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बंगाल की बेटी ने ममता बनर्जी की फ्री साइकिल ठुकराई, कहा- पिता को झूठे मामलों में फँसा प्रताड़ित किया

पश्चिम बंगाल की एक छात्रा ने ममता बनर्जी सरकार की योजना के तहत मुफ्त साइकिल लेने से इनकार कर दिया है। ऐसा उसने अपने पिता को कथित तौर पर झूठे मुकदमों में फँसाकर प्रताड़ित किए जाने के विरोध में किया है। यह लड़की दसवीं कक्षा की छात्रा है

बीरभूम जिले के रामपुरहाट उपसंभाग में कुसुमी हाई स्कूल की छात्रा मोऊतृषा डे ने अधिकारियों को पत्र लिखकर कहा कि वह साइकिल नहीं लेगी, क्योंकि उसके पिता को कथित तौर पर झूठे मामलों में गिरफ्तार किया गया था।

स्कूल के प्राचार्य श्रीकांत मंडल ने शनिवार को यह जानकारी देते हुए कहा, “साबुज साथी योजना के तहत शुक्रवार को विद्यार्थियों को साइकिल बाँटी गईं। उसने इसे लेने से मना कर दिया। हमने उच्च अधिकारियों को सूचित कर दिया है और साइकिल लौटा दी है।’’

बता दें कि छात्रा के पिता सुशांत डे स्थानीय बीजेपी नेता हैं। वे मयूरेश्वर-2 प्रखंड के अध्यक्ष भी हैं। छात्रा ने आरोप लगाया कि पुलिस ने 17 सितंबर 2020 को उसके पिता को झूठे मामलों में फँसाकर गिरफ्तार कर लिया था। मोऊतृषा ने मीडिया को बताया, “पिता के पुलिस और न्यायिक हिरासत में रहते हुए हमें बहुत दुख झेलना पड़ा था।”

वहीं सुशांत डे का कहना है कि, “पुलिस ने पिछले साल झूठे आरोपों के आधार पर मेरे खिलाफ एक के बाद एक मामले दर्ज किए। मैं 35 दिन तक पुलिस और न्यायिक हिरासत में रहा। लेकिन राज्य सरकार द्वारा दी जा रही मुफ्त साइकिल ना लेना उनकी बेटी का अपना निर्णय है।”

बता दें राज्य सरकार द्वारा इस योजना के तहत सरकारी स्कूलों तथा सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों को मुफ्त साइकिल बाँटी जाती हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 2015 में इस योजना की शुरुआत की थी।

‘मैं तुम्हारा प्राइवेट पार्ट्स देखना चाहता हूँ, मेरा मसाज करो… मैं तुम्हें स्टार बना दूँगा’ – ‘बिस बॉस 14’ कंटेस्टेंट पर लगे आरोप

टीवी प्रोड्यूसर और और ‘बिग बॉस 14’ से लाइमलाइट में आने वाले विकास गुप्ता एक बार फिर से चर्चा में हैं। टीवी रियलिटी शो ‘Roadies’ के विजेता विकास खोकर ने आरोप लगाया है कि विकास गुप्ता ने उनसे सेक्सुअल फेवर माँगा था। विकास गुप्ता ने उन्हें अपनी अश्लील तस्वीरें क्लिक कर के भेजने को कहा था। उन्होंने बताया कि उनके साथ ये सब होना तब शुरू हुआ, जब उन्होंने ‘Roadies 9’ का खिताब जीता।

बकौल खोकर, विकास गुप्ता ने उनसे शारीरिक सम्बन्ध बनाने की भी इच्छा जताई। खोकर ने इसका खुलासा करते हुए कहा कि ऐसी माँग करने वाले विकास गुप्ता अकेले नहीं थे, बल्कि 2012 के बाद कई लोगों ने उन से शारीरिक सम्बन्ध बनाने की इच्छा जताई थी। यही वो साल था, जब उन्होंने ‘Roadies’ का ख़िताब जीता था। उन्होंने बताया कि विकास गुप्ता उनके जरिए अपनी ‘यौन इच्छाएँ’ पूरी करना चाहते थे।

बकौल विकास खोकर, विकास गुप्ता ने उनसे कहा था, “मेरे घर आओ और मेरा मसाज करो, क्योंकि मेरे शरीर में दर्द है। अगर तुम मुझे अपनी नंगी तस्वीरें भेजोगे तो मैं तुम्हें एक शो में काम दूँगा। मैं तुम्हारा शरीर देखना चाहता हूँ। मैं तुम्हारे प्राइवेट पार्ट्स को देखना चाहता हूँ। जो भी मेरे करीब आता है, उसे स्टार बनने से कोई नहीं रोक सकता।”

विकास गुप्ता ने इस तरह से लालच देकर विकास खोकर को अपने घर बुलाना चाहा था, ऐसा आरोप लगा है। वहीं टीवी अभिनेता अली गोनी ने आरोप लगाया है कि विकास गुप्ता उन्हें और उनकी साथी जश्मीन भसीन को बदनाम करना चाहते हैं।

भसीन ‘टशन-इश्क’ और ‘दिल से दिल तक’ जैसे सीरियलों में काम कर चुकी हैं। अब अली ने आरोप लगाया कि दोनों के बारे में गुप्ता अफवाहें फैला रहे हैं। इससे पहले ‘कसौटी ज़िंदगी की’ के अभिनेता पार्थ संथान ने भी उन पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे। उन्होंने पार्थ को काम के बदले रुपए नहीं दिए और करियर बर्बाद करने की धमकी दी थी।

हाल ही में सबने विकास गुप्ता को ‘बिग बॉस 14’ में रोते हुए देखा था। खोकर ने कहा है कि वो रो कर लोगों की सहानुभूति लेने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुप्ता को उनके ही किए की सज़ा मिल रही है। उन्होंने कहा, “ईश्वर न्याय कर रहे हैं। उसने कर्म ही ऐसे किए हैं कि उसे रोना पड़ेगा।”

करियर के शुरुआती दिनों में विकास खोकर मुंबई के अँधेरी वेस्ट में स्थित एक चाय की दुकान में जाते थे, जहाँ एकता कपूर भी जाया करती थीं। वो एकता कपूर से मिल कर काम की उम्मीद में हर दिन वहाँ जाते थे। लेकिन, एकता की जगह उनकी मुलाकात विकास गुप्ता से हुई थी।

1 महीने में दिल्ली आए सभी ईरानी नागरिकों की कुंडली खँगालेगी पुलिस, इजरायली दूतावास के पास धमाके से जुड़ा है मामला

दिल्ली में इजरायली दूतावास के पास बम ब्लास्ट की सुरक्षा एजेसियाँ हर एंगल से जाँच कर रही हैं। इसी कड़ी में दिल्ली पुलिस ने विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) से पिछले एक महीने में दिल्ली आए सभी ईरानी नागरिकों के बारे में जानकारी माँगी है। साथ ही उन ईरानी नागरिकों की लिस्ट भी माँगी है जो पिछले काफी दिनों से भारत मे रह रहे हैं.

इजरायल दूतावास के पास कम तीव्रता के विस्फोट के बाद से ही देश की सुरक्षा एजेंसियाँ हाई अलर्ट पर हैं। ब्लास्ट की घटना के बाद दिल्ली पुलिस शहर में रह रहे ईरानियों की तलाश रही और कुछ से पूछताछ भी की जा रही है। जिन ईरानी नागरिकों के वीजा एक्सपायर हो गए हैं और फिर भी रुके हैं, उनको लेकर FRRO से डेटा लिया गया है।

बता दें, अब तक कि जाँच से पता चला है कि जब धमाका हुआ था तो उस इलाके में लगभग 45,000 मोबाइल नंबर एक्टिव थे। स्पेशल सेल की टीम घटना से जुड़े सबूतों को बरामद करने के लिए लगातार मौके पर पड़ताल कर रही हैं। मीडिया सूत्रों का कहना है कि घटनास्थल से मिले पत्र में लिखी धमकी की लिखावट काफी साफ-सुथरी है, जिसे किसी भी प्रकार की जल्दबाजी में नहीं लिखा गया है। यह इस बात का संकेत देती है कि धमाका पहले से की गई योजना के तहत किया गया है।

गौरतलब है कि इजरायल एम्बेसी के पास हुए धमाके से कोई हताहत नहीं हुआ था, लेकिन कुछ गाड़ियों के शीशे टूट गए थे। इसके बाद एयरपोर्ट, सरकारी इमारतों और अहम जगहों की सुरक्षा बढ़ा दी गई थी।

जैश उल हिन्द ने इस धमाके की ज़िम्मेदारी ली थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ मैसेजिंग एप्लीकेशन टेलीग्राम पर प्राप्त हुए संदेश (मैसेज) में आतंकी संगठन ने दावा किया था, “सबसे ताकतवर अल्लाह की रहमत और मदद से, जैश उल हिन्द के सैनिकों ने दिल्ली के अति सुरक्षित क्षेत्र में घुसपैठ की और IED हमले को अंजाम दिया। इसके बाद कई प्रमुख शहर निशाने पर होंगे। यह तो बस एक शुरुआत है। इसके ज़रिए हम भारत सरकार द्वारा किए गए अत्याचारों का बदला लेंगे।” मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियॉं इस दावे की पुष्टि करने में फिलहाल जुटी हैं।

इजरायल को इस धमाके के तार 2012 की घटना से जुड़े होने का अंदेशा है। 13 फरवरी 2012 को दिल्ली में इजरायली राजनयिक की कार में धमाका किया गया था। दो बाइक सवार हमलावरों ने इजरायली राजनयिक की पत्नी की गाड़ी में बम चिपका दिया था। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को इस धमाके के लिए जिम्मेदार ठहराया था। दिल्ली पुलिस ने 7 मार्च 2012 को इस मामले में जर्नलिस्ट मोहम्मद अहमद काजमी को गिरफ्तार किया था। वह ईरानी मीडिया समूह के लिए काम करता था।

मक्का मस्जिद की फोटो के साथ LGBT का झंडा… गिरफ्तार कर लिए गए 4 छात्र: तुर्की के राष्ट्रपति से लेकर मंत्री तक विरोध में

तुर्की में असहिष्णुता की घटना सामने आई है। शनिवार (30 जनवरी 2021) को तुर्की की पुलिस ने 4 छात्रों को गिरफ्तार किया। उन पर आरोप है कि उन्होंने इस्तांबुल के बोगाज़िशी यूनिवर्सिटी (Boğaziçi University) स्थित इस्लाम के पवित्र स्थल का कथित तौर पर अपमान किया

दरअसल प्रदर्शनकारी छात्रों ने सऊदी अरब, मक्का के मस्जिद-अल-हरम स्थित ‘काबा’ की तस्वीर के पास एक कलाकृति (आर्टवर्क) प्रदर्शित की, जिस पर रेनबो झंडा (एलजीबीटी/LGBT चिन्ह) बना हुआ था। छात्रों ने उस आर्टवर्क को कुलाधिसचिव (रेक्टर) दफ्तर के सामने लगाया था। 

छात्रों ने वहाँ पर एक और आर्टवर्क लगाया था, जिसमें आधा साँप और आधा इंसान वाला काल्पनिक पात्र (शाहमरन) बना हुआ था। उस आर्टवर्क को इस्लाम पर ‘घटिया हमला’ बताते हुए पुलिस ने सभी छात्रों को मज़हबी मूल्यों के अपमान के संदेह में गिरफ्तार कर लिया।

इसमें दो छात्रों के खिलाफ़ वारंट जारी किया गया था और जबकि दो अन्य छात्रों को नज़रबंद किया गया है। ये छात्र नए रेक्टर मेलीह बुलु (Melih Bulu) की बोगाज़िशी यूनिवर्सिटी में नियुक्ति का विरोध कर रहे थे। इनका चयन तुर्की राष्ट्रपति एर्दोगन ने किया था। 

तुर्की के सरकारी अधिकारी भी कर रहे हैं आलोचना 

अपने एक ट्वीट में आंतरिक मंत्री सुलेमान सोइलु (Suleyman Soylu) ने प्रदर्शन करने वाले छात्रों को ‘LGBT deviants’ बताया और कहा वह गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इस नफरत भरे ट्वीट की तमाम सामाजिक कार्यकर्ताओं और नेटिज़न्स ने भी आलोचना की और फ्रांस ने तो इसे ‘हेट स्पीच’ बताते हुए प्रतिबंधित कर दिया। 

तुर्की के आंतरिक मंत्री का ट्वीट

तुर्की के राष्ट्रपति के आधिकारिक प्रवक्ता इब्राहिम कलिन (Ibrahim Kalin) ने भी ट्वीट करके कहा कि काबा का अपमान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता या प्रदर्शन के अधिकार के दायरे में नहीं आता है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “क़ानून के मुताबिक़ इस हरकत की जो भी सज़ा होगी, वह दी जाएगी। इस तरह के घटिया इरादे और दोयम दर्जे की हरकत भ्रामक और निराशाजनक है।” 

इब्राहिम कलिन का ट्वीट

जनवरी की शुरुआत में राष्ट्रपति एर्दोगन ने प्रदर्शनकारी छात्रों को ‘आतंकवादी’ कहा था। दरअसल तुर्की में समलैंगिकता वैध है लेकिन एलजीबीटी समुदाय के लोगों के साथ अक्सर मारपीट और शोषण की घटनाएँ होती हैं।

समाज में उनके प्रति स्वीकार्यता का दायरा कम है और एर्दोगन के सत्ता में आते ही उन पर अत्याचार बढ़ा है। सरकार ने इस्तांबुल प्राइड मार्च पर 5 साल का (2019 तक) प्रतिबंध लगाया था। 2020 में यह मार्च कोरोना महामारी की वजह से नहीं हो पाई थी।    

छात्रों के प्रदर्शन पर बात करते हुए एक वकील लेवेंट (Levent Pişkin) ने कहा था, “सरकार 2015 से ही एलजीबीटी समुदाय के लोगों पर अपराध तय कर रही है, जब उसने इस्तांबुल प्राइड मार्च पर प्रतिबंध लगाया था। यह पिछले साल से कुछ ज़्यादा हो रहा है।” इसके अलावा वकील ने प्रदर्शनकारी छात्रों के लिए गवर्नर ऑफिस द्वारा इस्तेमाल की गई ‘होमोफोबिक भाषा’ की भी आलोचना की थी।   

‘एक सुंदर हिन्दू लड़की चाहिए, जो मेरी वासना को तृप्त करे’: शादीशुदा नसीर महिलाओं को अश्लील मैसेज भेज कर रहा परेशान

“मैं (नसीर हुसैन) 34 साल का एक मुस्लिम पुरुष हूँ। मेरी एक काफी सुंदर सी पत्नी है। 2 बच्चे भी हैं। मैं वाला एक मजबूत और बेहद कामुक इंसान हूँ, जो एक सुंदर हिन्दू युवती से निकाह करना चाहता है। वो युवती 20-30 आयु वर्ग में होनी चाहिए। ऐसी महिला, जो मेरे वासना को तृप्त करे। जो मेरे बीज को अपने अंदर लेकर मेरे दो बच्चों को पैदा करे। मैंने तुम्हें काफी आकर्षक पाया है और मैं तुम्हारे साथ निकाह की संभावनाओं को तलाशना चाहता हूँ। मैं तुम्हें शारीरिक और वित्तीय रूप से बहुत खुश रखूँगा। अगर तुम इस दिशा में आगे बढ़ना चाहती हो तो मुझे ज़रूर बताओ। एक और हिन्दू युवती मुझे खासी सुंदर और आकर्षक लगी थी, जिसे मैंने ये सन्देश भेजा था। लेकिन, अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। अब तुम बताओ।”

आप इस अजीबोगरीब मैसेज को पढ़ कर हँसिए मत, क्योंकि ये सचमुच में किसी ने भेजा है। उस व्यक्ति का नाम है – नसीर हुसैन। ट्विटर पर ‘कॉस्टिक कन्या’ हैंडल और ‘CIGGY’ यूजरनेम के साथ सक्रिय एक महिला ने बताया कि उन्हें नसीर हुसैन नामक व्यक्ति की तरफ से सोशल मीडिया पर ऐसे मैसेज मिले हैं। इस मैसेज ने उन्हें इतना आक्रोशित कर दिया कि उन्होंने उसे ब्लॉक कर डाला और सोशल मीडिया पर भी इसे पोस्ट किया, ताकि अन्य महिलाएँ सावधान हो जाएँ।

सन्देश में नसीर ने दावा किया है कि उसने एक अन्य हिन्दू महिला को भी ऐसे ही मैसेज भेजा है। इसी ट्वीट की रिप्लाई में जून पॉल नामक एंटरटेनमेंट जर्नलिस्ट ने बताया कि दुर्भाग्य से वो ‘अन्य हिन्दू महिला’ वही हैं। उन्हें नसीर हुसैन ने मैसेज भेजा था कि वो उनसे कुछ महत्वपूर्ण बात करना चाहता है। हालाँकि, उन्होंने उसे ब्लॉक कर दिया। बाद में पता चला कि वो कई हिन्दू महिलाओं को ऐसे मैसेज भेज चुका है।

नसीर हुसैन ने ‘CIGGY’ नामक महिला यूजर को भेजा सन्देश

जो मैसेज उसने पॉल को किया किया, हूबहू उसने प्रेरणा नामक एक महिला को भी लिखा था। प्रेरणा ने भी इसका स्कीनशॉट शेयर किया। ‘CIGGY’ ने बताया कि नसीर हुसैन नाम का ये व्यक्ति कई सोशल मीडिया हैंडलों से महिलाओं को प्रताड़ित करने में लगा हुआ है। उसने ‘@naser_hussain_pcb’ के बाद ‘@naser_hussain_55’ नाम से इंस्टाग्राम अकाउंट बना लिया। उन्होंने इस आईडी को रिपोर्ट करने की अपील की।

इतना ही नहीं, नसीर हुसैन लड़कियों को अपनी अधनंगी तस्वीरें भी भेजता रहता है। उसने वर्णिका नामक यूजर को अल्लाह की कसम खा कर ‘भरोसा’ दिलाया था और कहा था कि वो उसे अपनी ‘हिन्दू पत्नी’ बनाना चाहता है। वर्णिका ने अपनी दोस्तों के साथ एक तस्वीर शेयर की थी, जिस पर उसने लिखा था, “तुम्हारे पीछे जो लड़की खड़ी है, वो काफी लकी है।” उसने लड़की के लिए ‘My baby’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया।

भगवान श्रीराम के ‘पोस्टर’ वाली गाड़ी पर पत्थरबाजी, मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने निकले थे कार्यकर्ता

अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए चंदा इकट्ठा करने का अभियान जारी है। तमाम संगठनों के कार्यकर्ता गाँवों के घर-घर जाकर मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग एकत्रित कर रहे हैं। इस दौरान चंदा इकट्ठा करने वालों पर अराजक तत्वों द्वारा पत्थरबाजी और हमले की कई ख़बर सामने आ चुकी हैं। ताज़ा मामला कर्नाटक के बेंगलुरु का है, जहाँ एक हिन्दू संगठन के कुछ कार्यकर्ताओं पर अभियान के दौरान हमला किया गया। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ घटना बेंगलुरु जिले के गुराप्पनापलया (Gurappanapalya) इलाके की है। शुक्रवार (29 जनवरी 2021) को दिन के लगभग 12:20 बजे हिन्दू संगठन और भाजपा के कार्यकर्ता चंदा इकट्ठा करने के लिए एक गाड़ी से निकले थे। गाड़ी पर श्रीराम का पोस्टर और संगठन के झंडे लगे हुए थे। जब गाड़ी पेट्रोल लेने के लिए रुकी तो कुछ लोगों ने उसे रोक कर हमला कर दिया। आरोपों के मुताबिक़ लगभग 4-5 लोगों ने पहले गाड़ी का रास्ता रोका। इसका विरोध किए जाने पर उन लोगों ने गाड़ी पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। 

घटना को देखते हुए स्थानीय लोगों ने इस मामले में दखल दिया और तब जाकर स्थिति सामान्य हुई। इस मामले पर एक मीडिया समूह से बात करते हुए दक्षिण बेंगलुरु भाजपा ईकाई के महासचिव वी सुदर्शन ने विस्तार से जानकारी दी। 

उन्होंने कहा, “हम पिछले 15 दिनों से श्रीराम मंदिर के लिए घर-घर जाकर चंदा इकट्ठा करने का अभियान चला रहे हैं। इस घटना में हमारे कार्यकर्ताओं को चोट आई है, हमने इस संबंध में मामला दर्ज कराया है। हमने पुलिस से कहा है अगर आरोपितों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार नहीं किया जाता है तो हम पुलिस स्टेशन पर धरना-प्रदर्शन करेंगे। हमने उसमें से कई आरोपितों की पहचान भी कराई है, हम उम्मीद करते हैं कि जल्द से जल्द उनकी गिरफ्तारी होगी।”      

पुलिस ने अभियान में शामिल कार्यकर्ताओं को धमकाने और उन पर हमला करने के आरोप में लगभग 40-50 अज्ञात लोगों पर एफ़आईआर दर्ज की है। एफ़आईआर में धमकाना, धार्मिक सौहार्द बिगाड़ना, गैरक़ानूनी तरीके से इकट्ठा होना और दंगे भड़काने का आरोप शामिल किया गया है। 

श्रीराम मंदिर का निर्माण लगभग 3.5 वर्ष में किया जाएगा और इसके निर्माण में लगभग 1100 करोड़ रुपए खर्च अनुमानित है। मुख्य मंदिर के निर्माण में लगभग 300 से 400 करोड़ रुपए का खर्च अनुमानित है। इसके लिए पूरे देश में आर्थिक सहयोग इकट्ठा करने का अभियान जारी है। यह पहली ऐसी घटना नहीं है जब श्रीराम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने वालों पर पत्थरबाजी हुई है। इसके पहले मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में चंदा इकट्ठा करने वाले कार्यकर्ताओं पर पत्थरबाजी की घटना हो चुकी है। आधे से अधिक मामलों में पत्थरबाजी करने वाले लोग ‘शांतिप्रिय मज़हब’ के थे।       

रूस के 1.4 लाख हिन्दुओं को प्रताड़ित कर रहा ईसाई एक्टिविस्ट, एक रूसी हिन्दू ने वीडियो बना माँगी मदद

आप में से काफी लोगों को रूस में हिन्दू समुदाय द्वारा सामना की जा रही परेशानियों के बारे में पता होगा, क्योंकि ऑपइंडिया ने इस मामले को बार-बार उठाया है। हमने इसी सिलसिले में गुरु श्री प्रकाश जी के सुपुत्र प्रसून प्रकाश से बातचीत भी की थी, जिन्होंने अलेक्जेंडर दोर्किन द्वारा हिन्दुओं को प्रताड़ित किए जाने के बारे में बताया था। इस लेख में भी हम उस पर बार करेंगे, लेकिन उससे पहले चीजों को संक्षेप में समझते हैं। रूस 14.4 करोड़ की जनसंख्या वाला एक विशाल देश है।

रूस में 1.4 लाख हिंदू हैं। आश्चर्यजनक यह है कि वहाँ सिर्फ 10000 ही भारतीय मूल के नागरिक हैं। यानी कि लगभग 1 लाख 30 हजार हिंदू वहाँ के यानी रूसी मूल के हैं। ये हमारे लिए काफी गर्व की बात है। आखिर वहाँ रह रहे हिन्दुओं में 92% रूसी ही जो हैं। ये हिन्दू धर्म के प्रति दुनिया की समझ को दर्शाता है। रूस का एक कट्टर और कुख्यात ईसाई अलेक्जेंडर दोर्किन लगातार हिन्दुओं एवं गुरु प्रकाश को निशाना बना रहा है।

वो पिछले 20 वर्षों से रूस के हिन्दुओं को परेशान करने में लगा हुआ है। उसने ही 2011 में पवित्र पुस्तक भगवद्गीता पर प्रतिबंध लगा दिया था। श्री प्रकाश जी रूस में क्लासिकल हिंदुत्व को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। उनके समर्थन में 2017 में दिल्ली स्थित रूसी दूतावास के सामने कई लोगों ने प्रदर्शन भी किया था। उनके और उनके परिवार को पिछले 6 वर्षों से परेशान किया जा रहा है। 2015 में इस तरह का पहला हमला हुआ था।

अलेक्जेंडर दोर्किन ने अफवाहों और झूठी खबरों के सहारे रूस के हिन्दुओं को परेशान करना शुरू किया है। वो उनके खिलाफ शिकायतें दर्ज करवाता है और झूठे आरोप लगाता है, जिससे वो हिन्दू धर्म को छोड़ने के लिए विवश हो जाएँ। इसी तरह के एक पीड़ित रूसी नागरिक हैं सर्गेई केवशिन, जो 2006 से ही एक हिन्दू श्रद्धालु हैं। उन्होंने हाल ही में दोर्किन द्वारा एक फोरम पर हिंदुत्व को लेकर लिखे गए आपत्तिजनक बयानों का खुलासा किया, जैसे –

  • सारे हिन्दू देवी-देवता शैतान हैं।
  • हिन्दुओं की ध्यान-कला सिर्फ एक सम्मोहन है।
  • शैतान के कानून को ‘कर्मा’ कहते हैं।
  • मीराबाई एक सांप्रदायिक महिला थीं।
  • भगवान को हिन्दू जिस रूप में देखते हैं, ये अशुभ है।
  • श्रीमद्भगवद्गीता किसी भी मामले में पवित्र नहीं है।

इसी तरह के और कई बयान भी उसने दिए हैं। इसके बाद सर्गेई ने अलेक्जेंडर दोर्किन के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज कराई हैं, जिनके आधार पर रूस के प्रशासन ने उसके खिलाफ जाँच भी बिठाई थी। 2020 में उसके खिलाफ जाँच हुई थी। अब भी कई मामलों में तहकीकात जारी है। दोर्किन जाँच व पूछताछ से न सिर्फ भाग रहा है, बल्कि सर्गेई के खिलाफ उसने एक झूठी शिकायत भी दर्ज करा दी है।

सर्गेई ने ऑपइंडिया को बताया कि ऐसा हिन्दू धर्म को बदनाम करने के लिए और रूसी प्रशासन को भटकाने के लिए किया जा रहा है, ताकि वो कार्रवाई से बच निकले। सर्गेई ने हाल ही में यूट्यूब पर एक वीडियो अपलोड कर के अंतरराष्ट्रीय हिन्दू समुदाय को इस अन्याय के खिलाफ उनका साथ देने की अपील की थी, खासकर भारत के नागरिकों को। अगर किसी भारतीय नागरिक के पास इससे जुड़े कोई सबूत या दस्तावेज हैं तो वो सीधे उन्हें भेज सकता है। उन्होंने वीडियो में कहा:

“मेरा जन्म मॉस्को में हुआ था और मैं रूस के 1.4 लाख हिन्दुओं में से एक हूँ। हिन्दू देवी-देवताओं को शैतान कहने वाले और हिन्दुओं को जंगली कहने वाले को आप क्या प्रतिक्रिया देंगे? अलेक्जेंडर दोर्किन हिन्दुओं को रूस छोड़ देने अथवा परिणाम भुगतने की धमकी दे रहा है। वो अपने लेक्चरों, इंटरव्यूज और लेखों के माध्यम से दो दशक से हिन्दू धर्म को बदनाम करने में लगा हुआ है। मुझे उम्मीद है कि रूस के हिंदुओं को और मुझे न्याय मिलेगा।”

रूस के प्रशासन ने सर्गेई को कहा है कि उन्हें अलेक्जेंडर दोर्किन के खिलाफ कार्रवाई के लिए कुछ और सबूत या दस्तावेज मुहैया कराने होंगे, जो उसके खिलाफ जाते हों। उन्होंने अपना ईमेल अड्रेस ‘[email protected]‘ बताते हुए हिंदुओं से कहा है कि अगर उनके पास कोई भी जानकारी है तो उन्हें प्रेषित करें। उन्होंने ‘नमस्ते’ और ‘जय श्री राम’ के साथ वीडियो का अंत करते हुए इस मामले में न्याय के लिए हिन्दू एकता की वकालत की।

इससे पहले प्रसून प्रकाश ने बताया था“लगभग चार साल पहले मेरा परिवार और हमारा आश्रम (श्री प्रकाश धाम) राष्ट्रवादी रूढ़िवादी ईसाई गुंडों (कुछ हद तक ईसाई भारतीय हिन्दू समूहों के ईसाई के समान, अगर ऐसा कहना सही है) का शिकार हो गया।” इस बात की पुष्टि के लिए उन्होंने उन लेखों का ज़िक्र किया, जिसमें इस घटना का उल्लेख किया गया था। यह लेख ‘न्यूज़वीक’ और ‘डेली कॉलर’ में छपे थे।

आध्यात्मिक गुरू श्री प्रकाश ने हिंदू धर्म की इस अवहेलना को जब चुनौती दी, तो अलेक्जेंडर दोर्किन ने उन्हें और उनके परिवार को ‘विदेशी मैल’ तक कहा। 1 नवंबर 2018 को कुछ रूसी असामाजिक तत्वों ने पुलिस के कपड़े पहन कर उनके आश्रम में अनाधिकृत छापेमारी भी की थी। उन लोगों के साथ वहाँ की पुलिस ने श्री प्रकाश को रूस छोड़ने का दबाव बनाया और कभी वापस न लौटने को कहा।

आर्थिक सर्वे में भी कोरोना से निपटने के योगी सरकार के प्रयासों का डंका, WHO भी कर चुका है तारीफ

सोमवार (1 फरवरी 2021) को मोदी सरकार आम बजट पेश करेगी। शुक्रवार यानी 29 जनवरी को आर्थिक सर्वे (Economic Survey 2020-2021) पेश किया गया था। इसमें उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की जमकर तारीफ की गई है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के बाद अब मोदी सरकार ने भी कोरोना संक्रमण का प्रसार रोकने के उत्तर प्रदेश के प्रयासों का लोहा माना है।

आर्थिक सर्वे में क्या कहा गया?

आर्थिक सर्वे में कहा गया, “उत्तर प्रदेश में स्वभाविक रूप से कोरोना वायरस (Coronavirus) के प्रसार की जितनी आशंका व्यक्त की जा रही थी, उससे बहुत कम मामले सामने आए हैं। 690 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर के घनत्व वाले प्रदेश की सरकार महामारी के प्रसार को प्रभावी तरीके से रोक लगाने में सफल रही है।”

आर्थिक सर्वेक्षण में वर्णित क्रॉस-कंट्री विश्लेषण में कहा गया है, “भारत कोविड -19 के प्रसार और घातक परिणाम दोनों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने में सक्षम है। अनुमान से 37.1 लाख कम मामले सामने आए। अमेरिका में अनुमानित मामलों से 62.5 लाख अधिक मामले आए।”

WHO भी कर चुका है तारीफ

भारत सरकार से पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी योगी सरकार की कोरोना वायरस प्रबंधन को लेकर तारीफ कर चुका है। WHO ने कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग तकनीक की न सिर्फ तारीफ की थी, बल्कि अन्य देशों को अपनाने की सलाह भी दी थी। डब्‍ल्‍यूएचओ ने उत्तर प्रदेश की कोविड मैनेजमेंट रणनीति को सराहते हुए कहा था कि योगी सरकार की रणनीति प्रदेश में कोविड की रोकथाम करने में कारगर रही।

वैक्सीनेशन के मामले में भी नंबर-1 यूपी

कोरोना वायरस से जंग की बात हो, तो हर छोर पर योगी सरकार अपना दम दिखा रही है। प्रबंधन के बाद अब सरकार वैक्सीनेशन (Coronavirus Vaccination) में भी नंबर वन है। जानकारी के मुताबिक, प्रदेश में अब तक 2 लाख 95 हजार लोगों का वैक्सीनेशन किया जा चुका है। पहले चरण में स्वास्थ्यकर्मियों के वैक्सीनेशन को 4 फरवरी तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद 5 फरवरी से अन्य फ्रंट लाइन वर्कर्स को वैक्सीन लगाई जाएगी।

उत्तर प्रदेश न केवल टीकाकरण में अग्रणी है, बल्कि इसने देश में सबसे अधिक टेस्ट करने का भी रिकॉर्ड बनाया है। राज्य में औसतन 1.5 लाख से अधिक COVID टेस्ट प्रतिदिन किए जा रहे हैं, जो देश में सबसे अधिक हैं।

गौरतलब है कि लॉकडाउन के दौरान जब लगभग हर राज्य की सरकारें राजस्व की समस्या पर हताश हो रही थीं उस समय यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार वाकई आपदा में अवसर खोजने के लिए प्रयासरत थी। उन्हीं कोशिशों का नतीजा है कि सरकार ने मात्र 8 माह में 26 लाख 62 हजार 960 लोगों को रोजगार मुहैया करवाने में सफलता पाई।

बिना पेड़ काटे ‘मोन शुगु’ कागज, खराब सब्जियों से बिजली: Mann Ki Baat में PM मोदी को तिरंगे की चिंता

किसान आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (जनवरी 31, 2021) को ‘मन की बात’ के जरिए लोगों को सम्बोधित किया। इस दौरान उन्होंने अपने कार्यक्रम के बारे में बताते हुए कहा कि हमारी छोटी-छोटी बातें, जो एक-दूसरे को कुछ सिखा जाए, जीवन के खट्टे-मीठे अनुभव जो, जी-भर के जीने की प्रेरणा बन जाएँ – बस यही तो है ‘मन की बात’। उन्होंने कहा कि जब वो ‘मन की बात’ करते हैं तो ऐसा लगता है, जैसे लोगों के बीच, उनके परिवार के सदस्य के रूप में उपस्थित हैं। उन्होंने लाल किला से लेकर चिली तक की बातें की।

उन्होंने पिछले दिनों संपन्न हुए त्योहारों का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले की ही तो बात लगती है, जब हम एक दूसरे को शुभकामनाएँ दे रहे थे, फिर हमने लोहड़ी मनाई, मकर संक्रांति मनाई, पोंगल, बिहु मनाया। देश के अलग-अलग हिस्सों में त्योहारों की धूम रही। 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिन को ‘पराक्रम दिवस’ के तौर पर मनाया गया और 26 जनवरी को ‘गणतंत्र दिवस’ की शानदार परेड भी सबने देखी।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत की सीरीज जीत पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इस महीने, क्रिकेट पिच से भी बहुत अच्छी खबर मिली, जहाँ हमारी क्रिकेट टीम ने शुरुआती दिक्कतों के बाद, शानदार वापसी करते हुए ऑस्ट्रेलिया में सीरीज जीती। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत और टीमवर्क प्रेरित करने वाला है। लेकिन, उन्होंने याद दिलाया कि इन सबके बीच दिल्ली में 26 जनवरी को तिरंगे का अपमान देख देश बहुत दुखी भी हुआ।

पीएम मोदी ने कहा कि हमें आने वाले समय को नई आशा और नवीनता से भरना है और हमने जिस तरह पिछले साल असाधारण संयम और साहस का परिचय दिया था, इस साल भी हमें कड़ी मेहनत करके अपने संकल्पों को सिद्ध करना है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे पद्म पुरस्कारों के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले छिपे हुए नायकों को सम्मान देने का जो क्रम शुरू हुआ था, वो इस वर्ष भी जारी रहा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस साल की शुरुआत के साथ ही कोरोना के खिलाफ हमारी लड़ाई को भी करीब-करीब एक साल पूरा हो गया है। जैसे कोरोना के खिलाफ भारत की लड़ाई एक उदाहरण बनी है, वैसे ही, अब, हमारा टीकाकरण अभियान भी दुनिया में एक मिसाल बन रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि हम सबसे बड़े टीकाकरण अभियान के साथ ही दुनिया में सबसे तेज गति से अपने नागरिकों का वैक्सीनेशन भी कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत के हर हिस्से में, हर शहर, कस्बे और गाँव में आजादी की लड़ाई पूरी ताकत के साथ लड़ी गई थी। भारत भूमि के हर कोने में ऐसे महान सपूतों और वीरांगनाओं ने जन्म लिया, जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया। उन्होंने मैं सभी देशवासियों को और खासकर के युवाओं को आह्वान किया कि वो देश के स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में लिखें। अपने इलाके में स्वतंत्रता संग्राम के दौर की वीरता की गाथाओं के बारे में किताबें लिखें। उन्होंने कहा:

“हैदराबाद के बोयिनपल्ली में एक स्थानीय सब्जी मंडी किस तरह अपने दायित्व को निभा रही है, ये पढ़ कर भी मुझे बहुत अच्छा लगा। बोयिनपल्ली की सब्जी मंडी ने तय किया है कि बचने वाली सब्जियों को ऐसे फेंका नहीं जाएगा, इससे बिजली बनाई जाएगी। पहाड़ी इलाके में सदियों से ‘मोन शुगु’ नाम का एक पेपर बनाया जाता है। इसके लिए पेड़ों को नहीं काटना पड़ता है। अमेरिका के सन फ्रांसिस्को से बेंगलुरु के लिए एक नॉन-स्टॉप फ्लाइट की कमान भारत की चार महिला पायलट्स ने संभाली। दस हजार किलोमीटर से भी ज्यादा लंबा सफ़र तय करके ये फ्लाइट सवा दो-सौ से अधिक यात्रियों को भारत लेकर आई।”

प्रधानमंत्री ने देश को बताया कि पिछले दिनों झाँसी में एक महीने तक चलने वाला ‘स्ट्रॉबेरी फेस्टिवल’ शुरू हुआ। कानून की छात्रा गुरलीन ने पहले अपने घर पर और फिर अपने खेत में स्ट्रॉबेरी की खेती का सफल प्रयोग कर ये विश्वास जगाया है कि झाँसी में भी ये हो सकता है। पश्चिम बंगाल के वेस्ट मिदनापुर स्थित ‘नया पिंगला’ गाँव के एक चित्रकार सरमुद्दीन की रामायण पर बनाई पेंटिंग 2 लाख रुपए में बिकी, जिस पर पीएम मोदी ने ख़ुशी जताई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को बड़ी जानकारी दी कि चिली की राजधानी सैंटिगो में 30 से ज्यादा योग विद्यालय हैं। चिली में न सिर्फ अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस भी बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है, बल्कि ‘हाउस ऑफ़ डेप्यूटीज’ में योग दिवस को लेकर बहुत ही गर्मजोशी भरा माहौल होता है। उन्होंने जनता को याद दिलाया कि इसी महीने 18 जनवरी से 17 फरवरी तक, हमारा देश ‘सड़क सुरक्षा माह’ यानी ‘Road Safety Month’ भी मना रहा है। सड़क हादसे आज हमारे देश में ही नहीं पूरी दुनिया में चिंता का विषय है।

पति को बनाया पुतला: सोते वक्त लेडीज कपड़े पहनाया, फोटो ली और सोशल मीडिया पर डाला

कोरोना महामारी से सब प्रभावित हुए हैं। घरों में बंद रहने के दौरान लेकिन लोग अलग से नज़र आने का तरीका भी खोज लिए हैं। ऐसी ही एक महिला हैं फिलिपीन्स की। उन्होंने कपड़े बेचने के लिए अपने सोते हुए पति को ‘मॉडल’ में तब्दील कर दिया। 

फ़िलिपीन्स की रहने वाली यह महिला कपड़ों का एक ऑनलाइन बुटीक चलाती हैं। नाम है – जोक्लिन मे जज़ारेनो कैडे (Jocelyn May Jazareno Caday)। इस महिला ने ये अनूठी तरकीब अपने बुटीक के कपड़े बेचने के लिए निकाली।

वायरल हुई पोस्ट वाली महिला के बुटीक का नाम जो ऑनलाइन शोप्पे (jo’s online shoppe) है। महामारी की वजह से उनके कपड़ों का व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ था। इसी बीच एक दिन उन्होने अपने पति को ‘आरामदायक’ स्थिति में सोते हुए देखा, तभी तय किया कि वह अपने पति को मैनीक्वीन (mannequin) में तब्दील करेंगी। 

इसके बाद महिला ने अपने पति को तमाम तरह के कपड़े पहनाए, जिसमें पैंट, स्कर्ट, टॉप, प्लाजो जैसे तमाम महिलाओं के कपड़े शामिल थे। ऐसा करते हुए महिला ने अपने पति की कई तस्वीरें भी ली और बाद में उन्हें अपने ऑनलाइन बुटीक के फेसबुक पेज पर साझा कर दिया

25 जनवरी 2021 को साझा की गई तस्वीरें फ़िलहाल सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। तस्वीरों के उस पोस्ट पर लगभग 11 हज़ार प्रतिक्रियाएँ, लगभग 6 हज़ार टिप्पणियाँ आई हैं और उसे 22 हज़ार लोगों ने साझा किया है। 

महिला ने एक तस्वीर के कैप्शन में लिखा भी है, “अगर मैनीक्वीन नहीं भी है तो कोई दिक्कत नहीं। ये है कपड़े बेचने का नया ट्रेंड।”