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शिवलिंग पर कंडोम: अभिनेत्री सायानी घोष को नेटिजन्स ने लताड़ा, ‘अकाउंट हैक’ थ्योरी का कर दिया पर्दाफाश

बंगाली फिल्म एक्ट्रेस सायानी घोष को एक पुराने हिंदूफोबिक ट्वीट के लिए आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल एक्ट्रेस ने 2015 में यह ट्वीट किया था जो कि शनिवार (जनवरी 16, 2021) को वायरल हो गया। जिसके बाद लोगों ने उन्हें ट्विटर पर निशाने पर लेना शुरू किया।

18 फरवरी 2015 को, अभिनेत्री ने एक तस्वीर पोस्ट की थी, जिसमें एक महिला को पवित्र हिंदू प्रतीक शिवलिंग के ऊपर कंडोम डालते हुए दिख रही थी। उन्होंने इस तस्वीर को कैप्शन दिया ‘Gods cudnt have been more useful’ (भगवान अब और उपकारी नहीं हो सकते)। बता दें कि हिंदू संस्कृति को अपमानित करता उनका ये ट्वीट महाशिवरात्रि के अवसर पर किया गया था, जो कि उस साल 17 फरवरी को मनाया गया था।

नेटिजन्स ने अभिनेत्री को कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी

अभिनेत्री का पुराना ट्वीट वायरल होते ही सोशल मीडिया पर तमाम तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आने लगी। मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय ने ट्वीट किया, “मिस सायानी घोष, आपने एक शिवलिंग पर कंडोम डाला है, जिसे मेरे सहित सभी हिंदू पवित्र से भी पवित्रतम मानते हैं!” उन्होंने कहा कि यह भारतीय दंड संहिता की धारा 295 ए के तहत एक संज्ञेय, गैर-जमानती अपराध है। तथागत रॉय ने चेतावनी दी, “अब परिणाम के लिए तैयार रहें।”

एक अन्य यूजर ने बंगाली में लिखा, “आपकी गंदी मानसिकता पर शर्म आती है। कोलकाता पुलिस, हिंदू देवताओं की छवि को बिगाड़ने के लिए उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करे। हम अब हिंदू धर्म के किसी भी अपमान को बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

‘ईद’ और ‘महाशिवरात्रि’ पर उनके दोहरे रवैये के लिए एक अन्य यूजर ने पूछा, “क्या यह ढोंग नहीं है? (वह) स्वरा भास्कर का बंगाली संस्करण है।”

लोगों की नाराजगी के बाज सायानी घोष ने माँगी माफी

2010 से फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाली अभिनेत्री ने इस हिंदूफोबिक ट्वीट को हैकर द्वारा किया गया ट्वीट बताया। उन्होंने दावा किया कि अपमानजनक पोस्ट हैकर की करतूत थी। उन्होंने खुद के ट्वीट को ‘अप्रिय’ करार देते हुए कहा, “डिअर ऑल, 2015 के एक पोस्ट मेरे ध्यान में लाया गया है जो अत्यंत अप्रिय है। आपकी सभी जानकारी के लिए बता दूँ कि मैंने 2010 में ही ट्विटर ज्वाइन कर लिया था लेकिन कुछ ही दिनों तक उपयोग करने के बाद मैंने उपयोग करना छोड़ दिया। हालाँकि अकाउंट बना रहा।”

उन्होंने दावा किया कि उनके पीआर एजेंट भासका रॉय ने उन्हें सूचित किया कि उनका अकाउंट हैक कर लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2017 तक खाते को पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता है। एक्ट्रेस ने जोर दिया, “मेरे पीआर भासका रॉय ने मुझे बताया कि मेरा अकाउंट हैक कर लिया गया है और हमें इसे तुरंत पुन: प्राप्त करने की आवश्यकता है। विभिन्न कारणों से, हम 2017 के बाद ही ऐसा कर पाए।”

इसके अलावा, सायानी घोष ने कहा कि कुछ अनावश्यक को छोड़कर अधिकांश पोस्ट हटा दिए गए थे। उन्होंने कहा, “मैं लोगों की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने वाली सामग्री को रोकने के लिए सख्त कदम उठाऊँगी।” अभिनेत्री ने यूजर्स से अपमानजनक पोस्ट का लिंक साझा करने का आग्रह किया ताकि वह इसे अपने ट्विटर टाइमलाइन से हटा सकें।

उन्होंने विनती की, “मुझे उम्मीद है कि गलत नहीं समझा जाएगा। मेरा धर्म मेरे लिए बहुत मायने रखता है इसलिए हमारी कोशिश एकता में है।”

नेटिजन्स ने पुख्ता सबूत के साथ ‘हैक थ्योरी’ का पर्दाफाश किया

हालाँकि, नेटिजन्स ने उनके घिसे-पिटे ‘हैक थ्योरी’ मानने से इनकार कर दिया। ऐसा इसलिए कि सायानी ने शिवलिंग की अपमानजनक तस्वीर 18 फरवरी 2015 को पोस्ट की थी और उनका कहना है कि अकाउंट हैक कर लिया गया है। मगर उसी दिन का उनका दूसरा पोस्ट कुछ और ही कहानी बयाँ करता है। उनका कहना है कि उन्हें बदनाम करने के लिए अकाउंट हैक करके शिवलिंग वाली फोटो डाली गई थी, लेकिन ये सोचने वाली बात है कि हैकर सायानी की दोस्तों के साथ उनकी सेल्फी क्यों पोस्ट करेगा? नीचे दिए गए स्क्रीनशॉट में, वह अपने दोस्त के साथ सेल्फी और अपनी वैनिटी वैन की तस्वीरें अपलोड करती हुई दिखाई दे रही है।

Screengrab of the tweets by Saayoni Ghosh via Befitting Facts

दिलचस्प बात यह है कि, सायानी घोष ने दावा किया था कि उनके खाते को 2017 तक पुन: प्राप्त नहीं किया जा सका था। हालाँकि, एक ट्विटर यूजर (@kannadaveera) ने उनके ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट साझा किए हैं, जो सितंबर और अक्टूबर 2016 की तारीख में है। उक्त ट्वीट्स में अभिनेत्री को फिल्म ‘ब्योमकेश ओ चिड़ियाखाना’ का प्रमोशन करते हुए देखा गया, जो कि 7 अक्टूबर 2016 को रिलीज होने वाली थी। उसने फिल्म से अपने कैरेक्टर के दृश्य भी साझा किए थे, जो फिल्म की रिलीज़ से एक दिन पहले थे। ऐसी सामग्री निश्चित रूप से किसी हैकर द्वारा पोस्ट नहीं की जा सकती है।

इन सब चीजों के देखते हुए नेटिजन्स ने उनकी संदिग्ध माफी को खारिज कर दिया और कथित हैकर पर दोष मढ़ने की कोशिश करने के लिए माफी न माँगने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।

‘भूखमरी वाले देश में राम मंदिर 10 साल बाद नहीं बन सकता?’: अक्षय पर पिल पड़े लिबरल्स

बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने अयोध्या में बन रहे राम मंदिर के लिए लोगों से वैसे ही दान करने की अपील की, जैसे रामसेतु बनाने के दौरान वानरों और गिलहरी ने किया था। कुछ लोगों को ये बात नागवार गुजरी और वो सेकुलरिज्म का चोला ओढ़ कर चले आए। आनंद कोयारी नाम के यूजर ने उन्हें अस्पतालों और स्कूलों के लिए चंदा इकट्ठाइकठ्ठा करने की सलाह दे दी और दावा किया कि कोरोना काल में एक भी मंदिर काम नहीं आया।

जबकि लॉकडाउन के दौरान गरीबों की देखभाल में देश ही नहीं, दुनिया भर के मंदिर आगे रहे और उन्होंने लोगों में सिर्फ जागरूकता ही नहीं फैलाई, वरन सरकारों को दान में भी बड़ी रकम दी। वहीं हरप्रीत सिंह नामक ‘किसान आंदोलन’ समर्थक ने लिखा कि अगर कोई शैक्षिक संस्थान बन रहा होता तो वो सोचता, राम मंदिर के लिए वो कभी दान नहीं देगा। राहुल शुक्ल नामक यूजर ने दावा कर डाला कि जब लॉकडाउन में सबके खाने के लाले पड़े हैं और इसने सबकी बाट लगा दी है, तब अक्षय ऐसी अपील कर गलत कर रहे हैं।

कुमार यादवेंद्र नामक यूजर ने लिखा, “इस कनाडाई नागरिक के झाँसे में नही आना। देश के दलितों-पिछड़ों-आदिवासियों-गरीबों-मजदूरों-किसानों को अपने बच्चों के लिए शिक्षा का बंदोबस्त करना चाहिए। एक-एक पैसा अपने बच्चों के बेहतर भविष्य पर खर्च करना शिक्षा जरूरी हैं। बाक़ी सब काम पीछे, शिक्षा हो आगे। इनका बेटा तो अभिनेता बनेगा। और आपका?” एक अन्य यूजर तो पैसों का ही हिसाब माँगने लगा।

अमित चौधरी नामक यूजर ने लिखा, “अब से पहले भी 1400 करोड़ रुपए इकट्ठे किए जा चुके हैं लेकिन आज तक उन पैसों का अता-पता भी नहीं है। इस देश में भूखमरी है, गरीब जनता है। उनके बारे में ध्यान देना जरूरी है। मंदिर तो आज नहीं तो कल 10 साल या 5 साल बाद फिर से बन जाएगा, लेकिन जो लोग भूख से मर रहे हैं उनका क्या?” परमवीर सिंह नामक यूजर ने उन्हें किसानों को दान देने की सलाह दे डाली।

बता दें कि बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अक्षय कुमार ने अयोध्या में निर्माणाधीन भव्य राम मंदिर के लिए डोनेशन की अपील की है। ‘खिलाड़ी’ नाम से विख्यात अभिनेता ने लिखा कि अयोध्या में हमारे भगवान श्रीराम के मंदिर का निर्माण शरू होना बहुत ख़ुशी की बात है और अब हमारी योगदान की बारी है। अक्षय ने बड़ी जानकारी दी कि उन्होंने इसके लिए अपना योगदान दे दिया है और उम्मीद जताई और लोग इससे जुड़ेंगे। उन्होंने इस दौरान एक रोचक कहानी का भी जिक्र किया, जो उन्होंने अपनी बेटी को सुनाई थी।

कुछ लोगों ने कहा कि भगवान को दान की ज़रूरत नहीं है, वहीं कुछ ने भूखे को भोजन देने की बातें कही। वहीं कइयों ने उनसे ‘किसान आंदोलन’ पर बोलने के लिए दबाव बनाया। एक ने उन्हें ‘अवसरवादी’ बताते हुए पूछा कि गिलहरी कैसे कुछ बोल सकती है? बलविंदर सिंह नामक यूजर ने लिखा कि मंदिर से केवल पुजारी को रोटी मिलती है। वहीं कुछ ने ‘कनाडियन’ कह कर उन्हें चिढ़ाने की कोशिश की।

Coca-Cola ने लॉन्च किए ‘किसान एकता’ लिखे बोतल: सोशल मीडिया पर वायरल दावे का फैक्टचेक

दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के महिमामंडन और अराजकता को सही ठहराने के लिए तरह-तरह के दावे शेयर किए जा रहे हैं। स्वदेशी कंपनियों को बदनाम किया जा रहा है और विदेशी कंपनियों को देवता बताया जा रहा है। इसी तरह अब एक वायरल दावे में कहा जा रहा है कि ‘कोका कोला’ (Coca-Cola) ने ‘किसान एकता’ और ‘सपोर्ट फार्मर्स’ लिखे हुए कोल्डड्रिंक के कई बोतल बाजार में उतारे हैं। कहा जा रहा है कि उसने ‘किसान आंदोलन’ के समर्थन में ऐसा किया है।

सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों को जम कर शेयर किया जा रहा है और कहा जा रहा है कि कैसे एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी भारत में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ का समर्थन कर रही है। ये वही लोग हैं, जिन्होंने रिलायंस जियो के बॉयकॉट के पोस्ट्स भी डाल रखे हैं। जहाँ जियो का बहिष्कार किया जा रहा है, वहीं ‘कोका कोला’ का प्रचार किया जा रहा है। ऐसे कई बोतलों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर अपलोड की गईं।

फेसबुक पर भी वायरल हुआ दावा

अब हम आपको बताते हैं कि इस वायरल दावे की सच्चाई क्या है। दरअसल, ‘कोका कोला’ ने ऐसी कोई बोतल लॉन्च ही नहीं की है, जिस पर ये चीजें लिखी हुई हों। कंपनी ने भारत में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ को लेकर भी कोई बयान नहीं दिया है, समर्थन करना तो दूर की बात है। 2018 में कंपनी ने ‘शेयर्ड कोक’ बोतलें लॉन्च की थीं, जिसके तहत बोतल पर ‘पिता’, ‘भाई’, ‘दादी’ इत्यादि लिखे होते हैं।

‘किसान आंदोलन’ में खालिस्तानी ताकतों के घुसने की बात खुद केंद्र सरकार भी स्वीकार कर रही है। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने ‘लोक भलाई इंसाफ वेलफेयर सोसाइटी (LBWS)’ के बलदेव सिंह सिरसा को समन भेजा है। ऐसे करीब दो दर्जन खालिस्तानी लिंक वाले नेताओं को समन भेजा गया है। संगठन ‘सिख फिर जस्टिस’ (SFJ) ‘किसान आंदोलन’ की आग में घी डालने का काम कर रहा है और वित्तीय मदद का ऐलान भी करता रहा है। 

‘आइए, हम सब वानर और गिलहरी बन अयोध्या के राम मंदिर के लिए योगदान दें, मैंने कर दी शुरुआत’: अक्षय कुमार की अपील

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अक्षय कुमार ने अयोध्या में निर्माणाधीन भव्य राम मंदिर के लिए डोनेशन की अपील की है। ‘खिलाड़ी’ नाम से विख्यात अभिनेता ने लिखा कि अयोध्या में हमारे भगवान श्रीराम के मंदिर का निर्माण शरू होना बहुत ख़ुशी की बात है और अब हमारी योगदान की बारी है। अक्षय ने बड़ी जानकारी दी कि उन्होंने इसके लिए अपना योगदान दे दिया है और उम्मीद जताई कि और लोग इससे जुड़ेंगे।

राम मंदिर संकल्प निधि में डोनेशन के समर्थन में अक्षय कुमार ने वीडियो भी जारी किया। अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से जारी किए गए वीडियो में उन्होंने कहा कि कल रात उन्होंने अपनी बेटी को एक कहानी सुनाई। इस कहानी में एक तरफ वानरों की सेना थी और एक तरफ लंका थी, जिनमें भयंकर संग्राम चल रहा था। वानर समुद्र में रामसेतु बनाने के लिए पत्थर डाल रहे थे, तभी भगवान राम की नज़र एक गिलहरी की तरफ पड़ी।

अक्षय कुमार ने कहा, “रामसेतु का निर्माण कर सीता मैया को वापस लाना था। एक गिलहरी पानी में जाकर किनारे पर आती थी, फिर रेत में लोट जाती और फिर पत्थरों की तरफ जाती थी। यही क्रम चलता रहा। भगवान राम ने गिलहरी से पूछा कि वो कर क्या रही है? गिलहरी ने जवाब दिया कि वो अपने शरीर को गीला कर रही है, उस पर रेत लपेट कर पत्थरों के बीच की दरारें भर रही हैं। ये था उस गिलहरी का योगदान।”

अक्षय कुमार ने इसी ‘गिलहरी योगदान’ की बात करते हुए बताया कि उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए योगदान दे दिया है और साथ ही लोगों से अपील करते हुए कहा कि अब वो सभी भी यही करें। उन्होंने कहा कि हम में से कुछ वानर बनें, कुछ गिलहरियाँ बनें और अपना-अपना योगदान देकर ऐतिहासिक और भव्य राम मंदिर बनाने में योगदान दें, ताकि आने वाली पीढ़ी को इस मंदिर से मर्यादा पुरुषोत्तम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती रहे।

हाल ही में खबर आई थी कि बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी भी भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए समर्पण निधि देंगे। श्रीराम जन्मभूमि समर्पण निधि अभियान पर इकबाल अंसारी ने कहा कि बात राम मंदिर की है। बात धर्म की है। लोग बढ़-चढ़कर चंदा दें, मंदिर- मस्जिद के विवाद में लोग न आएँ। उन्होंने कहा था, “चंदा देने में कोई बुराई नहीं। लोग चंदा दे अब वह चाहे एक रुपए हों या एक लाख रुपए। राम मंदिर में सब का सहयोग होना चाहिए।”

निधि राजदान के ‘प्रोफेसरी’ वाले दावे से 2 महीने पहले ही हार्वर्ड ने नियुक्तियों पर लगा दी थी रोक

एनडीटीवी की पूर्व पत्रकार निधि राजदान शुक्रवार (15 जनवरी 2021) से ही चर्चा में बनी हुई हैं। उन्होंने खुद को ‘फिशिंग अटैक’ का शिकार बताते हुए कहा था कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से जो ऑफर मिला था, वह फेक था।

मामले में नया मोड़ तब आया जब निधि राजदान ने एक ब्लॉग लिखा। इसमें उन्होंने बताया कि वह ‘फिशिंग अटैक’ का शिकार कैसे बनीं। इस ब्लॉग में उन्होंने कई सारे सवालों के जवाब दिए हैं, लेकिन कई सारे सवाल भी खड़े हुए हैं। हमारे पास हार्वर्ड विश्वविद्यालय से संबंधित कई रिपोर्ट्स हैं जो इस घटना की परत दर परत को खोलते हैं।

अप्रैल 2020 की शुरुआत में हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने घोषणा की थी कि वे नई नियुक्ति और वेतन पर तत्काल रोक लगा रहे हैं। यह निर्णय कोविड-19 को लेकर लिया गया था। यहाँ पर बता दें कि निधि राजदान ने घोषणा की थी कि वह जून 2020 में एक एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में विश्वविद्यालय में शामिल होने वाली हैं।

Harvard University had announced a freeze on salary and hiring in April 2020, two months before Nidhi Razdan said she was joining the University as an associate professor.
Screenshot of a headline by CNBC

हार्वर्ड विश्वविद्यालय के दैनिक छात्र समाचार पत्र द हार्वर्ड क्रिमसन में छपी रिपोर्ट में बताया गया था कि संस्थान में खर्चों पर रोक लगाई जा रही है। यहाँ पर होने वाली नए पदों की भर्तियाँ भी स्थगित कर दी गई है ताकि इस पैसे को बचाकर देश की अर्थव्यवस्था में योगदान किया जा सके।

विश्वविद्यालय के अध्यक्ष लॉरेंस बेको, कार्यकारी उपाध्यक्ष कैथरीन लैप और प्रोवोस्ट एलन गर्बर के एक संयुक्त ईमेल में कहा गया था, “भविष्य में इस तरह के कई निर्णय और विकल्प तेजी से सामने आएँगे। हालाँकि यह पहले से स्पष्ट है कि हमें अपने राजस्व में गिरावट के साथ अपने खर्च को श्रेणीबद्ध करने के लिए तुरंत कुछ कार्रवाई करने की आवश्यकता है।” उन्होंने कहा कि दुनिया भर के अन्य विश्विद्यालयों की तरह हार्वर्ड विश्वविद्यालय की आर्थिक स्थिति पर भी महामारी का असर पड़ा है।

ईमेल में कहा गया था, “हमारे राजस्व के प्रमुख स्रोत- ट्यूशन, दान, कार्यकारी और सतत शिक्षा और रिसर्च सपोर्ट- अभी खतरे में हैं और हमें आर्थिक सहायता की माँग में वृद्धि की उम्मीद है। महामारी की वजह से हुई आर्थिक गिरावट ने परिवार के बजट को प्रभावित किया है।”

विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने छँटनी और छुट्टी की भी आशंका जताई थी। उन्होंने कहा था, “हम अभी भी विश्वविद्यालय की वित्तीय स्थितियों की एक पूरी पिक्चर हासिल करने के लिए काम कर रहे हैं।”

हार्वर्ड क्रिमसन की रिपोर्ट में कहा गया, “कार्यों पर महामारी के वित्तीय प्रभावों से निपटने के लिए हमें और क्या अन्य कदम उठाने आवश्यक हैं, यह निर्धारित करने के लिए हम FY21 के बजट की जाँच करेंगे। अधिक जानकारी उपलब्ध होने पर हम आपसे संवाद करेंगे।”

पिछले वित्तीय वर्ष में, विश्वविद्यालय संचालन के लिए 1.9 बिलियन डालर का वित्त पोषण किया गया, जो हार्वर्ड के कुल परिचालन राजस्व का एक तिहाई है। रिपोर्ट में कहा गया कि इस वित्तीय वर्ष के अंत तक यह खर्च 40.9 बिलियन डॉलर था। MIT कम्यूनिटी के अध्यक्ष एल राफेल रीफ ने कहा कि संस्थान अभी यह नहीं जान सका है कि वित्तीय वर्ष 2021 में वैश्विक वित्तीय स्थिति कितनी गंभीर होगी। लेकिन हमें कठिन विकल्पों की उम्मीद करनी चाहिए। अध्यक्ष ने कहा था कि शीर्ष अमरीकी संस्थान महामारी से उत्पन्न एक कठिन आर्थिक वातावरण में लागत को नियंत्रित करने के लिए विकल्पों को ढूँढ़ रहे हैं।

इस प्रकार, इस तथ्य को देखते हुए कि हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने अप्रैल में ही घोषणा की थी कि वे वेतन और नए पदों पर भर्तियाँ स्थगित कर दी गई है। यह आश्चर्य की बात है कि निधि राजदान ने घोषणा को देखा या सुना नहीं था। उनके अनुसार, उसे इस महीने पता चला कि नौकरी का प्रस्ताव ‘फिशिंग अटैक’ था।

बता दें कि इससे पहले निधि के खुलासे के बाद हार्वर्ड ने बताया था कि उसके कैम्पस में न तो पत्रकारिता का कोई विभाग और न ही कोई कॉलेज है। यहाँ तक कि पत्रकारिता के एक भी प्रोफेसर नहीं हैं। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी स्थित नीमन फाउंडेशन के जर्नलिज्म लैब के सीनियर डायरेक्टर और पूर्व डायरेक्टर जोशुआ बेंटन ने ये खुलासा किया। उन्होंने ये भी बताया कि हार्वर्ड में जर्नलिज्म पर फोकस रख कर सिर्फ मास्टर्स ऑफ लिबरल आर्ट्स नामक डिग्री की पढ़ाई होती है, जिसे कार्यरत पत्रकारों द्वारा ही पढ़ाया जाता है।

लड़कियों के नंबर चुरा कर उन्हें अश्लील फोटो-वीडियो भेजता था मिस्त्री तस्लीम, UP पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में पुलिस ने मोहम्मद तस्लीम नाम के टीवी मैकेनिक को गिरफ्तार किया है। तस्लीम पर आरोप है कि वह व्हाट्सएप ग्रुप में लड़कियों के अश्लील वीडियो और तस्वीरें भेजता था, जिसके चलते पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। इसके अलावा आरोपित तस्लीम पर आईपीसी की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला भी दर्ज कर लिया गया है।

घटना उत्तर प्रदेश के पीलीभीत स्थित बशीर खान क्षेत्र की है। यहाँ यूपी पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच (cyber crime branch) ने शनिवार (16 जनवरी 2021) को तस्लीम को गिरफ्तार किया। 30 वर्षीय मोहम्मद तस्लीम पेशे से टीवी मैकेनिक है।

तस्लीम पर आरोप है कि वह अपने मोबाइल फोन से व्हाट्सएप ग्रुप में लड़कियों के अश्लील फोटो और वीडियो भेजता था। तस्लीम की इन हरकतों से परेशान होकर एक लड़की ने उसकी पुलिस में शिकायत कर दी। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ घटना पर पुलिस का कहना है कि मैकेनिक तस्लीम फेसबुक और व्हाट्सग्रुप से लड़कियों के नंबर चुराता था इसके बाद अश्लील फोटो, वीडियो भेजता था। पुलिस ने मोहम्मद तस्लीम के पास फ़र्ज़ी आईडी और सिम कार्ड भी बरामद किया है। 

पीलीभीत कोतवाली के एसएचओ श्रीकांत द्विवेदी ने इस घटना पर कहा, “मामले के आरोपित मोहम्मद तस्लीम पर आईपीसी की धारा 294 (सार्वजनिक रूप से अश्लील हकत करना) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (information technology act) की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया जा चुका है। वह फ़िलहाल पुलिस की गिरफ़्त में है और मामले की जाँच जारी है।” 

आजम खान को तगड़ा झटका, जौहर यूनिवर्सिटी की 70 हेक्टेयर जमीन यूपी सरकार के नाम होगी

उत्तर प्रदेश के रामपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद मोहम्मद आजम खान को एडीएम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। एडीएम प्रशासन के राजस्व न्यायालय ने जौहर यूनिवर्सिटी की 70.05 हेक्टेयर जमीन उत्‍तर प्रदेश सरकार के नाम दर्ज करने का आदेश दिया है। यह जमीन अभी तक आजम खान की जौहर ट्रस्ट के नाम पर थी।

सपा सांसद आजम खान मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रस्ट ने शासन से 12.5 एकड़ जमीन खरीदने की अनुमति ली थी। लेकिन नियमों की अनदेखी करते हुए ट्रस्ट ने करीब 70 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन खरीद ली। आरोप है कि इस दौरान जमीनों पर अवैध कब्जे भी किए गए और सरकारी नियमों में फेरबदल किया गया। जिसके मद्देनजर एडीएम जेपी गुप्ता की कोर्ट ने शनिवार को यह फैसला सुनाया।

एडीएम कोर्ट के इस फैसले के बाद साढ़े बारह एकड़ जमीन तो यूनिवर्सिटी के पास रहेगी, लेकिन करीब 173 एकड़ जमीन (70 हेक्टेयर) राज्य सरकार के नाम दर्ज की जाएगी। बता दें 1 साल पहले इस मामले की शिकायत भाजपा लघु उद्योग प्रकोष्ठ के पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयोजक आकाश सक्सेना द्वारा की गई थी।

अतिरिक्त जिला सरकारी वकील (एडीजीसी-सिविल) अजय तिवारी ने कहा, “ट्रस्ट ने सरकारी आदेश का उल्लंघन किया है, जिसमें उन्हें सिर्फ इस शर्त के आधार पर 12 एकड़ से अधिक जमीन की खरीद की अनुमति दी थी गई कि उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।” एडीजीसी ने कहा, “अदालत ने इससे पहले सीतापुर जेल में बंद ट्रस्ट के अध्यक्ष आजम खान को नोटिस और समन जारी किया था, जिसे उन्होंने स्वीकार करने से इनकार कर दिया।”

गौरतलब है कि कोर्ट ने अपने आदेश में सूचित किया था कि ट्रस्ट अनुसूचित जाति/जनजाति श्रेणी के लोगों से संबंधित जमीन को नहीं खरीद सकेगा और न ही इनके द्वारा नदी के किनारे या इसके आसपास के क्षेत्रों व ग्राम समाज भूमि या ‘चक’ सड़क से संबंधित भूमि को खरीदा जा सकेगा। इसके बावजूद आजम खान ने कोर्ट की बातों को अनदेखा कर शर्तों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश राजस्व अधिनियम की धाराओं का भी उल्लंघन किया।

कोर्ट से आदेश लेते वक्त ट्रस्ट द्वारा तब कहा गया था कि वह गरीबों की मदद के लिए चैरिटी का काम भी करेगी। साथ ही ट्रस्ट गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा भी दिलाएगी। लेकिन जाँच के दौरान यह सामने आया कि ट्रस्ट द्वारा जमीन पर जौहर विश्वविद्यालय का कार्य तो जोरशोर से चल रहा लेकिन ट्रस्ट द्वारा किए गए बाकी सारे वादे हवा हवाई हैं। पिछले दस सालों में ट्रस्ट ने कोई चैरिटी का काम नहीं किया।

इसे देखते हुए शिकायतकर्ता ने माँग की थी कि यूनिवर्सिटी को सरकार द्वारा टेकओवर कर लेना चाहिए।उल्लेखनीय है कि 500 एकड़ की जमीन पर फैले मुहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के चांसलर सपा सांसद आजम खान हैं। विश्वविद्यालय को 2006 में स्थापित किया गया था। खान के अलावा उनकी पत्नी तंजीन फातिमा और दोनों बेटे ट्रस्ट के सदस्य हैं। आजम की बड़ी बहन ट्रस्ट की कोषाध्यक्ष हैं।

‘अडानी सभी बैंकों को खरीद सकता है’ – सुब्रमण्यम स्वामी के आरोपों पर कंपनी ने बता डाला 30 साल का रिकॉर्ड

शनिवार (16 जनवरी 2021) को अडानी ग्रुप ने बैंक का लोन नहीं चुकाए जाने के आरोप का स्पष्टीकरण जारी किया। इसके अलावा यह भी कहा कि उनके ग्रुप पर एक भी एनपीए (गैर निष्पादित परिसंपत्ति) नहीं होने का रिकॉर्ड पिछले तीन दशकों से बरकरार है। शुक्रवार (15 जनवरी 2021) को सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्विटर के ज़रिए अडानी ग्रुप पर आरोप लगाते हुए कहा था कि ग्रुप ने 4.5 लाख करोड़ का लोन नहीं चुकाया है जो कि अब एनपीए में तब्दील हो चुका है।  

अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी को ‘Trapeze artist’ (फँसाने वाला कलाकार) कहते हुए दावा किया कि 2016 से ग्रुप की आय हर दो साल में दोगुनी हो रही है। इसके बावजूद अडानी ग्रुप ने बैंक के लोन नहीं चुकाए। राज्यसभा सांसद ने अडानी समूह पर तंज कसते हुए कहा कि वह सभी बैंकों को खरीद सकता है, जैसे उसने कुल 6 बड़े हवाई अड्डे खरीदे हैं। 

2019 में अडानी ग्रुप ने 6 बड़े हवाई अड्डों को संचालित करने की नीलामी जीती थी। 

इन आरोपों के सामने आते ही अडानी ग्रुप ने आधिकारिक रूप से अपना पक्ष रखा है और कहा कि उन पर पिछले 3 दशकों से कोई एनपीए नहीं है। 

स्वामी के आरोपों पर अडानी ग्रुप का जवाब 

ट्विटर पर अपना पक्ष रखते हुए ग्रुप ने कहा कि जिन नीतिगत कॉर्पोरेट गवर्नेंस और पूँजी प्रबंधन प्रक्रियाओं से क्रेडिट गुणवत्ता में बढ़ोतरी होती है, उनका अनुसरण करते हुए ग्रुप ने आधारभूत तारकीय बुनियादी ढाँचे की संपत्ति तैयार की। जवाब के अंत में अडानी ग्रुप ने कहा, “हम पर एक भी एनपीए (गैर निष्पादित परिसंपत्ति) नहीं होने का रिकॉर्ड पिछले तीन दशकों से बरकरार है।” 

इसके अलावा अडानी ग्रुप ने ट्वीट में दर्ज की गई संख्याओं को ‘गलत और काल्पनिक’ बताया। जवाब के अगले हिस्से में अडानी ग्रुप ने कहा, “राष्ट्रनिर्माण की हमारी मूल मानसिकता, इस पर रह कर अडानी ग्रुप ने देश की माँगों को मद्देनज़र रखते हुए बुनियादी ढाँचे से जुड़ी चीज़ें बनाई हैं।”

इसके अलावा अडानी ग्रुप ने यह भी कहा, “हमें जिस तरह का नीतिगत कॉर्पोरेट गवर्नेंस और पूँजी प्रबंधन मिला है, उसकी वजह से हमारी कैपिटल गुणवत्ता लगातार बढ़ी है और ऋण से EBITDA का अनुपात 4 से कम है। जिसका यह मतलब है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने हमें क्रेडिट रेटिंग काफी ज़्यादा दी है।”       

अली अब्बास की ‘तांडव’ के खिलाफ मुंबई में कंप्लेन: भगवान शिव के गेटअप में जीशान अयूब ने परोसा है प्रोपेगेंडा

‘अमेज़न प्राइम’ पर आई अली अब्बास ज़फर निर्देशित वेब सीरिज ‘तांडव’ में सैफ अली खान ने मुख्य किरदार निभाया है। सीरिज में अभिनेता मोहम्मद जीशान अयूब ने एक दृश्य में भगवान शिव का गेटअप लेकर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है और मौजूदा राजनीति को लेकर नैरेटिव बनाने की कोशिश की है, जिससे लोग नाराज़ हैं। भाजपा नेता राम कदम ने मुंबई पुलिस से इसकी शिकायत की है।

हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान करने वाले ‘तांडव’ के बहिष्कार का ऐलान करते हुए महाराष्ट्र के भाजपा नेता राम कदम ने पूछा कि आखिरकार क्यों हर बार फिल्मों और वेब सीरिज में हिन्दू देवी-देवताओं को अपमानित करने का काम किया जाता है? उन्होंने कहा कि ताजा उदाहरण नई वेब सीरिज ‘तांडव’ है। उन्होंने कहा, “सैफ अली खान एक बार फिर ऐसी फिल्म या सीरिज का हिस्सा हैं, जो हिन्दू भावनाओं को ठेस पहुँचाता है।”

राम कदम ने कहा कि निर्देशक अली अब्बास जफर को इस सीरिज से भगवान शिव का मजाक बनाने वाला हिस्सा हटाना होगा और अभिनेता जीशान अयूब को माफ़ी माँगनी पड़ेगी। भाजपा नेता ने ऐलान किया कि जब तक जरूरी बदलाव नहीं होते, तब तक ‘तांडव’ का बहिष्कार किया जाएगा। जिस दृश्य पर आपत्ति जताई जा रही है, उसे पहले ही एपी​सोड में दिखाया गया है। जहाँ भगवान शिव बना ज़ीशान अयूब सोशल मीडिया पर प्रोफ़ाइल पिक बदलने की बात करता है, क्योंकि ‘रामजी के फॉलोवर्स बढ़ रहे हैं।’

मंच पर एक अभिनेता नारद के किरदार में मौजूद होता है और ‘आज़ादी-आज़ादी’ के नारों का बचाव करने और देशद्रोहियों को सही साबित करने के लिए भगवान शिव के किरदार का इस्तेमाल किया गया है। वहीं एक अन्य दृश्य में कॉलेज का एक युवक लड़की से कहता है, ‘जब एक छोटी जाति का आदमी एक ऊँची जाति की औरत को डेट करता है न, तो वह बदला ले रहा होता है, सिर्फ उस एक औरत से।’

राम कदम ने रविवार (जनवरी 17, 2021) को घाटकोपर थाने जाकर ‘तांडव’ के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। उन्होंने वेब सीरिज के निर्माता, निर्देशक और अभिनेता पर कार्रवाई की मॉंग की है।कपिल मिश्रा, तजिंदर पाल सिंह बग्गा और मनोज कोटक जैसे कई अन्य भाजपा नेताओं ने भी इस सीरिज का विरोध किया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से लोग माँग कर रहे हैं कि वो इस तरह के कंटेंट्स पर प्रतिबंध लगाएँ।

इसी सीरिज में एक अभिनेत्री जोर देकर कहती है कि पुलिस के लिए मुसलमानों को मारना आसान है और कानून प्रवर्तन अधिकारियों पर सवाल उठाते हुए कहा जाता है कि कई मुस्लिम युवाओं को उनकी हत्याओं को जस्टिफाई करने के लिए आतंकवादी के रूप में ब्रांडेड किया जाता है। साथ ही दिखाया गया है कि कैसे मुस्लिमों को ‘आतंकी साबित कर उन्हें मार डाला जाता है।’

सलमान खान को 5 साल कैद की सजा… लेकिन चुनौती याचिका पर पेश होने से 17वीं बार मिल गई छूट

जोधपुर की स्थानीय जिला एवं सत्र अदालत ने अभिनेता सलमान खान को 6 फरवरी को उनके समक्ष पेश होने को कहा है। अदालत ने अभिनेता को शनिवार (जनवरी 16, 2021) को पेश होने से छूट दी। सलमान खान को एक निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती देने वाली एक याचिका की सुनवाई के सिलसिले में शनिवार को अदालत में पेश होने के लिए कहा गया था, जिसमें उन्हें पाँच वर्ष कैद की सजा सुनाई गई थी।

सलमान खान के वकील निशांत बोरा ने कहा, “हमने एक अर्जी सौंपी, जिसमें कोरोना महामारी की स्थिति और यात्रा के दौरान उनकी सुरक्षा को संभावित खतरे पर विचार करते हुए उन्हें पेश होने से छूट दिए जाने का अनुरोध किया गया।” इसकी अनुमति देते हुए, सत्र न्यायाधीश देवेंद्र कछवाहा ने सलमान खान को 6 फरवरी को सुनवाई की अगली तारीख पर अदालत में पेश होने का निर्देश दिया।

बता दें कि जोधपुर में काला हिरण शिकार प्रकरण की सुनवाई चल रही है। शनिवार को उनके वकील ने कोरोना का हवाला देते हुए हाजिरी माफी रखी। कोर्ट ने उसे छूट प्रदान करते हुए अगली सुनवाई तिथि 6 फरवरी तय कर दी। साथ में सलमान को कोर्ट में उपस्थित रहने का आदेश दिया। इस मामले में सलमान की तरफ से यह लगातार 17वीं बार हाजरी माफी ली गई है। कोरोना काल में ही उन्हें सातवीं बार हाजिरी माफी मिल चुकी है।

एक दिसम्बर को न्यायाधीश ने उन्हें 16 जनवरी को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था। सलमान के अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत की तरफ से कोर्ट में पेश हाजिरी माफी में कहा गया कि रेस्पोंडेंट मुंबई में निवास करता है। मुंबई व जोधपुर में कोविड-19 महामारी भयंकर रूप से फैली हुई है। इन परिस्थितियों में रेस्पोंडेंट का पेशी के लिए जोधपुर आना खतरे से खाली नहीं है। इस कारण रेस्पोंडेंट सलमान खान आज कोर्ट में पेश नहीं हो सका है। ऐसे में सलमान को आज हाजिरी माफी प्रदान की जाए।

ट्रायल कोर्ट में मिल चुकी है सजा

अप्रैल 2018 में सलमान खान ने ट्रायल कोर्ट से मिली सजा को जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में चुनौती दी थी। इसके बाद वे एक बार कोर्ट में पेश हुए। ढाई साल की इस अवधि में इसके अलावा प्रत्येक पेशी पर वे किसी न किसी कारण से हाजरी माफी लेते रहे। 17 बार वह हाजिरी माफी का लाभ ले चुके हैं।

कोरोना काल में उनकी पहली पेशी 18 अप्रैल को, दूसरी 4 जून को, तीसरी पेशी 16 जुलाई को, चौथी 14 व पाँचवी 28 सितंबर को तथा छठीं पेशी 1 दिसम्बर को और 16 जनवरी को एक बार फिर सलमान की तरफ से कोरोना के नाम पर हाजिरी माफी माँगी गई। कोर्ट ने भी कोरोना काल को ध्यान में रखते हुए हर बार सलमान को हाजरी माफी प्रदान की।

सह आरोपितों को मिल चुका है संदेह का लाभ

बता दें कि इस मामले में सह आरोपित फिल्म अभिनेता सैफ अली खान, अभिनेत्री नीलम, तब्बू व सोनाली बेंद्रे को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था। सलमान खान को उस समय गिरफ्तार कर जोधपुर जेल भेजा गया था। तीन दिन बाद वे कोर्ट से मिली जमानत के आधार पर रिहा हुए थे। सलमान खान ने उन्हें सुनाई गई पाँच साल की सजा को चुनौती दे रखी है। वहीं आर्म्स एक्ट के मामले में कोर्ट ने सलमान को बरी कर दिया था। राज्य सरकार ने कोर्ट के इस निर्णय को चुनौती दे रखी है।

22 साल से चल रहे है मामले

स्थानीय पुलिस ने सलमान खान व अन्य के खिलाफ दो अक्टूबर 1998 को हिरण शिकार का मामला दर्ज किया। सलमान के खिलाफ हिरण शिकार का मामला विश्नोई समुदाय की तरफ से दर्ज कराया गया था। सलमान खान के खिलाफ तीन अलग-अलग स्थान पर हिरण शिकार व अवधि पार लाइसेंस के हथियार रखने के मामले दर्ज किए गए। इस मामले में सलमान खान को बारह अक्टूबर 1998 को गिरफ्तार किया गया। पाँच दिन बाद वे जमानत पर रिहा हुए।