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‘बलात्कारी को टिकट दिया, थप्पड़ मार कर सुकून मिला’ – कॉन्ग्रेसी नेताओं में हाथापाई, महिला नेता ने भी कूटा

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के टाउन हॉल स्थित कॉन्ग्रेस कार्यालय में शनिवार (10 अक्टूबर 2020) को बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी मुकुंद भास्कर मणि का स्वागत होना था। इस दौरान कॉन्ग्रेस की ही तारा यादव का राष्ट्रीय सचिव सचिन नायक से विवाद हो गया। विवाद बहुत जल्द हाथापाई में बदल गया, जिसमें साफ़ देखा जा सकता है कि कई कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने तारा यादव को पीट दिया। यह वीडियो काफी चर्चा में बना हुआ है। 

दरअसल उत्तर प्रदेश की 7 विधानसभा सीटों पर आगामी 3 नवंबर को चुनाव होने वाले हैं, देवरिया सदर सीट इनमें से एक है। मुकुंद भास्कर मणि इस विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाए गए थे, उनके स्वागत के लिए कॉन्ग्रेस कार्यालय में बैठक आयोजित की गई थी।

इस बैठक में राष्ट्रीय सचिव और प्रदेश प्रभारी सचिन नायक भी शामिल हुए थे। संगठन की इस बैठक में चुनावी रणनीति पर भी चर्चा होनी थी। तभी पार्टी नेत्री तारा यादव कार्यालय में गुलदस्ता लेकर पहुँची और उनकी सचिन नायक से बहस शुरू हो गई। ख़बरों के मुताबिक़ वह चुनाव के लिए पार्टी टिकट नहीं मिलने की वजह से नाराज़ थीं। 

बहस के दौरान तारा यादव ने कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय सचिव को धक्का दिया, जिसके बाद उन्होंने भी पार्टी नेत्री को थप्पड़ जड़ दिया। वायरल वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि इसके बाद कई अन्य कार्यकर्ताओं ने उनसे मारपीट शुरू कर दी। जल्द ही वहाँ मौजूद अन्य कार्यकर्ता उन्हें कार्यालय से बाहर लेकर गए। बाहर निकलने के बावजूद कॉन्ग्रेस नेत्री तारा यादव चिल्ला कर विरोध कर रही थीं। इसके अलावा बाहर निकलने पर उन्होंने कहा कि थप्पड़ मार कर सुकून मिल गया। 

एक समाचार समूह से बात करते हुए उन्होंने कहा, “पार्टी ने एक गलत व्यक्ति को टिकट दिया है, वह नेता (मुकुंद भास्कर मणि) बलात्कारी है। मैंने राष्ट्रीय सचिव से यही कहा था कि उन्होंने एक गलत व्यक्ति को टिकट दिया है। इस कदम से संगठन की छवि पर प्रभाव पड़ेगा, यह टिकट किसी और को दिया जाना चाहिए। कोई ऐसा जिसका चरित्र और तौर तरीका बेहतर हो, यह बात कहने की वजह से मेरे साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट हुई।”       

घटना के बाद तारा यादव ने कॉन्ग्रेस जिलाध्यक्ष समेत 4 नामजद और अन्य के विरुद्ध मारपीट व छेड़खानी का मामला दर्ज कराया है। वहीं कॉन्ग्रेस के अन्य कार्यकर्ताओं का कहना है कि तारा यादव देवरिया सदर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनावों के लिए टिकट माँग रही थीं। इस सीट से लगभग डेढ़ दर्जन उम्मीदवार थे और टिकट किसी और को ही दिया जा सकता था। इस बात से नाराज़ होकर कॉन्ग्रेस नेत्री ने पार्टी के ही राष्ट्रीय सचिव के साथ अभद्र व्यवहार किया। उनके द्वारा लगाए गए सभी आरोप सरासर गलत हैं।  

‘गाय को बचा लो, उठा कर ले जा रहे तस्कर’ – फोन पर हँसती रही राजस्थान पुलिस, फिर गोरक्षकों पर हंगामा क्यों?

राजस्थान के भरतपुर से पुलिस का एक संवेदनहीन चेहरा उजागर हुआ है। एक स्थानीय व्यक्ति ने पीसीआर को कॉल कर के गाय की तस्करी (गो-तस्करी) किए जाने की सूचना दी लेकिन पुलिस ने इस पर कोई कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाई। जब स्थानीय व्यक्ति ने पुलिस को कॉल किया तो पुलिसकर्मी गाय की तस्करी (गो-तस्करी) होने की सूचना को नज़रअंदाज़ करते हुए और शिकायतकर्ता की बातों से बेखबर अपने साथियों के साथ हँसते व बातचीत करते हुए पाए गए।

दरअसल, गो-तस्करों ने गाय को SUV वैन में डाला और उसे लेकर चले गए। ‘टाइम नाउ’ के अनुसार, जब स्थानीय नागरिक राजकुमार सिंह ने गाय की तस्करी होने की सूचना दी तो पुलिसकर्मी हँसी-मजाक कर रहे थे। सीसीटीवी वीडियो फुटेज में तीन तस्करों (जिनमें से एक संभवतः ड्राइवर है) को गाय को गाड़ी में डालते हुए देखा जा रहा है। वो गाय को किसी तरह से अंदर गाड़ी में डालने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें निर्दोष जानवर के पाँव मुड़ जाते हैं।

‘टाइम्स नाउ’ के रिपोर्टर ने खबर का विवरण देते हुए कहा कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, जो राज्य के गृह मंत्री भी हैं – उनके राज्य में न तो सड़कों पर महिलाएँ सुरक्षित हैं और न ही गायें सुरक्षित हैं। ये मामला शुक्रवार (अक्टूबर 9, 2020) का है, जब गो-तस्करों ने भरतपुर के कोतवाली थाने से कुछ ही दूर इस वारदात को अंजाम दिया। पास के ही एक मकान में लगी सीसीटीवी में ये घटना कैद हो गई।

बताया गया है कि जब स्थानीय व्यक्ति ने इस घटना को देख कर पुलिस को सूचना दी तो वो हँसते हुए आपस में ही बातचीत करते रहे। इस घटना के 48 घंटे बीत जाने के बावजूद गाय तो दूर, भरतपुर पुलिस अब तक उस गाड़ी का भी पता नहीं लगा पाई है, जिस में गाय को ठूँस कर तस्कर ले गए। अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई न होने से पता चलता है कि पुलिस इस घटना को कितने हल्के में ले रही है।

आखिर स्थानीय व्यक्ति जब गो-तस्करो को पकड़ने के लिए खुद ही बीड़ा उठाते हैं तो इस पर जम कर हंगामा होता है। लेकिन, अगर उनकी शिकायतों को नज़रअन्दाज़ कर पुलिसकर्मी आपस में हँसते-बतियाते रहेंगे तो क्यों न ग्रामीण भी गाय को बचाने के लिए खुद ही निकल पड़ें? और, क़ानूनी के निकम्मेपन के कारण ही ऐसा होता है। इसी क्रम में कभी गोरक्षक क़ानून भी अपने हाथ में ले लेते हैं।

ISI के सरगनाओं से मिला था गौतम नवलखा, सरकार के खिलाफ बुद्धिजीवियों को गोलबंद करने का दिया गया था टास्क

तथाकथित एक्टिविस्ट गौतम नवलखा को NIA ने भीमा-कोरेगाँव में हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया है। उसके बारे में खुलासा हुआ है कि अर्बन नक्सली गौतम नवलखा अमेरिका में अपने एक कॉमन फ्रेंड के जरिए पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI के सरगनाओं से मिला था। शुक्रवार (अक्टूबर 9, 2020) को NIA ने अपनी मुंबई स्थित स्पेशल कोर्ट में 8 अर्बन नक्सलियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी।

10,000 पेज के दस्तावेज में इसके पूरे डिटेल्स हैं कि कैसे इन सभी ने भीमा-कोरेगाँव में जाति आधारित हिंसा भड़काई। NIA के एक सूत्र ने समाचार एजेंसी IANS को बताया, “अमेरिका में ISI ने गौतम नवलखा से संपर्क किया था, ताकि वो पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी को भारत में बेहतर जासूस मुहैया करा सके।” हालाँकि, ये किस वर्ष में हुआ, इस बारे में सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं बताया गया है।

हालाँकि, NIA की चार्जशीट में इतना ज़रूर बताया गया है कि गौतम नवलखा लगातार ISI के संपर्क में था और उसे भारत में सरकार के खिलाफ तथाकथित बुद्धिजीवियों को गोलबंद करने का कार्य सौंपा गया था। गौतम नवलखा को कुछ फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी में भी शामिल किया गया था और साथ ही वो हिंसक नक्सली संगठन CPI (माओवादी) की गुरिल्ला गतिविधियों के लिए कैडर की भर्ती करने में लगा हुआ था।

गोवा में रहने वाले मिलिंद तेलतुंबे के बारे में भी बताया गया है कि वो ‘भीमा-कोरेगाँव शौर्य दिन प्रेरणा अभियान’ का संयोजक था और दिसंबर 31, 2017 को पुणे के शनिवारवाड़ा में उपस्थित था, जहाँ ‘एल्गार परिषद’ के कार्यक्रमों को आयोजित किया गया था। उसने माओवादी संगठनों के साथ मिल कर फंडिंग जुटाने में खासी सक्रियता दिखाई। गौतम नवलखा को अप्रैल में गिरफ्तार किया गया था। NIA जनवरी में ही इस मामले में केस दर्ज किया था।

इस पूरी हिंसा के मामले में ये पता चला है कि एल्गार परिषद के लोग प्रतिबंधित माओवादी संगठन से लगातार संपर्क में थे और उन्हें गैर-क़ानूनी गतिविधियों के लिए फंडिंग दी गई थी। इस मामले में नवम्बर 2018 में पुणे पुलिस ने चार्जशीट दायर की थी। साथ ही फ़रवरी 2019 में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की गई। गौतम नवलखा से अमेरिका में रहने वाले पाकिस्तानी-कश्मीरी आतंकी सैयद गुलाम नबी फाई से उसके संपर्कों को लेकर भी पूछताछ हुई थी, जिसे FBI ने धर-दबोचा था।

फाई के ‘कश्मीरी अमेरिका काउंसिल (KAC)’ के लिए कार्यक्रम आयोजित करने हेतु गौतम नवलखा ने कई बार अमेरिका की यात्रा की थी। ये सभी अर्बन नक्सली सरकार को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुँचाना चाहते थे। ये सभी एक बड़ी सुनियोजित साजिश के तहत काम कर रहे थे। गौतम नवलखा के खिलाफ ‘मटेरियल एविडेंस’ भी कोर्ट में पेश किए जा चुके हैं। भीमा-कोरेगाँव मामले में कुछ और बड़ा खुलासा होने की उम्मीद है।

अमेरिकी अटॉर्नी नील मैकब्राइड के अनुसार, गुलाम नबी फई पाकिस्तानी खुफिया विभाग के लिए एक अग्रिम मोर्च के रूप में काम करता था और कश्मीर पर ISI के प्रोपेगेंडा को बढ़ावा देता था। इससे पहले फई ने स्वीकार किया था कि उसे पाकिस्तान की सरकार की तरफ से फंडिंग मिलती है। नवलखा गुलाम नबी फई के समर्थन में खड़ा था और उसकी गिरफ्तारी के बाद उसके समर्थन में एफबीआई को भी खत लिखा था।

गौमूत्र का मजाक उड़ाता है एक्टर साकिब सलीम, ZEE5 की नई फिल्म ‘कॉमेडी कपल’ की सोशल मीडिया पर बायकॉट

वेब सीरीज ऐप ZEE 5 ने अपनी नई फिल्म “कॉमेडी कपल” का टीज़र लॉन्च किया। इस फ़िल्म का प्रीमियर ज़ी 5 पर 21 अगस्त को होगा। इस फ़िल्म के प्रोमो को सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। इसके पीछे की वजह है मुख्य किरदार साकिब सलीम का गौमूत्र को लेकर मजाक उड़ाना।

वेब सीरीज के जरिए आए दिन हिंदू मान्यताओं का मजाक बनाया जाता है। इसी क्रम में इस फ़िल्म में भी मजाक की आड़ में हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का काम किया गया है।

गुड़गाँव में स्टैंडअप कॉमेडी के बैकड्रॉप पर आधारित इस फ़िल्म में मुख्य किरदार के तौर पर साकिब सलीम के साथ श्वेता बसु प्रसाद ने काम किया है। फिल्म के टीज़र की शुरुआत में साकिब सलीम (दीप) और श्वेता बसु प्रसाद (ज़ोया) दिखाई देते हैं, जहाँ वे अपना कॉमेडी एक्ट दिखाने के लिए मंच पर आते हैं।

इस टीज़र में साकिब रिलेशनशिप पर अपनी थ्योरी को साझा करते हुए इसे तीन स्टेज में दिखाते हैं, और ऐसा करते समय साकिब कहते हैं: “मुझे कोल्ड ड्रिंक पिलाओ, क्या तुम्हारे पास ठंडा पानी है? बाकी छोड़ दो- क्या आपके पास गौमूत्र है? मैं गौमूत्र पीने के लिए भी तैयार हूँ, कम से कम मेरे सारे पाप धुल जाएँगे।”

फिल्म निर्माताओं द्वारा हिंदूफोबिक कंटेंट को दिखाने और हिंदू धर्म के विश्वास और गाय की पवित्रता का मज़ाक बनाने पर ट्विटर हैंडल जेम्स ऑफ बॉलीवुड ने लोगों से फिल्म का बहिष्कार करने का आह्वान किया। यूजर ने कहा, “पुलवामा आत्मघाती हमलावर आदिल दार के बाद गौमूत्र पर एक और बेहूदा मजाक।” साथ ही कहा कि फिल्म का बहिष्कार किया जाना चाहिए।

इसी के साथ ही जेम्स ऑफ़ बॉलीवुड ने एक और ट्वीट करते हुए ज़ी 5 से आग्रह किया कि कृपया हिन्दू घृणा से भरे कंटेंट को अपने प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित न करें। साथ ही चेतावनी भी दी कि अगर उन्होंने ऐसा किया तो यह उनके बिज़नेस को नुकसान भी पहुँचा सकता है।

गौरतलब है कि मुस्लिमों और हिन्दुफोबिया से ग्रसित लोगों ने अक्सर हिंदुओं और उनकी भावनाओं का मजाक उड़ाने के लिए गौमूत्र पर तंज कसा है। 14 फरवरी, 2019 को सीआरपीएफ के काफिले पर हुए नृशंस हमले के बाद, जैश-ए-मुहम्मद समूह द्वारा एक वीडियो जारी किया गया था, जिसमें आत्मघाती आतंकवादी ने सुरक्षाकर्मियों पर दर्दनाक हमला किया था। इस हमले में 40 सुरक्षाकर्मी बलिदानी हुए थे। उस वक्त भी गौमूत्र को लेकर मजाक उड़ाया गया था।

यह पहली बार नहीं हुआ है जब Zee5 ने हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाया है। इस वर्ष की शुरुआत में,अपनी नई तमिल वेबसीरीज गॉडमैन ’के माध्यम से भी Zee5 ने हिंदूफोबिया कंटेंट को बढ़ावा दिया था। जिसके बाद काफी बवाल भी हुआ था।

भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी, प्रमुख हिंदू समूहों और कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने तब हिंदू विरोधी वेब सीरीज के खिलाफ अपनी आवाज उठाई थी। उन्होंने दावा किया था कि सीरीज का उद्देश्य ब्राह्मणों और हिंदू संतों के प्रति नफरत फैलाना है। जिसके बाद ज़ी 5 ने वेब सीरीज़ की रिलीज़ को स्थगित करने का फैसला लिया था।

योगी सरकार की सिफारिश पर CBI ने ली हाथरस केस की जिम्मेदारी, केंद्र ने जारी की सूचना

केंद्र ने शनिवार (अक्टूबर 10, 2020) को एक अधिसूचना जारी कर सूचित किया है कि केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) उत्तर प्रदेश के हाथरस में 19 वर्षीय दलित महिला के कथित गैंगरेप और हत्या की जाँच का जिम्मा संभालेगी।

अधिकारियों ने कहा कि एजेंसी शनिवार देर रात तक या रविवार (अक्टूबर 11, 2020) की सुबह एफआईआर दर्ज कर सकती है। सीबीआई राज्य पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी को फिर से दर्ज करेगी और अपराध की जाँच शुरू करेगी।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गत शनिवार (अक्टूबर 3, 200) को हाथरस कांड की जाँच के लिए केंद्र सरकार से सिफारिश की थी। केंद्र सरकार की डीओपीटी विभाग के नोटिफिकेशन के बाद सीबीआई ने हाथरस केस को टेकओवर कर लिया है। जल्द ही सीबीआई हाथरस केस की जाँच शुरू करेगी। 

अभी तक हाथरस कांड की जाँच विशेष जाँच दल (SIT) कर रही थी। हाल ही में इस जाँच को पूरा करने के लिए यूपी सरकार ने 10 दिनों का और वक्त दे दिया था, ताकि सच सामने आ सके। माना जा रहा था कि इस मामले में लगातार बढ़ते विवाद की वजह से सरकार ने ये फैसला लिया, लेकिन अब ये मामला सीबीआई के पास पहुँच गया है।

बता दें कि 19 वर्षीय दलित युवती से 14 सितंबर को चार युवकों ने कथित रूप से गैंगरेप किया था। पीड़िता की 29 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी।

गौरतलब है कि हाल ही में हाथरस केस में एक नया वीडियो सामने आया। कहा गया कि यह वीडियो 14 सितंबर 2020, यानी घटना वाले दिन का ही है। इसे तब शूट किया गया था जब पुलिस मौके पर जाँच करने पहुँची थी। वीडियो में खेत में कई सामान बिखरे नजर आ रहे हैं।

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने इस वीडियो को लेकर यह दावा किया है कि मौका-ए-वारदात पर कम से कम चार लोग मौजूद थे और लड़की की माँ भी महज 3 मीटर की दूरी पर थी। ऐसे में अगर लड़की चीखती-चिल्लाती तो उसकी आवाज इतनी दूरी से साफ सुनी जा सकती थी।

उल्लेखनीय है कि 14 सितंबर को हाथरस में हुई इस घटना के बाद से सवर्ण बनाम दलित की बहस ने जोर पकड़ा हुआ है। अब तक मीडिया ये कहती रही कि मृतका के साथ गैंगरेप हुआ था। हालाँकि, इस वीडियो के सामने आने के बाद और पुलिस के दावों को देख कर सवाल उठ रहा है कि जब मृतका से उसकी माँ मात्र 3 मीटर की दूरी पर थी तो कैसे उन तक आवाज नहीं पहुँची।

इस मामले में यह भी गौर करने वाली बात है कि आरोपित पक्ष की ओर से लगातार मृतका के साथ कुछ भी गलत किए जाने की बात से इनकार किया जा रहा है। आरोपितों ने आज इस बाबत जेल से एसपी को पत्र भी लिखा है। अपने पत्र में उन्होंने बताया है कि मृतका की माँ और भाई ने ही उसकी पिटाई की, जिसके कारण उसकी मौत हो गई।

इस घटना को लेकर काफी विवाद हुआ। विपक्षी पार्टियों ने योगी सरकार को निशाने पर लिया और देश भर में प्रदर्शन हुए। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीबीआई जाँच की घोषणा की। हाथरस मामले में एसआईटी की जाँच के आधार पर एसपी समेत कई पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया गया है।

इसी मामले को लेकर योगी सरकार ने पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर की थी। इसमें लिखा गया था कि सरकार चाहती है कि इस तरह के दुखद हादसे में मारी जाने वाली युवती को न्याय मिले। मामले का सच सामने आए। इसलिए, उसने पहले एसआईटी का गठन किया। फिर मामला सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की  गई।

राजस्थान में पुजारी बाबूलाल वैष्णव को जला कर मार डाला: अजीत भारती का वीडियो। Ajeet Bharti on Rajasthan pujari Babulal set on fire

राजस्थान में बाबूलाल वैष्णव नाम के पुजारी को 6 से 8 लोगों ने पेट्रोल डालकर जला दिया। बाद में उनकी इलाज के दौरान जयपुर के अस्पताल में मृत्यु हो जाती है। मरते वक्त उन्होंने उन लोगों का नाम भी लिया, जिन्होंने उनके साथ ये दुष्कृत्य किया था। बाबूलाल वैष्णव अपने परिवार के साथ काफी सालों से उस इलाके में रह रहे थे, जहाँ पर ‘मीणा’ बहुसंख्यक हैं। पुजारी के परिवार का भरण-पोषण गाँव के लोग ही करते थे।

पुजारी लगभग 200 साल पुराने मंदिर का रख-रखाव और पूरी जिम्मेदारी निभाते थे। बाबूलाल के परिवार के मंदिर के सामने वाली को समतल बनाकर बुआई करने लायक बनाया। कुछ लोगों ने इस पर कब्जा करने की कोशिश की, लेकिन पंचायत ने यह जमीन पुजारी को दे दी। इसके बावजूद आरोपितों ने यहाँ पर कब्जा करने की कोशिश की, मना करने पर पुजारी को पेट्रोल डालकर जला दिया। पुलिस पर इस मामले में संवेदनहीनता दिखाने के आरोप लग रहे हैं।

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक करके देखें

‘मोदी की वजह से पुजारी ने किया आत्मदाह’: आजतक ने राजस्थान में पुजारी की हत्या को बताया आत्महत्या

राजस्थान के करौली स्थित बूकना गाँव में जमीन विवाद को लेकर गत बुधवार को पाँच व्यक्तियों द्वारा एक पुजारी को ज़िंदा जला कर मार दिया गया था। इस घटना के बाद पुजारी के परिवार सहित हजारों लोग राजस्थान में अशोक गहलोत की अगुवाई वाली कॉन्ग्रेस सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। लोग राज्य सरकार से परिजनों के लिए मुआवजे और अपराधियों के खिलाफ सख्त और त्वरित कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

वहीं, दूसरी ओर इस घटना को लेकर इंडिया टुडे समूह के स्वामित्व वाले हिंदी समाचार चैनल ‘आजतक’ ने हत्या के लिए राजस्थान राज्य सरकार की जगह पीएम मोदी और केंद्र सरकार को दोषी ठहराया और उनके खिलाफ जहर उगलने का काम किया है। इसके अलावा, समाचार चैनल आजतक ने यह भी निष्कर्ष निकाला है कि मंदिर के पुजारी की हत्या नहीं की गई थी बल्कि उन्होंने आत्मदाह कर खुद को जलाया था।

राजस्थान के करौली गाँव से रिपोर्टिंग करते हुए आजतक संवाददाता पुजारी की झोपड़ी की ओर इशारा करते हुए कहता है कि यह पीएम मोदी की आवास योजना के पीछे का कड़वा सच है।

केंद्र सरकार पर अपना हमला जारी रखते हुए, ‘आजतक’ के रिपोर्टर का कहना है कि झोपड़ी की बदहाल स्थिति की वजह से पुजारी ने ‘आत्मदाह’ किया था। इसके आगे रिपोर्टर कहता है कि यह असंभव लगता है कि पीएम मोदी की आवास योजना के तहत सभी को उचित आवास उपलब्ध कराने का सपना कभी सच होगा।

रिपोर्टर इस पर ही नहीं रुकता। आजतक अपनी इस रिपोर्ट की आड़ में कहीं न कहीं राजस्थान में कॉन्ग्रेस की अगुवाई वाली सरकार को बचाने का प्रयास करते हुए भाजपा और केंद्र सरकार का घेराव कर लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश करता है।

रिपोर्टर ने केंद्र सरकार के कर्तव्यों को लेकर भाजपा नेता राज्यवर्धन राठौर से सवाल किए। आजतक रिपोर्टर ने पूछा, “क्या यह भाजपा और केंद्र सरकार की जिम्मेदारी नहीं है कि वह प्रत्येक नागरिक को उचित घर प्रदान करे।”

इसके बाद रिपोर्टर ने निष्कर्ष भी निकाला कि अगर पुजारी को भाजपा सरकार द्वारा रहने के लिए एक उचित घर मुहैया कराया गया होता, तो आज वह नहीं मरता।

मूल रूप से आजतक का रिपोर्टर अशोक गहलोत सरकार को राज्य में एक क्रूर हत्या के लिए जिम्मेदार ठहराने के बजाय भाजपा सरकार पर दोष मढ़ने की कोशिश करता है, जिसका पीड़िता के घर की स्थिति से कोई संबंध नहीं है।

आपको बता दें इंडिया टुडे के लिए यह हरकत कोई नई बात नहीं है। मीडिया दिग्गज का नाम हाल ही में टीआरपी घोटाले में भी उजागर हुआ है। जहाँ इंडिया टुडे पर चैनल को देखने के लिए लोगों को रिश्वत देने आरोप लगा है।

गौरतलब है कि आज ही एक हत्या के मामले में लोगों को गुमराह करने की कोशिश की थी। चैनल ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें कहा गया कि एक 18 वर्षीय लड़के को एक ‘महिला’ के साथ उसकी ‘दोस्ती’ के लिए पीटा गया था। मीडिया हाउस ने युगल के बीच प्रेम संबंध को ‘मित्रता’ के रूप में दर्शाया। हालाँकि यह रिपोर्ट एकमात्र उदाहरण नहीं है जहाँ इंडिया टुडे ने एक मुस्लिम लड़की के प्यार में एक हिंदू लड़के की भीषण हत्या को छुपाने का प्रयास किया।

इंडिया टुडे ने अपनी पूरी रिपोर्ट में घटना के विवरणों का विस्तार से वर्णन किया है, दोषियों के खिलाफ लगाए गए आरोप, तनाव कम करने के लिए पड़ोस में पुलिस बल की तैनाती, मृतक के चाचा की गवाही, कारण पीड़ित की मौत, घटना पर पुलिस का बयान आदि।

हालाँकि इन सबके बीच इंडिया टुडे की रिपोर्ट से एक चीज गायब थी- हिंदू लड़के और मुस्लिम लड़की के बीच अंतरधार्मिक प्रेम संबंध का जिक्र। चैनल ने बड़े ही शातिर तरीके से किसी तरह के प्रेम संबंध का उल्लेख न करते हुए इसे दोस्ती करार दिया, ताकि ‘अंतरधार्मिक प्रेम संबंध’ का विवरण देने से आसानी बचा जा सके।

इंडिया टुडे ने अंकित सक्सेना हत्या मामले में भी छिपाया धर्म

फरवरी 2018 में अंकित सक्सेना को उसकी प्रेमिका शहज़ादी के परिवार वालों ने सिर्फ़ इसीलिए मार डाला क्योंकि वो दोनों के रिश्ते से नाराज़ थे। शहज़ादी की माँ ने अपनी स्कूटी से धक्का देकर अंकित को गिराया और फिर शहज़ादी के पिता ने चाक़ू से उनके गले को रेत डाला। तब भी इंडिया टुडे की रिपोर्ट में हत्या पर पर्दा डालने की कोशिश की थी।

ऐसा अक्सर देखा गया है कि जब एक भीषण कृत्य का शिकार बहुसंख्यक समुदाय से होता है और अपराधी अल्पसंख्यक समुदाय से होता है तो इंडिया टुडे जैसे ही मीडिया गिरोह धार्मिक एंगल को दबाने का हरसंभव प्रयास करती है और इसे ‘दोस्ती’ का नाम देती है। हालाँकि जब पीड़ित अल्पसंख्यक समुदाय से होता है और हमला करने वाला बहुसंख्यक समुदाय से, तो माहौल इसके विपरीत होता है।

‘राहुल की हत्या को सांप्रदायिक मत बनाओ’: AAP की लोगों से अपील, अपना नेता था हिंदू विरोधी दंगों में शामिल

दिल्ली के आदर्श नगर में एक मजहबी भीड़ द्वारा 18 वर्षीय हिंदू लड़के राहुल राजपूत पर किए गए क्रूर हमले के बाद उनकी मौत हो गई। राहुल राजपूत की दुर्भाग्यपूर्ण मौत के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) नेता पवन कुमार शर्मा ने एक बयान जारी किया। AAP ने इस बयान में मजहबी युवकों द्वारा की गई इस भीड़ हत्या में धार्मिक एंगल न लाने की ‘अपील’ की है।

पवन कुमार शर्मा ने कहा कि दोषियों को सजा मिलेगी। जिसके साथ अन्याय हुआ है, उसे न्याय मिलेगा। इसके साथ ही उनका कहना था कि घटना को किसी तरह का जातिगत या धार्मिक एंगल की तरफ मोड़ना राजनीति करना होगा।

AAP विधायक पवन कुमार शर्मा ने मीडिया से कहा, “हम पीड़ित के पिता, श्री संजय के पक्ष में खड़े हैं। हम सुनिश्चित करते हैं कि उन्हें कोई कठिनाई नहीं होगी। हम दिन-रात उनके साथ खड़े हैं। हालाँकि, हमें इस घटना का सांप्रदायिकरण नहीं करना चाहिए और जो लोग कर रहे हैं, वे वास्तव में इस घटना का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रहे हैं। अरविंद केजरीवाल सरकार परिवार को न्याय दिलाने और दोषियों को सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।”

दिल्ली विश्वविद्यालय के 18 वर्षीय छात्र राहुल राजपूत की दूसरे समुदाय की लड़की के साथ प्रेम प्रसंग होने की वजह से मोहम्मद अफरोज और मोहम्मद राज ने अपने तीन अन्य साथियों के साथ मिलकर उस पर बर्बरतापूर्वक हमला किया। राहुल घायल अवस्था में ही अस्पताल पहुँचा जहाँ इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हमलावरों में शामिल अफरोज को अपनी 16 साल की नाबालिग बहन के एक हिन्दू युवक राहुल के साथ प्रेम प्रसंग से आपत्ति थी। इसलिए उसने राहुल को सबक सिखाने की ठानी।

मोहम्मद अफ़रोज़ और उसके साथियों द्वारा राहुल को पीटने का वीडियो CCTV में सामने आया है। उन्होंने पूरी तैयारी के साथ राहुल के चचेरे भाई के फोन पर कहा कि उन्हें अपने बच्चे को ट्यूशन दिलाना है, इसलिए राहुल को बाहर भेज दें।

फोन सुनकर राहुल बिना किसी को बताए बाहर गली में आ गया। घर के बाहर मौजूद 4-5 लोग उसे अपने साथ ले गए और गली नंदा रोड पर लात- घूंसों से उसको मारना शुरू कर दिया। CCTV में देखा गया कि मारपीट के बाद घायल हालत में ही राहुल किसी तरह से अपने घर पहुँचा। फिर उन्हें पास के एक अस्पताल में ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान राहुल ने दम तोड़ दिया। 18 वर्षीय राहुल की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में अंदरूनी चोटों को मौत का कारण बताया गया।

हिन्दू विरोधी दंगों में AAP की भूमिका

गौर करने वाली बात है कि ये उसी AAP के विधायक मामले का सांप्रदायिकरण नहीं करने का ज्ञान दे रहे हैं, जिनका सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने का लंबा और पुराना इतिहास रहा है। जाहिर सी बात है कि यह हिंदू लड़का और दूसरे समुदाय की लड़की से जुड़ा मामला है, इसलिए इस ‘सेक्युलर अपराध’ पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है।

कुछ महीने पहले, AAP नेता उन लोगों में शामिल थे, जिन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ ‘शांतिपूर्ण’ विरोध प्रदर्शन करने की आड़ में राष्ट्रीय राजधानी में हिंदू विरोधी दंगे भड़काने की साजिश रची थी। तब AAP पार्षद ताहिर हुसैन कथित रूप से एक मजहबी भीड़ को उकसाने में शामिल थे

इस दौरान AAP पार्षद के घर के अंदर इंटेलिजेंस ब्यूरो के कर्मचारी अंकित शर्मा को घसीटा गया और फिर बेरहमी से मार डाला गया। शर्मा को चार से छ: घंटे तक कम से कम  400 बार चाकू मारा गया। आईबी के कर्मचारी अंकित शर्मा की मौत के मामले में दर्ज एफआईआर में ताहिर हुसैन का नाम शामिल होने के बाद AAP ने उन्हें निलंबित कर दिया था।

AAP पार्षद ताहिर हुसैन ने बाद में दिल्ली में हिन्दू विरोधी दंगों को अंजाम देने की बात कबूल की। दिल्ली पुलिस को अपने कबूलनामे में, हुसैन ने कहा कि खालिद सैफी, जो उनके बहुत करीब हैं, ने उनके साथ दंगों की योजना बनाई। उन्होंने एक बार उनसे कहा था कि उनकी राजनीतिक स्थिति और धन का उपयोग हिंदुओं के खिलाफ और समुदाय के लिए किया जाना चाहिए।

उन्होंने सैफी से वादा किया कि वह कोई भी कदम उठाने के लिए हमेशा तैयार रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट द्वारा राम लला विराजमान के पक्ष में फैसला सुनाए जाने और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पेश नागरिक संशोधन अधिनियम पारित किए जाने के बाद, ताहिर और खालिद ने मुलाकात की और फैसला किया कि यही वह समय है जब उन्हें वारदात को अंजाम देना चाहिए।

आरोप पत्र में कहा गया है कि ताहिर ने अपने सहयोगियों के साथ खजुरी खास इलाके में कई हिंदू दुकानों को जलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जाँच के दौरान, पुलिस को पता चला कि उसने 24 और 25 फरवरी 2020 के दंगों के दौरान एक भीड़ को उकसाया था कि हिंदुओं ने दूसरे मजहब के कई लोगों को मार डाला है और शेरपुर चौक पर अपनी दुकानों को आग लगा दी है। 

AAP विधायक अमानतुल्ला खान ने ताहिर हुसैन का बचाव करते हुए कहा कि भारत में दंगे होते रहेंगे

AAP के एक अन्य नेता, अमानतुल्लाह खान, अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी के एक और राजनेता हैं, जिन्हें सांप्रदायिक रूप से भड़काऊ बयान देने के लिए जाना जाता है। पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन द्वारा प्रायोजित और समर्थित दंगाई गतिविधियों का बचाव करते हुए, खान ने दावा किया कि जब तक मजहब विशेष के साथ भेदभाव किया जाता है, तब तक देश में दंगे जारी रहेंगे।

ऐसे में जब AAP नेता पवन कुमार शर्मा मजहबी भीड़ द्वारा एक युवा हिंदू व्यक्ति की मौत को सांप्रदायिक रूप नहीं दिए जाने की बात कहते हैं, इस पर गौर करना आवश्यक है कि उनकी खुद की पार्टी के सदस्य उन लोगों में से हैं जिन्होंने हिंदू विरोधी उन्माद को भड़काया और धार्मिक लाइन पर समाज को विभाजित किया।

नक्सली आतंकियों ने किया 25 आदिवासियों का सामूहिक कत्ल, ‘पुलिस के एजेंट’ होने के शक में ठहराया था धोखेबाज

वामपंथी उग्रवादियों (LWT) ने छत्तीसगढ़ के बीजापुर में तकरीबन 25 आदिवासियों को बर्बरतापूर्वक मौत के घाट उतार दिया। नक्सलियों ने मारे गए लोगों पर पुलिस मुखबिर, गोपनीय सैनिक और भीतरघाती होने का आरोप लगाया है।

खबरों के मुताबिक, एक नक्सली वामपंथी आतंकवादी समूह ने बृहस्पतिवार (अक्टूबर 08, 2020) को एक बयान जारी कर कहा था कि बीजापुर के गँगालूर इलाके में उनके खिलाफ ‘स्पष्ट सबूत’ मिलने के बाद जनअदालत के माध्यम से कम से कम 25 आदिवासी लोगों को सजा दी गई है।

‘विकल्प’ नाम से जाने जाने वाले एक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन ने उन्हें ‘धोखेबाज’ और ‘पुलिस के मुखबिर’ घोषित करते हुए कहा कि मारे गए लोगों में 12 गोपनीय सैनिक, 5 भीतरघाति और 8 मुखबिर शामिल थे।

नक्सलियों द्वारा मारे गए आदिवासियों की सही संख्या अभी भी स्पष्ट नहीं है। हालाँकि, तेलंगाना पुलिस ने कहा कि उन्हें खुफिया जानकारी मिली थी कि नक्सलियों ने सितंबर के अंतिम सप्ताह में तेलंगाना-छत्तीसगढ़ के पास 16 ग्रामीणों की हत्या की थी।

तेलंगाना के एक अधिकारी ने ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ को बताया कि नक्सलियों ने कुछ अन्य ग्रामीणों को भी अगवा कर लिया था और उन्हें बीजापुर के जंगलों में छिपा दिया और बाद में उन्हें भी मार डाला था। नक्सल आतंकवादी गिरोह ‘विकल्प’ ने कथित तौर पर दावा किया कि पुलिस के लिए काम करने वाले गुप्त एजेंटों में से एक वरिष्ठ माओवादी नेता विज्जा भी शामिल था।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार वामपंथी आतंकवादी संगठन ने कहा, “हमारी पूछताछ से पता चला कि विज्जा पिछले दो वर्षों से एक पुलिस एजेंट के रूप में काम कर रहा था और उसे माओवादी पार्टी की केंद्रीय समिति को नुकसान पहुँचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उसने चार बार पुलिस को पार्टी की बैठकों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी थी।”

कथित तौर पर, बीजापुर में आदिवासियों की हत्या के लिए जिम्मेदार 39 वर्षीय नक्सली नेता मोडियम विज्जा उर्फ ​​भादरू को सितंबर के आखिरी सप्ताह में वामपंथी आतंकवादियों ने गोली मार दी थी। पुलिस माओवादी नेता विज्जा की धरपकड़ में जुटी थी। यहाँ तक उसे पकड़ने के लिए 8 लाख रुपए का नकद इनाम भी रखा था।

आदिवासी इलाकों में ग्रामीण हैं नक्सलियों के खिलाफ

इस बीच पुलिस ने कहा है कि वामपंथी आतंकवादी निर्दोष आदिवासियों को निशाना बना रहे है। बस्तर क्षेत्र वामपंथी आतंकवादी का आंदोलन अपने अंत के करीब है क्योंकि आदिवासी इलाकों में ग्रामीण उनके खिलाफ हो रहे हैं। .

बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने कहा है कि आतंकवादी गतिविधियों का आदिवासी क्षेत्रों में कोई लेना-देना नहीं है और इस क्षेत्र में आदिवासियों के बीच नक्सल विरोधी भावना के निर्माण के कारण इसका अंत हो रहा है। सुंदरराज ने कहा कि माओवादी नेताओं को अब अपने आंदोलन के खात्मे का डर दिख रहा है। यह आंदोलन अब पूरी तरह से दिशाहीन हो गया है।

J-K: पुलवामा एनकाउंटर में मारा गया LeT का टॉप कमांडर जाहिद टाइगर, 2 ऑपरेशन में 4 आतंकी ‘क्लीन बोल्ड’

जम्मू-कश्मीर स्थित पुलवामा के कंगन क्षेत्र में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच एनकाउंटर में सुरक्षा बलों और पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। संयुक्त ऑपरेशन में लश्कर के एक टॉप कमांडर समेत 2 आतंकी मारे गए हैं। 

कश्मीर जोन पुलिस ने ट्वीट कर बताया कि पुलवामा एनकाउंटर में लश्कर के टॉप कमांडर जाहिद नजीर भट (Zahid Nazir Bhat) उर्फ जहीद टाइगर भी मारा गया है। पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए यह बड़ी कामायबी है।

55 राजपूताना राइफल्स की अगुवाई में आतंकियों के खिलाफ यह एनकाउंटर चला। पुलवामा एनकाउंटर में भी 2 आतंकी मारे जा चुके हैं। शनिवार (अक्टूबर 10, 2020) को दिनभर में 2 अलग-अलग एनकाउंटर में अब तक 4 आतंकी ढेर कर दिए गए।

इससे पहले पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि सुरक्षाबलों को दक्षिण कश्मीर में कुलगाम जिले के चिनगाम इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके बाद शुक्रवार देर रात इस इलाके को घेर लिया और तलाशी अभियान शुरू किया गया था।

उन्होंने बताया कि तलाशी अभियान के दौरान आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों पर गोलीबारी की, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई। अधिकारी ने बताया कि मुठभेड़ में दो आतंकवादियों की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि मारे गए आतंकियों की पहचान जंगलपुरा दिवसार कुलगाम निवासी तारिक अहमद मीर और पाकिस्तानी नागरिक समीर भाई उर्फ उस्मान के तौर पर की गई। पाकिस्तान के पंजाब का रहने वाला उस्मान ‘ए’ श्रेणी का आतंकवादी है। अधिकारी के अनुसार, दोनों आतंकवादी जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े थे।

पुलिस अफसर खुर्शीद अहमद और सरपंच की हत्या में थे शामिल

अधिकारी ने बताया, “पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार दोनों मारे गए आतंकवादी आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए जिम्मेदार संगठनों का हिस्सा थे। वे कई आतंकी वारदातों और नागरिकों की हत्या में शामिल थे। इनमें फुराह मीरबाजार में पुलिस अधिकारी खुर्शीद अहमद की हत्या और अखरान मीरबाजार में सरपंच आरिफ अहमद पर हमला शामिल है। हमले में अहमद गंभीर रूप से घायल हो गए थे।”

सेना के एक अधिकारी ने बताया कि मुठभेड़ स्थल से एक एम4 राइफल और एक पिस्तौल जब्त की गई हैं। पुलिस ने बताया कि दक्षिण कश्मीर में पुलवामा जिले के दादूरा इलाके में एक अन्य अभियान में दो आतंकवादी मारे गए। पुलिस ने बताया कि सुरक्षा बलों ने आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद इलाके में घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया। जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई। उन्होंने बताया कि मुठभेड़ स्थल से दो एके राइफल बरामद की गई हैं।