Home Blog Page 4269

अताबुद्दीन अंसारी ने नाम बदलकर हिन्दू युवती को प्रेमजाल में फँसाकर किया गर्भवती, निकला पहले से शादीशुदा और 1 बच्चे का बाप

देश में ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला झारखंड का बेहद ही चौकाने वाला सामने आया है। अताबुद्दीन अंसारी नाम के शख्श ने आकाश महतो बनकर 20 वर्षीय पीड़िता को अपने प्रेमजाल में फँसाया और उसका शारीरिक शोषण भी किया। जिससे वह गर्भवती हो गई। आरोपित की पहचान सामने आते ही गाँव वालों ने उसे पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया। बता दें अंसारी पहले से शादीशुदा था और एक बच्चे का बाप भी है।

प्रभात खबर के अनुसार, मामला बोकारो जिले के चंदनकियारी थाना क्षेत्र का है। पीड़िता का आरोप है कि पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिला अंतर्गत पाड़ा थाना क्षेत्र के रिगुडीह गाँव का रहने वाले अताबुद्दीन अंसारी ने आकाश महतो बनकर 6 महीने से हिंदु युवती को प्रेमजाल में फँसा कर उसका यौन शोषण करता रहा। वहीं आरोपित की पहचान तब सामने आई जब वह युवती के गाँव उससे शादी करने के लिए पहुँचा था।

पुलिस ने शुक्रवार (4 दिसंबर, 2020) को मामले को संज्ञान में लिया और आरोपित अताबुद्दीन अंसारी को गिरफ्तार करते हुए उसके खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज किया है। साथ ही पीड़िता को मेडिकल जाँच के लिए अस्पताल में भर्ती करवा मामले में आगे की कार्रवाई में जुट गई है।

दर्ज एफआईआर के अनुसार, आमडीहा गाँव की रहनेवाली पीड़िता का 2017 में विवाह हुआ था, लेकिन आपसी मतभेद होने के चलते उसके पति ने उसे छोड़ दिया, जिस कारण वह वापस अपने मायके रहने लगी। इसी दौरान छह महीने पहले वह पश्चिम बंगाल अपने रिश्तेदार के गाँव में मेला देखने गई थी। मेले में उसकी मुलाकात अताबुद्दीन अंसारी से हुई। अंसारी ने उस वक्त अपनी पहचान छुपाते हुए अपना नाम आकाश महतो बताया था। जिसके बाद से ही दोनों फ़ोन पर बात करने लगे। आरोपित मुस्लिम युवक ने युवती को शादी का लालच देकर कई बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। जिसके चलते वह गर्भवती हो गई।

गर्भवती होने के बाद पीड़िता ने उस पर शादी का दवाब बनाया। इसी सिलसिले में जब वह पीड़िता के गाँव उसके परिजनों से उसका हाथ माँगने पहुँचा तो परिवार वालों ने उससे पहचान पत्र और अपने से जुड़ी सारी जानकारी देने को कहा तो आकाश बना अताबुद्दीन आनाकानी करने लगा। अंसारी के रवैए को देखते ही परिजनों को उस पर संदेह हुआ।

गाँव वालों के साथ मिलकर जब पीड़िता के परिजनों ने जबरन उसकी छानबीन की तो तलाशी में युवक की जेब से आधार कार्ड बरामद हुआ। जिस पर युवक का नाम 27 वर्षीय अताबुद्दीन अंसारी, पिता हामित अंसारी होने का खुलासा हुआ। पोल खुलते ही युवक को ग्रामीणों ने बंधक बना लिया और पुलिस को इसकी जानकारी दे दी। लेकिन मौका पाते ही आरोपित फरार हो गया। जिसकी जानकारी उन्होंने पुलिस को दे दी।

पुलिस ने मौके पर पहुँच कर इलाके की छानबीन शुरू कर दी। वहीं गाँववालों ने भी इस काम में पुलिस को पूरा सहयोग दिया। जिसके बाद पुलिस ने आरोपित को पास के मंढरा गाँव से धर दबोचा और उसे थाने ले आई। शुक्रवार को पुलिस ने आरोपित का मेडिकल जाँच कराया और उसे जेल भेज दिया। इन्वेस्टीगेशन के दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि अताबुद्दीन अंसारी की पहले ही एक शादी हो चुकी है और वह एक बच्चे का बाप भी है। ग्रूमिंग जिहाद की इस घटना के खुलासे के बाद ग्रामीणों में काफी आक्रोश है।

‘महाराष्ट्र में स्थिर सरकार चाहते हैं तो टिप्पणी करना बंद करें’: राहुल गाँधी पर शरद पवार के बयान से भड़की कॉन्ग्रेस

शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी के गठबंधन की महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार में अंदरूनी कलह के संकेत सामने आए हैं। कॉन्ग्रेस ने शनिवार (दिसंबर 5, 2020) को सत्तारूढ़ शिवसेना की अगुवाई वाली महाराष्ट्र सरकार में अपने सहयोगियों से अपील की कि वे राज्य में ‘स्थिर’ सरकार चाहते हैं तो पार्टी के नेतृत्व पर टिप्पणी करने से बचें। 

बता दें कि राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार ने राहुल गाँधी पर टिप्पणी की जिस पर कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपनी नाराजगी दर्ज की है। पवार ने एक अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा कि राहुल गाँधी में राजनीतिक स्थिरता की कमी है। कॉन्ग्रेस की प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष यशोमति ठाकुर ने शनिवार को शरद पवार की टिप्पणी पर पलटवार किया है।

यशोमति ठाकुर ने कहा, “महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस कमेटी का कार्यकारी अध्यक्ष होने के नाते, मैं महाविकास अघाड़ी में सहयोगियों से अपील करना चाहती हूँ कि यदि आप महाराष्ट्र में स्थिर सरकार चाहते हैं तो कॉन्ग्रेस के नेतृत्व पर टिप्पणी करना छोड़ दें। हर किसी को गठबंधन के बुनियादी नियमों का पालन करना चाहिए। हमारा नेतृत्व बहुत मजबूत और स्थिर है। गठबंधन का गठन लोकतांत्रिक मूल्यों में हमारी मजबूत धारणा का परिणाम है।”

गौरतलब है कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार कई बार कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के नेतृत्व और राजनीति में उनकी सक्रियता पर निशाना साध चुके हैं। कुछ सप्ताह पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की किताब में राहुल गाँधी को लेकर की गई टिप्पणी के बाद से विपक्ष कॉन्ग्रेस पर निशाना साध रही है। 

हालाँकि, शरद पवार ने बराक ओबामा के विचारों पर आपत्ति जताई, लेकिन हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी के नेतृत्व में ‘स्थिरता’ का अभाव है। शरद पवार के इस बयान पर अब महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और कॉन्ग्रेस की प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष यशोमति ठाकुर ने नाराजगी जाहिर की है।

यशोमति ठाकुर के ट्वीट के बीच एनसीपी और शिवसेना के नेताओं ने पवार की टिप्पणी को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उनका तीन पार्टियों के गठबंधन वाली राज्य सरकार की स्थिरता से कोई संबंध नहीं है।

इससे पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने राहुल गाँधी को लेकर एक बड़ा बयान देकर भारत में हलचल मचा दी थी। बराक ओबामा ने अपने संस्मरण ‘ए प्रॉमिस्ड लैंड’ (A promised Land) में कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सोनिया गाँधी के बेटे राहुल गाँधी को लेकर एक खुलासा किया। ओबामा ने अपनी किताब में लिखा कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गाँधी में एक ऐसे घबराए हुए और अनगढ़ छात्र के गुण हैं, जो अपने टीचर को इंप्रेस करने की पूरी कोशिश करते हैं, लेकिन उसमें विषय (राजनीति) में महारत हासिल करने की योग्यता और जूनून की कमी है।

फिल्म ‘राम सेतु’ के लिए अक्षय कुमार को अयोध्या में शूटिंग करने की मिली परमिशन, CM योगी ने दी मंजूरी

बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने हाल ही में अपने अगले प्रोजेक्ट की अनाउंसमेंट करते हुए फिल्म का नाम और पोस्टर साझा किया था। फिल्म राम सेतु (Ram Setu) के पोस्टर में अक्षय श्रीराम की तस्वीर के आगे खड़े हुए एक अलग ही लुक में नजर आ रहे हैं। इस फिल्म की शूटिंग अयोध्या में होगी जिसकी इजाजत एक्टर को मिल गई है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुंबई के ट्राइडेंट होटल में अभिनेता अक्षय कुमार ने मुलाकात की थी। ताकि वो फिल्म ‘राम सेतु’ के लिए अयोध्या में शूटिंग की परमिशन ले सकें। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो योगी आदित्यनाथ को अक्षय कुमार का प्रपोजल बेहद पसंद आया और उन्होंने मदद का पूरा आश्वासन दिया है। यानी कि अक्षय जल्द ही अयोध्या की लोकेशन्स पर राम सेतु की शूटिंग करते हुए दिखाई देंगे।

सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में फिल्म निर्माण की असीम संभावनाएँ हैं। इसके दृष्टिगत राज्य सरकार फिल्म नीति-2018 के माध्यम से फिल्म निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है। राज्य में फिल्मों की शूटिंग होने से स्थानीय लोगों को रोजगार व प्रदेश के कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्राप्त होता है। प्रदेश में फिल्म की शूटिंग करने वाले निर्माताओं को हर संभव सहयोग व सुविधा प्रदान की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अक्षय कुमार ने अपनी कला का सदुपयोग करते हुए ‘टाॅयलेट एक प्रेम कथा’ फिल्म के माध्यम से समाज को प्रेरक संदेश दिया। ऐसी फिल्में समाज में जागरूकता उत्पन्न करने में मददगार सिद्ध होती हैं। सीएम योगी से मुलाकात के दौरान अक्षय कुमार ने फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना की और राज्य में फिल्म सिटी की स्थापना के निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व में उनके द्वारा अभिनीत फिल्मों की शूटिंग उत्तर प्रदेश में की जा चुकी है।

भगवान राम के ऊपर आधारित रामसेतु फिल्म की शूटिंग को लेकर अयोध्या के संत समाज भी उत्साहित है। वहीं संतों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पहल का स्वागत किया है। संतों का कहना है कि अयोध्या के विकास के लिए यह एक नया अवसर है तो भगवान के जीवन पर आधारित फिल्मों के निर्माण से आने वाली पीढ़ियों को एक अच्छा संदेश और अपने पूर्वजों की जानकारी युवा पीढ़ी को मिलेगी। उन्होंने कहा कि भगवान राम से जुड़ी हुई संस्कृति के बारे में जानेगी।

सरयू नित्य आरती कराने वाले महंत शशिकांत दास ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना की है। उन्होंने कहा कि अक्षय कुमार के द्वारा और रामसेतु फिल्म के निर्माण से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा ही साथ ही अयोध्या को भी एक नई दिशा मिलेगी। इससे अयोध्या के व्यवसायियों को भी लाभ होगा।

वहीं तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास ने इसे स्वागत योग्य कदम के साथ ही नए युग की शुरुआत बताया। उनका कहना है कि फिल्म ऐसे बननी चाहिए जिससे कि लोग अपने संस्कृति और परंपरा के बारे में जाने निष्ठावान बने। 

फिल्म की शूटिंग अक्षय अगले साल 2021 में मई के आसपास करेंगे। अभिषेक वर्मा राम सेतु को डायरेक्ट कर रहे हैं। फिल्म की कहानी की बात करें तो अक्षय राम सेतु का सच पता लगाते हुए दिखाई देंगे। अक्षय कुमार की अभी कई फिल्म रिलीज होनी हैं। साल 2021 अक्षय के लिए बड़ा साबित होने वाला है। एक के बाद एक कई सारी फिल्में रिलीज होनी हैं। पृथ्वीराज, रक्षाबंधन और सूर्यवंशी जैसी फिल्में रिलीज होने वाली हैं।

तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में हर सीट पर लड़ेगी सुपरस्टार रजनीकांत की पार्टी, आध्यात्मिक राजनीति का दावा

हाल ही में सुपरस्टार रजनीकांत ने राजनीति में कदम रखने की तमाम अटकलों को ख़त्म करते हुए अहम ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि वह 31 दिसंबर को अपने राजनीतिक दल की घोषणा करेंगे और नए साल के अवसर अपने दल को लॉन्च करेंगे। इसी बीच उनके राजनीतिक दल और आगामी वर्ष में होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को लेकर एक और अहम बात सामने आई है। सुपरस्टार रजनीकांत का राजनीतिक दल तमिलनाडु की हर विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ेगा। 

सुपरस्टार रजनीकांत के राजनीतिक सलाहकार तमिलरूवी मनियन ने शनिवार (5 दिसंबर 2020) को इस बात की पुष्टि की। पुष्टि करते हुए उन्होंने बताया कि पार्टी सिर्फ आध्यात्मिक राजनीतिक करेगी और किसी अन्य की आलोचना नहीं करेगी। 2021 में होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के मुद्दे पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए तमिलरूवी मनियन ने कहा, “हम विधानसभा चुनावों में प्रदेश की पूरी 234 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। हमारी राजनीति, पवित्र और आध्यात्मिक राजनीति पर आधारित होगी न कि नफरत की राजनीति की तरह जैसा आज कल हो रहा है।” 

इसके अलावा सुपरस्टार रजनीकांत के राजनीतिक सलाहकार तमिलरूवी मनियन ने यह भी कहा कि हम राजनीतिक करते हुए किसी और की आलोचना नहीं करेंगे और न ही किसी भी तरह का आरोप-प्रत्यारोप करेंगे। हाल ही में रजनीकांत ने कहा था कि वह 31 दिसंबर को अपनी बहुप्रतीक्षित राजनीतिक पार्टी की घोषणा करेंगे और वर्षों से चल रही अटकलों को समाप्त करते हुए इसे जनवरी में लॉन्च करेंगे।

रजनीकांत ने यह घोषणा अपने मंच रजनी मक्कल मंद्रम के वरिष्ठ पदाधिकारियों से मुलाकात के एक दिन बात की थी। बाद में बुधवार को, उन्होंने कहा था कि वह चुनावी राजनीति के लिए अपनी योजनाओं पर जल्द ही खुद के फैसले की सार्वजनिक घोषणा करेंगे। अपने एक ट्वीट में उन्होंने कहा था, “चलें अब सब कुछ का बदलाव करें, अभी नहीं तो कभी नहीं।”

इसके अलावा सुपरस्टार ने आगे यह भी कहा था, “आगामी विधानसभा चुनावों में हमारी निश्चित रूप से जीत होगी। हम लोगों को एक पारदर्शी, भ्रष्टाचार मुक्त और बिना किसी धार्मिक-जातिगत भेदभाव वाली सरकार देंगे।” रजनीकांत बहुत पहले ही तमिलनाडु में लोगों को एक वैकल्पिक राजनीति देने का बात कई बार कह चुके हैं। अब उन्होंने इस दिशा में अपना सधा हुआ कदम बढ़ा दिया है।

पश्चिम बंगाल के आसनसोल में बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हमला, 7 घायल: पार्टी ने लगाया TMC के गुंडों पर आरोप

पश्चिम बंगाल में शनिवार (दिसंबर 5, 2020) को एक बार फिर से हिंसक वारदात की खबर सामने आई है। इसमें बीजेपी के 5 से 7 कार्यकर्ता घायल बताए जा रहे हैं। राज्य के आसनसोल में बीजेपी की बाइक रैली पर हमला हुआ है। बीजेपी कार्यकर्ताओं पर फायरिंग की गई और पत्थरबाजी भी की गई। बताया जा रहा है कि इस दौरान बम भी फेंके गए।

हमले का आरोप टीएमसी कार्यकर्ताओं पर लगा है। स्थानीय बीजेपी नेता लखन घोरुई ने जानकारी देते हुए बताया, “टीएमसी के गुंडों ने गोलीबारी की और बम विस्फोट कर 5-7 लोगों को घायल कर दिया। हम अभी अस्पताल जा रहे हैं। पुलिस से मदद माँगने के बावजूद कोई कदम नहीं उठाया गया है।”

ये वाकया उस वक्त हुआ जब बीजेपी के कार्यकर्ता बर्धमान जिले में संपर्क अभियान पर थे। टीएमसी कार्यकर्ताओं पर इस हिंसा का आरोप लगाया गया है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा का चुनाव होना है लेकिन उससे पहले लगातार बीजेपी और राज्य की सत्ताधारी टीएमसी के बीच झड़प की खबरें आ रही हैं।

गौरतलब है कि पिछले दिनों पश्चिम बंगाल के कूच बिहार में बीजेपी के कार्यकर्ता की पीट-पीटकर हत्या का मामला सामने आया था। मृतक कार्यकर्ता का नाम कलाचंद कर्मकार (kalachand Karmakar) था और उनकी उम्र 55 साल थी। वह बीजेपी के बूथ कमेटी के सचिव भी थे।

आरोप था कि पाँचों टीएमसी कार्यकर्ताओं ने बेरहमी से बीजेपी नेता की पिटाई की, जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आई। जब इलाज के लिए उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मृतक बीजेपी नेता के परिवार वालों ने टीएमसी के गुंडों पर हत्या का आरोप लगाया था। परिवार ने पुलिस को दी शिकायत में पाँच टीएमसी कार्यकर्ता का नाम लिया था। 

उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना के मथुरापुर में गुरुवार (30 जुलाई, 2020) को भाजपा बूथ सचिव गौतम पात्र का शव पेड़ से लटका मिला था। बीते 24 घंटे के भीतर बंगाल में दो भाजपा कार्यकर्ताओं के शव पेड़ से लटके मिले थे। इससे पहले पूर्वी मिदनापुर जिले के कछुरी गाँव में बीजेपी कार्यकर्ता पूर्णचंद्र दास का शव पेड़ से लटका मिला था।

जबरन धर्म-परिवर्तन के खिलाफ योगी सरकार के कानून बनाते ही बदले मौलानाओं के सुर, जारी किया फतवा

उत्तर प्रदेश में जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कानून क्या बना, मौलानाओं के भी सुर बदल गए हैं। उत्तर प्रदेश में नया कानून बनने के बाद दरगाह-ए-आला हजरत परिसर स्थित रजवी दारुल इफ्ता द्वारा योगी आदित्यनाथ की सरकार के रुख के पक्ष में फतवा जारी करने को लेकर लोग हैरत में हैं। दरअसल, मौलानाओं ने कहा है कि लालच देकर या फिर जोर-जबरदस्ती से धर्म-परिवर्तन कराना नाजायज है, ये ठीक नहीं है।

ये फतवा मंगलवार (दिसंबर 1, 2020) को ही जारी कर दिया गया था, लेकिन कुछ दिनों बाद जब ये सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तब लोगों को इसके बारे में पता चला। दरअसल, सुन्नी उलमा कौंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना इंतेजार अहमद कादरी ने दारुल इफ्ता में सवाल दाखिल किया था। इस पर फतवा जारी किया जाना था। इस सवाल में पूछा गया था कि ‘लव जिहाद (ग्रूमिंग जिहाद)’ की शरीयत में क्या हैसियत है?

दारुल इफ्ता के अध्यक्ष मुफ्ती मुतीउर्रहमान रिज़वी ने इस सवाल का जवाब दिया और जबरन धर्म-परिवर्तन कराने को नाजायज ठहराया। उन्होंने यहाँ तक कहा कि शादी-विवाह के लिए भी धर्म परिवर्तन कराना जायज नहीं माना जाता है। ‘अमर उजाला’ की खबर के अनुसार, मुफ्ती के इस जवाब की तस्दीक दारुल इफ्ता के प्रमुख मौलाना अरसलान रजा खाँ ने की है। इसे सोशल मीडिया पर भी वायरल किया गया।

इस फतवे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक जिले में दलित परिवार द्वारा अपनी मर्जी से इस्लाम स्वीकार करने का उदाहरण दिया गया। साथ ही दावा किया गया कि अपनी इच्छा से धर्म-परिवर्तन करने को लेकर कोई दिक्कत नहीं है। ‘लव जिहाद’ की शब्दावली का जिक्र करते हुए बताया गया कि ‘लव’ एक अंग्रेजी शब्द है और ‘जिहाद’ अरबी। साथ ही कहा कि इन्हें जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि शरीयत में इसकी कोई हैसियत नहीं।

उधर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार उस 44 वर्ष पुराने कानून को ख़त्म करने पर विचार कर रही है, जिसके तहत अलग-अलग धर्म से आने वाली वैवाहिक जोड़ों को प्रोत्साहित किया जाता है। अंतरधार्मिक शादी को बढ़ावा देने वाली इस योजना को अब ख़त्म किया जा सकता है। जबरन धर्मांतरण को लेकर योगी सरकार पहले ही अध्यादेश ला चुकी है, अब अंतरधार्मिक विवाह को बढ़ावा देने वाली योजना भी बंद हो सकती है।

आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम से होगी 65 लाख की वसूली: विधायक के रुप में लिए वेतन-भत्ते जमा कराने के आदेश

समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम से विधायक के रूप में लिए गए वेतन व भत्ते वसूलने के आदेश जारी हुए हैं। मुख्य लेखा अधिकारी अनुज कुमार पांडेय ने अब्दुल्ला आजम को नोटिस जारी कर 65 लाख रुपए जमा करने के आदेश दिए हैं।

अब्दुल्ला आजम 2017 के विधानसभा चुनाव में स्वार सीट से निर्वाचित घोषित हुए थे।  नामांकन पत्र दाखिल करते वक्त अब्दुल्ला की आयु संबंधी गलत जानकारी दी थी जिस पर मुकदमा दर्ज कराया गया था। हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2019 को अब्दुल्ला आजम की विधायकी रद्द कर दी थी। विधानसभा सचिवालय ने भी हाईकोर्ट के फैसले के बाद स्वार सीट को रिक्त घोषित कर दिया था।

इस पूरे प्रकरण को लेकर भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने प्रमुख सचिव विधानसभा से माँग की थी कि अब्दुल्ला आजम को विधायक के रूप में दिए गए वेतन व भत्ते को उनसे सूद समेत वापस लिया जाए। उनके द्वारा की गई इस शिकायत के बाद बीते 2 दिसंबर 2020 को उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य लेखा अधिकारी अनुज कुमार ने अब्दुल्ला आजम को नोटिस जारी किया है।

नोटिस में लिखा है अब्दुल्ला आजम ने 14 मार्च 2017 से 16 दिसंबर 2019 तक जो भी वेतन व भत्ते प्राप्त किए हैं उसकी रकम सरकारी कोष में जमा कराएँगे।

भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने पूर्व में सपा सांसद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम के खिलाफ गंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि अब्दुल्ला के दो जन्म प्रमाण पत्रों के आधार पर दो पैनकार्ड और दो पासपोर्ट बनवाए गए और उनका समय-समय पर अनुचित लाभ भी लिया गया। 

विवेचना के बाद पुलिस ने आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, 120 बी व पासपोर्ट अधिनियम के अंतर्गत आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया था। इस मामले में पिछले दिनों लोअर कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद सपा नेताओं ने हाईकोर्ट में अर्जी लगाई थी, वहाँ से भी जमानत खारिज हो गई थी। गौरतलब है कि सांसद आजम खान, उनकी पत्नी विधायक डॉक्टर तजीन फातमा और बेटे अब्दुल्ला आजम पिछले नौ माह से सीतापुर की जेल में बंद हैं।

उल्लेखनीय है कि लंबे अरसे से विवाद और मुकदमों में चल रही उत्तर प्रदेश के भू-माफिया आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी की दीवार पर बृहस्पतिवार (फरवरी 20, 2020) दोपहर आखिरकार प्रशासन ने बुलडोजर चला दिया गया। आजम उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थित इस यूनिवर्सिटी के कुलपति हैं।

यह कार्रवाई प्रशासन की तरफ से चकरोड प्रकरण में की गई। प्रशासन द्वारा जौहर यूनिवर्सिटी की दीवार को कई जगह से जेसीबी मशीन से तोड़कर उसके अंदर कब्जा किए गए सरकारी चकरोड से कब्जे को हटाया गया। इस यूनिवर्सिटी में चकरोडों पर अवैध कब्जे का मामला चल रहा था। अधिकारियों ने इस घटना के संबंध में जौहर यूनिवर्सिटी प्रशासन को पहले ही नोटिस जारी कर दिया था। इस मामले में तीन थानों की फोर्स ने मिलकर 17 बीघा जमीन पर बनी तीन मीटर दीवार को तोड़कर रास्ता बनाया।   

केरल कस्टम विभाग ने CRPF सुरक्षा के लिए गृह मंत्रालय को लिखा, गोल्ड तस्करी मामले में आ सकते हैं बड़े नेताओं के नाम

केरल के सोना तस्करी घोटाला में बड़ा खुलासा हुआ है। कस्टम कमिश्नर ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को लिखा है न सिर्फ उनके दफ्तर, बल्कि इस मामले की जाँच कर रहे प्रत्येक अधिकारी को CRPF की सुरक्षा मुहैया कराई जाए। केरल सोना तस्करी घोटाला मामले में कई बड़े नाम सामने आने वाले हैं और इसलिए अधिकारियों को लगता है कि उनकी सुरक्षा को खतरा है। इस मामले में कई बड़े नेताओं और अधिकारियों के शामिल होने की आशंका है।

इससे पहले केंद्र सरकार ने कस्टम अधिकारियों को सुरक्षा प्रदान की थी। लेकिन बाद में उन्हें केरल पुलिस से सुरक्षा लेने को कहा गया था। सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया, जब इस मामले में मुख्य आरोपित स्वप्ना सुरेश की तरफ से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने वकालत छोड़ने का ऐलान कर दिया। उन्होंने इसके लिए ‘प्रोफेशनल कारणों’ को जिम्मेदार बताया। कहा जा रहा है कि स्वप्ना और सरित कुमार के अप्रूवर बनने के कारण ऐसा हुआ है।

शुक्रवार (दिसंबर 4, 2020) को दोनों मजिस्ट्रेट के सामने अपना कबूलनामा दे चुके हैं। उसी दिन इन दोनों के अलावा IAS अधिकारी एम शिवशंकर और यूनिटेक बिल्डर्स के एमडी संतोष से पूछताछ हुई। जयघोष और सिद्दीकी नामक दो आरोपितों से भी पूछताछ हुई है। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि हवाला नेटवर्क के जरिए 100 करोड़ रुपए भेजे जा रहे थे और इस मामले में राजनयिकों के भी शामिल होने की आशंका है।

जुलाई 5, 2020 को कस्टम अधिकारियों ने तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट से 30 किलो सोना जब्त किया था। इसके बाद UAE काउंसलेट में काम करने वाले सरित कुमार की गिरफ़्तारी हुई थी। स्वप्ना सुरेश का भी नाम आया, जिसकी नियुक्ति शिवशंकर के ही इशारे पर हुई थी। केरल के मुख्यमंत्री ने शिवशंकर को सस्पेंड करने का निर्णय लिया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। अब सीएम के एडिशनल सेक्रेटरी रवीन्द्रन का नाम सामने आया है।

इससे पहले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के संयोजक बेनी बेहानन ने सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को पद से हटाने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि जब से मुख्यमंत्री कार्यालय पर सवाल उठने शुरू हुए हैं, पिनराई का पद पर बने रहना अनुचित है। उन्होंने लिखा था कि उच्च शिक्षा मंत्री केटी जलील के अलावा, कुछ और मंत्रियों के बच्चे भी सवालों के घेरे में आ गए हैं।

कोरोना वैक्सीन के थर्ड फेज में हरियाणा के मंत्री अनिल विज की रिपोर्ट पॉजिटिव: चिंता जैसी कोई बात नहीं, जानिए क्यों?

हरियाणा के गृह- स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज शनिवार (5 दिसंबर, 2020) को कोरोना संक्रमित हो गए हैं। उन्होंने खुद ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी है। फिलहाल सिविल अस्पताल अंबाला कैंट में उनका इलाज चल रहा है।

अनिल विज ने ट्वीट करते हुए कहा, “मैं कोरोना संक्रमित पाया गया हूँ। मैं सिविल अस्पताल अंबाला कैंट में भर्ती हूँ। जो लोग भी मेरे संपर्क में आए हैं उन्हें यह सलाह दी जाती है कि वे कोरोना की जाँच कराएँ।”

बड़ी बात यह है कि 15 दिन पहले यानी 20 नवंबर को अनिल विज ने कोवैक्सीन परीक्षण के तीसरे चरण के परीक्षण के लिए वालंटियर के तौर पर खुद को टीका लगवाया था। बावजूद इसके वह कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं।

बता दें कि कोरोना वायरस महामारी के बचाव के लिए भारत बायोटेक और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की दवा कोवैक्सीन के तीसरे चरण का परीक्षण चल रहा है। पहले और दूसरे चरण के ह्यूमन ट्रायल में करीब एक हजार वॉलंटियर्स को यह वैक्सीन दी गई थी। 16 नवंबर को इस वैक्सीन के तीसरे चरण का परीक्षण भारत में 25 केंद्रों में 26,000 लोगों के साथ किए जाने की घोषणा की गई थी। ये भारत में कोविड-19 वैक्सीन के लिए आयोजित होने वाला सबसे बड़ा ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल है।

हरियाणा के मंत्री अनिल विज के कोरोनाक्सिन वैक्सीन ट्रेल्स के तीसरे चरण के परीक्षणों के लिए स्वेच्छा से परीक्षण करने के बाद भी कोरोनोवायरस के लिए सकारात्मक परीक्षण की रिपोर्ट ने देश के नागरिकों में दहशत पैदा कर दी है।

वहीं विज की कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद लोग इस वैक्‍सीन के असर को लेकर शक जाहिर कर रहे हैं। वहीं कुछ लोग इसके पीछे वैक्सीन को भी जिम्मेदार ठहरा रहे है।

हालाँकि, कोवैक्सीन ट्रायल के संबंध में जनता में सीमित जानकारी है। साथ ही यह दावा करना पूरी तरह से भ्रामक है कि हरियाणा के मंत्री वैक्सीन के इंजेक्शन लगाने के बाद कोरोनावायरस से संक्रमित हुए।

गौरतलब है कि भारत बायोटेक ने कोविड-19 वैक्सीन कोवाक्सिन के लिए भारत के पहले चरण में 3 प्रभावकारिता अध्ययन किया। अनिल विज सहित अन्य वालंटियर्स को ट्रायल के दौरान, 28 दिनों के अंतराल पर दो इंट्रामस्क्युलर इंजेक्शन दिया जाना था। इन प्रतिभागियों को कोवैक्सीन या ‘प्लेसबो’ (डमी ड्रग) दिया जाना था जिसका कोई प्रभाव नहीं होता है।

बता दें हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री को Covaxin की पहली डोज 20 नवंबर को दी गई थी। वहीं पहली डोज के 28 दिन बाद उन्हें Covaxin के फेज 3 ट्रायल प्रोटोकॉल के अनुसार, 0.5mg की दो डोज वालंटियर के तौर पर दी जानी थी। लेकिन इस डोज से पहले ही वे कोरोना संक्रमित हो गए। डॉक्टर्स के अनुसार जब तक वैक्‍सीन की दोनों डोज नहीं लगतीं, तब तक यह शरीर में कोविड से लड़ने की इम्युनिटी को नहीं बढ़ाता है।

Covaxin का ट्रायल रैंडमाइज्‍ड, डबल ब्‍लाइंड था। ऐसा भी हो सकता है कि विज को वैक्‍सीन के बजाय प्‍लेसीबो मिला हो। विज के संक्रमित होने की यही वजह नजर आती है, हालाँकि, एक्सपर्ट अभी इसकी जाँच कर रहे है।

बता दें प्लेसबो एक साधारण सेलाइन सॉल्यूशन है जिसका आमतौर पर टीका परीक्षणों के दौरान उपयोग किया जाता है। नई दवा या वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभावकारिता के मूल्यांकन के लिए यादृच्छिक, प्लेसबो-नियंत्रित परीक्षणों को सुरक्षित और-गोल्ड स्टैंडर्ड माना जाता है। इन परीक्षणों में वालंटियर्स को जाँच के तहत या तो सेलाइन इंजेक्शन जैसे प्लेसबो देने के लिए यादृच्छिक (रैंडमाइज़ेशन) किया जाता है।

कुछ मामलों में परीक्षण के तहत कुछ व्यक्ति में, जिसे प्लेसबो के साथ इंजेक्शन लगाया गया है, प्रतिक्रियाएँ दिखा सकता है। उदाहरण के लिए, उसमें सुधार भी हो सकता है या व्यक्ति में उपचार से कुछ दुष्प्रभाव भी देखा जा सकता है। इन प्रतिक्रियाओं को “प्लेसबो प्रभाव” के रूप में जाना जाता है।

टीकों के संबंध में एक और महत्वपूर्ण बात यह भी है कि वे लगाए जाने के तुरंत बाद काम करना शुरू नहीं करते हैं। कोरोनावायरस के टीके के मामले में टीकाकरण के बाद शरीर को टी-लिम्फोसाइट्स और बी-लिम्फोसाइट्स का उत्पादन करने में कुछ सप्ताह लगते हैं। इसलिए, दोनों खुराक प्राप्त करने के बाद भी, अगर कोई व्यक्ति वायरस के संपर्क में आता है तो भी शरीर के इम्युनिटी के अनुसार कोरोना वायरस से संक्रमित हो सकता है।

वहीं जल्दबाजी में टीके को लेकर कोई भी राय बनाना सही नहीं होगा। किसी भी दावा का असर तभी दिखाई पड़ता है जब उसकी पूरी डोज व्यक्ति को दी गई हो। इस वक्त करीब 28 हजार वॉलंटियर्स देशभर में Covaxin के फेज 3 ट्रायल से गुजर रहे है। ट्रायल पूरा होने के बाद, जब डेटा आएगा तभी वैक्‍सीन के असर पर स्‍पष्‍ट रूप से कुछ कहा जा सकेगा।

इसीलिए वर्तमान में कोवाक्सिन वैक्सीन की प्रभावकारिता से घबराने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि अनिल विज को वास्तविक परीक्षण वैक्सीन या प्लेसबो के अधीन किया गया था या नहीं। वहीं यह बात भी नजरअंदाज नहीं की जानी चाहिए कि उन्हें आवश्यक दो खुराकों में से केवल एक ही दिया गया था। उम्मीद है कि भारत बायोटेक को हाल के घटनाक्रमों के मद्देनजर जल्द ही अपना बयान जारी करेगा।

इंडिया टुडे की डाटा इंटेलीजेंस यूनिट का मैथ फिर गड़बड़ाया, हैदराबाद निकाय चुनाव के नतीजों में जोड़-घटाव भी गलत

इंडिया टुडे की डाटा इंटेलिजेंस यूनिट (DIU) एक बार फिर से सोशल मीडिया में आलोचनाओं का केंद्र बनी हुई है। इसका कारण इनकी आँकड़ों और चार्टों को लेकर नासमझी है। बता दें कि हैदराबाद निकाय चुनावों के मतगणना वाले दिन इंडिया टुडे को 2016 और 2019 में तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के चुनाव परिणामों के बीच तुलना करते हुए देखा गया था।

डीआईयू के लिए फर्जी आँकड़ों को उछालना नया नहीं है। इंडिया टुडे ने दावा किया कि 2016 में टीआरएस ने 99 सीटें हासिल की थीं, जबकि 2020 में केवल 56 सीटें थीं। यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम में कुल 150 सीटें हैं। रिपोर्टों के अनुसार, टीआरएस ने 2016 में 88 सीटें हासिल की थीं, न कि 99 सीटें, जैसा कि इंडिया टुडे ने शुक्रवार (दिसंबर 4, 2020) को दावा किया। इंडिया टुडे ने आँकड़ों में गलती करने के अलावा बेसिक मैथेमेटिकल कैलकुलेशन में भी गलतियाँ की।

इंडिया टुडे की डाटा इंटेलिजेंस यूनिट के अनुसार 2020 के चुनावों में टीआरएस की 56 सीटों का मतलब था कि पार्टी की इस बार 46 सीटें कम आई। हालाँकि 99 में से 56 का घटाव करने पर परिणाम 43 आते हैं। डीआईयू में अपना विश्वास दिखाने वाले राहुल कँवल ने खुद से कैलकुलेट करके बताया कि टीआरएस को 43 सीटें कम आई। मगर स्क्रीन पर दिख रहे नंबर और राहुल कँवल द्वारा बताए जा रहे नंबरों में विरोधाभास था।

यह अपने आप में झूठे आँकड़ों पर आधारित था कि टीआरएस ने 2016 में 99 सीटें हासिल की, जबकि वास्तव में उसे 88 सीटें आई थी। यह पहली बार नहीं है जब इंडिया टुडे ने अपने ‘डाटा इंटेलिजेंस यूनिट’ के मिसकैलकुलेशन और फैब्रिकेटेड डाटा को पास करने की कोशिश की।

आर्थिक राहत पर इंडिया टुडे का भ्रामक चार्ट

मार्च में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1.70 लाख करोड़ रुपए का पैकेज रिलीज करने का ऐलान किया ताकि कोरोना से पैदा हुए हालात से लड़ा जा सके। जैसे ही सरकार ने इस फंड की घोषणा की, इंडिया टुडे की पत्रकार गीता मोहन ने एक चार्ट शेयर किया। चार्ट में यह दर्शाया गया कि अन्य देशों के मुकाबले ये फंड कितना कम है।

डाटा इंटेलिजेंस यूनिट द्वारा बनाए गए इस चार्ट में कई त्रुटियाँ थी। इसमें दर्शाया गया कि 1.70 लाख करोड़ रुपए का फंड या फिर $22.5 बिलियन का मतलब हर व्यक्ति के हिस्से केवल $19 आता है, जो अन्य देशों द्वारा जारी किए गए फंड से बेहद कम है। जैसे जर्मनी में $7281, यूके में $ 6,246 और यूएसए में $6,042 आदि।

इस चार्ट में कई तरह से दूसरे देशों की भारत से तुलना की गई ताकि ये साबित किया जा सके कि सरकार अन्य देशों के मुकाबले कोरोना से लड़ने के लिए कम प्रयास कर रही है। लेकिन बता दें विभिन्न देशों द्वारा घोषित पैकेजों में और भारत द्वारा जारी पैकेज किसी भी रूप में तुलनीय नहीं था। अन्य देशों द्वारा घोषित अधिकांश पैकेज COVID-19 के प्रकोप के कारण होने वाले नुकसान से निपटने के लिए और अर्थव्यवस्था की मदद करने के लिए व्यापक उपाय के रूप में था। मगर भारत का पैकेज एक आर्थिक पैकेज नहीं था, ये एक कल्याणकारी पैकेज था जो केवल समाज के एक वर्ग को लक्षित करता था।

GDP पर झूठ फैला रहा था इंडिया टुडे ग्रुप का बिजनेस टुडे

गौरतलब है कि पिछले दिनों बिजनेस टुडे ने एक ग्राफ शेयर किया। इस ग्राफ में संस्थान ने G7 देशों की जीडीपी ग्रोथ दिखाई थी। ग्राफ में दावा किया गया कि यह जीडीपी ग्रोथ का आँकड़ा अप्रैल-जून 2020 के बीच का था। हालाँकि आलोक वाजपेयी नाम के ट्विटर यूजर ने इसकी पोल खोल कर रख दी। जिसके कारण संस्थान को अपना ग्राफ भी डिलीट करना पड़ा।