Home Blog Page 4300

पाकिस्तान को अलग रखा गया था ऑपरेशन से, जो बाइडन ने किया था लादेन को मारने के अभियान का विरोध: बराक ओबामा

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपनी नई पुस्तक में कहा है कि उन्होंने एबटाबाद में ओसामा बिन लादेन के ठिकाने पर छापा मारने के अभियान में पाकिस्तान को शामिल करने से इनकार कर दिया था, क्योंकि यह ‘खुला रहस्य’ था कि पाकिस्तान की सेना, खासकर उसकी खुफिया सेवा में कुछ तत्वों के तालिबान और संभवत: अलकायदा से संबंध थे और वे कई बार अफगानिस्तान एवं भारत के खिलाफ सामरिक पूँजी के तौर पर इनका इस्तेमाल करते थे।

ओबामा ने ‘ए प्रोमिस्ड लैंड’ नामक अपनी किताब में राष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यकाल में एबटाबाद में मारे गए छापे की जानकारी दी है। अमेरिकी कमांडो के इस छापे में दुनिया का सर्वाधिक वांछित आतंकवादी लादेन 2 मई, 2011 को मारा गया था। उन्होंने बताया कि इस अत्यधिक खुफिया अभियान का तत्कालीन रक्षा मंत्री रोबर्ट गेट्स और पूर्व उपराष्ट्रपति एवं मौजूदा निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन ने विरोध किया था। 

अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति ने बताया कि एबटाबाद में पाकिस्तानी सैन्य छावनी के बाहर एक पनाहगाह में लादेन के रहने की बात स्पष्ट हो जाने के बाद अलकायदा प्रमुख को मारने के लिए कई विकल्पों पर विचार किया गया। उन्होंने कहा कि इस अभियान की गोपनीयता बनाए रखने की आवश्यकता ने चुनौती बढ़ा दी थी।

ओबामा ने कहा, “हम जानते थे कि यदि किसी को बिन लादेन के बारे में हमारे कदम की जरा सी भी भनक लग गई, तो मौका हमारे हाथ से चला जाएगा, इसलिए पूरी संघीय सरकार में केवल कुछ ही लोगों को अभियान की योजना की जानकारी दी गई थी। पूर्व राष्ट्रपति ने आगे लिखा, “हमारे सामने और चुनौतियाँ थीं, हम जो भी विकल्प चुनते उसमें पाकिस्तान को शामिल नहीं किया जा सकता था।” 

पाकिस्तानियों को लादेन को खत्म करने के ऑपरेशन में शामिल करने के क्या खतरे थे इस बारे में ओबामा लिखते हैं कि एबटाबाद से पाकिस्तान का एक सैन्य ठिकाना मात्र कुछ ही मील की दूरी पर था, जिसके कारण इस बात की संभावना बढ़ गई थी कि पाकिस्तानियों को कुछ भी बताने से अभियान की जानकारी लीक हो सकती है। ओबामा ने लिखा कि वे एबटाबाद में भले ही कोई भी विकल्प चुनते, उन्हें सबसे खतरनाक तरीके से अपने सहयोगी के क्षेत्र में बिना अनुमति घुसना पड़ता और इससे राजनयिक संबंध भी दाव पर लगे थे तथा इसने जटिलताएँ भी बढ़ा दी थीं।

आतंकवाद में पाकिस्तान की मिलीभगत को साफ-साफ रेखांकित करते हुए बराक ओबामा ने लिखा, “हालाँकि पाकिस्तान की सरकार ने आतंकवाद विरोधी अभियान में हमारी मदद की थी, लेकिन यह एक खुला सत्य था कि पाकिस्तान के कुछ सैन्य अधिकारी, खासकर इसकी खुफिया एजेंसियों के ताल्लुकात तालिबान और यहाँ तक कि अल कायदा से थे, ये इसका इस्तेमाल रणनीतिक शक्ति के रूप में करते थे ताकि अफगानिस्तान कमजोर बना रहे और पाकिस्तान के नंबर वन दुश्मन भारत के साथ शामिल न हो जाए।” 

आखिरकार अंतिम चरण में ओबामा प्रशासन दो विकल्पों पर विचार कर रहा था। पहला विकल्प था कि हवाई हमले से पूरे कंपाउंड को ही नष्ट कर दिया जाए, दूसरा विकल्प था कि एक विशेष ऑपरेशन को अनुमति दी जाए, जहाँ एक चुनिंदा टीम हेलिकॉप्टर से चुपके से पाकिस्तान जाए, कंपाउंड में कार्रवाई को अंजाम दे और इससे पहले कि पाकिस्तान की पुलिस और सेना को पता चले और वो कोई कार्रवाई करे ये टीम पलक झपकते ही वहाँ से बाहर निकल आए। 

आखिरकार ओबामा सरकार ने गहन चर्चा और विचार के बाद दूसरे विकल्प पर हामी भरी। बराक ओबामा लिखते हैं, “रेड के लिए अंतिम अनुमति देने से पहले एक मीटिंग में तत्कालीन विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा था कि ये एक 51-49 का कॉल है, रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स ने भी रेड के खिलाफ राय दी, हालाँकि वो एयर स्ट्राइक के पक्ष में थे।”

आगे ओबामा ने कहा, “जो बाइडेन की राय भी रेड के खिलाफ थी, उन्होंने तर्क दिया कि इस ऑपरेशन के फेल होने के बहुत चांस थे और वे खुफिया एजेंसियों से और भी सुनिश्चित करवाना चाहते थे कि लादेन कंपाउंड में है।”

ओबामा ने कहा कि इस अभियान के बाद उन्होंने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई लोगों से फोन पर बात की, जिनमें से उनके लिए सबसे मुश्किल पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से बात करना था, जिन्हें पाकिस्तान की संप्रभुता के हनन के कारण आलोचनाओं का शिकार होना पड़ता। उन्होंने कहा, “हालाँकि मैंने जब उनसे बात की, तो उन्होंने बधाई दी और सहयोग देने का आश्वासन दिया।”

26 साल से चला रहे देश में संस्कृत की एकमात्र पत्रिका, अब बनेंगे BJP सांसद: जानिए कौन हैं बुनकर समाज के ये संघी

भाजपा ने कर्नाटक में राज्यसभा चुनाव के लिए के नारायण को उम्मीदवार बनाया है। के नारायण छापखाना चलाते हैं और संस्कृत भाषा को जिंदा रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 68 वर्षीय के नारायण कर्नाटक के अति-पिछड़ा बुनकर समुदाय से आते हैं। कोरोना के कारण अशोक गस्ती की मौत के बाद खाली हुई सीट पर उन्हें उम्मीदवार बनाया गया है। वो न तो जाना-पहचाना चेहरा हैं और न ही संगठन में किसी बड़े पद पर, लेकिन संघ से उनका पुराना जुड़ाव रहा है।

दिसंबर 1, 2020 को होने वाले चुनाव के लिए भाजपा द्वारा उन्हें आगे करने को लेकर राजनीतिक विश्लेषक तक भी हैरत में हैं। वो बेंगलुरु में प्रिंटिंग प्रेस ‘स्पैन प्रिंट’ का संचालन करते हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि देश की एकमात्र संस्कृत पत्रिका ‘संभाषण संदेश’ का प्रकाशन उन्हीं के द्वारा किया जाता है। वो 1994 से इसका प्रकाशन करते आ रहे हैं। इस पत्रिका में कोई प्रचार सामग्री नहीं होती। दुनिया भर में इसके 15,000 सब्सक्राइबर्स हैं।

वो तुलु भाषा की पत्रिका ‘तुलुवेरे केडिगे’ के संपादक भी हैं। बुनकर समुदाय के कई समाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से भी वो जुड़े हुए हैं। खुद के नारायण का भी कहना है कि राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में उनका नामांकन अप्रत्याशित था। उन्होंने TNIE को बताया कि जब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नलीन कुमार कटील ने उन्हें फोन कर के अपना वोटर आईडी कार्ड तैयार रखने को कहा, तब वो अपने घर पर ही थे।

इसके कुछ देर बाद उनके नाम की घोषणा कर दी गई। वो भाजपा दफ्तर भी कभी-कभार ही जाते हैं। 2019 में वो अंतिम बार भाजपा के दफ्तर गए थे, वो भी बुनकर समुदाय की समस्याओं के निदान हेतु। उन्होंने कहा कि भाजपा एकमात्र ऐसी पार्टी है, जो कार्यकर्ताओं के काम को महत्ता देती है, जहाँ प्रभाव, पैसा और प्रसिद्धी मायने नहीं रखती। उन्होंने कहा कि भाजपा में एक ही चीज की महत्ता है और वो है सेवाभाव।

इसी साल जून में सविता समुदाय (नाई समाज) से आने वाले अशोक गस्ती को उम्मीदवार बनाया गया था, जो सांसद भी बने। उनके अलावा इरन्ना कार्डी सांसद बने, उनका चयन भी हैरान कर देने वाला था। यहाँ तक कि कर्नाटक भाजपा के कई नेता भी के नारायण के चयन से हैरान हैं, क्योंकि उन्हें उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों का अंदाज़ा ही नहीं है। तटवर्ती इलाकों से आने वाले के नारायण बेंगलुरु के दिग्गज नेता दिवंगत अनंत कुमार के करीबी थे।

आर्ट्स से स्नातक करने वाले के नारायण ABVP और संघ के कार्यक्रमों के लिए पोस्टर-बैनर प्रिंट किया करते थे। उनकी शिक्षा-दीक्षा मंगलुरु में हुई है। वो 1971 में बंगलुरु शिफ्ट हुए थे। सदन में भाजपा सदस्यों की संख्या को देखते हुए उनका सांसद बनना तय है। बुधवार (नवंबर 18, 2020) को नॉमिनेशन भरने की अंतिम तारीख है। भाजपा ने ऐसे कई लोगों को विभिन्न चुनावों में मौका दिया है और कइयों की विजय भी हुई है।

इसी तरह अक्टूबर 2019 में उत्तर प्रदेश के घोसी में विधानसभा उपचुनाव में भाजपा ने विजय राजभर को टिकट दिया था। वो जीते भी और फ़िलहाल विधायक हैं। विजय राजभर के पिता अभी भी फुटपाथ पर सब्जी की दुकान लगाते हैं। राजभर ने संगठन में भी ख़ूब काम किया है। वह मऊ में भाजपा के नगर अध्यक्ष रहे हैं। नगरपालिका के चुनाव में उन्होंने सहादतपुर से वार्ड सदस्य के रूप में जीत दर्ज की थी। 

‘कमाल के नमक हराम मुख्यमंत्री हैं केजरीवाल… सोशल डिस्टेंसिंग नियमों का पालन कर छठ नहीं करने देंगे’

राजधानी दिल्ली में सार्वजनिक जगहों पर छठ पूजा पर राज्य सरकार के रोक के बाद बीजेपी और आप के बीच की जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। इसी कड़ी में अब दिल्ली बीजेपी के पूर्व चीफ और सांसद ने मनोज तिवारी ने सीएम अरविंद केजरीवाल को अपशब्द तक बोल दिए। तिवारी ने कहा कि गाइडलाइंस के नाम पर झूठा ड्रामा किया जा रहा है। बता दें कि कोरोना महामारी के कारण राज्य सरकार ने सार्वजनिक जगहों पर छठ पूजा की अनुमति नहीं दी है और दिल्ली हाई कोर्ट ने इस फैसले को सही बताया है।

मनोज तिवारी ने ट्वीट कर कहा, “कमाल के नमकहराम मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हैं। कोविड के सोशल डिस्टेंसिंग नियमों का पालन कर आप छठ नहीं करने देंगे और गाइडलाइंस सेंटर से माँगने का झूठा ड्रामा अपने लोगों से करवाते हैं। तो बताएँ, ये 24 घंटे शराब परसोने के लिए परमिशन कौन से गाइडलाइंस को फ़ॉलो कर ली थी, बोलो CM।”

इस बीच, दिल्ली हाईकोर्ट ने कोरोना महामारी के कारण दिल्ली सरकार के सार्वजनिक जगहों पर छठ पूजा नहीं कराने के आदेश को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सार्वजनिक जगहों पर छठ पूजा की अनुमति देना इस जानलेवा बीमारी का तेजी से प्रसार का रास्ता तैयार करना होगा।

उन्होंने दिल्ली में कोरोना से बिगड़े हालात के पीछे सीधे-सीधे अरविंद केजरीवाल को जिम्मेदार ठहराया और सार्वजनिक स्थानों पर छठ पूजा पर रोक के पीछे बिहार चुनाव में बीजेपी को मिली जीत बताया। उन्होंने कहा कि केजरीवाल बीजेपी की जीत से चिढ़ गए हैं।

बीजेपी सांसद ने कहा कि पहले कोरोना के अटैक में भी अरविंद केजरीवाल घर से बाहर नहीं निकले थे। केजरीवाल सिर्फ विज्ञापन करते हैं। गृह मंत्री के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली में व्यवस्थाएँ बेहतर हुई हैं। अभी अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में छठ पूजा पर अटैक कर दिया है। आज मंदिर-मस्जिद, सप्ताहिक बाजार सब खुले हैं, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर छठ नहीं मनाने दिया जाएगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि अरविंद केजरीवाल उत्तर प्रदेश और बिहार में हार से नाराज हैं। उन्हें दिल्ली में छठ पूजा को लेकर नियमों के तहत मनाने की छूट देनी चाहिए।

बता दें कि दिल्ली में सार्वजनिक स्थानों पर छठ पूजा पर बैन को लेकर बीजेपी और AAP में जमकर जुबानी जंग जारी है। सार्वजनिक स्थानों पर छठ पूजा करने की माँग को लेकर दिल्ली बीजेपी पूर्वांचल मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार (नवंबर 17, 2020) को सीएम आवास पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में दिल्ली बीजेपी के महामंत्री दिनेश प्रताप सिंह, पूर्वांचल मोर्चा के अध्यक्ष कौशल मिश्रा व अन्य कई लोग मौजूद रहे।

उधर, छठ पूजा के आयोजन को लेकर आम आदमी पार्टी ने बीजेपी पर हमला बोला है। पार्टी ने कहा कि बीजेपी की केंद्र सरकार ने गाइडलाइंस जारी करके छठ पर्व मनाने पर रोक लगाई है। बीजेपी नेता दिल्ली सरकार पर पर्व मनाने की अनुमति नहीं देने का आरोप लगाकर राजनीति कर रहे हैं।

बीजेपी प्रदेश महामंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि जब दिल्ली में मुख्यमंत्री साप्ताहिक बाजारों, मॉल, शराब के ठेकों और ई-रिक्शा को चलाने की अनुमति दे सकते हैं, तो छठ पूजा के आयोजन के लिए अनुमति क्यों नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सैकड़ों लोगों के साथ अक्षरधाम मंदिर में पूजा कर सकते हैं तो छठ पूजा के आयोजन पर भी अनुमति देना चाहिए।

छठ पूजा पर रोक लगा कर मुख्यमंत्री ने लाखों पूर्वांचलियों के साथ भेदभाव किया है और उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाया है। पूर्वांचल मोर्चा के अध्यक्ष कौशल मिश्रा ने कहा कि किसी भी पूर्वांचली ने यह नहीं सोचा था कि उन्हें छठ के आयोजन को लेकर मुख्यमंत्री से ऐसे अनुरोध करना पड़ेगा। विरोध प्रदर्शन की अगुवाई करते हुए पूर्वांचल मोर्चा के अध्यक्ष कौशल मिश्रा ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ‘पूर्वांचल विरोधी’ करार दिया और कहा कि इस प्रतिबंध से दिल्ली में रहने वाले बिहार एवं पूर्वांचल के लोगों की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं।

‘पति मर गया तो दोबारा शादी करो’ – विधवा के मना करने पर जानू खान ने काट दी नाक और जीभ, तोड़ डाला हाथ

राजस्थान के जैसलमेर जिले में दूसरी शादी से इनकार करने पर विधवा महिला के नाक और जीभ काटने का बेहद ही खौफनाक मामला सामने आया है। खबर के अनुसार, ससुराल वालों ने महिला पर जबरन दूसरी शादी करने का दबाव बनाया, जिसका विरोध करने पर गुस्साए ससुराल वालों ने विधवा की नाक और जीभ को काट दिया। पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपित जानू खान को गिरफ्तार कर लिया है। बाकी अन्य नामजद आरोपित मौके से फरार है।

रिपोर्ट के अनुसार, मामला जैसलमेर जिले के सांकडा थाना इलाके में स्थित जगीरों की ढाणी का है। पुलिस ने बताया कि पीड़िता की 6 साल पहले कोजे खान नाम के युवक से शादी हुई थी। शादी के 1 साल गुजरने के बाद उसके शौहर ने आत्महत्या कर ली थी। जिसके बाद पिछले कुछ महीनों से परिचित जानू खान विधवा महिला पर उसके भतीजे से शादी करने का दबाव बनाने लगा। वहीं जब कुछ दिन पहले जानू खान और ससुराल पक्ष ने महिला पर जबरन निक़ाह करने का फिर से दबाव बनाया तो परेशान होकर गुड्डी ने जानू खां को धक्के देकर घर से बाहर निकाल दिया।

दर्ज एफआईआर के अनुसार, 28 वर्षीय गुड्डी के इस रवैए को देखते हुए गुस्साए जानू खान ने मंगलवार (17 नवंबर, 2020) दोपहर 1 बजे दुले खान, इकबाल खान, हासम खान, फारूक खान, आम्बे खान, लाडू खान, मनु खान, अनवर खान, सलीम खान, जानू खान, नेमते खान और नेवे खान के साथ विधवा महिला के घर में घुस कर उस पर जानलेवा हमला कर दिया।

इतना ही नहीं आरोपितों ने हैवानियत की सारी हदें पार करते हुए धारदार हथियार से विधवा की नाक और जीभ भी काट दी। घटना की जानकारी होते ही पुलिस ने मौके पर पहुँचकर जाँच-पड़ताल शुरू करते हुए मुख्य आरोपित जानू खान को हिरासत में ले लिया और फरार अन्य अरोपितों की धर-पकड़ में जुट गई। बताया जा रहा है कि इस घटना के बाद महिला गंभीर रूप से घायल हुईं, लिहाजा उन्हें इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल से जोधपुर शिफ्ट किया गया है, जहाँ फिलहाल इलाज चल रहा है।

गौरतलब है कि पीड़िता के भाई ने मामले की शिकायत थाने में की थी। भाई बसीर ने आरोप लगाया कि मंगलवार दोपहर को गुड्डी के ससुराल के कुछ आरोपी उसके घर पहुँचे और शादी से इनकार करने पर गुड्डी पर हमला किया। बसीर ने आगे कहा, “उन्होंने गुड्डी की नाक और जीभ काट दी और उसका दाहिना हाथ भी तोड़ दिया, बेटी को बचाने आई माँ बिस्मिल्ला को भी आरोपियों ने घायल कर दिया।”

एसएचओ कांता सिंह ने कहा कि मामला दर्ज करने के बाद उन्होंने मुख्य आरोपित जानू खान को गिरफ्तार कर लिया है जबकि बाकी आरोपितों की तलाश जारी है। पुलिस के अनुसार आरोपियों की पहचान जानू खान, दुल्ले खान, इकबाल खान, हसम खान, साली, फारुख खान, आंबे खान, लड्डू खान, मनु खान, अनवर खान, सलीम खान, नेमटे खान और नेबे खान के रूप में की गई।

‘फ्रांस का विरोध नहीं किया तो हिंदुस्तान में भी ईंट से ईंट बजा देंगे’: कॉन्ग्रेस नेता आरिफ मसूद के बयान पर अरेस्ट वारंट जारी

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के इकबाल मैदान में सैंकड़ों की भीड़ इकट्ठा करके भड़काऊ बयानबाजी करने वाले कॉन्ग्रेस नेता आरिफ मसूद के खिलाफ विशेष अदालत ने गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है।

इस मामले में मसूद से पहले अब तक 6 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं मसूद के खिलाफ तलैया पुलिस द्वारा धारा 82/83 के संबंध में आवेदन पेश किया गया था। इसी आवेदन पर सुनवाई करते हुए जस्टिस प्रवेंद्र कुमार सिंह ने वारंट जारी किया।

इससे पूर्व अदालत ने उनके ऊपर लगे आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उनको 8 नवंबर को अग्रिम जमानत देने से इंकार किया था। इस पूरे मामले में 7 लोग आरोपित बनाए गए थे। इन में से तीन को कुछ दिन पहले गिरफ्तार किया गया था जबकि तीन को सोमवार (नवंबर 16, 2020) दोपहर में गिरफ्तार किया गया।

क्या है मामला?

कुछ दिन पहले फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों की ओर से पैगंबर मोहम्मद पर की गई टिप्पणी के खिलाफ भोपाल में हजारों मुस्लिमों की भीड़ ने सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन किया था। दिलचस्प बात यह है कि इस भीड़ नेतृत्व का करने वाले कोई और नहीं बल्कि देश की सबसे ‘सेकुलर पार्टी’ कॉन्ग्रेस के विधायक आरिफ मसूद थे।

इस विरोध प्रदर्शन के दौरान मसूद ने कहा था कि अगर उनका बस चलता, तो वे राष्ट्रपति मैक्रों का चेहरा कुचल देते। उन्होंने आगे कहा था, “हमारे हाथ बँधे हुए हैं क्योंकि हम कानून के पालन करने वाले नागरिक हैं और हमें हमारे अल्लाह के नबी द्वारा शांति की शिक्षा दी गई है।”

उन्होंने यह भी कहा था कि फ्रांस के राष्ट्रपति के कार्य को भारत में बैठी हिन्दूवादी सरकार सहमति दे रही हैं। मध्य प्रदेश में बैठी हिन्दूवादी सरकार मुस्लिम वर्ग के अपमान को शह दे रही है। हिन्दुस्तान की केंद्र व राज्य सरकार कान खोलकर सुन ले, यदि फ्रांस के इस कृत्य का विरोध नहीं किया गया, तो हिंदुस्तान में भी ईंट से ईंट बजा देंगे।

इन्हीं देश विरोधी बयानों के बाद तलैया थाना प्रभारी डीपी सिंह ने बताया था कि मसूद और उनके समर्थकों के खिलाफ तलैया थाने में दो अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से एक में मसूद की रिहाई हो चुकी है जबकि दूसरे मामले में धारा 153 के तहत केस दर्ज है।

गुपकार गैंग की एकता में दरार: अब कॉन्ग्रेस ने डीडीसी चुनावों में PDP के खिलाफ उतारे उम्मीदवार

अनुच्छेद 370 की विदाई को एक साल से ज्यादा हो गए लेकिन जम्मू कश्मीर की राजनीतिक पार्टियाँ अब भी ये बात पचा नहीं पा रही हैं कि उनकी दुकानें बंद हो चुकी है। महबूबा मुफ्ती और फारूक अब्दुल्ला जैसे नेताओं की बौखलाहट बढ़ रही है। उन्होंने विदेशी ताकतों की मदद से 370 की बहाली का संकल्प लिया है और उसे गुपकार समझौते का नाम दिया। गृह मंत्री अमित शाह ने गुपकार गठबंधन पर जोरदार हमला किया और उसे ‘गुपकार गैंग’ बता दिया।

वहीं अब जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए बने गुपकार गुट की एकता में दरार पैदा हो गई है। डीडीसी चुनावों में उतरने जा रही कॉन्ग्रेस ने कई सीटों पर पीडीपी कैंडिडेट के खिलाफ उम्मीदवार उतार दिए हैं।

जानकारी के मुताबिक डीडीसी चुनावों के दूसरे फेज के मतदान के लिए त्राल, लरनू, केल्लर, तंगधार में कॉन्ग्रेस के उम्मीदवारों ने पर्चा भरा है। लेकिन इससे पहले गठबंधन ने फैसला किया था कि यहाँ पर पीडीपी के उम्मीदवार उतारे जाएँगे।

सेंट्रल कश्मीर के बडगाम में पीडीपी के जिला अध्यक्ष नजीर अहमद खान ने नामांकन किया है, जबकि गुपकार की बैठक में फैसला किया गया था कि इस सीट से नेशनल कॉन्फ्रेंस का उम्मीदवार पर्चा भरेगा। नजीर अहमद खान ने कहा है कि संगठन ने उन्हें पत्र सौंपा था और उसे ही उम्मीदवार घोषित किया था, लेकिन ऐन मौके पर उनकी उम्मीदवारी हटा दी गई और ये सीट नेशनल कॉन्फ्रेंस को दे दी गई। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता है कि स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में पर्चा भरकर उन्होंने कोई गलती की है।

पीडीपी के एक नेता ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि कॉन्ग्रेस दक्षिण कश्मीर में पीडीपी के खिलाफ उम्मीदवार उतार रही है। नेता ने कहा, “कॉन्ग्रेस यहाँ पूरी तरीके से गेम बिगाड़ रही है, ऐसा लगता है कि कॉन्ग्रेस का सीटों के बँटवारे को लेकर समझौता सिर्फ नेशनल कॉन्फ्रेंस से हुआ है।”

बताया जा रहा है कि किश्तवाड़ में पीडीपी और एनसी के नेता आमने-सामने आ गए हैं। एक दल ने पीपुल्स अलासंय फॉर डिक्लेरेशन के बैनर तले अपने उम्मीदवार को उतारा तो दूसरे दल ने उसके खिलाफ अपने उम्मीदवार को खड़ा कर दिया। इसी तरह से कालाकोट के मोगला में भी एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवारों को उतारा गया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लोरन, बुफलेजाय, सूरनकोट में दलों ने एक-दूसरे के खिलाफ निर्दलीय कैंडिडेट उतार दिए हैं। पीरी बुधल में कॉन्ग्रेस और एनसी एक-दूसरे के सामने अपने अपने उम्मीदवार उतार चुकी है। डांगरी में पीडीपी ने एनसी के उम्मीदवार के खिलाफ अपने निर्दलीय उम्मीदवार को उतार दिया है।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस ने लंबी फजीहत के बाद मंगलवार (नवंबर 17, 2020) को गुपकार गठबंधन से अपनी दूरियों का ऐलान आधिकारिक तौर पर कर दिया। भाजपा नेता व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान के बाद इस मामले ने तूल पकड़ा था। गृह मंत्री ने गुपकार गैंग के उद्देश्य सामने रखते हुए कॉन्ग्रेस से पूरे मामले पर अपना स्टैंड क्लियर करने को कहा था।  इससे पहले खबर थी कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के खिलाफ बेहद मुखर रही कॉन्ग्रेस पार्टी भी इस विवादास्पद गठबंधन में शामिल हो गई

एक राष्ट्रीय पार्टी का अलगाववादी नेताओं के साथ प्रेम, देश और जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक भविष्य के लिए एक चिंताजनक बात है और ये आगे चलकर साबित करेगा कि कॉन्ग्रेस दोमुँहेपन की पराकाष्ठा को पार कर चुकी हैl अमित शाह ने गुपकार गैंग और कॉन्ग्रेस पर हमला करते हुए कहा था कि गुपकार गैंग कश्मीर को आतंक युग में ले जाना चाहता है। इतना ही नहीं अमित शाह ने ये भी कहा कि अगर गुपकार गैंग देश के मूड के साथ नहीं आता है, तो जनता उसे डुबो देगी। 

भारत के खिलाफ ‘ब्लैक डे’ मनाने वाले POK मूल के सांसद नजीर अहमद का इस्तीफा: महिला के यौन शोषण का है आरोप

पाकिस्तान मूल के ब्रिटिश सांसद नजीर अहमद ने ब्रिटेन के हाउस ऑफ लार्ड्स से 14 नवंबर को इस्तीफा दे दिया। यह जानकारी हाउस ऑफ लार्ड्स की कंडक्ट कमेटी ने दी। हाउस के कोड ऑफ कंडक्ट की जाँच में नजीर को यौन शोषण का दोषी पाए जाने के बाद उनसे इस्तीफा माँगा गया था।

समिति ने बताया, “लॉर्ड अहमद ने हाउस ऑफ लॉर्ड्स से 14 नवंबर को इस्तीफा दे दिया लेकिन कमेटी ने जिस रिपोर्ट पर रजामंदी कायम की थी, उसमें सिफारिश की गई थी कि वह इस्तीफा दें।”

बता दें कि हाउस ऑफ लार्ड्स के सदस्य नजीर अहमद ने ब्रिटेन में अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हुए ताहिरा जमान नामक महिला को मदद का आश्वासन देकर उसका यौन शोषण किया था।

इसके बाद ब्रिटिश संसद के उच्च सदन की आचार संबंधी समिति ने मामले की जाँच की थी जिनमें रोटरडम इलाके से आने वाले अहमद पर लगे आरोपों को सही पाया गया।

जानकारी के मुताबिक, अहमद ने हाउस ऑफ लॉर्ड के सदस्य के पद पर रहते हुए मार्च 2, 2017 को ताहिरा का यौन उत्पीड़न किया था। अहमद ने महिला से झूठ बोला था कि वह एक हकीम (FAITH HEALER) के ख़िलाफ़ मेट्रोपॉलिटियन पुलिस में शिकायत दर्ज करवाने में उसकी मदद करेगा।

जाँच अधिकारी ने अहमद के ऊपर लगे आरोपों पर कहा, “मैंने पाया कि लॉर्ड अहमद ने यह जानने के बाद जमान का घबराहट और अवसाद का ईलाज चल रहा है, उन्होंने उसका भावनात्मक और शारीरिक रूप से यौन शोषण किया। जो कोड के उल्लंघन की गंभीरता को बढ़ाता है।”

इसके बाद अहमद ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कंडक्ट कमेटी में जाँच अधिकारी की रिपोर्ट के ख़िलाफ़ अपील भी की, लेकिन कमेटी ने इसे नकार दिया। अब बिना किसी बहस के 19 नवंबर को हाउस में कमेटी की रिपोर्ट अप्रूव की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि यह नजीर अहमद पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मीरपुर जिले का निवासी है। भारत के 69वें गणतंत्र दिवस पर इसने ब्लैक डे प्रदर्शन का आयोजन किया था। इस दौरान भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को फाड़ा गया था और पाकिस्तानी प्रदर्शनकारियों ने उसे पैरों तले रौंदा था। इतना ही नहीं अहमद ने ऐसी प्राइवेट बिलबोर्ड वैन भी मँगवाई जिसमें फ्री कश्मीर, फ्री खालिस्तान, फ्री असम, फ्री नागालैंड और फ्री मणिपुर लिखा दिख रहा था।

बता दें कि लॉर्ड अहमद की नियुक्ति पूर्व ब्रिटिश पीएम टोनी ब्लेयर द्वारा हुई थी। पिछले काफी समय से ही अहमद का ट्रैक रिकॉर्ड दागी रहा है। उन्हें कई विवादों के ऊपर लेबर पार्टी से निलंबित किया गया है। साल 2007 में एक कार क्रैश के कारण जेल की सजा भी हुई थी। 2018 में नजीर ने कश्मीर और सिख अलगाववादियों के लिए यूके में प्रदर्शन भी किया था

‘TMC पर अब ममता का नियंत्रण नहीं’: MLA ने अपनाए बगावती सुर, 35 क्षेत्रों में प्रभाव रखने वाला अधिकारी परिवार भी नाराज़

पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस के विधायक मिहिर गोस्वामी के अब पार्टी छोड़ने की अटकलें तेज हो गई हैं। 2021 विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी में बगावत के सुर दिखने लगे हैं। गोस्वामी ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए आरोप लगाया है कि अब तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) ममता बनर्जी के नियंत्रण में है ही नहीं। उन्होंने कहा कि अब पार्टी की बागडोर पश्चिम बंगाल की सीएम के हाथ में नहीं है।

मिहिर गोस्वामी ने पूछा कि जब इस पार्टी की बागडोर ममता बनर्जी के नियंत्रण में है ही नहीं, तो फिर उनका इससे सारे नाते तोड़ लेना प्राकृतिक है या नहीं? विधायक मिहिर गोस्वामी ने कहा कि पार्टी में रहते उन्होंने कई बार अपमान का घूँट पिया, लेकिन ‘दीदी’ के कारण चुप रह गए। मिहिर गोस्वामी ने कहा कि वो पिछले 30 सालों से ममता बनर्जी के साथ हैं और 1998 में TMC के गठन के साथ ही इससे जुड़े हुए हैं।

कूच बिहार दक्षिण के विधायक ने आरोप लगाया कि उनके संगठन के सभी पदों से इस्तीफा दिए 6 सप्ताह हो गए हैं, लेकिन पार्टी की मुखिया की तरफ से उन्हें कोई फोन कॉल नहीं आया। उन्होंने बताया कि उन्हें पार्टी से निलंबित किए जाने या निकाले जाने सम्बंधित कोई आदेश भी प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया था कि चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (I-PAC) तृणमूल कॉन्ग्रेस को चला रही है।

इसी आरोप के साथ उन्होंने संगठन के सभी पदों से इस्तीफा भी दिया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जिस तरह से 18 सीटें जीत कर राज्य में दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है, उसके बाद से ही ममता बनर्जी की नींद उड़ी हुई है और उन्होंने प्रशांत किशोर को राज्य में उनकी लोकप्रियता को बढ़ाने की बागडोर सौंपी है, ताकि 2021 विधानसभा चुनाव में वो लगातार तीसरी बार वापसी कर पाए। इससे पार्टी के कई नेता नाराज़ भी हैं।

अक्टूबर में गोस्वामी ने भाजपा सांसद नीतीश प्रमाणिक के साथ एक बैठक में हिस्सा लिया था, जिसके बाद से अटकलों का बाजार और गर्म हो गया है। वहीं नाराज चल रहे शिवेंदु अधिकारी को मनाने के लिए पार्टी के कई नेता सक्रिय हो गए हैं। रविवार (नवंबर 15, 2020) को एक वरिष्ठ TMC नेता ने उनसे मुलाकात की। वरिष्ठ सांसदों को उनसे संपर्क में रहने को कहा गया है। अधिकारी पिछले कई दिनों से कैबिनेट बैठक में भी नहीं शामिल हुए हैं।

ईस्ट मिदनापुर में वो TMC या सुप्रीमो ममता बनर्जी के पोस्टरों के बिना ही रैलियाँ आयोजित कर रहे हैं। उनकी गुरुवार को होने वाली रैली पर सबकी नजर है। कॉन्ग्रेस उन्हें अपने पाले में लेने के लिए बेचैन है और प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि TMC जैसे दल में उन्हें सम्मान नहीं मिलेगा, इसीलिए इस कद के नेता का कॉन्ग्रेस में हमेशा स्वागत है। प्रशांत किशोर ने भी मंत्री शिवेंदु और उनके सांसद पिता शिशिर अधिकारी के घर जाकर उनसे मुलाकात की।

अधिकारी परिवार का ऐसा वर्चस्व है कि वो ईस्ट मिदानपुर के अलावा वेस्ट मिदानपुर, बाँकुरा, पुरुलिया, झारग्राम और बीरभूम के 35 विधानसभा क्षेत्रों में प्रभाव रखते हैं। हालाँकि, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष का कहना है कि पार्टी ने उनसे अभी संपर्क नहीं किया है। उन्होंने कहा कि TMC का ये आंतरिक मामला है और उन्हें आशा है कि अधिकारी अपना स्टैंड जल्द ही स्पष्ट करेंगे। शिवेंदु के भाई दिव्येंदु भी सांसद हैं।

नवंबर 2020 के पहले हफ्ते में पश्चिम बंगाल पहुँचे केंद्रीय गृह मंत्री से शाह ने भी कहा था कि ममता सरकार का अंत करीब आ चुका है। आने वाले दिनों में यहाँ पर सोनार बांग्ला की रचना करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भरसक प्रयास होंगे। उन्होंने आश्वासन दिया था कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल में 2/3 बहुमत के साथ भाजपा की सरकार बनने जा रही है। उन्होंने अपील की थी कि बंगाल एक सीमावर्ती राज्य है और यहाँ की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व युवाओं को रोजगार देने के लिए उन्हें ममता सरकार को भाजपा सरकार से बदलना होगा।

वो पुलिस वाला, जिसका एक हाथ है बेजान… फिर भी खुद CM शिवराज सिंह चौहान को करनी पड़ी तारीफ

मध्य प्रदेश के जबलपुर से 35 किमी दूर घुघरी गाँव में कल (नवंबर 17, 2020) एक मालवाहक के खाई में गिरने की खबर आई। दुर्घटना के समय इसमें 36 मजदूर सवार थे, जिसमें से 27 बुरी तरह घायल हो गए। मामले की सूचना पाते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुँची और घायलों को अस्पताल पहुँचाने का काम किया। इस दौरान एक ऐसा दृश्य तस्वीरों में कैद हुआ कि सीएम शिवराज सिंह चौहान खुद को प्रदेश पुलिस की तारीफ करने से रोक नहीं पाए।

दरअसल, जिस समय यह दुर्घटना घटी उस दौरान घायलों की संख्या इतनी अधिक थी कि उन्हें अस्पताल तक ले जाने के लिए स्ट्रेचर कम पड़ गए। ऐसे में 57 साल के एएसआई संतोष सेन ने सारी जिम्मेदारी संभाली और उनके साथ एलआर पटेल, आरक्षक अशोक, राजेश, अंकित ने उनका साथ देते हुए घायलों को कंधे व गोद में लेकर कैजुएलटी तक पहुँचाया। खबर है कि घायलों में 10 की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है। उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है।

बुधवार (नवंबर 18, 2020) को अखबार में संतोष सेन की इस प्रतिबद्धता को देख उनकी तस्वीर और खबर सोशल मीडिया पर शेयर की जाने लगी। थोड़ी देर पहले प्रदेश सीएम शिवराज सिंह चौहान ने लिखा, 

“एएसआई संतोष सेन पर पूरे मध्य प्रदेश को गर्व है! संतोष जी युवा पुलिसकर्मियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनके जैसे लोग समाज को दिशा दिखाने का कार्य करते हैं। मैं उनके जज़्बे को प्रणाम करता हूँ, उन्हें शुभकामनाएँ देता हूँ और हार्दिक अभिनंदन करता हूँ।”

गौरतलब हो कि एएसआई संतोष सेन की यह हिम्मत सिर्फ इसलिए सराहनीय नहीं है क्योंकि उन्होंने सरकारी मुलाजिम होने के नाते अपना काम किया बल्कि इसलिए भी है क्योंकि उन्होंने इंसानियत की नई मिसाल पेश की है।

नई दुनिया की खबर के अनुसार, संतोष सेन का एक हाथ बेजान है तब भी उन्होंने घायलों को मेडिकल कॉलेज तक पहुँचाया। शायद उनकी जगह कोई और अधिकारी होता तो वह ये काम अपने साथियों के जिम्मे छोड़ देता और हाथ का बहाना बना कर सिर्फ ड्यूटी पूरी करता, लेकिन एएसआई संतोष सेन ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने घायलों को कंधे पर उठाकर नए मानक गढ़े।

जानकारी के मुताबिक, साल 2006 में वह नरसिंहपुर में आरक्षक के तौर पर पदस्थ थे, तभी उन्हें एक बदमाश को गिरफ्तार करने का काम सौंपा गया, लेकिन बदमाश के पास पहुँचते ही उसने संतोष सेन को गोली मार दी। इसके बाद उनके सीधे हाथ ने काम करना बंद कर दिया।

कल जब उनकी वीडियो वायरल होनी शुरू हुई तो उन्हें उनके सराहनीय काम के लिए एसपी ने पुरस्कृत करने का ऐलान किया। उनके साथ घटनास्थल पर मौजूद आरक्षकों को भी इनाम देने की घोषणा हुई।

MP में गाय आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था: शिवराज सरकार ने किया गौ कैबिनेट का गठन, कमलनाथ ने भी दिखाई गोभक्ति

मध्य प्रदेश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए और गायों के संरक्षण के लिए गौ कैबिनेट का गठन किया गया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार (नवंबर 18, 2020) को ये जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गोधन संरक्षण और संवर्धन के लिए इस गौ कैबिनेट के गठन का निर्णय लिया गया है। पशुपालन, वन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, राजस्व, गृह एवं किसान कल्याण विभाग – ये सभी मंत्रालय गौ कैबिनेट का हिस्सा होंगे।

मध्य प्रदेश में भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दीपक विजयवर्गीय ने बताया कि इस फैसले का उद्देश्य है कि ग्रामीण रोजगार के लिए एक वैकल्पिक स्रोत को विकसित किया जाए, जिसके लिए गायों और गाय से प्राप्त होने वाले अन्य संसाधनों के इस्तेमाल को माध्यम बनाया गया है। उन्होंने कहा कि रोजगार का एकमात्र समाधान औद्योगीकरण ही नहीं है, अन्य विकल्पों को भी विकसित किया जाना है, ताकि हम एक पर ही आश्रित न रहें।

भाजपा ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकल्प के रूप में गौ पालन के पीछे का कारण बताते हुए कहा कि ये एक ऐसा विकल्प है जो टिकाऊ है, क्योंकि पिछले 2000 वर्षों से भी अधिक समय से ऐसा होता आ रहा है। नई गाय आधारित अर्थव्यवस्था के जरिए मध्य प्रदेश की सरकार एक टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करेगी, जिसके लिए गौ कैबिनेट का गठन किया गया है। साथ ही ग्रामीण सेटअप की आमदनी बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

इतना ही नहीं, गौ कैबिनेट की प्रथम बैठक के लिए भी तारीख तय कर दी गई है। गोपाष्टमी के दिन रविवार (नवंबर 22, 2020) को दोपहर के 12 बजे इसकी पहली बैठक होगी। अभ्यारण्य सागरिया अगर मालवा को बैठक स्थल के रूप में चुना गया है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा सरकार के इस फैसले के बाद श्रेय लेने के लिए इसे अपना प्रोजेक्ट करार दिया। उन्होंने खुद को गोभक्त साबित करने की कोशिश करते हुए कहा:

“2018 के विधानसभा चुनाव के पूर्व प्रदेश में गौ मंत्रालय बनाने की घोषणा करने वाले शिवराज सिंह अब गोधन संरक्षण व संवर्धन के लिए गौ कैबिनेट बनाने की बात कर रहे हैं। उन्होंने अपनी चुनाव के पूर्व की गई घोषणा में गौमंत्रालय बनाने के साथ-साथ पूरे प्रदेश में गौ अभ्यारण और गौशालाओं के जाल बिछाने की बात भी कही थी, प्रत्येक घर में भी छोटी-छोटी गौशाला बनाने की भी बात उन्होंने अपनी चुनावी घोषणा में कही थी। अपनी पूर्व की घोषणा को भूलकर शिवराज फिर एक नई घोषणा कर रहे हैं। सभी जानते हैं कि अपनी 15 वर्ष की सरकार में व वर्तमान 8 माह में शिवराज सरकार ने गौ माता के संरक्षण व संवर्धन के लिए कुछ भी नहीं किया, उल्टा गौमाता के लिए चारे की राशि में कॉन्ग्रेस सरकार ने जो 20 रुपए प्रति गाय का प्रावधान किया था, उसे भी कम कर दिया। कॉन्ग्रेस सरकार ने अपने वचन पत्र में वादा किया था कि हमारी सरकार आने पर हम 1000 गौशालाओं का निर्माण शुरू कराएँगे।”

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दावा किया कि कॉन्ग्रेस ने अपने वचन को पूरा किया और प्रदेश भर में गौशालाओं का निर्माण व्यापक स्तर पर चालू करवाया। उन्होंने ये भी दावा किया कि कॉन्ग्रेस सरकार के गौ माता के संरक्षण व संवर्धन के लिए किए जा रहे कामों से ही भाजपा सरकार को ‘थोड़ी सदबुद्धि आई’ और उन्होंने गौमाता की सुध लेने की सोची। उन्होंने प्रदेश भर में गौशालाओं के निर्माण की भी माँग की।

इससे पहले उत्तर प्रदेश में में पोषण की बिगड़ती स्थिति में सुधार लाने के लिए प्रदेश सरकार ने ऐसे कुपोषित परिवारों, जिनके पास गाय रखने हेतु स्थान हो और जो लोग गौ-पालन के इच्छुक हों, उन्हें गाय देने का सभी जिला प्रशासन को निर्देश जारी किया था। योगी सरकार ने ‘माननीय मुख्यमंत्री निराश्रित/बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना’ के तहत गाय के भरण-पोषण हेतु हर महीने 900 रुपए की धन राशि मुहैया कराने का निर्णय लिया है।