जाँच में पाया कि उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था।

राज्य की विपक्षी पार्टी भाजपा ने इन हत्याओं पर हेमंत सोरेन की सरकार को कटघरे में खड़ा किया है, वहीं मीडिया में भी इन ख़बरों में दोनों पक्षों की तरफ से चीजें पेश की गईं। अधिकतर हेडलाइंस में बताया गया कि चोरी के आरोप में ये घटनाएँ हुई हैं।

एक सप्ताह में मरने वाले में दोनों अलग-अलग मजहब के भी हैं, ऐसे में किसी भी मामले को सांप्रदायिक एंगल भी नहीं दिया गया। लेकिन हाँ, दोनों मामलों में चोरी का आरोप और भीड़ द्वारा हत्या कॉमन है।

झारखंड में जब रघुबर दास के नेतृत्व में भाजपा की सरकार थी, तब तबरेज अंसारी की मॉब लिंचिंग का मुद्दा जम कर उठाया गया था। देश भर में प्रदर्शन हुए थे और मीडिया में इसे सांप्रदायिक एंगल दे दिया गया था। जबकि उस पर भी चोरी के आरोप थे। झारखंड में इस तरह की घटनाएँ आए दिन होती हैं, लेकिन जब से सरकार बदली, तब से मीडिया या बुद्धिजीवियों ने ऐसे किसी मामले को सांप्रदायिक रंग नहीं दिया।

चोरी के आरोपित का महिमामंडन कर के उसके नाम पर इस्लामी कट्टरवादियों ने कई टिक-टॉक वीडियो भी बनाए थे। देश में ‘हिन्दुओं की भीड़ द्वारा मुस्लिमों को मारे जाने’ की अफवाह फैलाई गई थी। लेकिन, सचिन वर्मा का मामला मीडिया में ज्यादा नहीं आया क्योंकि इससे उस नैरेटिव की पोल खुल जाती। ऐसी घटनाओं की आशंका हमेशा बनी रहती है कि कल को अगर भाजपा की सरकार आ जाए तो फिर इसे कम्युनल एंगल दिया जाएगा।

अभी भी अगर आप मुबारक खान का नाम ट्विटर पर सर्च करेंगे तो आपको उसके परिजनों के बयानों के वीडियो मिल जाएँगे और कई लोग ये सवाल उठाते हुए मिलेंगे कि अब देश में मुस्लिमों की मॉब लिंचिंग आम हो गई है। लेकिन, सचिन वर्मा के नाम पर आपको ये सब नहीं मिलेगा। मुबारक खान की हत्या की बात व्हाट्सएप्प पर भी सर्कुलेट हो रही है, जिसका स्क्रीनशॉट शेयर कर के लोग एक खास नैरेटिव को आगे बढ़ा रहे हैं।

झारखंड के सरायकेला-खरसावाँ जिले के सरायकेला थाना इलाके के धातकीडीह गाँव में 2019 में पिटाई के बाद तबरेज अंसारी की मौत हो गई थी। तबरेज अंसारी की मौत के मामले के सहारे पूरे देश में ‘मॉब लिंचिंग’ का माहौल होने का दुष्प्रचार भी फैलाया गया था।

जनवरी 2021 में एक घटना हुई थी। चोरी किए गए दो मोबाइल फोन्स के साथ खरसा के कदमडीहा गाँव निवासी आरिफ अंसारी को दबोचा गया था। वो मृतक तबरेज अंसारी का साथी था और दोनों चोरी का सामान बेचा करते थे।