Home Blog Page 398

औरतों को क्यों दें संपत्ति में अधिकार…बांग्लादेश में महिला आयोग की रिपोर्ट पर भड़की मुल्ला जमात, बोले- ये सब इस्लाम के खिलाफ

बांग्लादेश में महिलाओं को अधिकार देने की बात पर इस्लामी कट्टरपंथी भड़क गए हैं। महिलाओं को सम्पत्ति में हिस्सा देने की बात पर कट्टरपंथी नाराज हैं। इसके लिए सिफारिश करने वाली रिपोर्ट को उन्होंने खारिज करने की बात की है। शेख हसीना के बांग्लादेश की सत्ता से जाने के बाद लगातार महिला अधिकारों पर हमले हो रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश में हाल ही में महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाले आयोग ने एक रिपोर्ट मोहम्मद यूनुस को सौंपी है। इस रिपोर्ट में महिलाओं की भलाई के लिए 433 सिफारिशें की गई हैं।

अब बांग्लादेश की जमात-ए-इस्लामी, इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश (IAB), और हिफाजत-ए-इस्लाम जैसे इस्लामी संगठनों ने इसे ‘नामंजूर’ बताया है। उन्होंने यूनुस सरकार से इसे रद्द करने की माँग भी की है।

महिलाओं को सम्पत्ति के अधिकार के खिलाफ हैं कट्टरपंथी

महिला आयोग की रिपोर्ट में बांग्लादेश के भीतर महिलाओं और पुरुषों को समान संपत्ति देने के अधिकार की बात की गई है। इस पर जमात के महासचिव मिया परवार ने कहा कि यह प्रस्ताव इस्लामी कानूनों के खिलाफ है और इसे लागू करना ‘शरिया के खिलाफ खड़ा होना’ होगा।

परवार ने कहा कि इसमें कई ऐसे प्रावधान है जो इस्लामी मान्यता के अनुसार निकाह, तलाक और विरासत नियमों के खिलाफ हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस्लाम में मर्द और औरत को बराबर रखा जाता है लेकिन दोनों के काम अलग-अलग बताए गए हैं।

कट्टरपंथी संगठन इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश की महिला शाखा ने रिपोर्ट को सांस्कृतिक और मजहबी मामलों से अलग बताया। हिफाजत-ए-इस्लाम ने महिला आयोग की पूरी संस्था को खत्म करने की माँग की और इसे इस्लामी कानूनों पर हमला करार दिया। उलेमा माशायेख परिषद ने मजहबी भावनाओं का अपमान बताते हुए रिपोर्ट को खारिज किया है। 

तख्तापलट के बाद महिलाएँ टारगेट पर

बांग्लादेश में लगातार इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर महिलाएँ हैं। यह बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से बढ़ा है। इससे पहले जनवरी 2025 में महिला फुटबॉल मैचों को भी निशाना बनाया गया था, जहाँ इस्लामी कट्टरपंथी महिलाओं के फुटबॉल खेलने को इस्लामी विरोधी बताकर तोड़फोड़ की गई थी।

इसके अलावा नाबालिग और महिलाओं के साथ बलात्कार और यौन उत्पीड़न की घटनाएँ भी बांग्लादेश में बढ़ती जा रही हैं। बांग्लादेश में दहेज के नाम पर हिंसा, बाल विवाह, और कार्यस्थलों पर भेदभाव अब भी व्यापक स्तर पर देखे जा रहे हैं। महिलाओं के अधिकारों की वकालत करने वाली कार्यकर्ता कई बार धमकियों और हमलों का शिकार होती हैं।

इस्लामी कट्टरपंथियों का यूसीसी विरोध

बांग्लादेश ही नहीं भारत में भी UCC जैसे कानूनों का इस्लामी कट्टरपंथी विरोध करते आए हैं। इसी कड़ी में वह UCC जैसे कानून भी लागू ना किए जाने की माँग करते रहे हैं। गौरलतब है कि साल 2024 में UCC कानून उत्तराखंड में लागू किया गया था, जिसके खिलाफ इस्लामी कट्टरपंथी आ गए थे।

जनजातियों को जगाने के लिए जमीन पर चंपई सोरेन का अभियान: बोले – संथाल परगना में 9% से 24% हो गए मुस्लिम, धर्मांतरण के बाद छीना जाए आरक्षण

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने संथाल परगना में लगातार जनजातीय की आबादी में आ रही कमी को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने इसका कारण धर्मांतरण बताया है। उन्होंने कहा कि अगर इसे नहीं रोका गया तो जनजातीय समाज का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। उन्होंने मौजूदा प्रदेश सरकार द्वारा खुद को ‘अबुआ सरकार’ कहे जाने पर भी तंज कसा।

दरअसल, रविवार (20 अप्रैल, 2025) को चाकुलिया शहर के टाउन में भारत जकात माझी परगना महाल एवं जनजातीय साँवता सुसार अखाड़ा के संयुक्त तत्वाधान में जनजातीय महासम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शिरकत करने पहुँचे प्रदेश के पूर्व CM चंपई सोरेन ने जनजातीय समाज को जगाने की बात कही।

उन्होंने कहा, “जागो आदिवासी जागो! चाकुलिया की धरती से मैं आदिवासियों को जगाने आया हूँ। हमें झारखंड में धर्म-परिवर्तन को हर हाल में रोकना होगा। वरना, यहाँ भी मुर्शिदाबाद जैसे हालात बन जाएँगे।”

सोरेन ने कहा, “यदि धर्म-परिवर्तन नहीं रुका तो आदिवासियों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। झारखंड में सिर्फ नाम की अबुआ सरकार है। राँची, लोहरदगा, गुमला, साहिबगंज, पाकुड़ हर तरफ तेज़ी से धर्मांतरण हो रहा है। सरकार चुप्पी साधी हुई है। आदिवासियों की परंपरागत माँझी परगना महाल व्यवस्था खत्म हो रही है।”

पूर्व सीएम ने कॉन्ग्रेस पर जनजातीय समाज के साथ हमेशा से धोखा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “वर्ष 1967 में सबसे पहले कॉन्ग्रेस पार्टी के सांसद कार्तिक उराँव ने संसद में आदिवासी परंपरा को बचाने के लिए डिलिस्टिंग लागू करने की माँग की थी। लेकिन, तत्कालीन इंदिरा गाँधी सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। कॉन्ग्रेस ने हमेशा आदिवासियों के साथ धोखा किया है। आज राज्य की सत्ता में वह भी साझेदार है। इसलिए यह सरकार कभी आदिवासियों का विकास नहीं कर सकी।”

जनजातीय समाज की लड़कियों का आरक्षण रोकना जरूरी

चंपई सोरेन ने कहा कि संथाल परगना की हालत ऐसी है कि वहाँ मुखिया एवं जिला परिषद जनजातीय महिलाएँ हैं पर उनके पति मुस्लिम है। ऐसा यदि होता रहा तो जनजातीय समाज की संख्या और घट जाएगी। इसलिए दूसरे समुदाय में विवाह करने वाली जनजातीय लड़कियों का आरक्षण रोकना जरूरी है। इसे लेकर संथाल परगना में जल्द ही लाखों की संख्या में जनजातियों को जुटाकर बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।

जनजातियों का इतिहास संघर्षों से भरा

पूर्व सीएम चंपाई सोरेन ने कहा, “आदिवासियों का इतिहास संघर्ष से भरा हुआ है। बाबा तिलका माँझी से लेकर सिद्धू-कान्हू, चाँद भैरव, बिरसा मुंडा सबने आज़ादी की लड़ाई लड़ी थी। उसके बाद दिशोम गुरु शिबू सोरेन एवं मेरे नेतृत्व में झारखंड अलग राज्य की लड़ाई लड़ी गई।”

उन्होंने ध्यान दिलाया कि आज धर्म-परिवर्तन के जरिए हमारे अस्तित्व एवं परंपरागत व्यवस्था पर चोट पहुँचाई जा रही है, इसके खिलाफ भी संघर्ष के लिए तैयार रहना है।

जनजातियों का अधिकार छीन रही सरकार

जनजातीय सम्मेलन में दिशोम तरफ परगना चंद्र मोहन मंडी ने कहा कि राज्य की वर्तमान सरकार जनजातीय समाज का अधिकार छीन रही है। सुप्रीम कोर्ट ने PESA Act के जरिए जो अधिकार हमें दिया है, उसका अनुपालन नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि जनजातियों पर अत्याचार एवं धर्मांतरण बढ़ता जा रहा है, राज्य की ‘अबुआ सरकार’ आदिवासियों को छलने का काम कर रही है।

संथाल परगना में मुस्लिम आबादी बढ़ी

चंपई सोरेन ने संथाल परगना में हो रहे धर्मांतरण और आदिवासियों की आबादी में कमी को लेकर चिंता जताई है। इस संबंध में झारखंड हाईकोर्ट ने भी मौजूदा हेमंत सोरेन की सरकार से साल 2024 में माँगा था। दरअसल, हाईकोर्ट में बांग्लादेशी घुसपैठ को लेकर दानियल दास की ओर से जनहित याचिका दायर की गई थी। मामले में हाईकोर्ट ने झारखंड सरकार पर प्रश्न उठाए। हाईकोर्ट ने सवाल पूछा था कि जब बांग्लादेशी घुसपैठ से इनकार किया जा रहा है तो भला जनजातीय जनसंख्या कैसे घट गई।

हाईकोईट के पास पहुँचे आँकड़ों में इस संथाल परगना में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या 1951 में 44.67% थी जो वर्ष 2011 में घट कर 28.11% तक आ गई। इसे दिनांक 8 अगस्त, 2024 के आदेश में नोट भी किया गया है। यानी कि जनजातीय आबादी में 16 फीसदी की कमी आई है।

उस वक्त केंद्र ने जनजातीय आबादी के कम होने के पीछे दो कारण बताए थे, जिसमें पहला पलायन और दूसरा धर्मांतरण। अब धर्मांतरण के मुद्दे को ही चंपई सोरेन ने रेखांकित किया है। केंद्र ने ये भी बताया था कि जहाँ जनजातीय आबादी घटी है तो वहीं संथाल परगना में मुस्लिम आबादी 20 से 40 फीसदी तक बढ़ी है।

1951 से 2011 में हिंदू की आबादी में कमी

बता दें कि केंद्र के अनुसार, 1951 की जनगणना में संथाल परगना की कुल जनसंख्या 23,22,092 थी, जिसमें हिंदू 90.37 प्रतिशत, मुस्लिम 9.43 प्रतिशत और ईसाई 0.18 प्रतिशत थे। वहीं, 2011 की जनगणना में संथाल परगना की कुल जनसंख्या 69,69,097 हो गई, जिसमें हिंदू 67.95 प्रतिशत रह गए, मुस्लिमों की संख्या 22.73 प्रतिशत हो गई और ईसाई 4.21 प्रतिशत हो गए।

कर्नाटक में 30 साल में 94% बढ़े मुस्लिम, आबादी 39 लाख से 77 लाख पहुँची: सर्वे ने बताया- हिन्दू लिंगायत सिर्फ 8% बढ़े, रिपोर्ट देख कॉन्ग्रेस नेता भिड़े

कर्नाटक में मुस्लिम आबादी तीन दशक में लगभग दोगुनी हो गई। जबकि इस दौरान कर्नाटक के लिंगायत हिन्दुओं की जनसंख्या में लगभग 10% ही बढ़ोतरी हुई। यह सारे आँकड़े कर्नाटक में करवाए गए जातिगत जनगणना के सर्वे से सामने आए हैं। मुस्लिम कर्नाटक में दलितों के बाद सबसे बड़ा समूह हैं।

94% बढ़ी मुस्लिम आबादी

डेक्कन हेराल्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, 1984 में कर्नाटक के भीतर जातियों की संख्या पता लगाने के लिए किए गए वेंकटस्वामी कमीशन के सर्वे ने मुस्लिमों की आबादी 39.63 लाख थी और यह प्रदेश की जनसंख्या में 10.97% का हिस्सा रखते थे। इसी सर्वे में सामने आया था कि कर्नाटक में वीराशैव-लिंगायत 61.14 लाख हैं और उनका राज्य की आबादी में 16.92% है।

इसके अलावा वोक्कालिगा समुदाय की आबादी 42.19 लाख बताई गई थी और उनका राज्य की जनसंख्या में हिस्सा तब 11.68% था। 1984 के सर्वे में राज्य की दलित आबादी 57.31 लाख बताई गई थी। दलितों का राज्य की आबादी में हिस्सा लगभग 16% था।

2015 के सर्वे में यह स्थितियाँ पूरी तरह से बदल चुकी हैं। इस सर्वे से सामने आया है कि 1984 से 2015 के बीच कर्नाटक में मुस्लिम आबादी लगभग दोगुनी हो चुकी है। इस सर्वे के अनुसार, 2015 में मुस्लिम आबादी 76.9 लाख थी। यानी इन 30 वर्षों में राज्य में मुस्लिम आबादी 94% बढ़ी है।

इसी बीच लिंगायतों की आबादी मात्र 8.50% बढ़ी जबकि वोक्कालिगा इस दौरान 46% बढ़ पाए। मुस्लिमों की आबादी दोगुनी होने के चलते वह अब OBC के भीतर सबसे बड़ा समूह हैं। उनका आरक्षण भी इस सर्वे में 4% से बढ़ा कर 8% करने की सिफारिश की गई है।

आबादी में हिस्सा भी बढ़ा

इसी सर्वे के अनुसार, राज्य की कुल आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी 18.08% है, जो 2011 की जनगणना में 12.92% बताई गई थी। सर्वे का यह आँकड़ा 2015 का है। ऐसे में 4 साल में मुस्लिम आबादी की हिस्सेदारी कर्नाटक में 5.16% बढ़ गई।

रिपोर्ट में उनका आरक्षण बढ़ाने की सिफारिश के पीछे राज्य में OBC की हिस्सेदारी सबसे अधिक होना कारण बताया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य में कुल आबादी में ओबीसी की हिस्सेदारी 69.60% है, ऐसे में उन्हें जनसंख्या के आधार पर आरक्षण मिलना चाहिए।

रिपोर्ट में और क्या?

इस सर्वे OBC आरक्षण 32% से बढ़ाकर 51% करने की सिफारिश की गई है। यह सिफारिश अगर मानी जाती हैं, तो राज्य में कुल आरक्षण 85% हो जाएगा। इस 85% में 51% OBC आरक्षण होगा जबकि 24% आरक्षण अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए रहेगा।

इसके अलावा 10% आरक्षण आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS को पहले की तरह मिलता रहेगा। ध्यान देने योग्य बात यह है कि पिछड़ा वर्ग आयोग ने OBC और मुस्लिम आरक्षण को बढ़ाने की सिफारिश तो की है लेकिन SC-ST तथा EWS आरक्षण को पहले की तरह ही रखने की बात कही है।

अब हो रहा विरोध

कॉन्ग्रेस के अंदर ही अब 2015 के सर्वे का विरोध हो रहा है। कर्नाटक के उद्योग मंत्री एमबी पाटिल का कहना है कि कैबिनेट में सात लिंगायत मंत्री हैं और हम सभी एक साथ हैं। वहीं, वोक्कालिगा समुदाय के कई नेता और संत भी इस रिपोर्ट का खुलकर विरोध कर रहे हैं।

उनका कहना है कि उनकी जनसंख्या को कम आँककर उनके साथ अन्याय किया गया है। मंड्या से कॉन्ग्रेस विधायक रविकुमार गौड़ा (गनीगा) का कहना है कि रिपोर्ट में वोक्कालिगा समुदाय की संख्या कम बताई गई है। ये रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए।

17 अप्रैल, 2025 को हुई कैबिनेट बैठक में ये रिपोर्ट कैबिनेट के सामने रखी गई है, लेकिन इस पर कोई भी अंतिम फैसला नहीं लिया जा रहा है।

राहुल गाँधी ने फिर विदेश जाकर किया देश को बदनाम, चुनाव प्रणाली से लेकर EC पर भी उठाए सवाल: BJP नेता बोले- ये जॉर्ज सोरोस के एजेंट, सिर्फ ‘भारत विरोधी’ काम करेंगे

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने चुनाव आयोग को लेकर अमेरिका में विवादित बयान दिया है। राहुल गाँधी ने दावा किया है कि चुनाव आयोग समझौता कर चुका है। उन्होंने इस बयान में महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। राहुल गाँधी 2 दिन के लिए अमेरिका गए हुए हैं।

उन्होंने विदेशी धरती पर भारत का यह आंतरिक मुद्दा ब्राउन यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम के दौरान उठाया। उन्होंने दावा किया कि देश की चुनावी प्रणाली में ‘बड़ी समस्या’ है। राहुल गाँधी ने कहा, “सरल शब्दों में कहूँ तो महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में जितने लोगों ने वोट डाले, उतने वयस्क (बालिग) लोग महाराष्ट्र में है ही नहीं और यह एक तथ्य के आधार पर कह रहा हूँ।”

राहुल गाँधी ने दावा किया, “शाम 5:30 बजे तक के मतदान आँकड़े उपलब्ध थे, लेकिन 5:30 बजे से 7:30 बजे के बीच जब मतदान समाप्त हो जाना चाहिए था, लेकिन इसके बाद भी 65 लाख अलग से वोट डाले गए थे।”

राहुल गाँधी ने इसे भौतिक रूप से असंभव बताया और कहा, “एक व्यक्ति को वोट डालने में लगभग 3 मिनट लगते हैं, तो यदि हम हिसाब लगाए तो इसका मतलब है कि लोग आधी रात 2 बजे तक वोट डालने के लिए लाइन में खड़े थे और मतदान पूरी रात चलता रहा, जो कि सच नहीं है।”

राहुल गाँधी ने चुनाव में मत प्रतिशत बढ़ने का यह मुद्दा चुनाव आयोग द्वारा स्पष्टीकरण दिए जाने के बाद भी उठा रहे हैं। महाराष्ट्र चुनाव के बाद दिसम्बर, 2024 में भी राहुल गाँधी ने यही बातें कहीं थी। इसके बाद चुनाव आयोग ने बताया था कि मतदान के अंतिम आँकड़े में वोटिंग के दिन आए आँकड़ों से बदलाव संभव है।

राहुल गाँधी के इस बयान को लेकर भाजपा अब हमलावर हो गई है। उनके भारत विरोधी बयान पर निशाना साधते हुए भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “जो राहुल गाँधी अपने ही देश में मतदाताओं का विश्वास नहीं जीत सकते, वे विदेश जाकर भारतीय लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे है।”

भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी को ‘लोकतंत्र विरोधी और ‘भारत विरोधी’ बताया। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी जॉर्ज सोरोस के एक एजेंट है, जो हमेशा विदेशी धरती पर देश को बदनाम करते हैं, आग उगलते हैं।

यह कोई पहला मौक़ा नहीं है जब राहुल गाँधी ने विदेश में भारत और उसकी एजेंसियों को लेकर विवादित बातें की हो। इससे पहले वह सितम्बर, 2024 में अमेरिका दौरे के दौरान भी भारतीय लोकतंत्र को लेकर कई ऐसी ही बातें कह चुके हैं। उन्होंने इस दौरान भारत की तुलना सीरिया और ईराक से कर दी थी।

डर से घर छोड़ भाग गए थे हिन्दू, कोई तोड़फोड़ नहीं हुई: मुर्शिदाबाद हिंसा पर TMC विधायक अमीरुल इस्लाम का बयान, बोले- हमारे शहर में ‘सामान्य’ हो रही स्थिति

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में इस्लामी कट्टरपंथियों के डर के चलते सैकड़ों हिन्दू पलायन कर गए थे, लेकिन राज्य में सत्तारूढ़ TMC इसे मानने को तैयार नहीं है। TMC के एक विधायक ने कहा है कि वह हिन्दू घबरा कर चले गए और उन्हें हिंसा से कोई डर नहीं था। TMC के विधायक अमीरुल इस्लाम ने यह बातें कहीं है। उन्होंने तोड़फोड़ की बात भी नकार दी है।

अमीरुल इस्लाम मुर्शिदाबाद के उसी शमशेरगंज से विधायक हैं, जहाँ सबसे अधिक हिंसा इस्लामी कट्टरपंथियों ने की थी। अमीरुल इस्लाम ने रविवार (20 अप्रैल, 2025) को हिंसा प्रभावित धुलियान और बाक़ी इलाकों का दौरा किया। उनके साथ TMC के और भी नेता थे।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमीरुल इस्लाम ने कहा, “इन लोगों (हिन्दुओं) को वापस नहीं लाया गया, वे स्वेच्छा से वापस आए हैं… उनके इलाके में घरों में तोड़फोड़ नहीं की गई, वे सिर्फ डर के मारे भाग गए। और अब वे घर लौट रहे हैं… हमारा शहर सामान्य स्थिति की ओर लौट रहा है।”

मुर्शिदाबाद में डर के चलते भागे हिन्दुओं को वर्तमान में राज्य की पुलिस वापस ला रही है। अमीरुल इस्लाम ने इन्हीं के वापस लाए जाने पर यह दावे किए हैं। जहाँ उन्होंने कोई हमला ना होने का दावा किया है वहीं हालिया रिपोर्ट्स ने बताया है कि उन्होंने इस दौरान इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा मारे गए हिन्दू चंदन दास और हरगोबिन्द दास के परिजनों से भी मुलाक़ात की।

अमीरुल इस्लाम के साथ पहुँचे MP समीरुल इस्लाम ने यहाँ पर भी अड़ियल रवैया अपनाए रखा। उन्होंने कहा कि चंदन दास का परिवार अभी मुआवजा नहीं स्वीकार कर रहा है लेकिन बाद में यह कर लेगा। चंदन दास के परिवार ने ममता सरकार द्वारा दिया गया ₹10 लाख का मुआवजा ठुकरा दिया था।

समीरुल इस्लाम ने कहा है कि जब सब बाहरी लोग चले जाएँगे तो इनके पास लोकल ही बचेंगे। इससे पहले भी TMC के नेता मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा के ऊपर लीपापोती करते आए हैं। हालाँकि, इससे यहाँ के हिन्दुओं का खौफ नहीं जा रहा है।

गौरलतब है कि 11 अप्रैल, 2025 को मुर्शिदाबाद के धुलियान और शमशेरगंज इलाकों में वक्फ कानून के विरोध के नाम पर इस्लामी भीड़ ने भारी हिंसा की थी। इस हिंसा के दौरान हिन्दुओं के घरों-दुकानों को निशाना बनाया गया था। 3 हिन्दू मार भी दिए गए थे। इसके बाद मुर्शिदाबाद से बड़ी संख्या में हिन्दू मालदा और झारखंड भाग गए थे।

इन हिन्दुओं ने बताया था कि इस्लामी कट्टरपंथी उन्हें महिलाओं के रेप के बदले जीवित छोड़ने की बात कह रहे थे। उन्होंने BSF और बाकी केन्द्रीय सुरक्षाबलों के मुर्शिदाबाद में स्थायी रूप से तैनात किए जाने की माँग की थी।

सूअर के गोश्त जैसा है इजरायली सामान, बहिष्कार करो: संभल में मंदिर-मदरसों पर चिपकाए पोस्टर – शादाब, गुलफाम समेत 7 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के संभल जिले के नरौली कस्बे में दुकानों की दीवारों पर ‘फ्री गाजा, फ्री फिलिस्तीन’ जैसे पोस्टर चिपकाने के मामले में पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया है। इन पोस्टरों में मुसलमानों से इजरायली सामान का बहिष्कार करने की अपील भी की गई है। पोस्टर में ऐसे सामानों को भी दिखाया गया है, जिनसे दूर रहने और खरीदारी ना करने की सलाह दी गई है।  

बनियाथार एसएचओ रामवीर सिंह ने रविवार (20 अप्रैल 2025) को पीटीआई को बताया कि पुलिस ने आरोपितों की पहचान कर उनमें से 7 लोगों को पकड़ा है। आरोपितों में मोहम्मद शादाब, मोहम्मद रिहान, गुलफाम, मोहम्मद सलीम, समीर, याकूब, और सलमान शामिल हैं। इन पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने, हिंसा फैलाने और धार्मिक भावनाओं को भड़काने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और वीडियो के आधार पर 200 से अधिक उपद्रवियों के पोस्टर जारी किए हैं, जिनकी पहचान की जा रही है। इनमें से 11 और उपद्रवियों की पहचान हो गई है। सभी आरोपितों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमें दर्ज किए गए हैं। आपको बता दें कि ‘फ्री गाजा, फ्री फिलिस्तीन’ के पोस्टर मंदिर, दुकानों, बिजली के खंभों और मदरसों की दीवारों पर चिपकाए गए थे।

पुलिस के अनुसार, कुछ दिन पहले कस्बे की दुकानों की दीवारों पर यह पोस्टर देखे गए, जिनमें एक विशेष समुदाय से इज़रायली सामान का बहिष्कार करने की अपील भी की गई थी। थाना प्रभारी रामवीर सिंह ने कहा कि जिन दुकानों की दीवारों पर ये पोस्टर लगे थे, उनके मालिकों से भी पूछताछ की गई।

घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए बजरंग दल के संयोजक नितिन शर्मा ने पत्रकारों से कहा कि पोस्टरों में मुसलमानों से अपील की गई थी कि वे सिर्फ मुस्लिम दुकानदारों से ही खरीदारी करें, जो समाज में साम्प्रदायिक तनाव फैलाने की मानसिकता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा, “ये केवल पोस्टर नहीं हैं, बल्कि यह एक खतरनाक सोच है जो ज़िले में फैल रही है। पश्चिम बंगाल की तरह यहाँ भी हिन्दुओं के ख़िलाफ़ माहौल बनाया जा रहा है। अगर प्रशासन ने समय पर कार्रवाई नहीं की, तो विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे सँगठन खुद मोर्चा संभालेंगे।”

ग़ौरतलब है कि अक्टूबर 2023 में हमास के नेतृत्व वाले चरमपंथियों द्वारा दक्षिणी इजरायल में हमला किए जाने के बाद इजरायल ने गाज़ा में सैन्य अभियान शुरू किया था, जिसमें 1,200 लोगों की मौत हुई थी और 251 को बंधक बना लिया गया था। इसके बाद से इज़रायली हमले में अब तक 51,000 से अधिक फिलीस्तीनी नागरिकों की मौत हो चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएँ और बच्चे शामिल हैं। यह जानकारी एपी ने गाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से दी है।

इस घटना के बाद प्रशासन ने इंटरनेट सेवाएँ 48 घंटे के लिए बंद कर दी हैं। पुलिस और प्रशासन इस मामले की गंभीरता से जाँच कर रहे हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की योजना बना रहे हैं।

बार-बार सो जाता है हिन्दू, संघ उन्हें 100 सालों से जगा रहा: लखनऊ में गरजे RSS सरकार्यवाह, बोले- भारत को नहीं बनाना हिंदू राष्ट्र, ये पहले से है

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले कहा है कि भारत पहले से ही हिन्दू राष्ट्र है। संघ सरकार्यवाह ने बताया है कि हिन्दू जागृत नहीं रहते और यह काम हर बार किसी महापुरुष को करना पड़ता हैं। उन्होंने यह सारी बातें लखनऊ में एक संघ कार्यक्रम में कहीं।

लखनऊ में आयोजित एक RSS के एक कार्यक्रम में रविवार (20 अप्रैल, 2025) को संघ सरकार्यवाह होसबाले ने कहा, “संघ बीते 100 वर्षों से हिन्दू समाज को जागृत कर रहा है। इसलिए संघ लगातार 100 वर्षों से बढ़ रहा है। संघ भारत को हिन्दू राष्ट्र नहीं बना रहा, यह पहले से हिन्दू राष्ट्र है।”

उन्होंने आगे कहा, “संघ जातियों में बनते हिन्दू को राष्ट्रीय हिन्दू बना रहा है। वह अकेले हिन्दू को शक्तिशाली बना रहा है।” उन्होंने इस दौरान कहा कि भारत अब वापस उठ रहा है और यह विश्व के कल्याण के लिए ही उठ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की उन्नति किसी को दास बनाने के लिए नहीं होगी।

उन्होंने इस दौरान हिन्दुओं में चेतना की कमी को लेकर बात की। उन्होंने कहा, “हिन्दू समाज के साथ एक समस्या है कि इसे कोई महापुरुष जगाता है। मगर वह फिर सो जाता है। ऐसा एक नहीं कई बार हुआ है। हिन्दू समाज को बार-बार जगाना पड़ता है… ऐसा ही काम डॉ हेडगेवार ने किया है। संघ ने हमेशा हिन्दुओं को जगाया है।”

लखनऊ में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्वयंसेवकों को लोगों के साथ मिलकर काम करने के लिए कहा। RSS के इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक पूरे उत्तर प्रदेश से शामिल हुए थे। RSS इस समय उत्तर प्रदेश में काफी एक्टिव है।

RSS सरकार्यवाह से पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत भी उत्तर प्रदेश के दौरे पर थे। उन्होंने इस दौरान उत्तर प्रदेश में हिन्दुओं की एकता की प्रशंसा भी की थी। अलीगढ़ में उन्होंने कहा था कि उत्तर प्रदेश में हिन्दू एकजुट हैं और इसी कारण से प्रदेश का माहौल बदला है। RSS मुखिया ने ऐसी एकता देश में बनाए जाने की बात की थी।

77 साल के बुजुर्ग को पीटा, घसीटकर अस्पताल से बाहर किया: पद से हटाया गया ‘रेड क्रॉस’ का कर्मचारी और डॉक्टर, मध्य प्रदेश पुलिस ने दर्ज की FIR

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में 77 वर्षीय साल के एक बुज़ुर्ग व्यक्ति के साथ सरकारी अस्पताल में डॉक्टर द्वारा मारपीट और दुर्व्यवहार किया गया है। घटना गुरुवार (17 अप्रैल 2025) की है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि डॉक्टर एक अन्य व्यक्ति के साथ बुज़ुर्ग को घसीटते हुए अस्पताल से बाहर ले जा रहा है और उसके साथ मारपीट कर रहा है।

पीड़ित का नाम उद्धवलाल जोशी है और वह नौगाँव शहर के रहने वाले हैं। वे अपनी पत्नी के इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुँचे थे। जोशी ने आरोप लगाया है कि उन्होंने समय पर पर्ची कटवाई और लंबी कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतज़ार किया। इस दौरान वे डॉक्टर राजेश मिश्रा के पास पहुँचे और उनसे बुजुर्ग होने की वजह से थोड़ा जल्दी देखने की विनय किया।

आरोप है कि डॉक्टर राजेश मिश्रा ने बुजुर्ग की बात सुनकर भड़क गए और चीखने-चिल्लाने लगी। इसी दौरान उन्होंने बुजुर्ग व्यक्ति को थप्पड़ और लात मारी और अस्पताल के कर्मियों को बुलाकर बाहर निकलवा दिया। अस्पताल के कर्मियों ने बुजुर्ग को घसीटते हुए अस्पताल से बाहर निकाल दिया। वायरल वीडियो में ये साथ दिख रहा है कि बुजुर्ग जमीन पर गिरा हुआ है और अस्पताल कर्मी उनका हाथ खींच रहे हैं।

इस घटना को लेकर बुजुर्ग जोशी ने डॉक्टर राजेश मिश्रा के खिलाफ स्थानीय नौगाँव थाने में एफआईआर भी दर्ज करवाई है। डॉक्टर राजेश मिश्रा जिला अस्पताल छतरपुर में अस्थि रोग विशेषज्ञ एवं संविदा स्नातकोत्तर चिकित्सा अधिकारी हैं। अपनी शिकायत में बुजुर्ग जोशी ने बताया कि वह अस्पताल में अपनी 70 वर्षीया पत्नी का इलाज कराने के लिए आए थे। इसी दौरान यह घटना हुई।

वहीं, अस्पताल प्रशासन ने इस घटना को लेकर अलग ही पक्ष रखा है। सिविल सर्जन जीएल अहिरवार कहना है कि उस समय अस्पताल में भीड़ ज़्यादा थी और जोशी ने कतार तोड़ते हुए सीधे डॉक्टर के पास पहुँचने का प्रयास किया। इसके बाद उनकी डॉक्टर से बहस शुरू हो हुई। उन्होंने दावा किया कि बुजुर्ग के साथ कोई मारपीट नहीं हुई है और डॉक्टर ने सिर्फ अनुशासन बनाए रखने के लिए आपत्ति जताई थी।

प्रशासन ने डॉक्टर राजेश मिश्रा का संविदा खत्म कर पद से हटाते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। वहीं, बुजुर्ग को घसीटने वाले रेड क्रॉस कर्मचारी राघवेंद्र खरे को भी हटा दिया गया है। वहीं, जाँच में डॉक्टर मिश्रा द्वारा बुजुर्ग के साथ मारपीट की घटना को सही पाया गया है। मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग द्वारा कहा गया है कि डॉक्टर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

वहीं, कॉन्ग्रेस ने इस घटना को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की है। पार्टी ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर वीडियो शेयर करते हुए इसे ‘अमानवीय और घटिया व्यवहार’ बताया है। कॉन्ग्रेस ने लिखा, “प्रदेश की भाजपा सरकार इस घिनौने व्यवहार पर चुप्पी साधे बैठी है। यह पहला मामला नहीं है, जब अस्पतालों में मरीजों को अपमान और पीड़ा का सामना करना पड़ा हो। राज्य में सेवा अब यातना में बदल गई है।”

रिजवान ने विधवा हिंदू महिला को फँसा कर मुस्लिम बनाया, महीनों तक करता रहा रेप: भाई संग मिल पीड़िता की 17 साल की बेटी का भी किया गैंगरेप, बिजनौर में गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश पुलिस ने बिजनौर में एक विधवा महिला और उसकी 17 साल की नाबालिग बेटी को अपनी हवस का शिकार बनाने वाले रिजवान को गिरफ्तार कर लिया है। ब्यूटी पार्लर चलाने वाली हिंदू महिला को रिजवान ने पहले अपने प्रेमजाल में फँसाया, उसके बाद उसका इस्लाम में धर्मांतरण कराकर मुस्लिम बना दिया। इतना ही नहीं, रिजवान के साथ-साथ उसके भाई ने भी किशोरी से दुष्कर्म किया।

मामला बिजनौर के नगर कोतवाली थाना क्षेत्र का है। हिंदू महिला के पति का पाँच साल पहले निधन हो गया था। उसकी 17 की एक बेटी है। परिवार का पालन-पोषण करने के लिए वह ब्यूटी पार्लर चलाती है। इसी दौरान उसकी मुलाकात जुलाहा मुहल्ले के रहने वाले रिजवान से हुई। रिजवान से महिला को अपने झाँसे में ले लिया और प्यार-मुहब्बत का नाटक करके उससे निकाह करने की बात कही।

महिला रिजवान की बातों में आ गई। रिजवान ने निकाह के नाम पर महिला का धर्म परिवर्तन करा दिया और उसका मुस्लिम नाम रख दिया। इसके बाद वह महिला से लगातार रेप करता रहा। इसके कारण महिला गर्भवती हो गई। इस बीच रिजवान ने पीड़ित महिला की 17 साल बेटी को निशाना बनाना शुरू कर दिया। आरोप है कि पिछले साल 10 अगस्त को ब्यूटी पार्लर गई तो रिजवान ने उसकी बेटी से रेप किया।

इतना ही नहीं, रिजवान ने अपने छोटे भाई इमरान से भी नाबालिग लड़की का रेप करवाया। आरोपितों ने नाबालिग लड़की को धमकाया कि अगर उसने इस बारे में अपनी माँ या किसी अन्य को बताया तो वे उसे और उसकी माँ की हत्या कर देंगे। उन लोगों ने पीड़िता पर धर्म परिवर्तन का दबाव डाला। आखिरकार पीड़िता ने घटना के बारे में अपनी माँ को बताया और कोतवाली थाने में संपर्क किया।

अपनी शिकायत में पीड़िता ने रिजवान और उसके भाई इमरान पर गैंगरेप करने, जान से मारने की धमकी देने, जबरन धर्म परिवर्तन कराने सहित कई शिकायतें कीं। शिकायतों के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपितों के खिलाफ पॉक्सो, गैंगरेप और धर्म परिवर्तन कानून विभिन्न कानून की अलग-अलग धाराओं में मामला दर्ज कर लिया। पुलिस ने रिजवान को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि इमरान फरार है।

जेल में PM मोदी और अमित शाह, पंजाब अलग देश: ‘खालसा डे परेड’ के दौरान कनाडा में खालिस्तानियों का उत्पात, तिरंगे का भी अपमान

कनाडा के सरे शहर में शनिवार (19 अप्रैल 2025) को वार्षिक खालसा दिवस वैसाखी परेड का आयोजन किया गया, जिसमें भारत विरोध नारे लगाए गए। परेड में 5,50,000 से अधिक लोग शामिल हुए थे। इस परेड में खालिस्तान के झंडे और भारत विरोधी पोस्टरों को लहराया गया। इन पोस्टरों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के ‘वॉन्टेड’ बताया गया था।

बता दें कि सन 1699 में सिख धर्म के 10वें एवं अंतिम गुरु, गुरु गोविंद सिंह ने खालसा की स्थापना वैशाखी के दिन की थी। इसी के सम्मान में यह आयोजन किया जाता है। यह सिखों का सबसे बड़ा आयोजन है, जो दुनिया के सबसे बड़े आयोजनों में से एक है। यह सिख एकता और विविधता का उत्सव है, लेकिन अलगाववादियों ने इसे भी नहीं छोड़ा। सरे शहर में यह 1998 से निकाला जा रहा है।

परेड के प्रवक्ता मोनिंदर सिंह ने परेड को एकता, विविधता और साझा खुशी की सुंदर अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने कहा, “सरे नगर कीर्तन सिख समुदाय के लिए अपने इतिहास, प्रथाओं, मानवाधिकारों और संप्रभुता के प्रति प्रतिबद्धता को साझा करने का एक अवसर है।” हालाँकि, इस कार्यक्रम में कई लोगों के लिए संप्रभुता का मतलब खालिस्तान आंदोलन से था।

इस परेड में एक बड़ा ट्रेलर ट्रक भी शामिल किया गया था, जिस पर जेल बनाया गया था। इस ‘जेल’ के अंदर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री जयशंकर के पुतले नारंगी रंग की वर्दी में थे। ‘जेल’ के बगल में उन्हें सिखों का दुश्मन बताते हुए उनकी गिरफ्तारी की माँग करने वाले पोस्टर लगाए गए थे। उन पर खालिस्तानी आतंकवादी निज्जर की हत्या का आरोप लगाया गया था।

ट्रक पर एक और पोस्टर था, जिसमें लिखा था ‘भारत को विभाजित करो’। इसमें 1 नवंबर 2025 को वैंकूवर में ‘खालिस्तान जनमत संग्रह’ की भी घोषणा की गई थी। परेड के दौरान ‘मोदी राजनीति को मार डालो’, ‘निज्जर को किसने मारा? भारतीय सरकार’ जैसे नारे लगाए गए। परेड में भारतीय ध्वज का भी अपमान किया गया। तिरंगे को झाँकियों के पीछे लटकाया गया था, जमीन को छू रहा था।

खालिस्तानी आतंकवादी संतोख सिंह खेला भी परेड में मौजूद था। उसने मंच से पंजाब को भारत से अलग कर खालिस्तान बनाने की बात कही। परेड में हरदीप सिंह निज्जर और कनिष्क बम विस्फोट के मास्टरमाइंड तलविंदर सिंह परमार सहित कई आतंकवादियों का जश्न मनाया गया। यह घटना सरे में लक्ष्मीनारायण मंदिर और वैंकूवर में गुरुद्वारे पर खालिस्तानियों द्वारा भारत विरोधी और खालिस्तान समर्थक नारे कुछ ही घंटों बाद हुई।

लक्ष्मीनारायण मंदिर पर फिर हमला

कनाडा के सरे में 19 अप्रैल को लक्ष्मीनारायण मंदिर पर हमला किया गया। मंदिर की दीवारों और दरवाजों पर खालिस्तान समर्थक नारे लिख गए दिए गए। इसके साथ ही तोड़फोड़ भी की गई है। मंदिर समिति से जुड़े लोगों का कहना है कि ये हमले पूर्व नियोजित हो सकते हैं, ताकि सिख और हिन्दू समाज आपस में बँट जाएँ। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच शुरू की है।

कनाडा में मंदिर और गुरुद्वारों पर हमले का यह कोई पहला मामला नहीं है। 4 नवम्बर को भी कनाडा के ब्रैम्पटन में हिंदू मंदिर में श्रद्धालुओं पर खालिस्तानी समर्थकों की भीड़ द्वारा हमला किया गया था। इस दौरान, मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं पर लाठी-डंडे बरसाए गए और महिलाओं व बच्चों को भी नहीं बख्शा गया था।

रॉस स्ट्रीट गुरुद्वारे पर हमला

सरे के मंदिर के अलावा, वैंकुवर के खालसा दीवान सोसाइटी गुरुद्वारा (रॉस स्ट्रीट गुरुद्वारा) पर खालिस्तान समर्थक और भारत विरोधी नारे लिख दिए गए। गुरुद्वारा प्रबंधन ने इसका आरोप ‘चरमपंथी ताकतों’ पर लगाया है। वहीं, सरे स्थित लक्ष्मीनारायण मंदिर के दिवारों को भी ऐसे ही अपवित्र कर दिया गया। उधर, सरे में उसी दिन खालसा दिवस वैशाखी परेड में खालिस्तानी झंडे लहराए गए।

रॉस स्ट्रीट गुरुद्वारा प्रबंधन का का कहना है, “खालिस्तान की वकालत करने वाले सिख अलगाववादियों के एक छोटे समूह ने ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ जैसे विभाजनकारी नारे लगाकर हमारी पवित्र दीवारों को खराब कर दिया। यह कृत्य उन चरमपंथी ताकतों द्वारा चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है, जो कनाडाई सिख समुदाय के भीतर भय और विभाजन पैदा करना चाहते हैं।”