दुनिया में सबसे अमीर, टेस्ला के मालिक और 14 बच्चों के पिता एलन मस्क बच्चों की फौज खड़ी करना चाहते हैं। वे महिलाओं से बच्चे पैदा करने का आग्रह कर रहे हैं। अपने बच्चों के लिए माता ढूंढ रहे एलन मस्क सरोगेट मदर्स के जरिए अपने ‘ढेर सारे बच्चों’ की इच्छा पूरी करना चाहते हैं।
द वॉल स्ट्रीट की रिपोर्ट में ये छपी है। इसमें कहा गया है, “दुनिया के सबसे अमीर आदमी अपनी कंपनियों को चलाने और ट्रंप को सलाह देने के साथ-साथ एक दर्जन से ज़्यादा बच्चों और ‘हरम ड्रामा’ को भी संभालते हैं। हाल ही में उन्होंने पैसे और निजता को लेकर एक महिला के साथ लड़ाई में पितृत्व परीक्षण कराया।”
रिपोर्ट के मुताबिक मस्क के 13वें बच्चे को जन्म देने वाली कंजर्वेटिव इंफ्लुएंसर एशले सेंट क्लेयर ने कहा है कि उन्हें ऐसे कई मैसेज मिले हैं जिसमें बच्चों की फौज खड़ी करने की बात कही गई थी।
एलन मस्क की चार महिलाओं, तलाकशुदा पत्नी जस्टिन मस्क, सेंट क्लेयर, सिंगर ग्रिम्स, न्यूरालिंक की सीईओ शिवोन जिलिस से 14 बच्चे हैं। शिवोन जिलिस से मस्क के 4 बच्चे हैं और वो कई हाई लेबल प्रोग्राम में मस्क के साथ नजर आ चुकी हैं। यहां तक कि पीएम मोदी के साथ बातचीत के दौरान भी वे मस्क के साथ दिखीं थीं।
रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि मस्क ने क्रिप्टो इंफ्लूएंसर टिफनी फोंग से भी संपर्क किया था। लेकिन फोंग ने जब इस मैसेज को सार्वजनिक कर दिया तो मस्क ने सोशल मीडिया पर उसे अनफॉलो कर दिया।
मस्क का मानना है कि दुनिया में जन्मदर का गिरना मानवता के लिए खतरा है और जनसंख्या बढ़ा कर ही ‘सभ्यता को नष्ट’ होने से बचाया जा सकता है। इसके लिए अधिक बच्चे पैदा करने की जरूरत है लेकिन ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता इंटेलिजेंट हो, ताकि बच्चा भी इंटेलिजेंट हो सके।
रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि मस्क ने जापान की एक हाई प्रोफाइल महिला को अपना स्पर्म उपलब्ध कराया था।
पश्चिम बंगाल में वक्फ कानून हिंसा विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा/BJP) के नेता मिथुन चक्रवर्ती ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए उनको बंगाली हिंदुओं के लिए खतरा बताया। उन्होंने ममता बनर्जी को सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने और समुदायों के बीच अशांति पैदा करने का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि बंगाली हिंदू बेघर होने और शिविरों में खिचड़ी खाने को मजबूर हैं।
ममता बनर्जी के आरोप
16 अप्रैल 2025 को इमामों की सभा के दौरान ममता बनर्जी ने मुर्शिदाबाद में हुए दंगे को प्री-प्लांड बताया था। साथ ही कहा था कि इसमें भाजपा, BSF और सेंट्रल एजेंसियों की साजिश है। पश्चिम बंगाल ने मुर्शिदाबाद हिंसा की जाँच के लिए (SIT) का गठित की है, जिसमें नौ अधिकारी होंगे जिसकी कमान मुर्शिदाबाद रेंज के DIG को सौंपी गई है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आगे मुर्शिदाबाद हिंसा में बंगलादेशियों के शामिल होने की बात कही और BSF की भूमिका पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार को जिम्मेदारी लेने को कहा। उन्होंने ये सवाल भी उठाया कि अगर तृणमूल कॉन्ग्रेस हिंसा में शामिल होते तो उनके घरों पर हमले नहीं होते।
ममता बनर्जी के अनुसार, केंद्र सरकार मीडिया संस्थानों को पैसे देकर बंगाल को बदनाम कर रही है, जबकि उनकी सरकार ने हिंसा में मारे गए लोगों को 10 लाख रुपए देने की घोषणा की है।
बांगलादेशियों के शामिल होने के दावे
न्यूज एजेंसी PTI ने खुफिया रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि मुर्शिदाबाद हिंसा में बांग्लादेशी संगठनों अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) और जमात-उल मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) का हाथ है।
वही हिंसा के दौरान हुए पिता-पुत्र की हत्या के मामले में पुलिस ने दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है जो बांग्लादेश बॉर्डर और वीरभूम से पकड़े गए हैं, जिनके नाम दिलदार नदाब और कालू नदाब है।
बीएसएफ और सीआरपीएफ की मौजूदगी से लोग सुरक्षित
हिंसा प्रभावित क्षेत्र शमशेरगंज के निवासी हबीब-उर-रहमान ने ANI से कहा बीएसएफ़ और सीआरपीएफ की मौजूदगी से माहौल शांत है। मगर, लोगों को डर भी है कि अगर बीएसएफ़ हटी तो हालत फिर खराब भी हो सकते हैं। हालाँकि पाँच दिन बाद अब हालात सामान्य है, प्रशासन ने हालात पर नियंत्रण पा लिया है। पलायन कर चुके लोग भी वापस आ रहे हैं।
हिंसा की जाँच के लिए कमेटी का गठन
मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा की जाँच के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने एक कमेटी का गठन किया है, जिसके अध्यक्ष विजया रहाटकर होंगे। वह खुद हिंसा-प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे। वहीं NCW ने महिलाओं के खिलाफ हुए किसी भी प्रकार के हिंसा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है।
सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार (17 अप्रैल 2025) को वक्फ (संशोधन) कानून 2025 की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सीजेआई संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने अंतरिम आदेश पर सुनवाई की।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान, केंद्र सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिया कि अगली सुनवाई तक वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद में गैर-मुस्लिम सदस्य नियुक्त नहीं किए जाएँगे। इसके साथ ही नोटिफिकेशन या रजिस्ट्रेशन के जरिए घोषित वक्फ संपत्तियाँ, जिनमें ‘वक्फ बाय यूजर’ भी शामिल हैं, डी-नोटिफाई नहीं होंगी, यानी मौजूदा स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा। कोर्ट ने केंद्र के इस बयान को रिकॉर्ड पर लिया और अगली सुनवाई 5 मई 2025 को दोपहर 2 बजे तय की है।
#BREAKING In challenge to Waqf Amendment Act 2025, Centre makes the following statements to the Supreme Court :
Non-Muslims won't be appointed to Central Waqf Councils and State Waqf Boards.
Waqfs, including waqf-by-user, whether declared by way of notification or…
इससे पहले, बुधवार (16 अप्रैल 2025) को कोर्ट ने तीन मुद्दों पर अंतरिम आदेश का प्रस्ताव रखा था: पहला- अदालतों द्वारा वक्फ घोषित संपत्तियों को डी-नोटिफाई न किया जाए। दूसरा- कलेक्टर की जाँच के दौरान वक्फ संपत्ति को गैर-वक्फ न माना जाए, और तीसरा- वक्फ बोर्ड और परिषद में पदेन सदस्यों के अलावा कोई गैर-मुस्लिम नहीं होगा। पदेन ऐसे सदस्य होते हैं, जो अपनी सरकारी ओहदों के कारण यहाँ जिम्मेदारी पाते हैं।
इस मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने समय माँगा था, जिसके बाद सुनवाई गुरुवार को हुई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कानून पर रोक लगाना असाधारण कदम होगा और कई निजी संपत्तियों को वक्फ घोषित करने से लोग प्रभावित हुए हैं। इस पर सीजेआई ने जवाब दिया कि मौजूदा स्थिति में बड़ा बदलाव नहीं होना चाहिए, ताकि किसी के अधिकार प्रभावित न हों।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि कानून में ‘वक्फ बाय यूजर‘ को हटाना और गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना संविधान के अनुच्छेद 26 का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जामा मस्जिद जैसी सैकड़ों साल पुरानी वक्फ संपत्तियों के लिए दस्तावेज माँगना असंभव है।
सिबल ने यह भी कहा कि नया कानून मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वायत्तता में हस्तक्षेप करता है। याचिकाकर्ताओं में AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी, AAP विधायक अमानतुल्लाह खान, कॉन्ग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, RJD सांसद मनोज झा और कई संगठन शामिल हैं। दूसरी ओर, छह BJP शासित राज्यों-असम, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हरियाणा, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश ने केंद्र सरकार के कानून का समर्थन किया है।
इस सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से पाँच मुख्य याचिकाएँ चुनने को कहा और कहा कि बाकी याचिकाओं को आवेदन के रूप में माना जाएगा। इसके अलावा, साल 1995 के वक्फ कानून और 2013 के संशोधन को चुनौती देने वाली याचिकाओं को अलग से सूचीबद्ध किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने नैमिष तीर्थ को भी अयोध्या की तर्ज पर विकसित करने का फ़ैसला लिया है। नैमिषारण्य का सनातन धर्म में बड़ा ही पौराणिक महत्व है। योगी सरकार ने संतों के सुझाव पर आधुनिकता के साथ-साथ पुरातनता का ध्यान रखने का भी आश्वासन दिया है। ये नैमिषारण्य ही है जहाँ अधिकतर पुराण लिखे गए, साथ ही भगवान श्रीराम ने अपना अश्वमेध यज्ञ भी यहीं आयोजित किया था। नैमिषारण्य में अक्सर ऋषि-मुनियों की धर्मसभा होती रहती थी।
नैमिषारण्य का विकास कर रही योगी सरकार
नैमिषारण्य में जल्द ही हेलीकॉप्टर सेवा भी शुरू की जाएगी। नए घाट बनाए जाएँगे, साथ ही पुराने घाटों का कायाकल्प किया जाएगा। साथ ही सड़कों का चौड़ीकरण भी किया जाएगा। नैमिषारण्य में हेलीपोर्ट बनकर तैयार हो गया है और PPP (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) की तर्ज पर संचालित किया जाएगा। पर्यटन विभाग ने इसे लेकर टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी है। दक्षिण भारत से यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। पर्यटन भी बढ़ेगा। पहली उड़ान यहाँ से अयोध्या के लिए निकलेगी।
नैमिषारण्य में श्रीमद्भागवत एवं सत्यनारायण समेत तमाम कथाओं का श्रवण करने का भी विशेष महत्व है। इसे 88,000 ऋषि-मुनियों की पावन तपोभूमि के रूप में जाना जाता है। इसे योगी सरकार एक ‘वैदिक सिटी’ के रूप में विकसित करेगी। ठाकुरनगर-रुद्रावर्त धाम मार्ग के किनारे हेलीपोर्ट बनकर तैयार हो गया है, जिसमें 9 करोड़ रुपए लगे हैं। 3 हेलीपैड भी बनाए गए हैं। 5-7 सीटर हेलीकॉप्टर उड़ान भरेंगे। मनु-शतरूपा ने भी नैमिषारण्य में ही तपस्या की थी।
नैमिषारण्य में वेद विज्ञान अध्ययन केंद्र की भी स्थापना की जाएगी, जिससे युवाओं को प्राचीन शास्त्रों के अध्ययन का मौका मिलेगा। यहाँ आधारभूत संरचनाओं को भी विकसित किया जाएगा। इसके लिए 5 एकड़ जमीन भी सरकार ने आवंटित कर दी है। इसके लिए सबसे पहले 25 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया था। वैदिक आर्किटेक्चर और वास्तुशास्त्र में मास्टर्स की डिग्री भी दी जाएगी। गुरुकुल परंपरा के साथ आधुनिक तकनीक मिलेगा और इस तरह यहाँ शास्त्रों का अध्ययन कर युवा निकलेंगे।
नैमिषारण्य में हुई धर्मसभा, जहाँ पड़े महापुराणों के बीज
वाराह पुराण में एक कथा है, जिसमें भगवान विष्णु ने गुरमुख नामक ऋषि से कहा था कि उन्होंने निमिष मात्र (पालक झपकते ही) में यहाँ असुरों का संहार कर दिया है, इसीलिए ये क्षेत्र नैमिषारण्य के नाम से जाना जाएगा। इसी तरह पद्म पुराण में कथा है कि प्रयागराज में इकट्ठा हुए ऋषि-मुनियों ने भगवान विष्णु से एक ऐसे स्थल के बारे में पूछा, जहाँ वो कथा कर सकें। भगवान विष्णु ने उन्हें एक चक्र दिया और कहा कि जहाँ इस चक्र का नेमि (बीच का डंडा) नष्ट हो जाएगा, वही वो स्थल होगा। ऋषि-मुनि इस चक्र के पीछे चले और नैमिषारण्य वाली जगह आकर ही ये चक्र ठहर गया।
आख़िर नैमिषारण्य महत्वपूर्ण क्यों है? अगर हम प्राचीन काल में जाते हैं तो पता चलता है कि महाभारत के युद्ध के बाद युधिष्ठिर ने धर्मपूर्वक भारत-भूमि पर शासन किया। इसके बाद परीक्षित और फिर जनमेजय हस्तिनापुर की गद्दी पर बैठे। तबतक कलियुग का प्रादुर्भाव होने लगा था। ये घटना महाभारत युद्ध के 1500 वर्ष बाद की है, जब शौनक ऋषि ने देश भर के तमाम ऋषि-मुनियों को यहाँ इकट्ठा किया। शौनक ऋषि का मन्त्रों की रचना में बड़ा योगदान था। माना जाता है कि तब देश-समाज पर अवश्य ही कोई संकट आन पड़ा होगा, तभी ये धर्मसभा बुलाई गई थी।
वहाँ सूत ऋषि को विशिष्ट अतिथि के रूप में बुलाया गया था, जिन्होंने एक के बाद एक करके सैकड़ों कथाएँ सुनाईं। सवाल-जवाब का लंबा दौड़ चला और इनको लिपिबद्ध भी किया गया। इसी तरह पुराणों की रचना हुई। कई वर्षों तक ये प्रश्नोत्तरी चलती रही। हालाँकि, इस धर्मसभा के बाद भी सदियों तक पुराणों में कुछ न कुछ जोड़ा जाता रहा, इस दौरान कई ऐसी चीजें भी जोड़ दी गईं जो धर्म विरोधियों की साज़िश थीं। मुग़लकाल में इस्लामी आक्रांताओं ने भी पुराणों को दूषित करने का प्रयास किया। एक पौराणिक श्लोक है:
एकदा नैमिषारण्ये ऋषयः शौनकादयः। प्रपच्छुर्मुनयः सर्वे सूतं पौराणिकं खलु॥
अर्थात, एक बार नैमिष वन में शौनक आदि ऋषियों ने सूतजी से कई पौराणिक एवं ऐतिहासिक प्रश्न किए। संस्कृत भाषा के विद्वान सूर्यकान्त बाली ने अपनी पुस्तक ‘भारत गाथा’ में नैमिषारण्य में हुई इस महासंगोष्ठी के बारे में विस्तार से बताया है। नैमिषारण्य में एक नहीं, बल्कि कई धर्म-संगोष्ठियाँ हुई थीं। महाभारत और ब्रह्मपुराण में कथा मिलती है कि एक बार 12 वर्षों का सत्र चला था। मत्स्य पुराण, और अग्निपुराण में भी एक दीर्घसत्र की बात है। भागवत महापुराण में तो एक 1000 वर्षों तक चलने वाले सत्र का जिक्र है।
नैमिषारण्य में रहने वाले ऋषियों को नैमिषीय कहा जाता था। जिस तरह से त्रेतायुग में दण्डकारण्य का महत्व था, उसी तरह कलियुग के प्रारंभ में नैमिषारण्य का महत्व रहा। वो आध्यात्मिक संवाद और स्वाध्याय का एक केंद्र हुआ करता था। इसका अर्थ है कि उस समय नैमिषारण्य में इतने ऋषि-मुनियों के ठहरने, खाने-पीने और कथा का श्रवण करने के लिए उचित व्यवस्थाएँ रही होंगी। सभी 18 पुराणों की रचना के बीज यहीं हुए अंतिम धर्मसभा में पड़े। सूत एवं शौनक ऋषियों ने कथाओं के प्रचार-प्रसार के लिए अपने उत्तराधिकारी भी तय किए।
नैमिषारण्य के मंदिर, वहाँ का आध्यात्मिक महत्व
नैमिषारण्य तीर्थ आज उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में स्थित है। वहाँ दक्षिण भारत से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। नैमिषनाथ विष्णु मंदिर यहाँ का प्रमुख मंदिर है, जहाँ उनकी शेषनाग पर विराजमान प्रतिमा भी है। यहाँ एक ‘चक्र तीर्थ’ भी है, जहाँ स्थित कुंड का विशेष महत्व है। यहाँ कई प्राचीन आश्रम व मठ हैं, जहाँ ऋषि-मुनि तपस्या किया करते थे। लखनऊ से 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नैमिषारण्य तीर्थ को अब तक की सरकारों ने विकास से अछूता रखा था, यहाँ के महत्व को पिछली सरकारें समझ नहीं पाईं।
चक्रतीर्थी, भेतेश्वरनाथ मंदिर, व्यास गद्दी, हवन कुंड, ललिता देवी का मंदिर, पंचप्रयाग, शेष मंदिर, क्षेमकाया, मंदिर, हनुमान गढ़़ी, शिवाला-भैरव जी मंदिर, पंच पांडव मंदिर, पंचपुराण मंदिर, माँ आनंदमयी आश्रम, नारदानन्द सरस्वती आश्रम-देवपुरी मंदिर, रामानुज कोट, अहोबिल मंठ और परमहंस गौड़ीय मठ – ये सब वो पवित्र स्थल हैं, जो नैमिषारण्य के महत्व को बढ़ाते हैं। गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस में भी आपको नैमिषारण्य तीर्थ की महत्ता को लेकर ये चौपाई मिलेगी:
तीरथ बर नैमिष बिख्याता। अति पुनीत साधक सिधि दाता॥
यहाँ स्थित ललिता देवी मंदिर का भी स्थानीय श्रद्धालुओं में विशेष महत्व है। ये कथा तो आपको पता ही है कि हिमालय के कनखल में प्रजापति दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया था और उसमें महादेव को नहीं बुलाया था। सती के आत्मदास के बाद जब उनका मृत शरीर लेकर महादेव फिर रहे थे, तब विष्णु ने चक्र से मृत शरीर के टुकड़े किए। इस दौरान सती का हृदय नैमिषारण्य में ही गिरा और यहाँ लिंगधारिणी ललिता देवी का प्राकट्य हुआ। माना जाता है कि नैमिषारण्य में कलियुग का प्रभाव नहीं रहता।
यहाँ एक अक्षय वट भी है, जिसके बारे में प्रचलित है कि महर्षि वेद-व्यास के शिष्य महर्षि जैमिनी ने यहाँ तपस्या की थी। जैसे बिहार के गया को पितरों का चरण मानते हैं, ऐसे ही नैमिषारण्य में उनकी नाभी मानी गई है। पितरों की शांति के लिए भी यहाँ दान-पुण्य किए जाते रहे हैं। अक्षय वट के नीचे ही ‘व्यास गद्दी’ भी है, जहाँ से महर्षि वेद-व्यास ने उपदेश दिए थे। इस धाम के बारे में ये भी उल्लेख है कि वृत्रासुर के वध के लिए महर्षि दधीचि ने अपनी हड्डियाँ यहीं दान की थीं। इन हड्डियों से देवराज इंद्र का वज्र बना।
हनुमान गढ़ी का भी विशेष महत्व है। यहाँ पटल लोक से हनुमान जी के उद्भव को दर्शाया गया है। भगवान राम और लक्ष्मण को अपने कंधे पर लेकर जाते हुए हनुमान जी की मूर्ति यहाँ है। इसे दक्षिणेश्वर मंदिर के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि यहाँ की मुख्य प्रतिमा दक्षिण दिशा की ओर है। ये चक्रतीर्थ से 500 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। 12 किलोमीटर दूर मिश्रिख में दधीचि कुंड है। यहाँ का सबसे बड़ा आश्रम देवपुरी मंदिर है, जिसे नारदानंद स्वामी ने बनवाया था। ये 5 मंजिला परिसर है, जहाँ 108 मंदिर हैं। ये 3 एकड़ में फैला हुआ है।
नैमिष तीर्थ में स्थित देवी और श्रीहरि की प्रतिमाएँ
दक्षिण भारत से भी नैमिषारण्य का ख़ास जुड़ाव है, जो बताता है कि भारत भूमि सनातन के कारण ही एक है। नैमिषारण्य के बालाजी मंदिर में तिरुपति मंदिर भी है, जिसका प्रबंधन आंध्र प्रदेश स्थित TTD (तिरुमला तिरुपति देवस्थानम) बोर्ड सँभालता है। प्रत्येक वर्ष फरवरी में यहाँ मेला लगता है, जिसमें बड़ी संख्या में दक्षिण भारतीय आते हैं। एक सप्ताह तक चलने वाले इस आयोजन में ‘दीप यज्ञ’ भी चलता है। 1996 में वेंकटरामाचार्य से प्रेरणा लेकर इस मंदिर को निर्मित किया गया था। चक्रतीर्थ से 7 किलोमीटर दूर महादेव का ‘रुद्रावर्त तीर्थ’ भी है।
एक्टर से नेता बन कर लगातार मुस्लिमों की वकालत करने वाले तमिल एक्टर जोसफ विजय के खिलाफ फतवा जारी किया गया है। बरेली के एक मौलाना ने पार्टियों में शराब पिलाने, तस्करों को आमंत्रित करने समेत कई कारणों के तहत फतवा जारी किया है। एक्टर विजय ने वक्फ कानून के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली है।
बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने एक्टर विजय के खिलाफ यह फतवा जारी किया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए बताया, “कुछ लोग ऐसे हैं जो चेहरा बदल कर मैदान में आते हैं। इसी शक्ल में एक विजय थालापति हैं। वो TVK पार्टी अध्यक्ष हैं और पहले फ़िल्मी दुनिया में जाने जाते थे और अब सियासी पार्टी बना कर राजनीति में आए हैं और मुस्लिमों के हमदर्द बन रहे हैं।”
#WATCH | Bareilly, Uttar Pradesh | On Fatwa against TVK President Vijay, President of All India Muslim Jamaat, Maulana Shahabuddin Razvi Bareilvi says, "…He has formed a political party and maintained cordial relations with Muslims. However, he has portrayed Muslims in a… pic.twitter.com/vMHXZBjPEo
आगे उन्होंने बताया, “जबकि उनकी फिल्मों में मुस्लिमों को शैतान बनाकर पेश किया गया और आतंकी बताया। रमजान के वक्त में उन्होंने रोजा इफ्तार आयोजित किया और इसमें शराबी, जुआरी और असामाजिक तत्वों को बुलाया। इसको लेकर तमिलनाडु के सुन्नी मुसलमान नाराज है और हमसे फतवा पूछा है।”
मौलाना शहाबुद्दीन ने इसके आगे बताया, “मैंने इसी कड़ी में एक फतवा जारी किया है। मैंने कहा है कि मुस्लिमों को विजय के साथ नहीं खड़े होना चाहिए। वो मुस्लिम के विरोधी चेहरा हैं। उन्हें अपनी मजलिसों और महफ़िलों में बुलाएँ।”
मौलाना रिजवी ने यह बयान ऐसे समय में दिया है जब एक्टर विजय ने सुप्रीम कोर्ट में वक्फ कानून को चुनौती दी है। उन्होंने अपनी याचिका में दावा किया है कि यह कानून संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के खिलाफ है और धार्मिक आधार पर भेदभाव को बढ़ावा देता है।
विजय ने अपनी पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के माध्यम से यह याचिका दायर की है। उन्होंने इस कानून को वापस लेने की माँग की है। इसके साथ ही उन्होंने सरकार को चेतावनी भी दी है कि, अगर ये कानून वापस नहीं लिया गया तो उनकी पार्टी मुस्लिमों के साथ मिलकर कानूनी लड़ाई लड़ेगी। इससे पहले विजय ने एक इफ्तार पार्टी का आयोजन भी किया था।
इसमें बड़ी संख्या में मुस्लिम जुटे थे। हालाँकि, यह सब करने के बाद भी विजय से काफिर का टैग नहीं छूटा है। विजय स्वयं एक ईसाई हैं। लगातार मुस्लिमों की वकालत करने विजय के मुस्लिमों का लगातार पक्ष लेने और लड़ाइयाँ सब करने के बाद भी उनके खिलाफ फतवा जारी किया गया है और मुस्लिमों को उनसे दूर रहने को कहा गया है।
ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है कि किसी हिन्दू को लगातार मुस्लिमों की लगातार वकालत करने के बावजूद किसी गैर-मुस्लिम को उसकी जगह बताई गई हो। इससे पहले कट्टरपंथी मौलाना जाकिर नाइक ने भी प्रोपेगेंडाबाज पत्रकार रवीश कुमार के लिए ऐसी ही बातें बताई थीं।
दरअसल, ज़ाकिर नाइक ने सवाल पूछा गया था कि दूसरे धर्म वालों का क्या होगा? सवाल था कि आजकल रवीश कुमार जैसे ‘अच्छे दिल वाले’ पत्रकार भी हैं, जो सच्चाई दिखाते हैं, सच्चाई का साथ देते हैं और दूसरे मजहब वालों का पक्ष लेते हुए ‘दमनकारियों’ के खिलाफ बोलते हैं।
सवाल में ये भी कहा गया था कि मीडिया में रवीश ऐसे अकेले पत्रकार नहीं हैं बल्कि और भी हैं जो समुदाय विशेष से तो नहीं हैं लेकिन उनका पक्ष लेते हैं। सवाल था कि अगर ये पत्रकार इस्लाम का अनुयायी बने बिना ही मरें तो उनका क्या होगा, अल्लाह उनके साथ क्या करेगा? क्या उन लोगों का भी यही अंजाम होगा, जो अन्य काफिरों का होता है?
बकौल ज़ाकिर नाइक, रवीश कुमार हों या ‘समुदाय विशेष का पक्ष लेने वाले’ अन्य दूसरे धर्मों वाले, उन सभी के लिए समान सज़ा की ही व्यवस्था है। ज़ाकिर नाइक ने अपने अनुयायियों को समझाया कि जन्नाह अलग-अलग तरह के होते हैं, जैसे फिरदौस और फिरदौस आला।
नाइक ने कहा कि जब कोई जन्नत में जाता है तो सबके लिए अलग-अलग लेवल की व्यवस्था की गई है, सारे जन्नाह समान नहीं होते। ज़ाकिर नाइक ने कहा कि मजहब के सभी लोग भले ही उच्च-कोटि वाले जन्नाह में नहीं जाएँगे लेकिन मजहब के सारे सच्चे लोग जन्नाह में ही जाएँगे।
दूसरे धर्म वालों के बारे में उसने कहा कि जन्नाह की तरह नरक भी अलग-अलग प्रकार के होते हैं और दूसरे धर्म वाले दिल के कितने भी अच्छे क्यों न हों, उन्हें जाना नरक में ही है। ज़ाकिर नाइक ने स्पष्ट कहा कि दूसरे धर्म वालों का नरक में जाना तय है। बकौल नाइक, अगर कोई मरते समय इस्लाम का अनुयायी नहीं है तो उसके लिए नरक की ही व्यवस्था है।
ऐसे में यह स्पष्ट है कि मुस्लिमों को कोई समर्थन दे लेकिन यदि वह उनके मजहब का नहीं है तो उसे कभी भी स्वीकार्यता नहीं मिलेगी। यह बात सिर्फ ऐसे मामलों में नहीं बल्कि चुनावों में भी स्पष्ट हो जाती है जब मुस्लिम उम्मीदवार की तरफ एकतरफा मुस्लिम वोट होते हैं।
पाकिस्तान फौज के प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने एक बार फिर दो देशों वाली थ्योरी दोहराई है। मुनीर ने कहा है कि पाकिस्तान कलमे की बुनियाद पर बना है। मुनीर ने हिन्दुओं के खिला भी जहर उगला है। उसका यह बयान वायरल हो रहा है।
आसिम मुनीर ने यह बयान पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित ओवरसीज पाकिस्तानी कार्यक्रम सम्मेलन में बुधवार (16 अप्रैल, 2025) को दिया है। जनरल आसिम मुनीर ने इस दौरान कहा कि हम हिंदुओं से हर मायने में अलग हैं, चाहे वो धर्म हो या मकसद हो।
"..We different from Hindus in every possible aspect of life. Our religion is different, our customs are different…that was the foundation of 2 nation theory…"
अपने विवादास्पद भाषण में मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान और भारत दो अलग-अलग राष्ट्र हैं, जिनकी संस्कृति, धर्म और सोच में कोई समानता नहीं है। उन्होंने पाकिस्तान को ‘कलमे की बुनियाद पर बनी दूसरी रियासत’ बताया। उन्होंने पाकिस्तानियों से विभाजन की कहानी आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने की बात कही।
कश्मीर को बताया पाकिस्तान की नस
जनरल आसिम मुनीर ने कार्यक्रम में कश्मीर को पाकिस्तान के ‘गले की नस’ की बताया और दावा किया कि कश्मीर को पाकिस्तान से कोई अलग नहीं कर सकता। इसके अलावा गाजा पट्टी को पाकिस्तानियों का दिल बताया।
बलूचिस्तान में बीएलए के हमलों को लेकर कहा, “आतंकवादियों की दस पीढ़ियाँ भी बलूचिस्तान या पाकिस्तान को नहीं बदल सकतीं…अगर भारतीय सेना के 13 लाख सैनिक हमें हिला नहीं पाए, तो ये आतंकवादी हमारे इरादों को कैसे तोड़ सकते हैं?”
आने वाली पीढ़ी जान सके कि पाकिस्तान उनके लिए क्या
अपने भाषण में मुनीर ने कहा, “मेरे भाई-बहन, बेटे-बेटियों! कृपया पाकिस्तान की कहानी को कभी भूलना मत। इसे अपनी अगली पीढ़ी को बताएँ, जिससे वह पाकिस्तान के साथ अपने जुड़ाव को महसूस करें। यह कभी कमजोर न हो, चाहें यह तीसरी पीढ़ी हो, चौथी पीढ़ी हो या फिर पाँचवीं पीढ़ी। और आने वाली पीढ़ी जान सके कि पाकिस्तान उनके लिए क्या है।”
प्रवासी पाकिस्तानियों को संबोधित करते हुए जनरल मुनीर एक फौजी प्रमुख नहीं बल्कि किसी मौलाना की तरह नजर आए। उनके भाषण में इस्लाम, कलमा, मक्का-मदीना जैसे शब्दों की भरमार रही। बता दें कि, जनरल मुनीर के इसी शब्दावली के कारण उसको पाकिस्तान में ‘मुल्ला जनरल’ के तौर पर जाना जाता है।
इस सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत पाकिस्तान के सभी बड़े नेता मौजूद थे।
नेशनल हेराल्ड केस में कॉन्ग्रेस नेता सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी समेत कई लोगों पर ईडी ने चार्जशीट दायर की है। ये चार्जशीट 988 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले को लेकर दायर की गई है।
9 सितंबर 1938 को जवाहर लाल नेहरू ने नेशनल हेराल्ड अखबार शुरू किया. अखबार शुरू करने में करीब 5 हजार स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना अहम योगदान दिया। अखबार का प्रकाशन तीन भाषाओं हिन्दी, अंग्रेजी और उर्दू में होता था। अंग्रेजी में ‘नेशनल हेराल्ड’, उर्दू में ‘कौमी आवाज’ और हिन्दी में ‘नवजीवन’ के नाम से प्रकाशित होता था। इसका संचालन एसोसिएट जर्नल यानी एजीएल करता था। लेकिन इसके सर्वेसर्वा नेहरू थे क्योंकि उनके इशारों पर ही नेशनल हेराल्ड चला करता था। 1942 से 1945 यानी 3 सालों तक नेशनल हेराल्ड पर अंग्रजों ने प्रतिबंध लगा दिया था।
फिरोज गाँधी को बनाया मैनेजिंग डायरेक्टर
प्रधानमंत्री बनने के बाद नेहरू ने बोर्ड के चेयरमैन के पद से इस्तीफा दे दिया। नेहरू ने बेटी इंदिरा गाँधी के पति फिरोज गाँधी को बोर्ड का मैनेजिंग डायरेक्टर बनवाया। आजादी के बाद से कांग्रेस का मुखपत्र बन गया,लेकिन धीरे-धीरे आर्थिक स्थिति खराब होने लगी।
नेहरू के दौर से ही नेशनल हेराल्ड में एक से बढ़कर एक घोटाले शुरु हो गये थे… सोचिए 1947-48 में बड़ौदा के महाराजा से नेशनल हेराल्ड के लिए पूरे दो लाख रुपये की रिश्वत मांग ली गई… जिसकी शिकायत सरदार पटेल ने नेहरू से की, फिर भी वो रिश्वत वापस नहीं की गई…
डीडी न्यूज के पत्रकार पंकज श्रीवास्तव के मुताबिक नेहरू के निजी सचिव ओ. एम. मथाई ने नेशनल हेराल्ड और एजीएल को लेकर कई खुलासे किए। मथाई के मुताबिक फिरोज गाँधी कंपनी चलाने में सक्षम नहीं थे।
इस वजह से बोर्ड को काफी नुकसान हुआ। आर्थिक संकट से उबारने के लिए जनहित निधि ट्रस्ट बनाया गया। इस ट्रस्ट में प्रधानमंत्री नेहरू की बेटी इंदिरा गाँधी की बड़ी भूमिका थी। मथाई ने नेशनल हेराल्ड के लिए रिश्वत लेने के आरोप लगाए थे।
नेहरू के निजी सचिव ने रिश्वत की बात कही
पत्रकार पंकज श्रीवास्तव बताते हैं कि मथाई ने कहा था कि नेशनल हेराल्ड के लिए बड़ौदा के राजा प्रताप सिंह से 2 लाख रिश्वत ली गई थी। सरदार वल्लभ भाई पटेल ने नेशनल हेराल्ड रिश्वत कांड की शिकायत नेहरू से की थी। शिकायत के बाद भी रिश्वत की रकम महाराजा बड़ौदा को नहीं लौटाई गई। सरदार पटेल ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि ये स्वतंत्रता सेनानियों का अखबार है, लेकिन इससे सरकारी लोग जुड़े हैं। सरदार पटेल ने ये भी कहा था कि वो इसे चैरिटी का विषय नहीं मानते।
नेहरू के दौर में कई बिजनेस घरानों ने नेशनल हेराल्ड को आर्थिक मदद की। इनलोगों ने अखबार को विज्ञापन देना शुरू किया। मफतलाल ग्रुप, टाटा ग्रुप और बिड़ला ग्रुप ने कई विज्ञापन दिए। इन विज्ञापनों के माध्यम से बोर्ड को 1956 से 1957 के बीच 842000 रुपए जमा हुए
1962 में जब प्रधानमंत्री के तौर पर पंडित नेहरू विराजमान थे। उस वक्त दिल्ली में नेशनल हेराल्ड को जमीन मिली। ये जमीन बहादुर शाह जफर मार्ग पर 15 हजार स्क्वायर फीट का प्लॉट दिया गया। इसके बाद आर्थिक तंगी के बीच 2008 तक इसका प्रकाशन चला। गाँधी परिवार का इस पर वर्चस्व बना रहा। इसमें घोटाले का आरोप सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी पर है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस मुखिया फारूक अब्दुल्ला छुपे तौर पर मोदी सरकार के 5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने के फैसले के समर्थन में थे। उन्होंने इसे जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पास करवाने में मदद करवाने की भी बात कही थी। यह खुलासा भारत की खुफिया एजेंसी R&AW के पूर्व प्रमुख AS दुलत ने किया है। वहीं अब्दुल्ला ने यह आरोप नकारे हैं।
पूर्व R&AW प्रमुख ने अपनी नई किताब ‘द चीफ मिनिस्टर एंड द स्पाय’ (मुख्यमंत्री और जासूस) में यह सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने लिखा कि जब 5 अगस्त, 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाला अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी कर दिया था, जिसके बाद अब्दुल्ला ने उनसे बात की थी।
फारूक अब्दुलाह तब कई कश्मीरी नेताओं के साथ नजरबंद किए गए थे। दुलत ने किताब में बताया, “अब्दुल्ला ने कहा कि शायद नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भी इस प्रस्ताव को पारित करवा सकती थी। जब मैं 2020 में उनसे मिला तो उन्होंने मुझसे कहा कि हम मदद करते लेकिन हमें विश्वास में क्यों नहीं लिया गया?”
दुलत ने अपनी किताब में बताया है कि जम्मू-कश्मीर को लेकर फैसला लिए जाने के बाद 2020 में केंद्र सरकार ने अब्दुल्ला से बातचीत करने भेजा था। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने उनसे फारूक अब्दुल्ला को इस बात के लिए मनाने को कहा था कि वह नजरबंदी से बाहर आने पर यह मुद्दा ना उठाएँ और पाकिस्तान का राग भी ना अलापें।
दुलत ने इसके अलावा यह भी दावा किया कि केंद्र सरकार ने अब्दुल्ला से यह भी बताने को कहा था कि वह मीडिया से इस मुद्दे पर बात भी नहीं करेंगे। पूर्व खुफिया एजेंसी प्रमुख ने दावा किया है कि अब्दुल्ला ने यह बात मान ली थी और कहा था कि वह सिर्फ संसद में यह मुद्दा उठाएँगे और सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रतीक्षा करेंगे।
अब्दुल्ला के अनुच्छेद 370 हटाने के समर्थन को लेकर अब श्रीनगर से लेकर दिल्ली तक हलचल मच गई है। विश्वसनीयता खोने के डर के चलते फारूक अब्दुल्ला ने स्पष्ट रूप से यह दावे नकार दिए हैं। उन्होंने इसको लेकर सफाई दी है।
उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “दुलत साहब ने नहीं जो किताब लिखी है, उसमें इतनी गलतियाँ हैं कि मैं बयान नहीं कर सकता। अफ़सोस है कि अगर वह मुझे अपना दोस्त कहते हैं तो दोस्त ऐसा नहीं लिख सकता… अगर हमने अनुच्छेद 370 को धोखा देना होता तो इसके खिलाफ हम प्रस्ताव विधानसभा में क्यों पास करते?”
VIDEO | Srinagar: Reacting to the remarks made in former RAW chief AS Dulat’s latest book 'The CM and the Spy', National Conference President Farooq Abdullah said:
“Dulat sahab’s book is full of so many inaccuracies, I can’t even begin to describe them. It’s unfortunate — if he… pic.twitter.com/AoT5CDDl1x
उन्होंने दुलत की किताब के उस दावे को भी नकार दिया जिसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के भाजपा के साथ गठबंधन की संभावना की बात कही थी। वहीं दुलत ने इन सबके बीच कहा है कि अब्दुल्ला को इस पर गुस्सा होने के बजाय किताब पढ़नी चाहिए और इसमें उनकी तारीफ़ ही लिखी गई है।
गौरतलब है कि 2019 में अनुच्छेद 370 को हटाने को फारूक अब्दुल्ला ने धोखा करार दिया था। उन्होंने और उनकी पार्टी ने इस कदम का विरोध लगातार किया है। उन्होंने 2024 के अंत में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव में भी यह मुद्दा उठाया है। अब उनके इस सार्वजनिक स्टैंड से उलट दावा सामने आया गया है।
दुलत के इस दावे के बाद फारूक अब्दुल्ला और उनकी पार्टी सवालों के घेरे में है। इससे पहले भी नेशनल कॉन्फ्रेंस और अब्दुल्ला परिवार पर आरोप लगता रहा है कि वह कश्मीर में सत्ता चलाने के लिए केंद्र के साथ गुपचुप समझौते में आ चुके हैं। जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सार्वजनिक मंचों से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तारीफ़ को लेकर भी यही बातें कही गई हैं।
वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को लेकर देश में बहस तेज़ हो हो गई। वहीं, इसके विरोध के नाम पर हो रहे प्रदर्शनों में जमकर हिंसा हो रही है। इन प्रदर्शनों ने कानून और व्यवस्था की गंभीर चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। दरअसल, वक्फ संशोधन कानून की संवैधानिकता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बहस चल रही है। इस बीच पश्चिम बंगाल में जारी हिंसा और इसके कारण हिंदुओं के हो रहे पलायन को सुप्रीम कोर्ट और महिला आयोग, दोनों ने गंभीरता से लिया है।
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार (16 अप्रैल 2025) को मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अगुवाई में तीन सदस्यीय पीठ ने अधिनियम की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली 70 से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश ने इस कानून के विरोध के नाम पर हो रही हिंसा पर गहरी चिंता जताई और कहा कि जब मामला अदालत में है, तब सड़कों पर हिंसा नहीं होनी चाहिए।
वहीं, सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने भी हिंसा को दबाव की रणनीति करार बताया। दरअसल, वक्फ कानून को लेकर पश्चिम बंगाल में मुस्लिम बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे हैं और हिंसा को अंजाम दिया है। पिता-पुत्र सहित कई लोगों की हत्या कर दी गई है। लोग अपने घार-बार छोड़कर पड़ोसी झारखंड-बिहार में शरण ले रहे हैं।
NCW Forms Inquiry Committee to Probe Murshidabad Violence; Chairperson Vijaya Rahatkar to Personally Visit Affected Areas and Meet Survivors. pic.twitter.com/HMuimlOxxc
इस बीच मुर्शिदाबाद और मालदा सहित कई जगहों पर जारी हिंसा में महिलाओं को निशाना बनाए जाने का राष्ट्रीय महिला आयोग ने संज्ञान लिया है। इसकी जाँच के लिए एक कमिटी गठित की गई है। आयोग की अध्यक्ष विजया राहतकर 18-19 अप्रैल को मालदा और मुर्शिदाबाद का दौरा करेंगी। आयोग की टीम स्थानीय प्रशासन, पीड़ित महिलाओं और उनके परिजनों से मुलाकात कर करेगी।
भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए एक अनोखा कदम उठाया है। मुंबई और मनमाड के बीच चलने वाली पंचवटी एक्सप्रेस में देश का पहला चलता-फिरता एटीएम लगाया गया है। यह पहल सेंट्रल रेलवे के भुसावल डिवीजन और बैंक ऑफ महाराष्ट्र के सहयोग से शुरू हुई है।
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने एक्स अकाउंट पर इसका वीडियो साझा कर इस ऐतिहासिक शुरुआत की जानकारी दी। यह पहली बार है जब किसी भारतीय ट्रेन में यात्रा के दौरान नकद निकासी की सुविधा दी गई है।
सेंट्रल रेलवे (CR) द्वारा शुरू किए गए इस पायलट प्रोजेक्ट में, एक निजी बैंक द्वारा उपलब्ध कराया गया एटीएम एक वातानुकूलित कोच के अंदर स्थापित किया गया है।यह पहले अस्थायी पेंट्री के रूप में इस्तेमाल होने वाले क्यूबिकल में स्थापित है। सुरक्षा के लिए इसमें शटर डोर, रबर पैड, बोल्ट और दो अग्निशमन यंत्र लगाए गए हैं। मनमाड रेलवे वर्कशॉप में कोच में जरूरी बदलाव किए गए ताकि एटीएम चलती ट्रेन में भी सुचारू रूप से काम कर सके।
इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत एटीएम को एसी चेयर कार कोच में लगाया गया है। सेंट्रल रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी स्वप्निल नीला ने बताया, “यह एक प्रयोग है। अगर यह सफल रहा, तो अन्य ट्रेनों में भी एटीएम लगाए जाएँगे।”
पंचवटी एक्सप्रेस रोजाना छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी), मुंबई से मनमाड जंक्शन, नासिक तक चलती है। यह ट्रेन 258 किलोमीटर की दूरी 4 घंटे 35 मिनट में तय करती है। इसके 22 कोच हैं, जिनमें रोजाना करीब 2,200 यात्री सफर करते हैं। सभी कोच वेस्टिब्यूल से जुड़े हैं, इसलिए हर यात्री एटीएम तक आसानी से पहुँच सकता है। एटीएम से नकद निकासी के अलावा चेकबुक ऑर्डर और अकाउंट स्टेटमेंट की सुविधा भी मिलेगी।