Home Blog Page 398

RG कर अस्पताल में जिस डॉक्टर की रेप के बाद कर दी गई हत्या, आज भी एक्टिव है उसका व्हाट्सएप: पीड़ित पिता का दावा, कहा- न्याय व्यवस्था से मेरा भरोसा उठ गया

कोलकाता के RG कर मेडिकल कॉलेज में रेप और हत्या मामले में पीड़िता के पिता ने CBI पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि जाँच एजेंसी असली दोषियों को बचा रही है। पिता ने ये भी दावा किया कि बेटी के मोबाइल नंबर से व्हाट्सएप ग्रुप लेफ्ट किया गया है। यानी मौत के बाद भी बेटी का मोबाइल फोन इस्तमाल किया जा रहा था।

मीडिया से बातचीत में पीड़ित पिता ने कहा, “CBI पर भरोसा था लेकिन अब हम सारी उम्मीद खो रहे हैं। CBI मेरी बेटी के बलात्कार और हत्या के पीछे के अपराधियों को जानती है लेकिन वह पूरे मामले का खुलासा नहीं कर रही है।”

CBI ने पेश की अलग-अलग रिपोर्ट

पीड़िता के पिता ने बताया कि CBI ने कोलकाता हाई कोर्ट और सियालदह के जिला कोर्ट में दो बिल्कुल अलग रिपोर्ट पेश की हैं। उन्होंने कहा, “हम हाईकोर्ट में यह बताएँगे कि दो अलग-अलग स्थित रिपोर्ट पेश की जा रही हैं। यहाँ तक कि सुप्रीम कोर्ट के जज भी उनके समक्ष प्रस्तुत की गई रिपोर्ट की गंभीरता पर संदेह कर रहे हैं।”

इसके अलावा पीड़िता के पिता ने दावा किया है कि CBI उनकी बेटी के असली अपराधियों को जानती है लेकिन किसी वजह से इसका खुलासा नहीं कर रही है। पीड़िता के पिता ने बताया कि उनका CBI से विश्वास टूटता नजर आ रहा है।

बेटी की मौत के बाद मोबाइल नंबर एक्टिव

पीड़िता के पिता ने यह भी दावा किया कि उनकी बेटी का मोबाइल हादसे में मौत के बाद भी एक्टिव है। उन्होंने बताया कि बेटी के नंबर से व्हाट्सअप ग्रुप में हलचल देखी गई है। उन्होंने बताया है कि उनकी बेटी को एक व्हाट्सएप ग्रुप से निकाल दिया गया गया है। उन्होंने बताया कि इसके लिए उनकी बेटी के फोन को एक्सेस किया गया है।

CBI के पास उसका फोन है लेकिन जाँच एजेंसी इस बात से इनकार करती है। पीड़िता के पिता का कहना है कि उनकी बेटी के मोबाइल फोन में सभी उत्तर हैं। उन्होंने कानूनी प्रक्रिया पर निराशा जताते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें भारतीय न्याय व्यवस्था में किसी पर भी अब भरोसा नहीं है।

मुख्य आरोपित को उम्रकैद

बता दें कि कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में 9 अगस्त 2024 को एक 31 वर्षीय महिला डॉक्टर की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था, जिसके बाद लोगों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया था। मामले की जाँच पहले स्थानीय पुलिस कर रही थी लेकिन कोलकाता हाईकोर्ट ने पुलिस की जाँच से असंतोष जताया। इसके बाद मामले को CBI को सौंपा गया था।

CBI ने मुख्य आरोपित संजय रॉय सहित कई लोगों को गिरफ्तार भी किया है, जिसे इस अपराध का दोषी माना गया। 20 जनवरी 2025 को कोलकाता हाईकोर्ट मामले में मुख्य आरोपित साबित करते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। फिलहाल इस मामले में सुप्रीम कोर्ट एक स्वतः संज्ञान याचिका पर सुनवाई कर रहा है। इसमें वरिष्ठ अधिवक्ता करुणा नंदी पीड़ितों के माता-पिता का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

मोदी सरकार का 1 फैसला… कॉन्ग्रेस की नौटंकी का हो गया द एंड: सरकार में रहते करते थी विरोध, विपक्ष में जाते ही चुनावी फायदे के लिए चिल्लाने लगी थी जाति-जाति

मोदी सरकार देश में जातीय जनगणना करवाएगी। यह जातीय जनगणना अगली सामान्य जनगणना के साथ होगी। इसको राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति ने मंजूरी दे दी है। मोदी सरकार ने यह भी आरोप लगाया है कि कॉन्ग्रेस और INDI गठबंधन के बाकी दल जाति जनगणना को एक राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करते रहे हैं।

बुधवार (30 अप्रैल, 2025) को यह फैसला केन्द्र सरकार की कैबिनेट की बैठक में लिया गया है। इस बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की। इस कैबिनेट बैठक में गन्ने का उचित मूल्य बढ़ाने समेत और भी कई फैसले लिए गए।

रेल और IT मामलों के केन्द्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति ने आज फैसला किया है कि जाति जनगणना को आगामी जनगणना में शामिल किया जाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि सरकार लोगों के हितों के प्रतिबद्ध है।

अश्विनी वैष्णव ने इसके साथ ही कॉन्ग्रेस पर हमला भी बोला। उन्होंने कहा, “मनमोहन सिंह ने लोकसभा से कहा था कि जातिगत जनगणना के लिए एक कैबिनेट समिति बनाई जाएगी। यह वादा पूरा नहीं हुआ… लेकिन कॉन्ग्रेस ने इसकी जगह पर केवल एक जाति सर्वे करवाया। उसका नाम SECC है।”

उन्होंने आगे कहा, “कॉन्ग्रेस और INDI गठबंधन के दलों ने जाति जनगणना को सिर्फ एक राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया। संविधान में जातिगत जनगणना केन्द्रीय सूची में है और केंद्र का अधिकार है। कुछ राज्यों में इसको लेकर सर्वे हुए हैं जो राजनीतिक नजरिए से किए गए हैं इनमे कोई पारदर्शिता नहीं है।”

अश्विनी वैष्णव ने आगे बताया, “इसी तरह के सर्वे के चलते सामाजिक सद्भाव में दरार पड़ी है। सामाजिक संरचना में राजनीतिक दरार ना पड़े इसलिए जनगणना में जातीय जनगणना को शामिल किया जाएगा। राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में यह फैसला लिया है।”

केन्द्र सरकार का यह फैसला कॉन्ग्रेस समेत तमाम दलों के लिए झटके के जैसा आया है। कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी जाति जनगणना को लम्बे समय से हथियार बनाते रहे हैं। मोदी सरकार ने इसे सामान्य जनगणना के साथ शामिल करके नहले पर दहला मार दिया है। अब कॉन्ग्रेस इस मुद्दे को नहीं भुना पाएगी।

इस फैसले की सराहना गृह मंत्री अमित शाह ने भी की है, उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में आज हुई CCPA की बैठक में, आगामी जनगणना में जातिगत गणना को शामिल करने का निर्णय लेकर सामाजिक समानता और हर वर्ग के अधिकारों के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता का संदेश दिया गया है।”

उन्होंने आगे लिखा, “कॉन्ग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने दशकों तक सत्ता में रहते हुए जातिगत जनगणना का विरोध किया और विपक्ष में रहते हुए इस पर राजनीति की। इस निर्णय से आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े सभी वर्गों का सशक्तीकरण होगा, समावेशन को बढ़ावा मिलेगा और यह वंचितों की प्रगति के नए मार्ग प्रशस्त करेगा।”

कॉन्ग्रेस ने वहीं एक ओर इस फैसले का स्वागत किया है तो वहीं दूसरी तरफ मोदी सरकार पर इसमें देरी का आरोप लगाया है।

‘हिन्दू डॉक्टर ने मरीज को मुस्लिम जानकर इलाज से किया इनकार’: पहलगाम अटैक के बाद ‘विक्टिम मुस्लिम’ नैरेटिव गढ़ने को The Quint ने परोसी फर्जी कहानी, ऐसे खुली पोल

सोशल मीडिया पर रविवार (26 अप्रैल ,2025) को ‘मुस्लिम पीड़ित’ की झूठी कहानी फैलाई गई, जिसमें दावा किया गया कि कोलकाता की एक स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ चंपाकली सरकार ने एक मुस्लिम मरीज का इलाज करने से इनकार कर दिया। आरोप था कि कस्तूरी दास मेमोरियल सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर चंपाकली ने कंगकोना खातून नामक महिला को उसके मजहब के चलते चिकित्सा सेवा देने से मना कर दिया।

रिपोर्ट में डॉ सरकार को विलेन दिखाने के लिए एक अपुष्ट कॉल रिकॉर्डिंग भी पेश की गई। यह उल्लेख करना ज़रूरी है कि उस ऑडियो क्लिप की अब तक कोई फॉरेंसिक जाँच नहीं हुई है और उसकी असलियत की पुष्टि नहीं हो सकी है।

हालाँकि, यह दावा पूरी तरह झूठा और भ्रामक निकला। यह घटना पहलगाम आतंकी हमले के बाद सामने आई उन कई फर्जी खबरों में से एक है, जो सोशल मीडिया और कुछ मीडिया संस्थानों द्वारा फैलाई जा रही हैं। इसके पीछे की मंशा इस्लामी आतंकवादियों द्वारा किए गए हिंदुओं के नरसंहार जैसे गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाना और हिंदुओं को गलत तरीके से खलनायक के रूप में प्रस्तुत करना प्रतीत होता है।

‘द क्विंट’ और कुछ अन्य मीडिया संस्थानों द्वारा इन फर्जी कहानियों को पुनः प्रकाशित कर तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया, जिससे सांप्रदायिक तनाव और गलतफहमियों को बढ़ावा मिला।

वामपंथी प्रोपेगेंडा आउटलेट ‘द क्विंट’ ने डॉ चंपाकली सरकार के हवाले से यह बयान दिया, “आपके मजहब के लोग मेरे धर्म के लोगों को मार रहे हैं, आप लोग हत्यारे हैं।”

‘द क्विंट’ की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

इसमें आगे आरोप लगाया गया है, “डॉक्टर ने कहा – आपके पति को हिंदुओं द्वारा मार दिया जाना चाहिए ताकि आप उस दर्द को महसूस कर सकें जो हिंदुओं ने झेला है। आपको अपने इलाज के लिए केवल मदरसों और मस्जिदों में जाना चाहिए, जहाँ मुस्लिमों को आतंकवादी बनना सिखाया जाता है।”

डिजिटल मीडिया पोर्टल ‘द क्विंट’ के हवाले से, ये बात सामने आई है जिसमें डॉ सरकार को एक कथित कॉल रिकॉर्डिंग के आधार पर खलनायक के रूप में दिखाया गया है। आरोप है कि यह रिकॉर्डिंग असत्यापित है और इसे बिना पुष्टि के रिपोर्ट में प्रमुखता दी गई। रिपोर्ट में कंगकोना खातून, उनके पति और भाभी महफूजा (जो पेशे से वकील हैं) के बयानों को गलत रूप में प्रस्तुत किया गया है।

वहीं, डॉ सरकार के पक्ष को बहुत ही सीमित जगह दी गई, जबकि पूरी रिपोर्ट उन्हीं के इर्द-गिर्द केंद्रित थी। रिपोर्ट के अनुसार, पत्रकार अलीज़ा नूर ने इस ख़बर को लिखा, जिन पर पहले भी ‘मुस्लिम पीड़ित’ की कहानी को स्थापित करने के लिए एक फर्जी खबर फैलाने के आरोप लग चुके हैं।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्टस के अनुसार, डॉक्टर को मरीज के मजहब का पता नहीं था और उसके सरनेम ‘खातून’ की जानकारी मिलने के बाद डॉक्टर नाराज हो गई।

शिकायत के अनुसार, डॉक्टर पिछले 7 महीनों से महिला का इलाज कर रही थी, डॉक्टर मरीज का पहला नाम कोंकणा से जानती थी। आरोप लगाया गया है कि उसका सरनेम ‘खातून’ देखकर डॉक्टर ने कथित तौर पर कहा की वो मुस्लिम महिला का इलाज नहीं करेंगी। बकौल रिपोर्ट, डॉक्टर ने हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले का हवाला दिया और मजहबी कट्टरता के आरोप लगाए।

इस फर्जी खबर को मुस्लिम मिरर, डेक्कन क्रॉनिकल, मकतूब मीडिया और सियासत जैसी इस्लामी प्रचार साइटों द्वारा प्रोपेगंडा के तहत फैलाने का काम किया गया।

दावे बनाम सच्चाई, क्या था असल मामला?

कंगकोना खातून पिछले 7 महीने से अपनी नियमित जाँच के लिए डॉ सरकार के पास जा रही थीं। इतने लंबे समय तक इलाज के दौरान डॉक्टर को मरीज की मजहबी पहचान का पता न चलना असंभव सा लगता है। यदि डॉक्टर पूर्वाग्रही होतीं, तो शुरुआत से ही इलाज करने से इनकार कर देतीं। खातून का कहना है कि डॉक्टर को उसके उपनाम के बारे में हाल ही में जानकारी मिली और तभी से उनके व्यवहार में बदलाव आया।

दिलचस्प बात यह है कि यह खुलासा पहलगाम आतंकी हमले के दो दिन बाद हुआ। उसके मुताबिक, गुरुवार (24 अप्रैल, 2025) को डॉक्टर ने उसका इलाज करने से मना कर दिया, जिसके बाद 25 अप्रैल को उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। हालाँकि, जब जाँच शुरू हुई और तथ्य सामने आए, तो उसके आरोपों की बुनियाद कमजोर पड़ गई।

डॉक्टर को महिला के पूरे नाम से ही जा रहा था पेमेंट, देख सकते हैं सरनेम

कोलकाता के प्रसिद्ध एनेस्थेसियोलॉजिस्ट डॉ प्रमोद रंजन रॉय ने गुरुवार (24 अप्रैल 2025) को सोशल मीडिया पर एक स्क्रीनशॉट साझा किया, जिसमें दिखाया गया था कि कंगकोना खातून ने डॉ चंपाकली सरकार को परामर्श शुल्क का भुगतान किया था। यह स्क्रीनशॉट उसी दिन का था जिस दिन खातून ने आरोप लगाया था कि उनका उचित इलाज नहीं किया गया और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया।

यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब किसी तरह का इलाज किया ही नहीं गया, तो मरीज ने डॉक्टर को जाँच के लिए परामर्श शुल्क क्यों अदा किया?

इस मुद्दे पर अब और भी स्पष्टता आ गई है। मंगलवार, (29 अप्रैल, 2025) को ‘पश्चिम बंगाल डॉक्टर्स फोरम’ (WBDF) द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि उन्होंने डॉ चंपाकली सरकार द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों की समीक्षा की है, और उस समीक्षा के आधार पर उनके बयान को सही और विश्वसनीय माना है।

WBDF द्वारा प्रेस विज्ञप्ति

WBDF ने अपने बयान में कहा, “संबंधित डॉक्टर से सीधे संपर्क करने और तथ्यों की पुष्टि करने के बाद, हमने पाया कि बताए गए तथ्य प्रसारित किए जा रहे आरोपों के विपरीत हैं। वास्तव में, जिस मरीज़ की बात हो रही है, उसे मरीज़ के अनुरोध पर डॉक्टर ने उसके घर पर देखा था। सबूत के तौर पर, हमने परामर्श शुल्क की ऑनलाइन भुगतान रसीद की पुष्टि की है, जिस पर उचित समय और दिनांक अंकित है, जो बताता है कि परामर्श वास्तव में हुआ था।” WBDF के बयान ने कंगकोना खातून के झूठ की हवा निकाल दी।

यह बताया गया है कि खातून ने डॉ चंपक और सरकार के बीच एक निजी बातचीत सुनी थी, जो उनके खातून से संबंधित नहीं थी।

इसमें यह भी बताया गया है कि पहले भी डॉक्टरों को झूठे आरोपों के तहत इसी तरह निशाना बनाया गया है। ऑपइंडिया ने इस मामले को लेकर ‘पश्चिम बंगाल डॉक्टर्स फोरम’ (WBDF) के सदस्य डॉ. कौशिक चाकी से संपर्क किया, जिन्होंने प्रेस विज्ञप्ति की प्रामाणिकता की पुष्टि की।

डॉ चंपाकली सरकार का क्या कहना है

डॉ प्रमोद रंजन रॉय द्वारा शेयर किए गए वीडियो में पीड़िता डॉ चंपाकली सरकार ने अपना बयान दिया है।

उन्होंने अपने बयान में लिखा, “मैं डॉ CK सरकार हूँ। मैं पिछले 30 सालों से बेहाला, साउथ 24 परगना में प्रैक्टिशनर हूँ। मैं मेडिकल नैतिकता में विश्वास रखती हूँ। मेरे लिए सभी मरीज एक समान हैं। मैं अपने सभी मरीजों को समान प्राथमिकता देती हूँ। मेरी नजर में जाति, धर्म और नस्ल का कोई महत्व नहीं है। मैं मरीजों का सही और नैतिक तरीके से इलाज करने की पूरी कोशिश करती हूँ। कुछ लोगों को मुझसे दिक्कत थी। आप लोग अफवाहों पर ध्यान न दें। मेरे करियर को बर्बाद करने की कोशिश की गई है। मुझे सोशल मीडिया और न्यूज रिपोर्ट से जानकारी मिली है। संकट के समय में इस तरह की अफवाहें फैलाई जाती हैं। मुझे उम्मीद है कि आप लोग इस पर विश्वास नहीं करेंगे।”

साथ ही, डॉक्टर ने निजी कारणों से अपने 3 दशक लंबे करियर को बर्बाद करने की कोशिश करने के लिए खातून के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की बात भी कही है।

डॉ चंपाकली सरकार ने ‘द टेलीग्राफ’ को बताया, “मेरे 80 प्रतिशत मरीज़ मुस्लिम हैं। क्या मैं कुछ ऐसा कहूँगी जिससे मुझे सबसे ज़्यादा दुःख पहुँचे? मैंने परनाश्री पुलिस स्टेशन में शिकायत भी दर्ज कराई है कि मुझे बदनाम किया जा रहा है।”

डॉक्टर ने यह भी कहा की यह असत्यापित ऑडियो कॉल रिकॉर्डिंग फ़र्जी है। उन्होंने ‘द क्विंट’ से कहा, “नहीं, यह सब फ़र्ज़ी है, यह मेरी कॉल रिकॉर्डिंग नहीं है।”

यह हिंदू समुदाय को बदनाम करने का पहला प्रयास नहीं है। हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद, ऐसी साजिशों की कोशिश हुई हैं जिनका इस्तेमाल आकर आतंकी हमलों के पीछे मजहबी घृणा वाली वास्तविकता से ध्यान बँटाया जा सके, कश्मीरियों और मुस्लिमों को हिन्दुओं द्वारा निशाना बनाए जाने की झूठी कहानी गढ़ी जा सके।

इस रणनीति के तहत ‘मुस्लिम पीड़ित’ कार्ड का इस्तेमाल किया गया, ताकि बहस का केंद्र आतंकवाद से हटकर सांप्रदायिक पीड़ाओं की ओर मोड़ा जा सके। इसी सिलसिले में, एक और फ़र्ज़ी खबर सोशल मीडिया पर फैलाई गई, जिसमें दावा किया गया कि बेंगलुरु में एक मुस्लिम कॉर्पोरेट कर्मचारी की मौत उसके हिंदू सहकर्मियों द्वारा ‘गायत्री मंत्र’ ज़बरदस्ती जपवाने और पहलगाम हमले पर प्रतिक्रिया न देने के कारण हुई।

इस फर्जी खबर का पर्दाफाश ऑपइंडिया ने किया। यह कहानी मूल रूप से एक लिंक्डइन यूजर इशान सक्सेना की मनगढ़ंत पोस्ट पर आधारित थी, जिसे तथाकथित पत्रकार अलीजा नूर ने बिना किसी तथ्य की जाँच के रिपोर्ट किया। इस खबर को वामपंथी मीडिया प्लेटफॉर्म ‘द क्विंट‘ ने प्रमुखता से प्रकाशित किया, लेकिन जब सच्चाई सामने आई, तो बिना किसी माफ़ीनामे के चुपचाप हटा दिया गया। यह दिखाता है कि किस तरह तथ्यों की पुष्टि किए बिना ‘नैरेटिव’ गढ़ने की कोशिश की जाती है, और जब वो फिट नहीं बैठती, तो उसे दबा दिया जाता है।

नूर, जिन्होंने पहले कोलकाता के डॉक्टर की कहानी लिखी थी, अब ताज़ा खुलासे के बाद अपने एक्स (Twitter) और इंस्टाग्राम अकाउंट डिलीट कर चुकी हैं। इसी प्रोपेगेंडा तंत्र ने जामिया मिलिया इस्लामिया की एक कश्मीरी छात्रा के साथ छेड़छाड़ की घटना को भी बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया था। लेकिन जब बाद में मामला  सामने आया कि आरोपित मेवात का मोहम्मद आबिद है, तो यह पूरा नैरेटिव अचानक शांत हो गया।

6 महीने जेल में रखा, बार-बार याचिका की खारिज: आखिरकार ISKCON संत चिन्मय कृष्ण दास को बांग्लादेश में जमानत, हिन्दुओं की आवाज उठाने पर ठोंक दिया था देशद्रोह

बांग्लादेश में राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किए गए ISKCON संत चिन्मय कृष्ण दास को जमानत मिल गई है। उन्हें बांग्लादेश के हाई कोर्ट ने जमानत दी है। चिन्मय कृष्ण दास को हिन्दुओं के अधिकारों के लिए आवाज उठाने पर मोहम्मद यूनुस की सरकार ने गिरफ्तार कर लिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चिन्मय कृष्ण दास को बुधवार (30 अप्रैल, 2025) को बांग्लादेश के हाई कोर्ट ने जमानत दी। जस्टिस अताउर रहमान और जस्टिस मोहम्मद अली रेजा ने उनकी जमानत का आदेश पारित किया। इससे पहले 23 अप्रैल, 2025 को उन्हें जमानत देने से मना करते हुए आदेश सुरक्षित रख लिया था।

चिन्मय कृष्ण दास की अभी जेल से रिहाई नहीं हुई है, कोर्ट का आदेश जेल अधिकरियों के पास पहुँचने के बाद उन्हें रिहा कर दिया जाएगा। चिन्मय कृष्ण दास के लिए जमानत की याचिका डालने वाले वकील अपूर्ब कुमार भट्टाचार्य ने कोर्ट को बताया था कि हिन्दू संत जेल के भीतर बीमार हैं और समस्याओं से गुजर रहे हैं।

चिन्मय कृष्ण दास को यह जमानत उनके गिरफ्तार किए जाने के 6 महीने बाद दी गई है। उनके गिरफ्तार किए जाने के बाद रिहाई की माँग करने वाले हिन्दुओं पर भी हमला कर दिया गया था। उन्हें जेल के भीतर खाना देने गए लोग भी गिरफ्तार कर लिए गए थे।

बांग्लादेश में चिन्मय कृष्ण दास को जमानत ना देने के लिए भी लगातार प्रयास हो रहे थे। एक बार उन्हें 30 मिनट सुनवाई के बाद जमानत देने से इनकार किया गया तो एक बार उनकी याचिका में खामी निकाल दी गई थी। उनके वकील रबीन्द्र घोष पर भी हमला हुआ था।

क्यों गिरफ्तार हुए थे चिन्मय कृष्ण दास?

25 अक्टूबर, 2024 को बांग्लादेश के चटगाँव में हिन्दुओं ने एक रैली आयोजित की थी। इस रैली का नेतृत्व चिन्मय कृष्ण दास कर रहे थे। यह रैली चटगाँव में ऐतिहासिक लाल दीघी मैदान में आयोजित की गई थी। इसमें हजारों हिन्दू शामिल हुए थे। चटगाँव में यह रैली हिंदुओं पर इस्लामी कट्टरपंथियों के हमलों के विरोध में आयोजित की गई थी।

इस रैली के दौरान हिन्दुओं ने भगवा झंडे लहराए और सरकार से कार्रवाई की माँग की। चटगाँव में हुई इस रैली के कारण इस्लामी कट्टरपंथी बिदक गए। उन्होंने इस रैली में एक जगह पर एक भगवा झंडा, बांग्लादेश के झंडे से ऊँचा लहराता हुआ देख लिया।

इसी के आधार पर फिरोज खान नाम के एक शख्स ने चटगाँव में ही चिन्मय कृष्ण दास समेत 19 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई थी। फिरोज खान ने आरोप लगाया था कि बांग्लादेश का झंडा नीचे करके लहराया जा रहा था जो इसका अपमान है और यह देशद्रोह का कार्य है। फिरोज ने आरोप लगाया था कि इससे चिन्मय कृष्ण दास देश में अशांति लाना चाहते हैं।

इसके बाद चिन्मय कृष्ण दास को गिरफ्तार कर लिया गया तगा। उन्हें चटगाँव की अदालत में पेश किया गया। यहाँ मजिस्ट्रेट काजी नजरुल इस्लाम ने उन्हें देशद्रोह का आरोपित मानते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया और जेल भेज दिया था।

‘शौर्य चक्र विजेता की माँ को पाकिस्तान डिपोर्ट होने का डर’: इंडियन एक्सप्रेस की खबर का J&K पुलिस ने किया फैक्ट चेक, कहा- ऐसी झूठी बातें मत फैलाओ

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद लगातार पाकिस्तानी नागरिकों की वापसी कराई जा रही है। इसी बीच पाकिस्तानियों की पीड़ा दिखाने के नाम पर कुछ मीडिया संस्थान प्रोपेगेंडा चला रहे हैं। इसी कड़ी में अंग्रेजी मीडिया संस्थान इंडियन एक्सप्रेस ने एक झूठी खबर चलाई। इंडियन एक्सप्रेस ने यह प्रोपेगेंडा सच्चाई जानते हुए किया।

इंडियन एक्सप्रेस ने बुधवार (30 अप्रैल 2025) ने एक भ्रामक खबर प्रकाशित की। इस खबर में इंडियन एक्सप्रेस ने दावा किया कि आतंकियों से लड़ते हुए एक सैन्य ऑपरेशन में बलिदान हुए जम्मू कश्मीर पुलिस के एक जवान की माँ को भी डिपोर्ट किया जाने वाला है।

इंडियन एक्सप्रेस के श्रीनगर एडिशन में 30 अप्रैल, 2025 को प्रकाशित इसी खबर में यह भ्रामक दावे किए गए

इंडियन एक्सप्रेस ने अपने श्रीनगर एडिशन में दावा किया कि शौर्य चक्र विजेता बलिदानी मुदस्सिर शेख की माँ शमीमा को पाकिस्तान वापस भेजे जाने वाली लिस्ट में रखा गया। इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि शमीमा के भारत छोड़े जाने की अफवाह भी फ़ैल गई।

उसने मुदस्सिर के परिजनों के भी कुछ बयान छापे। इनसे ऐसा सन्देश गया कि मुदस्सिर की माँ शमीमा को भारत छोड़ना ही पड़ा है। हालाँकि, इस पूरी खबर कि सच्चाई खुद शमीमा और बारामूला पुलिस ने पहले ही बयान कर दी थी। शमीमा अख्तर भारत में ही रहने वाली हैं।

29 अप्रैल, 2025 को एक्स (पहले ट्विटर) पर बारामूला पुलिस ने बताया था, “बलिदानी कांस्टेबल मुदस्सिर अहमद उर्फ ​​बिंदास की माँ के कथित डिपोर्टेशन के संबंध में सोशल मीडिया पर प्रसारित खबरें झूठी और निराधार हैं और उनका स्पष्ट रूप से खंडन किया जाता है।” पुलिस ने जनता और मीडिया से इस मामले को लेकर गलत सूचना फैलाने से बचने का आग्रह किया है।

वहीं शमीमा अख्तर का खुद का बयान इसी खबर में बताता है कि वह श्रीनगर इलाज के लिए गईं थी और इस बीच कुछ लोगों ने उनके पाकिस्तान जाने सम्बन्धी अफवाह फैलाई। शमीमा अख्तर ने पाकिस्तान जाने की बातों को नकार दिया है।

अब इंडियन एक्सप्रेस की यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। नेटिजन्स इसे पाकिस्तान के हित में उठाया गया कदम बता रहे हैं। अंकुर सिंह नाम के एक्स यूजर ने कटिंग को शेयर करते हुए लिखा, “क्या पाकिस्तानियों के लिए सहानुभूति बटोरने को ऐसी खबरें चलाई जा रही हैं?”

अन्य यूजर ने इंडियन एक्सप्रेस को फेक खबर फैलाने और भारत की छवि बिगाड़ने के चलते बैन करने की माँग की है। कमेंट में उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्री कार्यालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को टैग भी किया है।

कौन थे मुदस्सिर अहमद ?

कॉन्स्टेबल मुदस्सिर अहमद शेख साल 2022 में आतंकियों से लड़ते हुए बलिदान हो गए थे। पुलिस को 25 मई 2022 को एक वाहन में सवार हथियारों से लैस तीन आतंकवादियों की गतिविधि के बारे खुफिया जानकारी मिली थी। यह आतंकवादी अमरनाथ यात्रा पर हमला करने जा रहे थे।

इसके बाद बारामूला में सुरक्षाबलों ने आतंकियों के खिलाफ अभियान चलाया। इस ऑपरेशन में कॉन्स्टेबल मुदस्सिर अहमद शेख भी शामिल थे। उनको ऑपरेशन के बीच गोली लग गई। इलाज के लिए ले जाते समय मुदस्सिर अहमद की मौत हो गई।

इस ऑपरेशन में मुदस्सिर अहमद ने अप्रतिम शौर्य दिखाया था और एक आतंकी को गाड़ी से खींच लिया था। उनकी इस वीरता के चलते 2023 में उन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था। उनकी माँ शमीमा अख्तर ने अपने पति के साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से यह सम्मान प्राप्त किया था।

उरी में उनके नाम पर एक चौक भी है और कई पुलिस स्टेशन में भी उनकी तस्वीरें लगी हुई है। हालाँकि, इंडियन एक्सप्रेस ने यह सब ध्यान ना रखते हुए भ्रामक खबर फैलाई जिसकी सच्चाई बाहर आ गई।

सूरज की गर्मी से पिघलते हुए ग्लेशियर को मिलेगी ‘विज्ञान की छाया’, ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए ताप को कम करने पर काम कर रहे वैज्ञानिक: जानिए सब कुछ

विश्व भर के वैज्ञानिक तपती धरती को ठंडा करने के लिए एक नया प्रयोग करने जा रहे हैं। पिघलते ग्लेशियर बचाने और ग्लोबल वार्मिंग से लड़ने को वैज्ञानिक अब सूरज की रोशनी को ठंडा करना चाहते हैं। इसके लिए वैज्ञानिकों ने तकनीक भी खोज ली है।

यूनाइटेड किंगडम (UK) के वैज्ञानिक ने ग्लोबल वॉर्मिंग कम करने के लिए एक प्रयोग पर काम कर रहे हैं। इस प्रयोग में वह सूरज की रोशनी को कम करने या परावर्तित कर वापस अंतरिक्ष में भेजने की कोशिश करेंगे। ब्रिटिश सरकार की एडवांस रिसर्च एंड इनवेंशन एजेंसी (ARIA) की ओर से इस प्रयोग के लिए लगभग ₹550 करोड़ रुपए (50 मिलियन यूरो) का फंड तय किया है।

द टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के अनुसार, एरिया के प्रोग्राम डायरेक्टर प्रोफेसर मार्क साइम्स ने बताया कि ये कुछ ही जगहों पर किया जाएगा। उन्होंने कहा, “हम जो कुछ भी करेंगे वह सुरक्षित होगा। इस अनुसंधान के प्रति हम पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।”

इस प्रयोग के जरिए वैज्ञानिक प्रयोगशाला से इतर असल दुनिया में आने वाले परिणाम के आँकड़े जुटाना चाहते हैं ताकि इसको बड़े स्तर पर लागू करने के जोखिम पता किए जा सकें। सोलर जियोइंजीनियरिंग के जरिए किए जाने वाले इस प्रयोग का सीधा असर पर्यावरण पर होने का दावा किया जा रहा है।

इस प्रयोग के जरिए पृथ्वी ठंडी होने की बात कही जा रही है। यह भी बताया गया है कि बारिश के समय और तरीके में बदलाव हो सकता है। हालाँकि इस प्रक्रिया के कुछ नुकसान भी हैं, जिनका असर दीर्घकालिक हो सकता है।

क्यों हो रहा प्रयोग?

ग्लोबल वार्मिंग को लेकर पूरी दुनिया चिंता में है। पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है। इससे समुद्र का पानी गर्म हो रहा है और पहाड़ों पर मौजूद ताजे पानी के ग्लेशियर पिघल रहे हैं। इसे कम करने को लेकर दुनिया भर में वार्ता, कार्यक्रम समेत कई जतन किए जा रहे हैं। कई सुझाव दिए जा रहे हैं।

इसके अलावा जीवाश्म ईंधन को ना जलाने, अक्षय ऊर्जा का उपयोग करने और वैकल्पिक ऊर्जा का उपयोग करने समेत तमाम तरह की बातें हो रही हैं। हालाँकि इन सब का अब तक कोई गंभीर परिणाम निकल कर सामने नहीं आ रहा है।

संयुक्त राष्ट्र (UN) की 2024 की पर्यावरण को लेकर एक रिपोर्ट के अनुसार, कार्बन उत्सर्जन वर्तमान में जिस गति से बढ़ रहा है, उसके जारी रहने से वर्ष 2100 में पृथ्वी का तापमान 3.1 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। उस स्थिति में दुनिया भर में सूखा, बाढ़ जैसी आपदाएँ आ सकती हैं।

इससे फसलें तक बर्बाद हो सकती हैं। समुद्र के बढ़े हुए जलस्तर से शहर डूब सकते हैं। कई बीमारियाँ फैल सकती हैं। इसके लिए पेरिस जलवायु समझौते में वैश्विक औसत तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री तक कम करने का लक्ष्य दुनिया भर के कई देशों ने लिया था। हालाँकि, फिर भी बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग में ये लक्ष्य हासिल करना मुश्किल लग रहा है।

सूरज की रोशनी घटाने का विचार

विज्ञान के शोध और आविष्कार को प्रकाशित करने वाली अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका नेचर में 2014 में एक अध्ययन प्रकाशित हुआ था। इसमें बताया गया कि 2014 में आइसलैंड में एक ज्वालामुखी विस्फोट हुआ जिससे बड़ी मात्रा में सल्फर डाइऑक्साइड के कण हवा में पहुँचे। इससे बादलों में एक चमक देखी गई और पृथ्वी का तापमान भी कम हुआ।

लंदन स्थित इंपीरियल कॉलेज के सेबेस्टियन ईस्थम ने बताया, “विमान यात्रा के दौरान निकलने वाले जेट ईंधन में मौजूद सल्फर स्ट्रेटोस्फेयर (समताप मंडल) तक जाता है। सल्फर में कूलिंग इफेक्ट पहले से ही होते हैं तो इसका हम सही तरह से उपयोग कर सकते हैं।”

ये वैज्ञानिक तकनीक आ सकती है काम

इस प्रयोग के लिए वैज्ञानिक जियोइंजीनियरिंग की एक तकनीक स्ट्रेटोस्फेरिक एयरोसोल इंजेक्शन (SAI) की प्रक्रिया का उपयोग करेंगे। इस प्रक्रिया में हवाई जहाज के एक समूह से सल्फर या कैल्शियम कार्बोनेट के कण (एयरोसोल कणों) को स्ट्रैटोस्फेयर में छिड़का जाता है। इससे सूर्य की किरणें अंतरिक्ष की ओर परावर्तित हो जाती हैं। इससे पृथ्वी का वातावरण ठंडा हो जाता है।

जियोइंजीनयरिंग की दूसरी तकनीक मरीन क्लाउड ब्राइटनिंग है। इस प्रक्रिया में समुद्र के पानी से निकला वो नमक जिसको खाने लायक नहीं बनाया जा सकता, उसे बादलों में छिड़का जाता है। इससे बादल चमकदार बनते हैं जो सूर्य की किरणों को अंतरिक्ष में वापस भेजने में अपनी भूमिका निभाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सूर्य की रोशनी करने का ये प्रयोग सफल होता है, तो आगामी 10 वर्षों के भीतर इसे बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है।

प्रयोग में कई खतरे भी

जियोइंजीनियरिंग तकनीक को लेकर वैज्ञानिकों में मतभेद है। कृत्रिम रूप से जलवायु को बदलने का प्रयास करने वाली इस तकनीक पर कई विशेषज्ञों का कहना है कि यह उत्सर्जन को कम करने के प्रयासों से सिर्फ ध्यान भटकाने का एक कदम है। पृथ्वी पर उत्सर्जन जस का तस ही है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर माइल्स एलन का कहना है कि इस प्रयोग को शुरू तो आसानी से किया जा सकता है लेकिन प्रयोग का सुरक्षित होना एक अलग मसला है जिसमें दशकों लग सकते हैं। उन्होंने बताया है कि इसके अलावा अगर ये प्रयोग एकदम से रोका जाता है तो पृथ्वी का तापमान अचानक 4 से 6 गुणा तक बढ़ जाएगा।

उनके अनुसार, ये धरती के लिए ग्लोबल वार्मिंग से कहीं अधिक नुकसानदायक सिद्ध होगा।

वैज्ञानिकों ने चेताया

इस तकनीक का प्रयोग ना करने के लिए 60 वैज्ञानिकों के एक समूह ने एक खुला पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि एयरोसोल और पर्यावरण के बीच सामंजस्य स्थापित नहीं होता तो पृथ्वी पर प्राकृतिक आपदाएं बढ़ सकती हैं। ओजोन परत को नुकसान हो सकता है।

सूर्य की किरणें कमजोर हो सकती हैं तो प्रकाश संश्लेषण में कमी आ सकती है। इससे फसलों और प्रकृति को नुकसान होगा। कुल मिलाकर वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक रासायनिक हथियार के बराबर ही खतरनाक है।

निष्कर्ष

एक तरफ लगातार बढ़ते तापमान से हर कोई परेशान है तो इसे कम करने के वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा मिलना स्वाभाविक है। लोग ग्लोबल वार्मिंग से राहत तो चाहते हैं लेकिन संसाधनों का दोहन बंद नहीं करना चाहते। वहीं दूसरी ओर वैज्ञानिकों के समूह का कहना है कि इस तरह के प्रयोग को धरातल पर लाने से पहले गहन पड़ताल जरूरी है क्योंकि ये विनाश का कारण भी बन सकता है।

अंग्रेजों ने 208 साल पहले चुराई थी मराठा योद्धा की सोना जड़ित तलवार, अब उसे लंदन से वापस भारत ला रही BJP सरकार: महाराष्ट्र CM ने किया ऐलान, जानें कौन थे ‘राजे रघुजी भोसले’

जब अंग्रेजों ने भारत में लूटपाट मचाई थी तब उन्होंने मराठा साम्राज्य के नागपुर खजाने से कई ऐतिहासिक वस्तुएँ लूट ली थीं। इन्हीं में से एक थी मराठा सेनापति राजे रघुजी भोसले की लोकप्रिय ‘रघुजी तलवार’। अब इसे वापस भारत लाया जा रहा है। हाल ही में महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार ने तलवार को 47.15 लाख रुपये में नीलामी के दौरान खरीदा।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने तलवार को खरीदने की जानकारी दी। उन्होंने एक्स पर रघुजी तलवार की फोटो शेयर करते हुए मराठा विरासत के लिए अहम बताया। उन्होंने लिखा, “मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि राज्य सरकार ने नागपुर के भोसले परिवार के संस्थापक राजे रघुजी भोसले की ऐतिहासिक तलवार खरीद ली है, जिसकी लंदन में नीलामी हुई थी। इस प्रकार, हमारे मराठा साम्राज्य का एक मूल्यवान और ऐतिहासिक खजाना अब महाराष्ट्र में आएगा।”

लंदन के एक बिचौलिए से खरीदी तलवार

महाराष्ट्र सरकार ने रघुजी तलवार को लंदन से एक बिचौलिए से खरीदा है। सीएम ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि इसे सीधे नीलामी में खरीदने में कुछ तकनीकी समस्याएँ आ रही थी। राज्य के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार, सांस्कृतिक कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी विकास खड़गे ने इस कार्य को तेजी से पूरा किया। राज्य सरकार तलवार के लिए 47.15 लाख रुपये की नीलामी रकम का भुगतान करेगी। इसके बाद तलवार को महाराष्ट्र लाया जाएगा।

नीलामी आयोजित करने वाली सोथबी ने अपने पोर्टल पर रघुजी तलवार से जुड़ी सूचना साझा की। इसके अनुसार बाल्केट-हाल्ट तलवार 38,100 पाउंड में बेची गई है। नीलामी से पहले 6 हजार से 8 हजार पाउंड के बीच अनुमान लगाया गया था।

तलवार पर सोने का महीन

राजे रघुजी भोसले की यह तलवार मराठा शैली की ‘फिरंग’ किस्म की है। जो मराठा काल में काफी प्रसिद्ध थी। तलवार में एक तरफ ही धार है, जिसकी ब्लेड यूरोप में निर्मित हैं लेकिन तलवार पर भारतीय कलाकारी की झलक है। तलवार की हिल्ट (हाथ पकड़ने वाला हिस्सा) पारंपरिक ‘बास्केट स्टाइल’ में है, जिस पर सोने का महीन काम किया गया है। तलवार पर ‘श्रीमंत रघोजी भोसले सेना साहेब सुभा’ लिखा है।

इतिहासकारों के अनुसार, जब 1817 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने नागपुर का खजाना लूटा था। तभी यह तलवार भी अंग्रेजों के हाथ लगी थी। भारत से लौटते वक्त अपने साथ लंदन ले गए और अब तक वहीं किसी निजी संग्रह में इसे रखा गया था।

कौन थे रघुजी भोसले ?

रघुजी भोसले मराठा सम्राट छत्रपति शाहू महाराज के शासनकाल में एक प्रमुख सेनानायक थे। उनकी युद्ध नीति, साहस और नेतृत्व से प्रभावित होकर शाहू महाराज ने उन्हें ‘सेना साहेब सुभा’ की उपाधि दी थी। रघुजी भोसले ने 1745 में बंगाल के नवाबों के खिलाफ युद्ध अभियान का नेतृत्व किया। उन्होंने न केवल बंगाल और ओडिशा को मराठा साम्राज्य में शामिल किया। बल्कि दक्षिण भारत में भी अपनी राजनीतिक और सैन्य पकड़ मजबूत की।

पहलगाम में हिंदुओं की हत्या करवाने के बाद साइबर अटैक पर उतरा पाकिस्तान, लेकिन रहा नाकाम: देर रात LOC पर की हिमाकत तो भारतीय सेना ने दिया मुँहतोड़ जवाब

पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के सर पर भारत का खतरा मंडरा रहा है। हमले से बचने के लिए पाकिस्तान हर संभव प्रयास कर रहा है। इस बीच पाकिस्तान की एक नापाक कोशिश सामने आई है। पाकिस्तानी हैकर भारत के साइबर सिक्योरिटी को हैक करने की कोशिश कर रहे हैं हालाँकि ये वार भी खाली गया है।

जानकारी के अनुसार IOK हैकर यानि ‘इंटरनेट ऑफ़ खिलाफ़ा’ नामक समूह भारत की ऑनलाइन सेवाओं को रोकने और पर्सनल इंफोर्मेशन चुराने का काम कर रही थी। जिसके बाद भारतीय साइबर सुरक्षा प्रणाली को पाकिस्तान की इस नापाक हरकत की भनक लगी और ये हमला समय रहते विफल कर दिया गया।

इसके अलावा भारत की साइबर सुरक्षा प्रणाली को आर्मी वेलफेयर हाउसिंग ऑर्गनाइजेशन (AWHO) के डेटाबेस चुराने की जानकारी मिली। इसके अलावा भारतीय वायु सेना प्लेसमेंट संगठन पोर्टल को भी हैक करने का एक साथ प्रयास किया गया। सभी चार साइटों को तुरंत अलग कर दिया गया और कार्रवाई की गई, जिसके चलते समय रहते किसी भी तरह की कोई डेटा चोरी नहीं हो पाई।

शायद पाकिस्तान जानता नहीं है, कि वे कितने भी प्रयास भारत के खिलाफ कर ले, अंत में विफल ही होना है। क्योंकि भारतीय सेना अपनी डिजिटल स्पेस की रक्षा करने के लिए, साइबर सिक्योरिटी को लगातार अपग्रेड करती रहती है और हमेशा अलर्ट रहती है।

पाकिस्तान को हमले का डर

वहीं भारत के एक्शन के बाद पाकिस्तान में हमले के डर का माहौल है। और इसी बीच पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने बुधवार (30 अप्रैल 2025) को बताया कि उन्हें “विश्वसनीय खुफिया जानकारी” मिली है, कि भारत अगले 24 से 36 घंटों के भीतर सैन्य कार्रवाई कर सकता है।

यह दावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मंगलवार (29 अप्रैल 2025) को बैठक के बाद किया गया। बैठक में पीएम मोदी ने भारतीय सशस्त्र बलों को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब देने के लिए खुली छूट दी है।

एक्स (पहले ट्विटर) पर पोस्ट किए गए एक बयान में, तरार ने चेतावनी दी कि किसी भी तरह के हमले का जवाब वे देगा और भारत को ही जवाबदेह ठहराया जाएगा।

तरार ने कहा, “पाकिस्तान के पास विश्वसनीय खुफिया जानकारी है कि भारत पहलगाम की घटना को झूठा बहाना बनाकर अगले 24 से 36 घंटों के भीतर सैन्य हमला करने का इरादा रखता है।”

यह दावा ऐसे समय में आया है जब नियंत्रण रेखा (LoC) पर पहले से ही पाकिस्तानी सेना द्वारा गोलीबारी की जा रही है और भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद कश्मीर घाटी में आतंकवाद विरोधी अभियानों को तेज कर दिया है।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद LOC पर गोलीबारी

22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तानी सेना नियंत्रण रेखा (LOC) पर उकसावे के लिए छोटे हथियारों से गोलीबारी कर रही है, जिसका जवाब भी पाकिस्तानी सेना को प्रभावी ढंग से दिया जा रहा है। 29-30 अप्रैल 2025 की रात पाकिस्तानी सेना की ओर से कश्मीर के नौशेरा, सुंदरबनी और अखनूर सेक्टरों में फिर से गोलीबारी की गई, जिसका भारतीय सेना ने मुँहतोड़ जवाब दिया।

भारतीय सेना ने 28-29 अप्रैल 2025 की रात को भी कुपवाड़ा और बारामूला जिलों के विपरीत क्षेत्रों के साथ-साथ जम्मू और कश्मीर के अखनूर सेक्टर में नियंत्रण रेखा (LoC) के पार पाकिस्तान सेना द्वारा फिर से गोलीबारी कर उकसाने की प्रक्रिया को विफल कर दिया।

भारतीय सेना के अनुसार, भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तानी सेना द्वारा बिना उकसावे के की गई गोलीबारी का तेजी से और प्रभावी ढंग से जवाब दिया। 25-26 अप्रैल 2025 की रात को भी पाकिस्तानी सेना द्वारा की गई गोलीबारी के बाद भारत के जवाब का लगातार पाँचवाँ दिन है।

इससे पहले भी भारतीय सेना ने 27-28 अप्रैल 2025 की रात को कुपवाड़ा और पुंछ जिलों के विपरीत क्षेत्रों में LoC के पास पाकिस्तान सेना की गोलीबारी का मुँहतोड़ जवाब दिया था।

अपने तरीके से जवाब देने को स्वतंत्र है भारत, उसे आत्मरक्षा का पूरा अधिकार: इजरायल का खुला समर्थन, पहलगाम आतंकी हमले को 7 अक्टूबर के हमास अटैक जैसा बताया

पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद इजरायल के राजदूत रुवेन अजार ने भारत के प्रति अपना पूरा समर्थन जताया। यह भारत में पुलवामा हमले के बाद सबसे बड़ा आतंकी हमला था। अजार ने साफ तौर पर कहा कि इजरायल भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करता है और भारत की संप्रभुता का सम्मान करता है।

न्यूज चैनल WION के साथ बातचीत में रुवेन अजार ने पहलगाम हमले की तुलना 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल में हमास के हमले से की। उन्होंने कहा, “इस हमले का तरीका, लोगों को सिर में गोली मारना, धर्म के आधार पर निशाना बनाना, और छुट्टियाँ मना रहे आम लोगों को मारना, बिल्कुल वैसा ही है जैसा हमने इजरायल में देखा। वहाँ लोग म्यूजिक फेस्टिवल में थे, अपने घरों में सो रहे थे, तभी आतंकियों ने उन्हें मार डाला, लूटा और जलाया।”

उन्होंने इस हमले को आतंकवाद की वैश्विक समस्या का हिस्सा बताया और कहा कि भारत और इजरायल दोनों एक ही तरह के दर्द से गुजर रहे हैं। उन्होंने भारत के साथ एकजुटता दिखाते हुए कहा, “हम भारत के आत्मरक्षा के हक को पूरी तरह समर्थन देते हैं। यह हक संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में भी दर्ज है। भारत को कोई सलाह देने की जरूरत नहीं, वह खुद जानता है कि उसे क्या करना है।” हमले के तुरंत बाद इजरायल ने भारत के प्रति संवेदना जताई और हर तरह की मदद की पेशकश की।

रुवेन अजार ने बताया कि उन्होंने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की और कहा, “हमने संवेदना के साथ-साथ हर तरह की मदद का भरोसा दिया। भारत के पास पहले से ही बहुत कुछ है, लेकिन हम खुफिया जानकारी, तकनीक, और आतंकवाद से निपटने के तरीकों में सहयोग को और बढ़ाने को तैयार हैं।” बता दें कि भारत और इजरायल के बीच पहले से चले आ रहे गहरे रिश्ते की बात की और कहा कि यह सहयोग सिर्फ संकट के समय नहीं, बल्कि हर दिन होता है। वैसे, हम आपको याद दिला दें कि कारगिल युद्ध के दौरान, जब अमेरिका ने मदद से इनकार कर दिया था, तब इजरायल ने भारत का साथ दिया था।

इजारयली राजदूर रुवेन अजार ने भारत की भौगोलिक और मौसमी चुनौतियों का जिक्र किया और कहा कि इजरायल भारत से बहुत कुछ सीख सकता है, खासकर इतने बड़े देश में आतंकवाद से निपटने के तरीकों से। उन्होंने कहा, “भारत को विशाल इलाकों और मुश्किल मौसम में काम करना पड़ता है, यह हमारे लिए सीखने की बात है। वहीं, इजरायल के पास कुछ अलग अनुभव हैं, जैसे आतंकियों द्वारा बनाई गई सुरंगों से निपटना या मजहबी उन्माह में बौखलाए आतंकियों को रोकना।” उन्होंने इन अनुभवों को साझा करने की बात कही, ताकि दोनों देश एक-दूसरे की मदद कर सकें।

आतंकवादी संगठनों के बीच वैश्विक साठगांठ पर चिंता जताते हुए अजार ने कहा कि हाल ही में हमास की पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूदगी को भारत और इजरायल दोनों ने गंभीरता से लिया। उन्होंने कहा, “आतंकी संगठन एक-दूसरे से प्रेरणा लेते हैं, ट्रेनिंग देते हैं, और मजहबी उन्माद फैलाते हैं। हमास ने 7 अक्टूबर को जो बर्बरता की, उसे वह अपने समर्थकों को दिखा रहा था, ताकि अपने दुश्मनों में डर पैदा कर सके। यही चिंता की बात है।” उन्होंने पहलगाम हमले को भी इसी तरह की रणनीति का हिस्सा बताया, जहाँ आतंकियों ने छुट्टियाँ मना रहे लोगों को निशाना बनाया।

पाकिस्तान के ‘स्वतंत्र जाँच’ के प्रस्ताव को अजार ने पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने इसे ‘धोखा’ करार देते हुए कहा, “एक तरफ आतंकियों को पनाह देना और दूसरी तरफ जाँच की बात करना, यह दोहरा चरित्र है।” उन्होंने मुंबई 26/11 और पठानकोट हमलों का जिक्र किया, जब भारत ने पाकिस्तान को सबूत दिए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान का यह प्रस्ताव सिर्फ दुनिया को भ्रमित करने की कोशिश है।” भारत की कूटनीतिक कार्रवाइयों की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अपने क्षेत्र और पड़ोसी देशों की स्थिति को अच्छे से समझता है और उसे कोई सलाह देने की जरूरत नहीं।

रुवेन अजार ने आतंकवाद को एक वैश्विक समस्या बताते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने भारत द्वारा कुछ YouTube चैनलों पर बैन लगाने जैसे कदमों की सराहना की और कहा कि ऐसी कंपनियों को सजा मिलनी चाहिए जो आतंकियों को अपने प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने देती हैं। उन्होंने आतंकवाद को पैसा और पनाह देने वाले देशों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की वकालत की। उन्होंने कहा, “सीरिया, लेबनान, ईरान जैसे देशों को सजा मिली है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र इस दिशा में कुछ खास नहीं कर रहा। भारत और इजरायल जैसे देशों को मिलकर काम करना होगा।”

पहलगाम हमले को इजरायल के राजदूत रुवेन अजार ने इस क्षेत्र के लिए एक बड़ा मोड़ बताया, जैसा कि हमास का हमला उनके क्षेत्र के लिए था। उन्होंने कहा, “यह हमला इसलिए खास है क्योंकि आतंकियों ने छुट्टियाँ मना रहे लोगों को निशाना बनाया, ताकि उस इलाके में डर फैल जाए।” उन्होंने उम्मीद जताई कि यह घटना दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट करेगी। उन्होंने कहा, “आतंकवाद अब सिर्फ किसी एक देश की समस्या नहीं। यूरोप, अमेरिका, भारत, इजरायल हर जगह लोग धर्म के नाम पर मारे जा रहे हैं। हमें इसे रोकने के लिए साथ मिलकर काम करना होगा।”

इस इंटरव्यू के आखिर में रुवेन अजार ने भारत के आत्मरक्षा के हक को फिर से दोहराया और कहा, “हम भारत के साथ खड़े हैं। भारत को जो करना है, वह उसकी अपनी मर्जी है, लेकिन हम उसका पूरा समर्थन करते हैं।”

सेना को खूली छूट, PM मोदी ने कहा- कब-कहाँ-कैसे लेना है एक्शन तय करिए: पहलगाम आतंकी हमले के बाद तीनों आर्मी चीफ संग की बैठक, NSA-CDS-रक्षा मंत्री भी थे मौजूद

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया। आतंकियों ने हिंदू पर्यटकों को निशाना बनाया, जिसके बाद देश में गुस्सा और आक्रोश फैल गया। भारत सरकार ने इस हमले का जवाब देने के लिए तुरंत कड़े कदम उठाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए सेना को खुली छूट दे दी है।

प्रधानमंत्री आवास पर सोमवार और मंगलवार (28-29 अप्रैल 2025) को दो हाई-लेवल बैठकें हुईं। इनमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी और वायुसेना प्रमुख अमर प्रीत सिंह शामिल रहे। करीब 90 मिनट तक चली इन बैठकों में पहलगाम हमले के बाद की सुरक्षा स्थिति, आतंकियों के खिलाफ चल रहे ऑपरेशनों और भविष्य की रणनीति पर गहन चर्चा हुई।

पीएम मोदी ने कहा, “आतंकवाद का समूल नाश करना हमारी राष्ट्रीय प्रतिबद्धता है।” उन्होंने सेना की पेशेवर क्षमताओं पर भरोसा जताते हुए जवाबी कार्रवाई के तरीके, समय और लक्ष्य तय करने का पूरा अधिकार सशस्त्र बलों को सौंप दिया।

इससे पहले, सोमवार (28 अप्रैल 2025) को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने डर जताया था कि पहलगाम हमले के पलटवार में भारत पाकिस्तान पर कभी भी हमला कर सकता है। आसिफ ने रॉयटर्स से कहा था कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सैन्य हमला कर सकता है। ऐसे में पाकिस्तान ने अपनी सेना को मजबूत किया है और सैन्य हमले की आशंका में रणनीतिक फैसले लिए हैं। आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान हाई अलर्ट पर है और वजूद का खतरा होने पर पाकिस्तान परमाणु हथियारों का भी इस्तेमाल कर सकता है।

बता दें कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार (Government of India) ने कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर भी सख्त कदम उठाए थे। सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया गया, अटारी सीमा (Atari Border) को तत्काल बंद किया गया, पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द किए गए और पाक उच्चायोग के रक्षा, वायु और नौसेना अताशे को एक हफ्ते में भारत छोड़ने का आदेश दे दिया। इस आदेश के बाद पाकिस्तानियों के भारत से वापस लौटने की भीड़ बढ़ गई, तो देश के अलग-अलग हिस्सों में उनकी धरपकड़ भी तेज हो गई।