Home Blog Page 4264

केजरीवाल बॉर्डर पर, CM हाउस पर धरना: पार्षदों ने कहा- निगमों का ₹13,000 करोड़ दो, नहीं तो हड़ताल करेंगे सफाईकर्मी

केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली को घेरे बैठे ‘किसानों’ के समर्थन और सेवा में आम आदमी पार्टी (AAP) कोई कसर नहीं छोड़ रही है। खुद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपनी पूरी कैबिनेट के साथ सिंघु बॉर्डर पर किसानों से मिलने पहुँचे थे। दिलचस्प बात यह है दिल्ली के मुख्यमंत्री के घर के बाहर दिल्ली नगर निगम के पार्षद धरने पर बैठे हैं।

इनकी माँग है कि नगर निगमों के 13000 करोड़ रुपए की बकाया राशि चुकाई जाए। लेकिन, मुख्यमंत्री इनसे मुँह फेर कर किसान आंदोलन में पहुँच गए। अब पार्षदों व धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि जब तक उनकी सुनवाई नहीं होगी, वे कहीं नहीं जाएँगे।

भाजपा दिल्ली के ट्विटर अकाउंट पर धरने का वीडियो शेयर करते हुए लिखा गया है, “नगर निगम दिल्ली के 13,000 करोड़ रुपए की बकाया राशि न देने पर, आज, मुख्यमंत्री निवास स्थान पर केजरीवाल सरकार के ख़िलाफ़ तीनों निगम के पार्षदों द्वारा धरना प्रदर्शन जारी है।”

अगले ट्वीट में लिखा गया, “अपनी नाकामियों का ठीकरा दिल्ली सरकार दूसरे राज्यों पर फोड़ती आई है और अब नगर निगम, जो दिल्लीवासियों के लिए वास्तव में काम करती है, उसे भी पंगु बनाने में जुटी हुई है। मुख्यमंत्री जी शर्म करो, निगम का बकाया पैसा जारी करो।”

इसी क्रम में अगले ट्वीट में कहा गया, “केजरीवाल सरकार दलगत राजनीति से ऊपर उठकर दिल्ली के विकास और जन सेवा के लिए निगमों का बकाया 13000 करोड़ रुपए तत्काल प्रभाव से दे। निगमों को पंगु बनाना बंद करे केजरीवाल सरकार।”

शेयर किए गए वीडियो में प्रदर्शनकारियों को कहते सुना जा सकता है कि केजरीवाल सरकार ने उनसे वादा किया था कि सारा बकाया चुकाया जाएगा और उनसे यह भी कहा गया था कि वह लोग उनसे आकर कभी भी मिल सकते हैं। प्रदर्शनकारी कहते हैं कि आज सुबह जब वे मुख्यमंत्री से मिलने आए तो कहा गया कि वह उनसे मिलेंगे, लेकिन थोड़ी देर बाद सीएम बिन कुछ कहे और बिना उनसे मिले चले गए।

अब मुख्यमंत्री का रवैया देखकर प्रदर्शन पर बैठे लोगों का कहना है कि वह उनके आवास पर बैठे हैं और जब सीएम वापस आएँगे तब वह पहले उनसे बात करेंगे और तभी उनको अंदर जाने दिया जाएगा। प्रदर्शनकारी कहते हैं, “उन्होंने अगर हमारा पैसा क्लियर किया तो हम यहाँ से जाएँगे, वरना सभी सफाई कर्मचारी हड़ताल पर जाने को तैयार हैं। यदि दिल्ली में कोरोना की चौथी लहर आई तो उसके जिम्मेदार भी मुख्यमंत्री ही होंगे।”

प्रदर्शनकारी बताते हैं, “ये पैसा कोई हमारा नहीं है। ये राज्य वित्त आयोग जिसका गठन राज्य सरकार ने किया है, उसकी सिफारिश के अनुसार तीनों नगर निगम का पैसा 13,500 करोड़ रुपया नगर निगम को दिल्ली सरकार से लेना है।”

उल्लेखनीय है कि अपने आवास पर निगम पार्षदों की सुनवाई करने की बजाय दिल्ली मुख्यमंत्री केजरीवाल ने थोड़ी देर पहले अपने ट्विटर पर किसान प्रदर्शन की वीडियो शेयर की है। इस वीडियो में वह कहते नजर आ रहे हैं कि किसानों की माँग बिलकुल जायज है और उनकी पार्टी शुरू से इस संघर्ष में साथ हैं।

वह कहते हैं कि शुरू-शुरू में जब किसान बॉर्डर पर आए तो केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस ने उनसे 9 स्टेडियम माँगे। बहुत दबाव बनाया गया ताकि किसान दिल्ली आए और उन्हें पकड़कर स्टेडियम में डाल दिया जाए, लेकिन उनकी सरकार ने परमिशन नहीं दी और इससे आंदोलन को बढ़ने में मदद मिली। इसके बाद से उनकी पार्टी से जुड़े सभी लोग सेवादार की तरह किसानों की सेवा करने में लगे हैं। वह कहते हैं कि वह आज भी प्रोटेस्ट में बतौर सेवादार ही पहुँचे हैं।

ममता बनर्जी ने बंगाल में 2014 में ही लागू कर दिया था एग्रीकल्चर मार्केटिंग एक्ट, अब मोदी सरकार के कृषि कानूनों का कर रहीं विरोध

जहाँ एक तरफ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी केंद्र के कृषि कानूनों का विरोध करते हुए किसानों के आंदोलन के समर्थन की बातें कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने अपने राज्य में इससे मिलता-जुलता एक कानून 2014 में ही पारित कर लिया था। ममता बनर्जी की सरकार ने पश्चिम बंगाल में ‘एग्रीकल्चर मार्केटिंग बिल’ विधानसभा में पास कराया था। अब वो मोदी सरकार के नए कृषि कानूनों का विरोध कर रही हैं।

ममता बनर्जी ने कहा है कि केंद्र की भाजपा सरकार को या तो कृषि कानूनों को वापस ले लेना चाहिए, या फिर इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने डेरेक ओ ब्रायन सहित तृणमूल कॉन्ग्रेस के अपने कुछ वफादार नेताओं को सिंघु सीमा पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के पास भेजा भी और प्रदर्शनकारी नेताओं से बातचीत की। इस दौरान योगेंद्र यादव भी देखे गए। मंगलवार (दिसंबर 8, 2020) को किसान संगठनों ने ‘भारत बंद’ का आह्वान कर रखा है जिसे कई राजनीतिक दलों ने भी समर्थन दिया है।

मोदी सरकार के नए कृषि कानूनों से किसानों को अपने उत्पाद कहीं भी भेजने की छूट मिलती है, साथ ही ‘कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग’ की स्थिति में प्राइवेट कंपनियों की मनमानी पर भी लगाम लगती है। इसमें क्षति की स्थिति में खरीददार पर ही सारी जिम्मेदारी डाल दी गई है और किसान इन सबसे मुक्त है। रुपए के भुगतान के लिए समयसीमा भी दी गई है। बावजूद इसके भ्रम फैला कर किसानों को बरगलाया जा रहा है।

पश्चिम बंगाल सरकार ने 2014 में जो ‘एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केटिंग (रेगुलेशन) बिल’ पास कराया था, दावा किया गया था कि इससे किसानों को अपने उत्पादों के उचित दाम मिलेंगे। ममता बनर्जी सरकार ने कहा था कि बिचौलियों की गतिविधियों को रोकने के लिए ऐसा किया गया है। साथ ही कहा था कि बिचौलियों से निपटने के कड़े कदम उठाए जा रहे हैं और उनसे निपटने में ये कानून सहायक सिद्ध होगा।

आज जब मोदी सरकार यही कर रही है तो ममता बनर्जी सहित पूरे विपक्ष को दिक्कत है। पश्चिम बंगाल के उस कानून के अनुसार, इससे किसानों की पहुँच एक नए बाजार तक होगी और वो सीधे उपयोगकर्ताओं तक अपने उत्पाद बेच सकेंगे। ग्राहकों और किसानों, इसे दोनों के लिए सरकार ने लाभदायक बताया था। साथ ही कहा गया था कि दोनों को ज्यादा भरोसेमंद सिस्टम का हिस्सा बनाना राजकोष के लिए भी अच्छा होगा।

ठीक इसी तरह, NCP के संस्थापक-अध्यक्ष शरद पवार आज ‘किसानों’ के आंदोलन को समर्थन देते हुए कृषि कानूनों पर मोदी सरकार को घेर रहे हैं। शरद पवार यूपीए सरकार में लगातार 10 वर्षों तक केंद्रीय कृषि मंत्री थे और तब वो इन्हीं कृषि सुधारों की पैरवी कर रहे थे, जिनके विरोध में आज वो खड़े हैं। उन्होंने APMC सुधारों को लेकर मुख्यमंत्रियों को पत्र भी लिखा था। उन्होंने तब इन सबके लिए प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी पर जोर दिया था, जबकि आज ये भ्रम फैलाया जा रहा है कि प्राइवेट सेक्टर किसानों की जमीनें ले लेंगे और उन्हें रुपए नहीं देंगे।

बंगाल: BJP नेता कबीर बोस की कार पर हमला, 100 से ज्यादा TMC नेताओं ने घेरा हुआ है घर, सुरक्षाकर्मी को भी पीटा गया

पश्चिम बंगाल में ममता सरकार की पुलिस ने भाजपा से जुड़े लोगों के ख़िलाफ़ अपनी कार्रवाई जारी कर रखी हुई है। सोमवार (दिसंबर 7, 2020) को राज्यसभा सांसद स्वप्न दासगुप्ता ने बताया कि भाजपा प्रवक्ता कबीर शंकर बोस को उनके घर में हाउस अरेस्ट कर लिया गया और टीएमसी के कार्यकर्ता उन्हें घर से बाहर निकलने नहीं दे रहे।

स्वप्नदास गुप्ता ने अपने ट्वीट में लिखा,

“पश्चिम बंगाल के भाजपा प्रवक्ता और वकील कबीर शंकर बोस को उनके सेरामपोर के फ्लैट में बंद करके रखा गया है। टीएमसी पुलिस के साथ मिल कर किसी को घर में उनके घुसने या बाहर निकलने से रोक रही है। उनकी कार को क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। क्या कानून व्यवस्था बंगाल में पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।”

इसके अलावा ऑपइंडिया से बात करते हुए कबीर शंकर ने स्वयं अपनी स्थिति बताई। उन्होंने कहा कि लगभग 100 से ज्यादा टीएमसी कार्यकर्ता  उनके घर के बाहर खड़े हैं और उन्हें अंदर बंद किया हुआ है। वह कहते हैं, “पुलिस बिलकुल मेरे घर के बाहर है। उन्होंने मेरी आवाजाही बंद कर दी है। किसी को अंदर आने नहीं दिया जा रहा है। वह मुझे खाना और दवाई भी नहीं लेने दे रहे। यहाँ कुछ भी हो सकता है। मुझे नहीं पता ये क्या चल रहा है। कल्याण बनर्जी हमसे डर गए हैं।”

TMC के गुंडों ने तोड़ी भाजपा प्रवक्ता कबीर की गाड़ी, सुरक्षाकर्मी को भी मारा

बता दें कि डीएनएन न्यूज ने भाजपा नेता के सुरक्षाकर्मियों से टीएमसी की झड़प की वीडियो साझा की है। ये वीडियो उस समय की है जब भाजपा नेता कबीर शंकर बोस अपनी कार को निकाल रहे थे। इस वीडियो में हम देख सकते हैं कि दो समूह आपस में लड़ रहे हैं और धक्कामुक्की कर रहे हैं। वीडियो में हम भाजपा नेता की कार को क्षतिग्रस्त हुए भी देख सकते हैं और कार के शीशों को भी टूटा हुआ साफ देख सकते हैं।

कबीर कहते हैं,

“जब मैं अपने घर से बाहर निकला तो मैंने कई टीएमसी कार्यकर्ताओं और स्थानीयों को घर के बाहर बैरीकेडिंग किए देखा। टीएमसी पार्षद पप्पू सिंह जो वहाँ मौजूद थे उन्होंने मुझे आगे जाने से रोका। मेरे सुरक्षाकर्मियों ने उनसे विनती की कि हमें बाहर जाना है, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। जब टीएमसी के लोगों ने मेरे आदमी पर हमला किया तो उसे आत्मरक्षा में जवाब देना पड़ा। मेरी कार और मेरे सुरक्षाकर्मी पर हमला हुआ। ऐसे हिंसक हमले भाजपा को नहीं रोक सकते। ”

स्थानीय सांसद कल्याण बनर्जी भी इस बीच टीएमसी समर्थकों के साथ मौके पर पहुँचे। उन्होंने कबीर के आवास के बाहर नारेबाजी की। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने भाजपा नेता को ‘गुंडा’ कहा, जिन्हें स्वयं राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने गुंडागर्दी के लिए भेजा है।

कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाते हुए कहा, “मैं जगदीप धनखड़ को बताना चाहता हूँ कि वो सेरामपोर में शांति नहीं भंग कर सकते हैं। ये सब उनका प्लान था। उनके संबंध अपराधियों से हैं।” पूरी झड़प पर सफाई पेश करते हुए कल्याण बनर्जी ने पास खड़ी महिला पर इशारा करते हुए कहा कि भाजपा नेता और उनके सुरक्षाकर्मी ने उसे प्रताड़ित किया। इतना ही नहीं बनर्जी ने अमित शाह को दंगाई भी कहा।

याद दिला दें कि इससे पहले शनिवार (दिसंबर 5, 2020) को भाजपा की रैली पर टीएमसी के गुंडों ने हमला किया था। एक वीडियो सामने आई थी जिसमें हवा में धुआँ उड़ता दिखा था। भाजपा राष्ट्रीय सचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था कि बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले आम हो गए हैं और ऐसे अटैक ममता बनर्जी की ओर से करवाए जाते हैं।

संसद भवन की नई बिल्डिंग के भूमिपूजन से TMC को आपत्ति, कहा- यह सिकुलर नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 दिसंबर 2020 को नए संसद भवन का भूमि पूजन करेंगे। इसकी घोषणा होने के साथ ही विपक्ष की ’धर्मनिरपेक्ष’ ताकतें इस कदम को ‘गैर-धर्मनिरपेक्ष’ साबित करने की कोशिश में जुट गई है।

टाइम्स नाउ के रिपोर्ट के अनुसार, “टीएमसी नए संसद भवन के निर्माण से पहले भूमि पूजन समारोह का विरोध करती है। यह कदम ‘धर्मनिरपेक्ष नहीं’ है। अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने भी सरकार की ‘प्राथमिकताओं’ पर सवाल उठाया है।” तृणमूल कॉन्ग्रेस के अलावा राशिद अल्वी, पीएल पुनिया जैसे कॉन्ग्रेसी और सीपीआई के नेताओं ने भी संविधान के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों का हवाला देते हुए भूमि पूजन के फैसले की आलोचना की है।

तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता, महुआ मोइत्रा ने भी रविवार (दिसंबर 6, 2020) को सरकार के फैसले के बारे में अपनी नाराजगी व्यक्त की थी। एक ट्वीट में उन्होंने दावा किया कि देश के प्रधानमंत्री को ‘धर्मनिरपेक्ष’ ‘बहु-आस्था’ वाले लोकतंत्र में आधारशिला रखना चाहिए, न कि भूमि पूजन करना चाहिए। खुद को ‘संविधान समर्थक’ बताते हुए मोइत्रा ने इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने इस तरफ इशारा किया इसका मतलब यह नहीं कि वे हिंदू विरोधी हैं।

उनके ट्वीट में लिखा था, “एक धर्मनिरपेक्ष बहु-आस्था वाले लोकतंत्र में पीएम को नए संसद भवन की आधारशिला रखनी चाहिए, न कि ‘भूमि पूजा’ करनी चाहिए। मैं इस तरफ इशारा करने के लिए हिंदू विरोधी नहीं हूँ, केवल संविधान समर्थक हूँ।”

10 दिसंबर को नए संसद भवन का भूमि पूजन

शनिवार (दिसंबर 5, 2020) को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने बताया था, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 दिसंबर को नए संसद भवन का भूमि पूजन करेंगे। अक्टूबर 2022 तक निर्माण कार्य पूरा होने की संभावना है। हमारी स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगाँठ पर नई संसद में सत्र आयोजित किया जाएगा।”

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि लोकसभा सदस्यों के लिए लगभग 888 सीटें होंगी और नए भवन में राज्यसभा सदस्यों के लिए 326 सीटें होंगी। नए भवन में 1224 सदस्यों को एक साथ समायोजित करने की क्षमता होगी। बिड़ला ने नए संसद भवन को आत्मनिर्भर भारत का मंदिर बताया, जो राष्ट्र की विविधता को दर्शाएगा।

संविधान की मूल प्रति में भगवान राम

ऐसा अक्सर देखा गया है कि भारत में लेफ्ट-लिबरल गिरोह हर घटना को पश्चिमी धर्मनिरपेक्षता के नजरिए से विश्लेषण करते हुए भारत की सांस्कृतिक बारीकियों और विरासत को समझने में विफल रहा है। भारत के संविधान में भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण का चित्रण है जो लंका में रावण का वध करने के बाद अयोध्या लौट रहे हैं। तस्वीर मौलिक अधिकारों से संबंधित अध्याय की शुरुआत में दिखाई देती है।

अगस्त में राम मंदिर के भूमि पूजन से पहले कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भगवान राम को नमन करते हुए भारतीय संविधान की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की, जिसमें श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण वनवास से वापस अयोध्या के लिए लौट रहे हैं।

अपने ट्वीट में रविशंकर प्रसाद ने लिखा, “भारत के संविधान की मूल प्रति में मौलिक अधिकारों से जुड़े अध्याय के आरम्भ में एक स्केच है जो मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम, माता सीता और भाई लक्ष्मण के रावण पर विजय प्राप्त कर अयोध्या वापसी का है। आज संविधान की इस मूल भावना को आप सभी से शेयर करने का मन हुआ।”

‘2014 के बाद 450 Km मेट्रो लाइन बनकर तैयार, 1000 Km पर काम चालू’: PM मोदी ने आगरा मेट्रो का किया शिलान्यास

जहाँ एक तरफ विपक्षी दल कई मुद्दों पर विरोध प्रदर्शनों में उलझे हुए हैं, मोदी सरकार का विकास कार्य अनवरत जारी है। सोमवार (दिसंबर 7, 2020) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगरा मेट्रो प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया। आगरा के 15वीं वाहिनी पीएसी परेड ग्राउंड में हुए कार्यक्रम को पीएम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सम्बोधित किया। यूपी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की देखरेख में इसका काम शुरू होने वाला है।

26 लाख की जनसंख्या को लाभान्वित करने वाला आगरा मेट्रो रेल 29.4 किलोमीटर लंबा होगा और इसमें दो कॉरिडोर होंगे। ताज ईस्ट गेट से सिकंदरा लगभग 14 किलोमीटर होगा और 13 मेट्रो स्टेशन होंगे। दूसरा कॉरिडोर आगरा कैंट से कालिंदी विहार तक होगा और इसकी लंबाई 15.4 किलोमीटर होगी। इसमें कुल 14 मेट्रो स्टेशन होंगे। हर साल 60 लाख पर्यटक आगरा आते हैं। अब उन्हें भी सुविधा मिलेगी।

आगरा मेट्रो रेल के कॉरिडोर शहर के चार प्रमुख रेलवे स्टेशनों, बस डिपो, कॉलेजों, प्रमुख बाजारों और पर्यटन स्थलों को आपस में जोड़ेंगे। सुबह 11 बजे से शिलान्यास कार्यक्रम शुरू हुआ, जिसे सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आगरा के पास बहुत पुरातन पहचान तो हमेशा रही है। अब इसमें आधुनिकता का नया आयाम जुड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सैंकड़ों वर्षों का इतिहास सँजोए ये शहर अब 21वीं सदी के साथ कदमताल मिलाने के लिए तैयार हो रहा है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि आगरा में स्मार्ट सुविधाएँ विकसित करने के लिए पहले ही लगभग 1,000 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है और पिछले साल जिस कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का शिलान्यास करने का उन्हें मौका मिला था, वो भी अब बन कर तैयार है। उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2014 के बाद के 6 वर्षों में देश में 450 किमी से ज्यादा मेट्रो लाइन देशभर में ऑपरेशनल हैं और लगभग 1000 किमी मेट्रो लाइन पर तेजी से काम चल रहा है।

बकौल पीएम मोदी, जब आप साहस और समर्पण के साथ आगे बढ़ते हैं, तो कोई भी बाधा आपको रोक नही सकती। भारत का सामान्य युवा, भारत के छोटे शहर आज यही साहस और समर्पण दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक सुविधाएँ और कनेक्टीविटी मिलने से पश्चिमी यूपी का ये सामर्थ्य और बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि देश का पहला रैपिड रेल ट्रांसपोर्ट सिस्टम मेरठ से दिल्ली के बीच बन रहा है। पीएम मोदी ने कहा:

“नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन प्रोजेक्ट के तहत 100 लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च करने की तैयारी है। ‘Multi-model Connectivity Infrastructure Master Plan’ पर भी काम किया जा रहा है। कोशिश है कि देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए पूरी दुनिया से निवेश आकर्षित किया जाए। यहाँ की भूमि और किसानों में अपार सामर्थ्य है। पशुधन के मामले में भी ये क्षेत्र देश मे अग्रणी है। ऐसे में यहाँ डेयरी और फ़ूड प्रोसेसिंग से जुड़े उद्योगों के लिए बहुत संभावनाएँ हैं। दो-तीन दिन पहले तेलंगाना में, हैदराबाद में गरीब और मध्यम वर्ग ने सरकार के प्रयासों को अभूतपूर्व आशीर्वाद दिया है। आपका साथ और आपका समर्थन ही मेरी प्रेरणा शक्ति है। देशवासियों की छोटी से छोटी खुशी, मुझे नए-नए काम करने की हिम्मत देती है।”

पीएम ने जनता को आश्वस्त किया कि दिल्ली-मेरठ के बीच 14 लेन का एक्सप्रेस-वे भी जल्द ही इस क्षेत्र के लोगों को सेवा देने लगेगा। उन्होंने कहा कि देश के इंफ्रा सेक्टर की एक बड़ी दिक्कत हमेशा से ये रही थी कि नए प्रोजेक्ट्स की घोषणा तो हो जाती थी लेकिन उसके लिए पैसा कहाँ से आएगा, इस पर बहुत ध्यान नहीं दिया जाता था। उन्होंने बताया कि राजग सरकार ने नई परियोजनाओं की शुरुआत करने के साथ ही, उसके लिए आवश्यक धनराशि के इंतजाम पर ध्यान दिया है।

पीएम ने बताया कि अब एक संपूर्णता की सोच से रिफॉर्म्स किए जा रहे हैं। शहरों के विकास के लिए सरकार ने 4 स्तरों पर काम किया है। बीते समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान हो, जीवन ज्यादा सुगम हो, ज्यादा से ज्यादा निवेश हो और आधुनिक टेक्नॉलॉजी का उपयोग अधिक हो। उन्होंने कहा कि रियल एस्टेट सेक्टर की क्या स्थिति थी, इससे हम भली-भाँति परिचित हैं। घर बनाने वालों और घर खरीदारों के बीच भरोसे की एक खाई आ चुकी थी। कुछ गलत नीयत वाले लोगों ने पूरे रियल एस्टेट को बदनाम करके रखा था।

उन्होंने आगे बताया कि इस परेशानी को दूर करने के लिए RERA का कानून लाया गया। हाल में आई कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस कानून के बाद मिडिल क्लास के घर तेज़ी से पूरे होने शुरू हुए हैं। अमृत मिशन के तहत देश के सैकड़ों शहरों में पानी, सीवर जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड किया जा रहा है। शहरों में सार्वजनिक टॉयलेट्स की बेहतर सुविधाएँ हों, वेस्ट मैनेजमेंट की आधुनिक व्यवस्था हो, इसके लिए स्थानीय निकायों को मदद दी जा रही है।

किसान आंदोलन में #नहीं_चाहिए_भाजपा का ट्रेंड: अखिलेश यादव के घर के बाहर पुलिस, बैरिकेडिंग तोड़ रहे सपाई गुंडे

किसान आंदोलन का राजनीतिकरण करने से इस समय कोई विपक्षी पार्टी नहीं चूक रही। दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेसृ मामले को सुलझाने की बजाय केंद्र सरकार की आलोचना कर रही है और उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने भी किसानों को अपना समर्थन दिखाने के लिए एक यात्रा निकालने का ऐलान किया है। 

समाजवादी पार्टी के इस ऐलान के बाद यूपी पुलिस ने लखनऊ से लेकर कन्नौज तक में हर कोने पर सुरक्षा बढ़ा दी है। वहीं अखिलेश यादव के घर के बाहर घेरा कर दिया गया है, जिसे देखकर सपा कार्यकर्ता लखनऊ में जगह-जगह प्रदर्शन कर रहे हैं और पुलिस की बैरिकेडिंग को भी तोड़ रहे हैं।

लखनऊ के विक्रमादित्य रोड पर स्थित समाजवादी पार्टी के कार्यालय को छावनी में बदल दिया गया है। हर जगह पुलिस के जवान खड़े हैं। अखिलेश यादव के घर के बाहर बैरिकेडिंग है। पुलिस ने किसी को भी यहाँ आने-जाने से मना किया है। 

परिस्थितियों को संभालने के लिए पुलिस ने अपने पास वाटर कैनन भी रखे हैं। इधर, समाजवादी पार्टी के एमएलसी राजपाल कश्यप और आशू मलिक को हिरासत में लिया गया है। दोनों नेताओं पर पुलिस से धक्कामुक्की का आरोप है। दोनों कार्यालय बंद होने के बावजूद उसमें जाने का प्रयास कर रहे थे।

कश्यप ने मीडिया से बात करते हुए सवाल किया है कि आखिर पुलिस उन्हें क्यों रोक रही है? क्यों अखिलेश यादव को रोका जा रहा है? उनका कहना है कि प्रदेश सरकार अखिलेश यादव से घबरा रही है और किसानों की आवाज उठाने पर उनके साथ अन्याय हो रहा है।

यहाँ गौरतलब हो कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आज सुबह किसानों के समर्थन में जनता को यात्रा में शामिल करने के लिए अपने ट्वीट में लिखा था, “कदम-कदम बढ़ाए जा, दंभ का सर झुकाए जा, ये जंग है ज़मीन की, अपनी जान भी लगाए जा… ‘किसान-यात्रा’ में शामिल हों! #नहीं_चाहिए_भाजपा।”

इस ट्वीट के बाद और पुलिस कार्रवाई देखकर सोशल मीडिया पर कई लोग इस पर अपनी राय रख रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि समाजवादियों और किसान में कोई समानता नहीं है, क्योंकि हजारों करोड़ की सरकारी संपत्ति और सरकारी नौकरियों की बंदरबाँट करने वाले किसान नहीं हो सकते। गुंडाराज चलाने वाले किसान कैसे हो सकते हैं? किसानों के नाम पर उनकी जमीन और गौधन लूटने वाली पार्टी और नेता सिर्फ माफिया हो सकते हैं।

बता दें कि उत्तर प्रदेश में साल 2022 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी सत्ता में आने के लिए योगी सरकार की छवि बिगाड़ने में लगातार प्रयासरत है। यही कारण है कि वह अपने ट्वीट में किसानों के समर्थन के साथ #नहीं_चाहिए_भाजपा का हैशटैग लगा रहे हैं।

‘बाबरी मस्जिद… भगवान का घर तोड़ना पाप’ – शब्दों से खेल रही स्वरा भास्कर की हिंदी कमजोर या है पाखंड?

6 दिसंबर का दिन हिंदुओं के लिए शौर्य दिवस और वामपंथियों के लिए ब्लैक डे होता है। हिंदुओं के लिए शौर्य दिवस इसलिए क्योंकि साल 1992 में 6 दिसंबर को ही कारसेवकों ने बिना किसी की परवाह किए राम मंदिर के लिए एक रास्ता प्रशस्त किया था और वामपंथियों के लिए ब्लैक डे इसलिए, क्योंकि वह चाह कर भी इन कारसेवकों को नहीं रोक पाए थे।

6 दिसंबर 1992 का ही परिणाम था कि 5 अगस्त 2020 को राम मंदिर का भूमिपूजन संपन्न हो पाया। यह दिन स्मृतियों से भुला पाना असंभव है। न जाने कितने हिंदू हृदय सम्राट बलिदान हुए, तब जाकर एक सपने का असली नक्शा इस साल तैयार हुआ।

इस साल भूमिपूजन के बाद वामपंथी 6 दिसंबर पर पहले से ज्यादा शोक मनाते दिखे, लेकिन बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर का विलाप एक अलग ही स्तर का था। उनकी जानकारी के मुताबिक बाबरी मस्जिद भगवान का घर होता है और कारसेवकों ने इसे तोड़ कर पाप किया।

स्वरा ने 6 दिसंबर के अवसर पर अपने ट्वीट में लिखा, “चाहे जितनी लीपा पोती कर लो, भगवान का घर… किसी के भी भगवान का घर तोड़ना पाप होता है।”

स्वरा भास्कर का यह ट्वीट किसके लिए है? ये एक बड़ा सवाल होना चाहिए, क्योंकि सदियों पहले भगवान का घर तोड़ा गया, इस बात में कोई संदेह नहीं है। लेकिन, जब उनका ट्वीट भगवान राम के संदर्भ में नहीं है… तो वह किस भगवान की बात कर रही हैं और किस भगवान के घर के लिए अपना रोना रो रही हैं। बाबरी मस्जिद के लिए? जिसकी नींव ही सदियों पहले राम मंदिर के मलबे पर रखी गई थी। 

स्वरा भास्कर की इसी प्रकार की अज्ञानता के कारण पिछले दिनों रुबिका लियाकत ने उन्हें अपने शो में जम कर लताड़ा था और अब उनकी ऐसी बेवकूफियों के कारण उनका दोबारा मजाक उड़ने लगा है। स्वरा भास्कर, अपने चंद फॉलोवर्स को बरकरार रखने के लिए ये जानती हैं कि उन्हें कैसे अपनी बातें बनानी हैं। लेकिन क्या उन्हें बात का अंदाजा है कि वह इस प्रक्रिया में मजहब का घालमेल कर रही हैं।

इस्लाम में मूर्ति पूजन की कोई जगह नहीं है, तो केवल इबादत करने के लिए बनाई गई इमारत भगवान का घर कैसे हो सकती है?

एक ऐसी जगह, जिसके ढाँचे और उसकी भूमि पर विवाद रहा हो और दूसरा समुदाय सबूतों के साथ उस पर अधिकार प्राप्त कर चुका हो, उस पर घड़ियाली आँसू क्यों? मस्जिद और मंदिर जैसे शब्दों का घालमेल कर ट्वीट क्यों?

सेकुलरिज्म के नाम पर बात मस्जिद की लेकिन ‘भगवान’ शब्द का प्रयोग करना स्वरा भास्कर को उचित लग रहा होगा, लेकिन क्या उनके उन फॉलोवर्स को यही बात पचेगी जो, दूसरे धर्म के लोगों को काफिर कहते हैं, काफिरों का सर तन से जुदा करने की कसमें खाते हैं?

शब्दों के उलटफेर से देश के हिंदू को लंबे समय तक भ्रमित किया गया। स्वरा जैसों का प्रयास आज भी वही है कि राम मंदिर बनने के बाद सेकुलर हिंदू उसमें जाए और अपने पूर्वजों के बलिदान के लिए मंदिर में बैठकर अल्लाह से माफी माँगे।

पाखंड की कोई परिभाषा नहीं होती। स्वरा भास्कर इस बात को हर बात सिद्ध कर देती हैं। वह बाबरी मस्जिद पर विलाप कर रही हैं, लेकिन हैरानी इस बात की है कि भगवान और भगवान का घर लिखने वाली कभी उन सैंकड़ों मस्जिद पर अपना ज्ञान नहीं देती हैं, जिन्हें तैयार करने के लिए भारत की विरासत और संस्कृति पर आघात हुआ।

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया दावे करता है कि एक दिन बाबरी का उदय जरूर होगा। इधर स्वरा जैसे लोग हिंदुओं को एहसास दिलाते हैं कि उन्होंने बाबरी मस्जिद को गिरा कर पाप किया। अगर ये सारी चीजें एक दूसरे से जुड़ी नहीं हैं तो क्या है! क्या देश के सेकुलर हिंदू के मन में अपने धर्म के प्रति घृणा भरने का काम नहीं हो रहा है? हिंदुओं को हिंसक दिखाने की कोशिश नहीं चल रही है?

पिछले कुछ सालों में हमें हिंदुओं का कट्टर रूप देखने को जरूर मिला है, लेकिन ये कट्टर चेहरा इसलिए बेहतर है क्योंकि देश में स्वरा जैसे लोग मौजूद हैं, जो अपनी अज्ञानता को सेकुलरिज्म की चादर से ढक रहे हैं और इसका शिकार हो रहा है सामान्य हिंदू।

कम से कम कथित कट्टर हिंदू में गलत के ख़िलाफ़ विरोध करने की क्षमता तो है। उसके पास अपने हक के लिए बोलने के लिए बुलंद आवाज तो है। कॉन्ग्रेस काल में बढ़े हिंदू के पास इनमें से कुछ नहीं था। आज का हिंदू स्वरा भास्कर की भाँति कम से कम दुनिया को बरगला नहीं रहा।

जब समय आने पर देश के मुस्लिम ‘बाबरी याद रहेगी’ का हैशटैग चला सकते हैं तो आखिर हिंदू उस प्रहार को क्यों भूलें जिसमें न केवल उनके मंदिर का विध्वंस किया गया बल्कि पूरे हिंदू धर्म को लक्षित करके हिंदुओं को निशाना बनाया गया। 6 दिंसबर 1992 को केवल चंद हिंदुओं का ज्वार था, जो खुद के प्राण को दाँव पर लगाकर भगवान को छत दिलाने गए थे, उनका उद्देश्य मजहब को निशाना बनाने का नहीं था, अपनी पहचान वापस पाने था।

‘सरकार मेरी सैंडल दिलावे, ये मोदी और पुलिस की साजिश’ – महिला किसान नेता की सैंडल गायब, वीडियो वायरल

दिल्ली और उसके आस-पास के इलाकों में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के दौरान एक अजीबोगरीब वाकया सामने आया है। एक महिला आंदोलनकारी की सैंडल ही चोरी हो गई, जिसके लिए उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार ठहरा दिया। ग्रेटर नोएडा में चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान जब महिला प्रदर्शनकारी नेता की सैंडल गायब हो गई तो उसने कहा कि ये सरकार और पुलिस की साजिश है।

महिला आंदोलनकारी ने अपने परिचय ‘किसान एकता संघ’ नामक संगठन के महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर गीता भाटी के रूप में दिया है। उन्होंने बताया कि पुलिस-प्रशासन और सरकार की ‘साजिश’ के तहत उनके पाँवों की सैंडल छीन ली गई है, ताकि वो आगे की लड़ाई न लड़ सकें। महिला ‘किसान नेता’ ने कहा कि वो नंगे पाँव भी किसानों की लड़ाई लड़ेंगी और सैंडल गायब होने के सम्बन्ध में FIR भी दर्ज करवाएँगी।

महिला प्रदर्शनकारी प्रदर्शनकारी नेता ने कहा, “मैं इन लोगों के खिलाफ लड़ाई लड़ूँगी। किसानों के पास तो आज खाने के लिए भी नहीं हैं। हमने जैसे-तैसे रुपए जमा कर के किसी तरह एक सैंडल खरीदी थी। अब ये सैंडल छीन ली गई है। अब ये सैंडल मुझे कौन देगा? ये सरकार मेरी सैंडल दिलावे।” वहाँ उपस्थित लोगों ने ‘बहुत बढ़िया’ कह कर उनका उत्साहवर्धन किया और ‘गेता भाटी जिंदाबाद’ के नारे लगाए।

कई लोगों ने उनके इस बयान पर चुटकी भी ली। जहाँ दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो से हस्तक्षेप की माँग की, वहीं ‘द स्किन डॉक्टर’ नामक ट्विटर यूजर ने लिखा कि पीएम मोदी इसे ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित कर के संसद सत्र बुला कर सैंडल की व्यवस्था करने की सोच रहे होंगे। वहीं एक व्यक्ति ने तो पीएम मोदी और उनके मंत्रियों से इस्तीफा तक माँग दिया।

उधर राजनेता और पेशेवर प्रदर्शनकारी योगेंद्र यादव पंजाब के किसानों के विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। रविवार (दिसंबर 6, 2020) को एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, योगेंद्र यादव ने कहा कि बंद के दौरान आवश्यक वस्तुओं के वितरण की भी अनुमति नहीं होगी। उन्होंने कहा कि दोपहर 3 बजे तक चक्का जाम रहेगा। किसान संगठनों ने 8 दिसंबर को भारत बंद का आह्वान कर रखा है।

ग्लैमर को इस्लाम विरोधी कह कर भागी सना खान, सोशल मीडिया पर दे रहीं हनीमून की पल-पल की जानकारी

‘बिग बॉस-6’ फेम अभिनेत्री सना खान अपने शौहर मौलाना मुफ़्ती अनस सैयद के साथ हनीमून के लिए जम्मू कश्मीर पहुँची हुई हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी इस यात्रा को लेकर फैंस को जानकारी दे रही हैं। उन्होंने कई तस्वीरें भी अपलोड की हैं, जिनमें वो अपने शौहर के साथ दिखाई दे रही हैं। सूरत में हुई उनकी शादी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद लोगों को इसकी खबर लगी थी।

इससे पहले ‘आयतुल कुर्सी’ के माध्यम से दोनों मियाँ-बीवी ने एक-दूसरे की नजर भी उतारी। इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में वो एक-दूसरे के साथ इस रस्म को निभाते हुए दिख रहे हैं। सना खान ने कहा कि इसे घर से निकलने के पहले और नमाज के बाद दोहराना चाहिए, क्योंकि ये बुरी नजरों से बचाता है। उन्होंने लिखा कि अपने पति/पत्नी के साथ इस सुरा को तब जरूर दोहराएँ, जब वो काम के लिए बाहर निकल रहे हों।

सना खान अपने इंस्टाग्राम हैंडल के माध्यम से स्टोरीज शेयर कर के खुद के बारे में जानकारी देती रहती हैं और अपने शौहर के साथ जम्मू कश्मीर की हनीमून यात्रा के दौरान भी वो अपने फैंस का विशेष ख्याल रख रही हैं। नीचे हम उनमें से कुछ तस्वीरों को संलग्न कर रहे है, जिन्हें सना खान ने अपने इस्टाग्राम हैंडल के माध्यम से शेयर किया है। सना हिंदी, तमिल, तेलुगु और मलयालम फिल्म में भी काम कर चुकी हैं।

फ्लाइट बोर्ड करने से पहले शौहर के साथ इंतजार करतीं सना खान
फ्लाइट में से इस सेल्फी को शेयर कर सना ने लिखा – ‘शौहर और बेगम चले’
अपने शौहर के ‘सरप्राइज लुक्स’ को सना खान ने कैमरे में किया कैद

इससे पहले ‘अल्लाह के कायदों’ पर चलने की बात कहते हुए बॉलीवुड छोड़ने वाली सना खान ने मौलाना अनस सैयद से निकाह कर लिया था। सना सलमान खान अभिनीत ‘जय हो’ जैसी फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं। बिग बॉस सीजन 8 का हिस्सा रह चुके एजाज खान ने सना का परिचय मुफ्ती अनस से करवाया था। एजाज खान सोशल मीडिया में सांप्रदायिक तौर पर भड़काऊ पोस्ट करने के लिए जाना जाता है। निकाह के बाद दोनो ने केक भी काटा था।

जब मुस्लिम भीड़ ने 30 मंदिरों को बुलडोजर से ढाह कर आग लगाया: वो भी दिसंबर 1992 ही था…

दिसंबर 6, 1992 की तारीख बार-बार याद दिलाते हुए कुछ लोग कहते हैं कि न भूलेंगे और न भूलने देंगे। वो अपने बच्चों को इस बारे में बताने की बातें करते हैं। लेकिन, दिसंबर 6, 1992 को याद करने वाले लोग इसके ठीक अगले दिन क्या हुआ था – ये क्यों नहीं अपने बच्चों को बताते? दिसंबर 7-8, 1992 को पाकिस्तान में एक साथ 30 मंदिरों पर न सिर्फ हमले हुए थे, बल्कि मुस्लिम भीड़ ने उन्हें आंशिक या पूर्ण रूप से ध्वस्त भी कर दिया था।

पूरे पाकिस्तान में इस दिन जब 30 मंदिरों पर हमले हो रहे थे, तब वहाँ की सरकार छुट्टियाँ मना रही थी। बाबरी मस्जिद विध्वंस के विरोध में पाकिस्तान में शोक दिवस मनाया जा रहा था और सारे दफ्तरों को बंद कर दिया गया था। सारे स्कूल-कॉलेज बंद पड़े हुए थे। अगर कोई बाहर था तो मुस्लिमों की भीड़, जो अलग-अलग क्षेत्रों में हिन्दू मंदिरों को निशाना बनाने के लिए निकली थी। तब पाकिस्तान में 5 लाख के करीब हिन्दू थे, कुल जनसंख्या का मात्र 2%।

लाहौर में स्थिति सबसे ज्यादा भयावह थी। वहाँ तो हजारों की संख्या में मुस्लिम भीड़ बुलडोजर लेकर निकली थी और उनका एक ही उद्देश्य था – जहाँ भी मंदिर दिखे, उसे ध्वस्त कर दो। एक हिन्दू मंदिर कई सालों से वीरान पड़ा हुआ था, अत्याचारियों ने उसे भी नहीं छोड़ा और ध्वस्त कर दिया। लाहौर में 6 अन्य मंदिरों को आगे के हवाले कर के उन्हें ख़ाक में मिला दिया गया। अफ़सोस ये कि आज इस पर बात ही नहीं होती, विरोध तो दूर की बात है।

लाहौर में स्थित ‘एयर इंडिया’ के दफ्तर पर हमला किया गया और कर्मचारियों की पिटाई की गई। पूरी भीड़ ‘भारत को कुचल दो’ और ‘हिंदुस्तान की मौत’ जैसे नारे लगा रही थी। वो घर-घर से मुस्लिमों को बाहर निकलने के लिए भड़का रहे थे, ताकि बाबरी विध्वंस का बदला लिया जाए। ये सब पाकिस्तान में पहले भी होता रहा था और अब भी हो रहा है, लेकिन एक घटना के बहाने ये सब खुलेआम पूरी ऊर्जा के साथ करने का उन्हें बहाना मिल गया था।

पाकिस्तान में उस दिन अगर कोई दफ्तर या दुकानें खुली हुई थीं, तो उन्हें भी बंद करा दिया गया। सबके मुँह पर बाबरी मस्जिद का नाम था, लेकिन किसी ने ये जानने की जहमत नहीं उठाई कि आखिर बाबरी मस्जिद को अयोध्या में किस तरीके से बनाया गया था। क्या सदियों पुराने राम मंदिर को तोड़ने से पहले कइयों का खून नहीं बहाया गया था? 16वीं शताब्दी से पहले के इतिहास से किसी को कोई मतलब नहीं।

पाकिस्तान का स्टैंड स्पष्ट था। उसने भारत के राजदूत को तुरंत समन किया और माँग की कि बाबरी मस्जिद को त्वरित रूप से वापस वहाँ पर खड़ा किया जाए। पाकिस्तान ने अयोध्या की इस घटना पर कूटनीतिक रूप से भी आक्रोश जताया। ‘मुस्लिमों के अधिकारों की रक्षा’ के लिए पाकिस्तान इतना बेचैन हो उठा कि उसने संयुक्त राष्ट्र और ‘आर्गेनाईजेशन ऑफ़ इस्लामिक कॉन्फ्रेंस (OIC)’ में भारत पर दबाव बनाने के लिए शिकायत करने का ऐलान किया।

राजधानी इस्लामाबाद में छात्र भी पीछे नहीं थे। कायदे आज यूनिवर्सिटी के छात्रों ने भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन किया और तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के पुतले जलाए। मुस्लिम युवाओं की भीड़ का कहना था कि इस समस्या का एक ही समाधान है – ‘हिन्दुओं के खिलाफ जिहाद’। 97% मुस्लिमों वाले मुल्क में, जिसका आधिकारिक मजहब ही इस्लाम है, जिसका बँटवारा ही इस्लाम के नाम पर हुआ था – ये सब हो रहा था और इस पर आज भी बाबरी का रोना रोने वालों के मुँह से कुछ नहीं निकलता।

अब एक ऐसे मंदिर की बात करते हैं, जिसे उस समय आंशिक रूप से ध्वस्त किया गया था लेकिन उसके 22 वर्षों बाद 2016 में उसे मिट्टी में मिला दिया गया। लाहौर में पंजाब यूनिवर्सिटी के पास स्थित जैन मंदिर में मुस्लिम भीड़ बुलडोजर, हथौड़ा और हाथों का इस्तेमाल कर के तोड़-फोड़ मचाने पहुँची। पुलिस ने उन्हें मौन अनुमति दी और तबाही का मंजर शुरू हो गया। ‘एयर इंडिया’ के दफ्तर से फर्नीचर व सामान निकाल कर उन्हें आग के हवाले कर दिया गया।

2016 में लाहौर में उस जैन मंदिर के अवशेष को भी हटा दिया गया। कोर्ट के आदेश के बावजूद उसे पंजाब प्रान्त की सरकार ने पूर्णरूपेण ध्वस्त करने का निर्णय देकर ये बता दिया कि इस्लामिक मुल्कों में मजहब पहले आता है और न्याय-व्यवस्था बाद में। एक विवादित मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के बहाने ये सब किया गया। कोर्ट ने कहा था कि इस सदियों पुरानी ऐतिहासिक स्थल के 200 फ़ीट के इर्दगिर्द में कोई निर्माण कार्य न हो, लेकिन किसी ने नहीं माना।

पुराने लाहौर के अनारकली बाजार का ये वही मंदिर था, जिसे दिसंबर 1992 में मुस्लिम भीड़ ने ध्वस्त किया था। क्या आपको पता है कि इस मंदिर का इस्तेमाल उसके बाद किस चीज के लिए किया जाता था? यहाँ कूड़ा-कचरे का प्रबंधन करने वाली कम्पनी ने अपना दफ्तर बना लिया था। तत्कालीन शाहबाज शरीफ की सरकार ने उसे पूर्णरूपेण ध्वस्त किया, उससे पहले यहाँ दुकानें खोल ली गई थीं और इसका कमर्शियल यूज किया जाता था। 1992 में NYT ने पाकिस्तान में मंदिरों को ध्वस्त किए जाने वाली घटना पर टिप्पणी करते हुए लिखा था:

“सीमा विवाद और धर्म को लेकर झगड़े के कारण भारत के साथ पाकिस्तान के रिश्ते तभी से खराब बने हुए हैं, जब 1947 में इसका गठन हुआ था। ये ब्रिटिश की एक कॉलनी थी, जिसका विभाजन कर दिया गया था। भारत की पुलिस ने दो पाकिस्तानियों को मार डाला और एक पाकिस्तान कूटनीतिक अधिकारी की पिटाई की गई, जिसके बाद ये रिश्ते और खराब हुए हैं। आज प्रदर्शनकारियों ने कराची में 5 मंदिरों पर हमले किए, पत्थरबाजी की और दक्षिणी सिंध प्रान्त में 25 मंदिरों को आग के हवाले कर दिया गया।”

बता दें कि दक्षिणी सिंध वही क्षेत्र है, जहाँ पाकिस्तान के 90% से भी अधिक हिन्दू रहते हैं लेकिन वो वहाँ भी सुरक्षित नहीं हैं और जबरन धर्मांतरण और धार्मिक स्थलों पर हमले तो आम बातें हैं। सुक्कुर नामक शहर में हिन्दुओं की दुकानों पर हमला किया गया। पुलिस ने आँसू गैस के गोले छोड़ कर इतिश्री कर ली। पश्चिमी शहर क्वेटा में 200 की मुस्लिम भीड़ ने एक मंदिर के दरवाजे ही उखाड़ डाले थे।

ऐसा नहीं है कि ये सब सिर्फ पाकिस्तान में ही हुआ था। इसके बाद भारत में भी किस तरह से दंगे किए गए और हिन्दुओं को निशाना बनाया गया, ये किसी से छिपा नहीं है। बांग्लादेश में भी ‘एयर इंडिया’ के दफ्तर पर हमला किया गया था। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैय्यद अली ख़ामेनेई (1989 से अब तक वही हैं) ने भी बाबरी विध्वंस की निंदा की थी। उन्होंने भी तेहरान रेडियो के माध्यम से नई दिल्ली को ‘मुस्लिम अधिकारों की रक्षा’ की सलाह दी।

आज जरूरत है कि जब हमें अवध रूप से राम मंदिर को ध्वस्त कर बाबरी की याद दिलाई जाती है, तो हम भी उन्हें प्राचीन काल में अवैध रूप से क्रूरता कर के ध्वस्त किए गए 30,000 मंदिरों की याद दिलाएँ। पाकिस्तान में बाबरी वाली घटना के अगले ही दिन किस तरह से 30 मंदिरों को ध्वस्त कर दिया गया, वो याद दिलाएँ। वो 30 प्राचीन मंदिर, उनकी जगह आज कहीं कूड़ा-करकट फेंका जाता है तो कहीं नामोंनिशान ही मिट गया है कि वहाँ कभी मंदिर था भी… यह भी याद दिलाएँ।

अपने बच्चों को तथाकथित अन्याय की याद दिलाने का दावा करने वाले लोग अपने पूर्वजों की करतूतों के बारे में अपनी अगली जनरेशन को बताएँगे भी या नहीं? या फिर वही वामपंथी इतिहासकारों के माध्यम से पढ़ाया जाता रहेगा कि अकबर महान था और अयोध्या बाबरी की वजह से ही पूरी दुनिया में विख्यात था? मुग़ल कहाँ से आए थे? बाबर का जन्म कहाँ हुआ था? तैमूर और चंगेज खान के वंशजों के बारे में अपने बच्चों को नहीं बताएँगे?