‘अपनी पॉलिसी, अपना प्रोपेगेंडा’ – वाली मनमानी बड़ी-बड़ी IT कंपनियों की शायद अब नहीं चलने वाली है। बुधवार (3 फरवरी 2021) को केंद्र सरकार ने ट्विटर को स्पष्ट कह दिया है कि ‘किसान’ प्रदर्शन को लेकर जितने भी भड़काऊ ट्वीट हैं, उन्हें हटाया जाए वरना जेल और जुर्माना दोनों के लिए कंपनी तैयार रहे।
केंद्र सरकार ने 257 अकाउंट को ब्लॉक करने का आदेश ट्विटर को दिया था। ये सभी अकाउंट #ModiPlanningFarmerGenocide (किसानों के नरसंहार के लिए मोदी की प्लानिंग) नाम से हैशटैग चला रहे थे।
ट्विटर ने केंद्र सरकार की शिकायत पर शुरुआत में इन 257 अकाउंट्स पर रोक (withheld) लगाई थी। 1 फरवरी 2021 को लगाई गई यह रोक लगभग एक मजाक था। क्योंकि यह कुछ मिनटों-घंटों में ही हटा लिया गया। कंपनी ने ‘फ्री स्पीच’ और ‘समाचार के लायक कंटेंट’ का हवाला देकर इन अकाउंट्स को रिस्टोर कर दिया था।
IT मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को ट्विटर के बारे में कहा – “ट्विटर एक माध्यम है। वह सरकार का आदेश मानने के लिए बाध्य है। ऐसा नहीं करने पर कानून के अनुसार उस पर कार्रवाई करने के लिए सरकार स्वतंत्र है। नरसंहार के लिए उकसाना ‘फ्री स्पीच’ नहीं हो सकता। यह कानून-व्यवस्था के लिए खतरा है। “
भड़काऊ कंटेंट को माध्यम देकर लोगों तक फैलाने के लिए IT एक्ट के सेक्शन 69A (3) के तहत ट्विटर इंडिया के सीनियर ऑफिसर को 7 साल तक की जेल और कंपनी पर जुर्माना – दोनों का प्रावधान है।
#ModiPlanningFarmerGenocide के हैशटैग के साथ भड़काऊ कंटेंट ट्वीट करने वालों में प्रमुख नाम थे – किसान एकता मोर्चा, BKU एकता उग्रहन, कारवाँ मैगजिन, सीपाआई नेता मोहम्मद सलीम और कथित एक्टिविस्ट हंसराज मीणा।
सोशल मीडिया पर बैन
युगांडा में राष्ट्रपति ने 12 जनवरी को ट्विटर और फेसबुक के साथ अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक कर दिया। राष्ट्रपति मुसेवेनी ने कहा, “इन प्लेटफॉर्म्स का समान रूप से उपयोग किया जाना चाहिए। यदि आप किसी पक्ष को लेना चाहते हैं, तो आप युगांडा में काम नहीं कर सकते, क्योंकि युगांडा हमारा देश है हम उन्हें यह तय करने नहीं दे सकते कि कौन अच्छा है और कौन बुरा।”
Myanmar state-run internet provider blocks Facebook services: Reuters
म्यांमार में नई-नवेली सैन्य सत्ता ने 4 फरवरी 2021 को फेसबुक को ब्लॉक कर दिया। वहाँ की सरकारी इंटरनेट प्रोवाइडर MPT ने फेसबुक को ही ब्लॉक कर दिया। फेसबुक के साथ-साथ इसके मैसेंजर, इंस्टाग्राम, वॉट्सऐप को भी ब्लॉक किया गया है। MPT के अलावा प्राइवेट टेलिनॉर (Telenor) ने भी म्यांमार सरकार का आदेश मानते हुए फेसबुक को ब्लॉक किया।
भारत द्वारा किए जा रहे कृषि सुधारों के महत्व को समझते हुए, संयुक्त राज्य अमेरिका ने बुधवार (फरवरी 03, 2021) को मोदी सरकार द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों को अपना समर्थन दिया। बुधवार को जारी एक बयान में, बायडेन प्रशासन ने कहा कि वो उन कदमों का स्वागत करता है, जो भारत के बाजारों की कुशलता में सुधार करेंगे और निजी क्षेत्र में अधिक निवेश को आकर्षित करेंगे।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यूएस स्टेट डिपार्टमेंट द्वारा जारी बयान में संकेत दिया गया है कि नया बायडेन प्रशासन भारत सरकार के कृषि क्षेत्र में सुधार के कदम का समर्थन करता है जो कि निजी निवेश और किसानों के लिए बड़े बाजार को आकर्षित करेगा।
अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका यह स्वीकार करता है कि शांतिपूर्ण विरोध किसी भी संपन्न लोकतंत्र की पहचान हैं। साथ ही, उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच मतभेदों को बातचीत के माध्यम से हल किया जाना चाहिए।
Not to be lost in this, State Dept broadly appears to back India’s agricultural reforms amid #FarmersProtests: “In general, the United States welcomes steps that would improve the efficiency of India’s markets and attract greater private sector investment.” https://t.co/phU9UVHR9n
प्रवक्ता ने कहा, “हम मानते हैं कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किसी भी संपन्न लोकतंत्र की पहचान हैं। भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी यही कहा है। हम पार्टियों के बीच किसी भी तरह के मतभेदों को बातचीत के माध्यम से हल करने का ही समर्थन करेंगे। सामान्य तौर पर, संयुक्त राज्य अमेरिका ऐसे कदमों का स्वागत करता है जो भारत के बाजारों की दक्षता में सुधार करेंगे और निजी क्षेत्र के अधिक निवेश को आकर्षित करेंगे।”
उल्लेखनीय है कि अमेरिका से पहले वर्ड बैंक और आईएमएफ भी भारत के तीन नए कृषि कानूनों का समर्थन कर चुका है। किसान इन कृषि कानूनों के खिलाफ 26 नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। बायडेन प्रशासन का यह बयान भारतीय लोकतंत्र के खिलाफ की जा रही वैश्विक साजिशों के खुलासे के ठीक अगले दिन ही आया है।
इन आंदोलनों के बीच, 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर किसान ट्रैक्टर रैली के दौरान हिंसा भड़की। प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली में प्रवेश करने के लिए बैरिकेड्स तोड़ दिए और केंद्र की तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में अपनी ट्रैक्टर रैली के दौरान राष्ट्रीय राजधानी के कई हिस्सों में उत्पात मचाया।
वहीं, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सीमावर्ती क्षेत्रों में किसानों द्वारा जारी विरोध प्रदर्शन के बीच, कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियों ने भी इसे अपना समर्थन दिया। इसमें पॉप सिंगर रिहाना, मिया खलीफा, थनबर्ग आदि ने ट्विटर पर इसे लेकर ट्वीट किए। लेकिन बुधवार (फरवरी 03, 2021) देर शाम ग्रेटा थनबर्ग ने अनजाने में ही भातीय लोकतंत्र को बदनाम करने के इस ग्लोबल अजेंडा की भी पोल खोल डाली।
स्वीडिश एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने भारत में जारी किसान आंदोलन के समर्थन में एक ट्वीट किया। लेकिन कुछ ही देर बाद यह ट्वीट ग्रेटा ने डिलीट भी कर दिया। हालाँकि, तब तक बहुत देर भी हो चुकी थी। इस डॉक्यूमेंट से यह स्पष्ट हो गया है कि किसान आन्दोलन एक सोची समझी रणनीति के साथ शुरू किया गया था और 26 जनवरी का उपद्रव भी इसी रणनीति का हिस्सा था।
इस बीच, भारत ने किसानों के विरोध पर विदेशी हस्तियों के बयानों को ‘निहित स्वार्थ समूहों’ का हिस्सा करार दिया। भारत रत्न सचिन तेंदुलकर, गायिका लता मंगेशकर समेत बॉलीवुड से लेकर खेल जगत की तमाम हस्तियों ने भी इस अंतरराष्ट्रीय अजेंडा के खिलाफ ट्वीट किया है।
रिहाना के ट्वीट के बाद भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर इन ट्वीट्स को लेकर बयान जारी किया। मंत्रालय ने कहा, “भारत की संसद ने व्यापक बहस और चर्चा के बाद, कृषि क्षेत्र से संबंधित सुधारवादी क़ानून पारित किया। ये सुधार किसानों को अधिक लचीलापन और बाज़ार में व्यापक पहुँच देते हैं। ये सुधार आर्थिक और पारिस्थितिक रूप से सतत खेती का मार्ग प्रशस्त करते हैं।”
विदेश मंत्रालय ने अपने पोस्ट में #IndiaTogether और #IndiaAgainstPropaganda हैशटैग का इस्तेमाल किया।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सीमावर्ती क्षेत्रों में किसानों द्वारा जारी विरोध प्रदर्शन के बीच, कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियों ने अपना समर्थन दिया है। इसमें पॉप सिंगर रिहाना, मिया खलीफा, थनबर्ग आदि ने ट्विटर पर इसे लेकर ट्वीट किए। लेकिन बुधवार (फरवरी 03, 2021) देर शाम ग्रेटा थनबर्ग ने अनजाने में ही भातीय लोकतंत्र को बदनाम करने के इस ग्लोबल अजेंडा की भी पोल खोल डाली।
स्वीडिश एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने भारत में जारी किसान आंदोलन के समर्थन में एक ट्वीट किया। लेकिन कुछ ही देर बाद यह ट्वीट ग्रेटा ने डिलीट भी कर दिया। हालाँकि, तब तक बहुत देर भी हो चुकी थी। इस डॉक्यूमेंट से यह स्पष्ट हो गया है कि किसान आन्दोलन एक सोची समझी रणनीति के साथ शुरू किया गया था और 26 जनवरी का उपद्रव भी इसी रणनीति का हिस्सा था।
ग्रेटा द्वारा डिलीट कर दिया गया ट्वीट
ट्वीट में ग्रेटा ने लिखा था कि ‘हम भारत में चल रहे किसान आंदोलन के साथ एकजुटता से खड़े हैं।’ इसके बाद उसने एक और ट्वीट किया, जिसमें गूगल डॉक्युमेंट की एक फाइल शेयर की गई थी। इस फाइल में भारत में चल रहे किसान आन्दोलन को हवा देने वाले सोशल मीडिया कैंपेन का शेड्यूल और तमाम रणनीति दर्ज थीं।
यह गूगल डॉक्यूमेंट शेयर करते हुए ग्रेटा ने लिखा था कि जो लोग मदद करना चाहते हैं यह ‘टूलकिट’ उनके लिए है। इस लिंक में भारत सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव डालने क कार्ययोजना का विवरण था। ग्रेटा ने गलती से सार्वजानिक किया हुआ ये ट्वीट तो डिलीट कर दिया लेकिन तब तक लोगों के पास यह डॉक्यूमेंट पहुँच चुके थे।
इस दस्तावेज में उन सभी ट्वीट का जिक्र दिया गया है, जो भारत सरकार पर दबाव बनाने के लिए विभिन्न हस्तियों, समूहों और लोगों द्वारा किए जाने हैं। यहाँ तक कि रिहाना द्वारा जो ट्वीट किया गया, वो भी ठीक उन्हीं शब्दों में है, जैसा कि इस दस्तावेज में रिहाना के नाम से जारी किया गया था।
जब हमने इस दस्तावेज में दी गए कुछ ट्वीट तलाशे, तो हमें ये परिणाम मिले। परिणाम बताते हैं कि यह अभियान कम से कम नवंबर, 2020 से चल रहा है।
ग्रेटा थनबर्ग द्वारा किए गए ट्वीट के बाद इस टूलकिट के दस्तावेजों की गोपनीयता में बदलाव कर इसे ‘प्राइवेट’ कर दिया गया है, ताकि लोग इसमें छुपी जानकारी ना जुटा सकें। यह भी कहा गया है कि 26 जनवरी के लिए जो योजना तैयार की गई थी, वह पूरी दुनिया और भारत में बिल्कुल वैसी ही रही।
डॉक्यूमेंट की कुछ प्रमुख बातें
विरोध प्रदर्शन में भाग लें: 25 जनवरी तक ईमेल द्वारा एकजुटता दिखने वाले फोटो/वीडियो संदेश शेयर करें (दिल्ली की सीमा पर किसानों के लिए एकजुटता संदेश)।
डिजिटल स्ट्राइक: #AskIndiaWhy वीडियो/फोटो संदेश – 26 जनवरी को या उससे पहले।कृषि बिल का विरोध करने के लिए प्रधानमंत्री और कृषि मंत्री को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व व्यापार संगठन और विश्व बैंक के साथ टैग किया जाना है।
4-5 फरवरी 2021 को ट्विटर स्टॉर्म: 5 फरवरी तक या अधिकतम 6 फरवरी तक फोटो/वीडियो संदेश शेयर करें। गौरतलब है कि ठीक 6 फ़रवरी के दिन ही किसानों ने राष्ट्रव्यापी चक्का जाम की भी घोषणा की है।
स्थानीय प्रतिनिधियों द्वारा भारत सरकार पर दबाव बनाने में अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की कोशिश करें।
इसमें लोगों को भारतीय दूतावासों, स्थानीय सरकारी कार्यालयों या विभिन्न बहुराष्ट्रीय अडानी और अंबानी कंपनियों के कार्यालयों में एकजुटता विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के लिए भी दिशानिर्देश दिया गया है।
इस बीच, भारत ने किसानों के विरोध पर विदेशी हस्तियों के बयानों को ‘निहित स्वार्थ समूहों’ का हिस्सा करार दिया। भारत रत्न सचिन तेंदुलकर, गायिका लता मंगेशकर समेत बॉलीवुड से लेकर खेल जगत की तमाम हस्तियों ने भी इस अंतरराष्ट्रीय अजेंडा के खिलाफ ट्वीट किया है।
रिहाना के ट्वीट के बाद भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर इन ट्वीट्स को लेकर बयान जारी किया। मंत्रालय ने कहा, “भारत की संसद ने व्यापक बहस और चर्चा के बाद, कृषि क्षेत्र से संबंधित सुधारवादी क़ानून पारित किया। ये सुधार किसानों को अधिक लचीलापन और बाज़ार में व्यापक पहुँच देते हैं। ये सुधार आर्थिक और पारिस्थितिक रूप से सतत खेती का मार्ग प्रशस्त करते हैं।”
विदेश मंत्रालय ने अपने पोस्ट में #IndiaTogether और #IndiaAgainstPropaganda हैशटैग का इस्तेमाल किया।
कॉन्ग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी के लिए उत्तर प्रदेश से बुरी खबर सामने आई है। अयोध्या जिले के एडीजे-प्रथम कोर्ट ने उन्हें राफेल मामले (Rafael) को लेकर नोटिस जारी किया है। राहुल गाँधी को 26 मार्च को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है। यह निर्देश वकील मुरलीधर चतुर्वेदी की दायर याचिका के तहत दी गई है, जिसमें उन्होंने राहुल गाँधी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अपशब्द कहने के आरोप लगाए हैं।
क्या बोले थे राहुल गाँधी
जानकारी के मुताबिक, राहुल गाँधी कुछ समय पहले राफेल को लेकर लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमलावर थे। इस दौरान उन्होंने लड़ाकू विमान से संबंधित दस्तावेज को स्कैम बताया था। वकील ने याचिका में जिक्र किया है कि राहुल गाँधी ने ना सिर्फ कागज को फर्जी बताया, बल्कि पीएम के लिए ‘चौकीदार चोर’ शब्द का इस्तेमाल भी किया था।
सुप्रीम कोर्ट से माँग चुके हैं माफी
बता दें कि राफेल मामले को लेकर राहुल गाँधी पर ये पहला केस नहीं है। इससे पहले उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल की जा चुकी है। उन पर कोर्ट की अवमानना का आरोप लगा था। तब राहुल गाँधी ने हलफनामा दायर करके सुप्रीम कोर्ट से माफी माँग ली थी। उन्होंने हलफनामे में लिखा था कि उन्होंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया। उनसे गलती हो गई। इसके लिए वह माफी चाहते हैं।
गौरतलब है कि राहुल गाँधी राफेल डील और कई मुद्दों को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर लगातार हमलावर रहे हैं। वो नोटबंदी पर भी सरकार को घेरने से पीछे नहीं रहे। इस दौरान भी उन्होंने केंद्र सरकार पर भ्रष्टाचार और पीएम मोदी को चौकीदार चोर कहकर संबोधित भी किया।
हाल ही में उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोदी सरकार पर हमला किया और कहा कि चीन भारत में प्रवेश करता है और हमारी जमीन हड़प लेता है। आप उन्हें क्या संदेश देते हैं? कि हम अपने रक्षा व्यय में वृद्धि नहीं करेंगे। आपने इसे 3000-4000 करोड़ रुपए बढ़ा दिया। आपने क्या संदेश दिया? आप भारत में प्रवेश कर सकते हैं और जो चाहें कर सकते हैं, हम अपने रक्षा बलों का समर्थन नहीं करेंगे।
पाॅप सिंगर रिहाना ने किसानों के समर्थन को लेकर जब से ट्वीट किया है, वह भारत में दिग्गजों के निशाने पर आ गई है। सोशल मीडिया पर जहाँ यूज़र्स उन्हें जमकर खरी-खोटी सुना रहे वहीं फेमस सेलेब्रिटीज़ उन्हें भारत के आतंरिक मामलों से दूर रहने की सलाह दे रहे हैं। इसी कड़ी में अब ‘गॉड ऑफ क्रिकेट‘ भारत रत्न सचिन तेंदुलकर ने बाहरी हस्तियों को मुँहतोड़ जवाब दिया है।
पूर्व दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने कहा है कि भारत की संप्रभुता से समझौता नहीं किया जा सकता है। उनकी यह यह टिप्पणी विदेश मंत्रालय द्वारा अंतरराष्ट्रीय पॉप स्टार रिहाना, जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग और अन्य की ओर से किसान आंदोलन पर की गई टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करने के बाद आई है।
सचिन तेंदुलकर ने लिखा, “भारत की संप्रभुता से समझौता नहीं किया जा सकता है। बाहरी ताकतें दर्शक हो सकती हैं लेकिन प्रतिभागी नहीं। भारतीय भारत को जानते हैं और उन्हें ही भारत के लिए फैसला करना है। आइए एक राष्ट्र के रूप में एकजुट रहें। IndiaTogether #IndiaAgainstPropaganda”
India’s sovereignty cannot be compromised. External forces can be spectators but not participants. Indians know India and should decide for India. Let’s remain united as a nation: Sachin Tendulkar
वहीं पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना ने भी इस पर नाराजगी जाहिर की और विदेशी हस्तियों को किसान आंदोलन पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं करने की सलाह दी।
We as a country have issues to resolve today and will have issues to resolve tomorrow as well, but that doesn’t mean we create a divide or get perturbed by external forces. Everything can be resolved through amicable and unbiased dialogue. #IndiaAgainstPropaganda#IndiaTogether
गौरतलब है कि इससे पहले अमित शाह ने भी इस मामले पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। इसके अलावा बॉलीवुड सेलेब्रिटीज़ भी भारत के समर्थन में खुलकर सामने आए और सीधे शब्दों में ट्वीट करते हुए लोगों से आग्रह किया कि वे मतभेद पैदा करने वाले किसी भी चीजों पर ध्यान न दें। इसके बाद से ही ट्विटर पर #IndiaTogether (इंडिया टुगेदर) ट्रेंड कर रहा है। इस ट्रेंड में बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अक्षय कुमार, अजय देवगन, सुनील शेट्टी, करण जौहर, एकता कपूर, कैलाश खेर और कई अन्य सितारें शामिल हैं।
No propaganda can deter India’s unity!
No propaganda can stop India to attain new heights!
Propaganda can not decide India’s fate only ‘Progress’ can.
उल्लेखनीय है कि विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि देश के कुछ हिस्सों में किसानों के एक बहुत छोटे से वर्ग को कृषि सुधारों के बारे में कुछ आपत्तियाँ हैं और आंदोलन पर जल्दबाजी में टिप्पणी करने से पहले इस मुद्दे को समझने की जरूरत है।
ट्विटर पर फैल रहे दुष्प्रचार पर लगाम लगाते हुए विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर रिहाना और ग्रेटा थनबर्ग जैसे चर्चित लोगों के ट्वीट को लेकर कहा कि सनसनीखेज सोशल मीडिया हैशटैग और कमेंट्स को लुभाने का तरीका, खासकर यह मशहूर हस्तियों द्वारा किया गया हो, तो यह न तो सटीक है और न ही जिम्मेदाराना है।
इस संबंध में विदेश मंत्रालय ने कहा, “इस तरह के मामलों पर टिप्पणी करने से पहले हम आग्रह करते हैं कि तथ्यों का पता लगाया जाए और मुद्दों को समझा जाए। भारत की संसद ने पूर्ण बहस और चर्चा के बाद कृषि क्षेत्र से संबंधित सुधारवादी कानून पारित किए।” हालाँकि इस दौरान मंत्रालय की ओर से विशेष रूप से किसी का नाम नहीं लिया गया है।
बता दें कि पॉप गायिका रिहाना ने मंगलवार (फरवरी 02, 2021) को एक खबर को ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा था, “हम इसके बारे में बात क्यों नहीं कर रहे?” इसके साथ ही उन्होंने Farmer’s Protest हैशटैग भी लिखा। वहीं इस खबर को साझा करते हुए एक्टिविस्ट ग्रेटा थुनबर्ग ने भी प्रदर्शनकारियों के साथ अपनी ‘एकजुटता’ व्यक्त की थी।
इंटरनेशनल पॉप स्टार रिहाना के ट्वीट के बाद देश में चल रहा किसान आंदोलन का मुद्दा अब इंटरनेशनल हो गया है। ट्विटर पर किसानों के समर्थन और विरोध में ट्वीट्स की बाढ़ आ चुकी है। एक तरफ जहाँ बॉलीवुड के दिग्गज सितारे भारत सरकार के समर्थन में एक जुट हो गए, वहीं अब केंद्रीय अमित शाह ने भी तीखा रुख अपनाते हुए कहा है कि कोई भी प्रोपेगेंडा भारत की एकता को तोड़ नहीं सकता है।
दरअसल, गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार (3 फरवरी, 2020) को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव के ट्वीट को रिट्वीट किया और विरोधी ताकतों को करारा जवाब दिया है। उन्होंने देश की अखंडता और एकता की मिसाल देते हुए कहा कि कोई भी प्रोपेगेंडा भारत की एकता को तोड़ नहीं सकता है। ना ही कोई भारत को नई ऊँचाई पाने से रोक सकता है।
No propaganda can deter India’s unity!
No propaganda can stop India to attain new heights!
Propaganda can not decide India’s fate only ‘Progress’ can.
गृहमंत्री ने ट्वीट किया, ”कोई प्रोपेगेंडा भारत की एकता को नहीं तोड़ सकता है। कोई प्रोपेगेंडा भारत को ऊँचाइयाँ प्राप्त करने से नहीं रोक सकता। भारत का भाग्य कोई प्रोपेगेंडा तय नहीं कर सकता है, केवल प्रगति तय करेगा। प्रगति के लिए भारत एक है और साथ है।” गृहमंत्री ने ट्वीट के साथ हैशटैग #IndiaAgainstPropaganda #IndiaTogether का इस्तेमाल किया है।
आपको बता दें कि पॉप गायिका रिहाना ने मंगलवार को एक खबर को ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा था, “हम इसके बारे में बात क्यों नहीं कर रहे? इसके साथ उन्होंने Farmer’s Protest हैशटैग भी लिखा।” वहीं इस खबर को साझा करते हुए एक्टिविस्ट ग्रेटा थुनबर्ग ने भी प्रदर्शनकारियों के साथ अपनी ‘एकजुटता’ व्यक्त की थी।
जिसके बाद ट्विटर पर फैल रहे दुष्प्रचार पर लगाम लगाते हुए विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करते हुए रिहाना और ग्रेटा थनबर्ग जैसे चर्चित लोगों के ट्वीट को लेकर कहा कि सनसनीखेज सोशल मीडिया हैशटैग और कमेंट्स को लुभाने का तरीका, खासकर यह मशहूर हस्तियों द्वारा किया गया हो, तो यह न तो सटीक है और न ही जिम्मेदाराना है। यह लोगों को लुभाने का आसान तरीका है।
इस संबंध में विदेश मंत्रालय ने आगे कहा, “इस तरह के मामलों पर टिप्पणी करने से पहले हम आग्रह करते हैं कि तथ्यों का पता लगाया जाए और मुद्दों की उचित समझ बनाई जाए। भारत की संसद ने पूर्ण बहस और चर्चा के बाद कृषि क्षेत्र से संबंधित सुधारवादी कानून पारित किए।” हालाँकि, इस दौरान मंत्रालय की ओर से विशेष रूप से किसी का नाम नहीं लिया गया है।
गौरतलब है कि विदेश मंत्रालय के बयान के बाद बॉलीवुड सेलेब्रिटीज़ भी भारत के समर्थन में खुलकर सामने आए। बॉलीवुड अभिनेताओं ने सामने आकर सीधे शब्दों में ट्वीट करते हुए लोगों से आग्रह किया कि वे मतभेद पैदा करने वाले किसी भी चीजों पर ध्यान न दें। इसके बाद से ही ट्विटर पर #IndiaTogether (इंडिया टुगेदर) ट्रेंड कर रहा है।
इस कड़ी में बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अक्षय कुमार, अजय देवगन, सुनील शेट्टी, करण जौहर, एकता कपूर, कैलाश खेर और कई अन्य सितारें शामिल रहे।
दिल्ली पुलिस ने गणतंत्र दिवस के दंगों के मुख्य अभियुक्तों के बारे में जानकारी देने वालों के लिए इनाम की घोषणा की है, जिसमें अभिनेता से कार्यकर्ता बना खालिस्तानी समर्थक दीप सिद्धू भी शामिल है। वहीं दूसरी तरफ, सिद्धू ने अपने फेसबुक पेज पर सनसनीखेज आरोप लगाते हुए एक और वीडियो जारी किया है। सिद्धू ने आरोप लगाया कि किसान यूनियन के नेता लाल किले में मौजूद थे, जो उन नेताओं के द्वारा किए गए दावों के विपरीत है।
उसने कहा कि उसके पास उन नेताओं के वीडियो सबूत हैं जो लाल किले में मौजूद थे और उनके चेहरे ढके हुए थे। सिद्धू ने आगे आरोप लगाया कि उन नेताओं ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश नहीं की, जिसके बाद उसे कदम उठाना पड़ा। उसने दावा किया कि अगर वह उत्तेजित प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित नहीं करता, तो चीजें हाथ से निकल जातीं, लेकिन अब हर कोई उन्हें बलि का बकरा बना रहा है और कह रहा है कि उन्होंने लोगों को लाल किले की ओर बढ़ने के लिए उकसाया।
दो फरवरी को उसके द्वारा जारी किए गए पहले दो वीडियो में, दीप सिद्धू ने अंग्रेजी में बात की। उसने कहा कि वह सितंबर में विरोध प्रदर्शन में शामिल हुआ था और उस समय कॉन्ग्रेस, AAP और BJP सहित सभी राजनीतिक दलों ने उससे संपर्क किया था, लेकिन उसने किसी भी संबद्धता से इनकार किया।
दीप सिद्धू ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने उसका वीडियो अपलोड किया था जो नवंबर में वायरल हो गया था, लेकिन बाद में बरखा दत्त के साथ उनके साक्षात्कार के बाद उन पर हुए अटैक के कारण इसे हटा दिया गया। सिद्धू ने अप्रत्यक्ष रूप से यह कहते हुए खालिस्तानियों के प्रति अपने झुकाव को सही ठहराने की कोशिश की कि एक लोकतांत्रिक देश में लोगों को दोनों पक्षों को सुनना चाहिए।
‘मुझे बलि का बकरा बनाया गया, और अब मैं पुलिस से भाग रहा हूँ’
दीप सिद्धू ने कहा कि हालाँकि उसने लाल किले की स्थिति को नियंत्रित कर लिया था और घटना के समय वह एकमात्र ज्ञात चेहरा था, लेकिन उसे यूनियन नेताओं, विपक्षी दलों और सरकार सहित सभी ने बलि का बकरा बना दिया। उसने आगे आरोप लगाया कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि उन्होंने लाल किले की ओर मार्च के लिए किसी को उकसाया।
सिद्धू ने दावा किया कि उसके पास यह दिखाने के लिए सबूत है कि वह सुबह 9 बजे मार्च में शामिल हुआ था, इससे पहले नहीं, जैसा कि सभी लोग बोल रहे हैं। जब उसने शुरू किया, तब तक लोग लाल किले तक पहुँच चुके थे। सिद्धू ने कहा कि वकील होने और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने के बावजूद मुकुल रोहतगी और हरीश साल्वे जैसे प्रसिद्ध वकीलों के साथ उन्हें अपने खिलाफ दर्ज मामलों के कारण पुलिस से भागना पड़ा है।
दूसरे वीडियो में, सिद्धू ने दावा किया कि यूनियन के नेता अपने ‘आईटी सेल’ का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि उनकी गलत छवि को दिखाया जा सके। उसने कहा कि जब भी वह अपने पक्ष की बात रखना चाहता है तो आईटी सेल सक्रिय हो जाता है और उनकी बातों को दबा दिया जाता है। उसने कहा कि वह हरियाणा में विरोध स्थल के करीब रह रहा है और कभी भी वहाँ पहुँच सकता है। उसने किसान नेताओं को चुनौती दी कि वे उनके साथ इस बारे में चर्चा करें कि वे किस तरह से आंदोलन को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं।
वीडियो का एक हिस्सा है, जहाँ उसने अपनी पूँछ पर आग के साथ भगवान हनुमान के साथ अपनी तुलना करने की कोशिश की, लेकिन वीडियो का वह हिस्सा एडिट किया गया था, और इसमें केवल जलती हुई पूँछ और ‘हनु’ नाम का संदर्भ शामिल है जिसके बाद वीडियो ट्रिम कर दिया गया था।
‘कोई हिंसा नहीं हुई’
दीप सिद्धू ने गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा पर लीपापोती करने की कोशिश की। उसने दावा किया कि जब वह लाल किले की ओर बढ़ रहा था, तब सड़क पर कोई हिंसा नहीं हुई थी। उसने आरोप लगाया कि हिंसा के नाम पर मीडिया जो कुछ भी दिखा रहा है वह केवल छोटी-मोटी घटनाएँ हैं। उसने पुलिस कर्मियों पर किसी भी हमले को पूरी तरह से इनकार किया, जिसमें सैकड़ों पुलिसकर्मी घायल हो गए। जिन पर दंगाइयों ने तलवारों, डंडों और ट्रैक्टरों से हमला किया था।
‘मैं आपसे निराश हूँ, रवीश कुमार’
NDTV का, विशेष रूप से पत्रकार रवीश कुमार का नाम लेते हुए, सिद्धू ने कहा कि उसने सोचा था कि रवीश एक समझदार पत्रकार हैं, लेकिन जिस तरह से उन्होंने उसे अपने शो में पेश किया, वह निराशाजनक था। उन्होंने सिर्फ इसलिए कहा क्योंकि रवीश अपने प्राइम टाइम शो में उनके नाम का इस्तेमाल करना चाहते थे, उन्होंने सिद्धू से बात करने और कहानी का अपना पक्ष जानने की कोशिश नहीं की। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने बरखा दत्त के साथ साक्षात्कार के बाद मीडिया को साक्षात्कार देना बंद कर दिया, क्योंकि वहाँ उसे गलत तरीके से दिखाया गया था।
‘मैं साबित कर सकता हूँ कि किसने उकसाया’
3 फरवरी को जारी किए गए दूसरे वीडियो में सिद्धू ने दावा किया कि उसके पास इस बात का सबूत है कि प्रदर्शनकारियों को किसने उकसाया था। उसने कहा कि वह जल्द ही अपने सभी वीडियो पब्लिश करेगा, जिसमें 26 जनवरी को सुबह 4 बजे रिकॉर्ड किए गए वीडियो भी शामिल हैं। उसने दावा किया कि उसने केवल एक-दूसरे का समर्थन करने की बात की, और संगठन के नेता उकसाने लगे थे। उसने आगे कहा कि लोग चाहे वे दिल्ली से कितने भी दूर हों, गाँवों और शहरों से विरोध प्रदर्शन में शामिल हों।
’लाल किले पर निशान साहब में कुछ भी गलत नहीं है’
सिद्धू ने दावा किया कि लाल किला देश में सभी का है, और खाली पोल पर निशान साहब को फहराने में कोई बुराई नहीं है। हालाँकि, सिद्धू ने अपने वीडियो में यह उल्लेख नहीं किया कि खाली पोल हर 15 अगस्त को राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए रिजर्व है। सिद्धू यह स्वीकार करने में भी असफल रहा कि धार्मिक ध्वज फहराने के लिए पोल के शीर्ष पर गए व्यक्ति द्वारा राष्ट्रीय ध्वज कैसे फेंका गया। वह आगे यह स्वीकार करने में असफल रहा कि सिख पवित्र चिन्ह वाले दो झंडे, एक त्रिकोणीय और दूसरा आयताकार झंडा लाल किले के गुंबद पर फहराया गया था।
दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ को लेकर प्रोपेगंडा फैलाने वाली रिहाना अचानक से पूरे भारतीय मीडिया और सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बन गई हैं। उन्हें लेकर लेख लिखे जा रहे हैं। इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी है।
उन्होंने एक के बाद एक दो ट्वीट करते हुए लिखा, “यह हमारा आंतरिक मामला है और इसे हम अपने किसान भाइयों के साथ बातचीत कर सुलझाएँगे, लेकिन निहित स्वार्थों को लेकर विदेशी शक्तियों द्वारा प्रोपेगेंडा फैलाकर राष्ट्र को अस्थिर करने हेतु किया गया कोई भी कृत्य भारत स्वीकार नहीं करेगा।”
यह हमारा आंतरिक मामला है, और इसे हम अपने किसान भाइयों के साथ बातचीत कर सुलझायेंगे लेकिन निहित स्वार्थों को लेकर विदेशी शक्तियों द्वारा प्रोपेगेंडा फैलाकर राष्ट्र को अस्थिर करने हेतु किया गया कोई भी कृत्य भारत स्वीकार नहीं करेगा।#IndiaTogether#IndiaAgainstPropaganda
उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है, किसान बिल को लेकर कतिपय संगठनों द्वारा दर्ज किए गए विरोध के लिए आदरणीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारत सरकार 11 बार किसानों से वार्ता कर चुकी है।”
बता दें कि रिहाना ने दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ का समर्थन करते हुए पूछा था कि लोग इस पर बात क्यों नहीं कर रहे हैं? इस दौरान उन्होंने CNN की एक खबर भी शेयर की थी, जिसमें भारत सरकार पर अनर्गल आरोप लगाए गए थे। इंटरनेट बंद करने और किसानों पर ‘अत्याचार’ की बातें की गई थीं।
रिहाना ने जिस खबर को शेयर किया था, उसमें दावा किया गया है कि दिल्ली में केंद्र सरकार ने इंटरनेट कनेक्शन काट दिया है और किसानों के साथ पुलिस अत्याचार कर रही है। ग्रेटा थनबर्ग ने भी रिहाना के सुर में सुर मिलाया। बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने ‘किसान आंदोलन’ पर रिहाना के सवाल का जवाब दिया।
उन्होंने कहा, “इसके (किसान आंदोलन) बारे में बात इसलिए नहीं हो रही है, क्योंकि वो किसान हैं ही नहीं। वो ऐसे आतंकी हैं, जो भारत को विभाजित करने के प्रयास में लगे हुए हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, ताकि हमारा देश टूट जाए और फिर कमजोर हुए देश पर चीन अपना कब्ज़ा जमा ले। फिर वो इसे अपनी चाइनीज कॉलोनी बना लेगा, USA की तरह।” उन्होंने दिल्ली में हुई हिंसा के प्ररिप्रेक्ष्य में ये बातें कही।
इसके साथ ही बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार, अजय देवगन, सुनील शेट्टी ने भी उन तमाम सेलेब्स को आईना दिखाया। एक्टर ने विदेश मंत्रालय द्वारा जारी किए गए बयान का समर्थन करते हुए कहा है, “किसान हमारे देश का एक अहम हिस्सा है। उनकी परेशानियों का हरसंभव समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। इस प्रयास का समर्थन करना चाहिए। जो भी दूरियाँ पैदा करने की कोशिश कर रहा है, उन पर ध्यान नहीं देना चाहिए।”
अक्षय के अलावा अजय देवगन और सुनील शेट्टी ने भी इस मुद्दे पर ट्वीट किया है। दोनों ही दिग्गज अभिनेताओं ने एकजुटता का संदेश देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी बाहरी प्रपोगेंडा के प्रभाव में नहीं आना है। वहीं ये भी कहा गया है कि आधा सच हमेशा खतरनाक साबित होता है।
किसान आंदोलन को लेकर भारत के खिलाफ हो रहे दुष्प्रचार पर अब बॉलीवुड भी आगे आता हुआ दिखाई दे रहा है। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अक्षय कुमार, अजय देवगन, सुनील शेट्टी, करण जौहर, एकता कपूर, कैलाश खेर और कई अन्य सितारों ने कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियों द्वारा भारत के खिलाफ किए जा रहे दुष्प्रचार पर करारा जवाब दिया और भारत का समर्थन करते हुए एकजुटता दिखाई है।
दरअसल, पॉप सिंगर रिहाना और एक्टिविस्ट ग्रेटा थुनबर्ग के किसान आंदोलन को लेकर किए गए ट्वीट ने भारत में बहस को तेज कर दिया है। जिसके बाद बॉलीवुड अभिनेताओं ने सामने आकर सीधे शब्दों में ट्वीट करते हुए लोगों से आग्रह किया कि वे मतभेद पैदा करने वाले किसी भी चीजों पर ध्यान न दें। इसके बाद से ही ट्विटर पर #IndiaTogether (इंडिया टुगेदर) ट्रेंड कर रहा है।
विदेश मंत्रालय द्वारा ट्विटर पर साझा किए गए एक बयान का हवाला देते हुए अक्षय कुमार ने ट्विटर पर लिखा, ”किसान हमारे देश का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। किसानों के मुद्दों को हल करने के लिए किए जा रहे प्रयास जगजाहिर हैं। मतभेद पैदा करने वाले किसी व्यक्ति पर ध्यान देने के बजाय एक सौहार्दपूर्ण संकल्प का समर्थन करें।” #IndiaTogether #IndiaAgainstPropaganda”
Farmers constitute an extremely important part of our country. And the efforts being undertaken to resolve their issues are evident. Let’s support an amicable resolution, rather than paying attention to anyone creating differences. ??#IndiaTogether#IndiaAgainstPropagandahttps://t.co/LgAn6tIwWp
फिल्म निर्माता करण जौहर ने भी किसानों के विरोध पर वैश्विक हस्तियों की टिप्पणी पर ट्वीट करते हुए लिखा, ”हम अशांत समय में हैं और समय की आवश्यकता हर कदम पर विवेक और धैर्य अपनाने की है। आइए, हम मिलकर हर संभव प्रयास करें कि हम ऐसे समाधान निकालें जो सभी के लिए काम करें- हमारे किसान भारत की रीढ़ हैं। हमें किसी को भी विभाजित नहीं होने देना चाहिए।”
We live in turbulent times and the need of the hour is prudence and patience at every turn. Let us together, make every effort we can to find solutions that work for everyone—our farmers are the backbone of India. Let us not let anyone divide us. #IndiaTogether
अजय देवगन ने ट्वीट कर लिखा, ”भारत या भारतीय नीतियों के खिलाफ किसी भी प्रकार के झूठे प्रचार की तरफ ध्यान न दें। ऐसे समय में जरूरी है कि हम सभी एकजुट रहें।”
Don’t fall for any false propaganda against India or Indian policies. Its important to stand united at this hour w/o any infighting ??#IndiaTogether#IndiaAgainstPropaganda
वहीं बॉलीवुड अभिनेता सुनील शेट्टी ने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा, “हमें हमेशा चीजों का व्यापक दृष्टिकोण रखना चाहिए, क्योंकि आधे सच से ज्यादा खतरनाक कुछ भी नहीं है।”
इसके अलावा कैलाश खेर ने लिखा, ”बढ़ते वर्चस्व को देख भारत विरोधी किसी भी हद तक गिर रहे हैं। महामारी के इस दुखद दौर में भी भारत मानवता की खातिर कई देशों में वैक्सीन की आपूर्ति कर मदद कर रहा है। चलिए हम सभी महसूस करें कि भारत एक है और हम अपने देश के खिलाफ टिप्पणियों को बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
बढ़ते वर्चस्व को देख भारत विरोधी किसी भी हद तक गिर रहे. Even in this sad phase of pandemic,India is helping all nations with vaccine supply for the sake of Humanity.Let all realise that India is ONE & will not tolerate comments against it. #IndiaTogether#IndiaAgainstPropaganda
आपको बता दें कि पॉप गायिका रिहाना ने मंगलवार को एक खबर को ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा था, “हम इसके बारे में बात क्यों नहीं कर रहे? इसके साथ उन्होंने Farmer’s Protest हैशटैग भी लिखा।” वहीं इस खबर को साझा करते हुए एक्टिविस्ट ग्रेटा थुनबर्ग ने भी प्रदर्शनकारियों के साथ अपनी ‘एकजुटता’ व्यक्त की थी।
गौरतलब है कि इस मामले पर विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए रिहाना और ग्रेटा थनबर्ग जैसे चर्चित लोगों के ट्वीट को लेकर कहा कि सनसनीखेज सोशल मीडिया हैशटैग और कमेंट्स को लुभाने का तरीका, खासकर यह मशहूर हस्तियों द्वारा किया गया हो, तो यह न तो सटीक है और न ही जिम्मेदाराना है। यह लोगों को लुभाने का आसान तरीका है।
इस संबंध में विदेश मंत्रालय ने आगे कहा, “इस तरह के मामलों पर टिप्पणी करने से पहले हम आग्रह करते हैं कि तथ्यों का पता लगाया जाए और मुद्दों की उचित समझ की जाए। भारत की संसद ने पूर्ण बहस और चर्चा के बाद कृषि क्षेत्र से संबंधित सुधारवादी कानून पारित किए।” हालाँकि इस दौरान मंत्रालय की ओर से विशेष रूप से किसी का नाम नहीं लिया गया है।
हाल ही में अमरीका की सबसे अमीर सेल्फ-मेड महिलाओं में गिनी जानी वाली गायिका रिहाना ने किसानों के विरोध प्रदर्शन को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की, जिससे वह भारतीय लिबरल गिरोह की नायिका बन गई।
देखते ही देखते रिहाना समर्थन में लिबरल गिरोह ने ट्वीट्स के पहाड़ खड़े कर दिए। होता भी क्यों न, आखिरकार एक अंतरराष्ट्रीय हस्ती ने ‘फासीवाद’ मोदी सरकार के खिलाफ जो विरोध दर्ज कर दिया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के खिलाफ उठाई गई इस आवाज पर वाम-उदारवादियों ने जमकर जश्न मनाया।
गौरतलब है कि जब ज्यादातर लिबरल रिहाना, मिया खलीफा, ग्रेटा थुनबर्ग और अन्य लोगों की जय-जयकार कर रहे थे, इस दौरान कुछ ऐसे लोग भी थे जिन्होंने उनके अस्तित्व और ठिकाने को लेकर ही उन पर सवाल खड़े कर दिए। जिनमें से बिहार की बेबी कुमारी भी एक थीं।
दरअसल, बेबी कुमारी ने रिहाना को लताड़ते हुए पूछा कि वो है कौन? साथ ही उन्होंने कुछ हँसने वाले इमोजी भी शेयर किए। हालाँकि, जाहिर है, बेबी का यह सवाल भारत के मामलों में घुसने के लिए रिहाना के खिलाफ एक तंज था। लेकिन वाम-उदारवादियों ने तो इसे रिहाना की जगह खुद पर ही ले लिया और बेबी कुमारी का मजाक उड़ाने लग गए।
परीचित मलिक नाम के एक यूजर ने बेबी कुमारी के ट्वीट का जवाब देते हुए रिहाना के तारीफों के पुल बाँध दिए। और बताया कि उनके ट्विटर पर 100 मिलियन फॉलोअर्स होने के साथ ही उनकी कमाई मिलियंस में है। उन्होंने यह भी गिनाया कि रिहाना सबसे ज्यादा पैसे कमाने वाली सेलेब्रिटीज में से एक है। इसके बाद मलिक ने बेबी कुमारी को नीचा दिखाते हुए पूछा, और तुम कौन हो?
She is Rihanna, – she has 100M followers on Twitter (more than modiji) , -Her networth is $600 Million -she holds 6 guinness wrld records -forbes top 10 highly paid celebrity, -Times 100most influential ppl in the wrld , Now tell me who the hell are you ?
बेबी कुमारी एक दलित नेता, भाजपा बिहार की उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक हैं, जो कि बोचहाँ से विधायक हैं।
वहीं, कॉन्ग्रेस नेता प्रवीण कुमार बिरादर ने 24,000 फॉलोवर्स होने के बावजूद रिहाना जैसी सेलेब्रिटी से यह सवाल करने के लिए बेबी कुमारी का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि ऐसे सवाल करने से पहले थोड़ा तो दिमाग लगाओ।
ब्रिटिश सिख जगतार सिंह जौहल के समर्थक, आरएसएस के कई नेताओं की हत्या में शामिल होने का आरोपित, भी बेबी कुमारी का मजाक उड़ाते दिखे।
जाहिर तौर पर, लिबरल्स के तर्क के अनुसार, भारतीय नागरिक बेबी कुमारी, जो पूर्व में लोकतांत्रिक रूप से चुने गई नेता रही हैं, को अरबों फॉलोवर्स वाली रिहाना से सवाल करने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि बेबी कुमारी उन चीजों पर टिप्पणी कर रही हैं, जिनके बारे में शायद ही उन्हें अधिकार हैं क्योंकि ट्विटर पर उनके कम फॉलोवर्स हैं।