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जिस मृत किसान लेकर राजदीप ने फैलाया झूठ, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई सामने

26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर परेड में ट्रैक्टर दुर्घटना में जिस ‘किसान’ की मौत हुई उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई है। बरेली ADG अविनाश चंद्र ने बताया, “कल रात को मृत किसान के शव का पोस्टमार्टम हुआ जिसमें गोली लगने की पुष्टि नहीं हुई। ट्रैक्टर पलटने से उनको चोट लगी, जिससे उनकी मौत हुई।”

दरअसल, आईटीओ पर पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ते समय नवनीत का ट्रैक्टर पलट गया था। परिवार वाले पुलिस की गोली से मौत को कारण बता रहे हैं। मगर अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आ गया है और इसकी पुष्टि हो गई है कि किसान की मौत गोली लगने से नहीं बल्कि ट्रैक्टर पलटने से हुई है।

26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली में किसान ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा ने देशवासियों के मन में एक गहरा सवाल छोड़ दिया। जहाँ सोशल मीडिया पर प्रदर्शनकारियों को लोग तरह-तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं तो वहीं किसान संगठन भी इन्हें अपने लोग मानने से इनकार कर रहे हैं। 

इस दौरान दिल्ली के आईटीओ में पुलिस और प्रदर्शनकारी किसानों के बीच हुई झड़प में ट्रैक्टर पलटने से यूपी के रामपुर के रहने वाले युवक की मौत हो गई। जो कुछ महीने पहले ही गाँव लौटा था। परिजनों का आरोप है कि युवक की मौत पुलिस की गोली लगने से हुई है तो वहीं प्रशासन ने पोस्टमार्टम का हवाला देते हुए इसे हादसा बताया है।

परिजनों और प्रदर्शनकारी किसानों का आरोप था कि नवनीत की मौत पुलिस की गोली लगने से हुई है। वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि नवनीत की मौत हेड इंजरी के कारण हुई है। उसके सिर में कोई बुलेट नहीं मिला है। मौत का कारण हादसा है। गोली लगने से मौत नहीं हुई है।

गौरतलब है कि इसे लेकर समाचार चैनल ‘इंडिया टुडे’ के पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने फेक न्यूज़ फैलाया और पोल खुलने पर अपना ट्वीट चुपके से डिलीट भी कर दिया। राजदीप सरदेसाई ने तिरंगे में लिपटी मृतक की लाश की तस्वीर अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर करते हुए लिखा कि इसकी मौत पुलिस की गोली से हुई है। राजदीप ने ट्विटर पर लिखा, “पुलिस फायरिंग में आईटीओ पर 45 साल के नवनीत की मौत हो गई है। किसानों ने मुझे बताया कि उसका ‘बलिदान’ व्यर्थ नहीं जाएगा।” 

योगेंद्र यादव और राकेश टिकैत का नाम FIR में: पुलिस ने कहा – ‘अच्छे से सत्यापन के बाद कर रहे गिरफ्तारी’

गणतंत्र दिवस पर हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने बुधवार (जनवरी 27, 2020) को करीब 200 प्रदर्शकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में लिया। मामले की बाबत दर्ज की गई 22 एफआईआर में पुलिस ने कम से कम 10 ऐसे किसान नेताओं का नाम जोड़ा है, जो लगातार प्रदर्शन का चेहरा बने हुए थे। इनमें योगेंद्र यादव और राकेश टिकैत का भी नाम शामिल है।

समाचार एजेंसी ANI के अनुसार दिल्ली पुलिस की एफआईआर में किसान ट्रैक्टर रैली के संबंध में जारी एनओसी के उल्लंघन के लिए किसान नेताओं दर्शन पाल, राजिंदर सिंह, बलबीर सिंह राजेवाल, बूटा सिंह बुर्जिल और जोगिंदर सिंह उग्राहाँ के नामों का जिक्र है।

पुलिसा का कहना है कि 300 से ज्यादा पुलिसकर्मी हिंसा में घायल हुए। अधिकांश को आईटीओ और लाल किले पर दंगों में चोट आई। अब पुलिस इन किसान नेताओं को पूछताछ के लिए समन भेजेगी। सुप्रीम कोर्ट में भी इस संबंध में याचिका दर्ज हुई है। इसमें हिंसा की जाँच और घटना के लिए जिम्मेदार प्रत्येक व्यक्ति व संगठन के ख़िलाफ़ कार्रवाई की माँग है।

जानकारी के अनुसार, लाल किले पर मचे हुड़दंग के बाद राष्ट्रीय राजधानी की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। खासकर लाल किला और किसान आंदोलन साइट पर अतिरिक्त पैरामिलिट्री फोर्स तैनात हुई है।

वरिष्ठ पुलिस ने किसान नेताओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जानकारी देते हुए कहा, “हम पहले ही 200 प्रदर्शनकारियों को, दंगे करने, सार्वजनिक संपत्तियों के नुकसान पहुँचानेऔर पुलिस कर्मियों पर हमला करने के लिए हिरासत में ले चुके हैं।”

पुलिस ने कहा, “हम अच्छे से सत्यापन करने के बाद गिरफ्तारी कर रहे हैं। हम लाल किला, आईटीओ, नांगलोई और अन्य क्षेत्रों में सीसीटीवी भी देख रहे हैं, जहाँ हिंसा भड़की थी।” पुलिस ने दिल्ली वेस्टर्न ज़ोन में 93 लोगों को गिरफ्तार भी किया है।

लाल किले पर हुई हिंसा के संबंध में पुलिस ने आरोपितों के विरुद्ध IPC की धारा 395 (डकैती), 397 (लूट या डकैती, मारने या चोट पहुँचाने की कोशिश), 120बी (आपराधिक साजिश की सजा) और अन्य धाराओं के तहत FIR दर्ज की है। 

यहाँ बता दें कि केंद्र सरकार के साथ 11 दौर की बैठक के बावजूद अपनी जिद पर अड़े रहने वाले किसानों ने कल दिल्ली में जमकर उत्पात मचाया था। इस दौरान कई संख्या में पुलिस वाले घायल हुए थे। एक प्रदर्शनकारी की तो अपने ही ट्रैक्टर के पलट जाने से मौत भी हुई। वही बड़ी संख्या में सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया गया।

‘धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला स्क्रिप्ट नहीं लिखो’ – TANDAV वालों की होगी गिरफ्तारी, रोक से SC का इनकार!

वेब सीरीज ‘तांडव’ के निर्माताओं को बुधवार (जनवरी 27, 2021) को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिल पाई है। सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि इस राहत के लिए हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्क्रिप्ट नहीं लिखनी चाहिए, जिससे भावनाएँ आहत हों। उन्होंने कहा, “आप धार्मिक भावनाओं को आहत नहीं कर सकते।” 

कोर्ट ने यह भी कहा है कि संविधान में दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता असीमित नहीं है। वहीं वेब सीरीज तांडव के निर्माता, लेखक और अभिनेता के खिलाफ देश भर में दर्ज मामलों को आपस में जोड़ने पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया।

मामले पर अगली सुनवाई 4 हफ्ते बाद होगी। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को अमेजन प्राइम की तांडव वेब सीरीज के अभिनेताओं और निमार्ताओं के खिलाफ एफआईआर पर रोक की माँग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता निरपेक्ष नहीं है।

याचिकाकर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ वकील फली एस नरीमन, मुकुल रोहतगी और सिद्धार्थ लूथरा ने तर्क रखते हुए कोर्ट के समक्ष अर्णब गोस्वामी के केस का उदाहरण दिया। लूथरा ने कोर्ट से कहा कि सीरीज के डायरेक्टर का शोषण किया जा रहा है और क्या इस तरह देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा होगी। इसके जवाब में बेंच ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता असीमित नहीं है और कुछ मामलों में इसे प्रतिबंधित भी किया जा सकता है।

फली एस नरीमन ने अपना तर्क रखते हुए कहा कि डायरेक्टर ने बिना शर्त लिखित माफी माँगी है और विवादित दृश्यों को हटा दिया है, उसके बावजूद 6 राज्यों में उनके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज की गई हैं। इसके जवाब में जस्टिस भूषण ने कहा, “अगर आप एफआईआर को खारिज करना चाहते हैं तो राज्यों के हाई कोर्ट क्यों नहीं जाते हैं।”

दरअसल, सीरीज के निर्माता हिमांशु मेहरा, अभिनेता मोहम्मद जीशान अयूब और एमेजॉन प्राइम वीडियो इंडिया की हेड अपर्णा पुरोहित ने उनके खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट आज उनकी इस याचिका पर ही सुनवाई हुई।

तांडव की टीम ने जो याचिका दायर की थी, उसमें कहा गया था कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में जो एफआईआर दर्ज हुईं हैं, उन्हें रद्द किया जाए। बता दें कि लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली में वेब सीरीज ‘तांडव के निर्माता-निर्देशक, लेखक और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जिसके बाद यूपी पुलिस ने एक्शन लिया। यूपी पुलिस मामले की जाँच के लिए मुंबई पहुँची थी और निर्देशक का बयान दर्ज किया था।

दर्शकों की भावना को ठेस पहुँची

सीरीज को लेकर आरोप लगे हैं कि फिल्म में कुछ ऐसे सीन दिखाए गए हैं, जिससे दर्शकों की भावना को ठेस पहुँची है। वहीं मध्य प्रदेश पुलिस ने एमेजॉन प्राइम वेब सीरीज ‘तांडव’ के निर्माताओं के खिलाफ जबलपुर और ग्वालियर में दो प्राथमिकी दर्ज की हैं।

इन दोनों एफआईआर को भी सीरीज की टीम ने रद्द करने की माँग अपनी याचिका में की है। ‘तांडव’ के निर्देशक द्वारा माफी माँगने के बावजूद भी इस पर मचा बवाल कम नहीं हुआ था। लोगों ने सीरीज को बैन करने तक की माँग की है। सीरीज को लेकर लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला। 

तांडव का क्यों विरोध?

दरअसल, सीरीज में मोहम्मद जीशान अयूब को भगवान श‍िव के रूप में एक नाटक करते हुए दिखाया गया है। यह सीन एक कॉलेज के कैंपस में थिएटर फेस्टिव के तौर पर फिल्माया गया है। जीशान का सीरीज में शिवा नामक युवक का किरदार है।

थिएटर फेस्टिव में एक एक्टर कहता है, “भोलेनाथ प्रभु ईश्वर, ये राम जी के फॉलोअर्स दिन-पर-दिन सोशल मीड‍िया पर बढ़ते ही जा रहे हैं। लगता है हमें भी कोई नई सोशल मीड‍िया स्ट्रैटजी बना लेनी चाहिए।” इस पर शिव कहता है, “क्या करूँ, नई फोटो लगाऊँ।”

एक्टर कहता है, “भोलेनाथ, आप बहुत ही भोले हैं, कुछ नया कीज‍िए बल्‍क‍ि कुछ नया ट्वीट कीज‍िए, कुछ सेंसेशनल, कोई भड़कता हुआ शोला, जैसे क‍ि कैंपस के सारे विद्यार्थी देशद्रोही हो गए, आजादी-आजादी के नारे लगा रहे हैं।” इसके बाद शिव कहता है, “आजादी…व्हाट द …। (बीप) जब मैं सोने गया था तब तक तो आजादी कूल चीज हुआ करती थी। अब बुरी हो गई क्या। फिर स्टूडेंट्स की ओर देखते हुए पूछते हैं, “हाँ भई किस चीज से आजादी चाहिए तुम लोगों को।”

Video: ‘किसान’ नेता स्वतंत्र क्यों घूम रहे हैं? एक भी अरेस्ट क्यों नहीं?

सिंघु बॉर्डर पर किसान क्यों हैं अभी भी? एक भी अरेस्ट क्यों नहीं? मीटिंग तो एक रूटीन प्रक्रिया है, लेकिन असामान्य परिस्थिति में रूटीन से बाहर क्यों नहीं है सरकार? टिकैत, योगेन्द्र यादव समेत वो चालीस किसान नेता क्यों नहीं हैं कस्टडी में? सरकार जवाबदेही तक क्यों नहीं तय कर पाई है?

राष्ट्रवाद लाल किला देख कर चिंतित होना है: भाजपा सबसे बेहतर विकल्प है, उसकी अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक विवशताएँ हैं लेकिन हम लगातार चल रहे उदाहरणों के होने के बाद भी सरकार की असफलता को मास्टरस्ट्रोक नहीं कह सकते।

सरकार ने सिख सुप्रीमेसिज्म को अपीज करने का खूब प्रयास किया। बजाय इसके कि पंजाब में 38% हिन्दू हैं और ये हमेशा किसी की बी टीम बन कर खेलते रहे। पंजाब में हिन्दुओं की स्थिति पर भी सोचता हूँ, लेकिन इन्हें किसान कह कर बातचीत के लिए आमंत्रित करने का सिलसिला तो बंद होना चाहिए।

दीप सिद्धू अचानक से दोबारा भाजपाई हो गया। बाकी बीस हजार उसके क्लोन थे? नीरव मोदी की तस्वीर दिखा कर भी यही कहा गया था। इस आतंकी घटना को एक व्यक्ति के फेक न्यूज से नहीं बचा सकते, ‘अराजक तत्व घुस आए’ कहना पुरानी दलीलें हैं जो नहीं चलेंगी।

बात आपके बातों के साख की है क्योंकि जो आपको वोट देते हैं वो आपसे पूछ रहे हैं कि कहाँ है छप्पन इंच: वो अनभिज्ञ हैं आपकी ऊपर बताई गई विवशताओं से लेकिन उन्हें सांकेतिक तौर पर भी एक्शन ले कर कौन समझाएगा? ये तो सरकार का ही कार्य है, हम तो सूचनाएँ दे सकते हैं।

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पत्नी दूसरे के साथ भागी तो बन गया ‘सीरियल किलर’: 18 महिलाओं को बेरहमी से उतारा मौत के घाट

हैदराबाद में टास्क फोर्स पुलिस ने एक सीरियल किलर को गिरफ्तार किया है। इसकी पहचान मैना रामुलू के रूप में हुई है। यह सीरियल किलर अब तक 18 महिलाओं के साथ सेक्स करने के बाद उनकी हत्या कर चुका है। आरोपित शराब के नशे में हत्याएँ करता था। दो महिलाओं के हत्या के आरोप में गिरफ्तार किए गए आरोपित ने पकड़े जाने के बाद 16 और वारदातें कुबूल कीं।

आरोपित पत्थर काटने का काम करता था। पुलिस की टास्क फोर्स ने उसे 21 आपराधिक मामलों में पकड़ा था। इसमें से 16 हत्या के मामले थे और बाकी प्रॉपर्टी से संबंधित अपराध। साथ ही इससे पहले वह एक बार पुलिस की कस्टडी से भी भाग चुका है।

पुलिस के अनुसार 21 साल की उम्र में उसकी शादी हो गई थी। लेकिन, उसकी पत्नी किसी और के साथ भाग गई। इसके बाद से ही महिलाओं के प्रति उसके मन में एक घृणा भर गई थी। फिर, सन 2003 से ही उसने आपराधिक गतिविधियाँ शुरू कर दीं।

अकेली महिलाओं को वह पकड़ता था और शारीरिक संबंध बनाने के बदले उन्हें पैसे ऑफर करता था। उन्हें ले जाकर वह शराब पीता था और फिर महिला की हत्या कर देता था। इसके बाद वह महिलाओं का कीमती सामान आदि लेकर भाग जाता था। पुलिस काफी दिनों से उसकी तलाश कर रही थी।

बता दें कि 30 दिसंबर, 2020 को घाटकेसर के अंकुशपुर में वेंकटगिरि की 50 वर्षीय महिला वेंकटगम्मा की हत्या कर दी गई थी। नॉर्थ जोन टास्क फोर्स की पुलिस टीम ने इस हत्या के मामले में बोरबंडा के 45 वर्षीय रामुलू को गिरफ्तार किया था। उसके ऊपर मूलगुण के बालगु में 35 वर्षीय अज्ञात महिला की हत्या का भी आरोप है, जिसकी लाश 10 दिसंबर, 2020 को सिद्दीपेट में मिली थी।

इस तरह की दो महिलाओं की हत्या

रामुलू ने वेंकटम्मा को शराब खरीदने के बहाने यूसुफगुडा ताड़ी परिसर से उठाया। वह अंकुशपुर, घाटकेसर में एक अलग जगह पर उसे ले गया और शराब पीने के बाद बोल्डर से टक्कर मारकर उसकी हत्या कर दी। इसी तरह से, वह दूसरे शिकार को बालानगर ताड़ी परिसर में ले गया और उसे जाप्ता सिंगापल्ली गाँव, मुलुगु, सिद्दीपेट में सुनसान जगह ले गया। कमिश्नर ने कहा कि पीड़िता अत्यधिक नशे में थी, रामुलू ने उसकी साड़ी का इस्तेमाल कर उसके चेहरे को जला दिया गया और उसके चाँदी के आभूषण लेकर फरार हो गया। शव की पहचान उसके शरीर के साथ बरामद की गई सेल फोन के इस्तेमाल से वेंकटम्मा के रूप में हुई। 

पुलिस ने आसपास की जिला पुलिस और राज्य पुलिस से संपर्क किया है। वहाँ इस तरह की हत्याओं के जो भी मामले थे उनकी जाँच की जा सकती है। फिरहाल आरोपित से पूछताछ हो रही है।

‘150+ लोगों से हिन्दू धर्म छुड़वा ईसाई बनाया जा रहा था’ – इंदौर में VHP और बजरंग दल का दखल, 11 पर FIR

मध्य प्रदेश के इंदौर के भंवरकुआँ थाने में सैंकड़ों लोगों का धर्म परिवर्तन कराने का मामला सामने आया है। खबर है कि सेंट अर्नाल्ड रिलिजियस सेंटर (चर्च) में सैंकड़ों हिंदुओं को लालच देकर बुलाया गया और उसके बाद उनका धर्म-परिवर्तन करवाया जा रहा था। इस दौरान विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल संगठन के कार्यकर्ता मौके पर पहुँच गए और उन्हें रोकते हुए पुलिस को मामले की सूचना दी।

रिपोर्ट के अनुसार, मामला भंवरकुआँ थाना क्षेत्र के इंद्रपुरी का है। यहाँ सत्य प्रकाशन संचार केंद्र में लगभग 150 से अधिक लोगों को हिन्दू धर्म छोड़ कर ईसाई धर्म अपनाने के लिए बरगलाया जा रहा था। इसकी सूचना पाकर हिंदू संगठनों के लोगों ने मौके पर पहुँच कर जम कर प्रदर्शन किया।

दरअसल, हिन्दू संगठनों का आरोप है कि यहाँ 150 लोगों को धर्म-परिवर्तन कराने के लिए इकट्ठा किया गया था। इनके अनुसार झाबुआ, नागदा, देवास सहित इंदौर के चंदन नगर क्षेत्र से गरीब परिवारों को यहाँ लाकर जबरन धर्म-परिवर्तन करवाया जा रहा था।

आरोप लगे संस्था के फादर जोमोन का कहना है कि यह कम्युनिकेशन सेंटर है और धर्मांतरण से उनका कोई लेना देना नहीं है। उनके अनुसार वहाँ दो हॉल हैं, जहाँ प्रार्थना की जाती है। और वो इसे सार्वजनिक कार्य के लिए भी उपलब्ध करवाते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जो भी ग्रुप वहाँ आया, उसने क्या किया, उनको जानकारी नहीं। हंगामा होने के बाद वो देखने आए।

जब पूरे मामले की सूचना पुलिस को लगी तो मौके पर पहुँच कर हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं को शांत किया और उचित कार्रवाई का आश्वासन देकर उन्हें रवाना किया। कथित तौर पर भंवरकुआँ पुलिस ने मौके पर पहुँचकर 11 से अधिक लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इसमें से 9 लोगों को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है। पुलिस पूरे मामले की तहकीकात में जुटी है।

धर्म-परिवर्तन को लेकर पीड़ितों ने कहा कि वो अपनी मर्जी से आए थे। बताया गया कि किसी भी प्रकार की समस्या वहाँ ठीक हो जाती है। एक महिला ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “प्रवचन करने से सारे बिगड़े काम बन जाते हैं, जो भी आएगा परमेश्वर के करीब… वह ठीक होकर जाएगा। यहाँ आकर गूंगे-बहरे सब ठीक हो जाते हैं।”

लाल किले में हुई हिंसा के मामले में 200 लोग हिरासत में: लूट, डकैती और हत्या की साजिश के आरोप में मुकदमा दर्ज

गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली में हुई हिंसा के संबंध में दिल्ली पुलिस ने 200 लोगों को हिरासत में ले लिया है। कहा जा रहा है जल्द ही इन सबको गिरफ्तार किया जाएगा। इससे पहले पुलिस ने इस संबंध में डकैती, लूट आपराधिक साजिश की कई धाराओं में केस दर्ज किया था। पूरे मामले पर क्राइम ब्रांच द्वारा जाँच की जाएगी।

बता दें कि किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान कल दिल्ली के लाल किले पर हुई हिंसा के संबंध में IPC की धारा 395 (डकैती), 397 (लूट या डकैती, मारने या चोट पहुँचाने की कोशिश), 120बी (आपराधिक साजिश की सजा) और अन्य धाराओं के तहत FIR दर्ज हुई है। यहाँ उपद्रवियों ने कब्जा करने के बाद काफी तोड़फोड़ मचाई थी और दिल्ली पुलिस के कर्मियों पर हमला किया था।

शांतिपूर्ण ट्रैक्टर परेड के नाम पर पूरे एक दिन के नाटक के चलते दिन के अंत तक 313 पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात सामने आई थी। बावजूद इसके किसान नेताओं ने यह गलती नहीं मानी। अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा,

”किसानों के आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश लगातार चल रही थी। हमें डर था कि कोई साजिश कामयाब न हो जाए मगर आखिर में साजिश कामयाब हो गई। लाल किले में बिना किसी सांठगांठ के कोई नहीं पहुंच सकता। इसके लिए किसानों को बदनाम करना ठीक नहीं है।”

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पलवल में भी बैरीकेड तोड़कर सड़कों पर हाहाकार मचाने के लिए पुलिस ने 2000 से ज्यादा लोगों के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज कर लिया है। इनके ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 186, 332, 353, 307, 427 और नेशनल हाईवे एक्ट की धारा 8 के तहत केस दर्ज हुआ है। ये शिकायत गादपुरी थाने के हेड कॉन्सटेबल की शिकायत पर हुई है।

जाँच अधिकारी व सब इंस्पेक्टर हनीश खान ने बताया कि 350 से 400 ट्रैक्टरों पर सवार 2,000 से 2,200 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जो कल पुलिस अधिकारियों के साथ हिंसक हो गए, बैरिकेड और कंटेनर को तोड़ दिया। साथ ही गादपुरी में शीतला गाँव के पास 11.30 से 12 बजे के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग को ब्लॉक किया।

उन्होंने बताया कि वह इस संबंध में जाँच कर रहे हैं और आरोपितों की पहचान होना अभी बाकी है। पुलिस के अनुसार, उपद्रवियों ने फरीदाबाद में घुसने का प्रयास किया था, लेकिन पुलिस ने उन्हें सही समय पर समझा-बुझाकर रोक लिया। घटना के बाद फरीदाबाद में धारा 144 लगाई गई। साथ ही जिलाधिकारी ने आदेश दिया कि 5 या 5 से ज्यादा लोग, हाथ में डंडा, तलवार या किसी तरह का हथियार लिए बिलकुल नहीं घूम सकते हैं। आदेश के अनुसार, इन निर्देशों का पालन अगले निर्देश आने तक किया जाएगा।

1 Feb को संसद पर कब्जा, ‘खालिस्तानी’ झंडा फहराने वाले को 2.5 करोड़ रुपए: आतंकी संगठन SFJ का ऐलान

गणतंत्र दिवस के अवसर पर किसान आन्दोलनकारियों के लाल किले पर उपद्रव के बाद अब प्रतिबंधित आतंकी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ (SFJ) ने आगामी 1 फरवरी को संसद पर कब्ज़ा और घेराव की धमकी दी है। इतना ही नहीं, खालिस्तानी संगठन SFJ ने लाल किले पर झंडा फहराने वाले व्यक्ति को $350,000 इनाम देने का भी एलान किया है। SFJ ने कनाडा से सात मिनट का एक वीडियो जारी करते हुए लाल किले पर ‘खालिस्तानी’ झंडा फहराने की बात भी स्वीकार की है।

1 फरवरी को संसद में बजट भी पेश किया जाना है। इस दौरान सभी लोगों की निगाहें समाचार चैनल्स पर रहेंगी। ऐसे में इसी दिन को संसद घेराव के लिए चुना गया है।

गौरतलब है कि राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस के मौके पर ‘किसान’ दंगाइयों ने ऐतिहासिक लाल किले पर सिखों के धार्मिक झंडे निशान साहब को फहरा दिया और राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा का अपमान भी किया। पूरे दिन ये तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया और समाचार चैनल्स पर छाई रहीं।

यही नहीं, दंगाइयों ने राम मंदिर और केदारनाथ मंदिर को निशाना बनाते हुए राम मंदिर की झाँकी के कुछ हिस्सों को तोड़ दिया। दंगाइयों ने अयोध्या श्रीराम मंदिर की झाँकी के लिए बनाए गए राम मंदिर के गुम्बद को निशाना बनाकर उसे तोड़ दिया। ये दोनों झाँकी कल गणतंत्र दिवस की परेड में दिखाई गई थीं।

गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में हुई हिंसा में एक्शन लेते हुए दिल्ली पुलिस ने करीब 200 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया है। इन पर हिंसा करने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और पुलिसकर्मियों पर हमला करने का आरोप लगा है।

मंगलवार को हुए इन ‘किसान दंगों’ में अब तक कुल 22 FIR दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस ने कहा कि वे सत्यापन करने के बाद गिरफ्तारी कर रहे हैं। दंगों में 230 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है।

राष्ट्रीय राजधानी में लाल किले और किसान विरोध स्थलों पर कई स्थानों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। मंगलवार के दिन ट्रैक्टर परेड के लिए निर्धारित मार्ग से दूर, सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने सीमाओं पर बैरिकेड्स को तोड़ दिया और पुलिस के साथ भिड़ गए। उन्होंने कई जगहों से दिल्ली में प्रवेश किया और गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर धावा बोल दिया।

‘स्किन टू स्किन कॉन्टैक्ट के बिना छूना यौन अपराध नहीं’ वाले बॉम्बे HC के फैसले पर SC ने लगाई रोक, आरोपित को नोटिस जारी

किसी नाबालिग के ब्रेस्ट को बिना ‘स्किन टू स्किन’ कान्टैक्ट के छूने पर POCSO के तहत अपराध न मानने के हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। साथ ही भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने मामले के आरोपित को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब माँगा है।

बता दें कि यूथ बार असोसिएशन में बॉम्बे हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाई कोर्ट के इस फैसले पर विवाद छिड़ गया था। हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक आदेश में कहा था कि किसी नाबालिग के ब्रेस्ट को बिना ‘स्किन टू स्किन’ कॉन्टैक्ट के छूना POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) एक्ट के तहत यौन शोषण की श्रेणी में नहीं आएगा बल्कि IPC की धारा 354 के तहत छेड़छाड़ का अपराध माना जाएगा।

हाई कोर्ट की नागपुर बेंच की न्यायमूर्ति पुष्पा गनेडीवाला ने 19 जनवरी को पारित एक आदेश में कहा कि किसी हरकत को यौन हमला माने जाने के लिए ‘गंदी मंशा से त्वचा से त्वचा (स्किन टू स्किन) का संपर्क होना’ जरूरी है। उन्होंने अपने फैसले में कहा कि महज छूना भर यौन हमले की परिभाषा में नहीं आता है। न्यायमूर्ति गनेडीवाला ने सेशन्स कोर्ट के फैसले में संशोधन किया था, जिसने 12 वर्षीय लड़की का यौन उत्पीड़न करने के लिए 39 वर्षीय व्यक्ति को तीन वर्ष कारावास की सजा सुनाई थी।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यौन हमले की परिभाषा में शारीरिक संपर्क प्रत्यक्ष होना चाहिए या सीधा शारीरिक संपर्क होना चाहिए। कोर्ट ने कहा, “स्पष्ट रूप से अभियोजन की बात सही नहीं है कि आवेदक ने उसका टॉप हटाया और उसका ब्रेस्ट छुआ। इस तरह बिना पेनेट्रेशन के यौन मंशा से सीधा शारीरिक संपर्क नहीं हुआ।”

हाल ही में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने भी महाराष्ट्र सरकार से इस मामले में अपील दायर करने के लिए कहा था। महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को लिखे पत्र में, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के चेयरपर्सन प्रियांक कानूनगो ने कहा था कि फैसले में ‘यौन इरादे से बिना किसी पेनेट्रेशन के स्किन टू स्किन’ की भी समीक्षा किए जाने की जरूरत है और राज्य को भी इस पर संज्ञान लेना चाहिए। यह फैसला इस मामले में नाबालिग पीड़िता के लिए अपमानजनक प्रतीत हो रहा है।

लाल किले के भीतर दंगाइयों का आंतक: चकनाचूर हुए काउंटर पर लगे शीशे, उखाड़ दिए गए रेलिंग व बैनर

दिल्ली के लाल किले पर गणतंत्र दिवस के दिन किसान दंगाइयों ने खूब उत्पात मचाया। न केवल तिरंगे का अपमान करते हुए उन्होंने वहाँ सिख झंडा किले से फहराया बल्कि अंदर भी काफी तोड़फोड़ की। आज घटना की अगली सुबह सारे नुकसान की तस्वीरें सामने आ गई हैं।

समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा जारी तस्वीरों में देख सकते हैं। शीशे चकनाचूर पड़े हैं। काउंटर को पलट दिया गया है। सारी चीजें तितर-बितर हैं। एजेंसी का कहना है कि ये तस्वीर टिकट काउंटर, मेटल डिटेक्टर गेट की हैं। जहाँ टूटे शीशों के अलावा लाल किले में पुलिसकर्मियों की टोपियाँ भी पड़ी हैं।

न्यूज 18 के अनुसार, लाल किले में घुसी भीड़ ने उपद्रव के दौरान न केवल टिकट काउंटर को पूरी तरह फोड़ा। उन्होंने इसके साथ लगे बोर्डों को भी निकाल कर फेंक दिया। वहीं एसी और रेलिंग को उखाड़कर भी नीचे कर दिया गया है।

यहाँ मालूम हो कि किसान ट्रैक्टर रैली के बाद जहाँ लाल किला को काफी हानि पहुँची है, वहीं पूरे आयोजन का सबसे बुरा प्रभाव पुलिसकर्मियों पर पड़ा है। आज सुबह तक इस हिंसा में घायल हुए पुलिसकर्मियों की संख्या 109 हो गई है। दिल्ली पुलिस ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली के ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर आलोक कुमार ने कहा कि ट्रैक्टर रैली में पुलिस कर्मियों के साथ मारपीट करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।

बता दें कि कल उपद्रवी किसानों ने दिल्ली पुलिस मुख्यालय के सामने रखे बैरिकेड्स को तोड़ने के साथ ही पुलिस वाहनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया था। आईटीओ में कुछ प्रदर्शनकारी एक पुलिसकर्मी को निर्ममता से पीटते दिखे थे। इस बीच एक हिस्से ने उस पुलिसकर्मी को बचाया भी। दूसरी जगह ट्रैक्टर पर बैठे प्रदर्शनकारी ने पुलिसकर्मियों पर ट्रैक्टर चढ़ाने कोशिश की थी। आईटीओ में खड़ी सरकारी बसों में तोड़फोड़ हुई थी। घोड़े पर बैठे निहंगों ने बैरिकेडिंग को तोड़ा था।