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‘गुपकार गैंग’ से कॉन्ग्रेस ने किया दूरियों का ऐलान, गृहमंत्री अमित शाह के वार के बाद लिया फैसला

कॉन्ग्रेस ने लंबी फजीहत के बाद मंगलवार (नवंबर 17, 2020) को गुपकार गठबंधन से अपनी दूरियों का ऐलान आधिकारिक तौर पर कर दिया है। भाजपा नेता व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बयान के बाद इस मामले ने तूल पकड़ा था। गृहमंत्री ने गुपकार गैंग के उद्देश्य सामने रखते हुए कॉन्ग्रेस से पूरे मामले पर अपना स्टैंड क्लियर करने को कहा था।

इसके बाद सोशल मीडिया पर भी देश की सबसे पुरानी पार्टी की देशभक्ति पर सवाल उठने लगे। अब कॉन्ग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने एक बयान में घोषणा की है कि पार्टी पीएजीडी (पीपुल्स असोसिएशन फॉर गुपकार डेक्लेरेशन) का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि वह देश की क्षेत्रीय अखंडता से कभी समझौता नहीं करेंगे।

उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस न तो गुपकार गठबंधन का पार्ट है और न ही पीएजीडी का। क्या अमित शाह बता सकते हैं कि उन्होंने पीडीपी के साथ गठबंधन में सरकार क्यों बनाई थी, जिस पर अब वह हमला कर रहे हैं।”

कॉन्ग्रेस ने जम्मू कश्मीर जेल से कुख्यात आतंकी मौलाना मसूद अजहर, मुश्ताक अहमद जरगर जैसे आतंकियों की रिहाई को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधने की कोशिश की। जिनके बारे में विदित है कि साल 1999 में हाईजैक हुए इंडियन एयरलाइन्स के प्लेन (जिसमें 178 पैसेंजर थे) को छुड़ाने के लिए उन्हें अफगानिस्तान के कंधार ले जाकर रिहा किया गया था।

कॉन्ग्रेस का दावा किया कि कॉन्ग्रेस लोकतांत्रिक ढंग से बीजेपी का पर्दाफाश करने के लिए जम्मू कश्मीर में आगामी जिला विकास परिषद के चुनावों में भाग लेगी। 

महात्मा गाँधी, इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी का नाम शामिल करते हुए कॉन्ग्रेस ने कहा कि उन्हें ऐसी पार्टी से राष्ट्रवाद का ज्ञान लेने की जरूरत नहीं है, जो ब्रिटिश समय में दास या उनके समर्थक थे।

सुरजेवाला ने यह भी कहा कि अमित शाह और नरेंद्र मोदी सराकर को राष्ट्रवाद और देशभक्ति का पाठ पढ़ने की आवश्यकता है क्योंकि उनके मूल संगठन आरएसएस ने कभी 52 साल में तिरंगा नहीं फहराया।

गौरतलब है कि इससे पहले अमित शाह ने मंगलवार को अपने ट्विट्स में कहा था, “कॉन्ग्रेस और गुपकार गैंग जम्मू और कश्‍मीर को वापस आतंक के युग में ले जाना चाहते हैं।” 

उन्होंने अपने अगले ट्वीट में कहा, “जम्‍मू और कश्‍मीर हमेशा से भारत का आतंरिक हिस्‍सा रहा है। भारत के लोग राष्‍ट्रहित के खिलाफ बने किसी अपवित्र ‘ग्‍लोबल गठबंधन’ को सहन नहीं करेंगे। या तो गुपकार गैंग देश के मूड के साथ चले नहीं तो लोग उसे डुबो देंगे।”

उन्होंने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी से इस राजनीतिक कदम पर स्पष्टता जारी करने को कहा था। गृहमंत्री ने लिखा था , “गुपकार गैंग जम्मू एवं कश्मीर में विदेशी ताकतों का हस्तक्षेप चाहता है। गुपकर गैंग तिरंगे का अपमान करता है। क्या सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी गुपकार गैंग के ऐसे कदमों का समर्थन करते हैं? उन्हें देश की जनता के समक्ष अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए?”

कंगना रनौत और उनकी बहन रंगोली को तीसरी बार समन, मुंबई पुलिस ने कहा – ’23 नवंबर से पहले बांद्रा थाने में पेश हो’

मुंबई पुलिस इन दिनों उन सभी लोगों पर अपनी कार्रवाई करने में जुटी है, जिन्होंने पिछले दिनों उद्धव सरकार की खुलेआम तीखी आलोचना की। रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्णब गोस्वामी के बाद अब बारी आई है बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत की। कंगना और उनकी बहन रंगोली चंदेल को मुंबई पुलिस ने समन भेजा है और उन्हें 23-24 से पहले बांद्रा पुलिस के सामने पेश होने को कहा गया है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, कंगना रनौत और रंगोली चंदेल को पुलिस द्वारा समन भेजा गया है। इसमें उन्हें 23-24 नवंबर से पहले बांद्रा पुलिस के सामने पेश होने की बात कही गई है। यह समन उन्हें सोशल मीडिया पर दो समुदायों के बीच साम्प्रदायिक तनाव फैलाने के लिए किए गए आपत्तिजनक टिप्पणियों पर भेजा गया है।

बता दें कि कंगना रनौत और उनकी बहन रंगोली को पहले भी दो बार समन भेजा गया था मगर तब उन्होंने घर में अपने भाई की शादी होने का हवाला देकर पेश होने में असमर्थता जताई थी। उनके ख़िलाफ़ बांद्रा पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी।

पेशे से वकील और शिकायतकर्ता काशिफ अली खान ने पिछले महीने अंधेरी कोर्ट में रंगोली और कंगना के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। काशिफ ने धारा 121, 121A, 124A,153A ,153B, 295A, 298, और 505 के तहत अपनी शिकायत दर्ज करवाई थी।

काशिफ ने शिकायत में कहा था कि बॉलीवुड एक्ट्रेस भारत के विभिन्न समुदायों, कानूनों और अधिकृत सरकारी निकायों का कोई सम्मान नहीं करतीं और उन्होंने ज्यूडिसरी का मजाक भी उड़ाया। उनका आरोप था कि कंगना और उनकी बहन ने दो धर्मों के बीच सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश की।

अर्णब गोस्वामी को भेजा गया कारण बताओ नोटिस

गौरतलब है कि कंगना से पहले मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक टीवी पर अपनी हालिया कार्रवाई में चैनल के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी को कारण बताओ नोटिस भेजा था। यह नोटिस पालघर लिंचिंग केस और बांद्रा में प्रवासियों की भीड़ इकट्ठा होने पर की गई ‘सांप्रदायिक टिप्पणियों’ को लेकर था।

इस बार उन्हें रविवार को शाम 4 बजे वर्ली के असिस्टेंट पुलिस कमिशनर और स्पेशल एग्जिक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने को कहा गया है। इतना ही नहीं, इससे पहले रिपब्लिक टीवी के एडिटर अर्णब गोस्वामी से ‘अच्छे बर्ताव’ के लिए एक बॉन्ड साइन करने को भी कहा गया।

पालघर मामले में CBI जाँच की माँग पर BJP विधायक राम कदम हिरासत में, मुंबई पुलिस ने भूख हड़ताल को रोका

महाराष्ट्र में भाजपा विधायक राम कदम को उनके आवास से हिरासत में ले लिया गया है। पालघर में दो संतों सहित 3 लोगों की पुलिस के सामने भीड़ द्वारा हुई हत्या के विरोध में वो भूख-हड़ताल पर जाने वाले हैं और सरकार से न्याय की माँग कर रहे हैं। पालघर मामले में सीबीआई जाँच के लिए वो ‘जन आक्रोश रैली’ निकाल रहे थे। उन्हें मुंबई में शुरू होने वाली रैली में हिस्सा लेने से रोक दिया गया है और पुलिस हिरासत में ले गई।

राम कदम ने पुलिस की इस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि पालघर जाने से महाराष्ट्र सरकार रोक रही है, आखिर वो किस-किस आवाज को दबोचने की कोशिश करेगी? इससे पहले उन्होंने पूछा था कि ‘रावणराज चलाने वाली मुगलिया MVA सरकार’ हिन्दू धर्म के त्योहारों का विरोध करना कब बंद करेगी? उनका सवाल था कि “अन्य धर्मों के त्योहारों को इजाज़त देने में शीघ्रता दिखाते हैं वो हिन्दू धर्म के लिए क्यों नहीं है?”

राम कदम ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से पूछा था कि क्या ‘महा विकास अघाड़ी’ के फैसले इटली में लिए जाते हैं? उनकी माँग है कि पालघर में जहाँ साधुओं ने प्राण त्यागा, वहाँ पर एक मंदिर स्वरूप स्मारक का निर्माण करवाया जाए। उन्होंने कहा था कि ऐसा नहीं होने पर वो उसी स्थल पर भूख-हड़ताल करेंगे। वहीं पुलिस का कहना है कि राम कदम को खार थाने में एक घंटे रख कर छोड़ दिया गया है। अब वो फिर से पालघर जाने की कोशिश करेंगे।

सितम्बर 2020 में पालघर में 2 साधुओं की लिंचिंग मामले में महाराष्ट्र पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर के इस मामले में CBI जाँच की माँग का विरोध किया था। पुलिस ने कहा था कि याचिका खारिज करने के साथ याचिकाकर्ता पर जुर्माना भी लगाया जाना चाहिए। उसका कहना है कि राज्य CID गहन जाँच के बाद पहले ही 126 आरोपितों के ख़िलाफ़ दो चार्जशीटें दायर कर चुकी है इन चार्जशीटों को भी कोर्ट में दाखिल किया गया है।

जो भर्ती घोटाले का आरोपित, वही बना नीतीश का शिक्षा मंत्री, ऐसे में मुंगेर गोलीकांड की होगी जाँच? अनंत सिंह फिर बोलेंगे…

थोड़े ही दिन पहले एक वीडियो वायरल होने लगा। वैसे तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मानें तो “वायरल” बीमारियाँ होती हैं इसलिए ये बड़ी बुरी चीज़ हैं, लेकिन जनता की ओर से सोचें तो ऐसा नहीं लगता। आमतौर पर जो चीज़ें वायरल होती हैं, वो सत्ता की ऐंठन सुधारने के काम ही ज्यादा आती है। दीपावली के अवसर पर उत्तर प्रदेश से निकले इस वीडियो का भी ऐसा ही असर हुआ था।

पुलिसकर्मी जिस पटाखा विक्रेता को किसी गंभीर अपराधी की तरह उसकी छोटी सी बेटी के सामने ही मारते-पीटते, घसीटते, लिए जा रहे थे, उस पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ध्यान चला गया। बच्ची के मन में पुलिस के लिए कहीं दुर्भावना बैठ ना जाए, इसलिए तुरंत कार्रवाई हुई। यूपी पुलिस के बड़े अधिकारी बच्ची से मिलने उसके घर पहुँचे, मामले का निपटारा हुआ। वो यूपी थी और ये बिहार है, इसलिए स्वाभाविक ही है कि दोनों जगहों में अंतर होगा।

इसी वजह से, बिहार के मुंगेर में पुलिसिया बर्बरता का वीडियो जब चुनावों के बीच ही आया तो उस पर शोर नहीं मचा। एक अजीब सी चुप्पी साध ली गई। जनता की इस चुप्पी का मतलब भी बिलकुल साफ़ था। मतदान के पहले ही चरण में हुई इस घटना ने अपने व्यापक प्रभाव छोड़े। मुंगेर में उस वक्त जो एसपी तैनात थीं, वो जदयू के एक कद्दावर नेता की सुपुत्री हैं। चुनाव के जब नतीजे आए तो जिन 124 सीटों पर जदयू ने अपने उम्मीदवार उतारे थे, उनमें से उसे केवल 43 पर जीत हासिल हो पाई।

इसके बाद भी क्या नई सरकार बनने के बाद मुंगेर में दुर्गा पूजा विसर्जन के दौरान हुए इस गोलीकांड की जाँच होगी? इसकी संभावना तो नहीं लगती। ये संभावना इसलिए नहीं लगती क्योंकि जदयू के मुखिया नीतीश कुमार ने जब मंत्रालय बाँटने शुरू किए तो शिक्षा मंत्रालय उठाकर मेवालाल चौधरी को दे दिया गया। मेवालाल चौधरी पर आरोप है कि कृषि विश्वविद्यालय भागलपुर का वीसी रहते हुए साल 2012-2013 में 161 सहायक प्राध्यापक और कनीय वैज्ञानिकों की नियुक्ति में उन्होंने जमकर मेवे खाए थे।

यहीं पर भवन निर्माण में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी उन पर मौजूद हैं। नियुक्ति घोटाले में फरवरी 2017 में IPC 409, 420, 467, 468, 471 और 120B के तहत मुक़दमा दर्ज किया हुआ है। जिसके बाद पार्टी ने उन्हें 2017 में निलंबित भी किया था। उस दौर में पूर्व उप-मुख्यमंत्री और तब केवल भाजपा नेता रहे सुशील मोदी ने भी उनको हटाए जाने और जाँच को लेकर काफी शोर मचाया था।

मेवालाल चौधरी के पासपोर्ट को जब्त करवाए जाने के लिए भी सुशील मोदी ने कार्रवाई करवाई थी। अब सुशील मोदी भाजपा की ओर से उप-मुख्यमंत्री नहीं है लेकिन पता नहीं कब फिर से मेवालाल चौधरी का निलंबन गायब हुआ और वो पार्टी की तरफ से मंत्री भी बन गए। राजभवन के निर्देश पर हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस ने नियुक्ति घोटाले की जाँच की थी। इस जाँच के आधार पर एफआईआर दर्ज हुई लेकिन मेवालाल चौधरी को अदालत से जमानत मिल गई थी।

शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी की पत्नी और पूर्व विधायक रही नीता चौधरी की आग से झुलसने के 5 दिन बाद मौत हो गई थी। उस मामले को भी नियुक्ति घोटाले से जुड़ा हुआ माना जा रहा था। पूर्व आईपीएस अमिताभ दास ने डीजीपी एसके सिंघल को इस मामले की जाँच को लेकर चिट्ठी लिखी है। ये राजद के लिए सरकार को घेरने का अच्छा मौका है। मंत्रिमंडल का गठन होते ही इस किस्म की स्थिति के सामने आने से नीतीश कुमार जैसे सधे हुए राजनीतिज्ञ के लिए भी मुश्किलें बढ़ी हैं।

कुछ लोगों का ऐसा भी मानना है कि उनके साथी भाजपा ने जान-बूझकर नीतीश के लिए ये स्थिति खड़ी की है। मेवालाल को लेकर उनकी साँप-छुछुंदर सी हालत करने के पीछे भाजपा का अपनी स्थिति मजबूत करना भी एक वजह हो सकता है। फ़िलहाल ऐसा माना जा रहा है कि 110 में से 74 सीटें जीत लेने वाली भाजपा सरकार चलाने में बेहतर स्थिति में आना चाहती है। फ़िलहाल तो ये समझ में आता है कि नियुक्ति से लेकर निर्माण तक में घोटाले करने वालों को मंत्रालय दिए गए हैं।

जिन पर भाजपा के सुशील मोदी ही आरोप लगा रहे थे, जाँच करवाने की बात कर रहे थे, उन्हें भाजपा के ही समर्थन से मंत्री बना दिया गया है। ऐसे में जो अनैतिक या पुलिसिया जुल्मों के अभियोग सरकार बहादुर पर लगते रहे हैं, उनकी जाँच की कैसी संभावना? जिसकी विधायक रह चुकी पत्नी की संदेहास्पद स्थिति में मृत्यु हो जाए और कोई जाँच नहीं हो, उसके सत्ता में आने के बाद किस चीज़ पर कौन निष्पक्ष जाँच करेगा?

ये कोई बिना वजह नहीं था कि बाहुबली नेता अनंत सिंह सीधे टीवी इंटरव्यू में ही “प्रेम दिवस (₹&) की सरकार है” कह बैठते हैं। अगर सोचें कि क्या आपराधिक मामलों और पुलिस के काम काज की बिहार में वैसी ही जाँच होगी, जैसी पड़ोस के उत्तर प्रदेश में दिखी? तो इन सब के बीच हमें राजद के टिकट पर मोकामा से जीते बाहुबली विधायक अनंत सिंह के सरकार के काम काज पर की गई टिप्पणी ही याद आती है। “प्रेम दिवस” की जाँच होगी!

कॉन्ग्रेस नेता के घर से बरामद हुए 17 पिस्टल, 2 कार्बाइन, 1478 कारतूस: ₹4 करोड़ का है घर, लगा NSA

मध्य प्रदेश के जबलपुर में कॉन्ग्रेस नेता के घर से बड़ी मात्रा में हथियार बरामद हुए थे, जिनमें से दो लाइसेंसी भी हैं। मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के पूर्व सचिव गजेंद्र सोनकर के घर पुलिस गई थी जुआ को लेकर कार्रवाई करने, लेकिन हथियारों का जखीरा बरामद हो गया। भानतलैया स्थित उनके आवास से प्रतिबंधित 9 एमएम की दो कार्बाइन सहित 17 पिस्टल, 1478 कारतूस, 19 मैग्जीन, खड्ग, फरसा, कुल्हाड़ी, ‘बका’ और दो जंगली जानवर के सींग भी मिले

एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा ने जानकारी दी थी कि हनुमानताल थाने में उक्त कॉन्ग्रेस नेता, उनके भाई व मैनेजर के विरुद्ध आर्म्स एक्ट और वन्य जीव अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर रिमांड पर भेज दिया गया था। कई थानों की पुलिस ने मिल कर कार्रवाई को अंजाम दिया, बावजूद इसके इसे गोपनीय रखा गया था। कॉन्ग्रेस नेता ने अपने घर के आसपास सीसीटीवी के अलावा कंट्रोल रूम भी बना रखे हैं और गार्ड तैनात कर रखा है।

अब पता चला है कि कॉन्ग्रेस नेता ने अपने स्टोन क्रशर प्लांट में काम करने वाले एक कर्मचारी के नाम पर 2 शस्त्रों का लाइसेंस ले रखा था। 15 हजार रुपए की नौकरी करने वाले व्यक्ति के नाम पर इतने महँगे लाइसेंसी हथियारों के मिलने से पुलिस हैरान है और बताया जा रहा है कि वो तो बस एक मोहरा भर था। 2014 में एक आपराधिक प्रकरण आने के बाद गजेंद्र के लाइसेंस रद्द कर दिए गए थे, जिसके बाद उसने कर्मचारी के नाम पर लाइसेंस लिया।

दोनों शस्त्रों का लाइसेंस रद्द किया जाना है। खतरनाक हथियार रखने के आरोप में कॉन्ग्रेस नेता गजेंद्र सोनकर और उनके भाई सोनू सोनकर पर NSA के तहत कार्रवाई की जा रही है। मैनेजर रजनीश वर्मा, गोटेगाँव नरसिंहपुर निवासी भाईलाल पटेल, ओमकार उर्फ बबुआ सोनकर फरार चल रहे हैं। प्रत्येक पर 5-5 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया है। गजेंद्र सोनकर की आय के स्रोत का पता लगाने के लिए इनकम टैक्स विभाग को भी पुलिस ने पत्र लिखा है।

उसका घर ही 4 करोड़ रुपए का है। उनके पास से 7.41 लाख रुपए 42 मोबाइल जब्त किए गए थे। वहाँ पर कई जुआरी भी शामिल थे, जिन्हें थाने ले जाकर उन पर कार्रवाई की गई। कॉन्ग्रेस नेता का घर भी अवैध हो सकता है, क्योंकि इसे कब्ज़ा की गई जमीन पर बनाया गया है। जाँच के बाद उसे भी तोड़ने की कार्रवाई की जा सकती है। एक जुआरी 15 लाख रुपए लेकर फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है।

हाल ही में कई छोटे-बड़े अपराधों में कॉन्ग्रेस नेताओं के नाम आ रहे हैं। कुछ दिनों पहले उत्तर प्रदेश के जालौन में कॉन्ग्रेस जिलाध्यक्ष अनुज मिश्रा पर लड़कियों के साथ छेड़छाड़ और उनके साथ फोन पर अश्लील बातचीत करने का आरोप लगा था। इसके बाद लड़कियों ने ही मिल कर उनकी धुनाई कर दी थी। दोनों पीड़ित लड़कियों ने पुलिस को सबूत उपलब्ध कराए थे। उन्होंने पुलिस को कॉल रिकॉर्डिंग्स देकर बताया था कि वो अकेले में मिलने के लिए भी बुलाते थे।

दीवाली और पटाखों से नफरत में BJP सांसद की 8 साल की मृत पोती तक को नहीं छोड़ा ध्रुव राठी और लिबरलों ने

दीपावली की रात पटाखों के कारण भाजपा सांसद रीता बहुगुणा की पोती किया के साथ जो कुछ भी हुआ, वह अत्यंत दुखदायी और दर्दनाक है। 8 साल की मासूम को जरा सी लापरवाही के कारण अपनी जान गवानी पड़ी। वह उस दिन अपने ननिहाल में छत पर जाकर अपने मामा के बच्चों के साथ खेल रही थी, तभी उसकी फैंसी ड्रेस में अचानक आग लग गई। 

घर वालों को उसकी चीखें बच्चों का शोर लगा और वह उसे अनसुना करते रहे, लेकिन जब थोड़ी देर बाद जाकर छत पर देखा तो किया झुलस चुकी थी। इसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान ही उसने दम तोड़ दिया। 

इस दुख की घड़ी में रीता बहुगुणा के घर वालों को हर ओर सांत्वना दी गई मगर लिबरल गैंग ने इसमें भी अपना मतलब निकाल लिया और सारी घटना को पटाखे बैन तक लाकर छोड़ दिया। ध्रुव राठी जैसे लोगों ने खबर का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा, “2 मिनट का मौन उन बेवकूफों के लिए, जो वाकई पटाखों को प्रमोट करते हैं।”

ध्रुव राठी का पाखंड

अब दिलचस्प बात यह है कि दीवाली पर पहले पॉल्यूशन के नाम पर पटाखे बैन की माँग करने वाला यही ध्रुव राठी एक समय में अपनी वीडियो में ये बताता भी नजर आ चुका है कि न्यू ईयर पर पटाखे जलाने क्यों गलत नहीं हैं और इससे क्यों नुकसान नहीं होता।

सोशल मीडिया पर लोगों को इसका पाखंड अच्छे से मालूम है। लोग जानते हैं कि ऐसे मौकों पर ध्रुव राठी दो चेहरों के साथ बात करता है, अपने उन दर्शकों को बरगलाता है, जो इसे रोल मॉडल मान कर यूट्यूब पर सब्सक्राइब कर लेते हैं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फॉलो कर लेते हैं। इसके तर्क बिन हाथ-पाँव के होते हैं, जो सिर्फ़ लिबरल गिरोह को समझ आते हैं।

रीता बहुगुणा की पोती के निधन का ही मामला देख लीजिए। पूरा मामला कहीं न कहीं लापरवाहियों से जुड़ा हुआ है। मगर ध्रुव राठी को तो जैसे इस घटना के घटते ही कोई मुद्दा मिल गया अपने कुतर्कों को जस्टिफाई करने का और दीवाली पर जलाए जाने वाले पटाखों पर अपनी नफरत निकालने का।

सब जानते हैं कि दीवाली पर पटाखे जलाए जाने की की रीत आज की नहीं है और सब यह भी जानते हैं कि बच्चों को कभी भी दीवाली के मौके पर अकेले पटाखे जलाने की छूट नहीं दी जाती। किया का निधन एक दर्दनाक दुर्घटना है। लेकिन इसके लिए दीवाली के पटाखों को दोष देना, उसके घर वालों को दोष देना बिलकुल ऐसा है, जैसे जले पर नमक छिड़कना।

भाजपा सांसद के घर वाले दुख में हैं। उनकी पोती के साथ जो हुआ उससे हम सब को सबक लेना जरूर है लेकिन उन पर आरोप मढ़ना या इल्जाम लगाना कि पटाखे बैन होने के बाद भी उनकी पोती ने पटाखे जलाए या उनके घर में ही सरकारी आदेशों का पालन नहीं किया गया, सिर्फ एजेंडे को दर्शाता है, किसी प्रकार की संवेदनशीलता को नहीं।

विचार करिए क्या वाकई रीता बहुगुणा की पोती के साथ जो हुआ, उस पर कोई भी संवेदनशील व्यक्ति अपना प्रोपेगेंडा चला सकता है क्या? शायद आपका जवाब होगा नहीं। मगर, अफसोस! लिबरल गैंग इस पूरे मामले को अपना एजेंडे के लिए भुनाने में लगी हुई है। उदाहरण देखिए:

ध्रुव राठी के समर्थक इसे भगवान राम से जोड़कर अपनी बात रख रहे हैं। उनका कहना है कि भक्त इसे भी भगवान राम का प्रसाद समझेंगे।

वहीं पॉमिता घोषाल लिखती हैं, “भक्त कहेंगे कि वो हिंदुओं के गौरव के लिए अपने बच्चों को कुर्बान करने के लिए भी तैयार हैं।”

सुमित मोंगा का कहना है कि पागलों के सींग होते हैं भक्तों के बिलकुल नहीं होते।

‘₹1788 करोड़ का कारोबार, ₹149 करोड़ का लेनदेन’: कमलनाथ के भतीजे रतुल पुरी और बेटे बकुल को लेकर गवाह का खुलासा

अगस्ता-वेस्टलैंड घोटाला मामले में मुख्य गवाह चार्टर्ड अकाउंटेंट राजीव सक्सेना ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की पूछताछ में बताया है कि किकबैक को किन माध्यमों से और किन कंपनियों में निवेश के जरिए लेनदेन किया गया। साथ ही रक्षा दलाल सुषेण मोहन गुप्ता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के भतीजे रतुल पुरी के रोल के बारे में भी खुलासा किया है। राजीव सक्सेना को ED ने दुबई से प्रत्यर्पित कर उसकी 385 करोड़ रुपए की संपत्ति को अटैच किया था।

फ़िलहाल वो जमानत पर बाहर है। वो इस मामले को लेकर पूरी तरह से तथ्यों का खुलासा नहीं कर रहा है, इसीलिए ED उसे अप्रूवर से हटाना चाहती है। ED को पता चला है कि राजीव सक्सेना की कम्पनी को क्रिस्चियन मिशेल की कम्पनी से 0.94 मिलियन डॉलर (7 करोड़ रुपए) का निवेश प्राप्त हुआ। इंटरस्टेलर टेक्नोलॉजीज में सक्सेना की 99.9% हिस्सेदारी थी। मिशेल को दिसंबर 2018 में प्रत्यर्पित किया गया था और वो फ़िलहाल जेल में है।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर के अनुसार, मॉरीशस से प्राप्त हुए दस्तावेजों को जब राजीव सक्सेना को दिखाया गया तो उसने इसे स्पष्ट धोखाधड़ी करार दिया, लेकिन वो भी इसका हिस्सेदार था। इसी तरह सुषेण मोहन गुप्ता ने डीएम पावर और डीएम साउथ इंडिया हॉस्पिटैलिटी नामक दो कंपनियों में निवेश किया। राजीव सक्सेना की कम्पनी मैट्रिक्स ग्रुप लिमिटेड ने अपनी सब्सिडियरी कम्पनी रीगल पावर लिमिटेड के माध्यम से ऑप्टिमा इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड में निवेश किया।

ये वही रुपए थे, जिन्हें इंटरस्टेलर टेक्नोलॉजीज लिमिटेड और ग्लोबल सर्विसेज FZC ने दिए थे। ग्लोबल सर्विसेज FZC के बारे में राजीव सक्सेना का कहना है कि उससे मिले पेमेंट को ही रतुल पुरी ने निवेश के लिए व्यवस्थित किया था। सक्सेना का कहना है कि वो उस समय इस बात से अनजान था कि इस कम्पनी को भी अगस्ता-वेस्टलैंड से फंड्स मिले थे। गुप्ता, पुरी और सक्सेना विभिन्न निवेशों और कारोबार के बारे में भी विचार-विमर्श कर रहे थे।

कई व्यापारिक प्रस्तावों पर विचार करते समय तीनों ने ‘मोज़र पावर’ के सोलर पैनल प्रोजेक्ट्स में कारोबार का मन बनाया था और इसके सप्लायर्स के बीच दलाल के रूप में काम करने का खाका तैयार किया था। सक्सेना ने एक फ्लो चार्ट भी ED को दिखाया, जिससे पता चलता है कि उसकी कम्पनी मिडास मेटल्स इंटरनेशनल लिमिटेड ने इस मामले में दलाल की भूमिका निभाई थी। इसके अलावा पुरी की कम्पनी ऑप्टिमा इंफ्रास्टक्टर लिमिटेड में भी निवेश की योजना बनाई गई थी।

इस अवैध हवाला नेटवर्क को आगे बढ़ाते हुए इस कम्पनी ने हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट्स में निवेश किया। मॉरीशस में रतुल पुरी ने कुल 50 मिलियन डॉलर (372.56 करोड़ रुपए) के निवेश की योजना बनाई थी, जिनमें से इन दलालों को 10% निवेश करना था। बाकी के निवेश के लिए कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से बातचीत की गई थी। 2 से 6 साल के बीच ‘मोजर पॉवर’ और मिडास मेटल्स के बीच 240 मिलियन डॉलर (1788.3 करोड़ रुपए) का कारोबार हुआ था।

हालाँकि, जब निवेश की योजना परवान नहीं चढ़ पाई तो फिर इन दलालों को 1 मिलियन डॉलर (7.451 करोड़ रुपए) का पेमेंट नहीं मिला। चूँकि उनकी गलतियों के कारण ये डील नहीं रुकी थी, इसीलिए बाद में उन्हें कई हवाला कंपनियों के माध्यम से पेमेंट्स दिए गए। घाटे को भरने के लिए रतुल पुरी की कम्पनी इक्वीनोक्स ओसियन होल्डिंग्स लिमिटेड की वित्तीय सम्पत्तियों को मैट्रिक्स कम्पनी को 2014 में ट्रांसफर किए जाने की योजना बनी।

राजीव सक्सेना ने बताया कि इस दौरान उन्हें प्रिस्टिन रिवर नामक कम्पनी से भी पेमेंट्स मिलते थे, जो कमलनाथ के बेटे बकुल नाथ द्वारा नियंत्रित है। रतुल पुरी के एकाउंट्स से 20 मिलियन डॉलर (149 करोड़ रुपए) इस कम्पनी को ट्रांसफर किए गए थे, जहाँ नितिन भटनागर नामक व्यक्ति का नाम लिखा था। भटनागर ने भी पूछताछ में बताया कि उसे रतुल पुरी से सक्सेना ने ही मिलवाया था। उस समय भटनागर एक बैंक का मैनेजर था, जिसने बाद में खुद की कम्पनी खोल ली।

उससे पहले वो बकुल नाथ की कम्पनी का मैनेजर था। 2011-12 में प्रिस्टिन रिवर कम्पनी को 18 मिलियन डॉलर (134.12 करोड़ रुपए) का पेमेंट दिया गया। सिंगापुर की जाँच एजेंसियों ने इस पेमेंट के स्रोत पर प्रश्नचिह्न भी खड़ा किया था। भटनागर ने आरोपों से इनकार करते हुए जाँच एजेंसियों के साथ सहयोग की बात कही। वहीं रतुल के वकील नवीन कपिल का कहना है कि ED को खुद राजीव सक्सेना पर भरोसा नहीं है, उसकी बातें भ्रामक हैं और उसे अप्रूवर से हटाया जा रहा है।

ज्ञात हो कि सीबीआई ने सितम्बर 17, 2020 को दायर की गई चार्जशीट में बताया है कि 2000 में सक्सेना के पास इंटरस्टेलर टेक्नोलॉजीज के 99.9% शेयर्स थे। उसने गौतम खेतान के साथ मिल कर अपनी कम्पनी के बैंक खाते में अगस्ता-वेस्टलैंड से 12.4 मिलियन यूरो प्राप्त किए थे। इसके बाद इस रकम को आगे दलालों, नेताओं और अधिकारियों में बाँटे गए। उसने रक्षा मामलों के दलाल सुषेण मोहन गुप्ता और कमलनाथ के भतीजे रतुल पुरी की इस लेनदेन में प्रमुख भूमिका बताई।

COVID-19 पर रिपोर्टिंग और वायरस से निपटने पर चीनी सरकार की आलोचना करने पर महिला पत्रकार को 5 साल की जेल

चीन पर लगातार आरोप लग रहे हैं कि वह कोरोना वायरस को लेकर सच छिपा रहा है और उसने दुनिया को गुमराह किया है। यहाँ तक कि उसने अपने उन नागरिकों को भी नहीं ​बख्शा, जिसने चीन के झूठ के खिलाफ आवाज बुलंद करने की कोशिश की। एक नए दस्तावेज में खुलासा हुआ है कि वुहान में कोरोना वायरस पर रिपोर्टिंग करने वाली एक महिला पत्रकार को चीन ने पाँच साल के लिए जेल भेज दिया है।

37 साल की झांग झान (Zhang Zhan) को बीते मई महीने में गिरफ्तार किया गया था। वह तभी से जेल में हैं। उन पर आरोप हैं कि उन्होंने झगड़ा करने की कोशिश की और प्रशासन के लिए मुश्किलें खड़ी कीं। चीन हमेशा सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ इन्हीं आरोपों का इस्तेमाल करता रहा है और इससे संबंधित धाराओं में उन्हें जेल भेजता रहा है।

चीनी मानवाधिकार रक्षकों (CHRD) के अनुसार, वह 14 मई को लापता हो गई और एक दिन बाद पता चला कि उसे शंघाई में पुलिस ने हिरासत में लिया था। उन्हें 19 जून को शंघाई में औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया था और तीन महीने की नजरबंदी के बाद उन्हें अपने वकील से मिलने की अनुमति दी गई थी। सोमवार (नवंबर 17, 2020) को जारी अभियोग पत्र में कहा गया है कि झांग झान ने टेक्स्ट वीडियो और अन्य मीडिया जैसे वीचैट, ट्विटर और यूट्यूब के माध्यम से गलत जानकारी फैलाई थी।

उन पर ये भी आरोप है कि उन्होंने विदेशी मीडिया को इंटरव्यू दिया और वुहान की खबरें लीक कीं। चाइनीज ह्यूमन राइट्स डिफेंडर्स (CHRD) के मुताबिक गिरफ्तारी के खिलाफ उन्होंने भूख हड़ताल भी की। 18 सितंबर को उनके वकील का फोन आया कि उन पर आरोप तय किए गए हैं।

झांग झान को पहले दो मौकों पर हिरासत में लिया गया था

झांग झान को 2018 में इसी तरह के आरोप में हिरासत में लिया गया था। सितंबर 2019 में उसे शंघाई पुलिस ने बुलाया था और बाद में हांगकांग का समर्थन करने के लिए “झगड़ा करने” के संदेह में आपराधिक हिरासत में लिया गया था और फिर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। नवंबर 2019 में रिहा होने से पहले उन्हें दो बार मानसिक चिकित्सा संबंधी परीक्षण से गुजरना पड़ा।

अन्य पत्रकार जिन्हें हिरासत में लिया गया था

ऐसा नहीं है कि झांग झान कोरोना वायरस पर रिपोर्टिंग करने के लिए गिरफ्तार होने वाली पहली पत्रकार हैं, इस साल कई अन्य पत्रकारों को भी गिरफ्तार किया गया है। एक पूर्व वकील से पत्रकार बने चेन क्विशी को जनवरी में गिरफ्तार किया गया था। क्विश के लापता होने की रिपोर्ट देने के लिए ली ज़हुआ को फरवरी में वुहान जाने के बाद गिरफ्तार किया गया था। उन्हें अप्रैल में रिहा किया गया। वुहान निवासी फांग बिन उसी समय के आसपास लापता हो गए, लेकिन उनके बारे में कभी कुछ जानकारी सामने नहीं आई।

यूपी ATS ने दो संदिग्ध आतंकी इकबाल और फारुख को किया गिरफ्तार: जाँच के दौरान मिला विदेशी कनेक्शन

यूपी पुलिस की ATS ने दो संदिग्ध बांग्लादेशी आतंकियों को सहारनपुर से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार संदिग्ध आतंकियों के नाम इकबाल और फारुख हैं। पुलिस ने दोनों आरोपितों के पास से फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड समेत तमाम अन्य दस्तावेज बरामद किए है। दोनों आरोपितों को एटीएस ने कोर्ट में पेश किया। जहाँ से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

यूपी एटीएस के एडीजी डीके ठाकुर (ADG DK Thakur) ने बताया कि सहरानपुर की कमेला कॉलोनी से चटगाँव बांग्लादेश के रहने वाले दो सगे भाइयों मोहम्मद इकबाल और मोहम्मद फारुख को एटीएस ने गिरफ्तार किया है। ये दोनों अवैध रूप से सहारनपुर में रह रहे थे। इसके साथ दोनों आरोपितों ने सहारनपुर के एड्रेस पर पासपोर्ट, आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, जाति और आय प्रमाणपत्र भी बनवा लिए थे।

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों के मोबाइल फोन में कई विदेशी संदिग्धों के नंबर एक्टिवेट मिले हैं। अधिक जानकारी देते हुए यूपी एटीएस के एडीजी डीके ठाकुर ने यह भी बताया कि मोहम्मद इकबाल और मोहम्मद फारुख मोबाइल फोन के जरिए बांग्लादेश, अमेरिका, सऊदी अरब, इटली, ब्रिटेन, ऑस्ट्रिया, म्यांमार के लोगों के संपर्क में थे। साथ ही उन्होंने बताया कि पुलिस फोन से मिले विदेशियों के नंबरों पर हुई बातचीत का ब्यौरा जुटाने में लगी है और इनके सहरानपुर में रहने के मकसद पर पूछताछ की जा रही है।

पहले भी फर्जी दस्तावेज के मामले में दोनों भाई 2 साल की जेल काट चुके हैं। जेल से बाहर आने के बाद दोनों अपने वतन लौटने के बजाए भारत में एक्टिव थे और यूपी के सहारनपुर में रह रहे थे।

एटीएस एडीजी के मुताबिक, दोनों आरोपित साल 2013 में अवैध रूप से भारत में रहने के आरोप में पश्चिम बंगाल में गिरफ्तार किए गए थे और लगभग दो साल जेल में रहे हैं। जेल से रिहा होने के बाद इन दोनों को बांग्लादेश के लिए निर्वासित कर दिया गया था। इसके बाद दोनों साल 2015 में दोबारा अवैध रूप से सीमा पार कर भारत आ गए और दलालों के माध्यम से सहारनपुर के पते पर फर्जी वोटर आईडी, आधार कार्ड और पासपोर्ट बनवा लिया।

रिपोर्ट के अनुसार पुलिस को आशंका है कि इकबाल और फारुख दिल्ली में गिरफ्तार आतंकियों के संपर्क में थे। दरअसल, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने सोमवार रात जम्मू-कश्मीर के बारामूला और कुपवाड़ा के रहने वाले आतंकी अब्दुल लतीफ मीर और अशरफ खटाना को गिरफ्तार किया था। जिनके पास से पुलिस ने दो सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल और 10 जिंदा कारतूस जब्त किए थे।

वहीं जाँच पड़ताल में आतंकियों के कनेक्शन पाकिस्तान से भी पाए गए थे। रिपार्ट के अनुसार पकड़े गए आतंकी दिल्ली में किसी बड़े हमले के मिशन पर थे। वहीं तफ्तीश में यह भी पता चला था कि कोरोनाकाल में ये दोनों उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में स्थित देवबंद गए थे। देवबंद कनेक्शन मिलने के बाद ही ATS सक्रिय हुई थी।

मूडीज के बाद अब Goldman Sachs ने किया भारत की GDP ग्रोथ अनुमान में सुधार: भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी आने के संकेत

लॉकडाउन प्रतिबंधों में ढील के बाद से भारतीय अर्थव्यवस्था उम्मीद से अधिक तेजी से रिकवर कर रही है। अब रेटिंग एजेंसियाँ भी भारत की जीडीपी ग्रोथ के लिए अपने अनुमान को बढ़ा रही हैं। मूडीज के बाद ग्लोबल रिसर्च फर्म और रेटिंग एजेंसी गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने भी वित्त वर्ष 2021 के लिए भारत की जीडीपी के अनुमान में सुधार किया है। गोल्डमैन सैक्स ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी के अनुमान को -10.3 कर दिया है। 

गौर करने वाली बात यह है कि गोल्डमैन सैक्स सितंबर महीने में भारतीय अर्थव्यवस्था में -14.8 फीसदी गिरावट का अनुमान किया था, लेकिन अब इसमें 4.5 फीसदी के सुधार के संकेत दिए हैं। बड़ी बात यह है कि एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट अगले वित्त वर्ष 2021-22 में जीडीपी में 13 फीसदी सुधार आने का अनुमान किया है।

एजेंसी के मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था में तेज रिकवरी के संकेत दिखने लगे हैं। अक्टूबर माह में जहाँ परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स(PMI) ग्रोथ के मामले में 13 साल के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए 58 अंक तक पहुँच गया है। वहीं, पिछले 6 महीने में पहली बार सितंबर में इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन इंडेक्स (IIP) में 0.2 फीसदी के तेजी देखने को मिली है। मूडीज के बाद अब ग्लोबल रिसर्च फर्म और रेटिंग एजेंसी गोल्डमैन सैक्स ने भी वित्त वर्ष 2021 के लिए भारत के जीडीपी पूर्वानुमान में सुधार किया है।

अमेरिकी ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स ने प्रभावी वैक्सीन की घोषणा के चलते अनुमान में सुधार किया है, जो प्रभावी नीतियों और गतिशीलता प्रदान कर सकता है। हालाँकि, इससे पहले सितंबर में गोल्डमैन सैक्स ने कहा था कि अगले वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी में 10.9 फीसदी का सुधार आएगा। रेटिंग एजेंसी गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि अगले वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेजी से ग्रोथ करेगी, लेकिन पिछले वित्त वर्ष के मुकाबल वित्त वर्ष 2021 में भारतीय अर्थव्यवस्था में -10.3 की गिरावट देखने को मिलेगी।

हाल ही में 12 नवंबर को रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत के लिए वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान आर्थिक गतिविधियों में आने वाली कमी के अनुमान को संशोधित किया है। मूडीज ने अब भारतीय अर्थव्यवस्था में 8.9 फीसदी गिरावट आने का अनुमान जताया है, जबकि पहले उसने 9.6 फीसदी गिरावट आने का अनुमान लगाया था।

भारतीय रिजर्व बैंक के नए अध्ययन के अनुसार, यदि अर्थव्यवस्था में सुधार की वर्तमान गति बरकरार रही तो भारतीय अर्थव्यवस्था वित्तीय वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही यानी अक्टूबर से दिसंबर में ही गिरावट के दौर से बाहर आ जाएगी और फिर विकास दर बढ़ने लगेगी।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि मार्च से अक्टूबर 2020 तक सरकार द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत दी गई विभिन्न राहतों से तेजी से गिरती हुई अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिला है। साथ ही सरकार की ओर से जून 2020 के बाद अर्थव्यवस्था को धीरे-धीरे खोलने की रणनीति के साथ राजकोषीय और नीतिगत कदमों का अर्थव्यवस्था पर अनुकूल असर पड़ा है। यद्यपि अभी देश महामारी से उबरा नहीं है, लेकिन अर्थव्यवस्था ने तेजी हासिल करने की क्षमता दिखाई है।