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‘जिन्हें बुर्के से समस्या नहीं, उन्हें जनेऊ से क्यों दिक्कत’: कर्नाटक में CET परीक्षा में हिंदू छात्रों के साथ भेदभाव देख BJP ने उठाए सवाल, बवाल के बाद कॉन्ग्रेस मंत्री ने जाँच के आदेश दिए

कर्नाटक के बेंगलुरु में ब्राह्मण लड़कों से ‘कॉमन एंट्रेंस एग्जाम’ के दौरान उनके जनेऊ उतरवाने का मामला अब तूल पकड़ चुका है। भाजपा नेताओं ने राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार से सवाल किए हैं कि जब शैक्षणिक संस्थान में बुर्का पहनकर जाने से प्रशासन को समस्या नहीं है, तो फिर जनेऊ से क्या दिक्कत है। इन सवालों के उठाने के बाद खबर है कि शिक्षा मंत्री डॉक्टर एमसी सुधाकर ने इस घटना की निंदा करते हुए मामले की रिपोर्ट माँगी है।

उन्होंने कहा कि एग्जाम के प्रोटोकॉल में कहीं ऐसा नहीं है कि किसी बच्चे की जनेऊ उतरवानी पड़े। ऐसा पहले कभी भी नहीं हुआ है। इस मामले को गंभीरता से लेंगे। इसे स्वीकारेंगे बिलकुल नहीं। रिपोर्ट मिलने के बाद इस पर कार्रवाई होगी। मामले में बीदर और शिवमोग्गा के उप-आयुक्तों से रिपोर्ट माँगी गई है।

गौरतलब है कि 16 अप्रैल 2025 को कर्नाटक के शिवमोगा के स्फूर्ति कॉलेज में परीक्षा केंद्र पर स्क्रीनिंग कमेटी ने ब्राह्मण लड़के से जनेऊ उतारने को कहा और जब छात्र ने इससे इनकार किया तो उसे वापस भेज दिया गया। लड़के ने बताया कि ऐसा उसके साथ गणित परीक्षा वाले दिन हुआ जबकि इससे पहले वो दो परीक्षाएँ बिना समस्या के दे चुका था।

इसी प्रकार शिवमोग्गा के आदिचुंचनगिरी इंडिपेंडेंट पीयू कॉलेज परीक्षा केंद्र में तीन लड़कों को जनेऊ हटाने के लिए कहा गया। हालाँकि बाद में एक छात्र को जनेऊ के साथ एग्जाम लिखने की अनुमति दी गई, जबकि दो अन्य को ये अनुमति नहीं मिली।

इस घटना के बाद 17 अप्रैल को राज्य में हिंदू संगठनों द्वारा जमकर प्रदर्शन किए गए। कॉन्ग्रेस शासित सरकार और उनके प्रशासन पर सवाल उठाए गए। साथ ही मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से इस मामले पर माफी की माँग की गई।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से माफी माँगने की माँग करते हुए कहा, “कॉन्ग्रेस सरकार, जिसे बुर्का पहने छात्राओं से कोई समस्या नहीं थी, उसे हिंदू धर्म के पवित्र प्रतीक में खतरा नजर आ रहा है।” वहीं विपक्ष के नेता आर अशोक ने भी कहा कि जनेऊ का अपमान मराठा और वैश्य लोगों का भी अपमान है क्योंकि वो भी जनेऊ पहनते हैं।

अभी 10 साल कुर्सी पर रहेंगे PM मोदी, अगला चुनाव भी जीतेंगे, 90+ साल जिएँगे: जिन्होंने सबसे पहले देखी दिल्ली में केजरीवाल की हार, उनकी भविष्यवाणी

पत्रकार सुशांत सिन्हा ने अपने पॉडकास्ट में प्रसिद्ध एस्ट्रोलॉजर डॉ. विनय बजरंगी से पीएम नरेंद्र मोदी, राहुल गाँधी और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल के भविष्य को लेकर सवाल किए। डॉ. विनय ने इन तीनों के लेकर कई बड़ी बातें कही। विनय का दावा है कि नरेंद्र मोदी अगले चुनाव में भी प्रधानमंत्री के पद पर बने रहेंगे। वहीं, उनका मानना है कि अरविंद केजरीवाल अगले 6-7 वर्षों तक भी राजनीतिक जीवन में बड़ी भूमिका से दूर होंगे।

सुशांत सिन्हा के पॉडकास्ट में ही डॉ विनय बजरंगी ने पहले ही भविष्यवाणी की थी कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली के चुनाव में हारेंगे। अब एक नए पॉडकास्ट में उन्होंने ये दावा किया है कि अगले 8 वर्षों तक दिल्ली की राजनीति में वह सक्रिय नहीं हो पाएँगे। साथ ही वह दोबारा जेल जा सकते हैं। इसके अलावा उन्होंने दिल्ली की वर्तमान सीएम रेखा गुप्ता के कार्यकाल के बेहतर होने का भी दावा किया है।

इस पॉडकास्ट में पीएम नरेंद्र मोदी के भविष्य पर सुशांत ने सवाल किया। इस पर डॉ. विनय ने बताया कि वह अगले चुनाव में भी पीएम बनकर ही वापसी करेंगे। साथ ही अपने जीवन में 90 की आयु भी पार करेंगे। वक्फ बिल के भविष्य को लेकर सुशांत ने डॉ. विनय से सवाल किया। इसके उत्तर में डॉ. विनय ने कहा कि अभी जो इसके विरोध में हैं, 6 माह बाद उनके इसके पक्ष में आने के संकेत हैं।

सुशांत ने मोदी के बाद अगले पीएम के रूप में योगी या अमित शाह के होने पर सवाल किया तो डॉ. विनय का कहना था कि योगी आदित्यनाथ पीएम की कुर्सी तक पहुँच सकते हैं। उनका मानना है कि अमित शाह ऊँचाई तक तो जाएँगे लेकिन कुछ परेशानियाँ लगातार बनी रहेंगी। वहीं, राहुल गाँधी के कभी प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुँचने के सवाल पर ज्योतिषाचार्य विनय बजरंगी का कहना था कि राहुल की कुंडली में सशक्त योग है लेकिन उनकी सोच के आधार पर वह बोल नहीं पाते। अपनी सोच और समझ बढ़ाकर वह राजनीति में एक बेहतर स्थिति तक पहुँच सकते हैं।

राहुल गाँधी के राजनीति में न होकर किसी अन्य करियर में जाने के सवाल पर ज्योतिषाचार्य का कहना है कि रेंटल और जमीन के व्यवसाय में बेहतर स्थिति में हो सकते थे।

विनय बजरंगी भारत के नामी ज्योतिषाचार्यों में एक हैं। सिविल इंजीनियरिंग में परास्नातक के बाद उन्होंने वैदिक एस्ट्रोलॉजी और वेस्टर्न एस्ट्रोलॉजी में PhD की है। उनके पास 25 वर्षों का ज्योतिष का अनुभव है। कुछ समय पहले भी वह सुशांत के पॉडकास्ट में आ चुके हैं।

चू%या, संस्कार के सरगना, आलसी, शास्त्रों के पीछे छिपने वाले… ब्राह्मणों पर पेशाब करने का ऐलान करने वाले अनुराग कश्यप बोले – नहीं वापस लूँगा अपनी बात

फ़िल्म अभिनेता अनुराग कश्यप ने इंस्टाग्राम पर एक कमेंट में ब्राह्मणों के ऊपर पेशाब करने की बात कही थी, अब उन्होंने माफ़ी तो माँगी है लेकिन इस कथित माफ़ी के नाम पर भी अपने ही घृणा भरे एजेंडे को आगे बढ़ाया है। बता दें कि महाराष्ट्र के ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले के जीवन पर बनी फिल्म ‘फुले’ की रिलीज में देरी को लेकर सेंसर बोर्ड पर भी वो बरसे थे। साथ ही फ़िल्म में हिन्दू धर्म के नकारात्मक चित्रण को लेकर विरोध का गुस्सा उन्होंने ब्राह्मणों पर भद्दी टिप्पणी करके निकाला था।

अनुराग कश्यप को एक यूजर ने लिखा था कि ब्राह्मण से तुम्हारी जितनी सुलगेगी, उतनी सुलगाएँगे। इसी कमेंट का रिप्लाई देते हुए उन्होंने एक पूरे समुदाय पर टिप्पणी कर डाली। बाद में उन्होंने उस कमेंट का स्क्रीनशॉट इंस्टाग्राम पर डालते हुए ब्राह्मणों पर सारा जीवन शास्त्रों के पीछे छिपने का आरोप लगाया और अलसी बताया। उन्होंने ब्राह्मणों के लिए ‘चू%या’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ये लोग सारी ज़िंदगी दूसरों को नीचा दिखाकर ख़ुद को बड़ा बोलते हैं। अनुराग कश्यप को लोग इन टिप्पणियों के बाद सनकी बता रहे हैं।

इंस्टाग्राम पर अनुराग कश्यप दिखा रहे अपनी सनक

अब आते हैं अनुराग कश्यप द्वारा इंस्टाग्राम पर लगाई गई उस स्टोरी पर, जिसे उनका ‘माफ़ीनामा’ बताया जा रहा है। उन्होंने लिखा कि ये उनका ‘माफ़ीनामा’ है, उस पोस्ट के लिए नहीं बल्कि उस एक पंक्ति के लिए जिसे संदर्भ के बिना लिया जा रहा है और घृणा का प्रसार किया जा रहा है। उन्होंने इस कमेंट्स में एक बार फिर ब्राह्मणों के लिए अप्रत्यक्ष रूप से ‘संस्कार के सरगना’ बताते हुए कहा कि किसी कमेंट के कारण उनके द्वारा किसी की बेटी को बलात्कार की धमकियाँ नहीं मिलनी चाहिए।

‘विक्टिम कार्ड’ खेलते हुए अनुराग कश्यप ने अपने परिवार और साथियों को धमकियाँ मिलने का बहाना बनाया। उन्होंने ऐलान किया, “कही हुई बात वापस नहीं ली जा सकती और मैं लूँगा भी नहीं, जो गाली देना है दो। मेरे परिवार ने न कुछ कहा है और न कहता है। इसीलिए, अगर मुझसे माफ़ी चाहिए तो ले लो। लेकिन, महिलाओं को बख़्श दो ब्राह्मण लोगों। इतना संस्कार तो शास्त्रों में भी है, सिर्फ़ मनुवाद में नहीं है। आप कौन से ब्राह्मण हो तय कर लो, बाकी मेरी तरफ से माफ़ी।”

बता दें कि अनुराग कश्यप बॉलीवुड में ‘देव डी’ (2009), ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ (2012) और ‘मुक्केबाज’ (2018) जैसी फ़िल्मों के लिए जाने जाते हैं। अब वो दक्षिण भारत में अभिनय में हाथ आजमा रहे हैं। वो 2024 में ‘महाराजा’ नामक थ्रिलर फ़िल्म में अभिनय करते हुए दिखाई दिए थे, अब वो कन्नड़ फ़िल्म ‘8’ में अभिनय कर रहे हैं। बताया जाता है कि उन्होंने मुंबई छोड़ दी है। उनका कहना है कि यहाँ प्रतिभा का सम्मान नहीं है। हाल ही में उन्होंने अपने पास काम न होने की चर्चा को अफवाह बताते हुए दावा किया था कि वो शाहरुख़ खान से भी अधिक व्यस्त हैं।

गुरुग्राम में 7.5 एकड़, बीकानेर में 275 बीघा, फरीदाबाद में 531 एकड़, गौतम बुद्ध नगर में 12 एकड़… रॉबर्ट वाड्रा के ख़िलाफ़ ED की 3 चार्जशीट तैयार

हाल ही में ‘नेशनल हेराल्ड’ मामले में ED ने चार्जशीट दायर की, जिसमें सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी के नाम हैं। अब रॉबर्ट वाड्रा के ख़िलाफ़ ED ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। लगातार 3 दिन उनसे कुल 16 घंटे की पूछताछ हुई। अब ख़बर आ रही है कि प्रवर्तन निदेशालय ने उनके ख़िलाफ़ 3 चार्जशीट तैयार करके रखी हुई है। ये तीनों मामले मनी लॉन्ड्रिंग के हैं। चार्जशीट दायर किए जाने के साथ ही इन तीनों मामलों में रॉबर्ट वाड्रा के ख़िलाफ़ आरोप तय करने का रास्ता भी साफ़ हो जाएगा।

संजय भंडारी के साथ रॉबर्ट वाड्रा के संबंध

दो अन्य मामले भगोड़े हथियार कारोबारी संजय भंडारी के साथ उनके संबंधों से जुड़े हुए हैं। उसने रक्षा समझौतों के जरिए लंदन में अकूत संपत्ति जमा की। बीकानेर में एक जमीन के मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप भी इन दोनों पर हैं। उधर सोनिया-राहुल के ख़िलाफ़ ED ने हाल ही में चार्जशीट दायर की। आरोप है कि उन्होंने YIL (यंग इंडिया लिमिटेड) के जरिए AJL (एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड) की 5000 करोड़ रुपए की संपत्ति हड़प ली। YIL में 76% शेयर सोनिया-राहुल के हैं, मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडिस के निधन के बाद बाकी के 24% शेयरों के मालिक भी यही लोग हो गए।

‘नेशनल हेराल्ड’ अख़बार चलाने वाली कंपनी AJL को कॉन्ग्रेस पार्टी ने 90 लाख का ऋण दिया था। AJL ने 50 लाख रुपए देकर उसकी सारी संपत्तियों पर कब्ज़ा कर लिया। उधर रॉबर्ट वाड्रा पर गुरुग्राम में 7.5 करोड़ रुपए की जमीन ख़रीद कर 58 करोड़ रुपए में बेचने के आरोप हैं। CC थम्पी और संजय भंडारी के साथ मिलकर उनपर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। स्विट्जरलैंड की कंपनी Pilatus से 75 ट्रेनर एयरक्राफ्ट की ख़रीद में इन दोनों ने पैसे कमाए थे। ED ने पूरे मनी ट्रेल का विवरण तैयार किया है।

बीकानेर, फरीदाबाद और गौतम बुद्ध नगर में भी ख़रीदी ज़मीन

संजय भंडारी की दुबई स्थित कंपनी के खाते में दलाली की 310 करोड़ रुपए की रकम भेजी गई। इस कंपनी का नाम ‘ऑफसेट इंडिया सोलूशन्स FZC’ है। इन रुपयों का बाद में दुबई व लंदन में संपत्ति ख़रीदने के लिए इस्तेमाल किया गया। ED ने 150 करोड़ रुपयों का पता लगाया और संजय भंडारी की 26 करोड़ रुपए की संपत्तियाँ जब्त की। लंदन में संजय भंडारी द्वारा ख़रीदी गई संपत्तियों से रॉबर्ट वाड्रा के भी तार जुड़े। एक अन्य मामला बीकानेर लैंड डील का भी है।

राजस्थान के बीकानेर में रॉबर्ट वाड्रा ने विस्थापितों के लिए जमीन ख़रीदने का दावा किया। बताया जाता है कि इसके लिए उन्होंने अपने सहयोगियों के माध्यम से फ़र्ज़ी प्रमाण-पत्रों का सहारा लिया। उनकी कंपनी ‘Skylight Hospitality’ के माध्यम से 275 बीघा जमीन ख़रीदी गई। मात्र 72 लाख रुपए में इन जमीनों को ख़रीद कर इन्हें 5.20 करोड़ रुपए में बेचा गया। एक अन्य मामले में प्रियंका गाँधी भी आरोपित हैं, जिसमें 21 नवंबर, 2023 को सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की जा चुकी है।

रॉबर्ट वाड्रा, प्रियंका गाँधी और CC थम्पी ने मिलकर हरियाणा के फरीदाबाद में 2005-08 के बीच रिटेलर HL पाहवा से 531 एकड़ ज़मीन ख़रीदी। उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में 12 एकड़ ज़मीन ख़रीद के एक मामले में भी वाड्रा और थम्पी के विरुद्ध जाँच चल रही है। तीनों ने मिलकर उस ज़मीन को वापस पाहवा को बेचा, फिर पाहवा ने उस ज़मीन को DLF को बेच दिया। 22 दिसंबर, 2023 को जब कोर्ट ने चारजधीत का संज्ञान लेकर आरोप तय करने शुरू किए, तब रॉबर्ट वाड्रा और प्रियंका गाँधी इस मामले में आरोपित नहीं थे।

हिन्दू मृतकों को ठीक से अंतिम संस्कार भी नसीब नहीं, आतंकी के जनाजे में 2 लाख की भीड़: मुर्शिदाबाद के ब्राह्मण-नाई हों या सीलमपुर के गिहारा, ‘उनके’ लिए सब एक

भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, आम बोलचाल में इसका अंग्रेजी अनुवाद आजकल अधिक इस्तेमाल में आता है – सेक्युलर। आपातकाल के दौरान 1976 में संविधान के 42वें संशोधन के दौरान Secularism शब्द को भारतीय संविधान की प्रस्तावना में भी घुसा दिया गया। बड़ी बात ये है कि संसद के दोनों सदनों में घंटों की बहस के बाद जो क़ानून बनता है उसे इस देश में न्यायिक समीक्षा से गुजरना पड़ता है, लेकिन आपातकाल के दौरान बने क़ानून उसके बाद भी लागू रहते हैं।

तो, आइए एक ताज़ा घटना से समझते हैं कि भारत में सेक्युलरिज्म क्या है। हाल ही में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में मुस्लिम भीड़ सड़कों पर निकली। कारण – दिल्ली में महीनों तक चली प्रक्रिया के बाद एक क़ानून पारित किया गया – वक़्फ़ बोर्ड संशोधन का। JPC (संयुक्त संसदीय समिति) की दर्जनों बैठकों और सैकड़ों हितधारकों से चर्चा के बाद सांसदों ने बहुमत से इस अधिनियम को पारित किया, राष्ट्रपति ने इसपर हस्ताक्षर किया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में गया, जहाँ सरकार से सवाल-जवाब हो रहे हैं। क़ानून के प्रावधानों पर रोक लगी हुई है।

वक़्फ़ के नाम पर मुर्शिदाबाद में हिन्दुओं पर अत्याचार

सरकार ने चीख-चीख कर समझाया कि कैसे ये क़ानून भारतीय मुस्लिमों के हित में है। खैर, तो हम बात कर रहे थे मुर्शिदाबाद की घटना की। 5000 की भीड़ ने बाहर निकलकर रेलवे सेवा ठप्प कर दी। सड़क पर सार्वजनिक वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। बसें धू-धू कर जलीं। पुलिस वालों ने मस्जिद में छिपकर जान बचाई। हिन्दुओं की दुकानों को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया। 400 हिन्दुओं ने पलायन कर मालदा में शरण ली। इसी बीच हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ गढ़ने वाले हरगोविंद दास और चंदन दास को घर में घुसकर काट डाला गया।

हमने उस घर की महिलाओं का आर्तनाद सुना, मासूम बच्चों को बेबस होकर ताकते हुए देखा, पिता-पुत्र की क्षत-विक्षत लाशें देखीं। एक बुजुर्ग महिला को देखा, जिसकी माँग और कोख एक साथ सूनी कर दी गई। मेनस्ट्रीम मीडिया ने इस हिंसा की कवरेज के लिए स्टार एंकरों को नहीं भेजा, बात-बार पर कोर्ट जाने वाले गिरोहों ने चुप्पी साध ली और बात-बात पर विरोध प्रदर्शन करने वाले समूह बिल में घुसे रहे। हिन्दुओं की जान की शायद कोई क़ीमत नहीं है, ख़ासकर जब हिंसा मुस्लिम भीड़ ने की हो।

मृत शरीर के भी कुछ अधिकार होते हैं, सम्मानजनक अंतिम संस्कार के। दुर्भाग्य से, भारत देश में ये आतंकियों को तो सहज उपलब्ध है लेकिन बेचारे हिन्दुओं को नहीं। आज अगर एक आतंकी की लाश को दफनाने की जगह जला दिया जाए तो कल को सुप्रीम कोर्ट से गिरोह विशेष कोई नया फ़ैसला लेकर आ जाएगा। ये तो ऐसा देश है जहाँ हिन्दुओं का नरसंहार करने वाले मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब की कब्र को बचाने के लिए भी हिंसा होती है। हरगोविंद दास और चंदन दास के लिए कोई सड़क पर नहीं आता।

हिन्दू पिता-पुत्र को अंतिम संस्कार तक नसीब नहीं

अब तज़ा ख़बर ये है कि इन पिता-पुत्र को मृत्यु के बाद सम्मानजनक अंतिम संस्कार भी उपलब्ध नहीं हुआ। कारण – जो मुस्लिम भीड़ तलवारों, चाकुओं, लाठी-डंडों, पत्थरों और देशी बमों से लैस थी, उसे न केवल पश्चिम बंगाल की TMC सरकार का वरदहस्त प्राप्त है बल्कि जो स्थानीय हिन्दू हैं वो भी डरे हुए हैं। क्या सामान्य वर्ग, क्या OBC और क्या दलित – मुस्लिम भीड़ से सबको पलायन के लिए मज़बूर होना पड़ा है। पीड़ितों में अधिकतर दलित ही हैं।

उनके परिवार के 13 सदस्यों ने भागकर झारखंड के राजमहल में शरण ली। जिसने भी 500 दंगाइयों द्वारा 2 निर्दोष व्यक्तियों को बेरहमी से काटे जाने का मंजर देखा होगा, वो ख़ौफ़ में आएगा ही। क्या आपको पता है, दोनों के अंतिम संस्कार में न पुरोहित आए और न नाई। भारत में हर आयोजन की ऐसी व्यवस्था की गई है जहाँ समाज का कोई भी वर्ग भूखा न मरे। छठ में हम उस डोम समाज से बाँस के पात्र ख़रीदते हैं, जो समाज के सबसे निचले पायदान पर है। रुद्राभिषेक से लेकर लखराँव तक जैसे आयोजनों में फूल माली समाज के हाथ का ही शुद्ध माना गया है।

ठीक इसी तरह, अंतिम संस्कार में ब्राह्मणों द्वारा श्राद्धकर्म संपन्न कराए जाने की प्रक्रिया है। नाई को बुलाया जाता है, जो मृत शरीर का मुंडन करता है। हरगोविंद दास और चंदन दास के अंतिम संस्कार में न कोई पुरोहित आया और न कोई नाई। पुरोहित सामान्य वर्ग में आता है, नाई OBC में। मुस्लिम भीड़ से हिन्दुओं के हर वर्ग को भय है। वो किसी को दलित जानकार छोड़ते नहीं, उनके लिए सारे ग़ैर-मुस्लिम काफिर हैं। अंतर इतना है कि इन दलितों के लिए देश में ख़ुद को पिछड़ों का ठेकेदार बताने वाला समूह कोई आवाज़ नहीं उठाता।

ब्राह्मण, नाई गिहारा… मुस्लिम भीड़ के लिए सब एक

ब्राह्मणों ने इसे पुलिस से जुड़ा मामला बताया तो नाइयों ने सामान न होने की बात कहकर टाल दिया। कारण – मुस्लिम भीड़ का ख़ौफ़। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 10 लाख रुपए की क़ीमत लगाई इनकी जान की, लेकिन परिवार ने इसे ठुकरा दिया। परिवार को न्याय चाहिए। हिन्दुओं की सुरक्षा के लिए BSF इलाक़े में तैनात है, लेकिन न्याय कौन दिलाएगा? दोषियों को सज़ा कैसे मिलेगी? वो हमेशा हजारों की भीड़ में निकलते हैं, वो वोट बैंक हैं। ब्राह्मण या नाई वोट बैंक थोड़े हैं!

हाल की ही एक और घटना है – दिल्ली के सीलमपुर में गिहारा समाज से आने वाले कुणाल नामक नाबालिग लड़के को चाकुओं से गोदकर मार डाला गया। 17 साल के कुणाल के हत्यारे मुस्लिम हैं, इसीलिए किसी भी पिछड़ों के ठेकेदार ने कोई आवाज़ नहीं उठाई। ST समाज से आता है परिवार, राहुल गाँधी या अखिलेश यादव की तरफ से कोई पोस्ट नहीं आया। जिनलोगों ने राष्ट्रपति दौपदी मुर्मू के ST होने व महिला होने का सर्टिफिकेट रद्द कर रखा है, वो भला कुणाल के लिए क्या न्याय माँगेंगे।

मुर्शिदाबाद का ब्राह्मण और नाई हो या फिर सीलमपुर का गिहारा, मुस्लिम भीड़ की हिंसा में सब समान रूप से निशाना बनाए जाते हैं और कोई इनके लिए आवाज़ भी नहीं उठाता। कश्मीर से पंडितों का पलायन हुआ, पश्चिम बंगाल में दलितों का हो रहा है। बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद जिन हिन्दुओं को निशाना बनाया गया, वो भी दलित ही थे। गाज़ा के लिए चिंतित समूह पड़ोस में बांग्लादेशी हिन्दुओं के लिए चूँ तक न कर पाया। कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी। कुछ तो मजबूरियाँ हैं कि हिन्दुओं को अंतिम संस्कार तक ठीक से नसीब नहीं होता।

आतंकी बुरहान वानी के जनाजे में जुटे थे 2 लाख

जिस जम्मू कश्मीर से हिन्दुओं को भगाया गया, वहाँ बुरहान वानी नामक एक आतंकी मारा जाता है तो उसका जनाजे में 2 लाख मुस्लिम जमा होते हैं। उसे कश्मीर का ‘भगत सिंह’ बताकर बलिदानी क्रांतिकारियों का अपमान किया जाता है। 9 जुलाई, 2016 की वो तस्वीरें देखिए, क्या बच्चे, क्या बूढ़े, क्या महिलाएँ और क्या बुजुर्ग – सब के सब उसमें आपको शामिल दिखेंगे। पुलवामा के त्राल का आसमान उस दिन भीड़ की ‘आमीन-आमीन’ की आवाजों से गूँज रहा था।

उसके जनाजे में दूर-दूर से आए लोगों के लिए खाने-पीने की भी व्यवस्था थी। पके हुए चावल, पानी के बोतल और बिस्किट बाँटे जा रहे थे। वहाँ जुटे ‘भारतीय’ मुस्लिम कह रहे थे कि अब सैकड़ों की संख्या में लड़के हथियार उठाकर कश्मीर को ‘आज़ाद’ करेंगे। जम्मू कश्मीर में जगह-जगह सुरक्षा बलों से मुस्लिमों की झड़पें हुईं। उस भीड़ में शामिल कितने लोगों को सज़ा मिली? ये संभव ही नहीं है। तभी तो कभी नागपुर, कभी महू तो कभी मुर्शिदाबाद में ये भीड़ निकलकर हिन्दुओं का क़त्लेआम मचाती है और उन्हें अंतिम संस्कार तक नसीब नहीं होता।

वाराणसी गैंगरेप मामले में पुलिस ने राजू खान और मोहम्मद शहबाज को दबोचा: आरोपितों के परिजनों का आरोप- लड़की खुद गई थी साथ, SIT गठित

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में युवती के साथ गैंगरेप करने के मामले में शामिल बाकी आरोपितों की पुलिस ने पहचान कर ली है। उनमें से दो आरोपितों को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। पुलिस बाकी आरोपितों की गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। इनमें से 7 आरोपितों की पहचान किया जाना अभी बाकी है। पुलिस ने इनकी पहचान के लिए सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की जाँच की।

लालपुर पुलिस जिन दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान नरपतपुर डुबकियाँ निवासी राज खान और लल्लापुरा निवासी मोहम्मद शहबाज के रूप में हुई है। युवती के साथ दुष्कर्म में ये दोनों भी शामिल थे। पुलिस ने दोनों आरोपितों का मेडिकल कराने के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया है। बता दें कि इस मामले में कुल 23 में से 13 आरोपित गिरफ्तार हो चुके हैं। 

इसके बाद पुलिस कमिश्नर ने डीसीपी (क्राइम) प्रमोद कुमार की अध्यक्षता में एक SIT गठित की है। यह मामले की सत्यतता की जाँच करेगी। टीम में महिला IPS अधिकारी ADCP वरुणा जोन और इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी शामिल हैं। पुलिस कमिश्नर ने बताया की ऐसे मामलों की विवेचना में 60 दिन लगते हैं, लेकिन पुलिस प्रयास करेगी कि 30 दिनों में रिपोर्ट तैयार कर आगे की कार्यवाही की जाए।  

उधर, आरोपितों के परिजनों ने लड़की पर ही आरोप लगाए हैं। कुछ आरोपितों के परिजनों का कहना है कि युवती खुद लड़कों के साथ गई थी। उन्होंने लड़की के चैट और इंस्टाग्राम भी पुलिस को दिखाए। परिजनोें ने युवती के उन सात दिनों के मोबाईल लोकेशन, चैट हिस्ट्री और स्क्रीनशॉर्ट्स शामिल हैं। परिजनों द्वारा दिए गए सबूतों के आधार पर ही जाँच के लिए यह SIT गठित की गई है।

पीड़ित छात्रा का उपचार जारी है। उसे हेपेटाइटिस-B पॉजिटिव पाया गया है। इसके बाद से उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल छात्रा की हालत में सुधार है। डॉक्टर का कहना है कि लंबे वक्त तक नशे करने के कारण छात्रा को पीलिया हो गया है। पीड़ित छात्रा की मेडिकल हिस्ट्री भी ट्रॉमा सेंटर और IMS-BHU को भेजा गया है।

होटल कॉन्टिनेन्टल का मालिक और गैंगरेप का मास्टरमाइंड अनमोल गुप्ता की जमानत याचिका पर अगली सुनवाई 21 अप्रैल को होगी। वही पीएम मोदी की नाराजगी के बाद DCP वरुणा चंद्रकांत मीणा को हटा कर उन्हे वाराणसी से DGP ऑफिस, लखनऊ भेज दिया गया। आरोप है की DCP मीणा ने इस मामले में कोई कठोर कदम नहीं उठाया और न ही लापरवही बरते वाले अफसरों पर कोई रिपोर्ट दी ।  

बता दें कि लगभग दो सप्ताह पहले वाराणसी में स्नातक की एक छात्रा से 23 लड़कों ने 7 दिनों तक गैंगरेप किया था। उसके बाद उसे सड़क पर फेंक कर भाग गए थे। इसके बाद छात्रा अपने घर पहुँची थी और घटना के बारे में परिजनों को बताया था। उसकी हालत को देखते हुए उसे अस्पताल पहुँचाया गया था। लड़की के बयान पर 12 लोगों के नामजद रिपोर्ट और 11 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी।

जिन 11 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी, उनमें से 9 की पहचान पुलिस ने कर ली है। उनकी गिरफ्तारी के प्रयास के दौरान दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। बाकी 7 चिन्हित आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस प्रयास कर रही है। वहीं, जिन दो आरोपितों की पहचान बाकी है, उनकी पहचान के लिए पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगालने सहित तमाम काम कर रही है।

प्रेमी मोहम्मद साहिल के लिए लड़कियों को फँसाकर लाती थी गुलशन खातून, ब्लैकमेल करके करता था रेप: नाबालिग पीड़िता ने बताया – पॉर्न वीडियो बनाकर विदेश में बेचता है

बिहार के वैशाली में मोहम्मद साहिल सिद्दीकी अपनी गर्लफ्रेंड के साथ मिलकर दूसरी लड़कियों को ब्लैकमेल करता था और उनका पॉर्न बनाता था। बिहार पुलिस ने लड़कियों का पोर्न बनाकर उसे विदेश में बेचने वाले इस सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। 17 साल की एक नाबालिग लड़की की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज करके मुख्य आरोपित मोहम्मद साहिल को गिरफ्तार कर लिया है।

यह मामला तब खुला, जब एक पीड़िता का वीडियो 26 मार्च को वायरल हो गया। हालाँकि, लोक-लाज से पीड़िता ने परिजनों ने चुप्पी साधे रखी। आखिरकार पीड़िता के पिता ने 2 अप्रैल 2025 को जंदाहा थाने में इसकी शिकायत दर्ज करवाई। पीड़िता ने बताया कि मोहम्मद साहिल अपनी गर्लफ्रेंड गुलशन खातून के साथ मिलकर लड़कियों को फँसाता है और फिर उनका पोर्न बनाता है।

पीड़िता ने बताया कि वह कंप्यूटर क्लास के लिए जंदाहा बाजार जाती थी। वहीं पर उसकी दोस्ती गुलशन खातून से हुई। इसके बाद दोनों साथ घुमने-फिरने से लेकर साथ में रेस्टोरेंट में खाना खाने जाने लगे। जब पीड़िता का गुलशन पर विश्वास बढ़ गया तो उसने पीड़िता को अपने प्रेमी मोहम्मद साहिल से मिलवाया। एक दिन गुलशन उसे खाने के बहाने लेकर होटल में गई। वहाँ गुलशन ने उसकी तस्वीरें ले लीं।

अपनी शिकायत में पीड़िता ने बताया कि उसकी तस्वीरों को गुलशन के प्रेमी साहिल ने एडिट करके ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। साहिल कहता था कि अकेले मिलो वर्ना उसकी सारी अश्लील तस्वीरें वह पीड़िता के घरवालों को भेज देगा। मोहम्मद साहिल की धमकी से पीड़िता डर गई और आखिरकार उससे मिलने के लिए चली गई। वहाँ साहिल ने उसे खाना खिलाया।

उस खाने में नशीला पदार्थ मिला हुआ था। खाना खाने के बाद वह बेहोश गई। इसके बाद मोहम्मद साहिल ने उसका रेप किया और उसका वीडियो बना लिया। अश्लील वीडियो के आधार पर वह पीड़िता को ब्लैकमेल करने लगा और उससे जबरन शारीरिक संबंध बनाने लगा। पीड़िता का आरोप है कि एक दिन मोहम्मद साहिल और गुलशन ने उसे पकड़ कर बुरी तरह से पीटा और उसका मोबाइल छीन लिया।

इसके बाद दोनों ने उसकी अश्लील तस्वीरों को वायरल कर दिया। वहीं, पीड़िता के पिता का कहना है कि मोहम्मद साहिल कई लड़कियों को ब्लैकमेल करके उनका अश्लील वीडियो बनाता था और उन्हें विदेश में बेचकर पैसे कमाता था। पिता का कहना है कि मोहम्मद साहिल सिद्दीकी जिहादी मानसिकता का व्यक्ति है और इसी मानसिकता के तहत वह लड़कियों का वीडियो बनाकर वायरल करता था।

इस घटना को लेकर डीएसपी अबू जफर आलम ने बताया कि मामला दर्ज करके आरोपित को जेल भेज दिया गया है। डीएसपी ने कहा कि साहिल और उसकी गर्लफ्रेंड द्वारा वायरल वीडियो, नशीली दवाओं के इस्तेमाल और पोर्न वीडियो विदेश भेजने के आरोपों की जाँच की जा रही है। अगर जाँच में ये मामले सही पाए जाते हैं तो आरोपितों पर और गंभीर धाराएँ जोड़ी जा सकती हैं।

पुलिस का कहना है कि साहिल अपनी प्रेमिका गुलशन लड़कियों को मीठी-मीठी बातों से बहलाती-फुसलाती थी और फिर उसे साहिल के पास लेकर जाती थी। कुछ लड़कियों को वह प्रेम करने का नाटक करता था और फिर उनके साथ शारीरिक संबंध बनाता था। इसके बाद उनका वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करता था और कुछ से रुपए भी ऐंठता था।

पुलिस का कहना है कि मोहम्मद साहिल जिन लड़कियों को अपना शिकार बनाया, उसमें दूसरे धर्म की लड़कियाँ भी शामिल हैं। वह इन लड़कियों से जितनी बार संबंध बनाता था, उतनी बार उनका वीडियो रिकॉर्ड करता था और फोटो खींचता था। इन फोटोे और वीडियो को वह दूसरी जगह बेचता था। विरोध करने वाली लड़कियों का वह फोटो-वीडियो वायरल भी कर देता था।

पुलिस का यह भी कहना है कि मोहम्मद साहिल की प्रेमिका गुलशन खातून नशा की आदी है। अपने जाल में फँसाने वाली लड़कियों को भी नशा देती थी। आरोपित ने सोशल मीडिया पर कई लड़कियों के फोटो और वीडियो वायरल किए हैं। हालाँकि, कई लड़कियों के शिकार बनने के बावजूद कोई भी परिवार शायद लोक-लाज की डर से अभी सामने नहीं आया है, सिवाय पीड़िता के। 

‘ब्राह्मणों पर मू%गा, कोई दिक्कत?’: अनुराग कश्यप ने हिन्दू घृणा में पार की हद, ‘फुले’ फिल्म की रिलीज में देरी से हुए आग-बबूला, CBFC को कहा भला-बुरा

बॉलीवुड निर्देशक अनुराग कश्यप ने आगामी फिल्म ‘फुले’ की रिलीज में देरी और उस पर सेंसरशिप को लेकर ब्राह्मण समुदाय और सेंसर बोर्ड (CBFC) पर तीखा हमला बोला है। अनुराग कश्यप ने आरोप लगाया कि फिल्म की रिलीज को ब्राह्मण समुदाय के विरोध के कारण ही टाला गया है। अनुराग कश्यप ने यह भी सवाल उठाया कि एक फिल्म जो रिलीज नहीं हुई है, उसका कुछ समूहों द्वारा विरोध क्यों किया जा रहा है और उन्हें कैसे पहुँच मिली।

फिल्म की रिलीज टली, सोशल मीडिया पर आक्रोश

इस विवाद के बीच, निर्देशक आनंद महादेवन और कलाकार प्रतीक गाँधी और पत्रलेखा की यह फिल्म, जो ज्योतिबा फुले और सावित्री बाई फुले के जीवन पर आधारित है, अब 25 अप्रैल को रिलीज होने की संभावना है। वहीं अनुराग कश्यप की टिप्पणियों से सोशल मीडिया पर लोगों में काफी आक्रोश देखा जा रहा है, जहाँ कई लोगों ने उनकी भाषा और अभिव्यक्ति की आलोचना की है।

अनुराग कश्यप की ओर की सवाल किया गया, “कौन है असली च****?, लोग च**** नहीं, आप ब्राह्मण लोग हो या फिर आप के बाप हैं जो ऊपर बैठे हैं। फैसला कर लो।” इसी पोस्ट पर एक इंस्टाग्राम यूजर ने अनुराग कश्यप को कहा, “ब्राह्मण तुम्हारे बाप हैं। जितना तुम्हारी उनसे सुलगेगी उतना तुम्हारी सुलगाएँगे।” अनुराग कश्यप ने यूजर को जवाब में कहा, ब्राह्मण पे मूतूँगा… कोई दिक्कत?

इंस्टाग्राम पर अनुराग कश्यप का विवादास्पद बयान

अनुराग कश्यप ने अपने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में कहा, “मेरी जिंदगी का पहला नाटक ज्योतिबा और सावित्री बाई फुले पर था। भाई अगर जातिवाद नहीं होता इस देश में ज्योतिबा बाई फुले और सावित्री बाई फुले को क्या ज़रूरत थी लड़ने की। अनुराग कश्यप ने आगे लिखा, “अब ये ब्राह्मण लोगों को शर्म आ रही है या वो शर्म में मारे जा रहे हैं या फिर एक अलग ब्राह्मण भारत में जी रहे हैं जो हम देख नहीं पा रहे हैं, च**** कौन है कोई तो समझाए।”

अनुराग कश्यप ने सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा, “मेरा सवाल यह है कि जब फिल्म सेंसरशिप के लिए जाती है, तो बोर्ड में 4 सदस्य होते हैं। आखिर समूहों और विंग्स को फिल्मों तक पहुँच कैसे मिलती है, जब तक कि उन्हें इसकी अनुमति न दी जाए? पूरी प्रणाली ही धाँधली है।”

इसके अलावा फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप ने पंजाब 95, तीस, धड़क 2 जैसी फिल्मों को लेकर भी टिप्पणी की है। अनुराग ने कहा कि ऐसी फिल्में सेंसरशिप के प्रकोप का सामना करती है और रिलीज होने से रुक जाती है। उन्होंने मोदी सरकार को कहा, “मुझे नहीं पता कि इस जातिवादी, क्षेत्रवादी, नस्लवादी सरकार के एजेंडे को उजागर करने वाली और कितनी फिल्मों पर रोक लगाई गई है।”

अनुराग कश्यप ने आगे कहा, “उन्हें (मौजूदा सरकार) अपना चेहरा आईने में देखने में शर्म आती है। क्या उन्हें इतनी शर्म आती है कि वे खुलकर ये तक नहीं बता सकते कि फिल्म में ऐसा क्या दिखाया गया है, जो उन्हें परेशान करता है।”

₹2000 से ऊपर के UPI लेनदेन पर 18% GST वसूलेगी सरकार? ET Now की ख़बर के बाद सोशल मीडिया में चर्चा, जानिए क्या है सच

क्या अब ₹2000 से अधिक के ऑनलाइन लेनदेन पर सरकार GST (वस्तु एवं सेवा कर) लगाने जा रही है? इसमें कोई शक नहीं है कि UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) ने ऑनलाइन लेनदेन की दुनिया में क्रान्ति ला दी है। इसका अंदाज़ा आप इसी से लगा सकते हैं कि अकेले 2024 में 17 हजार करोड़ से अधिक लेनदेन सिर्फ़ UPI के माध्यम से हुए। 2023 के मुक़ाबले इसमें 45% की उछाल देखी गई। UPI आज सब्जी के ठेलों से लेकर ऑटो स्टोर तक में इस्तेमाल में लाया जाता है।

UPI पेमेंट्स पर अब लगेगा GST?

मोदी सरकार की हर योजना को लेकर एक गिरोह विशेष में डर का माहौल बनाने की आदत घुस गई है। ठीक उसी पैटर्न का अनुसरण करते हुए अब ये भय फैलाया जा रहा है कि 2000 रुपए से अधिक के UPI लेनदेन पर अब केंद्र सरकार 18% GST वसूल करेगी। ऊपर से ‘ET Now’ ने एक लेख के जरिए इस अफवाह को और हवा दी, जिसका शीर्षक था – “₹2000 से अधिक के UPI लेनदेन पर GST? जानिए विशेषज्ञ क्या कहते हैं।” ये ख़बर शुक्रवार (18 अप्रैल, 2025) को प्रकाशित की गई।

इसके बाद भाजपा विरोधी गिरोह सोशल मीडिया पर सक्रिय हुआ और करदाताओं पर एक और बोझ डालने का आरोप लगाने लगा।

AAP से जुड़े कपिल नामक एक शख्स ने भी इस अफवाह को आगे बढ़ाया। कई पोस्ट्स में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अपमानजनक तस्वीरें शेयर की गईं। कपिल ने दावा किया कि जिनके पास व्हाइट मनी है, सिर्फ़ वही लोग UPI का इस्तेमाल करते हैं और अब सरकार उनपर भी टैक्स का बोझ डालने जा रही है।

ख़ुद को ‘क्रिप्टो एजुकेटर’ बताने वाले सुमित कपूर ने भी सायरन की इमोजी के साथ लिखा कि इस फ़ैसले से लोगों के रोज़ाना ख़र्च करने के तौर-तरीके, छोटे कारोबार और मध्यम वर्ग बुरी तरह प्रभावित होंगे। साथ ही उसने ‘डिजिटल इंडिया’ पर भी सवाल उठाया।

आइए, अब जानते हैं कि सच्चाई क्या है। असल में ‘ET Now’ बिना किसी सरकारी स्रोत का हवाला दिए हुए ये ख़बर प्रकाशित कर दी जो अटकलों के अलावा और कुछ भी नहीं है। ख़बर में ही उसने ये भी लिख दिया कि ये एक काल्पनिक स्थिति हो सकती है, क्योंकि सरकार आजकल डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा दे रही है। इसने लिखा कि ऐसी सिर्फ़ चर्चा है। चर्चा कहाँ है, इसने नहीं बताया। लेनदेन पर GST की कोई चर्चा नहीं है टैक्स लगेगा भी तो सिर्फ सर्विस चार्ज पर – ट्रांजैक्शन पर नहीं।

2000 से ऊपर के पेमेंट्स पर GST: जानिए क्या है सच

ये भी जानने लायक बात है कि पेमेंट एग्रीगेटर्स 0.5% से लेकर 2% तक का चार्ज कैशलेश ट्रांजैक्शंस पर लेते हैं। इसको ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ नाम दिया जाता है। क्रेडिट कार्ड वगैरह पर इसे लिया जाता है, UPI पर ये फ़िलहाल लागू नहीं है। RuPay क्रेडिट कार्ड पर भी ऐसा कोई फी नहीं लगता। UPI सर्विस प्रोवाइडर आना ख़र्च निकाल सकें, इसीलिए UPI पर MDR लाने की चर्चा तो है लेकिन अभी बात आगे नहीं बढ़ी है। क्रेडिट कार्ड या वॉलेट से लिंक्ड प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPIs) के माध्यम किए गए पेमेंट्स पर 1.1% का सर्विस चार्ज लगता है, लेकिन ये ग्राहक नहीं बल्कि मर्चेंट देते हैं।

1% से भी कम UPI पेमेंट वॉलेट या क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किए जाते हैं, इसीलिए लगभग 99.9% पेमेंट्स पर कोई शुल्क नहीं वसूला जाता। ये स्पष्ट कर दिया गया है कि P2P (पीयर टू पीयर) या P2M (पीयर टू मर्चेंट) ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं वसूला जाएगा। P2P का अर्थ हुआ 2 लोगों के बीच ट्रांजैक्शन, बिजनेस ट्रांजैक्शन इससे अलग है। 2000 रुपए से नीचे के क्रेडिट कार्ड या वॉलेट्स के माध्यम से होने वाले UPI पेमेंट्स पर MDR लगाने के लिए प्रस्ताव GST काउंसिल की बैठक में पिछले साल आया था, लेकिन इसे अबतक स्वीकार नहीं किया गया है।

जिस बांग्लादेश में 7 महीने से रोज हो रहे हिन्दू-अल्पसंख्यकों पर 10+ हमले, उसने भारत को ‘मुस्लिमों’ पर दिया ज्ञान: विदेश मंत्रालय ने लगाई लताड़, कहा- अपना घर संभालो

भारतीय विदेश मंत्रालय ने मुर्शिदाबाद हिंसा को लेकर बांग्लादेश को लताड़ लगाई है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा को लेकर भारत पर टिप्पणी की थी। विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश को खुद का रिकॉर्ड ठीक करने की सलाह दी है।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार (18 अप्रैल, 2025) को बांग्लादेश की टिप्पणी पर कहा, “हम पश्चिम बंगाल की घटनाओं के संबंध में बांग्लादेश की ओर से की गई टिप्पणियों को खारिज करते हैं। यह बांग्लादेश में होने वाले अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न पर भारत की चिंता के बराबर में एक मुद्दा खड़ा करने का छिपा हुआ फर्जी प्रयास है।”

उन्होंने आगे कहा, “वहाँ ऐसे कृत्यों के अपराधी खुलेआम घूमते रहते हैं। उलटी सीढ़ी टिप्पणियाँ करने और अपनी महानता दिखाने के बजाय बांग्लादेश को अपने देश मे अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।”

बांग्लादेश को भारत की यह कड़े शब्दों वाली टिप्पणी उसके मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के प्रेस सचिव के बयान के बाद सामने आई है। यूनुस के प्रेस सलाहकार शफीकुल आलम ने गुरुवार (17 अप्रैल, 2025) को भारत के खिलाफ जहर उगला था।

शफीकुल आलम ने कहा, “हम मुर्शिदाबाद में साम्प्रदायिक हिंसा में बांग्लादेश को शामिल करने के किसी भी प्रयास का दृढ़ता से खंडन करते हैं… हम भारत और पश्चिम बंगाल सरकार से अल्पसंख्यक मुस्लिम आबादी की पूरी तरह से सुरक्षा के लिए सभी कदम उठाने की अपील करते हैं।”

शफीकुल आलम का बयान उन रिपोर्ट्स के बाद आया था जिनमें मुर्शिदाबाद हिंसा में बांग्लादेशी घुसपैठियों के शामिल होने की बात कही गई थी। बांग्लादेश ने भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर यह ज्ञान तब दिया है जब उसके यहाँ खुद ही हिन्दुओं समेत बाकी अल्पसंख्यकों पर लगातार हमले हुए हैं।

3 अप्रैल, 2025 को राज्यसभा में विदेश मंत्रालय द्वारा दिए गए एक उत्तर के अनुसार, 5 अगस्त, 2024 को बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से 23 मार्च, 2025 तक 2400 से अधिक हमले हिन्दुओं या बाकी अल्पसंख्यकों पर हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने बताया है कि यह मसला उसने बांग्लादेश के साथ उठाया भी है।

इससे पहले भी बांग्लादेश भारत विरोधी बयान देता आया है। हालाँकि, इस बार भारत ने उसे तगड़ा जवाब दिया है।