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लोकसभा स्पीकर के बराबर हैं CJI, फिर राष्ट्रपति को आदेश दे सकता है सुप्रीम कोर्ट? जानिए क्या है आर्टिकल 142, उपराष्ट्रपति ने क्यों बताया ‘न्यूक्लियर मिसाइल’

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा बनाए गए वक्फ संशोधन अधिनियम-2025 की संवैधानिकता पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति को भी समय सीमा देते हुए निर्देश जारी किया था। अब उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने न्यायपालिका पर फिर से निशाना साधा है और कहा कि वह अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़कर विधायिका के मामले में हस्तक्षेप कर रही है।

उपराष्ट्रपति धनखड़ ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 142 लोकतांत्रिक ताकतों के खिलाफ एक ‘परमाणु मिसाइल’ बन गया है, जो न्यायपालिका के पास 24 घंटे उपलब्ध होता है।। उपराष्ट्रपति का बयान ऐसे समय में आया है, जब संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित वक्फ अधिनियम के कुछ प्रावधानों पर सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताई और उसे रोकने की बात कही।

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा, “हाल ही में एक निर्णय के माध्यम से राष्ट्रपति को निर्देश दिया गया है। हम कहाँ जा रहे हैं? देश में क्या हो रहा है? हमने लोकतंत्र के लिए इस दिन की कभी उम्मीद नहीं की थी। हमारे पास ऐसे न्यायाधीश हैं जो कानून बनाएँगे, कार्यकारी कार्य करेंगे, सुपर-संसद के रूप में कार्य करेंगे और उनकी कोई जवाबदेही नहीं होगी, क्योंकि देश का कानून उन पर लागू नहीं होता है।”

उपराष्ट्रपति ने कहा, “हम ऐसी स्थिति नहीं बना सकते, जहाँ आप (सुप्रीम कोर्ट) भारत के राष्ट्रपति को निर्देश दें। वह भी किस आधार पर? संविधान के तहत आपके पास एकमात्र अधिकार अनुच्छेद 145(3) के तहत संविधान की व्याख्या करना है।” उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 145(3) के अनुसार किसी महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दे पर कम-से-कम 5 न्यायाधीशों वाली पीठ द्वारा निर्णय लिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जब पाँच न्यायाधीशों वाली पीठों का निर्णय निर्धारित किया गया था, तब सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या आठ थी। धनखड़ ने बिल के संबंधित मामले को लेकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति के खिलाफ निर्णय दो न्यायाधीशों वाली पीठ द्वारा दिया गया था। अब सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है।

उन्होंने यहाँ तक कहा कि संविधान पीठ में न्यायाधीशों की न्यूनतम संख्या बढ़ाने के लिए अनुच्छेद 145(3) में संशोधन करने की आवश्यकता है। उपराष्ट्रपति ने राज्यसभा के प्रशिक्षुओं के छठे बैच को संबोधित करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति को बिल पर तीन महीने में निर्णय लेने का निर्देश दिया गया है। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो संबंधित राज्यपाल द्वारा भेजा गया विधेयक कानून बन जाता है।

न्यायपालिका की वर्तमान हालात पर बात करते हुए उपराष्ट्रपति ने न्यायाधीश यशवंत वर्मा का भी जिक्र किया। ये वही जज हैं, जिनके घर पर इस साल होली के दिन नोटों से भरे बोरों में आग लग गई थी। मामले में भारी विवाद के बाद भी सुप्रीम कोर्ट उन्हें दिल्ली से इलाहाबाद हाई कोर्ट स्थानांतरित कर दिया गया और मामले की जाँच के लिए आंतरिक कमिटी बना दी गई।

धनखड़ ने कहा, “14 और 15 मार्च की रात को नई दिल्ली में एक न्यायाधीश के निवास पर एक घटना घटी। सात दिनों तक किसी को इसके बारे में पता नहीं चला। हमें खुद से सवाल पूछने होंगे। इसमें हुई देरी को क्या समझा जा सकता है? क्या यह क्षमा योग्य है? क्या इससे कुछ बुनियादी सवाल नहीं उठते? किसी भी सामान्य स्थिति में और सामान्य परिस्थितियाँ कानून के शासन को परिभाषित करती हैं।”

अनुच्छेद 142, जिसे उपराष्ट्रपति ने परमाणु मिसाइल कहा

संविधान के अनुच्छेद 142 में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और डिक्री को देने का अधिकार और उसे लागू करने आदि से संबंधित से संबंधित है। अनुच्छेद 142 के उपबंध-1 सुप्रीम कोर्ट को ये अधिकार देता है कि उसके पास आए किसी भी मामले में वह न्याय के लिए डिक्री या आदेश पारित कर सकेगा। यह डिक्री या आदेश पूरे भारत में लागू होगा।

इसके उपबंध-2 में कहा गया है कि इस संंबंध में संसद द्वारा बनाए गए किसी कानून के अधीन रहते हुए सुप्रीम कोर्ट पूरे भारत के किसी भी क्षेत्र के किसी व्यक्ति को हाजिर होने, दस्तावेज प्रस्तुत करने, अवमानना की जाँच करने या दंड देने का समस्त अधिकार उसके पास होगा। इस तरह अनुच्छेद 142 में स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट को संसद द्वारा पारित कानून के दायरे में ही काम करना है।

हालाँकि, बात यहीं खत्म नहीं होती। कॉलेजियम के तर्ज पर सुप्रीम कोर्ट ने इसकी भी काट निकाली है। पिछले कुछ वर्षों में अनुच्छेद 142 की व्याख्या और उसके प्रयोग के विभिन्न उदाहरण पेश किए गए। हाल ही में भारत के सुप्रीम कोर्ट के पाँच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य मामले में निर्णय देकर एक कानूनी ढाँचा विकसित किया।

यह ढाँचा संविधान के अनुच्छेद 142 की व्याख्या और उसके प्रयोग से संबंधित था। इस निर्णय ‘एशियन रीसर्फेसिंग ऑफ रोड एजेंसी प्राइवेट लिमिटेड एवं अन्य बनाम सीबीआई के पिछले निर्णय से बिल्कुल उलट था। सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट बार के फैसले में एशियन रीसर्फेसिंग के निर्णय को पलट दिया था। इसमें अनुच्छेद 142 के तहत नए दिशा-निर्देश जारी करने के अलावा अंतरिम आदेशों से संबंधित पहलुओं को भी शामिल किया।

इसमें विचार किया गया कि अंतरिम आदेश को रद्द करने या संशोधित करने का हाई कोर्ट का अधिकार क्या है और क्या अंतरिम आदेश किसी विशेष समय की समाप्ति पर खुद ही समाप्त हो सकता है। एशियन रिसर्फेसिंग के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इसी मुद्दे पर विचार किया था। उस दौरान शीर्ष न्यायालय ने माना था कि जब तक अंतरिम आदेश का समय ना बढ़ाया न जाए, वह आदेश की तारीख से 6 महीने बाद स्वतः समाप्त हो जाता है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने उस फैसले को उलट दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एशियन रीसर्फेसिंग मामले में निर्धारित समय बीत जाने पर अंतरिम आदेशों की स्वतः समाप्ति की शर्त लागू रहने योग्य नहीं थी और इसलिए इसे खारिज कर दिया। इसके बाद अनुच्छेद 142 में दिए गए अधिकारों के तहत उसने नए दिशा-निर्देश जारी किए।

इसके तहत सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि क्या कोई न्यायालय अंतरिम आदेश पारित करते समय कोई समय सीमा तय कर सकता है। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि अनुच्छेद 142 के तहत शक्ति का उपयोग प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को दबाने या वादियों के मूल अधिकारों को दबाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 142 के तहत अधिकार क्षेत्र का उपयोग विवेक से और केवल असाधारण परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए, ताकि विवादों का निष्पक्ष और न्यायपूर्ण समाधान निकाला जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने जोर दिया कि अनुच्छेद 142 द्वारा दी गई शक्तियों का उद्देश्यपूर्ण न्याय सुनिश्चित करना है।

सुप्रीम कोर्ट ने एशियन रीसर्फेसिंग में पहले दिए गए निर्णय को खारिज करते हुए कहा कि अनुच्छेद 226(3) के तहत पारित स्थगन आदेश को रद्द करने के लिए अनिवार्य शर्त स्थगन आदेश हटाने के लिए आवेदन दाखिल करना और न्यायालय द्वारा न्यायिक विवेक का प्रयोग करना है। इस आवेदन पर दो सप्ताह के भीतर निर्णय नहीं लिया जाता है तो स्थगन आदेश स्वतः समाप्त नहीं होता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्थगन आदेश तब तक प्रभावी रहता है, जब तक कि इसके रद्द करने के लिए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए आवेदन का कारणों के साथ निपटारा नहीं हो जाता। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अदालतों को मामलों के निपटान के लिए कठोर समय-सीमा नहीं लगानी चाहिए, जब तक कि कोई असाधारण परिस्थिति न हो।

अपने इस निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने जो नया गाइडलाइन तय किया उसके अनुसार, अनुच्छेद 142 के तहत शक्तियों का प्रयोग न्यायालय द्वारा अपने समक्ष पक्षकारों के लिए पूर्ण न्याय करने के लिए किया जा सकता है, लेकिन ऐसा करने में न्यायालय अन्य अधिकार क्षेत्रों में अन्य वादियों के पक्ष में पारित वैध न्यायिक आदेशों को रद्द नहीं करेगा।

राष्ट्रपति को निर्देश देने के लिए उपराष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट पर क्यों भड़के?

हमने अपने पिछले आर्टिकल में बताया था कि क्या सुप्रीम कोर्ट भारत के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति को निर्देश सकते हैं या नहीं। इस आर्टिकल में हमने कई कानून पहलुओं पर विचार किया था। कई लोगों के मन में सवाल उठता होगा कि भारत में पदों की वरीयता क्रम क्या है। इससे भी साफ हो जाएगा कि सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति को निर्देश दे सकता है या नहीं।

अगर वरीयता क्रम की बात की जाए तो राष्ट्रपति को देश का सर्वोच्च पद है। राष्ट्रपति को भारत का पहला नागरिक कहा जाता है। इतना ही नहीं, राष्ट्रपति और संसद को मिलाकर ही भारत बनता है और वह संघ के प्रशासन का प्रमुख होता है। इसी प्रशासन का एक अंग न्यायपालिका भी है। इस तरह देश का सर्वोच्च राष्ट्रपति का होता है।

भारत में राष्ट्रपति और राज्यपाल ही ऐसे दो पद हैं, जिनके खिलाफ अदालती कार्रवाई नहीं की जा सकती है। भारत के संविधान ने अनुच्छेद 361 के तहत इसका प्रावधान किया है। यह अनुच्छेद राष्ट्रपति और राज्यपालों के खिलाफ अदालती कार्यवाही से सुरक्षा प्रदान करता है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ना ही इन दोनों को किसी मामले में नोटिस जारी कर सकता है और ना ही निर्देश दे सकता है।

राष्ट्रपति के बाद देश में दूसरा सर्वोच्च पद उपराष्ट्रपति का होता है। इसके बाद तीसरे नंबर पर प्रधानमंत्री आते हैं। देश का चौथा सर्वोच्च पद राज्यपाल का होता है, जो उनके कार्य वाले राज्यों में होता है। इसके बाद वरीयता क्रम में पाँचवें स्थान पर पूर्व राष्ट्रपति आते हैं। इसके बाद भारत के उपप्रधानमंत्री का पद वरीयता क्रम में 5A स्थान पर आता है।

भारत में अधिकारियों का वरीयता क्रम (साभार: www.mha.gov.in)

केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और लोकसभा स्पीकर का पद एक समान होता है। दोनों वरीयता क्रम में छठे नंबर पर आते हैं। इसके बाद सातवें नंबर पर केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्री अपने राज्यों में होते हैं। योजना आयोग के उपाध्यक्ष, पूर्व प्रधानमंत्री, राज्यसभा और लोकसभा में विपक्ष के नेता भी सातवें क्रम पर ही आते हैं।

भारत रत्न से सम्मानित व्यक्ति का क्रम 7A होता है। आठवें क्रम में राजदूत, भारत द्वारा मान्यता प्राप्त राष्ट्रमंडल देशों के आयुक्त, अपने राज्य के बाहर मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल होते हैं। नौंवें क्रम पर सुप्रीम कोर्ट के आते हैं। इसके बाद 9A पर संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष, मुख्य चुनाव आयुक्त और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) आते हैं।

वरीयता क्रम मेें 10वें स्थान पर राज्यसभा के उपसभापति, राज्यों के उपमुख्यमंत्री, लोकसभा के उपसभापति, योजना आयोग (वर्तमान में नीति आयोग) के सदस्य और केंद्र सरकार के राज्यमंत्री आते हैं। वहीं, 11वें स्थान पर भारत के अटॉर्नी जनरल, कैबिनेट सचिव और अपने-अपने केंद्रशासित प्रदेशों के भीतर लेफ्टिनेंट गवर्नर (उपराज्यपाल) तक शामिल हैं। वरीयता क्रम में 12वें स्थान पर पूर्ण जनरल या समकक्ष रैंक के पद पर कार्यरत चीफ ऑफ स्टाफ।

मुर्शिदाबाद में हिंसा से पहले चुन-चुनकर हिंदू घरों पर ‘काली स्याही’ से लगाए निशान, फिर इस्लामी भीड़ ने की बमबाजी-आगजनी: मौके पर पहुँचे पत्रकार तो हुआ खुलासा

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा फैलाई गई हिंसा में नया खुलासा हुआ है। हिंसा फैलाने वाले मुस्लिम कट्टरपंथियों को पहले से ही मालूम था कि कहाँ बम फेंकना है और कहाँ आग लगाना है क्योंकि हिंदुओं के घरों पर काली स्याही से निशान बना दिए गए थे।

इसका खुलासा NMF न्यूज की एक ग्राउंड रिपोर्ट से हुआ। एनएमएफ के पत्रकार पंकज प्रसून ने मुर्शिदाबाद हिंसा में टारगेट किए गए हिंदुओं के घरों के सामने से रिपोर्टिंग की जिसमें पत्रकार को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि हिंदुओं के घरों पर काली स्याही लगाई गई है। इससे साफ जाहिर होता है कि हिंसा करने वाले इस्लामिक कट्टरपंथियों को पता था कि किस हिंदू घर पर बम फेंकना है और कहाँ आग लगाना है?

पत्रकार पंकज प्रसून ने हिंसा का शिकार हुए स्थानीय लोगों से भी बातचीत की। बातचीत के दौरान पता चला कि मुस्लिम भीड़ गलियों में घुसी और हिंदुओं के घरों पर काली स्याही देखकर उन्हें निशाना बनाया, आगजनी की और लूटपाट मचाई।

11 अप्रैल 2025 को मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले में नए वक्फ संशोधन कानून के विरोध में मुसलमानों ने हिंसा की। खासतौर पर हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा, तोड़फोड़, आगजनी की घटनाएँ देखी गई थी। हिंसा की शुरुआत जुम्मे की नमाज के बाद मुर्शिदाबाद के सुती और समसेरगंज इलाकों से हुई थी।

मुर्शिदाबाद हिंसा में 11 अप्रैल 2025 के ही दिन इस्लामिक कट्टरपंथियों ने एक हिंदू पिता (गोविंद दास) और उनके पुत्र की भी हत्या कर दी थी। इसके अलावा मुसलमानों ने एक हिंदू दंपति की मिठाई की दुकान को तहस-नहस कर किया और सामान लूट लिया।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार इस्लामिक कट्टरपंथियों ने हिंसा में फँसी एक एंबुलेंस को आग के हवाले कर दिया और ड्राइवर की बेरहमी से पिटाई की। हिंसा का शिकार हुआ एक हिंदू व्यक्ति ने बताया कि हमलावर बाहर से नहीं आए थे, वे स्थानीय मुसलमान थे।

मुर्शिदाबाद हिंसा में एक अन्य हिंदू पीड़ित ने एएनआई को बताया, “उन्होंने (इस्लामिक कट्टरपंथियों) वाहनों को नष्ट कर दिया, हमारा सामान लूट लिया और दुकानों में भी आग लगा दी।” पीड़ित ने आगे बताया, “मैं रात को सो नहीं पाया। हम जाग रहे थे और डरे हुए थे। जब यहाँ हिंसा हो रही थी, तब कोई पुलिस बल नहीं था।”

मुर्शिदाबाद हिंसा का शिकार हुआ एक हिंदू व्यापारी अमर भगत की पत्नी मंजू भगत ने आजतक के एक रिपोर्टर को बताया, ” भीड़ सामने के गेट से घुसने का प्रयास कर रही थी, लेकिन दरवाजा तोड़ नहीं पाई। इसके बाद मुस्लिम कट्टरपंथी पीछे के गेट से घुसने लगे। पीड़िता ने आगे बताया कि इनलोगों ने बाइक तोड़ दी, घर में मौजूद टेबुल-कुर्सी, गद्दा, सोफा वगैरह को तहस-नहस कर दिया और कीमती सामानों को लूट लिया।

पीड़ितों ने यह भी दावा किया कि पुलिस ने उनके कॉल का भी कोई जवाब नहीं दिया जबकि हिंसा शमशेरगंज पुलिस स्टेशन से करीब 500 मीटर की दूरी पर हो रही थी। हिंसा के दौरान स्थिति इतनी खतरनाक हो गई थी कि हजारों हिंदुओं ने वहाँ से पलायन किया। ये घरों से भाग कर नावों के जरिए नदी पार किया और मालदा में शरण लेने के लिए मजबूर हो गए।

‘पगलेट महिला, खुद को देवी समझ रही’: बद्रीनाथ के ‘उर्वशी’ मंदिर को अभिनेत्री ने बताया अपना, लोगों ने पूछा- कौन सी दुनिया में जीती हो तुम

बॉलीवुड अभिनेत्री उर्वशी रौतेला कभी अपने सोशल मीडिया पर दिए गए परिचय तो कभी अपनी उपबल्धियों पर दिए गए अटपटे बयानों के कारण चर्चा में रहती हैं। इस बार भी उनके सुर्खियों में आने का कारण ऐसा ही है। ‘डाकू महाराज’ फिल्म की एक्ट्रेस ने दावा किया है कि उत्तराखंड में उनके नाम पर मंदिर बनाया गया है। उन्होंने ये दावा सिद्धार्थ कनन के यूट्यूब चैनल पर इंटरव्यू देने के दौरान किया।

वीडियो में 20 मिनट के बाद देख सकते हैं कि जब यूट्यूबर सिद्दार्थ कन्नन ने उर्वशी रौतेला से पूछा ‘बद्रीनाथ मंदिर के दर्शन करने जाओगे तो उसके बाजू में एक टेंपल है, उर्वशी।’ जब कनन ने पूछा कि मंदिर आपके नाम पर है, आपके लिए डेडीकेटेड है? तो जवाब में उर्वशी बोलीं- “हाँ वहाँ उर्वशी मंदिर है।”

जब कनन ने उनसे बार-बार पूछा कि क्या वो मंदिर उनको समर्पित है, तब भी वो हाँ कहती रहीं। आगे उन्होंने ये भी कहा कि वो चाहती हैं कि उनके नाम पर मंदिर साउथ में भी हो।

अब लोग उनकी इस बात को सुन ये पूछ रहे हैं कि क्या अभिनेत्री इस गलतफहमी में हैं कि वो खुद देवी हैं और लोग उनकी पूजा करने मंदिर जाते हैं। लोग उर्वशी के बयान की खूब खिल्ली उड़ा रहे हैं।

लोगों का कहना है कि उर्वशी रौतेला अपना मानसिक संतुलन को खो चुकी हैं। लोग उन्हें पागल बोल रहे हैं। कहा जा रहा है कि ये महिला ठीक है या फिर इसे त्वरित कोई मेडिकल मदद चाहिए।

एक यूजर ने तो ये तक कहा कि ये औरत अपनी दुनिया में जीती है बस। इसे बाकी दुनिया से कोई लेना-देना नहीं है।

बता दें कि उर्वशी रौतेला ने बद्रीनाथ में उर्वशी मंदिर को लेकर कहा है कि वहाँ उनकी पूजा होती है। जबकि हकीकत तो यह है कि ये मंदिर अपसरा उर्वशी देवी को समर्पित है। लोग जब बद्रीनाथ में दर्शन करने आते हैं तो यहाँ भी दर्शन के लिए पहुँचते हैं। ये मंदिर, बद्रीनाथ मंदिर से 1.5 किलोमीटर दूर बामनी गाँव में पवित्र अलकनंदा नदी के तट पर बसा है।

ट्रंप के लौटते ही अमेरिका में ‘इस्लामी शहर’ बसाने का मुस्लिमों का ख्वाब टूटा, 400 एकड़ में बसाने का था प्लान: ईद की नमाज के लिए भी बनाने वाले थे ग्राउंड

अमेरिका में एक इस्लामी शहर बनाने की कर रहे मुस्लिमों के एक समूह को झटका लगा है। इस्लामी शहर को लेकर तैयार किए गए प्लान पर कई तरह की जाँच चालू हो गई है। अमेरिका में यह इस्लामी 400 एकड़ में बसाए जाने की योजना मुस्लिम बना रहे थे। इसके लिए जमीन भी खरीद ली गई थी। यहाँ सब कुछ इस्लामी कायदे कानून से किया जाना था। बड़ी संख्या में मुस्लिमों ने इस नए इस्लामी शहर में प्लॉट भी खरीद लिए थे। अब इस प्रोजेक्ट पर तलवार लटक रही है। अमेरिकी नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वह शरिया शहर को अनुमति नहीं देंगे।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला अमेरिका के टेक्सास राज्य से जुड़ा है। यहाँ के प्लानो शहर की एक मस्जिद की कमिटी ने यह इस्लामी शहर बनाने का इरादा बनाया था। इसका नाम ईस्ट प्लानो इस्लामिक सेंटर (EPIC) है। यह टेक्सास की बड़ी और अमीर मस्जिदों में से एक है। यह एक संगठन के रूप में भी रजिस्टर्ड है। इस नए प्रोजेक्ट का ऐलान 2024 में हुआ था।

यहाँ आने वाले मुस्लिमों ने टेक्सास में ही एक अलग इस्लामी शहर बसने के इरादे से 400 एकड़ जमीन खरीदी। यह जमीन इसी मस्जिद ने कुछ बैंकर आदि की मदद से खरीदी थी। यह जमीन टेक्सास के शहर जोसफिन से 40 मील की दूरी पर है। यहीं पर यह शहर बसाने की योजना बनाई गई थी।

EPIC सिटी की वेबसाइट के अनुसार, इस शहर की प्लानिंग इस्लाम को आगे रख कर की गई है। EPIC की योजना के अनुसार, इस इस्लामी शहर में 1000 घर बनाए जाने हैं। इसके अलावा इस इस्लामी शहर में कई घर वाली इमारतें भी बनती। यह इस्लाम को ध्यान में रख कर शरिया के अनुसार किया जाता।

इस इस्लामी शहर में मदरसे, स्कूल और एक कॉलेज तथा मस्जिद आदि बनाए जाने की भी योजना थी। इसके अलावा ईद की नमाज पढ़ने के लिए मैदान भी बनाए जाने थे। इस प्रोजेक्ट के बारे में डाली गई वीडियो में लिखा गया है कि अल्लाह इसे पूरी करने में मदद करे।

लाखों डॉलर में बिक रहे थे प्लॉट

इस इस्लामी शहर में सबसे छोटे प्लॉट की कीमत लगभग $2 लाख (लगभग ₹1.70 करोड़) रखी गई थी। इनकी कीमत बढ़ते-बढ़ते $5 लाख तक जाती थी। प्लॉट की कीमत उतनी ही अधिक रखी गई थी, जितना वह मस्जिद के नजदीक होता। मस्जिद के नजदीक वाले प्लॉट 15% तक प्रीमियम पर बेचे जाने थे।

अमेरिका भर के मुस्लिमों का इस पूरे प्रोजेक्ट में काफी रुचि थी। इसी के चलते इस इस्लामी शहर के प्लॉट हाथोहाथ बिक रहे थे। लगभग 450 मुस्लिमों ने इस शहर में अपने प्लॉट बुक भी करवा दिए थे। इसके लिए उन्होंने मोटा पैसा भी दे दिया था ताकि समय आने पर इस इस्लामी शहर में बसा सके।

अब कसा शिकंजा

यह इस्लामी शहर कुछ वर्षों के भीतर बस जाना था। इसके बाद यहाँ हजारों मुस्लिम इस्लामी तरीके से रह सकते। इस बीच इस इस्लामी शहर को लेकर लोग चिंतित हो गए। उन्होंने अमेरिका में एक पूरा इस्लामी शहर बसने और यहाँ दूसरे धर्म के लोगों को जगह ना दिए जाने को लेकर चिंताएँ व्यक्त की।

इसके बाद इसका विरोध शुरू हुआ। टेक्सास राज्य के गवर्नर ग्रेग एबट इस शहर के बसने के खिलाफ हैं। अमेरिका के कानूनों के अनुसार, किसी भी इलाके में दूसरे किसी धर्म या रंग के लोगों को बसने से रोका नहीं जा सकता। इस पर सजा का प्रावधान है।

इन सब चिंता के बीच गवर्नर एबट ने साफ़ कर दिया है कि वह टेक्सास में एक ‘शरिया शहर’ नहीं बसने देंगे। उन्होंने कहा कि ना तो टेक्सास में शरिया कानून चलेगा और ना ही शरिया शहर को ही अनुमति दी जाएगी। गवर्नर एबट ने सिर्फ इतना ही नहीं किया बल्कि इस मामले में जाँच के आदेश दिए हैं।

EPIC के इस्लामी शहर पर अब कई मामले में जाँच चल रही है। टेक्सास के अटॉर्नी जनरल केन पैक्सटन ने इस मामले में 4 अलग-अलग जाँच के आदेश दिए हैं। इस सब के बाद इस शहर के भविष्य पर संकट मंडराने लगा है। हालाँकि, अभी स्पष्ट नहीं है कि यह प्रोजेक्ट धरातल पर उतर पाएगा या नहीं। राष्ट्रपति ट्रंप के सत्ता में लौटने के बाद से इसके आसार और कम हो गए हैं।

दिल्ली में 17 साल के कुणाल की चाकुओं से गोदकर हत्या, पलायन कर रहे हिन्दुओं ने CM योगी से लगाई मदद की गुहार: तमंचे वाली ‘जिकरा डॉन’ का आ रहा नाम

दिल्ली के सीलमपुर में एक 17 वर्षीय हिन्दू लड़के की हत्या के बाद भय का माहौल है। चाकुओं से गोदे जाने के बाद नाबालिग को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हमलावरों की गिरफ़्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें गठित की गई हैं। नाराज़ पीड़ितों ने विरोध प्रदर्शन किया, सड़क भी जाम किया। पुलिस पर पक्षपात के आरोप लगे हैं। इलाक़े में बड़ी संख्या में जवानों को तैनात किया गया है। मृतक का नाम कुणाल है, जिन्होंने बताया कि बेटा दूध और समोसा लेने के लिए बाहर निकला था।

सीलमपुर में हिन्दू लड़के की हत्या, CM योगी से मदद की गुहार

साहिल और गुसरा नामक 2 व्यक्तियों पर हत्या के आरोप लगे हैं। मृतक के परिवार का कहना है कि पुलिस ने पैसे लेकर पहले इन दोनों को छोड़ दिया था। माँ ने बताया कि साथ में एक लड़की भी थी, पहले भी एक लड़की तमंचे के साथ पकड़ी गई थी लेकिन फिर उसे छोड़ दिया गया था। उन्होंने बताया कि कुणाल किसी से लड़ता नहीं था, उसे घेरकर मारा गया। स्थानीय लोगों ने यूपी मॉडल लागू करने की बात करते हुए कहा कि दोषियों को फाँसी दिया जाना चाहिए। सीलमपुर के लोगों ने विरोध में चौपाल लगाकर कहा कि आरोपितों के घरों पर बुलडोजर चले।

उन्होंने कहा कई अगर यही चलता रहा तो सीलमपुर अगला कश्मीर, बांग्लादेश या पश्चिम बंगाल बन जाएगा। उस इलाक़े में 3 ही हिन्दू परिवार बचे हैं अब। स्थानीय निवासियों ने बताया कि बहन-बेटियों को छेड़ा जाता है, मकान बिक रहे हैं, लोग पलायन कर रहे हैं और हिन्दुओं को निशाना बनाया जा रहा है। अबतक इस मामले में कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई है। स्थानीय लोगों ने यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ से मदद की गुहार लगाते हुए पोस्टर लगाए हैं। लोगों का कहना है कि पिछले 6-7 वर्षों में आधा दर्जन हत्याएँ हो चुकी हैं।

‘रसूखदार’ आरोपितों पर हाथ डालने से बचती है पुलिस

स्थानीय लोगों की मानें तो आरोपितों के रसूखदार होने के कारण उन्हें पुलिस छोड़ देती है। पार्षदों-विधायकों से उनके राजनीतिक संबंध होते हैं, इसीलिए पुलिस हाथ नहीं डालती। लोगों ने ‘मकान बिकाऊ हैं’ के पोस्टर लगाए हैं। पीड़ित परिवार गिहारा समाज से आता है। नवंबर 2024 में भी समाज के कुछ लड़कों से सोहेल नामक युवक का झगड़ा हुआ था। कुणाल गाँधीनगर में एक कपड़े की दुकान पर काम करता था। वारदात से पहले वो अपनी दादी को अस्पताल छोड़ने गया था। गिहारा समाज के लोग इस घटना के पीड़ित परिवार का साथ देने पहुँचे हैं।

उधर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी पुलिस कमिश्नर से बातचीत करके घटना की जानकारी ली है। उन्होंने बताया कि आरोपितों में जिन-जिन के नाम आए हैं, उनकी धर-पकड़ होगी। उन्होंने कहा कि कुणाल के परिवार को न्याय मिलेगा।

कौन है सीलमपुर की ‘लेडी डॉन’ जिकरा, जिसका हत्याकांड में आ रहा नाम

इस हत्याकांड में ‘लेडी डॉन’ जिकरा का नाम भी आ रहा है। इसकी आधिकारिक पुष्टि तो नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय लोगों की मानें तो इसी जिकरा और उसके भाइयों ने इस हत्याकांड को अंजाम दिया है। जिकरा आर्म्स एक्ट के मामले में जेल भी जा चुकी है। घटना से 15 दिन पूर्व ही वो जेल से बाहर आई थी। इलाक़े में एक लाला नामक बदमाश भी है, जिसकी जिकरा से दुश्मनी चलती है। लोगों का कहना है कि कुणाल से जिकरा ने लाला के बारे में पूछा, मना करने पर उसकी हत्या कर दी गई।

जिकरा के भाई का नाम साहिल है, वो भी इस हत्याकांड में शामिल था। रील बनाने की शौक़ीन जिकरा सीलमपुर की ही रहने वाली है। अपने साथ तमंचा लेकर चलती रही है। इंस्टाग्राम पर भी उसके 15,000 से अधिक फॉलोवर्स हैं। पटपड़गंज के विधायक रवींद्र नेगी भी मौके पर पहुँचे, जिन्होंने स्थानीय पार्षद पर ड्रग्स के धंधे का आरोप लगाया।

जिस वक्फ कानून के विरोध में इस्लामी कट्टरपंथी कर रहे हिंसा, उसका दाऊदी बोहरा समुदाय ने किया समर्थन: PM मोदी से मुलाकात कर कहा- शुक्रिया, इससे मुस्लिमों को होगा फायदा

गुरुवार (17 अप्रैल 2025) को दाऊदी बोहरा समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उन्हें 2025 के नए वक्फ (संशोधन) कानून के लिए धन्यवाद दिया। दाऊदी बोहरा के प्रतिनिधिमंडल से एक सदस्य ने कहा कि समुदाय की यह माँग लंबे समय से लंबित थी, जिसे पीएम मोदी ने नए वक्फ कानून के साथ पूरा किया।

दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय ने प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के सिद्धांत पर भरोसा भी जताया। बैठक के दौरान पीएम मोदी के साथ केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री किरेन रिजिजू भी शामिल थे।

1700 शिकायतों में ज्यादातर मुस्लिम महिलाएँ

बैठक के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि यह वक्फ कानून रातों-रात नहीं बना। वक्फ कानून की बारीकियों को समझने के लिए 5 साल दिए गए। वक्फ को लेकर 1700 से ज्यादा शिकायत करने वालों में अधिकतर मुस्लिम महिलाएँ शामिल थी। वक्फ के नाम पर मजबूर और लाचार गरीबों की संपत्तियों पर कब्जा किया जा रहा था।

40 से अधिक देशों में दाऊदी बोहरा की वैश्विक उपस्थिति

दाऊदी बोहरा एक मुस्लिम समुदाय है, जो पश्चिम भारत में रहते हैं। दाऊदी बोहरा की वैश्विक उपस्थिति 40 से अधिक देशों में है। दाऊदी बोहरा का ऐतिहासिक संबंध मिस्र के फातिमी इमामों से माना जाता है, जो मिस्र से हैं। यह अहल-अल-बैत यानी पैगंबर मुहम्मद के वंशज माने जाते हैं।

वक्फ कानून की कई धाराओं पर 7 दिन की रोक

आपको बता दें, कि गुरुवार (17 अप्रैल 2025) को सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई तक नए वक्फ कानून की कई धाराओं पर सात दिनों तक के लिए रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ में CJI संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार और केवी विश्वनाथन शामिल थे। पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की प्रतिबद्धता को नोट किया। अब अगली सुनवाई 5 मई 2025 को होनी है।

अधिवक्ता विष्णु जैन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दोहरा रवैया बताया

हिंदुओं का पक्ष रखने वाले अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को दोहरा रवैया बताया है। विष्णु जैन ने ये तर्क भी दिया कि आखिर AIMIM, अमानतुल्लाह ख़ान, जमीयत और कई विपक्षी राजनीतिक दलों की याचिकाएँ सीधे सुप्रीम कोर्ट में कैसे स्वीकार कर ली जाती हैं? जबकि हिन्दुओं को अयोध्या से लेकर काशी-मथुरा तक के लिए जिले की कचहरी से होकर गुजरना पड़ता है और सदियों लग जाते हैं।

हिंदुओं को ईसाई बनाने के लिए लगाया कैंप, महिला से कहा- मेरे साथ सेक्स करो… जिसकी हत्या में 25 साल जेल में रहे महेन्द्र, उसकी करतूतें पीड़िता ने कोर्ट को भी बताई थी

ओडिशा के क्योंझार जेल से मिशनरी ग्राहम स्टेंस की हत्या के दोषी हिन्दू कार्यकर्ता महेन्द्र हेम्ब्रम रिहा कर दिए गए हैं। महेंद्र हेम्ब्रम को अच्छे आचरण के चलते 25 वर्ष की सजा काटने के बाद रिहा किया गया है। महेंद्र हेम्ब्रम स्टेंस की हत्या मामले में दारा सिंह के साथ आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे। उनके रिहा होने के साथ ही मिशनरी ग्राहम स्टेंस की मारे जाने से पहले की हरकतें एक बार फिर सामने आ रही हैं। ग्राहम स्टेंस पर ईसाई धर्मांतरण करवाने के साथ ही महिलाओं का यौन शोषण करने के आरोप भी लगे थे।

जंगल के कैम्प में किया था शोषण

ग्राहम स्टेंस की हत्या के बाद उसके कुकर्मों के विषय में कोर्ट की सुनवाई में जानकारी सामने आई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2003 में इस मामले की सुनवाई के दौरान एक महिला ने गवाही देते हुए बताया था कि ग्राहम स्टेंस ने कैसे उसका जंगल में यौन उत्पीड़न किया।

ग्राहम स्टेंस ने पीड़िता ने बताया था कि अगर वह उससे शारीरिक संबंध बनाएगी तो उसे फायदा होगा। पीड़िता ने बताया था कि ग्राहम स्टेंस ने उसे मनोहरपुर के पास जंगलों में बनाए गए एक कैम्प में बुलाया था। यह कैम्प ईसाई धर्मांतरण के लिए ही स्थापित किया गया था। यहाँ वह अपने पति के साथ पहुँची थी।

ग्राहम स्टेंस ने कैम्प में बुलाने के बाद उसके पति को एक अलग झोपड़ी में सोने का आदेश दिया था और उसे दूसरी झोपड़ी में अकेले सोने को कहा था। महिला ने बताया था कि उसने यह बात मान ली और अलग जगह पर आराम करने चली गई।

पीड़िता के बयान के अनुसार, ग्राहम स्टेंस रात में महिला की झोपड़ी में घुस आया और उससे आँखे बंद करके ध्यान लगाने को कहा। पीड़िता ने कोर्ट को बताया था कि इसके बाद ग्राहम उसके शरीर पर हाथ चलाने लगा और छेड़खानी करने लगा।

ग्राहम ने महिला से संबंध बनाने को कहा और इसके एवज में फायदा होने की बात कही। पीड़िता ने बताया था कि उसने ग्राहम स्टेंस की इस हरकत पर शोर मचा दिया था जिससे वह चला गया था। पीड़िता ने इस विषय में अपने पति और बाकी ग्रामीणों से भी बताया था।

पीड़िता के अनुसार, यह घटना 21 जनवरी, 1999 को हुई थी। पीड़िता और उसका पति इसके बाद यह कैम्प और मनोहरपुर इलाका छोड़ कर चले गए थे। इस घटना के एक दिन बाद ही रहस्यमयी तरीके से गाड़ी में आग लगने के चलते ग्राहम स्टेंस की मौत हो गई थी।

गोमांस खिलाने का किया था प्रयास

ग्राहम स्टेंस सिर्फ यौन उत्पीड़न ही नहीं करता था बल्कि वह हिन्दू मान्यताओं पर भी प्रहार करता था। यौन उत्पीड़न की ही पीड़ित महिला ने बताया था कि मनोहरपुर के जंगल में उसका यौन उत्पीड़न करने से पहले पति के साथ गोमांस खाने के लिए भी दबाव डाला गया था।

पीड़िता ने बताया था कि ग्राहम स्टेंस गोमांस खाने को ईसाइयत में धर्मांतरण के लिए जरूरी बताता था। कोर्ट में महिला के लगाए गए आरोपों को लेकर मामले की जाँच कर रही CBI ने कई सवाल पूछे थे। CBI के वकील ने पीड़िता के आरोप नकार भी दिए थे।

गाड़ी में जल कर मरा था ग्राहम स्टेंस

ग्राहम स्टेंस एक ईसाई मिशनरी था जो ऑस्ट्रेलिया से आया था। ग्राहम स्टेंस ओडिशा के क्योंझर और आसपास के जनजातीय इलाके में हिन्दुओं का धर्मांतरण करवाता था। ग्राहम स्टेंस का इस इलाके में काफी विरोध था। बताया जाता है कि 23 जनवरी की रात को ग्राहम स्टेंस एक चर्च के बाहर एक गाड़ी में अपने 2 नाबालिग बेटों के साथ सो रहा था।

आरोप है कि हिंदूवादी नेता दारा सिंह और महेंद्र हेम्ब्रम ने इस दौरान भीड़ को भड़का दिया था। इसी के बाद ग्राहम स्टेंस की गाड़ी में आग लग थी और उसकी बेटों के साथ जलकर मौत हो गई थी। यह भी आरोप है कि इस दौरान भीड़ ने ग्राहम को गाड़ी से भागने का मौका नहीं दिया।

इस मामले में 51 लोग आरोपित बनाए गए थे। लेकिन एक-एक करके 49 लोग बरी हो गए जबकि दारा सिंह और महेन्द्र हेम्ब्रम को दोषी करार दिया गया था। उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। महेन्द्र हेम्ब्रम ने खुद को जल्द रिहा किए जाने की याचिका डाली थी। उनका अच्छा आचरण देते हुए उन्हें 25 वर्ष बाद जेल से छोड़ दिया गया है।

दारा सिंह की ऐसी ही याचिका अभी लंबित है। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 6 जनवरी 2024 को दोषी दारा सिंह की रिहाई को लेकर दायर याचिका पर ओडिशा सरकार और CBI से जवाब माँगा था। हालाँकि, इस पर अभी कोई निर्णय हुआ है।

मुर्शिदाबाद के हिंदुओं में डर ऐसा कि पिता-पुत्र के श्राद्ध में शामिल होने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे ब्राह्मण-नाई, इस्लामी भीड़ ने घर से खींचकर मार डाला था

इस्लामी कट्टरपंथियों के डर से पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में मारे गए हिन्दू पिता-पुत्र के अंतिम संस्कार में धार्मिक कर्मकांड में नाई और पुरोहित तक शामिल नहीं हुए। इस्लामी कट्टरपंथियों की हिंसा के चलते उन्होंने कोई ना कोई कारण बता कर मृतक चंदन दास (40) और हरगोबिन्द दास (70) का क्रियाकर्म करवाने से इनकार कर दिया।

कोई पुरोहित-नाई आने को तैयार नहीं

दैनिक जागरण में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार (16 अप्रैल, 2025) को दोनों का अंतिम संस्कार के बाद श्राद्ध कर्म आयोजित किया जाना था। इसके लिए परिजन शमशेरगंज के ही एक पुरोहितों (ब्राह्मण) के पास गए। उन्होंने मृतकों के परिजनों से कहा कि यह मामला पुलिस के पास है, इसलिए वह किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहते।

परिजनों ने बताया कि ब्राह्मणों के मना करने के पीछे की असली वजह डर है। इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए चंदन और हरगोबिन्द के एक सम्बन्धी चित्रदीप दास ने बताया, “आज हमारे यहाँ श्राद्धकर्म था। हमने एक पुरोहित से आने के लिए कहा था। लेकिन उसने यह कहते हुए आने से इनकार कर दिया कि यह सुरक्षा जुड़ा मामला है।”

हिन्दुओं के क्रियाकर्म में ब्राह्मण-पुरोहित के ना आने को लेकर नईदुनिया में प्रकाशित खबर

हरगोबिन्द दास के भतीजे बापोन दास ने बताया, “हमने एक और पुरोहित की व्यवस्था की। लेकिन वह बसुदेवपुर में रहता है, जो 5 किलोमीटर दूर है। उसने कहा कि वह नहीं आ सकता क्योंकि यहाँ कोई सुरक्षा नहीं है। मैं उसके घर गया और गंगाजल लेकर आया। हमने तय किया है कि जब हम सुरक्षित महसूस करेंगे, तभी श्राद्ध कर्म करेंगे।”

श्राद्धकर्म के लिए ब्राह्मणों के अलावा नाइयों ने भी हरगोबिन्द दास के घर आने से मना कर दिया। जागरण को उनके ही एक परिजन ने बताया कि वह अपने इलाके के 2 नाइयों के पास गए थे लेकिन उन्होंने जरूरी सामान ना होने की बात कह कर टाल दिया। उनके इस बहाने के पीछे भी इस्लामी कट्टरपंथियों का खौफ बताया गया है।

परिवार ने ठुकराया ममता सरकार का मुआवजा

गौरतलब है कि 11 अप्रैल, 2025 को मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज और सूती इलाकों में इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा की थी। यह हिंसा कई दिनों तक चली थी। इस्लामी कट्टरपंथियों ने यह हिंसा वक्फ कानून के विरोध के नाम पर की थी।

उन्होंने इसी दौरान मूर्तिकार चंदन दास और उनके पिता हरगोबिन्द दास की घर से खींच कर हत्या कर दी थी। दोनों को चाकुओं से गोदा गया था और उनके शव को सड़क पर फेंक दिया गया था। चंदन दास की पत्नी ने बताया कि इस्लामी कट्टरपंथी उनके घर में घुस कर दोनों को खींच ले गए और मार दिया। उन्होंने बताया कि घंटों तक पुलिस लगातार फोन करने के बावजूद नहीं आई।

चंदन दास और हरगोबिन्द दास के परिजनों ने राज्य की ममता बनर्जी सरकार से मुआवजा लेने से भी इनकार कर दिया है। ममता बनर्जी ने उनके परिवार को ₹10 लाख देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि उन्हें पैसा नहीं बल्कि न्याय चाहिए। मृतक चंदन और हरगोबिन्द के कई परिजन हिंसा के बाद झारखंड भी चले गए थे।

डर कर झारखंड चले गए थे परिजन

हरगोबिन्द दास के भतीजे हृदय दास भी झारखंड के पाकुड़ चले गए थे। उन्होंने बताया था कि वह लोग अपनी माँ को बीमार बना कर एक एम्बुलेंस में छुपते हुए आए हैं। वह झारखंड में एक रिश्तेदार के यहाँ रुके हुए थे। उनके साथ और भी परिजन जान बचा कर भागे थे।

पश्चिम बंगाल पुलिस इस बीच दोनों के हत्यारों को पकड़ने के लिए प्रयास करने का दावा कर रही है। अब तक इस मामले में तीन लोग गिरफ्तार किए गए हैं। पुलिस ने पहले कालू नदाब और दिलदार को गिरफ्तार किया था। इनमें से एक बांग्लादेश सीमा से गिरफ्तार किया गया था।

पश्चिम बंगाल पुलिस ने बताया है कि अब उसने इस मामले में तीसरा आरोपित इंजमाम उल हक़ गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया है कि इंजमाम अपराध में शामिल तो था ही, उसने CCTV कैमरे तोड़ कर सबूत मिटाने के प्रयास भी किए थे।

मुर्शिदाबाद में अभी तैनात रहेंगे केन्द्रीय सुरक्षाबल 

मुर्शिदाबाद में हिंसा के बाद कलकत्ता हाई कोर्ट ने केन्द्रीय सुरक्षाबल तैनात करने का आदेश दिया था। उनके आने के बाद यहाँ हिंसा रुक सकी थी। मुर्शिदाबाद में हिंसा रोकने के लिए BSF भी तैनात की गई थी। हाई कोर्ट ने गुरुवार (17 अप्रैल, 2025) को कहा है कि केन्द्रीय सुरक्षाबल कुछ दिन और मुर्शिदाबाद में रहेंगे। वहीं यहाँ के स्थानीय हिन्दुओं ने कहा है कि इस्लामी कट्टरपंथियों से सुरक्षा के लिए उन्हें स्थायी रूप से केन्द्रीय बलों की तैनाती चाहिए।

नेता, SP, यूट्यूबर… पंजाब में सबके घर पर करवाता था ग्रेनेड अटैक, अब अमेरिका में पकड़ा गया हैप्पी पासिया: ISI की शह पर खड़ा कर रहा था आतंक का नेटवर्क, बब्बर खालसा से लिंक

चंडीगढ़ ग्रेनेड हमला समेत 14 आतंकी हमलों का मास्टर माइंड हैप्पी पासिया उर्फ हरप्रीत सिंह को अमेरिका में हिरासत में लिया गया है। हैप्पी पासिया पर 5 लाख का इनाम था। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक अमेरिका में उसे आईसीई यानी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स इंफोर्समेंट विभाग ने हिरासत में लिया है। अब भारत उसके प्रत्यर्पण की कोशिश कर सकता है।

पंजाब में पिछले 7 महीने में ग्रेनेड हमले की 16 घटनाएँ हुई हैं। इस दौरान पुलिस थाने, धार्मिक स्थल, बीजेपी नेता मनोरंजन कालिया पर हमला शामिल है। इनमें से कम से कम 14 हमलों में उसका नाम सामने आया है।

14 ग्रेनेड हमलों का मास्टर माइंड

एनआईए ने चंडीगढ़ ग्रेनेड हमले में आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल के 4 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। इनमें हैप्पी पासिया और रिंदा का नाम शामिल था। जालंधर के पूर्व एसपी जसकीरत सिंह चहल और उनके परिवार पर ग्रेनेड हमले की जिम्मेदारी पासिया ने सोशल मीडिया पर ली थी। अमृतसर के मजीठा पुलिस स्टेशन पर ग्रेनेड हमले में भी उसका हाथ था। उसने एक यूट्यूबर के घर पर भी ग्रेनेड हमला करवाया।

पासिया आतंकी संगठन बब्बर खालसा यानी बीकेआई के लिए काम कर चुका है। पासिया लगातार पंजाब में आतंकवाद को एक बार फिर जीवित करने की कोशिशों में लगा था।

चंडीगढ़ हमले के बाद एनआईए ने चंडीगढ़ जिला कोर्ट में अर्जी दायर कर पासिया के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने की माँग की थी। एनआईए को पता चला था कि पासिया अमेरिका में छिपा बैठा है जिसके बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों से संपर्क किया गया।

अवैध तरीके से अमेरिका में घुसा पासिया

एनआईए को जाँच के दौरान ये भी पता चला कि पासिया 2023 में अवैध तरीके से अमेरिका पहुँचा था। आतंकी रिंदा के साथ मिलकर पासिया पंजाब में आतंक का नेटवर्क तैयार कर रहा था जिसमें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई भी उसे आर्थिक मदद कर रही थी।

हैप्पी अमृतसर के रामदास पुलिस थाने के पासिया गाँव का रहने वाला है। वो अलग-अलग देश के कोड वाले फोन का इस्तेमाल करता है जिसको ट्रेस नहीं किया जा सके। अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी जैसे देशों में उसका ठिकाना है। मैक्सिको बॉर्डर होते हुए वह अमेरिका में सबसे पहले घुसा था।

हिंदू लड़कियों को प्रेमजाल में फँसा संभोग की वस्तु बनाना हमारा (मुस्लिम) शौक: सरकारी क्लर्क निकला लव जिहादी, पढ़िए गोमाँस से नमाज तक की हर डिटेल

बिहार के लखीसराय से हाल ही में लव जिहाद का एक मामला सामने आया है। एक हिन्दू युवती ने सरकारी क्लर्क कमाल अशरफ पर हिन्दू बन कर उसे फँसाने, यौन संबंध बनाने और नमाज पढ़ने के साथ गौमांस खाने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है। इस मामले में दर्ज की गई FIR की कॉपी से और भी चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। कमाल अशरफ बताता था कि हिन्दू लड़कियों को फँसाना और उन्हें सम्भोग का वस्तु बना कर रखना उन लोग (मुस्लिम) का शौक है।

16 वर्ष की आयु में बनाया निशाना

ऑपइंडिया के पास लखीसराय के सूर्यगढ़ा थाने में इस मामले में दर्ज की गई FIR की कॉपी मौजूद है। FIR में हिन्दू पीड़िता ने बताया है कि आरोपित कमाल अशरफ उसे 2012 में भगा ले गया था, तब वह 16 वर्ष की थी। हिन्दू पीड़िता को उस समय कमाल अशरफ ने अपने आप को राजस्थान का रहने वाला सुमित बताया था। अशरफ एक सरकारी स्कूल में क्लर्क के तौर पर तैनात है। हिन्दू पीड़िता ने बताया कि उसे इसके बाद अशरफ ने आसनसोल और जमुई में रखा।

कमाल अशरफ इस दौरान सुमित बन कर ही हिन्दू लड़की का यौन शोषण करता रहा। FIR में बताया गया है कि कमाल अशरफ हिन्दू पीड़िता को इसके बाद दबाव डाल कर एक बार कोर्ट ले गया और जबरदस्ती शादी करने बयान दिलवा दिया। कमाल अशरफ ने इस दौरान पीड़िता से शादी भी नहीं की। कुछ दिनों बाद पीड़िता ने एक बच्चे को भी जन्म दे दिया, इसके बाद अशरफ उसे धर्मांतरण करने के लिए प्रताड़ित करने लगा।

हिन्दू लड़की फँसाना शौक

FIR में पीड़िता ने बताया है कि बच्चे के जन्म के बाद उसे पता चला कि आरोपित का असल नाम सुमित नहीं बल्कि कमाल अशरफ है और वह राजस्थान नहीं बल्कि लखीसराय का ही रहने वाला है। इसके बाद लगातार कमाल अशरफ हिन्दू युवती पर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने लगा और बिना इस्लाम कबूल किए उससे शादी करने से भी मना कर दिया।

हिन्दू पीड़िता ने बताया, “उनके (कमाल अशरफ) द्वारा कहा गया कि बिना धर्म परिवर्तन तुमसे हमारी शादी नहीं हो सकती है, और हम लोगों का शौक है, कि हिन्दू लड़की को अपने प्रेम जाल में फँसा कर उसे सम्भोग का वस्तु बना कर रखना है और हमसे कभी शादी भी नहीं किया।”

पीड़िता ने बताया कि इस बीच वह भी शिक्षा विभाग में सरकारी कर्मचारी के तौर पर काम करने लगी। इसके बाद भी कमाल अशरफ ने उससे ₹50 हजार भी ले लिए। पीड़िता ने बताया कि पैसे ना देने पर कमाल अशरफ उसे नग्न कर पीटता था और यातनाएँ देता था।

नमाज ना पढ़ने पर हाथ-पैर तोड़े

हिन्दू युवती की यातनाएँ लगातार बढ़ती ही गईं। FIR में बताया गया है कि जब उसने मंदिर जाने और पूजा करने की इच्छा जताई तो कमाल अशरफ उस पर नमाज के लिए दबाव बनाने लगा। जब हिन्दू युवती ने नमाज पढ़ने का विरोध किया तो उसकी पिटाई कर उसका हाथ पैर तोड़ दिया।

कमाल अशरफ ने पूजा के लिए युवती ने जो देवी-देवताओं की मूर्तियाँ रखी थीं, उन्हें भी फेंक दिया और गौमांस खा कर इस्लाम अपनाने का दबाव डालने लगा। कमाल अशरफ हिन्दू युवती ही नहीं बल्कि उसके बच्चे को भी मुस्लिम बनाने के लिए दबाव बनाता था।

दूसरों से संबंध बनाने का डाला दबाव

हिन्दू पीड़िता ने बताया है कि कमाल अशरफ उसके साथ यातनाएँ देने के साथ ही उस पर एक और मुस्लिम इब्राहिम अहमद के साथ संबंध बनाने के लिए दबाव डाल रहा था। पीड़िता ने कहा कि इससे मना करने पर दोनों ने मिलकर उसे बर्बरता से पीटा और उसके गुप्तांगों को नुकसान पहुँचाने का प्रयास किया।

इब्राहिम अहमद ने हिन्दू युवती से खा किअगर वह दोनों के साथ संबंध बनाएगी तो कमाल अशरफ उसके साथ निकाह कर लेगा और उसे बीवी का दर्जा देगा। पीड़िता किसी तरह भाग कर एक रिश्तेदार के घर पहुँची और कमाल अशरफ के विरुद्ध FIR दर्ज करवाई।