दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। याचिका में हिन्दू मैरिज एक्ट 1956 के तहत समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की बात कही गई थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि इस अधिनियम में ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि शादी आदमी और औरत के बीच ही होनी चाहिए। सोमवार 14 सितंबर 2020 को दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई की।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि वह इस याचिका का विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि हमारा कानून, समाज और मूल्य मान्यता नहीं देते हैं। हिन्दू मैरिज एक्ट समलैंगिक विवाह की अनुमति नहीं देता है। इस क़ानून के तहत सिर्फ एक आदमी और औरत के बीच शादी हो सकती है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि हमें भूलना नहीं चाहिए कि सर्वोच्च न्यायालय ने सिर्फ समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर किया है। न्यायालय ने इस मुद्दे पर इसके अलावा कुछ और नहीं कहा है।
Hearing on petition seeking marriage equality for LGBTQ persons begins before the Delhi High Court #LGBTQ
सॉलिसिटर जनरल मेहता ने यह भी कहा कि याचिका हलफ़नामा दायर किए जाने लायक नहीं है। इतना ही नहीं सर्वोच्च न्यायालय ने समलैंगिक विवाहों के बारे में कुछ नहीं कहा, इसलिए इसे मान्यता देने की माँग करने का कोई मतलब नहीं है। वहीं मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायाधीश प्रतीक जालान की पीठ ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा हमने मामले को खुले विचारों से समझा है।
Hearing on petition seeking marriage equality for LGBTQ persons begins before the Delhi High Court #LGBTQ
उन्होंने कहा हमने मुद्दे को इस आधार पर भी समझा है कि दुनिया में कितने बदलाव हो रहे हैं। इसके अलावा दिल्ली हाईकोर्ट ने ऐसे लोगों की सूची सौंपने के लिए कहा जिन लोगों को हिन्दू मैरिज एक्ट के तहत समलैंगिक विवाह का रजिस्ट्रेशन करने से मना कर दिया गया था। वहीं केंद्र सरकार ने क़ानून और संस्कृति का हवाला देते हुए समलैंगिक विवाह का विरोध किया। इस मामले पर अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को होगी।
यह याचिका अभिजीत अय्यर मित्रा, गोपी शंकर एम, गीति थंडानी और जी उर्वशी ने दायर की थी। अपनी याचिका में इन्होंने कहा था कि शादी का अधिकार छिनना समानता के अधिकार और जीने के अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने अपनी याचिका में यह भी कहा था हिंदू मैरिज एक्ट ऐसा नहीं कहता कि शादी महिला-पुरुष के बीच ही हो। साल 2018 से भारत में समलैंगिकता अपराध नहीं है, लेकिन फिर भी समलैंगिक शादी अपराध क्यों है। जब एलजीबीटी (LGBT) समुदाय को सुप्रीम कोर्ट ने मान्यता दी है, तो फिर शादी को मान्यता न देना संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन होगा।
बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत आज (14 सितंबर) मुंबई से अपने घर मनाली जाने के लिए रवाना हो गईं। उन्होंने चंडीगढ़ पहुँचते ही एक ट्वीट किया और बताया कि उन्हें पहले मुंबई में कैसा महसूस होता था और अब कैसा महसूस किया।
Maharashtra: Actor Kangana Ranaut leaves from her residence for Mumbai Airport. pic.twitter.com/lnzPneAshP
उन्होंने लिखा, “चंडीगढ़ मे उतरते ही मेरी सिक्योरिटी नाम मात्र रह गई है। लोग ख़ुशी से बधाई दे रहे हैं। लगता है इस बार मैं बच गई। एक दिन था जब मुंबई में माँ के आँचल की शीतलता महसूस होती थी। आज वो दिन है जब जान बची तो लाखों पाए। शिव सेना से सोनिया सेना होते ही मुंबई में आतंकी प्रशासन का बोल-बाला।”
चंडीगढ़ मे उतरते ही मेरी सिक्यरिटी नाम मात्र रह गयी है, लोग ख़ुशी से बधाई दे रेही हैं, लगता है इस बार मैं बच गयी, एक दिन था जब मुंबई में माँ के आँचल की शीतलता महसूस होती थी आज वो दिन है जब जान बची तो लाखों पाए, शिव सेना से सोनिया सेना होते ही मुंबई में आतंकी प्रशासन का बोल बाला।
इस ट्वीट से पहले कंगना ने अपने एक ट्वीट में बताया था कि वह भारी मन से वापस जा रही हैं। उन्होंने लिखा, “भारी मन से मुंबई से वापस लौट रही हूँ। जिस तरह मुझे इन दिनों परेशान किया गया, मेरे ऊपर अटैक किया गया, मुझे गलत चीजें बोली गईं, मेरा घर तोड़ने की धमकी दी गई और मेरा ऑफिस तोड़ा, सिक्योरिटी को हथियार के साथ मेरे आसपास रहने के लिए कहा गया, मुझे लगता है POK से तुलना करना सही था।”
With a heavy heart leaving Mumbai, the way I was terrorised all these days constant attacks and abuses hurled at me attempts to break my house after my work place, alert security with lethal weapons around me, must say my analogy about POK was bang on. https://t.co/VXYUNM1UDF
एक अन्य ट्वीट में उन्होंने यह भी लिखा, “‘दिल्ली के दिल को चीर के वहाँ इस साल खून बहा है, सोनिया सेना ने मुंबई में आजाद कश्मीर के नारे लगवाए, आज आजादी की कीमत सिर्फ आवाज है, मुझे अपनी आवाज दो, नहीं तो वो दिन दूर नहीं जब आजादी की कीमत सिर्फ और सिर्फ खून होगी।”
दिल्ली के दिल को चीर के वहाँ इस साल खून बहा है, सोनिया सेना ने मुंबई में आज़ाद कश्मीर के नारे लगवाए, आज आज़ादी की क़ीमत सिर्फ़ आवाज़ है, मुझे अपनी आवाज़ दो, नहीं तो वो दिन दूर नहीं जब आज़ादी की क़ीमत सिर्फ़ और सिर्फ़ ख़ून होगी। https://t.co/wDriSqqbLR
यहाँ बता दें कि पिछले दिनों बीएमसी की कार्रवाई के बाद से कंगना रनौत लगातार महाराष्ट्र प्रशासन पर हमलावर हैं। बॉलीवुड अभिनेता नास्सर अब्दुल्ला ने शिवसेना का समर्थन करते हुए एक इंटरव्यू में हाल में कहा कि महाराष्ट्र में तोड़फोड़ की घटनाएँ बालसाहब ठाकरे के समय से ही होती आ रही हैं।
उन्होंने दावा किया कि जितने भी शिवसैनिक हैं, वो सभी महिलाओं की इज्जत करते हैं। उन्होंने कहा कि कंगना रनौत शिवसेना के साथ आततायी हो गईं और इसलिए उनका दफ्तर तोड़ा गया। बकौल नास्सर अब्दुल्ला, ये बात तो माननी पड़ेगी कि शिवसैनिकों ने कंगना रनौत के साथ हाथापाई नहीं की।
उल्लेखनीय है कि कंगना रनौत 9 सितंबर को मुंबई पहुँची थीं। उनके आने से पहले शिवसेना नेता संजय राउत ने उन्हें मुंबई वापस न लौटने की धमकी दी थी, जिसके बाद कंगना ने कहा था कि वह मुंबई जरूर आएँगी जिसे जो करना है कर ले। ऐसे में कंगना जब कड़ी सुरक्षा के बीच मुंबई लौट रही थी तो तो बीएमसी ने उनके ऑफिस पर अवैध निर्माण की बात कहते हुए तोड़फोड़ की।
सोशल मीडिया पर पॉलिटिकल कार्टून का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस पॉलिटिकल कार्टून को इंडिया टुडे ने बनाया है। पॉलिटिकल कार्टून को ‘The App Hunter’ नाम दिया गया है और इसमें पीएम मोदी को प्रतिबंधित चीनी ऐप को निशाना बनाते हुए देखा जा सकता है।
कार्टून में पीएम मोदी बंदूक से ब्यूटी प्लस, लूडो वर्ल्ड, वी चैट, टिकटॉक और पबजी जैसे तमात चीनी ऐप का शिकार करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो को इंडिया टुडे ने 8 सितंबर को अपलोड किया था।
चीनी मीडिया के अनुसार पीएम मोदी द्वारा प्रतिबंधित ऐप पर निशाना बनाकर उनकी राष्ट्रीय भावना को आहत किया गया है। चीन के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स में कहा गया है कि चीनी सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे आतंकवाद और चीन के खिलाफ राष्ट्रीय भावना को भड़काने के रूप में समझा है।
A politoons video produced by India Today depicting @narendramodi shooting enemies representing Chinese apps is condemned by Chinese netizens as terrorism and provocation of Chinese national sentiments. https://t.co/sudYfxgKiTpic.twitter.com/AjSLyFGil1
चीनी नेटिजन्स ने इस व्यंग्य वीडियो को बेहद बेहूदा बताते हुए इसकी निंदा की। कई नेटिजन्स ने इस पर तमाम तरह की प्रतिक्रिया दी। एक चीनी सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, “मोदी ने निहत्थे लोगों का कत्लेआम किया, क्या भारतीय मीडिया आतंकवाद की वकालत करने की कोशिश कर रहा है?”
वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, “एक सशस्त्र मोदी निहत्थे लोगों की हत्या कर रहा है। भारतीय मीडिया अपने प्रधानमंत्री को आतंकवादी की तरह क्यों दिखा रहा है?” चीनी मीडिया के अनुसार कुछ पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह गुमराह और अति राष्ट्रवाद का उत्पाद है। कुछ अन्य नेटिजन्स ने लिखा, “इंडिया टुडे ऐसे हिंसक और खूनी वीडियो की वकालत कर रहा है, जो आतंकवाद को प्रचारित करता है।”
चीनी मीडिया के मुताबिक सिंघुआ विश्वविद्यालय में भारतीय अध्ययन के सहायक प्रोफेसर झी चाओ ने सोमवार (सितंबर 14, 2020) को ग्लोबल टाइम्स को बताया, “निजी उद्यमों पर नकेल कसने के लिए राज्य मशीनरी का उपयोग करना लोकलुभावनवाद को बढ़ाने में भारतीय जनता पार्टी के असली रंग को दर्शाता है। यह जनता को आनंद तो देता है, लेकिन जनता के हितों को नुकसान भी पहुँचाता है।”
गौरतलब है कि लद्दाख में भारतीय सैनिकों के जोरदार ऐक्शन के बाद भारत के 118 और चीनी ऐप को बैन करने से चीन बुरी तरह से भड़क गया है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने भारत के इस कदम पर गंभीर चिंता जताई थी। चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने एक बयान जारी करके भारत के इस फैसले पर सख्त ऐतराज भी जताया थी।
बता दें कि लद्दाख में चल रहे तनाव के बीच भारत अब तक चीन के 224 ऐप पर बैन लगा चुका है। चीनी वाणिज्य मंत्रालय का कहना था कि भारत का ऐप पर बैन लगाना चीनी निवेशकों और सर्विस प्रोवाइडरों के कानूनी हितों का उल्लंघन करता है। चीन इसको लेकर गंभीरतापूर्वक चिंतित है और पूरजोर विरोध करता है।
महाराष्ट्र में गिरफ्तार किए गए ‘रिपब्लिक टीवी’ के पत्रकारों अनुज कुमार, वीडियो जर्नलिस्ट यशपालजीत सिंह और ओला कैब ड्राइवर प्रदीप दिलीप धनावड़े को खालापुर कोर्ट से जमानत मिल गई है। रिपब्लिक मीडिया ने कहा है कि ये उसकी देशव्यापी मुहिम के कारण संभव हो पाया है। महाराष्ट्र पुलिस के द्वारा रिपब्लिक की क्रू टीम को लगभग 138 घंटे तक अपने पास रखा गया, लेकिन अब कोर्ट ने तीनों को जमानत प्रदान किया है।
रिपब्लिक ने इस कार्रवाई को अवैध करार दिया था। इन तीनों को रायगढ़ से गिरफ्तार किया गया था, जब वो इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग कर रहे थे। रिपब्लिक इस मामले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक भी पहुँचा था, जहाँ सोमवार (सितम्बर 14, 2020) को मामला दर्ज किया गया। आरोप है कि रिपब्लिक को अपने पत्रकारों को क़ानूनी सहायता देने से भी वंचित कर दिया गया था।
इस मामले पर बयान देते हुए रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के संस्थापक अर्नब गोस्वामी ने कहा, ”ये लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर प्रहार है। शिवसेना चाहती है कि हम उनके सामने घुटने टेक दें, वो हमसे हमारे रिपोर्ट करने के मूल अधिकार को छीनना चाहते है। संविधान के अनुच्छेद 19 (ए) के तहत, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के पास ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है। हमारी कवरेज सच के लिए है, सत्ता से डरे बिना।”
NHRC को दी गई याचिका में रिपब्लिक ने कहा है कि बिना क़ानूनी मदद उपलब्ध कराए उसके पत्रकारों को कस्टडी में लेना गलत है। इसे मानवाधिकार के मूलभूत सिद्धांतों का उल्लंघन भी करार दिया गया है। साथ ही आरोप लगाया कि पत्रकारों को उस रिपोर्ट के बारे में खुलासा करने को कहा जा रहा है, जिसकी वो जाँच कर रहे थे। साथ ही उस रिपोर्टिंग में मिले अहम लीड्स और उनके सूत्रों के बारे में खुलासा करने को कहा गया था।
Republic’s reporter Anuj and crew granted bail by court after being detained for 138 hours https://t.co/kXSgNgNftF
पत्रकारों और मीडिया नेटवर्क को धमकाने, डराने के अपने काम को जारी रखते हुए, शिवसेना ने बृहस्पतिवार (सितम्बर 10, 2020) को महाराष्ट्र में स्थानीय केबल ऑपरेटरों को ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ पर प्रतिबंध लगाने के लिए भी कहा था। संजय राउत को अपना मार्गदर्शक बताते हुए, शिवसेना ने ऐसा ना करने पर इसका ‘अंजाम भुगतने’ तक की भी धमकी दी थी।
ड्रग केस में गिरफ्तारी के बाद रिया चक्रवर्ती को लेकर आए दिन नए खुलासे हो रहे है। ताजा जानकारी के अनुसार, एनसीबी ने आज (सितंबर 14, 2020) सुबह छापेमारी के दौरान रिया के भाई शौविक के स्कूली दोस्त सूर्यदीप मल्होत्रा को भी गिरफ्तार कर लिया है। इसके अलावा एनसीबी की पड़ताल में सामने आया है कि ड्रग तस्करों से बात करने के लिए रिया अपनी माँ के फोन का इस्तेमाल करती थी।
आजतक और टाइम्स नाऊ का दावा है कि एनसीबी के सूत्रों से उन्हें यह सूचना मिली है। इनकी रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि रिया के घर पर एनसीबी की रेड के समय एक लैपटॉप और मोबाइल फोन बरामद किया गया था।
बता दें कि इससे पहले ईडी ने भी अपनी जाँच के लिए रिया का फोन माँगा था लेकिन उस समय रिया ने उन्हें अपना फोन नहीं दिया। जो फोन दिया उससे भी ऐसी चैट निकल कर आ गई जिसके कारण ईडी ने एनसीबी को यह केस सौंप दिया और उन्होंने अपनी ताबड़तोड़ छापेमारी व पूछताछ करके इस मामले से संबंधित कई लोगों को गिरफ्तार किया। रिया चक्रवर्ती भी इस संबंध में पिछले शुक्रवार को जेल भेजी जा चुकी हैं। उनकी बेल याचिका कोर्ट ने दो बार खारिज की है। मुमकिन है कि वो अब हाईकोर्ट का रुख करें।
सूर्यदीप मल्होत्रा को लेकर भी खुलासा रिया और शौविक की चैट्स से ही हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि सूर्यदीप, सुशांत के घर पार्टी करने आया करते थे। इतना ही नहीं 10 अक्टूबर को हुई एक चैट में शौविक किसी को ड्रग्स के लिए सूर्यदीप नाम रेफर कर रहा है। इसके अलावा यह भी पता चला है कि शौविक हाई एंड ड्रग पार्टी में भी सूर्यदीप को लेकर कई बार गया था।
सूर्यदीप पर यह भी आरोप है कि उसी ने शौविक को बांद्रा बॉयज ड्रग पेडलर ग्रुप से मिलवाने का काम किया था। जैसे पहले सूर्यदीप ने उसे बाशित से मिलवाया, फिर बाशित ने उसे अब्बास, जैद और करण से मिलवाया और धीरे-धीरे यह ग्रुप बढ़ता गया।
रिपब्लिकटीवी की खबर में एनसीबी ने पूरे केस में 6 अन्य लोगों की गिरफ्तारी की है। इनके नाम करमजीत सिंह, ड्वेन फर्नांडिस, संकेत पटेल, अंकुश अर्जेना, संदीप गुप्ता और आफताब फतेह अंसारी हैं। इन्हें जल्द ही एडिशनल चीफ मजिस्ट्रेट कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया जाएगा।
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र उमर खालिद को दिल्ली पुलिस ने रविवार (13 सितंबर 2020) को गिरफ्तार किया था। फरवरी में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) विरोध के दौरान दिल्ली के कई इलाकों में दंगे हुए थे और उमर खालिद पर उन दंगों का षड्यंत्र रचने का आरोप है। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने उमर खालिद पर गैर क़ानूनी गतिविधि (नियंत्रण) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया था।
पुलिस ने उमर खालिद से लगभग 11 घंटे तक पूछताछ की। इसके बाद जैसे ही यह ख़बर सामने आई कि उमर खालिद को दिल्ली दंगों के मामले में शामिल होने की वजह से गिरफ्तार किया जा चुका है, ठीक वैसे ही लिबरल गैंग ने सोशल मीडिया पर प्रलाप शुरू कर दिया। लिबरल गैंग के तमाम लोगों ने उमर खालिद की गिरफ्तारी पर प्रलाप करते हुए प्रतिक्रियाएँ दी।
पत्रकार सबा नकवी ने गिरफ्तार को गलत बताया। इसके बाद जाँच एजेंसी की भूमिका पर सवाल खड़ा करते हुए कहा उमर खालिद निर्दोष है और उसे अपराधी बताया जा रहा है।
When an actor can be treated as and enemy of the people, what chance did #UmarKhalid have, a left activist and Indian Muslim, outstanding student, against whom a narrative has been constructed by TV channels since 2016.
इसके बाद खुद को घोर वामपंथी बताने वाली स्वरा भास्कर ने यूएपीए को ही खारिज कर दिया। स्वरा के मुताबिक़ इस क़ानून को ख़त्म कर देना चाहिए, क्योंकि इसके तहत उमर खालिद की गिरफ्तारी हुई है।
अभिनेता मोहम्मद ज़ीशान अयूब ने अपने ट्वीट में लिखा कि इस देश में अल्पसंख्यक होना किसी अपराध से कम न है। अगर कोई अहिंसा या संविधान की बात करता है तो उसे सूली पर चढ़ा दिया जाता है।
जी हाँ, इस देश में अब #Minority होना गुनाह है!! सही होना उससे भी बड़ा अपराध!! और संविधान या अहिंसा की बात करने पे तो सूली पे भी चढ़ाए जा सकते हैं! कल आपके घर से भी, कोई भी उठा लिया जाएगा, और आप ऐसे ही मुँह ताकते रह जाएँगे!! ताक़त का नंगा नाच है ये! #IStandWithUmarKhalid
पत्रकार तवलीन सिंह ने ट्वीट कर संकेत दिए कि उमर की गिरफ्तार इसलिए हुई है, क्योंकि वह मुस्लिम है। उन्होंने कहा कि कोई ऐसे हिन्दू के बारे में जानता है जिसे दिल्ली दंगे भड़काने के लिए गिरफ्तार किया गया हो।
Can anyone name Hindus arrested for inciting violence during the Delhi riots? For instance those who shouted ‘desh ke ghaddaron ko, goli maaro saalon ko’?
जबकि सच्चाई यह है कि दिल्ली पुलिस ने बिना धर्म या समुदाय देखे कार्रवाई की है। हिंदुस्तान टाइम्स द्वारा प्रकाशित खबर के अनुसार पुलिस ने दिल्ली दंगों के मामले में ऐसे 9 लोगों को भी गिरफ्तार किया है जो हिंदू हैं। वैसे भी इस तर्क का कोई अर्थ नहीं है। उमर खालिद ने पहले ही यह बात स्वीकारी थी कि वह नास्तिक है।
प्रशांत भूषण जिन्हें हाल ही में अदालत ने अवमानना के मामले में दोषी करार दिया था उन्होंने भी उमर खालिद की गिरफ्तारी पर गुस्सा जताया है। उन्होंने कहा सीताराम येचुरी, योगेन्द्र यादव, जयंती घोष और अपूर्वानंद पर हुई कार्रवाई से एक बात साफ़ है कि दिल्ली दंगों के मामले में दिल्ली पुलिस की जाँच दुर्भावनापूर्ण तरीके से की जा रही है।
Umar Khalid’s arrest by Delhi police after naming Yechury, Yogendra Yadav, Jayati Ghosh& Apoorvanand, leaves no doubt at all about the malafide nature of it’s investigation into Delhi riots. It’s a conspiracy by the police to frame peaceful activists in the guise of Investigation
जबकि दिल्ली पुलिस ने इनका नाम एक चश्मदीद के खुलासे के आधार पर शामिल किया है। इन पर अभी तक इस मामले में कोई धारा लगाई नहीं गई है, जैसा कि प्रशांत भूषण लोगों के सामने बताना चाह रहे हैं।
स्वघोषित सामाजिक कार्यकर्ता और तथाकथित चुनावी विश्लेषक योगेन्द्र यादव ने भी उमर खालिद की छवि चमकाने का मौक़ा नहीं छोड़ा। अपने ट्वीट में योगेन्द्र यादव ने बताया कि उन्हें उमर खालिद की गिरफ्तारी की वजह से हैरानी है। इसके बाद योगेन्द्र यादव ने उमर खालिद को युवा, आदर्शवादी और हिंसा विरोधी भी बताया।
Shocked that an anti-terror law UAPA has been used to arrest a young, thinking, idealist like @UmarKhalidJNU who has always opposed violence and communalism in any form. He is undoubtedly among the leaders that India deserves.@DelhiPolice can’t detain India’s future for long.
अक्सर झूठ का प्रचार प्रसार करने वाले और खुद को फैक्ट चेकर बताने वाले प्रतीक सिन्हा ने भी इस मुद्दे पर ट्वीट करने का मौक़ा नहीं छोड़ा। प्रतीक सिन्हा उमर खालिद की गिरफ्तारी से इतने निराश हुए कि यहाँ तक कह दिया कि भारत में लोकतंत्र जैसा महसूस ही नहीं होता है। उनके मुताबिक़ दिल्ली दंगों के मामले में जिस तरह की कार्रवाई हुई है उसे देख कर ऐसा लगता है जैसे देश में लोकतंत्र ही ख़त्म हो गया है।
On most days, this country doesn’t feel like a democracy anymore. #StandWithUmarKhalid
वामपंथी मीडिया समूह द वायर के सह संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन ने भी उमर खालिद की गिरफ्तारी पर सवाल खड़े किए हैं। उनके मुताबिक़ अमित शाह ने लोकसभा में उमर खालिद को दिल्ली दंगे भड़काने का आरोपित बताया था। इसी वजह से उसकी गिरफ्तारी हुई।
There was an inevitability to this police action. Though they know there’s no evidence to back up their ludicrous case, @AmitShah in the LS had blamed @UmarKhalidJNU for the riots (his own party folks had triggered) and parliament reconvenes Monday.https://t.co/u5WqMMSnWM
विवादित पत्रकार राणा अयूब जो हाल ही में कोरोना से ठीक हुई हैं उन्होंने भी उमर खालिद के समर्थन में एक ट्वीट किया।
The Modi regime has systematically arrested every dissenting voice that commands a following and has leadership potential. The anti CAA protest gave us leaders who are willing to be our ‘opposition’ in the face of intimidation by the state. The arrests are meant to silence them
जहाँ एक तरफ लिबरल्स ने तमाम कारण बता कर उमर खालिद की गिरफ्तारी को गलत बताया वहाँ एक बात उल्लेखनीय है कि दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपित ताहिर हुसैन ने अपने बयान में कहा था कि उसे उमर खालिद ने ही खालिद सैफी से मिलवाया था। इसके बाद सभी ने मिल कर दंगों की योजना तैयार की थी।
पहले उमर खालिद के विरुद्ध जो एफआईआर दर्ज की गई थी, उसमें ऐसा कहा गया था कि दिल्ली दंगों का षड्यंत्र पहले से ही रचा गया था। इसकी साज़िश रचने में कोई और नहीं बल्कि उमर खालिद और उसके सहयोगी शामिल हैं। उमर खालिद ने दिल्ली दंगों के दौरान विवादित भाषण दिए थे और लोगों से निवेदन किया था कि वह डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान सड़कों पर आएँ ताकि दुनिया में ऐसा संदेश जाए कि भारत में अल्पसंख्यकों के साथ बहुत अत्याचार हो रहा है।
बिहार के बेगूसराय जिले के शाहपुर गाँव में एक दलित नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ और उसके परिवार के साथ मारपीट के बाद पिछले दिनों पुलिस ने उसके ही तीन परिजनों को गिरफ्तार कर लिया था। मगर, ताजा सूचना के अनुसार बजरंग दल के लगातार प्रयासों के बाद उन्हें जेल से आखिरकार शनिवार को बेल मिल गई।
लड़की के साथ छेड़छाड़ मामले में दूसरे पक्ष के ख़िलाफ़ शिकायत करने के बाद उसके तीन परिजनों को जेल में बंद किया गया था। इस गिरफ्तारी के बाद से ही बजरंग दल लगातार परिवार को इंसाफ दिलाने की कोशिशों में जुटा था और साथ ही एसएचओ की कार्रवाई से असंतुष्ट होकर उनके खिलाफ़ आंदोलन भी कर रहा था।
पिछले दिनों बजरंग दल ने इस मामले के संज्ञान में आने के बाद डीएसपी राजन सिन्हा से मिल कर लाखो थाना प्रभारी के निलंबन की माँग उठाई थी। उन्होंने प्रदर्शन करते हुए पुलिस अधिकारी की भूमिका पर सवाल किए थे।
बजरंग दल ने पूछे थे सवाल
बजरंग दल का कहना था कि आखिर पूरे मामले में लड़की के नाबालिग होने पर भी पॉक्सो एक्ट क्यों नहीं लगाया गया? लड़की के वंचित समाज से होने और आवेदन में जाति सूचक गाली का उल्लेख देखने के बाद भी केस को एससी-एसटी एक्ट में नहीं क्यों नहीं लिखा गया? लड़की के घायल परिजनों को जेल में क्यों भेजा गया और फिर उन्हें 72 घंटे जेल में क्यों रखा गया?
10 सितंबर को बजरंग दल का रास्ता जाम प्रदर्शन – जलाया गया थाना प्रभारी का पुतला भी
10 सितंबर को बजरंग दल का रास्ता जाम प्रदर्शन
बजरंग दल का सवाल था कि जब पीड़ित पक्ष में एक व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार था और उसका इलाज चल रहा था, तब भी उसे बिना मानसिक इलाज के सीधे जेल भेज दिया गया और 72 घंटे बंद करके प्रताड़ना दी गई। इसके अलावा संगठन के यह भी आरोप थे कि केस होने के दौरान एक ‘दलाल’ थाना प्रभारी के केबिन में गया था और फिर निकल कर पीड़ित परिवार से पैसे की माँग करने लगा था। बजरंग दल की मानें तो इस बात को प्रमाणित करने के लिए संगठन के पास वीडियोज आदि भी हैं।
इतना ही नहीं, एक ऑडियो का जिक्र करते हुए बजरंग दल प्रदेश सह संयोजक शुभम भारद्वाज कहते हैं कि उनके संगठन के कार्यकर्ता से इस मामले को दबाने की बात भी थाना प्रभारी ने की थी। इसलिए उनका सवाल है कि वंचित समाज की लड़की के साथ अपराध को दबाने की बात करना कहाँ तक उचित है?
गौरतलब है कि इन्हीं सवालों के मद्देनजर बजरंग दल ने 10 सितंबर को रास्ता जाम करके प्रदर्शन किया था। साथ ही थाना प्रभारी का पुतला भी जलाया था। संगठन का कहना था कि वह इस मामले को दलित आयोग और बाल आयोग तक लेकर जाएँगे। हिंदू दलितों पर अत्याचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
क्या था मामला?
3 सितंबर बेगूसराय के शाहपुर गाँव में एक नाबालिग दलित लड़की के साथ दूसरे समुदाय के युवक मो अलाउद्दीन द्वारा छेड़छाड़ का मामला सामने आया था। लड़की ने ऑपइंडिया को बताया था कि सब्जी लेने के लिए बाजार जाते समय अलाउद्दीन ने उसे पहले साइकिल से गिराया फिर हाथ लगाने लगा। बड़ी मुश्किल से वह खुद को छुड़ा कर भागी, जिस पर उसने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि चम$%^ कब तक बच पाएगी।
लड़की ने घर आकर अपने परिवार को यह सब बताया, जिसके बाद उसके घर के लोग दूसरे पक्ष के लड़के को समझाने गए, लेकिन दूसरे पक्ष ने बात सुनने की बजाय हमला बोल दिया और ईंट-पत्थर फेंकने लगे। घायल अवस्था में जब लड़की के परिजन अपनी शिकायत लेकर थाने में पहुँचे, तो उन्हें इलाज के लिए भेजा गया और फिर लौटने पर उनमें से तीन लोगों को जेल में बंद कर दिया गया।
बजरंग दल के संज्ञान में यह मामला आते ही इस पर थाना प्रभारी से गिरफ्तारी को लेकर सवाल पूछा गया मगर, थाना प्रभारी ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया और दूसरे पक्ष की एफआईआर का खुद ही इंतजार करने लगे। बजरंग दल के सक्रिय कार्यकर्ता व विभाग संयोजक पंकज कहते हैं कि जब उनसे यह बात कही गई, तब उन्होंने कहा कि क्या बिना दूसरे पक्ष की एफआईआर के एडवांस कार्रवाई में तीनों को गिरफ्तार किया गया है?
दूसरे पक्ष की FIR
उल्लेखनीय है कि पीड़ित परिवार के बाद दूसरे पक्ष की ओर से भी 4 सितंबर को एफआईआर करवाई गई थी। शिकायत के अनुसार दूसरे पक्ष से मो. पप्पू ने बताया कि 3 सितंबर को उनके घर पर 10 लोग (राजू कुमार, अमित कुमार, गौतम कुमार, सुनील दास, राजेश दास, अमरेश कुमार, उदय दास, दिनेश दास, संतोष दास और मंटून दास) आए और गाली गलौच करने लगे।
इसके बाद लाठी-डंडे से उन पर वार भी किया। इस बीच जब उसकी पत्नी सोनी खातुन घर से निकल कर उन्हें बचाने आई तो उसके साथ भी मारपीट हुई और राजू कुमार, अमित कुमार ने उसकी साड़ी पकड़ कर खींच लिया, जिससे वह अर्धनग्न हो गई। इसके बाद शिकायत के मुताबिक उन लोगों ने मो. पप्पू की पत्नी के गले से 10 ग्राम की चेन खींच ली और धमकी दी कि अगर मुकदमा किया तो जान से मार देंगे।
दूसरे पक्ष की एफआईआर
यहाँ बता दें कि इस छेड़छाड़ के मामले में बजरंग दल ने पुलिस पर जो सवाल उठाए, उन पर प्रतिक्रिया लेने के लिए हमने लाखो थाना प्रभारी का पक्ष जानने का प्रयास किया था। लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। हालाँकि, मामले के मद्देनजर थाना प्रभारी संतोष शर्मा ने घटना वाले दिन ऑपइंडिया को पूरा मामला दोनों पक्षों के बीच हुई मारपीट का बताया था और सूचित किया था कि इस संबंध में 5 लोगों की गिरफ्तारी हुई है।
बजरंग दल कार्यकर्ता पंकज ने पूछी थी गिरफ्तारी की वजह
स्थानीय बजरंग दल कार्यकर्ता पंकज बताते हैं कि जब थाना प्रभारी ने लड़की के घरवालों को गिरफ्तार किया था, तब उन्होंने ही इस मामले में सवाल उठाए थे। वह पुलिस से हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहते हैं कि जब शिकायत करने पीड़ित परिवार गया तो पुलिस ने उन्हें ही जेल में डाल दिया। बाद में संगठन के दबाव में उन्होंने दूसरी ओर से भी दो लोगों की गिरफ्तारी की। ऐसे में उन्होंने (पंकज) कहा कि चलिए मान लेते हैं कि पुलिस ने माहौल को शांत करने के लिए ऐसा किया। लेकिन 24 घंटे बाद तो उन्हें छोड़ा जाना चाहिए।
वे बताते हैं कि थाना प्रभारी ने उनके सवालों को सुन कर रहा, “उधर से देख लेते हैं कि क्या शिकायत आती है। उसके बाद छोड़ देंगे।” जिस पर पंकज ने हैरानी जताते हुए कहा, “ये तो एडवांस बुकिंग हो गई कि कोई एफआईआर हुई भी नहीं और आप अपनी तरफ से खुद ही कार्रवाई करके जेल में डाल दिए।”
इस पर थाना प्रभारी ने कहा, “यहाँ माहौल कम्युनल हो जाता है। इसलिए हमें यह सब करना पड़ेगा।” पंकज का आरोप है कि पुलिस अधिकारी ने उस समय ऐसी बातें करके लड़की के परिजनों को नहीं छोड़ा और शाम को दूसरे पक्ष की एफआईआर मँगवा ली।
प्रदेश सह संयोजक शुभम भारद्वाज की माँग
शुभम भारद्वाज का कहना है कि लाखो ओपी के शाहपुर गाँव में एक वंचित दलित समाज की बहन के साथ 3 सितंबर को मो अलाउद्दीन ने छेड़छाड़ करते हुए दुष्कर्म करने का प्रयास किया। विरोध करने पर पीड़ित लड़की के परिजनों पर जानलेवा हमला कर बुरी तरह से घायल कर दिया।
थाना पहुँच कर शिकायत करने वाले पीड़ित परिजनों के साथ लाखो ओपी प्रभारी के द्वारा जातिसूचक गाली गलौज किया गया तथा करीब 72 घण्टे तक जेल में बंद रखा गया। दलाल के माध्यम से पीड़ित से 10 हजार रुपया माँग की गई। केस में POCSO एक्ट की सुसंगत धारा नहीं लगाई गई है। थाना प्रभारी फोन कर मामले को दबाने का दबाव बजरंगदल कार्यकर्ताओं पर दे रहे हैं। इसलिए भ्रष्ट, धर्म एवं दलित विरोधी लाखो ओपी प्रभारी को शीघ्र निलंबित करना जरूरी है।
झारखण्ड में राजद सुप्रीमो लालू यादव के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुलाकात का असर बिहार में दिख रहा है। नीतीश सरकार में मंत्री नीरज कुमार ने कहा है कि इस मुलाकात से लोकतंत्र शर्मसार हुआ है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के महामंडलेश्वर सजायाफ्ता लालू प्रसाद यादव के दरबार के दरबार में मत्था टेकने झारखंड सरकार के मुखिया हेमंत सोरेन पहुँचे। उन्होंने कहा कि झारखंड सीएम लालू के सामने नतमस्तक हैं।
बता दें कि लालू यादव को रिम्स से निदेशक के बंगले में शिफ्ट किया गया है और हेमंत सोरेन ने बताया है कि उनका स्वास्थ्य पहले से बेहतर है। नीरज कुमार ने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन लालू के दर पर फ़रियाद लेकर गए थे। जहाँ लालू यादव रुके हुए हैं, वहाँ लगातार नेताओं का जमावड़ा लगा हुआ है और बिहार से टिकट के दावेदार एक-एक कर के पहुँच रहे हैं। उनके बँगले के बाहर खासी चहल-पहल है।
हेमंत सोरेन ने घोषणा की है कि बिहार में होने वाले विधानसभा चुनावों में उनकी पार्टी राजद के साथ मिल कर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने बताया कि वो लालू का स्वास्थ्य जानने के लिए आए थे। इससे पहले लालू रिम्स के पेइंग वार्ड में भर्ती थे, जहाँ से उन्हें शिफ्ट किया गया। रिम्स में भी हेमंत सोरेन लालू से मिलने पहुँचे थे। उन्होंने चुनाव जीतने के बाद भी लालू यादव का आशीर्वाद लिया था और उनसे शासन चलाने के गुर सीखे थे।
राजद ने इसी बीच पटना में स्थित पार्टी कार्यालय में पोस्टर लगाया है, जिसमें लालू यादव के नदारद होना चर्चा का विषय बन रहा है। विधानसभा चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान कभी भी हो सकता है, इससे पहले राजद युवाओं को लुभाने में जुट गया है। ‘नई सोच नया बिहार, युवा सरकार अबकी बार’ नारे के साथ लगाए गए इस पोस्टर में केवल तेजस्वी यादव दिख रहे हैं। इसमें न तो तेजप्रताप और न ही पार्टी के किसी अन्य नेता की तस्वीर है।
जुलाई 2020 में झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया था कि जहाँ एक तरफ मरीजों को RIMS में बेड्स नहीं मिल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ लालू यादव की सुरक्षा का बहाना बना कर 18 कमरों को बंद कर दिया गया है। उन्होंने पूछा था कि किसकी शह पर ऐसा किया जा रहा है? उन्होंने ध्यान दिलाया था कि अगर एक कमरे में 2 मरीज भी होते तो इन कमरों में लगभग 40 मरीजों का इलाज किया जा सकता है।
बिहार में विधानसभा चुनाव लड़ेगा झारखंड मुक्ति मोर्चा, हेमंत सोरेन ने लालू से मिलकर मांगी 12 सीटें, तो राजद सुप्रीमो बोले…@HemantSorenJMMhttps://t.co/AaHJGVj9Qm
राजनीतिक विश्लेषकों का ये भी कहना है कि रघुवंश प्रसाद सिंह की मौत और उससे पहले दिए गए उनके इस्तीफे के कारण लालू यादव की समाजवादी छवि को नुकसान पहुँच सकता है। जिस तरह से तेजप्रताप यादव ने उनके बारे में कहा था कि समुद्र में से एक लोटा पानी निकल जाने से कुछ नहीं होगा और लालू यादव इमोशनल पत्र लिख कर उनका इस्तीफा ठुकराते रहे, ये विरोधाभास भी जनता के बीच गलत सन्देश लेकर जा सकता है।
चीन पर कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर लगातार सवाल उठते आ रहे हैं। अमेरिका से लेकर यूरोप के कई देश इस खतरनाक वायरस की उत्पत्ति के लिए चीन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इसी क्रम में अब खुद चीन की महिला वीरोलॉजिस्ट डॉ. ली-मेंग यान ने कोरोना वायरस के मानव निर्मित होने का दावा किया है।
डॉ. ली-मेंग ने दावा किया है कि कोरोना वायरस को एक सरकार के नियंत्रण वाले प्रयोगशाला में तैयार किया गया था और उनके पास अपने दावे को साबित करने के लिए वैज्ञानिक प्रमाण हैं। जिसे वह जल्द पेश करेंगी।
कोरोना से निपटने के लिए चीनी सरकार के खिलाफ व्हिसलब्लोअर बनने वाली वायरोलॉजिस्ट को पिछले साल दिसंबर में चीन से निकलने वाले सार्स (कोरोना जैसा वायरस) जैसे मामलों के एक समूह को देखने का काम सौंपा गया था।
हॉन्गकॉन्ग में काम करने वाली शीर्ष वैज्ञानिक ने दावा किया कि उन्होंने अपनी जाँच के दौरान एक कवर-अप ऑपरेशन का पता लगाया और कहा कि चीन की सरकार को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने से पहले ही वायरस के प्रसार की जानकारी थी।
‘हॉन्गकॉन्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ’ से वायरोलॉजी और इम्यूनोलॉजी में विशेषज्ञता प्राप्त डॉ. ली-मेंग को कथित रूप से सुरक्षा चिंताओं के कारण अमेरिका भागने के लिए मजबूर होना पड़ा। 11 सितंबर को, उन्होंने एक गुप्त जगह से ब्रिटिश टॉक शो ‘लूज वीमेन’ को एक साक्षात्कार दिया और कोरोना वायरस बीमारी पर अपने शोध और चुनौतियों के बारे में बात की।
इस दौरान उन्होंने चीन सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “इस वायरस को लेकर चीन बहुत कुछ छुपा रहा है और मैं दावे के साथ कह सकती हूँ कि यह एक चीन द्वारा मानव निर्मित वायरस है। मेरे पास इसके सबूत हैं और मैं ये साबित कर दूँगी।”
ली-मेंग ने कहा कि कोरोना वुहान के मीट मार्केट से नहीं आया है, क्योंकि यह मीट मार्केट एक स्मोक स्क्रीन है। यह वायरस प्रकृति की देन नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि अगर यह वायरस वुहान के मीट मार्केट से नहीं आया है तो आखिर इसकी उत्पत्ति कैसे हुई? इसका जवाब देते हुए ली-मेंग ने कहा कि यह खतरनाक वायरस वुहान के लैब से आया है और यह मानव निर्मित है।
उन्होंने कहा कि इस वायरस का जीनोम अनुक्रम एक मानव फिंगर प्रिंट की तरह है और इसके आधार पर ही वे साबित कर देंगी कि यह एक मानव निर्मित वायरस है। उन्होंने कहा कि किसी भी वायरस में मानव फिंगर प्रिंट की उपस्थिति यह बताने के लिए काफी है कि इसकी उत्पत्ति मानव द्वारा की गई है। ली-मेंग ने कहा कि भले ही आपके पास जीव विज्ञान का ज्ञान न हो या आप इसे नहीं पढ़ते हैं, लेकिन फिर भी आप इसके आकार से इस वायरस की उत्पत्ति की पहचान कर लेंगे।
इस दौरान उन्होंने चीन सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “धमकी के बाद मैं हॉन्गकॉन्ग छोड़कर अमेरिका चली गई लेकिन मेरी सारी निजी जानकारी सरकारी डेटाबेस से मिटा दी गई और मेरे साथियों से मेरे बारे में अफवाह फैलाने के लिए कहा गया। सरकार मुझे झूठा साबित करने के लिए तरह -तरह के हथकंडे अपना रही है और हत्या करने तक का आरोप लगा रही है, लेकिन मैं अपने लक्ष्य से पीछे हटने वाली नहीं हूँ।”
ली-मेंग का कहना है कि वह कोरोना वायरस का अध्ययन करने वाली पहले कुछ वैज्ञानिकों में से एक थीं। दिसंबर 2019 के अंत में उनका दावा था कि उन्हें विश्वविद्यालय में उनके पर्यवेक्षक द्वारा एसएआरएस जैसे मामलों के एक विषम समूह को देखने के लिए कहा गया था जो कि चीन में उत्पन्न हुआ है।
डॉ. ली-मेंग ने कहा कि उन्होंने दिसंबर के अंत और जनवरी के शुरू में चीन में ‘न्यू निमोनिया’ पर दो शोध किए और अपने सुपरवाइजर के साथ परिणाम साझा किए जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सलाहकार थे।
वह अपने सुपरवाइजर से चीनी सरकार और डब्ल्यूएचओ की ओर से सही काम करने की उम्मीद कर रही थीं। लेकिन उन्हें तब बेहद आश्चर्य हुआ, जब उनसे चुप्पी बनाए रखने के लिए कहा गया और ऐसा नहीं करने पर उन्हें गायब कर दिए जाने की धमकी दी गई। वायरोलॉजिस्ट ने कहा कि चीन में वैज्ञानिकों को गायब कर देना आम बात है।
डॉ. ली-मेंग ने कहा कि इस पर किसी ने प्रतिक्रिया नहीं दी। लोग सरकार से डर रहे थे। वे इस झंझट से बचने और अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए सरकार और डब्ल्यूएचओ के साथ सहयोग करने की प्रतीक्षा कर रहे थे, लेकिन इसकी जानकारी बेहद जरूरी थी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चीन की सरकार ने उनके खिलाफ गलत जानकारी फैलाने के लिए बाकायदा कुछ लोगों को नौकरी पर रखा है। उन्होंने कहा कि वायरस से पार पाने के लिए यह पता होना महत्वपूर्ण है कि उसकी उत्पत्ति कैसे हुई। यदि चीन ने दुनिया को सच बता दिया होता तो शायद इसे वक्त रहते नियंत्रित किया जा सकता था।
पत्रकार राणा अयूब के कोरोना पॉजिटिव होने की खबर आई थी। सोशल मीडिया के माध्यम से राणा अयूब ने अपनी मेडिकल जाँच रिपोर्ट शेयर कर के दावा किया कि अब वो कोरोना वायरस से मुक्त हो गई हैं। हालाँकि, इस दौरान रिपोर्ट में उनका सेक्स मेल लिखा हुआ था, अर्थात उनका लिंग पुरुष दर्ज था। इसके बाद से ही सोशल मीडिया पर ये चर्चा शुरू हो गई है कि राणा अयूब का सेक्स मेल है और वो पुरुष हैं।
बाद में राणा अयूब ने इस ट्वीट को डिलीट कर लिया। फिर उन्होंने इस हिस्से को क्रॉप कर के अपनी जाँच रिपोर्ट की तस्वीर फिर से पोस्ट की। इसमें उन्होंने अपना सेक्स मेल लिखे होने वाला हिस्सा हटा दिया था। कुछ लोगों ने कहा कि वो अपने कोविड-19 टेस्ट कराने गई थीं या फिर अपना जेंडर टेस्ट कराने? वहीं एक अन्य ट्विटर यूजर ने लिखा कि कोरोना टेस्ट तो बहाना था, राणा अयूब को अपना जेंडर टेस्ट करवाना था।
मीडिया टिप्पणीकार अरुण पुदुर ने इस जाँच रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट पोस्ट करते हुए पूछा कि राणा अयूब ने उस ट्वीट को डिलीट क्यों किया, जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा हुआ है कि उनका सेक्स मेल है। उन्होंने पूछा कि ये जाँच रिपोर्ट ही फेक है या फिर राणा अयूब ‘Gender Fluid’ हैं? साथ ही उन्होंने ये भी पूछा कि कहीं वो मुंबई के कई ड्रगबाजों की तरह अपने शरीर से ड्रग्स के सबूत मिटाने के लिए तो नहीं अस्पताल में भर्ती हुई थीं?
Or may be she had done séx change? ?
— 卐 ࿗ प्रतीक पई-अग्रवाल Pratik Pai-Agrawal ࿗ 卐 (@36garhiToora) September 14, 2020
विराज नाम के एक ट्विटर यूजर ने तो यहाँ तक दावा किया कि कहीं उन्होंने अपने कोरोना केस वाली बात तो झूठ के रूप में नहीं फैलाई थी? एक यूजर ने लिखा कि वायरस ही जेंडर न्यूट्रल है। ज्योति कपूर दास ने ‘मेरी 5 साल की भतीजी’ टाइप का कोई बहाना फिर से आने की शंका जताई। बता दें कि राणा अयूब ने दावा किया था कि उनकी 5 साल की भतीजी ने मंदिर-मस्जिद की तस्वीर साथ बना कर असहिष्णुता पर लेख लिखा था।
बाद में पता चला कि वो लेख बच्चों की एक पोर्टल से कॉपी-पेस्ट किया गया था। ‘मीमर हर्ष’ नामक ट्विटर यूजर ने शक जताया कि राणा अयूब को कोरोना हुआ ही नहीं था और उन्होंने सहानुभति लेने के लिए ये ‘निंजा टेक्निक’ अपनाया। एक व्यक्ति ने तंज कसते हुए पूछा कि आखिर ये कैसा हॉस्पिटल है, जिसमें कोरोना पॉजिटिव महिला मरीज इलाज के बाद पुरुष बन कर निकलती है। उसने इसकी तुलना ‘आलू-सोना’ वाली मशीन से की।
ज्ञात हो कि राणा अय्यूब ने ही जानकारी दी थी कि कोरोना वायरस टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आया है। उन्होंने बुधवार (सितंबर 9, 2020) को ट्वीट किया था कि बीती रात उनका ऑक्सीजन लेवल काफी डाउन हो गया, जिसके बाद उनका कोरोना टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आया है। उन्होंने अपने ट्वीट में इस बात का दावा किया था वह खुद को किसी अस्पताल में भर्ती कराने के लिए नवी मुंबई में एक बेड की तलाश कर रही है।