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मिर्जापुर सीरीज के ‘मुन्ना’ से प्रभावित होकर तौसीफ ने चलाई थी निकिता पर गोली: मामा ने जेल से कराई हथियार की व्यवस्था

मेवात में हुए निकिता हत्याकांड के मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। निकिता की गोली मार कर हत्या करने वाला आरोपित तौसीफ मिर्जापुर वेब सीरीज़ से प्रभावित था जिसमें मुख्य अभिनेता नायिका द्वारा नकार दिए जाने के बाद उसकी हत्या कर देता है। दैनिक जागरण में प्रकाशित ख़बर के अनुसार पूछताछ के दौरान निकिता की हत्या के आरोपित तौसीफ ने इस बात का खुलासा किया कि वह मिर्जापुर के किरदार ‘मुन्ना’ से प्रभावित था। 

तौसीफ ने बेहद स्पष्ट रूप से कहा कि जिस तरह मिर्जापुर वेब सीरीज़ में ‘मुन्ना’ एक लड़की द्वारा नकार दिए जाने पर उसकी हत्या कर देता है, इस बात से प्रभावित होकर उसने निकिता तोमर की हत्या करने की योजना बनाई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) द्वारा की जा रही पूछताछ में उसने खुलासा किया कि जब निकिता ने उसका प्रस्ताव ठुकरा दिया तब उसे समझ नहीं आया कि उसे क्या करना चाहिए। इसके बाद उसने हाल ही में आई इस वेब सीरीज़ मिर्जापुर की दूसरी किस्त देखी और उससे प्रभावित होकर उसने निकिता की हत्या को अंजाम दिया। 

इसके अलावा पूछताछ में और भी कई हैरान कर देने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट में एक और बात सामने आई है कि आरोपित तौसीफ के मामा ने ही उसे घटना को अंजाम देने के लिए हथियार उपलब्ध कराया था। उसका मामा इस्लामुदीन अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि की वजह से पहले ही जेल में बंद है, उसने जेल के भीतर रहते हुए तौसीफ को हथियार उपलब्ध कराया था। साल 2018 में एक पुलिस अधिकारी का अपहरण करने के आरोप में उसे 10 वर्ष की सज़ा सुनाई गई थी। फ़िलहाल वह इस मामले की सज़ा के लिए जेल में बंद है। 

निकिता तोमर की हत्या

आरोपित तौसीफ 21 वर्षीय छात्रा निकिता तोमर पर लगातार इस्लाम कबूल करने का दबाव बना रहा था। जब निकिता ने उसके प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया, तब उसने निकिता की गोली मार कर हत्या कर दी। इस हफ्ते की शुरुआत में फ़रीदाबाद के वल्लभगढ़ स्थित अग्रवाल कॉलेज के सामने दो लोगों ने दिनदहाड़े निकिता को गोली मार दी थी। जिसमें से एक आरोपित तौसीफ लगातार उसे धमकी दे रहा था और धर्म परिवर्तन का दबाव भी बना रहा था। 

इस संबंध में निकिता ने पिछले महीने छेड़छाड़ और उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी हालाँकि, बाद में इस मामले में समझौता हो गया था। यह पूरी घटना कैमरे में रिकॉर्ड हो गई थी और कुछ ही देर बाद पूरे सोशल मीडिया पर इसे लेकर प्रतिक्रियाएँ उठने लगी थी। इसके कुछ ही समय बाद पुलिस ने दोनों आरोपितों तौसीफ और रेहान को गिरफ्तार कर लिया था।

मेवात में दलित नर्स का अपहरण: पीड़िता के पिता ने कहा- इकबाल बनाता था शादी और धर्म परिवर्तन का दबाव, FIR दर्ज

हरियाणा के मेवात से लगातार ऐसी ख़बरें सामने आ रही हैं जिनमें हिन्दू समुदाय के लोगों के साथ अत्याचार हो रहा है। इसमें भी विशेष रूप से हिन्दू समुदाय की लड़कियाँ जिनका मर्ज़ी के विरुद्ध धर्म परिवर्तन कराया जाता है, ऐसा ही एक मामला मेवात के बिछौर थाना क्षेत्र के अंतर्गत नीमका गाँव में सामने आया है। इस घटना में इकबाल नाम के युवक ने दलित समुदाय की नर्स का अपहरण किया था, जिसके बाद लड़की के पिता ने आरोपित के विरुद्ध अपहरण और दुष्कर्म समेत अन्य गम्भीर धाराओं में मामला दर्ज कराया है। इसके बाद पुलिस ने आरोपित की तलाश शुरू कर दी है। 

महेंद्रगढ़ के निवासी पीड़िता नर्स के पिता ने पुलिस को दी गई शिकायत में कहा कि वह अनुसूचित जाति से संबंध रखते हैं। उनकी बेटी पुन्हाना उपमंडल के गाँव सिंगार स्थित पीएचसी में स्टाफ नर्स के पद पर कार्यरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि ड्यूटी के दौरान नीमका गाँव के रहने वाले इकबाल नाम के युवक ने छेड़छाड़ की। इसके बाद उसने धर्म परिवर्तन करके निकाह करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। शादी नहीं करने की बात पर उसने अपहरण, दुष्कर्म और जान से मारने की धमकी तक दी थी। पीड़िता ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी लगभग 20 दिन पहले गाँव आकर अपने परिजनों को दी थी। 

इसके बाद लड़की के पिता ने बताया कि जब वह ड्यूटी के लिए सिंगार पीएचसी वापस गई तब से उसका फोन बंद है। काफी समय तक उसकी कोई जानकारी नहीं मिलने पर वह सिंगार पीएचसी आए और अपनी बेटी की तलाश शुरू की लेकिन फिर भी कुछ पता नहीं चला। इस खोजबीन के दौरान लड़की के पिता इकबाल के घर गए तो वहाँ पता चला कि वह किसी लड़की को लेकर गया है। लेकिन आस-पास वालों को इस बात की जानकारी नहीं थी कि वह किस लड़की को अपने साथ लेकर गया है। 

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लड़की के पिता ने इस घटना के 20 दिन पहले अपहरण की आशंका जताई थी। उन्होंने कहा था कि इकबाल उनकी बेटी का धर्म परिवर्तन करवाने के बाद शादी करना चाहता था इसलिए उसने उनकी बेटी का अपहरण किया।

इस मुद्दे पर बिछौर थाना प्रभारी कृष्ण कुमार का कहना है कि पीड़िता नर्स के पिता की शिकायत के आधार पर नीमका निवासी इकबाल पर अपहरण समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366, 506 और 3 (1) मुख्य रूप से शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने आरोपित की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी है।    

‘फ्रेंच प्रॉडक्ट्स रखने वाले दुकानदारों के पास नहीं जाएँगे मुस्लिम’: कॉन्ग्रेस ने कहा- पैगम्बर मुहम्मद के खिलाफ कुछ भी बर्दाश्त नहीं

कॉन्ग्रेस पार्टी ने माँग की है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव फ्रेंच प्रोडक्ट्स को राज्य में प्रतिबंधित करें। ‘तेलंगाना कॉन्ग्रेस अल्पसंख्यक सेल’ के अध्यक्ष शेख अब्दुला सोहैल ने कई मुस्लिमों के साथ शुक्रवार (अक्टूबर 30, 2020) को एर्रागड्डा के प्रभात नगर स्थित मस्जिद-ए-रहमानिया के पास जुमे की नमाज के बाद विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपने बयान में इस्लाम का अपमान किया है।

उन्होंने तेलंगाना के मुख्यमंत्री से माँग करते हुए कहा कि वो न सिर्फ फ्रांस के राष्ट्रपति की निंदा करें, बल्कि तेलंगाना में फ्रेंच प्रॉडक्ट्स पर भी सम्पूर्ण पाबन्दी लगाएँ। उन्होंने सभी मुस्लिमों से अपील करते हुए कहा कि वो फ्रेंच प्रॉडक्ट्स का बॉयकॉट करें। कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने फ्रांस के राष्ट्रपति के कई पोस्टर भी जलाए। अब्दुल्ला सोहैल ने कहा कि फ्रेंच राष्ट्रपति के बयान को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने जानबूझ कर भारतीय मुस्लिम समुदाय को भड़काने के लिए फ्रांस के समर्थन के लिए कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि अगर पैगम्बर मुहम्मद के खिलाफ कोई कुछ भी बोलता है तो मुस्लिम समुदाय इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि भारत को किसी भी ऐसे व्यक्ति का संस्था का समर्थन नहीं करना चाहिए, जिसने किसी समुदाय की भावनाओं को भड़काने का काम किया हो।

उन्होंने कहा कि पूरे तेलंगाना, खासकर हैदराबाद के सभी रिटेल व होलसेल व्यापारियों को तुरंत फ्रांस में बने प्रॉडक्ट्स को हटाना चाहिए। साथ ही उन्होंने चेताया कि जो भी दुकानदार फ्रांस में बने प्रॉडक्ट्स को बेचेगा, मुस्लिम समुदाय के लोग वहाँ जाना बंद कर देंगे। उनके साथ कॉन्ग्रेस के कई कार्यकर्ता थे और बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग भी जुटे थे, जिन्होंने फ्रांस के खिलाफ जम कर नारेबाजी की।

बता दें कि गुरुवार (अक्टूबर 29, 2020) को भोपाल में भी हजारों मुस्लिमों की भीड़ सड़क पर उतर आई और प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कॉन्ग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने किया। विरोध प्रदर्शन के दौरान मसूद ने कहा कि अगर उनका बस चलता, तो वे राष्ट्रपति मैक्रों का चेहरा कुचल देते। उन्होंने आगे कहा, “हमारे हाथ बंधे हुए हैं क्योंकि हम कानून के पालन करने वाले नागरिक हैं और हमें हमारे अल्लाह के नबी द्वारा शांति की शिक्षा दी गई है।”

‘सुसाइड बॉम्बर’ सादिया अनवर बनी थी IS लड़ाका: 15 साल की उम्र से ही जुड़ी कट्टरपंथ से, जाकिर नाईक है आदर्श

एनआईए (नेशनल इंटेलिजेंस एजेंसी) ने अपनी चार्जशीट में खुलासा किया है, जिसके मुताबिक़ महाराष्ट्र के पुणे की रहने वाली एक महिला को दो बार कट्टरपंथ के चंगुल से मुक्त कराया गया था। इसके बावजूद वह आईएस (इस्लामिक स्टेट) की तरफ वापस चली गई।

एनआईए के अनुसार पुणे के येरवड़ा की निवासी सादिया अनवर शेख को सबसे पहली बार साल 2015 में कट्टरपंथ से मुक्त कराया गया था, उस दौरान वह नाबालिग थी। इसके बाद साल 2018 में भी उसे कट्टरपंथ से आज़ाद कराने का प्रयास किया गया था। 

सादिया अनवर शेख को कट्टरपंथ से मुक्त कराने के सारे प्रयास असफल होने के बाद इस साल जुलाई महीने में उसे इस्लामिक स्टेट से ताल्लुक रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद एनआईए ने सितंबर में उसके विरुद्ध चार्जशीट दायर की थी।

साल 2015 में जब पहली बार वह एनआईए की जाँच के दायरे में आई, तब वह महज़ 15 साल की थी। सबसे पहले वह सोशल मीडिया पर कट्टर विषय वस्तु और विवादित सामग्री साझा करने की वजह से सुर्ख़ियों में आई थी। एनआईए ने अपनी चार्जशीट में यह भी कहा है कि कट्टर इस्लामी ज़ाकिर नाईक उसका आदर्श है। 

एनआईए द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक़ सादिया सुसाइड बॉम्बर बनने की ख्वाहिश रखती है। साल 2015 में पुणे के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने उसे कट्टरपंथ से आज़ाद कराने के बाद छोड़ दिया था।

NIA का यह प्रयास हालाँकि व्यर्थ गया। इसके बाद सादिया ने सोशल मीडिया पर दोबारा विवादित और कट्टर विचार साझा करना शुरू कर दिए। इसके बाद साल 2018 में जम्मू कश्मीर पुलिस ने भी उसके तौर-तरीके और मानसिकता में सुधार का प्रयास किया था। तब भी इस प्रक्रिया के बाद उसे छोड़ दिया गया था। 

एनआईए ने अपनी चार्जशीट में दावा किया है कि सादिया 2015 से ही अनेक आतंकवादी संगठनों से जुड़े लोगों के संपर्क में थी। इसमें इस्लामिक स्टेट खोरासन प्रोविंस (आईएसकेपी), इस्लामिक स्टेट इन जम्मू एंड कश्मीर (आईएसजेके), अल कायदा, अंसार गज़वत उल हिन्द (एजीएच) पाकिस्तान, श्रीलंका और अफग़ानिस्तान मुख्य थे। 

इतना ही नहीं, वह फ़िलीपीन्स स्थित आईएस के ‘ऑनलाइन मोटिवेटर’ करेन ऐशा हमीदोन (karen aisha hamidon) से लगातार संपर्क में थी।  इसने भारत के तमाम युवाओं को कट्टरपंथ अपनाने में अहम भूमिका निभाई है। एनआईए के अधिकारी अप्रैल 2018 के दौरान हमीदोन से पूछताछ करने के लिए मनीला भी गए थे।        

‘जो भी कपिल मिश्रा का सिर काटेगा, उसे मेरी तरफ से ₹1 लाख का इनाम’: अजहरुद्दीन अंसारी की खुलेआम धमकी

भाजपा नेता कपिल मिश्रा को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के जरिए जान से मार डालने की धमकी दी गई है। अजहरुद्दीन नामक व्यक्ति ने उनके एक फेसबुक पोस्ट पर टिप्पणी की है कि जो भी कपिल मिश्रा का सिर काट कर ले आएगा, उसे वो 1 लाख रुपए का इनाम देगा। साथ ही उसने कपिल मिश्रा के लिए गाली का भी प्रयोग किया। दिल्ली के पूर्व मंत्री ने ट्विटर पर अजहरुद्दीन की टिप्पणी का स्क्रीनशॉट डाल कर उसकी पोल खोली।

साथ ही उन्होंने धमकी देने वाले अजहरुद्दीन के फेसबुक प्रोफाइल का लिंक और उसकी तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “ये कमेंट मेरे फेसबुक पर किया गया हैं। मेरा सिर काटने पर एक लाख का ईनाम घोषित करने वाला ये आदमी दिल्ली में ही रहता है।” अजहरुद्दीन अपने फेसबुक टाइमलाइन पर भी अक्सर भाजपा विरोधी पोस्ट डालता रहता है। अजहरुद्दीन अंसारी ने अपना निवास स्थान दिल्ली ही डाल रखा है।

कपिल मिश्रा द्वारा उसकी करतूतों को शेयर किए जाने के बाद गुस्साए लोगों ने पुलिस से उसके खिलाफ कार्रवाई की माँग की। कई लोगों ने अजहरुद्दीन की तस्वीर शेयर कर दिल्ली पुलिस को टैग किया और उसकी गिरफ़्तारी की माँग की। लोगों ने याद दिलाया कि आजकल फ्रांस में जो कुछ भी हो रहा है, उसे देखते हुए ऐसे तत्वों पर कड़ी कार्रवाई की ज़रूरत है क्योंकि ये कुछ भी कर सकते हैं। कई लोगों ने कपिल मिश्रा के प्रति समर्थन जताया।

बता दें कि कपिल मिश्रा ने सोशल मीडिया पर फ्रांस का समर्थन किया और हो रही आतंकी घटनाओं की निंदा की थी। साथ ही राजस्थान में जब पुजारी की हत्या हुई थी तो उन्होंने धन इकट्ठा कर के पीड़ित परिवार की मदद की थी। वो दिल्ली के आदर्श नगर में मार डाले गए राहुल राजपूत के भी परिजनों से मिले थे। इन कारणों से वो हमेशा से इस्लामी कट्टरवादियों की आलोचना का शिकार बनते रहे हैं। उन्होंने दिल्ली दंगे के पीड़ितों के लिए भी डोनेशन अभियान चलाया था।

कोरोना वैक्सीन का BJP का वादा आचार संहिता का उल्लंघन नहीं: राहुल गाँधी के करीबी को चुनाव आयोग से झटका

भारतीय जनता पार्टी ने बिहार चुनाव के लिए घोषणापत्र जारी करते हुए वादा किया था कि पार्टी अगर सत्ता में आती है तो राज्य के हर नागरिक को निःशुल्क कोरोना वायरस की वैक्सीन दी जाएगी। इसके बाद विपक्षी पार्टियों ने इसे केंन्द्र सरकार का ‘सिर्फ बिहार के लिए’ किया गया वादा समझ कर जबरदस्त विरोध किया था। अब चुनाव आयोग ने भी भाजपा को क्लीन चिट देते हुए कहा है कि इस वादे में कुछ भी गलत नहीं है।

पिछले सप्ताह भाजपा के खिलाफ शिकायत दायर की गई थी, जिस पर फैसला सुनाते हुए चुनाव आयोग ने ये बात कही। तथाकथित RTI एक्टिविस्ट और राहुल गाँधी के करीबी साकेत गोखले ने चुनाव आयोग के समक्ष शिकायत दायर करते हुए आरोप लगाया था कि ये केंद्र सरकार की शक्तियों का खुला उल्लंघन है और मतदाताओं को भ्रमित करने की एक चाल है। उनका कहना था कि ये गलत है, क्योंकि अब तक ‘वैक्सीन पॉलिसी’ पर फैसला नहीं आया है।

हालाँकि, चुनाव आयोग का तब भी यही स्टैंड था जब 2019 लोकसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपनी ‘न्याय योजना’ के जरिए 25 करोड़ लोगों को 72,000 रुपए प्रति महीने देने का वादा किया था। आयोग ने इसके खिलाफ आई शिकायत पर कॉन्ग्रेस के पक्ष में फैसला सुनाया था। आयोग ने गोखले को दिए गए रिप्लाई में कहा है कि वादे में ऐसा कुछ नहीं होना चाहिए, जो भारतीय संविधान के विरुद्ध जाता हो।

साथ ही आदर्श आचार संहिता के हवाले से दूसरी बात ये बताई गई है कि ऐसा कुछ नहीं होना चाहिए, जिससे मतदाताओ पर किसी ऐसी प्रक्रिया से लुभाया जाए, जो चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता को भंग करता हो। इस प्रतिक्रिया में चुनाव आयोग ने कहा है कि घोषणापत्र किसी खास चुनाव के लिए ही बनाए जाते हैं। साथ ही कहा कि इस वादे में आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का कोई भी मामला नहीं बनता है।

इसका विरोध करते हुए राजद ने कहा था कि कोरोना वायरस की वैक्सीन पर पूरे देश का अधिकार है, ये भाजपा का नहीं है। पार्टी ने कहा था कि बिहार के लोगों के पास आत्मसम्मान है और वो कुछ रुपयों के लिए अपने बच्चों के भविष्य को नहीं बेचेंगे। बिहार में भाजपा के प्रभारी भूपेंद्र यादव ने कहा कि स्वास्थ्य एक सार्वजनिक नीति है और इस पर घोषणा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि ये ऐसा ही है, जैसे कर्जमाफी की घोषणाएँ की जाती हैं।

अमेरिका में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बायडेन (Joe Biden) ने भी अपने देशवासियों से वादा किया है कि अगर उनकी जीत होती है तो वो मुफ्त में कोरोना वायरस की वैक्सीन मुहैया कराएँगे। उन्होंने शुक्रवार (अक्टूबर 23, 2020) को कहा था कि अगर वो राष्ट्रपति बनते हैं तो सभी अमेरिकी नागरिकों को मुफ्त कोरोना वैक्सीन मिलेगी। उन्होंने कहा था कि सुरक्षित और प्रभावशाली वैक्सीन के आते ही ये सबके लिए उपलब्ध होनी चाहिए, भले ही किसी ने स्वास्थ्य बीमा कराया हो या नहीं।

‘लव जिहाद’ को लेकर बेटियों-परिवारों को सचेत करने वाले 3 ग्रुप को फेसबुक ने हटाया, TOI ने की थी शिकायत

फेसबुक ने ‘लव जिहाद’ का विरोध करने वाले तीन ग्रुप्स को हटा दिया है। दुनिया के सबसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का कहना है कि ये ग्रुप्स उसके नियमों का उल्लंघन कर रहे थे, इसीलिए उन्हें हटाया गया है। ‘TOI’ का कहना है कि इन ग्रुप्स द्वारा आपत्तिजनक सामग्रियाँ फैलाई जा रही थीं। साथ ही मीडिया संस्थान ने ये भी दावा किया कि इन सोशल ग्रुप्स द्वारा कई सालों से ‘एडल्ट न्यूडिटी’ और ‘हेट स्पीच’ फैलाए जा रहे थे।

‘TOI’ ने अपने तथाकथित अध्ययन के हवाले से दावा किया था कि इन पेजों पर इंटरफेथ कपल्स (जिसमें पति-पत्नी अलग-अलग मजहब से होते हैं) की पहचान सार्वजनिक कर के उनकी सुरक्षा को खतरा पैदा किया जा रहा था और उनकी प्रिवेसी को नुकसान पहुँचाया जा रहा था। इसने इन पेजों को ‘मोरल पुलिसिंग’ और ‘जबरन दबाव बनाने’ का दोषी करार दिया था। फेसबुक ने कम्युनिटी स्टैण्डर्ड के उल्लंघन के आरोप में ऐसे 3 ग्रुप्स को बंद कर दिया।

ये सभी ऐसे ग्रुप्स थे, जिनमें ‘लव जिहाद’ की आलोचना की जा रही थी। TOI का दावा है कि इनमें लोग इन ग्रुप्स में अल्पसंख्यक समुदाय के आर्थिक बहिष्कार की अपील कर रहे थे और उनके खिलाफ भड़काया जा रहा था। इनमें से एक ग्रुप को अगस्त 27, 2014 को बनाया गया था और उसमें ‘दिशानिर्देश’ जारी किए जा रहे थे कि अभिभावक अपनी बेटियों के कॉलेज आने-जाने के समय को नोट करें। ऐसे 4 ओपन ग्रुप्स के अध्ययन के हवाले से ‘TOI’ ने दावा किया है,

“इन ग्रुप्स में लव जिहाद को अल्पसंख्यक पुरुषों और उनके मौलवियों की साजिश बताया जा रहा था और कहा जा रहा था कि ये लोग हिन्दू महिलाओं की आँखों में धूल झोंक कर धर्मान्तरण कराते हैं। जब हमने ऐसे 4 ग्रुप्स के अध्ययन के बाद सोशल मीडिया जायंट फेसबुक को इसके विवरण भेजे तो उसने इन ग्रुप्स के कंटेंट्स को हटा दिया। हालाँकि, ऐसे कई सारे प्राइवेट ग्रुप्स फेसबुक पर मौजूद हैं। हमने अपने एक सप्ताह के रिसर्च में पाया कि इन ग्रुप्स में अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा था।”

TOI ने दावा किया है कि इन ग्रुप्स के ‘दिशानिर्देशों’ में लड़कियों के अभिभावकों से कहा जा रहा था कि वो अपनी बेटियों पर खासकर तब ज्यादा नजर रखें, जब आसपास के इलाके में मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हों। साथ ही इन अभिभावकों को अपने घर की लड़कियों के मोबाइल फोन्स पर भी नज़र रखने को कहा गया था, ताकि पता चले कि वो किन लोगों से बातचीत करती हैं। अब फेसबुक ने ऐसे 3 ग्रुप्स पर कार्रवाई की है।

बता दें कि हाल ही में कई ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं, जिन्हें ‘लव जिहाद’ का नाम दिया गया है। फरीदाबाद में निकिता तोमर की हत्या की वारदात से अभी देश उबरा नहीं है। निकिता तोमर के पिता का दावा है कि आरोपित तौसीफ ही नहीं बल्कि उसकी माँ भी उनकी बेटी निकिता पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाती रहती थी। छात्रा के पिता ने आरोपित तौसीफ की माँ पर आरोप लगाया है कि वह बार-बार फोन कर के उनकी बेटी पर दबाव डालती थी कि उनका मजहब कबूल कर लो।

‘उसके (अल्लाह) खिलाफ गुस्ताखी की तो सिर तन से जुदा कर देंगे’ – AMU के छात्र नेता फरहान ने चिल्ला-चिल्ला कर कहा

फ्रांस के शिक्षक की गला काट कर हत्या कर दिए जाने के बाद फ्रांस की सरकार ने कट्टरपंथी मुस्लिमों के विरुद्ध मोर्चा खोल रखा है। नतीजतन दुनिया भर के तमाम इस्लामी मुल्कों का कट्टर वर्ग फ्रांस के विरोध में नज़र आ रहा है। इसी तरह भारत में भी इस्लाम का एक कट्टरपंथी हिस्सा फ्रांस का विरोध कर रहा है जबकि भारत सरकार इस मुद्दे पर स्पष्ट रूप से फ्रांस का समर्थन करती है। हैरान कर देने वाले मामले में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्रसंघ सदस्य को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि उसके (अल्लाह) खिलाफ़ कोई गुस्ताख़ी की, तो हम उसका सिर कलम कर देंगे। 

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र नेता फरहान ज़ुबैरी को वीडियो में और भी कई हैरान करने वाली बातें कहते हुए सुना जा सकता है। वीडियो की शुरुआत में वह कहता है:

“अगर उनके (अल्लाह) के खिलाफ़ कोई गुस्ताख़ी भरी हरकत की, तो हम उसका सिर कलम कर देंगे/उसका सिर तन से जुदा कर देंगे। क्योंकि हमारी बुनियाद, इस्लाम की बुनियाद कलमे से है और कलमा है ला इलाहा इल्लल्लाह मोहम्मदुर रसूलुल्लाह। तो जिसकी खातिर हम ज़िंदगी में हैं, जिसकी उम्मत में हैं, अगर उसके लिए कोई गलत चीज़ करेगा तो तो हम बिलकुल बर्दाश्त नहीं करेंगे।” 

इस घटनाक्रम के साथ और भी हैरानी की बात यह है कि मौके पर तमाम लोग मौजूद थे और वह छात्र की बात पर चिल्ला कर सहमति भी दर्ज कराते हैं। इसके बाद फरहान जुबैर ने कहा कि एक देश के राष्ट्रपति कहते हैं कि इमारत पर जो कार्टून दिखाया गया है, वह फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन (अभिव्यक्ति की आज़ादी) है।     

इसके अलावा टाइम्स नाउ में हुई परिचर्चा के दौरान भी फरहान ज़ुबैरी की जहरीली बयानबाज़ी जारी रहती है। सिर तन से जुदा करने के बयान पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उसने कहा, “बिलकुल! गुस्ताख़ी करने की हिम्मत कैसे होगी, क्यों करेगा कोई गुस्ताख़ी?” पूरी परिचर्चा के दौरान फरहान ज़ुबैरी ने चीखना और चिल्लाना जारी रखा। अपने बयान के लिए माफ़ी माँगना तो दूर उसने वीडियो में कई बार यहाँ तक कह दिया कि वह अपने बयान से पीछे नहीं हटेगा।   

वीडियो और प्रकरण के चर्चा में आने के बाद उत्तर प्रदेश की अलीगढ़ पुलिस ने तत्काल प्रभाव से इसका संज्ञान लिया। अलीगढ़ पुलिस ने इस मामले पर ट्वीट करते हुए कहा कि प्रकरण में जाँच हेतु एएमयू प्रशासन से पत्राचार किया जा रहा है।

ठीक इसी तरह महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई स्थित भिंडी बाज़ार में फ्रांस के राष्ट्रपति का पोस्टर सड़क पर चिपका कर विरोध किया गया था। इस विरोध प्रदर्शन के वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि रास्ते पर मैक्रों के पोस्टर चिपके हुए हैं और उसके ऊपर से वाहन गुज़र रहे हैं। इस दौरान सबसे ज़्यादा हैरानी की बात तब हुई, जब एक मौलाना ने इस प्रकरण पर बयान दिया था। 

रज़ा एकेडमी के मौलाना अब्बास रिज़वी ने कहा, “फ्रांस के राष्ट्रपति ने अल्लाह के रसूल की शान में जो गुस्ताखी की है, उसको ऐसी ही सज़ा मिलनी चाहिए।” इसके अलावा मौलाना अब्बास रिज़वी ने मुंबई की सड़कों पर फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों का पोस्टर लगाए जाने और उसके ऊपर चप्पल-जूते पहन कर चलते लोगों के साथ कुत्ते-बिल्लियों के चलने का समर्थन भी किया था।

इसी तरह मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इस्लामी कट्टरपंथियों ने ‘अद्भुत मिसाल’ पेश की थी। भोपाल के इकबाल मैदान में कॉन्ग्रेस विधायक आरिफ़ मसूद की अगुवाई में हज़ारों की तादाद में लोग इकट्ठा हुए और उन्होंने अपना विरोध दर्ज कराया था। इतना ही नहीं, मौजूद लोगों ने फ्रांस के राष्ट्रपति से माफ़ी माँगने तक की बात कह दी थी।

सोमनाथ मंदिर सरदार पटेल का ‘यज्ञ’… उसी का विस्तार अयोध्या राम मंदिर: PM मोदी ने नेहरू-कॉन्ग्रेस पर साधा निशाना

भारत के प्रथम उप-प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की जन्मतिथि को पूरा देश ‘एकता दिवस’ के रूप में मनाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (अक्टूबर 31, 2020) को इस अवसर पर गुजरात के केवडिया में स्थित ‘स्टेचू ऑफ यूनिटी’ पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। देश के एकीकरण में उनके योगदानों को याद करते हुए पीएम मोदी ने याद दिलाया कि कैसे उन्होंने सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कराया था।

पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ के पुनर्निर्माण से सरदार पटेल ने भारत के सांस्कृतिक गौरव को लौटाने का जो यज्ञ शुरू किया था, उसका विस्तार देश ने अयोध्या में भी देखा है। साथ ही उन्होंने इसे वर्तमान से जोड़ते हुए कहा कि आज देश राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का साक्षी बना है और भव्य राम मंदिर को बनते भी देख रहा है। गुजरात के सौराष्ट्र में पश्चिमी समुद्र तट पर स्थित सोमनाथ को पीएम मोदी ने उत्तर प्रदेश के सरयू किनारे स्थित अयोध्या से जोड़ा।

ये इसीलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका जिक्र कर के पीएम मोदी ने इशारों ही इशारों में ये भी बता दिया कि इस्लामी आक्रांताओं द्वारा ध्वस्त किए गए मंदिरों के जीर्णोद्धार को लेकर दशकों से कॉन्ग्रेस का रुख समान ही रहा है। गुजरात के स्वतंत्रता सेनानी, लेखक और बाद में केंद्रीय कैबिनेट का हिस्सा बनने वाले कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी ने सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए दिन-रात एक कर दिया था।

जब सरदार पटेल के प्रयासों के बाद मंदिर का निर्माण शुरू हुआ तो भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को इसके उद्घाटन के लिए निमंत्रण भेजा गया, जिस पर नेहरू बिफर गए। उन्होंने डॉक्टर प्रसाद को पत्र लिख कर कहा कि वो किसी ‘संप्रदाय को बढ़ावा देने’ वाले कार्यक्रम में शामिल न हों। हालाँकि, डॉ प्रसाद ने इसे पश्चिमी भारत की सभ्यता का प्रतीक बताया और कार्यक्रम का हिस्सा बने, पर इस कार्यक्रम को सेंसर कर दिया गया।

पत्र-पत्रिकाओं में इससे जुड़ी खबरें छपने ही नहीं दी गईं। केएम मुंशी के साथ सरदार पटेल तो थे, लेकिन नेहरू ने इसे व्यक्तिगत आस्था की बात बताते हुए फंड्स देने से ही इनकार कर दिया था। जब उन्हें कहीं से सूचना मिली कि सौराष्ट्र सरकार इसके लिए वित्त की व्यवस्था कर रही है, तो उन्होने पत्र लिख नाराजगी जताई। नेहरू ने तो कैबिनेट बैठक तक बुला कर डॉ प्रसाद को इसमें शामिल न होने को कहा था।

आज राम मंदिर को लेकर भी कमोबेश कॉन्ग्रेस का यही रुख है। रामसेतु को लेकर तो पार्टी की सरकार ने कोर्ट में ये तक कह दिया था कि राम का कोई अस्तित्व ही नहीं है। वहीं जब मंदिर का शिलान्यास हो गया तो प्रियंका गाँधी बधाई देते हुए राम-राम की रट लगाने लगीं। सरदार पटेल को श्रद्धांजलि देते हुए पीएम मोदी ने याद दिलाने की कोशिश की है कि कैसे कॉन्ग्रेस आज़ादी के बाद से ही हिन्दुओं की आस्था के बीच में रोड़ा बन कर खड़ी है।

इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत की भूमि पर नज़र गड़ाने वालों को मुँहतोड़ जवाब मिल रहा है। आज का भारत सीमाओं पर सैकड़ों किलोमीटर लंबी सड़कें बना रहा है, दर्जनों ब्रिज, अनेक सुरंगें बना रहा है। अपनी संप्रभुता और सम्मान की रक्षा के लिए आज का भारत पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर देश ही अपनी प्रगति के साथ साथ अपनी सुरक्षा के लिए भी आश्वस्त रह सकता है। इसलिए, आज देश रक्षा के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ रहा है और इतना ही नहीं, सीमाओं पर भी भारत की नज़र और नज़रिया अब बदल गया है।

पीएम मोदी ने पाकिस्तान संसद के वायरल वीडियो पर कहा कि पिछले दिनों पड़ोसी देश से जो खबरें आई हैं, जिस प्रकार वहाँ की संसद में सत्य स्वीकारा गया है, उसने इन लोगों के असली चेहरों को देश के सामने ला दिया है। उन्होंने याद दिलाया कि अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए, ये लोग किस हद तक जा सकते हैं, पुलवामा हमले के बाद की गई राजनीति, इसका बड़ा उदाहरण है। पीएम मोदी ने आगे कहा:

“आज यहाँ जब मैं अर्धसैनिक बलों की परेड देख रहा था, तो मन में एक और तस्वीर थी। ये तस्वीर थी पुलवामा हमले की। देश कभी भूल नहीं सकता कि जब अपने वीर बेटों के जाने से पूरा देश दुखी था, तब कुछ लोग उस दुख में शामिल नहीं थे, वो पुलवामा हमले में अपना राजनीतिक स्वार्थ देख रहे थे। देश भूल नहीं सकता कि तब कैसी-कैसी बातें कहीं गईं, कैसे-कैसे बयान दिए गए। देश भूल नहीं सकता कि जब देश पर इतना बड़ा घाव लगा था, तब स्वार्थ और अहंकार से भरी भद्दी राजनीति कितने चरम पर थी। मैं ऐसे राजनीतिक दलों से आग्रह करूँगा कि, देश की सुरक्षा के हित में, हमारे सुरक्षाबलों के मनोबल के लिए, कृपा करके ऐसी राजनीति न करें, ऐसी चीजों से बचें। अपने स्वार्थ के लिए, जाने-अनजाने आप देशविरोधी ताकतों की हाथों में खेलकर, न आप देश का हित कर पाएँगे और न ही अपने दल का।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें ये हमेशा याद रखना है कि हम सभी के लिए सर्वोच्च हित- देशहित है। जब हम सबका हित सोचेंगे, तभी हमारी भी प्रगति होगी, उन्नति होगी। उन्होंने याद दिलाया कि आज के माहौल में, दुनिया के सभी देशों को, सभी सरकारों को, सभी पंथों को, आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की बहुत ज्यादा जरूरत है। शांति-भाईचारा और परस्पर आदर का भाव ही मानवता की सच्ची पहचान है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद-हिंसा से कभी भी, किसी का कल्याण नहीं हो सकता।

इसी क्रम में हाल ही में ये भी खबर आई थी कि मध्य प्रदेश के रायसेन में बेतवा नदी के किनारे भोजपुर गाँव में स्थित शिव मंदिर (उत्तर का सोमनाथ) का पुराना वैभव फिर से लौट कर आने वाला है क्योंकि केंद्र सरकार ने इसके बचे हुए निर्माण-कार्य को पूरा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राजा भोज ने इस्लामी आक्रांता महमूद गजनवी से बदला लेने के बाद इस मंदिर का निर्माण कराया था। विजय के बाद इस मंदिर का निर्माण हुआ। भोपाल से भोजपुर की दूरी 32 किलोमीटर है।

शादी से पहले समरीन बनी प्रियांशी, हिन्दू रीति से की शादी: कोर्ट ने कहा – ‘सिर्फ विवाह के लिए धर्म परिवर्तन वैध नहीं’

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने धर्म परिवर्तन और विवाह को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा है कि केवल विवाह के लिए धर्म परिवर्तन स्वीकार्य नहीं है। इसके अलावा न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि धर्म परिवर्तन का उद्देश्य अलग है, उसका विवाह से कोई सरोकार नहीं है।

धर्म परिवर्तन करने के बाद विवाह करने वाले एक जोड़े ने संरक्षण के लिए माँग करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। इस याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने यह आदेश सुनाया है। 

मुज़फ़्फ़रनगर के इस विवाहित जोड़े ने परिवार वालों को उनके शांति पूर्ण वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप करने पर रोक लगाने की माँग की थी। न्यायालय ने इस याचिका में दखल देने से इनकार करते हुए इसे खारिज कर दिया है।

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि एक याची हिन्दू है तो दूसरा मुस्लिम। प्रियांशी उर्फ़ समरीन ने 29 जून 2020 को हिन्दू धर्म स्वीकार किया था और इसके लगभग 1 महीने बाद हिन्दू रीति से शादी की थी। कोर्ट ने इस तथ्य के आधार पर स्पष्ट रूप से कहा कि यह धर्म परिवर्तन सिर्फ विवाह के उद्देश्य से किया गया है। 

न्यायालय ने 2014 के नूर जहां बेगम मामले के आदेश का हवाला देते हुए आदेश सुनाया और कहा कि ऐसे मामलों में न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि ‘विवाह के लिए धर्म परिवर्तन मान्य नहीं हो सकता है।’

नूर जहां बेगम मामले में दायर की गई अनेक याचिकाओं में एक ही प्रश्न था, “क्या सिर्फ विवाह के लिए धर्म परिवर्तन मान्य हो सकता है?” जबकि धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को न तो उस धर्म के बारे में कोई जानकारी होती है और न आस्था/विश्वास। तमाम याचिकाओं में एक ही प्रश्न था कि लड़कियों ने मुस्लिम लड़कों के कहने पर इस्लाम धर्म कबूल किया। जबकि उन लड़कियों को न तो इस धर्म के बारे में मूलभूत जानकारी थी और न ही आस्था।

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि इस तरह की गतिविधियाँ कुरान के शूरा दो आयत 221 के निर्देशों के विपरीत है। न्यायालय ने इस तरह की गतिविधियों को कुरान की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए वैध करार नहीं दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने भी लिली थॉमस मामले में ठीक ऐसा ही आदेश दिया था। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि इस्लाम में सच्ची आस्था के बिना सिर्फ विवाह करने के लिए किया गया धर्म परिवर्तन मान्य नहीं कहा जा सकता है।