Home Blog Page 3999

‘रोहिंग्या को तुरंत रिहा करें, प्रत्यर्पित करने से केंद्र सरकार को रोकें’: प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में डाली याचिका

सुप्रीम कोर्ट से जम्मू-कश्मीर में हिरासत में लिए गए रोहिंग्या को तुरंत रिहा करने और उन्हें प्रत्यर्पित करने के आदेश को लागू करने से केंद्र सरकार को रोकने की गुहार लगाई गई है। इस संबंध में पिछले साल कोर्ट की अवमानना मामले में दोषी पाए गए वकील प्रशांत भूषण के माध्यम से गुरुवार (मार्च 11, 2021) को एक याचिका दायर की गई। इस याचिका में जम्मू में हिरासत में लिए गए अवैध रोहिंग्या प्रवासियों को रिहा करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की माँग की गई है। कथित तौर पर यह याचिका रोहिंग्या मोहम्मद सलीमुल्ला ने दायर की है और एडवोकेट चेरिल डीसूजा (Cheryl Dsouza) ने इसे तैयार किया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, बताया गया है कि यह जनहित याचिका भारत में रह रहे अवैध प्रवासियों (याचिका की भाषा में शरणार्थी) को प्रत्यर्पित करने से बचाने के लिए दायर की गई है। यह भी कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 के साथ ही अनुच्छेद 51 (सी) के तहत प्राप्‍त अधिकारों की रक्षा के लिए यह याचिका दाखिल की गई है।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से गुजारिश की गई है कि वह संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) को इस मामले में हस्तक्षेप करने के निर्देश जारी करें। साथ ही शिविरों में रखे गए रोहिंग्या की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने की माँग की गई है।

याचिका में कहा गया है कि एक सरकारी सर्कुलर की वजह से रोहिंग्या खतरे का सामना करना पड़ रहा है। यह सर्कुलर अवैध रोहिंग्या प्रवासियों की पहचान का निर्देश अधिकारियों को निर्देश देता है। शीर्ष अदालत में लंबित एक मामले में हस्तक्षेप अर्जी दायर कर गृह मंत्रालय को निर्देश देने का आग्रह किया है कि वह अनौपचारिक शिविरों में रह रहे रोहिंग्याओं के लिए विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) के जरिए तीव्र गति से शरणार्थी पहचान-पत्र जारी करें।

याचिका कहती है कि भारत में शरणार्थियों के लिए कानून न होने से रोहिंग्याओं को अवैध प्रवासी माना जाता है, जिन्हें फॉरेनर्स एक्ट 1946 और फॉरेनर्स ऑर्डर 1948 के तहत कभी भी भेजा जा सकता है। इसमें यह भी कहा गया है कि मुस्लिम पहचान की वजह से सरकार रोहिंग्या के साथ भेदभाव करती है।

2017 में दायर हुई थी याचिका

बता दें कि इसी मामले में एक आवेदन साल 2017 में दायर किया गया था। उसमें रोहिंग्या सहित अन्य शरणार्थियों के निर्वासन के खिलाफ अधिकार की सुरक्षा की माँग की गई थी। याचिका में कहा गया था कि सरकार रोहिंग्या लोगों म्यांमार प्रत्यर्पित करने का प्रस्ताव देकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही है।

उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर में रह रहे अवैध प्रवासियों की पहचान करने के लिए चल रही कवायद के तहत, कई रोहिंग्याओं को विदेशी अधिनियम की धारा 3(2) ई के तहत होल्डिंग सेंटर भेजा गया था। इनके पास पासपोर्ट अधिनियम की धारा 3 के तहत आवश्यकतानुसार वैध यात्रा के दस्तावेज नहीं थे।

माँ के साथ मंदिर गई 4 साल की मासूम से 40 वर्षीय इरशाद ने किया दुष्कर्म का प्रयास, यूपी पुलिस ने भेजा जेल

उत्तर प्रदेश में मैनपुरी के करहल थाना क्षेत्र के अंतर्गत गुरुवार को माँ के साथ मंदिर गई चार वर्षीय मासूम के साथ 40 वर्षीय युवक इरशाद ने दरिंदगी की हद पार करने की कोशिश की। लेकिन मासूम के चीखते ही आसपास के लोगों की नजर उस दरिंदे पर पड़ गई। कहा जा रहा है कि आरोपित को तत्काल भीड़ ने पकड़ लिया और उसकी जमकर धुनाई कर दी। बात फैलते ही मासूम के परिजन तथा बस्ती के दूसरे लोग भी मौके पर पहुँच गए थे।

रिपोर्ट के अनुसार, तत्काल सूचना मिलने के बाद प्रभारी निरीक्षक शिवकुमार चौहान भी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए लोगों की पिटाई से घायल हुए युवक को अपने कब्जे में लिया और उसे थाने भिजवाया। और बच्ची को मेडिकल के लिए अस्पताल भिजवाया गया। पिता की शिकायत पर आरोपित के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस ने इस घटना में आरोपित इरशाद को पकड़कर न्यायालय में पेश किया जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, करहल थाना क्षेत्र की एक बस्ती निवासी एक महिला गुरुवार की सुबह महाशिवरात्रि पर पूजा करने के लिए शिव मंदिर गई थी। उनके साथ उनकी 4 साल की पुत्री भी थी। माँ जब मंदिर में चली गई तो बच्ची बाहर खेलने लगी। आरोप है तभी दरिंदा इरशाद वहाँ आया और बच्ची को बहला कर मंदिर के पीछे ले गया। वहाँ उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया।

वहीं कुछ रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि जब चार वर्षीय बालिका अपनी माँ के साथ शिवरात्रि पर शिव मंदिर में दर्शन करने गई थी। तभी मासूम बच्ची भीड़ में किसी तरह माँ से बिछड़ गई और रोने लगी। इसी बीच रो रही बालिका पर कस्बा करहल के मोहल्ला मनिहारन निवासी इरशाद पुत्र महबूब की नजर पड़ी। मौका पाकर वह बालिका को मंदिर के पीछे ले गया और उसके साथ हैवानियत करने की कोशिश करने लगा।

बालिका के चीखने पर लोग दौड़ पड़े और आरोपित इरशाद को धर लिया। लोगों ने दरिंदे इरशाद की पहले जमकर धुनाई की। फिर यूपी पुलिस के हवाले कर दिया। पिता की तहरीर पर आरोपित इरशाद के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 ए, बी, पॉस्को एक्ट तथा दलित उत्पीड़न की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।

‘इस नाटक में सांप्रदायिक लोगों के लिए जगह नहीं’: BJP में शामिल होने पर थिएटर आर्टिस्ट को निकाला

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के समर्थकों ने लोगों को भाजपा में शामिल होने से रोकने के लिए ‘कैंसिल कल्चर (cancel culture)’ को हथियार बनाया है। ऐसी ही एक घटना सामने आई है। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक कौशिक कर नाम के एक थिएटर कलाकार को BJP में शामिल होने के बाद नाटक से निकाल दिया गया।

खबरों के अनुसार, कौशिक कर को उत्पल दत्ता द्वारा लिखित ‘घूम नी’ (‘Ghum Nei’)  नाटक से हटा दिया गया। यह निर्णय सौरव पालोदी नामक कम्युनिस्ट पार्टी के एक एक मुखर समर्थक द्वारा लिया गया। सौरव पालोदी, ‘इचामोटो (Ichamoto)’ नाम से थिएटर समूह चलाता है। उसे इस निर्णय पर सोशल मीडिया में लोगों ने काफी लताड़ा है। हालाँकि सीपीएम समर्थकों ने उसके फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि कर के भाजपा में शामिल होने का फैसला उनके निष्कासन के लिए पर्याप्त था।

एक फेसबुक पोस्ट में, पालोदी ने लिखा, “हमने कौशिक कर को ‘घुम नी’ नाटक से हटा दिया है। वह भाजपा में शामिल हो गए हैं और यह कारण हमारे लिए मौजूदा परिदृश्य में उन्हें हटाने के लिए पर्याप्त है। इस नाटक में सांप्रदायिक लोगों के लिए कोई जगह नहीं है। नाटक के लिए नई तारीखों की घोषणा जल्द ही की जाएगी।”

फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट

उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए कहा, “दत्त के नाटक को स्वीकार करते हुए, कौशिक और मैंने उनका कैरेक्टर बनाया और उसका नाम अखलाक रखा। नाम में 2015 के दादरी मामले का संदर्भ था जहाँ भीड़ ने मोहम्मद अखलाक के घर पर हमला किया था। उसे गोमांस खाने के संदेह में मार दिया गया था। बीजेपी में शामिल होने के बाद किसी को अखलाक की भूमिका निभाने की अनुमति देना नाटक की आत्मा पर हमला होगा।”

‘घुम नी’ नाटक से हटाए जाने को लेकर कौशिक कर ने सौरव पालोदी को फटकारते हुए कहा कि बिना किसी जमीनी कनेक्शन के वामपंथी थिएटर समूहों पर घेराबंदी करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “सौरव इस तरह के बयान देकर अपनी मूर्खता छिपा रहा है। कुछ वामपंथी जो धर्मताल और ब्रिगेड के बीच चलते हैं और फ़ेसबुक पर हाइपर वेंटीलेट करते हैं, वे रंगमंच को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके पास जमीनी स्तर पर कोई कनेक्ट नहीं है।”

कर ने आगे कहा, “मुझे हटाना या किसी नाटक के मंचन से रोकना केवल उन अभिजात वर्ग की असुरक्षा को उजागर करता है जो साम्यवाद के सार को नहीं समझते हैं।” उन्हें अभिनेता से नेता बने कंचन मोइत्रा का समर्थन मिला है। उन्होंने इस कदम को ‘सरासर असहिष्णुता’ करार देते हुए कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में इस तरह के फैसलों का किसी भी कीमत पर बचाव नहीं किया जा सकता है। अभिनेता रुद्रनील घोष ने भी ‘कैंसिल कल्चर’ की निंदा की है।

माकपा से सौरव पालोदी के संबंध

सौरव पालोदी कम्युनिस्ट पार्टी का एक मुखर समर्थक है। उसने CPI (M) पश्चिम बंगाल फ्रेम के साथ अपनी प्रोफ़ाइल तस्वीर भी अपडेट की है। उसने ब्रिगेड ग्राउंड में कम्युनिस्ट पार्टी की रैली में भी भाग लिया था। सभा में भाग लेने के बाद पालोदी का कहना था कि बंगाल चुनाव में बीजेपी और तृणमूल कॉन्ग्रेस के बीच कोई मुकाबला नहीं है।

फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट

सभा में जुटी भीड़ के बाद पालोदी ने दावा किया कि सीपीआई (एम) 2021 के चुनावों में एक मजबूत दावेदार है।

फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट

उसे पड़ोसी देश बांग्लादेश के ‘कम्युनिस्ट’ छात्रों का समर्थन करते हुए भी देखा गया था। यहाँ पर यह उल्लेख किया जाना आवश्यक है कि पालोदी ममता बनर्जी शासन का मुखर आलोचक है।

फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट

‘दम है तो रोक कर दिखाओ’: बॉर्डर पर ‘किसान’ कर रहे पक्का निर्माण, ट्यूबवेल भी लगाया; पुलिस को बैरंग लौटाया

नए कृषि कानूनों के विरोध के नाम पर दिल्ली के बॉर्डर पर बैठे ‘किसानों’ ने अब पक्के निर्माण शुरू कर दिए हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कुंडली बॉर्डर पर जमे प्रदर्शनकारियों ने निर्माण शुरू किया है। ट्यूबवेल भी लगाया है। पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो उन्हें चेतावनी दी।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार गर्मी बढ़ने की वजह से अस्थायी टेंटों में प्रदर्शनकारियों को परेशानी होने लगी है। लिहाजा उन्होंने अब सड़क पर ही पक्का निर्माण शुरू कर दिया है। रिपोर्ट में बताया गया है, “कुंडली में जीटी रोड पर पानीपत-दिल्ली लेन पर मुख्य मंच से थोड़ा आगे ईंट और सीमेंट से कमरों का निर्माण शुरू किया गया है। अभी नींव बनाने का काम शुरू हुआ है। कमरों के ऊपर सरकंडे और पराली से छत बनाई जाएगी।”

निर्माण करने वाले प्रदर्शनकारियों के हवाले से बताया गया है कि रैन बसेरे की तर्ज पर कमरे बनाए जाएँगे। चारों ओर से ईंट और सीमेंट की मोटी दीवार और ऊपर पराली की छत होगी। इन कमरों के लिए कूलरों का भी इंतजाम किया जा रहा है। पंजाब के किसान जत्थेबंदी के नेता मनजीत राय के हवाले से बताया गया है कि किसान मोर्चा के सेवादारों ने एसी-कूलर भिजवाने का भरोसा दिया है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी में हिम्मत है तो इसे रोक कर दिखाए। रिपोर्ट में बताया गया है कि पुलिस ने निर्माण रुकवाने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उनकी नहीं सुनी।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार किसान नेताओं ने नेशनल हाईवे पर ज्यादा से ज्यादा पक्के निर्माण का ऐलान किया है। साथ ही सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह उन्हें रोक कर दिखाए।

इससे पहले यह​ खबर सामने आई थी कि कुछ किसान नेता होटलों में ठहरते हैं जिनका बिल लाखों में आ रहा है। जी न्यूज (zee News) की रिपोर्ट के अनुसार होटल में ठहरने वाले नेताओं में बलबीर सिंह राजेवाल और कुलवंत सिंह संधू हैं। ये प्रदर्शन स्थल के पास कुंडली में स्थित थ्री स्टार होटल टीडीआई क्लब रिट्रीट (TDI CLUB Retreat) में ठहरे हैं।

रिपोर्ट में बताया गया था कि भारतीय किसान यूनियन-राजेवाल (BKU राजेवाल) के अध्यक्ष बलबीर सिंह राजेवाल होटल के कमरा संख्या 206 में 12 दिसंबर 2020 से 3 मार्च 2021 के बीच रहते थे। फिलहाल वे कमरा संख्या 303 में रह रहे हैं।

वहीं जमुहारी किसान सभा, पंजाब के महासचिव कुलवंत सिंह संधू इसी होटल के कमरा संख्या 201 में अपने बेटे दोसांझ के साथ 27 दिसंबर 2020 से ठहरे हुए हैं। हालाँकि उनके ठहरने और खाने-पीने का इंतजाम फ्री है। संधू पर इस मेहरबानी के पीछे होटल के मालिकों में से एक रवींद्र तनेजा को बताया जा रहा है। तनेजा मानेसर लैंड स्कैम का आरोपित है।

जोमैटो विवाद पर फाउंडर का आया बयान, डिलिवरी बॉय ने कहा- मुझे चप्पल से मारा, खुद की अँगूठी से हुई घायल

बेंगलुरु में हितेशा चंद्रानी के ऊपर हमला करने के बाद 11 मार्च को फूड डिलीवरी ऐप जोमैटो के डिलीवरी एजेंट को गिरफ्तार कर लिया गया। पीड़िता द्वारा ट्विटर पर घटना को साझा करने के बाद बेंगलुरू पुलिस ने कार्रवाई की। पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसके साथ जोमैटो डिलीवरी एजेंट ने मारपीट की थी, जो मंगलवार (मार्च 9, 2021) को उसके घर में आया था। इस मारपीट में उसकी नाक की हड्डी में फ्रैक्चर भी आया है। वहीं डिलीवरी एजेंट ने भी पीड़िता पर आरोप लगाया है।

अब, Zomato के संस्थापक दीपिंदर गोयल ने इस बाबत बयान जारी किया है। गोयल ने कुछ दिनों पहले बेंगलुरु में हुई घटना के संदर्भ में ट्विटर पर लिखा। दीपेंद्र गोयल ने अपने बयान में लिखा, “हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता सच को जानना है। इस संबंध में हम हितेशा और कामराज (हमारा डिलीवरी एजेंट) दोनों की मदद ले रहे हैं। जाँच जारी है। इस मामले में हम पुलिस की भी मदद ले रहे हैं।”

जोमैटो ने कहा कि वह लगातार हितेशा के संपर्क में है और उसके मेडिकल का भी खर्च वहन कर रहे हैं। इसके साथ ही वो उनकी कानूनी कार्यवाही में भी मदद कर रहे हैं। बयान में कहा गया है कि वे कानूनी कार्यवाही में भी उसकी मदद कर रहे हैं। बयान में आगे कहा गया है, “हम कामराज के साथ भी लगातार संपर्क में हैं, यह सुनिश्चित करने के लिए कि कहानी के दोनों पक्ष प्रकाश में आए और निष्पक्षता से इस प्रक्रिया का पालन किया जाए।” दीपक गोयल ने बताया कि कामराज कंपनी में 26 महीनों से है। वो अभी तक 5,000 से ज्यादा डिलीवरी कर चुका है। उसे 5 में से 4.75 रेंटिंग मिले हैं, जो उच्चतम है।

वहीं कामराज ने द न्यूज मिनट से बात करते हुए अपना पक्ष रखा। उसने कहा कि हितेशा उसे चप्पल से मार रही थी, वो तो बस अपना बचाव कर रहा था। कामराज ने कहा कि कस्टमर ने उसके साथ मौखिक रूप से दुर्व्यवहार किया।

कामराज ने कहा कि जब वह हितेशा के अपार्टमेंट के दरवाजे पर पहुँचा तो उसने उसे खाना सौंप दिया और भुगतान के लिए इंतजार कर रहा था क्योंकि उसने कैश ऑन पेमेंट का विकल्प चुना था। कामराज ने कहा कि यातायात और खराब सड़कों के कारण डिलीवरी में देरी होने पर उन्होंने तुरंत माफी माँगी।

कामराज ने कहा, “हालाँकि, वह शुरू से ही बहुत असभ्य थी। उसने मुझसे पूछा, ‘तुम देर से क्यों आए?’ मैंने माफी माँगी, क्योंकि वहाँ चल रहे सिविक कार्यों के कारण सड़क ब्लॉक थे, और ट्रैफिक जाम भी था। लेकिन वह जोर देकर कहती रही कि ऑर्डर को 45-50 मिनट के भीतर पहुँचाना होगा। मैं इस काम पर दो साल से अधिक समय से काम कर रहा हूँ, और यह पहली बार है जब मुझे इस तरह के कटु अनुभव से गुजरना पड़ा है।”

कामराज के अनुसार, हितेशा ने भोजन लिया लेकिन ऑर्डर के लिए भुगतान करने से इनकार कर दिया। उसने कहा कि वह Zomato चैट सपोर्ट के साथ बात कर रही थी। उसे डर था कि उसे पैसे नहीं मिलेंगे, वह उससे अनुरोध करने लगा। कामराज ने आगे बताया, “इस दौरान उसने मुझे ‘नौकर’ कहा और फिर चिल्लाने लगी कि तुम क्या कर सकते हो?’ इस बीच जोमैटो ने मुझे बताया कि ऑर्डर को कैंसिल कर दिया गया है। इस पर मैंने उसे खाना वापस करने के लिए कहा, लेकिन उसने सहयोग नहीं किया।”

इसके बाद उसने बिना खाना लिए ही वहाँ से वापस जाने का फैसला किया। उसने जैसे ही अपार्टमेंट छोड़ा हितेशा ने अपशब्द कहना शुरू कर दिया। कामराज ने कहा, “उसने अचानक मुझ पर चप्पल फेंकी और मुझे मारने लगी। अपने बचाव में जब मैंने अपनी हाथ आगे किया तो गलती से उसकी नाक पर लग गया। जब वह मुझे धक्का देने की कोशिश कर रही थी तभी उसकी अँगूठी से उसके नाक पर लग गया और खून बहने लगा। उसके नाक को देखकर कोई भी समझ सकता है कि पंच से इतना चोट नहीं लगेगा और मैंने अँगूठी नहीं पहनी है।”

गौरतलब है कि हितेशा ने पूरी घटना की जानकारी देते हुए बताया था कि उसने जोमैटो से फूड दोपहर 3.30 पर ऑर्डर किया था, लेकिन जब वो शाम 4.40 तक भी नहीं आया तो उसने कस्टमर केयर पर फोन कर ऑर्डर कैंसिल करनी की बात कही। इसके बाद उन्होंने डिलीवर बॉय से ऑर्डर लेने से मना कर दिया तो दोनों में आपसी विवाद हो गया, इसके बाद डिलीवरी बॉय ने लड़की की नाक पर मुक्का मार दिया, जिसके बाद खून आने पर वो वहाँ से भाग गया।

‘बंद करो बॉम्बे बेगम्स’: बच्चों के कैजुअल सेक्स और ड्रग्स पर NCPCR सख्त, भगवद्गीता को लेकर भी बकवास

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स (Netflix) से वेब सीरिज ‘बॉम्बे बेगम्स (Bombay Begums)’ की स्ट्रीमिंग बंद करने को कहा। ऐसा नहीं होने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। दो ट्विटर हैंडल की तरफ से इस वेब सीरिज में बच्चों के गलत चित्रण को लेकर शिकायत मिलने पर यह कार्रवाई की गई है। साथ ही यूजर्स ने सीरिज के हिंदूफोबिक कंटेट को लेकर भी नाराजगी जताई है।

शीर्ष बाल अधिकार संस्था ने गुरुवार (11 मार्च 2021) को वेब सीरिज में बच्चों के अनुचित चित्रण का हवाला देते हुए नेटफ्लिक्स से इसकी स्ट्रीमिंग तुरंत बंद करने को कहा। साथ ही 24 घंटे के भीतर एक विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट भी पेश करने को कहा है। NCPCR ने कहा है कि यदि ओटीटी प्लेटफॉर्म ऐसा नहीं करती है तो वह कानूनी कार्रवाई को विवश होगी।

एनसीपीसीआर ने नोटिस में कहा है कि नाबालिगों के कैजुअल सेक्स को सामान्य बताने के बाद अब वेब सीरिज बच्चों के बीच ड्रग्स के सेवन को सामान्य दिखा रही है। आयोग ने कहा है कि वह बच्चों का इस तरह से चित्रण करने की अनुमति नहीं दे सकती। नोटिस में कहा गया है, “इस प्रकार की सामग्री के साथ सीरीज न केवल बच्चों के युवा दिमाग को दूषित करेगी, बल्कि इसका परिणाम अपराधियों के हाथों बच्चों के साथ दुर्व्यवहार और शोषण भी हो सकता है।”

आयोग को इस संबंध में दो ट्विटर हैंडल से शिकायत मिली थी। @DeepikaBhardwaj नामक हैंडल ने ‘बॉम्बे बेगम्स’ में बच्चों के चित्रण पर कड़ा एतराज जताया है। खासकर, जिस तरीके से बच्चों के बीच ड्रग्स के सेवन को दिखाया गया है।

एक अन्य लोकप्रिय ट्विटर हैंडल @GemsOfBollywood ने भी शिकायत की थी। उसने बताया था कि इस वेब सीरिज में लड़कियों के अपने शरीर के अंगों की तस्वीरें खींचकर सहपाठियों को भेजते दिखाया गया है। यह ट्विटर हैंडल फिल्म उद्योग के हिंदूफोबिक एजेंडे को बेनकाब करने के लिए जाना जाता है।

वेब सीरिज में एक तिलकधारी नेता को भगवद्गीता के हवाले से यह बताते दिखाया गया है कि पुरुष के भावना की तृप्ति ही स्त्री का सर्वोच्च धर्म है।

एनसीपीसीआर को किए गए इन ट्वीट्स सीपीसीआर (बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए आयोग) अधिनियम 2005 की धारा 13(1)(जे) के तहत कार्रवाई करने की मांग की गई थी। एनसीपीसीआर की नोटिस में कहा गया है, “नेटफ्लिक्स को बच्चों के संबंध में या बच्चों के लिए किसी भी सामग्री को स्ट्रीम करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। इसलिए, इस मामले को देखने के लिए आपको निर्देशित किया जाता है और तुरंत इस सीरीज की स्ट्रीमिंग रोकने के लिए कहा जाता है।”

‘बॉम्बे बेगम्स’ की स्क्रिप्ट अलंकृता श्रीवास्तव ने लिखी है और पूजा भट्ट मुख्य भूमिका में है। यह सीरिज मुंबई में विभिन्न क्षेत्रों की 5 महिलाओं के जीवन पर आधारित है। गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब कोई वेब सीरिज अपने कंटेंट को लेकर विवादों में है। हाल ही में अमेजन प्राइम वीडियो की वेब सीरिज ‘तांडव’ हिंदूफोबिक कंटेट को लेकर विवादों में थी। इससे जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म पर रिलीज से पहले कंटेंट की स्क्रीनिंग पर जोर दिया था।

14 साल के दलित की मुस्लिम लड़की से थी दोस्ती, नाक-गुप्तांग काट नदी में फेंका: लड़की की अम्मी और उसकी दोस्त गिरफ्तार

कर्नाटक के कलबुर्गी जिले में 14 वर्षीय दलित लड़के की नृशंस हत्या के मामले में पुलिस ने दो को गिरफ्तार किया है। जानकारी के मुताबिक दलित लड़के की पड़ोस की मुस्लिम लड़की से दोस्ती थी। लड़की को उसने मोबाइल फोन गिफ्ट दिया था। आरोप है कि इसकी वजह से उसकी हत्या कर दी गई। मामले में गिरफ्तार महिलाओं की पहचान लड़की की अम्मी तरबी और उसकी दोस्त महबूबसाब के तौर पर हुई है। दोनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 (हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पिछले महीने के अंत में दलित लड़के की हत्या कर शव कलबुर्गी जिले में भीमा नदी में फेंक दी गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नारिबोल के एक सरकारी स्कूल के कक्षा 9 में पढ़ने वाले दलित लड़के की पड़ोस की कॉलोनी में रहने वाली 14 वर्षीय लड़की के साथ दोस्ती को लेकर बेरहमी से हत्या की गई।

ग्रामीणों द्वारा गाँव से कुछ किलोमीटर दूर भीमा नदी में एक शव को बरामद करने के बाद 27 फरवरी को यह घटना सामने आई थी। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुँच शव को बाहर निकाला, जिसे बोरी में डालकर फेंका गया था। शव काफी हद तक खराब हो गया था। पुलिस ने परिवार वालों की मदद से शव की पहचान की। पुलिस के अनुसार, हत्या से पहले लड़के का नाक और गुप्तांग काट दिए गए थे।

स्वराज्य के अनुसार, मृतक लड़के के चाचा विश्वनाथ ने कहा कि उनका भतीजा 22 फरवरी की शाम को घर से यह कहकर निकला था कि वह मंदिर जा रहा है और 15 मिनट में वापस आ जाएगा। जब वह वापस नहीं आया, तो परिवार चिंतित हो गया और उन्होंने उसके दोस्तों से उसके ठिकाने के बारे में पूछताछ की।

परिवार को बाद में पता चला कि लड़के की गाँव की एक मुस्लिम लड़की से गहरी दोस्ती थी। मृतक लड़के के दोस्तों ने भी बताया कि उसने लड़की को एक मोबाइल फोन गिफ्ट किया था। इसके बाद लड़के के पिता और चाचा लड़की के घर पहुँचे। लड़की ने मोबाइल वापस किया और अंदर चली गई। इसके बाद, उन्होंने जेवरगी पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवाई।

पुलिस जाँच के दौरान पता चला कि लड़की की माँ ने लड़के को अपने घर की तरफ नहीं आने और अपनी बेटी से दूर रहने की चेतावनी दी थी। लड़की की माँ ने लड़के को ठिकाने लगाने के लिए अपने एक परिचित से मदद भी माँगी थी। पुलिस के अनुसार, 22 फरवरी को महबूबसाब लड़के को बात करने के बहाने दूर ले गई।

पाँच दिनों के बाद महेश का शव नारिबोला गाँव से कुछ किलोमीटर दूर पाया गया। ग्रामीण यह देखकर चौंक गए कि लड़के का प्राइवेट पार्ट और नाक कटा हुआ था। पुलिस ने मीडिया को भी यही बताया। नाबालिग लड़के के पिता मल्लिकार्जुन कोल्ली ने कहा कि उनके बेटे को गाँजा पीने और धूम्रपान करने के लिए मजबूर किया गया था। हत्यारों ने नशे की हालत में उसकी हत्या कर दी। पिता ने कहा, “अगर मेरा बेटा सही रास्ता पर नहीं था तो उसे मारने की बजाय उन्हें मुझसे बात करनी चाहिए थी।” 

आईपीसी की धाराओं 363 (अपहरण), 302 (हत्या), 201 (सबूतों को गायब करना) और एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत लड़की की माँ और उसके दोस्त महबूबसाब के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पीड़ित परिवार ने कहा कि उन्हें एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत राज्य सरकार से कुछ मुआवजा मिला है।

इस घटना को लेकर राज्य में बड़े पैमाने पर आक्रोश देखने को मिला। सामाजिक कार्यकर्ताओं और अभिनेताओं सहित कई लोगों ने निर्मम हत्या के खिलाफ प्रदर्शन किया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की थी। एक्टिविस्ट और एक्टर प्रणिता सुभाष ने हत्या की निंदा करते हुए कहा कि मृतक किस पीड़ा से गुजरा होगा इसकी कल्पना करना असंभव है। उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

एंटीलिया केस: तिहाड़ में रेड- IM आतंकी तहसीन अख्तर के बैरक में मिला मोबाइल, मनसुख हिरेन की मौत की गुत्थी सुलझाने में जुटी ATS

उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित घर एंटीलिया के बाहर विस्फोटक लदी कार खड़ी करने के लिंक दिल्ली के तिहाड़ जेल से जुड़ रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जेल में छापेमारी के दौरान इंडियन मुजाहिद्दीन (IM) के आतंकी त​हसिन अख्तर के बैरक से मोबाइल बरामद किया गया है। इससे पहले खबर आई थी कि आतंकी संगठन जैश-उल-हिंद ने जिस टेलीग्राम चैट के जरिए कार खड़ी करने की जिम्मेदारी ली थी वह दिल्ली की तिहाड़ जेल या उसके आसपास से ही क्रिएट की गई थी।

रिपोर्टों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों ने तिहाड़ के जेल नंबर-8 में गुरुवार (11 मार्च 2021) शाम छापेमारी। इस दौरान आतंकी तहसीन अख्तर के बैरक से मोबाइल मिला। तहसीन अख्तर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के दौरान पटना के गॉंधी मैदान में हुए धमाकों समेत कई बम बलास्ट में शामिल रहा है। बताया जा रहा है कि एजेंसियों की रडार पर एक और मोबाइल नंबर भी है।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बताया है कि इसी मोबाइल से आतंकी संदेश भेजने का चैनल क्रिएट किए जाने का शक है। आगे की जॉंच और फोरेंसिक विश्लेषण तिहाड़ जेल प्रशासन ने जब्त मोबाइल हैंडसेट और अन्य चीजें मिलने के बाद की जाएगी।

इससे पहले बताया गया था कि आतंकी संदेश बनाने के लिए टेलीग्राम चैनल 26 फरवरी को बनाया गया था। इसी चैनल से 27 फरवरी की रात मुकेश अंबानी के घर के बाहर एसयूवी खड़ी करने की जिम्मेदारी ली गई थी। 28 फरवरी को दूसरे चैनल का इस्तेमाल करते हुए जैश-उल-हिंद ने घटना में अपना हाथ होने से मना कर दिया था।

इस मामले में टेरर केस की जाँच एनआईए करेगी। वहीं, महाराष्ट्र एटीएस मनसुख हिरेन की मौत और उनके गायब वाहन की जाँच कर रही है। हिरेन की मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए एटीएस ने बीती रात क्राइम सीन रिक्रिएट किया था। इस मामले में आरोपों के दायरे में आए मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारी सजिन वाजे का तबादला भी कर दिया गया है।

गौरतलब है कि मनसुख हिरेन शुक्रवार (5 मार्च 2021) को मृत मिले थे। वह उस विस्फोटक लदी एसयूवी के मालिक थे जो कुछ दिन पहले मुंबई में मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर खड़ी मिली थी। एंटीलिया के बाहर मिले कार को लेकर परिजनों का कहना है कि वह चोरी हो गई थी और इसकी रिपोर्ट भी लिखाई गई थी।

अपने मुँह मियाँ मिट्ठू: घर में ढेर NDTV ने ब्रिटेन में हिंदी चैनलों से खुद को बेहतर बता थपथपाई पीठ

एक मुहावरा है: अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना। यानी, खुद की तारीफ करना। भारत का लिबरल जमात इससे भयंकर तरीके से पीड़ित है। इस मुहावरे को एक बार फिर चरितार्थ करते हुए अक्सर फर्जी न्यूज को हवा देने के लिए पहचान रखने वाले एनडीटीवी (NDTV) ने टीआरपी (TRP) को लेकर अपनी पीठ थपथपाई है।

NDTV ने एक ट्वीट में न सिर्फ अपनी तारीफ की, बल्कि यह दिखाने की कोशिश की है उसने रिपब्लिक टीवी को पीछे छोड़ दिया है। NDTV ने ट्विटर पर लिखा, “जब रेटिंग सिस्टम में कोई धाँधली नहीं होती है, तो नतीजा यह होता है।” मीडिया हाउस का स्पष्ट रूप से कहना था कि रेटिंग सिस्टम में धाँधली नहीं होने पर रिपब्लिक टीवी से कहीं बेहतर काम NDTV करता है।

Tweet by NDTV while they attempted to pat themselves on the back, in a bid to outsmart Republic TV run by Arnab Goswami
NDTV द्वारा किया गया ट्वीट

भारत में एनडीटीवी को कितने दर्शक मिलते हैं यह किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में उसकी खुद की पीठ थपथपाने का एकमात्र उद्देश्य यह था कि वह लोगों को यह बता सके कि वह रिपब्लिक टीवी से आगे है। लेकिन इसके लिए NDTV ने ट्वीट में जिस डाटा का हवाला दिया है वह भारत का नहीं, बल्कि ब्रिटेन का है।

यदि आप NDTV द्वारा ट्वीट किए गए ग्राफिक को ध्यान से देखेंगे तो पाएँगे कि यह आँकड़ा यूनाइटेड किंगडम (UK) के दर्शकों का है। इन्फोग्राफिक में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि यह डाटा 1 से 7 मार्च के सप्ताह के लिए BARB, UK से लिया गया है।

BARB, UK भारत के BARC की तरह है। यह एक ऐसा संगठन है जो ब्रिटेन में 28 मिलियन टीवी और ब्रॉडबैंड-केबल घरों के व्यूअरशिप का डेटा एकत्र करता है। उनकी वेबसाइट के अनुसार, वे अपने शोध के माध्यम से निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर देते हैं:

  • कौन देख रहा है?
  • वे क्या देख रहे हैं?
  • वे कब देख रहे हैं?
  • वे किस स्क्रीन पर देख रहे हैं?
  • कंटेंट स्क्रीन पर कैसे आया?

इससे यह पता चलता है कि NDTV न केवल ब्रिटेन के आँकड़ों के आधार पर अपनी प्रशंसा कर रहा है, बल्कि वह रिपब्लिक नेटवर्क के हिंदी चैनल रिपब्लिक भारत से तुलना करने की कोशिश कर रहा है, जिसके प्रमुख पत्रकार अर्नब गोस्वामी हैं।

सरल शब्दों में कहें तो NDTV लोगों को यह बताने की कोशिश कर रहा है कि जब डाटा किसी चैनल के पक्ष में नहीं मोड़ा गया हो (उनका मतलब रिपब्लिक से है) तो न्यूज चैनल के रूप में NDTV रिपब्लिक से काफी बेहतर होगा। इस बात को साबित करने के लिए, NDTV भारत के बजाय यूके से डाटा लेता है और खुद की तुलना एक हिंदी चैनल से करता है- जहाँ पर काफी हद तक अंग्रेजी बोलने वाले दर्शक होते हैं।

NDTV ने यह भी बताया है कि वे ‘आज तक’ चैनल से भी आगे है। यह भी एक हिंदी चैनल है। इसकी वजह यह है कि जिस देश में अधिकांश लोग केवल अंग्रेजी बोलते और समझते हैं वहाँ कोई भी अंग्रेजी समाचार चैनल हिंदी चैनल की तुलना में बेहतर करेगा ही, भले ही वह चैनल अर्नब गोस्वामी का ही क्यों न हो।

‘बंगाल के हर जिले में बम फैक्ट्री’: अमित शाह को झूठा बताने के लिए कॉन्ग्रेस समर्थक ने RTI जवाबों में की हेराफेरी

कॉन्ग्रेस समर्थक और तथाकथित आरटीआई कार्यकर्ता साकेत गोखले ने आरटीआई आवेदन के मिले जवाबों को गलत तरीके से पेश किया। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बयान जारी कर इसकी जानकारी दी है। मंत्रालय ने बताया है कि गोखले ने आरटीआई के तहत दिए जवाब को गलत तरीके से पेश करते हुए दावा किया कि मंत्रालय को पश्चिम बंगाल में बम फैक्ट्री की कोई जानकारी नहीं है। कई मीडिया हाउस ने गोखले के दावों के आधार पर रिपोर्ट प्रकाशित की। इसके बाद गृह मंत्रालय ने बयान जारी किया।

गोखले ने इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा किए गए दावे सही थे या नहीं, यह जानने के लिए आरटीआई दायर की थी। अक्टूबर 2020 में एक टीवी साक्षात्कार में अमित शाह ने कहा था कि पश्चिम बंगाल के ‘हर जिले में बम फैक्ट्री’ है। गोखले ने अक्टूबर 2020 में आरटीआई दायर कर गृह मंत्रालय से इन अवैध बम बनाने फैक्ट्री का विवरण माँगा था। 

उसने आरटीआई आवेदन में चार सवाल पूछे थे। उसने बम फैक्ट्री की जिलेवार सूची माँगी चाहिए थी, जिसका जिक्र गृह मंत्री द्वारा किया गया था। इसके अलावा उसने पूछा था कि बम फैक्ट्री को लेकर कभी आधिकारिक ब्रीफिंग दी गई हो तो उसे भी उपलब्ध करवाया जाए। उसका अगला सवाल था कि क्या गृह मंत्री का बयान आधिकारिक इनपुट पर आधारित था, और क्या इस तरह की फैक्ट्री की सूची पश्चिम बंगाल सरकार के साथ शेयर की गई है।

9 मार्च को, साकेत गोखले ने ट्वीट किया कि उसे अपने आरटीआई आवेदन का जवाब मिल गया है और दावा किया कि गृह मंत्रालय ने कहा है कि उनके पास वह जानकारी नहीं है जो माँगी गई है। गोखले ने जवाब का एक स्क्रीनशॉट भी पोस्ट किया। जिसके मुताबिक आरटीआई में उल्लेख किए गए प्वाइंट 1 से 3 के बारे मंत्रालय के पास जानकारी नहीं है। गृह मंत्रालय ने जवाब में यह भी कहा कि ‘पुलिस’ और ‘पुलिस ऑर्डर’ राज्य के विषय हैं और किसी तरह की आपराधिक/आतंकवादी गतिविधि को लेकर पहली जवाबदेही राज्य पुलिस की है। इसलिए मंत्रालय ने गोखले से राज्य/केंद्र शासित प्रदेश से जानकारी माँगने को कहा।

गोखले ने यह भी दावा किया कि उसने चार सवाल पूछे, लेकिन मंत्रालय ने केवल तीन का ही उल्लेख किया। इस आधार पर उसने निष्कर्ष निकाला कि बंगाल में कोई बम फैक्ट्री नहीं है, क्योंकि उसने इसकी सूची राज्य सरकार से साझा किए जाने को लेकर जानकारी माँगी थी। उसने केंद्रीय गृह मंत्री को झूठा बताते हुए दावा किया कि बंगाल में कोई बम फैक्ट्री नहीं है और अमित शाह झूठी जानकारी दे रहे हैं।

हालाँकि अब गृह मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि झूठ गोखले बोल रहे हैं। वे एक अलग आरटीआई पर मंत्रालय की प्रतिक्रिया को गृह मंत्री को झूठा बताने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। मंत्रालय ने बताया है कि जनवरी में गोखले ने एक आरटीआई आवेदन दाखिल किया था। इसमें उसने किसान आंदोलन में खालिस्तानी संगठनों की संलिप्तता को लेकर जानकारी माँगी थी। मंत्रालय ने कहा है कि गोखले ने 9 मार्च को जो जवाब पोस्ट किया वह इस आरटीआई को लेकर था न कि बंगाल में बम फैक्ट्री को लेकर।

गृह मंत्रालय ने बताया है कि खालिस्तानी मसले पर उन्हें गोखले के दो आरटीआई आवेदन ऑनलाइन मिले थे। एक सीधे और दूसरा कानून मामले के मंत्रालय के जरिए। इसका जवाब 3 मार्च को दिया गया। गृह मंत्रालय ने यह भी कहा है कि गोखले ने जान-बूझकर रेफरेंस नंबर को छिपाया है ताकि वह इसे बंगाल को लेकर माँगी गई सूचना से जोड़ सके।

MHA का कहना है कि उसके उत्तर स्पष्ट रूप से RTI आवेदनों, MHOME/R/T/21/00110 और MHOME/R/E/21/00149 की संदर्भ संख्या और उनकी तिथि 12 जनवरी 2021 को दिखाता है, जिससे स्पष्ट है कि वे किसान आंदोलन में खालिस्तानियों की संलिप्तता को लेकर माँगी गई जानकारी का जवाब दे रहे हैं।

मंत्रालय ने आगे बताया कि उन्होंने 18 अक्टूबर 2020 को बम कारखानों के संबंध में RTI प्राप्त नहीं की है और इसका जवाब नहीं दिया है। गृह मंत्रालय ने कहा है कि गोखले ने दुर्भावनापूर्ण इरादे से ऐसा किया। उसने जवाब को सार्वजनिक रूप से गुमराह करने और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर झूठ फैलाने के दुर्भावनापूर्ण इरादे के साथ एक अलग RTI से जोड़ा।