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सनी देओल की दो टूक- यह हमारी सरकार और किसान के बीच का मसला, बीच में न आए कोई; उधर सिद्धू की जुबानी फैज की बोली

नए कृषि संबंधी कानूनों के विरोध में चल रहे किसानों के प्रदर्शन के बीच गुरदासपुर से भारतीय जनता पार्टी के सांसद और बॉलीवुड एक्टर सनी देओल ने रविवार ( 6 दिसंबर, 2020) को कहा कि वह अपनी पार्टी और किसान दोनों के साथ खड़े हैं। सरकार पर भरोसा जताते हुए उन्होंने मामले में दखल देने वाले को इससे दूर रहने के लिए भी कहा है।

बीजेपी सांसद सनी देओल ने ट्वीट के सहारे अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा, “मेरी पूरी दुनिया से विनती है कि यह किसान और हमारी सरकार का मामला है, इसके बीच में कोई ना आए क्योंकि दोनों आपस में बातचीत कर इसका हल निकालेंगे। मैं जानता हूँ कि कई लोग इसका फायदा उठाना चाहते हैं और वो लोग अड़चन डाल रहे हैं। वह किसानों के बारे में बिल्कुल नहीं सोच रहे उनका अपना ही खुद का कोई स्वार्थ हो सकता है।”

सनी देओल ने बयान में कहा है, “दीप सिद्धू, जो चुनाव के वक्त मेरे साथ था, लंबे समय से मेरे साथ नहीं है। वो जो कुछ कह रहा है और कर रहा है वो खुद अपनी इच्छा अनुसार कर रहा है। मेरा उसकी किसी भी गतिविधि से कोई संबंध नहीं है। मैं अपनी पार्टी और किसानों के साथ हूँ और हमेशा किसानों के साथ रहूँगा। हमारी सरकार ने हमेशा किसानों के भले के बारे में ही सोचा है और मुझे यकीन है कि सरकार उनके साथ बातचीत करके सही नतीजे पर पहुँचेगी।”

वहीं दूसरी और कॉन्ग्रेस नेता नवजोत सिंह ने पंजाब-हरियाणा के किसानों के आंदोलन का समर्थन करते हुए फ़ैज़ अहमद की उस इस्लामवादी कविता का आह्वान किया जो सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान काफ़ी प्रचलित हुआ था। उन्होंने विरोध प्रदर्शनों के दृश्य के साथ एक वीडियो क्लिप ट्वीट किया है। इस वीडियो में फैज की कविता की लाइन ‘सब तख्त गिराए जाएँगे, सब ताज उछाले जाएँगे’ को सुना जा सकता है।

वहीं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) ने भी किसान विरोध के लिए अपने समर्थन की पुष्टि करने के लिए उसी कविता का आह्वान किया। जिनमें आगे की पंक्तियों के बोल है “बस नाम रहेगा अल्लाह का।”

बता दें इससे पहले शाहीन बाग ‘बिलकिस बानो‘ दादी को भी इन विरोध प्रदर्शनों में देखा गया था और वह इन विरोधों के बारे में बेहद मुखर रही हैं। पहले सिर्फ यह चिंता थी कि कहीं शाहीन बाग की तरह किसान विरोध-प्रदर्शन के दौरान भी दिल्ली की सड़कों को ब्लॉक न किया जाएँ। लेकिन अब तो इस विरोध प्रदर्शन में सीएए विरोध के दौरान लगाए गए नारे भी लगाए जाने लगे हैं।

गौरतलब है कि नए कृषि कानून के खिलाफ पंजाब से शुरू हुआ किसान विरोध-प्रदर्शन राजनीति के एक अलग पड़ाव का केंद्र बिंदु बन गया है। जिसमें विपक्षी पार्टियों के साथ-साथ खालिस्तानियों ने भी अपना कब्जा जमाना शुरू कर दिया है। इस प्रदर्शन की आड़ में विपक्षी राजनीतिक दल एक बेहद खतरनाक खेल खेलने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं किसान संगठनों ने नए कृषि कानूनों के खिलाफ 8 दिसंबर को भारत बंद बुलाया है, जिसका अधिकतर विपक्षी समर्थन भी कर रहे।

इच्छाधारी प्रदर्शनकारी योगेंद्र यादव करेंगे पंजाब के किसानों के ‘चक्का जाम’ को लीड, दूध-फल-सब्जी भी नहीं आने देंगे

चुनाव के दौरान खुद के बचपन में सलीम होने की वोटरों को दुहाई देकर भी करारी शिकस्त को नहीं टाल पाए योगेंद्र यादव सहूलियत के हिसाब से चोला ओढ़ लेते हैं। कभी राजनीतिक विश्लेषक की, कभी राजनैतिक दल के नेता की तो कभी किसान नेता की।

फिलहाल विफल राजनेता और पेशेवर प्रदर्शनकारी योगेंद्र यादव पंजाब के किसानों के विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। पंजाब के किसान नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। रविवार (दिसंबर 6, 2020) को एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, योगेंद्र यादव ने कहा कि बंद के दौरान आवश्यक वस्तुओं के वितरण की भी अनुमति नहीं होगी। उन्होंने कहा कि दोपहर 3 बजे तक चक्का जाम रहेगा। किसान संगठनों ने 8 दिसंबर को भारत बंद का आह्वान कर रखा है।

हालाँकि योगेंद्र यादव ने कहा कि विवाह और इमरजेंसी सेवाओं की अनुमति होगी। दूध, फल, सब्जियों और अन्य सेवाओं की डिलीवरी बंद रहेगी। सिंघु बॉर्डर पर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “8 तारीख को सुबह से शाम तक भारत बंद रहेगा। चक्का जाम शाम तीन बजे तक रहेगा। दूध-फल-सब्ज़ी पर रोक रहेगी। शादियों और इमरजेंसी सर्विसेज़ पर किसी तरह की रोक नहीं होगी।”

वैसे योगेंद्र यादव खुद किसान नहीं हैं। उन्हें हाल ही में किसानों और केंद्र सरकार के बीच इस मामले पर चर्चा में शामिल होने से रोका गया, क्योंकि वह एक राजनीतिक कार्यकर्ता हैं। यादव ने दावा किया कि गृह मंत्री अमित शाह ने खुद उनकी उपस्थिति पर आपत्ति जताई थी।

योगेंद्र यादव ने अपने बहिष्कार को लेकर कहा था, “हालाँकि किसान यूनियन ने फैसला किया कि बैठक का निमंत्रण तभी स्वीकार किया जाएगा जब चार प्रतिनिधि भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल किए जाएँगे। मुझे सूचित किया गया कि अमित शाह ने व्यक्तिगत रूप से इसका हिस्सा होने पर आपत्ति जताई थी। सरकार ने कहा कि मैं राजनीतिक व्यक्ति हूँ। किसान संघ बैठक का बहिष्कार करने के लिए तैयार थे, लेकिन वे मेरी जिद पर आगे बढ़ गए।”

योगेंद्र यादव जैसों के ‘इच्छाधारी’ चोले और विरोध-प्रदर्शनों में कथित तौर पर की गई सांप्रदायिक टिप्पणी को लेकर लोग विरोध-प्रदर्शनों के पीछे की मंशा पर सवाल उठाने लगे हैं।

गौरतलब है कि पिछले दिनों किसान संगठन और केंद्र सरकार के बातचीत में शामिल प्रतिनिधिमंडल में स्वराज पार्टी (Swaraj Party) के नेता योगेंद्र यादव (Yogendra yadav) का भी नाम था। मगर बाद में केंद्र सरकार के कहने के पर उनका नाम हटा दिया गया। सरकार ने कहा था कि वह ऐसा इसलिए कर रही है क्योंकि वह नहीं चाहती कि कोई राजनीतिक व्यक्ति इसमें शामिल हो।

मुरादाबाद में लव जिहाद का पहला केस दर्ज: धर्म परिवर्तन कराने के आरोप में राशिद और उसका भाई सलीम गिरफ्तार

उत्तरप्रदेश में बरेली के बाद मुरादाबाद में ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) को रोकने के लिए लागू किए गए अध्यादेश के तहत मामला दर्ज हुआ है। पुलिस ने परिजनों की शिकायत के आधार पर आरोपित राशिद और उसके भाई सलीम को गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि सोनू उर्फ राशिद हिन्दू युवती को बहला-फुसलाकर उसका धर्म परिवर्तन और निक़ाह करने की फिराक में था।

पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) विद्या सागर मिश्रा ने रविवार (6 दिसंबर, 2020) को मामले की जानकारी देते हुए बताया कि मुरादाबाद के कांठ थाने में लव जिहाद का पहला दर्ज हुआ और दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ग्रूमिंग जिहाद का यह मामला कांठ थाना क्षेत्र का है। बिजनौर जिले के कोतवाली क्षेत्र दारागंज निवासी युवती के परिजनों के मुताबिक उन्होंने अपनी बेटी पिंकी यादव को देहरादून पढ़ाने के लिए भेजा था। साथ ही वह देहरादून में एक ब्यूटी पार्लर में काम करती थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात मुरादाबाद जिले के कांठ तहसील के मोहल्ला पटेगंज निवासी सोनू उर्फ राशिद से हुई।

रिपोर्ट्स के अनुसार, राशिद ने उसे पैसे का लालच देकर बहला-फुसला लिया और युवती को झाँसे में लेते हुए उसका धर्मपरिवर्तन कराने और उससे निक़ाह करने की योजना बनाई। इसी के तहत वह उसे शनिवार को देहरादून से कांठ तहसील में रजिस्टर्ड शादी कराने के मकसद से बुर्का पहना कर उप निबंधक के कार्यालय पहुँचा था।

बंजरग दल के कार्यकर्ताओं को इसकी भनक लग गई। वे तहसील पहुँच कर पिंकी यादव को थाने ले गए। जहाँ पुलिस से धर्मान्तरण का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करने की माँग करने लगे। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को देखते ही राशिद वहाँ से भाग खड़ा हुआ था।

थाने पहुँच कर युवती ने बताया कि उसने अपनी मर्जी से राशिद के साथ 5 महीने पहले ही कोर्ट मैरिज कर ली थी। उसकी उम्र 22 साल है। वह वर्तमान में गर्भवती भी है। पुलिस ने युवती के परिजनों को मामले में संपर्क किया। कुछ समय बाद युवती की माँ ने थाने पहुँच कर मुस्लिम युवक के खिलाफ संगीन आरोप लगाए। जिसके आधार पर पुलिस ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम-2020 के तहत मुकदमा दर्ज कर दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। मुरादाबाद के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) विद्या सागर मिश्रा का कहना है कि युवती की उम्र और उसके प्रेम विवाह करने के दावे की जाँच की जा रही है।

बंगाल में भारत माता पूजा के लिए पोस्टर लगा रहे लोगों पर हमला, वाहनों में तोड़फोड़: TMC के गुंडों पर बमबारी का भी आरोप

पश्चिम बंगाल में रविवार (दिसंबर 6, 2020) को एक बार फिर से हिंसक वारदात की खबर सामने आई है। राजारहाट इलाके में भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला किया गया। हमला का आरोप टीएमसी समर्थित गुंडों पर लगा है। बीजेपी कार्यकर्ताओं पर उस वक्त हमला किया गया जब वो डिरेजियो मेमोरियल कॉलेज के पास पोस्टर लगा रहे थे। 

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता तपन चटर्जी के इशारे पर भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले का आरोप है। दरअसल रविवार रात राजारहाट इलाके में भाजपा की तरफ से भारत माता की पूजा का आयोजन होने वाला था। इसी के प्रचार के लिए भाजपा कार्यकर्ता पोस्टर लगा रहे थे। 

उसी समय कुछ बदमाश वहाँ पहुँचे और भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला कर दिया। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं को मारा-पीटा, उनके लगाए पोस्टर फाड़ दिए और उनके वाहनों में भी तोड़फोड़ की। भाजपा नेता अर्जुन सिंह ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है।  

उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “नैहाटी विधानसभा नैहाटी मंडल-1 गोरुफाड़ी कार्यालय में TMC के गुंडों ने बम फेंके। TMC को BJP से डर लग रहा है, ये डर अच्छा है।” पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा का चुनाव होना है, लेकिन उससे पहले लगातार बीजेपी से जुड़े लोगों को निशाना बनाने के आरोप और राज्य की सत्ताधारी टीएमसी के कार्यकर्ताओं पर लग रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले ही शनिवार (दिसंबर 5, 2020) को राज्य के आसनसोल में बीजेपी की बाइक रैली पर हमला हुआ था। बीजेपी कार्यकर्ताओं पर फायरिंग की गई और पत्थरबाजी भी की गई। इस दौरान बम भी फेंके गए। स्थानीय बीजेपी नेता लखन घोरुई ने जानकारी देते हुए बताया था, “टीएमसी के गुंडों ने गोलीबारी की और बम विस्फोट कर 5-7 लोगों को घायल कर दिया। हम अभी अस्पताल जा रहे हैं। पुलिस से मदद माँगने के बावजूद कोई कदम नहीं उठाया गया है।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों पश्चिम बंगाल के कूच बिहार में बीजेपी के कार्यकर्ता की पीट-पीटकर हत्या का मामला सामने आया था। मृतक कार्यकर्ता का नाम कलाचंद कर्मकार (kalachand Karmakar) था और उनकी उम्र 55 साल थी। वह बीजेपी के बूथ कमेटी के सचिव भी थे।

आरोप था कि पाँचों टीएमसी कार्यकर्ताओं ने बेरहमी से बीजेपी नेता की पिटाई की, जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आई। जब इलाज के लिए उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मृतक बीजेपी नेता के परिवार वालों ने टीएमसी के गुंडों पर हत्या का आरोप लगाया था। परिवार ने पुलिस को दी शिकायत में पाँच टीएमसी कार्यकर्ता का नाम लिया था। 

हथियार सप्लायर साजिद अली की गिरफ्तारी से पूर्वोत्तर में जिहादी-उग्रवादियों की साँठगाँठ हुई उजागर

भारतीय सेना और असम राइफल्स के जवानों ने बुधवार (दिसंबर 2, 2020) को असम के डिब्रूगढ़ जिले के नहरकटिया में NSCN (K) के एक प्रमुख हथियार और गोला-बारूद सप्लायर को धर-दबोचा। हथियारों के सप्लायर की पहचान शिवसागर जिले के नमती चाराली निवासी साजिद अली के रूप में की गई।

हथियार सप्लायर के कब्जे से जिंदा गोला-बारूद और हथियार बरामद किए गए। सूत्रों के मुताबिक, साजिद अली ने एनएससीएन (के) को हथियार और गोला-बारूद की आपूर्ति की। उसकी गिरफ्तारी को विद्रोही समूह के लिए बड़ा झटका बताया जा रहा है। साजिद अली उग्रवाद को समर्थन देता था और साथ ही जिहादी तत्वों के द्वारा घृणा फैलाने में लगातार भागीदार रहा।

गिरफ्तार अपराधी साजिद अली सशस्त्र कैडर को सहायता प्रदान करने में भी कथित रूप से शामिल था और असम और नागालैंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में विद्रोही समूह के लिए अवैध गतिविधियों को अंजाम देता था।

डिब्रूगढ़ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, पद्मनाव बरुआ ने कहा, “एनएससीएन (के) के एक हथियार और गोला-बारूद आपूर्तिकर्ता को सेना द्वारा गिरफ्तार किया गया था और उसे नहरकटिया पुलिस स्टेशन को सौंप दिया गया था। हमने पूछताछ शुरू कर दी है और उसे अदालत में भेज दिया है।”

उन्होंने बताया, “वह एनएससीएन (के) के लिए हथियारों और गोला-बारूद की तस्करी में शामिल होने के साथ ही सशस्त्र संवर्गों को सहायता प्रदान करने में भी शामिल था। वह असम एवं नागालैंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में विद्रोही समूह के लिए विभिन्न अवैध गतिविधियों को अंजाम देता था।”

सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा बलों ने गणतंत्र दिवस समारोह से पहले असम, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश की सीमाओं पर विद्रोही समूहों के खिलाफ आतंकवाद विरोधी अभियान तेज कर दिया है। सर्दियों के दौरान, विद्रोही समूह हथियारों और गोला-बारूद, खाद्य आपूर्ति और पैसे की खरीद करने की कोशिश करते हैं जो बारिश के मौसम में इतना आसान नहीं है।

नागालैंड के बाहर एनएससीएन (आईएम) और अन्य आतंकवादी समूहों के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया गया है। हाल ही में सेना के प्रमुख जनरल एमएम नरवान खुद राज्य की राजधानी कोहिमा पहुँचे और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, राज्यपाल आरएन रवि और मुख्यमंत्री नीफियू रियो के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं।

‘बेईमान और भ्रष्टाचारी नेताओं को आगे किया जा रहा है, क्योंकि वे चापलूस हैं’: ममता बनर्जी के एक और मंत्री ने खोला मोर्चा

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) में बगावतों का दौर थमता नहीं नजर आ रहा है। शुभेंदु अधिकारी ने मंत्री पद से इस्तीफा देकर एक समानांतर संगठन तैयार कर लिया है। कूच विहार के विधायक मिहिर गोस्वामी भाजपा में जा चुके हैं। अब राज्य के वन मंत्री राजीब बनर्जी की नाराजगी सामने आई है। उन्होंने शनिवार (दिसंबर 5, 2020) को अपनी सरकार पर निशाना साधते हुए बड़े आरोप लगाए।

राजीब बनर्जी ने कहा कि उन्हें तब बहुत दुःख होता है, जब वे देखते हैं कि बेईमान और भ्रष्टाचारी लोगों को आगे रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि ये सब सिर्फ इसीलिए किया जा रहा है, क्योंकि ऐसे लोग चापलूस होते हैं। उन्होंने कहा कि ये ‘चापलूसी का युग’ है और जो सक्षम और योग्य हैं, उन्हें वो सब नहीं मिल रहा जिसके वे हकदार हैं। उन्होंने कहा कि ये सब कुछ देख कर उन्हें बड़ी ठेस पहुँचती है।

पश्चिम बंगाल के वन मंत्री राजीब बनर्जी ने कहा कि उनका कभी-कभी मन करता है कि वे भी बाहर निकलें और इन चीजों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करें। उन्होंने साउथ कोलकाता में एक समाजिक कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि जो लोग AC में बैठ कर जनता को बेवकूफ बनाते हैं, उन्हें हर स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि जिन लोगों ने कुशलता से काम किया है, वो पीछे छूट जाते हैं।

उन्होंने ऐलान किया कि ऐसे लोगों का विरोध करने का अब सही समय है, क्योंकि जनता ने उन्हें स्वीकार करना बंद कर दिया है। उन्होंने ऐसे लोगों के खिलाफ आवाज़ उठाने की बात कही। ये सब ऐसे समय में हो रहा है, जब मुख्यमंत्री और TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी ने पार्टी को एकजुट रहने की सलाह दी है। इस बयान के 1 दिन बाद राजीब ने कहा कि एकजुट होकर आगे बढ़े चापलूसों को सबक सिखाने का समय आ गया है।

उन्होंने कहावत याद दिलाई कि आप सभी लोगों को हमेशा के लिए बेवकूफ नहीं बना सकते। राजीब हावड़ा के डोमजूर क्षेत्र से विधायक हैं। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि उनकी राजनीति जनता के लिए है और भले ही लाख बाधाएँ आएँ, वो जनसेवा पर केंद्रित रहेंगे। उन्होंने बताया कि कई लोग राजनीति से इसीलिए विमुख हो गए हैं, क्योंकि यहाँ भ्रष्टाचारियों का बोलबाला है। उन्होंने कहा कि आज युवाओं के मन में राजनीति को लेकर सही धारणा नहीं है।

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार से इस्तीफा देने वाले शुभेंदु अधिकारी ने रविवार (नवंबर 29, 2020) को पूर्वी मिदनापुर में सभा की थी। हालॉंकि उन्होंने अपने पत्ते पूरी तरह नहीं खोले हैं। इस सभा के जरिए उन्होंने अपनी ताकत की झलक दिखाने की कोशिश की। सत्ताधारी टीएमसी उनकी नाराजगी दूर करने की कोशिशों में लगी है। शुभेंदु अधिकारी ने अपने समर्थकों से कहा है कि वे सड़क पर उतरने के लिए गोलबंद हो जाएँ।

‘150 साल पुराने शिव मंदिर को ‘बाबर के वंशजों’ ने घेरा’: सहारनपुर में एक मंदिर के ‘गायब’ होने पर बवाल, शिवलिंग तोड़ने का भी आरोप

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक प्राचीन शिव मंदिर का रास्ता एक साजिश के तहत बंद किए जाने का आरोप लगा है। इलाके के हिन्दुओं का कहना है कि पहले जो मंदिर दूर से ही मंदिर दिख जाता था, अब वह दिखता भी नहीं है। इसके लिए वे स्थानीय मुस्लिम समुदाय के जबरन अतिक्रमण को जिम्मेदार ठहराते हैं। बजरंग दल का कहना है कि इस साजिश की शुरुआत साढ़े 3 दशक पहले ही हो गई थी और मंदिर फ़िलहाल बंद है।

गोटेशाह चुंगी में स्थित इस शिव मंदिर को लेकर स्थानीय हिन्दुओं में आस्था है। बजरंग दल ने प्रशासन से जल्द इसका समाधान करने की माँग की है। VHP के स्थानीय कार्यकर्ता सचिन मित्तल का कहना है कि प्रान्त मठ प्रमुख आचार्य कमल किशोर के नेतृत्व में जिलाधिकारी (DM) अखिलेश सिंह को ज्ञापन सौंपा गया है। इसमें विनती की गई है कि मंदिर का कपाट खुलवाने की व्यवस्था जल्द की जाए।

बजरंग दल ने तो यहाँ तक चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने कोई उपाय नहीं निकाला तो दिसंबर 1992 की तरह श्रद्धालु कारसेवा करने के लिए मजबूर हो जाएँगे। ‘धोबी वाली गली’ में गोटेशाह मजार के पास ये प्राचीन शिव मंदिर स्थित है, लेकिन पते पर जाने के बावजूद दिखाई नहीं देता। स्थानीय हिन्दुओं का कहना है कि अतिक्रमण कर इसे चारों ओर से घेर लिया गया है।

स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों का कहना है कि मंदिर मकान की छतों से ही दिखाई देता है। वो कहते हैं कि आज से 27 वर्ष पूर्व में ये मंदिर लाला धूलि चंद की संपत्ति हुआ करती थी, लेकिन उसके बाद इसे खरीद लिया गया। मंदिर की बाउंड्री और गेट के आगे गैलरी उन्होंने ही निर्माण कराया था, लेकिन उनके परिवार के भी किसी ने मंदिर की सुध नहीं ली। लाला जी के निधन के बाद उनका परिवार अब इंग्लैंड में रहता है।

इस संबंध में पुलिस ने बताया, “उक्त प्रकरण में क्षेत्राधिकारी नगर द्वितीय, सिटी मजिस्ट्रेट व थाना प्रभारी मंडी द्वारा मौके जाकर वार्तालाप की गई है तथा राजस्व विभाग द्वारा पूरे प्रकरण की नियमानुसार जाँच की जा रही है। जाँच उपरांत तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।”

ऑपइंडिया ने जब स्थानीय लोगों से बात की तो उन्होंने बताया कि प्रशासन के लोग हाल में सक्रिय हुए हैं और गुरुवार (दिसंबर 3, 2020) को मजिस्ट्रेट और सीओ जाँच के लिए वहाँ पहुँचे थे। इसके बाद तहसील की टीम ने भी वहाँ का दौरा कर के स्थिति को समझा। जहाँ मंदिर स्थित है, उस भूमि का खेसरा संख्या 792/2, 00472 और रकबा 0.0820 है। आरोप है कि मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कारखाना बना कर मंदिर का रास्ता ब्लॉक कर दिया है।

विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल की माँग है कि न सिर्फ मंदिर कार्य में बाधा डालने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, बल्कि उनके खिलाफ भू-माफिया एक्ट के तहत मुकदमा भी दर्ज किया जाए। ऑपइंडिया के पास उस ज्ञापन की कॉपी है, जिसे डीएम को दिया गया। इसमें मंदिर का पता ‘प्राचीन शिव मंदिर, गोटे शाह की चुंगी, धोबी वाली गली में स्थित मंडी समिति रोड’ बताया गया है। ज्ञापन में हिन्दू संगठनों ने लिखा है:

“कुछ मुस्लिम लोगो के द्वारा यहाँ एक विशेष समुदाय वाला माहौल बना देने के कारण हिन्दू परिवारों को कुछ समय पहले यहाँ से पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा। यहाँ लोगों ने मंदिर को चारों तरफ़ अपने कारखानों की अस्थायी दीवारे खड़ी कर मंदिर के रास्ते को बंद कर दिया, जिससे मंदिर में आने-जाने वाले लोगो का रास्ता ब्लॉक हो गया। इससे हिन्दू समाज बहुत आहत है। विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ता सख्त चेतावनी के साथ ये ज्ञापन देते हैं कि अगर 48 घंटों के अंदर मंदिर को नही खोला गया और मंदिर की जगह पर कब्जा कर मंदिर कार्य को बाधित करने वाले लोगो के विरुद्ध भू-माफिया एक्ट में मुकदमे दर्ज न हुए तो हम सड़कों पर आएँगे और स्वयं मंदिर खुलवाएँगे।”

दोनों संगठनों ने प्रशासन को चेताया है कि अगर इलाके में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब होती है तो उसकी पूर्ण जिम्मेदार शासन-प्रशासन की होगी। उन्होंने कहा कि इन्हीं कारणों से वो इस ज्ञापन के जरिए पहले ही चीजों से अवगत करा दे रहे हैं। ऑपइंडिया ने बजरंग दल के विभाग संयोजक कपिल मोहडा से बात की, जिन्होंने बताया कि घंटाघर स्थित हनुमान मंदिर में चालीसा पाठ के साथ-साथ आगे की रणनीति पर सिचार-विमर्श किया जा रहा है।

कपिल ने हमें बताया कि ये एक प्राचीन मंदिर है, जो लगभग 150 वर्ष पुराना है। उन्होंने बताया कि सड़क पर खड़े होकर भी मंदिर नजर नहीं आता है, स्थिति ऐसी बन गई है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों से लगातार मंदिर का रास्ता बंद करने का क्रम चल रहा है। उन्होंने प्रशासन पर भी कोई कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। उन्होंने चेताया कि दो दिनों के बाद हिन्दू कार्यकर्ता मंदिर के लिए कूच करेंगे।

उन्होंने बताया कि ये मुस्लिमों का इलाका है और आरोप लगाया कि यहाँ मंदिर में स्थित शिवलिंग को भी तोड़ डाला गया और मंदिर के जो पहले के दरवाजे थे, उन्हें ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि शिव मंदिर के बराबर में जो फैक्ट्रियाँ बनी हुई हैं, उन्हीं के मालिकों ने दीवारें बनवा कर मंदिर के रास्तों को बंद कर दिया। उन्होंने मंदिर पर कब्ज़ा करने वालों को ‘बाबर के वंशज’ करार दिया और कहा कि अगर ऐसा नहीं होता है तो सहारनपुर में वापस 1992 की याद आएगी।

उन्होंने कहा, “ये देश बाबर की नीतियों से नहीं चलेगा। अगर हमारे मठ-मंदिर कब्जाने की इस तरह से कोशिश की जाएगी तो इसका हम अब मुहँतोड़ जवाब देंगे।” ऑपइंडिया के पास वो वीडियो भी है, जिसके आधार पर दावा किया जा रहा है कि शिवलिंग को क्षतिग्रस्त किया गया। हिन्दू कार्यकर्ताओं ने बताया कि प्रशासन ने उन्हें इस वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने से मना किया हुआ है। इलाके में इस मुद्दे को लेकर तनाव व्याप्त है।

हिन्दू कार्यकर्ताओं ने विरोध-प्रदर्शन के दौरान ‘मंदिरों पर कब्ज़ा करने वालों को, गोली मारों %$ को’ के नारे भी लगाए। उन्होंने ‘बजरंग दल के चीते हैं, अपने दम पर जीते हैं’ और ‘मठ-मंदिर के सम्मान में, बजरंग दल मैदान में’ के साथ-साथ ‘जय श्री राम’ के नारे भी लगाए। हमने इस घटना के सम्बन्ध में विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल से भी बात की, जिन्होंने बताया कि इस प्रान्त में करीब 10 मंदिरों का यही हाल है।

उन्होंने कहा कि ये मंदिर एक बीघा के बड़े क्षेत्र में बनाया गया था और आसपास बड़ी संख्या में हिन्दू समाज के लोग रहते थे, लेकिन मुस्लिमों के व्यवहार के कारण उनका पलायन शुरू हो गया। उन्होंने कहा कि मंदिर के आसपास अब कोई हिन्दू घर नहीं बचा है। केवल मुस्लिम समुदाय के लोगों की दुकानें और फैक्ट्रियाँ हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय हिन्दू कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर दिया गया है और प्रान्त महामंत्री नागेंद्र जी ने वहाँ का दौरा किया है।

विनोद बंसल ने ऑपइंडिया को बताया, “मंदिर के कैम्पस में भी मुस्लिम समाज के लोगों ने अपना अधिकार जमाने के लिए उसकी संपत्ति को नष्ट कर दिया। मूर्तियों को तोड़ा गया। उन्हें उठाया गया। मंदिर को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। कहानियाँ गढ़ी जा रही हैं कि ये व्यक्तिगत संपत्ति है और जिसकी है वो चले गए।” बंसल ने माना कि पुलिस-प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि वो गंभीरता से इस मामले पर विचार करेंगे।

उन्होंने कहा कि समस्या ये है कि आमदनी का साधन न होने के कारण पुजारी चले जाते हैं तो वीरान मंदिरों के साथ ऐसा किया जाता है। साथ ही बताया कि इन चीजों को ध्यान में रखते हुए विहिप ऐसे मंदिरों की सूची मँगा रहा है, साथ ही स्थानीय समिति बना कर उन मंदिरों के प्रबंधन के लिए उचित व्यवस्था की जाएगी। विहिप इस बात से चिंतित है कि पुजारियों की कमी का फायदा उठा कर मंदिरों पर कब्ज़ा किया जा रहा है।

इससे पहले जानकारी सामने आई थी कि विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने 5000 ऐसे पुजारियों को प्रशिक्षित कर विभिन्न मंदिरों में नियुक्त किया है, जो एससी-एसटी (दलित) समुदाय से आते हैं। संगठन के निवेदन के बाद विभिन्न राज्य सरकारों ने भी अपने पैनल में इन पुजारियों को जगह दी है। खासकर दक्षिण भारत में संगठन को इस कार्य में खासी सफलता मिली है। अकेले तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में एससी-एसटी (दलित) समुदाय के 2500 पुजारियों को प्रशिक्षित किया गया है।

MSP जारी रहेगा, किसानों को झाँसे में आने की जरूरत नहीं: कृषि राज्य मंत्री ने कहा- लिखकर भी दे सकते हैं

राजधानी दिल्ली की सीमा पर किसानों का प्रदर्शन लगातार 11वें दिन जारी है। वे कृषि सुधार क़ानूनों का विरोध कर रहे हैं। इस मुद्दे पर किसान अपना मत स्पष्ट कर चुके हैं कि तीनों कृषि क़ानून वापस लिए जाएँ। इस बीच केंद्र सरकार और किसान संगठन के प्रतिनिधियों की बैठक भी हुई लेकिन बैठक में हुई वार्ता का कोई नतीजा नहीं आया। इस मुद्दे पर कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने बयान दिया है। उन्होंने विपक्ष पर किसानों को भड़काने का आरोप लगाया है। इसी बीच मशहूर मुक्केबाज विजेंद्र सिंह ने भी हरियाणा-दिल्ली बॉर्डर पर जारी किसानों के विरोध-प्रदर्शन का समर्थन किया है।  

कृषि सुधार क़ानून पर जारी विरोध-प्रदर्शन को लेकर कृषि राज्य मंत्री ने कहा, “न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) जारी रहेगा। किसानों को किसी भी झाँसे में आने की ज़रूरत नहीं है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जैसा कहते हैं वैसा ही करते भी हैं, एमएसपी के संबंध में लिख कर दे भी सकते हैं।” स्वामीनाथन आयोग का हवाला देते हुए उनका कहना था कि उसमें भी यही सिफारिश की गई है। कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में ही किसानों का हित है, यानी कृषि क़ानून किसानों के हित में है। सरकार ने पहले ही स्पष्ट किया है कि आवश्यकता पड़ने पर इसमें संशोधन भी किया जाएगा। 

कृषि राज्य मंत्री ने विपक्ष की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए कहा, “कुछ राजनीतिक लोग आग में घी डालने का काम कर रहे हैं। इस क़ानून ने किसानों को आज़ादी दी है। मुझे नहीं लगता है कि खेतों में काम करने वाले असल किसानों को कृषि सुधार क़ानूनों से किसी भी तरह की आपत्ति है। किसानों को असल में इस बात पर विचार करना होगा कि कौन इसे मुद्दे पर राजनीति कर रहा है।” 

कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा, “पिछले कई सालों में किसान संघ ने उचित मूल्यों के लिए आन्दोलन किया है। प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में सालों बाद किसानों के हित में निर्णय हुआ है। हर चार महीनों के दौरान किसानों के खाते में 4000 रुपए डाले जाते हैं। किसानों को सम्मान राशि दी जाती है। भारत बंद से सिर्फ और सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था का नुकसान होगा। मैं आशा करता हूँ किसान देश में अशांति फैलाने वाला कोई कदम नहीं उठाएँगे। मोदी सरकार का लक्ष्य है कि किसानों की आमदनी दोगुनी हो जाए, उसके लिए इस तरह के सुधारों की ज़रूरत थी। केंद्र सरकार हमेशा से ही देश के किसानों के पक्ष में रही है।”      

वहीं दूसरी तरफ मुक्केबाज विजेंद्र सिंह ने हरियाणा दिल्ली बॉर्डर पर जारी किसानों के विरोध-प्रदर्शन का समर्थन किया है। उल्लेखनीय है कि विजेंद्र सिंह पर साल 2013 के दौरान पुलिस ने आरोप लगाया था कि उन्होंने 12 बार ड्रग्स का सेवन किया है।

समर्थन करते हुए विजेंद्र सिंह ने ऐलान किया है कि केंद्र सरकार कृषि सुधार कानून वापस नहीं लेती है तो वह अपना राजीव गाँधी खेल रत्न अवार्ड (खेलों में दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार) वापस लौटा देंगे। किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए भारतीय मुक्केबाज ने कहा, “मैंने पंजाब में प्रशिक्षण लिया है और यहाँ की रोटी खाई है। आज जब ये लोग ठण्ड के मौसम में यहाँ मौजूद हैं तो मैं इनके भाई की तरह आया हूँ। हरियाणा के अन्य खिलाड़ी भी इसमें शामिल होना चाहते थे, लेकिन वह सरकारी नौकरी करते हैं, उनके लिए समस्या खड़ी हो जाएगी। फिर भी उन खिलाड़ियों का कहना है कि वह किसानों के साथ हैं।”

‘उद्धव ठाकरे, घनश्याम के चेहरे की मुस्कान देखिए और सबक सीखिए’: अर्णब ने कहा- रिपब्लिक निडर, हम जीतेंगे

फेक टीआरपी मामले में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट (AVP) घनश्याम सिंह को शनिवार (दिसंबर 5, 2020) को मुंबई की अदालत ने जमानत दे दी। जेल से रिहा होने के बाद घनश्याम सिंह ने दावा किया कि हिरासत में रहते हुए मुंबई पुलिस के अधिकारियों ने उनकी पिटाई की

पुलिस ने घनश्याम सिंह को उनके आवास से गिरफ्तार किया था और इसके बाद उन्हें 26 दिन के लिए तलोजा जेल में रखा गया था। यह पूछे जाने पर कि क्या पुलिस ने उन पर दबाव बनाने की कोशिश की या हिरासत में रहते हुए परेशान किया, सिंह ने खुलासा किया कि पुलिस ने उन्हें यह स्वीकार करने के लिए दबाव डालने की कोशिश की कि उन्होंने (रिपब्लिक टीवी) ‘कुछ किया है’। फ़र्ज़ी टीआरपी मामले को रिपब्लिक टीवी और इसके एडिटर-इन-चीफ़ अर्णब गोस्वामी के विरुद्ध षड्यंत्र और दुष्प्रचार के ज़रिए में तब्दील कर दिया गया था।

घनश्याम सिंह को अदालत में पेश किए जाने के पहले उनके साथ आतंकवादियों जैसा बर्ताव किया गया, चेहरा काले कपड़े से ढका गया था और उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया था। अपनी रिहाई के बाद सिंह ने कहा कि जब वह पुलिस हिरासत में थे, तो दूसरे दिन (मुंबई पुलिस) ने उन्हें पीटा। पुलिस “जानना” चाहती थी कि रिपब्लिक टीवी ने कैसे “टीआरपी” में हेरफेर की है। उन्होंने कहा, “मैं इनकार कर रहा था क्योंकि हमने कुछ नहीं किया है। मैंने बताया कि हमने कुछ नहीं किया है और मैंने भी कुछ नहीं किया है। उन्होंने काफी कोशिश की और फिर मुझे पीटा गया।”

सिंह की रिहाई पर बोलते हुए, अर्णब ने कहा कि उन्हें पुलिस हिरासत से बाहर देख कर काफी खुशी और गर्व होता है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक संदेश देते हुए, अर्णब ने कहा, “आप एक बार फिर विफल रहे हैं। आप पूरे देश के सामने सार्वजनिक रूप से कितनी बार असफल होंगे क्योंकि आप झूठ के साथ हैं? उद्धव ठाकरे, घनश्याम के चेहरे पर मुस्कान देखिए और सबक सीखिए। ‘सत्यमेव जयते’ की दहाड़ को देखिए।”

अर्णब ने आगे कहा कि जब तक ठाकरे झूठ के साथ रहे, तब तक उनका असफल होना तय है। उन्होंने कहा, “घनश्याम रिपब्लिक के लिए खड़ा है। वह 26 दिन के बाद बाहर आया और कहा कि अब वह और मजबूत हो गया है।” उन्होंने आगे कहा कि ठाकरे सरकार द्वारा रिपब्लिक के साथ ज़बरदस्ती करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सभी अकल्पनीय तरीकों के बावजूद अब उनका झुकना तय है।

अर्णब ने कहा, “रिपब्लिक निडर है। महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस के लोगों से मैं नज़रें मिला कर कहता हूँ कि हम सौदों में कटौती नहीं करते हैं। हम व्यापार बंद नहीं करते हैं। हम लड़ते हैं और हम जीतते हैं। और हम जीत रहे हैं।”

फेक टीआरपी स्कैम

गौरतलब है कि 8 अक्टूबर को आयोजित एक प्रेस वार्ता में मुंबई पुलिस कमिश्नर ने रिपब्लिक टीवी और अर्णब गोस्वामी पर कई गम्भीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि चैनल ने टीआरपी से जुड़ी जानकारी में बदलाव करने के लिए आम लोगों को पैसे दिए थे और उनसे कहा गया था कि वह उनका चैनल चलाकर अपना टीवी ऑन रखें।

हालाँकि, उसी दिन देर शाम तक रिपब्लिक टीवी ने सबूतों के साथ अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि असली रिपोर्ट में उनके चैनल का नाम कहीं भी नहीं है, बल्कि उन पर सवाल उठाने वाले इंडिया टुडे का नाम ओरिजनल एफआईआर में है। इसके बाद इंडिया टुडे और मुंबई पुलिस की मंशा पर सवाल खड़े हो गए। बाद में मुंबई पुलिस कमिश्नर को मानना भी पड़ा था कि एफआईआर में इंडिया टुडे का नाम है।

दक्षिण भारत की ‘लेडी सुपरस्टार’ सोमवार को BJP में शामिल होंगी, अमित शाह से की मुलाकात

दक्षिण भारत की मशहूर अभिनेत्री और राजनेता विजयशांति सोमवार (दिसंबर 7, 2020) को भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता लेंगी। बीजेपी नेता जी विवेक वेंकटस्वामी ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि तेलंगाना में मुख्यमंत्री केसीआर द्वारा दरकिनार किए गए कई नेता भी बीजेपी में शामिल होंगे।

विजयशांति ने रविवार (दिसंबर 6, 2020) को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी नेता किशन रेड्डी समेत कई अन्य नेताओं से मुलाकात की। बता दें कि विजयशांति ने कॉन्ग्रेस को अलविदा कह दिया है। विजयशांति को फ़िल्म की दुनिया में ‘लेडी सुपरस्टार’ के रूप में भी पहचाना जाता है।   

विजयशांति ने 2014 में टीआरएस छोड़ कर कॉन्ग्रेस की सदस्यता ली थी। उल्लेखनीय है कि हाल ही में हुए हैदराबाद निकाय चुनावों में कॉन्ग्रेस सिर्फ दो सीटों पर सिमट कर रह गई थी। वहीं भाजपा ने बेहद उम्दा प्रदर्शन करते हुए 48 सीटों के साथ दूसरा पायदान दासिल किया था। इसके अलावा टीआरएस 55 और एआईएमआईएम को 44 सीटों पर जीत हासिल हुई थी।

1997 में बनी सक्रिय राजनीति का हिस्सा

विजयशांति को दक्षिण भारतीय सिनेमा (मुख्य रूप से तेलुगु सिनेमा) का अमिताभ बच्चन कहा जाता है। 1997 में उन्होंने भाजपा की सदस्यता लेकर सक्रिय राजनीति में पहला कदम रखा था। तेलंगाना को अलग राज्य के रूप में स्थापित करने के आंदोलन के दौरान विजयशांति की केसीआर और उनके राजनीतिक दल तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) से काफी अच्छे संबंध थे। 2009-2014 के आम चुनावों में उन्होंने टीआरएस के टिकट पर चुनाव लड़ा था और मेडक से सांसद चुन कर आई थीं। 

40 वर्षों का फ़िल्मी करियर 

विजयशांति का फ़िल्मी करियर लगभग 40 वर्षों का था और इस दौरान उन्होंने लगभग 180 फीचर फिल्मों में काम किया। इसमें तेलुगु, तमिल, मलयालम, कन्नड़ और हिन्दी भाषा की फिल्म शामिल हैं। 1990 में आई फिल्म ‘कर्त्तव्यम’ के लिए विजयशांति को नेशनल अवॉर्ड मिला था, इस फिल्म में उन्होंने ‘सुपरकॉप’ का किरदार निभाया था। इसके अलावा विजयशांति को 7 फिल्मफेयर अवॉर्ड (साउथ) मिल चुके हैं। 

इनकी कुछ फिल्म ‘प्रतिघटना’, ‘स्वयं कृषि’, ‘अग्नि पर्वतम’, ‘चैलेंज’, ‘मुव्वा गोपालुडू’, ‘यमुडीकी मोगुदू’, ‘गैंग लीडर’, ‘राउडी इंस्पेक्टर’, ‘पुलिस लॉकअप’ और ‘पसीवाड़ी प्रणाम’ हैं। तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री और दक्षिण भारतीय सिनेमा में अपनी मज़बूत छवि बनाने के अलावा विजयशांति को 80 और 90 के दशक की सबसे प्रभावशाली शख्सियत में एक माना जाता था। राजनीतिक में उन्हें लगभग 20 साल पूरे हो चुके हैं।  

lady superstar of telugu film industry quits congress join bjp on monday