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‘किसान आंदोलन’ के बीच एक्टिव हुआ Pak, पंजाब के रास्ते आतंकी हमले के लिए चीन ने ISI को दिए ड्रोन्स’: ख़ुफ़िया रिपोर्ट

अब जब भारत की मुस्तैदी के कारण चीन सीमा पर सीधे संघर्ष में लगातार मात खा रहा है तो उसने पाकिस्तान वाला रवैया अपनाते हुए आतंकियों की मदद करनी शुरू कर दी है। पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी संगठन और इसके इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) की नई साजिश है कि अब जम्मू कश्मीर के साथ-साथ पंजाब के रास्ते चीन के ड्रोन्स के माध्यम से खतरनाक हथियार व अन्य दहशत का साजो-सामान भेजा जाएगा।

HT की खबर के अनुसार, काउंटर टेरर ऑपरेशंस से जुड़े अधिकारियों ने जानकारी दी है कि आतंकवादी संगठन और ISI की ओर से ड्रग्स और हथियारों की तस्करी के लिए कुछ वर्षों तक छोटे ड्रोन्स के इस्तेमाल के बाद इन्होंने अपग्रेडेड ड्रोन्स की खरीददारी की है, जो अधिक मात्रा में हथियार और विस्फोटक सीमा के पार भेजने में सक्षम हैं। फ़िलहाल LOC पर भारी बर्फ़बारी हुई है और जिहादी आतंकी सीमा पार नहीं कर पा रहे हैं।

इसीलिए, अब चीन ने पाकिस्तान को अपने ड्रोन्स मुहैया कराने शुरू कर दिए हैं, ताकि उनका इस्तेमाल कर के पंजाब के रास्ते भारत में दहशत फैलाने की सामग्री भेजी जा सके। जम्मू कश्मीर में हाल के महीनों में जिस तरह से सुरक्षा बलों ने आतंकियों का सफाया शुरू किया है और विकास कार्यों के साथ-साथ DDC के चुनाव भी हुए हैं, उसने आतंकियों को परेशान कर दिया है और वो बड़े हमले की फिराक में लगे हुए हैं।

‘हिन्दुतान’ में प्रकाशित शिशिर गुप्ता की खबर के अनुसार, ख़ुफ़िया रिपोर्ट्स में सबसे बड़ा खुलासा ये हुआ है कि पाकिस्तान में मौजूद खालिस्तानी संगठनों को उनके आका पंजाब में हो रहे ‘किसान आंदोलन’ का फायदा उठाकर राज्य में दहशतगर्दी को दोबारा जिंदा करने के लिए तमाम तरह की साजिश रच रहे हैं। ‘किसान आंदोलन’ में जिस तरह से भारतीय प्रतीक चिह्नों का अपमान हुआ है और इस्लामी सक्रियता देखी गई है, उससे भी इस ख़ुफ़िया सूचना को बल मिलता है।

केवल पंजाब की ही बात करें तो अगस्त 12, 2019 से लेकर अब तक 4 चाइनीज ड्रोन्स जब्त किए जा चुके हैं। न सिर्फ इन चाइनीज कमर्शियल ड्रोन्स से सामान पहुँचाए जा सकते हैं, बल्कि अलर्ट में ये भी कहा गया है कि इनका इस्तेमाल कर सीमा पर तैनात भारतीय जवानों पर गोलीबारी भी हो सकती है। सीमा पर नजदीकी लक्ष्यों को निशाना बना कर हमले की भी आशंका है, जिसके बाद इस सम्बन्ध में सतर्कता बरती जा रही है।

लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के बड़े नेताओं के साथ अप्रैल 2020 में हुई बैठक में भी चाइनीज ड्रोन्स का इस्तेमाल कर के भारत पर हमला करने के विकल्प का खाका पेश किया गया था। POK के कोटली स्थित ब्रिगेड मुख्यालय में भी इस पर विचार-विमर्श हुआ था। अब जब धुंध का मौसम लगभग आ ही गया है, भारत भी एंटी-ड्रोन्स टेक्नोलॉजी को मजबूत करने में जुटा है। BSF ने जून में ऐसे ही एक बड़े ड्रोन को पकड़ा था।

अक्टूबर में भी खबर आई थी कि पाकिस्तान की फ़ौज अब आतंकियों को ड्रोन्स का इस्तेमाल कर के बम बरसाने की ट्रेनिंग दे रही है, ताकि जम्मू कश्मीर के हिस्सों को निशाना बनाया जा सके। ISIS सालों से इराक और सीरिया में क्वाडकॉप्टर ड्रोन्स की मदद से बमबारी कर के इस फॉर्मूले को आजमाता रहा है। ISIS ने इसी तरह से ‘Killer Bees’ के जरिए कई देशों में तबाही मचाई है और उसके ड्रोन्स को रोकने के लिए अमेरिका और कई ड्रोन बनाने वाली कंपनियों को नई तकनीकों पर काम करना पड़ा।

BARC के रॉ डेटा के बिना ही ‘कुछ खास’ को बचाने के लिए जाँच करती रही मुंबई पुलिस: ED ने किए गंभीर खुलासे

10 दिन पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने TRP मामले में प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट यानी ECIR दर्ज की। ECIR पुलिस एफआईआर के समतुल्य होती है। ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों और उन सभी चैनल की जाँच करेगी, जिनका उल्लेख ओरिजनल एफआईआर (FIR) में किया गया है।

10 दिनों के बाद, ऑपइंडिया को पता चला है कि ईडी ने पहले ही हंसा रिसर्च के अधिकारियों को तलब किया है, जिनके FIR के आधार पर मूल जाँच शुरू की गई थी। बता दें कि हंसा रिसर्च द्वारा की गई प्रारंभिक एफआईआर में इंडिया टुडे और कुछ स्थानीय चैनलों को कथित टीआरपी घोटाले में मुख्य आरोपित के रूप में दर्ज किया गया था। हालाँकि, मुंबई पुलिस कमिश्नर परम बीर सिंह ने इस एफआईआर के दर्ज होने के 48 घंटों के भीतर ही एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया और अर्णब गोस्वामी के मीडिया चैनल ‘रिपब्लिक टीवी’ पर टीआरपी घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया।

दिल्ली ईडी के सूत्रों के मुताबिक, ईडी द्वारा पूछताछ किए जाने के दौरान हंसा रिसर्च ने इंडिया टुडे का नाम लिया था न कि रिपब्लिक टीवी का। इसके अलावा, जब दो BARC अधिकारियों को तलब किया गया, एक उनके सतर्कता विभाग से और दूसरा IT विभाग से, दोनों ने यह बताया कि मुंबई पुलिस ने BARC से कोई भी रॉ डेटा नहीं लिया था।

यहाँ रॉ डेटा का मतलब लगाए गए बार-ओ-मीटर के डिटेल से है। हंसा रिसर्च समूह प्राइवेट लिमिटेड द्वारा की गई शिकायत में आरोप लगाया गया था कि BARC द्वारा लगाए गए बार-ओ मीटर के साथ बदलाव किए जाते हैं। यह समूह BARC द्वारा तैयार किए गए बार-ओ मीटर इंस्टॉल करता है। हंसा रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में इंडिया टुडे का नाम लिया। आरोप है कि वो जिन घरों में बार-ओ मीटर लगे हुए हैं उन्हें रुपए का लालच तक देते थे जिससे वह अपना टीवी चालू रखें। 

प्रवर्तन निदेशालय द्वारा BARC अधिकारियों की पूछताछ के दौरान यह प्रमुख चूक सामने आई, जो अब मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से TRP के मामले में दिख रही है। BARC ने ED को बताया कि मुंबई पुलिस द्वारा बुलाए जाने के बावजूद, उन्होंने BARC के बुनियादी रॉ डेटा के लिए नहीं पूछा, जो कि इस जाँच का शुरुआती बिंदु होना चाहिए।

ईडी के सूत्रों ने यह भी खुलासा किया है कि BARC अधिकारियों को जाँच के लिए 48 घंटों के भीतर आँकड़ों के साथ तलब किया गया है। ऑपइंडिया को बताया गया है कि इस जाँच के पूरी हो जाने के बाद इंडिया टुडे के अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। 

गौरतलब है कि 8 अक्टूबर को आयोजित एक प्रेस वार्ता में मुंबई पुलिस कमिश्नर ने रिपब्लिक टीवी और अर्णब गोस्वामी पर कई गम्भीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि चैनल ने टीआरपी से जुड़ी जानकारी में बदलाव करने के लिए आम लोगों को पैसे दिए थे और उनसे कहा गया था कि वह उनका चैनल चलाकर अपना टीवी ऑन रखें।

हालाँकि, उसी दिन देर शाम तक रिपब्लिक टीवी ने सबूतों के साथ अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि असली रिपोर्ट में उनके चैनल का नाम कहीं भी नहीं है, बल्कि उन पर सवाल उठाने वाले इंडिया टुडे का नाम ओरिजनल एफआईआर में है। इसके बाद इंडिया टुडे और मुंबई पुलिस की मंशा पर सवाल खड़े हो गए। बाद में मुंबई पुलिस कमिश्नर को मानना भी पड़ा था कि एफआईआर में इंडिया टुडे का नाम है।

इंडिया टुडे शुरुआती जश्न मनाने केे बाद एफआईआर में नाम आते ही डैमेज कंट्रोल मोड में चला गया। राजदीप सरदेसाई मुंबई पुलिस से बात करते हुए एक बयान लेने की कोशिश कर रहे थे कि एफआईआर में इंडिया टुडे का नाम नहीं है। उन्होंने कहा, “यह बताने का प्रयास किया गया है कि एफआईआर में इंडिया टुडे का उल्लेख किया था” और फिर खुद को बेहतर बनाने और रिपब्लिक टीवी को फँसाने के लिए स्पष्टता की माँग की। हालाँकि, ज्वाइंट कमिश्नर ने स्वीकार किया कि वास्तव में एफआईआर में इंडिया टुडे का नाम था।

इस मामले में एक ऑडियो सामने आया था जिसमें मुख्य चश्मदीद तेजल सोलानी ने रिपब्लिक टीवी के पत्रकार से बात करते हुए कई बातें स्वीकार की थी। उसका कहना था कि उसके बेटे को टीआरपी में बदलाव के लिए इंडिया टुडे समूह से रुपए मिलते थे। तेजल सोलानी उन 5 लोगों के समूह में शामिल थे जिनके आधार पर टीआरपी के मामले में गिरफ्तारी हुई थी। एक और खुलासे के अनुसार विशाल भंडारी ने पूछताछ में बताया था कि ऑडिट टीम ने पैनल के एक घर का दौरा किया था। जिसके बाद वहाँ रहने वालों ने बताया कि उन्हें इंडिया टुडे 2 घंटे ज्यादा देखने के लिए भुगतान किया जाता था। 

FIR में इंडिया टुडे समूह का नाम शामिल होने की बात सामने आते ही उसे खूब फ़जीहत का सामना करना पड़ा था। चश्मदीद ने ऑडियो में स्पष्ट तौर पर इंडिया टुडे का नाम लिया था। एक ऐसे लोगों का समूह जिसकी अगुवाई राजदीप सरदेसाई जैसा व्यक्ति कर रहा हो उससे नैतिकता की आशा करना अप्रत्याशित है। इस बात की कल्पना की जा सकती कि ऐसे में आखिर किस तरह इंडिया टुडे समूह के लोगों को समझ होगी कि वह निरर्थक ख़बरें देना बंद करें।  

वहीं बार और बेंच की रिपोर्ट के अनुसार बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर याचिका में हंसा रिसर्च ने आरोप लगाया था कि पुलिस उनके कर्मचारियों को फर्जी बयान जारी करने के लिए दबाव बनाने की रणनीति अपना रही है। साथ ही रिपब्लिक टीवी द्वारा जारी एक डॉक्यूमेंट को फर्जी करार देने के लिए कह रही है।

हंसा रिसर्च की रिपोर्ट, जिसके आधार पर टीआरपी मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी, उसमे सिर्फ इंडिया टुडे के नाम का उल्लेख करते हुए कहा गया था कि इंडिया टुडे चैनल को देखने के लिए बार-ओ-मीटर वाले ने घरों को रिश्वत दिया था। वहीं पुलिस द्वारा लगाए गए आरोप के विपरीत इसमें रिपब्लिक का नाम नहीं था। इसके अलावा एफआईआर में भी इसका जिक्र नहीं है।

याचिका में कहा गया, “याचिकाकर्ताओं को लगातार क्राइम ब्रांच में लंबे समय तक रखा जाता है और गिरफ्तारी की धमकी दी जाती है और बार-बार झूठे बयान देने के लिए दबाव बनाया जाता है।”

याचिका हंसा समूह के निदेशक नरसिम्हन के स्वामी, सीईओ प्रवीण ओमप्रकाश और नितिन काशीनाथ देवकर की तरफ से दायर किया गया है। याचिका में कहा गया कि पुलिस को पहले ही बताया जा चुका है कि तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जा रहा है कि रिपब्लिक द्वारा दिखाए गए डॉक्यूमेंट सही है या नहीं।

हंसा द्वारा दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि उनके अधिकारियों से बिना लिखित सूचना के पूछताछ की जा रही है और उन्हें दस्तावेज तैयार करने का समय भी नहीं दिया गया है। याचिकर्ताओ पर इसके लिए दबाव भी बनाया गया।

कंपनी का कहना था कि उसके कर्मचारियों को मुंबई पुलिस द्वारा परेशान किया गया, क्योंकि उन्होंने रिपब्लिक टीवी के खिलाफ गलत बयान देने से इनकार कर दिया था। हंसा रिसर्च ने यह भी बताया है कि यह टीआरपी हेरफेर मामले में वे शिकायतकर्ता थे और अब उन्हें ही पुलिस द्वारा परेशान किया जा रहा है।

यह सब इस तथ्य से जुड़ा है कि मुंबई पुलिस ने कथित तौर पर BARC से रॉ डेटा की माँग नहीं की है, जो कि जाँच का शुरुआती बिंदु होना चाहिए था। यह इस तथ्य की ओर इशारा करता है कि जाँच को रोक दिया गया है। अब ईडी तह में जाकर इस मामले की जाँच कर रही है।

भीम-मीम पहुँच गए किसान आंदोलन में… चंद्रशेखर ‘रावण’ और शाहीन बाग की बिलकिस दादी का भी समर्थन

दिल्ली में चल रहे किसान ‘आंदोलन’ में अपना समर्थन देने के लिए आज भीम-मीम एक बार दोबारा एक साथ खड़े हैं। टाइम्स नाउ की खबर के मुताबिक एक ओर जहाँ भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर रावण गाजीपुर बॉर्डर पर पहुँच चुके हैं तो वहीं शाहीन बाग की दादी बिलकिस ने कहा है कि ये किसान उनके प्रदर्शन (शाहीन) में उनके साथ जुटे थे। अब समय है कि इनका साथ दिया जाए।

कॉन्ग्रेस नेता उदित राज का भी इस बीच बयान आया है। उदित राज ने कहा है कि वो किसानों की माँगों का समर्थन करते हैं। लेकिन किसानों के ख़िलाफ़ फैलाए जा रहे प्रोपगेंडा का विरोध करते हैं।

शाहीन बाग और किसान आंदोलन में एक जैसे चेहरे

यहाँ गौरतलब हो कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए कृषि सुधार कानूनों को लेकर जारी किसानों के ‘विरोध प्रदर्शन’ में धीरे-धीरे वह सभी लोग एक साथ आ रहे हैं, जिन्होंने पिछले दिनों शाहीन बाग जैसे आंदोलन का समर्थन किया था।

अभी हाल में पता चला था कि जिन लोगों ने JNU में हिंसा को बढ़ावा दिया था, दिल्ली दंगों के दौरान मुस्लिमों को भड़काया था, वही हरियाणा-पंजाब सीमा पर चल रहे इस ‘किसान आंदोलन’ को भी उपद्रव में बदल रहे हैं।

हजारों लोगों के दिल्ली कूच करने के बाद हरियाणा की सिंधु सीमा पर पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई है। ‘रावण’ के पहुँचने की जानकारी मिलने के बाद कई लोग सोशल मीडिया पर प्रदर्शन स्थल पर हिंसा भड़कने की आशंका जता रहे हैं। उनकी चिंता है कि कहीं मासूम किसान अपराधियों और पुलिस के बीच मुठभेड़ में मारे न जाएँ।

शाहीन बाग के बाद किसान आंदोलन में बिरयानी

शाहीन बाग और किसानों के इस ‘आंदोलन’ में एक जैसे चेहरों के अलावा एक अन्य कॉमन चीज बिरयानी भी निकल कर आई है। पिछले दिनों राजधानी दिल्ली के गाजीपुर क्षेत्र से वीडियो सामने आई, जिसमें दिखाया गया कि आंदोलन कर रहे ‘किसानों’ के बीच बिरयानी बाँटी जा रही है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया के इस वीडियो के साथ कैप्शन भी लिखा हुआ था, “गाजीपुर में किसानों के विरोध-प्रदर्शन की जगह पर बिरयानी का समय हो चुका है।” वीडियो में देखा जा सकता है कि सैकड़ों लोग बिरयानी के लिए पंक्ति बना कर खड़े हैं। 

इस वीडियो को देखने के बाद कुछ ही समय में काफी प्रतिक्रियाएँ सामने आईं, क्योंकि इस नज़ारे ने यूजर्स की शाहीन बाग़ की यादें ताज़ा कर दी, जब पिछले साल दिसंबर महीने में तमाम इस्लामी सीएए और एनआरसी के तथाकथित ‘विरोध’ में धरने पर बैठे थे।

किसानों के प्रदर्शन पर क्यों उठ रहे सवाल

यहाँ बता दें कि इस आंदोलन को लेकर लगातार कई तरह के सवाल सोशल मीडिया पर उठाए जा रहे हैं। खासकर जब से इस प्रदर्शन को खालिस्तानियों और इस्लामी कट्टरपंथी समूह पीएफआई का समर्थन मिला है।

पिछले दिनों  SFJ के संस्थापक गुरपतवंत सिंह पन्नू ने उन किसानों के लिए 10 मिलियन डॉलर की वित्तीय सहायता की घोषणा की थी, जिन्हें दिल्ली की यात्रा के दौरान किसी भी तरह का नुकसान हुआ हो। हाल ही में अपलोड किए गए एक वीडियो में पन्नू ने किसानों से उनको हुए नुकसान का डिटेल भेजने के लिए कहा था ताकि उनका संगठन राशि की क्षतिपूर्ति कर पाए।

‘गलत सूचनाओं के आधार पर की गई टिप्पणी’: ‘किसान आंदोलन’ पर कनाडा के PM ने जताई चिंता तो भारत ने दी नसीहत

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत के आंतरिक मामला में हस्तक्षेप करते हुए यहाँ दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के समर्थन में बयान जारी किया है, जिसके बाद भारत ने भी उन्हें कड़ी नसीहत दी है। जस्टिन ट्रूडो ने कहा कि स्थिति चिंताजनक है और कनाडा हमेशा शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि अगर वो भारत से आ रही इस खबर को नज़रअंदाज़ करते हैं तो ये लापरवाही होगी।

उन्होंने कहा कि हम सभी अपने परिवार और दोस्तों के लिए काफी चिंतित हैं, ये आप सबके लिए एक वास्तविकता है। कनाडा के पीएम सिख बहुल क्षेत्रों के लोगों को सम्बोधित कर रहे थे। बता दें कि उनकी सरकार में भी सिखों का दबदबा है और सिख वोटरों की संख्या के कारण अक्सर वहाँ के नेता खालिस्तानी एजेंडा को आगे बढ़ाते दिखते हैं। उन्होंने दावा किया कि कनाडा बातचीत की प्रक्रिया में विश्वास रखता है।

जस्टिन ट्रूडो ने जानकारी दी कि उन्होंने कई माध्यमों का इस्तेमाल करते हुए भारतीय प्रशासन तक अपनी बात पहुँचाई है और ये हम सबके लिए साथ में आगे बढ़ने का क्षण है। बता दें कि ये पहली बार है, जब किसी अन्य देश के नेता ने भारत में चल रहे कथित ‘किसान आंदोलन’ पर टिप्पणी की हो। भारतीय विदेश मंत्रालय ने उनकी इस टिप्पणी पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि भारत में किसानों के मुद्दे को लेकर कनाडा के कुछ नेता गलत सूचनाओं के आधार पर बयान दे रहे हैं।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि ऐसी टिप्पणियाँ अनुचित हैं, खासकर जब मुद्दा किसी लोकतांत्रिक राष्ट्र के आंतरिक मामलों से जुड़ा हो। भारत ने ये भी नसीहत दी है कि कूटनीतिक माध्यमों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए न किया जाए। कनाडा के रक्षा मंत्री हरजीत सिंह सज्जन ने भी आरोप लगाया था कि भारत में किसानों के साथ क्रूरता हो रही है और ये काफी परेशान करने वाला है।

गौरतलब है कि दिल्ली के ‘किसान आंदोलन’ पर भी खालिस्तानियों ने कब्ज़ा कर लिया है। ऐसी तमाम तस्वीरें और वीडियो सामने आए जिसमें प्रदर्शन के दौरान खालिस्तान के समर्थन की बात सामने आ रही है। इसी तरह का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें एक तथाकथित किसान द्वारा स्पष्ट तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता है कि जैसे इंदिरा गाँधी को ठोका वैसे ही नरेंद्र मोदी को भी ठोक देंगे। एक प्रदर्शनकारी ने ‘जय हिंद’ पर भी आपत्ति जताई।

कावर झील पक्षी विहार या किसानों के लिए दुर्भाग्य? Kavar lake, Manjhaul, Begusarai

बिहार में मीठे पानी की सबसे बड़ी झील बेगूसराय के मंझौल में है। इस झील का नाम कावर झील पक्षी विहार है। तकरीबन 15000 एकड़ में फैली इस झील की विशेष महत्ता है कि यहाँ कई प्रकार की वनस्पतियाँ पाई जाती हैं। इसके अलावा कई तरह के लैंड बर्ड्स, वाटर बर्ड्स ने भी इस जगह को अपना घर बनाया हुआ है।

इस खास झील की जानकारी और इसके कारण प्रभावित होते किसानों की बात आप तक पहुँचाने के लिए ऑपइंडिया संपादक अजीत भारती ने स्वतंत्र पत्रकार व कावर झील को लेकर खासी जानकारी रखने वाले महेश भारती से बात की। उन्होंने बताया कि 15000 एकड़ में फैली यह झील गोखुर झील है, जिसकी आकृति बरसात के दिनों में बढ़ जाती है जबकि गर्मियों में यह 3000-5000 एकड़ में सिमट कर रह जाती है।

महेश भारती के अनुसार, इस झील के पास 60 प्रकार की प्रवासी चिड़ियाँ आती हैं और 100 प्रकार की देशी प्रजाति के पक्षी इस झील के आस-पास निवास करते हैं। इस साइट को देखते हुए व इसकी महत्ता को समझते हुए कुछ समय पहले UNEP इस जगह को रॉमसेट साइट घोषित कर चुका है।

पूरी बातचीत का वीडियो इस लिंक पर क्लिक करके देखें।

शादी से 1 महीने पहले बताना होगा धर्म और आय का स्रोत: असम में महिला सशक्तिकरण के लिए नया कानून

उत्तर प्रदेश में जहाँ ‘लव जिहाद (ग्रूमिंग जिहाद)’ पर लगाम लगाने के लिए कानून बन गया है, वहीं अब असम में भी छद्म हिन्दू बन कर धोखे से शादी करने और धर्मांतरण कराने के खिलाफ कानून बनाने पर विचार चल रहा है। नए कानून में ये प्रावधान लाया जाएगा कि शादी से 1 महीने पहले होने वाले पति-पत्नी को आधिकारिक दस्तावेजों के माध्यम से अपने धर्म और आय के बारे में जानकारी देनी पड़ेगी।

असम के वित्त मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि राज्य की महिलाओं का सशक्तिकरण करने के उद्देश्य से ये कानून लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ये पूरी तरह उत्तर प्रदेश या मध्य प्रदेश के ‘लव जिहाद (ग्रूमिंग जिहाद)’ की रोकथाम के लिए बने कानूनों की तरह तो नहीं होगा, लेकिन उनसे कुछ समानताएँ ज़रूर होंगी। उन्होंने कहा कि ये ‘लव जिहाद (ग्रूमिंग जिहाद)’ के खिलाफ कानून नहीं होगा, ये सभी धर्मों के लिए एक समावेशी कानून होगा।

उन्होंने बताया कि पारदर्शिता से असम की बहनों के सशक्तिकरण के लिए ये कानून लाया जा रहा है। इसमें न सिर्फ अपना धर्म, बल्कि आय के स्रोत को लेकर भी लेकर जानकारी देनी होगी। साथ ही परिवार का पूरा विवरण और शिक्षा सम्बन्धी योग्यता बतानी होगी। सरकार की चिंता इस बात को लेकर है कि बहुत बार समान धर्म में शादी होने के बावजूद महिला को काफी बाद में पता चलता है कि उसका पति अवैध कारोबार में है।

इस कानून के तहत महिलाओं और पुरुषों को शादी से एक पहले पहले एक सरकारी फॉर्म में अनिवार्य रूप से आय का स्रोत, प्रोफेशन, स्थायी पता और धर्म के बारे में जानकारी देनी होगी। ऐसा न करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यूपी और एमपी के नए कानून से इसमें कुछ भाग लिया गया है। बता दें कि ‘लव जिहाद (ग्रूमिंग जिहाद)’ के खिलाफ पूरे देश में विरोध का माहौल है और हाल ही में हुई कई वारदातों के बाद कानून बनाने की जरूरत महसूस की गई।

भाजपा के वरिष्ठ नेता और असम सरकार में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं वित्त मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने अक्टूबर 2020 में भी कहा था कि अगर उनकी पार्टी 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में आती है तो राज्य सरकार ‘लव जिहाद’ के खिलाफ ‘कठोर लड़ाई’ शुरू करेगी। उन्होंने माना कि कई लड़कियों की तो तलाक की नौबत आ गई क्योंकि उन्हें गलत नाम बताकर लड़कों ने धोखा दिया।

‘अजान महाआरती जितनी महत्वपूर्ण, प्रतियोगता करवा कर बच्चों को पुरस्कार’ – वीडियो वायरल होने पर पलट गई शिवसेना

अपनी हालिया ‘सेक्युलर’ और ‘लिबरल’ छवि वाले उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ‘अज़ान पाठ प्रतियोगिता’ के आयोजन की योजना से मुकर गई है। शिवसेना दक्षिण मुंबई डिवीजन के प्रमुख पांडुरंग सकपाल ने पिछले इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें अज़ान शांतिपूर्ण और सुखदायक लगी, हालाँकि बाद में उन्होंने कहा कि अज़ान पाठ प्रतियोगिता आयोजित करना केवल एक मुस्लिम पार्टी के अधिकारी द्वारा दिया गया सुझाव था और इस तरह के आयोजन की उनकी कोई योजना नहीं है।

अज़ान पाठ प्रतियोगिता की कोई योजना नहीं

पांडुरंग सकपाल पीछे हटते हुए दावा करते हैं कि उनके पास अज़ान पाठ प्रतियोगिता आयोजित करने की कोई योजना नहीं है। बता दें कि सकपाल की अजान की प्रशंसा करते और अजान पाठ प्रतियोगिता करने की घोषणा सोशल मीडिया वेबसाइटों पर वायरल हो गई थी। इस वीडियो के सामने आने के बाद बीजेपी ने शिवसेना को लताड़ लगाई थी।

भाजपा ने घोषणा की आलोचना करते हुए कहा था कि शिवसेना ने हिंदुत्व के लिए अपना समर्थन पहले ही छोड़ दिया था और अजान पाठ की प्रतियोगिता की घोषणा करके वह अपने नवगठित ‘सेक्युलर’ साख को जलाने की कोशिश कर रही है। ऐसा वह अल्पसंख्यकों का वोट हासिल करने के लिए कर रही है। 

अज़ान पाठ प्रतियोगिता आयोजित करने की अपनी घोषणा के बाद पांडुरंग सकपाल ने ये कहते हुए यू-टर्न लिया कि उन्होंने पार्टी के मुस्लिम पदाधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल के सुझाव के बारे में बताया था।

सकपाल ने बताया, “उन्होंने कहा कि उनके बच्चे सड़कों पर घूम रहे थे और हमें उनके लिए एक प्रतियोगिता आयोजित करनी चाहिए। फिर भगवद गीता पाठ प्रतियोगिता की तर्ज पर जो हम अपने क्षेत्र में आयोजित करते हैं, मैंने उन्हें एक ऑनलाइन अज़ान पाठ प्रतियोगिता आयोजित करने का सुझाव दिया।”

इससे पहले कल (30 नवंबर, 2020), शिव सेना के प्रमुख पांडुरंग सकपाल द्वारा अज़ान पाठ प्रतियोगिता आयोजित करने की घोषणा का एक वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया था। अज़ान पाठ प्रतियोगिता आयोजित करने का विचार उनके दिमाग में कैसे आया, इस बारे में बात करते हुए, सकपाल ने कहा था, “मैं मरीन लाइन्स में बड़ा कब्रिस्तान के बगल में रहता हूँ। यही कारण है कि मुझे हर दिन अजान सुनने को मिलती है। मैंने अजान को अद्भुत और मनभावन पाया है। जो भी इसे एक बार सुनता है, वह अजान के अगले शेड्यूल का बेसब्री से इंतजार करता है। यही कारण है कि मेरे मन में मुस्लिम समुदाय के बच्चों के लिए अज़ान प्रतियोगिता आयोजित करने का विचार आया।”

सकपाल ने कहा था कि मुस्लिम समुदाय के बच्चे अजान का शानदार पाठ करते हैं। इस प्रतियोगिता को रखने का उद्देश्य प्रतिभाशाली कलाकारों के लिए एक मंच प्रदान करना है। सकपाल ने यह भी कहा कि बच्चों को उनके उच्चारण, ध्वनि मॉड्यूलेशन और गायन के आधार पर पुरस्कार दिया जाएगा। पुरस्कारों पर होने वाले खर्च का वहन शिवसेना करेगी।

सकपाल ने अज़ान की तुलना महाआरती से की

उन्होंने अजान की तुलना ‘महाआरती’ से करते हुए कहा था कि अजान केवल 5 मिनट का होता है। इसलिए, अगर किसी को इन कुछ मिनटों से परेशानी होती है तो उन्हें अनदेखा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अजान की परंपरा कई सदियों पुरानी है। यह कोई हाल की चीज नहीं है। इस तरह के विरोध को नजरअंदाज किया जाना चाहिए। महाआरती जितनी महत्वपूर्ण ही अज़ान है। यह प्यार और शांति का प्रतीक है।

हिंदुओं और PM मोदी से नफरत ने प्रतीक सिन्हा को बनाया प्रोपगेंडाबाज: 2004 की तस्वीर शेयर करके 2016 में उठाए सवाल

ऑल्ट न्यूज के संस्थापक प्रतीक सिन्हा की हिंदू घृणा एक बार फिर जगजाहिर हुई है। फैक्ट चेक के नाम पर वह दुनिया को क्या परोस रहे हैं, इसका खुलासा @befittigfacts नाम के सक्रिय ट्विटर यूजर ने अपने ट्वीट में किया है। इनमें दर्शाया गया है कि कैसे फेक प्रोपगेंडा चलाने के लिए के लिए फर्जी तस्वीरों का इस्तेमाल सिन्हा ने साल-दर-साल किया।

इन ट्विटों के मुताबिक प्रतीक सिन्हा ने साल 2014 की एक तस्वीर का इस्तेमाल करते हुए पाठकों को ये बताया कि कैसे नोटबंदी के दौरान साल 2016 में बूढ़ी महिलाओं को परेशानी झेलनी पड़ी। ट्वीट में लगी दोनों तस्वीरों और उनकी तारीखों को देख कर साफ पता चल रहा है कि सिन्हा प्रोपगेंडा फैलाने के लिए कोई भी हथकंडा आजमाने से नहीं चूकता। 

दूसरे ट्वीट में फैक्ट चेक वेबसाइट के संस्थापक ने गुजरात की स्थिति दर्शाते हुए गौ रक्षा पर सवाल उठाए। उसने कहा कि गौ माता गुजरात में सड़ रही हैं। आखिर कहाँ हैं उनके बच्चे जो अपनी माता के प्रेम दिखाते हैं। अब इस तस्वीर की सच्चाई यह है कि ये 2004 की तस्वीर है। सोचिए, प्रतीक सिन्हा गौ रक्षकों का मजाक उड़ाने के लिए कितने साल पीछे जाकर तस्वीरें खंगालता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक झूठ जो अक्सर फैलाया जाता है, वो ये कि उन्होंने साल 2014 में अपने चुनावी प्रचार में सबके अकॉउंट में 15 लाख भेजने का वादा किया था। इस झूठ को प्रतीक सिन्हा जैसे वामपंथी अक्सर हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं और कभी भी तंज के रूप में परोस देते हैं। लेकिन, इसका वास्तविक फैक्टचेक ये बताता है कि ये दावा झूठा है।

वास्तविकता में 7 नवंबर 2013 जिस समय नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के कांकेर में रैली करते हुए बयान दिया था। उस समय उन्होंने कहा था, “जो चोर लुटेरे हैं उनका काला धन जो कि भारत के बाहर जमा है अगर वह रुपया वापस आ जाए तो इतना धन आएगा कि हर एक भारतीय नागरिक को मुफ्त में 15-20 लाख रुपए यूँ ही मिल जाएगा।“ ध्यान दीजिएगा कहीं पर भी नरेंद्र मोदी ने 15 लाख रुपए बैंक में जमा कराने की बात नहीं की है। उन्होंने कहा था कि यदि आ जाए तो हर नागरिक को इतना पैसा मिलेगा।

गंगा नदी की सफाई पर प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता को लेकर सवाल उठाने के लिए खबरों को गलत तरह से पेश करने का काम भी प्रतीक सिन्हा ने बखूबी किया है। उन्होंने केवल हेडलाइन को शेयर करके अपने फॉलोवर्स को झूठ फैलाया, जिसमें एनजीटी का हवाला देकर हेडलाइन थी कि जनता का पैसा बर्बाद हुआ है और गंगा एक बूंद भी साफ नहीं हुई। जबकि वास्तविकता में एनजीटी ने अपने बयान में पीएम मोदी को ऐसे प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए सराहा था और सवाल अखिलेश सरकार पर उठे थे।

अपने अगले झूठ में प्रतीक सिन्हा ने कहा कि एक बुजुर्ग व्यक्ति इसलिए रो रहा था क्योंकि उसे पैसे नहीं मिले, जबकि वास्तविकता में वो खबर ये थी कि एक महिला ने उस व्यक्ति के पाँव पर अपना पैर रख दिया था और बुजुर्ग ने खुद कहा था कि इस परेशानी के अलावा उसे कहीं ज्यादा दिक्कत नहीं हुई।

ज्ञात रहे कि ये केवल चंद ट्वीट हैं जिनपर ऑल्ट न्यूज के संस्थापक झूठ फैलाते पाए गए हैं। ऐसे अनेक मामले हैं जब ये वामपंथियों के समर्थन के कारण ये बच निकलते हैं और किसी का इन पर ध्यान नहीं जाता। पिछले दिनों इनकी ही वेबसाइट ऑल्ट न्यूज पर कई तरह के फैक्ट चेक के नाम पर एक समुदाय विशेष को बचाने का प्रयास हुआ था।

सलमान और नदीम विवाहित हिन्दू महिला का करवाना चाहते थे जबरन धर्म परिवर्तन: मुजफ्फरनगर में लव जिहाद में पहली FIR

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में ‘ग्रूमिंग जिहाद’ (लव जिहाद) का मामला सामने आया है। यहाँ मंसूरपुर थाने में उत्तराखंड राज्य के दो युवकों के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध कानून-2020 के तहत FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि दोनों युवकों ने साजिश के तहत विवाहित महिला का जबरन धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास किया। नए कानून के तहत मुजफ्फरनगर जिले में यह पहली FIR है।

हरिद्वार में ठेकेदारी करता था महिला का पति

दरअसल, मंसूरपुर थाना क्षेत्र निवासी युवक अक्षय त्यागी हरिद्वार जिले के भगवानपुर में एक फैक्ट्री में ठेकेदार है। यहाँ वह पत्नी के साथ रहता है। भगवानपुर के रहने वाले सलमान और करौंदी गाँव निवासी नदीम उसकी फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं। आरोप है कि दोनों का मजदूरी के सिलसिले में घर आना-जाना लगा रहता था। नदीम ने अपने साथी सलमान के साथ मिलकर महिला को प्रेमजाल में फँसा लिया और शादी का झाँसा दिया। इस बीच उस पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया गया और बार-बार निकाह करने की बात कही गई।

गाँव लौटकर सोमवार देर शाम दी तहरीर

जब इस बात की जानकारी महिला के पति को हुई तो वह अपने गाँव लौट आया। वो लोग कहीं उसकी पत्नी को लेकर फरार ना हो जाए। सोमवार (नवंबर 30, 2020) की देर शाम पति-पत्नी मंसूरपुर थाने पहुँचे और आरोपित सलमान व नदीम के खिलाफ तहरीर दी। पुलिस ने दोनों के खिलाफ उत्तर प्रदेश धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/5 के तहत केस दर्ज किया है। मंसूरपुर पुलिस ने मामले की जानकारी हरिद्वार पुलिस को भी दी है। एसएसपी अभिषेक यादव ने बताया कि आरोपितों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। जल्द ही एक टीम भगवानपुर जाएगी।

बरेली में दर्ज हुई थी पहली FIR

बता दें कि रविवार को ही बरेली के देवरनिया थाने में एक छात्रा ने धर्म परिवर्तन का दबाव बनाए जाने के संबंध में मामला दर्ज कराया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 3/5 की धारा में FIR दर्ज कर आरोपित उवैस को गिरफ्तार किया था। कानून लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश का यह पहला मामला था।

इसके बाद बरेली के इज्जतनगर थाने में लव जिहाद का मामला सामने आया। ताहिर हुसैन ने अपनी पहचान छिपाकर हिन्दू युवती को अपने प्रेम जाल में फँसाकर उसकी मंदिर में माँग भरी और शादी की। उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। यही नहीं, प्रेग्नेंट होने पर लात घूसों से मारकर उसका गर्भपात किया।

ताहिर ने कहा था, “मुझे तुमसे शादी नहीं करनी थी। मेरा मजहब मुझे कहता है कि हम लव जिहाद में विश्वास रखते हैं, शादी में नहीं। एक हिंदू को गर्भवती करने से हमें दस बार मदीना शरीफ जाने का सवाब मिलता है।” पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

किसान आंदोलन या दूसरा शाहीन बाग? अजीत भारती का विश्लेषण | Ajeet Bharti Analysing Farmer Protests

दिल्ली में चल रहे कृषि आंदोलन में बीते दिनों शाहीन बाग एंगल निकलने के बाद इस मसले पर चर्चा करना अति आवश्यक हो गया है। इस आंदोलन में एक ऐसा समूह है जो हर किसी को बरगलाना चाहता है। सीएए के दौरान ऐसा ही शाहीन बाग में देखने को मिला था। उस समय समुदाय विशेष को भ्रमित करने का कार्य हुआ था या ये कहें कि कुछ लोग भ्रमित होने के लिए बैठे ही थे।

अब वही काम कृषि बिल के नाम पर हो रहा है। जैसे सीएए में लोगों से कहा गया कि इसमें उनकी नागरिकता छीन ली जाएगी। वैसे ही कृषि बिल को लेकर कहा जा रहा है कि इसके जरिए किसानों से उनकी जमीन सरकार छीन लेगी। सीएए से भी भारतीय मुस्लिम समुदाय का कोई लेना-देना नहीं था और कृषि बिल में भी किसानों की जमीन छीने जाने का कोई जिक्र नहीं है।

आज इन किसान आंदोलनों के लिए जिन्हें बुलाया गया है वह खालिस्तानी समर्थक हैं। उधम सिंह से अपनी तुलना करके ऐसे लोग कैमरे के सामने आकर बोल रहे हैं कि इंदिरा को ठोंक दिया, मोदी क्या चीज है।

पूरा वीडियो इस लिंक पर क्लिक करके देखें।