दिल्ली के महेंद्र पार्क इलाके में तीन भाइयों सुशील, अनिल और सुनील सहित उनके परिवार के महिलाओं पर भी जानलेवा हमला किया गया था। इस मामले में अब पाँचवें आरोपित चाँद अंसारी को गिरफ्तार किया गया है। 29 वर्षीय सुशील की हत्या के 3 दिन बाद गुरुवार (अक्टूबर 29, 2020) को उसे गिरफ्तार किया गया। परिवार ने तेज़ आवाज़ में डीजे बजाने पर आपत्ति जताई थी, जिसके बाद बौखलाए अब्दुल सत्तार के परिवार ने चाकुओं से हमला कर दिया था।
दिल्ली पुलिस को इस मामले में अब तक अब्दुल सत्तार, उसकी पत्नी शाहजहाँ और दोनों बेटों शाहनवाज तथा अफाक को गिरफ्तार करने में सफलता मिली थी। आजादपुर मंडी में लहसुन व्यापारी सत्तार ने अपने 4 बेटों के साथ सुशील के परिवार पर जानलेवा हमला किया था। साथ ही उसका एक दोस्त नाई भी इस वारदात में उन लोगों के साथ था। पुलिस फरार आरोपितों की तलाश कर रही है। बताया गया कि जल्द ही सभी को धर-दबोचा जाएगा।
आदर्श नगर के सराय पीपल थला में मंगलवार को हुई इस घटना के बाद दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष आदर्श गुप्ता भी पीड़ितों से मिलने पहुँचे और उन्होंने परिवार को 5 लाख रुपए का चेक प्रदान किया। उन्होंने पार्टी की तरफ से इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए पुलिस कमिश्नर से फरार आरोपितों की जल्द गिरफ़्तारी की माँग की और साथ ही फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से उन्हें जल्द से जल्द कड़ी से कड़ी सज़ा दिलाने की डिमांड रखी।
इससे 1 दिन पहले दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी पीड़ित परिवार से मिलने पहुँचे थे और उन्होंने परिवार को आश्वासन दिया था कि इस मामले में आरोपितों को कड़ी सज़ा दिलाई जाएगी। परिजनों और पड़ोसियों ने धरना देकर आरोपितों को फाँसी देने की माँग की। कई महिलाओं ने ‘हत्यारों को फाँसी दो’ लिखी तख्तियों के साथ विरोध प्रदर्शन किया। आदर्श गुप्ता ने भी प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर उन्हें आश्वासन दिया।
दिल्ली के महेंद्र पार्क इलाके में सुशील की हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले के आरोपित चाँद अंसारी को गिरफ्तार कर लिया है।
अब्दुल सत्तार और उसके बेटों ने मिल कर सुशील व उनके भाइयों अनिल-सुनील पर जानलेवा हमला किया था।
एडिशनल डीएसपी विक्रम हरिमोहन मीणा ने कहा था कि ये दो पड़ोसी परिवारों का मामला है, जो तेज़ आवाज में गाने बजाने को लेकर लड़ गए। उन्होंने बताया था कि दोपहर 3:15 बजे उनके कण्ट्रोल रूम को एक कॉल आई, जिसमें बताया गया कि आदर्श नगर मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 4 के पास के इलाके में स्थित एक झोपड़पट्टी में लड़ाई-झगड़ा हो रहा है। वहाँ पहुँची पुलिस ने देखा कि सुशील व उनके दोनों भाइयों पर अब्दुल सत्तार व उसके परिवार के 6 लोगों ने हथियारों से हमला किया गया था। ऑपइंडिया को पता चला कि भजन बजाने को लेकर भी विवाद हुआ था।
बता दें कि मृतक की शादी मात्र तीन साल पहले हुई थी। उनके घर पर उनकी व उनकी पत्नी की तस्वीरें बताती हैं कि दोनों का नया जीवन खुशहाल था। दोनों की सवा साल की एक बेटी भी है। लेकिन मंगलवार को हुए एक विवाद ने सब कुछ बदल कर रख दिया। कुछ कट्टरपंथियों के कारण अब सुशील दोबारा अपने परिवार के पास नहीं लौटेंगे। सुशील की पत्नी ने बताया कि आरोपित उनकी ओर दौड़े और उनसे छेड़छाड़ करने लगे थे, उन्हें उठाने की कोशिश की थी।
बांग्लादेश के सदरघाट स्थित जगन्नाथ यूनिवर्सिटी की छात्रा तिथि सरकार दुर्गा पूजा मंडप के दर्शन के लिए जाते समय गायब हो गईं और उनका 6 दिनों से कोई अता-पता नहीं है। तिथि सरकार को यूनिवर्सिटी द्वारा भी सस्पेंड कर दिया गया था। उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने फेसबुक पर इस्लाम और पैगम्बर मुहम्मद पर टिप्पणी की थी, जो वहाँ ईशनिंदा के तहत आता है। हालाँकि, हिंदू संगठनों ने उन पर लगे आरोपों को झूठा बताया है।
तिथि जूलॉजी की छात्रा हैं। उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से धार्मिक भावनाओं का अपमान करने के आरोप में जगन्नाथ विश्वविद्यालय अधिनियम -2005 की धारा 11 (10) के तहत विश्वविद्यालय से अस्थायी रूप से निष्कासित कर दिया गया था। उन्हें ‘कारण बताओ नोटिस’ में यह भी पूछा गया था कि आखिर उन्हें विश्वविद्यालय से हमेशा के लिए क्यों नहीं निष्काषित किया जाए? तिथि ने 24 अक्टूबर को अपने निष्कासन के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन भी किया था।
तीसरी वर्ष की छात्रा तिथि सरकार रविवार (अक्टूबर 25, 2020) को दुर्गा पूजा मंडप के दर्शन के लिए जा रही थीं। उससे पहले वो पल्लाबी पुलिस थाने भी गई थीं। उनकी बहन स्मृति रानी ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस का कहना है कि वो छात्रा की तलाश तो कर रही है लेकिन अभी तक कुछ पता नहीं चल सका है। पुलिस का कहना है कि तिथि ने अपना फेसबुक अकाउंट हैक होने को लेकर भी मामला दर्ज कराया था।
जगन्नाथ विश्वविद्यालय ने एक कमिटी बना कर तिथि की टिप्पणियों की जाँच के लिए 3 सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा था। विश्वविद्यालय ने इस बात से अनभिज्ञता जताई है कि छात्र गायब हुई है। उसका कहना है कि परिवार ने उसे अभी तक इस बारे में कुछ नहीं बताया है। पत्रकार शम्मी हक़ ने सोशल मीडिया पर तिथि के सस्पेंशन ऑर्डर को शेयर किया और लिखा कि फ़्रांस विरोधी प्रदर्शन अब एक भयावहता में बदलता जा रहा है।
बांग्लादेश से भी पाकिस्तान की तरह ही हिन्दुओं को प्रताड़ित करने की खबरें आती रहती हैं। जुलाई 2019 में अल्पसंख्यक हिन्दुओं की दुर्दशा को बयान करने वाली महिला पर बांग्लादेश में देशद्रोह का मुकदमा का निर्णय लिया गया था। बांग्लादेश हिन्दू बुद्धिस्ट क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल (HBCUC) की पदाधिकारी सचिव प्रिया साहा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कहा था कि उसके देश में अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित किया जा रहा है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में साल 2018 में दूसरे मजहब की युवती से प्रेम करने के कारण अंकित सक्सेना को मारा गया। साल 2020 में यही वजह राहुल राजपूत की मौत का कारण बनी। अंकित फोटोग्राफर थे। राहुल कॉलेज के छात्र। दोनों के बीच कई समानताएँ थीं। दोनों ने दूसरे मजहब की लड़की से प्रेम किया। दोनों को लड़कियों के परिजनों ने ही बर्बरता से मारा। दोनों अपने घर में एकलौते लड़के थे और शायद दोनों ही अपने माँ बाप का आखिरी सहारा थे।
कट्टरपंथ का शिकार हुए दिल्ली के दो युवक- अंकित सक्सेना और राहुल राजपूत
अंकित सक्सेना का रेता गया गला जब हमारी स्मृतियों से धुँधला हो गया, तब हमें एक बार दोबारा चेतावनी के रूप में राहुल की लाश देखने को मिली। राहुल को मो अफरोज समेत 4-5 युवकों ने इतनी बेहरमी से पीटा कि अस्पताल में इलाज चलते-चलते उसकी मौत हो गई।
जाँच हुई तो पता चला कि समुदाय विशेष के युवक इस बात से नाराज थे कि 18 वर्षीय राहुल की उनकी बहन (16 साल की नाबालिग लड़की ) से दोस्ती थी और ये बात उन्हें सरासर नागवार थी। इसके लिए उन्होंने पूरी साजिश रची।
घटना वाले दिन राहुल के पास एक फोन आया। कॉल करने वाले ने कहा कि उन्हें अपने बच्चे को ट्यूशन पढ़ाना है इसलिए वह बाहर आए। फोन की जानकारी होते ही 18 साल का राहुल अपनी गली में आया। गली में 4-5 लोग पहले से मौजूद थे। सब उसे अपने साथ स्वर्ण सिंह रोड स्थित उसके घर के पास से नंदा रोड पर ले गए।
यहाँ इन लोगों ने उसे इतना पीटा कि उसकी हालत गंभीर हो गई। राहुल लड़खड़ाते हुए अधमरी हालत में घर पहुँचा। अस्पताल पहुँचकर उसकी मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम में पता चला कि अंदरुनी चोटों ने राहुल की जान ले ली।
Ground Report: Migrant Slum Dwellers Kill Delhi Boy Rahul Rajput For Relationship With A Muslim Girl@swati_gshttps://t.co/Q8yi0fBBf2
ये अंदरुनी चोटें कौन सी थीं? राहुल के शरीर पर लगने वाली या समाज में कोढ़ की भाँति पनपने वाली। क्या राहुल को बेदर्दी से मारे गए लात घूँसे सिर्फ़ सामान्य लड़कों के बीच हुई झड़प थी। या ये उस कट्टरपंथ का परिणाम थी जो हमारे आस-पास लंबे समय से बढ़ रहा है लेकिन हम सेकुलर बन उसको सिर्फ़ नजरअंदाज किए जा रहे हैं।
राहुल की मौत को कुछ दिन बाद एक महीना बीत जाएगा और उसके कुछ दिन बाद एक साल। आप और हम उसे अंकित सक्सेना की तरह ही भुला देंगे। मगर, क्या राहुल के माता-पिता के जीवन में उसकी कमी कोई पूरी कर पाएगा जो आज भी राहुल के उस कमरे में बैठे मिलते हैं जहाँ वो बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता था।
राहुल राजपूत का घर
राहुल के माता-पिता से ऑपइंडिया की मुलाकात
मीडिया में यह पूरा मामला ठंडे बस्ते में जा चुका है। ऐसे में उसके माता-पिता कैसे हैं? इसे जानने के लिए ऑपइंडिया के सीनियर एडिटर रवि अग्रहरि राहुल के घर पहुँचे। स्वर्ण सिंह रोड पर स्थित राहुल का घर बाहर से आम घरों जैसा ही है। लेकिन भीतर बैठे राहुल के माता-पिता के चेहरे पर उसके न होने का सन्नाटा है। राहुल की एक बड़ी सी तस्वीर के सामने उसके माता-पिता हैं और आवाज में बेटे को खो देने का दर्द है।
#Breaking | Delhi murder: TIMES NOW accesses CCTV footage of the events that occurred before the murder of Rahul Rajput. The CCTV footage shows that the victim’s friend, the girl, had met him a short-while back before he was beaten to death.
उस खौफनाक दिन की सारी बातों को क्रमानुसार बताते हुए राहुल के पिता ने विस्तार से बात की। वह याद करते हुए कहते हैं कि 7 अक्टूबर को उस दिन राहुल को एक फोन आया था। फोन पर बच्चे को ट्यूशन पढ़ाने की बात हुई। उनके बेटे ने कहा यहाँ आ जाओ। लेकिन दूसरी ओर से कहा गया, ‘नहीं बाहर आ जाओ।’ राहुल यह सुनकर बाहर निकल गया।
राहुल के पिता संजय राजपूत कहते हैं कि जब उनका बेटा बाहर गया, तो वहाँ 7-8 लोग हथियार लेकर खड़े थे। सब उसे आगे वाली गली में लेकर चले गए। वहाँ उसके साथ मार-पिटाई हुई और उसी कारण उसने दम तोड़ा।
कौन थे राहुल राजपूत को मारने वाले?
संजय राजपूत के अनुसार, जिन्होंने राहुल को मारा वह जहाँगीर पुरी इलाके के रहने वाले थे। इस इलाके के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि वहाँ रहते सभी धर्म के लोग हैं, मगर अधिकांश रोहिंग्या / बंगालियों (बांग्लादेशियों) का इलाका है। राहुल की हत्या के मामले में पुलिस ने 6 लोगों को अब तक गिरफ्तार किया है, इसकी जानकारी भी हमें संजय राजपूत से मिली। हालाँकि, उन्हें यह नहीं मालूम था कि ये 6 लोग कौन-कौन हैं।
घटना के बाद राहुल के लिए बिलखता परिवार (साभार: स्वराज्य, स्वाति गोया की ग्राउंड रिपोर्ट से)
बेटे के साथ इतनी निर्ममता किए जाने के बावजूद संजय राजपूत शायद समाज में सौहार्द बनाए रखने के लिए एक भी बार अपने मुख से मजहब विशेष को लेकर कोई कटु टिप्पणी नहीं करते।
हाँ, वह ये जरूर बताते हैं कि उनके बेटे को मारने वाले किस समुदाय के थे, लेकिन आगे बातचीत में वह स्पष्ट करते हैं कि उन्हें समुदाय से कोई लेना-देना नहीं है। वह बस चाहते हैं कि अपराध में शामिल सभी लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिले ताकि राहुल को न्याय मिल सके।
घटना के दो घंटे ही बाद हुई राहुल की मौत
राहुल राजपूत के पिता बताते हैं कि उनके बेटे पर हमलावरों ने धारधार चीजें को हाथ में दबा कर हमला किया। उन्हें मालूम था कि राहुल को कहाँ और कैसे मारा जाएगा कि वह मर जाए। वह सभी पहले से तैयार थे। वो सब प्रोफेशनल किलर थे, जो घर से सोच के आए थे कि बंदे को मार ही देना है।
राहुल की गंभीर अवस्था को देखकर उसके परिजनों ने पहले तो जल्दीबाजी में एक लोकल डॉक्टर से दवाई ली, फिर बिगड़ती हालत देख उसे जगजीवन राम अस्पताल में पहुँचाया गया। वहाँ उसका ट्रीटमेंट शुरू हुआ, लेकिन लगभग 2 घंटे बाद ही उसकी मौत हो गई।
संजय राजपूत ने दूसरे पक्ष को दी अपने बच्चों की मानसिकता सुधारने की सलाह
संजय राजपूत हाल फिलहाल का एक वाकया हमसे साझा करते हुए यह भी बताते हैं कि कुछ समय पहले दूसरे समुदाय के कुछ लोग उनके घर के अंदर घुस आए। पुलिस बाहर बैठी थी लेकिन उन्हें इसकी कोई खबर तक नहीं हुई। उन्होंने सबको देखकर अपने आस-पड़ोसियों को बुलाया और बैठकर उनसे बात की। दूसरे पक्ष ने राहुल के परिजनों से घटना पर खेद जताया और कहा कि अगर कोई मदद चाहिए हो तो वह उन्हें बताएँ।
इस पर राहुल के पिता ने उन्हें समझाते हुए कहा, “मदद आपसे यही चाहिए कि आप अपने बच्चों की मानसिकता को बदल दो। हमारे साथ-साथ सबकी बहुत मदद हो जाएगी। आने वाली पीढ़ी तक की इससे मदद होगी। सिर्फ़ अपने बच्चों की मानसिकता बदल दो।”
समुदाय विशेष का गली में बढ़ा है आना-जाना, प्रशासन के लोग नहीं पूछते: संजय राजपूत
किशोर राहुल की मृत्यु के बाद से जहाँ उसके घर में उदासी है। वहीं दूसरे समुदाय से खतरा होने की बात पर वह कहते हैं कि कोई बताकर तो हमला नहीं करेगा। मगर, कुछ समय पहले कई मुल्ला जी को गली से आते-जाते देखा है। इस संबंध में एसीपी से भी शिकायत की है कि उनके घर के आस-पास समुदाय विशेष वालों का आना बढ़ गया है। वह कहते हैं, “पहले हम इन सब पर इतना ध्यान नहीं देते थे, लेकिन अब हमारी नजरों में लोग आ रहे हैं। हमने डीसीपी को भी बताया है। वह कहते हैं कि वो आगे कहेंगे।”
राहुल राजपूत के पिता बताते हैं कि जब घटना हुई थी, तब प्रशासन के कई लोग उनके घर पर आए लेकिन समय बीत जाने के बाद अब यहाँ कोई नहीं आता है। न्याय का आश्वासन भी परिवार को मीडिया के मौजूद होने तक मिला उसके बाद कोई नहीं आया। जो 6 पकड़े गए हैं। वही गिरफ्तार हैं, बाकी आगे क्या कार्रवाई हुई पता नहीं। संजय राजपूत कहते हैं कि मुख्य गवाह (राहुल की दोस्त लड़की) ने ही इन 6 लोगों को वेरीफाई किया।
मुख्य गवाह (राहुल की दोस्त) की सुरक्षा सुनिश्चित हो
उन्होंने पूरी घटना में मुख्य गवाह व राहुल की लड़की दोस्त के बारे में ऑपइंडिया को जानकारी देते हुए यह भी बताया कि अभी फिलहाल बच्ची अपने घर पर ही है। लेकिन उसके घर वाले उसे साफ-साफ मारने की धमकियाँ दे रहे हैं और पुलिस कह रही है कि यह उनके घर का मामला है जिसमें वह कुछ नहीं कर सकते। इसलिए वह लोग चाहते हैं कि उस लड़की की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
अपनी दोस्त के साथ राहुल राजपूत
वह बताते हैं कि जब लड़की ने राहुल को मारने वालों को पहचाना तब वह नारी निकेतन में रहती थी। मगर, अब वह वापस आ गई है। उसकी सुरक्षा में एक आदमी लगाया गया है पर कहते हैं कि लड़की के घर में उस आदमी के रहने की जगह नहीं है, इसलिए वह बाहर रहता है।
जब (लड़की) वह कॉल करती है, तभी वो आते हैं। लड़की कई बार राहुल के घरवालों को बताती है, “अगर यह मुझे मार देंगे तो मैं कॉल कैसे करूँगी।” आज (रिपोर्टिंग वाले दिन) भी उसने बताया था कि उसके घरवालों ने उसका गला दबा दिया था। वह कहते हैं कि ये कोशिश गवाह को मारने की है। क्योंकि अगर गवाह मर जाएगा तो उनका कोई क्या करेगा।
राहुल के चाचा ने हाथ जोड़कर माँगी थी राहुल की जिंदगी की भीख
गौरतलब है कि इस मामले में 7 अक्टूबर को एफआईआर हुई थी। इसकी एक कॉपी ऑपइंडिया के पास है। लड़के के चाचा धर्मपाल ने यह एफआईआर करवाई थी। इसमें उन्होंने बताया कि उन लोगों को 2 माह पहले ही पता चला था कि उनके भाई (संजय राजपूत) के बेटे राहुल का दूसरे पक्ष की लड़की के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था, जिससे लड़की के घरवाले नाराज थे और मिलने को मना करते थे।
इस बात को जानने के बाद सभी राहुल की सुरक्षा को लेकर चिंतित थे। ऐसे में 7 अक्टूबर को 7 बजे के आसपास उनके पास एक दोस्त का फोन आया कि उनके भतीजे राहुल को 4-5 लड़के पीट रहे हैं। जब उन्होंने जाकर देखा तो वहाँ 5-6 लड़के थे और राहुल सड़क पर था। उन्होंने फौरन उसे बचाया।
एफआईआर में राहुल के चाचा ने मेहराज, अफरोज, शहनवाज, फैक, मामा, तामुद्दीन आदि का नाम लेते हुए कहा कि उन्होंने पूछा कि आखिर क्यों मारा तो उन्होंने कहा कि राहुल उनकी बहन से बातचीत करता है। इस पर धर्मपाल (राहुल के चाचा) ने समझाया पर उन सबने कहा, “हम इसको खत्म कर देंगे।” बड़ी मुश्किल से हाथ पाँव जोड़कर राहुल को उसके चाचा ने उन हमलावरों की चंगुल से छुड़ाया था।
इसके बाद उन्हें धमकी देकर वह लोग भी वहाँ से चले गए। धर्मपाल राहुल को लेकर घर आए तो उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसे अस्पताल ले जाया गया। वहाँ उसकी मौत हो गई। राहुल को हमलावरों से बचाने पहुँचे चाचा का एफआईआर में साफ कहना है कि सभी आरोपितों ने राहुल को जान से मारने के इरादे से हमला किया था, इसलिए उसकी मौत हुई।
उत्तर प्रदेश पुलिस ने आज (30 अक्टूबर, 2020) जावेद नाम के एक शख्स को फेसबुक पर अश्लील तस्वीरें और अश्लील टिप्पणी पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया है।
अमर उजाला की एक रिपोर्ट के अनुसार, ग्राम छातीराम पोस्ट परतावल बाजार के रहने वाले जावेद ने फेसबुक पर एक फर्जी अकाउंट बनाया था। यूपी पुलिस ने बताया कि जावेद फेसबुक पर एक महिला को दूसरे के नाम से आईडी बनाकर उसे अश्लील तस्वीरें और अभद्र टिप्पणी पोस्ट करके परेशान कर रहा था। उसने लड़की के मोबाइल नंबर पर कॉल कर, मैसेज भेज कर गालियाँ भी दी थी।
पार्थवल बाजार से आरोपित को गिरफ्तार करने से पहले पुलिस ने कई बार उसे फ़ोन करने की कोशिश की थी, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। लेकिन आरोपित के नंबर पर कॉल करने पर जवाब नहीं मिल रहा था।
इसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ मामला दर्ज कर 24 घंटों के भीतर उसे गिरफ्तार कर लिया। बता दें, मिशन शक्ति के तहत गठित साइबर सेल की एक टीम के साथ श्यामदेउरवां थाने की पुलिस की एक टीम द्वारा यह कार्रवाई की गई। एसपी प्रदीप गुप्ता ने बताया कि ‘मिशन शक्ति’ के तहत नारी सुरक्षा, नारी सम्मान, नारी स्वावलंबन अभियान के तहत व साइबर अपराधों पर रोकथाम के लिए जिले में अभियान चलाया जा रहा है।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तीकरण के लिए इस महीने नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही मिशन शक्ति का शुभारंभ किया था। मिशन शक्ति को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था, ”शक्ति की आराधना के पावन अवसर ‘शारदीय नवरात्रि’ के प्रथम दिवस से प्रदेश में ‘मिशन शक्ति’ का शुभारंभ किया जा रहा है। यह अभियान महिलाओं और बच्चों के प्रति सम्मान तथा सुरक्षा की भावना के प्रसार तथा महिला स्वावलंबन की आवश्यकता को नवीन आयाम प्रदान करने में सहयोगी होगा।”
उन्होंने आगे कहा था, “दुर्भाग्यपूर्ण घटना की पीड़िता को श्रद्धांजलि देने के लिए, मैंने बलरामपुर से मिशन शक्ति अभियान को शुरु करने का फैसला किया। यह अभियान बलरामपुर में बर्बरता की शिकार हुई बिटिया को सच्ची श्रद्धांजलि है। महिलाओं व बच्चों के प्रति सम्मान और सुरक्षा का भाव हमारी संस्कृति है। इसी भावना के साथ आज ‘मिशन शक्ति’ का शुभारंभ हो रहा है।”
मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि महिलाओं, बेटियों, नाबालिग बच्चों और अनुसूचित जाति के लोगों के विरुद्ध अपराध करने वालों का सभ्य समाज में कोई स्थान नहीं। ऐसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की जाए कि वह गले मे तख्ती लटकाकर माफी माँगते फिरें या प्रदेश छोड़कर भाग जाएँ। आरोपितों के खिलाफ होने वाली कार्रवाईयों की दैनिक रिपोर्टिंग होनी चाहिए व शासन स्तर पर इसकी समीक्षा हो।
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के खिलाफ चुनाव आयोग ने बड़ी कार्रवाई की है। चुनाव आयोग ने उनसे स्टार प्रचारक का दर्जा छीन लिया है। यह कार्रवाई चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के कई मामले सामने आने के बाद की गई है।
राज्य में आगामी उपचुनावों में कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रचार के दौरान कमलनाथ ने अपने शब्दों को चुनने में लापरवाही बरती थी। चुनाव आयोग ने एक महिला उम्मीदवार के लिए ‘आइटम’ शब्द के इस्तेमाल के लिए कमलनाथ को फटकारा था और कहा था कि एक महिला के लिए उक्त शब्द का इस्तेमाल आयोग द्वारा जारी किए गए निर्देशों का उल्लंघन है।
चुनाव आयोग ने कमलनाथ की खिंचाई करते हुए उपचुनावों के लिए चुनाव प्रचार के दौरान एक महिला को संबोधित करने के लिए ‘आइटम’ जैसे अपमानजनक शब्दों का उपयोग करने के लिए उन्हें जमकर लताड़ा था।
यह एकमात्र उदाहरण नहीं है जब कमलनाथ पर मॉडल कोड को तोड़ने और सार्वजनिक जगहों पर अनुचित शब्दों का उपयोग करने का आरोप लगाया गया था। मध्य प्रदेश के वर्तमान सीएम शिवराज सिंह चौहान पर हमला करते हुए, उन्होंने सीएम को नौटंकी कलाकार भी कहा था। कमलनाथ ने कहा था कि वे मुंबई जाकर एक्टिंग करें। इसके साथ ही उन्होंने शिवराज सिंह चौहान पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि आपके भगवान तो वह माफिया हैं जिससे आपने मध्यप्रदेश की पहचान बनाई है। आपके भगवान वो मिलावटखोर हैं।
आयोग ने आदेश जारी करते हुए कहा कि कमलनाथ को स्टार प्रचारक के रूप में प्राधिकारियों द्वारा कोई अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा, “अब से यदि कमलनाथ द्वारा कोई चुनाव प्रचार किया जाता है तो यात्रा, ठहरने और दौरे से संबंधित पूरा खर्च पूरी तरह से उस उम्मीदवार द्वारा वहन किया जाएगा जिसके निर्वाचन क्षेत्र में वह चुनाव प्रचार करेंगे।”
इस आदेश में आगे कहा गया है कि चुनाव से पहले चुनाव प्रचार के दौरान सभी राजनीतिक दलों की सहमति के साथ नैतिक और सम्मानजनक व्यवहार को बनाए रखने के लिए आदर्श आचार संहिता कई दशकों से विकसित हुई है।
कमलनाथ की अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियों ने मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी थी। भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक महिला नेता के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने के लिए तीखी प्रतिक्रिया भी व्यक्त की थी।
गौरतलब है कि चुनाव प्रचार के दौरान कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भारतीय जनता पार्टी की महिला प्रत्याशी इमरती देवी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘आइटम’ कह डाला था।
पूर्व मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ ने आमसभा को संबोधित करते हुए भाजपा प्रत्याशी एवं कैबिनेट मंत्री श्रीमती इमरती देवी के बारे में कहा था, “आप तो उसे मुझसे ज्यादा पहचानते हैं, आपको मुझे पहले ही सावधान कर देना चाहिए था, ये क्या आइटम है।” (इतना कहने के बाद श्री कमलनाथ ने जनता की तरफ देखा, खिलखिला कर हँसे, फिर दोहराया ये क्या आइटम है, और मुस्कुराए, उनके समर्थकों ने तालियाँ बजाई और ठहाके लगाए।)
तुर्की और ग्रीस में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं। अमेरिका के भूगर्भ सर्वेक्षण के अनुसार भूकंप की तीव्रता 7.0 थी। तुर्की के आपदा और आपात प्रबंधन विभाग ने कहा कि भूकंप का केन्द्र एजियन सागर में 16.5 किलोमीटर नीचे था।
भूकंप से 6 लोगों की मौत हो गई और 100 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे है। तुर्की के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि दुर्भाग्य से इज़मिर में भूकंप से हमारे 6 नागरिकों की मौत हो गई। भूकंप से कुल 120 लोग प्रभावित हुए हैं। एंबुलेंस और हेलीकॉप्टर की मदद ली जा रही है। हम इज़मीर के लोगों के साथ हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस भूकंप से इजमिर शहर की कम से कम 20 इमारतें ढह गईं। बताया जा रहा है कि मलबे में कई लोगों के दबे होने का भी अंदेशा है।
साभार: दैनिक भास्कर
वहीं भूकंप को लेकर यूरोपीय-मूध्यसागर भूकंप विज्ञान केन्द्र ने कहा कि शुरुआत में भूकंप की तीव्रता 6.9 थी और इसका केन्द्र यूनान के उत्तर-उत्तरपूर्व में सामोस द्वीप में था। समुद्र में आए भूकंप की वजह से पानी शहरी इलाकों में आ गया। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक, भूकंप का केंद्र ग्रीस के नोन कार्लोवसियन शहर के उत्तर-पूर्व में 14 किलोमीटर की दूरी पर था।
साभार: दैनिक भास्कर
तुर्की के मंत्री सुलेमान सोयलू ने बताया कि इस भूकंप के कारण बोर्नोवा और बेराकली शहर में भी इमारतों को नुकसान पहुँचा है। उन्होंने कहा कि राहत और बचाव कार्य के लिए कई टीमें अगल-अलग शहरों में काम कर रही हैं।
साभार: दैनिक भास्कर
तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने ट्वीट कर लिखा कि गेट वेल सून इजमिर, हम राज्य के सभी संसाधनों के साथ भूकंप प्रभावित अपने नागरिकों के साथ खड़े हैं। हमने अपने सभी संबंधित संस्थानों और मंत्रियों के साथ इस क्षेत्र में आवश्यक कार्य शुरू कर दी है।
स्कूल की बच्चियों को अश्लील मैसेज भेजने वाले ईसाई उपदेशक को कोयंबटूर में गिरफ्तार कर लिया गया। एक निजी कॉलेज में पढ़ने वाली किशोरी ने जे सैमुअल जयसुंदर नाम के उपदेशक के ख़िलाफ़ बुधवार (अक्टूबर 28, 2020) को केस दर्ज करवाया था। उसने नाबालिग लड़कियों को अश्लील मैसेज भेजने वाली उपदेशक की आदत जानने के बाद यह कदम उठाया।
अपनी शिकायत में उसने बताया कि वह अपने स्कूल के दिनों में यानी साल 2011 से 2016 के बीच जयसुंदर द्वारा दी जाने वाली बाइबल की क्लास को अटेंड करती थी। इसी बीच प्रीचर ने उसे अश्लील संदेश फेसबुक पर भेजने शुरू किए। लेकिन उसने उन्हें बिलकुल नजरअंदाज कर दिया।
जब कुछ दिनों पहले वेल्लोर की लड़की ने पुलिस थाने जाकर इस संबंध में शिकायत दर्ज करवाई तो उसमें भी जयसुंदर के ख़िलाफ़ आवाज उठाने की हिम्मत जगी। इस बात को स्वयं पुलिस ने बताया। पुलिस ने कहा, “जब बच्ची को इस संबंध में शिकायत के बारे में पता चला और उसने जाना कि उपदेशक कई लड़कियों को निशाना बना चुका है, तब वह आगे बढ़कर शिकायत करवाने आई।”
शुरुआती जाँच में पुलिस को पता चला है कि जयसुंदर स्क्रिप्चर यूनियन के साथ साल 2006 से काम कर रहा था। वह कई प्राइवेट स्कूलों में भी घूमा है। खासकर उन स्कूलों में जहाँ ईसाई प्रबंधकों द्वारा स्कूलों संचालन किया जाता है और गर्मियों की छुट्टियों में बाइबल की पढ़ाई की जाती है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार पुलिस इंस्पेक्टर अमूठा ने इस संबंध में बताया कि जयसुंदर फेसबुक से लड़कियों की जानकारी इकट्ठा करता था और फिर उनको आपत्तिजनक संदेश भेजता था। कुछ लड़कियों ने मैसेंजर पर उसे रिप्लाई भी किया था।
उन्होंने उन सभी लड़कियों से अपील की है जिन्हें ईसाई उपदेशक द्वारा अश्लील संदेश या फिर धमकियाँ मिलीं, वह सामने आएँ और शिकयात दर्ज करवाएँ। जयसुंदर के खिलाफ़ पॉक्सो एक्ट की धारा 11, 12 के तहत केस दर्ज हुआ है और बुधवार को ही उसकी गिरफ्तारी हुई।
गौरतलब है कि इससे पहले ईसाई मिशनरी स्कूलों में बाइबिल की शिक्षा देने वाली संस्था ‘स्क्रिप्चर यूनियन (SU)’ के तमिलनाडु के निदेशक सैम जयसुंदर ने अपने खिलाफ लगे यौन उत्पीड़न के आरोप के कुछ दिनों बाद अपनी सफाई देते हुए कहा था कि उसके मैसेज को नाबालिग छात्राओं द्वारा गलत तरीके से पढ़ा गया। न्यू इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए, सैम जयसुंदर ने कहा कि लड़कियों के साथ बातचीत में उसका इरादा ‘दुर्भावनापूर्ण नहीं’ था।
आरोपित सैम ने वायरल हो रहे स्क्रीनशॉट की प्रमाणिकता पर कोई सवाल नहीं उठाए थे। उसने कबूल किया था कि वो छात्राओं के साथ बात किया करता था, हालाँकि उसने अपना बचाव करते हुए कहा कि उसके मैसेज को गलत तरीके से पढ़ा गया था।
बता दें कि कुछ दिन पहले सैम जयसुंदर को उसके पद से हटा दिया गया था। वह तमिलनाडु में कई वर्षों तक ‘स्क्रिप्चर यूनियन’ का डायरेक्टर था। ये कई ईसाई मिशनरी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं को आपत्तिजनक मैसेज भेजते हुए उन्हें वीडियो कॉल करने और अकेले में मिलने की माँग करते हुए उन्हें आलिंगन करने की इच्छा जता रहा था। ये सब 2016 से ही चल रहा था और पिछले दिनों कई लड़कियों ने आगे आकर इसका खुलासा किया था।
शार्ली हेब्दो नामक एक फ्रांसीसी व्यंग्य पत्रिका द्वारा पैगंबर मोहम्मद के कार्टून चित्रण और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा और कट्टरपंथी इस्लाम की निंदा ने दुनिया भर में मुस्लिमों को भड़का दिया है। वहीं भारत सरकार ने इस्लामी आतंकवादियों द्वारा फ्रांसीसी लोगों पर हाल ही में किए गए हमलों पर फ्रांस के साथ एकजुटता व्यक्त की। तो दूसरी ओर भारत में कुछ मुस्लिम नेताओं और संगठनों ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति की निंदा करते हुए उनपर पैगंबर का अपमान करने का आरोप लगाया है।
फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों की ओर से पैगंबर मोहम्मद पर की गई टिप्पणी के खिलाफ भोपाल में गुरुवार को हजारों मुस्लिमों की भीड़ सड़क पर उतर आई और प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कॉन्ग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने किया। विरोध प्रदर्शन के दौरान मसूद ने कहा कि अगर उनका बस चलता, तो वे राष्ट्रपति मैक्रों का चेहरा कुचल देते। उन्होंने आगे कहा, “हमारे हाथ बंधे हुए हैं क्योंकि हम कानून के पालन करने वाले नागरिक हैं और हमें हमारे अल्लाह के नबी द्वारा शांति की शिक्षा दी गई है।”
भोपाल सेंट्रल के कॉन्ग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया था। मसूद ने अपने एक ट्वीट में कहा कि पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ अपमानजनक बात बोलने के लिए फ्रांसीसी राष्ट्रपति के विरोध में गुरुवार को हजारों मुस्लिम इकबाल मैदान में इकट्ठे हुए थे।
इस बीच पुलिस ने विधायक आरिफ मसूद समेत 2 हजार अज्ञात लोगों पर कोरोना गाइडलाइन का पालन ना करने को लेकर केस दर्ज कर लिया है।
कथित रूप से पैगंबर मोहम्मद का अपमान करने के लिए फ्रांस के खिलाफ देवबंद के प्रमुख, मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी, देवबंद, ने इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ कोऑपरेशन (OIC), अरब लीग और अन्य मुस्लिम देशों ने नाराजगी जताते हुए फ्रांस के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की है।
इस्लामिक मदरसा ने भारत सरकार से फ्रांस सरकार की निंदा करने और ईशनिंदा करने वालो के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानून लाने की अपील भी की है।
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार भू माफियों पर लगातार कड़ी कार्रवाई कर रही है। ऐसे में हाल में गाजीपुर से बसपा सांसद अफजल अंसारी की पत्नी फरहत अंसारी व अन्य के ख़िलाफ़ धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ है।
इन पर हजरतगंज थाने में आपराधिक षड्यंत्र समेत 6 धाराओं में एफआईआर हुई है। इस संबंध में तहरीर जियामऊ के लेखपाल ने दी है। पुलिस ने इस केस को आईपीसी की धारा 120बी, 420, 447, 448 और 427 के तहत दर्ज किया है।
फरहत सहित अन्य लोगों पर आरोप है कि उन्होंने लखनऊ में फर्जी दस्तावेज के आधार पर सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा किया। जिसके कारण उनपर सरकारी संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दायर हुआ।
लेखपाल ने अपनी तहरीर में कहा है कि फरहत अंसारी द्वारा लखनऊ में अवैध रूप से अपने मकानों का निर्माण कराया गया है और वह लगातार अवैध रूप से मकान में रहकर सरकारी सम्पत्ति को नुकसान पहुँचा रही हैं। लेखपाल की मानें तो इन सबसे राजस्व में भी नुकसान हो रहा है। इसके अलावा आपराधिक षड्यंत्र के तहत उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ करोड़ो रुपए की संपत्ति पर कब्जा किया हुआ है।
उल्लेखनीय है कि एक ओर जहाँ मुख्तार अंसारी के भाई व सपा नेता अफजल अंसारी की पत्नी पर केस दर्ज हुआ है। वहीं, प्रदेश में सियासत का चोला ओढ़े अपराधियों और उनकी अवैध सम्पत्तियों पर यूपी पुलिस का बुलडोजर चलना जारी है।
इससे पहले गाजीपुर में, विधायक मुख़्तार अंसारी के करीबी आजम कादरी के अस्पताल सहित अवैध सम्पत्तियों को ध्वस्त किया गया था। वहाँ स्थित उसकी ‘शम्म-ए-हुसैनी हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर’ अस्पताल को बुलडोजर की मदद से धूल में मिला दिया गया, जो अवैध रूप से कब्ज़ा की गई ज़मीन पर बनी हुई थी।
इस दौरान एसडीएम सहित कई थानों की पुलिस सुबह से ही मौजूद थे और अंततः शनिवार (अक्टूबर 24, 2020) को दोपहर तक इसे ध्वस्त कर दिया गया। पूरा जिला प्रशासन इस दौरान इस कार्रवाई के लिए मुस्तैद रहा। मुख़्तार अंसारी के करीबी आजम ने हमीद सेतु के पास व गंगा के ठीक किनारे इस अस्पताल को बनवाया हुआ था। इस काम में एक पोकलेन और दो जेसीबी लगाए गए थे। 10 थानों की पुलिस की मौजूदगी में मुख़्तार अंसारी के करीबी के अस्पताल को बुलडोजर से ध्वस्त करने की कार्रवाई हुई।
दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों के कथित मास्टरमाइंड में से एक अपूर्वानंद ने गुरुवार (30 अक्टूबर, 2020) को ट्विटर पर इस्लामिक आतंकवादियों के अपराधों पर पर्दा डालने का काम किया है। बता दें इस्लामिक कट्टरपंथियों ने ईशनिंदा की आड़ में फ्रांस में कई गैर-मुस्लिमों को मौत के घाट उतार दिया।
इस्लामिक मॉब द्वारा किए गए अपराधों को हमेशा से ढकने की कोशिश करने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय के वामपंथी प्रोफेसर ने दावा किया कि ‘अल्लाह-हू-अकबर’ और ‘हत्या’ को इस्लाम के साथ नहीं जोड़ा जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि फ्रांस में बिल्कुल निंदनीय कार्य किया गया है।
अपूर्वानंद का बयान हाल ही में इस्लामिक आतंकवादियों द्वारा फ्रांस में हुई हत्याओं के बाद आया है। फ्रांस की सड़कों पर निर्दोष नागरिकों को पैगंबर मुहम्मद और इस्लाम के खिलाफ ईशनिंदा वालीं ’टिप्पणियाँ करने की वजह से अल्लाह-हू-अकबर चिल्लाते हुए मार दिया गया था।
अपूर्वानंद ने अपने ट्वीट के माध्यम से यह बताना चाहा कि पिछले कुछ दिनों में फ्रांस में इस्लामिक आतंकवादियों द्वारा किए गए गैर-मुस्लिमों की हत्या का इस्लाम के साथ कोई लेना-देना नहीं है। अपूर्वानंद के अनुसार, ‘अल्लाह-हू-अकबर’ का नारा फ्रांस की सड़कों पर हुई हत्या की कार्रवाई को एक साथ नहीं जोड़ा जा सकता।
अपूर्वानंद सरल शब्दों में दुनिया को यह बताना चाहते हैं कि फ्रांस में गैर-मुस्लिमों की हत्या का इस्लाम से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि यह अकेले की एक आपराधिक घटना थी।
गौरतलब है कि पेरिस में 47 वर्षीय शिक्षक द्वारा क्लास में पैगम्बर मोहम्मद का कार्टून दिखाने के बाद उसके सर को कलम कर दिया गया था। इस घटना के बाद कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने गैर मुस्लिमों को मौत के घाट उतारना शुरू कर दिया। इन घटनाओं को देखते हुए फ्रांस सरकार ने कट्टरपंथियों के खिलाफ सख्त बयान जारी किया था। वहीं दूसरी ओर देश में अपूर्वानंद जैसे ‘लिबरल-धर्मनिरपेक्ष’ पहले से ही इन इस्लामिक आतंकवादियों के अपराधों पर लिपा-पोती करने में लगे हैं।
अपूर्वानंद ने ट्वीट कर फ्रांस में कायरतापूर्ण आतंकी हमलों के पीछे के धार्मिक मकसद को नजरअंदाज करने का काम किया है। दरअसल, प्रोफेसर ने इस तथ्य को जानने के बाद भी ऐसे आतंकवादियों का समर्थन किया, जिन्होंने फ्रांस में गैर-मुस्लिमों की हत्या इस्लाम को बदनाम करने के आरोप में की थी।
गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर नैतिकता का ढकोसला करने वाले वामपंथी अपूर्वानंद पर हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के ‘मास्टरमाइंड‘ होने का आरोप है।
दिल्ली दंगों के मामले में मुख्य आरोपितों में से एक – गुलफिशा उर्फ गुल, जिसे गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया है, ने दिल्ली पुलिस के सामने स्वीकार किया था कि दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद दंगे भड़काने की साजिश के पीछे मास्टरमाइंड थे।
आरोपित गुल ने दावा किया था कि अपूर्वानंद ने एंटी-हिंदू दिल्ली दंगों में आगे से नेतृत्व के लिए बुर्का पहने ख़वातीनों की टीम तैयार की थी। गुलफिशा ने खुलासा किया था कि अपूर्वानंद ने उन्हें अग्रिम दंगों की सूचना दे दी थी। इसके अलावा उन्होंने प्रदर्शन की आड़ में दंगा करने का निर्देश भी दिया था।