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‘₹100 में उपलब्ध हैं शाहीन बाग वाली दादी बिल्किस बानो’ – कंगना रनौत को कानूनी नोटिस, डिलीट कर दिया था विवादित ट्वीट

शाहीन बाग़ उपद्रव से सुर्ख़ियों में आई ‘दादी’ बिल्किस बानो के ‘किसान आंदोलन’ में भाग लेने की खबर के बाद कंगना रनौत ने उन पर टिप्पणी की थी, जिसके बाद बॉलीवुड अभिनेत्री को एक कानूनी नोटिस भेजा गया है। एक वायरल तस्वीर में दिख रही एक बूढ़ी महिला को लेकर कंगना रनौत ने कहा था कि ये शाहीन बाग़ वाली वही ‘दादी’ हैं, जिन्हें टाइम मैगजीन ने सबसे प्रभावशाली लोगों में शुमार किया था।

कंगना रनौत ने दावा किया था कि शाहीन बाग़ वाली ‘दादी’ अब 100 रुपए में भी उपलब्ध हैं। उन्होंने पाकिस्तानी पत्रकारों पर भारत का अंतरराष्ट्रीय PR गलत तरीके से हाईजैक करने का आरोप भी लगाया। कंगना रनौत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बात पहुँचाने के लिए हमारे अपने लोग चाहिए। अब ये ट्वीट तो डिलीट कर लिया गया है, लेकिन इसके कारण कंगना कानूनी पचड़े में फँस गई हैं।

वहीं ‘न्यूज़ 18’ की एक खबर के अनुसार, जिस ‘दादी’ की तस्वीर पर कंगना रनौत ने टिप्पणी की, उस तस्वीर में वो शाहीन बाग़ वाली बिल्किस बानो नहीं हैं। इस खबर में बताया गया है कि ये तस्वीर भारतीय किसान यूनियन के एक प्रदर्शन का है, जब पीली साड़ी में कई महिलाओं को केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए देखा गया था। बिल्किस बानो ने भी दावा किया कि ये उनकी तस्वीर नहीं है।

हालाँकि, बिल्किस बानो खुद भी मंगलवार (दिसंबर 1, 2020) को ‘किसान आंदोलन’ में हिस्सा लेने पहुँचीं, लेकिन उपद्रव की आशंका के कारण उन्हें पुलिस ने उन्हें रोक दिया था। अब वो खुद को ‘किसान की बेटी’ बताते हुए सरकार को किसानों की आवाज़ सुनने की नसीहत दे रही हैं। उन्हें सिंघु सीमा पर रोका गया। पुलिस ने उन्हें अपनी सुरक्षा में लेकर साउथ ईस्ट दिल्ली स्थित उनके आवास पर पहुँचाया।

यहाँ गौरतलब हो कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए कृषि सुधार कानूनों को लेकर जारी किसानों के ‘विरोध प्रदर्शन’ में धीरे-धीरे वह सभी लोग एक साथ आ रहे हैं, जिन्होंने पिछले दिनों शाहीन बाग जैसे आंदोलन का समर्थन किया था। भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर रावण ने भी गाजीपुर बॉर्डर पर जाकर विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। उदित राज ने कहा है कि वो किसानों की माँगों का समर्थन करते हैं।

अंतरधार्मिक विवाह के बाद मिलने वाली प्रोत्साहन राशि को ख़त्म करेगी उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार!

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार उस 44 वर्ष पुराने कानून को ख़त्म करने पर विचार कर रही है, जिसके तहत अलग-अलग धर्म से आने वाली वैवाहिक जोड़ों को प्रोत्साहित किया जाता है। अंतरधार्मिक शादी को बढ़ावा देने वाली इस योजना को अब ख़त्म किया जा सकता है। जबरन धर्मांतरण को लेकर योगी सरकार पहले ही अध्यादेश ला चुकी है, अब अंतरधार्मिक विवाह को बढ़ावा देने वाली योजना भी बंद हो सकती है।

उत्तर प्रदेश में 1976 से ही ये योजना चल रही है, जिसके तहत अंतरजातीय और अंतरधार्मिक शादी के बाद वैवाहिक जोड़ों को शादी के बाद प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। आज जब ‘ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद)’ के खतरे को लेकर लोग चर्चा कर रहे हैं, शादी के लिए धर्मांतरण वाली समस्या भी सिर उठाए खड़ी है। उत्तर प्रदेश में ‘नेशनल इंटीग्रेशन डिपार्टमेंट’ ने ये योजना लागू की थी। बाद में उत्तराखंड अलग राज्य बना तो ये योजना वहाँ भी लागू हो गई।

अब जब उत्तराखंड इस योजना को ख़त्म करने ही वाला है, उत्तर प्रदेश में भी इस कदम को लेकर विचार शुरू हो गया है। इस योजना लाभ उठाने के लिए अलग-अलग धर्मों वाले वैवाहिक जोड़ों को विवाह के 2 वर्षों के भीतर जिलाधिकारी के पास आवेदन करना होता है। इसके बाद डीएम विभाग को आगे ये आवेदन भेजते हैं। पिछले साल ही 11 अंतरधार्मिक जोड़ों ने इस योजना का लाभ लिया है। उन सभी को 50,000 रुपए दिए गए।

हालाँकि, इस वर्ष अब तक इस योजना के लिए कोई राशि जारी नहीं की गई है। TOI की खबर के अनुसार, 4 आवेदन जरूर आए हैं, लेकिन वो सभी पेंडिंग पड़े हुए हैं। ‘उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश, 2020’ के बाद अब इस पर भी पुर्विचार किया जाएगा। 2017 में इस योजना में एक शर्त ये जोड़ी गई थी कि अगर अंतरधार्मिक जोड़े शादी के बाद धर्मांतरण करते हैं तो उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पाएगा।

यूपी सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने कहा कि इस योजना का अब अस्तित्व नहीं है और इसे जारी रखने के विषय में वो टिप्पणी नहीं कर सकते। ताज़ा कानून के बारे में उन्होंने कहा कि अपने पार्टनर को अंधेरे में रख कर धोखा देने वाला और धर्मांतरण कराने वालों पर लगाम लगाने के लिए इसे लाया गया है। यूपी के मुख्य सचिव राजेंद्र तिवारी ने इस बात से इनकार किया कि ये अध्यादेश अंतरधार्मिक विवाह को हतोत्साहित करता है।

हाल ही में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने ‘ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद)’ के खिलाफ बने विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020 पर हस्ताक्षर कर इसे मंजूरी दी। इसके बाद ये प्रदेश में औपचारिक रूप से लागू हो गया है। राज्यपाल ने शनिवार (नवंबर 28, 2020) को इसकी मंजूरी दी। राज्यपाल की अनुमति मिलते ही ये अपराध गैर-जमानती हो गया है और इसे 6 महीनों के भीतर विधानमंडल के दोनों सदनों में पास कराना होगा।

शादीशुदा और कई बच्चों के अब्बा बिलाल ने 23 साल की मेहर को मारी गोली, माँ को उतारा मौत के घाट: करना चाहता था निकाह

उत्तर पूर्वी दिल्ली के शाहदरा में मानसरोवर पार्क के पास बिलाल नाम के युवक ने एकतरफा प्रेम के कारण एक लड़की के घर में घुस कर उसकी माँ और उस पर गोली चला दी। अपनी बेटी को बचाने के लिए आगे आई शमा परवीन (56) की मौके पर मौत हो गई, वहीं बेटी मेहर (रिपोर्ट में अन्य नाम मेहेद और महक) इस हमले में बुरी तरह घायल है। मेहर का इलाज फिलहाल अस्पताल में चल रहा है लेकिन उसकी हालत बेहद गंभीर है।

जानकारी के मुताबिक पूरी घटना सोमवार (दिसंबर 1, 2020) शाम करीब 7:30 बजे की है। शमा अपने पति से अलग होने के बाद अपनी तीन बेटियों के साथ मानसरोवर पार्क के जी ब्लॉक में किराए के घर में चौथी मंजिल पर रहती थी। सोमवार को बिलाल ने इस घटना को तब अंजाम दिया, जब मेहर के घर एक व्यक्ति इंटरनेट कनेक्शन लगाने आया। इसी बीच बिलाल ने अपने साथी के साथ मौका देखकर घर में एंट्री ली और पहले मेहर पर हमला बोला, फिर माँ शमा परवीन को गोली मार दी।

कहा जा रहा है कि सोमवार को माँ-बेटी पर गोलियाँ चलाने से पहले वह मेहर के लिए अपना रिश्ता लेकर उनके घर पहुँचा था, लेकिन जब इस रिश्ते के लिए मना किया गया तो उसने उन पर ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसाईं। फिर अपने साथी के साथ फरार हो गया। पुलिस अब इस मामले को दर्ज करके आरोपित बिलाल की तलाश कर रही है।

हिंदुस्तान अखबार में प्रकाशित संबंधित खबर

मृतक शमा के रिश्तेदार खालिद ने मीडिया को बताया कि बिलाल शादीशुदा है और कई बच्चे होने के बाद भी मेहर से एक तरफा प्यार करता था। इसी क्रम में वह सोमवार को अपना रिश्ता लेकर आया था और न सुनने के बाद उसने पिस्टल निकाल कर मेहर के मुँह पर चला दी। पल भर में गोली मुँह के पार हो गई। बेटी को बचाने दौड़ी शमा पर भी सनकी बिलाल ने गोलियाँ चलाई और उसे वहीं मार डाला।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से बताया गया कि बिलाल द्वारा शमा परवीन को गोली मारने से पहले शमा की बेटी मेहर के साथ बिलाल की तीखी बहस हुई थी। जब शमा ने अपनी बेटी को बचाने की कोशिश की, तो उसे भी मारा। गंभीर रूप से घायल शमा की मौके पर मौत हो गई।

पुलिस ने बताया कि बिलाल नंद नगरी (ये इलाका मानसरोवर पार्क से थोड़ी दूरी पर है) का निवासी है। शमा का परिवार भी पहले नंद नगरी में रहता था। शाहदरा के एडिशनल डीसीपी संजय कुमार सेन ने बताया कि मेहर को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। जबकि उसकी माँ ने दम तोड़ दिया है। आरोपी फरार है और उसे पकड़ने के लिए कई टीमें गठित की गई हैं।

‘जो ट्विटर पर आलोचना करेंगे, उन सब पर कार्रवाई करोगे?’ बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र की उद्धव सरकार पर दागा सवाल

बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक मामले में सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार से कड़े सवाल पूछे हैं। हाई कोर्ट ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक दफ्तर को आलोचना सहनी ही पड़ेगी। हाई कोर्ट ने मंगलवार (दिसंबर 1, 2020) को कहा कि पूरे समाज के अधिकारों और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच लोगों को संतुलन बनाना ही पड़ेगा। उसने उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए पूछा कि क्या उन सभी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, जो ट्विटर पर कुछ आपत्तिजनक लिखेंगे।

एसएस शिंदे और एमएस कार्णिक ने सुनैना होली की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणी की। उनके द्वारा पोस्ट की गई 3 ट्वीट के आधार पर महाराष्ट्र पुलिस ने 3 अलग-अलग FIR दर्ज की थी। बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स साइबर क्राइम डिपार्टमेंट द्वारा रजिस्टर किए गए एक केस के मामले में उन्हें अगस्त 2020 में गिरफ्तार भी किया गया था। बाद में उन्हें जमानत मिली। उनके वकील ने कोर्ट में अभिव्यक्ति की आजादी का हवाला दिया।

उन्होंने कहा कि उनके क्लाइंट ने बस अपने विचारों को प्रकट करते हुए सरकार की नीतियों की आलोचना की थी। इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र के सरकारी वकील से पूछा कि आप कितनों के खिलाफ एक्शन लोगे? सरकारी वकील का कहना था कि पुलिस सुनैना के ‘उद्देश्य’ की जाँच करना चाहती थी। उन्होंने कहा कि ये ट्वीट राजनीतिक दलों के खिलाफ थे। इस पर कोर्ट ने कहा कि हर सार्वजनिक दफ्तर को आलोचना सुननी ही पड़ती है।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार पर टिप्पणी करते हुए ये भी कहा कि युवा वर्ग को अपने विचारों को प्रकट करने के लिए जगह देनी ही पड़ेगी। अब इस मामले में अगली सुनवाई बुधवार को होगी। उसने पूछा कि अगर ये स्वतंत्रता नहीं दी गई तो युवा वर्ग को पता कैसे चलेगा कि वो सही विचार प्रकट कर रहे हैं या गलत? सुनैना ने अपने खिलाफ दायर सभी FIR को रद्द करते हुए गिरफ़्तारी से अंतरिम राहत की माँग की थी।

अक्टूबर 30, 2020 को कोर्ट ने सुनैना को आदेश दिया था कि वो पुलिस के समक्ष पेश हों और जाँच में सहयोग करें। कोर्ट ने कहा था कि इन दिनों पुलिसकर्मियों का काम काफी कठिन हो गया है, हड़ताल और प्रदर्शनों के लिए विशेष तैयारियाँ करनी पड़ती हैं। जस्टिस शिंदे ने पुलिसकर्मियों द्वारा 12 घंटे काम करने को लेकर कहा था कि पूरी दुनिया में ‘स्कॉटलैंड यार्ड’ के बाद मुंबई पुलिस को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

सरकारी वकील ने कोर्ट से मिन्नतें की कि आरोपित को पूरी तरह नहीं छोड़ा जाना चाहिए, कुछ कार्रवाई ज़रूर की जानी चाहिए। पीठ ने कहा कि हम जजों को कहा जाता है कि टीवी और ट्विटर न देखने को, ताकि हम एकदम फ्रेश दिमाग लेकर कोर्ट में सुनवाई के लिए आएँ। कोर्ट ने कहा कि हमने एक लोकतांत्रिक संरचना अपनाया है। अब सभी की नजरें 3 दिसंबर को होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।

इससे पहले महाराष्ट्र सरकार की आलोचना करने वाले अपने फेसबुक पोस्ट की वजह से मुंबई के कमाठीपुरा के रहने वाले बालकृष्ण दीकोंडा (Balakrishna Deekonda) मुसीबत में पड़ गए थे। मुख्यमंत्री और राज्य सरकार ने उन्हें सीएम और उनकी सरकार की प्रतिष्ठा को खराब करने का आरोप लगाते हुए एक वैधानिक नोटिस भेजा था। उद्धव की तुलना धृतराष्ट्र से और अदित्य ठाकरे को पेंगुइन कहने पर 10 लाख रुपए के मानहानि का मुकदमा ठोका गया था।

गैंग्स ऑफ वासेपुर में डेफिनिट बनने वाले जीशान कादरी के खिलाफ FIR, ₹1.25 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला

कई बॉलीवुड फिल्मों के स्क्रीन राइटर जीशान कादरी के ख़िलाफ़ 1.25 करोड़ रुपए की हेरा-फेरी के मामले में मुकदमा दर्ज हुआ है। जीशान ने गैंग्स ऑफ वासेपुर-2 में बतौर एक्टर ‘डेफिनिट’ का किरदार निभाया था। उनके ख़िलाफ अंधेरी के अंबोली पुलिस थाने में शिकायत दर्ज हुई है। इसमें कहा गया कि जीशान की कंपनी ‘फ्राइडे टू फ्राइडे एंटरमेंट’ ने करोड़ों रुपयों का घपला किया।

रिजवान सिद्दकी नामक वकील ने कल अपने ट्विटर पर बताया कि जीशान के ख़िलाफ़ 420, 406 के तहत धोखाधड़ी और विश्वास उल्लंघन का मामला दर्ज हुआ है। इस शिकायत को उनके क्लाइंट जतिन सेठी ने दर्ज करवाया है।

अब आगे इस मामले में पड़ताल चल रही है। हो सकता है इस शिकायत में डायरेक्टर प्रियंका बस्सी का नाम भी जोड़ा जाए, क्योंकि वह भी इस घोटाले में शामिल थीं। अपने अगले ट्वीट में उन्होंने एफआईआर शेयर करते हुए यह भी बताया कि जीशान के ख़िलाफ़ 1.25 करोड़ रुपए की हेराफेरी के मामले में केस दर्ज करवाया गया है।

मामले की जानकारी देते हुए शिकायतकर्ता जतिन सेठी ने बताया कि उनकी कंपनी नाद फिल्म्स प्रोडक्शन हाउस और जीशान कादरी की कंपनी में पैसे की यह डील एक वेब सीरीज को लेकर हुई थी। लेकिन जीशान कादरी ने उस वेब सीरीज में यह पैसा इन्वेस्ट ही नहीं किया।

यहाँ बता दें कि जीशान कादरी ने गैंग्स ऑफ वासेपुर, छलांग और हलचल जैसी बॉलीवुड फिल्मों की पटकथाएँ लिखी हैं। इससे पहले गैंग्स ऑफ वासेपुर के एक सीन में एक सड़क चलती लड़की का अपहरण हिंदू युवकों द्वारा दिखाए जाने पर सोशल मीडिया यूजर्स ने जीशान की आलोचना करना शुरू किया था। उनके साथ अनुराग कश्यप पर भी लोगों ने हिंदू घृणा फैलाने का आरोप लगाया था। लोगों ने फिल्म में दर्शायी सामग्री को भी गलत तरह से पेश करने के लिए जीशान को लताड़ा था।

‘मोदी चला रहे 2002 का चैनल और योगी हैं प्यार के दुश्मन’: हिंदुत्व विरोधियों के हाथ में है Swiggy का प्रबंधन व रणनीति

भारत की सबसे बड़ी फूड डिलीवरी कंपनी Swiggy के सोशल मीडिया हैंडल्स से कुछ ऐसी चीजें लिखी गईं, जिससे उसका मोदी विरोध साफ़ नजर आता है। विजय पटेल नामक ट्विटर यूजर ने खुलासा किया है कि Swiggy के पीछे एक ऐसी मार्केटिंग कंपनी है, जिसमें मोदीफोबिक लोग भरे पड़े हैं। उन्होंने बताया कि ‘Dentsu Webchutney‘ नामक कंपनी ही Swiggy की मार्केटिंग रणनीति तैयार करती है।

इस ‘Dentsu Webchutney‘ के चेयरमैन हैं सिद्धार्थ राव, जिनके दो स्क्रीनशॉट्स शेयर कर के विजय पटेल ने उनके हिंदुत्व विरोध को सामने लाया। उन्होंने प्रोपेगंडा पोर्टल AltNews के संपादक प्रतीक सिन्हा के उस ट्वीट को लाइक किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि सभी चीजें बदल जाती हैं, लेकिन ठीक से काम न करने वाला धर्म एकमात्र ऐसा सिस्टम है, जिसे बदला नहीं जा सकता। प्रतीक सिन्हा और उसका AltNews फेक न्यूज़ फैलाने में मास्टर है।

साथ ही सिद्धार्थ राव ने ‘राष्ट्रीय कामधेनु आयोग’ के अध्यक्ष के उस बयान का भी मजाक उड़ाया था, जिसमें उन्होंने गाय के गोबर को एंटी-रेडिएशन और और रोग-प्रतिरोधी बताया था। जब फिल्म निर्देशक अनुभव सिन्हा ने लिखा था कि ‘कुछ दिनों से कोई धर्म खतरे में नहीं है। सब ठीक है ना?‘, तो सिद्धार्थ ने इस ट्वीट को रीट्वीट किया। अब इसके बाद पटेल ने कम्पनी के क्रिएटिव टीम का हिस्सा संकेत के वैचारिक झुकाव का खुलासा किया।

जब पीएम मोदी ने एक सप्ताह तक भारत को कोरोना मुक्त करने का अभियान चलाया तो संकेत ने पूछा कि फिर ‘भक्त’ कहाँ जाएँगे? बता दें कि मोदी समर्थकों के लिए लिबरल गिरोह ‘भक्त’ शब्द का इस्तेमाल करता है। साथ ही ‘श्रीराम जन्मभूमि निर्माण क्षेत्र’ ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास जब कोरोना पॉजिटिव हुए थे, तब संकेत ने ‘गो कोरोना गो’ लिख कर उनका मजाक बनाया। जब पीएम मोदी की रिमोट से किसी योजना के उद्घाटन की तस्वीर सामने आई थी, तब संकेत ने पूछा था कि ‘चैनल नंबर 2002’ पर क्या चल रहा है?

कई लिबरल पत्रकार अभी भी 2002 गुजरात दंगों में पीएम मोदी का नाम घसीटते हैं। साथ ही संकेत ने ये भी लिखा था कि पीएम मोदी ‘जुडिशरी के चैनल’ को म्यूट कर रहे हैं। साथ ही उसने पीएम मोदी के लिए ‘खाली कुकर’ शब्द का इस्तेमाल किया था। योग करते हुए पीएम मोदी की तस्वीर पर ‘उमराव जान’ भी लिखा। उसने एक ट्वीट को रीट्वीट किया, जिसमें कहा गया था कि पीएम मोदी ने एक बार अपने हाथों से ट्रेन खींच दी थी।

जब Swiggy की तरफ से ‘किसान आंदोलन’ पर मोदी समर्थकों का मजाक उड़ाया गया था, तब कम्पनी के कार्तिक ने पूछा था कि अब कौन केंद्रीय मंत्री सबसे पहले बॉयकॉट की अपील करेगा? कंटेंट क्रिएटर प्रज्ञा सरीन और संकेत ने अपनी पोल खुलने के बाद अपने एकाउंट्स लॉक कर लिए। इसके बाद कंपनी ने भी अपना ट्विटर हैंडल लॉक कर लिया और अपनी इंस्टा प्रोफाइल्स को प्राइवेट कर लिया।

इतना ही नहीं, Swiggy के फ़ाउंडिंग मेंबर राहुल जैमिनी भी राहुल गाँधी की प्रशंसा वाले ट्वीट्स किए और योगी आदित्यनाथ का अपमान करने वाले कार्टून की तस्वीर को भी लाइक किया, जिसमें उन्हें ‘प्यार का दुश्मन’ बताया गया था। वो सलिल त्रिपाठी और प्रतीक सिन्हा के ट्वीट्स लाइक करते रहे हैं। अब ये भी सामने आ रहा है कि ‘Dentsu Webchutney‘ कम्पनी राहुल गाँधी की छवि चमकाने के लिए भी हायर की गई थी।

एक खबर आई थी कि लोकसभा चुनाव 2019 से पहले राहुल गाँधी की छवि चमकाने के लिए जापान के एडवर्टाइजिंग फर्म ‘Dentsu‘ को हायर किया गया है। साथ ही इसके लिए 500 करोड़ रुपए खर्च करने की खबर भी आई थी। शॉर्ट फिल्मों और प्रिंट प्रचार सामग्रियों का प्रयोग कर के ऐसा किए जाने की योजना थी। इन सबसे साफ़ है कि Swiggy का पूरा प्रबंधन और मार्केटिंग मोदी विरोधियों के हाथ में है।

अप्रैल 2019 में बेंगलुरु में Swiggy की अजीबोगरीब माफी का मामला सामने आया था। ऑन-डिमांड खाना पहुँचाने वाली कंपनी Swiggy के डिलीवरी एजेंट पे एक महिला को गाली देने का आरोप लगा था और साथ ही अश्लील और अभद्र आचरण करने का भी आरोप लगा था। महिला का आरोप था कि शिकायत करने पर कंपनी ने उसे एक “Sorry” नोट और ₹200 का कूपन दे कर मामला रफा-दफा करने का प्रयास किया।

इस्लाम और उर्दू की शिक्षा के लिए अब्बा भेजते थे मदरसा, अच्छा नहीं लगता था… इसलिए मुंबई भागा: 14 साल के बच्चे की कहानी

दिल्ली के जामिया नगर से सितंबर में गायब हुआ 14 साल का बच्चा मुंबई से बरामद कर लिया गया है। दिल्ली पुलिस ने 1 दिसंबर 2020 को प्रेस रिलीज जारी करके यह सूचना दी। इस रिलीज में बताया गया कि बच्चे के माता-पिता उस पर मदरसा जाने का दबाव बनाते थे, इसलिए उसने घर छोड़ा और अब वह मुंबई में जाकर मिला है।

पुलिस के मुताबिक 14 साल के बच्चे की गुमशुदगी की रिपोर्ट 27 सितंबर को दर्ज की गई थी। इस केस को आईपीसी की धारा 363 के तहत दर्ज किया गया था। इसके बाद एसआई जनक सिंह और एचसी रावत को इस केस की जिम्मेदारी सौंपी गई और कुछ ही समय में उन्होंने गायब लड़के के दोस्तों से उसकी जानकारी जुटाई। इस बीच बच्चे के माता-पिता से बात की गई और अंतत: बच्चे को ढूँढ लिया गया।

आगे की पड़ताल में पुलिस ने पाया कि बच्चे के माता-पिता उसे मदरसा पढ़ाई करने के लिए भेजना चाहते थे लेकिन उसको वो जगह पसंद नहीं थी। उसे जबरन वहाँ भेजा जाता था। एक दिन उसने क्लास को छोड़कर भागने का प्लान बनाया और मुंबई निकल गया। जहाँ वह घुमक्कड़ों की तरह घूमने लगा। इसके बाद AHTU (Anti-Human Trafficking Unit) टीम ने उसे ढूँढा और पिता पुत्र की काउंसिलिंग के बाद उसे उसके परिवार को सौंप दिया गया।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस उपायुक्त राजेन्द्र प्रसाद मीणा ने बताया कि 27 सितंबर को जब किशोर के लापता होने की शिकायत पुलिस को दी गई, तो उन्होंने यह जानकारी दक्षिणी दिल्ली की एएचटीयू टीम से साझा की। इसके बाद इस केस के लिए टीम गठित हुई और टीम ने सीसीटीवी और करीबियों से पूछताछ कर किशोर को मुंबई से बरामद कर लिया।

किशोर ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि उसके अब्बा उसे जबरदस्ती इस्लाम और उर्दू की शिक्षा के लिए मदरसे भेजता था, जबकि उसे मदरसा जाना अच्छा नहीं लगता था। इसी कारण से वह एक दिन क्लास के लिए निकला और घर वापस नहीं गया। इसके बाद वह ट्रेन में बैठकर मुंबई चला गया। मुंबई जाने के लिए उसने घर से रुपए लेकर रिजर्वेशन पहले ही करा लिया था। किशोर मुंबई में एक दुकान में काम कर रहा था।

दुर्घटना में घायल पिता के लिए ‘नजदीकी’ अखिलेश यादव से मदद की गुहार… लेकिन आगे आई योगी सरकार

उत्तर प्रदेश में दुर्घटनाग्रस्त एक व्यक्ति की बेटी ने मदद के लिए गुहार तो लगाई अखिलेश यादव से, लेकिन मदद के लिए योगी आदित्यनाथ की सरकार आगे आई। दरअसल, प्रतीक्षा यादव प्रीत के पिता सड़क दुर्घटना में बुरी तरह घायल हो गए थे। उन्होंने अखिलेश यादव से गुहार लगाई कि उनके ही क्षेत्र (सैफई से मात्र 7 किलोमीटर दूर स्थित करहाल) में एक अदद चिकित्सक की व्यवस्था नहीं हो पाई, जिससे उनके दुर्घटनाग्रस्त पिता का इलाज हो पाए। उन्होंने बताया कि उनके पिता पूरे दिन बदहाल स्थिति में रहे।

प्रतीक्षा ने बताया कि उनके पिता की इतनी बुरी स्थिति है कि आगरा ले जाया जा रहा है, स्थानीय डॉक्टर लगभग जवाब दे चुके हैं। उन्होंने अखिलेश यादव से गुहार लगाई कि वो उनकी आर्थिक मदद भी करें और आगरा के डॉक्टर आरसी मिश्रा से भी संपर्क करें, ताकि उनके पिता का ठीक से इलाज चल सके। अखिलेश यादव या समाजवादी पार्टी द्वारा पीड़ित परिवार की सुध लेना तो दूर, किसी ने उनके ट्वीट पर रिप्लाई तक देने की जहमत नहीं उठाई।

ऐसे समय में योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने पीड़ित परिवार से संपर्क किया और उनकी मदद की। उनसे वार्ता के बाद उन्होंने आगरा के जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह को पूरे मामले की जानकारी दी और साथ ही CMO की तरफ से उन्हें यथासंभव मदद के लिए निर्देश दिया गया। शलभ मणि त्रिपाठी ने लिखा, “हम सब की यही कामना है कि आपके पिताजी जल्द स्वस्थ हों।” लोगों ने उनके इस कदम के लिए उनकी तारीफ की।

आगरा प्रशासन की तरफ से बताया गया है कि ‘रेनबो हॉस्पिटल’ के राकेश आहूजा ने मरीज की स्थिति के बारे में जानकारी दी है और साथ ही आश्वासन दिया है कि उनके इलाज के लिए डॉक्टरों की टीम पूरी कोशिश करेगी। उन्होंने हर प्रकार की मदद और डॉक्टरों द्वारा देखभाल का आश्वासन दिया। आगरा के डीएम ने कहा कि हम उनके जल्द ठीक होने की कामना करते हैं। प्रतीक्षा ने इससे पहले अखिलेश यादव के लगभग हर ट्वीट पर मदद माँगी और कहा था कि नेताजी (मुलायम सिंह) की सैफई के हर घर में पूजा होती है।

बता दें कि सपा के शीर्ष यादव परिवार का गृह ग्राम सैफई ही है, जो मुलायम सिंह यादव की कर्मभूमि भी रही है। ये गाँव जसवंत नगर विधानसभा और मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र में पड़ता है, जहाँ से मुलायम सिंह जीतते रहे हैं। यहाँ से मुलायम सिंह अब तक 7 बार और उनके भाई शिवपाल यादव 5 बार विधायक बन चुके हैं। मैनपुरी से भी मुलायम 5 बार सांसद रह चुके हैं। ऐसे में ये पूरा इलाका पिछले 5 दशक से उनका गढ़ रहा है।

इसी तरह एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें देखा जा सकता था कि बुलंदशहर में कुछ दुकानदार खुलेआम पटाखे बेच रहे थे, जिन पर खुर्जा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 6 दुकानदारों को हिरासत में लिया और पटाखे जब्त कर लिए। इस दौरान एक बच्ची पुलिस से अपने पिता को छोड़ने की गुहार लगाती रही। योगी सरकार ने तुरंत हरकत में आकर न सिर्फ पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की, बल्कि अधिकारीगण बच्ची के घर पहुँचे और उन्हें सहायता मुहैया कराई।

Nivar के बाद अब Burevi: इस साल का चौथा चक्रवाती तूफान, तमिलनाडु-केरल में अलर्ट

बंगाल की खाड़ी में हवा का दबाव बढ़ने की वजह से तमिलनाडु और पुडुचेरी में चक्रवात ‘निवार’ (Cyclone Nivar) का खतरा पिछले सप्ताह रहा, बहुत हद तक जन-जीवन को भी अस्त-व्यस्त किया। अब जबकि निवार गुजर गया है तो उसके एक हफ्ते बाद एक और चक्रवाती तूफान की चेतावनी दी गई है। इसका नाम है – Cyclone Burevi (चक्रवाती तूफान बुरेवी)

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD: India Meteorological Department) ने बताया कि मंगलवार की देर रात (1-2 दिसंबर की रात) चक्रवाती तूफान ‘बुरेवी’ त्रिंकोमाली के निकट श्रीलंका के तट से गुजर सकती है। यह 3 दिसंबर की सुबह तक बढ़ते हुए मन्नार की खाड़ी और आसपास के कोमोरिन इलाके में पहुँच जाएगी।

4 दिसंबर की सुबह तक Cyclone Burevi (चक्रवाती तूफान बुरेवी) पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम की ओर बढ़ते हुए तमिलनाडु के दक्षिण तट को पार करेगा। 4 दिसंबर को ही यह सुबह के आस-पास कन्याकुमारी और पंबन के बीच तबाही मचा सकता है।

मौसम विभाग का अनुमान और चेतावनी

Cyclone Burevi (चक्रवाती तूफान बुरेवी) को लेकर भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि 2-3 दिसंबर को इसकी शुरुआती रफ्तार 75 से 85 किलोमीटर प्रति घंटे की रह सकती है। 2-3 दिसंबर को भारी बारिश से लेकर बहुत भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है। जबकि 4 दिसंबर को यह थोड़ी हल्की होकर भारी बारिश में तब्दील हो सकती है।

मछुआरों को सलाह दी गई है कि वे 1 से 3 दिसंबर तक बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्व इलाके में और दक्षिण-पश्चिम खाड़ी से लेकर पूर्वी श्रीलंका के तट की ओर न जाएँ। मछली पकड़ने की सभी गतिविधियों को बंद करने की सलाह कन्याकुमारी के कलेक्टर ने दी है।

केरल के 4 जिलों में रेड अलर्ट, 3 में ऑरेंज अलर्ट

Cyclone Burevi (चक्रवाती तूफान बुरेवी) के कारण केरल में 2 और 3 दिसंबर को भारी बारिश होने का अनुमान भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने लगाया है। इसको देखते हुए मौसम विभाग ने केरल के 4 जिलों – तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पथनमथिट्टा और अलप्पुझा में रेड अलर्ट भी जारी किया है। इसके अलावा 3 जिलों – कोट्टायम, एर्नाकुलम और इडुक्की जिले में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

Cyclone Burevi (चक्रवाती तूफान बुरेवी) इस साल का चौथा चक्रवाती तूफान है। इससे पहले Cyclone Amphan (चक्रवाती तूफान अम्फान), Cyclone Nisarga (चक्रवाती तूफान निसर्ग) और Cyclone Nivar (चक्रवाती तूफान निवार) भारत में तबाही मचा चुका है।

हैदराबाद निगम चुनाव में हिंदू वोट कट रहे, वोटर कार्ड हैं, लेकिन मतदाता सूची से नाम गायब: मीडिया रिपोर्ट

हैदराबाद में मंगलवार (दिसंबर 1, 2020) को GHMC (ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन) चुनाव संपन्न हुआ। रिजल्ट 4 दिसंबर को घोषित होने वाला है। मगर इस बीच एक बेहद ही चौंकाने वाली बात सामने आ रही है। दरअसल, बताया जा रहा है कि यहाँ पर हिंदू वोटरों का नाम ही लिस्ट से ‘गायब’ कर दिया गया। हालाँकि, इनके पास वोटर कार्ड हैं, लेकिन वोटर लिस्ट में नाम नहीं।

‘जन की बात’ ने अपनी रिपोर्टिंग के जरिए इस बात का दावा किया। ‘जन की बात’ के मुताबिक यह घटना हैदराबाद के सबसे बड़े बूथ जाम बाग 77 डिवीजन का है। वीडियो में स्वाति नाम की एक हिंदू महिला दावा कर रही है कि वोटिंग लिस्ट में उनका नाम नहीं है, जबकि उनके पास वोटर कार्ड है और वो पिछले 20 सालों से वोट डालती आ रही है। इस बार जब वो वोट डालने गई तो लिस्ट से उनका नाम ही गायब था। ऐसा कई हिंदुओं के साथ हुआ। महिला ने बताया कि उनके पति का भी नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है।

वीडियो में एक और शख्स ने दावा किया कि हिंदू वोट कट रहे हैं। पिछले साल 60,000 हिंदू वोट कटे थे। रिपोर्टर प्रदीप भंडारी ने एक लिस्ट दिखाते हुए दावा किया कि इन पर जितने भी नाम हैं, सभी हिंदू हैं। इनमें से किसी का भी नाम वोटर लिस्ट में नहीं था। उन्होंने सवाल किया कि क्या ये चुनाव साजिश या रणनीति है या फिर सिर्फ एक गलती? क्या केसीआर की प्रशासन इस आरोप का जवाब देगी?

जीएचएमसी चुनाव में 1122 प्रत्याशी मैदान में हैं। यह चुनाव सभी दलों के लिए लिटमस टेस्ट की तरह है लेकिन बीजेपी ने पहली बार नगर निकाय चुनाव में सक्रियता दिखाते हुए जोरदार प्रचार किया। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से लेकर केंद्रीय मंत्री अमित शाह, स्मृति इरानी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहाँ चुनाव प्रचार किया।

एक समय तेलंगाना की राजनीति में शक्तिशाली रही तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) भी एक बार फिर खोई जमीन वापस लेने की कोशिश के तहत मैदान में उतरी है। पार्टी नेताओं ने अविभाजित आंध्रप्रदेश में एन चंद्रबाबू नायडू के मुख्यमंत्री रहते शहर के विकास के लिए किए गए कार्यों का हवाला दिया।

हैदराबाद नगर निगम चुनाव में कॉन्ग्रेस की ओर से तेलंगाना प्रदेश अध्यक्ष एन उत्तम कुमार रेड्डी और कार्यकारी अध्यक्ष ए रेवंत रेड्डी व अन्य वरिष्ठ नेताओं ने प्रचार किया। पिछले चुनाव में कॉन्ग्रेस को सिर्फ 2 वार्ड में जीत मिली थी।

निकाय चुनाव के लिए प्रचार करते हुए यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक नई बहस छेड़ी थी। योगी बोले, “कुछ लोग मुझसे पूछ रहे हैं कि अगर हैदराबाद का नाम बदलकर भाग्यनगर किया जा सकता है? मैंने कहा कि क्यों नहीं। मैं उनसे कहा कि उत्तर प्रदेश में सत्ता हासिल करने के बाद जब हमने फैजाबाद का नाम अयोध्या और इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किया तो फिर हैदराबाद का नाम बदलकर भाग्यनगर क्यों नहीं हो सकता है?”