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‘राजनीतिक हितों के लिए पत्रकारों का दमन’ – TRP स्कैम और महाराष्ट्र सरकार पर प्रकाश जावड़ेकर

महाराष्ट्र सरकार और रिपब्लिक टीवी के बीच बढ़ते विवाद के दौरान सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने टीआरपी मामले पर अपना बयान दिया है। उन्होंने रिपब्लिक टीवी के कर्मचारियों पर हो रहे हमले (सरकारी, पुलिसिया) के मद्देनजर कहा है कि राजनीतिक हितों के लिए पत्रकारों का दमन बेहद गलत है।

ऑपइंडिया संपादक अजीत भारती को दिए साक्षात्कार में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से जब टीआरपी स्कैम व किसी खास मीडिया पर हो रहे हमले से संबंधित सवाल पूछा गया, तब उन्होंने अपनी बात रखी।

उन्होंने कहा, “एक कंप्लेन में किसी का नाम आता है, चार्ज दूसरे पर लगता है। ये मुंबई पुलिस जो कर रही है, मुझे लगता है कि इस तरह से पत्रकारों का दमन अपने राजनीतिक हितों के लिए करना गलत है।”

TRP स्कैम, रिपब्लिक टीवी और मुंबई पुलिस

गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से मीडिया में टीआरपी स्कैम का मामला बेहद गरमाया हुआ है। मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में निराधार तरीके से रिपब्लिक टीवी का नाम इस स्कैम में लिए जाने के बाद से चैनल इस मुद्दे पर लगातार अपनी रिपोर्टिंग कर रहा है।

वहीं, मुंबई पुलिस को लेकर भी खुलासे हो रहे हैं कि वह टीआरपी स्कैम में रिपब्लिक टीवी का नाम न होने के बावजूद गवाहों से उनके चैनल का नाम जबरन बुलवा रहा है। अभी हाल में मुंबई पुलिस ने मीडिया संस्थान के 1000 कर्मचारियों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया था, जिसकी जगह-जगह आलोचना हुई।

रिपब्लिक टीवी चैनल के CFO (मुख्य वित्तीय अधिकारी) से संस्थान के हर छोटे-बड़े खर्चे का हिसाब माँगा गया। कर्मचारियों की सैलरी, स्टेशनरी के सामान से लेकर टॉयलेट पेपर तक का खर्चा बताने को कहा गया था।

यहाँ बता दें कि आज केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर द्वारा टीआरपी मामले पर दिया गया बयान ऑपइंडिया को दिए साक्षात्कार का हिस्सा है। यह बयान केवल पूरे इंटरव्यू का एक छोटा सा भाग है। ऑपइंडिया के साथ बातचीत में केंद्रीय मंत्री ने कई अन्य मुद्दों पर भी बात की है।

महेश भट्ट परिवार पर लड़कियाँ और ड्रग्स सप्लाई करने का आरोप लगाया जिस ‘बहू’ ने, उसके खिलाफ ₹1 करोड़ की मानहानि

फिल्म निर्माता महेश भट्ट और मुकेश भट्ट ने लवीना लोध के ख़िलाफ़ सोमवार (26 अक्टूबर 2020) को बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया है। भट्ट भाइयों ने लवीना से 1 करोड़ रुपए हर्जाने की माँग करते हुए मानहानि का केस दर्ज किया है। इसके अलावा कोर्ट से यह गुहार लगाई है कि वह लवीना को झूठ बोलने से, निंदनीय आरोप लगाने से रुकने के आदेश दें।

अब आगे इस मामले की सुनवाई 16 नवंबर को की जाएगी। बता दें कि इससे पहले शुक्रवार (23 अक्टूबर, 2020) को महेश भट्ट की लीगल टीम ने लवीना लोध के आरोपों को खारिज किया था। साथ ही बयान में लिखा था कि वह लवीना के ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई करेंगे।

महेश भट्ट की ओर से यह बयान लवीना लोध की हालिया वीडियो पर जारी किया गया था। इसमें उन्होंने भट्ट भाइयों पर गंभीर आरोप लगाए थे और महेश भट्ट को बॉलीवुड का बहुत बड़ा डॉन कहा था।

इसी वीडियो के मद्देनजर बॉम्बे हाईकोर्ट में भट्ट भाइयों के पहुँचने के बाद लवीना लोध के वकील की ओर से भी बयान जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि लवीना महेश भट्ट और मुकेश भट्ट के ख़िलाफ़ कोई अपमानजनक टिप्पणी नहीं करेंगी।

उल्लेखनीय है कि लवीना लोध के आरोपों पर विशेष फिल्म ने इंस्टाग्राम पर महेश भट्ट की लीगल टीम द्वारा जारी बयान को शेयर किया था। इस बयान में कहा गया था कि उनके ऊपर लगे आरोप सभी फर्जी हैं और अपमानजनक हैं। इसलिए उनके मुअक्किल इस पर एक्शन लेंगे।

लवीना लोध की वीडियो

23 अक्टूबर को जारी की गई वीडियो में लवीना लोध ने दावा किया था की शादी महेश भट्ट के भाँजे से हुई थी। लेकिन उन्हें समय रहते पता चल गया था कि उनका पति ड्रग तस्कर है। उन्होंने इस सच्चाई को जानने के बाद तलाक का केस फाइल कर दिया। लवीना ने अपनी वीडियो में अमायरा दस्तूर नाम की एक्ट्रेस का नाम भी लिया है।

लवीना ने कहा, “उनके (महेश भट्ट के भाँजे) फोन में अलग-अलग तरह की लड़कियों की तस्वीरें हैं, जिसे वह निर्देशकों को दिखाते हैं और उन लोगों को लड़कियाँ भी सप्लाई करते हैं। इन सबकी जानकारी महेश भट्ट को है।”

महेश भट्ट को लेकर उन्होंने कहा था कि वह इंडस्ट्री के सबसे बड़े डॉन हैं। सारा सिस्टम वही ऑपरेट करते हैं। अगर आप उनके नियमों के हिसाब से नहीं चलते तो वो आपका जीना हराम कर देते हैं। लवीना का कहना था कि महेश भट्ट ने न जाने कितने लोगों की जिंदगी बर्बाद कर दी है। कितने एक्टर्स, कंपरोजर्स, डॉयरेक्टर्स को काम से निकाल दिया है।

दिल्ली में डॉक्टरों, म्युनिसिपल कर्मचारियों को नहीं मिल रही सैलरी: केजरीवाल के घर के बाहर धरने पर बैठे तीनों मेयर

दिल्ली के सभी 3 म्युनिसिपल कॉर्पोरेशंस के मेयरों ने मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के घर के बाहर धरना दिया। उनका आरोप है कि म्युनिसिपल कॉर्पोरेशंस के कर्मचारियों को आम आदमी पार्टी की सरकार सैलरी नहीं दे रही है, जिस कारण उन्हें सड़क पर उतरने को बाध्य होना पड़ा है। मेयरों ने AAP सुप्रीमो से कहा है कि या तो वो अंदर बुला कर उनसे बातचीत करें, नहीं तो वो ऐसे ही विरोध प्रदर्शन करते रहेंगे। उधर डॉक्टरों की सैलरी को लेकर भी हंगामा मचा है।

गुरुवार (अक्टूबर 22, 2020) को भी तीनों म्युनिसिपल कॉर्पोरेशंस के डॉक्टरों ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया। 7 दिनों के भीतर ये उनका दूसरा विरोध प्रदर्शन था। हिंदूराव, कस्तूरबा गाँधी और राजन बाबू अस्पताल के डॉक्टरों ने दिल्ली सरकार के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। उन्होंने दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के खिलाफ भी नारेबाजी की और मिल-बैठ कर सैलरी का मुद्दा सुलझाने को कहा।

इन डॉक्टरों को पिछले 3 महीने से सैलरी नहीं मिली है। उनका कहना है कि कोरोना वायरस आपदा के दौरान उन्होंने अपनी जिंदगी खतरे डाल कर काम किया लेकिन अब उन्हें ही सैलरी नहीं दी जा रही है। साथ ही सातवें वेतन आयोग के हिसाब से उन्हें कई अन्य भत्ते भी नहीं प्रदान किए गए हैं। ये डॉक्टर पिछले कई सप्ताह से विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि अब सिर्फ मौखिक आश्वासन काफी नहीं है, एक्शन होना चाहिए।

अब खबर आई है कि दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येन्द्र जैन इन मेयरों से मुलाकात कर के उनकी बात सुनेंगे। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री के साथ बैठक के बाद क्या नतीजा निकलता है, इस पर सबकी नजर है। मेयर जय प्रकाश ने पूछा कि दिल्ली सरकार पब्लिसिटी पर करोड़ों रुपए क्यों खर्च कर रही है? उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार कुछ नहीं कर रही है और वो सीएम से मिल कर पूछना चाहते हैं कि कब तक वो इस मामले में हरकत में आएँगे।

उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर जय प्रकाश का कहना है कि दिल्ली में 6 साल से अरविंद केजरीवाल सरकार है और पिछले 6 सालों से ही ये संकट है। जयप्रकाश ने इसके पीछे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को दोषी ठहराते हुए कहा था, “दिल्ली में 6 साल से अरविंद केजरीवाल सरकार है और पिछले 6 सालों से ही ये संकट है। दिल्ली सरकार ज़िम्मेदार रवैया अपनाते हुए हमारे इस साल के जो 1600 करोड़ रुपए और पिछले साल के 9000 करोड़ रुपए रोक रखे हैं, उसे जारी करे और दिल्ली की जनता के साथ खिलवाड़ न करे।”

एक कुत्ते के साथ रेप, दूसरे के गुप्तांग में डाली 11 इंच की लकड़ी: महाराष्ट्र में हैवानियत की 2 घटनाएँ

मुंबई के पोवई स्थित गैलेरिया शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में 8 साल की ‘नूरी’ नाम के मादा कुत्ते के साथ दरिंदगी की घटना अंजाम दी गई है। घटना के बाद उसे उपचार के लिए वर्ल्ड फ़ॉर ऑल (WFA) के पशु स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। हैवानियत का स्तर इतना भयावह था कि उसके गुप्तांग में 11 इंच की लकड़ी डाली गई थी, फ़िलहाल डॉक्टर ने उसे निकाल दिया है। इसके अलावा पुलिस ने इस मामले के एक आरोपित को गिरफ्तार भी कर लिया है। 

इस मुद्दे की जानकारी देते हुए बॉम्बे एनिमल राइट्स (BAR) के विजय किशोर मोहनानी ने कहा, “22 अक्टूबर 2020 को वहाँ के कई स्थानीय लोगों ने हमें जानकारी दी कि गैलेरिया में नूरी नाम की एक मादा कुत्ता बुरी तरह घायल अवस्था में मिली है। हमें ऐसा लगता है कि किसी मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति जो गैलेरिया में काम करता है या आस-पास ही कहीं रहता है, उसने इस घटना को अंजाम दिया है।”

इसके बाद पोवई पुलिस थाने में घटना के संबंध में अज्ञात लोगों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 377 और पशु क्रूरता सुरक्षा अधिनियम 1960 के तहत एफ़आईआर दर्ज की गई। सोशल मीडिया पर एक वीडियो देखा जा सकता है, जिसमें मादा कुत्ता असहाय और दयनीय स्थिति में पड़ी हुई है।

पशु कल्याण अधिकारी गीतेन डूडानी ने इस घटना पर कहा, “नूरी की हालत फ़िलहाल स्थित है। सर्जरी की मदद से उसके गुप्तांग में फँसी हुई लकड़ी निकाली जा चुकी है। मुझे इस बात पर संदेह है कि घटना दो या दो से अधिक लोगों ने गैलेरिया के पार्किंग क्षेत्र में रात के वक्त अंजाम दी है। हमने पुलिस से निवेदन किया है कि वह उस क्षेत्र के सभी सीसीटीवी कैमरा की जाँच करें।” 

नीतियों में बदलाव को लेकर ‘इन डिफेंस ऑफ़ एनिमल्स’ (IAD) के कार्यकर्ता विवियन ने कहा कि जिन उपद्रवियों ने इस घटना को अंजाम दिया, वह 50 रुपए जुर्माना भर कर निकल जाएँगे। इसके बाद उन्होंने इस बात पर डर भी जाहिर किया कि सब कुछ ऐसे ही चलता रहा तो आने वाले समय में अपराधी आम लोगों के साथ भी ऐसी हिंसात्मक हरकत कर सकते हैं। इस बात के समर्थन में उन्होंने कई आँकड़े भी पेश किए। उनका कहना था, “इस तरह की भयावह और विकृत घटनाओं पर कड़ी सज़ा दी जाएगी, सिर्फ तभी समाज का भला हो सकता है।”   

दिहाड़ी मजदूर ने किया कुत्ते के साथ बलात्कार        

रविवार (25 अक्टूबर 2020) को 65 साल के एक व्यक्ति को नवी मुंबई स्थित नेरुल रेलवे स्टेशन पर कुत्ते के साथ बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। आरोपित का नाम महेंद्र डी पवार था। हैवानियत की यह पूरी घटना स्टेशन पर लगे सीसीटीवी फुटेज की मदद से सामने आई, इसके बाद उसे पीपुल फ़ॉर एनिमल्स (पीएफ़ए यूनिट 2) के पास भेज दिया गया। 

इस मामले पर जानकारी देते हुए पीएफ़ए के कार्यकर्ता विजया रंगरे ने कहा, “लगभग एक हफ़्ते पहले सीसीटीवी फुटेज सामने आई थी। उसमें साफ़ देखा जा सकता था कि नेरुल स्टेशन कॉम्प्लेक्स के पश्चिमी हिस्से में एक व्यक्ति मादा कुत्ते के साथ हैवानियत कर रहा है। घटना की जानकारी मिलने के बाद वह और उनके सहकर्मी आदित्य पाटिल मौके पर पहुँचे और घटना की खोजबीन शुरू कर दी। बहुत जल्द उन्हें पता चला कि आरोपित का नाम महेंद्र डी पवार था।

जाँच के दौरान उन्हें पता चला कि नेरुल स्टेशन कॉम्प्लेक्स के नज़दीक सोने वाले मजदूर ने रात में शराब पी और मादा कुत्ते के साथ दरिंदगी की। घटना के कुछ समय बाद तक आरोपित की नेरुल स्टेशन के पास तलाश की गई लेकिन उसका कोई पता नहीं चला था। इसके बाद नेरुल पुलिस और पीएफ़ए के समूह ने मिल कर उसे गिरफ्तार किया।

जाँच के दौरान उन्हें पीएफ़ए के कार्यकर्ता ने बताया, “हमने इस घटना के संबंध में सारे इलेक्ट्रॉनिक सबूत और चश्मदीदों के गवाह पुलिस को दे दिए हैं जिससे आरोपित को जेल भेजा जा सके।” इस घटना में भारतीय दंड संहिता की धारा 377 और पशु क्रूरता अधिनियम 1960 की धारा 11 (1) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।   

भारत में मुस्लिम लेकर आए थे जलेबी तो फिर श्रीराम के जन्मदिन पर कैसे बनी थी ‘कर्णशष्कुलिका’: जलेबी के मुगलीकरण पर बहस

इतिहास के साथ छेड़छाड़ करके उसे आज की पीढ़ी के सामने रखना सोशल मीडिया पर एक प्रचलन की तरह है। संस्कृति, सभ्यता से लेकर खाने पीने तक की चीजों में नैरेटिव घुसाने की कोशिश अक्सर यहाँ होती रहती है। ऐसे में तथ्य व तर्क ही इस नैरेटिव को धराशायी करने के कारगर तरीके हैं। हाल ही में कुछ ऐसा ही जलेबी को लेकर हुआ है। जी हाँ, बिरयानी के बाद अब जलेबी को लेकर दावा किया जा रहा है कि इसे भारत में मुस्लिम लेकर आए।

गुजरात हिस्ट्री’ नाम के ट्विटर हैंडल से कल दावा किया गया कि भारत में जलेबी मुस्लिमों की देन हैं। जलेबी नाम अरबी के शब्द जलाबिया से निकला है। फारसी में इसे जलिबिया कहा जाता है। यह भारत का मशहूर मिष्ठान है। इसके अलावा मुस्लिम भारत में चपाती बनाने की कला, कुल्फी, गुलकंद, गुलाबजामुन, जलेबी, पुलाव, फालुदा, बर्फी, बीरंज, मुरब्बो, हल्वो, शिरो और शक्कर पारा लेकर आए थे।

आगे ट्वीट में ‘गुजरात हिस्ट्री’ लिखता है कि मध्यकाल में कई सदियों तक मुस्लिमों ने भारत में राज किया। इसके बाद उन्होंने यह भी लिखा कि कुछ लोग हो सकता है उनके ट्वीट को पसंद करें कुछ न पसंद करें लेकिन वह ऐतिहासिक तथ्यों को नहीं बदल सकते।

अपने ट्वीट का स्रोत उन्होंने गुजरात की एक इतिहास की किताब, ‘भारत का सांस्कृतिक इतिहास’ को बताया है। साथ ही लिखा कि मुस्लिमों के 550 साल के शासल काल में मुस्लिमों और हिंदुओं के बीच खानपान, रहन-सहन, भाषा, मान्यताओं, संस्कृति और परंपराओं का आदान प्रदान हुआ।

अब ‘गुजरात हिस्ट्री’ के इसी दावे पर कुछ लोगों में काफी नाराजगी है। ‘आदि’ नाम के एक ट्विटर यूजर ने दावा किया है कि जलेबी प्रभु राम के जन्मदिन पर भी बनाई जाती थी जिसका जिक्र हिन्दुओं की आध्यात्मिक पुस्तक ‘रामायण’ में है। उस समय जलेबी को ‘कर्णशष्कुलिका’ कहा जाता था।

इसके बाद एक राज शर्मा नाम के ट्विटर यूजर ने बताया कि जलेबी चूँकि कान के पन्ना जैसी लगती थी इसलिए इसका नाम ‘कर्णशष्कुलिका’ रखा गया। इसके अलावा, 17वीं सदी की किताब में एक मराठा ब्राह्मण रघुनाथ ने जलेबी बनाने की विधि का उल्लेख कुण्डलिनि नाम से किया है। इसका आधार ‘भोजनकुतूहल’ नाम की किताब है।

राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के जानकार दिव्य कुमार सोती लिखते हैं, “बर्फी बनाने के लिए दूध, बिरयानी बनाने के लिए चावल, मुरब्बा बनाने के लिए आँवला और जलेबी बनाने के लिए गुड़-चीनी मुसलमान अरब के रेगिस्तान से भारत लेकर आए थे। इतिहास नहीं जानते तो कम से कम आपको भूगोल और खेती का तो पता होना चाहिए!”

इसी प्रकार एक यूजर @commentlogy लिखता है कि मुगलों से 1500 साल पहले संगम काल में तमिल कविता में जिक्र है कि आखिर कैसे चावल व मसालों से मीट बनता था इसलिए ये मानना कि पुलाव मुगलों ने सिखाया गलत है और इसे सूची से हटाया जाए।

डॉ पीएस विष्णुवर्धन तंज भरे अंदाज में लिखते हैं, “तो धरती के सबसे अमीर भारतीय आदि काल की तरह तब तक कच्चा माँस खाते थे, जब तक धरती के सबसे गरीब इलाकों से मुगल यहाँ आइस्क्रीम और बिरयानी  नहीं लेकर आए।”

ट्विटर का मशहूर ट्विटर अकॉउंट ‘ट्र इंडोलॉजी’ भी गुजरात हिस्ट्री को चपाती बनाने की विधि पर आड़े हाथों लेता है और पूछता है कि रोटी बनाने की विधि मुस्लिम लेकर आए भारत में? फिर कहता है, “महान, चपाती मूलत: संस्कृत शब्द चर्पटी से निकला है। दोनों का अर्थ एक ही होता है। ऐसे कोई शब्द फारसी और अरबी में नहीं है। चर्पटी का उल्लेख अम्राकोसा (Amarakośa) में है, जिसे पैगंबर के जन्म से भी सैकड़ों साल पहले लिखा गया था।”

राजस्थान: सैलरी माँगने पर दलित सेल्समैन को शराब ठेकेदारों ने डीप फ्रीजर में डाल ज़िंदा जलाया

राजस्थान में हिंसा की घटनाएँ थमने का नाम ही नहीं ले रही हैं। अलवर के कुमपुर गाँव से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ शनिवार (अक्टूबर 24, 2020) को एक सेल्समैन की शराब का ठेका चलाने वाले ने सिर्फ इसीलिए हत्या कर दी, क्योंकि वो सैलरी माँग रहा था। उक्त सेल्समैन को डीप फ्रीजर में डाल कर जिंदा ही जला डाला गया। उसका अपराध ये था कि उसने अपनी पाँच महीने से रोकी हुई सैलरी की माँग की थी। राजस्थान की इस घटना को लेकर सत्ताधारी कॉन्ग्रेस नेता चुप हैं।

थानाधिकारी द्वारा सिंह ने जानकारी दी है कि झाड़का निवासी रमेशचंद्र के पुत्र रूप सिंह धानका ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि उनका भाई 23 वर्षीय कमल किशोर शराब ठेका संचालक राकेश यादव और सुभाषचंद के यहाँ काम करता था। कुमपुर-भगेड़ी मोड़ पर एक कंटेनर में इस ठेके को चलाया जा रहा था। ठेकेदार ने कमल किशोर को 5 महीने से सैलरी नहीं दी थी। माँगने पर उससे मारपीट की जाती थी और उसे धमकाया जाता था।

दोनों ठेकेदार माछरोली के निवासी हैं। शनिवार की शाम ये दोनों कमल किशोर के घर आए और उसे ले गए। जब कमल पूरी रात घर नहीं आया तो परिवार वालों को लगा कि वो ठेकेदारों के साथ कहीं गया होगा। इसके अगले दिन मिली कि कुमपुर शराब ठेके में आग लग गई है। पुलिस ने परिजनों के साथ घटनास्थल पर पहुँच कर लोहे के कंटेनर को खुलवाया। अंदर कमल किशोर का शो डीप फ्रीजर में बैठी हुई अवस्था में मिला, जो पूरी तरह जल चुका था।

आरोप है कि ठेकेदार राकेश और सुभाष ने पेट्रोल डाल कर कमल को ज़िंदा जलाया और फिर कंटेनर को भी आग के हवाले कर दिया। परिजनों की शिकायत के बाद भेड़टा श्योपुर निवासी सुभाष यादव और फातियाबाद निवासी राकेश यादव के खिलाफ हत्या के साथ-साथ एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपित राकेश की माँ सरपंच है। पुलिस ठेके के कागजात की जाँच-पड़ताल कर रही है।

इस ठेके को कंटेनर में चला कर आबकारी विभाग के नियम-कायदों की सरेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही थीं। नियमानुसार सीसीटीवी कैमरे भी नहीं फिट किए गए। तमाम मापदंडों के उल्लंघन के बावजूद विभाग सुषुप्त अवस्था में बैठा रहा, जिससे उस पर भी तमाम सवाल उठ रहे हैं। डीएसपी ने इस मामले को गंभीर संदिग्ध बताया है। परिजन न्याय की माँग करते हुए शव का पोस्टमॉर्टम न कराने की जिद पर अड़े थे, लेकिन प्रशासन के समझने के बाद वो मान गए।

‘आज तक’ की खबर के अनुसार, खैरथल थाने में एफआईआर नंबर 405/20 आईपीसी की धारा 302, 436, 120 बी व 3(2)(v) एससी-एसटी के तहत दर्ज की गई है। दोनों ठेकेदार फ़िलहाल फरार हैं। आरोप है कि दुकान में लाखों का माल जलने के बाद भी वो सामने नहीं आए और हत्या के आरोप के बाद भी पुलिस ने उनकी तलाश करने का प्रयास नहीं किया। दुकान की चाभी भी मृतक के पास ही मिली। प्रक्रिया के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया गया है।

कुछ ही दिनों पाहे राजस्थान में करौली जिले के बूकना गाँव में जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद में 50 वर्षीय पुजारी बाबूलाल वैष्णव को पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया गया था। बाबूलाल वैष्णव को गंभीर हालत में जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ उन्होंने दम तोड़ दिया। इस बीच, राज्य के साधुओं ने मंदिर के पुजारी की हत्या के विरोध में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया था। बाबूलाल गाँव के राधागोविंद मंदिर के प्रधान पुजारी थे।

प्रकाश जावड़ेकर ने तकनीक संग दिया कोरोना जागरूकता का संदेश, पिछले 6 हफ्ते से लगातार कोविड पर आ रही गुड न्‍यूज

कोरोना वायरस की महामारी से उत्पन्न चुनौती और खतरे से निपटने के लिए भारत सरकार सभी आवश्यक कदम उठा रही है। इस बीच मंत्री भी अपने-अपने तरीके से संदेश देकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। इसी कड़ी में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने अनोखे तरीके से लोगों के बीच अपना संदेश जारी किया।

उन्होंने सोशल मीडिया और फेसबुक के कवर फोटो के माध्यम से लोगों के समक्ष कोरोना को लेकर जागरूकता फैलाई। इस क्रम में उन्होंने वन्यजीव के संरक्षण को लेकर भी संदेश दिया। एक कवर फोटो में #UnlockWithPrecautions के हैशटैग का इस्तेमाल करते हुए 6 फीट की दूरी बनाए रखने का संदेश दिया। इसके साथ ही उन्होंने फेस मास्क, हाथ धोने और सेनेटाइजर के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। 

इसी तरह एक अन्य कवर फोटो में उन्होंने 2 से 8 अक्टूबर तक वन्यजीव सप्ताह को लेकर संदेश दिया। इसमें लिखा गया था, “वन्यजीव है हमारी धरोहर, हर हाल में करेंगे इसका संरक्षण।” 

उल्लेखनीय है कि कोविड-19 के नए मामलों में इस हफ्ते (19-25 अक्‍टूबर) सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। पिछले हफ्ते के मुकाबले करीब 16% कम नए मामले सामने आए जबकि मौतों की संख्‍या में इस दौरान 19% कम रही। इस हफ्ते 3.6 लाख से थोड़े ज्‍यादा केस आए हैं जो कि पिछले तीन महीनों का सबसे कम आँकड़ा है। इससे पहले 20-26 जुलाई के बीच कोरोना वायरस के 3.2 लाख केस आए थे। पिछले हफ्ते देश में करीब 4.3 लाख केस दर्ज हुए थे। यह लगातार छठा हफ्ता है, जब देश में कोविड पीक (7-13 सितंबर) के बाद से मामले कम दर्ज किए गए हैं। एक तरह से यह दिखाता है कि भारत में कोरोना महामारी काबू में आ रही है।

रिकवरी रेट अब 90 पर्सेंट के पार

रविवार (अक्टूबर 25, 2020) को भारत ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अहम मुकाम हासिल किया। कोविड-19 की रिकवरी दर 90% से ज्‍यादा हो चुकी है। कुल 79.1 लाख में से अब‍ तक करीब 71.3 लाख लोग रिकवर कर चुके हैं। पिछले हफ्ते के मुकाबले वायरस से मौतों की संख्‍या 19% कम रही है। इस हफ्ते कोविड-19 से देश में लगभग 4,400 मौतें हुईं जबकि पिछले हफ्ते 5,455 मरीजों की मौत हुई थी। 14-20 सितंबर वाले हफ्ते के बाद से हर हफ्ते मौतों की संख्‍या भी घटी है।

रविवार को लगभग हर राज्‍य में कोविड-19 के आँकड़ों में कमी देखी गई, लेकिन दिल्‍ली अपवाद रही। वहाँ पर 4,136 नए मामले सामने आए जो पिछले 38 दिन में सबसे ज्‍यादा हैं। दशहरा और दुर्गा पूजा के बीच कर्नाटक देश का तीसरा राज्‍य बन गया है जहाँ 8 लाख से ज्‍यादा कोविड केस हैं। वहाँ रविवार को 4,439 नए मामले सामने आए। कोविड संक्रमण से सबसे ज्‍यादा प्रभावित महाराष्‍ट्र है और वहाँ कुल मामले 17 लाख के करीब पहुँच गए हैं।

ठाकरे के गाँजे की खेती वाले बयान पर कँगना का जवाब- ये महादेव, पार्वती का घर है जिसे देवभूमि कहते हैं

बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत ने महाराष्ट्र मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के ऊपर एक बार फिर निशाना साधा है। कंगना ने एक वीडियो जारी कर महाराष्ट्र के सीएम व महाराष्ट्र सरकार से कुछ सवाल किए हैं। उन्होंने अपनी वीडियो में अपने ऊपर हुई टिप्पणी को लेकर पूछा कि अब नारी सशक्तिकरण वाले कहाँ गए। उन्होंने कहा कि जिस हिमाचल के बारे में सीएम ने तुच्छ बातें की उसे देवभूमि कहा जाता है। दरअसल, उद्धव ठाकरे ने एक बयान में कहा था कि हम घरों में तुलसी उगाते हैं, गाँजा नहीं! ठाकरे ने यह भी कहा था कि गाँजा उनके राज्य में उगता है, ना कि महाराष्ट्र में।

कंगना ने वीडियो में कहा, “उद्धव ठाकरे तुमने कल मुझे अपने भाषण में गाली दी। मुझे नमक हराम कहा। इससे पहले भी मुझे सोनिया सेना के कई लोगों ने मुझे गंदी गलियाँ दी हैं। मुझे धमकाया है। मेरे जबड़े तोड़ने की बात या मुझे मारने की बात खुलेआम कही है। लेकिन आप देखेंगे कि नारी सशक्तिकरण के ठेकेदारों ने कुछ नहीं कहा।”

आगे कंगना ने कहा, “उसी भाषण में उद्धव ठाकरे ने माता पार्वती की जन्मभूमि और महादेव की कर्मभूमि हिमालय पर टिप्पणी की। आज भी यहाँ कण-कण में माँ पार्वती और भगवान शिव बसे हुए हैं। इसे देवभूमि कहा जाता है फिर भी इसके बारे में इतनी तुच्छ बातें की गई।”

बॉलीवुड एक्ट्रेस ने शिवसेना नेता को लेकर कहा कि एक मुख्यमंत्री होने के बावजूद उद्धव ठाकरे ने पूरे राज्य को नीचे गिराया है क्योंकि वह एक लड़की से नाराज हैं और वो लड़की उनके बेटे की उम्र की है।

रनौत कहती हैं, “चीफ मिनिस्टर आप मुझसे बहुत ज्यादा नाराज हुए थे जब मुझे धमकाने के बाद मैंने वहाँ (मुंबई) की तुलना पीओके से की थी क्योंकि वहाँ आजाद कश्मीर के नारे लगे थे और आपकी सोनिया सेना ने उसे डिफेंड किया था। तब संविधान को बचाने वाले आए थे। लेकिन आपने अपने भाषण में भारत की तुलना पाकिस्तान से की, पर अब वह संविधान वाले नहीं आएँगे क्योंकि उनके मुँह में कोई पैसा नहीं ठूस रहा है।”

अपनी बात रखते हुए कंगना ने कहा, “मैं कहना चाहती हूँ कि जितने भी देशभक्त लोग हैं उनका एक रवैया मैंने देखा है कि वो कोई सहायता नहीं करते। उनका कहना होता है कि यदि आप देश भक्ति के बारे में बात करते हैं, देश के लिए कुछ कर रहे हैं, तो कौन सा हमारे लिए कर रहे हैं, देश के लिए कर रहे हैं। वो कहते हैं कि हमारे पास न पैसे हैं, न हमें ठूसने आते हैं, न हम खुद ही लेते हैं। लेकिन देश विद्रोह के लिए आपके मुँह में पैसे ठूसे जाते हैं।” 

वह कहती हैं कि कल एक मुख्यमंत्री ने एक लड़की को सरेआम गाली दी। लेकिन ऐसे लोगों ने कुछ नहीं कहा। उन्होंने उद्धव ठाकरे को कहा, “कुल मिलाकर मैं ये बात कहना चाहती हूँ मुख्यमंत्री जी सरकार आती जाती हैं। आप सरकारी कर्मचारी हैं। मुंबई के लोग आपसे खुश नहीं हैं। सत्ता आती जाती है चीफ मिनिस्टर लेकिन जो एक बार सम्मान खो देता है वह उसे नहीं पा सकता है।”

कंगना रनौत का पोस्ट

कंगना रनौत के पोस्ट

अपने एक पोस्ट में भी कंगना ने महाराष्ट्र सीएम को तुच्छ व्यक्ति बताया है। उन्होंने लिखा:

”मुख्यमंत्री आप बहुत तुच्छ व्यक्ति हैं। हिमाचल को देव भूमि कहा जाता है, यहाँ सबसे अधिक संख्या में मंदिर हैं और क्राइम रेट शून्य है। हाँ, यहाँ की जमीन बहुत उपजाऊ है, यह सेब, कीवी, अनार और स्ट्रॉबेरी की उपज होती है, यहाँ कोई कुछ भी उगा सकता है। आप एक ऐसे नेता हैं जिसका नजरिया एक ऐसे राज्य को लेकर बदला लेने वाला, अदूरदर्शी और कम जानकारी वाला है, जो भगवान शिव और मां पार्वती का निवास स्थान है। इसके अलावा कई महान संतों जैसे मार्केंडेय, मनु ऋषि और पांडवों ने निर्वासन का लंबा समय हिमाचल में बिताया।”

रनौत ने आगे लिखा, ”मुख्यमंत्री, आपको खुद पर शर्म आनी चाहिए, जनसेवक होने के बावजूद आप इस तरह के तुच्छ झगड़े में शामिल हैं, अपनी शक्ति का इस्तेमाल आपसे अहसमत लोगों के अपमान और नुकसान के लिए कर रहे हैं। गंदी राजनीति खेलकर आपने जो कुर्सी हासिल की है, उसके लायक आप नहीं हैं। शर्म की बात है।” 

Hindustantimes

एक ट्वीट में वह लिखती हैं कि एक मुख्यमंत्री की जुर्रत देखिए वह देश को बाँट रहा है, किसने उन्हें महाराष्ट्र का ठेकेदार बनाया? वह केवल जनसेवक हैं, उनसे पहले वहाँ कोई और था और जल्द ही वह बाहर होंगे और कोई और राज्य की सेवा के लिए आएगा। वह ऐसा क्यों व्यवहार कर रहे हैं कि महाराष्ट्र के मालिक हैं।

गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे ने दशहरा उत्सव में जनता को संबोधित करते हुए कंगना रनौत के लिए नमक हराम जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। उन्होंने यह भी कहा था कि लोग मुंबई की इस तरह की तस्वीर बनाना चाहते हैं कि मुंबई पीओके हैं, यहाँ हर जगह ड्रग्स लेने वाले लोग हैं। वे नहीं जानते कि हमारे घरों में तुलसियाँ उगाते हैं, गांजा नहीं। गांजे के खेत आपके राज्य में है। आप जानते हो कहाँ, महाराष्ट्र में नहीं।

भारत का, भारत के लिए समर्पित मीडिया समूह IDMA: ऑपइंडिया, रिपब्लिक समेत 9 ग्रुप लगाएँगे विदेशी हस्तक्षेप पर लगाम

‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ और ‘ऑपइंडिया’ सहित 9 मीडिया संस्थानों ने मिल कर ‘इंडियन डिजिटल मीडिया असोसिएशन (IDMA)’ नामक प्लेटफॉर्म का गठन किया है। ये भारत में डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का सबसे बड़ा समूह है। ये भारत के स्वामित्व वाला, भारत का, और भारत के लिए समर्पित मीडिया समूह होगा। इसके सभी संस्थापक सदस्यों के 10 करोड़ यूजर्स हैं और ये सभी ‘इंडिया फर्स्ट’ की थ्योरी पर काम करेंगे।

इसमें रिपब्लिक, ऑपइंडिया, गोवा क्रॉनिकल, OTV डिजिटल, देश गुजरात, असम लाइव, न्यूज एक्स, संडे गार्जियन और इन खबर शामिल हैं। इसके साथ ही 25 से अधिक डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म इससे जुड़ने वाले भी हैं। ऑपइंडिया अंग्रेजी की संपादक नूपुर शर्मा ने इसका स्वागत करते हुए कहा कि डिजिटल मीडिया के पास राष्ट्रीय चर्चाओं को आकार देने की सामर्थ्य है। उन्होंने कहा कि पंचलाइंस और एजेंडा की जगह अब सच्चाई ने ले ली है।

भारतीय इतिहास के इस सबसे बड़े डिजिटल मीडिया समूह IDMA का उद्देश्य न सिर्फ सभी सदस्यों के हितों की रक्षा करना है, बल्कि इससे सम्बद्ध संगठनों से लेकर यूजरों तक से भी संपर्क स्थापित करना है। ये राष्ट्रवादी सिद्धांतों पर काम करेगा और इसके सभी सदस्य भारतीय होंगे, इसमें कोई विदेशी शामिल नहीं होगा। मीडिया में विदेशी हस्तक्षेप और नियंत्रण को कम करना भी इसका उद्देश्य है। समूह ने विदेशी स्वामित्व के खिलाफ सभी सम्पादकों को आगे आने की अपील की है।

लगातार बदलती दुनिया में डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का आगे आने वाली पत्रकारिता को आकार देने में एक बड़ा रोल होगा और इसे राष्ट्रवादी, नैतिक, पारदर्शी, डायनेमिक और भारतीय हितों की रक्षा के सिद्धांत के साथ IDMA को लॉन्च किया गया है। समूह का मानना है कि भारतीय मीडिया में विदेशी स्वामित्व से देश के हितों के साथ समझौता होता है और इसे खत्म किया जाना चाहिए। इससे जनता के ‘राइट टू इन्फॉर्मेशन’ की रक्षा भी करनी है।

रिपब्लिक और ऑपइंडिया सहित ये सभी 9 मीडिया प्लेटफॉर्म्स डिजिटल मीडिया समूह IDMA के संस्थापक सदस्य होंगे। ‘गोवा क्रॉनिकल’ के संपादक सेविओ रोड्रिगुएस ने कहा कि अगले कुछ दिनों में भारत डिजिटल मीडिया की तरफ एक बड़ा शिफ्ट देखने वाला है। उन्होंने कहा कि ‘वाइब्रेंट इंडिया’ की मुख्य आवाज़ के रूप में IDMA का गठन इन मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ आने से हुआ है, जो ‘डिजिटल मीडिया स्पेस’ को सुरक्षित रखेंगे।

NIT पटना की छात्रा की तस्वीर का दैनिक भास्कर ने किया ड्रग केस में इस्तेमाल, सोशल मीडिया ने खोली पोल

मीडिया अपने पाठकों के साथ किस तरह की बेईमानी करता है, इसका ताजा उदाहरण एक बार फिर देखने को मिला। दरअसल, परसों एक खबर आई कि ड्रग्स मामले में एनसीबी ने टीवी कलाकार प्रीतिका चौहान के खिलाफ़ कार्रवाई की है और उन्हें 8 नवंबर तक के लिए जेल भेज दिया है।

इस खबर को लगभग हर मीडिया चैनल व समाचार पत्रों ने प्रमुखता से उठाया। दैनिक भास्कर भी इस भीड़ में पीछे नहीं छूटा। उन्होंने भी प्रीतिका के ख़िलाफ़ लिए गए एक्शन पर अपनी खबर की। हालाँकि, खबर के साथ उन्होंने एक तस्वीर का इस्तेमाल किया, जो न तो प्रीतिका की थी और न ही प्रतीकात्मक तस्वीर थी।

इसके बाद सोशल मीडिया पर यह मुद्दा उठा। दैनिक भास्कर की ‘जागरूकता’ की पोल खोलते हुए BefittingFacts ने तथ्य सामने रखे। ट्विटर अकॉउंट से बताया गया कि दैनिक भास्कर अपनी खबर में जिस लड़की को प्रीतिका चौहान बताकर खबर दे रहा है कि उन्हें ड्रग केस में अरेस्ट किया गया, वह लड़की अनीता भारती है, पटना में पढ़ती है न कि प्रीतिका चौहान।

अपनी बात को साबित करने के लिए ट्विटर अकॉउंट होल्डर ने एक और पेपर की कटिंग शेयर की, जिसमें अनीता भारती और उनके भाई अभिषेक भारती की तस्वीर है। ये दोनों पिछले दिनों अपनी वेबसाइट ट्यूऑन खोलने के कारण चर्चा में आए थे। इन्होंने इस वेबसाइट के जरिए एक सकारात्मक पहल की शुरुआत की थी और बच्चों को एक ऐसा प्लेटफॉर्म मुहैया करवाया था, जहाँ वह मुफ्त ट्यूशन ले सकें।

इस पेपर कटिंग के मुताबिक अनीता एनआईटी पटना से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग की छात्रा हैं। मगर, दैनिक भास्कर उनके चेहरे का इस्तेमाल प्रीतिका के रूप में कर रहा है। साथ ही बता रहा है कि उनके पास से 99 ग्राम गांजा बरामद हुआ है।

BefittingFacts अपने ट्वीट में लिखते हैं, “दैनिक भास्कर ने ड्रग संबंधी केस में हुई प्रीतिका चौहान की गिरफ्तारी के लिए अनीता भारती की तस्वीर का इस्तेमाल किया। दैनिक भास्कर द्वारा घटिया स्तर की पत्रकारिता।”

गौरतलब हो कि एक ओर जहाँ पर मौजूद जानकारी के मुताबिक साल 2019 तक इस अखबार का सर्कुलेशन प्रतिदिन 45,79,051 का है, ऐसे में सोचने वाली बात है कि अगर इनकी ऐसी लापरवाही की पोल सोशल मीडिया पर खुल भी गई तो क्या हर पाठक तक इनकी गलती पहुँच पाएगी। शायद नहीं!

‘दैनिक भास्कर’ मीडिया जगत में 6 दशक को पार कर चुका है और यह अखबार गाँव-गाँव तक में अपनी जगह बना चुका है। ऐसे में संभव ही नहीं है कि इनके बिना गलती माने इनकी लापरवाहियों की पोल हर किसी के सामने खुल पाए। ऐसे ही संस्थान हमेशा से पाठक को बेवकूफ बनाकर कामचलाऊ पत्रकारिता करते आए हैं। इन्होंने अपनी लापरवाही के नाम पर कभी मौलवी को बाबा बताया है तो कभी मुस्लिम आलिम को तांत्रिक लिखने का काम किया है