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50 से ज्यादा लोगों का सिर काटा, कटे अंगों को दफनाने के लिए परिवारों को भेजा: मोजाम्बिक में इस्लामी आतंकियों का तांडव

इस्लामी आतंकवादियों ने पिछले कुछ दिनों में उत्तरी मोजाम्बिक में काबो डेलगाडो प्रांत के कई गाँवों पर हमला किया, जिसमें 50 से अधिक लोगों के सिर काट दिए गए। राज्य मीडिया और पुलिस ने सोमवार (नवंबर 9, 2020) को इसकी जानकारी दी।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “उन्होंने घरों में आग लगा दी और फिर उन लोगों को शिकार बनाया, जो जंगल में भाग गए थे। इस्लामी आतंकवादियों ने वहाँ जाकर भी भयावह तांडव मचाया।”

चश्मदीदों ने बताया कि इस्लामी आतंकवादियों ने एक गाँव के निवासियों को पहले खींच कर फुटबॉल के मैदान में लाया और फिर वहाँ उनकी बेरहमी से हत्या कर दी। उन्हें काट डाला गया। आतंकवादियों ने कथित तौर पर महिलाओं और बच्चों का अपहरण भी किया था।

काबो डेलगाडो प्रांत राष्ट्रीय सरकार द्वारा इस क्षेत्र की कथित उपेक्षा से प्रभावित होकर, लगभग तीन वर्षों से विद्रोह की चपेट में है। ‘इस्लामिक स्टेट’ समूह से जुड़े इस्लामी विद्रोही अशांति का फायदा उठा रहे हैं, क्रूर हमले कर रहे हैं और असंतुष्ट युवाओं को भर्ती कर रहे हैं क्योंकि वे इस क्षेत्र में एक इस्लामी खिलाफत स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।

जिहादियों ने पिछले तीन वर्षों में मोजाम्बिक के उत्तरपूर्वी काबो डेलगाडो प्रांत में तबाही मचाई है, वो गाँवों और कस्बों को एक इस्लामी खिलाफत स्थापित करने के अभियान के रूप में तोड़फोड़ कर रहे हैं। आतंकवादियों ने हाल के महीनों में अपने हमले को तेज कर दिया है और इस प्रक्रिया में नागरिकों को आतंकित करते हुए क्षेत्र के हिंसक रूप से जब्त कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि अप्रैल में कथित तौर पर उनके साथ शामिल होने से इनकार करने पर आतंकवादियों ने कई लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी और 50 से अधिक युवकों के सिर काट डाले। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि सरकारी सुरक्षा बलों ने भी प्रांत में बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों का उल्लंघन किया है।

राज्य मीडिया ने बताया कि दूसरे गाँव में भी कई लोगों के सिर धड़ से अलग कर दिए गए। 2017 से अभी तक लगभग 2,000 से अधिक लोगों की हत्या की जा चुकी है और मुख्य रूप से मुस्लिम प्रांत में हुए संघर्ष में लगभग 400,000 लोग बेघर हो गए हैं। आतंकवादी इस्लामिक स्टेट (आईएस) समूह से जुड़े हुए हैं। समूह ने गरीबी और बेरोजगारी का फायदा उठाया है ताकि क्षेत्र में इस्लामी शासन स्थापित करने के लिए युवाओं को अपनी लड़ाई में भर्ती किया जा सके।

डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने मंगलवार (नवंबर 10, 2020) को कहा कि पिछले सप्ताह सिर्फ नाव के माध्यम से प्रांतीय राजधानी पेम्बा में लगभग 10,000 लोग भाग गए। उन्होंने स्वच्छ पानी और स्वच्छता की पहुँच पर भी चिंता जताई।

मुएडा (Mueda, पूर्वोत्तर मोजाम्बिक में मकोंडे पठार का सबसे बड़ा शहर) में एक सहायता कर्मी ने इस हत्याकांड की पुष्टि करते हुए कहा कि कुछ लड़के उस क्षेत्र से आए थे। उन्होंने कहा कि शरीर के अंगों को मंगलवार को दफनाने के लिए उनके परिवारों को भेजा गया था। कार्यकर्ता ने कहा, “अंतिम संस्कार बड़े दर्द के वातावरण में आयोजित किया गया था। शरीर पहले से ही विघटित हो रहे थे और वे मौजूद लोगों को नहीं दिखाए जा सकते थे।” हालाँकि मोजाम्बिक अधिकारियों ने अभी तक मौतों पर टिप्पणी नहीं की है।

मोजाम्बिक के जिहादी खुद को अल-शबाब कहते हैं। हालाँकि सोमालिया में काम करने वाले उस नाम के समूह के बारे में उन्हें कोई ज्ञात जानकारी नहीं है। पिछले साल आतंकवादियों ने तथाकथित इस्लामिक स्टेट समूह के प्रति निष्ठा का वादा किया था।

मतगणना से पहले बिहार में मर्डर: BJP महिला नेता के पति को मारी 2 गोली, पटना अस्पताल पहुँचने से पहले मौत

बिहार के आरा में वोटों की गिनती शुरू होने से पहले सोमवार (नवंबर 9, 2020) को भाजपा नेत्री के पति की गोली मार कर हत्या कर दी गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार सोमवार की शाम बाइक सवार हथियारबंद बदमाशों ने सिविल कोर्ट के वकील व भाजपा महिला मोर्चा नगर अध्यक्ष के पति को गोली मारी।

इस घटना में वह गंभीर रूप से जख्मी हो गए। इसके बाद उन्हें आनन-फानन में निजी अस्पताल ले जाया गया और फिर पटना रेफर किया गया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

मृतक की पहचान प्रीतम नारायण सिंह के रूप में हुई है। उनकी पत्नी नीलू सिंह भाजपा पार्टी की सक्रिय नेत्री हैं। इस विधानसभा चुनावों में भी वह अपने पार्टी के प्रचार के लिए हर जगह सक्रिय नजर आईं थीं।

इस घटना के बाद मौके पर कई आला अधिकारियों ने पहुँच कर मुआएना किया। मृतक के बेटे प्रियदर्शी ने बताया कि उसके पिता जब शाम में सिविल कोर्ट से वापस घर लौट रहे थे, तभी सुंदर नगर मोहल्ले में मंदिर के समीप दो बाइक सवार हथियारबंद अपराधियों ने उन्हें रोका और उनसे हाल-चाल पूछकर उन्हें गोली मार दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मृतक को एक गोली सिर और दूसरी पीठ में मारी गई। मृतक के बेटे ने अपने पिता-चाचा के बीच एक जमीनी विवाद का खुलासा किया है। इस पर पुलिस का कहना है कि अभी उन्हें कुछ प्रथम सूत्र मिले हैं, उन्हीं आधार पर वह अपनी कार्रवाई कर रहे हैं। जाँच में जो कोई भी दोषी पाया जाएगा, उन पर त्वरित कार्रवाई का आश्वासन भी पुलिस ने दिया है।

पुलिस के मुताबिक दो की संख्या में बदमाश एक बाइक पर आए थे, जो वारदात को अंजाम देकर आराम से भाग निकले। पुलिस को मौके से पिस्टल की गोली का दो खोखा मिला है।

जीत रही बलात्कारी RJD विधायक की पत्नी, जो MLA है रेप और देह-व्यापार में फरार, उसकी बीवी भी आगे: बिहार चुनाव

बिहार विधानसभा चुनाव में राजद ने यूँ तो कई दागियों को टिकट दिया था, लेकिन दो ऐसे नाम हैं, जिनके परिजनों को टिकट देना विवाद का विषय बना था। नवादा से विधायक रहे राजवल्लभ यादव ने एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार किया था। उन्हें राजद ने लोकसभा का टिकट दिया था, इस बार उनकी पत्नी को विधानसभा का टिकट मिला। वहीं भोजपुर जिले के सन्देश से विधायक अरुण यादव (इन पर है रेप और देह-व्यापार का आरोप) की पत्नी को भी राजद ने टिकट दिया।

मतगणना के ताज़ा रुझानों के अनुसार, नवादा से राजवल्लभ यादव की पत्नी विभा देवी 5429 मत पाकर सबसे आगे चल रही हैं और उन्हें 35% से अधिक वोट्स मिले हैं। वो अपने नजदीकी प्रतिद्वंद्वी जदयू उम्मीदवार कौशल यादव से 1600 वोटों से आगे हैं। वहीं सन्देश विधानसभा सीट से अरुण यादव की पत्नी किरण यादव 18716 वोट पाकर आगे चल रही हैं। उन्हें अब तक की गिनती में 54% से भी अधिक वोट मिले हैं।

अब तक के कुल आँकड़ों के अनुसार, रुझानों में जहाँ NDA को 130 सीटों पर लीड मिली हुई है, वहीं महागठबंधन 101 सीटों पर आगे चल रहा है। लोजपा को भी 6 सीटें मिलती दिख रही हैं। भाजपा अब 70 सीटों की लीड के साथ बिहार में सबसे बड़ी पार्टी बनने जा रही है, वहीं राजद 64 सीटों पर आगे हैं। जदयू की सीटें गिरती दिख रही हैं और वो 53 सीटों पर आगे है।

बिहार में पटना के बाँकीपुर सीट पर दिलचस्प लड़ाई देखने को मिल रही है। यहाँ से भाजपा के नितिन नवीन फिलहाल आगे बढ़ रहे हैं। ECI की वेबसाइट के अनुसार, पुष्पम प्रिया चौधरी को मात्र 121 वोट ही मिल पाए हैं, जो अब तक के कुल वोट्स का मात्र 3.13% है। वो ‘द प्लुरल्स पार्टी’ से मैदान में उतरी हुई हैं। दूसरे नंबर पर शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा हैं, जिन्हें 1097 मत मिले हैं। वहीं भाजपा उम्मीदवार नितिन नवीन 2385 वोटों के साथ सबसे आगे हैं।

जहाँ एक तरफ बिहार में मुख्य राजनीतिक पार्टियों के अलावा बाकी के उम्मीदवार लड़ाई में जगह बनाने के लिए भी पिछड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वैशाली का लालगंज सीट एक अलग कहानी कह रहा है। यहाँ से उत्तर बिहार के ‘बाहुबली’ नेता विजय कुमार शुक्ला उर्फ़ मुन्ना शुक्ला भाजपा और कॉन्ग्रेस के उम्मीदवारों से बढ़त बनाते हुए दिख रहे हैं। वो भी तब, जब लोजपा ने भी यहाँ सिटिंग विधायक राजकुमार साह को उतारा है। डीएम जी कृष्णैया और मंत्री ब्रिज बिहार प्रसाद की हत्या मामले में आरोपित रहे मुन्ना शुक्ला जेल में बार बालाओं को नचाने के लिए भी जाने जाते रहे हैं।

अगर लालगंज विधानसभा की बात करें तो ये उनका गढ़ रहा है और वो यहाँ से एक बार निर्दलीय, एक बार जदयू से और एक बार लोजपा से जीत दर्ज कर चुके हैं। उनके जेल में रहते उनकी पत्नी अन्नू शुक्ला ने 2010 में बतौर जदयू उम्मीदवार जीत दर्ज की थी। अब वो 39.15% मतों (4185 वोट) के साथ बाकी सभी उम्मीदवारों से आगे चल रहे हैं।

वहीं बात एक और ‘बाहुबली’ अनंत सिंह की करें तो रोचक बयानों के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाले ‘छोटे सरकार’ मोकामा से आगे चल रहे हैं। अब तक की गिनती में उन्हें आधे से भी ज्यादा वोट्स मिले हैं। राजद से लड़ रहे अनंत सिंह जीत का चौका मारते हुए दिख रहे हैं क्योंकि वो पिछले 15 सालों से विधायक हैं। 38 आपराधिक मामलों के साथ वो बिहार के सबसे ज्यादा ‘दागदार उम्मीदवार’ हैं।

बिहार विधानसभा चुनाव की मतगणना जारी है और NDA स्पष्ट बहुमत की ओर बढ़ता दिख रहा है। एक और बड़ी बात ये है कि हसनपुर से, जो राजद का गढ़ माना जाता है – तेज प्रताप यादव पीछे चल रहे हैं। लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को जहाँ 4102 वोट्स मिले हैं, वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी जदयू के राजकुमार राय को 5621 मत मिले हैं। अगर अब तक के आँकड़ों की मानें तो जदयू के राजकुमार राय हैट्रिक लगाते दिख रहे हैं।

वहीं पटना के बाँकीपुर विधान सभा से शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा अब कॉन्ग्रेस उम्मीदवार के रूप में पिछड़ते नजर आ रहे हैं और भाजपा के नितिन नवीन आगे हो गए हैं। उनके पिता इसी क्षेत्र से जीतते रहे हैं और वो बिहार में भाजयुमो के अध्यक्ष हैं, इसीलिए पार्टी का बड़ा चेहरा हैं। पिता की मृत्यु के बाद विरासत संभालने वाले नितिन नवीन फ़िलहाल लव सिन्हा और पुष्पम प्रिय चौधरी से आगे चल रहे हैं।

बिहार विधानसभा चुनावों में चल रही मतगणना में अचानक से पलड़ा NDA की तरफ झुकता नजर आ रहा है। जहाँ अब नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला राजग 120 सीटों पर आगे चल रहा है, तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाला महागठबंधन 113 सीटों के साथ पिछड़ता दिख रहा है।

भाजपा फिलहाल 63 सीटों पर आगे चल रही है और जदयू 51 सीटों पर। अब बिहार में पहली बार भाजपा किसी भी गठबंधन में ‘बड़ा भाई’ बन कर उभरती नजर आ रही है। यानी, अब तक के आँकड़ों के हिसाब से देखें तो अगर राजग की सरकार बनती भी है तो भाजपा ‘बड़े भाई’ की भूमिका में होगी।

अब तक के रुझानों के अनुसार लोजपा मुंगेर प्रमंडल में 3 सीटों पर आगे दिख रही है। बता दें कि मुंगेर में ही दुर्गा पूजा विसर्जन के दौरान पुलिस क्रूरता में 2 युवकों के जान जाने की खबर सामने आई थी। इसे तेजस्वी यादव और चिराग पासवान ने मुद्दा भी बनाया था।

अब तक के आँकड़ों को देखें तो यहाँ महागठबंधन 7 और राजग 9 सीटों पर आगे चल रहा है। एसपी लिपि सिंह के रवैये के कारण यहाँ NDA के खिलाफ आक्रोश होने की बात कही जा रही थी। मुंगेर सीट से राजद के अविनाश कुमार विद्यार्थी आगे चल रहे हैं।

जमुई से भाजपा की श्रेयसी सिंह बढ़त बनाती हुई दिख रही हैं। बता दें कि इस क्षेत्र में लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान का अच्छा प्रभाव है और वो यहाँ से सांसद हैं। उन्होंने श्रेयसी सिंह के पक्ष में रैली भी की थी। उनके पिता दिग्विजय सिंह केंद्रीय मंत्री रहे हैं और वो खुद 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडलिस्ट रही हैं। जमुई से उनके आगे चलने का अर्थ है कि उनकी युवा अपील और चिराग की गोलबंदी का भी उन्हें फायदा हुआ है।

अब तक के रुझानों के अनुसार, कोसी क्षेत्र की सारी सीटों पर कड़ी टक्कर है और राजद 7 तो जदयू 6 सीटों पर आगे है। पप्पू यादव के प्रभाव वाले इन सभी 13 सीटों पर कड़ी लड़ाई देखने को मिल रही है।

खुद पप्पू यादव मधेपुरा से तीसरे नंबर पर चल रहे हैं। तिरहुत भाजपा का गढ़ माना जाता है और वो फ़िलहाल 18 सीटों के साथ इसे बचाते हुए नजर आ रही है, लेकिन मुस्लिम बहुत ढाका से राजद के फैसल रहमान और नरकटिया से शमीम अहमद आगे चल रहे हैं।

मधेपुरा से जदयू के निखिल मंडल आगे चल रहे हैं। दूसरे नंबर पर राजद के सिटिंग विधायक चंद्रशेखर हैं।

अब तक के रुझानों के अनुसार, इमामगंज से जीतन राम माँझी आगे चल रहे हैं। रामनगर से भाजपा की भागीरथी देवी आगे चल रही हैं, जिन्होंने सफाईकर्मी से विधायक तक का सफर तय किया। मधुबन से पूर्व सांसद सीताराम सिंह के पुत्र व नीतीश सरकार में मंत्री राणा रणधीर आगे चल रहे हैं।

मोतिहारी से भाजपा के प्रमोद कुमार आगे चल रहे हैं। सहरसा से आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद भी आगे चल रही हैं।

जहाँ तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव अपनी-अपनी सीटों से आगे चल रहे हैं, वहीं भाजपा के बड़े नेता नन्द किशोर यादव पीछे चल रहे हैं। एक और उलटफेर ये हो रहा है कि पप्पू यादव पीछे चल रहे हैं। बाँकीपुर से भाजपा के नितिन नवीन और प्लुरल्स की पुष्पम प्रिय चौधरी से आगे शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा कॉन्ग्रेस से आगे चल रहे हैं।

बिहार में विधानसभा चुनाव की मतगणना चल रही है और इसके रुझान सामने आ रहे हैं। अभी तक के रुझानों के अनुसार जमुई से शूटर श्रेयसी सिंह आगे चल रही हैं। वो बिहार के दिग्गज दिवंगत नेता दिग्विजय सिंह की बेटी हैं।

वाल्मीकिनगर से जदयू के युवा विधायक धीरेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ़ रिंकू सिंह आगे चल रहे हैं। शिवहर से आनंद मोहन और लवली आनंद के बेटे चेतन आनंद सिटिंग विधायक सर्फुद्दीन से आगे चल रहे हैं। झंझारपुर से नीतीश मिश्रा आगे चल रहे हैं। मोतिहारी से भाजपा के प्रमोद कुमार आगे चल रहे हैं।

बिहार में सरकार बनाने के लिए 122 सीटों के बहुमत की आवश्यकता है। 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा के लिए हुए चुनाव के बाद लगभग सभी एग्जिट पोल्स ने तेजस्वी यादव की जीत अनुमान लगाया था।

शिवराज सिंह के मध्य प्रदेश में पटाखों पर कोई बैन नहीं, ऐलान के बाद नेटिज़न्स ने कहा- ‘मामा जी रॉक्स’

त्योहार नज़दीक आते ही सरकारों ने तात्कालिक जागरूकता प्रदर्शित करते हुए पटाखों पर पाबंदी लगा दी। इसके विपरीत मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐलान किया है कि उनके राज्य में पटाखों पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। एक सोशल मीडिया यूज़र की बात का जवाब देते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के नागरिक पूरे उल्लास और ऊर्जा के साथ त्योहार मना सकते हैं। इसके अलावा उन्होंने आम जनता से यह भी अनुरोध किया कि इस दिवाली के अवसर पर वह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की वापसी का भी जश्न मनाएँ।

शिवराज सिंह चौहान ने अपने ट्वीट में लिखा, “मध्य प्रदेश खुशियों का प्रदेश है, यहाँ पर हम खुशियों पर कभी भी किसी तरह का प्रतिबंध नहीं लगाते हैं। प्रदेश में पटाखों पर कोई प्रतिबंध नहीं है, हाँ लेकिन चीनी पटाखों पर ज़रूर है। आप भगवान राम के अयोध्या लौटने की ख़ुशी मनाएँ, पटाखे जलाएँ एवं धूमधाम से दिवाली मनाएँ।” 

शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा कि जिन पटाखों पर देवी देवताओं की तस्वीर लगी है, उन्हें प्रतिबंधित किया गया है। यह पूरी तरह हिन्दू समुदाय के लोगों की भावनाओं और आस्था से जुड़ा मसला है क्योंकि इस्तेमाल के बाद इन्हें कूड़े में फेंक दिया जाता है। उस दौरान पटाखे समेत अन्य उत्पादों पर भगवान की तस्वीर लगी रहती है। 

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा किए गए इस ऐलान के बाद इंटरनेट पर मौजूद लोगों में काफी ज्यादा ख़ुशी की भावना पैदा हुई। यही नतीजा था कि उन्होंने अपने मुख्यमंत्री के लिए बेहिसाब स्नेह भी जाहिर किया। सोशल मीडिया पर दो वाक्य सबसे ज़्यादा चर्चा में रहे ‘मामा जी रॉक्स’ और ‘वी लव यू मामाजी’।

बीते कुछ दिनों में पटाखों को लेकर देश में काफी चर्चा और विवाद छिड़ा हुआ है जिसके चलते इस बात की काफी ज्यादा माँग उठी की पटाखों पर पाबंदी लगाई जाए। दिवाली साल में एक बार आने वाला त्यौहार है और पूरे देश भर में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, ऐसे में पटाखों पर लगाए प्रतिबंध को लेकर काफी प्रतिक्रियाएँ भी सामने आई।  

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की तरफ से यह ऐलान ठीक इसके बाद किया गया है जब एनजीटी ने देश के कई शहरों और क्षेत्रों में पटाखों पर रोक और पाबंदी लगाने का आदेश दिया था। इसके पहले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई पलानीस्वामी ने कहा था कि इस निर्णय की वजह से लाखों का रोज़गार छिन जाएगा और बहुत से लोगों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा।     

दीवाली पर Tanishq ने फिर परोसा हिंदू विरोधी प्रोपेगेंडा: सोशल मीडिया पर विरोध के बाद विज्ञापन हटाया

ज्वैलरी ब्रांड तनिष्क ने एक बार फिर विवादित विज्ञापन बनाया था। जिसमें तनिष्क ने हिन्दू विरोधी एजेंडा परोसते हुए दिवाली को निशाना बनाया था। पिछली बार की तरह इस बार भी तनिष्क के इस विज्ञापन की जम कर आलोचना हुई और विरोध में ट्विटर पर ट्रेंड भी चला। अंततः नतीजा यह निकला कि तनिष्क को अपना विज्ञापन हटाना पड़ा। इस विज्ञापन में कुछ महिलाएँ यह कहती हुई नज़र आ रही थीं कि उन्हें नहीं लगता किसी को पटाखे जलाने चाहिए। 

विज्ञापन में दिवाली के नाम पर सिर्फ़ कुछ महिलाएँ नजर आ रही थीं जो हल्के रंग की साड़ियों में थीं और तनिष्क के आभूषण धारण करके बता रही थीं कि इस दीवाली पर क्या-क्या किया जाना चाहिए और क्या-क्या नहीं। परंपरागत शृंगार के नाम पर महिलाओं ने सिर्फ़ तनिष्क की ज्वैलरी ही पहनी थी। 

साभार- पॉलिटिक्स वीडिओज़

विज्ञापन में न दिवाली पूजा से संबंधित कुछ नजर आ रहा था और न ही कुछ उसकी महत्ता से संबंधित। वहीं बैकग्राउंड की बात करें तो उसमें भी सामान्य लाइटिंग है, कोई दीया या कोई साज-सज्जा नहीं थी। विज्ञापन शुरू होते ही एक महिला इसमें कहती है, “यकीनन कोई पटाखे नहीं। मुझे नहीं लगता किसी को पटाखे जलाने चाहिए।” इसके बाद दो-तीन महिलाएँ अपनी बातें रखती हैं और अंत में इकट्ठा होकर खिलखिलाती नजर आती हैं। विज्ञापन खत्म।

सभी जानते हैं कि तनिष्क आभूषण बनाने वाला समूह है और आभूषणों की भारतीय परिवारों में क्या अहमियत है। तनिष्क जैसे ब्रांड के लोकप्रिय होने का यह एक बड़ा कारण भारतीय समाज द्वारा इसे तवज्जो देना है। ऐसे में सबसे पहला प्रश्न यही खड़ा होता है कि तनिष्क के इस विज्ञापन का त्योहार से क्या संबंध? उस पूरे विज्ञापन में कहीं भी इस तरह की कोई बात ही नहीं है। सबसे ज़्यादा हैरानी की बात यह है कि जिस त्योहार की बात हो रही है उससे संबंधित बुनियादी चीज़ें तक विज्ञापन से नदारद हैं। 

अगर आम जनता इसे हिन्दूफोबिया से ग्रसित विशुद्ध मार्केटिंग नहीं कहे तो क्या कहे? सिर्फ हिंदुओं के त्यौहार पर ही इस तरह के ब्रांड इतने जागरूक क्यों हो जाते हैं? अन्य त्योहारों पर इनकी जागरूकता का दायरा सीमित क्यों हो जाता है? चाहे इसके पहले वाला विज्ञापन ही क्यों न हो जिसमें तनिष्क ने मुस्लिम परिवार में हिंदू बहू की स्वीकार्यता का नाटक पेश किया था। अगर विज्ञापन और विज्ञापन के माध्यम से साझा किया गया विचार इतना ही सार्थक था तो उसे हटाने की ज़रूरत क्यों पड़ी? अगर तनिष्क का उद्देश्य सकारात्मक था और उसे बेहतर संदेश देना था तो दोनों विज्ञापन को हटाना ही नहीं था।

इस मामले में भी यही हुआ, विज्ञापन की मदद से पटाखे नहीं जलाने की नसीहत दी गई। जनमानस की भावनाएँ आहत हुई और चुपके से विज्ञापन हटा लिया गया। ठीक इसी पड़ाव पर कल्पना की जा सकती है कि इसी तरह का त्योहार विरोधी विज्ञापन किसी और मज़हब के लिए बना होता तब क्या हालात होते। तनिष्क ने अपने हिस्से की छद्म चर्चा बटोर ली भले उससे देश की बहुसंख्यक आबादी की भावनाओं का अपमान होता है। 

ऐसा विज्ञापन जिसमें दिवाली का ज़िक्र है पर मिठाई, दीये, पूजा पाठ, रंगोली, मोमबत्ती कहीं नज़र नहीं आती है। यानी दिवाली का मतलब पटाखे नहीं जलाए जाएँ और इंसान सिर्फ तनिष्क के आभूषण पहन कर बैठ जाए। बाकी विज्ञापन को अच्छे से देखने पर समझ आता है, दिवाली का माहौल कम और किटी पार्टी का माहौल ज़्यादा नज़र आता है।    

           

मुंबई पुलिस के सामने 10 की जगह 15 नवंबर को हाजिर होंगी कंगना, कहा- अभी भाई की शादी में व्यस्त हूँ

बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत और उनकी बहन रंगोली चंदेल को 10 नवंबर तक थाने में मौजूद रहने के लिए दूसरा नोटिस भेजा गया था। कंगना ने मुंबई पुलिस के सामने हाजिर होने से इनकार कर दिया है। कंगना और रंगोली के खिलाफ विभिन्न समुदायों के बीच कथित तौर पर वैमनस्य को बढ़ावा देने का मामला दर्ज किया था।

कंगना रनौत ने मुंबई पुलिस के दूसरे नोटिस के जवाब में कहा कि वह अपने भाई की शादी की वजह से नहीं आ पाएँगी। कंगना ने 15 नवंबर के बाद हाजिर होने की बात कही है। 

बता दें कि बांद्रा मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश के बाद बांद्रा पुलिस ने भड़काऊ बयान देने का मामला दर्ज किया था। इस मामले में अभिनेत्री और उनकी बहन को बयान दर्ज कराने के लिए 21 अक्टूबर को पहला नोटिस जारी किया था। हालाँकि, कंगना के वकील ने नोटिस का जवाब भेजा था जिसमें कहा गया था कि वो फिलहाल हिमाचल प्रदेश में हैं और अपने चचेरे भाई की शादी की तैयारियों में व्यस्त हैं। इसकी वजह से उन्होंने मुंबई आने में असमर्थता जताई थी।

कंगना रनौत और उनकी बहन रंगोली को मुंबई पुलिस ने 3 नवंबर को पूछताछ के लिए दूसरा समन भेजा था। दोनों बहनों को सोशल मीडिया पर भड़काऊ बयान देने के मामले में दर्ज एफआईआर (FIR) को लेकर पूछताछ के लिए बुलाया गया था। मुंबई बांद्रा पुलिस ने कंगना रनौत और रंगोली को 10 नवंबर को बुलाया है। बांद्रा पुलिस ने दोनों बहनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 153-ए, 295-ए, 124-ए, 34 के तहत FIR दर्ज की है।

इसके अलावा कंगना रनौत ने एक बार फिर से महाराष्ट्र सरकार पर हमला बोला है। कंगना ने रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी के रिहाई की माँग करते हुए मुंबई में अपना ऑफिस तोड़े जाने को लेकर राज्य की उद्धव सरकार पर निशाना साधा।

बता दें कि अर्णब गोस्वामी को साल 2018 के आत्महत्या के एक मामले में गिरफ्तार किया गया है, आज (नवंबर 9, 2020) कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया। कंगना रनौत पिछले कई मुद्दों को लेकर महाराष्ट्र सरकार पर हमलावर हैं, अब उन्होंने अर्णब का बचाव करते हुए उनकी रिहाई की माँग की है।

सोमवार की दोपहर कंगना रनौत ने एक ट्वीट किया जो अब सुर्खियों में आ गया है। उन्होंने लिखा, “ये सत्ताओं के ठेकेदार गरीबों का हक मार के जो बैठे हैं, बड़े बेचारे हैं ये किस्मत के मारे हमसे पूछते हैं ये इरादे हमारे, हम को इस लड़ाई से क्या हासिल होगा तानाशाहों, एक घर बनाया था वो भी तुड़वा के बैठे हैं।” कंगना रनौत का ये ट्वीट अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है।

इससे पहले कंगना रनौत ने अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी और उनके प्रताड़ना के आरोपों पर बोलते हुए कहा था कि ड्रग माफिया की पोल खोलने, ‘BullyDawood’ में बच्चों की तस्करी के व्यापार की पोल खोलने और सोनिया गाँधी को उनके ‘असली नाम’ से बुलाने के लिए उनके साथ ऐसा किया जा रहा है। उनका कहना था कि ‘पप्पू सेना’ द्वारा उन्हें यातनाएँ दी जा रही हैं क्योंकि उन्होंने सोनिया गाँधी का ‘असली नाम’ लिया।

कंगना रनौत ने एक अन्य ट्वीट में महाराष्ट्र की सरकार को ‘सोनिया सेना’ करार देते हुए कहा था कि उनसे पहले तो कितने ही बलिदानियों के गले काटे गए और उन्हें लटका दिया गया, सिर्फ फ्री स्पीच के लिए। उन्होंने कहा था, “एक आवाज़ बंद करेंगे तो कई आवाज़ें उठ जाएँगी। कितनी आवाजों को बंद करेंगे आप?” कंगना ने पूछा था कि आपको कोई पेंगुइन, पप्पू सेना या सोनिया सेना कहता है तो गुस्सा क्यों आता है? उन्होंने कहा कि आप ये सब हो, तभी तो कोई कहता है।

अफगानिस्तान में आत्मघाती कार बम हमले में 4 की मौत- 40 घायल, इससे पहले काबुल यूनिवर्सिटी हमले में गई थी 25 की जान

अफगानिस्तान में शांति बहाली को लेकर अफगान सरकार और तालिबान के बीच लगातार वार्ता का दौर जारी है। लेकिन इसके बावजूद हमले थम नहीं रहे हैं। अफगानिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में हर दिन आतंकी हमलों को अंजाम दिया जा रहा है। ताजा घटना दक्षिणी कंधार प्रांत में एक पुलिस ठिकाने पर आत्मघाती कार बम धमाके को अंजाम दिया गया है।

इस कार बम धमाके में 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि 40 अन्य घायल हो गए है। एक प्रांतीय अधिकारी ने सोमवार (नवंबर 9, 2020) को जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस ठिकाने को निशाना बनाकर हमला किया गया।

कंधार के जनस्वास्थ्य विभाग के प्रांतीय निदेशक मोहम्मद अशरफ नादरी ने जानकारी देते हुए बताया है कि मैवांद जिले में रविवार (नवंबर 8, 2020) देर रात यह हमला हुआ है। इस धमाके से मकान ध्वस्त हो गया। चिकित्सा कर्मी ध्वस्त मकान के मलबे में फँसे लोगों को निकालने में जुटे हुए हैं। अशरफ नादिर के अनुसार, घायलों में सैनिक एवं आम लोग भी शामिल हैं।

फिलहाल, किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। हालाँकि, ये माना जा रहा है कि इस हमले को तालिबान ने अंजाम दिया है। तालिबान एवं अफगानिस्तान सरकार के बीच कतर में शांति वार्ता के बावजूद हाल के महीनों में देश में हिंसा बढ़ गई है ।

गौरतलब है कि इससे पहले अफगानिस्तान के काबुल विश्वविद्यालय में सोमवार (नवंबर 02, 2020) को हुए आतंकी हमले में कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 40 से अधिक लोग घायल बताए गए। काबुल विश्वविद्यालय के पास गोलाबारी तब हुई जब अफगान और ईरानी अधिकारी विश्वविद्यालय में एक पुस्तक प्रदर्शनी का उद्घाटन कर रहे थे। अफगानिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्रालय के प्रवक्ता तारिक एरियन ने पुष्टि की कि बंदूकधारियों के एक समूह ने काबुल विश्वविद्यालय के परिसर में गोलीबारी की थी।

एक चश्मदीद ने बताया था कि हमलावरों ने काबुल विश्वविद्यालय में एक क्लास में प्रवेश किया और छात्रों पर गोलियाँ चलाईं। जिसके कारण क्लास में मौजूद कई छात्र या तो मारे गए या घायल हो गए। पूरे विश्वविद्यालय परिसर को सुरक्षाबलों ने खाली करा लिया था। आतंकियों की धड़पकड़ के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया गया था।

पिछले साल इस यूनिवर्सिटी के गेट पर बम विस्फोट में आठ लोगों की जान चली गई थी। वर्ष 2016 में बंदूकधारियों ने काबुल स्थित अमेरिकी यूनिवर्सिटी पर हमला किया था और 13 लोगों को मार डाला था।

‘पंजाब सरकार रेलवे ट्रैक खाली कराने में फेल’- शेखर गुप्ता को कोई समस्या नहीं, मोदी ने ट्रेन रद्द करवा दी इससे परेशानी

पंजाब में किसानों द्वारा किए जा रहे ‘रेल रोको’ अभियान की वजह से भारतीय रेलवे को काफी नुकसान हो रहा है। इस संबंध में पत्रकार शेखर गुप्ता ने पंजाब सरकार की निष्क्रियता का बचाव करते हुए अव्यवस्था का आरोप उलटा मोदी सरकार पर लगा दिया है। ट्विटर पर ट्वीट करते हुए शेखर गुप्ता ने इस मुद्दे पर मोदी सरकार की आलोचना की। 

इस दौरान उन्होंने कहा कि जिस तरह मोदी सरकार रेल यातायात रोक कर विरोध प्रदर्शन को रोकने का प्रयास कर रही है वह गलत है। शेखर गुप्ता के मुताबिक़ सरकार द्वारा ट्रेन को रोकने का निर्णय किसानों को अधीन करने के लिए उठाया गया है। शेखर गुप्ता ने यह भी कहा कि पंजाब के किसानों को धान से मक्का के उत्पादन के लिए आर्थिक सहयोग किया जाए।

शेखर गुप्ता ने अपने ट्वीट में लिखा, “मोदी सरकार जिस तरह रेल यातायात रोक कर पंजाब में हो रहे विरोध प्रदर्शन नियंत्रित कर रही है यह तार्किक नहीं है। किसानों को इस तरह नहीं लुभाया जा सकता है। सरकार को अमरिंदर के साथ काम करना चाहिए और भरोसा जीतना चाहिए। पंजाब के किसानों को धान के बाद मक्का की खेती के लिए आर्थिक सहयोग की ज़रूरत है। दबाव डालने पर प्रतिक्रिया पलट कर वापस आएगी।” 

मुख्य रूप से शेखर गुप्ता ने दो बिंदुओं का उल्लेख किया है, पहला मोदी सरकार विरोध प्रदर्शन के बीच रेलवे को हरी झंडी दिखाए, जिससे उपद्रव, तोड़फोड़ और हिंसा की गुंजाइश बने। जबकि इसके पहले पंजाब में विरोध प्रदर्शन के दौरान ट्रेन के चालकों के साथ मारपीट की कई ख़बरें सामने आ चुकी हैं। 

जब राज्य के अधिकांश रेलवे ट्रैक पर किसानों ने कब्जा कर रखा है ऐसे में रेलवे को पहले की तरह हरी झंडी दिखाना केंद्र सरकार का गलत निर्णय होगा। अगर ऐसे वक्त में केंद्र सरकार शेखर गुप्ता के सुझाव को आधार बनाते हुए ट्रेन चलाती है तो उसमें तोड़फोड़ का ख़तरा होगा। किसान इसी तरह अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखते हैं और ऐसे में ट्रेन चला दी जाती हैं तो वह किसी भी वक्त हिंसक रूप ले सकता है।         

जिस तरह शेखर गुप्ता ने अपने ट्वीट में किसानों की चिंता को सिर्फ केंद्र की मोदी सरकार की समस्या बताया है उससे एक और बात स्पष्ट होती है। इन्होंने पूरी सूझ बूझ के साथ अमरिंदर सिंह के हिस्से की भी ज़िम्मेदारी मोदी सरकार पर थोप दी। बेशक केंद्र सरकार देश की कृषि संबंधी नीतियों के लिए बड़े पैमाने पर ज़िम्मेदार है लेकिन यह ज़िम्मेदारी पंजाब सरकार की भी उतनी ही है कि वह किसानों का हित सुनिश्चित करे। क़ानून व्यवस्था राज्य की ज़िम्मेदारी है।  

अगर पंजाब सरकार किसानों को रेलवे ट्रैक पर बैठने और ट्रेन के रास्ते में बाधा पहुँचाने से नहीं रोक सकती है। तब इस मामले में रेलवे शायद ही कुछ कर सकता है सिवाय ट्रेन रद्द करने के जिससे तोड़फोड़ और उपद्रव पर लगाम लगाईं जा सके। दूसरा शेखर गुप्ता का सुझाव है कि सरकार किसानों को धान के बाद दूसरी खेती करने के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान करे। प्रिंट के संस्थापक द्वारा दिए गए तर्क की खूबी यह है कि वह अपने इस सुझाव पर गलत नहीं हैं लेकिन इस तरह के सुझाव पंजाब में रेल सुविधा शुरू करने का इकलौता समाधान नहीं हो सकते हैं।   

किसानों को धान की खेती करने से रोकने के लिए आर्थिक सहयोग देने का सुझाव आम दिनों में कारगर साबित हो सकता है जब प्रदेश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन नहीं हो रहे हों। फ़िलहाल रेलवे वापस पहले की तरह शुरू नहीं किया जा सकता है क्योंकि रेलवे ट्रैक पर किसानों ने कब्जा कर रखा है। जिस तरह की कई ख़बरें सामने आई थी कि पंजाब में लोको पायलट के साथ मारपीट की घटना हुई है उससे साफ हो जाता है कि ट्रेन चलने पर राज्य में क्या हालात हो सकते हैं।  

पंजाब सरकार की लापरवाही के चलते ठप्प हुए रेलवे ट्रैक

यह पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वह किसानों से संवाद करे और जल्द से जल्द उन्हें आंदोलन वापस लेने पर सहमति बनाए। लेकिन इस मामले में पूरी तरह पंजाब सरकार की लापरवाही सामने आई, इस मुद्दे पर पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार की निष्क्रियता से इतना साफ़ है कि वह सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक चमकाने वाले मुद्दों पर सक्रियता दिखाते हैं। 

भारतीय रेलवे को ‘रेल रोको’ अभियान की वजह से कुल 500 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। ऑल इंडस्ट्रीज़ एंड ट्रेड फोरम के अध्यक्ष बदिश जिंदल का इस मुद्दे पर कहना है कि राज्य के बिज़नेस में जितना नुकसान हुआ है वह लगभग 500 करोड़ का है। स्टील इंडस्ट्री से लेकर आवश्यक सुविधाओं तक पंजाब लगभग हर चीज़ की कमी महसूस कर रहा है। पंजाब सरकार की लापरवाही और निष्क्रियता के चलते पावर स्टेशन को कोयला नहीं मिल पा रहा है जिसकी पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर कमी हो गई है। 

उच्च न्यायालय इस मुद्दे पर लगा चुका है पंजाब सरकार को फटकार 

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने सरकार द्वारा रेलवे ट्रैक खाली नहीं करा पाने के मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उच्च न्यायालय ने 29 अक्टूबर को टिप्पणी करते हुए कहा था कि पंजाब सरकार क़ानून और न्याय व्यवस्था नियंत्रित करने में असफल साबित हुई है। इसके अलावा उच्च न्यायालय ने इस मुद्दे पर यह भी कहा था कि अगर पंजाब सरकार रेलवे ट्रैक खाली नहीं करा पाती है तो यह माना जाएगा कि सरकार संविधान का पालन नहीं कर पा रही है। 

लेकिन इस तरह की तमाम कड़ी प्रतिक्रियाओं के बावजूद पंजाब सरकार अभी तक इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठा पाई है। एक और उल्लेखनीय बात है कि पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार ने किसानों को केंद्र सरकार के विरुद्ध भड़काने का ही काम नहीं किया बल्कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में पारित किए गए कृषि विधेयकों के विरुद्ध सार्वजनिक रूप से विरोध प्रदर्शन भी किया।  

कृषि विधेयकों के पारित होने पर भड़का ‘रेल रोको’ अभियान 

सितंबर महीने में पंजाब के भीतर रेल रोको अभियान शुरू हुआ था, जिसके बाद सुरक्षा कारणों को मद्देनज़र रखते हुए रेल सेवा बंद कर दी गई थी। रेल सेवा छोटी अवधि के लिए शुरू की गई थी लेकिन पंजाब सरकार रेल ट्रैक खाली नहीं करा पाई थी। सितंबर में केंद्र सरकार ने खेती के क्षेत्र में 3 कृषि विधेयकों का ऐलान किया था। इस विधेयक के तहत उत्पादन से लेकर खरीद के बीच बिचौलियों की भूमिका को ख़त्म करने की बात कही गई थी। इसके बाद विपक्षी दलों ने यह कहते हुए इस विधेयक का विरोध किया था कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य समाप्त करना चाहती है और इस क्षेत्र के दिग्गजों और अमीरों को लाभ पहुँचाना चाहती है। पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार द्वारा पारित किए कृषि विधेयक को टालने के लिए एक प्रस्ताव भी पारित किया था।   

सेशंस कोर्ट ने मुंबई पुलिस को अर्णब से प्रतिदिन 3 घंटे पूछताछ की दी इजाजत, जमानत याचिका पर सुनवाई कल

अलीबाग सेशन कोर्ट में रायगढ़ पुलिस ने अन्वय आत्महत्या मामले में याचिका डाली है, जिसमें कल (नवंबर 10, 2020) अर्णब गोस्वामी को न्यायिक हिरासत देने के मजिस्ट्रेट के आदेश को संशोधित करने की माँग की गई है। इसके साथ ही कोर्ट ने अर्णब की जमानत याचिका पर पुलिस को नोटिस जारी किया है और जमानत याचिका पर भी कल सुनवाई होगी।

सोमवार (नवंबर 9, 2020) शाम अलीबाग स्थित सेशंस कोर्ट ने अन्वय नाइक आत्महत्या मामले में पुलिस टीम को रिपब्लिक टीवी एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी से तीन घंटे तक पूछताछ करने की अनुमति दे दी। अलीबाग पुलिस तलोजा जेल में जाकर अर्णब गोस्वामी से पूछताछ कर सकती है। अलीबाग पुलिस ने अलीबाग सेशंस कोर्ट में अलीबाग मजिस्ट्रेट कोर्ट के सामने अर्णब गोस्वामी को न्यायिक हिरासत भेजे जाने के ऑर्डर को चुनौती दी थी।

अदालत ने सीजेएम के खिलाफ स्थानीय अपराध शाखा द्वारा एक संशोधन आवेदन पर सुनवाई करते हुए आदेश पारित किया, अलीबाग के पुलिस हिरासत को खारिज कर दिया और इसके बजाय अर्णब को न्यायिक हिरासत देने का आदेश दिया।

बता दें कि इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के संस्थापक और प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में ऐसा दावा नहीं पेश किया गया, जिससे पीठ को असाधारण जुरिडिक्शन देना पड़े। हालाँकि, बॉम्बे हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि नियमित जमानत के अन्य विकल्प अभी भी है और उसके लिए प्रयास किया जा सकता है। इसके लिए अर्णब गोस्वामी को सेशन कोर्ट जाना पड़ेगा

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी से नाराज देश भर के तमाम लोग उनके समर्थन में सामने आ रहे हैं। सोशल मीडिया और प्रदर्शनों के माध्यम से लोग उनकी जल्द रिहाई की माँग कर रहे हैं। गोस्वामी को रविवार (नवंबर 8, 2020) सुबह अलीबाग क्वारंटाइन सेंटर से तलोजा जेल ले जाया गया। इस दौरान उन्होंने खुलासा किया कि उनकी जान को खतरा है और पुलिस द्वारा उनको प्रताड़ित किया जा रहा है।

रिपब्लिक टीवी के कंसल्टिंग एडिटर प्रदीप भंडारी ने ट्वीट कर बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और अर्णब गोस्वामी को सुरक्षा प्रदान करने को लेकर स्वत: संज्ञान लेने का अनुरोध किया है।

गौरतलब है कि रायगढ़ पुलिस ने रविवार को रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को न्यायिक रिमांड जारी रखने के लिए तलोजा जेल शिफ्ट कर दिया गया। अर्णब की शिफ्टिंग का कारण देते हुए पुलिस ने दावा किया कि अर्णब गोस्वामी अलीबाग के क्वारंटाइन सेंटर के अंदर मोबाइल फोन इस्तेमाल कर रहे थे। नियमों के अनुसार, वह अनुमति के बिना न्यायिक हिरासत में रहते हुए मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं कर सकते है।

अन्वय नाइक आत्महत्या मामले की आगे की जाँच अवैध नहीं, पीड़ितों के अधिकार भी महत्वपूर्ण: बॉम्बे हाईकोर्ट

रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी को अंतरिम जमानत देने से इनकार करने के आदेश में, बॉम्बे हाई कोर्ट ने माना कि रायगढ़ पुलिस द्वारा अन्वय नाइक आत्महत्या मामले में शुरू की गई आगे की जाँच को ‘अवैध और मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना’ नहीं कहा जा सकता है।

जस्टिस एसएस शिंदे और एमएस कार्णिक की खंडपीठ ने गोस्वामी के वकीलों- वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे और अबद पोंडा द्वारा उठाए गए तर्कों को खारिज कर दिया कि उनके खिलाफ पुलिस की कार्रवाई अवैध थी क्योंकि 2019 के मामले में मजिस्ट्रेट द्वारा क्लोजर स्वीकार किए जाने के बाद उन्होंने जाँच रद्द कर दी थी, तो ऐसे में वे मुकदमा नहीं कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के उदाहरणों का उल्लेख करते हुए, डिवीजन बेंच ने कहा कि ‘कानून में आगे की जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य नहीं है’। बेंच ने आगे कहा कि चार्जशीट दाखिल करने के बाद भी आगे की जाँच करना पुलिस का एक वैधानिक अधिकार है।

इस आदेश ने वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई द्वारा ‘A summary’, ‘B summary’ और ‘C summary’ रिपोर्ट के बीच के अंतर के बारे में प्रस्तुतियाँ और राज्य सरकार की शक्ति के बारे में और जाँच को निर्देशित करने के लिए काफी निर्भरता देखी गई।

बता दें कि मामले की जाँच कर रही रायगढ़ पुलिस ने अप्रैल 2019 में मजिस्ट्रेट के सामने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में ‘case summary’ दायर किया था। क्लोजर रिपोर्ट में जोर देकर कहा गया था, “तीनों अभियुक्तों को विभिन्न क्षेत्रों, स्थानों और तीनों के बीच कोई संबंध नहीं होने के कारण जाँच में प्रमाणित किया गया है। अब तक की जाँच में इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि सुसाइड नोट में नामजद तीन आरोपितों की ओर से की गई कार्रवाई, व्यक्तिगत रूप से या एक साथ मिलकर, मृतक के जीवन को असहनीय बना दिया या उसके पास आत्महत्या करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। इसलिए, इस मामले में साक्ष्य के अभाव में, ‘अंतिम समरी’ को स्वीकार किया जाना चाहिए।” 

गौरतलब है कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के संस्थापक और प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में ऐसा दावा नहीं पेश किया गया, जिससे पीठ को असाधारण जुरिडिक्शन देना पड़े। हालाँकि, बॉम्बे हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि नियमित जमानत के अन्य विकल्प अभी भी है और उसके लिए प्रयास किया जा सकता है। इसके लिए अर्णब गोस्वामी को सेशन कोर्ट जाना पड़ेगा

जमानत नहीं मिलने के बाद अर्णब आज न्यायिक हिरातस में 6ठी रात गुजारेंगे। रिपब्लिक ने इस पर बयान जारी करते हुए कहा कि वह हर कानूनी उपाय को अपनाएँगे और जनमत की अदालतों में अपनी निर्विवाद लड़ाई जारी रखेंगे। भारत के नागरिक को न्यायिक हिरासत में रात बिताने के लिए, कानून और व्यवस्था की मशीनरी द्वारा हमला किया जाना और बुनियादी कानूनी पहुँच से अवरुद्ध होना इस महान लोकतंत्र की आँखों के सामने एक चौंकाने वाली सच्चाई है, और अन्याय है, जिसे इतिहास माफ नहीं करेगी। अर्णब गोस्वामी पर हमला, मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ है और महाराष्ट्र राज्य में स्वतंत्र प्रेस की निर्मम हत्या नहीं होगी। दुनिया भर में भारत और भारत के लोग इसे नहीं होने देंगे।