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मंदिर में लाउडस्पीकर पर बवाल: 5 दिन में तीसरी घटना, पहले मार-पीट… अब परिणाम भुगतने की धमकी, एक्शन में UP पुलिस

उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित केमरी के सिघड़ियान मोहल्ले में मंदिर में लाउडस्पीकर बजाने को लेकर विवाद हो गया। इससे उत्पन्न हुए तनाव के बाद दो समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप कर के मामला शांत कराना पड़ा। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुँच कर पूरे मामले को शांत कराया। मंदिर में लाउडस्पीकर को लेकर हुए विवाद के बाद उत्पन्न हुए तनाव के सम्बन्ध में 3 लोगों का चालान किया गया है।

इन तीनों पर इलाक़े की शांति भंग करने का आरोप लगाया गया है। ये घटना मोहल्ले के वार्ड नंबर-3 में स्थित एक शिव मंदिर का है, जो वर्षों पुराना है। इस मंदिर में शाम के समय अक्सर लोग जुटते थे और भजन-कीर्तन हुआ करता था। इसके लिए लाउडस्पीकर का भी प्रयोग किया जाता था। लेकिन, कोरोना संक्रमण आपदा के कारण लगाए गए लॉकडाउन के बाद सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए लाउडस्पीकर का इस्तेमाल बंद कर दिया गया था।

कुछ दिनों पहले सरकार ने मंदिर में चुनिंदा लोगों को सोशल डिस्टेंडिंग का पालन करते हुए भजन-कीर्तन करने की अनुमति दे दी, जिसेक बाद ये क्रम फिर से शुरू हो गया। तभी समुदाय विशेष के कुछ युवक सड़क पर आकर हंगामा करने लगे। उन्होंने भजन-कीर्तन कर रहे श्रद्धालुओं को भला-बुरा कहना शुरू कर दिया। उन्होंने दावा किया कि मंदिर में लाउडस्पीकर तेज़ आवाज़ में बज रहा है और इसे लेकर हंगामा शुरू कर दिया।

चूँकि रामपुर के उस शिव मंदिर में पहले से ही इसी तरह से भजन-कीर्तन होता आ रहा था, इसीलिए श्रद्धालुओं ने लाउडस्पीकर बंद करने से इनकार कर दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ने लगा। वहाँ मौके पर सूचना मिलने के बाद पहुँची पुलिस ने तीन व्यक्तियों शाहिद हुसैन, मुहम्मद आसिफ व नावेद अली को गिरफ्तार करने के बाद स्थानीय शांति भंग करने के आरोप में उनका चालान भी काट दिया। पुलिस ने दोनों ही पक्षों से वार्ता की और उन्हें समझा-बुझा कर मामला शांत कराया।

मंदिर के लाउडस्पीकर से दिक्कत, बस जगह अलग

उन्नाव के माखी थाना क्षेत्र स्थित एक गाँव में भी ऐसी ही घटना हुई, जहाँ महादेव मंदिर में आरती के दौरान ही एक युवक ने पहुँच कर हंगामा शुरू कर दिया और कहने लगा कि उसे लाउडस्पीकर की वजह से मोबाइल पर बात करने में परेशानी हो रही है। इस मामले में एक ग्रामीण ने मुन्ना, जमील और रहीस नामक युवकों के खिलाफ तहरीर दी है।

इन सभी युवकों ने न सिर्फ गाली-गलौज किया, बल्कि मंदिर में लाउडस्पीकर बजाने पर परिणाम भुगतने की चेतावनी तक दी। इसके बाद वहाँ बड़ी संख्या में लोग पहुँच गए। सूचना मिलने के बाद पहुँची पुलिस ने तीनों युवकों को हिरासत में ले लिया। अभियोग पंजीकृत कर के तीनों आरोपितों से पूछताछ जारी है और गाँव में स्थिति नियंत्रण में है, ऐसा पुलिस ने बताया है। स्थानीय लोग इस घटना को लेकर अभी भी आक्रोश में हैं।

हाल ही में उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर स्थित एक गाँव में मंदिर के भीतर लाउडस्पीकर बजाने की वजह से कुछ युवकों ने स्वराज सिंह को बुरी तरह पीट दिया था। मारपीट करने वाले गुलज़ार, अफज़ल, शराफ़ समेत कुछ अन्य लोग थे। पुलिस द्वारा इस मामले में 3 आरोपितों को गिरफ्तार किए जाने की खबर आई थी। स्वराज सिंह ने बताया था कि कुछ युवक मौके पर लाठी और डंडे लेकर आए और उन्होंने बेटी के सामने खूब पीटा। 

सुशांत के हत्यारों और ड्रग्स स्कैंडल से आदित्य ठाकरे का है कनेक्शन: कंगना का दावा- इसलिए उद्धव उन्हें बना रहे निशाना

शिवसेना के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार और अभिनेत्री कंगना रनौत के बीच विवाद शांत होता नहीं दिख रहा है। कंगना ने दावा किया है कि अपने बेटे आदित्य ठाकरे को बचाने के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे उन्हें निशाना बना रहे हैं। कंगना की माने तो बॉलीवुड माफिया, सुशांत सिंह राजपूत के हत्यारों और ड्रग्स रैकेट का आदित्य से कनेक्शन है।

उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “महाराष्ट्र के सीएम की मूल समस्या यह है कि मैंने फिल्म माफिया, सुशांत सिंह राजपूत के हत्यारों और उसके ड्रग रैकेट का पर्दाफाश किया, जो उनके प्यारे बेटे आदित्य ठाकरे के साथ हैं। यह मेरा बड़ा अपराध है, इसलिए अब वे मुझे फिक्स करना चाहते हैं, ठीक है, देखते हैं कि कौन किसे फिक्स करता है।”

गौरतलब है कि मुंबई में 5 दिन बिताने के बाद कंगना रनौत सोमवार (सितंबर 14, 2020) को बहन रंगोली के साथ मनाली पहुँच गईं। उन्होंने चंडीगढ़ पहुँचते ही एक ट्वीट किया और बताया कि उन्हें पहले मुंबई में कैसा महसूस होता था और अब कैसा महसूस किया।

उन्होंने लिखा, “चंडीगढ़ मे उतरते ही मेरी सिक्योरिटी नाम मात्र रह गई है। लोग ख़ुशी से बधाई दे रहे हैं। लगता है इस बार मैं बच गई। एक दिन था जब मुंबई में माँ के आँचल की शीतलता महसूस होती थी। आज वो दिन है जब जान बची तो लाखों पाए। शिव सेना से सोनिया सेना होते ही मुंबई में आतंकी प्रशासन का बोल-बाला।”

इस ट्वीट से पहले कंगना ने अपने एक ट्वीट में बताया था कि वह भारी मन से वापस जा रही हैं। उन्होंने लिखा, “भारी मन से मुंबई से वापस लौट रही हूँ। जिस तरह मुझे इन दिनों परेशान किया गया, मेरे ऊपर अटैक किया गया, मुझे गलत चीजें बोली गईं, मेरा घर तोड़ने की धमकी दी गई और मेरा ऑफिस तोड़ा, सिक्योरिटी को हथियार के साथ मेरे आसपास रहने के लिए कहा गया, मुझे लगता है POK से तुलना करना सही था।”

बता दें कि कंगना रनौत 9 सितंबर को मुंबई आई थीं। उनके मुंबई पहुॅंचने से पहले बीएमसी ने उनके ऑफिस पर ‘अवैध निर्माण’ के चलते बुलडोजर चला दिया था। हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने उसी दिन कंगना के ऑफिस में तोड़फोड़ पर रोक लगा दी थी, लेकिन उससे पहले ही बीएमसी काफी तोड़फोड़ कर चुकी थी।

गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से ही कंगना लगातार बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद और माफिया को लेकर मुखर हैं। मुंबई पुलिस पर उनके सवाल उठाने के बाद शिवसेना उन पर लगातार हमलावर हैं। पहले उन्हें मुंबई नहीं आने की धमकी दी गई। इसके बाद उनके ऑफिस पर कार्रवाई की गई। कंगना ने दावा किया था कि उनका घर गिराने की धमकी भी दी जा रही है। इसके बाद से ही यह वह लगातार शिवसेना और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर हमलावर हैं।

आगरा में बन रहे मुगल म्यूजिम का नाम बदलेगा, छत्रपति शिवाजी पर होगा नाम: CM योगी का ऐलान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने आगरा में बन रहे मुग़ल संग्रहालय का नाम बदलने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा आगरा में निर्माणधीन म्यूज़ियम छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम स्थापित किया जाएगा। ताजमहल के पूर्व में बन रहे इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग 150 करोड़ रुपए है। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है, “उत्तर प्रदेश सरकार राष्ट्रवादी विचारों को पोषित करती है। गुलामी की मानसिकता के चिह्नों को छोड़ कर राष्ट्र के प्रति गौरवबोध कराने मुद्दों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। छत्रपति शिवाजी महाराज हमारे नायक हैं, मुग़ल किसी भी स्थिति में हमारे नायक नहीं हो सकते हैं।” उन्होंने कहा कि यह नया उत्तर प्रदेश है। नए उत्तर प्रदेश में गुलामी की मानसिकता के चिह्नों के लिए कोई स्थान नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इस सम्बंध में ट्वीट करते हुए जानकारी दी।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने राज्य के पर्यटन विभाग को इस मामले में जल्द कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। पर्यटन विभाग के मुख्य सचिव जितेन्द्र कुमार को इस मामले में जल्द कार्रवाई आगे बढ़ाने का आदेश दिया गया है। ख़बरों के मुताबिक़ पर्यटन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि संग्रहालय में छत्रपति शिवाजी महाराज के दौर से जुड़ी चीज़ें रखी जाएँगी। इसके अलावा आगरा में बन रहे संग्रहालय में मुग़ल काल से जुड़ी वस्तुओं और दस्तावेज़ों को भी रखा जाएगा।

योगी सरकार के आदेश के अनुसार पर्यटकों के लिए यहाँ कई तरह के विशेष प्रबंध किए जाएँगे। इसके अलावा सरकार संग्रहालय के भीतर ज़रदोज़ी और संगमरमर के पत्थरों पर हुई नक्काशी का छोटा केंद्र बनाने की तैयारी भी कर रही है। इस संग्रहालय के माध्यम से छत्रपति शिवाजी महाराज के गौरवशाली इतिहास को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया जाएगा। सरकार ने इस सम्बंध में पर्यटन विचाग के अधिकारियों को विशेष रूप से निर्देश दिया है कि संग्रहालय में मराठाओं के इतिहास से जुड़ी चीज़ों को प्रदर्शित किया जाएगा।   

CM yogi adityanath announced mughal museum being built in agra will be named after chatrpati shivaji maharaj

मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी बना रहे PFI और SDPI: तीस्ता सीतलवाड़ और नोमानी ने निजी बातचीत में कबूली

तीस्ता सीतलवाड़ और स्वराज अभियान से जुड़े वामपंथी कार्यकर्ता जिया नोमानी निजी तौर पर स्वीकार करते हैं कि पीएफआई और एसडीपीआई जैसे संगठन देश के मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी बनाते हैं।

समाचार चैनल टाइम्स नाउ द्वारा एक्सेस किए गए एक टेप में, स्वराज अभियान से जुड़े कार्यकर्ता जिया नोमानी को कट्टरपंथी इस्लामिक संगठनों द्वारा उत्पन्न खतरे को लेकर चिंता जताते हुए सुना जा सकता है।

टाइम्स नाउ द्वारा एक्सेस किए गए टेप में, ज़िया नोमानी तीस्ता सीतलवाड़ से कहते हैं, “मुझे पूरा यकीन है कि आप सभी को बेंगलुरु में होने वाली दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को लेकर देश में सेट हो रहे नैरेटिव से काफी चिंता होगी। हम आरएसएस से लड़ने की बात करते हैं और अगर हम मुस्लिम समुदाय से आने वाले दक्षिणपंथियों से नहीं लड़ते हैं, तो हमें उनसे लड़ने का नैतिक अधिकार नहीं है। क्योंकि यह ढोंग है।”

जिया नोमानी ने आगे कहा, “अगर हम SDPI और PFI जैसे संगठनों से नहीं लड़ते हैं। अब हमारे बीच मतभेद हो सकते हैं और हम इस पर बहस कर सकते हैं कि इस तरह के संगठनों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए या नहीं, लेकिन युवाओं के कट्टरता के लिए उन पर मुकदमा जरूर चलाया जाना चाहिए।” जिया नोमानी का यह भी कहना है कि एसडीपीआई और पीएफआई अपने वैचारिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए हिंसा का उपयोग करने के लिए तैयार रहते हैं।

नोमानी ने यह भी कहा, “उन्हें (मुस्लिमों) गलत बताया जाता है। उन्हें सिर्फ इतना बताया जाता है कि बाबरी मस्जिद टूट गया। अब हमें बदला लेना है, क्योंकि न्यायिक व्यवस्था हमारे समर्थन में नहीं है।”

तीस्ता सीतलवाड़ ने जवाब दिया, “जहाँ कहीं भी मुस्लिम समुदाय में इस तरह की प्रवृत्ति विकसित हो रही है, इसके खिलाफ कड़े बयान नहीं दिए जाते हैं और यह गलत है … मैं केवल इतना कहूँगी कि एसडीपीआई और पीएफआई हमारे जैसे लोगों और हमारे संगठनों के लिए के समस्यात्मक है। हमने उनके साथ सार्वजनिक मंच साझा नहीं करने के लिए एक सार्वजनिक स्टैंड लिया है।” इस बातचीत में वे दोनों निजी तौर पर इस बात से सहमत दिखाई देते हैं कि एसडीपीआई और पीएफआई वाकई खतरनाक हैं।

कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पीएफआई का हिंसा का इतिहास है। उनके सदस्य हिंसा के कई मामलों में जाँच के घेरे में हैं। दिल्ली दंगों की जाँच और नागरिकता संशोधन कानून के मद्देनजर देश भर में हुई हिंसा के दौरान पीएफआई की भूमिका संदिग्ध रही है और पीएफआई के कई सदस्यों को दंगों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार भी किया गया है। हालाँकि, वामपंथी संगठन सार्वजनिक रूप से उनका विरोध करने में बहुत हिचकिचा रहे हैं, हालाँकि वे निजी तौर पर मानते हैं कि ये खतरनाक संगठन हैं।

चीनी सेना और सरकार से जुड़ी फर्म ने 24 लाख लोगों की निजी जानकारियाँ जुटाई, 10 हजार भारतीय भी

इस बात में कोई शक नहीं है कि तमाम डाटा एजेंसी पब्लिक डोमेन में मौजूद ज़रूरी लोगों की जानकारी इकट्ठा करती हैं। लेकिन चिंता की बात तब होती है जब वह डार्क वेब या हैकिंग की मदद से ऐसा कुछ करती हैं। चीन की डाटा फर्म ज्हेनहुआ (zhenhua) से जुड़ी कुछ ऐसी ही घटना सामने आई है। हाल ही में क्रिस्टोफर बल्डिंग और रोबर्ट पेटर एल द्वारा जारी किए गए दस्तावेज़ के अनुसार चीन पब्लिक डोमेन में मौजूद जानकारी इकट्ठा कर रहा है और वह भी अनैतिक तरीकों से। 

चीन अपने देश के घरेलू डोमेन में मौजूद निजी जानकारी इकट्ठा करने की बात स्वीकार करता है। लेकिन इस दस्तावेज़ के मुताबिक़ चीन पूरी दुनिया के लगभग 24 लाख लोगों की निजी जानकारी इकट्ठा करता है और उनकी निगरानी भी करता है। चीनी कंपनी चाइना रिवाइवल दुनिया भर के लाखों करोड़ों लोगों का Overseas Key Information Data Base (OKIDB) तैयार किया है। 

इसमें 24 लाख लोग, 65 हज़ार संस्थान, 250 करोड़ लेख और लगभग 230 करोड़ सोशल मीडिया पोस्ट शामिल हैं। इससे भी ज़्यादा हैरानी की बात यह सामने आई है कि इस डाटा बेस में मौजूद 10 से 20 फ़ीसदी जानकारी पब्लिक डोमेन में मौजूद नहीं है। इसके अलावा डाटाबेस में लोगों के संपर्क, पारिवारिक संपर्क, पता, फोन नंबर, मेल आईडी, पद और काम जैसी अहम जानकारी भी शामिल है। 

इसके लिए चीनी कंपनी चाइना रिवाइवल ने लोगों के सोशल मीडिया पोस्ट, तस्वीर, लाइक्स, ट्वीट, रीट्वीट और शेयर जैसी निजी गतिविधियों से जानकारी निकाली है। इस बात पर भी संदेह जताया जा रहा है कि लोगों के बैंक, नौकरी और कागज़ात से सम्बंधित जानकारी भी निकाली गई है। इन सबसे ज़्यादा उल्लेखनीय बात यह है कि कंपनी चीन की सरकार को दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में प्रसारित की जाने वाली ख़बरों की जानकारी भी देता है। ख़ासकर भारत में क्या दिखाया जाता है इस पर चीनी सरकार की निगरानी सबसे ज्यादा रहती है। 

चीन की यह कंपनी इस पूरी प्रक्रिया में हाइब्रिड वॉरफेयर की प्रक्रिया का भी इस्तेमाल कर रही है। इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़ साल 1999 के दौरान चाइना पीपल लिबरेशन आर्मी (चीनी सेना) ने इसकी प्रस्तावना तैयार की थी। एक ऐसा वॉरफेयर जिसके ज़रिए सेना, राजनीति, अर्थव्यवस्था, तकनीक जैसे अहम क्षेत्रों से ध्यान हटाया जाता है। दुनिया के तमाम जानकारों और विशेषज्ञों ने इस मुद्दे पर चिंता जताई है।

कुछ ने तो यहाँ तक कहा है कि “चीन की तरफ से इस तरह की बड़े पैमाने पर डाटा चोरी होती रहती है। दुनिया के लिए यह वाकई बड़ा ख़तरा और चुनौती है। चीन की ऐसी कंपनी ऐसी गतिविधियों को अंजाम देकर चीन की सरकार और सेना की मदद करती हैं।” 

वहीं अगर भारत की बात करें तो करीब 10 हजार लोगों का डाटा चुराने की बात कही जा रही है। इनमें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, सोनिया गाँधी, ममता बनर्जी, अशोक गहलोत, अमरिंदर सिंह, उद्धव ठाकरे, नवीन पटनायक, शिवराज सिंह चौहान, निर्मला सीतारमण, स्मृति ईरानी, पियूष गोयल, भारत के मुख्य न्यायाधीश अरविन्द बोबड़े, सीडीएस मुखिया बिपिन रावत और कम से कम 15 पूर्व थल सेना, नौसेना और वायु सेना अध्यक्ष भी शामिल हैं।  

यह सिर्फ इतने तक सीमित नहीं है बल्कि देश के पत्रकार, वैज्ञानिक, शिक्षाविद, अभिनेता, धर्मगुरु जैसे लोग भी शामिल हैं। इन साड़ी जानकारियों से इस बात का अनुमान लगाया जा सकता है कि भारत के खिलाफ साज़िश रचने और नैरेटिव तैयार करने के लिए कितने बड़े पैमाने पर तैयारी हुई है। यह सिर्फ भारत के लोगों के साथ ही नहीं बल्कि अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसे बड़े देश के लोगों के साथ भी हो रहा है।        

‘नास्तिक वामपंथी’ बन कट्टर इस्लामी एजेंडे को बढ़ावा देने वाला उमर खालिद, 10 दिन की पुलिस रिमांड में भेजा गया

दिल्ली दंगों के मामले में रविवार की रात गिरफ्तार किए उमर खालिद को अदालत ने 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र उमर खालिद को दिल्ली पुलिस ने दंगों की साज़िश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया था। वह गैरक़ानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोपित है। पुलिस ने कहा है कि बहुत जल्द इस मामले में चार्जशीट दाखिल की की जाएगी। 

जैसा उम्मीद थी वैसा ही हुआ, उमर खालिद की गिरफ्तारी के बाद पूरी लिबरल गैंग का प्रलाप चालू हो गया। कुछ ने तो यूएपीए ख़त्म करने की माँग उठा दी और वहीं कुछ ने उसे ऐसा नेता बताया जिसकी देश को ज़रूरत है। कुछ लोगों ने तो यहाँ तक कह दिया कि उसकी गिरफ्तारी सिर्फ इसलिए हुई है क्योंकि वह मुस्लिम है। लेकिन उमर खालिद ने पिछले कुछ सालों में अपनी इस तरह की छवि खुद ही बनाई है। 

उसके साथ जो कुछ भी हो रहा है वह उसकी गतिविधियों का ही नतीजा है। फ़िलहाल दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने उमर खालिद को 10  दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसे सोमवार को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए अदालत में पेश किया था। न्यायाधीश अमिताभ रावत ने 11 पन्नों में यह आदेश सुनाया है।   

उमर खालिद का नाम सबसे पहली बार चर्चा में आया 2016 के ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ प्रकरण के बाद। 9 फरवरी 2016 को जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में आतंकवादी अफज़ल गुरु की बरसी के मौके पर विरोध-प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शन की वजह थी आतंकवादी अफज़ल गुरु का पुण्य स्मरण (टुकड़े टुकड़े गैंग के लिए)। उस प्रदर्शन के दौरान ऐसे कई नारे लगाए गए जो डरावने और हैरान करने वाले थे, उन नारों में सबसे ज़्यादा विवादित थे भारत तेरे टुकड़े होंगे-इंशाअल्लाह, इंशाल्लाह और भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी जंग रहेगी। 

घटना की जानकारी मिलते ही सरकार हरकत में आई और सबसे पहले तथाकथित कॉमरेड कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी हुई। इतना ही नहीं रिहा किए जाने के पहले 10 हज़ार रुपए का जुर्माना भी देना पड़ा। इसके अलावा उमर खालिद को एक सेमेस्टर के लिए निष्कासित कर दिया गया था। उमर खालिद को भी इस मामले में कन्हैया कुमार के साथ गिरफ्तार किया गया था। जेएनयू में हुई नारेबाजी के मामले में चार्जशीट दायर की थी और कन्हैया कुमार, उमर खालिद समेत अन्य गिरफ्तार किए गए थे।

मज़े की बात है कि उमर खालिद का पिता भी प्रतिबंधित इस्लामी संस्था ‘सिमी’ (स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया) का सदस्य था। इस संस्था से अलग होने के बाद वह ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का सदस्य बना। उमर खालिद के पिता ने ही मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से राम मंदिर निर्माण पर आए आदेश के विरोध में पुनर्विचार याचिका दायर करने का ऐलान किया था। 

उमर खालिद के पिता ने पश्चिम बंगाल की जंगीपुर सीट से वेलफेयर पार्टी ऑफ़ इंडिया के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ा था। इसमें कोई हैरानी की नहीं होनी चाहिए कि मुर्शिदाबाद ज़िले में आने वाला यह संसदीय क्षेत्र मुस्लिम बाहुल्य है। सिमी का पूर्व सदस्य फ़िलहाल जमात-ए-इस्लामी हिन्द की केन्द्रीय सलाहकार समिति का सदस्य है। इसके अलावा वह बाबरी मस्जिद कोआर्डिनेशन कमेटी का संयोजक भी रह चुका है।  

उमर खालिद ने एक बात पर हमेशा ज़ोर दिया है कि वह वामपंथी और नास्तिक है। जबकि ऐसे बहुत कम ही मौके होते हैं जब वह अपने मजहबी रूप से समर्पित पिता से असहमत होता हो। लखनऊ के नेता कमलेश तिवारी को जिहादियों ने इस्लाम के विरुद्ध ईशनिंदा करने के लिए जान से मार दिया था। इस घटना के ठीक दो दिन बाद उमर खालिद लगातार हिंदुओं को कोस रहा था। जिससे लोगों का इस बात से ध्यान हट जाए कि मुस्लिम समाज के कुछ लोगों में कट्टरता का स्तर कितना ज़्यादा बढ़ गया है। इसके बाद उसने अपने एक लेख में पैगम्बर मोहम्मद के सामने नतमस्तक होने की बात का बचाव भी किया। इतना सब कुछ तब जब वह खुद को नास्तिक करार देता है।

जेएनयू से सामने आए नारेबाजी विवाद के बाद उमर खालिद, टाइम्स नाउ पर अर्नब गोस्वामी के साथ एक चर्चा में भी शामिल हुआ था। बात करते हुए उमर ने मुखर होकर अफज़ल गुरु का समर्थन करना शुरू कर दिया। ठीक इसी तरह अरुंधति रॉय ने भी अफज़ल गुरु को फाँसी दिए जाने पर सवाल खड़े किए थे। इसके बाद उमर ने साक्षात्कार में सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात कही। उसके मुताबिक़ ऐसे बहुत से लोग थे जिन्होंने इस बात पर सवाल उठाया था कि अफज़ल गुरु भारत की संसद पर हुए हमलों में शामिल था भी या नहीं। 

खुद को नास्तिक वामपंथी बताने वाले उमर खालिद ने यहाँ तक कह दिया था कि अफज़ल गुरु को निष्पक्ष ट्रायल तक नहीं मिला था। इसके बाद उसने यह बात भी मानी कि उस दिन नारे लगाए गए थे, लेकिन वह कुछ कश्मीरियों ने लगाए थे। उसने अंत तक एक आतंकवादी का समर्थन करते हुए दूसरों पर कट्टरता का आरोप लगाया। उसका कहना था कि पूरे तंत्र में न्याय के लिए कोई जगह नहीं है। इसके बाद उमर खालिद ने कहा कि भारतीय सेना ने कश्मीर में लाखों लोगों को मारा और औरतों के साथ बलात्कार किया। इसके ठीक बाद अर्नब गोस्वामी ने चर्चा के दौरान ही उमर खालिद को देश विरोधी कह दिया।

22 फरवरी 2016 को उमर खालिद ने जेएनयू में एक भाषण दिया था। भाषण में उसने कहा था कि भारत और पाकिस्तान के खराब रिश्तों के लिए अमेरिका ज़िम्मेदार है। एक पाकिस्तानी शायर का उल्लेख करते हुए उमर ने कहा “हिंदुस्तान भी मेरा है और पाकिस्तान भी मेरा है पर इन दोनों मुल्कों पर अमेरिका का डेरा है।” इसके बाद उमर ने अपने विरोधियों को अमेरिका का एजेंट तक बता दिया। 

उमर खालिद यूनाइटेड अगेंस्ट हेट (UAH) का भी हिस्सा रह चुका है, जिसने सीएए के विरोध में PUCL और अन्य के साथ मिल कर अभियान चलाया था। PUCL एक ऐसा संगठन है जिसके तार अर्बन नक्सल से जुड़े हुए हैं और इसके कई लोग भीमा-कोरेगांव मामले में गिरफ्तार किए गए थे। वहीं UAH खुद भीम आर्मी, जमात-ए-इस्लामी, उलेमा-ए-हिंद और अल्पसंख्यक अधिकार जैसे संगठनों से जुड़ा हुआ है। UAH के संस्थापक खालिद सैफी को दिल्ली दंगों की साज़िश रचने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। 

दिल्ली दंगों में उमर खालिद की भूमिका सबसे पहली बार तब सामने आई जब 20 फरवरी को उस पर विवादित भाषण देने का आरोप लगा। उसने अपने भाषण में कहा मुस्लिमों को डोनाल्ड ट्रंप के सामने यह दिखाना ही होगा कि वह देश की सरकार के विरुद्ध लड़ रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप 24 फरवरी को भारत की यात्रा पर आए थे और इसी दिन से दंगे और हिंसा शुरू हो गई थी। 

दिल्ली दंगों के मामले में दायर की गई चार्जशीट में साफ़ लिखा है कि उमर खालिद दंगों के मुख्य आरोपित खालिद सैफी की मदद से ताहिर हुसैन के संपर्क में था। खालिद सैफी ने 9 जनवरी को ताहिर हुसैन और उमर खालिद के बीच शाहीन बाग़ में बैठक कराई थी।

ऐसे में उमर खालिद भले कितना भी नास्तिक वामपंथी होने का दावा कर ले पर उसकी हरकतों से सब साफ़ है। कई मीडिया संस्थानों ने उसे एक नास्तिक के तौर पर दिखाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उसकी गतिविधियों के साफ़ है कि वह इस्लामी कट्टरपंथियों से बहुत अलग नहीं है। फ़िलहाल जब उसकी गिरफ्तारी हो चुकी है ऐसे में अदालत तय करेगी कि दंगों के मामले में उसकी असल भूमिका क्या रही।          

सारा अली खान से कई बार ड्र्रग्स ले चुकी हैं रिया, जल्द तलब करेगी NCB: रिपोर्ट्स

बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े ड्रग्स मामले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) अभी तक 17 गिरफ्तारियाँ कर चुका है। इनमें उनकी गर्लफ्रेंड रही रिया चक्रवर्ती भी शामिल है। ऐसी खबरें हैं कि रिया चक्रवर्ती ने पूछताछ के दौरान एनसीबी को बताया कि सारा अली खान, रकुल प्रीत सिंह और डिजाइनर सिमोन खंबाटा भी ड्रग्स लेती हैं।

मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि रिया ने सारा से भी कई बार ड्रग्स ली थी। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि एनसीबी सारा को जल्द पूछताछ के लिए तलब कर सकती है। हालॉंकि आधिकारिक तौर पर इनकी पुष्टि नहीं हुई है। एनसीबी के हवाले से एएनआई ने बताया है कि अब तक इनमें से किसी को समन नहीं किया गया है।

टाइम्स नॉउ ने बताया था कि सारा अली खान, रकुल प्रीत सिंह और सिमोन खंबाटा को एनसीबी समन भेजेगी। बता दें कि बॉलीवुड स्टार सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में लगातार जाँच एजेंसियाँ कार्रवाई में जुटी है। सीबीआई और ईडी के साथ-साथ एनसीबी भी मामले में मुख्य आरोपित रिया चक्रवर्ती के हवाले से सामने आए सबूतों की बिनाह पर ड्रग मामले की पड़ताल में जुट गई है।

हाल ही में खबरें तेजी से सामने आई थी कि एनसीबी के साथ पूछताछ में रिया चक्रवर्ती ने सारा अली खान और रकुल प्रीत सिंह समेत कई फिल्मी सितारों का नाम लिया है जो ड्रग्स के आदी हैं।

इस बीच रिया चक्रवर्ती की सारा अली खान और सिमोन खंबाटा के साथ की पुरानी तस्वीरें वायरल हो रही हैं।हालाँकि बॉलीवुड हस्तियों के नाम की लिस्ट बनाने की खबर पर एनसीबी के एक अधिकारी का कहना है कि एजेंसी ने अब तक बॉलिवुड स्‍टार्स की कोई लिस्‍ट तैयार नहीं की है। उन्‍होंने यह भी कहा कि एजेंसी ने पेडलर्स और ट्रैफिकर्स की लिस्‍ट बनाई है और इसी को कुछ लोग बॉलिवुड सिलेब्‍स की लिस्‍ट मान रहे हैं, जिससे कन्‍फ्यूजन हो रहा है।

जानकारी के मुताबिक रिया चक्रवर्ती ने कई बार बॉलीवुड एक्ट्रेस सारा अली खान से ड्रग्स लिया है। बताया जा रहा है कि सारा अली खान एक हाई प्रोफाइल ड्रग्स पैडलर के संपर्क में थी, जिसकी एनसीबी तलाश कर रही है। सारा से ड्रग्स लेकर रिया ने सुशांत सिंह राजपूत तक पहुँचाया था। रिया और सारा कुछ ड्रग्स पैडलर्स के कॉमन संपर्क में थीं। सारा का रिया के अलावा एक अपना अलग ड्रग्स पैडलर है, जिससे सारा अलग से ड्रग्स लेती थीं। रिया और सारा को कौन-कौन बड़े ड्रग्स पैडलर ड्रग्स देते थे, उनकी तलाश एनसीबी कर रही है।

गौरतलब है कि NCB ने रिया चक्रवर्ती को 8 सितंबर को गिरफ्तार किया था। अभी वह जेल में बंद हैं।

प्रशांत भूषण ने जमा किया ₹1, कहा- जुर्माना भरने का मतलब यह नहीं कि मुझे आदेश स्वीकार है

अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से लगाया गया 1 रुपए का जुर्माना प्रशांत भूषण ने भर दिया है। जुर्माना भरते हुए उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि वे अदालत के इस निर्णय को स्वीकार कर रहे हैं। वह इस आदेश के विरुद्ध पुनर्विचार याचिका दायर करने जा रहे हैं।

प्रशांत भूषण ने कहा उन्हें जुर्माना भरने के लिए देश के कई हिस्सों से सहयोग मिला है। इस सहयोग की मदद से एक सत्य निधि बनाई जाएगी और इसके माध्यम से ऐसे लोगों की सहायता की जाएगी, जिन्हें सरकार असहमत होकर अपनी राय पेश करने पर जेल में बंद कर देती है। उन्होंने कहा सरकार से असहमति दर्ज कराने वालों को शांत कराने के लिए हर प्रकार के तरीके अपनाए जा रहे हैं। सत्य निधि के ज़रिए ऐसे लोगों की मदद की जाएगी, जिन्हें सरकार अभिव्यक्ति के लिए प्रताड़ित करती है।

सर्वोच्च न्यायालय ने 31 अगस्त 2020 को आपराधिक अवमानना ​​के मामले में वकील प्रशांत भूषण पर 1 रुपए का जुर्माना लगाया था। फैसले के कुछ ही देर बाद प्रशांत भूषण ने एक ट्वीट में कहा था कि इस फैसले के फ़ौरन बाद उनके सहयोगी और वकील राजीव धवन ने उन्हें 1 रुपया दिया, जो कि उन्होंने स्वीकार कर लिया है। प्रशांत भूषण ने कहा था कि वह जुर्माना भरेंगे और इसके ख़िलाफ़ पुनर्विचार याचिका भी दायर करेंगे। 

एक प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने जिस चीज़ के लिए उन्हें दोषी ठहराया है वो हर नागरिक के लिए सबसे बड़ा कर्तव्य है। अपने बयान में प्रशांत भूषण ने कहा है कि उनके ट्वीट्स का उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट की अवमानना नहीं था, वे सुप्रीम कोर्ट के अपने शानदार रिकॉर्ड से भटकने को लेकर नाराजगी की वजह से किए गए थे। भूषण ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के द्वारा लगाए गए जुर्माने की रिव्यू पिटिशन फाइल करने का मुझे अधिकार है। कोर्ट ने मुझ पर जो जुर्माना लगाया है, उसका मैं एक नागरिक को तौर पर कर्तव्य निभाते हुए भुगतान करूँगा।”

भूषण ने अपने बयान में यह भी कहा था कि मेरे मन में सुप्रीम कोर्ट के प्रति काफी सम्मान है और मैंने हमेशा माना है कि सुप्रीम कोर्ट कमजोर और दबे लोगों के लिए आशा की आखिरी किरण है।

जबरन शराब पिला सलीम ने उस्तरे से रेत दिया: दो हफ्ते से गायब काजल के टुकड़े-टुकड़े हुए कंकाल बरामद

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में दो सप्ताह से लापता युवती की गला काटकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने संप्रदाय विशेष के हत्यारोपित युवक सलीम को गिरफ्तार कर लिया है। खेत से कंकाल बरामद कर जाँच को भेजा गया है। मामला दो संप्रदाय का जुड़ा होने के चलते कस्बे में पुलिस तैनात है।

हल्दौर के खेड़ा मुहल्ला निवासी काजल के धड़ से उसकी गर्दन, हाथ व पैर भी अलग-अलग स्थानों पर मिले। कंकाल का ऐसा हाल देख लोगों के होश उड़ गए।

साभार:अमर उजाला

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक काजल 31 अगस्त की शाम घर से अपने ही मोहल्ले में सहेली के यहाँ दावत खाने के लिए गई थी लेकिन वापस नहीं लौटी। पिता ने एक सितंबर को थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस ने शक के आधार पर मोहल्ला खेड़ा के गली मालियोंवाला कुआँ निवासी सलीम को हिरासत में लेकर पूछताछ की।

कई दिन तक गुमराह करने के बाद शनिवार (सितंबर 12, 2020) रात सलीम ने काजल की हत्या करने का जुर्म कुबूल कर लिया। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर रात में ही हरदासपुर गढ़ी मार्ग पर स्थित खेत से काजल का कंकाल बरामद कर लिया। युवती के धड़ से गर्दन भी अलग पड़ी मिली। शव को जंगली जानवर खा चुके थे। परिजनों ने आसपास पड़े कपड़ों से शव की पहचान की। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त एक उस्तरा, मोबाइल व अन्य सामान भी बरामद कर लिया।

बताया जा रहा है कि उसने काजल की हत्या करने के बाद आवाज बदलकर उसके परिजनों को फोन किया। उसने फोन पर खुद को काजल का पति बताते हुए कहा कि काजल ने उसके साथ शादी कर ली है। इसलिए वह उसे ढूँढना बंद कर दें। जब उन लोगों ने काजल से बात करनी चाही तो सलीम ने फोन काट दिया। इससे उनकी आशंका और भी बढ़ गई औऱ उन्होंने पुलिस को बताया। इस पर पुलिस ने फिर से सलीम को हिरासत में लेकर पूछताछ की। कड़ाई से पूछताछ करने पर उसने सच उगल दिया।

एसपी सिटी लक्ष्मी निवास मिश्र, सीओ सिटी कुलदीप गुप्ता पुलिस और डॉग स्क्वाड के साथ मौके पर पहुँचे और जाँच पड़ताल की। एसपी सिटी ने बताया कि पूछताछ में आरोपित ने स्वीकार किया है कि तीन साल से काजल से प्रेम प्रसंग चल रहा था। उसे लग रहा था कि वह किसी और से भी बात करती है इसलिए हत्या की योजना बनाई।

घटना के दिन मिलने के बहाने वह काजल को अपने साथ ले गया और पहले उसे जबरन शराब पिलाई। फिर इसके बाद उसका उस्तरे से गला रेत दिया। गला रेतने के बाद उसका मोबाइल, चप्पल और अन्य सामान छिपा दिया। थाना प्रभारी जीत सिंह ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर आरोपित को जेल भेज दिया है।

कब्र जैसी डिजाइन, कुवैती झंडा-अरबी भाषा और तिरंगे का अपमान: शमशेर और बारिक पर FIR

अलीगढ़ के अकराबाद थाना क्षेत्र में हैंडपम्पों के साथ लगे कुवैती झंडे और अरबी भाषा में लिखी पट्टिकाओं का मामला अब तूल पकड़ रहा है। छर्रा विधायक ठाकुर रविन्द्रपाल सिंह ग्रामीणों के साथ अकराबाद थाना पहुँचकर शमशेर व बारिक अली नाम के व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। 

विधायक का मानना है कि इसके पीछे विदेशी मुल्कों की साजिश है। अवैध रूप से हैंडपम्प लगाकर जनता को गुमराह करने के मामले में राष्ट्र गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 की धारा 2 (राष्ट्रीय झंडे का अपमान) व आईपीसी की धारा 269 (जानलेवा बीमारी के संक्रमण) के तहत शमशेर व बारिक अली के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है।

बीजेपी विधायक रविंद्र पाल सिंह ने बताया कि दुभिया और खुर्रमपुर में शमशेर उर्फ भोलू व बारिक अली ने 45 हैंडपम्प लगवाए हैं। उन्होंने कहा कि इसके पीछे राष्ट्र विरोधी ताकतों की साजिश है। इन्होंने शासन और प्रशासन की अनुमति के बगैर विदेशी झंडे के साथ हैंडपम्प लगवाए। इस देश विरोधी साजिश को लेकर क्षेत्रीय जनता में आक्रोश है। इन हैंडपम्प के पास एक शिलालेख लगाए गए हैं जिन पर अरबी भाषा में कुछ लिखा हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इन पर अरबी भाषा में लिखा है, “कुवैत शेख अब्दुला नूरी चैरिटेबल ट्रस्ट हैंडपम्प लगवा रहे हैं। कुवैत राज्य आपके पक्ष में है। शेख अब्दुला नूरी चैरिटेबल ट्रस्ट भारत के भाइयों के लाभ के लिए यह हैंडपम्प स्थापित करा रहे हैं। ट्रस्ट का मुख्यालय कुवैत है।” इन शिलालेखों पर भारतीय ध्वज के साथ कुवैती ध्वज भी लगाया है। भारतीय ध्वज में 24 तीलियों के स्थान पर केवल 8 तीलियाँ ही दिख रही हैं।

भाजपा विधायक रविंद्र पाल सिंह इसे सोची-समझी साजिश और राष्ट्रद्रोह मानते हैं। उन्होंने बताया कि हैंडपम्प के चबूतरे का डिजाइन भी कब्रनुमा है। विधायक ने यह भी कहा कि हैंडपम्प 60 फीट की गहराई पर लगाए गए हैं, जिससे गंदा पानी पीकर इलाके के लोग बीमार हो रहे हैं। यह उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार की छवि खराब करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि मॉनसून के अलावा ये इन हैंडपम्प से पानी नहीं निकलेगा, क्योंकि इस क्षेत्र का वाटर लेवल काफी नीचे है।

अलीगढ़ के एसएसपी मुनिराज ने भी इसकी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि पुलिस इसकी जाँच की जा रही है। अभी तक यह पता चला है कि इसके लिए जिला प्रशासन से कोई अनुमति नहीं ली गई थी।