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चैरिटी समूहों के नाम पर मदरसों-मस्जिदों का निर्माण और जिहादी ट्रेनिंग: भारत की सीमा से लगे नेपाली कस्बों में पैठ बना रहा तुर्की का जिहादी संगठन

तुर्की में आतंकी संगठन अलकायदा से सम्बद्ध संस्था ने अब दक्षिण एशिया में अपने पाँव पसारने शुरू कर दिए हैं। इस तथाकथित चैरिटी समूह ने अब ‘इस्लामी संघ नेपाल (ISN)’ को अपना सहयोगी बनाया है। पता चला है कि दक्षिण एशिया में जिहाद का हब बनाने के लिए ये सब किया जा रहा है। इस संगठन का नाम है – ‘The Foundation for Human Rights and Freedoms and Humanitarian Relief’ (दी फाउंडेशन ऑफ़ ह्यूमन राइट्स एंड फ्रीडम एंड ह्यूमेनिटरियन रिलीफ)।

इसे ‘इंसान हक़ वे हुर्रियातेलेरी वे इंसानी यार्डम वाक़फ़ी (IHH)’ के नाम से भी जाना जाता है। वैश्विक जिहादी नेटवर्क का और ज्यादा विस्तार करने का लक्ष्य लेकर ये संगठन अपना अधिकतर कारोबार नेपाल के उन्हीं इलाकों में चला रहा है, जिसकी सीमाएँ भारत से लगती हैं। जिहादी संगठनों के लिए समाज में गुप्त समर्थन तैयार किया जा रहा है। ISN को तुर्की की IHH से सीधे फंड्स मिल रहे हैं।

भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसियों ने पहले ही आगाह किया था कि ISN जिहादी गतिविधियाँ चला रहा है। IHH को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के दस्तावेजों में हथियारों के तस्कर संगठन के रूप में दर्ज किया गया है। सीरिया के आतंकी संगठनों को समर्थन देने के कारण उसके खिलाफ जाँच भी हुई थी। IHH को तुर्की की एजेंसी MIT का पूर्ण समर्थन प्राप्त है। तुर्की में हाल के दिनों में कट्टर इस्लामी गतिविधियाँ बढ़ गई हैं।

वहाँ राष्ट्रपति एर्दोआँ (Erdogan) की सरकार द्वारा IHH को उसके लिए ज़रूरी सभी संसाधन और वित्त मुहैया कराए जा रहे हैं। तुर्की में पहले भी उसके खिलाफ कई बार जाँच हो चुकी हैं, लेकिन मौजूदा सरकार के समर्थन के कारण वो बचा हुआ है। नेपाल के लुम्बिनी व उसके आसपास के इलाकों में उसने मस्जिद, मदरसे, इस्लामी सेंटर और अनाथालयों की स्थापना की है। भारतीय सीमा से लगे सुनसरी में उसकी खासी रुचि है।

साथ ही, तुर्की के संसदीय समूह ‘SADAT’ द्वारा संरक्षित ‘Union of NGOs of the Islamic World’ नाम के एक NGO की स्थापना की गई है, जो IHH की तरह ही काम करता है। इसे अदनान तरनिवेरडी द्वारा संचालित किया जाता है, जो राष्ट्रपति एर्दोआँ के सैन्य सलाहकार थे। उन्होंने अपने कार्यकाल में आतंकियों के प्रशिक्षण पर खासा जोर दिया था। तुर्की की विकास एजेंसी TIKA भी नेपाल में दिलचस्पी ले रही है।

तुर्की की पुलिस ख़ुफ़िया एजेंसी के पूर्व प्रमुख अली फुयात इलमजेर को कट्टर इस्लामी जिहादियों में खासी दिलचस्पी है। अगस्त 16, 2016 को उन्होंने कोर्ट में स्वीकार किया था कि IHH को दुनिया भर में आतंकियों को जिहादी समर्थन देने के लिए तैयार किया गया है। उन्हें फंडिंग के साथ-साथ मेडिकल मदद और मानव संसाधन भी मुहैया कराए जाते हैं। 2016 में रूसी राजदूत का हत्यारा पुलिस अधिकारी भी इस नेटवर्क में शामिल है।

बच्चे का रेप के बाद हत्या कर शव को बोरे में बाँध तालाब में फेंका: मुबारक और साथी गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश स्थित बलरामपुर के महराजगंज तराई थाना क्षेत्र में दो आरोपितों को 9 साल के एक बालक की रेप और हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। गाँव में मासूम की हत्या कर के उसके शव को तालाब में फेंक दिया गया। पुलिस ने मात्र 4 घंटे में इस कांड का खुलासा कर दिया। मासूम के साथ यौन शोषण करने वाले दोनों आरोपितों- मुबारक उर्फ़ अरमान और विजय कुमार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

पूछताछ में दोनों आरोपितों ने अपना गुनाह कबूल भी किया। इस घटना के बारे में तब पता चला था जब गुरुवार (फरवरी 25, 2021) को गाँव के तालाब से एक 9 वर्षीय बालक का शव मिला था। उक्त शव को बोरे में रख कर फेंक दिया गया था। मृतक 14 फरवरी को गाँव में आयोजित एक मेला देखना के लिए गया हुआ था, लेकिन उसके लापता होने के बाद इसकी शिकायत पीड़ित परिजनों ने थाने में दर्ज कराई थी।

अपर पुलिस अधीक्षक एके मिश्र ने जानकारी दी है कि बालक का शव मिलने के बाद हत्या की धारा बढ़ाकर मामले की विवेचना प्रभारी निरीक्षक पीएन तिवारी ने शुरू की है। शव बरामद होने के 4 घंटे के अंदर ही पुलिस ने दोनों आरोपितों को धर-दबोचा। पूछताछ में दोनों आरोपितों ने कबूल किया है कि वो दोनों उस बच्चे का उत्पीड़न करते थे। रात को दोनों आरोपित मृतक को गन्ने के खेत में ले गए और वहाँ उसका यौन शोषण किया।

इसके बाद गला दबा कर बालक की हत्या कर दी गई। फिर रात को ही शव को बोरे में भर कर खेत में फेंक दिया गया। पुलिस ने दोनों ही अभियुक्तों को जेल भेज दिया है। शव को 12 दिन बाद बरामद किया जा सका। इस घटना के बारे में बताया गया है कि आरोपितों ने शव वाले बोरे में मिट्टी भी डाली थी, ताकि वो तालाब में डूब जाए। पुलिस मामले की आगे जाँच कर रही है, ताकि कोर्ट से आरोपितों को सज़ा दिलाई जा सके।

नाबालिग को बुर्का पहनाकर अगवा करने वाले 6 बच्चों के बाप मेहताब की बीवी-भाभी गिरफ्तार, भाई को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू

उत्तर प्रदेश के आगरा के दयालबाग से एक 9वीं क्लास में पढ़ने वाली नाबालिग छात्रा के अपहरण का मामला चर्चा में है। सोशल मीडिया पर इस घटना के वीडियो भी शेयर किए जा रहे हैं। इस मामले में एक्शन लेते हुए पुलिस ने शुक्रवार (फरवरी 26, 2021) अपहरणकर्ता मेहताब की पत्नी और उसकी दो भाभियों को गिरफ्तार किया है, जबकि आरोपित के एक भाई को हिरासत में लिया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है।

आरोपित मेहताब की गिरफ्तारी और छात्रा की बरामदगी के लिए पुलिस की टीम मेरठ-एनसीआर में लगातार छापेमारी कर रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, किशोरी के परिवार ने मामले को ‘लव जिहाद’ की घटना बताते हुए घटना से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।

सोशल मीडिया पर भी इस मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस पर भी आरोपित मेहताब की गिरफ्तारी का दबाव बढ़ता जा रहा है। पुलिस का कहना है कि नाबालिग छात्रा को अगवा करने वाला आरोपित मेहताब इसी लड़की के मामले में पहले भी एक बार जेल जा चुका है।

अब तक की जाँच में पुलिस ये पता करने में कामयाब रही है कि मेरठ में भावनपुर थाना क्षेत्र के रसूलपुर औरंगाबाद गाँव का निवासी आरोपित मेहताब दिल्ली चला गया है और वहाँ किसी परिचित के घर छुप रखा है।

CCTV में कैद हुई घटना

यूपी के आगरा में नाबालिग की फिल्मी अंदाज में किडनैपिंग का CCTV फुटेज सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है।

वीडियो में देखा जा सकता है कि बदमाश ने लड़की को अस्पताल से फिल्मी अंदाज में किडनैप कर लिया। आरोपित पहले भी किडनैपिंग के मामले में जेल की हवा खा चुका है। आरोपित ने लड़की को किडनैप करने के लिए एक प्लान बनाया था। पीड़ित लड़की अपनी बुआ के साथ दवा लेने अस्पताल गई थी उसी दौरान आरोपित वहाँ पहुँच गया और बुर्का पहनाकर लड़की को वहाँ से ले गया। लड़की की बुआ अस्पताल में उसका इंतजार ही करती रही।

पुलिस ने जब सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो उसमें साफ देखा जा सकता है कि लड़की बिना किसी दबाव के बड़े ही आराम से लड़के के साथ बाहर जा रही है। लड़की नाबालिग है। परिवार का कहना है कि मेहताब नाम के युवक ने उनकी बेटी को किडनैप किया है। परिवार ने बताया कि आरोपित मेरठ का रहने वाला है। पुलिस को सीसीटीवी फुटेज में आरोपित मेहताब राणा नजर आया और उसके साथ बुर्का पहने एक लड़की भी जाती दिख रही थी। किशोरी के परिजन बेहोशी की दवा सुँघाकर अपहरण की बात कह रहे हैं।

पुलिस का कहना है कि आरोपित मेहताब इस नाबालिग को तीसरी बार अगवा कर ले गया है। पुलिस ने बताया कि साल 2018 में मेहताब राणा मेरठ से आगरा होटल में नौकरी करने आया था, जहाँ उसकी पहचान नाबालिग के पिता से हुई थी। तभी से मेहताब का उनके के घर आना-जाना था। मेहताब की 10 साल पहले शादी हो चुकी है और उसके 6 बच्चे भी हैं।

2 मार्च 2021 का अपडेट: लड़की को मेहताब राना ने दो बार अगवा किया था, लेकिन इस बार यह बात सामने आई है कि पीड़िता ने खुद ही अगवा होने का ड्रामा रचा था। इससे संबंधित पूरी अपडेट आप यहॉं पढ़ सकते हैं

कॉन्ग्रेस ने मेरा इस्तेमाल नहीं किया, मुझे नीचे गिराने में लगे हैं पार्टी नेता: हार के बाद बोले कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल

गुजरात प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल अपनी पहली ही परीक्षा में फेल रहे और जिन इलाकों को पाटीदारों का गढ़ कहा जाता है, वहाँ भी नगर निकाय के चुनाव (Gujarat Civic Elections) में वो अपनी पार्टी यानी कॉन्ग्रेस का खाता तक नहीं खुलवा सके। पिछले 2 वर्षों से हार्दिक कॉन्ग्रेस में हैं और तब से अब तक 8 सीटों पर उपचुनाव के बाद अब निकाय चुनाव भी हो चुके हैं। 2015 के ‘पाटीदार आंदोलन’ से भाजपा के खिलाफ बिगुल फूँकने वाले हार्दिक पटेल ने अब अपनी ही पार्टी पर निशाना साधा है।

हार्दिक पटेल ने कहा कि निकाय चुनावों में कॉन्ग्रेस ने उनका ठीक तरह से इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता ही उन्हें नीचा दिखाने में लगे हुए हैं। हार्दिक पटेल ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि चुनाव प्रचार अभियान और जनसभाओं में उनके और कार्यक्रम तय किए जाते, तो सूरत में कॉन्ग्रेस को शून्य सीटें नहीं मिलतीं। हार्दिक पटेल ने बताया कि 10 दिनों में उन्होंने 27 रैलियाँ की और सभी खुद से की, पार्टी ने इसमें कोई मदद नहीं की।

हार्दिक पटेल बार-बार ‘आंदोलन’ शब्द का प्रयोग करते रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आंदोलन से कमाई करने वालों को ‘आंदोलनजीवी’ कहे जाने को अपनी जनसभाओं में मुद्दा बनाते रहे। उन्होंने 2015 के निकाय चुनावों के बारे में कहा कि उस वक़्त कॉन्ग्रेस को जितनी भी सीटें मिलीं, वो ‘पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (PAAS)’ के आंदोलन के कारण मिली। वो अभी भी इस संगठन के सदस्य बने हुए हैं।

हार्दिक पटेल ने कहा, “कॉन्ग्रेस को 2015 में आरक्षण आंदोलन का फायदा मिला, ये उसे भी स्वीकार करना पड़ेगा। मैं कॉन्ग्रेस को बार-बार कहता रहा हूँ की वो पाटीदार आंदोलन से निकले नेताओं को तरजीह दे, क्योंकि हमने पूरे राज्य का भ्रमण किया है। आज भी मैं दौरे कर रहा हूँ। उनमें से एक भी कॉन्ग्रेस ने तय नहीं किया है। फिर भी मैं अपने पाँवों पर खड़ा हूँ, क्योंकि मैं पार्टी को मजबूत करना चाहता हूँ, भले कोई और ये करे या नहीं।”

हार्दिक पटेल ने कहा कि कॉन्ग्रेस के नेता उन्हें नीचा दिखाना और नीचे गिराना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा करने दीजिए, मैं बार-बार उठ कर खड़ा होऊँगा। उन्होंने दावा किया कि 2015 में भाजपा उन्हें नीचे गिराना चाहती थी, लेकिन वो फिर खड़े हुए। उन्होंने बताया कि निकाय चुनाव प्रचार के अंतिम दिन पार्टी ने उन्हें सूरत जाने को कहा लेकिन उन्हें इनकार करना पड़ा क्योंकि उनके दौरे 7 दिन पूर्व से भी योजनाबद्ध होते हैं।

हार्दिक पटेल ने कहा कि अगर कॉन्ग्रेस ने चुनाव से 25 दिन पहले बताया होते कि उन्हें सूरत में 25 रैलियाँ करनी हैं, तो फिर वहाँ पार्टी के लिए ऐसे परिणाम नहीं आते। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस को खुले मन से आत्मनिरीक्षण कर के पता करना होगा कि कहाँ वो कमजोर पड़े और कहाँ वो विफल हुए। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस का घोषणापत्र और चुनावी गाना लोगों तक पहुँचने में सफल नहीं रहा। उन्होंने कहा कि अगर अहमद पटेल होते तो बेहतर प्रबंधन करते।

गुजरात में हुए म्युनिसिपल कॉरपोरेशन चुनाव में भाजपा की बंपर जीत को देखते हुए पीएम मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ट्वीट कर जनता का आभार जताया था। भाजपा ने कुल 85% सीटें जीती हैं। वहीं कॉन्ग्रेस मात्र 44 सीटों पर सिमट कर रह गई है।

मुनव्वर फारूकी के 2 और साथियों को मिली कोर्ट से जमानत: 2 हो चुके हैं पहले ही रिहा

हिन्दू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में मुनव्वर फारूकी के साथ गिरफ्तार दो और आरोपितों को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने शुक्रवार को अंतरिम जमानत दे दी

न्यायमूर्ति रोहित आर्य ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निचली अदालत को आदेश दिया कि वह सदाकत खान (23) और नलिन यादव (25) को अंतरिम जमानत पर रिहा करे। इसी पीठ ने इससे पहले प्रखर व्यास और एडविन एंथनी को 12 फरवरी को जमानत पर रिहा किया था। उससे पहले फारूकी की रिहाई हुई थी

बता दें कि फारूकी और पाँच अन्य को  इंदौर में शो का आयोजन करने के लिए 1 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था। ये कार्रवाई स्थानीय भाजपा नेत्री मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़ के बेटे एकलव्य सिंह की शिकायत पर हुई थी।

बीजेपी विधायक के बेटे ने इल्जाम लगाया था कि शो में हिंदू देवी देवताओं के विरुद्ध और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लिए अपमानजक शब्द प्रयोग किए गए।

मालूम हो कि 5 फरवरी को हिंदू देवी-देवताओं पर अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में जेल में बंद स्टैंड-अप कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी को सुप्रीम कोर्ट ने राहत प्रदान करते हुए अंतरिम जमानत दी थी। सुप्रीम कोर्ट में मुनव्वर फारूकी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उसे अंतरिम जमानत पर रिहा करने से मना कर दिया गया था।

उसके बाद प्रखर व्यास और एडविन एंथोनी को भी 12 फरवरी को अंतरिम जमानत दे दी गई। जिसे देखते हुए खान और यादव के वकीलों ने शीर्ष अदालत के इस आदेश का हवाला दिया और अपने मुवक्किलों के लिए जमानत माँगी। इसी पर गौर करते हुए कोर्ट ने बाकी दो की भी जमानत की अर्जी मंजूर की।

केरल में 9वीं कक्षा की छात्रा को ड्रग एडिक्ट बनाकर होता रहा गैंगरेप: मो अफ्ला और रफीक गिरफ्तार

केरल के मल्लापुरम में 9वीं कक्षा में पढ़ने वाली 14 साल की लड़की को ड्रग देकर उसके साथ गैंगरेप करने के मामले में पुलिस ने दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। ये दोनों एक ड्रग सिंडिकेट के सदस्य हैं। इनकी पहचान मोहम्मद अफ्ला और मोहम्मद रफीक के तौर पर हुई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस केस के साथ ही पुलिस ने ड्रग व सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इसी रैकेट के 7 सदस्य पिछले कुछ माह से पीड़िता को ड्रग देकर उसका रेप करते थे। इन लोगों से पीड़िता इंस्टाग्राम के जरिए संपर्क में आई थी।

केरल पुलिस ने बताया कि लॉकडाउन के बाद जब ऑनलाइन क्लास शुरू हुई तो लड़की को क्लास लेने के लिए मोबाइल एक्सेस दिया गया था। लेकिन इस दौरान वह इंस्टाग्राम के जरिए 30 साल के युवक के संपर्क में आई। ये मुख्य साजिशकर्ता था। इसने लड़की से कई बार इंस्टाग्राम पर चैटिंग की फिर उसके घर आया और उसे ड्रग्स देने लगा।

पुलिस ने बताया कि आरोपित लड़की को ड्रग दे देकर उसे उसका आदि बना रहे थे। बाद में उन्होंने उसका शारीरिक शोषण शुरू किया। फिर अन्य लोग भी उसका यौन शोषण करने लगे।

जानकारी के मुताबिक, पीड़िता मल्लापुरम की रहने वाली है। यहाँ वह अपने माँ और भाई के साथ रहती है। उसके पिता पश्चिम एशिया में काम करते हैं। आरोपितों ने पहले अपने मनसूबों को अंजाम देने के लिए लड़की के घर में जगह बनाई फिर उसे ड्रग दिया और बाद में प्रताड़ित करना शुरू किया। 

पुलिस के संज्ञान में पूरा मामला चाल्डलाइन के हस्तक्षेप के बाद आया और किसी तरह पीड़िता को बचाया जा सका। पड़ताल में पता चला कि रैकेट के सदस्य स्कूल जाने वाली लड़कियों को फँसाते थे, फिलहाल पीड़िता को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी भेज दिया गया है। पुलिस ने भी सातों आरोपितों के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया है।

केंद्र के हिसाब से हुआ है चुनाव तारीखों का ऐलान: चुनाव आयोग पर भड़कीं ममता बनर्जी, लिबरल भी बिलबिलाए

पश्चिम बंगाल में चुनावी तारीखों के ऐलान के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग पर सवाल खड़े किए हैं। चुनाव आयोग की ओर की गई घोषणा के बाद सीएम ममता ने उनकी मंशा पर सवाल खड़ा किया और पूछा कि क्या उन्होंने ये तारीखों का ऐलान बीजेपी के हिसाब से किया है।

सीएम ममता ने कहा कि इस बार पश्चिम बंगाल में 8 चरणों में चुनाव होगा। बीजेपी के कहने पर ऐसा हुआ है। उन्होंने कहा कि बंगाल पर बंगाली ही राज करेगा किसी बाहरी को घुसने नहीं दिया जाएगा।

ममता बनर्जी ने कहा, ”क्या केंद्र के निर्देश पर तारीखों का ऐलान किया गया है? जिलों को 2 भागों में क्यों बाँटा गया है? हमारा अनुरोध है की पैसे की बर्बादी बंद की जाए। हम जमीनी नेता हैं और स्थानीयों की परेशानी से वाकिफ हैं।”

आगे ममता बनर्जी ने कहा, “सरकार ने लोगों को धर्म के नाम पर तोड़ा और अब चुनावों के लिए तोड़ रही है, उन्होंने केवल 8 चरणों में चुनावों को नहीं तोड़ा बल्कि हर चरण को भी भागों में बाँटा है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, “पीएम अपनी ताकत का दुरुपयोग न करें। इससे बीजेपी को कोई फायदा नहीं होगा। बीजेपी को बंगाल की जनता जवाब देगी। बीजेपी जनता को हिंदू मुस्लिम में बाँट रही है।”

बता दें कि बंगाल में 8 चरणों के चुनावों की बात जानकर सिर्फ ममता बनर्जी अपना गुस्सा चुनाव आयोग पर नहीं उतार रही हैं, लिबरल गिरोह ने भी घोषणा के बाद रोना शुरू कर दिया है।

रोहिणी सिंह पूछती हैं कि आखिर 8 चरणों में होंगे चुनाव 294 चरण में करवाएँ जाएँ। आमिर जावेद लिखते हैं कि चुनाव 8 चरणों में होंगे, तीन हफ्ते तक, ये बंगाल जैसे राज्य के लिए थोड़ा अजीब है। इसी प्रकार अन्य गिरोह के लोग भी अलग-अलग ढंग से अपनी नाराजगी जाहिर करने में लगे हैं।

मरियम नवाज की खिल्ली उड़ाने के चक्कर में PAK सांसद ने किया हिंदुओं की भावनाओं को आहत, पोस्ट की देवी काली की तस्वीर

पाकिस्तान में टेलीविजन पर मजहबी ज्ञान देने वाले उलेमा से राजनेता बने सत्ताधारी पार्टी के लीडर आमिर लियाकत हुसैन ने विपक्षी नेता मरियम नवाज का मजाक उड़ाने के लिए हिंदू देवी माँ काली के चित्र का इस्तेमाल किया। उनकी इस अपमानजनक हरकत के बाद बवाल खड़ा हो गया है। लोग उनसे माफी माँगने को कहने लगे और उन्हें काफी भला बुरा भी कहा।

रिपोर्ट्स के अनुसार, आमिर लियाकत हुसैन, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के सदस्य हैं। जिनकी एक घटिया हरकत से पूरा विवाद छिड़ गया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बेटी का मखौल उड़ाने के लिए ऐसा किया, वो भी इसलिए क्योंकि मरियम ने पाकिस्तान सरकार को धमकी दी थी कि अगर वोट चुराने की कोशिश हुई तो वह उनका दूसरा रूप देखेंगे। 

इसी बयान को आधार बनाकर आमिर ने देवी काली के रूप वाली तस्वीर पोस्ट की और उस पर लिखा दूसरा रूप। इस ट्वीट के बाद हिंदू समुदाय भड़क गया। पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के प्रमुख और सिंध प्रांत के थारपारकार से सत्ताधारी पार्टी के प्रतिनिधि रमेश कुमार ने हुसैन के ट्वीट को शर्मनाक ट्वीट कहकर उसकी आलोचना की।

उन्होंने इस कृत्य की निंदा करते हुए कहा कि ऐसे मजहबी विद्वान होने का दावा करने वाले किसी व्यक्ति द्वारा इतनी शर्मनाक हरकत की निंदा की जाती है, यह अन्य धर्माों के प्रति सम्मान नहीं जानता। इस ट्वीट को फौरन डिलीट किया जाए, वरना हमारी ओर से ईशनिंदा के कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की माँग की जाती है और देशभर में विरोध प्रदर्शन भी होगा।

उन्होंने कहा कि इस हरकत से न केवल हिंदुओं की भावना आहत हुई है बल्कि सत्ताधारी पार्टी के समर्थकों में भी नाराजगी पैदा की है, जिन्होंने पार्टी प्रमुख और प्रधानमंत्री इमरान खान की प्रशंसा की और धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के बारे में पार्टी के घोषणापत्र में विश्वास किया, जो स्पष्ट रूप से अपने आप में एक मजाक है।

हिंदू समुदाय के एक अन्य पार्टी नेता और उमरकोट से पीटीआई एमएनए, लाल मल्ही ने भी हुसैन की आलोचना की। साथ ही प्रधानमंत्री इमरान खान से इस पर संज्ञान लेने की गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि ट्वीट ने वास्तव में, हुसैन के दूसरे रूप को दिखाया है।

पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, पीटीआई एमएनए और हिंदू नेता जयप्रकाश ने भी आमिर की आलोचना की और माफी माँगने को कहा। वहीं विपक्षी पार्टी के हिंदू नेता ने कहा कि हुसैन अपना दिमागी संतुलन खो चुके हैं और कमजोर वर्ग के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। इसलिए अगर हुसैन माफी नहीं माँगते तो उनकी ओर से प्रदर्शन किया जाएगा।

वह बोले, “हम नेताओं को ट्वीट करने से पहले या बयान जारी करने से पहले लोगों की भावनाओं की कद्र करनी चाहिए।” हिंदुओं के अधिकारों के लिए काम करने वाले कपिल देव ने कहा कि हिंदुओं को अपमान हुआ है और उनके धार्मिक भावनाओं को संसद में बैठे लोगों ने आहत किया है।

मालूम हो कि इतने विवाद के बाद आमिर हुसैन ने अपने हैंडल से उस तस्वीर को डिलीट कर दिया जिसे लेकर पूरा विवाद हुआ। उसने कहा, “मुझे पता है कि हिंदू समुदाय की भावनाएँ आहत हुईं। मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूँ, यही मेरे धर्म ने मुझे सिखाया है।”

2019 से अब तक किया बहुत काम, बंगाल में जीतेंगे 200 से ज्यादा सीटें: BJP नेता कैलाश विजयवर्गीय

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीख की घोषणा होने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से एक बार फिर ऐलान किया गया है कि इन चुनावों में वह 200 से ज्यादा सीटें जीतने वाले हैं।

भाजपा के बंगाल में इंचार्ज कैलाश विजयवर्गीय ने कहा अपनी जीत के प्रति आश्वस्त होते हुए कहा कि लोकसभा चुनावों में भी लोगों को विश्वास नहीं था कि भाजपा इतनी ताकतवर है लेकिन अब शंका दूर हो गई है। इसलिए उन्हें लगता है कि उनकी पार्टी लोकसभा से ज्यादा वोट पाएँगे और उनका विश्वास है कि वो 200 से ज्यादा सीट जीतेंगे।

कैलाश विजयवर्जीय ने चुनावों के सबसे बड़े मुद्दे भ्रष्टाचार, माफिया राज, सिंडिकेट राज को बताया। उन्होंने कहा कि इन सबके अलावा राज्य में डेवलपमेंट रुक गया है। लोगों ने मान लिया है कि बंगाल का विकास नहीं होगा क्योंकि वहाँ एक तरह से माफियों का साम्राज्य हो गया है। आम जनता ठगा महसूस कर रही है। उन्हें पता चल गया है कि केंद्र सरकार की योजनाएँ तक उनके पास नहीं पहुँच पा रहीं। इसलिए उन्हें कहीं से कहीं तक शक नहीं है कि वो बंगाल में दो तिहाई से कम बहुमत से चुनाव जीतेंगे।

कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि उन लोगों ने 2019 से 2021 के बीच बहुत काम किया है। वहाँ के कई ताकतवर कैंडिडेट भाजपा के साथ जुड़े हैं, फिर चाहे वो सुवेंदु अधिकारी हों या राजीव बनर्जी हों।

इसके अलावा भी काफी लोग हैं जो दूसरी पार्टी से थे और अब वह भाजपा के साथ आ गए हैं। जिसे देख कह सकते हैं कि उनकी ताकत उन इलाकों में बढ़ी जहाँ उन्हें पिछली बार सफलता नहीं मिली थी। इसलिए कह सकते हैं कि उन्हें बड़ी सफलता मिलेगी।

मुख्यमंत्री कैंडिडेट के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने आंतरिक लोकतंत्र पर बात की। उन्होंने कहा कि जहाँ उनकी कभी सरकार नहीं बनी होती है वहाँ वह लोग पहले उम्मीदवार की घोषणा नहीं करते हैं। चुनाव जीतने के बाद बैठक होगी, सब अपना नेता चुनेंगे और उसके बाद बोर्ड सहमति प्रदान करेगा, उसे मुख्यमंत्री बना दिया जाएगा। इसलिए मुख्यमंत्री चुनना उनके लिए चुनौती नहीं है बस उनका लक्ष्य दो तिहाई बहुमत से जीतना है।

ममता बनर्जी के काउंटर अभियान को लेकर वह बोले कि ममता बनर्जी भाजपा को बाहरी पार्टी मानती हैं। लोग नहीं मानते। उन्हें पता है कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी इस पार्टी के पहले अध्यक्ष थे। इसलिए उनकी बातों को कोई गंभीरता से लेता ही नहीं है। मीडिया इसे तूल देती है, आम जन नहीं।

बंगाल चुनाव में जीत की महत्ता पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि ये चुनाव सबके लिए महत्तवपूर्ण है क्योंकि वहाँ जिस प्रकार बाहरी ताकतें आ रही हैं और देश विरोधी गतिविधियाँ हो रही है, वो सबके लिए चिंता की बात है। वह कहते हैं कि बंगाल में अब तक जिसकी भी सरकार रही, उन्होंने देश के बारे में नहीं सोचा सिर्फ़ कुर्सी के बारे में सोचा। घुसपैठिए ऐसे आए जैसे बंगाल धर्मशाला हो। उनके साथ तमाम अपराध भी आए। तो बंगाल चुनाव के लिहाज से सबके लिए जरूरी है।

बता दें कि आज मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया है पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में चुनाव कराया जाएगा। पहला चरण 27 मार्च को होगा, दूसरा- 1 अप्रैल को, तीसरा- 6 अप्रैल को, चौथा- 10 अप्रैल को, पाँचवा- 17 अप्रैल को, छठा-22 अप्रैल को, सातवाँ- 26 अप्रैल को और अंतिम चरण 29 अप्रैल को होगा।

5 राज्यों के विधानसभा चुनावों की तारीखों का हुआ ऐलान, बंगाल में 8 चरणों में होगा मतदान: जानें डिटेल्स

आगामी विधानसभा चुनाव की तारीखों को लेकर आज (फरवरी 26, 2021) मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने प्रेस वार्ता की। इस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कोरोना योद्धाओं को सलाम करते हुए चुनाव की तारीख का ऐलान किया।

उन्होंने बताया कि देश के पाँच राज्य केरल, तमिलनाडु, असम, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में कुल मिलाकर इस बार 18 करोड़ मतदाता वोट देंगें। इनमें से केरल में इलेक्शन 6 अप्रैल को होंगे और वोटों की गिनती 2 मई को की जाएगी। तमिलनाडु में चुनाव एक चरण में ही होंगे। इसके लिए भी तारीख 6 अप्रैल रखी गई है और 2 मई को ही यहाँ भी काउंटिंग होगी। पुडुचेरी के चुनाव के लिए भी यही तारीख रखी गई है।

असम में तीन चरणों में चुनाव होगा। पहला 27 मार्च को। दूसरा 1 अप्रैल को और तीसरा 6 अप्रैल को। वहीं वोटो की गिनती 6 अप्रैल को की जाएगी।

पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में चुनाव कराया जाएगा। पहला चरण 27 मार्च को होगा, दूसरा- 1 अप्रैल को, तीसरा- 6 अप्रैल को, चौथा- 10 अप्रैल को, पाँचवा- 17 अप्रैल को, छठा-22 अप्रैल को, सातवाँ- 26 अप्रैल को और अंतिम चरण 29 अप्रैल को होगा।

मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने बताया कि पश्चिम बंगाल में कुल 294 सीट है, जिसमें 68 एससी कोटा और 16 एसटी कोटा की सीट है। उन्होंने कहा कि बंगाल में चुनाव के दौरान सभी बूथ ग्राउंड फ्लोर पर होगा। इसके साथ ही राज्य में वोटिंग 6 बजे तक होगी। 

उनके अनुसार, समय में बदलाव का फैसला कोरोना को देखते हुए लिया गया है। इससे पहले बिहार चुनाव के समय भी टाइमिंग में बदलाव किए गए थे। ECI ने बंगाल चुनावों को लेकर एक और बड़ा ऐलान किया। आयोग ने बताया कि 80 साल से ज्यादा के लोग अगर चाहें तो बैलेट पेपर के जरिये वोटिंग कर सकते हैं, लेकिन यह उनकी इच्छा पर है।

चुनाव आयोग ने कहा कि राजनीतिक दल अपने अपराधिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवार के बारे में लोकल अखबार, चैनल और अपनी वेबसाइट पर जानकारी देंगे जिससे जनता को पता रहे कि उम्मीदवार कैसा है?

मालूम हो कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा की 295 सीटों के लिए चुनाव की घोषणा के साथ सुदीप जैन को बंगाल का चुनावी प्रभारी बनाया गया है। चुनाव के लिए आयोग ने दो ऑब्जर्वर विवेक दुबे और एमके दास को नियुक्त किया है।

सीईसी सुनील अरोड़ा ने कहा कि चुनाव के दौरान स्पेशल, जनरल, खर्च और पुलिस ऑब्जर्वर तैनात होंगे। कई बार जरूरी होने पर चुनाव आयोग जिला ऑब्जर्वर पर निगरानी के लिए सेंट्रल आब्जर्वर भी भेजता है। उन्होंने बताया कि विवेक दुबे को पश्चिम बंगाल, दीपक मिश्रा को केरल, धर्मेंद्र कुमार को तमिलनाडु में स्पेशल पुलिस ऑब्जर्वर बनाकर भेजा जा रहा है।