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‘शाहीन बाग रिटर्न्स’: गाजीपुर में आंदोलनकारी ‘किसानों’ के बीच बँटी बिरयानी, नेटिजन्स बोले- आ गया सीजन 2

केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए कृषि सुधार कानूनों को लेकर जारी किसानों के विरोध प्रदर्शन के बीच टाइम्स ऑफ़ इंडिया द्वारा साझा किया गया वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में बना हुआ है। यह वीडियो राजधानी दिल्ली के गाजीपुर क्षेत्र का है जिसमें आंदोलन कर रहे ‘किसानों’ के बीच बिरयानी बाँटी जा रही है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया के इस वीडियो के साथ कैप्शन भी लिखा हुआ है, “गाजीपुर में किसानों के विरोध-प्रदर्शन की जगह पर बिरयानी का समय हो चुका है।” वीडियो में देखा जा सकता है कि सैकड़ों लोग बिरयानी के लिए पंक्ति बना कर खड़े हैं। 

वीडियो पर कुछ ही समय में काफी प्रतिक्रियाएँ सामने आई क्योंकि इस नज़ारे ने शाहीन बाग़ की यादें ताज़ा कर दी, जब पिछले साल दिसंबर महीने में तमाम इस्लामी सीएए और एनआरसी के तथाकथित ‘विरोध’ में धरने पर बैठे थे। नेटिज़न्स ने दिल्ली की सीमाओं पर जारी ‘किसानों’ के विरोध-प्रदर्शन और शाहीन बाग में हुए विरोध-प्रदर्शन के बीच समानताएँ स्थापित करनी शुरू कर दी।    

किसानों के लिए बिरयानी ने दिलाई शाहीन बाग़ के धरने की याद 

इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए तमाम नेटिज़न्स ने विचार प्रकट किया कि किसानों का विरोध, शाहीन बाग़ प्रदर्शन का सीज़न-2 है। एक सोशल मीडिया यूज़र ने इस विरोध प्रदर्शन का ज़िक्र करते हुए लिखा, “कुदरती बिरयानी, पिंचर प्रोटेस्ट की अपार सफलता के बाद पेश है भारत की सबसे बड़ी नौटंकी का दूसरा सीज़न, शाहीनबाग़ 2। जिसकी थीम है, “कुदरती बिरयानी किसानों का विरोध-प्रदर्शन।”

एक सोशल मीडिया यूज़र ने लिखा कि ‘नए दौर के प्रदर्शनकारियों’ के लिए मुख्य भोजन बन गया है।

वहीं एक ट्विटर यूज़र ने आरोप लगाते हुए कहा कि कट्टरपंथी इस्लामी संगठन, वामपंथी दल, आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस जिन्होंने शाहीन बाग़ ‘विरोध-प्रदर्शन’ को बढ़ावा दिया वही इस तथाकथित किसान आंदोलन के पीछे हैं। 

मिहिर झा नाम के ट्विटर यूज़र को ऐसा लगा, “जब बिरयानी ब्रिगेड सड़कों पर आई” तभी “किसान आंदोलन का शाहीन बाग़ करण पूरा हो गया था” 

शाहीन बाग़ प्रदर्शन को मिली थी भरपूर फंडिंग और समर्थन (और बिरयानी भी) 

ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट ने इस मुद्दे का ज़िक्र किया ही था कि शाहीन बाग़ में धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों और सहयोगियों के बीच बिरयानी बाँटी जा रही है। बिरयानी के साथ-साथ पानी की बोतल, फलों का रस और खाने की चीज़ें भी बाँटी गई थीं। अगर इतने से बात स्पष्ट नहीं होती है तो वहाँ पर एक म्यूज़िक सिस्टम भी लगा हुआ था, जिसका प्रतिदिन का किराया आठ से दस हज़ार रुपए था। इसके अलावा वहाँ पर लगाए गए टेंट का प्रतिदिन का किराया लगभग दस से तीस हज़ार रुपए के बीच था। दिन के वक्त में वहाँ पर 200 से 300 लोग हमेशा ही बैठे रहते थे, जिन्हें मुफ्त चाय-नाश्ता और भोजन दिया जाता था। यानी इस तरह के विरोध-प्रदर्शन का प्रतिदिन खर्च लगभग दस लाख रुपए था। 

इतना ही नहीं भाजपा आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने एक वीडियो भी साझा किया था जिसमें साफ़ देखा जा सकता था कि प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को 500 से लेकर 700 रुपए तक दिए जा रहे थे। जो व्यक्ति वीडियो में नज़र आया था उसका यहाँ तक कहना था कि यह लोग शिफ्ट में काम करते थे, जिससे वहाँ भीड़ कम नज़र नहीं आए। महिलाओं को अपने खाली वक्त में वहाँ बैठने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था। व्यक्ति ने यह भी बताया कि प्रदर्शन करने वालों के प्रबंधित रूप से ‘ड्यूटी के घंटे’ तय होते थे, उसके मुताबिक़ शाहीन बाग़ धरना-प्रदर्शन स्थानीय लोगों के लिए आमदनी का ज़रिया से बढ़ कर कुछ नहीं था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शाहीन बाग़ धरने में शामिल होने वाली तमाम महिलाएँ किसानों के विरोध प्रदर्शन में भी शामिल होने पहुँची थीं। किसान यूनियन के नेताओं का दावा है कि इस विरोध-प्रदर्शन में लगभग 3 लाख किसान हिस्सा ले रहे हैं।     

देखें, देव दीपावली की अनूठी तस्वीरें: 11 लाख दीयों से जगमग हुए बनारस के घाट

देव दीपावली के खास अवसर पर सोमवार (30 नवंबर 2020) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुँचे। पीएम मोदी ने देव दीपावली उत्सव का पहला दीया प्रज्जवलित किया। पीएम के दीप जलाने के बाद गंगा के दोनों किनारों पर सजे लाखों दीप जगमगा उठें। 

चेत सिंह घाट पर लाइट एंड साउंड शो की तस्वीर

राजघाट पर दीपदान के बाद पीएम क्रूज से रविदास घाट की ओर रवाना हुए। इस दौरान घंटे भर गंगा के दोनों किनारे पर होने वाले दीपदान का नजारा लिया। चेत सिंह घाट के सामने रुक कर यहाँ रामायण पर आधारित लेजर शो को देखा। इसके बाद सड़क मार्ग से सारनाथ रवाना हुए।

लेजर शो देखने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का क्रूज रविदास घाट पहुँचा। रविदास घाट से पीएम मोदी सड़क मार्ग से सारनाथ रवाना हुए। सड़क मार्ग पर भी उनके स्वागत के लिए जगह-जगह आयोजन रखा गया था।

प्रधानमंत्री के स्वागत में इस बार गंगा के दोनों किनारे जगमगा रहे हैं। सभी 84 घाटों के साथ ही गंगा पार रेती को भी रोशन किया गया है। प्रधानमंत्री ने राजघाट पर संबोधन के बाद क्रूज से काशी की देव दीपावली का करीब एक घंटे तक नजारा देखा। 

पीएम मोदी ने कहा कि पहले काशी बार-बार आता था लेकिन इस बार आने में विलंब हो गया। जब इतना समय बीत गया तो लगता था जैसे कुछ खो गया है। आज जब आया तो मन प्रफुल्लित हो गया। आप लोगों के दर्शन से मन ऊर्जावान हो गया।

PM मोदी ने कहा, “कोरोना काल में भी एक दिन आपसे दूर नहीं रहा। कोरोना के केस कैसे बढ़ रहे, अस्पताल की व्यवस्था, गरीबों को भोजन मिल रहा है या नहीं आदि से हमेशा जुड़ा रहा। काशी में जिस तरह से सेवाभाव हुआ है, वह अद्भुत है। आपके सेवाभाव को प्रणाम करता हूँ।”

उन्होंने कहा कि आपने गरीब से गरीब की जो सेवा की है उसने मेरे दिल को छू लिया है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि आपकी सेवा में कोई कमी नहीं रहने दूँगा।

मोदी ने कहा, “मेरे लिए सौभाग्य का अवसर है कि ऐसे जगमगाते माहौल में आने का मौका मिला है। माँ गंगा की अविरल धारा की तरह यहाँ विकास की गंगा बहती रहेगी।”

उन्होंने कहा कि काशी की ओर पूरे विश्व का पर्यटन देख रहा है। विश्वनाथ मंदिर के साथ ही दुर्गा मंदिर और दूसरे मंदिरों को सुधारा जा रहा है।

घाटों की तस्वीर तेज गति से बदल रही है। सुबह बनारस को फिर से आभा मिली है।

माँ गंगा का जल भी निर्मल हो रहा है। यही तो प्राचीन भारत का आधुनिक अवतार है। यही बनारस का सदा बना रहने वाला रस है।

पीएम ने भोजपुरी में संतों को नमन के साथ संबोधन की शुरुआत की।

काशी के कोतवाल की जय, माता अन्नपूर्णा की जय, माँ गंगा की जय, जो बोले सो निहाल, नमो बुद्धाय से पीएम मोदी ने राजघाट पर अपने संबोधन की शुरुआत की और सभी को देव दीपावली, कार्तिक पूर्णिमा और गुरु नानक देव के प्रकाश पर्व की बधाई दी।

उन्होंने काशी के संतों और महापुरुषों को भोजपुरी में याद कर नमन किया। वाराणसी पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी और प्रयागराज के बीच 2474 करोड़ की सिक्स लेन परियोजना का सोमवार (नवंबर 30, 2020) की दोपहर लोकर्पण किया।

पहली बार प्रधानमंत्री बने काशी की ‘देव दीपावली’ का हिस्सा, जानिए इस महापर्व का इतिहास…

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार (30 नवंबर 2020) को दीप प्रज्वलित कर कशी में देव दीपावली महोत्सव का शुभारंभ किया। इस दौरान उनके साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी थे।

देश समेत पूरी दुनिया की निगाहें आज काशी के इस भव्य आयोजन पर टिकी हुई हैं। इस अवसर पर बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “कोरोना काल ने भले ही बहुत कुछ बदल दिया है लेकिन काशी की ये ऊर्जा, काशी की ये भक्ति, ये शक्ति उसको थोड़े कोई बदल सकता है।” प्रधानमंत्री मोदी ने इसके अलावा संस्कृति, आस्था और मूल्यों को विरासत बताते हुए कई अहम बातें कहीं। यह भारत के इतिहास में पहला ऐसा मौक़ा है जब देश का कोई प्रधानमंत्री देव दीपावली के अवसर पर काशी में मौजूद है।

ऐसा कहा जाता है कि काशी की उत्तर वाहिनी गंगा के तट पर कार्तिक पूर्णिमा को मनाई जाने वाली देव दीपावली को पूरा देवलोक धरती पर होता है। काशी के घाट पर मनाई जाने वाली देव दीपावली का इतिहास लगभग साढ़े तीन दशक पुराना है। शुरुआत हुई थी काशी के ही पंचगंगा घाट से और तब सिर्फ स्थानीय लोग घाट पर दीया जलाते थे, लेकिन पहली बार साल 1985 के दौरान मंगला गौरी मंदिर के महंत नारायण गुरु ने देव दीपावली को विस्तृत करने का प्रयास किया। अस्सी के दशक में भी स्वच्छता गंगा के घाटों के लिए बड़ी समस्या थी जिसको मद्देनज़र रखते हुए महंत नारायण गुरु ने कहा कि घाटों पर दिया जलाया जाना चाहिए। उन्होंने पंचगंगा के अलावा कुल 5 घाटों पर दीप प्रज्वलित करना शुरू किया। 

(साभार – सोशल मीडिया)

नारायण गुरु ने इस आयोजन के लिए लोगों से सहयोग माँगना भी शुरू किया, दुकानदारों से तेल और घी माँगा। धीरे-धीरे जनता इस आयोजन की सार्थकता को देखते हुए सहयोग के लिए आगे आई। एक समाचार समूह में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक नारायण गुरु का कहना था कि उस दौर में 100 दीयों पर लगभग 12 रुपए खर्च होते थे। कालान्तर में इस आयोजन का दायरा 6 घाटों से बढ़ कर मुख्य घाटों तक बढ़ गया। मंगला गौरी मंदिर के महंत नारायण गुरु की अगुवाई में 90 के दशक तक देव दीपावली का यह आयोजन काशी के 84 में से 31 घाटों तक विस्तृत हो गया था। 

इसके बाद एक और मुहिम छेड़ी गई जिसके तहत इसे काशी के हर घाट पर आयोजित करने का प्रयास हुआ और केंद्रीय देव दीपावली महासमिति का गठन हुआ। आने वाले कुछ वर्षों में काशी की देव दीपावली का स्वरूप दिव्य हो गया। इसी बीच काशी के तालाबों और जलाशयों पर भी देव दीपावली मनाने की शुरुआत हुई। कथित तौर पर 1992 के दौरान विवादित ढाँचा गिराए जाने के बाद भी काशी की देव दीपावली का विस्तार हुआ और नब्बे का दशक ख़त्म होते होते इस आयोजन की ख्याति पूरे विश्व में प्रचलित ही गई। एक मान्यता के अनुसार देवता भी देव दीपावली में शामिल होते हैं और इसके पीछे की पौराणिक कथा भी बेहद चर्चित है।

(साभार – सोशल मीडिया)

कहा जाता है कि भगवान शिव के ज्येष्ठ पुत्र और देवताओं के सेनापति कार्तिकेय ने तारकासुर का वध कर दिया था। इसके बाद उसके तीनों बेटों तारकाक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली (त्रिपुरासुर) ने देवताओं से प्रतिशोध लेने का प्रण किया। उन्होंने कठोर तपस्या की और तपस्या के बाद ब्रह्मा प्रकट हुए तब उनसे अमरता का वरदान माँगा। ब्रह्मा ने कहा यह संभव नहीं है कुछ और माँगो। तब त्रिपुरासुर ने कहा हमारे लिए तीन पुरी (नगर) का निर्माण कर दें। यह तीनों पुरी जब अभिजित नक्षत्र में एक पंक्ति में खड़ी हों और कोई क्रोधजित अत्यंत शांत अवस्था में असंभव रथ और असंभव बाण का सहारा लेकर हमारा वध करना चाहे तभी हमारी मृत्यु हो। ब्रह्मा ने उन्हें यह वरदान दे दिया। 

वरदान के अनुसार त्रिपुरासुर को तीन पुरी प्रदान की गई। तारकाक्ष के लिए स्वर्णपुरी, कमलाक्ष के लिए रजतपुरी और विद्युन्माली के लिए लौहपुरी। इसके बाद तीनों ने ऋषि-मुनियों और देवताओं पर अत्याचार करना शुरू कर दिया, देवता भी इनका कुछ नहीं कर पाए। सभी देवता शिव की शरण में गए और उन्होंने देवताओं के कहा कि सब मिल कर प्रयास क्यों नहीं करते हैं? देवताओं ने कहा हम ऐसा कर चुके हैं लेकिन हम असफल रहे हैं। फिर शिव ने त्रिपुरासुर के वध का संकल्प लिया और देवताओं ने उन्हें अपना आधा बल दे दिया। शिव ने पृथ्वी को रथ बनाया, सूर्य और चंद्रमा इस रथ के पहिये बने, सृष्टा सारथी बने, विष्णु बाण, मेरुपर्वत धनुष और वासुकी बने धनुष की डोर। 

(साभार – सोशल मीडिया)

अंत में शिव ने उस असंभव रथ पर सवार होकर धनुष चढ़ाया और अभिजित नक्षत्र में तीनों पुरी के एक पंक्ति में आते ही कठोर प्रहार किया। प्रहार के ठीक बाद तीनों पुरी जल कर भस्म हो गई और त्रिपुरासुर का भी अंत हो गया। ऐसा माना जाता है कि यह दिन कार्तिक पूर्णिमा का था। त्रिपुरासुर का अंत होते ही सभी देवता प्रफुल्लित होकर शिव की नगरी काशी पहुँचे और सभी ने गंगा के घाट पर दीप प्रज्वलित किए। यह भी एक कारण है कि कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस बार की देव दीपावली कई मायनों में विशेष है, जिसमें सबसे उल्लेखनीय है कि पहली बार देश के प्रधानमंत्री इस महापर्व का हिस्सा बन रहे हैं।   

मेरे घर में चल रहा देश विरोधी काम, बेटी ने लिए ₹3 करोड़: अब्बा ने खोली शेहला रशीद की पोलपट्टी, कहा- मुझे भी दे रही मारने की धमकी

शेहला रशीद के खिलाफ उनके पिता अब्दुल रशीद शोरा ने शिकायत दर्ज कराई है। उनका कहना है कि बेटी शेहला उन्हें मौत की धमकी दे रही है। जेके न्यूज वायर के अनुसार अब्दुल ने शेहला के खिलाफ जाँच की माँग की है।

अब्दुल शोरा के अनुसार शेहला ‘कुख्यात गतिविधियों’ में शामिल है। वे कहते हैं, “मेरे घर में राष्ट्र विरोधी गतिविधियाँ चल रही हैं।”

अब्दुल रशीद शोरा ने जम्मू-कश्मीर के डीजीपी को अपनी शिकायत दी है। उन्होंने शेहला की ‘कुख्यात गतिविधियों’ को उजागर करते हुए उसके बैंक अकाउंट की जाँच की माँग की है। 

जम्मू-कश्मीर के डीजीपी को लिखे पत्र में अब्दुल रशीद शोरा ने दावा किया कि शेहला ने कश्मीर केंद्रित राजनीति में शामिल होने के लिए ‘कुख्यात लोगों’ से 3 करोड़ रुपए नकद लिए हैं। उन्होंने माँग की है कि फिरोज पीरजादा, जहूर वटाली (एनआईए द्वारा गिरफ्तार) और रशीद इंजीनियर के बीच के ‘रहस्यमय वित्तीय डील’ की जाँच की जाए।

एडवोकेट मोनिका अरोड़ा ने भी इस ट्वीट को शेयर करते हुए लिखा है कि शेहला रशीद के पिता ने उन पर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के लिए करोड़ों रुपए लेने का आरोप लगाया है। उन्होंने पिता के तौर पर शेहला को रोकने की कोशिश की, लेकिन अब उनकी खुद की जान खतरे में है। यह बहुत ही गंभीर आरोप है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों शेहला रशीद के खिलाफ दिल्‍ली पुलिस की स्‍पेशल सेल ने देशद्रोह के साथ कई अन्‍य धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी। शेहला रशीद पर जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने के बाद मौजूदा हालात को लेकर भारतीय सेना के खिलाफ झूठी खबरें फैलाने का आरोप था।

शेहला ने भारतीय सेना पर रात में कश्‍मीर के लोगों के घरों में घुसने, गैर-कानूनी रूप से लड़कों को उठाने, घरों में छानबीन करने, चावलों में तेल मिलाने, शोपियाँ में कश्‍मीरी लड़कों को बंधक बनाकर दहशत फैलाने जैसे कई आरोप लगाए थे।

एक ट्वीट में शेहला ने जम्मू-कश्मीर की हालत बेहद खराब होने का दावा करते हुए सशस्त्र बलों पर कश्मीरियों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। सेना ने इसे खारिज करते हुए शेहला के आरोपों को बेबुनियाद बताया। साथ ही कहा था कि असामाजिक तत्व और संगठन लोगों को भड़काने के लिए फर्जी खबरें फैला रहे हैं।

चायनीज कंपनी के मुकाबले देशी मोबाइल माइक्रोमैक्स की In Note 1 के साथ शानदार वापसी, कभी हुआ करता था भारत का नंबर 1 ब्रांड

जिन लोगों को साल 2013 तक स्मार्टफोन का चस्का लग चुका था वह सभी लोग अच्छे से जानते होंगे कि मोबाइल की दुनिया में माइक्रोमैक्स की क्या धूम थी। अलग-अलग रेंज का माइक्रोमैक्स फोन हर तीसरे-चौथे सड़क चलते इंसान के हाथ में देखने को मिल जाता था। 

माइक्रोमैक्स के इतना लोकप्रिय होने के पीछे मुख्य कारण था- कम दम दाम में अपने उपभोक्ता को तमाम फीचर्स के साथ ऐसा हैवी लुक वाला फ़ोन देना, जिससे उनकी जेब पर ज्यादा असर न पड़े और सोशल लाइफ में स्टेटस भी बरकरार रहे।

साल 2014-15 तक माइक्रोमैक्स भारत की लीडिंग कंपनियों में से एक रही। लेकिन, धीरे धीरे शाओमी का सुरूर लोगों पर चढ़ना शुरू हुआ और वह माइक्रोमैक्स को छोड़ उसकी ओर आकर्षित होते गए। गलती उस समय चायनीज कंपनियों की भी नहीं थी। 

क्वालिटी कंपैरिजन में माइक्रोमैक्स की कैनवस सीरिज के कई मॉडल्स को वाकई शाओमी का M1-1S पछाड़ने लगा था। बाकी की कसर वह लोग पूरी कर रहे थे जिन्हें तकनीक की जानकारी थी। हर कोई कम दाम में अच्छे फोन का पर्याय चायनीज फोनों को बताने लगा था।

Micromax Canvas Knight Cameo A290 Vs Xiaomi Mi 3: A New Budget Superstar in  the Making? - Gizbot News
साभार: gizbot

साल 2014 के अंत में और 2015 की शुरुआत में माइक्रोमैक्स की स्थिति डंवाडोल होनी शुरू हुई और इसी बीच आया शाओमी का नोट 1। जिसकी माँग ऑनलाइन नए रिकॉर्ड कायम कर रही थी। चायनीज कंपनियों को ज्यादा समय नहीं लगा माइक्रोमैक्स से लोगों का मन दूर हटाने में।

कभी जो काम सैमसंग के साथ माइक्रोमैक्स ने किया था, वही काम चीनी कंपनियों के फोन माइक्रोमैक्स के साथ करने लगे थे। सैमसंग का ग्राहक कभी उससे दूर नहीं हुआ बस जेब को देख कर माइक्रोमैक्स की ओर आकर्षित हुआ था। लेकिन चीनी कंपनियों ने तो जैसे माइक्रोमैक्स को रिप्लेस ही कर दिया। क्वालिटी में भी भी और दाम में भी।

चीन से बैर ने उभारी माइक्रोमैक्स की नैया

जब चीनी कंपनियों को लेकर भारत सरकार ने सख्त रवैया अपनाया, तब लोगों को माइक्रोमैक्स की दोबारा याद आई। ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बढ़ावा देने व चीन का बहिष्कार करने के लिए लोगों ने माइक्रोमैक्स को टैग करके ये कहना शुरू किया कि वह चीनी मोबाइलों का विकल्प ले कर आएँ।

ये प्रतिक्रिया माइक्रोमैक्स की डूबती नैया को किनारा देने के लिए पर्याप्त थी। माइक्रोमैक्स ने 17 जून 2020 को एक यूजर को रिप्लाई देते हुए कहा था कि वोकल फॉर लोकल के लिए आपका समर्थन देख कर हमें खुशी हुई। हम बहुत मेहनत कर रहे हैं और जल्द ही कुछ बड़े के साथ आएँगे।

इस घोषणा के चंद महीनों बाद ही माइक्रोमैक्स नए रूप के साथ बाजार में लौट आया। अपनी In मोबाइल के बारे में बताते हुए कंपनी ने अपने पहले के माइक्रोमैक्स और अब के माइक्रोमैक्स डिवाइस में फर्क दिखाया। नए डिवाइस में यूज किया गया In इंडिया को रिप्रजेंट करता है।

इस मोबाइल को वैसे तो लॉन्च 3 नवंबर 2020 को किया जा चुका है लेकिन 1 दिसंबर को फ्लिपकार्ट और वेबसाइट http://micromaxinfo.com पर इसकी सेल दोपहर ऑनलाइन 12 बजे होगी। इस बार भी कंपनी ने ग्राहकों की जेब और जरूरत देखकर अपने फोन को लॉन्च किया है। इससे पहले इसकी सेल 24 नवंबर को हुई थी।

In Note 1 बाय माइक्रोमैक्स को दो वेरिएंट्स में लॉन्च किया गया है। इस फोन के 4GB रैम 64GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत 10,999 रुपए तय की गई है। वहीं दूसरे 4GB रैम और 128GB स्टोरेज वेरिएंट को 12,499 रुपए में खरीदा जा सकेगा।

Micromax IN Note 1 Sells Out Within Minutes Of Going On Sale

माइक्रोमैक्स ने अपने in फोन में कैमरे में खास ध्यान दिया है। इसके AI क्वॉड कैमरा (चार कैमरों का सेटअप) सेटअप दिया गया है, जिसमें 48 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा सेंसर मिलेगा। वहीं मॉड्यूल में 5 मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाइड, 2 मेगापिक्सल का मैक्रो और 2 मेगापिक्सल डेप्थ सेंसर भी दिया गया है। सेल्फी के लिए फोन में 16 मेगापिक्सल का कैमरा है। बैटरी पावर के लिए फोन में 5000mAh की दमदार बैटरी दी गई है जो कि 18W के फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आएगी।

डिस्प्ले इसका 6.67 इंच का IPD LCD डिस्प्ले फुल HD+ रेजोलूशन के साथ दिया गया है। खास बात ये है कि ये फोन MediaTek Helio G85 प्रोसेसर से लैस है। वहीं प्रोसेसर की बात करें तो नए फोन में एंड्रॉयड 10 ऑपरेटिंग सिस्टम दिया गया है और इसे अगले दो साल में एंड्रॉयड 11 और एंड्रॉयड 12 अपडेट दिया जाएगा।

अब भारतीयों की ओर से चायनीज कंपनी के बहिष्कार का एक नजारा हम पिछले कुछ महीनों में कई एप्स और उत्पादों पर देख ही चुके हैं। लेकिन 24 नवंबर को सेल पर लगे इस फोन ने भी यह साबित किया कि भारतीय वाकई वोकल और लोकल को सपोर्ट करने के लिए आगे आ रहे हैं जिसके चलते यह फोन 30 मिनट के अंदर सोल्ड आउट हो गया।

भारत के इस प्यार को देख माइक्रोमैक्स भी भावनाएँ प्रकट करने से नहीं रुक पाया। उन्होंने लिखा, “इंडिया ने अपना प्यार दिखा दिया। धन्यवाद IN for India के लिए और दिल से हमारे स्वागत के लिए। अब अगले हफ्ते आएँगे, 1 दिसंबर को 12 बजे और अधिक स्टॉक के साथ।”

PM किसान सम्मान निधि: किसानों के खाते में 7वीं किस्त 1 दिसंबर से, इस तरह चेक करें लिस्ट में नाम है या नहीं

रबी की फसल खासकर गेहूँ की बुवाई के बाद खाद-पानी के लिए सातवीं किस्त का इंतजार रहे किसानों के खाते में कुछ घंटों बाद मोदी सरकार 2000 रुपए की रकम भेजेगी। इस वित्तीय वर्ष की तीसरी और योजना की शुरुआत से 7वीं किस्त 1 दिसंबर से आनी शुरू हो जाएगी।

बता दें कि मोदी सरकार सलाना 6000 रुपए किसानों को तीन किस्तों में देती है। पहली किस्त अप्रैल से जुलाई, दूसरी किस्त अगस्त से नवंबर और तीसरी किस्त दिसंबर से मार्च तक आती है। अगर आप भी 7वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं तो लिस्ट में अपना नाम देख लें। कहीं ऐसा न हो कि दस्तावेजों में गड़बड़ी के चलते परेशानी उठानी पड़ जाए।

रिकॉर्ड में कोई भी गड़बड़ी होने पर निश्चित तौर पर आपको योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। कृषि मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, 1.3 करोड़ किसानों को आवेदन करने के बाद भी इसलिए पैसा नहीं मिल सका, क्योंकि या तो उनके रिकॉर्ड में गड़बड़ी थी या फिर आधार कार्ड नहीं है। नाम की स्पेलिंग में गड़बड़ी से भी पैसा रुक सकता है। बता दें कि पिछले 23 महीने में केंद्र सरकार 11.17 करोड़ किसानों को सीधे 95 करोड़ रुपए से अधिक की मदद दे चुकी है।

किसान कैसे करें पहली बार रजिस्ट्रेशन

  • अगर आपने अभी तक पीएम किसान सम्मान निधि पाने के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं किया है, तो आप अपना रजिस्ट्रेशन कराने के बाद योजना का फायदा उठा सकते हैं। सबसे पहले आपको इस योजना से जुड़ी आधिकारिक साइट पर जाना होगा। जिसमें फार्मर्स कॉर्नर का ऑप्शन दिखाई देगा। उस पर न्यू फार्मर रजिस्ट्रेशन कॉलम पर क्लिक करें।
  • इसके बाद आपके सामने एक नई विंडो खुलेगी, जिसमें आपको आधार कार्ड का विवरण भरना है। फिर क्लिक हियर टू कॉनिटन्यू पर क्लिक करना पड़ेगा। इसके बाद आपके सामने एक अन्य पेज खुलेगा, जिसमें अगर आप पहले रजिस्ट्रेशन करा चुके हों, तो आपका विवरण आ जाएगा और अगर रजिस्ट्रेशन पहली बार कर रहे हैं, तो लिखा आएगा कि RECORD NOT FOUND WITH GIVEN DETAILS, DO YOU WANT TO REGISTER ON PM-KISAN PORTAL इस पर आपको YES करना होगा।
  • इसके बाद फॉर्म दिखेगा जिसे भरना होगा। इसमें सही-सही जानकारी भरने के बाद सेव कर दें। इसके बाद आपके सामने एक नया पेज खुलेगा, जिसमें आपसे आपकी जमीन का ब्यौरा माँगा जाएगा। खास तौर पर खसरा नंबर और खाता नंबर आदि का। इसे भरकर सेव कर दें। सेव करते ही रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। आपको एक रजिस्ट्रेशन नंबर और रिफरेंस नंबर मिलेगा जिसे अपने पास सँभाल लें। इसके बाद पैसा आना शुरू हो जाएगा।

लिस्ट ऑनलाइन देखने के लिए आसान स्टेप

  • वेबसाइट pmkisan.gov.in पर जाएँ। 
  • होम पेज पर मेन्यू बार देखें और यहाँ ‘फार्मर कार्नर’ पर जाएँ। 
  • लाभार्थी सूची के लिंक पर क्लिक करें।
  • इसके बाद अपना राज्य, जिला, उप-जिला, ब्लॉक और गाँव का विवरण दर्ज करें।
  • इतना भरने के बाद Get Report पर क्लिक करें और पूरी लिस्ट पाएँ।

लिस्ट में नाम न होने पर इस नंबर पर करें शिकायत

कई लोगों के नाम पिछली लिस्ट में थे। लेकिन नई लिस्ट में नहीं है तो इसकी शिकायत आप पीएम किसान सम्मान के हेल्पलाइन नंबर पर दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए आप हेल्पलाइन नंबर 011-24300606 पर कॉल कर शिकायत कर सकते हैं। 

मंत्रालय से ऐसे करें संपर्क 

  • पीएम किसान टोल फ्री नंबर: 18001155266
  • पीएम किसान हेल्पलाइन नंबर:155261
  • पीएम किसान लैंडलाइन नंबर्स: 011—23381092, 23382401
  • पीएम किसान की नई हेल्पलाइन: 011-24300606
  • पीएम किसान की एक और हेल्पलाइन है: 0120-6025109
  • ई-मेल आईडी: [email protected]

ऐसे जानें आपको अब तक कितनी किस्त मिली

  • पहले पीएम किसान (PM Kisan) की आधिकारिक वेबसाइट https://pmkisan.gov.in/ पर जाएँ।
  • यहाँ आपको राइट साइड पर ‘Farmers Corner’ का विकल्प मिलेगा।
  • यहाँ ‘Beneficiary Status’ के ऑप्शन पर क्लिक करें। नया पेज खुल जाएगा।
  • नए पेज पर आधार नंबर, बैंक खाता संख्या या मोबाइल नंबर में से किसी एक विकल्प को चुनिए। आपने जिस विकल्प का चुनाव किया है, उसका नंबर भरिए। इसके बाद ‘Get Data’ पर क्लिक करें।
  • यहाँ क्लिक करने के बाद आपको सभी ट्रांजेक्शन की जानकारी मिल जाएगी। यानी कौन सी क़िस्त कब आपके खाते में आई और किस बैंक अकाउंट में क्रेडिट हुई।  

‘TMC= टेररिस्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनी, युवाओं के बीच भी यही धारणा है’: BJP ने बंगाल के ‘भाईपो’ की बदजुबानी को बनाया निशाना

भाजपा ने पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) को ‘टेररिस्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनी’ करार दिया है। इधर ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को ‘गुंडा’ और राज्य में पार्टी के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय को ‘बाहरी’ करार दिया। दिलीप घोष ने अभिषेक बनर्जी को ‘बच्चा’ बताया है।

पश्चिम बंगाल में भाजपा के उपाध्यक्ष राजू बनर्जी ने TMC के लिए ‘टेररिस्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनी’ वाला तमगा इस्तेमाल किया। बता दें कि अभिषेक बनर्जी सांसद भी हैं और पार्टी में उन्हें अगला नेतृत्व माना जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय सहित भाजपा के कई बड़े नेताओं को बाहरी बताया।

दिलीप घोष ने उनके आरोपों का जवाब देते हुए कहा, “सभी ने पंचायत चुनाव में देखा है कि कौन गुंडा है। उन्होंने मुझे न केवल एक ठग बताया, बल्कि माफिया भी कहा है। माफिया कौन है, यह आप समझ सकते हैं। उनके काफिले में 25 कारें होती हैं और हर कोई जानता है कि उनके पास क्या-क्या है। वास्तविकता ये है कि उनकी हताशा उच्चतम स्तर पर चली गई है।”

वहीं राजू बनर्जी ने अपने बयान में कहा, “समय के साथ, TMC का अर्थ बदलता रहा है। अब यह टेररिस्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (आतंकवादी विनिर्माण कंपनी) बन गई है। युवाओं के बीच भी भी यही धारणा है। तृणमूल कार्यकर्ता भी ऐसा सोचते हैं और इसलिए वे कब्रिस्तानों की दीवारों पर लिख रहे हैं कि TMC 2021 में आ रही है।” हाल ही में कैलाश विजायवर्गीय ने कहा था कि अब TMC की लगाम भाईपो (भतीजे) के साथ में चली गई है, कोई स्वाभिमानी व्यक्ति वहाँ कैसे टिक सकता है?

ममता बनर्जी की पार्टी फ़िलहाल बगावतों से जूझ रही है। जहाँ 6 जिलों और 35 विधानसभा सीटों पर प्रभाव रखने वाले अधिकारी परिवार के शुभेंदु ने कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया है, वहीं कूच विहार के विधायक मिहिर गोस्वामी भाजपा में चले गए हैं। जटू लाहिड़ी ने भी असंतोष जताया है। उन्होंने कहा है, “प्रशांत किशोर को पार्टी में किराए पर रखा गया है। उनकी नियुक्ति होने के बाद से सभी तरफ से नुकसान होना शुरू हो गया है।” 

पोर्न वीडियो दिखा कर कास्टिंग डायरेक्टर ने हिरोइन के साथ किया कई बार रेप, देता था शादी का झाँसा: FIR दर्ज

टीवी और वेब सीरीज की एक्ट्रेस ने बॉलीवुड के कास्टिंग डायरेक्टर आयुष तिवारी पर रेप का आरोप लगाया है। एक्ट्रेस की शिकायत पर मुंबई के वर्सोवा पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज किया गया है। कास्टिंग डायरेक्टर के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 के तहत मामला दर्ज किया गया है और मामले की जाँच शुरू कर दी गई है।

इस मामले में कास्टिंग डायरेक्टर का कोई रिएक्शन नहीं आया है और न ही किसी की गिरफ्तारी अभी तक हुई है। पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा है कि आरोपित पिछले कुछ दिनों से उसे पोर्न वीडियो भेज परेशान कर रहा है।

पिछले दो साल से आरोपित को जानती थी एक्ट्रेस

वर्सोवा पुलिस ने मामले में जाँच शुरू करते हुए एक्ट्रेस का बयान दर्ज कर लिया है। पुलिस ने अगले सप्ताह आयुष को पूछताछ के लिए बुलाया है। एक्ट्रेस ने आरोप लगाया है कि आयुष तिवारी ने शादी का झाँसा देकर कई बार रेप किया है। एक्ट्रेस को एक वेब सीरीज के लिए आयुष तिवारी ने कास्ट किया था। जाँच में सामने आया है कि पीड़िता आरोपित को पिछले दो साल से जानती थी।

पोर्न वीडियो दिखाकर रेप का आरोप

वर्सोवा पुलिस के मुताबिक, आयुष तिवारी ने पीड़िता को शादी का लालच दिया और दो साल तक उसके साथ बलात्कार किया। पीड़िता ने आरोपित आयुष तिवारी पर पोर्न वीडियो दिखाकर रेप करने का आरोप लगाया है। पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा है:

“आयुष अश्लील वीडियो दिखाकर मेरे साथ रेप करता था। कुछ समय पहले मैंने आयुष का साथ छोड़ दिया था। साथ छोड़ने के बावजूद वह मोबाइल फोन से अश्लील वीडियो भेज रहा है।”

एक्ट्रेस ने यह भी कहा है कि आरोपित पिटाई करता था। आरोपित का घर छोड़ने के बाद पीड़िता ने अपने भाई को इसकी जानकारी दी। उसने भी आयुष तिवारी को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माना। आखिरकार पीड़िता वर्सोवा पुलिस स्टेशन पहुँची और शिकायत दर्ज कराई।

वर्सोवा के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक राघवेंद्र ठाकुर ने कहा, “हमने आरोपित के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। फिलहाल कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। हम मामले की जाँच कर रहे हैं।”

पहले शादी तुड़वाऊँगा फिर धर्म परिवर्तन करवाकर निकाह करूँगा: तमंचा लेकर हिंदू लड़की के घर में घुसा उवैस

उत्तर प्रदेश के बरेली में शुक्रवार (नवंबर 27, 2020) को ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) का मामला उजागर हुआ है। एक मुस्लिम युवक तमंचा लेकर एक शादीशुदा हिंदू लड़की के घर में घुस गया और विरोध करने पर धमकी देने लगा

लड़के ने घर में घुसते ही लड़की को बुला कर कहा कि वह उसके बिना नहीं रह सकता और उसकी शादी तुड़वा कर उससे निकाह करके ही रहेगा। लड़की के परिवार ने यह सब देखने के बाद डर से लड़के के ख़िलाफ़ देवरिया थाने में शनिवार को मुकदमा दर्ज करवाया है

मामला शरीफ नगर गाँव का है। लड़की के पिता ने अपनी शिकायत में पुलिस को कहा है कि उनकी बेटी इंटर कॉलेज की पढ़ाई के दौरान उवैस के संपर्क में आई थी। उवैस ने उसे अपने जाल में फँसाया और जब लड़की ने 2019 में बीए में एडमिशन लिया तो वह उसे बहलाकर अपने साथ भोपाल ले गया।

उस समय लड़की के घरवालों ने पुलिस में शिकायत नहीं की थी। गाँव में एक पंचायत बैठी थी और उसमें निर्णय लिया गया कि मुकदमा दर्ज नहीं करवाया जाएगा और उवैस उनकी लड़की को वापस कर देगा।

इसके बाद उवैस लड़की को चौराहे पर छोड़ गया, लेकिन लड़की पर धर्मांतरण और निकाह के लिए लगातार दबाव बनाता रहा। धमकियों का सिलसिला बंद न होने पर लड़की के पिता ने उसकी पढ़ाई छुड़वा दी और जून में उसकी शादी कर दी।

युवती जब अपने ससुराल चली गई तो उवैस उसके घरवालों को परेशान करने लगा। कुछ दिन बाद उसने कहा कि उसने लड़की के ससुराल का पता लगा लिया है, जल्द ही वह वहाँ जाकर उसकी शादी तुड़वाएगा और फिर उससे निकाह करेगा।

उवैस की बातें सुनकर लड़की के पिता के मन में डर बैठ गया। वह बेटी को अपने घर ले आए। जब उवैस को इसकी खबर हुई तो वह तमंचा लेकर घर में आया और सबको धमकी देने लगा। अंत में परिवार ने तंग आकर शिकायत करवाई।

पुलिस ने इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि हाल में जो अध्याधेश (विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम’) जारी हुआ है, उसकी धारा 3 व 5 के तहत यह मुकदमा दर्ज हुआ है। इसके अलावा आईपीसी की अन्य धाराएँ भी उवैस के ख़िलाफ़ लगाई गई हैं। लड़का फिलहाल फरार है और उसकी गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा है।

यहाँ बता दें कि ‘लव जिहाद’ के ख़िलाफ़ कानून बनाए जाने के बाद ये पहला मामला बरेली में दर्ज हुआ है। इससे पहले एक केस में एक युवती ने पुलिस थाने में ताहिर हुसैन और उसके परिवार के खिलाफ मजहब छिपाकर शादी करने की रिपोर्ट दर्ज कराई है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मुख्य आरोपित को जेल भेज दिया है।

‘झूठ फैलाना कुछ लोगों का पेशा’: PM मोदी ने कहा- विरोध का आधार फैसला नहीं, बल्कि आशंकाओं को बनाया जा रहा है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (नवंबर 30, 2020) को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में 6 लेन सड़क मार्ग का उद्घाटन किया। उनके दौरे से पहले न सिर्फ वहाँ पर घाटों की साफ़-सफाई की गई, बल्कि सुरक्षा का भी विशेष ख्याल रखा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देव-दीपावली का पहला दीपक जलाएँगे। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग 19 का भी उद्घाटन किया, जो 2 प्राचीन राजमार्गों को जोड़ता है। उन्होंने कृषि कानूनों और किसानों के प्रदर्शन पर भी बात की।

ये सड़क वाराणसी को प्रयागराज से जोड़ती है। इस सड़क के निर्माण में 2447 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। इस राजमार्ग के चालू होने के बाद दोनों शहरों की दूरी 3 घंटे कम हो जाएगी। मात्र 1 घंटा में लोग वाराणसी से प्रयागराज की यात्रा कर सकेंगे। घाटों का सौंदर्यीकरण भी किया गया है। देव-दीपावली के दौरान काशी के 84 घाटों पर 15 लाख दीपक जगमगाएँगे। पीएम मोदी गंगा नदी में तैनात क्रूज से जलमार्ग से विश्वनाथ धाम पहुँचे

इस दौरान जनता को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में काशी के सौंदयीकरण के साथ-साथ यहाँ की कनेक्टिविटी पर जो काम हुआ है, उसका लाभ अब आप सभी देख रहे हैं। उन्होंने जनता से कहा कि नए हाईवे हो, पुल-फ्लाईओवर हो, ट्रैफिक जाम कम करने के लिए रास्तों को चौड़ा करना हो, जितना काम बनारस और आसपास में अभी हो रहा है, उतना आजादी के बाद कभी नहीं हुआ।

पीएम ने समझाया कि जब किसी क्षेत्र में आधुनिक कनेक्टिविटी का विस्तार होता है, तो इसका बहुत लाभ हमारे किसानों को होता है। उन्होंने जानकारी दी कि बीते वर्षों में ये प्रयास हुआ है कि गाँवों में आधुनिक सड़कों के साथ भंडारण, कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्थाएँ खड़ी की जाएँ और इसके लिए 1 लाख करोड़ रुपए का फंड भी बनाया गया है। पीएम ने बताया कि वाराणसी में पेरिशेबल कार्गो सेंटर बनाया गया है।

इसके बनने के कारण अब यहाँ के किसानों को फल और सब्जियों को स्टोर करके रखने और उन्हें आसानी से बेचने की बहुत बड़ी सुविधा मिली है। पीएम मोदी ने कहा कि इस स्टोरेज कैपेसिटी के कारण पहली बार यहाँ के किसानों की उपज बड़ी मात्रा में निर्यात हो रही है। पीएम ने याद दिलाया कि कैसे चंदौली के किसानों की आय बढ़ाने के लिए 2 साल पहले काले चावल की एक वैरायटी का प्रयोग यहाँ किया गया था।

उन्होंने बताया कि पिछले साल खरीफ के सीज़न में करीब 400 किसानों को ये चावल उगाने के लिए दिया गया और साथ ही इन किसानों की एक समिति बनाई गई, इसके लिए मार्केट तलाश किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों औऱ आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर से किसानों को कितना लाभ हो रहा है, इसका एक बेहतरीन उदाहरण चंदौली का काला चावल (ब्लैक राइस) है। पीएम मोदी ने कहा कि ये चावल चंदौली के किसानों के घरों में समृद्धि लेकर आ रहा है।

दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के बीच वाराणसी पहुँचे पीएम मोदी ने कहा कि भारत के कृषि उत्पाद पूरी दुनिया में मशहूर हैं। उन्होंने पूछा कि क्या किसान की इस बड़े मार्केट और ज्यादा दाम तक पहुँच नहीं होनी चाहिए? साथ ही पूछा कि अगर कोई पुराने सिस्टम से ही लेनदेन ही ठीक समझता है तो, उस पर भी कहाँ रोक लगाई गई है? नए कृषि सुधारों से किसानों को नए विकल्प और नए कानूनी संरक्षण दिए गए हैं।

उन्होंने याद दिलाया कि कैसे पहले मंडी के बाहर हुए लेनदेन ही गैरकानूनी थे, वहीं अब छोटा किसान भी, मंडी से बाहर हुए हर सौदे को लेकर कानूनी कार्यवाही कर सकता है। उन्होंने दावा किया कि किसान को अब नए विकल्प भी मिले हैं और धोखे से कानूनी संरक्षण भी मिला है। उन्होंने कहा कि सरकारें नीतियाँ बनाती हैं, कानून-कायदे बनाती हैं। नीतियों और कानूनों को समर्थन भी मिलता है तो कुछ सवाल भी स्वभाविक ही हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र का हिस्सा बताया और कहा कि भारत में ये जीवंत परंपरा रही है। पीएम ने कहा:

“पिछले कुछ समय से एक अलग ही ट्रेंड देश में देखने को मिल रहा है। पहले होता ये था कि सरकार का कोई फैसला अगर किसी को पसंद नहीं आता था तो उसका विरोध होता था। लेकिन बीते कुछ समय से हम देख रहे हैं कि अब विरोध का आधार फैसला नहीं, बल्कि आशंकाओं को बनाया जा रहा है। दुष्प्रचार किया जाता है कि फैसला तो ठीक है लेकिन इससे आगे चलकर ऐसा हो सकता है। जो अभी हुआ ही नहीं, जो कभी होगा ही नहीं, उसको लेकर समाज में भ्रम फैलाया जाता है। कृषि सुधारों के मामले में भी यही हो रहा है। ये वही लोग हैं जिन्होंने दशकों तक किसानों के साथ लगातार छल किया है। MSP तो घोषित होता था लेकिन MSP पर खरीद बहुत कम की जाती थी। सालों तक MSP को लेकर छल किया गया। किसानों के नाम पर बड़े-बड़े कर्जमाफी के पैकेज घोषित किए जाते थे। लेकिन छोटे और सीमांत किसानों तक ये पहुँचते ही नहीं थे। यानी, कर्ज़माफी को लेकर भी छल किया गया।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसानों के नाम पर बड़ी-बड़ी योजनाएँ घोषित होती थीं, लेकिन वे खुद मानते थे कि 1 रुपए में से सिर्फ 15 पैसे ही किसान तक पहुँचते थे। उन्होंने इसे योजनाओं के नाम पर छल करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब इतिहास छल का रहा हो, तब 2 बातें स्वभाविक हैं। पहली ये कि किसान अगर सरकारों की बातों से कई बार आशंकित रहता है तो उसके पीछे दशकों का इतिहास है। दूसरी ये कि जिन्होंने वादे तोड़े, छल किया, उनके लिए ये झूठ फैलाना मजबूरी बन चुका है कि जो पहले होता था, वही अब भी होने वाला है।

उन्होंने चुनौती दी कि जब इस सरकार का ट्रैक रिकॉर्ड देखेंगे तो सच अपने आप सामने आ जाएगा। पीएम ने याद दिलाया कि भाजपा ने यूरिया की कालाबाज़ारी रोकने का वादा किया था और किसान को पर्याप्त यूरिया देने की बात की थी। उन्होंने कहा कि सरकार ने बीते 6 साल में यूरिया की कमी नहीं होने दी। यहाँ तक कि लॉकडाउन में जब हर गतिविधि बंद थी, तब भी दिक्कत नहीं आने दी गई।

उन्होंने कहा कि हमने वादा किया था कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुकूल लागत का डेढ़ गुणा MSP देंगे और ये वादा सिर्फ कागज़ों पर ही पूरा नहीं किया गया, बल्कि किसानों के बैंक खाते तक पहुँचाया गया है। बकौल पीएम मोदी, सिर्फ दाल की ही बात करें तो 2014 से पहले के 5 सालों में लगभग साढ़े 6 सौ करोड़ रुपए की ही दाल किसान से खरीदी गईं, लेकिन इसके बाद के 5 सालों में हमने लगभग 49 हज़ार करोड़ रुपए की दालें खरीदी हैं। अर्थात, लगभग 75 गुणा बढ़ोतरी।

प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि 2014 से पहले के 5 सालों में पहले की सरकार ने 2 लाख करोड़ रुपए का धान खरीदा था। लेकिन इसके बाद के 5 सालों में 5 लाख करोड़ रुपए धान के MSP के रूप में किसानों तक हमने पहुँचाए हैं। उन्होंने आँकड़े गिनाते हुए साबित किया कि लगभग ढाई गुणा ज्यादा पैसा किसान के पास पहुँचा है। 2014 से पहले के 5 सालों में गेहूँ की खरीद पर डेढ़ लाख करोड़ रुपए के आसपास ही किसानों को मिला। वहीं भाजपा की सरकार में 5 सालों में 3 लाख करोड़ रुपए गेहूँ किसानों को मिल चुका है, लगभग 2 गुणा।

इसके बाद पीएम मोदी ने सवाल दागा कि अगर मंडियों और MSP को ही हटाना था, तो इनको ताकत देने, इन पर इतना निवेश ही क्यों करते? साथ ही बताया कि मोदी सरकार तो मंडियों को आधुनिक बनाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। उन्होंने लोगों को ये याद रखने को कहा कि यही लोग हैं जो पीएम किसान सम्मान निधि को लेकर लोग सवाल उठाते थे। ये लोग अफवाह फैलाते थे कि चुनाव को देखते हुए ये पैसा दिया जा रहा है और चुनाव के बाद यही पैसा ब्याज सहित वापस देना पड़ेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि एक राज्य में तो वहाँ की सरकार, अपने राजनीतिक स्वार्थ के चलते आज भी किसानों को इस योजना का लाभ नहीं लेने दे रही है। देश के 10 करोड़ से ज्यादा किसान परिवारों के बैंक खाते में सीधी मदद दी जा रही है। अब तक लगभग 1 लाख करोड़ रुपए किसानों तक पहुँच भी चुका है। उन्होंने आश्वासन दिया कि उन्हें एहसास है कि दशकों का छलावा किसानों को आशंकित करता है। लेकिन अब छल से नहीं गंगाजल जैसी पवित्र नीयत के साथ काम किया जा रहा है।

पीएम मोदी ने कहा कि आशंकाओं के आधार पर भ्रम फैलाने वालों की सच्चाई लगातार देश के सामने आ रही है और जब एक विषय पर इनका झूठ किसान समझ जाते हैं, तो ये दूसरे विषय पर झूठ फैलाने लगते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया की जिन किसान परिवारों की अभी भी कुछ चिंताएँ हैं, कुछ सवाल हैं, तो उनका जवाब भी सरकार निरंतर दे रही है। साथ ही विश्वास जताया कि आज जिन किसानों को कृषि सुधारों पर कुछ शंकाएँ हैं, वो भी भविष्य में इन कृषि सुधारों का लाभ उठाकर, अपनी आय बढ़ाएँगे।