Home Blog Page 4097

Bigg Boss वाली हिरोइन जयश्री की संदिग्ध मौत, अपने ही फ्लैट में फंदे से लटका मिला शव

कन्नड़ अभिनेत्री जयश्री रमैया की मौत हो गई है। उनका शव संदिग्ध अवस्था में मिला है। पुलिस ने बताया है कि उनकी लाश फाँसी से फंदे से लटकी हुई मिली। इससे पहले वो ‘बिग बॉस कन्नड़’ का भी हिस्सा रही थीं। सोमवार (जनवरी 25, 2021) को उनके बेंगलुरु स्थित फ्लैट में उनकी लाश मिली। जयश्री रमैया की मौत के बाद लोगों के जेहन में सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत की यादें ताज़ा हो गईं, जिसकी जाँच सीबीआई कर रही है।

पुलिस ने अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं की है कि कन्नड़ अभिनेत्री जयश्री रमैया की मौत का कारण आत्महत्या है। पुलिस अभी इस मामले की जाँच कर रही है, जिसके बाद आधिकारिक बयान दिया जाएगा।

जयश्री पिछले कुछ दिनों से डिप्रेशन से जूझ रही थी। पिछले दिनों ही खबर आई थी कि बेंगलुरु के संध्या किरण आश्रम में उनका इलाज चल रहा था। उन्होंने पिछले साल सोशल मीडिया पर पोस्ट लिख कर इस दुनिया को छोड़ने की बात कही थी। उन्होंने वीडियो में कहा था कि वह डिप्रेशन से उबरने में सक्षम नहीं रही हैं, इसलिए मौत को गले लगाना चाहती हैं। हालाँकि, कुछ देर बाद ही जयश्री रमैया ने अपने इस पोस्ट को डिलीट कर दिया था।

उन्होंने कहा था कि वो डिप्रेशन से उबर नहीं पा रही हैं और इसीलिए उन्हें इच्छा-मृत्यु की अनुमति चाहिए। वो एक लोकप्रिय मॉडल थीं और बतौर अभिनेत्री भी कर्नाटक में पहचान बनाया था। कन्नड़ स्टार किच्चा सुदीप इस शो के होस्ट थे। उनके दोस्तों का कहना था कि वो किसी पारिवारिक कारण से अवसाद में चली गई थीं। वो अक्सर अपना फोन नंबर बदल लेती थीं, जिससे उनके परिचित उनसे सम्पर्क नहीं कर पाते थे।

सोशल मीडिया पर लाइव आकर अवसाद की बात करने के कुछ ही हफ़्तों बाद उनकी मौत होने को लेकर लोगों में तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। उन्होंने बाद में सफाई देते हुए कहा था कि वो एकदम ठीक हैं और अब कोई दिक्कत वाली बात नहीं है।

क्योंकि मेरी दुकान नहीं चली: कॉन्ट्रैक्ट किलर इम्तियाज ने बताया अपराध में वापसी का कारण

बिहार के एक कुख्यात कॉन्ट्रैक्ट किलर ने वहाँ के एक वरिष्ठ अधिकारी से काउंसलिंग के बाद सुधार के तौर पर एक किराने की दुकान खोली थी। लेकिन अब मोहम्मद इम्तियाज आलम नाम का यह आरोपित एक बार फिर अपने धंधे में वापस उतर चुका है। बताया जा रहा है कि इम्तियाज ने ऐसा कदम दुकान से होने वाली कम आमदनी और ‘पीयर प्रेशर’ यानी, अन्य गुर्गों द्वारा बनाए जा रहे दबाव के कारण उठाया।

‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बार मोहम्मद इम्तियाज ने हत्या नहीं बल्कि चोरी के लिए पेशे में वापसी की है। उनका गिरोह हर दो महीने में एक या दो हफ्ते के लिए दिल्ली आता, अपराध करता और वो वापस लौट जाता था। गिरोह का खुलासा हुआ और तीन आरोपित कश्मीरी गेट पर चोरी के सामान के साथ दबोच लिए गए।

मुख्य आरोपित की पहचान बिहार के अररिया निवासी 32 वर्षीय मोहम्मद इम्तियाज आलम के रूप में हुई है, जो हत्या, हत्या के प्रयास और डकैतियों के 20 से अधिक मामलों में शामिल रहा है। उनके सहयोगियों की पहचान मोहम्मद दरबेश (34) और मोहम्मद नईम (32) के रूप में की गई। तीनों आरोपितों से लैपटॉप, 11 ब्राँडेड घड़ियाँ, लगभग 1,000 रुपये नकद और अपराध के लिए इस्तेमाल एक तिपहिया वाहन जब्त किया गया।

डिप्टी कमिश्नर (उत्तर) ने कहा कि तीनों को पकड़ने के लिए सूचना के आधार पर जाल बिछाया गया था। उन्होंने बताया कि पुलिस को देखकर थ्री-व्हीलर पर बैठे तीनों लोगों ने भागने की कोशिश की, लेकिन वो पकड़े गए।

पुलिस के अनुसार, “मोहम्मद इम्तियाज आलम ने कहा कि वो एक कॉन्ट्रैक्ट किलर था, लेकिन बिहार में एक पुलिस अधिकारी द्वारा काउंसलिंग के बाद उसने अपराध छोड़ दिया। उसने अपने गुजारे के लिए एक दुकान शुरू की थी, लेकिन इसमें उन्हें ज्यादा कमाई नहीं हुई। अच्छी जिंदगी जीने के लिए वो अपने दो सहयोगियों के साथ शामिल हो गया और चोरी करने के लिए दिल्ली जाने लगा। उन्होंने चोरी के पैसों से एक इनोवा कार और घर खरीद लिया था।”

राम मंदिर के लिए ₹20 का दान (मृत बेटे के नाम से भी) – गरीब महिला की भावना अमीरों से ज्यादा – वायरल हुआ भावुक वीडियो

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट दुनिया भर के हिन्दुओं से अपील कर रहा है कि वह अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए अपनी श्रद्धा और क्षमता अनुसार दान करे। विश्व हिन्दू परिषद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समेत कई हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ता इस अभियान के तहत जनसंपर्क करके आर्थिक सहयोग इकट्ठा कर रहे हैं। दिसंबर 2020 के दौरान विहिप ने ऐलान किया था कि उनके कार्यकर्ता देश भर के लाखों गाँवों में घर-घर जाकर चंदा इकट्ठा करेंगे। 

इसी कड़ी में देश के तमाम मशहूर अभिनेताओं-अभिनेत्रियों, राजनेताओं और चर्चित नामों ने राम मंदिर निर्माण के लिए करोड़ों रुपए दान किए। रामायण की एक छोटी से घटना है, जिसमें लंका तक जाने के लिए बनाए जा रहे राम सेतु निर्माण जारी था। वहीं पर एक गिलहरी भी अपना योगदान दे रही थी। ठीक उसी तरह भारत में अनगिनत कहानियाँ हैं, जिनमें यह स्पष्ट तौर पर नज़र आता है कि हिन्दुओं के लिए राम मंदिर के क्या मायने हैं। श्रीराम ने उस गिलहरी को आशीर्वाद दिया और यह भी कहा कि किसी बड़े प्रयोजन के लिए किया गया दान महत्वपूर्ण होता है। दान की मात्रा अहम नहीं होती है बल्कि दान की भावना देखी जाती है। 

सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है। इसमें एक वृद्ध और गरीब महिला राम मंदिर के लिए दान करने का निवेदन कर रही है। वीडियो में कार्यकर्ता वृद्ध महिला से कहते हैं कि उन्हें 20 रुपए दान करने की ज़रूरत नहीं है, वह सिर्फ 10 रुपए ही दान करें।

इसके बावजूद गरीब नज़र आने वाली वृद्ध महिला अनुरोध करती है कि वह 20 रुपए ही दान करेगी। कार्यकर्ता वृद्ध महिला को मनाने का लगातार प्रयास करते हुए कहते हैं कि उन्हें 20 रुपए दान करने की ज़रूरत नहीं है, वह 10 रुपए अपने पास रख सकती हैं।   

इतनी बातों के बावजूद महिला अपनी बात पर अडिग रहती हैं। वह कहती हैं कि यह उनके रुपए हैं और वह 20 रुपए ही दान करना चाहती हैं। कार्यकर्ता महिला से कहते हैं कि उनके पास सिर्फ 10 रुपए का कूपन है, इस उम्मीद में कि शायद वृद्ध महिला उनकी बात मान जाएगी और 10 रुपए अपने पास रख लेगी। लेकिन वृद्ध महिला अपनी बात पर टिकी रहती हैं और दो कूपन की माँग करती हैं।

वृद्ध महिला बताती हैं कि उनके बड़े बेटे का निधन हो चुका है, इसलिए एक कूपन उनके बेटे के नाम का रखा जाए और दूसरा खुद उनके नाम का। इस वीडियो से एक बात साफ़ हो जाती है कि 80 वर्षीय वृद्ध महिला की भगवान राम के प्रति आस्था और विश्वास अटूट है, शायद इसलिए इंटरनेट की दुनिया में वीडियो को इतना प्यार मिल रहा है। 

राम मंदिर चंदे के लिए कन्नड़ अभिनेताओं की अपील 

एक और वीडियो में तमाम कन्नड़ अभिनेता निवेदन करते हुए नज़र आ रहे हैं कि सभी लोग भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए अपनी श्रद्धानुसार दान करें। 

भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए दान करने वालों में प्रणीत सुभाष, सुपरस्टार पवन कल्याण, एक्टर अक्षय कुमार, प्रोड्यूसर मनीष मुंद्रा, पूर्व क्रिकेटर और भाजपा सांसद गौतम गंभीर शामिल हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अयोध्या मंदिर निर्माण के लिए 5 लाख रुपए दान किए।

आर्थिक सहयोग के लिए अभियान 

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मकर संक्रांति (15 जनवरी) के मौके से ही चंदा इकट्ठा करने का अभियान शुरू कर दिया था। देशव्यापी भियान के दौरा श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के प्रस्तावित प्रतिरूप की तस्वीरें करोड़ों राम भक्तों के घर तक पहुँचाई जाएगी। ट्रस्ट ने दान के लिए 10, 100 और 1000 रुपए के कूपन उपलब्ध कराए हैं। 

मदरसे बंद करना सही, मुल्ले-मौलवी की कौन सुनता है: अजमल के ‘टोपी-बुर्का’ पर हिमांत बिस्वा सरमा का पलटवार

असम में ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के नेता बदरुद्दीन अजमल ने बेहद भड़काऊ बयान देकर भाजपा के खिलाफ मुस्लिमों में डर पैदा करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा था कि अगर भाजपा राज्य में दोबारा सत्ता में आती है, तो वह मदरसे बंद करवा देगी, मस्जिदों को नष्ट कर देगी। अजमल के इस आरोप पर बीजेपी नेता और असम सरकार में शिक्षा मंत्री हिमांत बिस्वा सरमा ने एबीपी न्यूज से बात करते हुए जवाब दिया है।

हिमांत बिस्वा सरमा ने कहा, ”मदरसा खत्म करना तो सही है, अभी सरकारी मदरसा तो खत्म किया है और आगे जाकर उनके जो मजहबी मदरसे हैं उसमे भी मजहबी शिक्षा के साथ साइंस, मैथ, कम्प्यूटर की शिक्षा देनी होगी। लोग यदि मदरसा से बाहर निकलना चाहते है तो निकलने की सुविधा देनी पड़ेगी। कई बच्चों को बचपन में पिताजी मदरसे में डालते हैं। लेकिन कई बच्चे सर्वे में बोलते हैं कि हमें मदरसे में नहीं रहना। प्राइवेट मदरसे में बहुत बड़ा मॉर्डनाइजेशन तो होगा ही। सरकारी मदरसे तो हम पहले ही बंद कर चुके हैं। यह बात तो अजमल भाई सही बोल रहे हैं, क्योंकि ये तो हम करेंगे ही।”

वहीं बदरुद्दीन अजमल के मस्जिद तोड़ने के आरोपों का भी सरमा ने जवाब दिया। उन्होंने कहा, “जहाँ तक मस्जिद की बात है तो भारत में किसी भी हिंदू ने कहीं भी मस्जिद को नहीं तोड़ा है। लेकिन अजमल भाई के पूर्वज हमारे कई मंदिरों को तोड़ चुके हैं। यह बात सभी जानते हैं। इसलिए मंदिर तोड़ना, मस्जिद तोड़ना यह उनकी भाषा है, हमारी नहीं।”

मदरसे के मामले में मौलवियों के विरोध के सवाल पर सरमा ने कहा कि उनकी बात कौन सुनेगा? विद्यार्थी का कल्याण करना सरकार की जिम्मेदारी होती है। एक छात्र डॉक्टर बने, इंजीनियर बने, आगे बढ़े ये एक शिक्षा मंत्री का काम होता है। अब कौन मुल्ला-मौलवी कहाँ क्या बोलता है, उसमें समय कौन खर्च करे? 

उन्होंने कहा, ”मुल्ला-मौलवी का काम होता है मस्जिद में जाना और मजहब की शिक्षा देना। छात्रों को शिक्षा देने की जिम्मेदारी सरकार की होती है, शिक्षा मंत्री का काम होता है। हम हमारी जिम्मेदारी निभाएँगे और वह अपनी जिम्मेदारी निभाएँ। इसमें विवाद कहाँ है?”

गौरतलब है कि बदरुद्दीन अजमल ने कहा था, “भाजपा दुश्मन है, देश की दुश्मन, भारत की दुश्मन, महिलाओं की दुश्मन, मस्जिदों की दुश्मन, दाढ़ी की दुश्मन, तलाक की दुश्मन, बाबरी मस्जिद की दुश्मन। क्या आप इस तरह एक पार्टी को वोट देंगे? अब आपको अधिक सावधान रहने की जरूरत है। अगर आप सावधान नहीं हैं, और अगर भाजपा असम में फिर से सरकार बनाती है तो आपको बुर्का पहनकर आने की इजाजत नहीं होगी, आप चेहरे पर दाढ़ी के साथ घर से बाहर नहीं निकल पाएँगे, आपको ये स्कलकैप (जालीदार टोपी) पहनने की इजाजत नहीं होगी, आपको मस्जिदों में अज़ान जपने की इजाजत नहीं होगी। हम इस तरह एक जगह पर रह पाएँगे?”

भारतीय सेना ने 20 चीनी फौजियों को जख्मी कर खदेड़ा, सीमा में घुसने का कर रहे थे प्रयास

LAC पर चल रहे भारत और चीन के विवाद के बीच एक बार फिर सिक्किम में दोनों पक्षों में झड़प हुई है। कहा जा रहा है कि तीन दिन पहले चीन ने भारत की सीमा में घुस कर यथास्थिति को बदलने का प्रयास किया, लेकिन तभी भारतीय सैनिकों ने उन्हें रोका और खदेड़ कर वापस उनके क्षेत्र में भेज दिया। इस दौरान ही झड़प भी हुई, जिसमें 20 चीनी सैनिक घायल हुए। वहीं भारत के भी 4 जवानों को चोटें आईं।

मीडिया खबरों के अनुसार, सिक्किम के नाकुला में यह झड़प हुई थी, जिसके कारण वहाँ हालात तनावपूर्ण हैं लेकिन स्थिति अब काबू में हैं। कहा जा रहा है कि झड़प के दौरान हथियारों का इस्तेमाल नहीं हुआ, मगर दोनों देशों के सैनिकों को चोटें आई हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारतीय क्षेत्र के साथ सभी प्वाइंट पर मौसम की स्थिति खराब होने के बावजूद कड़ी चौकसी बरती जा रही है।

गौरतलब है कि भारत-चीन सैनिकों के बीच इस झड़प के बाद पूर्वी लद्दाख के मोल्डो में भारत और चीन के सैन्य अधिकारियों के बीच बैठक हुई। करीब 15 घंटे चली इस बैठक का निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है। लेकिन इसके जरिए तनाव को कम करने की अपील की गई। इसके अलावा यह भी खबर है कि चीनी सेना ने पूर्वी लद्दाख से अपने 10,000 सैनिकों को वापस बुला लिया है। हालाँकि कुछ सेना की तैनाती अब भी है इसलिए भारतीय जवान भी पीछे नहीं हुए हैं।

यहाँ बता दें कि साल 2017 में डोकलाम विवाद के बाद लद्दाख में पिछले साल भारत और चीनी सैनिक एक-दूसरे के सामने आए थे। 15 जून 2020 को गलवान घाटी पर हुई भिड़ंत के दौरान 20 भारतीय जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे। वहीं 43 चीनी सैनिकों के भी मारे जाने की खबर सामने आई थी, लेकिन चीन ने मरने वाले सैनिकों की संख्या का खुलासा नहीं किया था।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल जून में LAC पर हुई हिंसा 1975 के बाद पहली ऐसी हिंसा थी जिसमें सैनिकों ने जान गॅंवाई। चीन ने भारतीय सेना पर हमला करने के लिए लाठी-ंडंडे, रॉड, हॉकी, ड्रैगन पंच, कंटीली तारों वाले हथियार आदि का इस्तेमाल किया था।

‘खुद हाथ-पैर बाँध डैम में कूदी पूजा भारती’: झारखंड पुलिस के दावे को ठुकरा परिजनों ने माँगी CBI जाँच

हजारीबाग मेडिकल कॉलेज की छात्रा पूजा भारती पूर्वे के घरवालों ने पुलिस द्वारा कही गई आत्महत्या की बात मानने से साफ़ इनकार कर दिया है। सिर्फ पूजा के परिजन ही नहीं बल्कि अन्य लोग भी पुलिस के दावे को मानने को तैयार नहीं हैं कि आखिर अपने हाथ-पैर बाँधने के बाद आत्महत्या के लिए कोई डैम से कैसे छलाँग लगाएगा?

पूजा भारती की लाश जनवरी 12, 2021 को झारखंड के रामगढ़ स्थित पतरातू डैम में तैरती हुई मिली थी। गोड्डा की रहने वाली पूजा भारती कुछ दिनों पहले ही फर्स्ट सेमेस्टर की परीक्षा देने घर से कॉलेज आई थी और उसके हाथ-पाँव बंधे हुए थे।

हाल ही में इस हत्या के मामले में झारखंड पुलिस ने दावा किया था कि अब तक की जाँच में सामने आया है कि पूजा ने आत्महत्या की थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पुलिस ने छात्रा के बैग और कमरे से मिले कागजातों के आधार पर दावा किया कि वो काफी अवसाद में थी। हालाँकि, पुलिस ने कहा कि अभी ठोस नतीजों पर पहुँचना बाकी है, क्योंकि कई बिंदुओं पर जाँच अभी भी जारी है।

पुलिस के अनुसार, छात्रा के शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं मिले हैं और छात्रा ने खुद ही अलग-अलग रस्सियों का इस्तेमाल कर के अपने हाथ-पाँव बाँध लिए होंगे, इसीलिए उसके लाश के हाथ-पाँव बँधे हुए मिले।

रिपोर्ट के अनुसार, मृतका के पिता अवध बिहारी पूर्वे ने कहा, “अगर पुलिस का मानना ​​है कि वह अपने हाथों और पैरों को बाँधने के बाद खुद डूब गई थी, तो पुलिस ने पहले यह दावा क्यों किया कि वे इस ‘मर्डर मिस्ट्री’ को सुलझाने के बेहद करीब हैं?”

मृतका पूजा के पिता ने पुलिस पर ‘अनप्रोफेशनल’ होने का आरोप लगाया और मामले की सीबीआई जाँच की माँग की है। पूजा के चचेरे भाई विद्यानंद पूर्वे ने कहा, “पुलिस का दावा कि मृतका तनाव में थी, हास्यास्पद है। मौत से कुछ घंटे पहले ही अपनी माँ से बात करते समय वो बेहद अच्छे मूड में थीं।” इस बीच, विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने सोमवार को गोड्डा में विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है और मौत की सीबीआई जाँच की माँग की है।

गौरतलब है कि परीक्षा देने के लिए घर से बाहर निकली झारखण्ड के हजारीबाग मेडिकल कॉलेज की छात्रा पूजा भारती (Puja Bharti) कुछ दिन से लापता थी और बाद में उसकी लाश पतरातू डैम (Patratu Dam) से मंगलवार (जनवरी 12, 2021) सुबह बरामद हुई। 22 साल की पूजा भारती गोड्डा की रहने वाली थी।

किसान रैली के लिए 308 पाकिस्तानी ट्विटर अकाउंट सक्रिय, ट्रैक्टर रैली की भी अनुमति… किसान नेता फिर भी नाखुश

दिल्ली पुलिस के साथ कई दौर की बातचीत के बाद किसानों को 26 जनवरी पर ट्रैक्टर रैली निकालने की अनुमति मिल गई है। बस पुलिस की शर्त है कि गणतंत्र दिवस की परेड को किसी हालत में बाधित नहीं किया जाएगा। रविवार को दिल्ली पुलिस ने कहा कि ट्रैक्टर रैली रिपब्लिक डे परेड के बाद निकाली जाएगी। सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम होंगे।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया , “बैरीकेड और अन्य सुरक्षा प्रबंधों को हटाकर राष्ट्रीय राजधानी में किसानों को आने दिया जाएगा और बाद में वह तय दूरी कवर करने के बाद दोबारा अपनी जगह पर लौट जाएँगे।”

पुलिस का कहना है कि रैली तीन भागों में निकाली जाएगी। पहली सिंघू बॉर्डर से निकलेगी और करीब 62 किमी की दूरी तय करेगी। इसके बाद टीकरी सीमा से निकलेगी, जो 60 किमी का रूट कवर करेगी और गाजीपुर सीमा से निकलने वाली 46 किमी का रूट कवर करेगी।

पुलिस का कहना है कि दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर लगभग 12000 से 13000 ट्रैक्टर पहुँचे हैं। टीकरी में यह संख्या 7000 से 8000 है, सिंघू में लगभग 5000 और गाजीपुर सीमा पर लगभग 1000 है, जो आने वाले दिनों में बढ़ने की उम्मीद है। पुलिस ने खूफिया सूत्रों से मिली जानकारी का हवाला देता हुए कहा कि कुछ ऐसे तत्व हो सकते हैं, जो माहौल बिगाड़ने का प्रयास करें।

पुलिस ने बताया है कि ट्विटर पर करीब 308 अकॉउंट ऐसे चिह्नित किए गए हैं, जो पाकिस्तान में बने और अब भ्रम पैदा करके किसानों की रैली में माहौल बिगाड़ना चाहते हैं। पुलिस की साइबर टीम लगातार ऐसे सोशल मीडिया अकॉउंट पर नजर बनाए हुए हैं।

दिल्ली पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने एक सर्कुलर जारी किया है, जिसमें सभी अधिकारियों और कर्मियों समेत सीएपीएफ और अन्य बलों को परेड के बाद शॉर्ट नोटिस में पोजिशन पर तैनात किए जाने के संबंध में व्यवस्था आदेश हैं।

परेड की जानकारी देते हुए स्पेशल कमिशनर ने बताया, “रैली सिंघू सीमा से शुरू होगी और संजय गाँधी ट्रॉन्सपोर्ट नगर, कंझावला, बवाना, औचंदी बॉर्डर, कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे से होकर गुजरेगी और सिंघू बॉर्डर पर वापस आ जाएगी। यह लगभग 62 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। पुलिस टीमों ने इन मार्गों का आकलन किया है।”

टीकरी सीमा से, किसानों को वह मार्ग दिया गया है जो नांगलोई, नजफगढ़, झरोदा, कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे से होकर गुजरेगा और फिर वापस टिकरी बॉर्डर पर जाएगा। वे भी लगभग 63 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे।

गाजीपुर बॉर्डर से किसान ट्रैक्टर रैली अप्सरा बॉर्डर, हापुड़ रोड कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे से होकर गुजरेगी और गाज़ीपुर में समाप्त होगी। उन किसानों के समूह 46 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे। 

पुलिस के अनुसार, यह काफी चुनौतीपूर्ण स्थिति है। उन्होंने इस संबंध में हरियाणा और यूपी के पुलिस अधिकारियों से बात की है। ये भी बताया है कि उन्होंने ट्रैक्टर को इस तरह से बाँटा है कि सारी रैली अच्छे से निपट जाएगी। पुलिस उन्हें पर्याप्त सुरक्षा मुहैया करवाएगी। संयुक्त मोर्चा किसान की ओर से आश्वस्त किया गया है कि वह जहाँ से निकलेंगे, वहाँ दोबारा लौट जाएँगे।

संयुक्त किसान मोर्चा ने रविवार को पुलिस से बातचीत में कहा कि सिर्फ़ ट्रैक्टर और ट्रॉलियाँ ही मार्च में भाग लेंगी। किसी के पास किसी प्रकार के हथियार नहीं होंगे। एक डंडा भी नहीं। एक ट्रैक्टर पर मुश्किल से 5 लोग ही बैठेंगे। कोई बॉनेट, बंपर या फिर ट्रैक्टर के ऊपर नहीं बैठेगा। 

रैली में भाग लेने वाले लोगों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने साथ 24 घंटे के राशन, पानी और ठंड से बचने का इंतजाम करते हुए चलें। किसान संगठन ने कहा है, “इस परेड के माध्यम से हमें देश और दुनिया को अपनी दुर्दशा के बारे में बताना है… हमारी जीत बहुत शांतिपूर्ण तरीके से निकाली जाने वाली परेड में है… हमारा उद्देश्य दिल्ली को जीतना नहीं है, बल्कि इस देश के लोगों का दिल जीतना है।”

इसमें यह भी कहा गया है कि कोई ट्रक कारों को ओवरटेक नहीं करेंगे, जिसमें किसान नेता होंगे। कोई गाना भी इस दौरान नहीं बजेगा। पुलिस से न उलझने और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को रोकने की अपील भी किसान एकता मोर्चा की ओर से की गई है। 

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस द्वारा 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली की अनुमति के बावजूद कई संगठन नाराज हैं। बीकेयू उग्रहन उन रास्तों पर रैली निकालने को लेकर खुश नहीं हैं, जो उन्हें असाइन किए गए। उनके अनुसार उन्हें सुझाए गए मार्गों में कहा गया है कि ट्रैक्टर मार्च को टीकरी से नांगलोई की ओर बढ़ना चाहिए, लेकिन उनके मुताबिक वह नांगलोई तक नहीं पहुँच सकते क्योंकि अन्य संगठनों के पंडाल उनके रास्ते में आते हैं।

इसी तरह किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के सुखविंदर सिंह सबहरा कहते हैं, “हमें लगता है कि ट्रैक्टर रैली के लिए हमें जिस तरह की अनुमति दी गई है, वह सही नहीं है। हम पुराने रिंग रोड पर जाना चाहते थे, लेकिन हमें सशर्त अनुमति दी गई और उस हिस्से को सौंपा गया, जो बड़े पैमाने पर हरियाणा के अंतर्गत आता है।”

वह कहते हैं, “हम बस यही कह रहे हैं कि हम वहाँ नहीं जाना चाहते, हम सिर्फ रिंग रोड पर जाना चाहते हैं। हम इस पर पुलिस के साथ एक बैठक करेंगे। इसके बाद तय किया जाएगा कि हम आखिर कहाँ जाएँगे। बैठक के बाद, हम रैली का समय और मार्ग तय करेंगे।”

नवंबर 2020 में निकाह, जनवरी 2021 में शौहर के लिए ‘काफी मोटी’ हो गई सना खान: खुलासा कर कहा- वर्कआउट करूँगी

अक्टूबर 2020 में ‘इस्लाम के खातिर’ मनोरंजन इंडस्ट्री को ठुकराने का ऐलान करने वाली सना खान ने नवंबर में मुफ्ती अनस से निकाह की थी। उसके बाद से ही हिंदी, मलयालम, कन्नड़, तमिल और तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में काम कर चुकी यह अभिनेत्री और मॉडल अपनी शादीशुदा ज़िदगी के बारे में इंस्टाग्राम पर फैंस को काफी कुछ बताती रहती हैं।

दोनों जब हनीमून के लिए कश्मीर गए थे तो सना उसका अपडेट भी फैंस को दे रही थीं। अब उन्होंने खुलासा किया है कि उनके शौहर और उनकी अम्मी को लगता है कि वे काफी मोटी हो गई हैं, इसलिए वह अब वर्कआउट करेंगी।

सना खान ने जानकारी दी है कि वो इन टिप्पणियों को काफी गंभीरता से ले रही हैं और जल्द ही वर्कआउट भी शुरू करेंगी, ताकि वापस से अपने शरीर को फिट रख सके। सना खान ने कहा कि उन्हें भी ऐसा लगता है कि उनका वजन बढ़ गया है, इसलिए अब एक्सरसाइज ज़रूरी है। उन्होंने कहा, “मेरी अम्मी को लगता है कि मेरे दोनों गाल गुलाबजामुन की तरह हो गए हैं। उन्हें लगता है कि मैं गोलू-मोलू-पोलू हो गई हूँ।”

सना खान ने बताया कि वो जब भी अपनी अम्मी को वीडियो कॉल करती है, वो इसी तरह की बातें कर उन्हें चिढ़ाने लगती हैं। हालाँकि, उन्होंने ये भी कहा कि ये खासा गंभीर मसला है। सना खान ने कहा कि माँओं को हमेशा अपने बच्चे दुबले-पतले ही लगते हैं, भले ही वो कितने ही मोटे क्यों न हो जाएँ। बकौल सना, अगर उनकी अम्मी ऐसा कह रही हैं तो सचमुच वो मोटी हो गई होंगी। उन्होंने कहा कि अब उन्हें पसीना बहाना पड़ेगा।

सना खान ने इंस्टाग्राम पर डाला नया वीडियो

सना खान ने कहा, “कुछ तो करना पड़ेगा। लेकिन, सवाल ये है कि आखिर कब करूँ?” इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए वीडियो में सना खान काले रंग के कपड़े पर सफ़ेद गोलों वाली हिजाब पहन रखी थी। उन्होंने एक चलती हुई कार में बैठ कर ये वीडियो शूट किया। उनके कई फैंस ने इस दौरान पोस्ट पर तरह-तरह के कमेंट्स किए। सना खान ने अपने पोस्ट में ‘#sanakhan #sanaanas #fun और #gharkibaatein’ जैसे हैशटैग्स भी लगाए।

बताते चलें कि हाल ही में कुछ आपत्तिजनक तस्वीरें वायरल हुई थीं। जिनके बारे में दावा किया जा रहा था कि सना खान के शौहर ने ही हनीमून की तस्वीरें वायरल कर दी हैं और इन तस्वीरों को उन्होंने ही अपने फोन के कैमरे से क्लिक किया था। फैक्ट-चेक में पता चला कि उनकी तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ कर के गलत दावा किया गया था।

राम मंदिर के लिए दे रहे हैं दान तो इन 13 फ्रॉड UPI IDs को ध्यान से देख लीजिए, कहीं और न चला जाए आपका पैसा…

केंद्र सरकार ने राम मंदिर निर्माण कार्य की देखरेख के लिए ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ टूस्ट का गठन किया। ट्रस्ट ने काम शुरू कर दिया और इसके लिए जनता को भी रुपए दान में देने के विकल्प दिए गए। इसके लिए आधिकारिक UPI ID और बैंक अकाउंट डिटेल्स जारी किए गए। अब इससे मिलती-जुलती कई फ्रॉड UPI IDs बना ली गई हैं, जिसके माध्यम से श्रद्धालुओं को ठगने की कोशिश हो रही है।

UPI का अर्थ हुआ यूनिफाइड पेमेंट इंटरफ़ेस। ऑनलाइन वित्तीय लेनदेन के लिए UPI ID एक वैकल्पिक माध्यम है। इससे पुराने तरीके में आपको किसी को भी रुपए भेजते समय उसके बैंक अकाउंट नंबर, IFSC नंबर, ब्रांच कोड, नाम और पता सहित अन्य विवरण भरने पड़ते हैं। लेकिन इसके उलट UPI ID एक तरह से वर्चुअल पेमेंट एड्रेस है, जिसे डालिए और उस व्यक्ति के खाते में रुपए पहुँच जाएँगे। ये एक खास पता होगा है, जिसके साथ किसी अन्य डिटेल्स की ज़रूरत नहीं।

इसी तरह से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को दान देने वाले श्रद्धालुओं के साथ धोखाधड़ी के लिए ठगों ने कई मिलती-जुलती UPI IDs बना ली हैं। लोगों की धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ कर के उन्हें लूटने के लिए ये तरीके आजमाए जा रहे हैं। अंशुल सक्सेना ने ऐसे 13 UPI IDs की सूची तैयार कर के पुलिस का ध्यान आकृष्ट कराया है, जो राम मंदिर के नाम पर जनता को लूटने के उपक्रम में लगे हो सकते हैं। इनकी डिटेल्स ये रहे:

फेक यूपीआई आईडी 1
फेक यूपीआई आईडी 2
फेक यूपीआई आईडी 3
फेक यूपीआई आईडी 4
फेक यूपीआई आईडी 5
फेक यूपीआई आईडी 6
फेक यूपीआई आईडी 7
फेक यूपीआई आईडी 8
फेक यूपीआई आईडी 9
फेक यूपीआई आईडी 10
फेक यूपीआई आईडी 11
फेक यूपीआई आईडी 12
फेक यूपीआई आईडी 13

अंशुल सक्सेना ने इससे पहले भी 5 ऐसी UPI IDs का खुलासा किया था, जो इसी तरह की करतूतों में लगे हुए थे। आप जब भी UPI ID के द्वारा राम मंदिर निर्माण के लिए दान कर रहे हैं तो कृपया आधिकारिक विवरण को जरूर ध्यान से देख लें और उससे मैच होने के बाद ही रुपए भेजें। साथ ही आप QR कोड्स को लेकर भी सतर्क रहें क्योंकि धोखाधड़ी में लिप्त लोग फोटोशॉप कर के अपना QR चिपका देते हैं। आधिकारिक और सही डिटेल्स ये रहे:

  1. SBI: shriramjanmbhoomi@sbi
  2. BOB: ramjanmbhoomi@barodampay
  3. PNB: 0513865A0000164.mab@pnb
राम मंदिर:स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) अकाउंट डिटेल
राम मंदिर: बैंक ऑफ बड़ौदा अकाउंट डिटेल्स
राम मंदिर: पंजाब नेशनल बैंक (PNB) बैंक अकाउंट डिटेल्स

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का ट्विटर पर ब्लू टिक वाला आधिकारिक हैंडल भी है, जिसकी सूचनाओं को सही मानें और कहीं और से आने वाले डिटेल्स को वहाँ जाकर जरूर चेक कर लें। उक्त हैंडल के पिन किए गए ट्वीट में दान देने के ज़रूरी सारे विवरण दिए गए हैं। साथ ही ये सारे डिटेल्स www.srjbtkshetra.org पर भी उपलब्ध हैं, जो श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट है। यहाँ से सारे डिटेल्स आप देख सकते हैं।

ममता बनर्जी ने मुगल हरम पर रिसर्च कर पाई थी PhD ‘डिग्री’… बस वो यूनिवर्सिटी दुनिया में नहीं है

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले कॉन्ग्रेस में हुआ करती थीं। जयप्रकाश नारायण की कार पर नाच कर विरोध जताना हो या जाधवपुर से दिग्गज वामपंथी नेता सोमनाथ चटर्जी को हराना हो, ये सब कारनामे उन्होंने बतौर कॉन्ग्रेस नेता ही किए थे। लेकिन, क्या आपको पता है कि उस वक़्त ममता बनर्जी ‘अमेरिका के ‘ईस्ट जॉर्जिया यूनिवर्सिटी’ से Ph.D होने का दावा करती थीं और अपने नाम में ‘डॉक्टर’ भी लगाती थीं।

जबकि, असली बात ये है कि इस नाम की कोई यूनिवर्सिटी है ही नहीं। हाँ, अमेरिका के एथेंस में लोकप्रिय ‘यूनिवर्सिटी ऑफ जॉर्जिया’ ज़रूर है, जो पिछले 235 वर्षों से सेवा दे रहा है। मार्च 2, 1985 को ‘द टेलीग्राफ’ में प्रकाशित एक लेख में ‘यूनाइटेड स्टेट्स एजुकेशनल फाउंडेशन इन इंडिया (USEFI)’ के हवाले से इसका खुलासा किया गया था कि जिस यूनिवर्सिटी से ममता बनर्जी Ph.D होने का दावा करती हैं, उसका कोई अस्तित्व ही नहीं है।

ममता बनर्जी कलकत्ता विश्वविद्यालय से ‘इस्लामिक स्टडीज’ में MA हैं। उन्होंने दावा किया था कि उन्हें 1982 में अमेरिका के ‘ईस्ट जॉर्जिया यूनिवर्सिटी’ में ‘मुग़ल हरम का राज्य और उसकी नीतियों पर प्रभाव’ विषय पर रिसर्च में PhD की डिग्री मिली थी और इस तरह वो अपने नाम में ‘डॉक्टर’ लगा सकती हैं। उनका दावा था कि ये पेपर उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय के प्रोफेसर करुणा पडा दत्ता के निर्देशन में तैयार किया था।

बाद में पता चला कि न सिर्फ ममता बनर्जी, बल्कि उनकी प्रोफेसर करुणा की भी डॉक्टरेट की डिग्री फर्जी थी। दोनों गुरु-शिष्य ने उसी ‘यूनिवर्सिटी’ से Ph.D होने का दावा किया था। ममता बनर्जी ने बताया था कि प्रोफेसर पीके महेश तब ‘ईस्ट जॉर्जिया यूनिवर्सिटी’ के एडमिशन काउंसलर थे, जिन्हें ये थीसिस भेजी गई थी। इसके बाद उन्हें 500 डॉलर देकर ओरिजिनल डिग्री लेने को कहा गया। उन्हें एक ‘प्रोविजनल सर्टिफिकेट’ भी मिला था।

USEFI ने भी कहा था कि अगर कोई भी व्यक्ति इस नाम की यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व करने या इससे जुड़े होने का दावा करता है, तो वो फ्रॉड है। इन यूनिवर्सिटी को लेकर संस्था के दफ्तर में कई छात्रों के सवाल आने लगे थे, जिसके जवाब में उसने ऐसा कहा। साथ ही इस ‘ईस्ट जॉर्जिया यूनिवर्सिटी’ के जिस ‘अमेरिकन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी’ से जुड़े होने का दावा किया जा रहा था, उसकी मान्यता ही नहीं थी।

इसे न तो अन्य विश्वविद्यालयों की मान्यता प्राप्त थी और न ही सरकारों ने उसे पंजीकृत किया था। अमेरिका में उस वक्त इसी तरह जाली डिग्रियों की फैक्ट्री चलाने वाले कुछ लोगों को जेल भी भेजा गया था। इसका एक प्रोस्पेक्ट्स भी था, जिसमें वो छात्रों के स्तर के हिसाब से उसे डिग्री देने का वादा करता था। तब सांसद रहीं ममता बनर्जी ने कहा था कि उन्होंने प्रोफेसर दत्ता को ये समझ कर थीसिस भेजा कि उन्हें इसके लिए अमेरिका नहीं जाना पड़ेगा।

प्रोफेसर दत्ता ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि उन्हें कोलकाता में बतौर रिसर्च गाइड काम करने के लिए पीके महेश ने ऑथराइज किया है। उन्होंने पूछा था कि जब इस यूनिवर्सिटी को लेकर इतनी गड़बड़ियों की बात सामने आ रही है तो फिर पीके महेश देश की राजधानी में बैठ कर कैसे अपना दफ्तर चला रहे हैं? इस घटना के सामने आने के बाद ममता बनर्जी की उस वक़्त भी किरकिरी हुई थी।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव सिर पर है, ऐसे में सोशल मीडिया में एक बार फिर से लोग इस विवाद को याद कर रहे हैं। ममता बनर्जी ‘जय श्री राम’ से चिढ़ने को लेकर और भाजपा कार्यकर्ताओं पर लगातार हो रहे तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों द्वारा हमले की खबरों पर पहले से ही विवादों में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री को लेकर विपक्षी दलों ने खूब मुद्दा बनाया था, जो फुस्स हो गया था। हाल ही में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जयंती समारोह में मोदी और ममता एक मंच पर दिखे थे।

हाल ही में इसी तरह के एक मामले में निधि राजदान की भी बेइज्जती हुई थी। कुछ महीने पहले निधि ने बताया था कि मैसाचुसेट्स के कैम्ब्रिज स्थित हॉवर्ड यूनिवर्सिटी में उन्होंने बतौर एसोसिएट प्रोफेसर (जर्नलिज्म) का ऑफर मिला है। फिर उन्होंने खुद को ‘फिशिंग अटैक’ का शिकार बताते हुए कहा था कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से जो ऑफर मिला था, वह फेक था। जबकि हॉवर्ड में ऐसा कोई विभाग ही नहीं था।