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डॉ. वर्गीज कुरियन: भारत में ‘ह्वाइट मनी’ की धारा बहाने वाला नायक, जिसने दिया ‘द टेस्ट ऑफ इंडिया’

13 साल का एक पारसी लड़का था। नाम था- पेस्तोंजी इदुल्जी दलाल (Pestonji Edulji Dalal)। इस महत्वाकांक्षी लड़के ने 13 साल की उम्र में ही बॉम्बे (अब के मुंबई) में 1888 में कॉफी एक दुकान खोली। अपने पुकारू नाम पॉली और अंग्रेजों की उच्चारण सुविधा का ख्याल रखते हुए दुकान का नाम दिया- पॉलसन।

बॉम्बे के अंग्रेज अफसरों के बीच दुकान जल्द ही फेमस हो गई। 1910 आते-आते अपने 35वें साल में पॉली की महत्वाकांक्षा और बढ़ गई। अंग्रेज अफसरों से बातचीत करते हुए उनके बटर की डिमांड पॉली को नया बिजनेस आइडिया दे गई। बॉम्बे से दूर गुजरात के काइरा में उसने एक डेयरी खोली। सिर्फ खोली नहीं, यह सुनिश्चित भी किया कि बॉम्बे के आर्मी और रेलवे वाले अंग्रेज कॉन्टैक्ट्स के जरिए वो यहाँ के प्रोडक्ट सप्लाई भी करे।

पॉलसन डेरी और बटर बिजनेस

1930 के बाद से पॉलसन डेरी ने इंडियन बटर बिजनेस पर एक तरह से राज किया। कोई कॉम्पिटिशन था ही नहीं। लेकिन यही पॉलसन डेरी की काल भी बनी। हुआ यह कि महत्वाकांक्षा में बिजनेस तो पॉलसन का खूब बढ़ा, लेकिन उसने दूध उत्पादकों का इस क्रम में दोहन बहुत किया।

फोटो साभार: प्रसार भारती फोटो डिविजन, भारत सरकार

1946 आते-आते गुजरात के काइरा में ही एंट्री होती है महात्मा गाँधी के विचारों से प्रभावित एक किसान और सामाजिक कार्यकर्ता त्रिभुवनदास पटेल की और इसके साथ आते हैं सरदार पटेल भी। दूध उत्पादकों की समस्याओं से सरदार पटेल 1942 से ही अवगत थे और कॉपरेटिव सोसायटी को लेकर उनके अंदर आइडिया भी था, लेकिन यह फलीभूत हो पाया 14 दिसंबर 1946 को KDCMPUL (Kaira District Cooperative Milk Producer’s Union Limited) के रूप में।

पॉलसन डेरी के सामने KDCMPUL

त्रिभुवनदास पटेल और सरदार पटेल की जोड़ी ने पॉलसन डेरी के खिलाफ जो अभियान छेड़ा, वो सिर्फ 2 कॉपरेटिव सोसायटी और 247 लीटर दूध प्रतिदिन के साथ शुरू हुआ। बॉम्बे मिल्क स्कीम को यहाँ से दूध की डायरेक्ट सप्लाई की जाती थी। इनका बिजनस मॉडल सपाट था पॉलसन डेरी से कम कीमत पर दूध की सप्लाई, लेकिन दूध उत्पादकों को प्रति लीटर भुगतान पॉलसन डेरी से ज्यादा।

1948 आते-आते KDCMPUL से और भी दूध उत्पादक जुड़ते चले गए। 247 लीटर दूध से शुरू हुआ सफर अब 5000 लीटर प्रतिदिन की उत्पादन क्षमता तक पहुँच गया था। लेकिन यही अब इसकी समस्या बनने जा रही थी। पॉलसन की मोनोपॉली को तोड़ने के लिए तकनीकी रूप से दक्ष किसी की जरूरत थी KDCMPUL को। यहीं पर सरदार पटेल को डॉ. वर्गीज कुरियन की याद आई। डेयरी इंजीनियरिंग कर विदेश से लौटे उस युवा की क्षमता से सरदार पटेल वाकिफ थे।

फोटो साभार: National Dairy Development Board

1949 में डॉ. वर्गीज कुरियन गुजरात के आनंद में एक सरकारी डेयरी में डेप्यूटेशन पर थे। वह यहाँ स्वेच्छा से नहीं थे। वह यहाँ इसलिए थे क्यों उनकी पढ़ाई में मिली सरकारी स्कॉलरशीप के बदले बॉण्ड के तहत उन्हें यहाँ सेवा देनी थी। इच्छा के विरुद्ध काम कर रहे डॉ. वर्गीज कुरियन को पटेल जोड़ी ने KDCMPUL में आग्रह कर बुलाया। उनके आने के बाद कॉपरेटिव सोसायटी को आगे बढ़ने और मार्केट शेयर का हिस्सा बनने के लिए जिस तकनीकी दक्षता की जरूरत थी, वो पूरी हुई। त्रिभुवनदास पटेल के साथ मिल कर प्रसार करते हुए उन्होंने खेड़ा जिले में भी कॉपरेटिव सोसायटी का गठन किया।

KDCMPUL से अमूल का सफर

पॉलसन जैसे डेरी के सबसे बड़े बिजनेस ब्रांड से लड़ने के लिए KDCMPUL (Kaira District Cooperative Milk Producer’s Union Limited) जैसे टेढ़े-मेढ़े-बड़े नाम को बदलना वक्त की जरूरत थी। 1950 में इस सोसायटी के जनरल मैनेजर बन चुके डॉ. वर्गीज कुरियन ने नाम बदलने के लिए खुद की सोच लोगों पर नहीं थोपी। बल्कि इसके उलट उन्होंने सभी कर्मचारियों और यहाँ तक की दूध उत्पादकों से भी नए नाम का आग्रह किया। क्वालिटी कंट्रोल सुपरवाइजर के पद पर काम कर रहे एक कर्मचारी ने नाम सुझाया- अमूल्य। यह संस्कृत से लिया गया था। इसी में थोड़ा बदलाव करते हुए और तब के संभ्रांत मार्केट को ध्यान में रखते हुए नाम पड़ा AMUL (Anand Milk Union Limited)

आनंद को जल्द से जल्द छोड़ कर जाने की इच्छा रखने वाले डॉ. वर्गीज कुरियन अब AMUL से दिल लगा बैठे थे। डेयरी इंजीनियरिंग की उनकी डिग्री अब तक बस नाम मात्र की थी। नाम मात्र इसलिए क्योंकि उन पर जिम्मेदारी दूध उत्पादकों से दूध लेने और ग्राहकों तक उसे सही-सलामत पहुँचाने की ज्यादा थी। पॉलसन के मुकाबले के लिए कॉपरेटिव सोसायटी का प्रसार भी करना था। इसके लिए त्रिभुवनदास पटेल और डॉ. वर्गीज कुरियन ने 2-लेवल डिस्ट्रीब्यूशन चैनल डिजाइन किया।

पहले लेवल में दूध उत्पादकों से गाँव के ही कॉपरेटिव सोसायटी द्वारा दूध लेने, उसमें फैट लेवल की जाँच करने, मिलावट की रोकथाम करने आदि से लेकर उसे नजदीक के चिलिंग यूनिट तक पहुँचाने और वहाँ कुछ घंटे तक उसे ठंडा करने के बाद पाश्चुराइजेशन प्रोसेस के लिए पाश्चुराइजर यूनिट तक ले जाना शामिल था।

फोटो साभार: चिंतन पारेख, IIT कानपुर, MBA-2014 बैच

दूसरे लेवल के डिस्ट्रीब्यूशन चैनल में पाश्चुराइजेशन के बाद दूध की पैकेजिंग और कूलिंग के अलावे होलसेलर और डिस्ट्रिब्यूटर तक इसकी पहुँच से लेकर रिटेलर से होते हुए ग्राहक तक इसे सही-सलामत पहुँचाना शामिल था।

भैंस का दूध और डॉ. वर्गीज कुरियन की डेयरी इंजीनियरिंग

भैंस का दूध इससे पहले प्रयोग तो होता था लेकिन इसका बड़े स्तर पर बिजनेस नहीं हो पाता था। कारण था भैंस के दूध का पाउडर बनाने की तकनीक का नहीं होना। डॉ. वर्गीज कुरियन वो पहले इंसान थे, जिन्होंने इस समस्या का सबसे पहले हल खोजा। भैंस के दूध से पाउडर बनाने वाले डॉ. कुरियन दुनिया के पहले व्यक्ति थे। 1955 से पहले इसके लिए सिर्फ गाय के दूध का इस्तेमाल किया जाता था।

कैरा डेयरी में अक्टूबर 1955 में भैंस के दूध से पाउडर बनाने का प्लांट लगाया गया। यह AMUL की बहुत बड़ी सफलता थी। सफलता इस मायने में क्योंकि इससे पहले दूध उत्पादकों से जितना दूध लिया जाता था और पाश्चुराइजेशन के बाद जितना बिक पाता था, उसके अलावे बचा हुआ दूध बर्बाद हो जाता था, क्योंकि पाउडर बनाने की तकनीक (भैंस के दूध के लिए) थी ही नहीं। AMUL के लिए रेवेन्यू जेनरेशन में इस एक तकनीक ने गजब का रोल प्ले किया। 1960 आते-आते AMUL की सक्सेस स्टोरी छपने लगी थी। पॉलसन पीछे छूट चुका था।

ऑपरेशन फ्लड से श्वेत क्रांति (दुग्ध क्रांति)

1964 में AMUL ने अत्याधुनिक कैटल फीड प्लांट (जहाँ पशुओं का चारा तैयार किया जाता है) का निर्माण किया। इसके शुभारंभ के लिए तब के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को निमंत्रित किया गया। प्रधानमंत्री कार्यालय ने PM लाल बहादुर शास्त्री का कार्यक्रम सिर्फ एक दिन का तय किया था। उन्हें दिन में प्लांट का शुभारंभ कर शाम में दिल्ली लौट जाना था। लेकिन ऐसा हो न सका। कारण खुद PM शास्त्री थे।

कैटल फीड प्लांट का शुभारंभ करने के बाद PM लाल बहादुर शास्त्री ने आनंद में ही रुकने का फैसला किया। उन्होंने घूम-घूम कर न सिर्फ AMUL की कार्यशैली देखी, बल्कि जितने भी कॉपरेटिव सोसायटी थे, लगभग सभी में जा-जा कर, घूम-घूम कर यह समझा कि कैसे AMUL इनसे दूध लेता है, बाजार तक पहुँचाता है और बदले में उस क्षेत्र के दूध उत्पादकों को वित्तीय रूप से मजबूत बना रहा है।

1964 में डॉ. वर्गीज कुरियन, PM लाल बहादुर शास्त्री के साथ (फोटो साभार: drkurien.com)

सब कुछ समझने के बाद PM लाल बहादुर शास्त्री दिल्ली चले गए। 1965 में उन्होंने डॉ. वर्गीज कुरियन को याद किया। मकसद था AMUL से भी कुछ बड़ा करने का… इतना बड़ा, जितना किसी ने पूरी दुनिया में डेयरी के विकास के लिए सोचा भी न था! Billion-Litre-Idea के साथ PM लाल बहादुर शास्त्री ने राष्ट्रीय दुग्ध विकास बोर्ड (NDDB) का गठन किया। डॉक्टर कुरियन को इस बोर्ड का अध्यक्ष बनाया। लक्ष्य स्पष्ट था और एक ही था- अमूल मॉडल को पूरे देश में लागू करना, दूध उत्पादकों और किसानों को वित्तीय रूप से मजबूत बनाना।

NDDB शुरू तो हो गया। AMUL मॉडल को एक शहर आनंद से निकाल कर 700 शहरों में फैलाना था। PM शास्त्री का कद छोटा था लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति अटल थी। लेकिन पैसे कहाँ से और कैसे आएँगे? इसके पीछे भी एक दिलचस्प किस्सा है। भारत तब लगभग गरीब देश था। NDDB ने वर्ल्ड बैंक से लोन का आग्रह किया। लेकिन एक शर्त रखी- लोन देने के नाम पर कोई शर्त या बंदिश नहीं होनी चाहिए। वर्ल्ड बैंक के प्रेसिंडेंट 1969 में इंडिया आए। डॉ. वर्गीज कुरियन ने उनसे कहा- “पैसे दीजिए और भूल जाइए।” आश्चर्य इस बात का कि डॉ. कुरियन की बातों से प्रभावित होकर प्रेसिंडेंट के इंडिया से लौटते ही NDDB को लोन दे दिया गया और शर्त रखी गई- एक भी शर्त नहीं।

इस तरह 1970 से शुरू हुआ ऑपरेशन फ्लड तीन चरणों में 1996 तक चला। आनंद से निकलकर AMUL मॉडल 94 लाख किसानों के बीच 73,300 डेयरी कॉपरेटिव (1996 तक) के रूप में पहुँच गया था। 1960 में मात्र 20 टन दूध का उत्पादन करने वाला भारत 2011 आते-आते 122000000 टन दूध का उत्पादन करने लगा था। दुनिया में कोई भी देश दूध उत्पादन में भारत से आगे नहीं (1,44,246 डेयरी कॉपरेटिव, साल 2012 तक) है।

दूध उत्पादकों की महत्वाकांक्षा ही मेरी महत्वाकांक्षा

सवाल उठता है कि क्या किसी इंसान की तकनीकी दक्षता ही काफी होती है, उसके संस्थान के सफल होने और रिकॉर्ड तोड़ रिजल्ट देने में? शायद नहीं। कम से कम यह एक अकेली चीज सफलता की गारंटी तो नहीं दे सकती। डॉ. वर्गीज कुरियन में लेकिन यह एक अकेली चीज नहीं थी। भैंस के दूध से सबसे पहले पाउडर बनाने वाले डॉ. वर्गीज को घमंड खा सकता था, लेकिन वो अपनी सफलता का श्रेय खुद के बजाय किसानों और दूध उत्पादकों को देते थे। अपनी सैलरी तक को वो किसानों की मेहनत का नतीजा बताते थे। यह वीडियो उनकी तकनीकी दक्षता से परे उनके व्यक्तित्व को बताती है, जिसने AMUL को दुनिया भर की डेरी का रोल मॉडल बना दिया।

बेटी के चलते जब दिया संस्थान से इस्तीफा

डॉ. वर्गीज कुरियन के एक बहुत करीबी दोस्त एब्रिल एसजे ने 2012 में BBN चैनल को एक इंटरव्यू दिया था। यह इंटरव्यू 11 सितंबर 2012 को दिया गया था… मतलब डॉ. वर्गीज की मृत्यु के ठीक 2 दिन बाद। एक तरह से यह श्रद्धांजलि था अपने दोस्त के लिए।

एब्रिल एसजे ने डॉ. वर्गीज कुरियन के बारे में वो बातें बताई थीं, जो अक्सर रिकॉर्ड और सफलता के नीचे दब जाती हैं। यह बातें थीं उनके व्यक्तित्व की, उनकी ईमानदारी की। एक बार का किस्सा सुनाते हुए एब्रिल एसजे ने बताया कि डॉ. वर्गीज कुरियन को अपने ही संस्थान से इस्तीफा देना पड़ गया था। कारण बनी थीं उनकी इकलौती बेटी। हुआ यह कि डॉ. वर्गीज की इकलौती बेटी ने AMUL की एक सब्सिडरी राष्ट्रीय सहकारी डेयरी फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NCDFI) में जॉब के लिए अप्लाई किया, नौकरी भी मिल गई। लेकिन एक पेंच फँस गया। डॉ. वर्गीज कुरियन इसके चेयरमैन थे। जब उन्हें पता चला कि उनकी बेटी को NCDFI में नौकरी मिल गई है तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

चेयरमैन के इस्तीफा देने के बाद संस्थान में स्वभाविक खलबली मच गई। डॉ. वर्गीज कुरियन से जब इस बारे में पूछा गया तो उनका जवाब था- “जहाँ मेरी बेटी नौकरी करे, मैं ऐसे किसी संस्थान का चेयरमैन नहीं रह सकता। मेरे या मेरी बेटी के ऊपर पक्षपात के आरोप लगेंगे।” और हुआ यह कि उनकी बेटी को फाइनली इस्तीफा देना पड़ा और वो चेन्नई में नौकरी करने चली गईं।

26 नवंबर 1921 को कालीकट में पैदा हुए वर्गीज कुरियन ने गुजरात के आनंद को अपनी कर्मभूमि बनाई। AMUL को दुनिया भर में एक ब्रांड… और इस क्रम में भारत डेयरी उत्पादन का #1 देश बना और दूध उत्पादकों को मिला वित्तीय सहारा।

‘माझ्या कक्कानी कसाबला पकड़ला’ – बलिदानी ओंबले के भतीजे का वो गीत… जिसे सुन पुलिस में भर्ती हुए 13 युवा

मुंबई पर हुए आतंकी हमलों को एक दशक से अधिक का समय बीत चुका है। इतना समय बहुत होता है। इतने समय में बहुत कुछ बदलता है, कहानियों से लेकर किरदार सब कुछ! लेकिन किरदारों की ज़मीन में बहुत से ऐसे किस्से होते हैं, जिनके बिना एक काली रात की सुबह होती ही नहीं। 26/11 आतंकी हमले में उस किरदार का नाम है तुकाराम ओंबले। वही नाम, जिसने सरहद पार से आए हुए आतंकी अजमल कसाब के ताबूत में सबसे बड़ी कील ठोंकी।

निहत्थे पकड़ा एके-47 का बैरल

इस नाम की जड़ें बहादुरी की मिट्टी में बहुत गहरी हैं। 27 नवंबर की रात जब ओंबले का गिरगाँव चौपाटी पर अजमल कसाब से सामना हुआ तब ओंबले पूरी तरह निहत्थे थे। यह जानने के बादजूद कि सामने वाले के हाथों में एके-47 है, ओंबले बिना परवाह किए उस पर टूट पड़े। अपने हाथों से उसकी एके-47 का बैरल पकड़ लिया। ट्रिगर दबा और पल भर में कई गोलियाँ चलीं और ओंबले मौके पर बलिदानी हो गए। इसके पहले अजमल कसाब और उसके साथी छत्रपती शिवाजी टर्मिनल पर गोलीबारी कर चुके थे।

लेकिन इस बलिदान ने बहुत गाढ़ी लकीर खींची। लोगों के लिए मिट्टी में मिलने की सबसे गाढ़ी लकीर! ओंबले के पहले तक उनके गाँव से कोई व्यक्ति पुलिस का हिस्सा नहीं बना था पर उनके शहीद होने के बाद 13 युवा पुलिस में भर्ती हुए। मुंबई से 284 किलोमीटर दूर, महज़ 250 परिवारों का गाँव, केदाम्बे। इस गाँव के लिए देश के लिहाज़ से तीन तिथियाँ सबसे अहम हैं – पहली 15 अगस्त, दूसरी 26 जनवरी और तीसरी 26 नवंबर।

बच्चों के चहेते और युवाओं के लिए नज़ीर

तुकाराम ओंबले ऐसे व्यक्ति थे, जो मृत्यु के पहले तक गाँव के बच्चों के चहेते बने रहे और मृत्यु के बाद युवाओं के लिए नज़ीर बने। यही कारण था कि उनकी मृत्यु के बाद लगभग 13 युवाओं ने पुलिस में शामिल होने का फैसला लिया। उनके गाँव के सरकारी विद्यालय में जब बहादुरी का ज़िक्र छिड़ता है, पढ़ाने वाले ओंबले का नाम सामने रख देते हैं।

उनके परिवार वाले आज भी बड़ी शान से बतौर ‘हवलदार’ उनका परिचय देते हैं। ओंबले बचपन में कटहल और आम बेचते थे और बाकी समय में गाय-भैंस चराते थे। उनके मौसा सेना में गाड़ी चलाते थे और तभी से उन्हें सेना वालों और पुलिसकर्मियों की वर्दी से लगाव हुआ। साल 1979 में पुलिस की नौकरी का हिस्सा बनने के लिए ओंबले ने बृहनमुंबई के विद्युत विभाग की नौकरी तक छोड़ दी थी।

मेरे चाचा ने कसाब को पकड़ा

इंडियन एक्सप्रेस द्वारा प्रकाशित किताब ‘26/11 स्टोरीज़ ऑफ़ स्ट्रेंथ’ के मुताबिक़ तुकाराम ओंबले के चचेरे भाई रामचन्द्र ओंबले का एक बेटा है स्वानन्द ओंबले। जब ओंबले मुंबई में शहीद हुए थे, तब उसकी उम्र साल भर भी नहीं थी। अपने विद्यालय में गाना गाते हुए वह बड़ी दमदारी के साथ कहता है – ‘माझ्या कक्कानी कसाबला पकड़ला’ यानी मेरे चाचा ने ही कसाब को पकड़ा था। बल्कि उस कक्षा में जब भी पूछा जाता है कि तुकाराम ओंबले कौन थे? सभी बच्चे एक साथ जवाब देते हैं – ‘पुलिस’। 

तुकाराम ओंबले की बेटी वैशाली अक्सर समाचार समूहों को दिए जाने वाले साक्षात्कारों में कहती हैं कि हमें पता है कि हमारे पिता जी नहीं लौटेंगे। फिर भी हम उम्मीद करते हैं कि ऐसा हो कि वह एक दिन वापस आएँ। दुनिया में होने वाली किसी भी आतंकी घटना के बारे में सुन कर बिलकुल अच्छा नहीं लगता है। ऐसी घटनाओं में भी किसी के परिवार का सदस्य अपनी जान जोखिम में डालता है और सब उसकी सलामती की दुआ करते हैं। उन्होंने जितना कुछ किया अपने देश के लिए किया और देश के लोगों के लिए किया।

दूसरों के लिए रुक जाते ज़्यादा देर

तुकाराम ओंबले के सहकर्मी हवलदार संजय चौधरी ने एक समाचार समूह से बात करते हुए कहा था, “इस बात में कोई शक नहीं है कि ओंबले हम सभी से अलग थे। जहाँ हर पुलिसकर्मी ड्यूटी खत्म पर जल्द से जल्द घर की राह देखता था, वहाँ ओंबले अपनी ड्यूटी से ज़्यादा रुक जाते थे। ओंबले अक्सर नाइट शिफ्ट में देर तक रुक जाते थे, जिससे दूसरे पुलिसकर्मियों को कोई असुविधा न हो। इसके बाद अगले दिन सुबह समय से आ भी जाते थे और हमें अपनी ज़िंदगी में इस तरह के पुलिसकर्मी कम ही नज़र आए। जिन्हें लोगों के साथ-साथ अपने साथ ड्यूटी करने वालों की भी उतनी ही परवाह थी।”

मोबाइल चोरी का विरोध करने पर चाकुओं से हमला, पुलिस ने अरेस्ट किया तो कई बार चिल्लाया – ‘अल्लाह-हू-अकबर’

ऐसा कोई भी इंसान जो पश्चिमी देशों में विशेष मज़हब के लोगों का बतौर अप्रवासी विरोध करता है, उसे इस्लामोफोबिक करार दिया जाता है और सांप्रदायिक घोषित किया जाता है। इस बात पर गौर करना लोग कम ही पसंद करते हैं कि किसी अन्य देश में शरण लेने के बाद मज़हब विशेष का व्यक्ति करता क्या है।

कुछ ऐसी ही घटना हुई फ्रांस के सेंट औएन (Saint Ouen) में, जहाँ दो लोगों ने एक व्यक्ति से उसका मोबाइल फोन छीनने का प्रयास किया। मना करने पर दोनों ने उस व्यक्ति पर धारदार हथियार से कई हमले किए और गिरफ्तारी के बाद एक आरोपित ‘अल्लाह-हू-अकबर’ चिल्ला रहा था। 

रविवार (22 नवंबर 2020) को मिशेल एवेन्यू (Michelet Avenue) के पास रात 9 बजे दो हमलावरों (अप्रवासियों) ने एक व्यक्ति को घेर कर उसका फोन छीनने का प्रयास किया। जब उसने ऐसा करने से मना किया तब उन्होंने व्यक्ति पर धारदार हथियार से कई हमले किए।

इस दौरान एक हमलावर ने व्यक्ति के सीने और हाथ पर कई हमले किए। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुँची और एक आरोपित को गिरफ्तार किया। उस व्यक्ति को कथित तौर पर घटना का आरोपित बताया जा रहा है। 

इस दौरान घटना का दूसरा आरोपित मोबाइल फोन लेकर मौके से फ़रार होने में कामयाब रहा, पुलिस फ़िलहाल उसकी खोजबीन में जुटी हुई है। फिर आरोपित की गिरफ्तारी के बाद पुलिस जब उसे अपने साथ लेकर जा रही थी, तब वह कई बार चिल्लाया लेकिन ऐसा उसने गिरफ्तारी के डर से नहीं किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ वह कई बार अल्लाह-हू-अकबर चिल्लाया और अंत में पुलिस उसे गिरफ्तार करके अपने साथ ले गई। पुलिस ने मामले के आरोपित की प्रोफाइल खंगालनी शुरू कर दी है।  

इसके अलावा पुलिस ने हत्या का प्रयास, आतंकवाद को बढ़ावा देना और चोरी का मामला दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। वहीं दूसरी तरफ घायल व्यक्ति को घटना के ठीक बाद स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उसका उपचार किया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ सोमवार को घायल व्यक्ति खतरे से बाहर बताया गया था। हाल फ़िलहाल में दुनिया के तमाम अन्य क्षेत्रों से इस तरह की कई घटनाएँ सामने आई हैं, जिनमें इस तरह के मज़हबी नारे लगा कर आम लोगों पर हमला कर दिया जाता है।  

फरीदी, जफर द्वारा संचालित 2 मेडिकल कॉलेज पर अंग तस्करी के आरोप, CM योगी ने दिए जाँच के आदेश

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के दो मेडिकल कॉलेज पर गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है – इलाज में लापरवाही और मानव अंगों की तस्करी। इन दोनों मेडिकल कॉलेज के नाम हैं – एरा मेडिकल कॉलेज (ERA’s Lucknow Medical College & Hospital) और इंटिग्रल मेडिकल इंस्टिट्यूट (INTEGRAL INSTITUTE OF MEDICAL SCIENCES & RESEARCH)

इस साल सितंबर में कोरोना संक्रमित युवक आदर्श पांडे की मौत एरा मेडिकल कॉलेज में हुई थी। हैरान करने वाली बात यह है कि आदर्श पांडे इससे पहले इंटिग्रल मेडिकल इंस्टिट्यूट में भर्ती थे।

आदर्श पांडे के परिवार वालों ने बताया कि 11 सितंबर को कोरोना संक्रमण के कारण उन्हें इंटिग्रल मेडिकल इंस्टिट्यूट में भर्ती कराया गया था। लेकिन वो अपनी बहन से बातचीत में बताए थे कि उन्हें दवा खाने के बाद नशा सा छा जाता है, मेडिकल स्टाफ बदसलूकी करता है।

बार-बार ऐसी बातों से घबरा कर आदर्श की बहन ने 22 सितंबर को जिले के तमाम अधिकारियों से शिकायत की और उसी रात आदर्श पांडे को एरा मेडिकल कॉलेज रेफर कराया। अब परिवार वालों का आरोप है कि इंटिग्रल मेडिकल इंस्टिट्यूट के स्टाफ ने एरा मेडिकल कॉलेज के स्टाफ को रात में ही फोन कर दिया और साजिश के तहत आदर्श की तबियत बिगाड़ दी।

23 सितंबर से लेकर 26 सितंबर तक आदर्श के परिवार वाले उससे संपर्क नहीं कर पा रहे थे। अचानक 26 सितंबर को घर वालों को मरीज की हालत ठीक बताई गई। लेकिन इस सूचना के 15 मिनट के अंदर ही दोबारा फोन कर आदर्श की मौत की सूचना दी गई। अब आदर्श पांडे के परिवार वालों ने मेडिकल कॉलेज पर आदर्श को मार डालने का आरोप लगाया है।

आदर्श की बहन का आरोप है कि इंटिग्रल मेडिकल इंस्टिट्यूट में मानव अंगों की तस्करी होती होगी, जिसका आदर्श ने वीडियो बना लिया होगा। उनके अनुसार इसी रैकेट का हिस्सा एरा मेडिकल कॉलेज भी है, जहाँ उनके भाई की मौत हुई।

आदर्श पांडे के परिवार वालों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले की शिकायत की है। प्रशासन की ओर से अब दोनों मेडिकल संस्थानों के खिलाफ जाँच के आदेश दे दिए गए हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इंटिग्रल मेडिकल इंस्टिट्यूट के डीन हैं – जफर इदरिस और एरा मेडिकल कॉलेज के डीन हैं – डॉ फरीदी। अखिलेश यादव तो यहाँ चीफ गेस्ट भी बन कर जा चुके हैं।

‘मैं मध्य प्रदेश की धरती पर ‘लव जिहाद’ नहीं होने दूँगा, ये देश को तोड़ने का षड्यंत्र है’: CM शिवराज सिंह चौहान

देश में लव जिहाद पर छिड़ी बहस के बीच मंगलवार (नवंबर 24, 2020) को उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने धर्म परिवर्तन से जुड़ा अध्यादेश पारित कर दिया है। देश के बाकी राज्यों में भी लव जिहाद पर कानून की माँग तेज होती जा रही है। इस बीच बुधवार (नवंबर 25, 2020) को मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने एक सभा में राज्य में लव जिहाद के कानून पर बड़ा बयान दिया।

उमरिया में जन-जातीय गौरव सम्मान समारोह में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लव-जिहाद के मुद्दे पर आक्रोश दिखाया है। उन्होने कड़े शब्दों में कहा, “मैं मध्यप्रदेश की धरती पर ‘लव जिहाद’ किसी भी कीमत पर नहीं चलने दूँगा। उसके लिए हम कानून बना रहे हैं। यह देश को तोड़ने का षड्यंत्र है, इसे किसी भी कीमत पर हम कामयाब नहीं होने देंगे।”

उन्होंने इस मौके पर कहा, “मेरे सामने ऐसे उदाहरण भी हैं कि शादी कर लो, पंचायत चुनााव लड़वा दो और फिर पंचायत के संसाधनों पर कब्जा कर लो। ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। मैं किसी भी कीमत पर मध्य प्रदेश की धरती पर लव जिहाद को कामयाब नहीं होने दूँगा।”

सीएम ने कहा, “मैं कोई कसर नहीं छोडूँगा परन्तु मैं आपसे चाहता हूँ कि ऐसे तत्व जो समाज को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, चाहे वो धर्मांतरण के नाम पर, चाहे दूसरे नाम पर हों, कुछ लोग संगठन बनाकर उनकी आड़ में अपने स्वार्थों को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे लोगों को अलग-थलग कीजिए।”

वहीं, जन-जातीय गौरव सम्मान समारोह में उन्होंने कहा कि ये कार्यक्रम आखिरी बार नहीं हो रहा है, हर साल 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा का जन्मदिन जनजाति गौरव दिवस के नाम से धूमधाम से मनाया जाएगा।

बता दें कि प्रदेश में लव जिहाद के खिलाफ प्रस्तावित बिल का ड्राफ्ट तैयार करने की कवायद तेज हो गई है। गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मंत्रालय में अफसरों के साथ बैठक की है। वहीं, उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने लव जिहाद के खिलाफ 24 नवंबर को अध्यादेश पारित कर दिया है। जिसमें गैर जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज करने और 10 साल की कठोरतम सजा का प्रावधान है।

इसके अलावा बिहार में भी लव जिहाद को लेकर कानून बनाने की बात चल रही है। हाल ही में गिरिराज सिंह ने कहा था, “मेरा मानना है कि ‘लव जिहाद’ आज सामाजिक समरसता के लिए एक तरह से कैंसर हो गया है। अब कई राज्य इसके लिए कानून बनाने की मुहिम में लग गए हैं। बिहार को भी इसको सांप्रदायिकता का नाम न देकर सामाजिक समरसता के लिए लव जिहाद पर काम करने की जरूरत है।”

क्या है अर्णब-अन्वय नाइक मामला? जानिए सब-कुछ: अजीत भारती का वीडियो | Arnab Goswami Anvay Naik case explained in detail

रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी पर मुंबई पुलिस का चेहरा 4 नवंबर को पूरे देश ने देखा। 20 सशस्त्र पुलिसकर्मी उनके घर में घुसे, घसीटकर उन्हें अलीबाग थाने ले गए।

सबसे ज़्यादा हैरान करने वाली बात यह थी कि अर्णब को 2018 के दौरान आत्महत्या के लिए उकसाने वाले ऐसे मामले में गिरफ्तार किया गया जिसे पहले बंद किया जा चुका था लेकिन उनपर कार्रवाई करने के लिए हाल ही में फिर से यह फाइल खोली गई।

महाराष्ट्र सरकार ने 2018 के जिस मामले की फाइल दोबारा खोल कर अर्णब गोस्वामी को गिरफ्तार किया था उस मामले में अंतरिम रिपोर्ट तक दायर की जा चुकी थी। अब ऑपइंडिया ने ARG Outlier Media Asianet News Pvt Ltd (ARG), CDPL (अन्वय नाइक की कंपनी, जिन्होंने आत्महत्या की थी) और नाइक की पत्नी और बेटी के बीच हुई पूरी बातचीत को एक्सेस किया है।

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यूपी में लव जिहाद पर अध्यादेश पारित: अजीत भारती का वीडियो | UP passes ordinance on Love Jihad and conversions

योगी आदित्यनाथ के कैबिनेट में उत्तर प्रदेश की सरकार ने लव जिहाद अध्यादेश को पारित कर दिया। अध्यादेश में नाम छिपाकर शादी करने वाले के लिए 10 साल की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा गैरकानूनी तरीके से धर्म परिवर्तन पर 1 से 10 साल तक की सजा होगी। साथ ही 15 हजार तक का जुर्माना भी देना पड़ सकता है।

सामूहिक रूप से गैरकानूनी तरीके से धर्म परिवर्तन करने पर जहाँ 10 साल तक सजा हो सकती है, वहीं 50 हजार तक जुर्माना भी देना पड़ सकता है। दूसरे धर्म में शादी करने के लिए संबंधित जिले के जिलाधिकारी से इजाजत लेना अनिवार्य होगा। इसके लिए शादी से पहले 2 माह की नोटिस देना होगा। बिना अनुमति लिए शादी करने या धर्म परिवर्तन करने पर 6 महीने से लेकर 3 साल तक की सजा के साथ 10 हजार का जुर्माना भी देना पड़ेगा।

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Cyclone Nivar के अगले 12 घंटे में अति विकराल रूप धरने की आशंका: ट्रेनें, फ्लाइट रद्द, NDRF की टीम तैनात

चक्रवाती तूफान ‘निवार’ (Cyclonic Storm Nivar) अगले 12 घंटे में अति विकराल रूप धर बुधवार आधी रात या गुरुवार तड़के तमिलनाडु और पुडुचेरी के बीच तट से टकराएगा। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने यह जानकारी दी। इस बीच सरकार ने कहा है कि चेम्बरमबक्कम झील में क्षमता से अधिक पानी होने की आशंका के चलते झील का पानी छोड़ा जाएगा।

बुधवार को आईएमडी द्वारा जारी बुलेटिन में कहा गया, “चक्रवाती तूफान के अगले 12 घंटे में अति विकराल रूप धरने की आशंका प्रबल है। इसके उत्तर पश्चिम की ओर बढ़ने और 25 नवंबर की रात या 26 नवंबर तड़के तमिलनाडु और पुडुचेरी के बीच कराईकल और मामल्लापुरम पर तट से टकराने की आशंका है। तूफान की गति 120-130 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी जो बढ़कर 145 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती है।”

राष्ट्रीय आपदा रिस्पांस फोर्स के महानिदेशक एसएन प्रधान ने बताया है, “तमिलनाडु से लगभग 30,000 से अधिक लोगों को निकाला गया है और पुडुचेरी से 7,000 लोगों को निकाला गया है। केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकारें मिलकर काम कर रही हैं। क्षति को कम करने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “चक्रवात निवार को ‘बेहद गंभीर’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इस दृष्टिकोण के साथ हम खराब से खराब स्थिति से निपटने की तैयारी कर रहे हैं। हमारी टीमें पिछले 2 दिनों से मैदान पर हैं। अब तक तमिलनाडु, पुडुचेरी और आंध्र प्रदेश में 25 टीमें तैनात हैं।”

घरों में रहने की अपील

तमिलनाडु और पुडुचेरी के तट से आज चक्रवाती तूफान निवार गुजरने वाला है। इसे लेकर सरकार और एनडीआरएफ की टीमें सतर्क हो गई हैं। तटीय इलाकों में बिना किसी कारण लोगों से घर से बाहर निकलने से मना किया गया है। पुडुचेरी की एलजी किरण बेदी ने लोगों से घर में रहने की अपील की है। पुडुचेरी के मुख्यमंत्री नारायण सामी ने कहा है कि साइक्लोन आज शाम से तटीय इलाकों को छुएगा। एनडीआरएफ, तटरक्षक बल, दमकल विभाग सहित विभिन्न राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के कर्मचारियों की तैनाती किसी भी स्थिति से निपटने के लिए की गई है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी से बातचीत कर तूफान से पैदा हालात की जानकारी ली और केंद्र से हर संभव मदद का भरोसा दिया। एनडीआरएफ ने कहा कि चक्रवाती तूफान की स्थिति तेजी से बदल रही है और यह 120 से 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाले अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल सकता है। 

तूफान के मद्देनजर तमिलनाडु और पुडुचेरी में बुधवार को सार्वजनिक छुट्टी घोषित की गई है और सार्वजनिक परिवहन को स्थगित कर दिया गया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलानीस्वामी ने कहा, “बुधवार को राज्य में आम छुट्टी होगी लेकिन आवश्यक सेवा से जुड़े कर्मी काम करेंगे।”

पुडुचेरी के उद्योग एवं राजस्व मंत्री एमओएचएफ शाहजहाँ ने कहा कि बुधवार को सभी सरकारी कार्यालयों में छुट्टी होगी और लोगों की सुरक्षा के लिए सभी कदम उठाए जा रहे हैं। उधर, चक्रवात को देखते हुए विमान सेवा इंडिगो ने कहा है कि बुधवार को निर्धारित 49 उड़ानों को रद्द कर दिया गया है। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि आगे की स्थितियों के अनुरूप अब फैसला लिया जाएगा।

तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी में चक्रवाती तूफान निवार के मद्देनजर एनडीआरएफ के करीब 1,200 बचाव कर्मियों को तैनात किया गया है और 800 अन्य को तैयार रखा गया है। चेन्नई हवाई अड्डे पर आने और यहाँ से जाने वाली उड़ानों को रद्द कर दिया गया है। इसके अलावा ट्रेनों को भी रद्द किया गया है। खतरनाक चक्रवात ‘निवार’ के मद्देनजर चेन्नई एयरपोर्ट पर उड़ानों का संचालन आज शाम 7 बजे से लेकर कल सुबह 7 बजे तक निलंबित किया गया है।

फिलहाल कहाँ है चक्रवात

निवार चक्रवात फिलहाल पश्चिम-पश्चिमोत्तर की ओर बढ़ रहा है और 6 घंटे बाद इसके उत्तर-पश्चिम की ओर मुड़ने का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक चक्रवाती तूफान बंगाल की खाड़ी के दक्षिण पश्चिम में है, जो कि कुड्डालोर के पूर्व और दक्षिण पूर्व में 310 किमी दूर है। पुडुचेरी से इसकी दूरी 350 किमी और चेन्नई से 370 किमी दूर है। अगले 6 घंटों में इसके और ज्यादा खतरनाक होने की आशंका बढ़ती जा रही है।

तमिलनाडु के मामल्लापुरम में भारी बारिश हो रही है। निवार चक्रवात आज आधी रात को या कल तड़के मामल्लापुरम और कराईकल के बीच से गुजर सकता है। मामल्लापुरम में बारिश के साथ-साथ तेज हवाएँ भी चल रही हैं। वहीं समुद्र में तेज लहरें भी उठ रही हैं।

इमरजेंसी के लिए स्वास्थ्य सेवा

तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री सी. विजयभास्कर ने कहा कि आपातकालीन मेडिकल सुविधाएँ सुनिश्चित करने के लिए पूरी तैयारी की जा रही है। पीएचसी स्तर पर दवाएँ भंडारित कर ली गई हैं। सभी सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही किसी भी इमरजेंसी के लिए ‘हॉस्पिटल ऑन व्हील्स’ को भी तैयार रहने को बोला गया है।

यूजीसी-नेट 2020 परीक्षा स्थगित

चक्रवाती तूफान ‘निवार’ के खतरा को देखते हुए तमिलनाडु और पुडुचेरी में 26 नवंबर को होने वाली यूजीसी-नेट 2020 (गणित और रसायन विज्ञान) की परीक्षा अगले आदेश तक स्थगित कर दी गई है। 

आखिर CM रावत ने India Today से ये क्यों कहा- भ्रामक खबर फैलाने से बचें?

समाचार चैनल ‘India Today’ ने अपने रोजाना के फर्जी अजेंडा और सत्ता विरोधी दुष्प्रचार में एक नया कारनामा कर दिखाया है। इंडिया टुडे ने अपने समाचार चैनल पर दावा किया कि उत्तराखंड सरकार ने देहरादून में रविवार, 29 नवम्बर से लॉकडाउन घोषित किया है। ख़ास बात यह है कि उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से India Today की इस खबर को फर्जी बताया है।

सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इंडिया टुडे चैनल के बुलेटिन को ट्वीट करते हुए लिखा, “कृपया इस तरह की अफ़वाहों पर ध्यान ना दें- सरकार ने ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया है। @IndiaToday – आपसे आग्रह है कि ऐसी भ्रामक खबरें फैलाने से बचें!”

गौरतलब है कि कोरोना महामारी हो या फिर सामाजिक अपराध, इंडिया टुडे का कई प्रकार की अफवाह और ख़बरों को बिना सत्यापित किए हुए प्रकाशित करने का इतिहास रहा है। इस बार भी बिना शासन और सरकार से जानकारी लिए हुए ‘व्हाट्सऐप’ आधारित खबरों को प्रकाशित करने की जल्दबाजी के कारण इण्डिया टुडे ने फर्जी खबर फ़ैलाने का काम किया है।

इसी चैनल के पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने इसी प्रकार के उतावलेपन में पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की मौत की खबर को भी उनकी मौत से कई दिन पहले ट्वीट किया था। इसी तरह से उत्तर प्रदेश के हाथरस में इंडिया टुडे चैनल की विरोधी राजनीतिक दलों से प्रभावती ‘रिपोर्टिंग’ भी लोगों के बीच चर्चा का कारण बनी रही।

#justiceforkirannegi: CM त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उठाया गैंगरेप पीड़िता के परिवार को इंसाफ दिलाने का बीड़ा, कहा- अब चुप नहीं बैठेंगे

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हुआ निर्भया कांड आज भी रूह कंपा देता है। तसल्ली है तो बस ये कि उसके दोषियों को फाँसी देकर देर-सवेर ही सही उसके साथ न्याय तो हुआ। 

हम खुश हैं क्योंकि एक ऐसे मुद्दे पर हमें कुछ दिन पहले जीत मिली जिसकी वीभत्सता की हमें जानकारी थी, जिसका जिक्र आए दिन मीडिया में हो रहा था, जिसके लिए वकील कोर्ट के चक्कर लगा रहे थे और जिसके लिए कैंडल मार्च किया गया था। 

लेकिन, इन सबके बीच उस उत्तराखंड की किरण नेगी का क्या? जिसके शरीर को दिल्ली में ही उसी साल निर्भया से पहले नोच लिया गया और जिसकी निर्मम हत्या पर चूँ तक न हुई। शायद उस समय किसी ने आवाज उठाई होती तो दिसंबर आते-आते निर्भया भी सतर्क हो जाती और उसके दोषियों के भीतर भी डर होता।

सोशल मीडिया के कारण अब किरण नेगी का मामला पहुँचा CM रावत के पास

आज सोशल मीडिया के कारण किरण नेगी का यह मामला मुख्यधारा में आया है। उत्तराखंड की बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए सीएम त्रिवेंद्र रावत ने इस पर स्वयं संज्ञान ले लिया है। उन्होंने किरण को न्याय दिलाने का जिम्मा उठाते हुए ये वादा किया है कि दोषियों को बिना दंड दिलवाए शांत नहीं बैठेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पर उन सभी लोगों का आभार व्यक्त किया है जो इस पर सालों से लगातार आवाज उठाते रहे।

मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि वह दोषियों को घृणित अपराध के लिए दंड दिलवाएँगे। साथ ही परिवार को भी हर तरह से लीगल सपोर्ट करेंगे। इसी बाबत सीएम रावत ने आज (नवंबर 25, 2020) किरण के माता-पिता से मुलाकात भी की। उन्हें बल देते हुए आश्वस्त किया कि वह उनकी हर संभव मदद करेंगे।

क्या हुआ था किरण नेगी के साथ?

गौरतलब है कि किरण नेगी का मामला जो बहुत पहले सुन लिया जाना चाहिए था, जिस पर आज तक प्रशासन मौन रहा। संदेह है कि यदि इस दर्दनाक घटना पर सीएम रावत स्टैंड नहीं लेते तो शायद यह केस अब भी चर्चा में नहीं होता।

किरण की मृत्यु कोई सामान्य घटना नहीं थी। किरण एक ऑफिस जाने वाली सपने देखने वाली मिडिल क्लास लड़की थी। चूँकि परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी और पिता सेक्योरिटी गार्ड थे इसलिए उसे यही लगता था कि जल्द से जल्द एक घर खरीदना है और अपने पूरे परिवार की जिम्मेदारी उठानी है।

वह घर आते ही अपनी माँ को चिल्ला कर बताती थी, ‘माँ मैं आ गई।’ उसकी आवाज को याद करते हुए किरण की माँ बताती हैं कि उनकी बेटी को सपने देखने का शौक था और उड़ने का भी।

9 फरवरी 2012 को किरण भी अपने ऑफिस से घर की ओर आ रही थी कि तभी एक लाल इंडिका में उसका अपहरण गुड़गाँव में कर लिया गया। इसके बाद हरियाणा ले जाकर उन दरिंदों ने उसका तीन दिन तक रेप किया। फिर अंत में उसे सरसों के खेत में मरने के लिए छोड़ दिया। 

किरण ने बार-बार अपनी जान की भीख माँगी, पर कल्पना करिए जिन्होंने उसके नाजुक अंगो में शराब की बोतल डाल दी हो, उसकी आँखों को तेजाब से जला दिया हो, उसके शरीर को खौलते पानी से दागा हो, उन्हें उस पर दया कैसे आती! उन दरिंदों ने पहले तीन दिन किरण के शरीर पर अपनी हवस मिटाई और फिर उसे दर्दनाक मौत दे दी।

मौजूदा जानकारी से पता चलता है कि किरण के साथ उस रात तीन सहेलियाँ थी। सभी अपना काम करके घर को लौट रही थीं। तभी एक इंडिका में बैठे तीनों दरिंदों ने सब लड़कियों को छेड़ना शुरू किया और जैसे ही वो जब वहाँ से भागने लगीं, उन लोगों ने किरण को अपनी गाड़ी में जबरन बिठा लिया।

पुलिस ने नहीं की सुनवाई, शीला दीक्षित ने कहा- ऐसे अपराध होते रहते हैं

किरण के अपहरण के बाद उसकी सहेलियों ने यह सूचना उसके घरवालों और पुलिस की दी थी। लेकिन प्रशासन ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। अंत में उत्तराखंड समाज के लोगों को इस घटना का विरोध करने के लिए सड़कों पर आना पड़ा, जिसकी वजह से पुलिस हरकत में आई और 14 फरवरी को किरण की लाश हरियाणा के खेत से मिली।

किरण के पिता बताते हैं कि अपनी बेटी के लिए न्याय माँगने वो शीला दीक्षित के पास तक गए थे, मगर उन्हें ये कह दिया गया कि इस तरह की घटनाएँ होती रहती हैं इसके बाद अधिकारियों ने उन्हें 1 लाख का चेक थमाया और किसी प्रकार की मदद या मुआवजा देने से इंकार कर दिया गया।

अब लगभग 9 साल होने वाले हैं। किरण के पिता मीडिया को बताते हैं कि उन्हें आज तक इंसाफ की दरकार है। साल 2014 में किरण का गैंगरेप करने वाले तीनों दोषियों को उच्च न्यायालय ने फाँसी की सजा दी थी, मगर बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुँच कर लटक गया। अब स्थिति ये है कि उन्हें यहाँ तक नहीं पता कि कोर्ट की अगली तारीख क्या है और उनके वकील का नाम क्या है।

क्या चाहते हैं किरण नेगी के माता-पिता?

माँग के नाम पर बस वह इतना चाहते हैं कि उनकी बेटी के साथ दरिंदगी करने वालों को फाँसी हो। उन्हें 8 साल कोर्ट के चक्कर लगाते बीत गए हैं, लेकिन न्याय का कुछ अता-पता नहीं है। वो प्रशासन पर सवाल उठाते हुए सवाल करते हैं कि यदि उनकी बिटिया हाथरस की होती या फिर निर्भया होती तो उसे न्याय मिल जाता?

उन्हें भी यह बात सताती है कि निर्भया से पहले हुई इस घटना पर अब भी कोई सुनवाई नहीं है। वहीं निर्भया के दोषियों को इंसाफ मिल चुका है। कुँवर नेगी (किरण के पिता) कहते हैं कि जब तक रेप मामलों में त्वरित कार्रवाई का प्रावधान नहीं होता तब तक कुछ भी नहीं बदल पाएगा। बेटियाँ डर महसूस करती हैं, ये डर अपराधियों में होना चाहिए। जब तक फाँसी की सजा नहीं होगी, यह रेप नहीं रुकेंगे। जिन मामलों में पुख्ता सबूत मिल रहे हैं उनमें तो 6 माह में फाँसी हो ही जानी चाहिए।

किरण नेगी के लिए लगाए गए पोस्टर

बेटी को न्याय दिलाने के लिए कुँवर नेगी जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर चुके हैं। जहाँ उन्हें पीड़ा यह देख कर हुई कि एक ओर केजरीवाल का पंडाल लगा था और उन्होंने उनके बारे में जानने तक का प्रयास नहीं किया। वहीं दूसरे गेट पर राहुल गाँधी की बैठक हुई और उन्होंने उनकी तरफ तक नहीं देखा। ये सब इन नेताओं ने तब किया जब कुँवर नेगी अपनी बिटिया के लिए हाथ में पोस्टर लेकर न्याय माँग रहे थे।

साल 2019 में हुआ था किरण के लिए पहली बार कैंडल मार्च

पिछले साल सर्वोच्च न्यायालय संग्रहालय से इंडिया गेट तक किरण के लिए न्याय माँगते हुए पहली बार कैंडल मार्च निकाला गया। इस मार्च में उत्तराखंड समाज के तमाम सामाजिक संगठन और लोग एकत्र हुए। इन सबने एक आवाज़ में माँग की कि उत्तराखंड की बेटी किरन नेगी के हत्यारों को जल्द से जल्द फाँसी की सजा दी जाए।

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कैंडल मार्च की तस्वीरें

कैंडल मार्च की अगवाई करने वाले समाज सेवी विनोद बछेती ने बताया था कि वह अपनी उत्तराखंड की बेटी को न्याय दिलाने के लिए एकत्रित हुए हैं। उन्हें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट बेटी के हत्यारों को फाँसी देगा और उत्तराखंड के लोगों को न्याय मिलेगा।

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कैंडल मार्च की तस्वीरें

इस कैंडल मार्च में शामिल किरण के माता पिता तब तक यही आस लगाए हुए थे कि जैसे निर्भया के हत्यारों को फाँसी की सजा दिलवाने की तैयारी हो रही है, वैसे ही कोर्ट उनकी भी सुनेगा, लेकिन अफसोस ये मामला इस साल तक लटका रहा। हालाँकि अब हो सकता है सीएम रावत के साथ आने के बाद उन्हें जल्द इसमें न्याय मिले।