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मस्जिद से ‘लव जिहाद’ का खुला राज: असद ने आशू बन लड़की का किया यौन शोषण, धराया

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लव जिहाद का एक मामला सामने आया है। जहाँ अशोका गार्डन इलाके में 30 वर्षीय मैकेनिक ने असद ने आशू बन कर 20 वर्षीय इंजीनियरिंग की छात्रा को प्रेम जाल में फँसाया था। युवती से दोस्ती के वक्त असद ने खुद को मैकेनिकल इंजीनियर बताया था। जिसके बाद शादी का झाँसा देकर वह 2 साल तक उसका शारीरिक शोषण करता रहा। फिर वह युवती पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाने लगा। मामला तब खुला जब छात्रा ने उसे नमाज पढ़ते वक्त पकड़ लिया था।

एएसपी राजेश सिंह भदौरिया ने मीडिया को बताया कि मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश 2020 (लव जिहाद) की धारा 3, 5 और अन्य धाराओं में भोपाल में पहला मामला दर्ज किया गया है। साथ ही, आरोपित असद को गिरफ्तार कर लिया गया है।

क्या है पूरा मामला

पुलिस के अनुसार, 23 वर्षीय पीड़िता बालाघाट की रहने वाली है। वह इंजीनियरिंग सेकंड इयर की छात्रा है। 2 साल पहले आशू से उसकी दोस्ती हुई थी जो कि खुद को मैकेनिकल इंजीनियर बताता था। उसके बाद आशू ने खुद को हिंदू बता कर पीड़िता के साथ नजदीकी बढ़ाई। जिसके बाद आशू 12 दिसंबर 2019 को पीड़िता को अशोका गार्डन स्थित अपने किराए के मकान में ले गया। वहाँ उसने छात्रा से कई बार शारीरिक संबंध बनाए। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता ने पुलिस को बताया कि 19 मार्च 2020 को आशू का जन्मदिन था। ऐसे में वह युवती को घुमाने के लिए रायसेन ले गया और वह एक होटल में ठहरा। वहाँ आशू ने एक काम होने का बहाना बनाते हुए कुछ देर में आने की बात कही। युवती को शक होने पर वह उसके पीछे-पीछे चली गई, जहाँ आशू एक मस्जिद में नमाज पढ़ता मिल गया। पीड़िता ने सवाल-जवाब किए तो आरोपित ने अपना नाम असली नाम असद खान बताया।

युवती ने झूठ बोलने की वजह पूछी तो आरोपित असद उस पर निकाह करने के लिए दबाव बनाने लगा। और यह भी कहा कि मैं एक साधारण मैकेनिक हूँ। इसके बाद पीड़ित युवती उससे दूरी बनाने लगी। लेकिन असद इस्लाम कबूल कर पीड़िता पर निकाह का दबाव बनाता रहा। साथ ही निकाह नहीं करने पर जान से मारने की धमकी भी देने लगा। पीड़िता ने यह भी बताया कि असद बात न मानने पर उसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर डाल कर अश्लील कमेंट भी करता था।

पीड़िता के मुताबिक, असद का मजहब पता चलने पर उसने आरोपित से दूरी बना ली, लेकिन असद ने उसका पीछा करना नहीं छोड़ा। अक्टूबर 2020 में असद ने उसे रास्ते में रोक लिया और फिर से निकाह का दबाव बनाने लगा। साथ ही, पीड़िता से मारपीट भी की। वहीं, 11 जनवरी 2021 को उसने युवती पर इस्लाम कबूल करने का फिर से दबाव बनाया। साथ ही, 19 जनवरी 2021 को असद ने युवती की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट कर आपत्तिजनक टिप्पणी की। ऐसे में पीड़िता ने मामले की शिकायत भाजपा जिला कार्यसमिति के सदस्य संजय मिश्रा से की और थाने में केस दर्ज करा दिया। 

भोपाल से भागते वक़्त धराया

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बताया जा रहा है कि अपने खिलाफ केस दर्ज होने की जानकारी मिलने के बाद असद ने भोपाल से भागने की कोशिश की। पुलिस को इसकी भनक लग गई तो उन्होंने असद खान उर्फ आशू की तलाश शुरू कर दी और उसे रेलवे स्टेशन से दबोच लिया। इसके बाद वहीं से आरोपित को हिरासत में ले लिया गया।

मिर्जापुर की सांस्कृतिक छवि ख़राब करने के लिए वेब सीरीज बनाने वालों को SC ने भेजा नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार (जनवरी 21, 2021) को वेब सीरीज़ मिर्जापुर (Mirzapur) और अमेजन प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video) के निर्माताओं को एक नोटिस भेजा है। इस नोटिस में कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के जिला मिर्ज़ापुर (Mirzapur) की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक छवि खराब करने के सम्बन्ध में ओवर-द-टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म और शो के निर्माताओं से जवाब माँगा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह नोटिस मिर्जापुर जिले के निवासी एसके कुमार की एक याचिका पर जारी किया गया है। याचिकाकर्ता ने निर्माताओं पर उत्तर प्रदेश की छवि खराब करने का आरोप लगाया था। शिकायतकर्ता कुमार ने कहा कि मिर्ज़ापुर को ‘आतंक और अवैध गतिविधियों का केंद्र’ के रूप में चित्रित किया गया है।

मिर्जापुर नाम की यह वेब सीरीज नवंबर 16, 2018 को अमेज़न प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video) पर लॉन्च की गई थी, जिसका दूसरा सीज़न कोरोना वायरस महामारी के बीच पिछले साल ही अक्टूबर माह में रिलीज़ किया गया था।

उत्तर प्रदेश में वेब सीरीज मिर्जापुर के निर्माताओं के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को अपमानित करने और एक विशिष्ट समुदाय को आपराधिक पृष्ठभूमि के रूप में प्रदर्शित करने के लिए FIR रिपोर्ट दर्ज होने के दो दिन बाद अदालत का नोटिस आया है।

रविवार (जनवरी 17, 2021) को मिर्जापुर के कोतवाली देहात पुलिस स्टेशन में यह एफआईआर स्थानीय पत्रकार अरविंद चतुर्वेदी की शिकायत के बाद दर्ज की गई, जिसमें वेब सीरीज के निर्माता रितेश सिधवानी, फरहान अख्तर, भौमिक गोंदालिया और अमेजन प्राइम वीडियो के नाम थे।

शिकायतकर्ता ने कहा कि वेब सीरीज ने उनकी धार्मिक, सामाजिक और क्षेत्रीय भावनाओं को चोट पहुँचाई है, और कहा कि यह मिर्जापुर शहर की छवि को धूमिल करता है। इसके अलावा, शिकायतकर्ता ने कहा कि वेब सीरीज मिर्ज़ापुर अपमानजनक सामग्री, अनाचार और अवैध संबंधों को भी दिखाती है।

हिन्दू घृणा से सनी वेब सीरीज पर जमकर हो रही हैं FIR

मिर्जापुर को यह नोटिस ऐसे समय पर भेजा गया है, जब हिन्दू घृणा में लिप्त होने के आरोप में कई अन्य वेब सीरीज भी दर्शकों के निशाने पर हैं। खासकर, ‘तांडव’ फिल्म इस समय पूरे देश में लोगों की प्रतिक्रिया के कारण चर्चा का विषय बनी हुई है।

अमेजन प्राइम की वेब सीरीज तांडव (Tandav) पर भारत के अलग-अलग हिस्सों में विवादित वेब सीरीज से जुड़े मेकर्स, डायरेक्टर और राइटर के खिलाफ केस दर्ज किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में अब एक नई एफआईआर मुंबई में और एक शिकायत इंदौर न्यायालय में भी दायर की गई है।

इसके अलावा, महाराष्ट्र के मुंबई में भी फिल्म के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज हो गई है। मुंबई के घाटकोपर पुलिस स्टेशन में IPC की धारा 153 (A) 295 (A) 505 के तहत तांडव वेब सीरीज को लेकर FIR दर्ज हुई है। निर्माता, निर्देशक और कलाकारों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है।

Covishield बनाने वाले सीरम इंस्टीट्यूट में भीषण आग: कोरोना वैक्सीन के करोड़ों डोज का यहाँ है स्टोर

दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन निर्माताओं में से एक पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के टर्मिनल-1 गेट पर आज (जनवरी 21, 2021) आग लग गई। इस दुर्घटना में कितना नुकसान हुआ, फिलहाल इसका कुछ पता नहीं है। मौके पर दमकल की 5-10 गाड़ियाँ आग बुझाने पहुँची हैं। कहा जा रहा है कि यहाँ पर वैक्सीन की कई करोड़ डोज स्टोर करके रखी गई थीं।

आनंद रंगनाथन ने इस घटना की वीडियो को अपने ट्विटर पर साझा किया है। वीडियो में देख सकते हैं कि सीरम इंस्टिट्यूट में लगी आग से हवा में बहुत धुआँ हो गया है। वह लिखते हैं, “covishield वैक्सीन बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में बड़ी आग लगी है। आशा है कि सभी सुरक्षित हैं।”

कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि बीसीजी टीका बनाने वाली इमारत में आग लगी है। सीरम इन्स्टिट्यूट के इस हिस्से में नया प्लांट है। पुणे के सीरम इंस्टिट्यूट की दूसरी मंजिल पर आग लगी है। घटना की सूचना पाते ही दमकल गाड़ियों के अलावा पुलिस भी मौके पर पहुँच गई है। राहत कार्य शुरू हो गया है।

बर्दाश्त नहीं करेंगे… कोर्ट ने बचा लिया, वरना सलाखों के पीछे होते: ‘तांडव’ पर MP के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा

अमेजन प्राइम की वेब सीरिज ‘तांडव’ पर मचे बवाल के बाद इसके मेकर्स को भले ही बुधवार (जनवरी 20, 2021) को बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत मिल गई हो, लेकिन ये मामला अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। इस विवाद पर हालिया बयान मध्यप्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने दिया है। उन्होंने कहा है कि हिंदुओं ने सिर्फ़ क्रिया की प्रतिक्रिया दी है। सवाल यह है कि ऐसी फिल्में बनती ही क्यों है?

मीडिया से बातचीत में ‘तांडव’ सीरिज पर अपना मत रखते हुए उन्होंने कहा, “क्या हमारे कहने से वो ऐसी पिक्चर बनाते हैं। हम क्रिया पर प्रतिक्रिया देते हैं तो कहते हैं कि हम लोग बवाल करते हैं। क्रिया क्यों करते हो? जो हमें प्रतिक्रिया देनी पड़े।” उन्होंने कहा, “अगर इस तरह की घटना होगी तो किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। न्यायालय ने राहत दे दी इसलिए बच गए, नहीं तो सलाखों के पीछे होते।”

भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा ने अपने ट्वीट में इस बयान का वीडियो साझा करते हुए लिखा है, “तांडव वेब सीरीज के खिलाफ हुए प्रदर्शनों पर आपत्ति जताने वालों को समझना चाहिए कि बहुसंख्यक हिंदुओं का विरोध क्रिया पर प्रतिक्रिया है। सवाल यह है कि ऐसी फिल्में बनती ही क्यों है?”

उन्होंने कहा, “मैं हिंदू धर्म की आस्था पर सुनियोजित तरीके से चोट पहुँचाने की सोच रखने वालों को आगाह करता हूँ कि किसी भी सूरत में अब इस तरह का दुस्साहस बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

बता दें कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को वेब सीरिज ‘तांडव’ के निर्देशक अली अब्बास जफर, अमेजन प्राइम इंडिया की प्रमुख अपर्णा पुरोहित, निर्माता हिमांशु मेहरा और लेखक गौरव सोलंकी को अग्रिम जमानत दे दी थी। इन सभी के ख़िलाफ़ सीरिज के जरिए लोगों की धार्मिक भावनाएँ आहत करने के आरोप में केस दर्ज है। इसी मामले पर सुनवाई करते हुए बुधवार को न्यायमूर्ति पीडी नाइक ने चारों को गिरफ्तारी से 3 हफ्ते की राहत दी, जिससे इन सभी को यूपी के लखनऊ में संबंधित कोर्ट में जाने का मौका मिलेगा।

उल्लेखनीय है कि इस केस में इससे पहले यूपी पुलिस की 4 सदस्यीय टीम ‘तांडव’ के खिलाफ लखनऊ में दर्ज मामले की तहकीकात करने मुंबई गई थी। ऐसे में अली अब्बास जफर और अन्य की ओर से पैरवी कर रहे वकील आबद पोंडा और अनिकेत निकम ने अदालत को कहा कि उनके मुव्वकिल को लखनऊ की अदालत में अग्रिम जमानत अर्जी देने के लिए कुछ वक्त चाहिए इसलिए उन्हें फिलहाल गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी जाए। याचिका में आवेदकों ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा था कि उन पर गलत आरोप लग रहे हैं। यूपी पुलिस सबको गिरफ्तार करने मुंबई आ गई है, इसलिए उन्हें राहत की जरूरत है।

7% नहीं, अब किसानों को 12% पर लोन: मोदी सरकार का फैसला, RBI ने जारी किए निर्देश – Fact Check

देश के किसानों को भड़काने के लिए एक ओर विपक्ष अपनी राजनीति कर रहा है। दूसरी ओर मीडिया फर्जी खबरें चला कर उनको बरगला रहा है। ताजा मामला किसान क्रेडिट कार्ड को लेकर सामने आया है। सोशल मीडिया पर एक खबर शेयर कर दावा किया जा रहा है कि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) पर लोन की ब्याज दर को 7% से बढ़ाकर 12% कर दिया गया है।

इस खबर के अनुसार 1 अप्रैल से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) पर लोन 7 प्रतिशत की जगह 12 प्रतिशत ब्याज दर पर मिलेगा। इस दावे को साबित करने के लिए खबर में आरबीआई का हवाला देकर कहा गया है कि आरबीआई ने सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों को दिशा-निर्देश भी इस संबंध में जारी कर दिए हैं और यह सब जानकर किसानों में भारी रोष है।

खबर के अनुसार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किसानों के लिए 7 प्रतिशत लोन पर किसान क्रेडिट कार्ड योजना शुरू की थी और आज देश के बहुत से किसानों के पास केसीसी है। केसीसी लोन का कार्ड रेट वैसे बारह प्रतिशत है, लेकिन सरकार 5 परेंसट सब्सिडी देकर 7 परसेंट ब्याज लेती है, लेकिन अब किसानों को 1 अप्रैल से बारह प्रतिशत ब्याज दर पर ही केसीसी लोन दिया जाएगा।

सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही इस खबर की प्रमाणिकता क्या है? इसका खुलासा पीआईबी फैक्टचेक ने किया है। पीआईबी ने खबर पर संज्ञान लेते हुए इसे फर्जी बताया है। खबर का फैक्ट चेक करते हुए पीआईबी ने लिखा, “खबर में दावा किया जा रहा है कि अब किसान क्रेडिट कार्ड लोन 7% की जगह 12% ब्याज दर पर मिलेगा। यह दावा फ़र्ज़ी है। केंद्र सरकार ने केसीसी लोन के ब्याज दर को बढ़ाने के संबंध में ऐसी कोई घोषणा नहीं की है।”

जानें क्या है किसान क्रेडिट कार्ड?

किसान क्रेडिट कार्ड बैंकों की ओर से किसानों को जारी किए जाते हैं। इनकी वैधता 5 साल की होती है और मैक्सिमम लिमिट बैंकों पर निर्भर करती है। किसानों के लिए इसकी राशि उनकी आय के आधार पर तय होती है। इस कार्ड की मदद से किसान कृषि कार्यों के लिए लोन लेते हैं। लोन पर 7 % का ब्याज लगता है। यह कार्ड पाने के लिए किसान बैंकों में अप्लाई करते हैं। बैंक किसान की योग्यता की जाँच करते हैं और 3-4 दिन में किसान को सूचित करते हैं। अगर बैंक को लगता है कि किसान यह कार्ड पाने योग्य हैं तो उससे जरूरी कागजात माँगे जाते हैं। जरूरी कागज या तो बैंकों में जमा होते हैं या बैंक की ओर से आकर कोई उन्हें घर से ले जाता है। सारी जाँच और वेरिफिकेशन के बाद किसानों को यह कार्ड उपलब्ध करवाया जाता है।

UP पुलिस ने बताया- गब्बर सिंह को मिली किस बात की सजा: Video

“अअआआ… थू.. सूअर के बच्चों।” ये वाक्य सुनते ही हमें बॉलीवुड के एक कालजयी किरदार गब्बर सिंह की याद आ जाती है। लेकिन गब्बर सिंह को शोले फिल्म में आखिर में पुलिस अधिकारी ठाकुर बलदेव सिंह द्वारा दी गई सजा भुगतनी पड़ी। गब्बर को जय-वीरू के घूँसों के साथ-साथ नोक वाले जूते से भी मार खानी पड़ी थी।

लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया है कि गब्बर सिंह को ये सजा बसंती को किडनैप करने या फिर रामगढ़ वालों पर अत्याचार के लिए नहीं मिली, बल्कि यहाँ-वहाँ थूकने के लिए मिली थी।

जी हाँ, उत्तर प्रदेश पुलिस ने कोरोना वायरस महामारी के बीच एक बेहद क्रिएटिव संदेश के जरिए लोगों को जागरूक करने के लिए डायरेक्टर रमेश सिप्पी द्वारा निर्देशित 1975 की फिल्म ‘शोले’ का सहारा लिया है।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इस वीडियो सन्देश को शेयर किया है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने ये वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, “गब्बर को मिली किस बात की सजा?” इस सन्देश में फिल्म के खलनायक गब्बर सिंह को थूकते हुए दिखाया गया है और उसके बाद बताया गया है कि उसे किस तरह से इसका अंजाम भुगतना पड़ा।

वीडियो के अंत में गब्बर सलाखों के पीछे दिखाया गया है और एक सन्देश उभर आता है, “सार्वजानिक स्थानों पर थूकने से Covid-19 के प्रसार का खतरा बढ़ सकता है। यह एक दंडनीय अपराध है।”

उत्तर प्रदेश पुलिस ने वीडियो में एक अंतिम संदेश देते हुए लिखा है, “सार्वजानिक स्थानों पर न थूकें। उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा ‘जान हित’ में जारी। यह वीडियो अब लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गया है और बड़े स्तर पर शेयर भी किया जा रहा है।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए विभिन्न राज्यों में सरकारें अपने-अपने तरीके आजमा रही हैं। इस वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सबसे ज्यादा आवश्यक इसके प्रति जागरूकता है। यही कारण है कि लोगों को रचनात्मकता के जरिए सरकार और पुलिस जागरूक करने का प्रयास कर रही है।

प्यारे मियाँ ने 5 नाबालिगों का किया रेप, एक पीड़िता की मौत: खा ली थी बहुत ज्यादा नींद की गोली

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के हाई प्रोफाइल प्यारे मियाँ यौन शोषण मामले में अब नया केस सामने आया है। इस मामले में शहर के सरकारी बालिका गृह में रह रही यौन शोषण कांड की 17 वर्षीय एक पीड़िता ने अधिक मात्रा में नींद की गोलियाँ खा लीं, जिस वजह से उनकी मृत्यु हो गई

बुधवार (20 जनवरी, 2021) की रात को पीड़िता को गंभीर स्थिति में हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था। भोपाल जिला प्रशासन ने इस मामले में न्यायिक जाँच के आदेश दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले साल जुलाई में स्थानीय अखबार चलाने वाले आरोपित प्यारे मियाँ (68) के खिलाफ पाँच नाबालिग लड़कियों के साथ कई बार बलात्कार करने का मामला दर्ज किया गया था। वहीं जिस लड़की ने नींद की गोलियाँ लीं, वह भी इन पीड़ितों में से एक थी।

भोपाल आईजी उपेंद्र जैन ने मामले की जानकारी देते हुए बुधवार को बताया था कि पीड़ित लड़की का सरकारी हमीदिया अस्पताल में इलाज चल रहा है और उसकी हालत बेहद नाजुक है।

पुलिस अधिकारी ने बताया था कि घटना के बाद जिलाधिकारी ने मामले की न्यायिक जाँच के आदेश दिए हैं। उन्होंने बताया कि जाँच रिपोर्ट के बाद ही घटना के पीछे की असल कहानी का पता चलेगा।

सरकारी अस्पताल में ज्यादा मात्रा में नींद की गोलियों का सेवन करने वाली दुष्कर्म पीड़िता को वेंटिलेटर पर रखा गया था। लेकिन स्थिति नाजुक ही बनी रही और उनकी मौत हो गई। पुलिस पूरे मामले में यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आखिर कैसे आश्रय गृह में पीड़िता को नींद की गोलियाँ मिलीं।

गौरतलब है कि यह मामला पिछले साल तब सामने आया था, जब देर रात गश्त करती पुलिस पार्टी को 5 लड़कियाँ सड़क पर दिखी थीं। कारण पूछा गया था तो जवाब देने के हालत में एक भी लड़की नहीं थी। सब शराब के नशे में थीं।

नाबालिग लड़कियों का शराब के नशे में होना पुलिस को खटका था। पुलिस ने सभी 5 लड़कियों को चाइल्ड लाइन को सौंप दिया था। फिर इनकी काउंसलिंग की गई थी। जब पूछताछ हुई तो इन्होंने अपने साथ हुए यौन शोषण का खुलासा किया था।

प्यारे मियाँ अपनी सहायक स्वीटी विश्वकर्मा की मदद से इन लड़कियों को अपने यहाँ नाचने के लिए बुलाता था। विष्णु हाइट्स स्थित फ्लैट में पार्टी के दौरान प्यारे मियाँ द्वारा एक नाबालिग का यौन शोषण करने की बात भी सामने आई थी।

इन पाँचों लड़कियों ने भी प्यारे मियाँ पर लैंगिक शोषण का आरोप लगाते हुए कहा था कि उन्हें समय-समय पर उस फ्लैट में ले जाया जाता था। उन्हें इसके लिए धनराशि भी दी जाती थी। बता दें कि इस मामले के सभी आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

काम की समीक्षा से डर लगता है साहेब: जामिया से JNU तक शिक्षकों में परफॉर्मेंस रिव्यू का खौफ

जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय द्वारा जारी एक आदेश में कहा गया है कि अब यह निर्धारित करने के लिए शिक्षकों की परफॉर्मेंस की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी कि उनकी नौकरी जारी रहनी चाहिए या उन्हें केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 के अनुसार समय से पहले सेवानिवृत्त किया जाना चाहिए।

इस फैसले की जामिया टीचर्स एसोसिएशन (Jamia Teachers Association) द्वारा आलोचना की जा रही है और शिक्षक और यूनिवर्सिटी प्रबंधन आमने-सामने आ गए हैं। एसोसिएशन का कहना है कि सीसीएस (Central Civil Services) के नियम विश्वविद्यालय के शिक्षकों के लिए लागू नहीं होते हैं, इसलिए आदेश को वापस लिया जाए। एसोसिएशन ने इस संबंध में बुधवार (जनवरी 20, 2021) को एक मीटिंग बुलाई, जिसमें समस्त शिक्षकों ने इस आदेश का विरोध किया।

समाचार पत्र ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के आदेश में कहा गया है कि अब शिक्षकों के परफार्मेंस का रिव्यू किया जाएगा, इसके आधार पर तय होगा कि उनकी नौकरी जारी रखी जाए, या उन्हें केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 के अनुसार समय से पहले सेवानिवृत्त कर दिया जाए।

जामिया टीचर्स एसोसिएशन के सचिव मोहम्मद इरफान कुरैशी ने कहा कि पूरे जेटीए चुनाव आयोग की एक राय थी कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया एक स्वायत्त निकाय है, जहाँ सीसीएस नियम लागू नहीं किया जा सकता है। इसलिए, JTA रजिस्ट्रार, JMI से माँग करता है कि वह तत्काल प्रभाव से कार्यालय के आदेश को वापस ले ले।

JNU के शिक्षकों ने जताई थी अटेंडेंस के नियमों पर आपत्ति

उल्लेखनीय है कि इससे पहले, कायदे-कानून विकसित करने या उनके अनुसरण पर JNU के शिक्षक भी जमकर नौटंकी कर चुके हैं। साल 2018 में JNU प्रशासन ने कहा था कि अगर कोई शिक्षक अटेंडेंस के नियम को नहीं मानेगा तो उसे छुट्टी नहीं दी जाएगी। यूजीसी के रेगुलेशंस के मुताबिक, पूरे साल के 180 टीचिंग के दिनों में शिक्षक का सप्ताह का वर्कलोड 40 घंटे से कम नहीं होना चाहिए। इस मानक को ही लागू करने के लिए अटेंडेंस के यह नियम बनाए गए, जिसके तहत शिक्षकों को अटेंडेंस रजिस्टर साइन करना जरूरी बताया गया। लेकिन शिक्षक एसोसिएशन ने इसका विरोध किया और JNU में ‘बिगड़ते हालात’ का हवाला देते हुए 24 घंटे की भूख हड़ताल करने की बात कही थी।

परफॉर्मेंस की समीक्षा से समस्या क्या है?

चाहे केंद्रीय यूनिवर्सिटी हो, किसी राज्य का कोई विद्यालय या फिर कोई अन्य सरकारी कार्यालय, अक्सर यही मानसिकता हर बड़े-छोटे स्तर पर देखने को मिलती रहती है। सवाल यह उठता है कि अपने काम की समीक्षा से भय किस बात का? वह भी तब, जब आप एक प्रतिष्ठित संस्थान का हिस्सा हों और किसी न किसी तरह से बाकी लोगों से अलग होने का विचार अपने भीतर रखते हों।

खासकर, शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों का ही नियम-कानून और कायदों के प्रति विरोधाभास हास्यास्पद विषय बन जाता है। यह एक ओएमआर शीट पर कुछ चिन्हों पर निशान लगाकर कम से काम साठ साल की राशन का जुगाड़ कर देने वाली मानसिकता ही इस देश में ‘क़्वालिटी’ के साथ सबसे बड़ा खिलवाड़ साबित होती आई है। इससे भी अधिक चिंताजनक सवाल यह है कि जिस तंत्र में मूल्याँकन और समीक्षा को लेकर इतना भय व्याप्त है, वह ‘क्रांति’ की बातें सोच भी कैसे पाता है?

Pak ने शाहीन-3 मिसाइल टेस्ट फायर किया, हुए कई घर बर्बाद और सैकड़ों घायल: बलूच नेता का ट्वीट, गिरना था कहीं… गिरा कहीं और!

पाकिस्तान ने बुधवार (20 जनवरी, 2021) को सतह से सतह पर मार करने वाली अपनी बैलिस्टिक मिसाइल शाहीन-3 का परीक्षण किया। पाकिस्तान आर्मी ने दावा किया है कि परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता से लैस इस मिसाइल की रेंज 2750 किलोमीटर है।

मिसाइल के लॉन्च होते ही पाकिस्तान सेना के प्रोपेगेंडा आर्म- इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) ने कहा कि शाहीन-3 मिसाइल का ‘सफल’ लॉन्च’ “हथियार प्रणाली के विभिन्न डिजाइन और तकनीकी मापदंडों को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से” था।

हालाँकि, पाकिस्तानी सेना के शाहीन-3 मिसाइल के सफल परीक्षणों के विपरीत, पाकिस्तान से और भी कई रिपोर्ट्स सामने आ रही है। इससे पता चलता है कि पाकिस्तान का यह परीक्षण उसकी बड़ी विफलता थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक मिसाइल बलूचिस्तान के नागरिक क्षेत्र में गिरा, जिसने कई घरों को तबाह कर दिया। साथ ही कई नागरिक घायल भी हो गए।

बलूचिस्तान की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक पार्टियों में से एक बलूच रिपब्लिकन पार्टी ने खुलासा किया कि पाकिस्तान आर्मी ने लेटेस्ट शाहीन-3 मिसाइल को डेरा गाजी खान के राखी क्षेत्र से फायर किया था और उसे नागरिक आबादी वाले डेरा बुगती के मैट क्षेत्र में गिराया गया।

बलूच रिपब्लिकन पार्टी ने ट्विटर पर पोस्ट करते हुए कहा कि सुरक्षा बलों ने कल रात क्षेत्र में सभी असुरक्षित जगहों को खाली करा दिया, लेकिन इस मिसाइल को उस क्षेत्र में विस्फोट कर दिया, जहाँ पहले से नागरिक मौजूद थे। इस विस्फोट ने कई घरों को नष्ट कर दिया और कई लोगों को घायल कर दिया है।

BRP के केंद्रीय प्रवक्ता शेर मोहम्मद बुगती ने यह आरोप भी लगाया कि पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान को प्रयोगशाला में बदल दिया है।

सोशल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शाहीन-3 के फेल परीक्षण में कई लोगों को गंभीर चोटें आईं। बुगती ने बताया कि इसके बावजूद घायलों को अभी तक इलाज के लिए अस्पताल नहीं ले जाया गया।

एक अन्य बलूच नेता फ़ाज़िला बलूच ने भी बताया कि कैसे 1998 में पाकिस्तान ने चागी में एक परमाणु मिसाइल का परीक्षण किया था, जिसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

बुगती ने विश्व के नेताओं से मिसाइल परीक्षण का खुलासा करने के लिए डेरा बुगती का दौरा करने का आग्रह किया, जिसके कारण बलूचिस्तान में विनाश हुआ है।

बॉलीवुड में कास्टिंग काउच: काम के नाम पर हीरोइन-मॉडलों से देह का धंधा करवाता था ‘प्रेम’

मुंबई क्राइम ब्रांच ने एक कास्टिंग काउच रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मामले में प्रेम (कोड नेम) और 2 महिलाओं को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये लोग विज्ञापनों, वेब सीरिज और फिल्मों में काम दिलाने के नाम पर स्ट्रगलिंग मॉडल और अभिनेत्रियों को देह व्‍यापार के धंधे में धकेलने का काम करते थे।

मीडिया रिपोर्ट्स में मुंबई क्राइम ब्रांच की क्रिमिनल इंटेलिजेंस यूनिट (CIU) के एपीआई सचिन वेज के हवाले से बताया गया है कि ‘प्रेम’ कास्टिंग निर्देशक और फिल्म निर्माता है। मुखबिरों से सूचना मिली थी कि वह स्ट्रगल कर रही मॉडल और एक्ट्रेस को फिल्मों में रोल दिलाने का सपना दिखाकर अपने जाल में फँसाता है। उसके बाद उन्हें ब्लैकमेल कर वेश्यावृत्ति में धकेल देता है।

सचिन वेज ने बताया कि यह गिरोह कई वेबसाइटों का इस्तेमाल कर इस घिनौने खेल को अंजाम देता था। वेबसाइटों के जरिए ग्राहकों से संपर्क किया जाता था। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने इस पूरे गिरोह को रंगे हाथ पकड़ने के लिए एक जाल बिछाया। इसके तहत नकली ग्राहक बनकर अधिकारियों ने प्रेम के खाते में 2 लाख रुपए जमा करवाए।

जाल में आरोपितों को फँसता देख CIU ने सामाजिक सेवा (SS) शाखा के साथ मिलकर 19 जनवरी को जुहू के रमाडा प्लाजा होटल से प्रेम को एक महिला के साथ पकड़ लिया। बता दें, प्रेम के साथ पकड़ी गई महिला पश्चिम बंगाल के कोलकाता की रहने वाली है। उसे भी एक्ट्रेस बनाने के नाम पर इस धंधे में धकेल दिया गया था। कथिततौर पर पूछताछ के बाद क्राइम ब्रांच ने आरोपितों द्वारा बताए गए ठिकानों से 8 पीड़ित महिलाओं को भी रेस्क्यू किया।

मामले में जारी प्रेस नोट के मुताबिक, “प्रारंभिक जाँच में पता चला है कि इनके कब्जे से मुक्त कराई गई पीड़ित महिलाओं ने कई विज्ञापनों में मॉडल के रूप में काम किया है और विभिन्न फिल्मों, वेब सीरिज आदि में भी वे काम कर चुकी हैं। पीड़ितों ने बताया कि आरोपित मॉडलिंग और एक्टिंग कराने के नाम पर ‘समझौता’ करने को कहता था।”

प्रेम और अन्य दो महिलाओं के खिलाफ मुंबई के जुहू पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120बी, 370, 34 के साथ अनैतिक तस्करी अधिनियम (पीआईटीए) के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया है। आरोपितों के पास से 5,59,000 रुपए नकद, 15 स्मार्टफोन और एक डस्टर कार बरामद की गई है।