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‘मेरे पिता ने तालिबानियों को दिया था ID कार्ड’: जॉब छुड़ाने के लिए अफगान महिला की आँख में घोपा गया चाकू, चली गोलियाँ

अफगानिस्तान के काबुल में तालिबानियों ने एक मुस्लिम महिला की आँख में चाकू मारकर उन्हें हमेशा के लिए अंधा बना दिया। उनकी गलती बस ये थी कि वो घर से निकल कर जॉब करने जाती थीं। तालिबानियों को उनकी यही आत्मनिर्भरता नागवार गुजरी और एक दिन उनके दफ्तर से घर लौटते हुए उनपर हमला बोल दिया।

पूरी घटना अफगानिस्तान के गजनी प्रांत की है। खटेरा नाम की 33 वर्षीय महिला ने कुछ समय पहले क्राइम ब्रांच में एक अधिकारी के तौर पर काम करना शुरू किया था। एक दिन पुलिस थाने से काम पूरा करके वह घर लौट रही थीं तभी तालिबानियों ने उन्हें पकड़ा और उनपर गोली चला दी। इसके बाद उनकी आँख में चाकू घोपे गए।

जब महिला को होश आया तो वह अस्पताल में थीं। उन्होंने होश आने पर डॉक्टरों से पूछा कि आखिर वह देख क्यों नहीं पा रहीं? इस पर डॉक्टर्स का जवाब था कि आँख में चोट लगने के कारण बैंडेज लगी हुई है इसलिए वह देखने में असमर्थ हैं। हालाँकि, खटेरा को एहसास हो चुका था कि उनकी आँखें निकाल ली गई हैं।

उन्होंने अपने साथ हुई इस बर्बरता के लिए तालिबानियों को जिम्मेदार ठहराया। मगर तालिबानी इसमें अपनी संलिप्ता को खारिज करते रहे और इन सबके लिए महिला के पिता को आरोपित बताया। उन्होंने कहा कि महिला के पिता के कहने पर उस पर हमला हुआ क्योंकि वो नहीं चाहते थे कि खटेरा बाहर काम करे।

अब यह हमला चाहे किसी के कारण भी हुआ है मगर इसने खटेरा की न केवल जिंदगी खराब की है बल्कि उसके सपनों को भी तोड़ दिया है। इस हमले के कारण सिर्फ़ उनकी आँखे नहीं गईं बल्कि उन्होंने जो आत्मनिर्भर होने के सपने देखे थे वह भी चकनाचूर हो गए। घटना से कुछ दिन पहले ही उन्होंने अपने सपने को साकार करने के लिए क्राइम ब्रांच में काम करना शुरू किया था। लेकिन वह वहाँ एक साल भी अपनी सेवा नहीं दे पाईं।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, वह कहती हैं, “काश मैं पुलिस में कम से कम एक साल काम कर पाती। अगर ऐसा होता तो ये सब मुझे कम दुख देता। ये सब बहुत जल्दी हुआ। मुझे सिर्फ़ काम मिला था और सपने साकार करते हुए सिर्फ़ 3 महीने हुए थे।”

इस हमले पर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भी अपना विरोध प्रकट किया। उन्होंने तालिबानियों के ख़िलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया। उनका मानना है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा सेना वापस बुलाए जाने के बाद से अफगानिस्तान के रूढिवादी और तालिबानी फायदा उठा रहे हैं।

खटेरा का बचपन से सपना था कि वह घर से निकल कर दफ्तर जाएँ और काम करें। लेकिन उसके पिता हमेशा से इसका इंकार करते थे। शादी के बाद उसने अपने शौहर का समर्थन पाया मगर पिता तब भी उसके घर से बाहर निकलने का विरोध करते रहे।

वह बताती हैं, “कई बार जब मैं ड्यूटी पर जाती थी तो मेरे पिता मेरा पीछा करते थे। उन्होंने आसपास के इलाके में तालिबान से संपर्क रखना शुरू कर दिया था और उनसे कहने लगे थे कि वह मुझे मेरी जॉब करने से रोकें।”

खटेरा के मुताबिक उनके पिता ने ही तालिबानियों को उनकी आईडी कार्ड की कॉपी दी थी ताकि यह साबित कर सकें कि वो पुलिस में काम करती हैं। जिस दिन हमला हुआ उस दिन भी महिला के पिता उसे लगातार कॉल कर रहे थे और उससे उसकी लोकेशन पता कर रहे थे।

गजनी पुलिस ने भी यह माना है कि इस हमले के पीछे तालिबानियों का ही हाथ था। उन्होंने खटेरा के पिता को कस्टडी में भी लिया। वहीं तालिबान प्रवक्ता ने कहा कि उनके समूह को पूरे मामले का पता था लेकिन उनका इसमें कोई हाथ नहीं है क्योंकि यह पारिवारिक मामला था।

खटेरा अब अपने परिवार के साथ काबुल में छिपी हुई हैं। वह पहले से बेहतर हैं लेकिन करियर खत्म होने का दुख उनसे बर्दाश्त नहीं हो पाता। अपने पिता की गिरफ्तारी के कारण उन्हें अपनी माँ की उलाहनाओं को झेलना पड़ रहा है जिसके कारण उन्हें रातों में नींद तक नहीं आती। उन्हें बस यही उम्मीद है कि डॉक्टर किसी तरह उन्हें उनकी दृष्टि लौटा दें।

वह कहती हैं, “अगर ऐसा मुमकिन हुआ और मुझे दोबारा दिखने लगा तो मैं अपनी जॉब दोबारा शुरू करूँगी।” वह आय की आवश्यकता पर बात जरूर करती हैं, लेकिन साथ में यह भी कहती हैं कि घर के बाहर जाकर नौकरी उनका जुनून है।

तेज प्रताप, अनंत सिंह, श्रेयसी, पुष्पम प्रिया.. जानें सुर्खियों में रहने वाले कुछ ‘नामी’ चेहरों के क्या हैं सुबह से अब तक के रुझान

बिहार विधानसभा की 243 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव के लिए मतगणना जारी है। चुनाव आयोग के रुझान के अनुसार राज्य में एक बार फिर राज्य में नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए गठबंधन सरकार बनाती हुई दिखाई दे रही है।

ऊपरी तौर पर देखें तो अभी तक आँकड़ों में एनडीए बढ़त बनाए हुए है, वहीं महागठबंधन भी उन्हें लगातार टक्कर दे रही है। ऐसे में, बिहार के कुछ ऐसे नेता हैं, जिनकी लोकप्रियता सकारात्मक और नकारात्मक, या अन्य कारणों से व्यक्तिगत तौर पर उन निर्वाचन क्षेत्रों से ज्यादा मायने रखती है। अभी तक के रुझानों में इन नेताओं की स्थिति क्या है। आइए इस पर एक सरसरी निगाह डाल लें।

1. तेज प्रताप यादव

लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) के कारण इन चुनावों में समस्तीपुर जिले की हसनपुरा सीट पर लगातार सबकी नजर बनी हुई है। ताजा आँकड़े बताते हैं कि इस सीट पर तेज प्रताप फिलहाल जदयू नेता राज कुमार राय से आगे चल रहे हैं लेकिन जदयू उन्हें लगातार कड़ी टक्कर दे रही है और आँकड़े आगे-पीछे हो रहे हैं। तेज प्रताप ने पिछली बार वैशाली जिले की महुआ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन इस बार उन्होंने समस्तीपुर जिले का रुख किया है।

2. तेजस्वी यादव

राघोपुर विधानसभा से चुनावी मैदान में उतरे तेजस्वी यादव अभी तक चुनाव में बढ़त बनाए हुए हैं। उन्होंने सभी प्रत्याशियों को पछाड़ते हुए सुबह से यहाँ अपनी बढ़त बनाई हुई है। यहाँ भाजपा के सतीश कुमार राजद नेता तेजस्वी यादव से पीछे चल रहे हैं।

3. पप्पू यादव

20 साल बाद मधेपुरा विधानसभा से चुनावी मैदान में उतरे पप्पू यादव पर सबकी नजर टिकी हुई है। लेकिन वर्तमान आँकड़े इस बाहुबली नेता के पाले में जाते नहीं नजर आ रहे। मधेपुरा से फिलहाल जदयू के निखिल मंडल बहुत आगे चल रहे हैं। इसके बाद राजद के चंद्रशेखर हैं और फिर तीसरे नंबर पर जाकर पप्पू यादव को जगह मिलती दिख रही है। 

4. अनंत सिंह

विवादित बयानों के कारण चर्चा में आने वाले बाहुबली नेता अनंत सिंह, जिन्हें कि ‘मगहिया डॉन‘ भी कहा जाता है, इस बार राजद की ओर से मैदान में हैं। अभी तक के रुझान बताते हैं कि मोकामा विधानसभा सीट पर अनंत सिंह आगे चल रहे हैं। उनके खिलाफ़ जदयू ने राजीव लोचन को मैदान में उतारा था, लेकिन अनंत सिंह के मुकाबले वह पीछे हैं।

5. श्रेयसी सिंह

जमुई से पहली बार भाजपा टिकट पर चुनाव लड़ने वाली श्रेयसी लगातार अपने प्रतिद्वंदियों के सामने बढ़त बनाए हुए हैं। राजद के मौजूदा विधायक भी इस समय उनसे पीछे हैं।

6. पुष्पम प्रिया चौधरी

इन चुनावों में ‘द प्लूरल्स पार्टी’ की प्रमुख पुष्पम प्रिया दो सीटों पर अपनी किस्मत आजमाने मैदान में उतरी थी। एक पटना की बांकीपुर सीट और दूसरी मधुबनी की बिस्फी सीट। पुष्पम प्रिया चौधरी इन दोनों सीटों से पीछे हैं। ECI की वेबसाइट के अनुसार, बिस्फी सीट से पुष्पम प्रिया को अब तक मात्र 246 वोट ही मिले हैं जबकि बांकीपुर सीट से 502 वोट पड़े हैं। पुष्पम प्रिया ने मार्च 2020 में अपनी पार्टी एलान किया और खुद को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित कर दिया। 

7. शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा

पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर ‘द प्लूरल्स पार्टी’ की पुष्पम प्रिया के सामने कॉन्ग्रेस से शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा भी मैदान में हैं। हालाँकि ये बात और है कि इन दोनों ही नामी चेहरों को पछाड़ते हुए बीजेपी से तीन बार विधायक नितिन नवीन बहुत देर से आगे चल रहे हैं।

8. जीवेश कुमार

जाले विधानसभा में कॉन्ग्रेस ने जिन्ना समर्थक मशकूर अहमद उस्मानी को उतार कर भाजपा के जीबेश कुमार का काम और भी आसान कर दिया है। इस क्षेत्र में काउंटिंग शुरू होने के साथ ही जीवेश कुमार अपनी बढ़त बनाए हुए हैं। वहीं, कॉन्ग्रेस उम्मीदवार उनसे बहुत पीछे हैं।

9. जीतनराम मांझी

इमामगंज सीट से चुनाव लड़ने उतरे जीतनराम मांझी ने शुरुआती रुझानों में इस क्षेत्र में अपनी बढ़त बनाई हुई थी। मगर जैसे जैसे आँकड़ों की गिनती बढ़ रही है मांझी पिछड़ते नजर आ रहे हैं। उनके ख़िलाफ़ इस बार राजद के उदय नारायण मैदान में हैं। वह खुद इस सीट पर मौजूदा विधायक हैं।

10. चंद्रिका रॉय

तेजप्रताप यादव के ससुर व जदयू नेता चंद्रिका राय फिलहाल परसा सीट से पीछे चल रहे हैं। राजद के छोटे लाल लगातार उनके ख़िलाफ़ बढ़त बनाकर इस सीट पर पहले पायदान पर हैं।

11. शालिनी मिश्रा

केसरिया विधानसभा में जदयू नेता शालिनी मिश्रा एक प्रमुख चेहरा थी। लेकिन फिलहाल आरजेडी के संतोष कुशवाहा के सामने वह पीछे चल रही हैं।

12. चिराग पासवान

नीतीश कुमार की पार्टी का विरोध करके लोजपा को इस बार मैदान में अकेले उतारने वाले चिराग पासवान शायद नतीजों को देख कर थोड़ा परेशान हों। उन्होंने बड़े बड़े दावे करके अलग चुनाव लड़ने का मन बनाया था। लेकिन अभी तक लोजपा को कुछ 5-4 सीटे मिलती दिख रही हैं। जबकि, एनडीए के पाले में 125 सीटें तक नजर आ रही हैं।

13. राजद के वरिष्ठ नेता जगदानंद के बेटे सुधाकर सिंह

रामगढ़ विधानसभा सीट पर बसपा के अंबिका सिंह ने अभी तक 10 हजार के करीब वोट पाकर अपनी बढ़त बरकरार रखी है। वहीं दूसरे नंबर पर भाजपा नेता अशोक कुमार सिंह हैं और तीसरे में जाकर कहीं राजद नेता सुधाकर सिंह हैं।

बिहार चुनावों में इन प्रमुख चेहरों के अलावा कुछ महत्तवपूर्ण सीटें भी हैं जहाँ चेहरे भले ही सुर्खियों में रहने वाले नाम नहीं हैं, लेकिन इनसे तय जरूर होगा कि मतगणना खत्म होते होते नतीजे किस पार्टी के पक्ष में जाएँगे। आइए जानें इन सीटों से कौन आगे चल रहा है।

1. लखीसराय: जिले की महज 2 सीटों पर इस बार चुनाव में 37 उम्मीदवार अपना भाग्य आजमा रहे हैं। हालाँकि मतगणना के रुझानों को देखें तो जिले की सूर्यगढ़ा सीट पर राजद के उम्मीदवार आगे चल रहे हैं और लखीसराय विधासभा में भाजपा के विजय कुमार सिन्हा कॉन्ग्रेस के अमरेश कुमार को पीछे किए हुए हैं।।

2. सिमरी बख्तियारपुर में बख्तियारपुर विधानसभा सीट पर, वीआईपी के मुकेश सहनी बढ़त बनाए हुए हैं, आरजेडी के युसूफ सलाहुद्दीन पीछे चल रहे हैं।

3. केवटी: इस सीट पर अभी मुरारी मोहन झा आगे चल रहे हैं। दूसरे नंबर पर आजेडी के अब्दुल बारी सिद्दकी हैं।

4. सुरसंड: इस सीट पर राजद उम्मीदवार सैयर अबू दुजाना अभी तक जीतते नजर आ रहे हैं। वहीं जदयू के दिलीप राय उनसे पीछे हैं।

5. ढाका: मुस्लिम बहुत इलाके ढाका में भाजपा को अभी तक बोल बोला है। यहाँ बीजेपी के पवन कुमार जायसवाल बढ़त बनाए हुए है, आरजेडी के फैसल रहमान पीछे हैं।

6. किशनगंज: भाजपा की स्वीटी सिंह ने कॉन्ग्रेस के अजहरुल हुसैन को पीछे करके अपनी बढ़त अभी तक यहाँ पर बनाई हुई है।

7. मोतिहारी: रुझानों में इस सीट पर आरजेडी के ओम प्रकाश चौधरी की बढ़त बनी हुई है। वहीं आरएलएसपी के दीपक कुशवाहा यहाँ से पीछे चल रहे हैं।

8. जहानाबाद: इस सीट पर आरजेडी के कुमार कृष्ण कुमार यादव उर्फ़ सुदय आगे व जेडीयू के कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा पीछे चल रहे हैं।

9. बक्सर: भाजपा के परशुराम चौबे इस सीट पर कॉन्ग्रेस के संजय कुमार तिवारी को पछाड़ कर आगे बने हुए हैं।

10. दरभंगा: मतदान गिनती के साथ साथ भाजपा के संजय सरावगी ने इस सीट पर अपनी बढ़त बनाई हुई है। आरजेडी के अमर नाथ गामी यहाँ से पीछे चल रहे हैं।

11. झाझा: इस सीट पर जेडीयू के दामोदर रावत बढ़त बनाए हुए हैं जबकि, आरजेडी के राजेंद्र प्रसाद अभी तक पीछे चल रहे हैं।

12. मनेर: मनेर सीट पर आरजेडी के वीरेन्द्र का कब्जा होता दिख रहा है और भाजपा प्रत्याशी निखिल आनंद पीछे हैं।

13. तरारी: इस सीट पर अभी तक भाकपा (माले) के सुदामा प्रसाद बढ़त बनाए हुए है, तो वहीं, बीजेपी के कौशल कुमार विद्यार्थी पीछे चल रही हैं।

CM योगी को लिखा प्रेस स्वतंत्रता पर, महाराष्ट्र में अर्णब-ठाकरे मामले पर घालमेल कर रहा था एडिटर्स गिल्ड

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने सोमवार (नवंबर 9, 2020) को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़े अहम मुद्दों की ओर ध्यान देने का अनुरोध किया और साथ ही रेखांकित किया कि हाल में ऐसी कई घटनाएँ सामने आईं हैं जो राज्य में स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए माहौल को लेकर ‘गहरी चिंता’ पैदा करती हैं। 

योगी को लिखे पत्र में गिल्ड की ओर से बिना रिपब्लिक टीवी का नाम लिए कहा गया कि मुंबई में एक टीवी चैनल के संपादक को जब गिरफ्तार किया गया तो उन्होंने (आदित्यनाथ) प्रेस की स्वतंत्रता की बात उठाकर सही किया था लेकिन उत्तर प्रदेश में पत्रकारों को अधिकारियों द्वारा डराने-धमकाने और प्रताड़ित करने की और भी तकलीफदेह घटनाएँ हुई हैं और पत्रकारों को उनका काम करने से रोका गया है। 

गौरतलब है कि योगी ने रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी की निंदा की थी। पत्र पर एडिटर्स गिल्ड की अध्यक्ष सीमा मुस्तफा एवं अन्य पदाधिकारियों के हस्ताक्षर हैं। इसमें कुछ ऐसे मामलों की जानकारी भी दी गई है जिनमें पत्रकारों को कथित रूप से झूठे आरोपों में गिरफ्तार किया गया। इसमें मलयालम समाचार पोर्टल अजीमुखम के दिल्ली में कार्यरत पत्रकार सिद्दकी कप्पन और वामपंथी वेबसाइट स्क्रॉल की कार्यकारी संपादक सुप्रिया शर्मा आदि पत्रकारों के खिलाफ उत्तर प्रदेश में दर्ज मामलों का उल्लेख किया गया है।

सवाल यह है कि क्या एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने ऐसा ही पत्र महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार को लिखा है? जहाँ पर एक मीडिया चैनल और उनके पत्रकारों को बुरी तरह से परेशान किया जा रहा है। हाँ, एडिटर गिल्ड ने मामले पर अपना बयान जरूर जारी किया। बयान में गिल्ड ने रिपब्लिक के पत्रकारों के खिलाफ मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज किए गए केस को चिंताजनक तो बताया, लेकिन साथ ही चैनल द्वारा टीआरपी में हेरफेर के लिए जारी पुलिस जाँच को जारी रखने और किसी भी तरह से कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करने की भी बात कही। 

कहने को एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया का दायित्व है प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करना और लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को मजबूत बनाना। लेकिन इन दिनों इस संगठन का वैचारिक पक्षपात खुलकर सामने आ रहा है। महीनों तक रिपब्लिक टीवी के खिलाफ चल रहे दमन चक्र पर मौन व्रत धारण करने के बाद जब आखिरकार एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने अपना बयान जारी किया, तो वह मुंबई पुलिस की निंदा करता कम, और रिपब्लिक टीवी की निंदा करता ज्यादा दिखाई दे रहा था।

मुंबई पुलिस द्वारा रिपब्लिक टीवी के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई के परिप्रेक्ष्य में एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने हाल ही में एक बयान जारी किया। अपने बयान में एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने बताया, “एडिटर्स गिल्ड मुंबई पुलिस द्वारा रिपब्लिक टीवी के विरुद्ध जारी अनगिनत FIR की निंदा करती है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हालाँकि यह अर्थ नहीं है कि घृणा को भी बढ़ावा दिया जाए!”

एडिटर्स गिल्‍ड ने बयान में रिपब्लिक टीवी की कवरेज पर भी सवाल उठाए। फिर क्या था, एडिटर्स गिल्ड ने अपनी असलियत जगजाहिर की, और कुछ पंक्तियों में मुंबई पुलिस की निंदा के पश्चात रिपब्लिक टीवी की धज्जियाँ उड़ाते हुए बाकी का बयान समर्पित कर दिया, चाहे वह सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु की कवरेज हो, या फिर बॉलीवुड का ड्रग्स कनेक्शन।

गिल्‍ड ने मुंबई हाई कोर्ट की टिप्‍पणी का जिक्र करते हुए कहा कि चैनल की ‘खोजी पत्रकारिता’ को लेकर काफी आपत्तियाँ दर्ज की गई हैं। संस्‍था ने न्‍यूज ब्रॉडकास्‍टर्स एसोसिएशन (NBA) के चैनल की रिपोर्टिंग से इत्तेफाक न रखने का भी जिक्र किया है। गिल्‍ड ने कहा है कि वक्‍त आ गया है कि चैनल जिम्‍मेदारी से व्‍यवहार करे और अपने पत्रकारों की सुरक्षा के साथ-साथ मीडिया की साख से समझौता न करे। गिल्‍ड ने पुलिस से भी यह सुनिश्चित करने को कहा है कि उसकी जाँच चैनल के पत्रकारों को नुकसान न पहुँचाए और गिरफ्तारी न हो।

बयान के अनुसार, “TRP की धाँधली के आरोपों के अलावा, इस बात से बिलकुल नहीं इनकार किया जा सकता कि रिपब्लिक टीवी ने सुशांत सिंह राजपूत की असामयिक मृत्यु से संबंधित जो कवरेज की है, उससे रिपोर्टिंग के तौर तरीकों और मीडिया की क्रेडिबिलिटी पर भी गंभीर प्रश्न चिन्ह लगाते मुंबई हाईकोर्ट ने चैनल के वकील से अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती के विषय में सवाल पूछते हुए एक उचित प्रश्न पूछा, “क्या जो आप करते हो वो भी इंवेस्टिगेटिव जर्नलिज़्म का हिस्सा है? जनता से क्या यह जानना जरूरी है कि किसे गिरफ्तार किया जाना चाहिए?” ऐसी ही चिंताएँ न्यूज ब्रॉडकास्टर असोसिएशन ने भी व्यक्त की।

इस पत्र को पढ़ने के बाद आप भी इस बात को भूल जाएँगे कि यह पत्र असल में मुंबई पुलिस के FIR की निन्दा करने के लिए जारी किया था, क्योंकि एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने रिपब्लिक टीवी को ही अपनी हद में रहने का निर्देश दिया।

जिस प्रकार से एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने अपने बयान में मुंबई पुलिस को आड़े हाथों लेने के बजाए रिपब्लिक टीवी की निंदा करने के लिए अधिक जगह दिया, उससे स्पष्ट होता है कि वैचारिक रूप से एडिटर्स गिल्ड किसके साथ है। यदि कश्मीर टाइम्स के विषय पर इनके बयान पर ध्यान दिया जाए, तो आपको समझ में आ जाएगा कि एडिटर्स गिल्ड कितना पक्षपाती है।

आपातकाल के बाद से ये पहली बार है कि कोई सरकार प्रेस की आजादी का इस तरह मखौल उड़ा रही है। चाहे प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस कमिश्नर परम बीर सिंह द्वारा बोला जा रहा सफेद झूठ हो, या फिर रिपब्लिक से मुंबई पुलिस द्वारा माँगे जा रहे सारे वित्तीय रिकॉर्ड्स का ब्योरा हो, ये स्पष्ट है कि मुंबई पुलिस रिपब्लिक टीवी, विशेषकर अर्णब गोस्वामी के विरुद्ध हाथ धोकर पड़ी हुई है। 

ऐसे में एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया का महाराष्ट्र प्रशासन के अत्याचारों पर मौन रहना ये स्पष्ट जताता है कि वह किस प्रकार से अप्रत्यक्ष रूप से महाराष्ट्र प्रशासन के दमनकारी कार्यों का समर्थन कर रही है। अब इसके पीछे दो ही कारण हो सकते हैं – या तो एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया वामपंथी विचारधारा वाले लोगों से भरी हुई हैं, या फिर वे अर्णब के समर्थन में बयान देकर उद्धव ठाकरे का प्रकोप नहीं झेलना चाहते।

शिवसेना NOTA से भी पीछे: बिहार के वोटरों ने समझाया लोकतंत्र, 22 में से 21 उम्मीदवार धराशाई

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 की 243 सीटों पर मतगणना जारी है। अब तक सभी सीटों पर शुरुआती रुझान आ चुके हैं। इन रुझानों ने एग्जिट पोल द्वारा की गई भविष्यवाणी को धराशाही कर दिया है।

चुनाव आयोग के रुझान के अनुसार राज्य में एक बार फिर एनडीए गठबंधन की सरकार बनती हुई दिखाई दे रही है। हालाँकि महागठबंधन और एनडीए (भाजपा और जदयू) के बीच काँटे का मुकाबला दिख रहा है।

वहीं इस चुनाव में शिवसेना की स्थिति बद से बदतर नजर आ रही है। अब तक गिने गए मतों के अनुसार, शिवसेना का प्रदर्शन नोटा से भी खराब है।

नीचे उन निर्वाचन क्षेत्रों की सूची दी गई है, जिनमें शिवसेना चुनाव लड़ रही है और अब तक के वोट जो उन्हें मिल चुके हैं। दोपहर 12:40 बजे तक ECI की वेबसाइट के आँकड़ों द्वारा वोटों की तुलना की गई है।

ConstituencyCandidateVotes for Shiv SenaVotes for NOTA
PaliganjManish Kumar44284
Gaya CityButi Sinha49159
WazirganjMritunjay Kumar32160
ChiraiyaSanjay Kumar254202
ManerRavindra Kumar63217
PhulpareshSanjay Kumar774
RaghopurJayamala Devi44418
BenipurSanjit Kumar Jha5312808
MadhubaniShankar Mahaseth114354
TaraiyaRanjay Kumar Singh212279
ConstituencyCandidateVotes for Shiv SenaVotes for NOTA
AstvaVinita Kumar92298
AuriaPradeep Kumar Singh71279
KalyanpurShatrughan Paswan369865
BanmankhiSubhash Chandra Paswam61733
ThakurganjNaveen Kumar Malik303529
SamastipurNand Kumar9108
SaraiPushpankumari104601
MorwaRanjan Manish Kumar88361
KishanganjShivnath Mallik106156
BahadurganjChandan Kuu. Yadav547849
ConstituencyCandidateVotes for Shiv SenaVotes for NOTA
NarpatganjGunja Devi58103
ManihariNagendra Chandra Mandal2251076
22 सीटों के रुझान

ऊपर दिए गए आँकड़ों से यह स्पष्ट है कि वर्तमान में 22 सीटों में से, 21 सीटों पर शिवसेना बिहार चुनाव में NOTA से पीछे है।

समय-समय पर हम इसे अपडेट करते रहेंगे।

मणिपुर में 2 सीटों पर BJP की जीत: गुजरात, UP से लेकर मध्य प्रदेश तक में भाजपा लहर

मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश समेत 11 राज्यों की 58 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के लिए मतगणना जारी है। पहले पोस्टल बैलेट की गिनती हो रही है। कुछ ही देर में रुझान आने शुरू हो जाएँगे। मध्य प्रदेश की 28, गुजरात की आठ, उत्तर प्रदेश की सात, मणिपुर की चार, कर्नाटक, ओडिशा, झारखंड और नागालैंड की दो-दो सीटें तथा छत्तीसगढ़, तेलंगाना और हरियाणा की एक-एक सीट पर भी उपचुनाव हुए। 

मध्य प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव का परिणाम राज्य की शिवराज सिंह चौहान सरकार का भविष्य तय करेंगे। इसके अलावा यूपी की सात विधानसभा सीटों पर भी उपचुनाव हुए। मतगणना सुबह 8 बजे से शुरू हो चुकी है।

गुजरात की 8 सीटों में से 7 पर बीजेपी आगे, 1 पर कॉन्ग्रेस

गुजरात की 8 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए मतगणना जारी है। 7 पर बीजेपी और 1 पर कॉन्ग्रेस आगे चल रही है।

सिंधिया के लिए पहला टेस्ट

मध्य प्रदेश की बात करें तो यहाँ शिवराज सिंह को अपनी सरकार बनाए रखने के लिए कम से कम 8 सीटें जीतना जरूरी है। इन उपचुनावों का सबसे बड़ा कारण रहा ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कॉन्ग्रेस के 22 विधायकों की पार्टी से बगावत। लिहाजा, यह उपचुनाव सिंधिया की लोकप्रियता का पहला टेस्ट है।

आज आने वाले नतीजे उनके लिए भी काफी अहम होंगे। इसी तरह, महज 15 महीने सरकार चलाने के बाद मुख्यमंत्री पद छोड़ने को मजबूर हुए कमलनाथ के लिए भी यह उपचुनाव बेहद महत्वपूर्ण है। उन्हें यह साबित करना है कि मध्य प्रदेश की जनता के बीच उनकी पहचान अभी बाकी है।

मध्य प्रदेश की 28 सीटों पर हुए उपचुनाव के शुरुआती रुझान

  1. जौरा सीट पर बीजेपी के सूबेदार सिंह आगे
  2. आगर सीट पर कॉन्ग्रेस के विपिन वानखेड़े आगे
  3. मुंगावली सीट पर बीजेपी के ब्रजेन्द्र सिंह आगे  
  4. दिमनी सीट पर कॉन्ग्रेस के रवीन्द्र तोमर आगे  
  5. सुरखी सीट पर बीजेपी के गोविंद सिंह आगे
  6. सांची सीट पर बीजेपी के प्रभुराम चौधरी आगे
  7. मलहरा सीट पर बीजेपी के प्रद्यम्न सिंह लोधी आगे
  8. डाबरा सीट पर बीजेपी की इमरती देवी आगे  
  9. अम्बाह सीट पर कॉन्ग्रेस के सत्यप्रकाश सरखरवार आगे
  10. अशोकनगर सीट से जजपाल सिंह जज्जी आगे 
  11. अनूपपुर सीट पर बीजेपी के बिसाहूलाल आगे

शुरुआती रुझानों में मध्य प्रदेश में भाजपा 17 सीटों पर आगे

मध्य प्रदेश में 28 विधानसभा उपचुनावों में मतगणना के दौरान शुरुआती रुझानों में सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 17 और मुख्य विपक्षी दल कॉन्ग्रेस 7 सीटों पर आगे है। शुरुआती लगभग एक घंटे की मतगणना के बाद 24 सीटों के रुझान मिले हैं। चार और सीटों के रुझान भी आने वाले हैं। 

बीजेपी की सरकार को अपने दम पर पूर्ण बहुमत का आँकड़ा पाने के लिए 28 में से बहुत ज्यादा नहीं सिर्फ आठ विधायक ही चाहिए। कॉन्ग्रेस के एक और विधायक के पाला बदलने से मध्य प्रदेश विधानसभा में विधायकों का सदन अब 229 का हो गया है और बहुमत का आँकड़ा जो 230 सदस्यों में 116 था, वो घटकर 115 हो गया है। मध्य प्रदेश के इतिहास में इतनी ज्यादा सीटों पर पहली बार उपचुनाव हुए हैं।

उपचुनाव से जहाँ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कुर्सी का भविष्य तय होगा, तो वहीं राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया का सियासी कद भी आज आने वाले नतीजों से तय हो जाएगा। भाजपा और कॉन्ग्रेस दोनों के लिए ये उपचुनाव आसान नहीं है। 

88 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला

उत्तर प्रदेश पर नजर डालें तो यहाँ सात विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के लिए मतगणना होगी। जिन सीटों पर उपचुनाव हुआ था उनमें नौगांव सादात, टुंडला, बांगरमउ, बुलंदशहर, देवरिया, घाटमपुर और मल्हनी विधानसभा सीटें शामिल हैं। उपचुनाव में औसतन 53 प्रतिशत मतदाताओं ने 88 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला ईवीएम में कैद किया था। आज यह साफ हो जाएगा कि उनमें से किसे जीत नसीब होती है।

उत्तर प्रदेश की 7 सीटों पर उपचुनाव – बीजेपी 4 और सपा 1 सीट पर आगे

चुनाव आयोग के शुरुआती रुझानों के मुताबिक बीजेपी 4, समाजवादी पार्टी 1 और बहुजन समाज पार्टी 1 सीट पर आगे चल रहे हैं।

पाँच सीटों में से एक पर बीजेपी जीती

मणिपुर उपचुनाव : पाँच सीटों में से 2 पर बीजेपी जीती और एक अन्य सीट पर आगे चल रही। 

रवीश कुमार के भाई ब्रजेश पांडेय दूसरे स्थान पर: कॉन्ग्रेस ने दिया था टिकट, दलित नाबालिग से यौन शोषण का है आरोप

बिहार के पूर्वी चम्पारण जिले की एक विधानसभा सीट है गोविंदगंज, जहाँ से रवीश कुमार के भाई ब्रजेश पांडेय कॉन्ग्रेस पार्टी के टिकट पर मैदान में हैं। 2015 में ये सीट हारने के बाद वो एक बार फिर से चुनावी मैदान में कूदे। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर आए अब तक के आँकड़ों के अनुसार, गोविंदगंज में रवीश कुमार के भाई ब्रजेश पांडेय दूसरे स्थान पर चल रहे हैं और भाजपा के सुनील मणि तिवारी पहले स्थान पर हैं।

अब तक के आँकड़ों के अनुसार, सुनील मणि तिवारी को 14190 वोट मिले हैं, वहीं दूसरे स्थान पर ब्रजेश पांडेय को अब तक मात्र 8311 वोट ही मिल सके हैं। वहीं, यहाँ से विधायक रहे राजू तिवारी 6315 मतों के साथ तीसरे स्थान पर चल रहे हैं। इस हिसाब से ब्रजेश पांडेय और राजू तिवारी के बीच मतों का फासला ज्यादा नहीं है, लेकिन सुनील मणि तिवारी इन दोनों से ही आगे चल रहे हैं। पिछली बार भी ब्रजेश दूसरे स्थान पर रहे थे।

2015 के चुनाव में 46765 (34.15%) मत पाने वाले ब्रजेश पांडेय को लोजपा के राजू तिवारी ने 74685 (54.54%) मत पाकर उन्हें 27920 (20.39%) मतों से हरा दिया था। पिछले चुनाव में जदयू, राजद और कॉन्ग्रेस एक साथ गठबंधन बना कर उतरी थी, जबकि इस बार जदयू और भाजपा साथ हैं। ब्रजेश पांडेय बिहार में कॉन्ग्रेस उपाध्यक्ष भी रहे हैं और पार्टी के विवादित चेहरों में से एक हैं, ऐसे में उन्हें टिकट दिए जाने पर भी सवाल खड़े हुए थे।

साल 2017 में जिस दौरान उन पर यौन शोषण का आरोप लगा उस वक्त वह कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर थे। इस मामले के सामने आने के बाद उन्हें पार्टी के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा भी देना पड़ा था। ब्रजेश पांडेय पर कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता की नाबालिग दलित बेटी के साथ यौन शोषण और बलात्कार का मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा उन पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण करने सम्बंधी अधिनियम और अनुसूचित – अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत पटना में मुकदमा दर्ज किया गया था।

पीड़िता ने मीडिया के सामने आकर धमकी दी थी कि अगर उसे न्याय नहीं मिला तो वह आत्मदाह करके अपनी जान दे देगी। घटनाक्रम पर विवाद बढ़ने के कई दिनों बाद जाँच करने वाले विशेष दल ने ब्रजेश पांडेय का शामिल किया था। ब्रजेश पांडेय के अलावा पूर्व आईएएस के बेटे निखिल प्रियदर्शी और संजीत कुमार शर्मा भी इस मामले में आरोपित थे। अब वो फिर से गोविंदगंज से हारते हुए दिख रहे हैं।

नीतीश-मोदी को लोगों ने रिजेक्ट कर दिया… से …हर चुनाव भाजपा ही जीतती है – रबिश की गिरगिट पत्रकारिता

बिहार विधानसभा चुनाव के शुरुआती रुझान सामने आ चुके हैं। लेकिन फ़िलहाल कुछ भी कहना सही नहीं होगा। समाचार चैनलों पर बहस जारी है कि कौन जीत रहा है या कौन जीत सकता है। इसी दौड़ में एक और चैनल पूरी ऊर्जा के साथ हाँफ रहा है।

चैनल का नाम है एनडीटीवी और उसकी अगुवाई कर रहे हैं देश के तथाकथित पत्रकार रबिश कुमार (कुछ लोग उन्हें भूलवश रवीश भी कहते पाए जाते हैं)। शुरुआती रुझानों में एनडीए की सीटें कम थीं तो रबिश कुमार खिलखिला रहे थे, महागठबंधन को मिली बढ़त से रबिश कुमार पूरी तरह चार्ज थे। 

माहौल बदला, नतीजों में भी परिवर्तन नज़र आया तो रबिश कुमार के चेहरे की रंगत भी बदली। पहली निगाह में कोई भी दर्शक महसूस कर लेता कि पत्रकार महोदय के मुखमंडल पर उत्साह में कितनी कमी आई है।

शुरुआत में एक पड़ाव ऐसा आया, जब रुझानों में एनडीए को 73 सीटें मिली थीं और महागठबंधन को 89… ऐसे में रबिश कुमार ने इतना क्यूट डायलॉग बोला कि उनके चाहने वालों की बाँछें खिल गईं। उन्होंने कहा, “शुरुआती रुझान जो शहरों से आ रहे हैं, उनकी मानें तो नीतीश-मोदी की जोड़ी को शहर के लोगों ने रिजेक्ट कर दिया है। इससे दिखता है कि लोगों में कितना ग़ुस्सा है।”  

फिर आया रुझानों का दूसरा पड़ाव… जिसके बाद ऐसा लग रहा था जैसे रबिश कुमार बिना कुछ खाए ख़बर पढ़ रहे थे। इस समय तक रुझानों में एनडीए को 112 सीटों पर बढ़त मिली थी और महागठबंधन को 113 सीटों पर। इस पर रबिश कुमार अपने मूल स्वभाव के विपरीत निष्पक्ष होकर बात करने लगे।

रबिश की खिलखिलाहट रुझानों के गड्ढे में चली गई। उन्होंने कहा, “देखिए, बिहार चुनाव में गाँवों की बहुत बड़ी भूमिका होती है, अभी वहाँ के EVM नहीं खुले हैं, जब वो खुलेंगे तो मामला साफ़ होगा।” वाकई पत्रकारिता के सारे सिद्धांतों ने ठीक यहीं पर तथाकथित निष्पक्ष पत्रकार के समक्ष दंडवत प्रणाम किया होगा!

यह तो सिर्फ एक छोटा सा उदाहरण था। इसके अलावा बिहार विधानसभा चुनावों की पूरी परिचर्चा के दौरान रबिश कुमार की गिरगिटनुमा पत्रकारिता ने कई बार रंग बदला।

चर्चा के दौरान रबिश कुमार ने बेहद व्यंग्यात्मक शैली में (जो कि उनसे होता नहीं) हें हें हें… करते हुए कहा था, “हर चुनाव भाजपा ही जीतती है।” बताइए रबिश कुमार कितने लकी हैं भारतीय जनता पार्टी के लिए!

शुरुआत में रबिश कुमार तमाम कारण गिनते नज़र आ रहे थे कि एनडीए क्यों चुनाव हार सकता है? नीतीश कुमार को जनता ने क्यों नकारा? लेकिन रुझान के बाद यही रबिश कुमार दबे मन से उन कारणों को खोजने लगे जिनके ज़रिए एनडीए और विशेष रूप से भाजपा को फायदा हुआ। 

रुझान अभी तक सामने आ रहे हैं, इसलिए कयास अपनी जगह और परिणाम अपनी जगह। लेकिन इस तरह की तमाम लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के बीच तथाकथित पत्रकार रबिश कुमार जैसे अति योग्य लोगों के विलाप की करतल ध्वनि का आनंद कुछ और ही है।

इनके लिए विरोध धर्म, यथार्थ से कहीं ऊपर है लेकिन कुतर्क, निजी कुंठा और निरर्थक आधारों पर किए गए विरोध की उम्र कितनी ही होगी! तथाकथित पत्रकार के चेहरे की कल्पना करके तब देखिए, जब नतीजे उनकी गिरगिटनुमा समझ के दायरे से बाहर होते हैं… हें हें हें       

30-40 घंटों की पूछताछ के बाद अब रिपब्लिक के AVP घनश्याम सिंह को मुंबई पुलिस ने किया गिरफ्तार

अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी के बाद अब मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के असिसटेंट वाइस प्रेसिडेंट घनश्याम सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। उनकी गिरफ्तारी मंगलवार (नवंबर 10, 2020) सुबह 7:40 बजे हुई। उन्हें फेक टीआरपी के मामले में गिरफ्तार किया गया है। रिपब्लिक मीडिया का कहना है कि ये गिरफ्तारी आधारहीन है। मुंबई पुलिस उन्हें टारगेट कर रही है।

रिपब्लिक मीडिया के डिस्ट्रीब्यूशन हेड घनश्याम सिंह पूछताछ में लगातार मुंबई पुलिस का सहयोग कर रहे थे। पिछले कुछ हफ्तों में कथित टीआरपी मामले में क्राइम ब्रांच यूनिट द्वारा उनसे 30-40 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई और वह जाँच में पूरा सहयोग दे रहे थे। सहयोग की भावना में वह एक नकली और खोखले मामले में भी लगातार कई मौकों पर मुंबई पुलिस के सामने पेश हुए। उन्होंने अपने ज्ञान और क्षमता के अनुसार पुलिस के सभी सवालों के पूरे जवाब दिए हैं।

घनश्याम को एक फर्जी टीआरपी हेरफेर मामले में भ्रामक धाराओं के तहत बुक किया गया है। यहाँ बता दें कि फेक टीआरपी के मामले में मुंबई पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह के 8 अक्टूबर के प्रेस कॉन्फ्रेंस के बावजूद, न तो वह और न ही मुंबई पुलिस रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क को टीआरपी घोटाले से जोड़ने के लिए एक भी सबूत पेश कर पाई है। इसलिए, घनश्याम की गिरफ्तारी भी अर्णब की अवैध गिरफ्तारी की तरह ही सबूतों और तथ्यों के बजाय निर्धारित प्रतिशोध की देन है।

गौरतलब है कि टीआरपी हेरफेर मामले में हंसा रिसर्च ग्रुप ने मुंबई पुलिस पर बेहद संगीन आरोप लगाए थे। ग्रुप ने कहा था कि मुंबई पुलिस द्वारा उन्हें रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के खिलाफ गलत बयान देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। बार और बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, BARC के बार-ओ-मीटर (ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल) का संचालन करने वाली कंपनी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख करते हुए इस मामले की जाँच मुंबई पुलिस के बजाय केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की माँग की।

बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर याचिका में हंसा रिसर्च ने आरोप लगाया कि पुलिस उनके कर्मचारियों को फर्जी बयान जारी करने के लिए दबाव बनाने की रणनीति अपना रही है। साथ ही रिपब्लिक टीवी द्वारा जारी एक डॉक्यूमेंट को फर्जी करार देने के लिए कह रही है।

वहीं वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल के बेटे अखिल सिब्बल ने बॉलीवुड के एक प्रख्यात प्रोडक्शन हाउस का पक्ष रखते हुए स्वीकार किया था कि रिपब्लिक टीवी की दर्शक दीर्घा (audience base) और टीआरपी काफी ज़्यादा है। अखिल सिब्बल ने स्वीकार किया कि दो समाचार चैनल ‘रिपब्लिक टीवी’ और ‘टाइम्स नाउ’ अंग्रेज़ी समाचार समूहों की 70 फ़ीसदी व्यूअरशिप का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह दावा ऐसे समय में किया गया जब अखिल सिब्बल के पिता की पार्टी से बनी महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार ने रिपब्लिक टीवी पर टीआरपी से छेड़छाड़ और ज़्यादा व्यूअरशिप दिखाने के लिए गलत आँकड़े साझा करने का आरोप लगाया है। 

मध्य प्रदेश उपचुनाव Results 2020: 17 सीटें BJP के पक्ष में, शुरुआती रुझान में कॉन्ग्रेस पीछे

मध्य प्रदेश में हुए 28 विधानसभा सीटों के लिए हुए उपचुनाव की मतगणना शुरू हो गई है। मतों की गिनती करने का काम 19 मुख्यालयों पर जारी है। शुरुआती रुझानों में भाजपा को बढ़त मिलते हुए नजर आ रहा है। इन 28 सीटों के नतीजे से यह स्पष्ट हो जाएगा कि मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की सरकार बरकरार रहेगी या नहीं।

गौरतलब है कि मार्च महीने में ज्योतिरादित्य सिंधिया 22 विधायकों के साथ कॉन्ग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे, उसके बाद तीन और विधायकों ने भाजपा का दामन थाम लिया था। 

वहीं तीन विधायकों के निधन से तीन सीटें खाली हुई थीं। आज की मतगणना भाजपा सरकार बचाने के लिहाज से ही अहम नहीं है, बल्कि इससे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया का राजनीतिक भविष्य भी तय होगा।

डबरा से इमरती देवी आगे

डबरा विधानसभा सीट से भाजपा आगे चल रही है। यहाँ से भाजपा प्रत्याशी इमरती देवी 500 वोटों से आगे चल रही हैं। 

ब्यावरा से भाजपा आगे

मध्य प्रदेश की ब्यावरा सीट से भाजपा आगे चल रही है। यहाँ से नारायण सिंह पवार एक हजार वोटों से आगे चल रहे हैं। 

पहले रुझान में भाजपा को बढ़त

मध्य प्रदेश उपुचनाव मतगणना के लिए सामने आए पहले रुझान में सुवासरा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा आगे चल रही है। इसके अलावा भाजपा की सुमित्रा कास्डेकर नेपानगर से आगे चल रही हैं। 

सुरखी विधानसभा सीट से भाजपा आगे

सुरखी विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी गोविंद सिंह राजपूत 3000 वोट से आगे चल रहे हैं। 

भाजपा को 17 सीटों पर बढ़त

शुरुआती रुझानों में भाजपा 17 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं, कॉन्ग्रेस 7 सीट पर आगे चल रही है। 

बिसाहू लाल सिंह आगे

मध्य प्रदेश के अनूपपुर से पहले राउंड की मतगणना में भाजपा प्रत्याशी बिसाहू लाल सिंह अपने निकटतम प्रतिद्वंदी विश्वनाथ सिंह से आगे चल रहे हैं।

हरदीप सिंह डंग पहले राउंड में 1318 वोटों से आगे

मंदसौर भाजपा प्रत्याशी हरदीप सिंह डंग पहले राउंड में 1318 वोटों से आगे हैं, वहीं देवास से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी राजवीर सिंह बघेल 1171 मतों से आगे चल रहे हैं।

मध्य प्रदेश में इससे पहले इतनी सीटों पर उपचुनाव नहीं हुए हैं। उपचुनाव के परिणाम जितने भाजपा के लिए महत्वपूर्ण हैं, उतने ही कॉन्ग्रेस के लिए भी। इनके परिणामों पर कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ और दिग्विजय सिंह का भविष्य निर्भर करेगा। पार्टी को सत्ता में वापस लाने में ये जोड़ी सफल रही तो दोनों नेताओं का कद राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ेगा और हार मिली तो दोनों के सियासी सफर पर ब्रेक भी लग सकता है। ऐसा होने पर प्रदेश में कॉन्ग्रेस की नई पीढ़ी को आगे आने का मौका मिलेगा।

अर्णब से हर दिन 3 घंटे पूछताछ, कोर्ट ने दिया आदेश: जेल में 10 पुलिस वालों ने एक साथ की पूछताछ

मुंबई के अलीबाग चीफ मजिस्ट्रेट ने अर्णब गोस्वामी समेत 3 लोगों से न्यायिक हिरासत में पूछताछ करने के लिए पुलिस को अनुमति दे दी है। अर्णब को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद पुलिस ने यह माँग 6 नवंबर को की थी। इसी माँग पर सुनवाई करते हुए सीजेएम ने कहा कि वह अर्णब से तलोजा जेल में हर दिन तीन घंटे पूछताछ कर सकते हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, रायगढ़ पुलिस की 10 सदस्यों की स्कवॉड ने सोमवार को गोस्वामी और तलोजा जेल में बंद अन्य दो आरोपितों से पूछताछ की। इसकी जानकारी जाँच अधिकारी एवं रायगढ़ क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर जमील शेख ने दी। उन्होंने बताया कि तीन टीमों ने अर्णब गोस्वामी, फिरोज शेख और नीतिश शारदा से पूछताछ की।

इंस्पेक्टर जमील ने कहा, “आरोपित अर्णब गोस्वामी से तलोजा जेल में पूछताछ करना बहुत टाइम कंज्यूमिंग है। अलीबाग से तलोजा जेल पहुँचने में करीब 2 घंटे लगते हैं और उसके बाद सीजेएम के आदेशानुसार हम पर 3 घंटे की बंदिश भी है। पुलिस हिरासत पूछताछ करने के लिए ज्यादा सही होती।”

बता दें कि इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के संस्थापक और प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि इस मामले में ऐसा दावा नहीं पेश किया गया, जिससे पीठ को असाधारण जुरिडिक्शन देना पड़े।

हालाँकि, बॉम्बे हाईकोर्ट ने ये भी कहा था कि नियमित जमानत के अन्य विकल्प अभी भी हैं और उसके लिए प्रयास किया जा सकता है। इसके लिए अर्णब गोस्वामी को सेशन कोर्ट जाना पड़ेगा

गौरतलब है कि रायगढ़ पुलिस ने रविवार को रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी को न्यायिक रिमांड जारी रखने के लिए तलोजा जेल शिफ्ट कर दिया गया था।

अर्णब की शिफ्टिंग का कारण देते हुए पुलिस ने दावा किया कि अर्णब गोस्वामी अलीबाग के क्वारंटाइन सेंटर के अंदर मोबाइल फोन इस्तेमाल कर रहे थे। नियमों के अनुसार, वह अनुमति के बिना न्यायिक हिरासत में रहते हुए मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं कर सकते है।