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पंजाब में किसान कुल्हाड़ी से काट रहे हैं Jio टॉवर का बिजली कनेक्शन, देखें वीडियो

नए कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों ने हाल ही में रिलायंस के पेट्रोल पंप और जियो (Jio) सिम का बहिष्कार करने का ऐलान किया था। इसके अलावा, पिछले दिनों किसानों ने रिलायंस मॉल के बाहर भी नारेबाजी और प्रदर्शन किए। पंजाब में किसानों ने अपने आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए अब Jio मोबाइल टावरों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।

पंजाब के किसान रिलायंस जियो की दूरसंचार आपूर्ति सेवाओं को बाधित कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो शेयर किए जा रहे हैं, जिनमें लोगों को कियो टॉवर की बिजली सप्लाई को बंद करते देखा जा सकता है।

‘एशियानेट’ न्यूज़ के अनुसार, “रिलायंस के पेट्रोल पम्प और रिटेल स्टोर के बाहर विरोध प्रदर्शन के बाद, पंजाब में किसानों ने अब राज्य के कई हिस्सों में दूरसंचार कंपनी की सेवाओं को बाधित करने के लिए रिलायंस Jio मोबाइल टावरों की बिजली आपूर्ति बंद कर दी है।”

वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोग टेलीकॉम टॉवर्स को जाने वाली बिजली की तारें कुल्हाड़ी से काट रहे हैं।

समाचार पत्र ‘इन्डियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न किसान संगठनों के किसानों ने पिछले तीन दिनों में पंजाब के नवांशहर, फिरोजपुर, मानसा, बरनाला, फाजिल्का, पटियाला और मोगा जिलों में कई Jio टॉवर्स की बिजली आपूर्ति बंद कर दी है। बरनाला और बठिंडा के अधिकांश गाँवों में किसानों ने बिजली आपूर्ति बंद करने के बाद टॉवर्स को बंद कर दिया।

फ़िरोज़पुर में, बीकेयू (उग्राहन) और बीकेयू (दकौंडा) के बैनर तले किसानों द्वारा सेलुलर ट्रांसमिशन टावरों को बिजली की आपूर्ति काट दी गई है। बीकेयू (दकौंडा) के नेता दर्शन सिंह करमा ने कहा, “हमने फिरोजपुर में पाँच Jio मोबाइल टावरों को बिजली आपूर्ति बंद कर दी। हमने अपना विरोध जताने के लिए ऐसा किया। हमारी लड़ाई कॉरपोरेट घरानों के खिलाफ है।”

BKU (उग्राहन) के गोरा सिंह भैणीबाग ने कहा कि उन्होंने बुधवार (दिसंबर 23, 2020) को मानसा में चार मोबाइल टावरों का बिजली कनेक्शन काट दिया और बृहस्पतिवार को Jio कार्यालयों के बाहर धरना दिया।

वहीं, नवांशहर में, कीर्ति किसान यूनियन (KKU) के बैनर तले किसानों ने 11 Jio मोबाइल टावरों को बिजली आपूर्ति ठप कर डाली। KKU नेता मास्टर भूपिंदर सिंह वारियाच ने कहा, “ये काले कानून कॉरपोरेट्स को फायदा पहुँचाने के लिए बनाए गए हैं, इसलिए हम अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं क्योंकि सरकार हमारी बात सुनने के लिए तैयार नहीं है।”

गुलशन बानो अपनी रिश्तेदार नाबालिग बच्ची को देह व्यापार में धकेलना चाहती थी, UP पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के बलिया से एक घटना सामने आई है। इसमें एक नाबालिग लड़की को गुलशन बानो नाम की उसकी ही रिश्तेदार देह व्यापार में धकेलने का प्रयास कर रही थी। हालाँकि ऐसा होने के पहले ही सिटी मजिस्ट्रेट, बलिया पुलिस और बाल कल्याण समिति (CWC) के अधिकारियों ने उसे सुरक्षित बरामद कर लिया। नाबालिग पीड़िता का परिवार मूल रूप से बिहार का रहने वाला है। 

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़ बुधवार (23 दिसंबर 2020) को पीड़िता के परिजनों ने CWC अधिकारियों को इस घटना की पूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गुलशन बानो नाम की उनकी रिश्तेदार उनकी बेटी को अपने साथ उत्तर प्रदेश के बलिया लेकर गई है और उस पर देह व्यापार में शामिल होने का दबाव बना रही है।

इस घटना की जानकारी देने वालों ने बलिया की उस जगह के बारे में भी बताया, जहाँ गुलशन बानो ने नाबालिग पीड़िता को कैद करके रखा था। CWC के अधिकारियों ने तत्काल प्रभाव से पुलिस को इस घटना के बारे में सूचित किया। 

सूचना मिलते ही पुलिस ने नाबालिग पीड़िता को सुरक्षित वापस लेकर आने के लिए एक संयुक्त टीम का गठन किया। बलिया पुलिस और CWC के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने कोतवाली पुलिस थाने के अंतर्गत आरोपित गुलशन बानो के ठिकाने पर छापा मार कर नाबालिग पीड़िता को उसके चंगुल से छुड़ाया

फ़िलहाल पुलिस ने गुलशन बानो पर भारतीय दंड संहिता की धारा 366 ए (नाबालिग लड़की को कैद में रखना) और 323 (जानबूझ कर चोट पहुँचाना) के तहत मुकदमा दर्ज करके उसे गिरफ्तार कर लिया है।

प्राइवेट कम्पनी ने सिर्फ उपज खरीदी या जमीन भी ले गया? PM मोदी को किसान से मिला जवाब ‘किसान’ आंदोलन पर तमाचा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (दिसंबर 25, 2020) को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस पर ‘पीएम किसान सम्मान निधि’ (PM Kisan Samman Nidhi) योजना के तहत किसानों को वित्तीय लाभ की नवीनतम किस्त जारी की। यह राशि 18,000 करोड़ रुपए से अधिक है और इसे प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से 90 मिलियन से अधिक लाभार्थियों तक पहुँचाया जाएगा।

पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक बटन दबाकर 09 करोड़ से अधिक किसान लाभार्थियों के खातों में 18 हजार करोड़ रुपए ट्रांसफर किए। फिलहाल वह 06 राज्यों के किसानों के साथ संवाद कर रहे हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर पीएम मोदी ने प्रत्येक किसान को 2,000 रुपए की किस्त जारी की। पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी के जन्मदिवस को हर साल ‘सुशासन दिवस’​ ​के रूप में भीमनाया जाता है।

पीएम-किसान योजना के तहत, छोटे और सीमांत किसानों को प्रति वर्ष 6,000 रुपए का वित्तीय लाभ प्रदान किया जाता है, जो 2,000 रुपए की तीन समान किश्तों में दिया जाता है। यह रुपया सीधा लाभार्थियों के बैंक खातों में स्थानांतरित किया जाता है।

‘प्राइवेट कम्पनी वाले उपज के साथ जमीन भी ले गए?’

इसी क्रम में अरुणाचल प्रदेश के किसान गगन पेरिंग से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बातचीत की शुरुआत की। गगन पेरिंग ने पीएम मोदी से कहा कि उन्हें किसान निधि के तहत 6000 रुपए मिले जिसका इस्तेमाल उन्होंने ऑर्गेनिक खाद और दवा खरीदने में किया।

उन्होंने बताया कि उनके साथ 446 किसान जैविक अदरक उगाते हैं। संवाद के दौरान पीएम मोदी ने पेरिंग से पूछा कि ‘आप छोटे किसानों को प्राइवेट कंपनी के साथ जोड़ते हैं, क्या उन्होंने सिर्फ प्रोडक्ट खरीदे या अपकी जमीन भी ले ली?’

पीएम मोदी के इस सवाल पर गगन पेरिंग ने कहा कि हाल ही में एक कंपनी से उनका एग्रीमेंट हुआ, जितनी उपज है, उसे ही ले जाने की बात हुई, जमीन की नहीं। उन्होंने पीएम मोदी को बताया कि उनकी जमीन सुरक्षित है।

इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कुछ लोग ऐसा भ्रम फैला रहे हैं कि किसानों की फसल का कोई कांट्रैक्ट करेगा तो जमीन भी चली जाएगी।

जब अटल बिहारी वाजपेयी की कविता के लिए शाहरुख से लेकर अमिताभ और जगजीत सिंह एक मंच पर आए

देश आज 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती मना रहा है। भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता को उनके उल्लेखनीय लेखन और काव्य कौशल के लिए भी जाना जाता है। लेकिन कम ही लोग उनकी एक ऐसी रचना के बारे में जानते हैं जिसे ग़जल गायक जगजीत सिंह ने अपनी आवाज दी थी और बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख़ खान ने इस गीत में अभिनय किया था। इस गीत की शुरुआत में बॉलीवुड कलाकार अमिताभ बच्चन ने भी अपनी आवाज दी थी।

यह वीडियो वर्ष 2002 में जारी किया गया था और इस एल्बम का नाम था ‘संवेदना’। अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा संवेदना नाम से ही एक पुस्तक भी लिखी गई थी, जो कि वर्ष 1999 में प्रकाशित हुई थी। यह म्यूज़िक वीडियो मशहूर फिल्म निर्देशक यश चोपड़ा द्वारा निर्देशित किया गया था।

‘संवेदना’ एल्बम का कवर

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी की इस कविता का शीर्षक है – “क्या खोया, क्या पाया जग में”

“अपने ही मन से कुछ बोलें
क्या खोया, क्या पाया जग में,
मिलते और बिछड़ते मग में,
मुझे किसी से नहीं शिकायत,
यद्यपि छला गया पग-पग में,
एक दृष्टि बीती पर डालें, यादों की पोटली टटोलें।
पृथिवी लाखों वर्ष पुरानी,
जीवन एक अनन्त कहानी
पर तन की अपनी सीमाएँ
यद्यपि सौ शरदों की वाणी,
इतना काफी है अंतिम दस्तक पर खुद दरवाजा खोलें।
जन्म-मरण का अविरत फेरा,
जीवन बंजारों का डेरा,
आज यहाँ, कल कहां कूच है,
कौन जानता, किधर सवेरा,
अंधियारा आकाश असीमित, प्राणों के पंखों को तौलें।
अपने ही मन से कुछ बोलें!”

यूट्यूब पर इस कविता का वीडियो मौजूद है –

https://youtu.be/1sTeazC0x98

एल्बम के कवर के अनुसार, वीडियो की शुरुआत में अमिताभ बच्चन द्वारा जो विवरण दिया गया है, वह जावेद अख्तर ने लिखा था।

दिसंबर 25, 1924 को ग्वालियर में जन्मे वाजपेयी को अपनी मूल भाषा, हिंदी के लिए अपार स्नेह था, और वह भारत के विदेश मंत्री के रूप में वर्ष 1977 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में हिंदी भाषा में भाषण देने वाले पहले व्यक्ति भी बने।

कविता और साहित्य में योगदान के कारण ही देहांत के बाद इतना समय बीत जाने के बावजूद, पूर्व प्रधानमंत्री की कविताएँ हमेशा की तरह आज भी लोकप्रिय हैं। इनमें से कुछ ने वास्तव में एक प्रतिष्ठित दर्जा हासिल किया है। अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं की ख़ास बात यह है कि वह युवाओं सहित हर उम्र वर्ग द्वारा गाई और सराही जाती हैं। उनकी कुछ प्रसिद्ध कविताएँ गीत नया गाता हूँ, कदम मिलकर चलना होगा, दूध में दरार पड़ गई आदि हैं।

मुस्लिम लड़की ने हिन्दू प्रेमी के साथ मंदिर में लिए 7 फेरे, बरेली पुलिस से लगाई सुरक्षा की गुहार

उत्तर प्रदेश के बरेली में एक मुस्लिम युवती ने हिन्दू युवक से मंदिर के भीतर शादी कर ली। एबीपी न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक़ मुस्लिम युवती ने अपनी मर्ज़ी से हिन्दू रीति-रिवाज़ों से सात फेरे लिए। युवती ने शादी का एक वीडियो भी साझा किया है, जिसमें उसने पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई है।  

जारी किए गए वीडियो में युवती कहती है, “मैंने अपनी मर्ज़ी से पंकज शर्मा को अपना जीवन साथी बना लिया है।” इसके बाद युवती निवेदन करते हुए कहती है कि उसने अपनी मर्ज़ी से हिन्दू युवक के साथ शादी की है, इसलिए उसके परिजन किसी को परेशान नहीं करें। 

युवती ने यह भी कहा कि शादी के बाद उसके पति, पति के दोस्तों, परिजनों को परेशान नहीं किया जाए। अंत में युवती ने खुद को और अपने पति को अपने परिजनों से ख़तरा बताते हुए बरेली एसएसपी से सुरक्षा की गुहार लगाई है। वीडियो के चर्चा में आने के बाद से पुलिस इस मामले की जाँच में जुट गई है। इसके अलावा पुलिस वीडियो की पड़ताल भी कर रही है।  

हाल ही में इस तरह की एक और घटना बरेली में ही सामने आई थी, जहाँ अलीशा नाम की मुस्लिम युवती ने अमन नाम के हिन्दू युवक से शादी कर ली थी। युवती के पिता ने बरेली के प्रेमनगर थाने में हिन्दू युवक पर अपहरण का मामला दर्ज कराया था।

पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के कुछ ही समय बाद युवती को बरामद कर लिया था। इसके बाद पुलिस ने युवती का मेडिकल कराया। अदालत में बयान भी दर्ज कराया। इस दौरान पुलिस ने बताया कि युवक और युवती दोनों बालिग़ हैं और युवती ने युवक के पक्ष में बयान दिया था। फिर पुलिस ने युवती को युवक के घर भेज दिया था और घटना में धर्म-परिवर्तन का कोई पहलू भी सामने नहीं आया था। 

इसके अलावा उत्तर प्रदेश के ही औरैया जिले में एक मामला सामने आया था, जिसमें दो अलग धर्म के प्रेमी-प्रेमिका ने आपसी सहमति से शादी की थी। दिल्ली की रहने वाली रेशमा और औरैया के निवासी अमन ने बिधूना कस्बे स्थित भगवान शिव के मंदिर में हिन्दू रीति रिवाज़ों से शादी की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ दोनों के बीच पिछले काफी समय से बातचीत हो रही थी। इस शादी में युवक और युवती के परिजन भी शामिल हुए थे और दोनों ने नवदंपत्ति को आशीर्वाद भी दिया था। परिजनों का कहना था कि जिस बात में उनके बच्चे खुश हैं, उस बात में ही उनकी ख़ुशी है। 

हिन्दू धर्म त्यागने वालों को पुनः हिन्दू बनाना: वो पंडित मदन मोहन मालवीय, जो अपने परिचय को लेकर थे स्पष्ट

इतिहास के पन्ने पलटने पर ऐसे नाम कम ही नज़र आते हैं, जिन्होंने अनेक किरदार निभाए और लगभग हर सामाजिक कसौटी पर खरे उतरे। एक शिक्षाविद, राजनीतिज्ञ, समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी भी थे पंडित मदन मोहन मालवीय।

‘सत्यमेव जयते’ को आम जन मानस का ध्येय बनाने से लेकर ‘काशी हिन्दू विश्वविद्यालय’ की स्थापना तक पंडित मदन मोहन ने कई प्रतिमान स्थापित किए। उन्होंने एक ऐसे राष्ट्रवादी व्यक्ति की भूमिका निभाई, जिन्होंने सनातन धर्म और हिन्दी भाषा की उन्नति के लिए अनवरत संघर्ष किया। 

ऐसे अनेक उत्कृष्ट कार्यों के परिणामस्वरूप 24 दिसंबर 2014 को उन्हें मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया था। पंडित मदन मोहन मालवीय को उनके कार्यों की वजह से ही ‘महामना’ की उपाधि दी गई थी।

25 दिसंबर 1861 को प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) में जन्मे पंडित मदन मोहन मूल रूप से मालवा के निवासी थे, इसलिए उन्हें ‘मालवीय’ कहा जाता था। उनकी प्राथमिक शिक्षा प्रयागराज के श्री धर्मज्ञानोपदेश पाठशाला में हुई थी, इस पाठशाला में सनातन धर्म की शिक्षा प्रदान की जाती थी। 

पंडित मदन मोहन अपने परिचय को लेकर स्पष्ट थे। अस्पृश्यता निवारण और शुद्धि (हिन्दू धर्म त्यागने वालों को पुनः हिन्दू बनाना) के वो घोर समर्थक थे। वह 3 बार हिन्दू महासभा के अध्यक्ष चुने गए थे।

महामना का ऐसा मानना था कि शिक्षा का एक ऐसा केंद्र होना चाहिए, जहाँ धर्म और शिक्षा एक विषय के दो पहलुओं की तरह नज़र आने चाहिए। इसलिए उन्होंने 1915 में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना की। इसके लिए पंडित मदन मोहन ने पूरे देश का दौरा किया और अनेक राजाओं से आर्थिक सहयोग एकत्रित किया। 

सनातन पद्धति का प्रचारक होने के साथ-साथ पंडित मदन मोहन प्राचीन भारतीय संस्कृति के घोर समर्थक भी थे। इस तर्क का विवरण उनसे संबंधित एक घटना में विशेष रूप से मिलता है। अंग्रेज़ों के शासनकाल में अंग्रेज़ी भारतीय समाज से परिचित हुई थी। अंग्रेज़ी और उसके साथ-साथ उर्दू का दायरा बढ़ना शुरू हुआ था। उस बढ़ते दायरे से हिन्दी भाषा को क्षति न हो, इसलिए उन्होंने जनमत संग्रह कराया।

पंडित मदन मोहन आर्य समाज से भी अनेक सन्दर्भों पर असहमति रखते थे। वह आर्य समाज द्वारा की गई भाषा की सेवा संबंधी कार्यों का सम्मान करते थे लेकिन समस्त कर्मकाण्ड, परम्पराओं और रीति-रिवाज़ों को सनातन पद्धति का मौलिक हिस्सा मानते थे। 

यह पंडित मदन मोहन मालवीय के अटूट प्रयासों का परिणाम था कि हिन्दी भाषा को उत्तर प्रदेश के न्यायालयों और दफ्तरों की व्यावहारिक भाषा के रूप में स्वीकार किया गया। भाषा को लेकर उनका मत शुरू से स्पष्ट था। इस संदर्भ में उनका एक भाषण बेहद प्रचलित है। वह कहते हैं:

“भारतीय विद्यार्थियों के मार्ग में आने वाली समसामयिक कठिनाइयों का कोई अंत नहीं है। सबसे बड़ी कठिनता यह है कि शिक्षा का माध्यम हमारी मातृभाषा न होकर एक अत्यंत दुरूह विदेशी भाषा है। सभ्य संसार के किसी भी अन्य भाग में जन-समुदाय की शिक्षा का माध्यम विदेशी भाषा नहीं है।”

पंडित मदन मोहन ही थे, जिन्होंने ‘हिन्दी, हिन्दू और हिन्दुस्तान’ के ध्येय का पुरजोर प्रचार किया। स्वतंत्रता संग्राम में भी उनकी भूमिका उल्लेखनीय थी। उन्होंने देश के अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के साथ मिल कर साइमन कमीशन का व्यापक स्तर पर विरोध किया था

उन्होंने तुष्टिकरण को लेकर भी अपना दृष्टिकोण स्पष्ट रखा, वह सदा सर्वदा इसके विरोध में रहे। पंडित मदन मोहन ने देश के विभाजन का प्रतिकार किया, उन्होंने महात्मा गाँधी के समक्ष इस मुद्दे पर खरी दलीलें रखी थीं। उनका कहना था कि विभाजन की कीमत पर स्वतंत्रता स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।

सनातन धर्मी छात्रों को शाकाहारी भोजन और समुचित जीवन शैली की व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए उन्होंने प्रयागराज में ‘हिन्दू छात्रावास’ (हिन्दू हॉस्टल) की स्थापना की थी। इलाहाबाद विश्वविद्यालय का हिन्दू छात्रावास आज भी परिसर का सबसे बड़ा छात्रावास माना जाता है।        

SEBI ने NDTV के प्रोमोटर्स पर ठोका ₹27 करोड़ का जुर्माना, शेयरहोल्डर्स से छुपाई थी जानकारी

बाजार नियामक संस्था सेबी (SEBI) ने बृहस्पतिवार (दिसंबर 24, 2020) को प्रोपेगेंडा समाचार चैनल NDTV के प्रोमोटर्स, प्रणय रॉय और राधिका रॉय के साथ ही ‘आरआरपीआर होल्डिंग’ (RRPR) पर 27 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया। SEBI ने आदेश दिया है कि यह रकम 45 दिनों के अंदर जमा करानी होगी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह जुर्माना कुछ कर्ज समझौतों के बारे में शेयरधारकों से जानकारी छिपाकर विभिन्न प्रतिभूति नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में लगाया गया है। आरआरपीआर होल्डिंग नई दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड (NDTV) की प्रमोटर संस्था है।

SEBI के अनुसार, रॉय दंपती और आरआरपीआर होल्डिंग पर 25 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है, जिसे ये तीनों संयुक्त रूप से जमा कराएँगे। इसके साथ ही, प्रणय और राधिका रॉय से 1-1 करोड़ रुपए का अतिरिक्त जुर्माना भी वसूलने के निर्देश दी गए हैं। SEBI के 52 पन्नों के आदेश के अनुसार, ‘कई कर्ज समझौतों में ऐसी शर्तें शामिल की गई हैं, जो NDTV शेयरधारकों के व्यक्तिगत हितों पर बुरा प्रभाव डालती हैं।’

बाजार नियामक संस्था ने कहा कि उसने अपनी जाँच 2017 में ‘क्वांटम सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड’ (Quantum Securities Pvt Ltd) की तरफ से की गई शिकायतों के आधार पर शुरू की थी। ‘क्वांटम सिक्योरिटीज’ भी समाचार चैनल NDTV का शेयरधारक है और उसने आरोप लगाया था कि विश्वप्रधान कॉमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड (VCPL) के साथ कर्ज समझौते के बारे में शेयरधारकों से आँकड़े छिपाकर नियमों का उल्लंघन किया गया है।

लोन से संबंधित जानकारी छुपाई गई

ऐसा एक कर्ज समझौता आईसीआईसीआई बैंक के साथ था, जबकि दो अन्य समझौते वीसीपीएल से किए गए थे। SEBI के अनुसार, वर्ष 2009 में वीसीपीएल के साथ 350 करोड़ रुपए का ऋण समझौता किया गया था। यह ऋण आईसीआईसीआई बैंक का कर्ज चुकाने के लिए लिया गया। इसके एक साल बाद वीसीपीएल से 53.85 करोड़ रुपए का एक अन्य समझौता किया गया।

समझौते की कुछ शर्तों के हिसाब से वीसीपीएल वारंट को इक्विटी शेयर में बदलकर आरआरपीआर होल्डिंग्स के जरिए NDTV की 30% हिस्सेदारी अधिग्रहित करने की इजाजत दी गई है। इससे NDTV की कार्य पद्धति प्रभावित हो सकती है। प्रणव रॉय और उनकी पत्नी ने इस मामले में NDTV के पार्टी नहीं होने का मुद्दा उठाया, लेकिन SEBI के सहायक अधिकारी ने उनके इस तर्क को खारिज कर दिया।

कई शर्तों का नहीं हुआ पालन

SEBI ने कहा कि ऐसी कई शर्तें थीं, जिनका पालन नहीं किया गया। इसमें ढेर सारी सूचनाएँ ऐसी थीं जो बहुत ही ज्यादा संवेदनशील थीं। इससे पहले, पिछले माह ही प्रणय रॉय और राधिका रॉय पर दो साल के लिए सिक्योरिटीज बाजार में कारोबार पर SEBI ने रोक लगा दी थी। यह कार्यवाही भेदिया कारोबार में संलिप्तता के चलते की गई। इसके साथ ही SEBI ने रॉय दंपति को 12 साल पहले की भेदिया कारोबार गतिविधियों से अवैध तरीके से कमाए गए 16.97 करोड़ रुपए लौटाने को भी कहा था।

SEBI के अनुसार, इस तरह के कृत्यों के जरिए दो प्रोमोटर्स और आरआरपीआर होल्डिंग ने पीएफयूटीपी (प्रिवेंशन ऑफ फ्रॉडुलेंट एंड अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस) मानदंडों के प्रावधानों का उल्लंघन किया है।

हत्या-दंगा-ठगी करने वाला हारून मियाँ के लिए TOI ने तांत्रिक लिख फैलाया भ्रम, बेटा आरिफ भी देता था अब्बा का साथ

दिल्ली पुलिस ने ठगी करने वाले जालसाज हारून मियाँ उर्फ शाहजी बंगाली को अरेस्ट किया है। हारून लोगों को अंधविश्वास में फँसाता और उनसे पैसे हड़पता था। मेरठ के ज़ाकिर नगर के रहने वाले हारून ने गूगल व ट्रू कॉलर एप पर भी मियाँ शाहजी बंगाली के नाम से खुद को पंजीकृत कर रखा था।

अमर उजाला ने इस खबर प्रकाशित किया। खबर की शीर्षक में ही हारून लिख कर स्पष्ट किया गया कि आरोपित कौन है, उसके अपराध का तरीका क्या है।

‘हिंदू पोस्ट’ नाम के एक छोटे (TOI की तुलना में) से मीडिया पोर्टल ने भी इस खबर की रिपोर्टिंग की। शीर्षक में Muslim Occult practitioner लिख कर यहाँ भी भ्रम फैलाने की कोशिश नहीं की गई।

लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) अपने आदत से बाज नहीं आया। मुस्लिम आरोपितों के नाम छिपाने या उसकी जगह हिंदू शब्दों और प्रतीक चित्रों को खबर में जगह देकर वो पाठकों को पहले भी बरगलाता रहा है। इस बार भी उसने यही किया।

हारून के खिलाफ हत्या और दंगों के कई मामले दर्ज हैं। सिर्फ हारून ही नहीं बल्कि उसका बेटा आरिफ भी धोखाधड़ी के धंधे में शामिल था। इतने सारे आरोपों के बावजूद TOI को अपने शीर्षक के लिए तांत्रिक शब्द ही सबसे पर्याप्त सूझा, यह उनकी पत्रकारिता की पहचान है।

आपको बता दें कि हारून ने एक महिला से घर में शांति कराने के नाम पर 85,000 रुपए उसके खाते में ट्रांसफर करने के लिए कहा। पीड़ित महिला को शक तब हुआ जब आरोपित ने उससे से 55 हजार रुपए और जमा कराने को कहा। इसके बाद पुलिस से शिकायत की और हारून गिरफ्तार हुआ।

सूअर का माँस खाने वाला, शराब पीने वाला ‘क़ायद ए आजम’, जो नमाज तक पढ़ना नहीं जानता था

25 दिसंबर के दिन कई तरह से विशेष है। जहाँ भारत में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपयी का जन्मदिन मनाया जा रहा है तो वहीं ईसाई सम्प्रदाय के लोग आज क्रिसमस का त्योहार मना रहे हैं। लेकिन पाकिस्तान के लिए आज क़ायद-ए आज़म यानी, महान नेता और देश के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना का जन्मदिन है।

मोहम्मद अली जिन्ना का जन्मदिन इस वर्ष कई कारणों से महत्वपूर्ण है। साल 2020 शुरुआत से ही कोरोना वायरस की महामारी के कारण चर्चा में रहा। इसकी शुरुआत में जहाँ चर्चा का विषय हाथ धुलना और हैण्ड सैनीटाइजर का नियमित इस्तेमाल था, तो इसके जाते-जाते चर्चा का विषय कोरोना वायरस की वैक्सीन हैं। लेकिन दोनों ही चीजों में कुछ ऐसी चीजें हैं जो एक खास समुदाय के लिए विशेष परेशानी का भी कारण बनी रही हैं। वो हैं- अल्कोहल और पोर्क यानी, सूअर का माँस!

देश-दुनियाभर में मुस्लिम समुदाय के लिए जिन्दगी और मजहब के बीच तालमेल बिठाना इस कारण विवादित विषय बनकर रह गया है क्योंकि इस्लाम में शराब के साथ ही सूअर के माँस को हराम माना गया है। लेकिन अगर कोरोना वायरस से सुरक्षित रहने के लिए एक ओर जहाँ हैंडसैनीटाइजर में अल्कोहल इस्तेमाल किया जाता है तो वहीं दूसरी ओर कोरोना वायरस वैक्सीन में सूअर के माँस का उपयोग किया जाता है।

लेकिन मजहब के नाम पर एक अलग देश की माँग करने वाले जिन्ना तो सूअर का माँस भी खाते थे और शराब का इस्तेमाल भी जमकर करते थे। यही नहीं, जिन्ना तो नमाज पढ़ना तक भी नहीं जानते थे। जिन्ना अक्सर इस्लाम का मजाक भी बनाते देखे जाते थे। एक बार तो उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि पवित्र स्थल मक्का का पत्थर इस कारण काला हो चुका है क्योंकि हम मुस्लिम उसे हजारों वर्षो से छूते आ रहे हैं।

वास्तव में, मोहम्मद अली जिन्ना खुद को मुस्लिमों का एक धार्मिक राजनेता नहीं बल्कि राजनीतिक नेता मानते थे। एक मशहूर लेखक केएल गौबा ने इस बारे में लिखा था कि एक बार उन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना को एक मस्जिद में नमाज़ पढ़ने के लिए बुलाया तो जिन्ना ने उनसे कहा कि उन्हें तो नमाज पढ़नी ही नहीं आती। इस पर केएल गौबा ने जिन्ना से कहा कि फिर वो वही करें जैसा कि वहाँ पर मौजूद दूसरे लोग कर रहे हैं।

मोहम्मद अली जिन्ना को खाने में पोर्क (सूअर का माँस) और सिगार का भी खूब शौक था। इसका जिक्र एक समय जिन्ना के सहायक रहे मोहम्मद करीम छागला, जो कि बाद में भारत के विदेश मंत्री भी बने, ने अपनी आत्मकथा ‘रोज़ेज इन दिसंबर’ में करते हुए बताया कि किस तरह मुंबई के एक मशहूर रेस्तराँ में जिन्ना ने कॉफ़ी के साथ सूअर के सॉसेज ऑर्डर किए थे। कुछ पुस्तकों में तो जिक्र मिलता है कि जिन्ना रोजाना नाश्ते में पोर्क ही खाना पसंद करते थे।

अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत में जिन्ना जहाँ एक उदारवादी के रूप में जाने जाते थे, वहीं समय के साथ वो एक बड़े कट्टरपंथी बनकर उभरे। मोहम्मद अली जिन्ना का पूरा जीवन ऐसे ही तमाम विरोधाभासों से घिरा रहा। उनके मजहब इस्लाम का उनके जीवन पर जरा भी असर नहीं था। फिर भी, जिन्ना की मौत के समय उनके मजहब और आस्था, विवाद का विषय बनने से अछूते नहीं रहे। यह विवाद उनके अंतिम संस्कार के तरीकों के चयन को लेकर था कि यह शिया समुदाय के अनुसार किया जाना चाहिए या फिर सुन्नी! विवाद की स्थिति में जिन्ना की अंत्येष्टि में आखिकार शिया और सुन्नी, दोनों ही तरीक़ों को अपनाया गया।

जिन्ना एक ऐसा व्यक्तित्व था, जो शराब पीता था, सूअर का माँस खाता था, उर्दू नहीं बोलता था और नमाज तक पढ़ना नहीं जनता था। बावजूद इन तमाम मजहबी विरोधाभासों के, उन्हें समुदाय विशेष ने प्रेम किया, यह चौंकाने वाली बात जरूर है। हालाँकि जिन्ना ने मजहब के नाम पर ही एक अलग राष्ट्र की वकालत कर उसे साकार रूप दिया, यह शायद एक मजहब की नजरों में जिन्ना के तमाम गैर-मजहबी कारनामों पर पर्दा डालने के लिए काफी हो।

फिलहाल दुनियाभर के मुस्लिम हलाल सर्टिफिकेट वाली कोरोना वैक्सीन के इन्तजार में हैं। मुस्लिम धर्मगुरु और मौलवी वैक्सीन को लेकर तरह-तरह के बयान भी दे रहे हैं। जिन्ना का जन्मदिन ऐसे समय पर मनाया जा रहा है जब सूअर का माँस और शराब, कोरोना वायरस के इलाज के बीच एक बड़ी दीवार पैदा करता नजर आ रहा है।

वाजपेयी के सेक्स पर शायरी: जिस अटल को विपक्षी भी करते प्रणाम, ‘घटिया’ शायर ने ठहाके के साथ उड़ाया था मजाक

आज देश के प्रतिष्ठित प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म जयंती है। वे सदैव अपने कर्मों और अपनी राजनैतिक शैली, भाषण कला के लिए विख्यात रहे, कोई विरला ही इससे इतर उन्हें निचा दिखाने के लिए इतना नीचे गिर सकता है जितना बहुत पहले मशहूर शायर डॉ राहत इंदौरी ने किया था। हालाँकि, कुछ महीने पहले ही उनका कोरोना वायरस संक्रमण के बाद दिल का दौरा पड़ने के कारण (16 अगस्त, 2020) को निधन हो गया। उनकी मौत के बाद उनके चाहने वालों ने सोशल मीडिया पर उनकी कुछ शायरियाँ शेयर करके उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। इसी बीच कुछ मुशायरों में अपनी बात रखते हुए उनकी कई पुरानी वीडियोज भी वायरल होना शुरू हुईं थी।

ये वह वीडियोज थीं, जिनमें उन्होंने अपनी शायरी करने के हुनर का इस्तेमाल दिग्गज नेताओं और देश के हालातों को बयान करने के लिए इस्तेमाल किया था। कुछ लोग इसे उनका हुनर समझकर शेयर कर रहे थे। तो कुछ ऐसे भी थे, जिन्होंने इन वीडियोज को शेयर करके राहत इंदौरी की सोच पर अपना गुस्सा निकाला। आज जब देश वाजपेयी की जयंती मना रहा है तो एक बार फिर सब ताजा हो गया है।

साल 2001 में राहत इंदौरी ने घुटनों पर एक शेर पढ़ा था और दिलचस्प बात यह है कि उसी समय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के घुटनों की सर्जरी हुई थी।

अपने शेर को मुशायरे में पढ़ते हुए तब राहत ने अटल बिहारी वाजपेयी का नाम अपनी जुबान से लेने से मना कर दिया था और कहा था, “मैं किसी का नाम नहीं लेता हूँ अपने जुबान से। क्योंकि मेरे शेरों की कीमत करोड़ों रुपए है। मैं दो-दो कौड़ी के लोगों का नाम लेकर अपने शेर की कीमत कम नहीं करना चाहता।” 

अपनी इस बात के बाद उन्होंने कहा था, “100 करोड़ के मुल्क का वजन जिन पैरों पर है, उनका खुद वजन नहीं संभलता।” यह कहकर इस बात को उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि वह अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में ही बात कर रहे हैं। इसके बाद उन्होंने तमाम वाहवाही के बीच अपना शेर पढ़ा, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री के घुटनों की सर्जरी का मजाक उड़ाया गया था।

उन्होंने कहा:

रंग चेहरे का ज़र्द कैसा है 

आईना गर्द-गर्द कैसा है 
काम घुटनों से जब लिया ही नहीं 

फिर ये घुटनों में दर्द कैसा है

इस शेर को सुनकर मुशायरे में ठहाके और तालियाँ गूँज गईं थीं। कुछ लोग उठकर आए थे और राहत को सम्मानित भी किया था। अब इसी मुशायरे की वीडियो को शेयर करके उनकी आलोचना की जी रही है।

यूजर्स का कहना है कि 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी ने अपना घुटनों की सर्जरी करवाई थी और राहत इंदौरी ने उन्हें दो कौड़ी का बता कर अपनी शायरी को करोड़ों की बताया था। लोग याद दिला रहे हैं कि राहत ने उनके ऊपर इसलिए घुटनों वाला शेर पढ़ा था क्योंकि वह आजीवन अविवाहित थे (मतलब निहायत ही घटिया मानसिकता का आदमी था राहत इंदौरी, जिसने घुटने को सिर्फ और सिर्फ सेक्स से जोड़ा)।

सोशल मीडिया यूजर्स यहीं पर नहीं रुके। राहत इंदौरी द्वारा गोधरा कांड पर की गई शायरी भी बेहद विवादित थी, उसे भी लोगों ने खोज निकाला। एक मुशायरे में उन्होंने गोधरा कांड को लेकर ये कह दिया था कि उस दिन कारसेवकों के साथ कुछ हुआ ही नहीं था।

अपनी शायरी सुनाने से पहले वह लोगों को बताते हैं कि गोधरा कांड के मात्र एक साल में सारी रिपोर्ट्स सामने आ गई है। जाँच कमीशन यह कहने लगा है कि गोधरा में कुछ हुआ ही नहीं था। मीडिया ने हौआ बना दिया और ये बताया कि रेल के डिब्बों में आग लगा दी गई थी।

इसके बाद राहत इंदौरी अपना शेर फरमाते हुए कहते हैं:

जिनका मसलक है रौशनी का सफर
वो चिरागों को क्यों बुझाएँगें
अपने मुर्दे भी जो जलाते नहीं
जिंदा लोगों को क्या जलाएँगे

इस वीडियो को शेयर करके लोग कारसेवकों को याद कर रहे हैं, जिन्हें गोधरा कांड में अपनी जान गँवानी पड़ी। लोग कह रहे हैं कि राहत इंदौरी ने थ्योरी गढ़ी और जहरीली हिंसक कट्टरपंथी भीड़ को अपने शेरों से बचाने की कोशिश की।

इतना ही नहीं, अपनी बातों से उन्होंने इस पूरे कांड के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी को जिम्मेदार बताया। साथ ही यह भी बताने की कोशिश की कि यह काम हिंदुओं का हो सकता है क्योंकि हिंदू ही शव का दाह संस्कार करते हैं।