Home Blog Page 4300

मंदिर में किसिंग सीन: Netflix के 2 अधिकारियों पर MP में FIR, गृह मंत्री ने दिए थे जाँच के आदेश

ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स के दो अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने एक वीडियो के जरिए इसकी जानकारी दी। बता दें कि नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज ‘ए सूटेबल बॉय’ (A Suitable Boy) पर भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के महासचिव गौरव तिवारी ने मंदिर प्रांगण में अश्लील दृश्य फिल्माने और लव जिहाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। 

इसके बाद गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मध्य प्रदेश पुलिस को इसकी जाँच करने को कहा था कि क्या Netflix का ‘द सूटेबल बॉय’ धार्मिक भावनाओं को आहत करता है। उन्होंने वीडियो में बताया कि प्रथम दृष्टया पुलिस ने इसे सही पाया है। उन्होंने बताया कि एफआईआर में नेटफ्लिक्स की वीपी (कंटेंट) मोनिका शेरगिल और डायरेक्टर (पब्लिक पॉलिसीज) अंबिका खुराना का नाम है। इनके खिलाफ रीवा पुलिस स्टेशन में धारा 295A के तहत मामला दर्ज किया गया है।

उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “Netflix पर प्रसारित वेब सीरीज “A Suitable Boy” के आपत्तिजनक दृश्यों से धर्म विशेष की भावनाएँ आहत होने का कानूनी परीक्षण करने के निर्देश गृह एवं विधि विभाग के अधिकारियों को दिए थे। परीक्षण में भावनाएँ आहत होने का आरोप सही पाया गया है।”

नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि वे भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव गौरव तिवारी द्वारा दायर शिकायत पर रीवा पुलिस द्वारा बुक किए गए हैं। गौरव तिवारी ने रीवा के एसपी राकेश कुमार सिंह को एक मेमोरेंडम देकर माँग की थी कि निर्माता-निर्देशक को माफी माँगने को कहा जाए और ये आपत्तिजनक दृश्य तुरंत हटाया जाए।

इससे पहले रविवार (नवंबर 22, 2020) को ट्वीट करते हुए कहा था, “एक ओटीटी मीडिया प्लेटफॉर्म पर “A Suitable Boy” नामक फ़िल्म जारी की गई है। इसमें बेहद आपत्तिजनक दृश्य दिखाए गए हैं जो एक धर्म विशेष की भावनाओं को आहत करते हैं। मैंने पुलिस अधिकारियों को इस विवादास्पद कंटेंट का परीक्षण कराने को निर्देशित किया है।”

उन्होंने आगे लिखा था, “पुलिस अधिकारी परीक्षण कर बताएँगे कि संबंधित ओटीटी प्लेटफार्म और फ़िल्म के निर्माता निर्देशक पर धार्मिक भावनाएँ आहत करने के लिए क्या कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।”

बता दें कि विक्रम सेठ के लिखे उपन्यास पर आधारित इस सीरीज को मीरा नायर ने डायरेक्ट किया है। फिल्म की कहानी के केंद्र में 1951 की एक लड़की है, जिसके लिए उसकी माँ एक योग्य लड़के की तलाश में है। इस तलाश के दौरान ही सीरीज में भारत विभाजन से उपजी त्रासदी से लेकर धर्म का झगड़ा, मंदिर-मस्जिद, उस वक्त की राजनीति और बड़ी-बड़ी उलझनें लिए बहुत से शेड्स दिखते हैं।

गौरव तिवारी ने ट्वीट करते हुए लिखा था, “मंदिर का प्रांगण, बैकग्राउंड में आरती और अश्लील दृश्य। क्या मस्जिद में अजान के समय ऐसा शूट करने की ‘क्रीएटिव फ़्रीडम’ है आपको नेटफ्लिक्स? हिंदुओं की सहिष्णुता को उनकी कमजोरी मत समझिए, ये मध्य प्रदेश का नहीं, भगवान शिव और करोड़ों शिव भक्तों का भी अपमान है। माफ़ी माँगनी पड़ेगी।”

गौरतलब है कि नेटफ्लिक्स की प्रवृत्ति हमेशा से हिंदू विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा देने की रही है। इसने ‘Ghoul’, ‘Sacred Games’ और ‘लैला’ के रूप में ऐसी कई वेब सीरिज बनाई है, जो हिंदू विरोधी भावनाओं को जन्म दे रही है और साथ ही इससे विश्व में हिंदू धर्म की नकारात्मक छवि पेश की जा रही है। ‘लैला’ वेब सीरीज में सनातन धर्म के अनुयायियों को सबसे हिंसक और दमनकारी मानसिकता वाले लोगों के तौर पर दिखाया गया है, जो सिर्फ लोगों को बाँटकर उन पर राज करना चाहते हैं। 

बंगाल की खाड़ी में Nivar चक्रवात: तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ रहा है, जानिए क्या हो सकता है असर

दक्षिण-पश्चिम तटों और बंगाल की दक्षिणी खाड़ी में हवा का दबाव बढ़ने की वजह से तमिलनाडु और पुडुचेरी में चक्रवात ‘निवार’ (Cyclone Nivar) का खतरा मंडरा रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटों में इस तेज हवा के तूफान में तब्दील होने की आशंका है। 

कब टकराएगा तट से

इस तूफान के 25 नवंबर को तमिलनाडु और पुडुचेरी के तट पर बसे इलाके कराईकल और मामल्लापुरम पहुँचने का अनुमान है। अगर हवा का दबाव उत्तर-पश्चिम की ओर जाता है, तो निवार तूफान उत्तर-पूर्व होते हुए 24 नवंबर को श्रीलंकाई तटों पर पहुँच सकता है।

इन इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट

निवार तूफान के प्रभाव से तटीय इलाकों में समान्य से अधिक बारिश हो सकती है। बारिश के साथ तेज हवाएँ भी इन इलाकों की परेशानियाँ बढ़ा सकती हैं। तूफान के प्रभाव की वजह से साउथ पेनिनसुलर इंडिया के क्षेत्रों में बारिश सामान्य की तुलना में ज्यादा होने की संभावना है। वहीं, 24 से 26 नवंबर के बीच इस तूफान के प्रभाव से आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों रायलसीमा और तेलंगाना में भारी बारिश की संभावना है।

NDRF की टीम तैनात

बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान निवार की वजह से तमिलनाडु और पुडुचेरी के तटीय इलाकों में भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग द्वारा जारी चक्रवाती तूफान निवार की चेतावनी के बाद तमिलनाडु के नागापट्टिनम और कराईकल क्षेत्रों में राष्ट्रीय आपदा बचाव दल (NDRF) की 6 टीमों को अलर्ट किया गया है।

फिलहाल कहाँ है ये तूफान

मौसम विभाग के मुताबिक चक्रवाती तूफान निवार के अगले 24 घंटे में तमिलनाडु और पुडुचेरी तटों को पार करने का अनुमान है। फिलहाल चक्रवाती तूफान पुडुचेरी से 600 किलोमीटर दक्षिण जबकि चेन्नई से दक्षिण पूर्व में 630 किलोमीटर दूर है। अगले 24 घंटे में ये चक्रवाती तूफान में बदल जाएगा। इस दौरान हवा की गति धीरे-धीरे बढ़ेगी। बंगाल की दक्षिण-पश्चिम खाड़ी और तमिलनाडु और पुडुचेरी के तटों पर 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएँ चल सकती हैं। 

मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह 

मौसम विभाग ने अपने अनुमान में कहा है कि तमिलनाडु और पुडुचेरी में 24 से 25 नंवबर और आंध्र प्रदेश के दक्षिणी और रायलसीमा में 25 से 26 नवंबर और तेलंगाना में 26 नंवबर को भारी बारिश होगी। मौसम विभाग ने इस दौरान मछुआरों को समुद्र तट पर न जाने और सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ की टीमों को भी अलर्ट रहने को कहा गया है।

चेन्नई के क्षेत्रीय मौसम विभाग के डिप्टी निदेशक एस बालाचंद्रन का कहना है कि तटीय जिलों में सोमवार से ही बारिश पड़ सकती है जो कि धीरे-धीरे चक्रवाती तूफान में बदल जाएगी। उन्होंने कहा कि मंगलवार और बुधवार को तटीय इलाकों में भारी बारिश के आसार हैं। 

बताया जा रहा है कि नागपट्टिनम से लेकर चेन्नई के बीच का समूचा तटीय क्षेत्र 36 घंटों के लिए भयानक मौसम का अनुभव कर सकता है। इस दौरान सम्पत्तियों को व्यापक नुकसान की आशंका है। चेन्नई और पुडुचेरी के बीच तटीय इलाकों पर 25 नवंबर का दिन भारी पड़ सकता है। निचले इलाकों में बारिश का पानी भर सकता है और कई इलाकों में बाढ़ का संकट भी पैदा हो सकता है।

बंगाल में ‘बिहार मॉडल’ लागू किया तो खून-खराबा होगा: ओवैसी को झटका दे ममता से मिल गए अनवर पाशा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले लिबरल और मीडिया गिरोह का एक वर्ग असदुद्दीन ओवैसी को लेकर घनघोर आशावादी था। बिहार चुनाव को आधार बना कर इस बात की अटकलें लगाई जा रही हैं कि एआईएमआईएम का प्रदर्शन कैसा हो सकता है। इस तरह के तमाम कयासों के बीच बंगाल में ओवैसी की पार्टी AIMIM को बड़ा झटका लगा है। एआईएमआईएम नेता अनवर पाशा तृणमूल कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए हैं। इसके अलावा उन्होंने एआईएमआईएम के राजनीतिक एजेंडों को भी कठघरे में खड़ा किया है। 

अनवर पाशा ने कहा कि एआईएमआईएम ने बिहार विधानसभा चुनाव में ध्रुवीकरण की राजनीति का सहारा लेकर भाजपा को जिताने में मदद की है। यह बेहद ख़तरनाक है और पश्चिम बंगाल में ऐसा नहीं होने दिया जा सकता। अगर पश्चिम बंगाल में ‘बिहार मॉडल’ लागू किया जाता है तो सिर्फ खून-खराबा होगा। पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्यकों की आबादी सिर्फ 30 फ़ीसदी है ऐसे में एआईएमआईएम जैसी सांप्रदायिक शक्तियों को रोकना बेहद ज़रूरी है।

अनवर पाशा का कहना था, “इन सांप्रदायिक ताकतों को पश्चिम बंगाल में दाखिल होने से रोकना बेहद ज़रूरी है। सालों से अलग-अलग समुदाय के लोग सद्भावना के साथ रह रहे हैं। लेकिन अब उन्हें बाँटने और उनके बीच घृणा पैदा करने का प्रयास हो रहा है।” इसके बाद पूर्व एआईएमआईएम नेता ने ममता बनर्जी की शान में भी कसीदे पढ़े। 

पाशा ने कहा कि ममता बनर्जी इकलौती मुख्यमंत्री थीं जिन्होंने सीएए और एनआरसी के विरोध में आवाज़ बुलंद की। लोग पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाते हैं, जबकि सच यह है कि अगर वह इमामों का आर्थिक सहयोग करती हैं तो पुजारियों का भी करती हैं। वह अपना सिर ढक कर आमीन कहती हैं तो पूजा करने के लिए मंदिर भी जाती हैं। इतना ‘सेकुलर नेता’ अपने जीवन में नहीं देखा। 

पाशा ने कहा, “मेरा पश्चिम बंगाल के मुस्लिमों से अनुरोध है कि वह भगवा को प्रदेश से दूर रखने के लिए ममता बनर्जी की मदद करें।” इसके बाद ओवैसी के विरुद्ध खरी-खरी बोलते हुए अनवर पाशा ने कहा, “मेरा उनके (ओवैसी) लिए एक पैगाम है। चुनाव लड़ने के लिए बंगाल आने की कोई ज़रूरत नहीं है। बंगाल को आपकी कोई ज़रूरत भी नहीं है। अगर फिर भी आप आते हैं तो हम डट कर आपसे लड़ेंगे। हम पश्चिम बंगाल में आपको ध्रुवीकरण की राजनीति नहीं करने देंगे और न ही भाजपा को जिताने में मदद करने देंगे।”

बिहार विधानसभा चुनावों में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने सीमांचल क्षेत्र में 5 सीटें हासिल की थीं। जिसके बाद पश्चिम बंगाल के आगामी चुनावों को लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

क्या है एप्पल का M1 प्रोसेसर, क्यों बदल जाएगा आपका लैपटॉप सदा के लिए पावर और परफॉर्मेंस दोनों में

अमेरिकी कंपनी एप्पल (Apple) ने अपने आईफोन (i-phone), आईपैड (i-pad), आईवॉच जैसे प्रोडक्ट्स के लिए चिप (CHIP) तैयार करने बाद अब MAC प्रोडक्ट के लिए भी चिप तैयार कर ली है। कंपनी ने इस चिप को बेहद आसान नाम दिया है- M1 चिप। ये चिप कई मायनों में खास है। 

15 साल में पहली बार मैकबुक के लिए डिजाइन हुई इस चिप में मुख्य रूप से परफॉर्मेंस को अधिक ध्यान में रखा गया है। इसमें 8 कोर CPU (सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट) और 8 कोर जीपीयू (ग्राफिक प्रोसेसिंग यूनिट) बिल्ट किया गया है। इसके अलावा रैम को भी इसी में जगह दी गई है। एप्पल का दावा है कि उनका लैपटॉप 98% लैपटॉप और पीसी से ज्यादा तेज काम करेगा।

Apple M1 chip diagram

इस चिप के साथ ही एप्पल ने न केवल मैक के बेहतर परफॉर्मेंस को आश्वस्त किया है बल्कि इसके बैटरी बैक अप को भी पहले से बढ़िया बताया है। एप्पल फिलहाल इस चिप को MacBook Air, MacBook Pro 13 inch और Mac Mini में इस्तेमाल करेगा।

इस चिप के आने के बाद ऐसा नहीं है कि intel प्रोसेसर वाले प्रोडक्ट्स को बाजार जगह नहीं देगा, लेकिन अब इंटेल प्रोसेसर के साथ ग्राहकों के पास इस नई तकनीक को एक्सपीरियंस करने का भी मौका होगा।

क्या होगी खासियत?

मौजूदा जानकारी के अनुसार मैक एयर में उपभोक्ता लगभग 15 घंटे तक ब्राउजिंग कर पाएगा। वही मैकबुक प्रो 13 इंच में यही समय सीमा 17-18 घंटे भी पहुँचेगी। एप्पल का दावा है कि 4 higher core और 4 lower core के साथ यह M1 चिप दुनिया का सबसे तेज सीपीयू कोर होगा। कंपनी ने दावा किया है कि हर पावर लेवल पर M1 बेहतर प्रदर्शन करेगा। इसमें वीडियो एडिटिंग और गेम्स को लेकर भी आपका अनुभव अधिक स्मूथ रहेगा, ऐसा एप्पल का कहना है।

M1 चिप में 16 बिलियन ट्रांजिस्टर का इस्तेमाल किया गया है। एप्पल का कहना है कि उसने पहली बार एक चिप में इतने ट्रांजिस्टर का प्रयोग किया है। इस तकनीक के इस्तेमाल के साथ ही मैक यूजर पहले से अधिक एप्स को चला पाएँगे।

Apple M1 chip diagram

कंपनी ने यह भी कहा है कि आने वाले समय में इस नई चिप के साथ एप्स की संख्या में सिर्फ़ बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। इस चिप में 5 नैनोमीटर प्रोडक्शन प्रोसेस का इस्तेमाल हुआ है, बिलकुल आईफोन 12 में यूज हुई A14 चिप की तरह।

सिक्यॉरिटी के मामले में भी एप्पल M1 चिप के साथ अपने उपभोक्ताओं को आश्वास्त करता है। एप्पल के अनुसार M1 और macOS Big sur किसी भी पर्सनल कंप्यूटर को एडवांस हाई सिक्यॉरिटी प्रदान करता है।

कितना तेज होगा M1 चिप?

एप्पल के अनुसार, M1 चिप कई चीजों में इंटेल प्रोसेसर से तेज होगा और इसे मैक में रिप्लेस किया जाएगा। M1 मैकबुक को 3.5 गुना ज्यादा तेज स्पीड देगा और ग्राफिक्स को 5 गुना अधिक। इसी तरह AI कंप्यूटेशन भी पहले से 11 गुना ज्यादा तेज होगा। पिछले साल बिकने वाले 98% लैपटॉप से तेज इसकी स्पीड होगी, ऐसा एप्पल का दावा है।

‘गुलाम नबी आजाद ने हरियाणा में कॉन्ग्रेस का बेड़ा गर्क कर दिया’: वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता ने बताया गाँधी परिवार का गद्दार

कॉन्ग्रेस पार्टी में आंतरिक कलह लगातार बढ़ती जा रही है। अब पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के हाल के बयानों का जवाब देते हुए पार्टी कार्यसमिति के विशेष आमंत्रित सदस्य कुलदीप बिश्नोई ने आरोप लगाया है कि राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष विपक्षी दलों के साथ मिल कर कॉन्ग्रेस पार्टी को तोड़ने में लगे हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गुलाम नबी आजाद गाँधी परिवार के साथ गद्दारी करने में लगे हुए हैं।

कुलदीप बिश्नोई हरियाणा कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं, जिन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से ये आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्हें गुलाम नबी आजाद के बयान से काफी हैरानी हुई है। उन्होंने बताया कि उन्हें दुःख भी हुआ और इस बात पर गुस्सा भी आया है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेता होने के बावजूद उन्होंने जिस तरह का बयान दिया है, वो निंदनीय है। उन्होंने आज़ादी में कॉन्ग्रेस के योगदान को याद किया।

कुलदीप बिश्नोई ने सवाल पूछा कि आज गुलाम नबी आजाद कॉन्ग्रेस पार्टी में ऊपर से नीचे तक चुनाव कराने की बातें कर रहे हैं, लेकिन जब उन्हें जम्मू-कश्मीर में पार्टी की युवा यूनिट का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, तब उन्हें चुनाव की याद क्यों नहीं आई थी? साथ ही पूछा कि जब उन्हें भारतीय युवा कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, तब उन्होंने पार्टी संगठन में चुनाव की बातें क्यों नहीं की थी? उन्होंने कहा:

“आजाद साहब, आज आप विरोधी दलों के साथ मिल कर पार्टी तोड़ने की साजिश रच रहे हैं। हम आपके इस षड्यंत्र को सफल नहीं होने देंगे। आपका क्या इतिहास है? आप अपने पूरे जीवनकाल में सिर्फ 3 चुनाव जीते हैं। जिस गाँधी परिवार ने आपको 5 बार राज्यसभा सांसद बनाया, आप उस परिवार के विरोध में बात कर रहे हैं। आपसे ज्यादा चुनाव मैंने जीते हैं। मैंने 6 चुनाव जीते हैं। जम्मू-कश्मीर में तो आपको कोई पूछता तक नहीं और आप यहाँ नसीहत देते हैं।”

कुलदीप बिश्नोई हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के बेटे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा में बतौर कॉन्ग्रेस प्रभारी काम करते हुए आजाद ने राज्य में पार्टी का बड़ा गर्क कर दिया। उन्होंने दावा किया कि अगर उनकी जगह कोई और प्रभारी होता तो राज्य में आज मनोहर लाल खट्टर की जगह कॉन्ग्रेस की सरकार होती। उन्होंने याद दिलाया कि ‘इंदिरा-राजीव ने देश के लिए जान दी और सोनिया ने पार्टी के लिए अध्यक्ष पद स्वीकार किया।’

उन्होंने गाँधी परिवार के ‘योगदानों’ की बात करते हुए कहा कि जहाँ आज राहुल गाँधी देश भर में घूम-घूम कर पार्टी को मजबूत करने में लगे हुए हैं, वहीं प्रियंका गाँधी भी यही कार्य कर रही हैं। उन्होंने यहाँ तक कहा कि वो पूर्णरूपेण गाँधी परिवार के साथ खड़े हैं, क्योंकि राहुल-प्रियंका से ही पार्टी है। उन्होंने दोबारा कॉन्ग्रेस का ‘स्वर्णिम युग’ लाने की बात करते हुए कहा कि नेता और कार्यकर्ता मेहनत करना जारी रखें।

वहीं एक अन्य कॉन्ग्रेस नेता तारिक अनवर ने कहा कि गुलाम नबी आजाद की बातें एक हद तक सही हैं, लेकिन पार्टी की इस असफलता के लिए वो भी जिम्मेदार हैं, मैं भी हूँ। उन्होंने कहा कि अगर सभी नेताओं ने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर दिया होता तो पार्टी को हार नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि सभी की अपनी विफलताएँ होती हैं और हमें उन्हें पार पाना होता है। उन्होंने कहा कि आज की स्थिति के लिए पूरी पार्टी, नेतृत्व और सभी नेता-कार्यकर्ता जिम्मेदार हैं।

इस साल अगस्त में भी कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता गुलाम नबी आज़ाद ने कहा था कि हर राज्य और जिला अध्यक्ष, यहाँ तक ​​कि पूरे सीडब्ल्यूसी का भी चुनाव होना चाहिए। उन्होंने पार्टी के निर्धारित मानकों पर निशाना साधते हुए गाँधी परिवार के नेतृत्व को लेकर भी अप्रत्यक्ष रूप से सवाल किया था। उन्होंने कहा था कि पार्टी में एक गुट है जो नहीं चाहता कि पार्टी मजबूत हो। साथ ही आरोप लगाया था कि जिन लोगों को ‘अपॉइंटमेंट कार्ड’ मिले हुए हैं, वे हमारे प्रस्ताव का विरोध करते हैं।

बहन से छेड़खानी करता था ड्राइवर मुश्ताक, भाई गोलू और गुड्डू ने कुल्हाड़ी से काट डाला: खुद को किया पुलिस के हवाले

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक युवती के भाइयों ने छेड़खानी करने वाले मुश्ताक (32) नाम के ड्राइवर की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी। इस घटना को अंजाम देने के बाद दोनों भाई कोतवाली पहुँचे। वहाँ उन्होंने खुद को पुलिस के हवाले कर दिया।

हत्या के आरोपित दोनों भाइयों ने पुलिसकर्मियों से कहा कि मुश्ताक पिछले कई दिनों से उनकी बहन को परेशान कर रहा था, इसलिए दोनों ने उसको जान से मार दिया। फ़िलहाल पुलिस ने युवती के भाइयों को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। वहीं दूसरी तरफ मुश्ताक के भाई ने हत्या के आरोपितों के अलावा युवती की माँ और बहन को भी नामजद किया है। 

लखनऊ के मोहनलालगंज स्थित दुर्गा माता मंदिर के नज़दीक गोलू अपने परिवार के साथ रहता है। पड़ोस में ही मुश्ताक का घर है, जो उसकी बहन को अक्सर परेशान करता था। इस बीच रविवार (22 नवंबर 2020) को मुश्ताक कंटेनर लेकर कोलकाता जा रहा था। जैसे ही वह थोड़ी दूर स्थित भवानी खेड़ा पहुँचा, तभी उसका गोलू की बहन से विवाद हो गया। दोनों के बीच काफी बहस हुई लेकिन मौके पर मौजूद लोगों ने दखल देकर पूरा मामला शांत करा दिया। इसके बाद युवती अपने घर पहुँची और वहाँ उसने पूरी घटना की जानकारी अपने घर वालों को दी। 

पूरे मामले की जानकारी मिलते ही उसके भाई गोलू और गुड्डू शाम के वक्त मुश्ताक के घर पहुँच गए। दोनों ने मुश्ताक को उसके घर से घसीट कर बाहर निकाला और जम कर पीटा। फिर उन्होंने मुश्ताक पर कुल्हाड़ी से कई वार किए। इसके बाद उसकी हालत बदतर हो गई तो गोलू और गुड्डू उसे मरा समझ कर वहाँ से निकल गए।

घटना की जानकारी मिलते ही मुश्ताक के परिजन घटनास्थल पर पहुँचे और बदहवास स्थिति में उसे स्थानीय अस्पताल लेकर गए। जहाँ चिकित्सकों ने उसकी हालत गंभीर बताते हुए ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। वहाँ मुश्ताक को मृत घोषित कर दिया गया। 

इस घटना पर इंस्पेक्टर जीडी शुक्ला ने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आरोपित गोलू और गुड्डू खून से सनी हुई कुल्हाड़ी लेकर थाने आए थे। फिर उन्होंने खुद ही बताया कि दोनों ने मिल कर मुश्ताक की हत्या कर दी है।

इसके बाद पुलिस अस्पताल पहुँची और मामले से संबंधित जानकारी ली। इसके मुताबिक़ मुश्ताक के भाई इम्तियाज ने गोलू, गुड्डू (भाई), रेनू (बहन), विमला (माँ) के विरुद्ध एफ़आईआर दर्ज कराई है। इंस्पेक्टर ने यह भी बताया कि इस हत्या में दोनों भाइयों के शामिल होने की बात सामने आई है और माँ से भी पूछताछ जारी है। बहन घर पर मौजूद नहीं थी, उसकी खोजबीन जारी है।              

UP के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक बार फिर जान से मारने की धमकी, आगरा से नाबालिग गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक बार फिर जान से मारने की धमकी मिली है। धमकी भरा संदेश रविवार (नवंबर 22, 2020) शाम पुलिस के डायल 112 के व्हाट्सएप नंबर पर भेजा गया था। मामले से पुलिस कमिश्नर को अवगत कराया गया। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना सुशांत गोल्फ सिटी में चौकी प्रभारी अहमामऊ की तहरीर पर देर रात मुकदमा दर्ज किया गया। 

साइबर सेल द्वारा फोन नंबर की जाँच में लोकेशन आगरा की मिली। इसके बाद सुशांत गोल्फ सिटी थाना प्रभारी सचिन सिंह के साथ टीम ने ग्राम अकोला थाना मांगरोल आगरा से आरोपित नाबालिग को दबोच लिया। 

पुलिस का कहना है कि नाबालिग को बाल न्यायालय में पेश किया जा रहा है। पुलिस ने नाबालिग के पास से एक मोबाइल फोन बरामद किया है, जिससे उसने धमकी भरा मैसेज भेजा था। छानबीन में सामने आया है कि नाबालिग ने मोबाइल फोन से मैसेज डिलीट कर दिया था। पुलिस अब फॉरेंसिक टीम की मदद से डिलीट किए गए संदेश को रिकवर करने का प्रयास कर रही है। पुलिस का कहना है कि नाबालिग से अन्य बिंदुओं पर पूछताछ की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि संदेश भेजने के पीछे नाबालिग के अलावा कोई अन्य तो नहीं था।

बता दें कि इसके पहले सात जुलाई को डायल 112 के वाट्सएप नंबर पर मुख्यमंत्री को जान से मारने की धमकी भरा मैसेज मिला। मैसेज मिलते ही पुलिस महकमा अलर्ट हो गया। छानबीन में पता चला कि धमकी भरा मैसेज कानपुर देहात से भेजा गया है। मामले में 12वीं के छात्र को पकड़ा गया। छात्र को जुवेनाइल कोर्ट के समक्ष पेश किया गया। 

वहीं 21 मई, 2020 की शाम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। यह धमकी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश- 112 के व्हाटसएप नम्बर पर दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि उन पर बम से हमला किया जाएगा। इसके बाद गोमती नगर थाने में इस सम्बन्ध में धारा 505 (1) बी, 506 और 507 के तहत FIR दर्ज कराई गई थी। मामले में पुलिस ने कामरान नाम के शख्स को गिरफ्तार किया। उसने पुलिस की पूछताछ में अपना जुर्म कबूल किया था। आरोपित कामरान ने कहा था कि उसने एक करोड़ रुपए मिलने के वायदे के बदले में सीएम योगी को बम से उड़ाने की धमकी दी थी।

इसके अलावा कोरोना वायरस के मद्देनजर नमाज और अजान पर निर्देशों से गुस्साए तनवीर खान नाम के एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गोली मारने की बात कही थी। तनवीर खान ने अपने फेसबुक एकाउंट से पोस्ट किया था, “दिलदार नगर और पूरे कामसरोवर (कामसर) में अजान नहीं हो रही है। योगी को गोली मार दो…।” पोस्ट वायरल होते ही तनवीर खान ने अपना एकाउंट डिएक्टिवेट कर लिया था।

उत्तराखंड में अंतरधार्मिक विवाह पर ₹50000: CM रावत ने दिए जाँच के आदेश, जल्द ही बंद हो सकती है योजना

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शनिवार (नवंबर 21, 2020) को राज्य के मुख्य सचिव को टेहरी गढ़वाल प्रशासन द्वारा अंतरजातीय/अंतरधार्मिक विवाह के बाद सहायता राशि देने वाली सूचना को लेकर जाँच करने का आदेश दिया है। जिले के सामाजिक कल्याण विभाग द्वारा अंतरधार्मिक विवाह करने वाले जोड़े को 50,000 रुपए की मदद देने की घोषणा की थी, जिसके बाद ‘लव जिहाद’ को बढ़ावा देने के आरोप लगे थे।

मुख्यमंत्री रावत ने मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि वो इस बात की जाँच कराएँ कि किन परिस्थितियों में इस प्रेस रिलीज को जारी किया गया। सीएम के मीडिया संयोजक दर्शन सिंह रावत ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री ने इस घटना को काफी गंभीरता से लिया है और चीफ सेक्रेटरी को जाँच का आदेश दिया है। सीएम का कहना है कि जब सरकार पूरी तरह जबरन धर्मान्तरण के बाद शादी के खिलाफ है, तो किन परिस्थितियों में ये प्रेस रिलीज जारी हुआ?

उन्होंने बताया अंतरजातीय/अंतरधार्मिक विवाह पर सहायता राशि देने की ये योजना उत्तराखंड के गठन से काफी पहले से ही मौजूद थी और उत्तर प्रदेश के क़ानून का हिस्सा थी, जिसे राज्य ने हूबहू ग्रहण कर लिया और अब तक ये ऐसा ही चला आ रहा है। दर्शन रावत ने कहा कि सरकार जल्द ही इस योजना को बंद करने पर विचार कर रही है, क्योंकि वो नहीं चाहती कि जबरन धर्मान्तरण के बाद होने वाली शादी से राज्य की शांति और सद्भाव को ठेस पहुँचे।

इस प्रेस रिलीज के सामने आने के बाद उत्तराखंड सरकार के आर्थिक सलाहकार आलोक भट्ट ने बताया था कि ये 1976 का उत्तराखंड का क़ानून है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत पहले 10,000 रुपए की सहायता राशि मिलती थी, जिसे कॉन्ग्रेस की सरकार ने 2014 में बढ़ाकर 50,000 रुपए कर दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा से किसी ने भी अंतरधार्मिक विवाह को बढ़ावा देने की बात नहीं की है।

साथ ही बताया कि भाजपा सरकार में कोई अपने बुरे सपने में भी ऐसा नहीं सोच सकता है कि वो धर्मांतरण के बाद शादी को बढ़ावा दे। वहीं राज्य की विपक्षी पार्टी कॉन्ग्रेस का कहना है कि अगर उसने इस सहायता राशि को बढ़ाया तो फिर भाजपा सरकार ने इसे बंद क्यों नहीं किया? कॉन्ग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि भाजपा के राज्य में चार-चार मुख्यमंत्री हुए, किसी ने भी इस योजना को बंद नहीं किया।

उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दों को इसीलिए उठाया जा रहा है क्योंकि उसने राज्य के विकास के लिए अभी तक कुछ नहीं किया है। उन्होंने दावा किया कि दो अलग-अलग जाति या धर्म के लोगों को आपस में शादी करने का अधिकार भारतीय संविधान से मिलता है और भाजपा की सरकार ऐसा करने से लोगों को नहीं रोक सकती, भले ही वो इस योजना को बंद ही क्यों न कर दे। अब इस मामले की जाँच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

ज्ञात हो कि इस योजना पर इस पर ‘सुदर्शन न्यूज़ टीवी’ के मुख्य संपादक सुरेश चव्हाणके ने पूछा था कि ‘लव जिहाद’ करने वाले को सजा की जगह 50,000 का सरकारी इनाम दिया जा रहा है? उन्होंने पूछा कि देवभूमि उत्तराखंड में ये उल्टी गंगा क्यों बह रही है? उन्होंने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से पूछा था कि जब सारे राज्य ‘लव जिहाद’ के विरुद्ध कानून बना रहे तो उत्तराखंड में इसे बढ़ावा क्यों? उन्होंने आशंका जताई थी कि कोई ‘UPSC जिहाद’ वाला अधिकारी ही ऐसा करा रहा है।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने पेश किया ‘चार्टर ऑफ रिपब्लिकन वैल्यूज’, मुस्लिम काउंसिल को 15 दिन का अल्टीमेटम

इस्लामी कट्टरपंथ से निपटने के लिए अपनी नई योजना को लेकर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मुस्लिम देशों के निशाने पर आ गए हैं। मैक्रों ने देश के मुस्लिम नेताओं से ‘चार्टर ऑफ रिपब्लिकन वैल्यूज’ पर सहमति देने के लिए कहा है। इसी को लेकर विवाद है।

चार्टर के मुताबिक, इस्लाम एक मजहब है और इससे किसी भी तरह के राजनीतिक आंदोलन को जोड़ा नहीं जा सकता है। चार्टर के तहत, फ्रांस के मुस्लिम संगठनों में किसी भी तरह के विदेशी हस्तक्षेप को प्रतिबंधित किया जाएगा। इसको लेकर फ्रेंच काउंसिल ऑफ द मुस्लिम फेथ (CFCM) को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है।

इसके अलावा इमामों को फ्रेंच भाषा आने की अनिवार्यता होगी और एकेडेमिक डिग्रियाँ भी जरूरी होंगी। मैक्रों को उम्मीद है कि नेशनल काउंसिल ऑफ इमाम के बनने के साथ ही चार सालों के भीतर तुर्की, मोरक्को और अल्जीरिया के करीब 300 इमामों को हटाया जा सकेगा। इसके अलावा, सरकारी अधिकारियों से धार्मिक आधार पर किसी तरह की बहस करने वालों के खिलाफ भी सख्त सजा का प्रावधान किया गया है।

इसके अलावा भी कई तरह के नियमों की बात चार्टर में की गई है, जिनमें घर पर शिक्षा न देने की बात भी शामिल है। मैक्रों के इस चार्टर की मुस्लिम देशों में आलोचना हो रही है। 

फ्रांस सरकार के इन सारे कदमों को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। पाकिस्तानी की मानवाधिकार मंत्री ने इन कदमों की आलोचना करते हुए कहा कि मैक्रों मुस्लिमों के साथ वही कर रहे हैं जो यहूदियों के साथ नाजियों ने किया। हालाँकि, पाकिस्तान की मंत्री ने ट्वीट में ये गलत जानकारी दी थी कि सिर्फ मुस्लिम बच्चों के लिए आइडेंटिफिकेशन नंबर जारी किया जाएगा। फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने जब इसे फेक न्यूज करार दिया तो उन्होंने ट्वीट ही डिलीट कर दिया।

गौरतलब है कि फ्रांस में शिक्षक सैमुअल पैटी की हत्या के बाद से ही सरकार इस्लामी कट्टरवाद के खिलाफ एक्शन में है। राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने भी कहा था कि आज इस्लाम के नाम पर हिंसा और हत्याओं को बढ़ावा दिया जा रहा है और ऐसे लोग हैं, जो इस्लाम के नाम पर हिंसक अभियान चलाते हुए हत्याओं और नरसंहार को जायज ठहरा रहे हैं। उन्होंने कहा था कि आतंकवाद इस्लाम की भी समस्या है, क्योंकि इसके 80% पीड़ित मुस्लिम ही हैं और वो इसके पहले पीड़ित हैं। उन्होंने विश्वास दिलाया था कि इस्लामी कट्टरवाद के खिलाफ जंग जारी रहेगी।

हाल ही में फ्रांस के ‘Savigny-le-Temple (Seine-et-Marne)’ क्षेत्र में अभिव्यक्ति की आज़ादी से जुड़े एक कोर्स की पढ़ाई के दौरान एक छात्र भड़क गया और उसने शिक्षक को धमकी दे डाली कि वो उसका वही हाल कर देगा, जो सैमुअल पैटी का हुआ था। सैमुअल की एक छात्र ने सिर्फ इसीलिए हत्या कर दी थी, क्योंकि उन्होंने कक्षा में पैगम्बर मुहम्मद का कार्टून दिखाया था, जो फ्रेंच पत्रिका ‘शार्ली हेब्दो’ में प्रकाशित हुआ था।

‘हिन्दुस्तान की शपथ नहीं लूँगा’: बिहार की विधानसभा में पहुँचते ही ओवैसी के MLA दिखाने लगे रंग

बिहार की 17वीं विधानसभा का सत्र आज से शुरू हो गया और इसके साथ ही नवनिर्वाचित विधायकों को सदन के सदस्यता की शपथ दिलाई गई। इसी दौरान सदन के भीतर हंगामा होने लगा, जब एआईएमआईएम के विधायक अख्तरुल इमान ने हिन्दुस्तान शब्द पर आपत्ति जता दी।

जैसे ही सदस्यता की शपथ के लिए एआईएमआईएम के विधायक का नाम पुकारा गया, उन्होंने शपथ पत्र में लिखा ‘हिन्दुस्तान’ शब्द बोलने से मना कर दिया और इसके स्थान पर भारत शब्द का इस्तेमाल किया। 

दरअसल अख्तरुल इमान ने उर्दू भाषा में शपथ लेने की इच्छा जाहिर की थी लेकिन उर्दू भाषा की शपथ में भारत की जगह हिन्दुस्तान शब्द का इस्तेमाल हुआ था। इसके बाद अख्तरुल इमान ने ‘हिन्दुस्तान’ शब्द पर आपत्ति जताई और प्रोटेम स्पीकर से भारत शब्द का इस्तेमाल करने की बात कही।

इस मुद्दे पर विधायक अख्तरुल इमान का कहना था कि भारत के संविधान की शपथ हिन्दी भाषा में ली जाती है। इसके अलावा मैथिली में भी हिन्दुस्तान के स्थान पर भारत का उपयोग किया जाता है। लेकिन उर्दू भाषा के शपथ पत्र में भारत की जगह हिन्दुस्तान शब्द का इस्तेमाल किया गया है।

अंत में अख्तरुल इमान ने कहा कि वह भारत के संविधान की शपथ लेना चाहते हैं न कि हिन्दुस्तान के संविधान की। इस बात के बाद सदन के भीतर काफी हंगामा भी हुआ और प्रोटेम स्पीकर जीतन राम मांझी भी इस बात पर हैरान रह गए।   

विधायकों को शपथ दिलाने वाले प्रोटेम स्पीकर जीतन राम मांझी ने इस मुद्दे पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह कोई पहली बार नहीं हो रहा है। यह हमेशा से विधानसभा की परम्परा रही है कि हिन्दुस्तान शब्द का उपयोग होता है लेकिन इस प्रकार की दलीलों से भी एआईएमआईएम के विधायक पर कोई असर नहीं पड़ा, वह अपनी अतार्किक बात पर भी अड़े रहे।

इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े विमर्श में गौर करने लायक तथ्य है कि एआईएमआईएम का प्रदर्शन बिहार विधानसभा चुनावों में उल्लेखनीय है। लेकिन संख्या के अलावा यहाँ मूल प्रश्न है कि इस बेहतर प्रदर्शन का आधार क्या था? इस प्रश्न का उत्तर सिर्फ एक शब्द का है – ध्रुवीकरण।

बिहार में राजनीतिक वजूद बनाए रखने का इससे बेहतर विकल्प और क्या हो सकता है एमआईएमआईएम जैसे राजनीतिक दलों के पास। और ध्रुवीकरण की प्रक्रिया में सफल होने के बाद इनके विधायक देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बन कर ‘हिन्दुस्तान’ शब्द पर आपत्ति जताते हैं।

जितना प्रासंगिक शब्द भारत है, उतना ही प्रासंगिक शब्द हिन्दुस्तान भी है लेकिन एआईएमआईएम जैसे एजेंडापरस्त राजनीतिक दल ऐसा क्यों करते हैं, यह समझना बहुत मुश्किल नहीं है। इस तरह के विवाद इस बात का सबूत हैं कि एआईएमआईएम के लिए राजनीतिक लाभ विचारधारा से कहीं बढ़ कर है। सवाल यह भी होना चाहिए कि एआईएमआईएम की कोई विचारधारा भी है? अगर है तो उसका उद्देश्य ध्रुवीकरण से इतर और क्या ही होगा।

संसद के दोनों सदनों से लेकर विधानसभा तक अनेक भाषाओं में शपथ ली जाती है और लगभग सभी भाषाओं की शपथ को राजनेता जस का तस स्वीकार करते हैं। इससे हट कर देश के कुछ राजनीतिक नुमाइंदे ‘कंट्रोवर्सी प्रिय’ होते हैं और यह पहला ऐसा मौक़ा नहीं है जब एआईएमआईएम की तरफ से लोकतांत्रिक इमारत में विवाद को ज़मीन दी गई हो। 2019 में सांसदों के शपथग्रहण के दौरान खुद असदुद्दीन ओवैसी ने शपथग्रहण के दौरान ‘अल्लाह हु अकबर’ बोल कर कर विवाद खड़ा किया था।

इसके पहले उत्तर प्रदेश में 2017 विधानसभा चुनावों में भाजपा के प्रचंड बहुमत हासिल करने के बाद भी शपथग्रहण की भाषा को लेकर बहस छिड़ी थी। यह पहला ऐसा मौक़ा था, जब भारतीय जनता पार्टी के कुल 13 विधायकों ने एक साथ संस्कृत भाषा में शपथ ली थी। इस बात पर आपत्ति जताते हुए समाजवादी पार्टी के तथाकथित धर्मनिरपेक्ष नेताओं का कहना था कि वह उर्दू भाषा में शपथ लेंगे। उनके मुताबिक़ संस्कृत में शपथ ली जा सकती थी तो उर्दू में क्यों नहीं यानी इनका द्वेष उर्दू की गैरमौजूदगी से नहीं बल्कि संस्कृत की मौजूदगी से था। जिसके बाद प्रोटेम स्पीकर ने उन्हें हिन्दी में शपथ दिलाई थी।