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‘गुजराती कसम खा कर पलट जाते हैं, औरंगजेब की तरह BJP नेताओं की कब्रों पर थूकेंगे लोग’: क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता की धमकी

भारत के पूर्व-क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह भी अब दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ में शामिल हो गए हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के बीच जाकर भड़काऊ भाषण दिए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेकर कहा कि अगर ‘हिम्मत है तो वो अकेले आएँ और किसानों से बात करे।’ एक पंजाबी समाचार चैनल से बात करते हुए उन्होंने पीएम मोदी को जान से मारने की दी गई धमकियों का भी समर्थन किया।

जब योगराज सिंह से पूछा गया कि इस ‘किसान आंदोलन’ में इंदिरा गाँधी की हत्या को याद कराते हुए पीएम मोदी को भी धमकी दी गई है, तो उन्होंने कहा कि जिसने जो बोया है, वो वही काटेगा। उन्होंने इसे भावनाओं की लड़ाई बताते हुए कहा कि सरकार को ऐसा कोई भी बयान नहीं देना चाहिए, जो भारत को विभाजित करे। उन्होंने भारत सरकार पर मुग़ल बादशाहों बाबर, औरंगजेब और अंग्रेजों से भी ज्यादा क्रूरता और अत्याचार करने के आरोप लगाए।

योगराज सिंह ने कहा कि उन्होंने पीएम मोदी सहित भाजपा के अन्य नेताओं के चेहरे देखे हैं, वो सभी ‘शैतानों की तरह’ दिखते हैं। पंजाबी में बोलते हुए उन्होंने कहा कि पीएम मोदी शायद ये नहीं जानते हैं कि भगवान और शैतान एक साथ नहीं रह सकते। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने अपनी जिंदगी उस मोड़ पर ला खड़ी की है, जहाँ उन्हें, उनके कैबिनेट मंत्रियों और RSS नेताओं की कब्रों के साथ ऐसा ही बर्ताव करेगी, जैसा औरंगजेब के कब्र के साथ किया जाता है।

उन्होंने कहा कि जनता उनकी कब्रों पर थूकेगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली की सीमाएँ सील कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली की सीमा खोल कर पुलिस व सुरक्षा बलों को हटा दिया जाए, और हिम्मत है तो पीएम मोदी अकेले आएँ। उन्होंने कहा कि पुलिस व सुरक्षा बलों को हटाने के बाद देखते हैं कि क्या होता है। युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह भी क्रिकेटर रहे हैं। उन्होंने आगे धमकाते हुए कहा:

“मैं आपको बताना चाहता हूँ कि पंजाबियों ने दिल्ली पर 18 बार विजय प्राप्त की है। अब 19वीं बार भी हम दिल्ली जीत सकते हैं। हमें इस मुकाम तक लाकर मत खड़ा करो। आपकी गोलियाँ ख़त्म हो जाएँगी, लेकिन अपनी छाती पर गोलियाँ खाने वाले पंजाबियों का आना कम नहीं होगा। अगर आप एक गोली भी दागते हो तो आपको उसी तरह उखाड़ फेंका जाएगा, जैसे मुगलों को हटाया गया था। किसे पता कि अमित शाह के पास कितने दिन बचे हुए हैं?”

योगराज सिंह ने दिए भड़काऊ बयान

उन्होंने यहाँ तक आरोप लगाया कि अमित शाह ने अपनी सुरक्षा घेरे में से सिख सुरक्षाकर्मियों को हटा दिया है। उन्होंने चुनौती दी कि मोदी-शाह ‘अपने दोस्त’ अम्बानी-अडानी को पंजाब लाकर दिखाएँ, फिर हम देखेंगे कि वो कैसे वापस जाते हैं? उन्होंने कहा कि गुजराती अपनी माँ-बहन की कसम खा कर भी पलट जाते हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से उनके बीच से ‘एक और जरनैल सिंह भिंडरवाला’ को पैदा करने के लिए कहा।

उधर केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों को लेकर दिल्ली के विज्ञान भवन में सरकार और किसान संगठनों के बीच चली बैठक मंगलवार (दिसंबर 1, 2020) शाम को खत्म हो गई। हालाँकि, बैठक में कोई भी नतीजा नहीं निकल सका है और फिर से तीन दिसंबर को बातचीत होगी। बातचीत में शामिल प्रतिनिधिमंडल में स्वराज पार्टी (Swaraj Party) के नेता योगेंद्र यादव (Yogendra yadav) का भी नाम था। मगर बाद में केंद्र सरकार के कहने के पर उनका नाम हटा दिया गया।

रिया के भाई शौविक चक्रवर्ती को ड्रग मामले में NDPS से मिली बेल, 3 महीने से थे हिरासत में

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े ड्रग मामले में अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती के भाई शौविक चक्रवर्ती को आज (दिसंबर 2, 2020) एनडीपीएस की विशेष अदालत से जमानत मिल गई है। पिछले महीने शौविक ने अपनी बेल के लिए विशेष अदालत में याचिका दी थी।

3 नवंबर को दायर की गई अपनी याचिका में उन्होंने कहा था कि उन्हें इस केस में फँसाया जा रहा है, क्योंकि उनके मुताबिक उनके कब्जे से कोई भी ड्रग या साइकोट्रॉपिक पदार्थ जब्त नहीं हुए थे

इसके अलावा उन्होंने हाइकोर्ट के आदेश का भी याचिका में जिक्र किया था, जिसमें अदालत ने एनसीबी अधिकारियों के समक्ष दिए बयानों को लेकर कहा था कि उन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता और इसलिए शौविक को जेल में रखने का कोई कारण नहीं है।

बता दें, एनडीपीएस की विशेष अदालत से जमानत मिलने से पहले शौविक की बेल याचिका बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज की थी। अदालत ने पेश किए गए सबूतों में यह पाया था कि शौविक ड्रग डीलर्स के संपर्क में थे और सुशांत के लिए ड्रग्स खरीदते थे।

ड्रग मामले में एनसीबी ने शौविक चक्रवर्ती को 5 सितंबर से हिरासत में लिया हुआ था। उन्हें पूरे तीन माह बाद आज राहत मिली है। इससे पहले मुंबई की विशेष अदालत ने मादक पदार्थ से जुड़े मामले में संदिग्ध तस्कर समेत दो आरोपितों को मंगलवार को जमानत दी थी। इनमें से एक शौविक के दोस्त सूर्यदीप मल्होत्रा हैं और दूसरा अंकुश अनरेजा है। इन्हें कोर्ट ने 50,000 रुपए के मुचलके पर जमानत दी थी।

इसके अलावा 7 अक्टूबर को सुशांत केस में मुख्य आरोपित रिया चक्रवर्ती को भी बॉम्बे हाईकोर्ट ने सशर्त जमानत पर रिहा किया था। उनके साथ सैमुअल मिरांडा को भी बेल मिली थी। रिया को 1 लाख के निजी मुचलके पर छोड़ा गया था और उन्हें निर्देश दिए गए थे कि जब भी उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा, तब उन्हें पहुँचना होगा।

केंद्र सरकार ने किसानों की वार्ता से योगेन्द्र यादव को किया बाहर, कहा- राजनेता नहीं, सिर्फ किसान आएँ

केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों को लेकर दिल्ली के विज्ञान भवन में सरकार और किसान संगठनों के बीच चली बैठक मंगलवार (दिसंबर 1, 2020) शाम को खत्म हो गई। हालाँकि, बैठक में कोई भी नतीजा नहीं निकल सका है और फिर से तीन दिसंबर को बातचीत होगी। 

केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठन पूरे देश में प्रदर्शन कर रहे हैं। जिसके बाद केंद्र सरकार ने किसान नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया था। इस बातचीत में शामिल प्रतिनिधिमंडल में स्वराज पार्टी (Swaraj Party) के नेता योगेंद्र यादव (Yogendra yadav) का भी नाम था। मगर बाद में केंद्र सरकार के कहने के पर उनका नाम हटा दिया गया।

सरकार ने इसका तर्क रखते हुए कहा था कि वह ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वह नहीं चाहते कि कोई राजनीतिक व्यक्ति इसमें शामिल हो। इस वजह से केंद्र सरकार ने योगेन्द्र यादव को शामिल करने से इनकार किया है।

बता दें कि शुरुआत में किसानों के संघ ने केवल पंजाब के प्रतिनिधियों को दिए जा रहे निमंत्रण पर सरकार के समक्ष चिंता जताई थी। उन्होंने देश भर से प्रतिनिधित्व प्राप्त करने के लिए पंजाब के 32 प्रतिनिधियों के अलावा प्रतिनिधिमंडल में 4 नामों का प्रस्ताव रखा।

इस चार प्रतिनिधि में शामिल थे- बीकेयू हरियाणा से गुरनाम सिंह चादुनी, मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय किसान मज़दूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार कक्का, अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह और स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव।

अमित शाह ने बैठक में मेरी उपस्थिति पर आपत्ति जताई: योगेंद्र यादव

हालाँकि, भारत सरकार ने योगेंद्र यादव का नाम सूची में शामिल करने पर आपत्ति जताई। यादव ने मीडिया से बात करते हुए दावा किया है कि यह गृह मंत्री अमित शाह ने उनकी उपस्थिति पर ‘व्यक्तिगत रूप से आपत्ति जताई थी।’ शाह ने कथित तौर पर किसानों से कहा था कि यादव एक राजनीतिक नेता हैं। अमित शाह का कहना था कि वो केवल वास्तविक हितधारकों अर्थात किसानों के साथ बातचीत करने में रुचि रखते हैं, राजनेताओं के साथ नहीं।

योगेंद्र यादव ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “हालाँकि किसान यूनियन ने फैसला किया कि बैठक का निमंत्रण तभी स्वीकार किया जाएगा जब चार प्रतिनिधि भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल किए जाएँगे। मुझे सूचित किया गया कि मेरे इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होने पर अमित शाह ने व्यक्तिगत रूप से आपत्ति जताई थी। सरकार ने कहा कि मैं राजनीतिक व्यक्ति था। किसान संघ बैठक का बहिष्कार करने के लिए तैयार थे, लेकिन वे मेरी जिद पर बाकी प्रतिनिधियों के साथ बैठक में जाने के लिए राजी हुए।”

वहीं ‘द हिन्दू’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि आंदोलन से जुड़े कुछ किसान इस समूह और नेता योगेंद्र यादव से नाराज़ हैं। कुछ नेताओं का कहना है कि शुरुआत में यादव ने प्रदर्शनकारियों से बॉर्डर से बुराड़ी मैदान में शिफ़्ट होने का आग्रह किया था। जिसके बाद कुछ लोग नाराज़ हो गए थे। इसके अलावा कुछ लोग इसलिए नाराज़ हैं कि उनके और कुछ राष्ट्रीय नेताओं के आसपास मीडिया की मौजूदगी ज़्यादा थी। जबकि उन्होंने मुट्ठी भर प्रदर्शनकारियों को ही लामबंद किया था।

बता दें किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें बिना शर्त बातचीत के लिए आमंत्रण भेजा था, बैठक के लिए मंगलवार दोपहर 3 बजे किसान नेता विज्ञान भवन पहुँचे थे। सरकार की ओर से केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल मंत्री पीयूष गोयल और योजना आय़ोग के पूर्व अध्यक्ष सोम प्रकाश बैठक में शामिल हुए। हालाँकि, इस बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल सका।

‘बॉलीवुड को कहीं और ले जाना आसान नहीं’: मुंबई पहुँचे CM योगी अक्षय से मिले, महाराष्ट्र की तीनों सत्ताधारी पार्टियों ने किया विरोध

शिवसेना ने उत्तर प्रदेश के नोएडा में प्रस्तावित फिल्म सिटी को लेकर एक बार फिर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा है। पार्टी मुखपत्र ‘सामना’ के एग्जीक्यूटिव एडिटर संजय राउत ने धमकाया है कि बॉलीवुड को कहीं और ले जाना आसान नहीं है। योगी आदित्यनाथ इसी सिलसिले में मुंबई भी पहुँचे हुए हैं, इसीलिए शिवसेना और ज्यादा चिढ़ी हुई है। वहाँ अभिनेता अक्षय कुमार ने उनसे मुलाकात की।

राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सवाल दागा है कि क्या सीएम योगी अन्य राज्यों में बनी फिल्म सिटी को लेकर भी वहाँ के कलाकारों से मुलाकात करेंगे या फिर सिर्फ मुंबई में ही ऐसा करने वाले हैं? उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत में भी फिल्म उद्योग काफी बड़ा है, पश्चिम बंगाल और पंजाब में भी फिल्म सिटी है। साथ ही पूछा कि क्या योगी जी इन स्थानों पर भी जाएँगे और वहाँ के निर्देशकों-अभिनेताओं से बात करेंगे या क्या वह केवल मुंबई में ही ऐसा करने जा रहे हैं?’ 

साथ ही उन्होंने पूछा कि नोएडा फिल्म सिटी का क्या हुआ? साथ ही धमकाया कि मुंबई की फिल्म सिटी को कोई कहीं नहीं ले जा सकता है। वहीं मुंबई कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे संजय निरुपम ने भी इस मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि बॉलीवुड किसी सरकार या राजनीतिक पार्टी के संरक्षण की मोहताज नहीं है, इसीलिए इसे कोई कहीं नहीं ले जा सकता है। उन्होंने कहा कि सिनेमा के दीवानों ने अपनी मेहनत से इस विराट दुनिया को बसाया है और 100 वर्षों से ऐसा ही होता आ रहा है।

संजय निरुपम ने कहा कि नेता लोग इस मुगालते में हैं कि वो इसे शिफ्ट कर देंगे, या बचा देंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी में फिल्म सिटी को लेकर मुंबई में कई उद्योगपतियों से भी मुलाकात की है। वो वहाँ ट्राइडेंट होटल में ठहरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि यूपी में फिल्म निर्माण की असीम संभावनाएँ हैं। उन्होंने जानकारी दी कि फिल्म नीति-2018 के माध्यम से फिल्म निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है।

साथ ही ये भी बताया कि राज्य में फिल्मों की शूटिंग होने से स्थानीय लोगों को रोजगार व प्रदेश के कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्राप्त होगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रदेश में फिल्म की शूटिंग करने वाले निर्माताओं को हरसंभव सहयोग व सुविधा प्रदान की जा रही है। उन्होंने अक्षय कुमार की ‘टॉयलेट – एक प्रेम कथा’ फिल्म की प्रशंसा की, जिसके माध्यम से एक समाजिक सन्देश दिया गया है। उन्होंने ऐसी फिल्मों को जागरूकता के लिए मददगार बताया।

वहीं NCP भी सीएम योगी के विरोध में उतर आई है। NCP नेता नवाब मलिक ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी यूपी में बॉलीवुड जैसी फिल्म सिटी बनाने की बात कर रहे हैं, जो अच्छी बात है लेकिन, ये समझ लेना गलत है कि 100 वर्षों से मुंबई को मिला बॉलीवुड का दर्ज़ा ख़त्म हो जाएगा, लोग पूरी तरह से अन्य राज्यों में चले जाएँगे। उन्होंने दावा किया कि बॉलीवुड को मिले दर्जे को कोई भी नहीं छीन सकता है।

इससे पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी कहा था कि बॉलीवुड को जिस तरह से मुंबई से खत्म करने या शिफ्ट करने की कोशिश की जा रही है, उसे वह बिलकुल बर्दाश्त नहीं करेंगे।  मल्टीप्लेक्स और सिनेमा थिएटर मालिकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करते हुए उन्होंने कहा, “मुंबई न केवल भारत की वित्तीय राजधानी है, बल्कि यह सांस्कृतिक राजधानी भी है। बॉलीवुड और सिनेमा बड़ी संख्या में लोगों के लिए रोजगार पैदा करते हैं।”

कॉन्ग्रेस समर्थक साकेत गोखले को झटका, शेफाली वैद्य के खिलाफ अवमानना कार्यवाही से AG का इनकार

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कॉन्ग्रेस समर्थक साकेत गोखले को झटका देते हुए एक्टिविस्ट-लेखिका शेफाली वैद्य के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने के लिए अपनी सहमति देने से इनकार कर दिया। लाइव लॉ ने अपनी रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी।

खुद को राहुल गाँधी का फॉलोवर बताने वाले साकेत गोखले ने अटॉर्नी जनरल से लेखिका शेफाली वैद्य के खिलाफ अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 (Contempt of Courts Act) की धारा 15 के तहत अवमानना याचिका दायर करने की अनुमति माँगी थी। साकेत ने आरोप लगाया था कि शेफाली वैद्य ने देश की न्यायपालिका के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की है।

कॉन्ग्रेस समर्थक साकेत गोखले द्वारा शेफाली वैद्य के खिलाफ कार्रवाई की माँग वाले पत्र का जवाब देते हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि जिस ट्वीट को लेकर वो अदालत की अवमानना कार्यवाही शुरू करना चाहते हैं, वह ट्वीट शेफाली वैद्य के ट्विटर पेज पर लगभग एक साल पहले पोस्ट किया गया था।

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि केंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971 की धारा 20 के अनुसार, कोई भी कथित रूप से विरोधाभासी आचरण की एक साल की अवधि समाप्त होने के बाद उसके खिलाफ कोई अवमानना कार्रवाई शुरू नहीं किया जा सकता, जब तक कि मामले का स्वत: संज्ञान न लिया जाए।

एजी केके वेणुगोपाल ने कहा, “इसलिए इन परिस्थितियों को देखते हुए शेफाली वैद्य के खिलाफ कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती। अत: मैं आपको इसकी सहमति देने से इनकार करता हूँ।”

बता दें कि साकेत गोखले जिस ट्वीट को लेकर अदालत की अवमानना याचिका दायर करना चाहते थे, वह ट्वीट शेफाली वैद्य ने 2017, 2018 और 2019 में किए थे। गोखले ने पिछले महीने उन ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट पोस्ट किए थे, जिनमें कहा गया था कि वह ‘एक दिलचस्प अदालत की अवमानना याचिका’ पर काम कर रहे हैं। ट्वीट में शेफाली वैद्य ने दिवाली के दौरान पटाखों पर प्रतिबंध और अन्य मामलों में किए गए विवादास्पद टिप्पणियों पर शीर्ष अदालत की आलोचना की थी।

यहाँ पर बताने की जरूरत नहीं है कि साकेत गोखले ने शेफाली वैद्य के खिलाफ इसलिए अवमानना का मामला दर्ज करना चाहा था क्योंकि अटॉर्नी जनरल ने उन लेफ्ट-लिबरलों के खिलाफ मुकदमा दायर करने की अनुमति दी थी, जिन्होंने रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी को जमानत देने के लिए सुप्रीम कोर्ट की कड़ी आलोचना की थी। 

अटॉर्नी जनरल ने लेफ्ट ट्रोल के खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू करने की सहमति दी

गौरतलब है कि अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने लॉ के एक छात्र को कॉमिक आर्टिस्ट रचिता तनेजा के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने के लिए सहमति दे दी है। रचिता तनेजा पर अवमानना की कार्यवाही की सहमति उन ट्वीट्स के लिए दी गई, जो ‘दुस्साहसिक हमला और संस्था का अपमान’ था। 

अर्णब गोस्वामी को बेल दिए जाने को लेकर sanitarypanels ने एक कार्टून बनाया था। जिसमें लिखा था, “तू जानता नहीं मेरा बाप कौन है।” इसमें बीच में अर्णब गोस्वामी को, एक तरफ सुप्रीम कोर्ट और दूसरी तरफ बीजेपी को दिखाया गया।

इसी तरह के दूसरे ट्वीट में सुप्रीम कोर्ट को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जोड़ते हुए ‘संघी कोर्ट ऑफ इंडिया’ के रूप में उल्लेखित किया। इसमें कैप्शन दिया गया, “अर्णब को जमानत मिलती है, असली पत्रकारों को जेल मिलती है, स्वतंत्र न्यायपालिका विफल होती है।”

इससे पहले गालीबाज ‘कॉमेडियन’ कुणाल कामरा द्वारा किए गए विवादित ट्वीट को लेकर अटॉर्नी जनरल ने अवमानना का मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने यह अनमुति इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील अनुज सिंह की शिकायत के आधार पर दी थी। 

गलवान घाटी में चीन ने रची थी खूनी साजिश, तैनात थे 1000 PLA सैनिक: अमेरिकी रिपोर्ट ने किया खुलासा

गत जून माह में गलवान घाटी (Galwan valley) पर भारतीय सैनिक और चीनी फौजियों के बीच हुई आपसी झड़प चीन की साजिश का परिणाम थी, इसका खुलासा अमेरिका ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में किया है।

अमेरिकी संसद कॉन्ग्रेस की एक शीर्ष सम‍िति ने बुधवार  (दिसंबर 2, 2020) को जारी की गई अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि चीन सरकार ने इस साल जून में गलवान घाटी में हुई खूनी हिंसा की ‘साजिश’ रची थी। यानी वह झड़प जिसमें भारत ने अपने 20 सैनिक खोए, वह कोई तुरंत पैदा हुई स्थिति का परिणाम नहीं थी बल्कि उनकी ही योजना का हिस्सा थी।

झड़प के 6 महीने बाद अमेरिका ने अपनी रिपोर्ट ‘यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमिशन’ में इस बात का उल्लेख किया है कि कुछ ऐसे सबूत हैं जिनसे पता चला है कि चीनी सरकार ने गलवान घाटी पर हिंसा के लिए अपनी योजना बनाई थी, जिसमें संभावित रूप से जानलेवा हमले की संभावना भी शामिल थी। रिपोर्ट में अमेरिका ने अपना दावा करते हुए सैटेलाइट तस्वीरों का हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि गलवान घाटी में झड़प वाले हफ्ते हजार की तादाद में पीएलए सैनिकों को तैनात किया गया था।

इसके अलावा रक्षा मंत्री वेई ने भी झड़प से कई हफ्ते पहले अपने बयान में चीन को उकसाते हुए स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया था। रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन सरकार के वा‍स्‍तविक नियंत्रण रेखा पर इस उकसावे वाले कदम को उठाने के पीछे का ठीक-ठीक कारण अभी इस वर्ष पता नहीं चल पाया है। लेकिन अंदाजा लगाया जा रहा है कि इसके पीछे उनका उद्देश्य रणनीतिक सड़क तैयार करना था। इतना ही नहीं चीन के सरकारी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने भी भारत को चेतावनी दी थी कि भारत अमेरिका-चीन प्रतिद्वंदिता में शामिल होता है तो उसे व्‍यापार और आर्थिक मोर्चे पर करारा जवाब दिया जाएगा।

गौरतलब है कि जून में LAC पर हुई हिंसा 1975 के बाद पहली ऐसी हिंसा थी जिसमें सैनिकों ने जान गवाई। लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीनी सैनिकों के बीच हाथापाई और संघर्ष में भारत के 20 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे जबकि चीन के 43 से अधिक जवानों के हताहत होने की सूचना सामने आई थी। चीन ने भारतीय सेना पर हमला करने के लिए लाठी-ंडंडे, रॉड, हॉकी, ड्रैगन पंच, कंटीली तारों वाले हथियार आदि का इस्तेमाल किया था।

‘मंदिर के पुजारी अर्ध नग्न, लेकिन किसी श्रद्धालु ने आपत्ति नहीं की’: शिरडी के फैसले पर तृप्ति देसाई को याद आई ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’

शिरडी के साईबाबा मंदिर न्यास की ओर से श्रद्धालुओं को ‘सभ्य तरीके से’ कपड़े पहनकर आने की अपील के बीच ‘सामाजिक कार्यकर्ता’ तृप्ति देसाई ने पूछा है कि श्रद्धालुओं और पुजारियों के लिए दोहरे मापदंड क्यों हैं।

मंगलवार (दिसंबर 1, 2020) की शाम एक वीडियो संदेश में देसाई ने कहा कि मंदिर न्यास द्वारा श्रद्धालुओं के लिए इस प्रकार के बोर्ड लगाया जाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार के खिलाफ है।

देसाई ने यह भी कहा कि यदि बोर्ड नहीं हटाए जाएँगे तो वह और अन्य कार्यकर्ता महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित शिरडी जाकर बोर्ड को हटा देंगे। श्री शिरडी साईबाबा संस्थान न्यास के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कान्हुराज बगाते ने मंगलवार को कहा कि न्यास ने केवल श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे सभ्य तरीके की पोशाक पहनकर वहाँ आए। कान्हुराज ने कहा कि उन्होंने वेशभूषा को लेकर कोई नियम नहीं थोपा है।

उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं द्वारा शिकायत की गई थी कि कुछ लोग आपत्तिजनक कपड़े पहनकर मंदिर में आते हैं जिसके बाद यह अपील की गई। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए देसाई ने कहा, “मंदिर के पुजारी अर्ध नग्न होते हैं, लेकिन किसी श्रद्धालु ने इस पर आपत्ति नहीं की। बोर्ड को तत्काल हटाया जाना चाहिए वरना हम आकर हटा देंगे।”

उन्होंने कहा कि विभिन्न जातियों, पंथ और धर्म के लोग देश और दुनिया से शिरडी आते हैं। तृप्ति ने कहा, “भारत में संविधान ने अपने नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार दिया है और इस अधिकार के अनुसार क्या बोलना है और क्या पहनना है यह व्यक्तिगत मामला है।”

देसाई का कहना था कि सभी भक्त इस बात से भली भाँति अवगत हैं कि जब वो पूजा स्थल पर जाते हैं तो उन्हें किस तरह का कपड़ा पहनना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी ये निर्णय नहीं ले सकता है कि श्रद्धालु किस तरह के कपड़े पहनेंगे। सभी की आस्था महत्वरूर्ण होती है।

गौरतलब है कि तृप्ति देसाई ने सबरीमाला के देवता स्वामी अय्यप्पा को चुनौती देने और उनके मंदिर के नियम भंग कर प्रवेश करने की कोशिश की, हालाँकि एक साल में दूसरी बार उनके मंसूबे नाकाम हो गए। इसके बाद तृप्ति देसाई कोच्चि हवाई अड्डे से अपने गृह नगर पुणे बैरंग लौट गईं। इसके पहले मंगलवार (26 जुलाई, 2019 को) सुबह वे इस घोषणा के साथ कोच्चि पहुँची थीं कि चाहे सुरक्षा मिले या न मिले, वे मंदिर में घुस कर रहेंगी।

राजनीतिक के कारण किसान यूनियन ने लिया बड़ा यू-टर्न: पिछले साल खुद ही उठाई थी नए कानून में शामिल सभी माँग

किसान आंदोलन में सबसे आगे आकर केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए कानूनों पर सवाल उठाने वाला भारतीय किसान संगठन (BKU) अब अपनी ही कही बातों से यू टर्न लेता नजर आ रहा है। बता दें कि जिन कानूनों पर संगठन आज नाराजगी दिखा रहा है, वह किसान को उनकी फसल मनमुताबिक दाम पर किसी भी बाजार में बेचने की आजादी देता है और बिचौलियों की भूमिका को खत्म करता है। कुछ समय पहले यही माँग इस संगठन की थी, लेकिन अब राजनीति के कारण हर बयान पूरी तरह उलट दिया जा रहा है।

आज संगठन का कहना है कि नए कानून किसानों के हित में नहीं हैं और इसलिए पुरानी प्रणाली वापस लाई जाए। इनकी माँग है कि बिचौलिया वाला सिस्टम दोबारा शुरू करके पुराने कानूनों को रिस्टोर किया जाना चाहिए, क्योंकि वह सर्वोत्तम थे और जिसे सरकार बिचौलिया बता रही है, वह केवल सर्विस प्रोवाइडर हैं, जो किसानों को सुविधा देने के लिए कमीशन लेते हैं।

अब अजीब बात है कि संगठन के ये दावे पिछले साल के मुकाबले बिलकुल उलट है। दरअसल, साल 2019 में बीकेयू ने केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवास की उन माँगों का समर्थन किया था, जिसमें उन्होंने पंजाब मुख्यमंत्री से अढ़तिया प्रणाली को हटाकर किसानों को डायरेक्ट भुगतान का मुद्दा उठाया था।

इसी संगठन के किसानों ने उस समय केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान की माँग का स्वागत किया था और ऐसे बिचौलियों की भूमिका खत्म करने की माँग उठाई थी जिनके कारण किसान पर उधार का अधिक बोझ बढ़ता है।

केंद्र सरकार ने नए कानून में किसानों को यही आजादी और अधिकार प्रदान किए हैं। लेकिन अब यही संगठन पुरानी प्रणाली वापस लाने पर जोर दे रहा है। साथ ही पंजाब सीएम अमरिंदर सिंह द्वारा इस कानून का विरोध किए जाने पर उनकी तारीफ कर रहा है। इस कानून को यह संगठन काला कानून बता रहा है।

पिछले साल मेनिफेस्टो में उठाई थी यही माँगे, अब अपनी बात से पलटे

दिलचस्प बात ये है कि साल 2019 में ऑल इंडिया किसान कॉर्डिनेशन कमेटी द्वारा तैयार किए गए बीकेयू मेनिफेस्टों में भी उन्हीं बातों का उल्लेख हैं जो नए कृषि कानून में हैं। इस मेनिफेस्टों में एक माँग APMC एक्ट और आवश्यक वस्तु अधिनियम को खत्म करने की है।

बीकेयू ने किसानों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए भारत के संविधान से नौवीं अनुसूची को समाप्त करने की भी माँग की थी। घोषणापत्र में कृषि भूमि को बेचने, किराए पर देने और पट्टे पर देने, बेहतर ग्रामीण बुनियादी ढाँचे, भविष्य की वस्तुओं में व्यापार आदि की माँगों का भी उल्लेख किया था।

मेनिफेस्टो में की गई माँग

सरकार के कानून में भी एपीएमसी की मोनोपॉली को खत्म करने के प्रावधान हैं, किसानों को कहीं भी फसल बेचने की आजादी है। इसके अलावा नए कानून में आवश्यक वस्तु अधिनियम में भी संशोधन किए गए हैं। साथ ही ये सुनिश्चित किया गया है कि किसानों को अपनी मेहनत का उचित दाम मिले।

ऐसे में ये हैरान होने वाली बात तो है ही कि आखिर एक साल में बीकेयू इतना बड़ा यूटर्न कैसे ले सकती है, क्योंकि वह तो अपनी माँगों में कृषि क्षेत्र में किसानों के हित के लिए बिचौलियों को हटाना चाहते थे।

यहाँ बता दें कि जब से केंद्र सरकार ने नए कानूनों को लागू किया है, तभी से विरोधी पार्टी इस पर भ्रम पैदा कर रही हैं। ये तीन कानून पीएम मोदी के ‘एक भारत एक कृषि बाजार’ विजन का हिस्सा है, जिससे किसानों के लिए अच्छा माहौल बने। लेकिन अब इन प्रदर्शनों के जरिए राष्ट्र विरोधी ताकतें अपनी आवाजें उठा रही हैं और अशांति फैलाने की लगातार कोशिश कर रही हैं।

कोरोना से जंग के बीच ऐतिहासिक क्षण: अप्रूव हुआ Pfizer-BioNTech Covid-19 वैक्सीन, UK ने लिया निर्णय

कोरोना महामारी से जंग के बीच एक सुखद सूचना यूके से आई है। खबर है कि यूके ने फाइजर-बायोएनटेक कोविड-19 वैक्सीन (Pfizer-BioNTech COVID-19 vaccine) को अधिकृत कर दिया है और इसे अगले सप्ताह से देश भर में उपलब्ध कराया जाएगा।

समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, Pfizer के सीईओ ने इस कोरोना वैक्सीन (Pfizer-BioNTech COVID-19 vaccine) अप्रूवल को ऐतिहासिक क्षण करार दिया है।

इससे पहले अपने पार्टनर BioNTech के साथ फाइजर (Pfizer Inc), मॉडर्ना और एस्‍ट्राजेनेका ने दिखाया था कि उनके प्रायोगिक वैक्‍सीन कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने में सक्षम हैं और आने वाले हफ्ते में यदि इसे मंजूरी मिली तो कंपनी इसका वितरण पूरे देश में शुरू कर देगी। साथ ही कई एशियाई देशों में इसकी बड़ी खेप जाएगी।

बता दें कि ब्रिटेन ने फाइजर और बायोएनटेक (फाइजर-बायोएनटेक कोविड-19 वैक्सीन) की दो-शॉट वाली वैक्सीन की चार करोड़ खुराक का ऑर्डर दिया हुआ है। यह Pfizer-BioNTech COVID-19 vaccine जाँच में 95% से अधिक प्रभावी बताई गई है।

ब्रिटेन ने गत 20 नवंबर को अपने चिकित्सा नियामक, मेडिसिन एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी (एमएचआरए) से फाइजर-बायोएनटेक कोरोना वायरस वैक्सीन (Pfizer-BioNTech COVID-19 vaccine) का आँकलन करने को कहा था। इसके अलावा, एजेंसी यह भी निर्धारित करने की प्रक्रिया में थी कि क्या ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन कठोर सुरक्षा मानकों को पूरा कर पाएगी या नहीं।

इस दौरान ब्रिटेन की ओर से कहा गया था कि अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ और फाइजर और बायोएनटेक द्वारा विकसित वैक्सीन (Pfizer-BioNTech COVID-19 vaccine) को प्राधिकरण की मंजूरी मिली, तो उसके कुछ ही घंटों में वैक्सीन का वितरण और टीकाकरण शुरू कर दिया जाएगा। जरूरी तैयारियाँ को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

‘₹100 में उपलब्ध हैं शाहीन बाग वाली दादी बिल्किस बानो’ – कंगना रनौत को कानूनी नोटिस, डिलीट कर दिया था विवादित ट्वीट

शाहीन बाग़ उपद्रव से सुर्ख़ियों में आई ‘दादी’ बिल्किस बानो के ‘किसान आंदोलन’ में भाग लेने की खबर के बाद कंगना रनौत ने उन पर टिप्पणी की थी, जिसके बाद बॉलीवुड अभिनेत्री को एक कानूनी नोटिस भेजा गया है। एक वायरल तस्वीर में दिख रही एक बूढ़ी महिला को लेकर कंगना रनौत ने कहा था कि ये शाहीन बाग़ वाली वही ‘दादी’ हैं, जिन्हें टाइम मैगजीन ने सबसे प्रभावशाली लोगों में शुमार किया था।

कंगना रनौत ने दावा किया था कि शाहीन बाग़ वाली ‘दादी’ अब 100 रुपए में भी उपलब्ध हैं। उन्होंने पाकिस्तानी पत्रकारों पर भारत का अंतरराष्ट्रीय PR गलत तरीके से हाईजैक करने का आरोप भी लगाया। कंगना रनौत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बात पहुँचाने के लिए हमारे अपने लोग चाहिए। अब ये ट्वीट तो डिलीट कर लिया गया है, लेकिन इसके कारण कंगना कानूनी पचड़े में फँस गई हैं।

वहीं ‘न्यूज़ 18’ की एक खबर के अनुसार, जिस ‘दादी’ की तस्वीर पर कंगना रनौत ने टिप्पणी की, उस तस्वीर में वो शाहीन बाग़ वाली बिल्किस बानो नहीं हैं। इस खबर में बताया गया है कि ये तस्वीर भारतीय किसान यूनियन के एक प्रदर्शन का है, जब पीली साड़ी में कई महिलाओं को केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए देखा गया था। बिल्किस बानो ने भी दावा किया कि ये उनकी तस्वीर नहीं है।

हालाँकि, बिल्किस बानो खुद भी मंगलवार (दिसंबर 1, 2020) को ‘किसान आंदोलन’ में हिस्सा लेने पहुँचीं, लेकिन उपद्रव की आशंका के कारण उन्हें पुलिस ने उन्हें रोक दिया था। अब वो खुद को ‘किसान की बेटी’ बताते हुए सरकार को किसानों की आवाज़ सुनने की नसीहत दे रही हैं। उन्हें सिंघु सीमा पर रोका गया। पुलिस ने उन्हें अपनी सुरक्षा में लेकर साउथ ईस्ट दिल्ली स्थित उनके आवास पर पहुँचाया।

यहाँ गौरतलब हो कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए कृषि सुधार कानूनों को लेकर जारी किसानों के ‘विरोध प्रदर्शन’ में धीरे-धीरे वह सभी लोग एक साथ आ रहे हैं, जिन्होंने पिछले दिनों शाहीन बाग जैसे आंदोलन का समर्थन किया था। भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर रावण ने भी गाजीपुर बॉर्डर पर जाकर विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। उदित राज ने कहा है कि वो किसानों की माँगों का समर्थन करते हैं।