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मुस्लिम दुकानदारों के साथ कारोबार जारी रखेगा बाँके बिहारी मंदिर, पहलगाम अटैक के बाद बहिष्कार की हो रही थी माँग: पुजारियों ने बताया ‘अव्यावहारिक’

वृंदावन के मशहूर बाँके बिहारी मंदिर ने मुस्लिम समुदाय के साथ व्यापार बंद करने की माँग को साफ तौर पर ठुकरा दिया है। मंदिर के पुजारी और प्रबंध समिति के सदस्य ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी ने इस माँग को व्यवहारिक रूप से गलत बताया। उन्होंने कहा कि वृंदावन में हिंदू और मुस्लिम बरसों से शांति और भाईचारे के साथ रहते हैं।

दरअसल, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद कुछ हिंदू संगठनों ने वृंदावन और मथुरा में प्रदर्शन किए। इन संगठनों ने हिंदू तीर्थयात्रियों और दुकानदारों से मुस्लिम समुदाय के साथ लेन-देन न करने की अपील की। साथ ही, मुस्लिम दुकानदारों से कहा गया कि वे अपनी दुकानों पर मालिक का नाम लिखें, ताकि उनकी पहचान हो सके।

काशी विद्वत परिषद के सदस्य नागेंद्र महाराज ने कहा था, “हमने मुस्लिम दुकानों की पहचान कर ली है। हिंदू दुकानदारों से कहा गया है कि वे उनके साथ व्यापार न करें और न ही उस समुदाय के लोगों को नौकरी दें।”

मुस्लिमों की बाँके बिहारी में आस्था

लेकिन मंदिर प्रशासन ने इस माँग को खारिज कर दिया। मंदिर के पुजारी और प्रबंधन समिति के सदस्य ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी ने सोमवार (28 अप्रैल 2025) को बयान दिया, “यह माँग व्यवहारिक नहीं है। मुस्लिम कारीगर और बुनकर यहाँ बाँके बिहारी के लिए वस्त्र बुनते हैं। कई मुस्लिम भक्त भी मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं।” उन्होंने बताया कि भगवान के लिए मुकुट और चूड़ियाँ जैसे सामान भी मुस्लिम कारीगर बनाते हैं। गोस्वामी ने कहा कि ज्यादातर स्थानीय लोग भी मानते हैं कि मंदिर में सभी समुदायों का योगदान बना रहना चाहिए।

पहलगाम हमले पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “हमले के दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। हम सरकार के साथ हैं। लेकिन वृंदावन में हिंदू और मुस्लिम शांति से रहते हैं।”

बता दें कि पिछले महीने भी मंदिर प्रशासन ने एक प्रस्ताव खारिज किया था, जिसमें मुस्लिम बुनकरों के बनाए भगवान कृष्ण के वस्त्रों पर रोक की बात थी। उस समय मंदिर ने कहा था कि वस्त्रों की पवित्रता और शुद्धता सबसे जरूरी है। अगर मुस्लिम कारीगर आस्था के साथ वस्त्र बनाते हैं, तो उनके वस्त्र लेने में कोई परेशानी नहीं है।

जस्टिन ट्रूडो के जाते ही कनाडा की जनता ने बाँध दिया खालिस्तानियों का बोरिया-बिस्तर: जगमीत सिंह खुद चुनाव हारे, पार्टी राष्ट्रीय दर्जा बचाने में रही नाकाम

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की लिबरल पार्टी ने सोमवार को संघीय चुनाव में जीत हासिल की है। वहीं पियरे पोलिएवरे की कंजर्वेटिव पार्टी ने हार स्वीकार कर ली है। चुनाव के नतीजों से सबसे बड़ी बात ये रही कि लिबरल पार्टी जो कुछ महीने पहले तक प्रधानमंत्री रहे जस्टिन ट्रूडो के नेतृत्व में भारी हार का सामना कर रही थी, उसने जीत हासिल की है।

इस चुनाव में खालिस्तानी नेता जगमीत सिंह की पार्टी एनडीपी को करारी शिकस्त मिली है। न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता जगमीत सिंह भी खुद ब्रिटिश कोलंबिया के बर्नाबी सेंट्रल से चुनाव हार गया है। इतना ही नहीं उसकी न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी का नेशनल पार्टी का दर्जा भी छिन गया है। राष्ट्रीय पार्टी के लिए कम से कम 12 सीटों की जरूरत थी लेकिन उसे सिर्फ 7 सीटें हासिल हुई हैं। करारी हार का जिम्मा उठाते हुए जगमीत सिंह ने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। जगमीत सिंह पिछले 8 सालों से पार्टी प्रमुख था।

हार स्वीकार करते हुए जगमीत सिंह ने कहा, ” मैं निराश हूँ कि हम ज्यादा सीटें नहीं जीत सके लेकिन हमारी पार्टी को लेकर मैं आशावादी हूँ। “

हालाँकि जगमीत सिंह की पार्टी की करारी हार को कनाडा में खालिस्तानियों को करारा झटका के तौर पर देखा जा रहा है। उसकी हार से भारत और कनाडा के बीच राजनयिक और व्यापारिक संबंधों को फिर से स्थापित करने में मदद मिलेगी। हाल के वर्षों में जगमीत सिंह और पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की गठजोड़ ने भारत के साथ कूटनीतिक रिश्ते खराब किए। इनलोगों ने आतंकवादी हरदीप निज्जर की हत्या में भारत के शामिल होने का आरोप भी लगाया। यही नहीं प्रधानमंत्री ट्रूडो ने 2020 में भारत में किसान आंदोलन के पक्ष में बयान दिया था। ऐसा करने वाले वो दुनिया के एकमात्र नेता थे। भारत ने ट्रूडो प्रशासन पर खालिस्तानियों के प्रति नरम रूख अपनाने का आरोप भी लगाया था। अब नए हालात में भारत-कनाडा के रिश्ते में सुधार हो सकता है। पीएम मोदी ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को जीत की बधाई दी है।

कनाडा चुनाव के नतीजों को ट्रंप की नीतियों से प्रभावित भी माना जा रहा है। देश के पब्लिक ब्रॉडकास्टर सीबीसी के मुताबिक लिबरल पार्टी की यह वापसी राष्ट्रपति ट्रम्प की टैरिफ नीतियों और कनाडा पर हमलों के कारण हुई है क्योंकि कुछ दिनों पहले तक पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के नेतृत्व में पार्टी भारी हार का सामना कर रही थी। अपने विजय भाषण में भी कार्नी ने अमेरिका की आलोचना की है।

उन्होंने कहा, ” हम अमेरिकी विश्वासघात के सदमे से उबर चुके हैं, लेकिन हमें सबक कभी नहीं भूलना चाहिए। जैसा कि मैं महीनों से चेतावनी दे रहा हूं, अमेरिका हमारी जमीन, हमारे संसाधन, हमारा पानी, हमारा देश चाहता है। ये बेकार की धमकियाँ नहीं हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प हमें तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं ताकि अमेरिका हम पर कब्ज़ा कर सके। ऐसा कभी नहीं होगा। लेकिन हमें इस वास्तविकता को भी पहचानना चाहिए कि हमारी दुनिया मौलिक रूप से बदल गई है।”

बांग्लादेश में हिंदू मंदिर तोड़ा, 200 साल पुराने श्मशान को ‘पशु बाजार’ में बदलने की साजिश: भेद खुला तो अधिकारी बोले- भूल से गिर गया पिलर

बांग्लादेश में हिंदुओं के निर्माणाधीन मंदिर और 200 साल पुराने श्मशान को नष्ट किया जा रहा है, ताकि उसे ‘पशु बाजार’ बनाया जा सके। ये मामला मैमनसिंह जिले के उचाखिला यूनियन का है, जहाँ रविवार (27 अप्रैल 2025) को हिंदुओं ने मंदिर में तोड़फोड़ और 200 साल पुराने श्मशान को ‘पशु बाजार’ में बदलने के प्रयासों के खिलाफ कड़ा विरोध प्रदर्शन किया।

जानकारी के अनुसार, हिंदुओं का आरोप है कि ईश्वरगंज उपजिला के निर्बाही अधिकारी (UNO) मोहम्मद एरशादुल अहमद हिंदू मंदिर और श्मशान को जबरन ध्वस्त करवा रहा है, ताकि वो वहाँ पर पशु बाजार बना रहे।

स्थानीय हिंदू नेता पिंटू चौधरी ने बताया कि उचाखिला यूनियन का श्मशान करीब 200 साल पुराना है और इसके समीप ही एक मंदिर का निर्माण कार्य प्रगति पर था। पिंटू चौधरी ने बताया कि UNO ने शनिवार (26 अप्रैल 2025) को मंदिर को गिराने का आदेश जारी कर दिया और श्मशान को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की घोषणा भी कर दी है।

हिंदू नेता पिंटू चौधरी ने कहा, “यह श्मशान और मंदिर हमारी आस्था का प्रतीक हैं और इन्हें किसी भी कीमत पर स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। सनातन धर्म के अनुयायी इस घटना से अत्यंत क्रोधित हैं और इसीलिए सड़कों पर उतरकर अपना विरोध जता रहे हैं।”

एक अन्य स्थानीय हिंदू नेता परेश साहा ने बताया कि एक इस्लामी ग्रुप हिंदुओं को इलाके से भगाने के लिए धमका रहा है, लेकिन उसके खिलाफ सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही। परेश साहा ने यह भी आरोप लगाया कि श्मशान भूमि को पशु बाजार बनाने के उद्देश्य से रेत से भरा जा रहा है। इसके अलावा शनिवार (26 अप्रैल 2025) को मंदिर के खंभों को भी तोड़ डाला।

बांग्लादेश पूजा उदजापन फ्रंट के सचिव बिजोय मित्रा शुवो ने बताया कि विध्वंस को रोकने के लिए हिंदुओं द्वारा पहले ही जानकारी दे दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई भी कार्रवाई नहीं की गई। हालाँकि, यूएनओ मोहम्मद एरशादुल अहमद ने इस पूरी घटना को मामूली बताने की कोशिश की और कहा कि मंदिर के खंभों का गिरना ‘अनजाने में’ हुआ है।

एक तरफ प्रशासन इसे गिरा रहा है, तो दूसरी तरफ मुस्लिम संगठन मामले से जुड़ी खबरों को दबाने में जुट गए हैं। इस्लामी आंदोलन की ईश्वरगंज उपजिला शाखा, इस घटना को तूल न देने का प्रयास कर रही है। सोमवार (28 अप्रैल 2025) को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने मंदिर और श्मशान के विध्वंस की खबरों को झूठा कहा।

बांग्लादेश में निशाने पर हिंदू

बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के 5 अगस्त 2024 को सत्ता से हटने के बाद से ही हिंदुओं पर अत्याचार की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। ऑपइंडिया इन मामलों की विस्तृत पड़ताल और रिपोर्टिंग करता रहा है।

ढाका के पतन के 3 दिनों के भीतर हिंदू मंदिरों, दुकानों और व्यवसायों पर कम से कम 205 हमले हुए हैं। ऑपइंडिया ने सबसे पहले खुलासा किया था कि कैसे मुस्लिम छात्रों ने 60 हिंदू शिक्षकों, प्रोफेसरों और सरकारी अधिकारियों को उनके पदों से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया।

मानवाधिकार कार्यकर्ता और निर्वासित बांग्लादेशी ब्लॉगर, असद नूर ने हाल ही में खुलासा किया है कि अल्पसंख्यक समुदाय को अब ‘जमात-ए-इस्लामी‘ में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

इसके बाद 28 सितंबर 2024 और 1 अक्टूबर 2024 के दौरान को ऋषिपारा बारवारी पूजा मंडप में कुल 4 मूर्तियों को और मणिकादी पालपारा बारवारी पूजा मंडप में 5 हिंदू मूर्तियों को तोड़ा था। फिर 3 अक्टूबर 2024 को, बांग्लादेश के ढाका डिवीजन के किशोरगंज में गोपीनाथ जिउर अखरा दुर्गा पूजा मंडप में 7 हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को नष्ट किया गया।

5 नवंबर 2024 को, चटगांव शहर के हजारी गली में हिंदू समुदाय पर पुलिस और कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने हमला किया। 29 नवंबर 2024 को, एक हिंसक मुस्लिम भीड़ द्वारा हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमला किया और 3 मंदिरों में तोड़फोड़ की। हमला जुम्मे की नमाज खत्म होने के तुरंत बाद हुआ। 30 नवंबर 2024 को, कारवान बाजार से पुलिस ने मुन्नी साहा नामक एक प्रमुख हिंदू पत्रकार को गिरफ्तार किया।

13 दिसंबर 2024 को चरमपंथियों के एक समूह ने महाश्मशान काली माता मंदिर पर हमला किया, 7 देवी-देवताओं की मूर्तियों को तोड़ी और सोने के आभूषण चुरा लिए। इसके बाद 19 दिसंबर 2024 को, अलाउद्दीन नामक एक मुस्लिम व्यक्ति ने पोलाशकंडा काली मंदिर में एक मूर्ति को तोड़ी। एक अन्य 37 वर्षीय अजहरुल नामक मुस्लिम व्यक्ति ने मैमनसिंह जिले के हलुआघाट उपजिला में कई देवी-देवताओं की मूर्तियों को तोड़ी।

चिनमोय कृष्ण दास प्रभु और उनके सहयोगियों की हालिया गिरफ्तारी, हिंदू संगठन इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाने के प्रयास और ‘राजद्रोह’ के मामलों के साथ हिंदू विरोध प्रदर्शनों को दबाना मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार द्वारा हिंदुओं के संगठित उत्पीड़न को दिखाता है।

लिबरल गैंग ने पहले खूब किया प्रचार- जामिया में कश्मीरी छात्रा से हुई छेड़छाड़, जैसे ही दरिंदा निकला मेवात का आबिद अली छाया सन्नाटा: पत्रकार से कहा- खबर दबाओ

दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में एक कश्मीरी लड़की से छेड़छाड़ की घटना हुई। पहले इसे वामपंथी गैंग ने प्रचारित किया लेकिन बाद में आरोपित मुस्लिम निकलने खबर दबाने को कहा गया। इस मामले की पूरी सच्चाई अब सामने आई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्विद्यालय में रविवार (27 अप्रैल 2025) की रात एक कश्मीरी छात्रा से कैंपस में ही छेड़छाड़ की गई। इस खबर को खूब हवा दी गई और बताया गया कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद कश्मीरी छात्रों को निशाना बनाया जा रहा है।

यह घटना जामिया मिलिया इस्लामिया के गेट नंबर आठ पर रविवार (27 अप्रैल 2025) को हुई। छात्रा लगभग 9.30 बजे छात्रा घर जा रही थी। इसी दौरान एक लड़के ने उसे रोककर बदसलूकी की। साथ ही उसे गलत तरीके से छुआ। घटना के समय विश्वविद्यालय की सुरक्षाकर्मी भी वहाँ थे। छात्रा ने विश्वविद्यालय प्रशासन को घटना की जानकारी दी। 

जामिया के छात्रों ने प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की माँग की। विश्वविद्यालय के प्रॉक्टोरियल और सुरक्षा दलों ने जामिया नगर पुलिस स्टेशन को बताया। पुलिस ने जाँच की तो पता चला कि आरोपित हॉस्टल की कैंटीन में काम करने वाला मोहम्मद आबिद है। वह हरियाणा के मेवात (नूह) के भैसी गाँव का रहने वाला है।

यह सूचना सामने आने के बाद कथित तौर पर इस खबर को दबाने का प्रयास किया गया। इस मामले को लेकर पत्रकार उबैर उल हमीद ने एक्स (पहले ट्विटर) पर इस संबंध में लिखा। उन्होंने कहा, “कल जामिया मिलिया इस्लामिया के कश्मीरी छात्रों ने हमसे एक स्टोरी हटाने को कहा, क्योंकि उन्हें डर था कि इससे समस्याएँ पैदा होंगी।”

हमीद ने बताया, “हमने हटा दिया, लेकिन आज यह हर जगह प्रकाशित हुई है। रातों-रात क्या बदल गया और अब यह ‘सुरक्षित’ क्यों है?” इस मामले में एक और खुलासा पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने किया। उन्होंने बताया कि संभवतः खबर दबाने को इसलिए कहा गया क्योंकि आरोपित मुस्लिम है और मेवाती है।

पहलगाम में हिन्दुओं पर हमले के तुंरत बाद यह नैरेटिव चलाया गया था कि देश भर में कश्मीरी छात्रों पर हमले हुए हैं। हालाँकि, एकाध जगह को छोड़ कर, ऐसी घटनाएँ सामने नहीं आई थीं। लेकिन इसे बड़ा बताने के लिए जामिया से सम्बन्धित खबर चलाई और गई जब आरोपित मुस्लिम और मेवाती निकल गया, तो इसे दबाने को कहा गया।

देश की सुरक्षा के लिए पेगासस का इस्तेमाल करना गलत नहीं: सुप्रीम कोर्ट, रिपोर्ट सार्वजनिक करने से इनकार; कहा- ऐसे मसलों पर सड़क पर नहीं होगी चर्चा

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (29 अप्रैल 2025) को पेगासस जासूसी मामले की सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए जासूसी सॉफ्टवेयर (स्पाइवेयर) का इस्तेमाल करने में कोई गलती नहीं है, लेकिन इसका निजी व्यक्तियों के खिलाफ दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने इस मामले में कई याचिकाओं पर सुनवाई की, जिसमें आरोप लगाया गया है कि भारत सरकार ने पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल पत्रकारों, जजों, कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों की जासूसी के लिए किया।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान देश की मौजूदा सुरक्षा स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे कठिन समय में सावधानी बरतनी जरूरी है। एक वकील ने जब कहा कि अगर सरकार ने स्पाइवेयर खरीदा है तो उसे इस्तेमाल करने से कोई नहीं रोक सकता, तो जस्टिस सूर्यकांत ने जवाब दिया, “अगर देश इस स्पाइवेयर का इस्तेमाल खतरनाक तत्वों के खिलाफ कर रहा है तो इसमें क्या गलत है? स्पाइवेयर रखने में कोई गलती नहीं है… हम देश की सुरक्षा के साथ समझौता नहीं कर सकते। निजी नागरिक, जिन्हें निजता का अधिकार है, उनकी रक्षा संविधान के तहत होगी… उनकी शिकायतों को हमेशा देखा जा सकता है।”

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पेगासस के कथित दुरुपयोग की जाँच के लिए गठित विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि यह रिपोर्ट देश की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ी है, इसलिए इसे सड़कों पर चर्चा का विषय नहीं बनाया जा सकता। हालाँकि कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रभावित व्यक्तियों को उनकी स्थिति के बारे में सूचित किया जा सकता है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “हाँ, व्यक्तिगत शंकाओं का समाधान होना चाहिए, लेकिन इसे सड़कों पर चर्चा का दस्तावेज नहीं बनाया जा सकता।”

यह मामला 2021 में उस समय सुर्खियों में आया था, जब न्यूज पोर्टल्स ने खुलासा किया था कि इजरायल की कंपनी एनएसओ ग्रुप के पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल भारत में पत्रकारों, कार्यकर्ताओं, वकीलों, अधिकारियों, एक पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज और अन्य लोगों के मोबाइल फोन में सेंधमारी के लिए किया गया। इन रिपोर्ट्स में एक लिस्ट का जिक्र था, जिसमें संभावित टारगेट्स के फोन नंबर शामिल थे। एमनेस्टी इंटरनेशनल की जाँच में कुछ फोन नंबरों में पेगासस की घुसपैठ के निशान मिले, जबकि कुछ में घुसपैठ की कोशिश के सबूत थे।

इस खुलासे के बाद सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएँ दाखिल हुईं, जिनमें वकील एमएल शर्मा, राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास, हिंदू ग्रुप के निदेशक एन. राम, एशियानेट के संस्थापक शशि कुमार, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया, पत्रकार रूपेश कुमार सिंह, इप्सा शताक्षी, परंजॉय गुहा ठाकुरता, एसएनएम आबिदी और प्रेम शंकर झा शामिल हैं। इन याचिकाओं में पेगासस के कथित इस्तेमाल की स्वतंत्र जाँच की माँग की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में इस मामले की जाँच के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस आरवी रविंद्रन की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित की थी। समिति ने जुलाई 2022 में अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी। रिपोर्ट में कहा गया कि जाँच किए गए 29 मोबाइल फोनों में पेगासस स्पाइवेयर नहीं मिला। हालाँकि 5 डिवाइस में कुछ मालवेयर पाए गए, लेकिन वे पेगासस नहीं थे। समिति ने यह भी बताया कि भारत सरकार ने जाँच में सहयोग नहीं किया।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि अमेरिका की एक जिला अदालत में व्हाट्सएप ने स्वीकार किया है कि पेगासस के जरिए हैकिंग हुई थी। सिब्बल ने कहा, “अब कोर्ट का सबूत है और व्हाट्सएप का सबूत है।” उन्होंने माँग की कि कम से कम समिति की जाँच रिपोर्ट याचिकाकर्ताओं को दी जाए। लेकिन कोर्ट ने कहा, “यह एक ऑब्जेक्टिव प्रश्न-उत्तर प्रकार का हो सकता है। आप पूछ सकते हैं कि क्या मैं इसमें शामिल हूँ। हम हाँ या ना में जवाब दे सकते हैं।”

वकील श्याम दीवान ने मामले की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा, “राज्य ने अपने नागरिकों के खिलाफ स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया। यह और भी बुरा है।” उन्होंने कहा कि इसमें पत्रकारों और जजों के खिलाफ इस्तेमाल के सबूत हैं। जवाब में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ऐसी दलीलें किसी और मंशा के साथ दी जा रही हैं। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि ये अभी सिर्फ आरोप हैं और व्यक्तियों को यह जानने का हक है कि क्या वे प्रभावित हैं, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी।

कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई 2025 को तय की है। सिब्बल को दो हफ्ते में अमेरिकी कोर्ट का फैसला और अन्य दस्तावेज जमा करने की इजाजत दी गई है।

पाकिस्तानी फौज का पूर्व कमांडो है पहलगाम में हमला करने वाला आतंकी हाशिम मूसा, लश्कर के लिए करता है जिहाद: कश्मीरी मददगारों ने पूछताछ के बाद उगला राज

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला करने वाले एक आतंकी की पहचान हाशिम मूसा के रूप में हुई है। हाशिम एक पाकिस्तानी है और वहाँ की फ़ौज का कमांडो भी रहा है। यह जानकरी पहलगाम में हुई आंतकी घटना की जाँच के बाद सामने आई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह जानकारी पहलगाम हमले के बाद 15 कश्मीरी ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGW) से पूछताछ के दौरान सामने आई है। उन्हें पहलगाम हमले में पाकिस्तानी आतंकवादियों को सहायता प्रदान करने के संदेह में हिरासत में लिया गया है।

इसके अलावा ओजीडब्ल्यू पर आरोप है कि आतंकवादियों के लिए लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था करने और हमले से पहले इलाके की रेकी करने में मदद की है। जिससे पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) की संभावित भूमिका की ओर भी इशारा मिलता है।

इस मामले से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, “संभावना है कि हाशिम मूसा को पकिस्तान के स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG) के द्वारा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) को सौंपा गया था ताकि वह जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे सके।”

जाँच में यह भी पता चला है कि हाशिम मूसा पहले भी कई आतंकी हमलों में शामिल रहा है। इसमें अक्टूबर 2024 में गांदरबल के गांगनगीर में हुआ हमला शामिल है, जिसमें कई निर्दोष लोग मारे गए थे। इसके अतिरिक्त, वह बारामूला के बूटा पथरी में हुए हमले में भी शामिल था, जिसमें दो भारतीय सेना के जवान और दो पोर्टर बलिदान हो गए थे।

पाकिस्तान में ट्रेन्ड दो स्थानीय आतंकवादी, जुनैद अहमद भट और अरबाज मीर गांगनगीर और बूटा पथरी के हमलों में भी शामिल थे। हालांकि, दोनों बाद में सुरक्षा बलों के साथ अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे गए थे।

इसी के साथ, खुफिया एजेंसियों ने आशंका जताई है कि कश्मीर में कई पर्यटन स्थलों पर पहलगाम जैसे और आतंकी हमलों हो सकते हैं है। जिसके चलते कश्मीर के 87 पर्यटन स्थलों में से 48 को तत्काल रुप से बंद कर दिए गए है। 

इंडिया टूडे की रिपोर्ट के अनुसार कम्यूनिकेशन इंटरसेप्ट ने पुष्टि की है कि पहलगाम हमले और भारत की जवाबी कार्रवाई के बाद घाटी में कुछ स्लीपर सेल सक्रिय हो गए हैं, जिन्हें फिर से हमला करने के निर्देश मिले हैं। बताया गया है , आतंकवादियों के घरों को गिराने की कार्रवाई का बदला फिर से पहलगाम से बड़े पैमाने पर हमलों की योजना हो सकती है।

पहलगाम में हिंदू पर्यटकों पर हुए हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कदम उठाए हैं। भारत ने सिंधु समझौता रद्द कर दिया है। इसके अलावा भारत ने पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा भी रद्द कर दिए हैं।

ST लड़की को जबरन मुस्लिम बनाने पर उबला झारखंड, अपहरण कर बंगाल में कराया धर्मांतरण: पूर्व CM बोले- निकाह करने वाला तस्लीम आलम पहले से ही 3 बच्चों का अब्बू

झारखंड के सरायकेला- खरसावाँ में एक मुस्लिम युवक को अपने से 13 वर्ष छोटी जनजातीय लड़की का धर्मांतरण करवाने के लिए गिरफ्तार किया गया है। मुस्लिम युवक ने लड़की का धर्मांतरण करवाने के बाद उसे पश्चिम बंगाल ले जाकर निकाह किया। आक्रोशित लोगों ने उसके घर पर भी पथराव किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि 32 साल के तस्लीम आलम ने 19 वर्षीय जनजातीय समाज की लड़की का अपहरण किया। उनका आरोप है कि इसके बाद जबरन उसका धर्मांतरण करवाया गया। यह घटना यहाँ के झिमरी गाँव में हुई।

लड़की की उम्र 19 वर्ष है। वह इंटरमीडिएट की छात्रा है। लड़की को इस्लाम कबूल करवाने के बाद तस्लीम ने पश्चिम बंगाल के बीरभूमि ले जाकर उससे निकाह किया। स्थानीय लोग इस पर आक्रोशित हैं। उन्होंने तस्लीम आलम के खिलाफ FIR दर्ज करवाई है।

पुलिस ने तस्लीम को गिरफ्तार कर लिया है। हालाँकि, कार्रवाई में देरी के चलते लोग आक्रोशित हो गए औए उन्होंने तस्लीम के घर पथराव कर दिया और आग लगा दी। स्थानीय लोगों को समझाने के लिए गई पुलिस टीम पर भी पत्थरबाजी हुई। इसके लिए कुछ स्थानीय लोगों को हिरासत में लिया गया है।

पुलिस ने तस्लीम को गिरफ्तार करने के साथ ही लड़की से भी पूछताछ की है। वह कुड़मी समुदाय की है। लड़की का कोर्ट में बयान भी दर्ज करवाया गया है। पुलिस ने कहा है कि आगे की कार्रवाई लड़की के बयान के आधार पर होगी।

धर्मांतरण के इस पूरे मामले को बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उठाया है। उन्होंने सीएम हेमंत सोरेन से इस मामले में कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने पोस्ट में निकाहनामे के दस्तावेज भी लगाए हैं। उन्होंने बताया है कि तस्लीम तीन बच्चों का बाप है।

बाबूलाल ने एक्स पर लिखा, “सरायकेला, झारखंड की एक बेटी का धर्म परिवर्तन कर बंगाल में विवाह कराने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार युवक तस्लीम, तीन बच्चों का पिता है, जबकि युवती इंटरमीडिएट की छात्रा बताई जा रही है। 19 वर्षीय युवती की उम्र भी संदेहास्पद मानी जा रही है। पुलिस इस मामले का संज्ञान लेकर शीघ्र उचित कारवाई करे।”

इसी के साथ उन्होंने सीएम सोरेन पर भी निशाना साधा। अपनी पोस्ट में आगे उन्होंने लिखा, “हम उम्मीद करते हैं कि ‘समर स्पेशल हॉली डे और शॉपिंग फेस्टिवल’ से वापस लौटने पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी इस संवेदनशील मामले का संज्ञान लेकर कठोर कार्रवाई का आदेश बिना विलम्ब देंगे।”

UN में उतर गया ‘दुष्ट पाकिस्तान’ का नकाब, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के कबूलनामे पर घिरा: आतंकियों को समर्थन-फंडिंग पर पूरी दुनिया के सामने भारत की योजना ने किया जलील

संयुक्त राष्ट्र में भारत की उप स्थाई प्रतिनिधि योजना पटेल ने पाकिस्तान के कबूलनामे को ही सबूत के रूप में पेश करते हुए जमकर पाकिस्तान की बखिया उधेड़ी। उन्होने कहा कि रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का कबूलनामा ये साबित करने के लिए काफी है कि इनका आतंकवाद को बढ़ावा देने का इतिहास रहा है जो पाकिस्तान को एक दुष्ट देश के रूप में स्थापित करता है।

आतंकवाद के शिकार देशों के नेटवर्क की शुरुआत के अवसर पर बोलते हुए उन्होने कहा कि “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक विशेष प्रतिनिधिमंडल ने इस मंच का दुरुपयोग करने और इसे कमजोर करने का विकल्प चुना है ताकि वह दुष्प्रचार में शामिल हो सके और भारत के खिलाफ निराधार आरोप लगा सके।”

आतंकवादी संगठनों को प्रशिक्षण, फंडिंग दे रहा पाकिस्तान- भारत

उन्होने कहा कि “पूरी दुनिया ने हाल ही में एक टेलीविजन साक्षात्कार में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ को आतंकवादी संगठनों को समर्थन, प्रशिक्षण और पैसे देने के पाकिस्तान के अतीत को स्वीकार करते हुए सुना है। यह रक्षा मंत्री का खुला कबूलनामा है जो किसी को भी आश्चर्यचकित नहीं करता है बल्कि पाकिस्तान को एक दुष्ट राज्य के रूप में उजागर करता है जो वैश्विक आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है और क्षेत्र को अस्थिर कर रहा है। दुनिया अब और आंखें मूंद कर नहीं रह सकती।”

योजना पटेल ने कहा कि 2008 के मुंबई धमाके के 17 साल बाद पहलगाम में आतंकी हमले में सबसे ज्यादा लोगों की मौत हुई है। भारत लगातार सीमा पार आतंकवाद से पीड़ित रहा है इसलिए आतंकवादी हमले के असर को बखूबी समझता है।

दुनिया ने इस हमले की तीखी आलोचना की है और ज्यादातर अहम देशों के नेताओं का समर्थन भारत को मिला है। ऐसे में पाकिस्तान जबरदस्ती प्रोपेगैंडा फैलाकर दुनिया को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री का बयान

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में एक टीवी चैनल को दिये इंटरव्यू में कहा था कि पाकिस्तान का आतंकियों को फंडिंग करने का इतिहास रहा है । उन्होने कहा था कि” पिछले 30 सालों से पाकिस्तान इस गंदे काम को अमेरिका के लिए करता रहा है।”

ख्वाजा आसिफ ने इंटरव्यू के दौरान स्वीकार किया था कि “लश्कर ए तैयबा का पाकिस्तान से कनेक्शन रहा है। यहां लश्कर के कई लिंक हैं हालाँकि अब ये संगठन खत्म हो चुका है।”

जिस राज्य के स्टेडियम में कपड़े सूखते हो, मैदान में जलकुंभी उगते हो… उसे इस ‘वैभव’ पर इतराना नहीं, नाला रोड के नाले में डूब मरना चाहिए

2025 में ही बालिग (18वाँ संस्करण) होने वाले इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) ने प्रशंसकों को क्रिकेट के कई अविस्मरणीय क्षण दिए हैं। हमने कई शानदार इनिंग्स देखी है। गजब के बॉलिंग स्पेल देखे हैं। फील्डिंग के ऐसे पल देखे हैं कि अपनी ही आँखों पर विश्वास न हो। फिर भी वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) के शतकीय प्रदर्शन ने सोशल मीडिया पर भावनाओं के फाटक खोल दिए हैं।

यह आश्चर्यजनक है, क्योंकि क्रिकेट स्किल और टाइमिंग का खेल है। भावनाओं पर नियंत्रण रखना होता है। परिस्थिति के अनुसार खुद को ढालना होता है। ऐसे में वैभव सूर्यवंशी को लेकर हम जो भावनाओं का ज्वार देख रहे हैं, उसके दो मोटे कारण समझ आते हैं।

पहली, उनकी उम्र। वैभव 14 साल के हैं। इतनी छोटी उम्र में इससे पहले किसी ने आईपीएल में शतक नहीं लगाया। वे सबसे तेज शतक लगाने वाले भारतीय बन गए हैं। आईपीएल के इतिहास की दूसरी सबसे तेज सेंचुरी ठोक दी है। 38 गेंदों पर करीब 266 के स्ट्राइक रेट से उन्होंने 101 रन बनाए। इसमें 7 चौके और 11 छक्के हैं।

स्ट्राइक रेट, चौके और छक्कों की संख्या बताती है कि इतनी कम उम्र में वे पावर हिटिंग के बड़े उस्ताद हैं। उन्होंने यह कारनामा गुजरात टाइटंस की उस बॉलिंग लाइनअप के सामने किया है जिसमें मोहम्मद सिराज, राशिद खान, वाशिंगटन सुंदर जैसे इंटरनेशनल प्लेयर मौजूद थे। जाहिर है आड़ा-तिरछा बैट भाँज के उन्होंने राजस्थान रॉयल्स के लिए रन नहीं जुटाए हैं। बताया है कि उनके भीतर स्किल भी मौजूद है।

वैभव के जय-जयकार का दूसरा कारण उनका बिहार से होना है। जो राज्य अपने ही नेताओं का मारा हो, जहाँ की जनता पलायन को अभिशप्त हो, जहाँ के लोग ‘बिहारी’ कहकर अपमानित किए जाने के अभ्यस्त हो, जिस राज्य में रहने का मतलब भविष्य को अंधकार में ढकेल देना माना जाता हो, यदि उसी राज्य के समस्तीपुर के एक गाँव से निकल कर कोई लड़का इस तरह का प्रदर्शन कर दिखाए तो भावनाओं का सैलाब आना स्वभाविक है।

पर यह केवल बिहार के आम लोगों तक ही सीमित नहीं है। पक्ष हो या विपक्ष बिहार का हर नेता इस सैलाब के साथ बहना चाहता है। ऐसा प्रदर्शित करने की कोशिश की जा रही है कि बिहार ने देश को एक ऐसी प्रतिभा तैयार करके दी है, जिसका डंका अंतरराष्ट्रीय पटल पर अगले कुछ दशकों तक बजने वाला है।

पर जमीनी वास्तविकता यह है कि वैभव सूर्यवंशी की यह सफलता केवल उसके जिद्द और जुनून के कारण संभव हुई है। केवल और केवल उसके परिवार के समर्पण के कारण संभव हुई है। इसमें बिहार के उन नेताओं का कोई योगदान नहीं है, जिन पर राज्य में खेल की आधारभूत संरचना तैयार करने की जिम्मेदारी है/थी।

बिहार की राजधानी पटना में ही एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम है। नाम है- मोइनुलहक स्टेडियम। कई साल पहले जब मैंने आखिरी बार इस स्टेडियम को देखा था तो इसमें सीआरपीएफ का कैंप लगा था। 1969 में बने इस स्टेडियम में 1996 के विश्व कप का मैच भी हुआ था। आखिरी इंटरनेशल मैच 1997 में महिलाओं का वनडे था।

उसके बाद इस स्टेडियम को धीरे-धीरे मर जाने के लिए छोड़ दिया गया। सालों बाद इस स्टेडियम की चर्चा 2018 में हुई, जब 15 साल बाद रणजी ट्रॉफी में बिहार की वापसी हुई। पर जब मैच हुआ तो स्टेडियम खेल के कारण चर्चा में नहीं आया। इसकी छत और टूटी दीवारें चर्चा में थी। दर्शक गैलरी में कपड़े सुख रहे थे।

अब इस स्टेडियम के पुनर्निर्माण की योजना बनी है। जिला मुख्यालयों के स्टेडियम तो और भी बुरे हाल में हैं। अपने गृह जिले मधुबनी के स्टेडियम को मैंने जब भी देखा वह तालाब की तरह ही दिखा। यहाँ बैट और बॉल का मुकाबला नहीं होता। जलकुंभी के बीच फैलने का मुकाबला होता है। इसी तरह राज्य के कई स्टेडियम पशुओं के चारागाह बने हुए हैं।

राज्य में प्रशिक्षण अकादमी का घोर अभाव है। जो चल रहे हैं उनमें ज्यादातर प्राइवेट हैं। यह भी कुछ शह​रों तक सीमित है। जिलों में निरंतरता से चलने वाले टूर्नामेंट नहीं हैं। ऐसा कोई सिस्टम नहीं है जो गाँव-देहात के खिलाड़ियों को चिह्नित करें, उनके कौशल को निखारे और फिर उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच प्रदान करे। जो कुछ भी हो रहा है, वह निजी या सामाजिक स्तर पर ही अधिक दिखता है।

यह बदहाली केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं है। बिहार में हर खेल ​व्यवस्था की उदासीनता के कारण दम तोड़ चुका है। वैसे हाल के वर्षों में सरकार के स्तर पर कुछ हद तक यह तंद्रा टूटती दिख रही है। नीतीश सरकार ने अलग से खेल विभाग का गठन किया है। अभी राज्य सरकार का खेल बजट करीब 700 करोड़ रुपए है।

राजगीर में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और ओलंपिक संघ के मापदंडों के हिसाब से स्टेडियम तैयार किए जा रहे हैं। पटना जिले के पुनपुन प्रखंड में 100 एकड़ में स्पोर्ट्स सिटी बनाने की घोषणा हुई है। बिहार स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी बन रही है। यहाँ खेल से जुड़े पाठ्यक्रमों में डिग्री देने के साथ-साथ करीब 24 खेलों के प्रशिक्षण के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएँ जुटाने की योजना है। इसी तरह राज्य में 37 एकलव्य स्पोर्ट्स ट्रेनिंग सेंटर, 32 खेलों इंडिया ट्रेनिंग सेंटर और भारतीय खेल प्राधिकरण के 3 सेंटर चल रहे हैं।

दरअसल बिहार में खेलों की बर्बादी की कथा भी लालू यादव-राबड़ी देवी के उस जंगलराज से ही शुरू होती है जिसने एक तरफ राज्य में पहले से मौजूद हर क्षेत्र की आधारभूत संरचनाओं को ध्वस्त किया, दूसरी तरफ नई संरचनाओं को खड़ा नहीं होने दिया ताकि ‘अपहरण इंडस्ट्री’ के लिए गली-गली ‘खिलाड़ी’ पैदा किए जा सके। इसका दूसरा पक्ष यह है कि 2005 से बिहार में शासन कर रहे नीतीश कुमार की सरकार ने इस स्थिति को ठीक करने की जो पहल की है वह काफी देर से की गई है और उसे एक खास हिस्से में सीमित कर दिया गया है।

असल में वैभव सूर्यवंशी की सफलता बिहार की व्यवस्था पर तमाचा है। परिचायक है हर उस बिहारी की जिजीविषा का जो अपने पुरुषार्थ से अपना भाग्य लिखता है। व्यवस्था और उससे जुड़े लोगों को इस सफलता का जश्न मनाने की जगह शर्म से पटना के नाला रोड के नाले में डूब जाना चाहिए। वे उन सैकड़ों वैभव की भ्रूण हत्या के जिम्मेदार हैं, जिन्होंने गाछी, खेत, उबड़-खाबड़ मैदान को पिच बनाकर पसीना बहाया, पर व्यवस्था के आगे अकाल मौत मर गए। जो खिलाड़ी से मजदूर बन गए। जो आज सूरत से लेकर दमन तक की फैक्ट्री में पसीना बहा रहे हैं।

पहलगाम अटैक के समय जो कश्मीरी ऑपरेटर लगा रहा था ‘अल्लाहू अकबर’ के नारे, वह अब NIA की कस्टडी में: वीडियो में गोलियों की आवाज सुनते ही बाहर आ गया था ‘इस्लाम’

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसारन घाटी में 22 अप्रैल, 2025 को हुए आतंकवादी हमले की जानकारियाँ लगातार सामने आ रही हैं। अब इस हमले का एक नया वीडियो सामने आया है, जिसमें एक जिप-लाइन ऑपरेटर को गोलियों की आवाज के बीच ‘अल्लाहू अकबर’ चिल्लाते और एक पर्यटक को जिपलाइन पर धक्का देते देखा गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पहलगाम आतंकी हमले के बाद वीडियो के सामने आने के बाद जिपलाइन ऑपरेटर को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। इस हमले में उसके प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल होने की आशंका है। यह वीडियो कश्मीर घूमने आए अहमदाबाद के ऋषि भट्ट ने जिपलाइन करते समय रिकॉर्ड की थी।

सोशल मीडिया पर उनके वीडियो पोस्ट करने के कुछ ही देर में ये वीडियो वायरल हो गई थी। वीडियो में साफ दिखता है कि जैसे ही गोलियों की आवाज आने के बाद जिपलाइन ऑपरेटर तीन बार ‘अल्लाह-हू-अकबर‘ चिल्लाता है और ऋषि को जिपलाइन पर आगे की ओर भेज देता है।

नीचे अफरा-तफरी मची है, लोग जान बचाने के लिए भाग रहे हैं, कुछ जमीन पर गिरते हैं क्योंकि गोलियाँ उनकी तरफ आ रही होती हैं। ऋषि के भी हाव-भाव कुछ समय के लिए असमंजस वाले लगते हैं लेकिन वे इस घटना के ठीक तरह से समझ नहीं पाते और अंत तक आते आते वीडियो रिकॉर्ड करते हैं।

ऋषि भट्ट की वीडियो के आधार पर ही अब NIA के अधिकारियों ने जिपलाइन ऑपरेटर को हिरासत में ले लिया है। उससे घटना से जुड़े पहलुओं पर पूछताछ की जाएगी। कयास लगाए जा रहे हैं कि स्थानीय लोगों का भी इस हमले से कोई जुड़ाव हो सकता है। NIA इस पर भी जाँच कर रही है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ऋषि ने बताया कि उनसे पहले उनकी पत्नी और बच्चे समेत 9 लोग जिपलाइन पर गए। उस समय ऑपरेटर ने कुछ नहीं कहा। जब वो आए तब ही उसने अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाया। उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया।

इस बीच ऑपरेटर ने उन्हें आगे जाने के लिए हल्का धक्का दे दिया। आगे आने के बाद ऋषि को जब एहसास हुआ कि गोलियाँ चल रहीं हैं तो वह घबरा गए, नीचे कई लोग निढाल पड़े थे। उन्होंने तुरंत ही जिपलाइन बीच में रोका और हुक खोलकर लगभग 20 फीट की ऊंचाई से कूद गए। नीचे आकर अपनी पत्नी और बच्चे को लेकर वहाँ से जान बचाकर भागे।

पहलगाम में इस्लामी आतंकियों ने हिन्दुओं का धर्म पूछ कर चुन-चुन कर गोली मार दी थी। खास तौर पर हिंदुओं को निशाना बनाया गया। मरने वालों में 25 भारतीय पर्यटक, एक नेपाली नागरिक और एक स्थानीय मुस्लिम समेत कुल 28 लोग थे।

पहलगाम आतंकी हमले में हमलावरों ने पुरुषों की पैंट उतारकर यह भी चेक किया गया कि वे मुस्लिम हैं या नहीं। कई लोगों को सीधे सिर में गोली मारी गई। हमले की जिम्मेदारी पहले लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटे संगठन द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी, लेकिन बाद में कार्रवाई के डर से उसने अपना बयान वापस ले लिया।