Home Blog Page 4066

पीएम केयर्स फंड से कोरोना टीकाकरण के पहले फेज के खर्च का 80% भुगतान: दिए गए ₹2,200 करोड़

पीएम-केयर्स फंड ने कोरोना वैक्सीन अभियान के पहले चरण में 2200 करोड़ रुपए का योगदान दिया है। यह टीकाकरण के पहले चरण की लागत का 80 फीसदी से अधिक है। व्यय सचिव ने मंगलवार (फरवरी 02, 2021) को यह जानकारी दी। 

इमरजेंसी परिस्थितियों में नागरिकों की सहायता और राहत के लिए प्रधानमंत्री कोष (पीएम-केयर्स) फंड कोरोना वायरस महामारी के दौरान मार्च 2020 में स्थापित किया गया था। इसमें लोगों और कंपनियों ने स्वेच्छा से योगदान किया है। 

हालाँकि, इस कोष में कितना संग्रह हुआ है, यह जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय में इस कोष का प्रबंधन कर रहे लोगों का कहना है कि कोष से महामारी से प्रभावित क्षेत्रों की मदद की जा रही है।

चालू वित्त वर्ष का बजट महामारी की शुरुआत से पहले पेश किया गया था और उसमें टीकाकरण के लिए कोई अलग आवंटन नहीं है। ऐसे में जनवरी से मार्च के दौरान टीकाकरण की 82 प्रतिशत से अधिक लागत पीएम केयर्स कोष के द्वारा वहन की जा रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अगले वित्त वर्ष के बजट में कोविड टीकाकरण के लिए 35 हजार करोड़ रुपए निर्धारित किए हैं।

व्यय सचिव टी वी सोमनाथन ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में अग्रिम मोर्चे तथा स्वास्थ्य सेवाओं के कर्मियों के टीकाकरण की लागत पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा वहन की जा रही है। यह पैसा पीएम केयर्स कोष और स्वास्थ्य मंत्रालय से आ रहा है।

सोमनाथन ने कहा, ‘‘जनवरी-मार्च के लिए टीकाकरण की लागत लगभग 2,700 करोड़ रुपए रहने की उम्मीद है। इसका एक हिस्सा स्वास्थ्य मंत्रालय से आ रहा है और इसका कुछ हिस्सा पीएम केयर्स फंड से वित्त पोषित है। यह तीन करोड़ लोगों के टीकाकरण के पहले के चरण के लिए है।’’

सचिव ने कहा कि इस दौर की पूरी लागत केंद्र सरकार द्वारा वहन की जाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘हमने टीकाकरण की आकस्मिक लागतों के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय को अतिरिक्त धनराशि प्रदान की थी। हमने टीकाकरण के तीन करोड़ बैच के लिए 480 करोड़ रुपए का अतिरिक्त आवंटन किया। बाकी करीब 2,220 करोड़ रुपए पीएम-केयर्स फंड से आएँगे।’’

‘भिंडरावाले तेरी सोच पर.. ‘- किसान आंदोलन में खुलकर लगे खालिस्तानी नारे, हुआ तिरंगे का अपमान: देखें वीडियो

दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन के नाम भीड़ बढ़ाने वाले लगातार ये पूछ रहे हैं कि आखिर इतने पावन प्रदर्शन को कैसे खालिस्तानियों से जोड़ा जा सकता है। अब इसी सवाल के जवाब में कुछ वीडियोज सामने आई हैं, जिससे साफ हो रहा है कि पूरे प्रदर्शन में खालिस्तानियों की घुसपैठ है।

ये वीडियो ट्विटर पर अंशुल सक्सेना ने शेयर की है। इसमें सुन सकते हैं कि प्रदर्शनकारी कैसे हाथों में झंडा लिए आतंकी भिंडरावाले और आंतकी जगतार सिंह के समर्थन में नारे लगा रहे हैं। कहा जा रहा है, “भिंडरावाले तेरी सोच पर राज करेगा… भाई जगतार जिंदाबाद-जिंदाबाद।” वीडियो बनाने वाला बार बार जगतार सिंह का नाम लेता है और भिंडरावाले की सोच को राज करवाने की बात कहता है।

कुछ सेकेंड की वीडियो में भारी भीड़ को देख कर कहा जाता है कि पंजाब के नौजवानों को देख सकते हैं जिन्हें नशेड़ी कहा गया, वो आज मोदी तक पहुँच गए हैं।

इसके बाद दूसरी वीडियो में साफ-साफ तिरंगे का अपमान होते देखा जा सकता है। वीडियो बनाने वाला पहले तो तिरंगे को देख कर गंदी गाली देता है। फिर उन प्रदर्शनकारियों की ओर बढ़ता है जिनके हाथ में खालसा का झंडा होता है। आगे के विजुअल्स में तिरंगे को जमीन पर पड़ा, गाड़ी के नीचे दबा देखा जा सकता है जबकि हाथों में खालसा का झंडा चारों ओर नजर आ रहा है।

गौरतलब है कि इससे पहले कई बार खालिस्तानियों ने किसान आंदोलन का समर्थन किया, लेकिन हर दफा ये कहकर इन बातों को खारिज कर दिया गया कि जबरदस्ती इस मुद्दे को खालिस्तान से जोड़ा जा रहा है। बेवजह मासूम किसानों को बदनाम किया जा रहा है। मगर, सामने आई दोनों वीडियो दिखाती हैं कि न तो ये प्रदर्शन का कोई वाजिब मकसद है और न ही ये विरोध कृषि कानून पर है।

मामले को तूल देकर हिंसक प्रदर्शन करना भीड़ का एकमात्र एजेंडा लग रहा है। पिछले दिनों भी यही कारनामा 26 जनवरी पर राष्ट्रीय राजधानी में देखने को मिला और अब भी यही हो रहा है। इससे पहले प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन ‘सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ)’ ने ऐलान किया था कि जो भी दिल्ली के लाल किला पर खालिस्तानी झंडा फहराएगा, उसे 2.5 लाख डॉलर (1.83 करोड़ रुपए) इनाम के रूप में दिए जाएँगे। उसके बाद इसी संगठन द्वारा 1 फरवरी को संसद पर कब्ज़ा और घेराव की धमकी दी गई थी।

दिल्ली पुलिस ने जारी की 26 जनवरी की हिंसा में शामिल 12 उपद्रवियों की तस्वीरें, 1000 से ज्यादा वीडियो से हो रही है तलाश

देश की राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के दिन हुए उत्पात को लेकर दिल्ली पुलिस उपद्रवियों के खिलाफ एक्शन लेने की पूरी तैयारी में है। इसी सिलसिले में दिल्ली पुलिस ने हिंसा करने वाले 12 उपद्रवियों की तस्वीरें जारी की हैं। चिन्हित किए गए इन उपद्रवियों को हिंसा के दौरान हाथ में लाठी डंडे लिए, पत्थरबाजी, तोड़फोड़ और लाल किला समेत कई जगहों पर जमकर उत्पात और पुलिस वालों पर हमला करते हुए देखा गया है।

दरअसल, दिल्ली पुलिस के पास हिंसा से जुड़े कई वीडियो हैं, जिन से उपद्रवियों की पहचान की जा रही है और उनकी साफ तस्वीरें निकलवाई जा रही हैं। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच टीम फॉरेंसिक की मदद से वीडियो में दिख रहे उपद्रवियों की पहचान कर उनकी तस्वीरें साफ करा रही हैं। इसी दौरान इन 12 दंगाइयों के चेहरे को वीडियो से फोटो निकाल कर उन्हें साफ कराए जाने के बाद सामने आए है।

साभार:न्यूज़18

आरोपितों के चेहरे सामने आने के बाद पुलिस ने इन्हें सोशल मीडिया पर जारी कर दिया है, ताकि जल्द से जल्द इनकी धर-पकड़ की जा सके। बता दें कि इससे पहले हिंसा से संबंधित 1000 से अभी अधिक वीडियो मिलने की जानकारी देते हुए दिल्ली पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव ने सभी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कही थी।

साभार:न्यूज़18

गौरतलब है कि 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारी किसानों ने लाल किले पर कब्जा कर लिया था और अपना झंडा फहरा दिया था। इसके अलावा उग्र किसानों ने लाल किला समेत कई जगहों पर जमकर तोड़फोड़ की और पुलिस पर भी जानलेवा हमला किया। गणतंत्र दिवस के दिन हुई हिंसा में 500 से भी ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए।

उल्लेखनीय है कि 26 जनवरी को हुए हिंसा को मद्देनजर रखते हुए दिल्ली की सीमाओं पर कड़ी सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर कई स्तरों पर बैरिकेड लगाए हैं और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है। वहीं अब इसे लेकर पुलिस से कई प्रकार के सवाल भी पूछे जा रहे हैं।

वहीं अब इस पर जवाब देते हुए दिल्ली के पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने कहा,“मुझे आश्चर्य है कि जब ट्रैक्टर का इस्तेमाल पुलिस पर हमला करने के लिए किया गया और 26 तारीख को बैरिकेड तोड़ दिए गए थे, उस पर मीडिया ने कोई सवाल नहीं उठाया। अब हमने क्या किया? हमने सिर्फ बैरिकेडिंग को मजबूत किया है ताकि यह फिर से टूट न जाए।”

बता दें, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के साथ नई दिल्ली की सीमाओं पर ज्यादा प्रदर्शनकारी किसानों को एकत्र होने से रोकने के लिए, पुलिस ने लोहे की कीलें और लकड़ी के बोर्ड सड़कों पर लगाए हैं। कॉन्सर्टिना के कटीले तारों और कंक्रीट स्लैब की दोहरी परतों से लोहे की बैरिकेड्स को मजबूत किया गया है, जिन पर ​​कि ट्रैक्टरों का भी चलना मुश्किल है। गौरतलब है कि संयुक्त किसान मोर्चा ने 6 फरवरी को राष्ट्रव्यापी ‘चक्का जाम’ की घोषणा की है।

एसएन श्रीवास्तव ने कहा कि कृषि कानूनों के विरोध से जुड़ी हिंसा में 510 पुलिस कर्मी घायल हुए हैं। आंंदोलन को देखते हुए प्रांतीय सशस्त्र बल (पीएसी) और त्वरित कार्य बल (आरएएफ) सहित सैकड़ों सुरक्षा कर्मियों को सतर्क रखा गया है।

दिल्ली पुलिस ने ट्रैक्टर मार्च के दौरान हुई हिंसा के संबंध में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कुल 44 FIR दर्ज की हैं और 122 लोगों को गिरफ्तार किया। हिंसा के सम्बन्ध में पुलिस ने 54 से अधिक किसान नेताओं और 200 ट्रैक्टर मालिकों को भी नोटिस भेजे हैं।

‘मिया खलीफा को न जानना पत्रकारिता का तिरस्कार’: दलित चिंतक दिलीप मंडल का वैज्ञानिक आनंद रंगनाथन पर हमला

पूर्व पॉर्न स्टार मिया खलीफा द्वारा भारत में चल रहे कथित किसान आंदोलन को समर्थन दिए जाने के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर लगातार प्रतिक्रिया दी जा रही है। कुछ लोग उन्हें बहुत अच्छे से जानते हैं और कुछ के लिए मिया एक नया नाम हैं। 

जेएनयू प्रोफेसर व वैज्ञानिक डॉ आनंद रंगनाथन उन्हीं लोगों की सूची में शामिल हैं जिन्हें मालूम ही नहीं था कि मिया खलीफा कौन हैं। उन्होंने ट्वीट में लिखा कि उनको ग्रेटा थनबर्ग तक के बारे में जानकारी है लेकिन उन्हें नहीं पता कि मिया कौन है। वह कहते हैं कि उन्हें इस नाम के बारे में जानने के लिए गूगल करना पड़ा और अब उन्हें चिंता हो रही है क्योंकि गूगल उन्हें मिया के विज्ञापन दिखा रहा है।

आनंद रंगनाथन का यह ट्वीट सामान्य था, क्योंकि ये संभव है कि जो व्यक्ति पॉर्न में दिलचस्पी न रखे उसे मिया के बारे में गूगल ही करना पड़े। मगर, स्वघोषित दलित चिंतक व द प्रिंट के स्तंभकार दिलीप मंडल इस बात पर यकीन नहीं कर पाए। शायद वो स्वंय मिया को बहुत अच्छे से जानते थे इसलिए उन्होंने रंगनाथन के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मिया खलीफा को न जानना पत्रकारिता जगत के डोमेन में अपराध हैं।

दिलीप मंडल इस पूरे मुद्दे को जातिवाद पर ले आए। उन्होंने रंगनाथन के लिए लिखा, “आपके लिए ये ऊँची जाति के गुण है! आप किसान आंदोलन पर उसके विचारों को नापसंद कर सकते हो, उसकी आलोचना कर सकते हो, लेकिन उसे न जानने की बात पत्रकारिता और जनसंचार में सिर्फ़ अपराध और तिरस्कार माना जाएगा। भारतीय पत्रकारिता पर दुखद टिप्पणी।”

इसके बाद जातिगत हमला दिलीप मंडल ने यही नहीं रोका। हर मुद्दे में जाति ले आने वाले दिलीप मंडल ने कहा कि आनंद रंगनाथन इसलिए गुस्से में हैं क्योंकि इससे उनकी जाति के गुमान को ठेस पहुँची है।

गौरतलब है कि आज ही रिहाना और मिया खलीफा ने किसान आंदोलन को अपना समर्थन दिया था। रिहाना ने सीएनएन की खबर शेयर करते हुए लिखा था कि आखिर हम इस पर क्यों बात नहीं कर रहे। रिहाना के कुछ देर बाद मिया खलीफा ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया।

खलीफा ने दावा किया कि केंद्र की मोदी सरकार ने दिल्ली में इंटरनेट भी बंद कर दिया है। साथ ही उन्होंने आंदोलन में शामिल बुजुर्ग महिलाओं की एक तस्वीर भी शेयर की, जिसमें लहराए जा रहे पोस्टर पर लिखा है – ‘किसानों की हत्या करना बंद करो’।

मालूम हो कि 26 जनवरी पर दिल्ली में हिंसा करने वाले कथित किसानों को ऐसे तमाम अंतरराष्ट्रीय हस्तियों का समर्थन मिलने के बाद विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि मामले पर पहले जानकारी लें, फिर टिप्पणी करें।

सभी तानाशाहों के नाम ‘M’ से हैं तो मोहनदास गाँधी और मोती लाल नेहरू क्या थे? राहुल के ट्वीट पर लोगों ने किया ‘माइनो’ को याद

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने बुधवार (फरवरी 03, 2021) को एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा और उनका नाम लिए बिना उनकी तुलना तानाशाहों से करने का प्रयास किया। राहुल गाँधी ने एक ट्वीट किया जिसमें उन्होंने दुनिया के कुछ तानाशाहों के नामों की लिस्ट दी थी।

राहुल ने इस ट्वीट में लिखा कि इतने सारे तानाशाहों के नाम ‘M’ (एम) से ही क्यों शुरू होते हैं। उन्होंने अपने ट्वीट में जिन तानाशाहों के नाम शेयर किए उनमें मार्कोस, मुसोलिनी, मिलोसेविक, हुस्नी मुबारक, मोबुतू, मिकोमबेरो, मुशर्रफ के नाम शामिल थे।

बता दें कि मार्कोस का पूरा नाम फर्डिनेंड इमैनुएल एड्रैलिन मार्कोस था, जो फिलिपींस का राष्ट्रपति बना। उसने देश में सैन्य तानाशाही वाले कई कड़े और बर्बर कानून लागू किए। इसके अलावा, बेनितो मुसोलिनी इटली का एक राजनेता था, जिसने फासीवाद की नींव रखी। स्लोबोदान मिलोशेविच सर्बिया का राजनेता था, जिसे तानाशाह के रूप में जाना जाता है। होस्नी मुबारक मिस्र का, कर्नल जॉसेफ मोबुतु कॉन्गो का, जनरल परवेज मुशर्रफ पाकिस्तान और माइकल माइकल माइकॉम्बेरो बुरुंडी में तानाशाही शासन किया।

सोशल मीडिया पर लोगों ने राहुल गाँधी को उनके ही सवाल पर आड़े हाथों ले लिया। राहुल गाँधी के ट्वीट के बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर लोगों ने उनसे पूछा कि ‘एम’ नाम के सभी तानाशाह, तो मोहन दास करम चंद गाँधी, मोती लाल नेहरू और मनमनोहन सिंह कौन? इसके साथ लोगों ने मंडेला, मार्टिन एल किंग, मलाला कई बड़ी समेत महबूबा मुफ्ती, ममता बनर्जी, मुलायम सिंह का भी जिक्र किया। 

ट्वीट वायरल होने के बाद लोगों ने राहुल गाँधी के नाना और सोनिया गाँधी के पिता, स्टीफन माइनो के बारे में ट्विटर पर सवालों की झड़ी लगा दी। बता दें कि सोनिया गाँधी के पिता मुसोलिनी और हिटलर जैसे तानाशाहों से जुड़े हुए थे। स्टीफन माइनो इटली में मुसोलिनी की सेना में एक वफादार सैनिक थे। जिन्होंने मुसोलिनी और इटली के फासीवादी के प्रति खुलकर अटूट वफादारी की घोषणा की थी।

सोशल मीडिया यूजर्स ने यह भी सवाल उठाया कि राहुल गाँधी ने चीनी नेता माओत्से तुंग का नाम क्यों नहीं लिया, जो कुछ वर्षों में लाखों लोगों की मौत का कारण बना। कुछ लोगों ने आश्चर्य व्यक्त किया कि क्या माओ का बहिष्कार चीन में कम्युनिस्ट पार्टी और भारत में कॉन्ग्रेस पार्टी के बीच गुप्त संबंधों का संकेत देता है।

‘खुद ही कोर्ट बनकर सरकारी आदेश की अवहेलना को जायज न ठहराए ट्विटर’: केंद्र सरकार ने Twitter को भेजा नोटिस

भारत सरकार ने कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने वाली सोशल मीडिया कंपनी ट्विटर को नोटिस भेजा है। कुछ लोगों ने ट्विटर पर किसानों के नरसंहार की बात फैलाई थी और इसके लिए पीएम मोदी को जिम्मेदार ठहराया था। कोर्ट के आदेश के बाद कारवाँ मैगजीन, अभिनेता सुशांत सिंह, हंसराज मीणा सहित कई हैंडलों पर रोक लगाई गई थी। हालाँकि, कुछ ही देर बाद ट्विटर ने उन हैंडल्स को फिर से चालू कर दिया। अब केंद्र सरकार ने कहा है कि ट्विटर कोर्ट बन कर सरकारी आदेश की अवहेलना को जायज न ठहराए।

केंद्र सरकार ने इस कदम से नाराजगी जताई है। जिन हैंडल्स को रोका गया था, उन सभी ने ‘ModiPlanningFarmerGenocide’ नामक हैशटैग के साथ अफवाह फैलाई थी। सरकार ने कहा है कि ये तथ्यात्मक रूप से गलत है और लोगों की भावनाओं को भड़काने के साथ-साथ घृणा फैलाने वाला भी है। बिना तथ्यों के समाज में तनाव फैलाने की साजिश है। ट्विटर सरकार के आदेश की अवहेलना नहीं कर सकता, क्योंकि ऐसे में उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Meity) ने अब ट्विटर को नोटिस भेजा है कि जिन 257 URLs और 1 हैशटैग को ब्लॉक करने का आदेश दिया गया था, उन्हें फिर से क्यों चालू किया गया। कहा गया है कि इससे देश में हिंसा भड़क सकती थी, जिससे कानून-व्यवस्था की समस्याएँ पैदा हो जाती। गणतंत्र दिवस के दिन हुई घटना के कारण पहले से ही पुलिस आगे की तैयारियों में लगी हुई है।

सरकार का कहना है कि आदेश को प्राप्त करने के बावजूद ट्विटर ने इसका पालन नहीं किया। सरकार ने कहा है कि ट्विटर ने कुछ मिनटों के लिए उन हैंडलों और हैशटैग को ब्लॉक कर के रखा और फिर चालू कर दिया। इस बीच कइयों ने उसे रीट्वीट और लाइक किया होगा, क्योंकि वो सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध थे। अब जब ट्विटर ने नियमों को मानने से इनकार कर दिया है, भारत सरकार ने उसे कानून सिखाया है।

कानून के हिसाब से ट्विटर सिर्फ एक माध्यम है, जहाँ लोग अपने विचार शेयर करते हैं और लिखते हैं। अगर कानून-व्यवस्था की समस्या खड़ी होने की आशंका है तो इस स्थिति में भारत सरकार आदेश दे सकती है कि किसी कंटेंट को प्लेटफॉर्म पर से हटाया जाए, क्योंकि इससे हिंसा भड़कने की आशंका हो सकती है। केंद्र सरकार ने कहा है कि ट्विटर उन कंटेंट्स का क्रिएटर भले न हो, लेकिन उन्हें फैलाने का मंच वही है।

मंत्रालय के अनुसार, जानबूझ कर आदेश को न मानने पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है। उसे भारतीय कानून को समझने की भी सलाह दी गई है क्योंकि ट्विटर ने ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों’ की बात करके खुद को बचाना चाहा है। ट्विटर ने एक तो सरकार का आदेश नहीं माना, ऊपर से सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए दावा किया कि उक्त कंटेंट भड़काऊ बयानों में नहीं आता है।

मंत्रालय ने कहा है कि ट्विटर ने न सिर्फ आदेश की अवहेलना की, बल्कि अपनी स्थिति को बिना किसी कानूनी तर्क के सही ठहराना चाहा। ट्विटर को आईटी एक्ट की धारा 69A ( केंद्र सरकार को ऑनलाइन सामग्री को ब्लॉक करने और साइबर अपराधी को गिरफ्तार करने का अधिकार देता है) समझाते हुए पूछा है कि उसने आदेश को क्यों नहीं माना। अभी ट्विटर ने इस सम्बन्ध में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

गणतंत्र दिवस के दौरान आंदोलन की आड़ में किए गए दंगों के बाद ट्विटर इंडिया ने उन हैंडलों पर रोक लगाने की कार्रवाई की थी। ‘द कारवाँ इंडिया’ ने एक आंदोलनकारी की मौत को लेकर फ़ेक न्यूज़ फैलाई थी। असल में आंदोलनकारी की मौत दुर्घटना में हुई थी, जबकि दावा यह किया जा रहा था कि उसकी मौत पुलिस की गोली से हुई है। इसी तरह के अफवाह कई अन्य हैंडल्स ने भी फैलाए थे, जिससे हिंसा भड़क सकती थी।

लिब्रू ‘खालिस्तानी’ को रिहाना वाले वीडियो से ₹2 बनाने हैं: दिलजीत दोसांझ को कंगना ने दिए ‘बेफिटिंग’ रिप्लाई

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत और पंजाबी सुपरस्टार दिलजीत दोसांझ के बीच ट्विटर पर जुबानी जंग शुरू हो गई है। बात इतनी आगे पहुँच गई कि दिलजीत ने कंगना को 2 रुपए की जॉब करने वाली कह दिया। वहीं कंगना ने भी पलटवार कहकर दिलजीत को खालिस्तानी बताया।

दरअसल, पूरा मामला दिलजीत के एक पोस्ट से शुरू हुआ। इसमें दिलजीत ने रिहाना को लेकर बनाई अपनी वीडियो को अनाउंस किया कि वह यूट्यूब पर डेढ़ बजे जारी होगा। इसी को देखकर कंगना ने लिखा, “इसको भी अपने दो रुपए बनाने हैं। ये सब कबसे प्लॉन हो रहा है? 1 माह तो कम से कम लगते हैं वीडियो की तैयारी और उसकी घोषणा में। लिब्रु चाहते हैं कि हम इसे बिलकुल हकीकत मान लें।” 

इस पर दिलजीत ने कहा, “2 रुपए, अपनी वाली जॉब मुझे मत बता। गाना आधे घंटे में बना लेते हैं हम। तेरे पर बनाने का मन नहीं करता वरना 2 मिनट ही लगेंगे। हर जगह तुझे बोलना होता है। जा यार बोर न कर। काम कर अपना।”

इसके बाद कंगना ने दोसांझ को फिर रिप्लाई दिया और इसमें लिखा, “मेरा एक ही काम है देशभक्ति। वही करती हूँ सारा दिन। मैं वही करूँगी लेकिन तेरा काम तुझे नहीं करने दूँगी खालिस्तानी।”

बता दें कि इससे पूर्व में शाहीन बाग की बिलकिस दादी को लेकर विवाद शुरू हुआ था। उस दौरान कंगना ने एक ट्वीट में दिलजीत दोसांझ को ‘करण जौहर का पालतू’ कह डाला था। वहीं दिलजीत ने भी जवाब देने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

कंगना ने दिलजीत के लिए लिखा था,  “ओ करण जौहर के पालतू, जो दादी शाहीन बाग में अपनी नागरिकता के लिए आंदोलन कर रही थी वो ही बिलकिस बानो दादीजी किसान आंदोलन के एमएसपी के लिए भी आंदोलन करती हुई दिखीं। महिंदर कौर जी को तो मैं जानती भी नहीं। क्या ड्रामा चलाया है तुम लोगों ने। इसे तुरंत खत्म करो।”

दिलजीत ने इस पर पलटवार करते हुए लिखा, “तूने जितने लोगों के साथ फिल्म की तू उन सबकी पालतू है…? फिर तो लिस्ट लंबी हो जाएगी मालिकों की…? ये बॉलिवुड वाले नहीं पंजाब वाले हैं… झूठ बोलकर लोगों को भड़काना और इमोशंस से खेलना आप अच्छे से जानती हो।” इस मुँहजोरी के दौरान दिलजीत ने कंगना को बददिमाग, बदतमीज कहा था। वही कंगना ने भी दिलजीत को डम्बो होने की संज्ञा दी थी।

हिमंत बिस्वा सरमा ने घुसपैठी बांग्लादेशी ‘सांप्रदायिक मियाँ’ को लताड़ा, कहा- वे असम की संस्कृति को कर रहे हैं विकृत

असम के शिक्षा मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार (फरवरी 03, 2021) को राज्य में घुसपैठ करने वाले अवैध प्रवासियों पर निशाना साधा। पत्रकारों से बात करते हुए भाजपा नेता ने जोर दिया, “असम की मुस्लिम आबादी दो धाराओं में विभाजित है; पहला जो बांग्लादेश से असम आए हैं और दूसरा जो स्वदेशी हैं।” उन्होंने आगे कहा, “कुछ लोग जो अलग-अलग समय पर असम आए थे, उन्होंने खुद को ‘मियाँ’ के रूप में बताना शुरू कर दिया है और वे बहुत ही सांप्रदायिक हैं।”

हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि ‘मियाँ’ बांग्लादेशी असमिया भाषा और संस्कृति के विकृति में शामिल रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, “तो, मैं उनके वोटों के साथ MLA नहीं बनूँगा। मेरी निजी राय है कि जो लोग असमिया संस्कृति, भाषा और समग्र भारतीय संस्कृति को खुले तौर पर चुनौती देते हैं, उन्हें हमारे लिए वोट नहीं करना चाहिए।”

उन्होंने पहले भी इस बात पर जोर दिया था कि ‘मियाँ मुस्लिम’ भगवा पार्टी को वोट नहीं देंगे। हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा था, “मियाँ मुसलमान हमें वोट नहीं देते हैं। मैं अनुभव के आधार पर यह कह रहा हूँ, उन्होंने हमें पंचायत और 2014 के लोकसभा चुनावों में वोट नहीं दिया। बीजेपी को उन सीटों पर वोट नहीं मिलेंगे जो उनके हाथ में हैं, जबकि अन्य सीटें हमारी हैं।”

गौरतलब है कि हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य द्वारा संचालित मदरसों को बंद करने के हालिया कदम को सही बताया था। यह बातें उन्होंने ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के नेता बदरुद्दीन अजमल द्वारा लगाए गए आरोपों पर एबीपी न्यूज के सवाल का जवाब देते हुए कही। बता दें कि अजमल ने आरोप लगाया था कि अगर भाजपा सरकार फिर से सत्ता में आती है, तो वह मस्जिदों और मदरसों को बंद कर देंगे।

सरमा ने कहा कि मदरसा खत्म करना तो सही है, अभी सरकारी मदरसा तो खत्म किया है और आगे जाकर उनके जो मजहबी मदरसे हैं उसमे भी मजहबी शिक्षा के साथ साइंस, मैथ, कम्प्यूटर की शिक्षा देनी होगी। प्राइवेट मदरसे में बहुत बड़ा मॉर्डनाइजेशन होगा।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा था, ”मुल्ला-मौलवी का काम होता है मस्जिद में जाना और मजहब की शिक्षा देना। छात्रों को शिक्षा देने की जिम्मेदारी सरकार की होती है, शिक्षा मंत्री का काम होता है। हम हमारी जिम्मेदारी निभाएँगे और वह अपनी जिम्मेदारी निभाएँ। इसमें विवाद कहाँ है?”

दिल्ली पुलिस ने दीप सिद्धू के नाम पर रखा ₹1 लाख का इनाम, 26 जनवरी की हिंसा में शामिल 8 लोगों की है तलाश

गणतंत्र दिवस पर प्रदर्शनकारी किसानों द्वारा आजोजित ट्रैक्टर परेड के दौरान जमकर बवाल किया गया। उपद्रवियों ने जमकर तोड़फोड़ की और लाल किले (Red Fort) पर अपना झंडा तक फहरा दिया था। दिल्ली पुलिस अब उपद्रवियों पर शिकंजा कसने के लिए पूरी तरह से तैयार है। उपद्रव करने वाले 12 लोगों की तस्वीरें जारी की गई हैं और 8 आरोपितों पर इनाम घोषित कर दिया गया है।

इन 8 लोगों की है तलाश

दिल्ली पुलिस गणतंत्र दिवस पर उपद्रव करने वालों की सरगर्मी से तलाश कर रही है। पुलिस ने 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा के 8 आरोपितों पर इनाम घोषित किया है। दीप सिद्धू समेत 4 आरोपितों पर 1-1 लाख रुपए का इनाम और 4 अन्य आरोपितों पर 50-50 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया है। जानकारी के मुताबिक दीप सिद्धू, जुगराज सिंह, गुरजोत सिंह और गुरजंत सिंह पर 1-1 लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया है। जजबीर सिंह, बूटा सिंह, सुखदेव सिंह और इकबाल सिंह पर 50-50 हजार रुपए इनाम का ऐलान किया है।

दिल्ली पुलिस की एसआइटी कर रही है जाँच

दिल्ली पुलिस ने उपद्रव में शामिल कई आरोपितों की भी पहचान कर उन पर इनाम की घोषणा की है। जाँच के दौरान दिल्ली पुलिस के पास करीब 5 हजार वीडियो आ चुके हैं। जिनमें से पुलिस उपद्रवियों की पहचान कर रही है। दिल्ली दंगों को लेकर अब तक पुलिस 44 एफआईआर दर्ज कर चुकी है, वहीं 122 लोगो की गिरफ्तारी हुई है। हालाँकि, दिल्ली में हुए इस उपद्रव को लेकर अभी भी किसी मुख्य आरोपित की गिरफ्तारी नही हो पाई है। दिल्ली में हुई इस हिंसा की जाँच क्राइम ब्रांच भी कर रही है।

इधर केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन के बीच नई दिल्ली की सीमाओं पर कड़ी सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर कई स्तरों पर बैरिकेड लगाए हैं और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है। इसे लेकर पुलिस से कई प्रकार के सवाल भी पूछे जा रहे हैं।

मंगलवार (फरवरी 02, 2021) को पत्रकारों को संबोधित करते हुए, दिल्ली के पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने कहा कि वह ये देखकर आश्चर्यचकित हैं कि 26 जनवरी के दिन जब पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया और प्रदर्शनकारियों द्वारा बैरिकेड्स तोड़कर हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया गया, उन पर कम सवाल उठाए गए।

कॉन्ग्रेस नेता ने राम मंदिर के लिए शुरू किया फंड संग्रह अभियान, कम्युनिस्टों ने कहा- सेकुलरिज्म पर बात करने का नहीं है अधिकार

केरल के अलाप्पुझा जिले में राम मंदिर के लिए कॉन्ग्रेस नेता द्वारा शुरू किया गया अभियान अब विवादों में आ गया है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि पार्टी के जिला उपाध्यक्ष रघुनाथ पिल्लई ने हाल में कदाविल मंदिर में चंदा इकट्ठा करने के काम का उद्घाटन किया था। उससे पहले उन्होंने कुछ राशि पल्लीपुरम स्थित कदाविल श्री महालक्ष्मी मंदिर के पुजारी को भी सौंपी थी।

जानकारी के अनुसार, उनका ये अभियान 30 जनवरी से 28 फरवरी तक चलने वाला है। हालाँकि, इस बीच इलाके में राजनीतिक उठा-पटक शुरू हो गई है। कम्युनिस्ट पार्टी ने कॉन्ग्रेस पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि पार्टी को राम मंदिर डोनेशन रैली में भाग लेने के बाद सेकुलरिज्म पर बात करने का अधिकार नहीं है।

सीपीएम राज्य सचिव ए विजयराघवन ने कहा कि कॉन्ग्रेस और आरएसएस ने हमेशा से राज्य में एक जैसा काम किया है। वह इस फंड कलेक्शन पर बोले कि यह केरल के राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए कोई आश्चर्य की बात नहीं थी। कई कॉन्ग्रेस नेता ऐसा पहले भी कर चुके हैं। इसलिए कॉन्ग्रेस को इस पर बोलने का अधिकार नहीं है।

विवादों पर प्रतिक्रिया देते हुए पिल्लई ने कहा कि आंतरिक कलह के कारण ऐसे विवाद हो रहे हैं जबकि, उन्होंने पल्लीपुरम पट्टार्य समाजम के अध्यक्ष के रूप में कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

पिल्लई का बचाव करते हुए, केपीसीसी के महासचिव ए ए शुकूर ने कहा, “पिल्लई एक सच्चे आस्तिक हैं, और उन्होंने समाजम के अध्यक्ष के रूप में समारोह का उद्घाटन किया था। इस पर विवाद खड़ा करने की आवश्यकता नहीं है। रघुनाथन पिल्लई एक बेहद धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति हैं और उन्होंने हमेशा आरएसएस का विरोध किया है। यह विवाद अनावश्यक है। ”

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस को लेकर राजस्थान में भी राम मंदिर का समर्थन करने के कारण विवादों का सामना करना पड़ रहा है। वहाँ पर NSUI ने राम मंदिर निर्माण के लिए अभियान शुरू किया है। इस अभियान का नाम है- ‘1 रुपया राम के नाम’।  इस पर लोग उन्हें चेता रहे हैं कि या तो वह ये अभियान वापस ले लें वरना पार्टी अपने परंपरागत वोटों से हाथ धो बैठेगी।

वहीं पार्टी नेता ने भी छात्र विंग के इस अभियान से पार्टी को सेकुलर बताते हुए किनारा किया है। कॉन्ग्रेस नेता पवन बंसल का कहना है कि दिल्ली के लेवल पर राम मंदिर के लिए कॉन्ग्रेस की चंदा इकट्ठा करने की कोई योजना नहीं है। उनसे संपर्क किया गया था, लेकिन उन्होंने इसके लिए मना कर दिया।