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अन्वय नाइक आत्महत्या मामले की आगे की जाँच अवैध नहीं, पीड़ितों के अधिकार भी महत्वपूर्ण: बॉम्बे हाईकोर्ट

रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी को अंतरिम जमानत देने से इनकार करने के आदेश में, बॉम्बे हाई कोर्ट ने माना कि रायगढ़ पुलिस द्वारा अन्वय नाइक आत्महत्या मामले में शुरू की गई आगे की जाँच को ‘अवैध और मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना’ नहीं कहा जा सकता है।

जस्टिस एसएस शिंदे और एमएस कार्णिक की खंडपीठ ने गोस्वामी के वकीलों- वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे और अबद पोंडा द्वारा उठाए गए तर्कों को खारिज कर दिया कि उनके खिलाफ पुलिस की कार्रवाई अवैध थी क्योंकि 2019 के मामले में मजिस्ट्रेट द्वारा क्लोजर स्वीकार किए जाने के बाद उन्होंने जाँच रद्द कर दी थी, तो ऐसे में वे मुकदमा नहीं कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के उदाहरणों का उल्लेख करते हुए, डिवीजन बेंच ने कहा कि ‘कानून में आगे की जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य नहीं है’। बेंच ने आगे कहा कि चार्जशीट दाखिल करने के बाद भी आगे की जाँच करना पुलिस का एक वैधानिक अधिकार है।

इस आदेश ने वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई द्वारा ‘A summary’, ‘B summary’ और ‘C summary’ रिपोर्ट के बीच के अंतर के बारे में प्रस्तुतियाँ और राज्य सरकार की शक्ति के बारे में और जाँच को निर्देशित करने के लिए काफी निर्भरता देखी गई।

बता दें कि मामले की जाँच कर रही रायगढ़ पुलिस ने अप्रैल 2019 में मजिस्ट्रेट के सामने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में ‘case summary’ दायर किया था। क्लोजर रिपोर्ट में जोर देकर कहा गया था, “तीनों अभियुक्तों को विभिन्न क्षेत्रों, स्थानों और तीनों के बीच कोई संबंध नहीं होने के कारण जाँच में प्रमाणित किया गया है। अब तक की जाँच में इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि सुसाइड नोट में नामजद तीन आरोपितों की ओर से की गई कार्रवाई, व्यक्तिगत रूप से या एक साथ मिलकर, मृतक के जीवन को असहनीय बना दिया या उसके पास आत्महत्या करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। इसलिए, इस मामले में साक्ष्य के अभाव में, ‘अंतिम समरी’ को स्वीकार किया जाना चाहिए।” 

गौरतलब है कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के संस्थापक और प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में ऐसा दावा नहीं पेश किया गया, जिससे पीठ को असाधारण जुरिडिक्शन देना पड़े। हालाँकि, बॉम्बे हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि नियमित जमानत के अन्य विकल्प अभी भी है और उसके लिए प्रयास किया जा सकता है। इसके लिए अर्णब गोस्वामी को सेशन कोर्ट जाना पड़ेगा

जमानत नहीं मिलने के बाद अर्णब आज न्यायिक हिरातस में 6ठी रात गुजारेंगे। रिपब्लिक ने इस पर बयान जारी करते हुए कहा कि वह हर कानूनी उपाय को अपनाएँगे और जनमत की अदालतों में अपनी निर्विवाद लड़ाई जारी रखेंगे। भारत के नागरिक को न्यायिक हिरासत में रात बिताने के लिए, कानून और व्यवस्था की मशीनरी द्वारा हमला किया जाना और बुनियादी कानूनी पहुँच से अवरुद्ध होना इस महान लोकतंत्र की आँखों के सामने एक चौंकाने वाली सच्चाई है, और अन्याय है, जिसे इतिहास माफ नहीं करेगी। अर्णब गोस्वामी पर हमला, मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ है और महाराष्ट्र राज्य में स्वतंत्र प्रेस की निर्मम हत्या नहीं होगी। दुनिया भर में भारत और भारत के लोग इसे नहीं होने देंगे।

महाराष्ट्र सरकार ने लगाया था ‘झूठा आरोप’: कपिल सिब्बल के बेटे ने कोर्ट में स्वीकारा- ‘रिपब्लिक TV की TRP सबसे अधिक’

वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल के बेटे अखिल सिब्बल ने बॉलीवुड के एक प्रख्यात प्रोडक्शन हाउस का पक्ष रखते हुए स्वीकार किया कि रिपब्लिक टीवी की दर्शक दीर्घा (audience base) और टीआरपी काफी ज़्यादा है। अखिल सिब्बल ने स्वीकार किया कि दो समाचार चैनल ‘रिपब्लिक टीवी’ और ‘टाइम्स नाउ’ अंग्रेज़ी समाचार समूहों की 70 फ़ीसदी व्यूअरशिप का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह दावा ऐसे समय में किया गया है जब अखिल सिब्बल के पिता की पार्टी से बनी महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार ने रिपब्लिक टीवी पर टीआरपी से छेड़छाड़ और ज़्यादा व्यूअरशिप दिखाने के लिए गलत आँकड़े साझा करने का आरोप लगाया है। 

दिल्ली उच्च न्यायालय में बॉलीवुड के एक प्रख्यात प्रोडक्शन हाउस द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई हो रही थी, जिसमें उन्होंने रिपब्लिक टीवी और टाइम्स नाउ पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया था। इस मामले पर एक न्यायाधीश की पीठ सुनवाई कर रही है। अखिल सिब्बल ने अपनी दलील पेश करते हुए कहा कि समाचार चैनलों को खुद से संयमित रहना सीखना होगा और बॉलीवुड पर किसी भी तरह की आपत्तिजनक टिप्पणी करने से बचना होगा।   

रिपब्लिक टीवी और टाइम्स नाउ पर मामला 

बॉलीवुड की तमाम मशहूर संस्थाओं और प्रोडक्शन हाउसेस ने अक्टूबर के दौरान दिल्ली उच्च न्यायालय में रिपब्लिक टीवी, अर्णब गोस्वामी, प्रदीप भंडारी, टाइम्स नाउ, नविका कुमार और राहुल शिवशंकर पर मामला दर्ज कराया था। मामले में ऐसा कहा गया था कि चैनलों और साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बॉलीवुड और इसके सदस्यों के खिलाफ गैर-जिम्मेदार और अपमानजनक टिप्पणी करने या प्रकाशित करने से बचना चाहिए।  

याचिका के अनुसार ऐसा भी कहा गया था कि इन लोगों (समाचार चैनल) ने बॉलीवुड के लिए ‘गंदगी, कचरा, मैला’ (“dirt”, “filth”, “scum”) जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। याचिका के अनुसार, बॉलीवुड के लिए इस प्रकार की टिप्पणी भी की गई थी- “अरब का हर इत्र बॉलीवुड के पेट में मौजूद गंदगी, कूड़े, कचरे और बदबू को हटा नहीं सकता है।” 

फेक टीआरपी स्कैम 

शुरूआती एफ़आईआर इंडिया टुडे के मुद्दे पर की गई थी न कि अर्णब गोस्वामी के मुद्दे पर। अभी तक अर्णब गोस्वामी और उनके समाचार चैनल को फेक टीआरपी स्कैम वाले मुद्दे पर मुंबई पुलिस निशाना बना रही है। मुंबई पुलिस के मुखिया परमबीर सिंह ने टीआरपी घोटाला मामले में रिपब्लिक टीवी पर गंभीर आरोप लगाए थे और दावा किया था कि यह चैनल नियमों की अनदेखी करते हुए टीआरपी मीटर से छेड़छाड़ करके ज़्यादा व्यूअरशिप दिखा रहा है। इसके बाद हंसा रिसर्च ने इस बात का खुलासा किया था कि उसके कर्मचारियों को रिपब्लिक टीवी के विरुद्ध झूठे बयान नहीं देने पर प्रताड़ित किया जा रहा है। 

शिकायतकर्ताओं ने अपने बयान में यह आरोप भी लगाया था कि उन्हें अपने घरों में इंडिया टुडे चैनल देखने के लिए रुपए दिए जा रहे थे। मुंबई पुलिस ने इन सारी बातों को अनदेखा करते हुए रिपब्लिक टीवी पर हमला जारी रखा और इंडिया टुडे को नज़रअंदाज़ किया जिसके चलते मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र सरकार को काफी अपमान भी झेलना पड़ा था। इस संबंध में बार और बेंच की रिपोर्ट में भी एक हैरान करने वाला खुलासा किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक़ जो कंपनी BARC के Bar-O-Meter देखती है उसने बॉम्बे उच्च न्यायालय में कहा था कि यह मामला मुंबई पुलिस से सीबीआई को स्थानांतरित कर देना चाहिए।   

‘TMC के गुंडों ने की एक और भाजपा कार्यकर्ता की हत्या’, लोगों ने पूछा- 2021 तक और कितनी मौतें होंगी?

पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले का सिलसिला आज भी जारी है। ताजा मामला बंगाल के दुर्गापुर विधानसभा क्षेत्र का है। यहाँ एक बार फिर एक भाजपा कार्यकर्ता की निर्मम हत्या को अंजाम दिया गया है। मृतक का नाम स्वरूप शॉ है। स्वरूप पुरुलिया निवासी थे और क्षेत्र में भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में काम करते थे।

भाजपा बंगाल के ट्विटर हैंडल से स्वरूप शॉ की हत्या के लिए टीएमसी के गुंडो पर आरोप मढ़ा गया है। ट्वीट में लिखा गया, “इस बार उन्होंने दुर्गापुर पूर्व के एक भाजपा कार्यकर्ता स्वरूप शॉ का अपहरण करके उसकी हत्या की। माँ-माटी-मानुष सरकार के नाम पर एक और राजनैतिक हत्या! बंगाल अब समय आ गया है इस जंगलराज को खत्म करने का। इस हत्यारी सरकार को उखाड़ फेंकने का।”

स्वरूप की हत्या के बाद से लोगों में एक भय पैदा हो गया है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स यह देखकर अपनी चिंता व्यक्त कर रहे हैं कि टीएमसी के गुंडों ने आज स्वरूप शॉ की हत्या कर दी। अभी तो 2021 के चुनाव आना बाकी है, पता नहीं यह लोग और कितने कार्यकर्ताओं की हत्या करेंगे

पश्चिम बंगाल में भाजपा नेता अरविंद मेनन लिखते हैं, “ममता के इशारों पर एक और भाजपा कार्यकर्ता को निशाना बनाया गया है, दुर्गापुर पूर्व विधानसभा के रहने वाले श्री स्वरूप शॉ को घर से अगवा कर निर्मम रूप से उनकी हत्या कर दी गई। बंगाल में टीएमसी के राजनीतिक आतंकवाद का अंत अब निश्चित है।”

उल्लेखनीय है स्वरूप शॉ की हत्या के बाद से भाजपा कार्यकर्ता लगातार वहाँ प्रदर्शन कर रहे हैं। भारी तादाद में लोग अस्पताल के बाहर भी इकट्ठा हुए हैं, वहाँ भी स्वरूप के लिए इंसाफ माँगा जा रहा है।

याद दिला दें कि इससे पहले भाजपा कार्यकर्ता बिजॉय सिल का शव नदिया जिले में एक पेड़ से लटका मिला था। भाजपा ने आरोप लगाया था कि गायेशपुर का निवासी बिजॉय सिल उनका कार्यकर्ता था और तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों ने उसकी जान ले ली।

ऐसे ही पिछले महीने उत्तर 24 परगना जिले में अज्ञात बदमाशों ने टीटागढ़ पुलिस स्टेशन के सामने भाजपा मनीष शुक्ला की गोली मार कर हत्या की थी। मनीष पर हमला उस समय हुआ था जब वह पार्टी कार्यालय के पास बैठे थे। उसी दौरान कुछ हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग की और जब तक उन्हें अस्पताल पहुँचाया गया, उनकी मृत्यु हो गई।

पटाखों पर रोक लेकिन कुर्बानी से ‘प्यार’ और क्रिसमस पर सब OK… नफरत सिर्फ हिंदुओं के त्योहारों से क्यों?

90 के दशक में बच्चों की दिवाली धूम-धड़ाके वाली ही होती थी। आज भी आपको वो दिन याद आते होंगे जब मम्मी-पापा घर की सफाई और पूजा के सामान की चिंता में घुले जाते थे। लेकिन आपको दिन रात बस दिवाली में अपने पटाखों की चिंता रहती थी। शाम को बाजार जाना और आलू बम, चरखी, फूलझड़ी, अनार, लड़ी बम, रॉकेट जैसे जाने कितने पटाखे खरीद लाते।

दिवाली की रात का इंतजार कौन करे। बच्चों की दिवाली तो दो-तीन दिन पहले से ही शुरू हो जाती। वो बम को टूटे-फूटे टीन के डब्बों के नीचे रखकर जलाना। बम फूटने पर उस डब्बे को हवा में उड़ते देखना। हाथ में रखकर अनार जलाना और दोस्तों के सामने हेकड़ी झाड़ना। 100 बमों की लड़ी को मटके में रखकर जलाना और फिर उसकी आवाज का पूरे मुहल्ले तक में गूँजना। रॉकेट जलाना, जो पड़ोसी के घर में घुस जाया करती थी।

याद ही होगा न ये सब आप लोगों को? इन पंक्तियों को पढ़कर आपके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान भी आ गई होगी। क्योंकि कमोबेश 90 के दशक के हर बच्चे का यही बचपन रहा होगा। सबने ऐसे ही दिवाली मनाई होगी। थोड़ी कम या थोड़ी ज्यादा।

अब दिल्ली में दिवाली से ठीक पहले दिल्ली सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। दिल्ली में पटाखों को 9 नवंबर से 30 नवंबर तक पूरी तरह से बैन कर दिया गया है। ग्रीन क्रैकर्स भी नहीं बिकेंगे। कहा गया कि दिल्ली को प्रदूषण से बचाने के लिए इस तरह की पाबंदी लगाई गई है। 

दिल्ली में कोरोना और पॉल्यूशन के कॉकटेल ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दिवाली के पास पॉल्यूशन का ठीकरा पटाखों पर फोड़ा जा रहा है। दिल्ली समेत कुछ अन्य राज्यों ने पटाखे जलाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। अब सवाल ये है कि प्रदूषण को लेकर सरकारें साल भर क्यों सोती रहती हैं? पॉल्यूशन का सॉल्यूशन चंद दिनों के बैन से निकलेगा? क्या पटाखा ही पॉल्यूशन का असली विलेन है? पराली जलाने पर बैन क्यों नहीं लगाती सरकारें? क्या पॉल्यूशन के बहाने हिंदू त्योहारों को टारगेट किया जा रहा है? पॉल्यूशन पर कब सख्त बनेगी पॉलिसी?

सवाल तो यह भी है कि पटाखों पर बैन केवल 30 नवंबर तक ही क्यों? यदि पटाखे हवा और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं तो पूरे साल के लिए उन्हें बैन कर देना चाहिए। पटाखे उद्योग बंद कर देना चाहिए। पटाखा कारोबारियों को पुनर्वास पैकेज देना चाहिए और भारत को पटाखा मुक्त देश घोषित कर देना चाहिए। सिर्फ हिंदू त्योहारों को प्रदूषण के बहाने क्यों टारगेट किया जा रहा है?

क्या प्रदूषण कम करने नाम पर पटाखों की बिक्री पर पाबंदी लगाना उचित है? मैं इस बात से असहमत हूँ। दिवाली में पटाखे फोड़ने से रोकना हिंदू संस्कृति पर हमला है। आखिर तुम हमें हमारा ही त्योहार मनाने से कैसे रोक सकते हो? पहले तुमने होली के समय हमसे ये कहकर पानी छीन लिया कि इस त्योहार में पानी की बहुत बर्बादी होती है। अब दिवाली पर पटाखे भी?

बकरीद के बारे में कोई कुछ नहीं कहता, जब लाखों मासूम जानवरों को मौत के घाट उतार दिया जाता है। क्या बकरीद के मौके पर बकरे कटने से नदियों का रंग लाल नहीं होता है। तब तो लोगों को प्रदूषण की फिक्र नहीं होती है। क्रिसमस के बारे में क्या कहेंगे जब हजारों पेड़ काट दिए जाते हैं?

दिल्ली में तो वैसे ही प्रदूषण रहता है, तो सिर्फ पटाखे पर बैन से क्या फर्क पड़ेगा? अजान के लिए मस्जिदों पर लाउडस्पीकर के इस्‍तेमाल पर क्‍या कहेंगे? क्‍या ये ध्‍वनि प्रदूषण ठीक है। ये अजीब है कि सारा जोर सिर्फ एक ही समुदाय पर चल रहा है। पटाखों की सेल पर जो बैन लगा, वह ‘हिंदू संस्कृति’ को लगा है, पटाखों को नहीं। ऐसा बैन न ईद पर लगता है न मुहर्रम और न ही क्रिसमस पर लगता है। सिर्फ दिवाली-होली पर लगता है, क्यों? 

इससे पहले पटाखों पर बैन का विरोध करते हुए त्रिपुरा के राज्यपाल ने यहाँ तक कह दिया था कि ऐसा लगता है कि प्रदूषण के नाम पर अंतिम संस्कार में शव जलाने पर भी कहीं रोक ना लगा दी जाए। राज्यपाल ने बाद में कहा,

“मैंने अपने ट्वीट में कोर्ट के फैसले पर कुछ नहीं कहा है। मैंने ये कहा है कि जिस तरह से दही हांडी समेत बाकी हिंदू त्योहारों को बैन किया जा रहा है, उसे देखते हुए हिंदुओं के अंतिम संस्कार पर भी रोक लगा दी जाएगी या फिर कोई कोर्ट में याचिका डालकर प्रदूषण के मुद्दे पर शवों को जलाने से रोक लगाने की माँग करेगा। निश्चित तौर पर इसमें राजनीति है। अवॉर्ड वापसी ग्रुप और बाकी लोग जो ऐसी याचिका दायर करते हैं, उनकी नजर हमेशा अल्पसंख्यक वोट बैंक पर होती है। मैं उस राजनीति में नहीं पड़ूँगा लेकिन इतना जरूर कहूँगा कि इसमें राजनीति है।”

बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने अरविंद केजरीवाल से पटाखा बैन को लेकर सवाल किया, “क्या हर साल दिवाली पर पटाखों को बैन करना उचित है? दिल्ली में आज तो पटाखे नहीं जल रहे हैं तो प्रदूषण का स्तर आज खराब क्यों है? करवा चौथ के दिन चाँद देखने के लिए एक-एक घंटे जद्दोजहद करनी पड़ी, प्रदूषण अपने चरम पर था, लेकिन तब तो पटाखे नहीं चल रहे थे?”

ज्वैलरी ब्रांड तनिष्क ने भी अपने लव जिहाद वाले विवादित विज्ञापन के बाद दिवाली के अवसर पर पटाखे को लेकर नया ऐड तैयार किया। इस ऐड में भी उन्होंने अपने प्रचार के नाम पर हिंदू विरोधी प्रोपेगेंडा परोसा है, जिसकी वजह से सोशल मीडिया पर एक बार फिर बॉयकॉट तनिष्क ट्रेंड करने लगा है।

ऐड शुरू होते ही एक महिला इसमें कहती है, “यकीनन कोई पटाखे नहीं। मुझे नहीं लगता किसी को पटाखे जलाने चाहिए।” इसके बाद दो-तीन महिलाएँ अपनी बातें रखती हैं और अंत में इकट्ठा होकर खिलखिलाती नजर आती हैं। बस ऐड खत्म।

सोचने वाली है बात है कि यह प्रचार दिवाली के लिए निर्मित हुआ है। यदि मान भी लिया जाए कि तनिष्क का प्रोपेगेंडा हिंदू विरोधी नहीं है तो फिर इसमें दीये, कैंडल्स, रंगोली, मिठाई, पूजा की थाली आदि चीजें कहाँ हैं? जो आमतौर पर दिवाली के मौके पर हर घर की शोभा बढ़ाते हैं। क्या दिवाली का मतलब सिर्फ़ तनिष्क का सोना पहनना होता है?

दिल्ली सरकार के फैसले से पटाखा कारोबारियों की नींद उड़ गई है। पटाखा कारो​बारियों का कहना है कि दिल्ली में विक्रेताओं ने सरकार से दिवाली तक ग्रीन पटाखे बेचने की अनुमति दी जाए, नहीं तो भारी नुकसान झेलना होगा।

पटाखा कारोबारी के अनुसार “अचानक प्रतिबंध के कारण, हमें लगभग 15-20 लाख रुपए के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। पहले सरकार ने कहा कि ग्रीन पटाखे बेचे जा सकते हैं और हमें लाइसेंस दिया गया है। हमने पहले ही स्टॉक खरीद लिया था।” 

पटाखे बेचने वाले दुकानदारों का कहना है कि सरकार द्वारा सभी प्रकार के पटाखों पर प्रतिबंध लगाने से उन्हें भारी नुकसान होगा। एक विक्रेता का कहना है, “हमने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ग्रीन पटाखों का स्टॉक खरीद लिया, लेकिन अब सीएम ने उन पर भी प्रतिबंध लगा दिया। हम प्रतिबंध का विरोध करेंगे।” 

पटाखे बैन का सीधा असर व्यापारियों पर पड़ेगा, क्योंकि पहले सरकार ने खुद ग्रीन क्रैकर्स की इजाजत दी थी और अब प्रतिबंध लगा दिया। 2 महीने पहले सरकार ने लाइसेंस दिए और जब व्यापारियों ने पटाखे खरीद लिए तो उस पर बैन लगा दिया गया। इस कारण व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। यह बेहद हास्यास्पद है और यह बताता है कि सरकार के पास कोई विजन नहीं है।

इस मामले में एक सवाल तो यह पूछा जा रहा है कि जब प्रदूषण के अन्य कई कारण हैं, तब फिर अकेले पटाखों की बिक्री पर रोक क्यों? ऐसे सवालों के साथ एक सवाल यह भी उठा है कि क्या सारे नियम-कायदे हिंदुओं के त्योहारों के लिए ही हैं? यह सवाल इसलिए उठा, क्योंकि अतीत में होली पर इस तरह की नसीहत बार-बार दी जाती रही है कि हानिकारक रंगों के इस्तेमाल से बचें। दीपावली के वक्त पटाखों पर अंकुश की चर्चा नई नहीं है। 

अरसा पहले कॉन्वेंट स्कूलों में बच्चों को पटाखों के चलते पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव के प्रति जागरूक करने की शुरुआत हुई थी, जो धीरे-धीरे पब्लिक स्कूलों तक भी पहुँची। तब भी यह चर्चा चली थी कि एक शहरी वर्ग हिंदुओं के त्योहारों के प्रति तिरस्कार का भाव रखता है। जब मूर्तियों के विसर्जन को लेकर नदियों के प्रदूषण की चिंता की गई, तब भी यह कहा गया कि आखिर सारी हिदायत हिंदुओं के त्योहारों के लिए क्यों?

‘जो बायडेन की मदद से जम्मू कश्मीर में वापस आएगा अनुच्छेद-370, जाएगा इस्लामोफोबिया’: कॉन्ग्रेस नेता की खिलीं बाँछें

जम्मू कश्मीर की स्थानीय पार्टियों का भारत-विरोधी रुख तो जगजाहिर है, लेकिन अब कॉन्ग्रेस पार्टी भी फ़ारूक़ अब्दुल्लाह और महबूबा मुफ़्ती जैसे नेताओं के सुर में सुर मिला रही है। कम से कम जम्मू कश्मीर में कॉन्ग्रेस नेताओं के बयान देख कर तो यही लगता है। ताज़ा मामला है जहाँजेब सिरवाल का, जो प्रदेश में कॉन्ग्रेस के चर्चित नेताओं में से एक हैं। वो अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बायडेन की मदद से अनुच्छेद-370 को वापस लाने का दावा कर रहे हैं।

अमेरिका में ‘डेमोक्रेटिक पार्टी’ के जो बायडेन और ने वहाँ के पदस्थ राष्ट्रपति व ‘रिपब्लिकन पार्टी’ के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प को हरा दिया है और कमला हैरिस उनकी डिप्टी के रूप में चुनी गई हैं। कॉन्ग्रेस नेता जहाँजेब सिरवाल ने भी इन दोनों नेताओं को जीत की बधाई दी लेकिन इस दौरान वो अपना भारत-विरोधी रवैया उजागर करना नहीं भूले। कॉन्ग्रेस के युवा नेता ने इसे व्यक्तिगत जीत न होकर एक ‘विचारधारा की जीत’ करार दिया।

उन्होंने इसे लोकतंत्र की जीत बताते हुए कहा कि जहाँ तक भारत और जम्मू-कश्मीर की बात है, उनकी जीत से यहाँ सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और इतना तो साफ है उनकी जीत से इस्लामोफोबिया में कमी आएगी। बता दें कि ये कट्टरपंथी नेता इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ आवाज़ उठाने को भी ‘इस्लामोफोबिया’ कहते हैं। कमोबेश पूरी दुनिया में इस्लामी कट्टरपंथियों का लगभग यही रुख है और वो आतंकवाद की निंदा तक नहीं करते।

इसी तरह कॉन्ग्रेस के युवा नेता जहाँजेब सिरवाल ने कहा कि जो बायडेन के पुराने बयानों से ऐसा प्रतीत होता है कि वो भारत सरकार पर दबाव बनाएँगे और सरकार अनुच्छेद-370 और 35-ए को फिर से वापस लाएगी और इन्हें लागू करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अलोकतांत्रिक तरीके से अनुच्छेद-370 को हटाया था और इसे वापस लाने से ‘इस्लामोफोबिया’ में कमी आएगी।

इससे पहले जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्लाह ने ‘लाइन ऑफ एक्चुअल कण्ट्रोल (LAC)’ पर चीन के आक्रामक रवैये के लिए भारत सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के फैसले को जिम्मेदार बताया था। ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस’ के अध्यक्ष ने कहा था कि चीन ने कभी भी अनुच्छेद 370 को लेकर भारत सरकार के फैसले को स्वीकार नहीं किया है। साथ ही उन्होंने उम्मीद भी जताई थी कि चीन की मदद से फिर से अनुच्छेद 370 को वापस लाया जा सकेगा।

उन्हीं के नक्शेकदम और चलते हुए जम्मू कश्मीर की एक अन्य पूर्व-मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने कहा था कि जब तक उनका झंडा (जम्मू कश्मीर का पुराना झंडा) वापस नहीं मिल जाता, तब तक वह दूसरा झंडा (तिरंगा) नहीं उठाएँगी। मुफ्ती ने कहा था कि उनका झंडा ‘डाकुओं’ ने ले लिया है। उन्होंने कहा था कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को बहाल करने तक उनका संघर्ष खत्म नहीं होगा और वो कश्मीर को पुराना दर्जा दिलवाने के लिए जमीन आसमान एक कर देंगी।

‘मरने से बेहतर यही होगा कि वह हथियार उठा ले, J&K के युवाओं के पास और कोई विकल्प नहीं’ – महबूबा मुफ्ती

अक्सर अपने विवादित बयानों के चलते सुर्ख़ियों में रहने वाली पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की मुखिया महबूबा मुफ़्ती ने एक बार फिर विवादित बयान दिया। इस बार उन्होंने अपने बयान में युवाओं को शामिल किया है। महबूबा मुफ़्ती ने अपने बयान में कहा है कि जम्मू कश्मीर के युवाओं के पास हथियार उठाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है। उनका कहना था कि नौकरी नहीं होने की वजह से घाटी के युवा हथियार उठा रहे हैं। 

आज प्रेस वार्ता करते हुए महबूबा मुफ़्ती ने कहा, “जब राज्य में पहली बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया और अनुच्छेद 370 हटा कर इसे बाँटा गया है, तब से घाटी में आतंकवाद बढ़ा है। उनके कार्यकाल में आतंकवाद काफी बढ़ा है, हर गाँव से लगभग 10 से 15 युवा एक साथ हथियार उठा कर आतंकवाद की राह स्वीकार कर रहे हैं।” जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री का कहना था कि इस तरह की घटनाएँ इसलिए हो रही हैं क्योंकि यहाँ के लोगों की आवाज़ दबाई जा रही है। 

इस मुद्दे पर उन्होंने कहा, “क्योंकि आपने आम लोगों की आवाज़ दबाई है, लोगों के पास कोई विकल्प नहीं बचा है। यहाँ के युवा सोच रहे हैं कि या तो वह जेल जा सकते हैं या फिर वो हथियार उठा सकते हैं। ऐसे में वह सोचता है कि मरने से बेहतर यही होगा कि वह हथियार उठा ले। लोगों को अपनी बात रखने का मौक़ा नहीं दिया जा रहा है, इसलिए ऐसा हो रहा है।” इसके बाद महबूबा मुफ़्ती ने पाकिस्तान और चीन से बातचीत करने का समर्थन किया। 

दोनों पड़ोसी देशों से संवाद का समर्थन करते हुए महबूबा मुफ़्ती ने कहा, “अगर हम चीन से बात कर सकते हैं तो पाकिस्तान से क्यों नहीं कर सकते हैं? पिछले काफी समय से सरकार चीन से निवेदन कर रही है कि वह हमारी ज़मीन लौटा दे। इन लोगों ने हमसे हमारा झंडा तक छीन लिया और यहाँ बाहर के लोगों को बसाया जा रहा है। 370 को ख़त्म करके जम्मू कश्मीर को बेचा गया है, हमारी नौकरियाँ बेची जा रही हैं।” 

इसके बाद महबूबा मुफ़्ती ने महागठबंधन को मिली बढ़त के लिए तेजस्वी को बधाई भी दी। जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “आज इनका (भाजपा) का समय है, कल हमारा समय आएगा। इनका हाल भी ट्रंप की तरह ही होगा, बॉर्डर के रास्ते खुलने ही चाहिए। हमारा झंडा हमें वापस दो, हम चुनाव इकट्ठे लड़ रहे हैं। जम्मू कश्मीर के टुकड़े कर दिए गए हैं, इस तरह की ताकतों को दूर करने के लिए हमने हाथ मिलाया है। हमसे हमारा अधिकार छीना नहीं जा सकता है।”        

महबूबा मुफ़्ती की तरफ से यह बयान ठीक उस दिन आया है, जब पीएजीडी (PAGD) गठबंधन ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के मामले पर जल्दी सुनवाई को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। पीएजीडी जम्मू कश्मीर की कुल 7 मुख्यधारा वाले राजनीतिक दलों का गठबंधन है। इसका गठन 15 अक्टूबर को हुआ था और इसका उद्देश्य जम्मू कश्मीर को वापस विशेष राज्य का दर्जा दिलाना है। 

महाराष्ट्र में सैलरी नहीं मिलने पर कंडक्टर ने लगाई फाँसी, ठाकरे सरकार को बताया जिम्मेदार: ड्राइवर ने भी की आत्महत्या

महाराष्ट्र में अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ आत्महत्या के मामले में मुंबई पुलिस की कार्रवाई किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में एक ओर जहाँ महाराष्ट्र सरकार व मुंबई पुलिस की मंशा पर लगातार सवाल उठ रहे हैं और राज्य प्रशासन द्वारा इस बात का हवाला दिया जा रहा है कि कानून सबके लिए समान है, वहीं अब आत्महत्या का ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें एक बस कंडक्टर ने अपनी मौत का जिम्मेदार ठाकरे सरकार को बताया है। 

इस केस के सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोग सवाल पूछने लगे हैं कि ठाकरे सरकार इस कंडक्टर को इंसाफ दिलाने के लिए क्या करेगी? क्या परिवहन मंत्री को जेल में डाला जाएगा?

लोगों का दावा है कि मनोज चौधरी नाम के बस कंडक्टर ने आत्महत्या इसीलिए की क्योंकि उन्हें उनकी सैलरी नहीं मिली थी। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीर के साथ उनका आखिरी पत्र भी शेयर किया जा रहा है। लोगों का ठाकरे सरकार से पूछना है कि क्या वाकई सरकार मराठी मानुष के लिए काम कर रही है?

जानकारी के मुताबिक, पूरा मामला जलगाँव जिले के कुसुम्बा गाँव का है, जहाँ मनोज चौधरी नाम के एसटी (स्टेट ट्रांस्पोर्ट) कर्मचारी ने वेतन न मिलने के कारण अपने आवास पर फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली। कंडक्टर मनोज चौधरी ने अपने पत्र में एसटी निगम और ठाकरे सरकार को आत्महत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया। आत्महत्या से पहले उन्होंने एक सुसाइड नोट भी लिखा। 

इस पत्र में उन्होंने बताया कि सैलरी में होने वाली अनियमितताओं और कम वेतन के कारण वह आत्महत्या कर रहे हैं। इसके लिए जिम्मेदार एसटी निगम और ठाकरे सरकार के कामकाज के तरीके हैं। उन्होंने लिखा कि इन सबमें उनके परिवार का कोई लेना-देना नहीं है और संगठनों से अपील की कि उनके परिवार को पीएफ व एलआईसी की रकम प्राप्त करवाने में मदद करें।

यहाँ बता दें कि सोशल मीडिया पर मनोज चौधरी के अलावा एक अन्य एसटी कर्मचारी के आत्महत्या की खबरें भी आ रही हैं। यह कर्मचारी बस ड्राइवर का काम करते थे। इनका नाम पांडरंग गडदे है। पत्रकार अभिषेक पांडे के अनुसार बस चालक ने कल देर शाम फाँसी लगाकर अपनी जान दी। इन्हें भी पिछले 4 माह से सैलरी नहीं मिली थी। माना जा रहा है कि आत्महत्या का कारण सैलरी हो सकती है।

अभिषेक पांडे ने इससे पहले 3 नवंबर को एसटी कर्मचारियों को सैलरी न मिलने का मामला उठाया था। उन्होंने लिखा था, “4 महीने से बिना पगार (सैलरी) काम करने का दर्द क्या होता है, महाराष्ट्र राज्य परिवहन के ड्राइवर और कंडक्टर से पूछिए। किसी दिन तनाव और पारिवारिक दबाव में बस चलाते समय हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन होगा? कोरोना में भूखे पेट काम संभव?”

अर्जुन रामपाल के ठिकानों पर NCB की छापेमारी, पूछताछ के लिए जाँच एजेंसी के दफ्तर पहुँचे फिरोज नाडियाडवाला

‘नार्कोटिक्स कण्ट्रोल ब्यूरो (NCB)’ ने बॉलीवुड अभिनेता अर्जुन रामपाल के ठिकानों पर छापेमारी की है। NCB ने सोमवार (नवंबर 9, 2020) को अर्जुन रामपाल के मुंबई स्थित ठिकानों पर छापेमारी की। अब तक एजेंसी ने बताया नहीं है कि ये छापेमारी क्यों की गई और उसके पास क्या कुछ हाथ आया है। इधर फिल्म निर्माता फिरोज नाडियाडवाला भी पूछताछ के लिए NCB ऑफिस पहुँचे हैं। ड्रग्स मामले में ये सब कार्रवाई की जा रही है।

कुछ ही दिनों पहले NCB ने अफ्रीकी मूल के मुंबई निवासी एगीसलोस डेमेट्रिडेस को गिरफ्तार किया था, जो अर्जुन रामपाल की गर्लफ़्रेंड का भाई है। एगीसलोस डेमेट्रिडेस के पास कई मादक पदार्थ मिले थे, जिसमें चरस और एलप्राज़ोलम की टेबलेट भी शामिल हैं। इसके पहले क्षितिज प्रसाद और जय मधोक के रूप में इस मामले में 21वीं और 22वीं गिरफ्तारी हुई थी। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से ही इस मामले में कार्रवाई शुरू हुई है।

फिरोज नाडियाडवाला को भी NCB ने समन भेजा है, जिसके बाद वो एजेंसी के दफ्तर पहुँचे और अधिकारियों की पूछताछ का सामना कर रहे हैं। एक दिन पहले ही उनकी पत्नी शबाना सईद को गिरफ्तार किया गया था। उनके आवास से ड्रग्स जब्त होने के मामले में उनसे पूछताछ की जा रही है। जब उनके जुहू स्थित ठिकानों पर NCB ने छापेमारी की थी, तब वो अपने आवास पर नहीं थे और इसीलिए उन्हें समन भेज दिया गया था।

एजेंसी ने जानकारी दी है कि शबाना सईद को ‘स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 ( Narcotic Drugs And Psychotropic Substances Act, 1985 (NDPS Act)’ के तहत गिरफ्तार किया गया है। उनके पास से 10 ग्राम गाँजा जब्त किया गया था। उनका बयान रिकॉर्ड करने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। सईद के साथ ही मुंबई के अन्य ठिकानों से 4 अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया।

छापेमारी में इस्माइल शेख नाम के ड्रग्स पेडलर के साथ चार अन्य लोगों को भी NCB ने पकड़ा, जिनसे पूछताछ चल रही है। बता दें कि फिरोज नाडियाडवाला हेरा फेरी, आवारा पागल दीवाना, आन, मेन एट वर्क, फूल एंड फाइनल, वेलकम, कारतूस जैसी कई हिट फिल्मों के प्रोड्यूसर हैं। इससे पहले इनकम टैक्स बकाया मामले में फिरोज नाडियाडवाला को तीन महीने की जेल भी हो चुकी है। अब फिर से वो जाँच एजेंसी की रडार पर हैं।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अर्णब गोस्वामी को अंतरिम जमानत देने से किया इनकार, अब फिर निचली अदालत में करनी होगी अपील

बॉम्बे हाईकोर्ट ने ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के संस्थापक और प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में ऐसा दावा नहीं पेश किया गया, जिससे पीठ को असाधारण जुरिडिक्शन देना पड़े। हालाँकि, बॉम्बे हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि नियमित जमानत के अन्य विकल्प अभी भी है और उसके लिए प्रयास किया जा सकता है। इसके लिए अर्णब गोस्वामी को सेशन कोर्ट जाना पड़ेगा

बता दें कि रिपब्लिक टीवी की सीनियर एग्जीक्यूटिव एडिटर और अर्णब गोस्वामी की पत्नी सम्यब्रता रे गोस्वामी ने एक बयान जारी किया है। इस बयान में उनका कहना है कि अगर उनके पति को किसी भी तरह का नुकसान होता है तो उसके लिए पूरी सरकार और पूरा राष्ट्रीय तंत्र ज़िम्मेदार होगा। महाराष्ट्र पुलिस द्वारा अर्णब गोस्वामी को तलोजा जेल भेजे जाने के बाद यह बयान जारी किया गया। अर्णब गोस्वामी ने खुद आरोप लगाया है कि जब उन्होंने अपने वकील से संपर्क करने की बात कही तब जेलर उनके साथ हिंसा पर उतर आए और उनकी बात को सिरे से खारिज कर दिया। 

उधर अभिनेत्री कंगना रनौत ने ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के संस्थापक और एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी और उनके प्रताड़ना के आरोपों पर बोलते हुए कहा है कि ड्रग माफिया की पोल खोलने, ‘BullyDawood’ में बच्चों की तस्करी के व्यापार की पोल खोलने और सोनिया गाँधी को उनके ‘असली नाम’ से बुलाने के लिए उनके साथ ऐसा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अधिकतर लोगों को ये भी नहीं पता कि वरिष्ठ पत्रकार को जेल में क्यों डाला गया है?

साथ ही उन्होंने कहा कि इतिहास अर्णब गोस्वामी को एक हीरो के रूप में याद रखेगा। उन्होंने कहा कि ये लड़ाई सिर्फ उनकी या अर्णब की नहीं है, बल्कि पूरी सभ्यता और भारतवर्ष की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि इस मामले में हाईकोर्ट खुद कह रहा है कि ये गलत है लेकिन बाहर कोई कुछ नहीं बोल रहा। उन्होंने उदाहरण दिया कि अमेरिका में ट्रम्प में लाख बुराइयाँ हों लेकिन वो आतंकवाद को ‘इस्लामी आतंकवाद’ कहते हैं और कोरोना को ‘चाइनीज वायरस’ कहते हैं।

पटाखे जलाने पर मुंबई में BMC ने भी लगाया बैन, कहा- तेज आवाज के पटाखे फोड़े तो होगी कार्रवाई

दिवाली से पहले मुंबई में बीएमसी ने पटाखे जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। त्योहार से पहले नए नियम जारी करते हुए नागरिकों को बीएमसी की ओर से सूचित किया गया है कि शहर में तेज आवाज के पटाखे फोड़ने वालों के खिलाफ बीएमसी कार्रवाई करेगी। नए नियमानुसार सिर्फ 8 से 10 बजे तक घर के आँगन या सोसायटी कंपाउंड में अनार, फुलझड़ी जलाने की इजाजत दी गई है।

इसके अलावा बीएमसी के हालिया सर्कुलर के अनुसार प्राइवेट और पब्लिक जगहों पर पटाखा जलाने पर रोक है। BMC की ओर से अपील की गई है कि इस दिवाली सभी बिना पटाखों का त्योहार मनाएँ, ताकि मुंबई को प्रदूषण और कोरोना वायरस की वेव से बचाया जा सके। इसमें कोरोना वायरस से बचने के लिए जरूरी नियम पालन करने को भी कहा गया है।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, एक अधिकारी ने इस संबंध में बताया कि राज्य के पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने महामारी के दौरान वायु प्रदूषण रोकने के लिए बीएमसी से पटाखे प्रतिबंधित करने की संभावनाएँ तलाशने को कहा था।

बता दें कि दिवाली से पहले हरियाणा सरकार ने भी प्रदूषण का हवाला देकर पटाखों पर सख्त रुख अपनाया है। हालाँकि, हरियाणा में भी पटाखे जलाने के लिए दो घंटे की छूट दी गई है।

प्रदेश सरकार की ओर से जारी किए गए दिशा निर्देशों में कहा गया है कि दिवाली और गुरुपर्व के दिन रात 8 बजे से 10 बजे तक पटाखा जला सकेंगे। वहीं क्रिसमस और नए साल की रात को 11.55 से 12.30 बजे तक पटाखे का उपयोग कर पाएँगे।

इसी तरह दिल्ली में पटाखे जलाने पर सख्ती से बैन लगाया गया है। प्रदूषण का हवाला देकर एनजीटी ने सोमवार को अपना आदेश दिया है कि दिल्ली एनसीआर में 9-10 नवंबर से लेकर 30 नवंबर तक पटाखों पर बैन रहेगा।

इससे पहले दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा था कि पटाखे बेचने या फोड़ने वाले लोगों पर वायु प्रदूषण (नियंत्रण) अधिनियम (1981) के तहत 1 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। गोपाल राय ने बताया था कि आरोपित के खिलाफ एयर एक्ट के तहत केस बनाया जाएगा, जिसमें 1 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है।