चेन्नई के विरुगंबक्कम (Virugambakkam) इलाके में अरुलमिगु सुंदरा वरदराज पेरुमल मंदिर (Arulmigu Sundara Varadharaja Perumal temple) की 10 एकड़ जमीन कलेक्टर ने मस्जिद कमेटी से वापस ले ली है।
स्वराज्य की खबर के मुताबिक, दो दशक पहले स्थानीय मस्जिद कमेटी ने इस पर अपना कब्जा किया था। कब्जे के बाद से ही श्रद्धालु व मंदिर से जुड़े कार्यकर्ता जमीन वापस पाने की कोशिशों में जुटे थे।
रिपोर्ट की मानें तो कलेक्टर ने अभी भी उस याचिका पर प्रतिक्रिया नहीं दी है जिसमें मंदिर के तालाब को वापस पाने की माँग की गई है। यह तालाब उसी मंदिर का है और करीब 2.5 एकड़ जमीन पर है। रिपोर्ट बताती हैं कि 1997 में तालाब को खाली किया गया था। मगर, कुछ स्वार्थी लोगों ने तालाब व उसके आसपास की 14 एकड़ जमीन को हथियाने का प्रयास किया, जबकि यह जमीन सुनगुवार ब्राह्मण समुदाय के लोगों ने दान में दी थी।
बावजूद इसके, स्थानीय मस्जिद समिति ने सरकारी कर्मचारियों की मदद से अपने नाम पर कब्जे वाली 3 एकड़ जमीन को पंजीकृत करने में कामयाबी कर ली। जिसे जानने के बाद जल्द ही, हिंदू मुन्नानी और मंदिर कार्यकर्ता मामले में शामिल हो गए।
मंदिर उपासक सोसायटी के अध्यक्ष टी आर रमेश ने मामले में जनहित याचिका दायर की और मद्रास उच्च न्यायालय ने उनकी दलीलों को स्वीकार करते हुए पंजीकरण रद्द कर दिया। फिर हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा।
हालाँकि, बाद में मामले की जाँच का काम जिलाधिकारी को सौंपा गया। जिसके मद्देनदर उन्होंने मस्जिद कमेटी के प्रतिनिधियों को बुलवाया। लेकिन इस पूछताछ के लिए वे उपस्थित नहीं हुए। नतीजतन 2 साल बाद भी इस पर कोई निष्कर्ष नहीं निकला।
इसके बाद घटनाक्रमों से अनजान, मंदिर कार्यकर्ता जेबमणि मोहनराज ने मंदिर के तालाब को पुनः प्राप्त करने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। दूसरी बार भी केस उसी जज के पास गया जिन्होंने पिछली बार फैसला सुनाया था। न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई करते हुए कलेक्टर को तुरंत अपनी जाँच पूरी करके यह निर्धारित करने के लिए निर्देशित किया कि क्या वहाँ एक तालाब मौजूद है?
बता दें, कलेक्टर ने इस मामले में जो फैसला सुनाया है उसमें जमीन को तालुक बोर्ड को देने की बात है। क्योंकि साल 1910 के रिकॉर्ड में जमीन उन्हीं के नाम है। जिसका मतलब है कि फैसले में वह जमीन मंदिर को वापस नहीं मिली। इससे उसके स्वामित्व पर अब भी सवाल है। वहीं तालाब को लेकर कोई फैसला नहीं आया है। स्वराज्य की माने तो मोहनराज ने मद्रास हाई कोर्ट ने इस मामले पर दोबारा याचिका डाली है।
असम के बारपेटा जिले के गनक कुची गाँव के एक वैष्णव मठ में तोड़फोड़ करने और धार्मिक स्थल को अपवित्र करने के आरोप में पुलिस ने गुरुवार (3 सितंबर, 2019) को रफीकुल अली को गिरफ्तार किया। आरोपित बरपेटा कस्बे के भैला क्षेत्र के शांतिपुर का निवासी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अली ने गुरु आसान और श्री राम अता भिठी के मठ में रखी हिंदू पवित्र पुस्तक भगवद गीता को आग में झोंक दिया था। आरोपित ने मठ के प्रार्थना कक्ष में तोड़फोड़ भी की थी। इस घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल पैदा हो गया। बता दे जिस वक्त घटना को अंजाम दिया गया, कोई भी मठ के भीतर मौजूद नहीं था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मठ 16 वीं शताब्दी में श्री माधवदेव द्वारा स्थापित किया गया था, जोकि श्रीमंत शंकरदेव के मुख्य शिष्य थे। गुरुवार को लगभग 2 बजे के आसपास रफीकुल ने मठ में प्रवेश किया। उसने पहले तोड़फोड़ की फिर गुरु आसन और अन्य वस्तुओं को मठ से बाहर लाकर आग लगा दी। इतना ही नहीं उसने मठ में रखे प्रसाद को भी फेंक दिया।
मठ से आग की लपटें और धुँए को उठता देख स्थानीय लोगों ने मौके पर पहुँचकर आरोपित को रंगेहाथ दबोच लिया। फिर उसे पुलिस को सौंप दिया गया। बारपेटा के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मठ का दौरा किया। गनक कूची सत्र समिति ने मामले को लेकर पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
बता दें गुरु आसन एक सात-स्तरीय लकड़ी का सिंहासन है जो गुरु के बैठने और आसन का प्रतिनिधित्व करता है। यह आसन सातरा को मणिकुट में रखा जाता है, जिसकी तुलना मंदिरों के गुप्त पवित्रगृह से की जा सकती है। वहीं मूर्ति का खंडन होने की वजह से इसकी पूजा अब नहीं की जाएगी। वैष्णव सत्र और असम में नामघरों में खंडित मूर्तियों की पूजा नहीं की जाती है।
गौरतलब है कि पिछले साल 8 अक्टूबर को भी रफीकुल अली ने लक्ष्मी मन्दिर में घुस कर आग लगा दी थी। उस पर इसके अलावा देवी के सोने-चाँदी के आभूषण चुराने, मन्दिर की फ़र्श तोड़ने और मन्दिर में लगे आगामी लक्ष्मी पूजा की जानकारी देने वाले पोस्टर फाड़ने का भी आरोप लगा था। लक्ष्मी मन्दिर बारपेटा के उत्कुची इलाके में स्थित है। उस समय भी घटना के बाद लोगों ने उसे पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया था।
सुशांत सिंह राजपूत केस में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ड्रग्स एंगल की पड़ताल कर रही है। अब इस मामले में बड़ी खबर सामने आ रही है। रिया चकवर्ती के भाई शौविक और सैमुएल को एनसीबी ने गिरफ्तार कर लिया है।
इससे पहले मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया था शौविक चक्रवर्ती ने NCB के सामने कथित तौर पर स्वीकार कर लिया है कि रिया के कहने पर उसने ड्रग्स खरीदे थे। इतना ही नहीं, शौविक का दावा है कि रिया ने उसके अलावा सुशांत के पूर्व मैनेजर सैमुएल मिरांडा से भी ड्रग मँगाए, क्योंकि वह कई ड्रग तस्करों के संपर्क में था।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार शौविक ने एनसीबी के सामने कबूल किया था कि वह अपनी बहन रिया के लिए ड्रग्स खरीदता था। वहीं, सैमुएल ने स्वीकार किया कि वह सुशांत के घर के लिए ड्रग्स खरीदते थे।
Narcotics Control Bureau arrests Rhea Chakraborty’s brother Showik Chakraborty and Samuel Miranda, in Sushant Singh Rajput death case: NCB
बता दें, इससे पहले सुशांत केस की जाँच में जुटी NCB ने ड्रग तस्कर कैजान इब्राहिम को गिरफ्तार किया था। यह इस मामले में जाँच एजेंसी द्वारा पाँचवी गिरफ्तारी थी। इसके अलावा रिपब्लिक टीवी का दावा है कि उनके स्टिंग में एक ड्रग तस्कर ने इस बात को स्वीकार किया है कि बॉलीवुड हस्तियों का पार्टियों पर ड्रग लेना बेहद आम बात है। अपने दावे के साथ उन्होंने स्टिंग की टेप भी जारी की है। इसमें उस तस्कर को कहते सुना जा सकता है कि बॉलीवुड सितारे अक्सर सफेद पदार्थ, कोकीन और हशीश ही लेते हैं।
Sensational disclosure in SSR case.
Sources: Showik has allegedly named Rhea saying ‘he procured drugs for Rhea’.
NCB sources also say that ‘they will quiz Showik further in this case’.
रिपब्लिक वर्ल्ड की खबर के अनुसार उनके स्टिंग में मुंबई का ड्रग तस्कर उन्हें अच्छी क्वालिटी की चरस देने का वादा भी करता है। वह कहता है कि इस काम के लिए 20,000 रुपए लगते हैं और खरीदने वाले को एडवांस देना पड़ता है। खबर की मानें तो, तस्कर उन्हें नय्यर अस्पताल के दाहिनी तरफ आने को भी कहता है। साथ ही ये पूछे जाने पर कि क्या वो खुद पर्सनली जाकर डिलीवरी देता है? वह कहता है कि उन्हें ड्रग्स लेने खुद आना पड़ेगा। अब स्थिति पुरानी नहीं रह गई है।
ड्रग तस्कर कहता है, “पार्टियों में ड्रग का सेवन बहुत आम बात है। मैं ऐसे लोगों के पास जा चुका हूँ और यह आमतौर पर नियमबद्ध है। मैं आपको अच्छा माल दे सकता हूँ। मैं इसका इंतजाम सितारों के लिए करता हूँ और बॉलीवुड हस्तियाँ इसे खरीदती हैं।”
उल्लेखनीय है कि सुशांत केस में ड्रग्स के पहलू पर छानबीन करते हुए आज नार्कोटिक्स ब्यूरो ने रिया चक्रवर्ती के घर पर छापेमारी भी की थी। रिया के घर में लगभग 3 घंटे से पूछताछ हुई और इसके अलावा सैमुएल मिरांडा के घर भी छापेमारी हुई। सैमुएल के घर कई घंटे चली छापेमारी के बाद नार्कोटिक्स ब्यूरो ने उसे हिरासत में ले लिया था।
गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में बच्चों की मौत के मामले में आरोपित डॉ. कफील खान हाल ही में इलाहाबाद उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आए हैं। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कम्युनिस्ट पार्टी को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया है।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ टिप्पणी करने के लिए खान को मुंबई से गिरफ्तार किया गया था। जयपुर प्रेस क्लब में आज (4 सितंबर, 2020) एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खान ने कहा कि उन्हें परिवार के साथ राजस्थान जाने की सलाह दी गई, क्योंकि यहॉं कॉन्ग्रेस की सरकार होने के कारण वे सुरक्षित रहेंगे।
उन्होंने कहा, “मुझे प्रियंका जी द्वारा जयपुर में सुरक्षित रहने का आश्वासन दिया गया। उन्होंने मेरी माँ और पत्नी से बात की थी और कहा था कि यूपी सरकार मेरे खिलाफ और आरोप लगा सकती है। हम यहाँ राजस्थान में सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।”
खान ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें गलत तरीके से फँसाया। साथ ही उन्होंने सीएम योगी से अपने निलंबन को रद्द करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनके निलंबन को वापस नहीं लिया गया तो वे इसे उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे।
बता दें 2017 में ऑक्सीजन की सप्लाई में कमी के कारण गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 72 बच्चों की मौत हो गई थी। इसके बाद डॉ.खान को चिकित्सा लापरवाही के आरोपों के कारण निलंबित और गिरफ्तार भी किया गया था।
यूपी पुलिस द्वारा 2 साल किए गए जाँच के बाद उनपर लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप हटा दिए गए, लेकिन फिर भी उन पर निजी प्रैक्टिस चलाने सहित दो अन्य आरोप लगाए गए थे। 9 महीने जेल में बिताने के बाद उन्हें 2018 में रिहा कर दिया गया था। लेकिन अभी भी वे नौकरी से निलंबित है।
गौरतलब है कि प्रियंका गाँधी ने ट्विटर पर डॉ. कफील खान के रिहा होने के बाद खुशी जाहिर की थी। वाड्रा ने इस मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी भी लिखा था। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि 2022 के उत्तर प्रदेश चुनाव में कफील खान कॉन्ग्रेस पार्टी का मुस्लिम चेहरा बन सकते हैं।
केरल के कन्नूर में अवैध बम निर्माण इकाई में धमाके की खबर आई है। घटना में कई लोगों के घायल होने की सूचना है। बताया जा रहा है घटनास्थल से कई स्टील बम बरामद हुए हैं। आरोप लग रहा है कि सीपीएम कार्यकर्ता धमाके के समय वहाँ बम बना रहे थे।
टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार, घटना पोन्नियम नामक जगह पर हुई। यह साफ़ नहीं है कि कितने लोग घायल हुए हैं। मगर, कहा जा रहा है कि घायल लोग सीपीएम के हैं। उन्हें इलाज के लिए अस्पाल ले जाया गया है।
इस धमाके में कुछ स्थानीय लोग भी घायल हुए हैं। वहीं सूचना पाते ही पुलिस भी घटनास्थल पर पहुँच गई है। घटना स्थल से उन्हें बम मिले हैं, जिन्हें कुछ पुलिसकर्मी थाने ले गए हैं और कुछ पुलिस मौके पर रहकर उस जगह की जाँच कर रहे हैं।
#Breaking | Blast reported at an illegal bomb manufacturing unit at Kannur in Kerala. Several people have been injured & dozens of powerful steel bombs have been recovered from the spot.
रिपोर्ट बताती है कि कन्नूर का पोन्नियम और आस-पास के क्षेत्र कुख्यात रूप से कम्युनिस्ट पार्टी के गढ़ के रूप में पहचाने जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन क्षेत्रों से पहले ऐसी कई घटनाएँ सामने आई हैं जहाँ स्थानीय रूप से निर्मित कच्चे बमों ने सीपीआई (एम) और आरएसएस कार्यकर्ताओं दोनों को घायल किया है।
इस्लामी कट्टरपंथी और न्यूजलॉन्ड्री के शरजील उस्मानी को शुक्रवार को अलीगढ़ की एक स्थानीय अदालत ने जमानत दे दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान दंगों को उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए एएमयू के छात्र उस्मानी को जिला अदालत ने जमानत दी। सीएए विरोधी हिंसक प्रदर्शनों में कथित भूमिका के लिए उसे 29 जुलाई को यूपी पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
विशेष न्यायाधीश नरेंद्र सिंह ने उस्मानी को जमानत देते हुए कहा कि उस्मानी एएमयू का मेधावी छात्र है और उसे मौका-ए-वारदात से गिरफ्तार नहीं किया गया था। न्यायाधीश के अनुसार, गिरफ्तारी के वक्त उसके खिलाफ कोई गंभीर सबूत भी नहीं पाया गया था।
अदालत ने न केवल उसकी शैक्षिक साख को संज्ञान में लिया, बल्कि दो मामलों में आरोपित उस्मानी को जमानत देते हुए यह भी उल्लेख किया कि वह लेख भी लिखता है।
बार और बेंच के अनुसार न्यायाधीश नरेंद्र सिंह ने कहा, “आरोपित को और जेल में रखने से कोई भी उद्देश्य पूरा नहीं होने वाला। इसलिए जेल में बंद अवधि और उसके शैक्षिक रिकॉर्ड को देखते हुए यह उसे जमानत देने का उचित समय है।”
जज ने कहा, “आरोपी का शैक्षिक रिकॉर्ड बताता है कि वह एक होनहार छात्र रहा है। उसने कई लेख लिखे हैं जो रिकॉर्ड में भी उपलब्ध हैं।” मामले के अन्य आरोपितों में से एक को पहले ही जमानत दे दी गई थी।
पिछले साल दिसंबर में एएमयू में हुए सीएए विरोधी हिंसक प्रदर्शन के बाद उस्मानी के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत अलग-अलग मामले दर्ज किए गए थे। न्यूज़लॉन्ड्री के कॉलमनिस्ट शरजील उस्मानी दिल्ली में इस साल फरवरी में हुए हिंदू-विरोधी दंगों के दौरान पुलिस पर रिवॉल्वर तानने वाले कट्टरपंथी शाहरुख पठान का महिमामंडन भी किया था।
उस्मानी ने भड़काऊ और देशद्रोही भाषण देने के आरोपित शारजील इमाम का भी समर्थन किया था। इमाम की गिरफ्तारी के तुरंत बाद उस्मानी ने झूठा प्रचार-प्रसार कर भारत में संप्रदाय विशेष के लोगों की कथित खराब हालत का दुष्प्रचार विदेश तक फैलाने की साजिश रची थी। उस्मानी ने घोषणा की थी कि वह अपने दोस्तों के साथ मिलकर भारत में संप्रदाय विशेष के खिलाफ कथित घृणा अपराधों को दर्शाते हुए वीडियो डालेगा ताकि वैश्विक स्तर पर वे सोशल मीडिया के जरिए लोगों पर प्रभाव बना सके।
सोशल मीडिया और शरजील इमाम का भड़काऊ भाषण वायरल होने के बाद उस्मानी ने उसका बचाव भी किया था। उसने संप्रदाय विशेष के लोगों से जेएनयू के स्कॉलर से खुद को अलग न करने का आग्रह किया था।
सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की जॉंच में मुंबई पुलिस के रवैए को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इस संबंध में कंगना रनौत भी लगातार मुखर रही हैं। उन्होंने मुंबई पुलिस की सुरक्षा से इनकार करते हुए यहॉं तक कह दिया था कि आज माफिया से ज्यादा डर उन्हें मुंबई पुलिस से लगता है। इसके बाद से महाराष्ट्र का सत्ताधारी गठबंधन खासकर शिवसेना उन पर हमलावर है।
शिवसेना संसद संजय राउत ने ट्वीट कर मुंबई पर केवल मराठियों का अधिकार बताया है। साथ ही यह भी कहा है कि शिवसेना महाराष्ट्र के ऐसे दुश्मनों को खत्म किए बिना नहीं रुकेगी। उन्होंने लिखा “मुंबई मराठी मानुष के बाप की ही है, जिन्हें यह मँजूर नहीं वह अपना बाप दिखाएँ। शिवसेना महाराष्ट्र के दुश्मनों का श्राद्ध किए बगैर नहीं रहेगी, प्रॉमिस जय हिंद जय महाराष्ट्र।”
मुंबई ही मराठी माणसाच्या बापाचीच आहे…ज्यांना हे मान्य नसेल त्यांनी त्यांचा बाप दाखवावा..शिवसेना अशा महाराष्ट्र दुष्मनांचे श्राद्ध घातल्या शिवाय राहाणार नाही. promise. जय हिंद जय महाराष्ट्र
इस ट्वीट के बाद कंगना रनौत की भी प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने अपने हालिया ट्वीट में मराठी लिबास में तस्वीर साझा की और लिखा, “किसी के बाप का नहीं है महाराष्ट्र, महाराष्ट्र उसी का है जिसने मराठी गौरव को प्रतिष्ठित किया है। मैं डंके की चोट पे कहती हूँ, हाँ मैं मराठा हूँ, उखाड़ो मेरा क्या उखाड़ोगे।”
किसी के बाप का नहीं है महाराष्ट्र, महाराष्ट्र उसी का है जिसने मराठी गौरव को प्रतिष्ठित किया है। और मैं डंके की चोट पे कहती हूँ हॉ मैं मराठा हूँ ,उखाड़ो मेरा क्या उखाड़ोगे? pic.twitter.com/MVvyiXiLzc
एक ट्वीट में उन्होंने अपने काम का जिक्र करते हुए लिखा, “इनकी औक़ात नहीं है, इंडस्ट्री के सौ सालों में एक भी फ़िल्म मराठा प्राइड पर बनाई हो, मैंने इस्लाम डॉमिनेट इंडस्ट्री में अपनी जान और करियर को दॉंव पर लगाया। शिवाजी महाराज और रानी लक्ष्मीबाई पर फ़िल्म बनाई। आज महाराष्ट्र के इन ठेकेदारों से पूछो, क्या किया है महाराष्ट्र के लिए?”
इनकी औक़ात नहीं है, इंडस्ट्री के सौ सालों में एक भी फ़िल्म मराठा प्राइड पे बनाई हो,मैंने इस्लाम डॉमिनेट इंडस्ट्री में अपनी जान और करीयर को दाओ पे लगाया, शिवाजी महाराज और रानी लक्ष्मीबाई पे फ़िल्म बनाई, आज महाराष्ट्र के इन ठेकेदारों से पूछो किया क्या है महाराष्ट्र केलिए ? pic.twitter.com/o9kk5OpSba
उन्होंने उन सभी लोगों को चापलूस बताया जो महाराष्ट्र के लिए आज फर्जी प्यार दिखा रहे हैं। उन्होंने लिखा, “हर चापलूस जो महाराष्ट्र के लिए प्रेम दिखा रहे हैं उन्हें पता होना चाहिए कि मैं हिंदी सिनेमा के इतिहास में पहली एक्टर व निर्देशक हूँ जो मराठा के गौरव शिवाजी महाराज और रानी लक्ष्मीबाई को बड़े पर्दे पर लाई। इसके लिए मुझे फिल्मों के रिलीज पर कई विरोध का सामना भी करना पड़ा।”
All chaploos who are showing their love for Maharashtra must know I am the first Actor/ Director in the history of Hindi Cinema to bring Maratha Pride Shiva Ji Maharaj and Rani LaxmiBai to the big screen and I faced huge opposition during the relase from the same people ? https://t.co/HMzDMcpdwQ
इससे पहले कंगना रनौत ने एक ट्वीट करते हुए चुनौती दी थी कि वह मुंबई आएँगी और टाइम भी पोस्ट करेंगी। उन्होंने लिखा था, “मैं देख रही हूँ कई लोग मुझे मुंबई वापस न आने की धमकी दे रहे हैं, इसलिए मैंने तय किया है कि 9 सितंबर को मुंबई आऊँगी। मैं मुंबई एयरपोर्ट पर पहुँचकर टाइम पोस्ट करूँगी, किसी के बाप में हिम्मत है तो रोक ले।”
I see many people are threatening me to not come back to Mumbai so I have now decided to travel to Mumbai this coming week on 9th September, I will post the time when I land at the Mumbai airport, kisi ke baap mein himmat hai toh rok le ? https://t.co/9706wS2qEd
गौरतलब है कि संजय राउत से पहले शिवसेना के ही विधायक प्रताप सरनाईक ने कंगना को खुलेआम धमकी दी थी। प्रताप सरनाईक ने ट्विटर पर लिखा, “अगर वह यहाँ आती है, तो हमारे योद्धा उसका मुँह तोड़ देंगे। मैं गृह मंत्री से अनुरोध करता हूँ कि वह कंगना रनौत के खिलाफ मुंबई को पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) बताने के लिए राजद्रोह का मुकदमा दर्ज करे।”
कंगनाला खासदार @rautsanjay61 नी सौम्य शब्दांत समज दिली.ती इथे आली तर आमच्या रणरागिणी तिचे थोबाड फोडल्याशिवाय राहणार नाहीत. उद्योजक व सेलेब्रिटी घडवणाऱ्या मुंबईची तुलना पाकव्याप्त काश्मीरशी करणाऱ्या कंगनावर देशद्रोही म्हणून गुन्हा दाखल करण्याची मी गृहमंत्र्यांना मागणी करणार आहे.
वहीं, राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने भी कंगना के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज करने की बात कही है। उनके पीओके वाले बयान पर MNS ने कहा, “POK के साथ मुंबई की तुलना करने पर कंगना के खिलाफ राजद्रोह के आरोपों के तहत केस दर्ज हो।”
इसी प्रकार महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने भी मुंबई के बारे में कंगना के बयान को गलत बताया। साथ ही कहा कि जिसकी मुंबई के बारे में ऐसी सोच है उसे मुंबई में रहने का अधिकार नहीं है। जिस पर कंगना ने अपने ट्विटर अकाउंट से उन्हें जवाब दिया। उन्होंने खबर शेयर करते हुए लिखा, “वह मेरे संवैधानिक अधिकारों को छीनने का प्रयास कर रहे हैं, एक ही दिन में यह पीओके से तालिबान बन गया।”
बता दें, अनिल देशमुख ने एक ट्वीट में लिखा था, “मुंबई पुलिस की तुलना स्कॉटलैंड की पुलिस से होती है। कुछ लोग मुंबई पुलिस को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। एक IPS अधिकारी इसके खिलाफ अदालत में गए हैं। उन्हें मुंबई या महाराष्ट्र में रहने का कोई अधिकार नहीं है।”
Mumbai Police is compared to Scotland Yard. Some people are trying to target Mumbai Police. An IPS officer has gone to court against this…After, her (#KanganaRanaut‘s) comparison of Mumbai Police…she has no right to live in Maharashtra or Mumbai: State Minister Anil Deshmukh pic.twitter.com/dy1OWIFAjl
बिहार के बेगूसराय जिले के शाहपुर गाँव में दलित नाबालिग लड़की से छेड़छाड़ और उसके परिजनों पर ईंट-पत्थर से हमले का मामला सामने आया है। मामला दो समुदायों के बीच का है। घटना में लड़की के भाई और चाचा घायल हुए हैं। पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें पीड़िता के घरवाले भी शामिल हैं। गिरफ्तारी मारपीट मामले में हुई है। छेड़खानी करने वाला संप्रदाय विशेष का युवक खबर लिखे जाने तक गिरफ्तार नहीं हुआ था।
पीड़िता का बयान
पीड़िता ने ऑपइंडिया से बात करते हुए सारी घटना साझा की। नाबालिग ने बताया, “कल मैं सब्जी लेने रमजानपुर बाजार साइकिल से जा रही थी। तभी रास्ते में मो. अलाउद्दीन मेरे आगे अपनी साइकिल घुमाने लगा। इसके बाद उसने अपनी साइकिल, मेरी साइकिल में मारी। मैं गिर गई और वह मेरे शरीर पर इधर-उधर हाथ लगाने लगा। किसी तरह मैं उसकी पकड़ से छूटी और अपनी घर की तरफ भागी। मगर, वह पीछे से (जातिसूचक शब्द-चम#@* का इस्लेताम करते हुए) बोला-देखते हैं कब तक बचेगी हम से।”
लड़की के अनुसार, मो. अलाउद्दीन ने इससे पहले भी कई लड़कियों को छेड़ चुका है। मगर उसके साथ ऐसा पहली बार किया था। वह बताती है, “घर पहुँचकर मैंने अपने मम्मी-भाई को सब कुछ बताया। वह लोग अलाउद्दीन के घर उसे समझाने गए। लेकिन वहाँ उन्होंने भाइयों पर ही हमला बोल दिया। उन्हें ईंट-पत्थर से मारा” पीड़िता के पिता काम के सिलसिले में बिहार से बाहर रहते हैं।
दर्ज हुई शिकायत
इस संबंध में लड़की की माँ ने थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया है कि जब वे लोग आरोपित के घर पहुँचे तो उनके साथ गाली-गलौच किया गया। उन्हें ईंट-पत्थर मारे गए। इस घटना में संतोष दास का सिर फूट गया। उनके अलावा भी कई लोगों को इस हमले में चोट आई है।
शिकायत के अनुसार, गाँव में पहले भी कई लड़कियों के साथ छेड़खानी और मारपीट के ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। जिन पर शिकायत भी दर्ज हुई मगर कार्रवाई कोई नहीं हुई। शिकायत में मो. अलाउद्दीन, मो. शाहिद, मो. इकबाल, मो. इस्माइल, मो. नूर आलम आदि पर छेड़खानी और मारपीट का आरोप लगाया गया है। पीड़िता की माँ ने शिकायत में पुलिस से निवेदन किया है कि उन लोगों को बचाया जाए, नहीं तो वे गाँव छोड़ने को मजबूर होंगे।
पीड़िता की मॉं की ओर से दी गई शिकायत
लड़की के चाचा व घटना में बुरी तरह घायल संतोष दास ने बताया, “हम दो-चार लोग मिल कर लड़के के घरवालों से बोलने गए थे। पर, वहाँ 10-12 लोग इकट्ठा होकर हम लोगों पर ईंट-पत्थर बरसा दिया। हम भाग नहीं पाए तो सिर में बुरी तरह लग गया। हमारे साथ लड़की के भाई राजू, गौतम को भी चोट आई। राजू को हाथ में चोट लगी, गौतम को सीने में और हमारे सिर में चोट आई।”
बजरंग दल कार्यकर्ता पंकज से ऑपइंडिया की बातचीत
घटना के संबंध में ऑपइंडिया की बात बजरंग दल के स्थानीय कार्यकर्ता पंकज से भी हुई। वह इस मामले के सामने आने के बाद से पीड़ित परिवार को इंसाफ दिलाने में लगे हैं। आज उन्हें लेकर वह थाने भी गए थे। पंकज ने ऑपइंडिया को घटना की जानकारी देते हुए बताया कि पीड़ित पक्ष सबसे पहले कल रात 9 बजे थाने गया था। इसके बाद इन लोगों को सदर अस्पताल भेजा गया मेडिकल बनवाने के लिए। करीब 11 बजे यह लोग सब कागज बनवाकर दोबारा थाना गए, जहाँ इनसे छेड़खानी और मारपीट का आवेदन लिखवाया गया। इसके बाद बाकी सबको वापस भेज दिया गया और तीन की गिरफ्तारी कर ली। इनके नाम- अमित दास, राजू दास और गौतम दास हैं। वहीं, दूसरे पक्ष से बस दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनके नाम शाहिद और इकबाल हैं।
पंकज बताते हैं कि उन्होंने पीड़ित पक्ष की गिरफ्तारी के मद्देनजर पुलिस थाने में जाकर पूछताछ की। इस पर पुलिस ने कहा कि यदि पीड़ित पक्ष छेड़खानी के बाद सीधे थाने आता तो पुलिस कार्रवाई करती। फिर, ये लोग उनके घर क्यों गए। इन्होंने भी कानून को हाथ में लिया है।
पंकज के मुताबिक, आज पीड़ित पक्ष की ओर से इस मामले में नया आवेदन दिया गया है। मगर, पुलिस का कहना है कि कल का आवेदन और आज का आवेदन एक ही जैसा है। पंकज ने पुलिस से कल दर्ज आवेदन की माँग की थी, किंतु थाना प्रभारी ने उसे दिखाने से मना कर दिया। अब उन्हें संदेह है कि पुलिस पहले वाले आवेदन पर ही न कार्रवाई करे। वहीं पीड़ित पक्ष को भी लग रहा है कि कल की शिकायत में पता नहीं क्या लिखा गया होगा।
पुलिस की कार्रवाई
ऑपइंडिया ने इस मामले में लाखो थाना प्रभारी संतोष शर्मा से भी संपर्क किया। उन्होंने बताया कि इस मामले में आज सुबह केस दर्ज हो गया है और उन्होंने उसे मुफस्सिल थाने में भेज भी दिया है। हालाँकि, जब हमने जब पीड़ित पक्ष की गिरफ्तारी पर सवाल पूछा, तो उन्होंने कहा कि मारपीट दोनों पक्षों में हुई थी, इसलिए इस मामले में दोनों पक्षों को मिलाकर 5 लोगों की गिरफ्तारी हुई है।
बजरंग दल ने जताई नाराजगी
इस मामले के संबंध में बेगूसराय में बजरंग दल के राज्य सह संयोजक शुभम भारद्वाज ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मामले में कार्रवाई पर पुलिस से नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि इससे पहले भी एक परिवार की लड़की को इसी संप्रदाय विशेष परिवार के लड़के ने छेड़ा था, उससे मारपीट की थी। पिछले साल भी प्राथमिकी दर्ज हुई थ। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कल भी वैसा ही मामला हुआ। लड़की से छेड़छाड़ हुई और जब लड़की के घरवालों ने शिकायत की, तो उन पर हमला हुआ।
शुभम का कहना है कि जब उनके कार्यकर्ता लड़की के परिजनों को थाने लेकर गए, तो उन्हें अस्पताल भेज दिया गया। जब वह सदर अस्पताल से लौटे तो थानेदार ने उलटे पीड़िता के परिजनों पर जेल में डाल दिया। जब सुबह उनके कार्यकर्ता थाने में पहुँचे, तो उन्होंने उनके कार्यकर्ता को भी डाँटा और कहा, “तुम्हें मामले को शांत कराना चाहिए।” इसके बाद शुभम का आरोप है कि उन्होंने राजा नाम के किसी शख्स को पैसा देकर मामला शांत कराने की बात भी कही।
यहाँ बता दें, पुलिस पर लगे गंभीर आरोपों के मद्देनजर हमने बेगूसराय एसपी को संपर्क करने का प्रयास किया। मगर, उनसे हमारी बात नहीं हो पाई। वहीं थाना प्रभारी ने बस हमें मामला दर्ज और गिरफ्तारी की सूचना दी। शुभम बिहार प्रशासन से पूछते हैं कि आखिर बेगूसराय का हिंदू क्यों सुरक्षित नहीं है? क्यों थाना प्रभारी मुस्लिम तुष्टिकरण कर रहे है? दलितों पर जो उत्पीड़न हो रहा है उस पर क्यों कदम नहीं उठाया जा रहा है? इस मामले को गंभीरता से लेते हुए वह कहते हैं कि विश्व हिंदू परिषद शांत नहीं रहेगा। कानून का सम्मान करेंगे। लेकिन ईंट का जवाब पत्थर से देंगे। अगर विहिप लॉकडाउन का सम्मान कर रहा है इसका मतलब यह नहीं है कि कोई विधर्मी ऐसा काम करे।
हाल ही में भारत सरकार ने PUBG समेत 118 और चीनी मोबाइल ऐप्स को बैन किया है। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान से प्रेरित हो बॉलीवुड ऐक्टर अक्षय कुमार (Akshay Kumar) ने FAU-G नाम से एक एक्शन गेम लॉन्च की है।
Supporting PM @narendramodi’s AtmaNirbhar movement, proud to present an action game,Fearless And United-Guards FAU-G. Besides entertainment, players will also learn about the sacrifices of our soldiers. 20% of the net revenue generated will be donated to @BharatKeVeer Trust #FAUGpic.twitter.com/Q1HLFB5hPt
बॉलीवुड सुपरस्टार ने कहा Fearless And United-Guards FAU-G गेम के जरिए खिलाड़ी मनोरंजन के अलावा हमारे सैनिकों के बलिदानों के बारे में भी जानेंगे। इस गेम से होने वाली कमाई का 20 फीसदी भारत के वीर ट्रस्ट को डोनेट किया जाएगा।
गौरतलब है हालिया भारत सरकार ने देश की संप्रभुता और अखंडता को मद्देनजर रखते हुए लोकप्रिय ऑनलाइन मल्टीप्लेयर गेम PUBG को बैन कर दिया था। सरकार ने दावा किया कि यह भारत की रक्षा, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा था। सिर्फ PUBG ही नहीं उसके साथ 117 अन्य चीनी ऐप्स पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था।
Linked in पर मौजूद प्रोफाइल के अनुसार FAU-G को मोबाइल गेम्स और इंटरैक्टिव एंटरटेनमेंट कंपनी nCore गेम्स द्वारा बनाया गया है। यह कंपनी बेंगलुरु से बाहर स्थित है। इसमें आगे कहा गया है, ”हम मुख्य रूप से इमर्सिव स्टोरीलाइन के साथ मल्टी-प्लेयर गेम्स बनाते करते हैं। जिनका भारतीयों के साथ मजबूत जुड़ाव होता है। हम भारत में भी भारतीय बाजार के लिए टॉप ग्लोबल स्टूडियो से गेम जारी करते हैं।”
न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में रहने वाले तिब्बती समुदाय के लोगों द्वारा भारतीय सेना का हौसलाअफ़जाई करते हुए एक वीडियो साझा किया है। LAC पर भारतीय सैनिकों द्वारा सुरक्षा करने के लिए तिब्बती समुदाय के सदस्यों ने उनका भारतीय झंडे, तिब्बती झंडे और सफेद स्कार्फ दिखाकर दिल खोलकर स्वागत किया।
#WATCH Himachal Pradesh: Members of Tibetan community in Shimla cheer for security forces as they leave for LAC along India-China border in Himachal Pradesh and Ladakh. pic.twitter.com/nx97dk8mOw
इससे पहले भी इसी तरह का एक दृश्य जून के मध्य में भारतीय सेना और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़पों के बाद मनाली में देखने को मिला था।
बता दें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तिब्बती समुदाय के लोग भारत के सैनिकों और क्षेत्र में चीन की गुस्ताखी और विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ डट कर खड़े होने के लिए पीएम मोदी के नेतृत्व की सराहना करते रहे हैं। इससे पहले निर्वासित तिब्बती सरकार (जिसका मुख्यालय हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में है) ने भारत सरकार से अपने मातृभूमि तिब्बत पर चीन अधिपत्य को लेकर आवाज उठाने का आग्रह भी किया था।
लद्दाख क्षेत्र में चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच पैंगोंग त्सो के दक्षिणी तट पर आक्रामकता दिखा रहे चीन को सबक सिखाने के लिए भारतीय जांबाज मुस्तैद हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय सशस्त्र बलों ने पूर्वी लद्दाख में चुशुल सेक्टर के आसपास उत्तरी तट और पैंगोंग त्सो झील के दक्षिणी तट पर वास्तविक सामरिक नियंत्रण रेखा (LAC) और आसपास इलाकों पर सफलतापूर्वक नियंत्रण कर लिया है।
भारतीय अधिकारियों ने कहा है कि भारत सीमा के तहत चीन द्वारा की जा रही गुस्ताखी और चालबाजी को विफल करने के लिए सख्त कार्रवाई की आवश्यकता थी। साथ ही भारतीय सेना ने 30 अगस्त को विशेष फ्रंटियर फोर्स यूनिट की सहायता से दक्षिणी तट पैंगोंग त्सो और छोटी स्पैंग्गुर झील के बीच दक्षिण में स्थित ऊँचाइयों पर कब्जा कर लिया था।
यह भी बताया गया था कि 2 सितंबर को भारतीय सशस्त्र बलों ने पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी किनारे पर महत्वपूर्ण सामरिक ऊँचाइयों को भी अपने नियंत्रण में कर लिया है।
उल्लेखनीय है कि जनरल बिपिन रावत ने गुरुवार को पाकिस्तान के मंसूबों को लेकर भी आगाह किया था। उन्होंने कहा कि हम सीमा पर शांति चाहते हैं। पर चीन की उकसावे वाली कार्रवाईयों से निपटने में सक्षम हैं। हमारे तीनों अंग (थल सेना, वायु सेना और जल सेना) खतरों से निपटने में समर्थ हैं।
भारत-अमेरिका रणनीति साझेदारी मंच से जनरल रावत ने पाकिस्तान की तरफ से की जा रही नापाक कोशिशों के बारे में बताते हुए कहा था, “पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ प्रॉक्सी वॉर (छद्म युद्ध) छेड़ा हुआ है। वह जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की घुसपैठ के अलावा भारत के अन्य हिस्सों में आतंकवाद फैलाने की कोशिश कर रहा है। वह उत्तरी सीमा पर हमारे लिए कुछ मुश्किल खड़ा करना चाहता है, लेकिन वह इसमें नाकाम होगा और उसे भारी नुकसान झेलना पड़ेगा।”