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वीडियो: खालिस्तान जिंदाबाद कहते हुए तिरंगा जलाया, किसानों के ‘आतंक’ से परेशान बीमार बुजुर्ग धरने पर बैठे

26 जनवरी को तथाकथित किसानों की ओर से हुए हिंसक ट्रैक्टर रैली प्रदर्शन की कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। जहाँ एक तरफ कल पुलिसकर्मियों के साथ किसानों की बर्बरता देखने को मिली। वहीं अब इंटरनेट पर एक बीमार बुजुर्ग के साथ तथाकथित प्रदर्शनकारियों द्वारा की गई बदसुलूकी की वीडियो भी सामने आई है, जिसको देखकर आपके भी रूह काँप जाएँगे।

रिपब्लिक के पत्रकार रवि मिश्रा ने आज (27 जनवरी, 2021) ट्विटर पर एक बुजुर्ग व्यक्ति की वीडियो शेयर की है। जो रो-रो कर किसानों के सामने अपनी व्यथा बता रहा है। हालाँकि, किसान उसकी बातों से पसीज नहीं रहे बल्कि उसके आँसू को एक प्रोपेगैंडा बता रहे है।

बता दें, यूजर ने बताया कि यह वीडियो यूपी गेट का है। जहाँ पर स्थानीय लोग किसान प्रदर्शन से परेशान हो गए हैं। वहीं एक बुजुर्ग अपनी गाड़ी छोड़ सड़क पर बैठ कर रोने को मजबूर हो गए। वीडियो में बुजुर्ग आदमी सड़क पर बैठे हैं और वहाँ से उठते हुए कहते हैं, “ये बोलते है आगे जाओगे तो मारूँगा। अरे क्या गुनाह किया है? हम यहाँ से निकले नहीं? ये हमारे रास्ते में आ गए।”

वहीं बूढ़े व्यक्ति की बात सुनकर प्रदर्शन में मौजूद एक व्यक्ति कहता है, “मत सुनो, सब ऐसे ही लोग है जो हमें बदनाम करने वाले है।” उसकी बातों को सुन बुजुर्ग व्यक्ति कहता है, “अरे बदनाम करने वालों मैं तो मरने वाला हूँ।”

इसके बाद बुजुर्ग व्यक्ति बताता है कि, आगे आने पर ये लोग बोलते है कि मारूँगा। भगा दिया इन्होंने। ये टोपीधारी था। मैं बीमार आदमी हूँ। मैं तो बस डॉक्टर को दिखाने जा रहा हूँ। हार्ट पेशेंट हूँ। मैं तो पंत हॉस्पिटल जा रहा था। ये लोग गाड़ी के सामने आ गए जैसे कोई झगड़ा करने आए हो। क्या कसूर है हमारा। हम निकल नहीं सकते? सड़क किसी के बाप की है?

वहीं सोशल मीडिया पर एक और वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ लोग भारतीय तिरंगे को जलाते हुए देखे जा सकते हैं। वीडियो में पीछे अमेरिका का झंडा है। उक्त व्यक्ति खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते हुए तिरंगे का अपमान कर रहे है। साथ ही पंजाब रेफरेंडम 2020 जिंदाबाद, दिल्ली बनेगा खालिस्तान नारे भी लगा रहे है।

हालाँकि यह दोनों वायरल वीडियो कब की है, यह फिलहाल नहीं पता लग पाया है।

गौरतलब है कि गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली में हुई हिंसा के बाद एक्शन मोड में आई दिल्ली पुलिस ने 37 नेताओं पर एफआईआर दर्ज की है। इनमें राकेश टिकैत, डाॅ दर्शनपाल, जोगिंदर सिंह, बूटा, बलवीर सिंह राजेवाल और राजेंद्र सिंह के नाम शामिल हैं। समयपुर बादली में दर्ज एफआईआर नंबर 39 में नर्मदा बचाओ आंदोलन की मेधा पाटकर और स्वराज इंडिया के योगेंद्र यादव का नाम भी शामिल है। इससे पहले पुलिस ने इस संबंध में डकैती, लूट आपराधिक साजिश की कई धाराओं में केस दर्ज किया था। पूरे मामले पर क्राइम ब्रांच द्वारा जाँच की जाएगी।

पुलिस का कहना है कि 300 से ज्यादा पुलिसकर्मी हिंसा में घायल हुए। अधिकांश को आईटीओ और लाल किले पर दंगों में चोट आई। अब पुलिस इन किसान नेताओं को पूछताछ के लिए समन भेजेगी। सुप्रीम कोर्ट में भी इस संबंध में याचिका दर्ज हुई है। इसमें हिंसा की जाँच और घटना के लिए जिम्मेदार प्रत्येक व्यक्ति व संगठन के ख़िलाफ़ कार्रवाई की माँग है।

किसानों नेताओं ने हिंसा भड़काई, धार्मिक झंडे लहराए और विश्वासघात किया: दिल्ली पुलिस

गणतंत्र दिवस के अवसर पर किसान आन्दोलनकारियों के लाल किले पर उपद्रव के बाद दिल्ली पुलिस आज शाम 8 बजे से प्रेस वार्ता कर रही है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इसकी सूचना देते हुए कहा कि इस दौरान पुलिस कल किसान रैली के दौरान हिंसा के संबंध में सभी सवालों का जवाब देगी।

शाम आठ बजे प्रेस वार्ता शुरू करते हुए दिल्ली पुलिस ने बताया कि दिल्ली के लोगों की सुरक्षा के हितों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया कि कुछ नियम और शर्तों के साथ यह किसानों को लिखित रूप में दिया गया था – रैली दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी, इसका नेतृत्व किसान को करना था नेताओं को अपने समूहों के साथ रहना होगा।

ट्रैक्टर रैली के दौरान मंगलवार को भड़की हिंसा को लेकर दिल्ली के पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव ने कहा कि शांतिपूर्ण रैली की शर्त थी, लेकिन किसानों ने तय रूट की अनदेखी की। उन्होंने कहा कि जो हिंसा हुई, वह नियम और कानूनों की अनदेखी करने के कारण हुई। उन्होंने प्रेस को सम्बोधित करते हुए कहा कि कई पुलिसकर्मी जख्मी हुए लेकिन उह्नोने संयम बरते रखा।

प्रमुख बातें –

  • किसानों ने अवरोध तोड़े और धार्मिक झंडे भी लहराए
  • हिंसा और पुरातत्व विभाग की सम्पत्ति पर फहराए गए झंडे को हम गम्भीरता से ले रहे हैं
  • हिंसा के वीडियो हमारे पास हैं, और उनके आधार पर एक्शन लिया जाएगा
  • 25 से ज्यादा आपराधिक केस दर्ज हो चुके हैं
  • कोई भी अपराधी छोड़ा नहीं जाएगा, जो भी किसान नेता हैं और वो दोषी पाए जाते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी
  • अगर हमारी प्रोसेज में कोई कमी होती तो हम ट्विटर पर मिले एकाउंट्स को पहचान नहीं पाते, लेकिन हमारे बीच समझौता हुआ था और उसके अनुसार चलना था, लेकिन समझौता तोड़ा गया
  • पुलिस ने संयम बरतकर परिस्थितियों को संभाला और जो लोग इसके पीछे थे उनके बारे में जानकारी मिल रही है।

प्रेस वार्ता से ठीक पहले दिल्ली पुलिस ने अपनी एफआईआर में आईटीओ में हुई हिंसा का क्रमवार विवरण पेश किया है। पुलिस ने बताया कि कैसे पुलिस के बार-बार लाउडस्पीकर पर कहने के बाद भी किसानों ने कानून व्यवस्था नहीं बनाए रखी और हिंसा करते हुए आगे बढ़ते रहे।

इस एफआईआर में उस एक्सीडेंट की भी बात है, ट्रैक्टर से तेज रफ्तार में आ रहे एक किसान की मौत हो गई थी। बताया जा रहा है कि ट्रैक्टर के हादसे के बाद पुलिसवालों ने ट्रैक्टर चालक को बचाने की भी कोशिश की लेकिन एक अन्य ट्रैैक्टर आया और उसने उन्हें ही कुचलने की कोशिश की जिसके चलते पुलिसवालों को वहाँ से भागना पड़ा।

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा को लेकर कई किसान नेताओं पर एफआईआर दर्ज की है। इसमें किसान नेता राकेश टिकैत, डॉ दर्शनपाल, जोगिंदर सिंह, बूटा सिंह, बलबीर सिंह राजेवाल और राजेंद्र सिंह का नाम भी शामिल है। ये सभी नेता किसान संगठनों से जुड़े हैं। इसी FIR में योगेंद्र यादव (Yogendra Yadav) का भी नाम शामिल है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि ट्रैक्टर परेड के दौरान इन नेताओं की ओर से नियमों का उल्लंघन किया गया।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत का एफआईआर में नाम शामिल किया गया है। एफआईआर में धारा 307 (हत्या के प्रयास), 147 (दंगा को लेकर सजा) और 353 (सरकारी नौकरशाह को ड्यूटी से रोकना या उन पर हमला करना) लगाई गई हैं।

घायल पुलिसकर्मियों ने बयान किया हिंसा का आँखों देखा मंजर: लाल किला, ITO, नांगलोई समेत कई जगहों पर थी तैनाती

गणतंत्र दिवस के मौके पर हुए किसान ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा में तीन सौ से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। ये पुलिस कर्मी लाल किला, आईटीओ और नांगलोई समेत बाकी जगह पर हुई हिंसा के दौरान घायल हुए। वहीं अब इनमें से घायल कुछ पुलिसकर्मियों ने कल हुई घटना का आँखों देखा मंजर बयान किया है।

हिंसा के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए उत्तरी दिल्ली के वजीराबाद थाने के एसएचओ पीसी यादव ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि कैसे भीड़ ने उन्हें घेरकर मारा और क्यों पुलिस इतना सब कुछ होने के बावजूद उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं कर पाई।

एसएचओ पीसी यादव ने बताया कि, “हम लाल किले में तैनात थे जब कई लोग वहाँ घुस गए। हमने उन्हें लाल किले की दीवार से हटाने की कोशिश की, लेकिन वे आक्रामक हो गए। हम किसानों के खिलाफ बल प्रयोग नहीं करना चाहते थे, इसलिए हमने यथासंभव संयम बरता।”

वहीं डीसीपी नॉर्थ, दिल्ली के ऑपरेटर संदीप ने बताया, “कई हिंसक लोग अचानक लाल किला पहुँच गए। नशे में धुत किसान या वे जो भी थे, उन्होंने हम पर अचानक तलवार, लाठी-डंडों और अन्य हथियारों से हमला कर दिया। स्थिति बिगड़ रही थी और हिंसक भीड़ को नियंत्रित करना हमारे लिए बहुत मुश्किल था।”

किसानों के हमले में घायल हुए मोहन गॉर्डन के SHO बलजीत सिंह ने आक्रामक प्रदर्शनकारियों के रवैए के बारे में बताया, “नजफगढ़ रोड पर हमने बैरिकेड से रास्ता रोका था। किसान प्रदर्शनकारी ट्रैक्टर लेकर नजफगढ़ की तरफ से आए। उन्होंने बैरिकेड तोड़ दिया और पथराव शुरू कर दिया। वे बहुत हिंसक थे और उनके पास हर तरह के हथियार थे। कई ने शराब भी पी थी।”

इसके अलावा कल हुए हिंसा में घायल जवानों की जानकारी देते हुए दिल्ली LNJP अस्पताल के डॉ सुरेश कुमार ने बताया कि, “कल 22 लोग हमारे अस्पताल में भर्ती हुए। जिसमें 12 पुलिसकर्मी थे, 2 लोग गंभीर रूप से घायल हैं बाकि प्राथमिक उपचार के बाद डिस्चार्ज किए गए। ट्रॉमा सेंटर में 62 पुलिसकर्मी और 2 प्रदर्शनकारी भर्ती थे। ज़्यादातर डिस्चार्ज हो गए, 2 पुलिसकर्मी अभी भी भर्ती हैं।”

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने कल हुए हिंसक हंगामे के बाद कई किसानों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक, “दिल्ली पुलिस की एफआईआर में (किसान ट्रैक्टर रैली के संबंध में एनओसी के उल्लंघन के लिए) किसान नेता दर्शन पाल, राजिंदर सिंह, बलबीर सिंह राजेवाल, बूटा सिंह बुर्जगिल और जोगिंदर सिंह उग्रा के नाम है। FIR में BKU के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का भी नाम है।” इसके साथ ही घटना की तफ्तीश के लिए दिल्ली पुलिस की एक टीम जाँच करने के लिए लाल किले पर पहुँची है।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली के लाल किले पर गणतंत्र दिवस के दिन किसान दंगाइयों ने खूब उत्पात मचाया था। न केवल तिरंगे का अपमान करते हुए उन्होंने वहाँ सिख झंडा किले से फहराया बल्कि अंदर काफी तोड़फोड़ भी की थी। वहीं आज घटना के सारे नुकसान की तस्वीरें भी सामने आ चुकी हैं। जिसमें किले के अंदर शीशे चकनाचूर पड़े हैं। काउंटर को पलट दिया गया। सारी चीजें तितर-बितर हैं। ये तस्वीर टिकट काउंटर, मेटल डिटेक्टर गेट की हैं। जहाँ टूटे शीशों के अलावा लाल किले में पुलिसकर्मियों की टोपियाँ भी पड़ी हैं।

मालूम हो कि किसान ट्रैक्टर रैली के बाद जहाँ लाल किला को काफी हानि पहुँची है, वहीं पूरे आयोजन का सबसे बुरा प्रभाव पुलिसकर्मियों पर पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक लगभग 109 से अधिक पुलिसकर्मी इस हिंसा में घायल हुए थे। दिल्ली पुलिस ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली के ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर आलोक कुमार ने कहा कि ट्रैक्टर रैली में पुलिस कर्मियों के साथ मारपीट करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।

बिहार में टेंपो में सवार 2-3 लोगों ने दिनदहाड़े बीजेपी प्रवक्ता को मारी दो गोली: स्थिति नाजुक

बिहार में बीजेपी प्रवक्ता को दिनदहाड़े गोली मार दी गई। खबर है कि मुंगेर जिले के जमालपुर कॉलेज के पास से बीजेपी के राज्य स्तरीय प्रवक्ता अजफर शम्शी (Azfar Shamshi) गुजर रहे थे। इसी दौरान उन्हें कुछ बदमाशों ने गोली मार दी। पुलिस ने मामले में कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य ललन प्रसाद सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और जमालपुर कॉलेज के लेक्चरर डॉ अजफर शम्शी को एक गोली उनकी कनपटी में लगी है, दूसरी पेट में। अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर कर दिया गया था। घटना की सूचना मिलते की एसपी मानवजीत सिंह ढिल्लो ने सदर अस्पताल पहुँचकर बीजेपी नेता का बयान दर्ज किया है।

न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए मुंगेर पुलिस अधीक्षक मानवजीत सिंह ढिल्लों ने कहा, “हमें सूचित किया गया था कि अजफर शम्शी को 2-3 लाेगों द्वारा गोली मार दी गई है जब वह अपने कक्ष में जा रहे थे। उनका इलाज चल रहा है। एसपी ने कहा उनका बयान दर्ज कर लिया गया है। कॉलेज के एक अन्य प्रोफेसर के साथ उनका विवाद था जिसे हमने गिरफ्तार किया है। उनसे पूछताछ की जाएगी।”

अजफर शम्शी के बेटे असद शम्सी ने बताया, “टेंपो पर सवार तीन अपराधियों ने घटना को अंजाम दिया। कॉलेज के बाहर अपराधियों ने उन्हें पीछे से गोली मारी, जोकि उनके सर में जाकर लगी। वहीं शम्शी का इलाज कर रहे डॉक्टर ने बताया कि इन्हें दो गोली लगी है एक सिर के पीछे तथा एक गोली पेट में लगी है, उनकी स्थिति काफी नाजुक है।”

बता दें, कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य ललन प्रसाद सिंह से प्रभार को लेकर डॉ शम्शी का विवाद चल रहा था। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद से इलाके में हड़कंप मच गया है।

अजफर शम्शी के ड्राइवर मोहम्मद मुन्ना ने बताया, “मैं प्रतिदिन की तरह सुबह 11 बजे अजफर को लेकर जमालपुर कॉलेज पहुँचा। कॉलेज गेट पर विद्यार्थियों की काफी भीड़ थी, इस वजह से शम्शी गेट के पास कार से उतर गए। वहीं गाड़ी मोड़ने के लिए कहा। तभी अचानक दो गोली चलने की आवाज सुनाई दी और भगदड़ मच गया।”

मोहम्मद मुन्ना ने बताया कि, जब आवाज सुनने के बाद उन्होंने पीछे देखा तो अजफर शम्शी जमीन पर खून से लतपथ गिरे पड़े थे। वहाँ मौजूद अन्य लोगों की मदद से उन्हें उनकी ही कार से सदर अस्पताल लाया गया। जहाँ उन्हें तुरंत भर्ती कराया गया।

गौरतलब है कि बीजेपी के राज्य स्तरीय प्रवक्ता अजफर शम्शी कॉलेज के प्रोफेसर के साथ ही आईटीसी मजदूर यूनियन के अध्यक्ष भी है।

महाराष्ट्र-कर्नाटक के बीच मराठी भाषी क्षेत्र घोषित हो केंद्र शासित प्रदेश: उद्धव ठाकरे

एक ओर जहाँ देश में खालिस्तान को लेकर बहस जारी है, तभी दूसरी ओर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने कर्नाटक में मराठी भाषी क्षेत्रों के विलय के विरोध जैसे अपने पुराने अजेंडे को पुनर्जीवित करने के प्रयासों को फिरसे हवा दे डाली है। दरअसल, शिवसेना बेलगाम क्षेत्र को कर्नाटक में शामिल करने के खिलाफ रही है और इसके लिए उसने मराठी को आधार बनाया है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बुधवार (जनवरी 27, 2021) को कहा कि जब तक कि सर्वोच्च न्यायालय इस मुद्दे पर अपना अंतिम फैसला नहीं दे देता, तब तक कर्नाटक की राज्य की सीमा पर मराठी भाषी लोगों के वर्चस्व वाले क्षेत्रों को केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया जाना चाहिए।

दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद पर एक पुस्तक के लोकार्पण पर बोलते हुए, उद्धव ठाकरे ने कहा कि हम सभी को कर्नाटक सरकार के अन्याय और अत्याचार का विरोध करने के लिए एक मंच पर आना चाहिए। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर मराठी बोलने वाले लोग कर्नाटक सरकार के खिलाफ आवाज उठाते हैं तो उनके खिलाफ झूठे केस दायर किए जाते हैं, जिसके खिलाफ हमें एकजुट होने की जरूरत है।

उल्लेखनीय है कि बेलगाम क्षेत्र कर्नाटक और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित है, जहाँ मराठी भाषी बहुसंख्यक रहते हैं। महाराष्ट्र कुछ क्षेत्रों पर अपना दावा करता है, जिनमें बेलगाम, करवार और निप्पनी शामिल हैं और ये कर्नाटक का हिस्सा हैं, इन क्षेत्रों में अधिकांश आबादी मराठी भाषी है। दोनों राज्यों के बीच विवाद का मामला कई वर्षों से उच्चतम न्यायालय के समक्ष लंबित है।

ठाकरे ने कहा, “जब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही है, तो कर्नाटक सरकार बेलगाम का नाम बदलकर उसे दूसरी राजधानी घोषित करती है, एक विधानमंडल भवन का निर्माण करती है और वहाँ एक विधायिका सत्र आयोजित करती है। क्या यह अदालत की अवमानना ​​नहीं है?”

मुख्यमंत्री ने कथित तौर पर स्वार्थी राजनीतिक हितों के लिए मराठी विषय को कमजोर करने के लिए महाराष्ट्र एकिकरण समिति (एमईएस) पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “हमें पिछले अनुभवों से सीखना होगा और जीतना होगा। कर्नाटक के कब्जे वाले मराठी-भाषी क्षेत्रों को महाराष्ट्र में शामिल किया जाएगा।”

कार्यक्रम के दौरान, उद्धव ठाकरे ने ‘महाराष्ट्र कर्नाटक सीमावाद: संघर्ष अनी संकल्प’ (महाराष्ट्र कर्नाटक सीमावाद: संघर्ष और समाधान) नाम की एक पुस्तक को विमोचन किया। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ओर के नेताओं साथ-साथ एनसीपी पार्टी प्रमुख शरद पवार, महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस प्रमुख बालासाहेब थोराट और विधान परिषद में विपक्षी नेता प्रवीण दारेकर भी मौजूद थे।

हिंदू लड़की ने माता-पिता पर लगाया जबरन ईसाई बनाने का आरोप: 9 लोग गिरफ्तार, 2 की तलाश जारी

मध्य प्रदेश के इंदौर से एक बेहद ही सनसनीखेज मामला सामने आ रहा है, जहाँ एक लड़की ने अपने ही माता-पिता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है कि वे उसका जबरन धर्मांतरण करवा रहे थे। हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार ने जबरन धर्मान्तरण के लिए एक नया अध्यादेश जारी किया है। पुलिस ने 25 वर्षीय युवती की शिकायत पर मामला दर्ज करते हुए उसके माता-पिता समेत 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस मामले की जानकारी एक पुलिस अधिकारी ने दी है।

इस मामले में आरोपितों की गिरफ्तारी से पहले बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने ईसाई समुदाय के एक केंद्र में कई लोगों का धर्म जबरन बदलने की कोशिश का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया था। भंवरकुआँ पुलिस थाने के प्रभारी संतोष कुमार दूधी के मुताबिक शालिनी कौशल (25) ने शिकायत दर्ज कराई है कि उनकी माँ रानी कौशल और पिता राकेश कौशल नानी के घर ले जाने का झाँसा देकर उन्हें ईसाई समुदाय के सत्प्रकाशन संचार केंद्र में चल रही प्रार्थना सभा में ले गए थे। यह केंद्र भंवरकुआँ पुलिस थाने के ठीक पीछे स्थित है।

इंदौर के पास स्थित गुजरखेड़ा गाँव से ताल्लुक रखने वाली युवती के हवाले से प्राथमिकी में कहा गया है, “वहाँ (सत्प्रकाशन संचार केंद्र) कुछ लड़कियाँ थीं जो मेरे हाथ-पैर खींचकर मेरे साथ मारपीट कर रही थीं। मुझे वहाँ एक हॉल में जबरन बैठाकर रखा गया था। बहुत सारे लोग मंच पर प्रभु यीशु के गाने बजा रहे थे। वे मुझे इन गानों पर नाचने के लिए बोल रहे थे। मैं हिंदू धर्म में जन्मी हूँ और इसी धर्म का पालन करती हूँ। प्रभु यीशु में मेरी कोई आस्था नहीं है, न ही मैं ईसाई धर्म अपनाना चाहती हूँ।”

लड़की का कहना है कि उसकी मम्मी और वहाँ (प्रार्थना सभा) ईसाई धर्म के आयोजकों द्वारा उसका जबरन धर्मांतरण कराया जा रहा था। थाना प्रभारी के मुताबिक युवती की शिकायत पर उसके माता-पिता और गणतंत्र दिवस पर आयोजित विवादास्पद प्रार्थना सभा में मौजूद नौ अन्य लोगों के खिलाफ मध्यप्रदेश धर्म स्वातंत्र्य अध्यादेश 2020 के संबद्ध प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि दो आरोपितों की तलाश जारी है।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के इंदौर के भंवरकुआँ थाने में सैंकड़ों लोगों का धर्म परिवर्तन कराया गया। बताया गया कि सेंट अर्नाल्ड रिलिजियस सेंटर (चर्च) में सैंकड़ों हिंदुओं को लालच देकर बुलाया गया और उसके बाद उनका धर्म-परिवर्तन करवाया जा रहा था। इस दौरान विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल संगठन के कार्यकर्ता मौके पर पहुँच गए और उन्हें रोकते हुए पुलिस को मामले की सूचना दी।

हिन्दू संगठनों का आरोप था कि यहाँ 150 लोगों को धर्म-परिवर्तन कराने के लिए इकट्ठा किया गया था। इनके अनुसार झाबुआ, नागदा, देवास सहित इंदौर के चंदन नगर क्षेत्र से गरीब परिवारों को यहाँ लाकर जबरन धर्म-परिवर्तन करवाया जा रहा था।

योगेन्द्र यादव, राकेश टिकैत सहित 37 किसान नेताओं पर FIR: गिरफ्तारी पर कोई बात नहीं

दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर आयोजित ट्रैक्टर रैली के नाम पर हुए अराजकता के खेल के बाद किसान नेताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। राजधानी में हुई हिंसा के बाद एक्शन मोड में आई दिल्ली पुलिस ने 37 नेताओं पर एफआईआर दर्ज की है। इनमें राकेश टिकैत, डाॅ दर्शनपाल, जोगिंदर सिंह, बूटा, बलवीर सिंह राजेवाल और राजेंद्र सिंह के नाम शामिल हैं। समयपुर बादली में दर्ज एफआईआर नंबर 39 में नर्मदा बचाओ आंदोलन की मेधा पाटकर और स्वराज इंडिया के योगेंद्र यादव का नाम भी शामिल है।

दिल्ली पुलिस ने अपने एफआईआर में आपराधिक षड़यंत्र, डकैती और घातक हथियारों के प्रयोग और हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराएँ लगाई हैं। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने टैक्टर रैली में हुई हिंसा मामले में 200 लोगों को हिरासत में लिया है। 

इन 37 किसान नेताओं पर एफआईआर

  • 1. डॉक्टर दर्शन पाल, बीकेयू क्रांतिकारी दर्शनपाल ग्रुप
  • 2. कुलवंत सिंह संधू, जम्हूरी किसान सभा पंजाब
  • 3. बूटा सिंह बुर्जगिल, भारतीय किसान सभा, धकोंडा
  • 4. निर्भय सिंह धुड़ीके, कीर्ति किसान यूनियन, धुड़ीके ग्रुप
  • 5. रुल्दू सिंह, पंजाब किसान यनियन, रुल्दू ग्रुप
  • 6. इंदरजीत सिंह, किसान संघर्ष कमेटी, कोट बुद्धा ग्रुप
  • 7. हरजिंदर सिंह टांडा, आजाद किसान संघर्ष कमेटी
  • 8. गुरबख्श सिंह, जय किसान आंदोलन
  • 9. सतनाम सिंह पन्नू, किसान मजदूर संघर्ष समिति, पिड्डी ग्रुप
  • 10. कंवलप्रीत सिंह पन्नू, किसान संघर्ष कमेटी पंजाब
  • 11. जोगिंदर सिंह उग्राहा, भारतीय किसान यूनियन उग्राहां
  • 12. सुरजीत सिंह फूल, भारतीय किसान यूनियन क्रांतिकारी
  • 13. जगजीत सिंह डालेवाल, भारतीय किसान यूनियन, सिद्धूपुर
  • 14. हरमीत सिंह कड़ियां, बीकेयू, कड़ियां
  • 15. बलबीर सिंह राजेवाल, भारतीय किसान यूनियन राजेवाल
  • 16. सतनाम सिंह साहनी, भारतीय किसान यूनियन, दोआबा
  • 17. बोघ सिंह मानसा, भारतीय किसान यूनियन मानसा
  • 18. बलविंदर सिंह औलख, माझा किसान कमेटी
  • 19. सतनाम सिंह बेहरू, इंडियन फार्मर एसोसिएशन
  • 20. बूटा सिंह शादीपुर, भारतीय किसान मंच
  • 21. बलदेव सिंह सिरसा, लोक भलाई इंसाफ वेलफेयर सोसायटी
  • 22. जगबीर सिंह जाड़ा, दोआबा किसान समिति
  • 23. मुकेश चंद्रा, दोआबा किसान संघर्ष कमेटी
  • 24. सुखपाल सिंह डफ्फर, गन्ना संघर्ष कमेटी
  • 25. हरपाल सिंह सांघा, आजाद किसान कमेटी दोआब
  • 26. कृपाल सिंह नाथूवाला, किसान बचाओ मोर्चा
  • 27. हरिंदर सिंह लाखोवाल, भारतीय किसान यूनियन लाखोवाल
  • 28. प्रेम सिंह भंगू, कुलहिंद किसन फेडरेशन
  • 29. गुरनाम सिंह चडूनी, भारतीय किसान यूनियन चडूनी
  • 30. राकेश टिकैट, भारतीय किसान यूनियन
  • 31. कविता कुमगुटी, महिला किसान अधिकार मंच
  • 32. रिषिपाल अंबावाटा, भारतीय किसान यूनियन अंबावाटा
  • 33. वीएम सिंह, ऑल इंडिया किसान संघर्ष कोऑर्डिनेशन कमेटी
  • 34. मेधा पाटेकर, नर्मदा बचाओ
  • 35. योगेंद्र यादव, स्वराज इंडिया
  • 36. अवीक साहा, जन किसान आंदोलन, स्वराज इंडिया
  • 37. प्रेम सिंह गहलोत, ऑल इंडिया किसान सभा

पुलिस का कहना है कि 300 से ज्यादा पुलिसकर्मी हिंसा में घायल हुए। अधिकांश को आईटीओ और लाल किले पर दंगों में चोट आई। अब पुलिस इन किसान नेताओं को पूछताछ के लिए समन भेजेगी। सुप्रीम कोर्ट में भी इस संबंध में याचिका दर्ज हुई है। इसमें हिंसा की जाँच और घटना के लिए जिम्मेदार प्रत्येक व्यक्ति व संगठन के ख़िलाफ़ कार्रवाई की माँग है।

बता दें कि हथियार लेकर नहीं चलना, निर्धारित मार्ग का पालन करना और ट्रॉलियों के बिना ट्रैक्टरों के साथ दिल्ली में प्रवेश करना… ये कुछ शर्तें थीं जिस पर सहमति किसान नेताओं और पुलिस के बीच बनी थी लेकिन मंगलवार (जनवरी 26, 2021) को ट्रैक्टर परेड में शामिल कई प्रदर्शनकारियों द्वारा इनका उल्लंघन किया गया। कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शनकारियों के मार्च में इस शर्त का भी उल्लंघन किया गया कि एक ट्रैक्टर पर पाँच से अधिक व्यक्ति सवार नहीं होंगे। यह ट्रैक्टर मार्च हिंसक हो गया और इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई स्थानों पर झड़प हुई।

किसान गाजीपुर बार्डर से आईटीओ की ओर निकले और लाल किला पहुँच गए। इन किसानों को पुलिस के साथ भिड़ते और पुलिसकर्मियों को लाठियों से मारते देखा गया। जब पुलिस ने आँसू गैस के गोले दागकर प्रदर्शनकारियों की भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की तो उन्होंने पथराव किया। बसों और पुलिस की गाड़ियों सहित कई वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया।

हरियाणा के ग्रामीणों ने किसान नेताओं को दिया हाईवे खाली करने का अल्टीमेटम, कहा- नहीं बर्दाश्त करेंगे तिरंगे का अपमान

गणतंत्र दिवस पर लाल किले में हुई हिंसा के बाद हरियाणा के रेवाड़ी में स्थानीय लोगों का गुस्सा किसान नेताओं पर फूट पड़ा। कहा जा रहा है कि डंगूरवाल गाँव में 15 ग्रामों के लोगों ने कल की घटना के बाद एक पंचायत की। इसके बाद किसान नेताओं को हाईवे खाली करने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्थानीय ग्रामीण बहुत ज्यादा गुस्से में है। उनका मत है कि आखिर किसान नेता हाईवे बंद करके क्यों बैठे हैं। इसके अलावा वह तिरंगे का अपमान किए जाने से भी नाराज़ है।

यहाँ बता दें कि जिन ग्रामों ने पंचायत की है वे दिल्ली-जयपुर हाईवे पर साहबी पुल के निकट स्थित है जहाँ आंदोलनकारी पिछले 2 माह से विरोध के नाम पर बैठे हुए हैं। पंचायत में शामिल ग्रामीणों ने कहा कि एक महीने से प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली-जयपुर हाईवे को बंधक बनाया हुआ है, जिस कारण आसपास के ग्रामीणों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। 

उनके अनुसार, हाईवे का ट्रैफिक गाँव से गुजर रहा है तथा गाँवों के लिंक रोड व पानी की पाइप लाइनें टूट चुकी हैं। वाहनों की टक्कर से बिजली के खंभे भी टूट गए हैं। ग्रामीण कहते हैं कि आंदोलन की आड़ में लाल किले पर तिरंगे का अपमान हुआ है, जो किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि ग्राीमीणों के इस तरह हाईवे पर पहुँचने के कारण पंचायत प्रतिनिधियों व प्रदर्शनकारियों के बीच बहस भी हुई जिससे वहाँ तनाव की स्थिति बन गई थी। मगर, बातचीत के दौरान वहाँ भारी पुलिस बल तैनात था इसलिए मामला शांत हो गया। ग्रामीणों ने कहा कि यदि 24 घंटे में हाईवे खाली नहीं किया गया तो फिर से पंचायत कर आगामी रणनीति तैयार की जाएगी।

दूसरी ओर हाईवे पर शाहजहाँपुर खेड़ा बॉर्डर पर हरियाणा पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिशन ने जय किसान आंदोलन के संयोजक योगेंद्र यादव का पुतला जलाकर लाल किला पर हुई घटना का विरोध किया। पेट्रोलियम एसोसिएशन ने भी हाईवे खोलने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है।

उन्होंने राजमार्ग न खोले जाने पर बुधवार को करनावास स्थित तेल टर्मिनल डिपो के सामने धरना शुरू करने की चेतावनी दी है। मालूम हो, करनावास में इंडियन आयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम व रिलायंस के तेल डिपो है। रेवाड़ी से प्रदेश के 9 जिलों के पेट्रोल पंपों पर तेल की आपूर्ति होती है।

इसके अलावा बुधवार को रेवाड़ी-रोहतक गंगायचा टोल प्लाजा पर 4 जनवरी से धरने पर बैठे किसानों को मौके पर पहुँचे भारी पुलिस बल ने खदेड़ दिया। प्रदर्शनकारी ने विरोध किया तो सरकार के आदेश बताकर टोल को खाली करवा दिया गया।

डर के मारे पड़ी फूट या समझदारी: दो ‘किसान’ संगठन हुए आंदोलन से अलग

गणतंत्र दिवस पर हुए उपद्रव के बाद अब केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे प्रदर्शन से अब दो किसान संगठनों ने अपना नाम वापस ले लिया है। आन्दोलन से खुद को अलग करने वालों में पहला नाम किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीएम सिंह का है, और दूसरा भारतीय किसान यूनियन का भानु गुट का!

वीएम सिंह ने किसान नेता राकेश टिकैत पर आरोप लगाते हुए कहा कि टिकैत अलग रास्ते से जाना चाहते थे। आन्दोलन से अपना नाम वापस लेते हुए कहा कि जिन लोगों ने भड़काया उन पर सख्त कार्रवाई हो। वीएम सिंह ने साफ किया कि आंदोलन खत्म करने का फैसला राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ का है न की ऑल इंडिया किसान संघर्ष कोऑर्डिनेशन कमेटी (AIKSCC) का।

वीएम सिंह ने कहा, “हिंदुस्तान का झंडा, गरिमा, मर्यादा सबकी है। उस मर्यादा को अगर भंग किया है, भंग करने वाले गलत हैं और जिन्होंने भंग करने दिया वो भी गलत हैं। आईटीओ में एक साथी शहीद भी हो गया। जो लेकर गया या जिसने उकसाया उसके खिलाफ पूरी कार्रवाई होनी चाहिए।”

वीएम सिंह ने कहा कि किसान यूनियन के राकेश टिकैत केंद्र के साथ मीटिंग करने गए थे, उन्होंने बैठक में गन्ना किसानों के मुद्दों पर बात क्यों नहीं की? उन्होंने कहा कि टिकैत ने क्या बात की पता नहीं और जब हम सिर्फ उन्हें सपोर्ट देते रहे तो वहाँ कोई नेता बनता रहा।

दूसरी ओर, भारतीय किसान यूनियन का भानु गुट भी किसान आंदोलन से अलग हो गया है। संगठन के मुखिया भानु प्रताप सिंह ने कहा कि जो आरोपित हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई हो। उन्होंने चिल्ला बॉर्डर से धरना खत्म करने का एलान किया है। भानु प्रताप सिंह ने कहा कि कल दिल्ली में जो कुछ भी हुआ उससे वो बेहद आहत हैं और 58 दिनों के विरोध प्रदर्शन को समाप्त कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का आंदोलन पिछले 63 दिनों से जारी है।

प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार वैसे भी डेढ़ साल तक के लिए कानून लागू नहीं करने वाली और माननीय प्रधानमंत्री उन्हें बातचीत का मौका देंगे लेकिन फिलहाल वो अपना नाम आन्दोलन से वापस ले रहे हैं क्योंकि कुछ लोगों ने माहौल गंदा कर दिया है।

जिस मृत किसान लेकर राजदीप ने फैलाया झूठ, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई सामने

26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर परेड में ट्रैक्टर दुर्घटना में जिस ‘किसान’ की मौत हुई उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई है। बरेली ADG अविनाश चंद्र ने बताया, “कल रात को मृत किसान के शव का पोस्टमार्टम हुआ जिसमें गोली लगने की पुष्टि नहीं हुई। ट्रैक्टर पलटने से उनको चोट लगी, जिससे उनकी मौत हुई।”

दरअसल, आईटीओ पर पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ते समय नवनीत का ट्रैक्टर पलट गया था। परिवार वाले पुलिस की गोली से मौत को कारण बता रहे हैं। मगर अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आ गया है और इसकी पुष्टि हो गई है कि किसान की मौत गोली लगने से नहीं बल्कि ट्रैक्टर पलटने से हुई है।

26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली में किसान ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा ने देशवासियों के मन में एक गहरा सवाल छोड़ दिया। जहाँ सोशल मीडिया पर प्रदर्शनकारियों को लोग तरह-तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं तो वहीं किसान संगठन भी इन्हें अपने लोग मानने से इनकार कर रहे हैं। 

इस दौरान दिल्ली के आईटीओ में पुलिस और प्रदर्शनकारी किसानों के बीच हुई झड़प में ट्रैक्टर पलटने से यूपी के रामपुर के रहने वाले युवक की मौत हो गई। जो कुछ महीने पहले ही गाँव लौटा था। परिजनों का आरोप है कि युवक की मौत पुलिस की गोली लगने से हुई है तो वहीं प्रशासन ने पोस्टमार्टम का हवाला देते हुए इसे हादसा बताया है।

परिजनों और प्रदर्शनकारी किसानों का आरोप था कि नवनीत की मौत पुलिस की गोली लगने से हुई है। वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि नवनीत की मौत हेड इंजरी के कारण हुई है। उसके सिर में कोई बुलेट नहीं मिला है। मौत का कारण हादसा है। गोली लगने से मौत नहीं हुई है।

गौरतलब है कि इसे लेकर समाचार चैनल ‘इंडिया टुडे’ के पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने फेक न्यूज़ फैलाया और पोल खुलने पर अपना ट्वीट चुपके से डिलीट भी कर दिया। राजदीप सरदेसाई ने तिरंगे में लिपटी मृतक की लाश की तस्वीर अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर करते हुए लिखा कि इसकी मौत पुलिस की गोली से हुई है। राजदीप ने ट्विटर पर लिखा, “पुलिस फायरिंग में आईटीओ पर 45 साल के नवनीत की मौत हो गई है। किसानों ने मुझे बताया कि उसका ‘बलिदान’ व्यर्थ नहीं जाएगा।”