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‘दर्जी चाचा’ मोहम्मद सोनू और ‘अम्मा’ उमा ने 3 बच्चों को किया टॉर्चर, उनकी माँ और ट्यूटर को मार डाला

गाजियाबाद में 29 साल की महिला और 16 साल की किशोरी की हत्या तथा तीन बच्चों को प्रताड़ित करने के मामले में पुलिस ने मोहम्मद सोनू और उमा सिंह को गिरफ्तार किया है। गाजियाबाद में सरस्वती विहार इलाके में शनिवार (फरवरी 6, 2021) रात यह घटना अंजाम दी गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ितों की पहचान डॉली ठाकुर (32) और अंशु कुमारी (16) के रूप में की गई है। सरस्वती विहार की रहने वाली डॉली अपने तीन बच्चों के साथ अपने घर पर थी। कक्षा 9 की छात्रा और प्राइवेट ट्यूटर अंशु कुमारी घटना के समय उनके तीन बच्चों को पढ़ा रही थी। आरोपित उमा, जो कि डॉली की दूर की रिश्तेदार है ने अपने प्रेमी मोहम्मद सोनू के साथ मिलकर पीड़िता को लूटने की योजना बनाई थी।

दोनों शनिवार रात 8:30 बजे डॉली के घर पहुँचे और पीड़िता को बातों में उलझा दिया। चाय पीने के बाद उन्होंने अंदर से दरवाजा बंद कर दिया और बंदूक की नोक पर डॉली को जबरदस्ती उठा लिया। इसके बाद सोनू ने .32 कैलिबर पिस्टल का इस्तेमाल कर डॉली के पेट में और किशोरी अंशु के सिर में गोली मारी। इसके बाद आरोपित ने 5 वर्षीय रुद्र और उसकी बहनों, गौरी और मीनाक्षी को मारने की कोशिश की। लेकिन, मोहम्मद सोनू की बंदूक जाम हो गई और उसने तीनों बच्चों को क्रूर यातना दिया।

आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज, एक पीड़िता की हालत गंभीर

अपराधी ने एक पेचकस, पीसने वाला पत्थर और चाकू से बच्चों को घातक चोटें पहुँचाई। इसके बाद उन लोगों को घायल अवस्था में छोड़ कर उमा और सोनू वहाँ से भाग गए। रात के लगभग 9:30 बजे डॉली के पति महेश ठाकुर और उनके ससुर घर लौटे तो उन्होंने डॉली को मृत और तीनों बच्चों को घायल अवस्था में देखा। उन्होंने मसूरी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की।

आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302, 307, 380, 394 और 411के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और शस्त्र अधिनियम की प्रासंगिक धाराएँ लगाई गई। बच्चों को चिकित्सा के लिए नेहरू नगर के यशोदा अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि 9 साल की मीनाक्षी की हालत गंभीर है, जबकि रुद्र और गौरी की हालत स्थिर है।

आरोपित उमा को उसके आवास से गिरफ्तार किया

एसपी (ग्रामीण) इराज राजा ने बताया, “सबसे महत्वपूर्ण सुराग दो लड़कियों में से एक ने दिया था, जिन्होंने बताया कि ‘अम्मा’ (उमा सिंह का जिक्र करते हुए) घर आए थे। बच्चे संदिग्ध महिला को इसी नाम से बुलाते थे। उन्होंने मोहम्मद सोनू को भी ‘दर्जी चाचा’ कहा।”

इस बीच, पुलिस ने लाल क्वार्टर इलाके में उमा के घर पर छापा मारा जहाँ उसने अपना अपराध कबूल किया। उसने एक वीडियो बयान में कहा, “डॉली मेरी सास की पोती थी और उसके बच्चे मुझे ‘अम्मा’ कहते थे। हम लंबे समय से डकैती की योजना बना रहे थे। शनिवार की रात हम डॉली के घर गए और वहाँ चाय भी पी। बाद में सोनू ने उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया और पहले किशोर लड़की और फिर डॉली की गोली मारकर हत्या कर दी। फिर, उसने चाकू और रसोई से पीसने वाला पत्थर लेकर बच्चों को मारा।”

एक मुठभेड़ के बाद पुलिस ने मोहम्मद सोनू को पकड़ लिया

उमा के विपरीत, मोहम्मद सोनू गाजियाबाद से भागने की योजना बना रहा था। उसे दबोचने के लिए कुल पाँच पुलिस दल तैनात थे। रविवार (फरवरी 7, 2021) को, जब उसे डासना के पास पुलिस ने देखा, तो आरोपित ने गोलीबारी की। पुलिस द्वारा जवाबी कार्रवाई के बाद सोनू जख्मी हो गया और उसे पकड़ लिया गया। पुलिस ने उसके पास से नकदी, गहने और एक पिस्तौल बरामद की।

सत्ता में आए तो केरल में लव जिहाद के खिलाफ कानून, ईसाई संगठन और चर्च भी कर रहे माँग: BJP

केरल में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा (BJP) ने कहा है कि यदि वह राज्य की सत्ता में आती है तो ग्रूमिंग जिहाद/लव जिहाद के खिलाफ कानून लाएगी। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने कहा कि केरल में राजग गठबंधन के सत्ता में आने पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पारित कानून की तर्ज पर धर्मांतरण विरोधी कानून बनया जाएगा।

भाजपा की केरल इकाई के प्रमुख ने कहा, “लव जिहाद एक गंभीर चिंता का विषय है। हिंदू संगठनों के अलावा, ईसाई संगठन और चर्च भी माँग (लव जिहाद के खिलाफ कानून) कर रहे हैं। हम इसे अपने घोषणा-पत्र (आगामी विधानसभा चुनाव के लिए) में शामिल करने की योजना बना रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की तरह हम भी लव जिहाद के खिलाफ कानून लाएँगे।” बता दें कि केरल में अप्रैल-मई में चुनाव होने वाले हैं।

गौरतलब है कि दिसंबर 2009 में खुद केरल हाईकोर्ट ने सरकार को ‘लव जिहाद’ की रोकथाम के लिए कानून बनाने के लिए कहा था। हाईकोर्ट ने कहा था कि कुछ पुलिस रिपोर्ट्स के हिसाब से ये स्पष्ट है कि लड़कियों के धर्मान्तरण के लिए साजिशन प्रयास किया गया और इसके पीछे कुछ संगठनों का हाथ भी दिख रहा है।

पिछले दिनों केरल में कैथोलिक पादरियों के एक संगठन ने कहा था कि ‘लव जिहाद’ एक वास्तविक समस्या है। केरल के चर्च ने इसके पीछे ISIS का हाथ बताते हुए कहा था कि ‘लव जिहाद’ के जरिए कई महिलाओं का जबरन धर्मान्तरण हो रहा है। केरल के चर्च का कहना था कि कुछ महीनों पहले केरल के जिन 21 लोगों को ISIS में शामिल कराया गया था, उनमें से आधे ईसाई थे। पादरियों का कहना था कि ‘लव जिहाद’ से सांप्रदायिक सद्भाव की भावना को ठेस पहुँच रही है। उनका ये भी आरोप था कि केरल का पुलिस-प्रशासन इस खतरे से निपटने को गंभीर नहीं है।

जब केरल के चर्चों ने ‘लव जिहाद’ को लेकर चर्चा शुरू की तो वामपंथी मीडिया घबरा गया और उसने इसे पादरियों पर ही हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ाने का आरोप मढ़ दिया। रवीश कुमार ने लव जिहाद को ‘हिन्दू-मुस्लिम सिलेबस का हिस्सा’ भी बता दिया। रवीश कुमार ने केरल में ‘लव जिहाद’ के एक भी मामले साबित न होने की बात कही तो ‘Scroll’ इसे कंस्पिरेसी थ्योरी बताया।

जिस बच्चे के सर से उठ गया पिता का साया, माँ भी छोड़ गई… योगी सरकार ने उठाया पढ़ने-रहने-खाने का दायित्व

उत्तर प्रदेश के मथुरा में गरीबी से जूझ रहे एक बच्चे की मदद के लिए योगी आदित्यनाथ की सरकार आगे आई है। उसके खाने-पाने से लेकर पढ़ाई-लिखाई की भी समुचित व्यवस्था की है, ताकि आर्थिक स्थिति उसके भविष्य के आड़े न आए। दरअसल, रश्मि शर्मा नामक ट्विटर यूजर ने एक वीडियो अपलोड किया था। इसमें एक बच्चा चूल्हे पर भोजन पकाते दिख रहा था और कोई व्यक्ति उससे बातचीत करते हुए वीडियो बनाता है।

उस व्यक्ति ने बच्चे से नाम पूछा, जिसके जवाब में उसने बताया कि उसका नाम दानी है। इसके बाद उससे पूछा गया कि वो खाना क्यों बना रहा है? इसके जवाब में उसने कहा कि उसकी माँ उसके साथ नहीं रहती है और उसके पिता की मृत्यु तभी हो चुकी है, जब वो काफी छोटा था। उससे पूछा गया कि वो काम क्या करता है, तो उसने बताया कि वो अपना पेट पालने के लिए मजदूरी करता है।

वीडियो में देखा जा सकता है कि उसके पास मिट्टी का एक चूल्हा है। रोटी पकाने के लिए तवा तक नहीं है। इसके कारण वह प्लेट को ही आँच पर डाल कर रोटी पका रहा था। वीडियो में उसने अपने सोने की जगह दिखाई, जहाँ उसे छत भी नसीब नहीं थी।

उस बच्चे का घर पूरी तरह से जर्जर था। उसके पिता की तस्वीर रखी हुई थी और उसके सामने उसने दीया भी जला रखा था। लेकिन काफी जर्जर होने के कारण घर में कोई भी दुर्घटना हो सकती थी। ये वीडियो मथुरा के शेरगढ़ छाता का था। रश्मि शर्मा ने इसे अपलोड करते हुए कहा कि इस बच्चे का कोई अपना नहीं है। उन्होंने उसका दर्द साझा करते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से ही सरकार से मदद की गुहार लगाई।

जैसे ही इस वीडियो पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभमणि त्रिपाठी की नज़र पड़ी, उन्होंने बच्चे की मदद के लिए प्रयास शुरू किए। बाद में उन्होंने जानकारी दी कि मथुरा के जिलाधिकारी के प्रयासों से बच्चे का स्कूल में प्रवेश करा दिया गया है और योगी सरकार के दखल के बाद बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी जिला प्रशासन ने ली है। उन्होंने बताया कि सरकारी व्यवस्था व सामाजिक संगठनों की मदद से भी उसे हर संभव सहायता देने का प्रयास किया जा रहा है।

मथुरा के शेरगढ़ स्थित ‘सरस्वती शिशु मंदिर’ में उसका दाखिला भी करा दिया गया। जिलाधिकारी के निर्देश में लिखा है कि बच्चे की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, उसके पास जमीन और कमाई का कोई जरिया भी नहीं है, उसका अपना कोई नहीं है- इसलिए, विद्यालय के प्रधानाचार्य ने उसकी शिक्षा निःशुल्क करने का निर्णय लिया है। 11 वर्षीय बच्चे का दाखिला कक्षा 3 में कराया गया। प्रधानाचार्य ने उसके उज्जवल भविष्य की भी कामना की।

इन सबके बावजूद कुछ ‘विरोधजीवी’ योगी सरकार को बदनाम करने में लगे रहते हैं। सीआर जया सुकिन नाम के एक अधिवक्ता ने उत्तर प्रदेश में अपराध बढ़ने, गैर-न्यायिक हत्याएँ होने और दलितों व महिलाओं पर अत्याचार होने के आरोप लगाते हुए योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग करने वाली याचिका दायर की थी।  याचिका सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दी।

पाकिस्तान के 365 मंदिरों में से 287 पर भू माफियाओं का कब्जा: Pak सुप्रीम कोर्ट में शोएब आयोग की रिपोर्ट

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को किस तरह के हालातों का सामना करना पड़ता है, ये सभी जानते हैं। अक्सर अल्पसंख्यक समुदाय के साथ अत्याचार और प्रताड़ना की ख़बरें सामने आती हैं लेकिन अब इस बात की पुष्टि काफी बड़े पैमाने पर हुई है। दरअसल पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने एक आयोग बनाया था। इस आयोग ने पाकिस्तान में मौजूद मंदिरों की स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार की है। 

पाकिस्तानी मीडिया समूह ‘डॉन’ (Dawn) के मुताबिक़ एक सदस्य वाले इस आयोग के मुखिया थे डॉ. शोएब संदल। इन्होंने पाकिस्तान में हिन्दू मंदिरों की स्थिति पर यह रिपोर्ट तैयार की।

आयोग ने हिन्दू मंदिरों की स्थिति पर आधारित रिपोर्ट 5 फरवरी 2021 को पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश की। रिपोर्ट में बताया गया है कि इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB: Evacuee Trust Property Board) लगभग आधे से अधिक प्राचीन हिन्दू मंदिरों को सुरक्षित रखने में असफल रहा है। 

आयोग ने 6 जनवरी को चकवल स्थित ‘कटस राज मंदिर’ और 7 जनवरी को मुल्तान स्थित ‘प्रहलाद मंदिर’ का दौरा किया था। रिपोर्ट के भीतर पाकिस्तान स्थित 4 प्राचीन हिन्दू स्थलों में 2 की जानकारी दी गई है। बताया गया है कि कैसे पिछले कुछ समय में इनका काफी नुकसान हुआ है।

रिपोर्ट में इन धार्मिक स्थलों की तस्वीरें भी शामिल की गई हैं। पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित इस आयोग में 3 सहायक सदस्य भी शामिल किए गए थे – डॉ. रमेश वंकवानी, साकिब जिलानी और पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल। 

रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ETPB को आदेश दे कि वो खैबर पख्तूनखवा सरकार के साथ मिल कर, खंडित मंदिर/समाधि ‘टेरी’ का पुनर्निर्माण शुरू करे। इसके अलावा रिपोर्ट में हिंगलाज मंदिर (लसबेला), प्रहलाद मंदिर (मुल्तान), कटस राज मंदिर (चकवल) और टेरी मंदिर (करक) के पुनर्निर्माण की बात भी कही गई है।

शोएब संदल की रिपोर्ट के मुताबिक़ ETPB अधिनियम में संशोधन किया जाना चाहिए। यह जरूरी है क्योंकि इसी आधार पर हिन्दू और सिखों के धार्मिक स्थलों के हालात सुधारने के लिए पहल की जा सकेगी। 

दरअसल पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी को ETPB को आदेश दिया था। इसके तहत उसके दायरे में जितने भी हिन्दुओं के मंदिर और सिखों के गुरुद्वारे आते हैं, उसकी जानकारी प्रदान करनी थी। इसके बाद आयोग ने 12 जनवरी को इस मामले में ETPB से संपर्क किया, जिससे अगली सुनवाई तक सम्बंधित जानकारी उपलब्ध हो सके।

पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद ETPB की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी। 25 जनवरी को ETPB ने एक रिपोर्ट पेश की लेकिन उसमें भी पूरी जानकारी नहीं दी गई थी और आयोग द्वारा तय किए गए प्रारूप को भी नज़रअंदाज़ किया गया था। 

ETPB द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक़ पाकिस्तान में फ़िलहाल लगभग 365 मंदिर हैं, जिनमें से ETPB सिर्फ 13 मंदिरों का रखरखाव करता है। इसके अलावा लगभग 65 मंदिरों की देखभाल हिन्दू समुदाय के लोग खुद करते हैं और 287 मंदिरों पर भू माफ़ियाओं का कब्ज़ा है।

रिपोर्ट में ETPB पर और भी कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। बीते 73 सालों में इनका प्रयास सिर्फ प्रवासी अल्पसंख्यकों की कीमती संपत्ति पर कब्ज़ा करना था। छोटे कस्बों से लेकर बड़े शहरों तक अल्पसंख्यक समुदाय के मंदिरों, पूजा स्थलों और भी कई प्रकार के धार्मिक स्थलों पर ETPB का कब्ज़ा है। 

हाल ही में पाकिस्तान की सबसे बड़ी अदालत ने खैबर पख्तूनखवा स्थित जमींदोज़ किए गए लगभग एक सदी पुराने मंदिर को नए सिरे से बनाने का आदेश दिया था। दिसंबर 2020 के दौरान कट्टरपंथी इस्लामी भीड़ ने इस मंदिर पर हमला करके इसे आग के हवाले कर दिया था। इस मुद्दे पर पाकिस्तान की वैश्विक स्तर पर आलोचना और फ़ज़ीहत हुई थी।   

उत्तर प्रदेश: बदायूँ में पुजारी की धारदार हथियार से गोदकर हत्या, मंदिर में खून से लथपथ शव मिला

उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले में एक मंदिर के पुजारी की धारदार हथियार से गोदकर हत्या कर दी गई। वारदात इस्लामनगर थाना क्षेत्र की है। ‘सखी बाबा’ के नाम से मशहूर पुजारी जय सिंह यादव पिछले 45 वर्षो से मंदिर में सेवारत थे और साड़ी और चूड़ियाँ पहनकर ‘देवी काली’ की तरह वेशभूषा में रहते थे।

सूचना पाकर पहुँची पुलिस मौका-ए-वारदात की गहनता से पड़ताल कर रही है। पुलिस ने बताया कि आरोपित रामवीर यादव, फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की तीन टीमें तैनात की गई हैं। वह उसी इलाके का रहने वाला है। पुलिस ने कहा, “किस इरादे से हत्या की गई है यह अभी भी अस्पष्ट है।”

इस्लामनगर थाना क्षेत्र के मोहजुद्दीनगर ढकनगला गाँव स्थित मंदिर में शनिवार (फरवरी 06, 2021) सुबह लोग पूजा-पाठ के लिए पहुँचे तो 75 साल के जय सिंह का खून से लथपथ शव मिला। इस घटना के बाद से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

सखी बाबा मंदिर परिसर में ही झोपड़ी बनाकर रहते थे। खबरों के मुताबिक, शनिवार को रामवीर यादव मंदिर में सखी बाबा से मिलने आया था। इस दौरान दोनों के बीच गरमागरम बहस हुई। तभी यादव ने अचानक से चाकू निकाला और सखी बाबा की हत्या कर दी। इसके बाद वो वहाँ से भाग गया। ग्रामीणों ने आरोपित को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह उनसे बच कर भाग निकला।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संकल्प शर्मा ने कहा, “पुरानी रंजिश के चलते रामवीर यादव ने चाकू घोंपकर सखी बाबा की हत्या कर दी है। रामवीर यहीं का रहने वाला है। हमने उस पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या) के तहत मामला दर्ज किया है और उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। हत्या के पीछे का कारण अभी भी स्पष्ट नहीं है। हमने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और उनके रिश्तेदारों को सूचित कर दिया है।”

लखनऊ में पुजारी की निर्मम हत्या

गौरतलब है कि पिछले दिनों उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बाहरी इलाके में शिवपुर गाँव में एक शिव मंदिर के 85 वर्षीय पुजारी की बेरहमी से हत्या कर दी गई। पुजारी फकीरे दास का खून से लथपथ शव बुधवार (जनवरी 20, 2021) को मंदिर परिसर में उनकी झोपड़ी के अंदर मिला था। पुलिस के अनुसार पुजारी के सिर पर चोट के निशान थे। एसपी ने कहा था, “चोरी के कोई निशान नहीं हैं। मंदिर की दान पेटी में रखी नकदी भी चोरी नहीं हुई है।” पुजारी मूल रूप से सुल्तानपुर जिले के रहने वाले थे।

Instagram पर कमलनाथ (कॉन्ग्रेसी और पूर्व CM) जिसे फॉलो करते हैं, उसे आप घर-परिवार के बीच नहीं देख सकते

जन प्रतिनिधियों का सोशल मीडिया पर सक्रिय होना जितना स्वाभाविक होता है, उतना ही ज़रूरी भी। लिहाज़ा हर राजनीतिक दल के नेता सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं लेकिन जब एक वरिष्ठ नेता ज़रूरत से ज़्यादा सक्रिय हो जाएँ तब? तब हादसा होता है, जो कमलनाथ के साथ हुआ है।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ भी कई सोशल मीडिया मंचों पर सक्रिय हैं। उन तमाम सोशल मीडिया मंचों में एक है इन्स्टाग्राम (instagram)। आभासी दुनिया (virtual world) का ‘फोटो/वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म’। 

इन्स्टाग्राम पर दो विकल्प होते हैं – पहला किसी को फॉलो (follow) करना और दूसरा फॉलो किया जाना। इन्स्टाग्राम पर कमलनाथ के लगभग 2.10 लाख फॉलोवर हैं। बदले में वो सिर्फ 17 लोगों को फॉलो करते हैं।

इन 17 लोगों में सिर्फ कुछ ही ऐसे एकाउंट हैं, जिनकी प्रोफाइल पर ‘ब्लू टिक’ नहीं है लेकिन हैरानी की बात ये नहीं है। वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता की ‘फॉलो लिस्ट’ में तीसरी प्रोफाइल ऐसी है, जो उतनी सामान्य नहीं नज़र आती है। 

कमलनाथ द्वारा फॉलो किया जाने वाला एकाउंट

उस प्रोफाइल/पेज का नाम है- करोना वायरल ऑफिशियल (karona viral official)। नाम से ही स्पष्ट है कि इसका न तो कॉन्ग्रेस से लेना देना है और न ही राजनीति या समाज से सरोकार है।

लगभग 25000 फॉलोवर वाले इस पेज पर ऐसे मिजाज़ का ‘कंटेंट’ साझा किया गया है, जो सार्वजनिक मंच पर दिखाया तक नहीं जा सकता है। ऐसी तस्वीरें, ऐसे वीडियो और ऐसे पोस्ट हैं, जो यहाँ दिखाने लायक कतई नहीं हैं। न जाने क्या लाचारी रही होगी ‘माननीय’ कमलनाथ जी की इस पेज को फॉलो करने की!

कमलनाथ द्वारा फॉलो किया जाने वाला एकाउंट

मज़े की बात ये है कि इस एकाउंट का नाम ‘करोना वायरल ऑफिशियल’ है। कोई भी आम नागरिक इस भ्रम में पड़ सकता है कि इस पर महामारी से संबंधित कोई अहम जानकारी होगी या जनहित से जुड़ी बातें मौजूद होंगी।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने फॉलो किया है तो कुछ ‘सामाजिक-राजनीतिक चेतना’ से लब्ध बात होगी लेकिन जनता का दुर्भाग्य! पेज खोलते ही ऐसे गंदे-गंदे पोस्ट नज़र आते हैं, जिन्हें लेकर सार्वजनिक मंचों पर चर्चा तक नहीं की जा सकती है। चर्चा तो दूर यहाँ शेयर तक नहीं किया जा सकता है।

खैर कमलनाथ जी दिग्गज नेता हैं, होगा कोई निजी कारण जो जनता की समझ से बाहर है। 

ऐसे ही 2020 के मार्च महीने में कमलनाथ को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा छिड़ी हुई थी। दरअसल मार्च के अंतिम हफ्ते में आइफा (iifa) होना था, शहर तय किया गया था इंदौर! इसके पहले मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक कार्यक्रम हो चुका था, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं।

इस तस्वीर में बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान और जैक्लीन फर्नांडीस भी मौजूद थे। सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों का प्रभाव कुछ इस कदर पड़ा कि ट्विटर पर ‘कमरनाथ’ ट्रेंड करना लगा। जिसकी वजह इस तस्वीर में साफ़ देखी जा सकती है। 

क्यों ट्रेंड कर रहा था ‘कमरनाथ’

इसके अलावा आइफा के आयोजन की काफी आलोचना हुई थी। पहला देश में कोरोना महामारी दस्तक दे चुकी थी और दूसरा इस आयोजन की लिए तय किया गया 700 करोड़ का खर्च। फ़िलहाल बड़ी बात ये है कि कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता एक ऐसा पेज फॉलो करते हैं, जिसका नाम भले ‘करोना वायरल’ है लेकिन कोरोना से शायद ही कोई लेना देना नज़र आए।    

‘गंदी बात’ वाली हीरोइन खुद मालामाल, दूसरों को एक फिल्म के बस ₹15-20 हजार; ‘बोल्ड’ सीन के लिए करती थी मजबूर

एकता कपूर के फेमस वेब शो ‘गंदी बात’ की एक्ट्रेस गहना वशिष्ठ को मुंबई क्राइम ब्रांच ने शनिवार (फरवरी 6, 2021) को गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने उसे बुधवार (फरवरी 10, 2021) तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया। गहना वशिष्ठ को ‘मिस एशिया बिकनी क्राउन’ विजेता के रूप में जाना जाता है।

गहना पर एक वेबसाइट के लिए एडल्ट वीडियो शूट करने और उन्हें अपलोड करने का आरोप है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि वो स्ट्रगल कर रहीं एक्ट्रेस को काम का लालच देकर पोर्न वीडियो शूट करवाती थी। काम के एवज में हर फिल्म के लिए 15,000 से 20,000 रुपए भुगतान करती थी। पुलिस को आरोपितों के सैकड़ों एक्स-रेटेड वीडियो मिले हैं।

एक क्राइम ब्रांच अधिकारी ने बताया कि चैनल को सब्सक्राइब करने के लिए 2000 रुपए देने होते थे। अन्य लीडिंग और जानी-मानी मॉडल भी हैं, जिन्होंने इन वेबसाइटों पर ऐसे वीडियो शेयर किए हैं। अधिकारी ने कहा, “हम कानूनी राय ले रहे हैं कि क्या अभिनेत्रियों और मॉडलों के खिलाफ उनके सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य पोर्न साइटों पर उनके अश्लील वीडियो साझा करने के लिए कार्रवाई की जा सकती है।”

मामले में पुलिस ने यास्मीन बेग खान उर्फ़ रोवा, प्रतिभा नलावडे, मोनू गोपालदास जोशी, भानुसूर्यम ठाकुर, मोहम्मद आसिफ और सैफी को धर-दबोचा है। पुलिस का मानना है कि इस रैकेट के पीछे यास्मीन बेग खान उर्फ़ रोवा का दिमाग है। गंदे कारोबार का भंडाफोड़ करने वाले इंस्पेक्टर केदार पवार ने कहा, “वे विदेशी आईपी एड्रेस का इस्तेमाल कर हॉटहिट ऐप के जरिए वीडियो अपलोड कर रहे थे।” पेड वेबसाइट के करीब 4 लाख सब्सक्राइबर हैं। पुलिस का मानना है कि गिरोह ने भद्दी वीडियो बेचकर करोड़ों कमाए हैं और पीड़ितों को सिर्फ 15,000 या 20,000 रुपए का भुगतान किया है।

गौरतलब है कि मुंबई में अभिनेत्री और मॉडल गहना वशिष्ठ को पोर्न वीडियो शूट कर के अपनी वेबसाइट पर डालने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। मुंबई पुलिस को पोर्न इंडस्ट्री के एक बड़े नेटवर्क के बारे में पता चला है, जिसमें कई अभिनेत्री, प्रोडक्शन कंपनियाँ और ऐसे मॉडल्स शामिल हो सकते हैं। ये सभी मोबाइल एप्स और वेबसाइट्स पर पोर्न फ़िल्में शूट कर के डालते रहे हैं।

गहना हिंदी और तेलुगु सिनेमा की फिल्मों के अलावा कई एडवर्टाइजमेंट वीडियोज में भी देखी जाती रही है। उससे शनिवार (फ़रवरी 6, 2021) की शाम को पूछताछ की गई। उसने अपनी वेबसाइट पर 87 पोर्न/अश्लील-आपत्तिजनक वीडियोज अपलोड की थी, जिन्हें देखने के लिए सब्सक्रिप्शन लेना होता था। इन एप्स के सब्सक्रिप्शन से जुटाए गए 36 लाख रुपए एक बैंक अकाउंट में मिले हैं, जिसे सीज कर दिया गया।

पुलिस ने बताया कि उन्हें 3 ऐसे पीड़ितों की शिकायत मिली है, जिन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें पोर्न वीडियोज शूट करने के लिए मजबूर किया गया। इसके बाद मुंबई पुलिस ने मलाड के मढ़ द्वीप स्थित ग्रीन पार्क बंगलो में तलाशी ली।

ट्विटर पर एक्शन लेने की तैयारी में मोदी सरकार: IT मंत्रालय स्वदेशी Koo ऐप पर

सरकार के आदेशों के बावजूद देश-विरोधी गतिविधियों को मंच देने और प्रोत्साहित करने को लेकर ट्विटर और केंद्र सरकार लगातार आमने-सामने हैं। अब ‘युअर स्टोरी’ की एक खबर की मानें तो इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और इसके कई संगठन माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर, से मेड-इन-इंडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘कू’ (Koo) की ओर रुख कर चुके हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय, MyGov, Digital India, India Post, NIC, NIELIT, SAMEER, कॉमन सर्विसेज सेंटर, UMANG ऐप, डिजी लॉकर, NIXI, STPI, CDAC, और CMET को इस प्लेटफ़ॉर्म यानी, ‘कू’ पर वेरिफाइड अकाउंट्स बन चुके हैं।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब सरकार खालिस्तानी और भारत-विरोधी अकाउंट को हटाने के अपने आदेशों के उलंघन करने पर ‘ट्विटर’ के खिलाफ कार्रवाई करने जा रही है। समाचार चैनल ‘न्यूज़18’ के अनुसार, “जिन ट्विटर अकाउंट पर एक्शन लेने का आदेश दिया गया था वो खालिस्तानी समर्थक, या पाकिस्तान द्वारा समर्थित और विदेशों से संचालित होने वाले अकाउंट हैं। कई खाते भी स्वचालित बॉट्स हैं, जिनका इस्तेमाल किसानों के विरोध के नाम पर गलत सूचना और भड़काउ सामग्री शेयर करने के लिए किया गया था।”

सरकार ने ट्विटर (Twitter) के सीईओ जैक डोर्सी (Jack Patrick Dorsey) की ट्विटर गतिविधि, जो भारत विरोधी पूर्वग्रह का संकेत देती हैं, का भी संज्ञान लिया है। इस पर मंत्रालय के सूत्रों ने कहा, “यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि कुछ दिनों पहले जैक डोर्सी (Jack Patrick Dorsey) ने किसान विरोध के समर्थन में विदेशी आधारित हस्तियों द्वारा किए गए कई ट्वीट लाइक किए थे। इसे देखते हुए, ट्विटर द्वारा सरकार के आदेशों की अवहेलना कई सवाल खड़े करती है।”

जैसा कि हमने पहले भी बताया था, जैक डोर्सी ने किसान विरोध प्रदर्शनों के समर्थन में ट्वीट करने के वाली पॉप स्टार रिहाना के ट्वीट को ‘उत्पीड़ितों’ के उत्थान के लिए किया गया एक प्रयास बताते हुए ‘लाइक’ किया था।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में, ट्विटर ने उन अकाउंट को ब्लॉक करने से इनकार कर दिया था, जिन्होंने एक हैशटैग ट्रेंड किया था, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी पर ‘किसान नरसंहार’ का प्रयास करने का आरोप लगाया गया। जनवरी 31, 2021 को भी इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने ट्विटर अकाउंट्स और ट्वीट्स के 257 लिंक की एक सूची ट्विटर को सौंपी थी।

भारत सरकार ने गणतंत्र दिवस पर हुए दंगों के बाद तनावपूर्ण स्थिति के दौरान हिंसा भड़काने की संभावनाओं के कारण ट्वीट और खातों को ब्लॉक करने का अनुरोध किया, लेकिन ट्विटर ने इसका पालन करने से इनकार कर दिया। इसके बाद, सरकार ने ट्विटर को एक और नोटिस भेजा और अब, उन्होंने अनुरोध किया है कि ऐसे करीब एक हजार भारत विरोधी अकाउंट को ब्लॉक किया जाए जिन्हें भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने चिन्हित किया है।

वहीं, अपने प्लेटफॉर्म पर मनमाने फैसलों को लेकर ट्विटर को लेकर सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि फ़्रांस भी आक्रोशित है। फ़्रांसिसी राष्ट्रपति इमैनुएल मेक्रों ने हाल ही में कहा कि इस तरह के फैसले लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रतिनिधियों द्वारा पारित कानूनों के अनुसार किए जाने चाहिए और निजी ‘टेक’ दिग्गजों पर नहीं छोड़े जाने चाहिए।

सूत्रों ने यह भी कहा कि ‘ट्विटर ने अभी तक भारत के किसी भी न्यायालय में इनमें से किसी भी आदेश को चुनौती नहीं दी है। तार्किक रूप से कोई भी कंपनी किसी भी सरकारी आदेश के खिलाफ अपील करने के लिए स्वतंत्र है, यदि उसे लगता है कि वह उस आदेश का पालन नहीं कर सकती।’

इस प्रकार, यह भी स्पष्ट है कि ट्विटर लोगों के विचार प्रतिबंधित करने और उन्हें अपनी मनमर्जी से अनुमति देने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, जो वर्तमान में राष्ट्रहितों को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं।

‘योगी सरकार को बर्खास्त कर लगाएँ राष्ट्रपति शासन’: CJI बोले- आगे बहस की तो भारी जुर्माना लगाएँगे, याचिका खारिज

उत्तर प्रदेश में चल रही योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग करने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दी है। इस याचिका में संविधान के अनुच्छेद 356 (केंद्र की संघीय सरकार को राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता या संविधान के स्पष्ट उल्लंघन की दशा में राज्य सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू करने का अधिकार) का प्रयोग करने की माँग की गई थी।

सीआर जया सुकिन नाम के एक अधिवक्ता ने यह याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में मनमाने ढंग से गैर-न्यायिक हत्याएँ हो रही हैं। साथ ही केंद्र सरकार द्वारा इन मामलों में कोई दिशा-निर्देश न जारी किए जाने की भी बात कही। इस पर CJI बोबडे ने पूछा कि वो किन आँकड़ों के आधार पर ऐसा कह रहे हैं?

उन्होंने पूछा कि क्या याचिकाकर्ता ने अन्य राज्यों के आपराधिक आँकड़ो का अध्ययन किया है? इस पर जया ने दावा किया कि देश में जितनी भी आपराधिक घटनाएँ होती हैं, उनमें से 30% सिर्फ यूपी में ही होते हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सवाल पूछा गया कि इससे वादी के मौलिक अधिकारों का कैसे हनन होता है? इस पर जया सुकिन कहने लगे कि वो भारत देश के नागरिक हैं। संतोषजनक और स्पष्ट जवाब न मिलने पर उन्हें चेतावनी दी गई।

CJI बोबडे ने उन्हें चेताया कि अगर वो आगे इसी तरह बहस करते रहे तो उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। तत्पश्चात उन्होंने याचिका ख़ारिज कर दी। अपनी याचिका में ने सुकिन ने पिछले 1 वर्ष में यूपी में हुई घटनाओं के आधार पर ये माँग की थी। हाथरस मामला, डॉक्टर कफील खान केस, AMU में ‘पुलिस द्वारा हिंसा और ज्यादती’, CAA विरोधियों के पोस्टर सार्वजनिक करने और गौतम बुद्ध नगर में अस्पताल में बेड की कमी की वजह से एक गर्भवती महिला की मृत्यु जैसी ख़बरों को आधार बनाया था।

साथ ही उन्नाव मामले में पीड़ित परिवार की सुरक्षा में विफल रहने के आरोप के साथ-साथ यूपी को याचिका में महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित करार दिया गया था। NCRB (नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो) के आँकड़ों को आधार बनाते हुए दावा किया गया था कि भारत में 2019 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 4,05,861 मामले दर्ज किए गए और इनमें से उत्तर प्रदेश की 59,853 घटनाएँ थीं।

योगी आदित्यनाथ की सरकार पर गैरकानूनी, मनमाने, सनकपन और अनुचित तरीके से काम करने का आरोप लगाते हुए कहा गया था कि सत्ता के अधिकारों के दुरुपयोग हो रहा है और सोशल मीडिया से लेकर मीडिया तक अभिव्यक्ति आज़ादी पर बंदिश है। इतना ही नहीं, दलितों के खिलाफ अत्याचार बढ़ने, जबरन बाल श्रम, ऑनर किलिंग, बेरोजगारी, बेरोजगारी, गरीबी और NGOs पर कार्रवाई सहित कई अन्य आरोप भी लगाए गए थे।

भारत के समर्थन में सचिन-लता-अक्षय: महाराष्ट्र सरकार कराएगी जाँच, मंत्री ने कहा – ‘किस दबाव में लिखा, एक जैसा क्यों

सचिन तेंदुलकर, अक्षय कुमार, लता मंगेशकर, सायना नेहवाल जैसे लोगों ने भारत की संप्रभुता की बात की। कॉन्ग्रेस और NCP के साथ टिकी महाराष्ट्र की सरकार को लेकिन यह रास नहीं आया। अब वो इसकी जाँच करवा रहे हैं कि आखिर एक साथ इतने बड़े भारतीय सेलेब्रिटी एक ही मुद्दे पर ट्वीट कैसे कर सकते हैं।

महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख जाँच का आदेश देते हैं। वो कहते हैं – “पूरे दुनिया में यह बात हो रही है। अपने-अपने क्षेत्र के नामचीन लोग जैसे सचिन साब, लता जी, साइना नेहवाल… इनकी अपनी-अपनी सोच है, लेकिन जिस प्रकार की टाइमिंग है, क्या किसी दबाव से इस प्रकार की ट्वीट आई है क्या? साइना नेहवाल और अक्षय कुमार के ट्वीट एकदम एक जैसा ट्वीट है।”

भारत में ‘किसान’ आंदोलन हो रहा है। इसके लिए समर्थन खालिस्तान जैसे आतंकी संगठनों से आ रहा है। और विदेशी ताकतों से भी। इनमें बड़े-बड़े नाम भी शामिल हैं। ये नाम भारत-विरोधी कंटेंट को सोशल मीडिया पर बढ़ावा दे रहे हैं।

इनके विरोध में सचिन तेंदुलकर, अक्षय कुमार, लता मंगेशकर, सायना नेहवाल जैसे लोगों ने भारत की संप्रभुता की बात की।

“भारत की संप्रभुता से समझौता नहीं किया जा सकता है। बाहरी ताकतें दर्शक हो सकती हैं लेकिन प्रतिभागी नहीं। भारतीय भारत को जानते हैं और उन्हें ही भारत के लिए फैसला करना है। आइए एक राष्ट्र के रूप में एकजुट रहें। IndiaTogether #IndiaAgainstPropaganda”

यह ट्वीट सचिन तेंदुलकर ने 3 फरवरी 2021 को किया था। क्यों किया था? क्योंकि भारत के अंदरूनी मामले में विदेशी लोग (बड़े-बड़े नाम, वो भी एक साजिश और प्रपंच के तहत) हस्तक्षेप करने लगे थे।

सचिन के अलावा अक्षय कुमार, लता मंगेशकर, सुरेश रैना, साइना नेहवाल जैसे बड़े नामों ने भी विदेशी ताकतों और प्रोपेगेंडा के खिलाफ अपनी बात सोशल मीडिया पर रखी थी। लेकिन यह महाराष्ट्र सरकार को रास नहीं आई। वजह राजनीतिक है या सच में किसी साजिश की आशंका है महाराष्ट्र की सरकार को… यह सिर्फ वहाँ के गृहमंत्री अनिल देशमुख ही बता सकते हैं।

इससे पहले कॉन्ग्रेस सांसद जसबीर सिंह गिल ने तेंदुलकर पर हमला करते हुए कहा है कि वे ‘भारत रत्न के लायक नहीं हैं’। साथ ही दावा किया है कि सचिन अपने बेटे को आईपीएल टीम में जगह दिलाने के लिए सरकार का समर्थन कर रहे हैं।