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जबरन गर्भ-निरोधन, प्रताड़ना कैंपों में उइगर मुस्लिमों का सफाया: चीन में नरसंहार पर USA की रिपोर्ट

संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के विदेश मामलों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को देखने वाले स्टेट डिपार्टमेंट ने चीन को शिनजियांग में उइगर मुस्लिमों के ‘नरसंहार’ के लिए जिम्मेदार ठहराया है। ट्रम्प प्रशासन ने कहा कि चीन अपने उत्तर-पश्चिमी हिस्से में उइगर व अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ बड़े स्तर पर दमनकारी अभियान चला रहा है, जो मानवता के खिलाफ अपराध है। नजरबंदी कैम्पों और जबरन गर्भ-निरोधन की खास तौर पर निंदा की गई है।

इसे पिछले दशक में चीन का सबसे बड़ा मानवाधिकार उल्लंघन माना जाता है। गौर करने वाली बात ये है कि डोनाल्ड ट्रम्प राष्ट्रपति के रूप में व्हाइट हाउस में अपना अंतिम दिन व्यतीत कर रहे हैं और इसी दौरान ये रिपोर्ट आई। पिछले 4 वर्षों से दोनों देशों के बीच बिगड़ते रिश्तों में नए ‘खोज’ के बाद और दरार पड़ सकती है। अमेरिकी विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अमेरिका में कोई भी सरकार आ जाए, अगले कई वर्षों तक चीन एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।

अमेरिका के स्टेट सेक्रेटरी माइक पोम्पियो ने कहा कि नरसंहार अभी भी चालू है और क्रमबद्ध तरीके से चीन की सरकार द्वारा उइगर मुस्लिमों का सफाया किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चीन पूरी तरह से इस एथनिक समूह को मिटा देना चाहता है। अब इस टिप्पणी के बाद जो बायडेन के अंतर्गत भी अमेरिका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन के खिलाफ नए प्रतिबंध लगा सकता है। वो खुद इसे एक भाषण में नरसंहार करार चुके हैं।

अमेरिका ने चीन की इस तरह से भर्त्सना अब तक नहीं की थी, जैसा उइगर मामले में किया गया है। यूएस ने कहा है कि एक राष्ट्रीय, एथ्निकल, रेसियल और धार्मिक समूह को बर्बाद किया जा रहा है। स्टेट डिपार्टमेंट के कई अधिकारी और अधिवक्ता इस पर कई दिनों से बहस कर रहे थे, लेकिन रिपोर्ट अब ट्रम्प प्रशासन के अंतिम दिन पेश की गई है। इस मामले में भी अमेरिका के कई अधिकारी आमने-सामने हैं। कुछ चीन पर कड़े प्रतिबंध की वकालत नहीं भी करते।

चीन पहले ही अमेरिका के आरोपों को नकार चुका है। उसका कहना है कि ये अमेरिकी राजनेताओं की एक ‘बेईमानी भरी छलरचना’ है। इसे वो ‘सदी की सबसे बड़ी कंस्पीरेसी’ कहता रहा है। शिनजियांग में प्रोपेगंडा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर सु सुइसियांग ने कहा कि चीन का हर समुदाय का हर व्यक्ति सुरक्षित, सटीक और उचित बर्थ कंट्रोल मेजर अपनाने को स्वतंत्र है। उन्होंने ‘जबरन गर्भ-निरोधन’ के आरोप नकार दिए।

अमेरिकी मीडिया इसे देश में कोरोना वायरस से मरने वाले 4 लाख लोगों और कैपिटल हिल इमारत में हुई हिंसा की खबरों को ढकने का माध्यम भी बता रहे हैं। वहीं उइगर नेताओं ने अमेरिका की इस रिपोर्ट पर ख़ुशी जताते हुए कहा कि ये पीड़ितों पर हो रहे अत्याचार को वैश्विक स्तर पर उठाने में काम आएगा। एक उइगर मुस्लिम की अम्मी ऐसे ही कैइस डिटेंशन कैंप में है। उसने भी इसका स्वागत किया। इसे पहले कनाडा ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को इस अपराध के लिए जिम्मेदार ठहराया था।

एंटोनी जे ब्लिंकन को अमेरिका का नया स्टेट सेक्रेटरी नॉमिनेट किया गया है और उन्होंने भी इस रिपोर्ट का समर्थन किया है। उन्होंने चीन को सबसे बड़ी चुनौती बताया। कुछ अमेरिकी अधिकारी चाहते थे कि अमेरिका इसे ‘नरसंहार’ न कहे, क्योंकि उसने म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लिमों के खिलाफ अत्याचार को ‘एथनिक क्लींजिंग’ कहा था। जो बायडेन विभिन्न पदों पर रहते हुए चीन की कई बार सार्वजनिक आलोचना कर चुके हैं।

हाल ही में अमेरिका स्थित चीनी दूतावास के एक ट्वीट में चीन के शिनजियांग प्रान्त स्थित यातना शिविरों में रखी गई उइगर औरतों के लिए दावा किया गया था कि वे अब ‘स्वच्छंद’ हैं और अब वह बच्चे ‘पैदा करने की मशीन’ नहीं रह गई हैं। ट्वीट के सामने आते ही इसकी जम कर आलोचना हुई, जिसके बाद ट्विटर ने भी इस ट्वीट को हटा दिया था। दूतावास द्वारा शेयर किए गए लेख में दावा किया गया था कि चीन ने उस क्षेत्र में ‘मजहबी कट्टरपंथ’ समाप्त कर दिया है।

भ्रष्टाचार पर सख्त योगी सरकार: UP पुलिस के ही भगोड़े IPS ऑफिसर की संपत्ति होगी कुर्क, बज चुकी है डुगडुगी

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में हर भ्रष्टाचारी के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। हाल में गाज गिरी है आईपीएस अरविंद सेन पर। पशुधन फर्जीवाड़े में आरोपित पाए गए पुलिस अधिकारी फिलहाल फरार चल रहे हैं लेकिन प्रशासन ने उनकी संपत्ति कुर्क करने का मन बना लिया है। सारी औपचारिकताएँ भी पूरी हो गई हैं। मुमकिन है 20 जनवरी 2021 या 21 जनवरी 2021 को इस काम के लिए तारीख तय कर दी जाए।

इससे पूर्व प्रशासन ने फरार चल रहे आईपीएस को पकड़ने के लिए 50 हजार रुपए का इनाम घोषित करवाया था। उन्हें ढूँढने के लिए कई टीमें काम पर लगी हुई हैं। अधिकारी पर शिकंजा कसने के लिए उनके गोमतीनगर के विराटखंड और अयोध्या स्थित आवास पर कुर्की का नोटिस चस्पा किए गए थे। न्यायालय ने भी उन्हें भगोड़ा घोषित करते समय संपत्ति कुर्क के आदेश दिए थे

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कुछ समय पहले अरविंद सेन की लोकेशन बाराबंकी टोल गेट पर मिली थी। उस समय पुलिस ने बड़ी सतर्कता से वहाँ घेराबंदी की, लेकिन उनका पता नहीं चला। अब कहा जा रहा है कि पुलिस उनकी कई संपत्तियों का ब्योरा निकलवाएगी।

आईपीएस अरविंद सेन ने लखनऊ की संपत्ति अपने परिजनों के नाम पर ली है। इसलिए इस संबंध में पुलिस विधिक राय ले रही है। कुछ दिन पहले पुलिस गोमतीनगर स्थित आईपीएस के घर गई थी। लेकिन वहाँ से वह कोई जानकारी नहीं जुटा पाए।

गौरतलब है कि इस पूरे मामले में इंदौर के व्यापारी मंजीत सिंह भाटिया उर्फ रिंकू द्वारा लखनऊ के हजरतगंज थाने में तहरीर दी गई थी, जिसके बाद इस केस में एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत में आशीष रॉय, मोंटी गुर्जर, उमेश मिश्रा सहित 13 अभियुक्तों को नामजद किया गया था। आईपीएस अरविंद सेन को खोजने के लिए UP पुलिस डुगडुगी भी पिटवा चुकी है।

केस में पूरी पड़ताल के बाद अरविंद सेन का नाम उजागर हुआ था। मंजीत सिंह भाटिया का आरोप था कि पशुपालन विभाग में ठेका दिलाने के नाम पर उनसे 10 करोड़ रुपए हड़पे गए। बता दें कि यह मामला 13 जून 2020 को उजागर हुआ था। इसके बाद से करीब 14 लोग इसमें गिरफ्तार भी हुए। 11 के ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर है।

जाँच के दौरान पुलिस को सचिवालय से जुड़े लोगों के नाम पता चले थे। इनमें 2 कर्मचारी और तीन होमगार्ड थे। इन पर आरोप था कि ये लोग पीड़ित व्यापारियों की गाड़ी को बिना प्रवेश पास के सचिवालय के अंदर जाने में सहयोग करते थे। साथ ही ये कर्मचारी ही फर्जी दफ्तर बनाने में सहायता भी करते थे।

‘हमारे नागरिकों के हितों की अनदेखी और यूरोप वालों को छूट’: केंद्र की Whatsapp को 2 टूक – भेदभाव नहीं चलेगा

भारत में Whatsapp की नई प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर न सिर्फ जनता ने आक्रोश जताया, बल्कि केंद्र सरकार भी इस मामले में सतर्क हो गई है। अब केंद्र सरकार ने फेसबुक के स्वामित्व वाले Whatsapp से कहा है कि वो भारतीय यूजरों की ‘इन्फॉर्मेशन प्राइवेसी और डेटा सिक्योरिटी’ का सम्मान करे। साथ ही इंस्टेंट मैसेजिंग एप को ये भी कहा गया है कि वो अपनी नई प्राइवेसी पॉलिसी को भारत में लेकर नहीं आए।

TOI की खबर के अनुसार, सरकार ने व्हाट्सएप्प की नई वैश्विक प्राइवेसी पॉलिसी अपडेट को लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। इसके आने के बाद यूजर्स को व्हाट्सएप्प से साथ कुछ सूचनाएँ साझा करनी पड़ेगी, जिन्हें वो अपने पार्टनर्स फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे एप्स के साथ शेयर कर सकता है। प्लेटफॉर्म का दावा है कि इससे उसे यूजर्स की पसंद-नापसंद को समझने में आसानी होगी और उसके हिसाब से कंटेंट्स पेश किए जाएँगे।

केंद्र सरकार को आशंका है कि भारतीय यूजर्स की इन सूचनाओं का न सिर्फ गलत इस्तेमाल किया जा सकता है, बल्कि इससे उनकी सुरक्षा को भी खतरा उत्पन्न हो सकता है। देश में Whatsapp का प्रयोग करने वाले उपभोक्ताओं की बड़ी संख्या को देखते हुए ये आशंका जताई गई है। साथ ही फेसबुक का प्रयोग करने वालों की संख्या भी दसियों करोड़ में है। केंद्रीय आईटी मंत्रालय ने CEO विल कैथकार्ट को उन प्रश्नों की सूची भेजी है, जिनके जवाब उन्हें देने पड़ेंगे।

अभी तक इसका कोई जवाब नहीं दिया गया है। केंद्र सरकार पिछले एक सप्ताह से पहले से ही इस मामले पर नजर रखे हुए थी और जनता की चिंताओं को समझने का प्रयास कर रही थी, जिसके बाद ये कदम उठाया गया। सरकार को इस बात से आपत्ति है कि जो व्हाट्सएप्प की नई प्राइवेसी पॉलिसी को स्वीकार नहीं करेंगे, उन्हें इसके प्रयोग की अनुमति नहीं होगी। साथ ही यूरोप की जनता को दी जा रही सहूलियत और छूट को लेकर भी सरकार ने व्हाट्सएप्प से सवाल पूछा है कि भारत के साथ दोहरा रवैया क्यों?

भारत सरकार अब यहाँ के नागरिकों के लिए भी डेटा प्रोटेक्शन के नए नियम लेकर आ सकती है, ताकि भविष्य में इस तरह के अपडेट्स के लिए लोगों को मजबूर न किया जा सके। केंद्र सरकार ने कहा है कि भारत के लोगों के अधिकार और हितों को ठेस पहुँचाने वाला Whatsapp यूरोपियन यूजरों को छूट दे रहा है, जो यहाँ के नागरिकों के साथ सौतेला व्यवहार है। इसे भेदभाव वाला व्यवहार करार दिया गया है।

भारत सरकार ने कहा है कि वो देश के नागरिकों की डेटा की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है और इसके लिए कदम उठाए जाएँगे। साथ ही ‘या तो अपडेट स्वीकार करो या व्हाट्सएप्प छोड़ दो’ वाले फैसले को सरकार ने ‘मोलभाव’ करार दिया है। व्हाट्सएप्प से दूसरे देशों में उसकी नीतियों को लेकर भी पूरा विवरण माँगा गया है। उस सर्वर के बारे में भी जानकारी माँगी गई है, जहाँ भारतीयों का डेटा स्टोर कर के रखा जाएगा।

विल कैथार्ट (Will Cathcart) को कड़े शब्‍दों में लिखे गए इस पत्र में इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एंड इनफॉर्मेशन टेक्‍नोलॉजी मिनिस्‍ट्री ने कहा है कि पूरी दुनिया में व्‍हाट्सएप के सबसे ज्‍यादा यूजर भारत में हैं और इसकी सेवाओं के लिए यह एक बहुत बड़ा बाजार है। भारत की संसद पहले से ही पर्सनल डेटा संरक्षण विधेयक पर विचार कर रही है। ये संसद के दोनों सदनों की ज्वाइंट सेलेक्ट कमिटी द्वारा विचार के एक अग्रिम चरण पर है।

महाराष्ट्र पंचायत चुनाव में 3263 सीटों के साथ BJP सबसे बड़ी पार्टी, ठाकरे की MNS को सिर्फ 31 सीट

महाराष्ट्र में हुए पंचायत चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है। वहीं शिवसेना ने दावा किया है कि सत्ताधारी गठबंधन ‘महा विकास अघाड़ी (MVA)’ को राज्य की ग्रामीण जनता ने पहली पसंद बनाया है। मुखपत्र ‘सामना’ के माध्यम से पार्टी ने कहा कि केंद्रीय जाँच एजेंसियों की मदद से ‘राजनीतिक क्रांति’ नहीं आ सकती। उसने भाजपा को जनादेश शिरोधार्य करने की सलाह देते हुए कहा कि ऐसा न करने पर जनता पार्टी को और नुकसान पहुँचाएगी।

महाराष्ट्र पंचायत चुनाव में भाजपा को जहाँ 3263 सीटें मिली हैं, वहीं शिवसेना 2808 पर आकर रुक गई। शरद पवार की NCP दूसरे नंबर की पार्टी बन कर उभरी, जिसकी सीटों की संख्या 3000 से मात्र 1 कम रही। कॉन्ग्रेस भी 2151 सीटें जीतने में कामयाब रही। राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का प्रदर्शन बहुत ही बुरा रहा और पार्टी को 31 सीटों से संतोष करना पड़ा। अन्य के खाते में 2510 सीटें गईं।

राज्य में 12,711 ग्राम पंचायतों के लिए चुनाव हुए थे, जिसमें 1.25 लाख उम्मीदवार उम्मीदवार विभिन्न पदों पर विजयी हुए। इन चुनावों को पार्टी के सिंबल पर नहीं लड़ा जाता, लेकिन राजनीतिक पार्टियाँ अपने पैनल चुनावी मैदान में उतारती हैं। या फिर उम्मीदवारी पर निर्णय को स्थानीय नेताओं के हवाले कर दिया जाता है। जहाँ MVA जीत का दावा कर रहा है, भाजपा और मजबूत होकर उभरने और सबसे बड़ी पार्टी होने का दम भर रही।

हालाँकि, अभी भी इन आँकड़ों में कुछ बदलाव आ सकता है क्योंकि पार्टियों ने अलग-अलग आँकड़े तो दिए ही हैं, साथ ही कुछ सीटों के लिए मतगणना अभी भी जारी है। अब एक सप्ताह के बाद विभिन्न पंचायत स्तर की समितियों का चुनाव होगा, जिसके लिए चारों पार्टियाँ जुट गई हैं। शरद पवार ने कहा है कि पंचायत स्तर पर भी MVA गठबंधन उसी तरह काम करेगा, जैसे मुंबई में सरकार चल रही है।

उद्धव ठाकरे का अब तक का पूरा कार्यकाल ही विवादों से भरा रहा है। जहाँ शुरू में विधायकों को रिसोर्ट में डालने से सब कुछ शुरू हुआ था, वहीं जून 2020 में सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद सरकार के खिलाफ असंतोष भड़का। कंगना रनौत जैसे आलोचकों के खिलाफ कार्रवाई की गई। बॉलीवुड माफिया को संरक्षण देने का आरोप लगा। अब सीएम के एक बयान के बाद कर्नाटक से राज्य का झगड़ा फिर शुरू हो गया।

लोगों के जबरदस्त विरोध के बाद वेब सीरीज ‘तांडव’ में बदलाव करेंगे प्रोड्यूसर-डायरेक्टर, अली अब्बास जफ़र ने फिर से माँगी माफी

एक्टर सैफ अली खान की वेब सीरीज तांडव को लेकर जमकर बवाल मचा हुआ है। सीरीज पर हिन्दू देवी-देवताओं के अपमान करने का आरोप लगा है। इस बीच सोमवार (जनवरी 18, 2021) को मेकर्स ने स्टेटमेंट जारी माफी माँगी थी। अब मेकर्स ने कहा है कि वह जल्द ही में सीरीज में बदलाव करने जा रहे हैं। इसकी जानकारी सीरीज के डायरेक्टर अली अब्बास जफर ने ट्वीट करके दी है। 

अली अब्बास जफर ने ट्वीट किया, ”हमारे मन में देश के लोगों की भावनाओं के प्रति बहुत सम्मान है। हमारा इरादा किसी व्यक्ति, जाति, समुदाय, नस्ल, धर्म, धार्मिक समुदाय, राजनीतिक दल, जीवित या मृत व्यक्ति की भावनाओं को चोट पहुँचाना नहीं था। तांडव के कास्ट और क्रू ने सीरीज के कंटेंट में बदलाव करने का फैसला लिया है। इस मामले में हम सूचना और प्रसारण मंत्रालय से मिले सपोर्ट के लिए उन्हें धन्यवाद कहना चाहते हैं। अगर सीरीज ने अनजाने में किसी किसी भावना को आहत किया है तो हम उसके लिए एक बार फिर माफी माँगते हैं।”

बयान के अनुसार, ‘‘तांडव की पूरी यूनिट ने वेब सीरीज को लेकर जताई गई चिंताओं पर ध्यान देने के लिए इसमें बदलाव करने का फैसला किया है।’’ अमेजन प्राइम की वेब सीरीज़ ‘तांडव’ को लेकर उठे विवाद के बाद इसके निर्माता बैकफुट पर हैं। इस पर उठे विवादों को बाद इस वेब सीरीज के निर्माताओं ने शो में बदलाव करने का निर्णय लिया है।

इससे पहले तांडव वेब सीरीज को लेकर निर्माताओं ने माफी माँगी थी। वेब सीरीज के निर्माताओं की ओर से जारी बयान में कहा गया था, “वेब सीरीज की कास्ट और क्रू मेंबर्स का मकसद किसी व्यक्ति, जाति, संप्रदाय, नस्ल, धर्म या फिर सामुदायिक समूह की भावनाएँ आहत करना नहीं था। इसके तहत किसी संस्थान, राजनीतिक दल या फिर किसी जीवित या मृत व्यक्ति के सम्मान को ठेस पहुँचाने का कोई इरादा नहीं था। तांडव की कास्ट और क्रू ने लोगों की आपत्तियों को संज्ञान में लिया है। यदि किसी भी भावनाएँ इससे आहत हुई हैं तो हम बिना शर्त इसके लिए माफी माँगते हैं।”

क्या है मामला

दरअसल, तांडव वेब सीरीज के पहले ही एपिसोड में एक्टर जीशान अयूब भगवान शिव के कैरेक्टर में दिखते हैं। यह यूनिवर्सिटी के थिएटर का एक सीन है, जिसमें मंच संचालक उनसे पूछता है कि भोलेनाथ कुछ करिए। रामजी के फॉलोअर्स तो लगातार सोशल मीडिया पर बढ़ते ही जा रहे हैं। इस पर जीशान अयूब कहते हैं, क्या करूँ अपनी प्रोफाइल पिक चेंज कर दूँ। इस पर मंच संचालक कहता है कि इससे कुछ नहीं होगा। आप कुछ अलग करिए। इस सीन को लेकर पूरा विवाद हो रहा है। बीजेपी के कई नेता इस सीरीज को बैन करने तक की माँग भी कर चुके हैं।

कंगना रनौत ने सीरीज के मेकर्स से पूछा कि क्या उनमें ‘अल्लाह’ का मजाक बनाने की हिम्मत है? उन्होंने कपिल मिश्रा के ट्वीट को रीट्वीट करके लिखा, “माफी माँगने के लिए बचेगा कहाँ? ये सीधा गला काट देते हैं, जिहादी देश फतवा निकाल देते हैं, लिबरल मीडिया वर्चुअल लिंचिंग कर देती है, तुम्हें ना सिर्फ़ जान से मार दिया जाएगा बल्कि उस मौत को भी जस्टिफ़ाई किया जाएगा, बोलो अली अब्बास जफर, है हिम्मत अल्लाह का मज़ाक़ उड़ाने की?”

माकपा के गुंडों ने नारेबाजी करते हुए धमकी दी: मुस्लिम लीग के कार्यकर्ताओं को मार दिया जाएगा, शरीर पर हरे झंडे गाड़ दिए जाएँगे

मार्क्‍सवादी कम्‍युनिस्‍ट पार्टी (CPM) ने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) कैडर को मौत की धमकी जारी करते हुए कन्नूर जिले में एक जुलूस निकाला है। CPM कार्यकर्ताओं ने मुस्लिम लीग को यह धमकी सोमवार (जनवरी 18, 2021) शाम के समय तब दी। दरअसल, स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान हिंसा के मामले में कुछ CPM कार्यकर्ताओं के एक समूह को गिरफ्तार कर लिया गया था। जेल से रिहाई के समय उनके द्वारा यह नारेबाजी की गई।

मलयालम समाचार पोर्टल ‘मातृभूमि’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, केरल के कन्नूर जिले के तेलीपारंबा विधानसभा (Taliparamba assembly) क्षेत्र में मय्यल कस्बे में एक जुलूस निकाला गया, जिसमें CPM कार्यकर्ताओं ने चिल्लाते हुए कहा कि मुस्लिम लीग के कार्यकर्ता मारे जाएँगे।

मार्क्सवादी पार्टी के नेताओं ने यह भी कहा कि ‘CPM एक ऐसा संगठन है जिसने उन लोगों को ख़त्म कर दिया, जिनको पार्टी मारना चाहती थी और फिर से उन लोगों की हत्या करेगी, जिसे पार्टी मारने को कहेगी।’

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए धमकी दी और कहा कि मुस्लिम लीग के कार्यकर्ताओं को मार दिया जाएगा और उनके शरीर पर हरे झंडे गाड़ दिए जाएँगे।

गौरतलब है कि केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन समेत वामपंथी पार्टी के कई बड़े नेता कन्नूर जिले से ही हैं। इस जिले में कई हत्याएँ हुई हैं, जिसमें सीपीएम हमेशा एक तरफ ही नजर आई है जबकि, पीड़ित या तो मुस्लिम लीग, आरएसएस या फिर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता थे। इस राजनीतिक रूप से अस्थिर जिले में 300 से अधिक लोग अपनी जान गँवा चुके हैं।

वहीं, CPM द्वारा मुस्लिम लीग को दी गई धमकियों के बाद केरल पुलिस हाई अलर्ट पर है। मुस्लिम लीग के राष्ट्रीय आयोजन सचिव, ईटी मोहम्मद बशीर ने कहा, “कन्नूर जिले में सीपीएम द्वारा जारी किए गए इन मौत के खतरों पर पुलिस को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। कन्नूर में सीपीएम हमेशा से सभी राजनीतिक हत्याओं में एक पक्ष रही है।”

देवी-देवताओं को गाली देने वाले फारुकी के बचाव में सामने आया एक और ‘कॉमेडियन’, किया कश्मीरी पंडितों के नरसंहार का इस्तेमाल

‘कॉमेडियन’ समय रैना ने आज (जनवरी 19, 2021) कश्मीरी पंडित नरसंहार की 31 वीं वर्षगाँठ का हवाला देते हुए ‘कॉमेडियन’ मुनव्वर फारुकी के जेल में बंद रहने को लेकर भारतीय न्यायिक प्रणाली को कोसा। बता दें कि मुनव्वर फारुकी को इस महीने की शुरुआत में हिंदू देवताओं, गोधरा की घटना और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने के लिए गिरफ्तार किया गया था।

समय रैना ने ट्वीट किया, “आज कश्मीरी पंडित नरसंहार के 31 साल पूरे हो गए हैं। मैं चाहता हूँ कि मैं अपनी मातृभूमि, कश्मीर वापस जाऊँ, जहाँ मुझे अपनी न्यायिक प्रणाली की मृत्यु के बारे में पढ़ने के लिए इंटरनेट नहीं होगा।”

रैना, जो खुद कश्मीरी पंडित हैं, ने कश्मीरी पंडितों के पलायन की दुखद घटना का जिक्र करने के बजाय ‘कॉमेडियन’ मुनव्वर फारुकी की गिरफ्तारी के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाया। लगभग 31 साल पहले, घाटी में कश्मीरी पंडितों के खिलाफ आतंक की जहर फैल गई थी, जब मुस्लिमों की भीड़ ने कश्मीरी पंडितों को घर से निकाल दिया था और उन्हें कश्मीर छोड़ने के लिए मजबूर किया था। कश्मीरी पंडित उस बेहद भयावह नारों, अराजकता और भयंकर रात के प्रत्यक्षदर्शी बने। उस रात उनसे कहा गया था कि वो अपनी मातृभूमि से पलायन करें अथवा धर्म परिवर्तन करें या फिर मरने के लिए तैयार रहें।

मुनव्वर फारुकी की गिरफ्तारी से कश्मीरी पंडितों के पलायन को जोड़कर रैना ने उन कश्मीरी पंडितों द्वारा सहन किए गए भयावहता को तुच्छ बता दिया, जो अपने ही देश में शरणार्थी की तरह रह रहे हैं। वहीं इसके विपरीत, फारुकी लंबे समय से हिंदू देवताओं और हिंदू धर्म के खिलाफ लगातार भड़काऊ और अपमानजनक टिप्पणी कर रहा है।

फारुकी और 4 अन्य को हिंदू देवताओं पर अभद्र टिप्पणी के लिए गिरफ्तार किया गया

हिंदू रक्षक संगठन के प्रमुख एकलव्य सिंह गौर की शिकायत के आधार पर फारुकी और चार अन्य व्यक्तियों- एडविन एंथोनी, प्रखर व्यास, प्रियम व्यास और नलिन यादव को इंदौर में एक स्टैंड-अप कॉमेडी शो में हिंदू देवताओं का मजाक उड़ाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन पर आईपीसी की धारा 295-ए, 269 और अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। COVID-19 सुरक्षा प्रोटोकॉल की कथित रूप से अनदेखी के लिए धारा 269 लगाई गई थी। फारुकी को 13 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था जिसे बाद में 27 जनवरी तक बढ़ा दिया गया

यूपी पुलिस ने मुनव्वर फारुकी की हिरासत माँगी

उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुनव्वर के खिलाफ पिछले साल अप्रैल में दर्ज एक मामले को लेकर प्रोडक्शन वारंट जारी किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तर प्रदेश पुलिस ने कॉमेडियन फारूकी को अपनी गिरफ्त में लेने के लिए इंदौर सेंट्रल जेल और सीजेएम कोर्ट के समक्ष 7 जनवरी को प्रोडक्शन वारंट प्रस्तुत किया। बताया जा रहा है कि 19 अप्रैल, 2020 में आशुतोष मिश्रा नामक एक अधिवक्ता की शिकायत पर प्रयागराज जिले के जॉर्ज टाउन पुलिस स्टेशन में उसके खिलाफ दर्ज एक मामले में यह प्रोडक्शन वारंट पेश किया गया है।

पुलिस ने आरोपित पर भारतीय दंड संहिता (IPC) धारा 153A (धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 295A (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य, धर्म का अपमान कर किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को अपमानित करने का इरादा) और धारा 65 और 66 आईटी एक्ट, 2008 के तहत मामला दर्ज किया था।

पीपल्स कॉन्फ्रेंस के सज्जाद लोन ने किया गुपकार गठबंधन से किनारा, हाल ही में एक नेता ने की थी अमित शाह से मुलाकात

गुपकार गठबंधन (Gupkar alliance) में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। गुपकार के नेता और पीपल्स कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद लोन ने गठबंधन से किनारा कर लिया है। सज्जाद लोन ने इस बाबत गुपकार गठबंध के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला को पत्र लिखा है। जिसमें सज्जाद लोन ने कहा कि वह गठबंधन छोड़ रहे हैं क्योंकि अन्य दलों ने हालिया डीडीसी चुनावों में उनकी पार्टी के खिलाफ प्रॉक्सी उम्मीदवारों को मैदान में उतारा।

पत्र में सज्जाद लोन ने लिखा, “हमारे लिए यह मुश्किल है कि हम इस पर बने रहें और दिखावा करें जैसे कि कुछ भी नहीं हुआ है। पार्टनर्स के बीच विश्वास का उल्लंघन हुआ है, जो कि हमारे विचार से परे है। हमारी पार्टी में प्रमुख दृष्टिकोण यह है कि हमें गठबंधन करने के लिए चीजों की प्रतीक्षा करने के बजाय सौहार्दपूर्ण तरीके से गठबंधन से बाहर निकलना चाहिए।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों उनकी पार्टी के सीनियर नेताओं ने उन्हें पत्र लिखा था। इसमें उन्हें कहा गया कि गुपकार में रहने से उन्हें नुकसान हुआ है। ऐसे में वह गुपकार गठबंधन से किनारा कर लें। इसके बाद से लोन की तरफ से पिछले कुछ दिनों से कोई बयान नहीं आया था। गुपकार के नेताओं से भी मुलाकात नहीं की गई थी। मगर अब सज्जाद लोन ने स्पष्ट कर दिया है कि वो गुपकार गठबंधन के सदस्य नहीं हैं।

बहरहाल, आखिरकार वही हुआ, जिसकी उम्मीद की जा रही थी। जिला विकास परिषद के चुनाव संपन्न होने के बाद ही गुपकार गठबंधन बिखरने लगा है। उन्होंने घटकों में जारी वर्चस्व का खुलासा करते हुए कहा कि कोई भी घटक दल किसी दूसरे को नहीं देखना चाहता है। बता दें कि इसके घटकों में नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, जम्मू कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट, अवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस और माकपा शामिल है।

उन्होंने अपने पत्र में आगे कहा, “इस गठबंधन को बलिदान की आवश्यकता थी। गठबंधन चलाने के लिए सभी दलों को दूसरे दलों को जगह देने की जरूरत होती है। लेकिन गुपकार में कोई सहयोग नहीं कर रहा है। कोई भी दल दूसरे को जगह देने को तैयार नहीं है, कोई भी पार्टी कुछ छोड़ने को तैयार नहीं है। हमने कश्मीर में चुनाव के दौरान एक दूसरे के खिलाफ ही लड़ाई लड़ी, न कि 5 अगस्त (5 अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 का उन्मूलन) के अपराधियों के खिलाफ। 

एक नेता के अमित शाह से मिलने की आई थी खबर

पिछले दिनों गुपकार गठबंधन के एक वरिष्ठ नेता के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने की खबर सामने आई थी। वहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री बशारत बुखारी ने गठबंधन के एजेंडे पर ही सवाल खड़ा कर दिया था। उन्होंने कहा था कि अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए चुनाव के बाद एलायंस को अपना रोड मैप स्पष्ट करना चाहिए था। उसके बिना तो गुपकार गठबंधन एक और हुर्रियत कॉन्फ्रेंस बनकर रह जाएगा।

गौरतलब है कि गुपकार गठबंधन का गठन पिछले साल अक्टूबर में संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू और कश्मीर की विशेष स्थिति को बहाल करने के उद्देश्य से किया गया था। जिसे 5 अगस्त 2019 को नरेंद्र मोदी सरकार ने रद्द कर दिया था। डीडीसी चुनाव में 110 सीटें गुपकार ने जीती। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी 75 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी।

राम मंदिर के लिए दान दीजिए, लोगों को प्रेरित कीजिए

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‘कुत्ते से सेक्स करोगी क्या?’ – शर्लिन, जिया के अलावा साजिद खान ने 5 हिरोइन-लड़कियों के साथ की घिनौनी हरकत

फिल्म निर्माता साजिद खान पर अक्सर अभिनेत्रियों और मॉडल्स द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोप लगते रहे हैं। सबसे ताजा खुलासा साजिद खान (Sajid Khan) को लेकर बॉलीवुड अभिनेत्री शर्लिन चोपड़ा (Sherlyn Chopra) ने किया है। उन्होंने बताया कि किस तरह 2006 में जब वह उनसे मिलने गई तो साजिद खान ने अपना लिंग (Penis) पैंट से बाहर निकाला और उनसे इसे ‘महसूस करने’ के लिए कहा था। शर्लिन चोपड़ा ने कहा कि यह घटना उनके पिता की मौत के कुछ दिनों के बाद की ही है।

लेकिन साजिद खान पर इससे पहले भी कई अन्य अभिनेत्री और मॉडल्स यौन उत्पीड़न का आरोप लगा चुकी हैं। इनमें प्रमुख नाम सलोनी चोपड़ा, जर्नलिस्ट करिश्मा उपाध्याय, रेचल वाइट, आहना कुमरा, डिम्पल पाउला और जिया खान हैं। इन अभिनेत्रियों और मॉडल्स ने बताया कि साजिद खान ने उनका कई महीनों तक शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न किया ।

करिश्मा उपाध्याय

जर्नलिस्ट करिश्मा उपाध्याय ने #MeToo मुहीम के बाद फिल्म मेकर साजिद खान पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। जर्नलिस्ट करिश्मा ने बताया कि जब वह साजिद खान का इंटरव्यू लेने गई थीं, तो वो पूरे समय अपने प्राइवेट पार्ट की बातें करते रहे। इसके बाद उन्होंने जर्नलिस्ट के सामने ही अपनी पैंट भी उतार दी और जबरन किस (Kiss) करना चाहा लेकिन करिश्मा ने साजिद खान को धक्का मारा और वहाँ से भाग निकली।

सलोनी चोपड़ा

एक समय पर सलोनी चोपड़ा ने डायरेक्टर साजिद खान की सहायक के तौर पर काम किया था। उसी दौरान उन्होंने साजिद खान पर यौन उत्पीड़न के आरोप भी लगाए। सलोनी ने बताया कि जब वो इंटरव्यू देने के लिए साजिद के पास गई थीं तो उन्होंने कई अनाप-शनाप सवाल किए, जैसे- आप मास्टरबेट करती हैं या नहीं और अगर करती हैं तो दिन में कितनी बार करती हैं? इसके बाद साजिद उनसे ऐसे ही सवाल करते रहे लेकिन आखिरकार सलोनी को ये नौकरी मिल गई। जॉब के दौरान भी साजिद खान रात में कॉल कर उन्हें परेशान करते थे।

रेचल

रेचल वाइट ने साल 2014 में फिल्म ‘उंगली’ में इमरान हाशमी के साथ काम किया था। उन्होंने अपने टि्वटर अकाउंट से यह खुलासा किया था कि जब वो पहली बार साजिद खान से मिली थीं तो वो उनकी ब्रेस्ट के बारे में बात करते रहे और कपड़े उतारने के लिए कहा। साजिद ने कहा कि फिल्म में हीरोइन को बिकिनी पहननी है, इसलिए उन्हें अपने कपड़े उतारकर दिखाने होंगे।

अहना कुमरा

‘लिपस्टिक अंडर माय बुरका’ की अभिनेत्री अहाना कुमरा ने साजिद खान पर #मिटू मुहिम के तहत अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया था। अहना ने कहा कि साजिद खान ने उनसे 100 करोड़ रुपए लेकर कुत्ते के साथ सेक्स करने की बात कही थी।

मॉडल डिम्पल पाउला

मॉडल पाउला ने हाउसफुल के डायरेक्‍टर साजिद खान पर यौन शोषण का आरोप लगाया है। उन्होंने इंस्टाग्राम पोस्ट में आरोप लगाया है कि जब वह 17 साल की थी तो हाउसफुल में रोल देने के बदले साजिद खान ने उनका यौन शोषण करने की कोशिश की थी।

जिया खान

दिवंगत अभिनेत्री जिया खान की बहन करिश्मा ने बताया था कि उनकी बहन जिया खान का डायरेक्टर साजिद खान ने शारीरिक शोषण किया था। साजिद ने एक्ट्रेस को टॉपलेस होने को कहा था। जिया खान की बहन करिश्मा, साजिद खान पर ऐसे आरोप लगाने वाली 7वीं महिला हैं।