Home Blog Page 413

हिंदू लड़कियों को प्रेमजाल में फँसा संभोग की वस्तु बनाना हमारा (मुस्लिम) शौक: सरकारी क्लर्क निकला लव जिहादी, पढ़िए गोमाँस से नमाज तक की हर डिटेल

बिहार के लखीसराय से हाल ही में लव जिहाद का एक मामला सामने आया है। एक हिन्दू युवती ने सरकारी क्लर्क कमाल अशरफ पर हिन्दू बन कर उसे फँसाने, यौन संबंध बनाने और नमाज पढ़ने के साथ गौमांस खाने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है। इस मामले में दर्ज की गई FIR की कॉपी से और भी चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। कमाल अशरफ बताता था कि हिन्दू लड़कियों को फँसाना और उन्हें सम्भोग का वस्तु बना कर रखना उन लोग (मुस्लिम) का शौक है।

16 वर्ष की आयु में बनाया निशाना

ऑपइंडिया के पास लखीसराय के सूर्यगढ़ा थाने में इस मामले में दर्ज की गई FIR की कॉपी मौजूद है। FIR में हिन्दू पीड़िता ने बताया है कि आरोपित कमाल अशरफ उसे 2012 में भगा ले गया था, तब वह 16 वर्ष की थी। हिन्दू पीड़िता को उस समय कमाल अशरफ ने अपने आप को राजस्थान का रहने वाला सुमित बताया था। अशरफ एक सरकारी स्कूल में क्लर्क के तौर पर तैनात है। हिन्दू पीड़िता ने बताया कि उसे इसके बाद अशरफ ने आसनसोल और जमुई में रखा।

कमाल अशरफ इस दौरान सुमित बन कर ही हिन्दू लड़की का यौन शोषण करता रहा। FIR में बताया गया है कि कमाल अशरफ हिन्दू पीड़िता को इसके बाद दबाव डाल कर एक बार कोर्ट ले गया और जबरदस्ती शादी करने बयान दिलवा दिया। कमाल अशरफ ने इस दौरान पीड़िता से शादी भी नहीं की। कुछ दिनों बाद पीड़िता ने एक बच्चे को भी जन्म दे दिया, इसके बाद अशरफ उसे धर्मांतरण करने के लिए प्रताड़ित करने लगा।

हिन्दू लड़की फँसाना शौक

FIR में पीड़िता ने बताया है कि बच्चे के जन्म के बाद उसे पता चला कि आरोपित का असल नाम सुमित नहीं बल्कि कमाल अशरफ है और वह राजस्थान नहीं बल्कि लखीसराय का ही रहने वाला है। इसके बाद लगातार कमाल अशरफ हिन्दू युवती पर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने लगा और बिना इस्लाम कबूल किए उससे शादी करने से भी मना कर दिया।

हिन्दू पीड़िता ने बताया, “उनके (कमाल अशरफ) द्वारा कहा गया कि बिना धर्म परिवर्तन तुमसे हमारी शादी नहीं हो सकती है, और हम लोगों का शौक है, कि हिन्दू लड़की को अपने प्रेम जाल में फँसा कर उसे सम्भोग का वस्तु बना कर रखना है और हमसे कभी शादी भी नहीं किया।”

पीड़िता ने बताया कि इस बीच वह भी शिक्षा विभाग में सरकारी कर्मचारी के तौर पर काम करने लगी। इसके बाद भी कमाल अशरफ ने उससे ₹50 हजार भी ले लिए। पीड़िता ने बताया कि पैसे ना देने पर कमाल अशरफ उसे नग्न कर पीटता था और यातनाएँ देता था।

नमाज ना पढ़ने पर हाथ-पैर तोड़े

हिन्दू युवती की यातनाएँ लगातार बढ़ती ही गईं। FIR में बताया गया है कि जब उसने मंदिर जाने और पूजा करने की इच्छा जताई तो कमाल अशरफ उस पर नमाज के लिए दबाव बनाने लगा। जब हिन्दू युवती ने नमाज पढ़ने का विरोध किया तो उसकी पिटाई कर उसका हाथ पैर तोड़ दिया।

कमाल अशरफ ने पूजा के लिए युवती ने जो देवी-देवताओं की मूर्तियाँ रखी थीं, उन्हें भी फेंक दिया और गौमांस खा कर इस्लाम अपनाने का दबाव डालने लगा। कमाल अशरफ हिन्दू युवती ही नहीं बल्कि उसके बच्चे को भी मुस्लिम बनाने के लिए दबाव बनाता था।

दूसरों से संबंध बनाने का डाला दबाव

हिन्दू पीड़िता ने बताया है कि कमाल अशरफ उसके साथ यातनाएँ देने के साथ ही उस पर एक और मुस्लिम इब्राहिम अहमद के साथ संबंध बनाने के लिए दबाव डाल रहा था। पीड़िता ने कहा कि इससे मना करने पर दोनों ने मिलकर उसे बर्बरता से पीटा और उसके गुप्तांगों को नुकसान पहुँचाने का प्रयास किया।

इब्राहिम अहमद ने हिन्दू युवती से खा किअगर वह दोनों के साथ संबंध बनाएगी तो कमाल अशरफ उसके साथ निकाह कर लेगा और उसे बीवी का दर्जा देगा। पीड़िता किसी तरह भाग कर एक रिश्तेदार के घर पहुँची और कमाल अशरफ के विरुद्ध FIR दर्ज करवाई।

पश्चिम बंगाल में ‘सेव हिंदू’ रैली निकालने की हाई कोर्ट ने दी इजाजत: CM ममता बनर्जी को ऐतराज, फिर भी मुर्शिदाबाद जाकर पीड़ितों से मिलेंगे गवर्नर

मुर्शिदाबाद में इस्लामी हिंसा के कारण 400 से भी अधिक हिन्दुओं को पलायन करना पड़ा। अब राज्यपाल CV आनंद बोस हिंसा पीड़ित इलाक़े का दौरा करेंगे और पीड़ित हिन्दुओं से भी मुलाक़ात करेंगे। गुरुवार (17 अप्रैल, 2025) को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्यपाल से कहा कि वो अपना मुर्शिदाबाद दौरा स्थगित कर दें, लेकिन बोस ने इससे इनकार कर दिया है। बता दें कि नए वक़्फ़ क़ानून का बहाना बनाकर मुर्शिदाबाद में मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओं पर हमले किए थे और वाहनों में आग लगाई थी।

देवी-देवताओं की मूर्तियाँ गढ़ने वाले हरगोविंद दास और उनके बेटे चंदन दास की घर में घुसकर हत्या कर दी गई। राज्य सचिवालय नबान्न से बोलते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि वहाँ विश्वास बनाने की मुहिम चल रही है, ऐसे में गवर्नर को वहाँ नहीं जाना चाहिए। ममता बनर्जी ने इस दौरान उदाहरण दिया कि वो ख़ुद भी उन इलाक़ों में नहीं गईं। राज्यपाल बोस ने कहा है कि ग्राउंड पर जाकर वास्तविकता का विश्लेषण करने के लिए वो मुर्शिदाबाद ज़रूर जाएँगे। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों ने वहाँ BSF कैम्प स्थापित करने की माँग की है, हमें इसके प्रयास करने होंगे कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

उधर कलकत्ता हाईकोर्ट में मुर्शिदाबाद हिंसा को लेकर सुनवाई हुई। अधिवक्ता प्रियंका टिबरेवाल ने कहा कि उच्च न्यायलय ने पीड़ितों को वापस बसाने पर जोर दिया है, साथ ही राज्य सरकार को योजना बनाने के लिए कहा गया है कि पीड़ितों को कैसे बसाया जाएगा और तबतक के लिए उनके रहने-खाने की व्यवस्था करने के लिए कहा गया है। साथ ही एक समिति बनाने के लिए कहा गया है, जिसमें राज्य व केंद्रीय मानवाधिकार आयोग के लोग होंगे। वो पीड़ितों से बात करके सारी शिकायतें दर्ज करेंगे।

अधिवक्ता को पीड़ितों से मिलने व बात करने की भी अनुमति मिली है। प्रियंका टिबरेवाल ने बताया कि हाईकोर्ट जाँच की निगरानी करेगा। साथ ही केंद्रीय बलों को वहाँ फ़िलहाल तैनात रखने के लिए कहा गया है। उधर कलकत्ता हाईकोर्ट ने BJYM (भारतीय जनता युवा मोर्चा) को ‘सेव बंगाली हिंदूज’ रैली निकालने की अनुमति दे दी। शनिवार (19 अप्रैल, 2025) को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के घर और भवानीपुर स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी के घर तक रैली निकाली जाएगी।

यमुना की सफाई का रोडमैप तैयार, 3 चरणों में होगा पूरा: PM मोदी ने की हाई लेवल मीटिंग, ‘मास्टर प्लान’ की जिम्मेदारी जल शक्ति मंत्रालय को

दिल्ली में यमुना नदी की सफाई और कायाकल्प के लिए गुरुवार (17 अप्रैल 2025) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य यमुना नदी की मौजूदा स्थिति का आकलन करना और इसके सफाई कार्यों की चल रही व भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करना था।

दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने बताया कि बैठक में विभिन्न एजेंसियों के कार्य योजना की समीक्षा की गई, जिसमें यमुना को प्रदूषण मुक्त करने के लिए समयबद्ध रणनीति बनाई गई।

इस कार्य योजना को तीन हिस्सों में बाँटा गया है: अल्पकालिक (3 महीने), मध्यमकालिक (3 महीने से 1.5 साल) और दीर्घकालिक (1.5 से 3 साल)। इनमें नालों का प्रबंधन, ठोस कचरा प्रबंधन, सीवेज प्रबंधन, सेप्टेज और डेयरी कचरा प्रबंधन, औद्योगिक कचरा प्रबंधन, अपशिष्ट जल उपचार संरचना में कमियों की पहचान, निगरानी उपाय, यमुना में जल प्रवाह सुधार, बाढ़ क्षेत्र संरक्षण, ग्रीन रिवर फ्रंट विकास और जन जागरूकता जैसे कार्य शामिल हैं। प्रत्येक कार्य के लिए स्पष्ट समय सीमा निर्धारित की गई।

यमुना की सफाई बीजेपी का प्रमुख चुनावी वादा रहा है। फरवरी 2025 में दिल्ली विधानसभा चुनाव जीतने के बाद, उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने ट्रैश स्किमर, वीड हार्वेस्टर और ड्रेजर जैसे उपकरणों के साथ सफाई शुरू कर दी थी। जल शक्ति मंत्रालय ने ‘यमुना मास्टर प्लान’ तैयार किया है, जिसे पीएम मोदी की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। इस प्लान में गुजरात के साबरमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर यमुना रिवर फ्रंट विकसित करने की योजना है।

बैठक में नालों की सफाई, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स की निगरानी और नए प्लांट्स के निर्माण पर जोर दिया गया। दिल्ली में 400 मिलियन गैलन प्रतिदिन सीवेज के उपचार में कमी को पूरा करने के लिए समयबद्ध योजना बनाई गई।

इसके अलावा, औद्योगिक इकाइयों से प्रदूषित पानी को नालों में बहने से रोकने के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति को सख्त निर्देश दिए गए। यमुना की सफाई के लिए दिल्ली जल बोर्ड, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग, दिल्ली नगर निगम, पर्यावरण विभाग, लोक निर्माण विभाग और दिल्ली विकास प्राधिकरण जैसे कई विभागों के बीच समन्वय पर बल दिया गया। यह प्रयास 2027 तक यमुना को स्वच्छ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

वक्फ बोर्ड पर याचिका कबूल नहीं, वक्फ कानून पर डायरेक्ट सुनवाई: अयोध्या पर प्रमाण माँगने वाले पूछ रहे – 1500 साल पुरानी मस्जिद कहाँ से लाएँगे कागज

उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने न्यायपालिका की गिरती हुई साख की बात करते हुए कहा है कि वो ‘सुपर संसद’ बनकर क़ानून नहीं बना सकता, ये काम उस संसद का है जो जनता के प्रति जवाबदेह है। हाल ही में संसद के दोनों सदनों से पारित होकर और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद वक़्फ़ संशोधन अधिनियम क़ानून बना। अब सुप्रीम कोर्ट में इसके ख़िलाफ़ कई याचिकाएँ पहुँच गईं। सब इसपर भी सुनवाई चल रही है, क़ानून के कई प्रावधानों पर अगली सुनवाई तक रोक लग गई है। सरकार को सुप्रीम कोर्ट में तमाम सवालों के जवाब देने पड़ रहे हैं।

हालाँकि, मोदी सरकार में ये एक चलन बन गया है जहाँ कुछ NGO, वकील और याचिकाकर्ता तय होते हैं। चाहे अनुच्छेद-370 और 35A निरस्त किए जाने का मामला हो या फिर चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया – ऐसा बार-बार हो रहा है जब मोदी सरकार के फैसलों को सुप्रीम कोर्ट की थकाऊ न्यायिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। ख़ासकर के वक़्फ़ संशोधन क़ानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हैरान करनी वाली है। इसका कारण ये है कि इस बिल को पास कराया जाना लोकतंत्र में एक उदाहरण होना चाहिए था।

‘हमारी याचिका पर कहा – HC जानिए, उनकी याचिकाएँ स्वीकार’

इसे संसद में पेश किए जाने के बाद ‘संयुक्त संसदीय समिति’ (JPC) को भेजा गया। इसमें शामिल पक्ष-विपक्ष के 21 लोकसभा व 10 राज्यसभा सांसदों 36 बैठकें कीं। इतना ही नहीं, 10 शहरों में जाकर ग्राउंड की भी स्थिति देखी। कुल 284 हितधारकों से उनके सुझाव लिए गए। 25 राज्यों के वक़्फ़ बोर्ड्स के प्रतिनिधियों से सुझाव लिए गए। लोकसभा में 12 घंटे की चर्चा के बाद रात के 2 बजे बिल पारित कराया गया। जिसे एक उदाहरण के रूप में लिया जाना चाहिए था, न्यायपालिका उसकी स्क्रूटनी करने में लग गया है।

काशी-मथुरा से लेकर हिन्दुओं से जुड़े तमाम विषयों पर विभिन्न अदालतों में हिन्दुओं का पक्ष रखने वाले अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने सुप्रीम कोर्ट के इस दोहरे रवैये पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया है कि वक़्फ़ बोर्ड को लेकर जब वो सुप्रीम कोर्ट में याचिका लेकर गए थे तब उनसे पूछा गया था कि सीधे सुप्रीम कोर्ट क्यों आ गए, हाईकोर्ट्स में जाना चाहिए था। उन्होंने बताया कि 7 साल से समाज 140 से अधिक याचिकाओं के साथ अलग-अलग अदालतों में संघर्ष कर रहा है, आज तक कोई अंतरिम राहत नहीं मिली।

विष्णु शंकर जैन ने पूछा कि आखिर क्या कारण है कि एक पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाता है तो तुरंत उसकी याचिका स्वीकार कर ली जाती है और अंतरिम राहत देने की बात भी की जाती है, जबकि दूसरे पक्ष के लिए ये क़ानून लागू नहीं होता। अधिवक्ता ने कहा कि पिछले 13 वर्षों से 4 राज्यों में एंडोमेंट एक्ट के जरिए मंदिरों पर कब्ज़ा किए जाने के विरुद्ध सुनवाई चल रही है, हाल ही में फ़ैसला भी आया है जिसमें सारे मुद्दों को हाईकोर्ट में भेज दिया गया है। विष्णु शंकर जैन ने कहा कि ये सारे सवाल इस मामले में क्यों नहीं किए जा रहे हैं?

गुरुवार (17 अप्रैल, 2025) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू होने से पहले विष्णु शंकर जैन ने मीडिया के समक्ष ये तर्क दिए थे। उन्होंने सलाह दी कि सारे मामलों को एक हाईकोर्ट में भेजकर एक संवैधानिक पीठ बनाई जाए और इसकी सुनवाई हो जाए। उनका सवाल जायज है – आख़िर AIMIM, अमानतुल्लाह ख़ान, जमीयत और कई विपक्षी राजनीतिक दलों की याचिकाएँ सीधे सुप्रीम कोर्ट में कैसे स्वीकार कर ली जाती हैं, जबकि हिन्दुओं को अयोध्या से लेकर काशी-मथुरा तक के लिए जिले की कचहरी से होकर गुजरना पड़ता है और सदियों लग जाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में गिड़गिड़ाते रहे SG, खुद ही प्रावधानों पर लगा दिया स्टे

इससे पहले कि सुप्रीम कोर्ट नए वक़्फ़ क़ानून पर रोक लगाता, केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता ने ख़ुद ही कह दिया कि अगली सुनवाई तक हम सेन्ट्रल वक़्फ़ काउंसिल और राज्यों के वक़्फ़ बोर्ड्स में नई नियुक्तियाँ नहीं करेंगे। नए क़ानून में इनमें ग़ैर-मुस्लिमों की नियुक्तियों का भी प्रावधान है, जिसपर स्वतः ही स्टे लग गया। साथ ही ‘वक़्फ़ बाय यूजर’ सहित अन्य वक़्फ़ संपत्तियों को भी अगली सुनवाई तक नहीं छुआ जाएगा। अब केंद्र सरकार एक सप्ताह बाद रिपोर्ट दाखिल करेगी।

अबतक इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लगातार 2 दिन सुनवाई की है। आप देखिए, काशी में ज्ञानवापी के सर्वे में भी निकला कि ये हिन्दू मंदिर था। उसकी दीवारें चीख-चीख कर कहती हैं कि ये मंदिर है। क्या वहाँ किसी प्रकार की रोक लगाई गई? क्या मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर को ध्वस्त करके बने शाही ईदगाह मस्जिद के संबंध में ऐसा कोई निर्णय आया? मध्य प्रदेश स्थित भोजशाला मंदिर को लेकर कोई स्टे आया? मुस्लिमों को नहीं भी नहीं रोका गया, फिर बार-बार मोदी सरकार के क़ानूनों पर स्टे क्यों?

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चीख-चीख कर बताया है कि लाखों सुझावों के बाद ये प्रावधान तय किए गए हैं, ऐसे में इन्हें सिर्फ़ ऊपर-ऊपर से पढ़कर इनके बारे में राय नहीं बनाई जा सकती। कई गाँवों को वक़्फ़ संपत्ति बताकर छीन लिया गया। सोचिए, तमिलनाडु में तिरुचेंदुराई नामक एक गाँव में 1500 वर्ष पुराने मंदिर को वक़्फ़ ने अपना बता दिया। डेढ़ हजार वर्ष पूर्व इस्लाम था ही नहीं। हाल ही में तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित कट्टुकोल्लै गाँव में 150 परिवारों की कृषि वाली भूमि को दरगाह की जमीन बताकर वक़्फ़ ने नोटिस थमा दिया।

तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट के जजों से कहा कि वो प्रावधानों पर रोक लगाकर बहुत ही कठिन क़दम उठा रहे हैं। CJI संजीव खन्ना ने कहा कि सुनवाई तक इन प्रावधानों के अनुसार फ़ैसले नहीं होने चाहिए, ताकि लोगों के अधिकारों का उल्लंघन न हो। विडम्बना देखिए कि इधर दाउदी बोहरा समाज के मुस्लिम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर इस क़ानून के लिए उन्हें धन्यवाद दे रहे थे, इधर सुप्रीम कोर्ट ‘अधिकारों के उल्लंघन’ की बात कर रहा था। अब 5 मई को सुप्रीम कोर्ट अगली सुनवाई करेगा।

सुप्रीम कोर्ट के ये तर्क हिन्दुओं के मामले में कहाँ चले जाते हैं?

अब देखिए, वक़्फ़ के मामले में CJI संजीव खन्ना कहते हैं कि कई ऐसी मस्जिदें हैं जो 14वीं-15वीं शताब्दी में बनी हुई हैं, ऐसे में वो दस्तावेज कहाँ से दिखाएँगे क्योंकि अंग्रेजी राज से पहले रजिस्ट्रेशन की कोई प्रक्रिया ही नहीं थी। विडम्बना देखिए, अयोध्या में श्रीराम की जन्मभूमि पर एक अदद मंदिर के लिए हिन्दुओं को 134 वर्षों तक कोर्ट में लड़ाई लड़नी पड़ी। काग़ज़ दिखाने की ही तो लड़ाई थी, स्वामित्व साबित करने की। क्या अब काशी, मथुरा, भद्रकाली, भोजशाला और अटाला पर भी सुप्रीम कोर्ट काग़ज़ नहीं माँगेगा क्योंकि उस समय रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था नहीं थी?

याद कीजिए, ये वही सुप्रीम कोर्ट है जिसने कृषि क़ानूनों पर सुनवाई के बिना ही अंतरिम रोक लगा दी थी। इससे दिल्ली को घेरे अराजक प्रदर्शनकारियों के बीच ये सन्देश गया था कि भीड़तंत्र का डर दिखाकर वो अपनी कोई भी बात मनवा सकते हैं। गनीमत है कि इस बार बिना सुने रोक नहीं लगाई गई और केंद्र सरकार ने ख़ुद क़दम पीछे खींच लिए। ‘वक़्फ़ बाय यूजर’ वैसे भी एक विवादित प्रावधान है, जहाँ कोई संपत्ति सिर्फ़ इसीलिए वक़्फ़ की हो जाती है क्योंकि उसका इस्तेमाल इस्लाम के लिए हो रहा है।

एक तरफ आप राम मंदिर के लिए कहेंगे कि सबूत लाओ और दूसरी तरफ वक़्फ़ के लिए ये कहेंगे कि ये बेचारे काग़ज़ कहाँ से दिखाएँगे – ये दोहरा रवैया कैसे चल सकता है? और हाँ, अगर ‘वक़्फ़ बाय यूजर’ नामक कोई प्रावधान हो सकता है, फिर ‘मंदिर बाय यूजर’ और ‘गुरुद्वारा बाय यूजर’ जैसा कोई प्रावधान क्यों नहीं हो सकता? कल को गाँव के गाँव ‘वक़्फ़ बाय यूजर’ हो जाएँगे, क्योंकि कश्मीर में तो हिन्दुओं को पलायन के लिए मजबूर किया गया तो वहाँ कौन देखने गया किसकी संपत्ति का क्या इस्तेमाल हुआ? पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में भी आज वही हो रहा है।

बड़ी अजीब बात है कि एक तरफ एक गिरोह को सड़क पर दंगे करने से लेकर किसी भी संपत्ति को अपना बताने तक के अधिकार हैं, वहीं दूसरी तरफ अपने आराध्यों के मंदिर में पूजा के अधिकार के लिए एक वर्ग दशकों तक कोर्ट में दौड़ता है। एक तरफ फंडिंग और रसूख है, दूसरी तरफ इस देश को अपना मानने वाले लोग हैं जो संविधान से ऊपर शरीयत को नहीं रखते। अब समय आ गया है कि सुप्रीम कोर्ट हिन्दुओं की भी सुने, उन्हें हाईकोर्ट जाने न बोले और मंदिरों से काग़ज़ माँगना बंद करे।

गिलमैन, क्रिटिकल, फुलब्राइट… क्यों अमेरिकी विश्वविद्यालयों की स्कॉलरशिप बंद कर रहे हैं ट्रंप, क्यों हजारों भारतीय छात्रों के भविष्य पर भी संशय: जानिए सब कुछ

अमेरिका में पढ़ाई का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए हाल के महीने किसी बुरे सपने से कम नहीं रहे। ट्रंप सरकार के विदेश विभाग ने फुलब्राइट, गिलमैन और क्रिटिकल लैंग्वेज जैसे स्कॉलरशिप प्रोग्रामों को अचानक बंद कर दिया, जो भारतीय छात्रों को अमेरिका के नामी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई और रिसर्च का सुनहरा मौका देते थे। इसके साथ ही अप्रैल 2025 में हजारों भारतीय छात्रों के F-1 और J-1 वीजा बिना स्पष्ट कारण रद्द कर दिए गए।

इन फैसलों ने लाखों भारतीय छात्रों के सपनों को चकनाचूर कर दिया, उनकी पढ़ाई को अधर में लटका दिया और उन्हें आर्थिक संकट में धकेल दिया। उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि आखिर ऐसा क्यों हुआ। न तो उन्होंने कोई गलती की और न ही किसी नियम का उल्लंघन किया। अब वे इमेग्रेशन वकीलों से मदद माँग रहे हैं। अमेरिका के वकीलों के पास ऐसी परेशानियों से जुड़े कई फोन रोजाना आ रहे हैं।

इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एजुकेशन की 2024 ओपन डोर्स रिपोर्ट के मुताबिक, 2023-24 में अमेरिका में 3,31,602 भारतीय छात्र पढ़ रहे थे, जो किसी भी देश के छात्रों की सबसे बड़ी संख्या थी। इनमें से ज्यादातर छात्र स्कॉलरशिप्स और स्टाइपेंड पर निर्भर थे, क्योंकि अमेरिका में पढ़ाई और रहने का खर्च सालाना 40 से 50 लाख रुपये तक होता है। अब स्कॉलरशिप्स बंद होने और वीजा रद्द होने से कई छात्रों को पढ़ाई छोड़ने की नौबत आ गई है। कुछ छात्र बड़े स्टूडेंट लोन लेने को मजबूर हैं, जिससे वे लंबे समय तक कर्ज के बोझ तले दब सकते हैं।

भारतीय छात्र वीज़ा रद्द होने से परेशान

रिपोर्ट के अनुसार, “अमेरिका में भारतीय छात्रों की संख्या बढ़ रही है। लेकिन F-1 छात्र वीज़ा मिलने में कमी आई है। कुछ रिपोर्ट्स से पता चलता है कि 2024 के पहले नौ महीनों में भारतीय छात्रोंं को मिलने वाले वीज़ा में 2023 की तुलना में 38% तक की गिरावट आई है।” बता दें कि F-1 और J-1 वीज़ा अमेरिका में पढ़ने वाले छात्रों के लिए जरूरी होते हैं।

(फोटो साभार : NBC News)

बोस्टन के एक इमिग्रेशन वकील मैथ्यू मैओना ने बताया कि उन्हें हर दिन करीब छह छात्रों के फोन जरूर आते हैं। जो घबराए हुए होते हैं। छात्र बताते हैं कि उन्होंने अपना कानूनी दर्जा खो दिया है और उन्हें इस संबंध में सहायता की ज़रूरत है। वकील ने कहा, “हमें लगा कि यह असामान्य होने वाला है। लेकिन अब ऐसा लगता है कि यह बहुत तेज़ी और उग्र रूप से आ रहा है।”

दिल्ली के 24 साल के रोहन शर्मा (बदला हुआ नाम) जैसे कई भारतीय छात्रों की कहानी दिल दहला देने वाली है। रोहन ने फुलब्राइट स्कॉलरशिप के जरिए न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में पीएचडी प्रोग्राम में दाखिला लिया था। लेकिन स्कॉलरशिप बंद होने और वीजा रद्द होने की खबर ने उनके सारे सपनों पर पानी फेर दिया। रोहन ने बताया, “मैंने दिन-रात मेहनत करके यह स्कॉलरशिप हासिल की थी। अब मेरे पास न फंडिंग है, न वीजा, और न ही घर वापस जाने के पैसे।” रोहन जैसे हजारों छात्र इस समय अनिश्चितता के भंवर में फँसे हैं।

मुंबई की 22 साल की प्रिया मेहता (बदला हुआ नाम) ने गिलमैन स्कॉलरशिप के जरिए कैलिफोर्निया में ग्रेजुएट प्रोग्राम में दाखिला लिया था। प्रिया ने बताया, “मेरे परिवार ने मेरी पढ़ाई के लिए कर्ज लिया था, क्योंकि स्कॉलरशिप से ज्यादातर खर्चे पूरे हो रहे थे। अब स्कॉलरशिप बंद हो गई और मेरा वीजा भी रद्द कर दिया गया। मैं अपने परिवार को क्या जवाब दूँ?” प्रिया जैसे कई छात्र अब इमिग्रेशन वकीलों से मदद माँग रहे हैं, लेकिन कानूनी प्रक्रिया महँगी और जटिल है।

अमेरिकी सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए जरूरी थी। विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने घोषणा की कि ‘Catch and Revoke’ अभियान के तहत उन विदेशी नागरिकों के वीजा रद्द किए जा रहे हैं, जो अमेरिका के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं, जैसे गाजा युद्ध में इजराइल का विरोध करने वाले। 27 मार्च 2025 तक 300 से अधिक छात्रों के वीजा रद्द किए गए, जिनमें भारतीय छात्रों की संख्या काफी थी। लेकिन सरकार ने इन रद्दीकरणों के पीछे स्पष्ट कारण नहीं बताए, जिससे छात्रों में गुस्सा और निराशा बढ़ रही है।

Associated Press की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों में 90 से अधिक कॉलेजों के 600 से ज्यादा छात्रों का वीजा रद्द हुआ, जिनमें भारतीय और चीनी छात्र सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। मिशिगन के दो संस्थानों के चार भारतीय छात्रों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। उनके वकील रामिस वदूद ने कहा, “छात्रों को कोई ठोस कारण नहीं बताया गया। यह अनिश्चितता उन्हें डरा रही है।”

इस संकट का असर भारतीय छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। बेंगलुरु की 26 साल की अनन्या राव (बदला हुआ नाम) ने बताया, “मैं हर रात सो नहीं पाती, क्योंकि मुझे नहीं पता कि कल क्या होगा। मेरे पास नौकरी नहीं है, न फंडिंग है, और मेरा वीजा भी खतरे में है।” कई छात्र अपनी पर्सनल सेविंग्स से खर्च चला रहे हैं, जबकि कुछ यूनिवर्सिटी से अस्थायी मदद की उम्मीद कर रहे हैं। लेकिन बढ़ती महंगाई में यह लंबे समय तक संभव नहीं है।

वीज़ा रद्द होने के फैसले पर विशेषज्ञ क्या बोले ?

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति भारतीय छात्रों के लिए वैकल्पिक रास्ते खोल सकती है। Eduabroad Consulting की प्रतिभा जैन ने कहा, “अगर स्कॉलरशिप्स बंद रहती हैं, तो छात्र जर्मनी, नीदरलैंड, ब्रिटेन या ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों का रुख कर सकते हैं, जहाँ 50% तक स्कॉलरशिप मिलती है।” वनस्टेप ग्लोबल की अरित्रा घोषाल ने सुझाव दिया कि भारतीय छात्रों को वीजा नीतियों की जानकारी रखनी चाहिए और उसी हिसाब से निर्णय लेने चाहिए।

कुछ अमेरिकी यूनिवर्सिटीज ने आपातकालीन ग्रांट्स और प्राइवेट स्कॉलरशिप्स की पेशकश शुरू की है, लेकिन ये सभी छात्रों की जरूरतें पूरी नहीं कर सकते। Career Mosaic की मनीषा ज़ावेरी ने सलाह दी, “छात्रों को वीजा नियमों की जानकारी रखनी चाहिए, अपने वित्तीय दस्तावेज तैयार रखने चाहिए और यूनिवर्सिटी सलाहकारों से संपर्क में रहना चाहिए।”

बहरहाल, इस बदलाव का असर केवल छात्रों पर नहीं पड़ा है बल्कि उन मिड-कैरियर प्रोफेशनल्स, रिसर्च साइंटिस्ट्स और सोशल साइँस के छात्रों पर भी पड़ा है जो अमेरिका में अकादमिक एक्सपोजर की उम्मीद लेकर आए थे। अब उन्हें अपने लिए दूसरे विकल्प तलाशने पड़ रहे हैं।

इस बीच, ट्रंप प्रशासन ने विश्वविद्यालयों पर भी दबाव बढ़ाया है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने चेतावनी दी कि अगर वह कुछ वीजा धारकों की जानकारी नहीं देता, तो उसे अंतरराष्ट्रीय छात्रों को स्वीकार करने का अधिकार खोना पड़ सकता है। कोलंबिया और जॉन्स हॉपकिन्स जैसे विश्वविद्यालयों की संघीय फंडिंग में भी कटौती हुई है।

यह संकट भारतीय छात्रों के लिए सिर्फ आर्थिक या शैक्षणिक नहीं, बल्कि भावनात्मक भी है। ForeignAdmits के निखेल जैन ने कहा, “ये स्कॉलरशिप्स भारतीय छात्रों के लिए सिर्फ फंडिंग नहीं थीं, बल्कि उनके समर्पण और सपनों की पुष्टि थीं। अब वे अपने भविष्य को एक धागे से लटकता देख रहे हैं।” iSchoolConnect के वैभव गुप्ता ने चेतावनी दी कि यह कटौती अमेरिका की सॉफ्ट पावर और इनोवेशन क्षमता को भी नुकसान पहुँचाएगी।

IIT-IIM जैसों संस्थानों के लिए बदलाव का सही समय

Collegify के आदर्श खंडेलवाल ने सुझाव दिया कि यह भारतीय संस्थानों के लिए मौका है। “IIT और IIM जैसे संस्थान अपनी रिसर्च सुविधाएँ बढ़ाएँ, स्कॉलरशिप्स शुरू करें और इंडस्ट्री के साथ साझेदारी करें ताकि होनहार छात्र देश में ही पढ़ाई करें।” लेकिन अभी के लिए, हजारों भारतीय छात्र अनिश्चितता, आर्थिक संकट और टूटे सपनों से जूझ रहे हैं। उनके लिए यह सिर्फ एक नीतिगत बदलाव नहीं, बल्कि जिंदगी का सबसे बड़ा झटका है।

प्रवासन नीति संस्थान के अनुसार, 1949-50 में अमेरिकी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में लगभग 26 हज़ार विदेशी छात्र थे। जबकि 2019-20 तक यह संख्या बढ़कर 1.1 मिलियन हो गई। इसी दौरान अमेरिका के उच्च शिक्षा संस्थानों में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की भागीदारी 1% से बढ़कर 6% तक पहुँच गई। हालाँकि ट्रंप सरकार के फैसलों के बाद इसमें क्या बदलाव होगा, ये देखने वाली बात होगी।

मूल रूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित की गई है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

उस हीरो के चेहरे से उठ गया नकाब, जिसने ड्रग्स लेकर फिल्म सेट पर हीरोइन से की थी छेड़छाड़: छापा पड़ा तो होटल की तीसरी मंजिल से भाग निकला

मलयालम अभिनेत्री विंसी अलोशियस ने अभिनेता शाइन टॉम चाको पर ड्रग्स लेने के बाद उनके साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया है। इस बात का खुलासा अभिनेत्री ने गुरुवार (17 अप्रैल, 2025) को किया। अभिनेत्री ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो के माध्यम से इस घटना का उल्लेख किया था, कि फिल्म सेट पर उनके साथ एक प्रसिद्ध अभिनेता ने ड्रग्स लेकर दुर्व्यवहार किया।

इसी बीच अभिनेत्री विंसी द्वारा अभिनेता टॉम चाको पर ड्रग्स लेने वाले आरोप में भी खुलासा हुआ है। बुधवार (16 अप्रैल, 2025) रात शाइन टॉम को ड्रग्स रेड के दौरान कोच्चि के एक होटल से भागते हुए देखा गया था। ‘जिला मादक पदार्थ निरोधक विशेष कार्रवाई बल’ (DANSAF) को अभिनेता के कमरे में ड्रग्स इस्तेमाल होने की सूचना प्राप्त हुई थी, जिसके बाद टीम मौके पर पहुँची थी।

DANSAF की टीम के आने की भनक जब अभिनेता शाइन टॉम को हुई, तो वे होटल की तीसरी मंजिल से भाग निकले। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभिनेता टॉम चाको के भागने की वजह ये बताई जा रही है कि उनके हाथ में ड्रग्स था।

अभिनेत्री विंसी ने कहा कि उनके साथ ‘सूत्रवाक्यम’ फिल्म की सेट पर दुर्व्यवहार किया गया था, जिसकी शिकायत उन्होंने फिल्म चैंबर में दर्ज कराई है। अभिनेत्री की शिकायत पर ‘चैंबर निगरानी समिति’ सोमवार (21 अप्रैल, 2025) को आपात बैठक बुलाएगी।

विंसी अलोशियस के खुलासे के आधार पर आबकारी विभाग जल्द सबूत इकट्ठा करेगा। आबकारी विभाग ने बताया कि यदि अभिनेत्री कोई सुराग देती है तो वे आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। ‘एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स’ (AMMA) ने बताया था कि अभिनेत्री विंसी जल्द ही उस व्यक्ति का नाम उजागर कर देगी, जिसने फिल्म के सेट पर ड्रग्स लिया था। यदि नाम सामने आता है, तो तुरंत उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। अब इसी मामले में अभिनेता शाइन टॉम चाको का नाम सामने आ गया है।

सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते समय अभिनेत्री विंसी अलोशियस ने स्पष्ट किया था कि वो ड्रग्स लेने वाले अभिनेताओं के साथ काम नहीं करेंगी। विंसी ने यह भी कहा कि वे अपने जीवन में ड्रग्स, सिगरेट जैसी किसी भी नशीली पदार्थों का हिस्सा कभी नहीं होंगी, जो उनके दिमाग या स्वास्थ्य को प्रभावित करे।

बहराइच के राम गोपाल को तो मुस्लिमों ने मार डाला, पर नहीं तोड़ पाए उनके परिवार का हौसला: ऑपइंडिया से बोले पीड़ित परिजन- योगी सरकार का मिल रहा सहयोग

उत्तर प्रदेश के बहराइच में एक प्रतिमा विसर्जन जुलूस में शामिल रामगोपाल मिश्रा की 13 अक्टूबर, 2024 को इस्लामी कट्टरपंथियों ने हत्या कर दी थी। रामगोपाल मिश्रा को भगवा झंडा लहराने पर गोली मारी गई थी। इस मामले में आधे दर्जन मुस्लिम नामजद किए गए थे। हिंसा की घटना के बाद रामगोपाल मिश्रा के परिजनों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाक़ात की थी। उन्होंने पीड़ित परिवार को इस मामले में त्वरित न्याय का भरोसा दिया था।

घटना के लगभग 6 माह पूरे होने के बाद ऑपइंडिया ने रामगोपाल मिश्रा के परिजनों से बात की है। ऑपइंडिया से बातचीत में उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दंगाइयों पर कि गई कार्रवाई पर संतोष जताया है। उन्होंने बताया है कि सारे आरोपित गिरफ्तार हो चुके हैं। रामगोपाल मिश्रा के भाई हरमिलन मिश्रा ने बताया है कि वह अभी कोर्ट में इस मामले में गवाहियाँ दे रहे हैं। उन्होंने रामगोपाल मिश्रा की पत्नी और बाकी परिवार के विषय में भी जानकारी दी है।

कोर्ट में अभी हो रहे बयान

ऑपइंडिया से मृतक रामगोपाल मिश्रा के भाई हरिमिलन ने बताया, “मामले में मुकदमा दर्ज हो गया था। अभी उस पर सुनवाई होती है। अभी मेरी और भाई की गवाही हो चुकी है। मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। आखिरी बार 9 अप्रैल को सुनवाई हुई थी। अब अगली सुनवाई 17 अप्रैल को होगी।” रामगोपाल मिश्रा की हत्या के मामले के अदालती रिकॉर्ड दिखाते हैं कि अब तक 6 बार इसकी सुनवाई हो चुकी है। इससे सम्बन्धित एक और मुकदमा भी बहराइच कोर्ट में ही चल रहा है।

सारे आरोपित गिरफ्तार

हरिमिलन मिश्रा ने ऑपइंडिया से बताया कि रामगोपाल मिश्रा की हत्या करने वाले अब्दुल हमीद समेत बाकी सारे आरोपित गिरफ्तार हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि अब्दुल हमीद और उसके परिजन जमानत का भी प्रयास कर रहे हैं लेकिन वह नहीं उन्हें मिली है। पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के विषय में पूछने पर उन्होंने बताया, “पुलिस और सरकारी वकील इस मामले को अभी मजबूती से रख रहे हैं। उनकी कार्रवाई पर हमें से हम संतुष्ट हैं।”

रामगोपाल मिश्रा की हत्या के बाद 6 मुस्लिमों को FIR में आरोपित बनाया गया था। इसमें अब्दुल हमीद, सरफराज उर्फ़ रिंकू , फहीम, राजा उर्फ़ साहिल, ननकऊ और साहिल को शुरुआत में आरोपित बनाया गया था। इस मामले में बाद में और भी आरोपित जोड़े गए थे। इन सबकी गिरफ्तारी पुलिस ने कर ली थी।

रामगोपाल की विधवा अब नौकरी के प्रयास में

रामगोपाल मिश्रा की हत्या से मात्र 2 महीने पहले ही उनकी शादी हुई थी। उन्होंने प्रेम विवाह किया था। ऑपइंडिया से बात करते हुए मृतक रामगोपाल मिश्रा के भाई हरिमिलन ने बताया कि उनकी विधवा भाभी रोली मिश्रा को नौकरी देने की बात कही गई थी। हरिमिलन ने बताया कि वर्तमान उसके लिए वह प्रयासरत हैं। रोली मिश्रा ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं हैं, इसलिए थोड़ा समय लग रहा है, यह भी हरिमिलन ने बताया है। रामगोपाल की पत्नी कुछ दिन अपने घर और कभी मायके में रहती हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह हो गया तो उनकी आजीविका का प्रश्न हल हो जाएगा।

समझौते का प्रश्न ही नहीं उठता

यह पूछने पर कि क्या कोई समझौते का दबाव तो नहीं डाला जा रहा, हरिमिलन मिश्रा ने बताया, “समझौते का तो सवाल ही नहीं उठता। वो लोग ₹1 करोड़ भी दे देंगे तो भी हम किसी प्रकार के समझौते के लिए नहीं मानेंगे। मेरा भाई जिस तरह की बर्बरता से मारा गया है, हमें बस उसके लिए न्याय चाहिए। पैसे लेने से मेरा भाई वापस नहीं आ जाएगा।”

हरिमिलन मिश्रा ने बताया कि अभी तो अब्दुल हमीद या उसकी तरफ से किसी ने उनसे ऐसी बात नहीं की है। उन्होंने यह भी बताया कि कोर्ट में कभी कभार दूसरे पक्ष के लोग समझौते का इशारा करते हैं। हरिमिलन ने कहा कि हमें बस न्याय चाहिए और जल्दी चाहिए।

पिता बीमार, चाहते हैं न्याय

मृतक रामगोपाल मिश्रा के पिता वृद्ध हैं और बीमार रहते हैं। उसने भी ऑपइंडिया ने बात की। उन्होंने कहा कि उनके बेटे की हत्या क्रूरता से की गई थी, जिसका दुख लगातार बना रहता है। उन्होंने माँग की कि जल्द कोर्ट अपनी कार्यवाही पूरी करके अब्दुल हमीद और बाकियों को सजा दे। उन्होंने कहा कि अब्दुल हमीद और उसके परिवार को सख्त से सख्त सजा दी जाए और यही उनके मृतक बेटे को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

भगवा झंडा लहराने पर मार दी थी गोली

13 अक्टूबर को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के लिए बहराइच के महाराजगंज में जुलूस निकल रहा था। इस जुलूस में डीजे आदि बज रहे थे। इसी में रामगोपाल मिश्रा भी शामिल थे। इस जुलूस पर अब्दुल हमीद के घर के पास इस्लामी कट्टरपन्थियों ने पत्थर बरसा दिए थे। जुलूस में शामिल लोगों पर हमला किया गया था। हिंसा के बीच रामगोपाल मिश्रा ने अब्दुल हमीद के घर की छत पर एक भगवा झंडा लगा दिया था। इसी बीच अब्दुल हमीद ने रामगोपाल मिश्रा को गोली मार दी थी। इसकी वीडियो भी वायरल हुई थी।

घटना के बाद सामने आया था कि रामगोपाल मिश्रा की हत्या के बाद भी अब्दुल हमीद और उसके घरवालों ने शरीर के साथ बर्बरता की थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नाखून उखाड़ने, करेंट लगाने और आँख के पास नुकीली चीज मारने की बात कही गई थी। हालाँकि, पुलिस ने यह सारी बातें नकार दी थी। अब्दुल हमीद की छत पर इसके बाद खून के धब्बे और कांच के टुकड़े भी मिले थे। घटना के बाद अब्दुल हमीद का परिवार भाग गया था। पुलिस ने इसके बाद एनकाउंटर में कुछ आरोपितों को पकड़ा था।

‘सुपर संसद’ बन रहा सुप्रीम कोर्ट, राष्ट्रपति को नहीं दे सकते आदेश: उप राष्ट्रपति, कहा – 1 महीने हो गए, कैश वाले जज पर FIR तक नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों द्वारा पारी किए गए अधिनियमों पर हस्ताक्षर को लेकर राज्यपालों और यहाँ तक कि देश के राष्ट्रपति तक के लिए भी समयसीमा तय कर दी है। वहीं वक़्फ़ संशोधन क़ानून पर भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। हर मामले की न्यायिक समीक्षा वाले खतरनाक ट्रेंड के बीच उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सुप्रीम कोर्ट को अपने अधिकारों की याद दिलाई है। उन्होंने न्यायपालिका की कमज़ोर होती साख को लेकर भी बात की है। बता दें कि जगदीप धनखड़ खुद लंबे समय तक अधिवक्ता रहे हैं और क़ानून के जानकार हैं।

उप-राष्ट्रपति ने 14-15 मार्च की रात हुए नई दिल्ली में एक जज के यहाँ आग लगने के बाद बड़ी मात्रा में कैश बरामद होने की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि एक सप्ताह तक इसके बारे में किसी को कुछ पता ही नहीं चला। उन्होंने पूछा कि क्या इस देरी का कारण समझा जा सकता है, क्या ये माफ़ी योग्य है, क्या इससे कुछ बुनियादी सवाल नहीं उठते? उन्होंने कहा कि किसी भी समय परिस्थिति में या फिर क़ानून के नियमों के हिसाब से स्थिति कुछ और होती। उन्होंने याद दिलाया कि 21 मार्च को एक अख़बार के माध्यम से जनता को इस घटना का पता चला।

राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि जब इस घटना का पता चला तब लोग अनिश्चितता के भाव में थे, इस खुलासे से चिंतित व परेशान थे। उप-राष्ट्रपति ने कहा कि कुछ दिनों बाद हमें एक आधिकारिक स्रोत (सुप्रीम कोर्ट) की तरफ से इनपुट आया। उन्होंने तंज कसा कि इस इनपुट से जज के दोषी होने का संकेत मिला, लेकिन यह संदेह नहीं हुआ कि कुछ गड़बड़ है या फिर जाँच की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अब लोग बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं, क्योंकि एक ऐसी संस्था कटघरे में है जिसे वो सर्वोच्च सम्मान व आदर के साथ देखते आ रहे हैं।

जगदीप धनखड़ ने कहा कि अबतक एक महीने का समय हो चुका है, लेकिन कोई सूचना नहीं है। उन्होंने कहा कि भले ही ये कीड़ों से भरा डब्बा हो या फिर अलमारी में कंकाल भरे हुए हों, इसे उड़ाने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि डब्बे का ढक्कन हटाने का समय आ गया है, अलमारी को ध्वस्त करने का समय आ गया है – ताकि ये कीड़े और कंकाल कम से कम सार्वजनिक परिदृश्य में तो आएँ और इनकी सफाई हो सके। जगदीप धनखड़ के इस बयान को न्यायपालिका की गिरती शुचिता को लेकर चिंता जताने का माध्यम बताया जा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि तो क्या हम ऐसे हालात में आ गए कि समय के साथ यह बात चली जाएगी? उन्होंने स्पष्ट किया कि लोगों के दिल पर इस घटना से गहरी चोट लगी है, लोगों का विश्वास डगमगा गया है। इस दौरान उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने एक सर्वे की भी चर्चा की, जिसमें पता चला था कि न्यायपालिका में लोगों का विश्वास कम हो रहा है। धनखड़ ने कहा कि कार्यपालिका, विधायिका व न्यायपालिका पारदर्शी हों व क़ानून के सामने सबके बराबर होने के सिद्धांत का पालन करें – ये हमारे लोकतंत्र का आधार है।

गुरुवार (17 अप्रैल, 2025) को राज्यसभा इंटर्न्स के छठे बैच को संबोधित करते हुए जगदीप धनखड़ ने कहा कि इस देश में किसी के ख़िलाफ़ FIR हो सकती है, उनके ख़िलाफ़ भी, लेकिन इस मामले में कोई FIR दर्ज नहीं हुई है। बता दें कि जिस जज की बात जगदीप धनखड़ कर रहे थे, उनका नाम यशवंत वर्मा है। उनके खिलाफ FIR दर्ज किए जाने की PIL को भी दिल्ली हाईकोर्ट ने असामयिक बताकर ख़ारिज कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी कह चुके हैं कि इस मामले में CJI की अनुमति के बाद ही FIR दर्ज की जा सकती है।

मुख्य न्यायधीश ने मामले की जाँच के लिए एक समिति गठित की है। जस्टिस यशवंत वर्मा के घर में आग लगने के बाद दमकल विभाग की गाड़ियाँ पहुँची थीं, आग बुझाने के दौरान ही कैश मिला था। जगदीप धनखड़ ने इस घटना और राष्ट्रपति के लिए डेडलाइन तय करने के फ़ैसले का जिक्र करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ‘सुपर संसद’ बन जाएगा और विधायी जिम्मेदारियाँ भी निभाने लगेगा, इसकी उन्होंने कल्पना नहीं की थी। उन्होंने कहा कि क़ानून बनाना संसद का अधिकार है और सरकार जनता के प्रति जिम्मेदार है चुनावों में।

जगदीप धनखड़ ने संविधान के अनुच्छेद 142 का जिक्र करते हुए कहा कि इसके तहत मिले कोर्ट को विशेष अधिकार लोकतांत्रिक शक्तियों के खिलाफ 24×7 उपलब्ध न्यूक्लियर मिसाइल बन गए हैं। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट को किसी भी मामले में पूर्ण फ़ैसला देने का अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति को आदेश नहीं दे सकती है। बता दें कि वक़्फ़ क़ानून पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई चल रही है और इसे लेकर भी सर्वोच्च न्यायालय आलोचना का शिकार बन रहा है।

4 औरतों से 14 बच्चे पैदा कर चुके हैं एलन मस्क, अब खड़ी करना चाहते हैं ‘बच्चों की फौज’: रिपोर्ट, जापानी महिला को भेजा अपना स्पर्म

दुनिया में सबसे अमीर, टेस्ला के मालिक और 14 बच्चों के पिता एलन मस्क बच्चों की फौज खड़ी करना चाहते हैं। वे महिलाओं से बच्चे पैदा करने का आग्रह कर रहे हैं। अपने बच्चों के लिए माता ढूंढ रहे एलन मस्क सरोगेट मदर्स के जरिए अपने ‘ढेर सारे बच्चों’ की इच्छा पूरी करना चाहते हैं।

द वॉल स्ट्रीट की रिपोर्ट में ये छपी है। इसमें कहा गया है, “दुनिया के सबसे अमीर आदमी अपनी कंपनियों को चलाने और ट्रंप को सलाह देने के साथ-साथ एक दर्जन से ज़्यादा बच्चों और ‘हरम ड्रामा’ को भी संभालते हैं। हाल ही में उन्होंने पैसे और निजता को लेकर एक महिला के साथ लड़ाई में पितृत्व परीक्षण कराया।”

रिपोर्ट के मुताबिक मस्क के 13वें बच्चे को जन्म देने वाली कंजर्वेटिव इंफ्लुएंसर एशले सेंट क्लेयर ने कहा है कि उन्हें ऐसे कई मैसेज मिले हैं जिसमें बच्चों की फौज खड़ी करने की बात कही गई थी।

एलन मस्क की चार महिलाओं, तलाकशुदा पत्नी जस्टिन मस्क, सेंट क्लेयर, सिंगर ग्रिम्स, न्यूरालिंक की सीईओ शिवोन जिलिस से 14 बच्चे हैं। शिवोन जिलिस से मस्क के 4 बच्चे हैं और वो कई हाई लेबल प्रोग्राम में मस्क के साथ नजर आ चुकी हैं। यहां तक कि पीएम मोदी के साथ बातचीत के दौरान भी वे मस्क के साथ दिखीं थीं।

रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि मस्क ने क्रिप्टो इंफ्लूएंसर टिफनी फोंग से भी संपर्क किया था। लेकिन फोंग ने जब इस मैसेज को सार्वजनिक कर दिया तो मस्क ने सोशल मीडिया पर उसे अनफॉलो कर दिया।

मस्क का मानना है कि दुनिया में जन्मदर का गिरना मानवता के लिए खतरा है और जनसंख्या बढ़ा कर ही ‘सभ्यता को नष्ट’ होने से बचाया जा सकता है। इसके लिए अधिक बच्चे पैदा करने की जरूरत है लेकिन ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता इंटेलिजेंट हो, ताकि बच्चा भी इंटेलिजेंट हो सके।

रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि मस्क ने जापान की एक हाई प्रोफाइल महिला को अपना स्पर्म उपलब्ध कराया था।

मुर्शिदाबाद में मुस्लिम भीड़ की हिंसा के बाद बंगाल की CM पर भड़के मिथुन चकवर्ती, बताया ‘हिंदुओं के लिए खतरा’: ममता बनर्जी ने BJP-BSF पर फोड़ा ठीकरा

पश्चिम बंगाल में वक्फ कानून हिंसा विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा/BJP) के नेता मिथुन चक्रवर्ती ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए उनको बंगाली हिंदुओं के लिए खतरा बताया। उन्होंने ममता बनर्जी को सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने और समुदायों के बीच अशांति पैदा करने का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि बंगाली हिंदू बेघर होने और शिविरों में खिचड़ी खाने को मजबूर हैं।

ममता बनर्जी के आरोप

16 अप्रैल 2025 को इमामों की सभा के दौरान ममता बनर्जी ने मुर्शिदाबाद में हुए दंगे को प्री-प्लांड बताया था। साथ ही कहा था कि इसमें भाजपा, BSF और सेंट्रल एजेंसियों की साजिश है। पश्चिम बंगाल ने मुर्शिदाबाद हिंसा की जाँच के लिए (SIT) का गठित की है, जिसमें नौ अधिकारी होंगे जिसकी कमान मुर्शिदाबाद रेंज के DIG को सौंपी गई है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आगे मुर्शिदाबाद हिंसा में बंगलादेशियों के शामिल होने की बात कही और BSF की भूमिका पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार को जिम्मेदारी लेने को कहा। उन्होंने ये सवाल भी उठाया कि अगर तृणमूल कॉन्ग्रेस हिंसा में शामिल होते तो उनके घरों पर हमले नहीं होते।

ममता बनर्जी के अनुसार, केंद्र सरकार मीडिया संस्थानों को पैसे देकर बंगाल को बदनाम कर रही है, जबकि उनकी सरकार ने हिंसा में मारे गए लोगों को 10 लाख रुपए देने की घोषणा की है।

बांगलादेशियों के शामिल होने के दावे

न्यूज एजेंसी PTI  ने खुफिया रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि मुर्शिदाबाद हिंसा में बांग्लादेशी संगठनों अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) और जमात-उल मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) का हाथ है।

वही हिंसा के दौरान हुए पिता-पुत्र की हत्या के मामले में पुलिस ने दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है जो बांग्लादेश बॉर्डर और वीरभूम से पकड़े गए हैं, जिनके नाम दिलदार नदाब और कालू नदाब है।   

बीएसएफ और सीआरपीएफ की मौजूदगी से लोग सुरक्षित

हिंसा प्रभावित क्षेत्र शमशेरगंज के निवासी हबीब-उर-रहमान ने ANI से कहा बीएसएफ़ और सीआरपीएफ की मौजूदगी से माहौल शांत है। मगर, लोगों को डर भी है कि अगर बीएसएफ़ हटी तो हालत फिर खराब भी हो सकते हैं। हालाँकि पाँच दिन बाद अब हालात सामान्य है, प्रशासन ने हालात पर नियंत्रण पा लिया है। पलायन कर चुके लोग भी वापस आ रहे हैं।   

हिंसा की जाँच के लिए कमेटी का गठन

मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा की जाँच के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने एक कमेटी का गठन किया है, जिसके अध्यक्ष विजया रहाटकर होंगे। वह खुद हिंसा-प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे। वहीं NCW ने महिलाओं के खिलाफ हुए किसी भी प्रकार के हिंसा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है।