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ड्रग्स माफिया को लेकर गौरी लंकेश के फिल्ममेकर भाई ने किए कई खुलासे, कन्नड़ इंडस्ट्री के टॉप एक्टर और मॉडल शामिल

फिल्म इंडस्ट्री में ड्रग्स के इस्तेमाल को लेकर देश में जारी बहस के बीच कर्नाटक में बड़े ड्रग्स रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। बीते हफ्ते कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री की एक टॉप अभिनेत्री की इस सिलसिले में गिरफ्तारी के बाद पूरा मामला सामने आया है।

बेंगलुरु में क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने मादक पदार्थ के इस्तेमाल के मामले में कन्नड़ अभिनेत्री रागिनी द्विवेदी को गिरफ्तार किया था। इस मामले में कई और हीरोइन, संगीतकार भी पुलिस के शिकंजे में हैं, जो अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर ड्रग रैकेट से जुड़े हुए हैं।

ड्रग्स का यह रैकेट एम अनूप, अनिखा डी और आर रविंद्र की गिरफ्तारी के बाद सामने आया। नारकोटिक्स ब्यूरो ने बेंगलुरु शहर में चल रहे ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए इनको गिरफ्तार किया था। इनकी गिरफ्तारी से पता चला कि कुछ प्रमुख संगीतकार, टॉप अभिनेता और वीआईपी के बच्चे भी ड्रग रैकेट में शामिल हैं।

बेंगलुरु में एनसीबी अधिकारियों द्वारा ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ करने के तुरंत बाद, लोकप्रिय कन्नड़ निर्देशक इंद्रजीत लंकेश ने ड्रग और नशीली दवाओं की तस्करी में कुछ टॉप अभिनेताओं की भागीदारी के बारे में एक चौंकाने वाला खुलासा किया।

उन्होंने आरोप लगाया था कि जाँच के दौरान दो नई अभिनेत्रियों के नाम सामने आए थे, लेकिन कथित राजनीतिक संबंध के कारण उनसे कोई सवाल नहीं किया गया। इंद्रजीत, पत्रकार गौरी लंकेश के भाई हैं जिनकी तीन साल पहले उन्हीं के घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

लंकेश ने यहाँ तक ​​कहा कि यदि पुलिस उन्हें संरक्षण देने का वादा करती है, तो वह इस तरह के कई तथ्य सामने रखेंगे। फिल्म निर्माता ने आरोप लगाया था कि ड्रग्स इंडस्ट्री और सैंडलवुड के बीच एक संबंध है। कुछ अभिनेत्रियाँ पार्टियों में प्रतिबंधित पदार्थों का सेवन करती हैं और शूटिंग के दौरान उन्हें अपने वैनिटी वैन में भी ले जाती हैं।

वहीं सेलिब्रिटी मैनेजर प्रशांथ सांभरगी (Prashanth Sambaragi) ने यह आरोप लगाया था कि सैंडलवुड में ड्रग रैकेट का कर्नाटक राजनीतिक हलकों के साथ-साथ बॉलीवुड से भी संबंध है। दिलचस्प बात यह है कि सांभरगी ने सैंडलवुड ड्रग मामले में इम्तियाज खत्री नाम के एक ड्रग पेडलर के शामिल होने का भी जिक्र किया। खत्री वर्तमान में मृतक अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत को ड्रग्स की सप्लाई के लिए सीबीआई के जाँच के दायरे में है।

सांभरगी ने आरोप लगाया था कि इम्तियाज ने 2017 में अपने जन्मदिन की पार्टी होस्ट की थी। पार्टी में संजय दत्त और सलमान खान जैसे बॉलीवुड सितारे भी शामिल थे। सांभरगी के अनुसार, पार्टी में कर्नाटक के एक विधायक और उनके बेटे भी मौजूद थे। विधायक पहले जेडी (एस) के साथ थे और बाद में कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए थे। सांभरगी ने खुलासा किया कि पार्टी में कई सैंडलवुड अभिनेता भी पार्टी में शामिल हुए थे।

इंद्रजीत लंकेश ने भी शनिवार को सीसीबी को बयान दिया और ड्रग रैकेट में शामिल लोगों के वीडियो, एकाउंट नंबर और फोन नंबर जैसे सबूत पेश किए। CCB सैंडलवुड में ड्रग रैकेट की विस्तृत जाँच कर रही है। सीसीबी ने पिछले गुरुवार को इस मामले में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में सेकंड डिवीज़न क्लर्क (एसडीसी) के रविशंकर को गिरफ्तार किया। जैसे ही पुलिस ने ड्रग मामले में उसकी संलिप्तता के बारे में पूछताछ की, उसने कन्नड़ अभिनेत्री रागिनी द्विवेदी की संलिप्तता को लेकर खुलासा किया।

बेंगलुरु की केंद्रीय अपराध शाखा (CCB) ने शुक्रवार को प्रारंभिक जाँच के बाद, अभिनेत्री रागिनी द्विवेदी को गिरफ्तार कर लिया। उनके आवास पर छापा भी मारा। महिला अधिकारियों सहित सीसीबी की एक टीम द्विवेदी के आवास पर पहुँची थी और उनके घर से महत्वपूर्ण सामग्री बरामद की थी।

कथित तौर पर, रागिनी का नाम गोवा के एक ड्रग पेडलर अहमद द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद सामने आया कि उसने रविशंकर को ड्रग्स की सप्लाई की थी। कथिततौर पर रागिनी और रविशंकर रिश्ते में थे। वहीं पूछताछ के दौरान रविशंकर ने राहुल नाम के एक शख्स का नाम लिया था, जो श्रीलंका में कैसिनो चलाता है। इसके अलावा कार्तिक राज नाम के रिश्तेदार का भी नाम लिया था।

दिलचस्प बात यह है कि राहुल की प्रेमिका संजना गलरानी है, जिसका नाम ड्रग मामले में भी आया है। वहीं अन्य आरोपित कार्तिक राज के अभिनेत्री शर्मिला मंड्रे के साथ अच्छे संबंध है। बता दें इस साल अप्रैल में मंड्रे बेंगलुरु की सड़कों पर लापरवाह ड्राइविंग के चलते हुए एक कार दुर्घटना के कारण विवादों में घिर गई थी।

गौरतलब है कि मामले में टॉप प्रभावशाली अभिनेत्रियों के नाम सामने आने के बाद अब सीसीबी ने ड्रग तस्करी मामले में गहन जाँच शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में, CCB ड्रग रैकेट मामले के संबंध से जुड़े कई और अभिनेताओं, कलाकारों और मॉडल से पूछताछ कर सकती है।

इस दौरान सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) पुलिस ने सैंडलवुड ड्रग माफिया मामले में 12 लोगों पर मामला दर्ज किया है। इस मामले में पुलिस अभिनेत्री रागिनी द्विवेदी, उनके दोस्त रविशंकर, राहुल शेट्टी और एक इवेंट मैनेजर, वीर खन्ना को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। सभी आरोपितों के खिलाफ धारा 21, 21C, 27A, 27B, और 29B नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

रिया की ड्रग्स पार्टी में शामिल होते थे बॉलीवुड के बड़े नाम, NCB ने महिला हवालात की सफाई के बाद बुलाया

रिया चक्रवर्ती को समन भेजे जाने के बाद एनसीबी द्वारा उनसे पूछताछ की जा रही है। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद सामने आए ड्रग्स एंगल से जाँच के दौरान कई बड़े खुलासे हो रहे हैं। NCB के जोनल डायरेक्टर वानखेड़े और डिप्टी डायरेक्टर केपीएस मल्होत्रा ने रिया चक्रवर्ती से पूछताछ की कमान थाम रखी है। इस दौरान रिया से पूछा जाएगा कि क्या वो खुद ड्रग्स का सेवन करती हैं और अगर हाँ तो कौन-कौन सी?

साथ ही रिया चक्रवर्ती के चैट से सामने आई ड्रग्स देने और खरीदने-बेचने के बाबत भी उनसे सवाल किए जाएँगे। रुपयों का भुगतान कैसे किया जाता था और ड्रग्स की खरीद-फरोख्त में कौन-कौन से लोग शामिल थे, इस बारे में भी उनसे सवाल किए जाएँगे। शौविक और रिया में किसे पहले ड्रग्स की आदत लगी और पहले बार उन्होंने किन ड्रग्स का सेवन किया था, ये सवाल भी पूछे जाएँगे। साथ ही सुशांत के ड्रग्स सेवन से सम्बंधित सवाल भी होंगे।

कई मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला है कि रिया ही सुशांत के लिए ड्रग्स मँगवाती थी। उन्होंने सुशांत को रोका क्यों नहीं, ये भी एनसीबी का सवाल होगा। शौविक चक्रवर्ती की तरह क्या रिया द्वारा भी ड्रग्स का इस्तेमाल मुनाफा कमाने के लिए किया जा रहा था, ये सवाल भी होंगे। रिया चक्रवर्ती ने बीमार सुशांत को ड्रग्स क्यों दिया और बॉलीवुड में इस ड्रग नेटवर्क में उनसे कौन-कौन लोग संपर्क में हैं, एनसीबी का ये भी सवाल होगा।

रिया चक्रवर्ती को शौविक और सैमुअल के साथ बिठा कर भी पूछताछ की जाएगी। दोनों को एनसीबी पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। बयानों में भिन्नता आने पर उन्हें साथ बिठाया जाएगा। इस दौरान रिया चक्रवर्ती के समक्ष उनके व्हाट्सप्प चैट की सीडीआर डिटेल्स भी दिखाई जाएगी। एनसीबी दफ्तर के महिला हवालात में सफाई और सैनिटाइजेशन के बाद रिया को बुलाया गया। इस मामले में कई और राज खुलने कई सम्भावना है।

उधर सैमुअल मिरांडा और दीपेश सावंत ने एनसीबी की पूछताछ के दौरान बताया कि सुशांत के फ्लैट पर अक्सर ड्रग्स पार्टी हुआ करती थी, जिसमें कई बड़े बॉलीवुड सेलेब्स भी पहुँचते थे। सैमुअल ने ड्रग्स के खरीद-फरोख्त में शौविक चक्रवर्ती का अहम किरदार बताया। शौविक ने ही उसे एक दोस्त सूर्यदीप का नंबर दिया था, उसने करमजीत नाम के एक सप्लायर का नंबर भी दिया था जो 2500 रुपए में एक पैकेट उपलब्ध कराता था।

उधर मृत्यु के बाद सुशांत सिंह राजपूत की गर्दन पर दिखे निशान को लेकर हो रही चर्चा अब सीबीआई जाँच तक पहुँच गई है। AIIMS के डॉक्टरों की टीम ने इस सम्बन्ध में कूपर हॉस्पिटल के उन डॉक्टरों से जवाब माँगा है, जिन्होंने सुशांत सिंह राजपूत का पोस्टमॉर्टम किया था। एम्स के तीन डॉक्टरों की टीम ने कूपर हॉस्पिटल के डॉक्टरों से पूछताछ की। एम्स के डॉक्टरों ने इस दौरान सुशांत के गले में बने निशान को लेकर भी सवाल दागे।

परिवार के मोह से निकलिए, वरना इतिहास बन जाएगी पार्टी: कॉन्ग्रेस में फिर लेटर वॉर, सोनिया को यूपी से खुला खत

नेतृत्व में बदलाव को लेकर 23 वरिष्ठ नेताओं की ओर से लिखे पत्र पर कॉन्ग्रेस में विवाद अभी शांत भी नहीं हुआ है। इसी बीच, यूपी कॉन्ग्रेस के नौ निष्कासित सदस्यों ने सोनिया गॉंधी को खुला पत्र लिखकर नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं।

पिछले साल पार्टी से निष्कासित नौ वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेताओं ने अंतरिम अध्यक्ष भेजे पत्र में कहा है कि वह पार्टी को महज ‘इतिहास’ का हिस्सा बनकर रह जाने से बचा लें। चार पन्नों के पत्र में यूपी की प्रभारी व पार्टी महासचिव प्रियंका गाँधी को परोक्ष रूप से निशाने पर लेते हुए सोनिया गाँधी से परिवार से ऊपर उठने का आग्रह किया गया है। पत्र में लिखा गया है, ‘परिवार के मोह से ऊपर उठें’ और पार्टी की लोकतांत्रिक परंपराओं को पुनर्स्थापित करें।

पूर्व सांसद संतोष सिंह, पूर्व मंत्री सत्यदेव त्रिपाठी, पूर्व विधायक विनोद चौधरी, भूधर नारायण मिश्रा, नेकचंद पांडे, स्वयं प्रकाश गोस्वामी और संजीव सिंह के दस्तखत वाले पत्र में कहा गया है कि कॉन्ग्रेस उत्तर प्रदेश में अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। 

‘मिलने के लिए एक साल से माँग रहे अपॉइंटमेंट’

पत्र में आगे कहा गया है, “इस बात की आशंका है कि आपको राज्य मामलों के प्रभारी द्वारा मौजूदा स्थिति से अवगत नहीं कराया जा रहा है। हम लगभग एक साल से आपसे मिलने के लिए अपॉइंटमेंट की माँग कर रहे हैं, लेकिन मना कर दिया जाता है। हमने अपने निष्कासन के खिलाफ अपील की थी जो अवैध था, लेकिन केंद्रीय अनुशासन समिति को भी हमारी अपील पर विचार करने का समय नहीं मिला।”

वेतनभोगियों का पार्टी पर कब्जा

पत्र में दावा किया गया है कि पार्टी के पदों पर उन लोगों का कब्जा है जो वेतन के आधार पर काम कर रहे हैं और पार्टी के प्राथमिक सदस्य भी नहीं हैं। पत्र में कहा गया है, “ये नेता पार्टी की विचारधारा से परिचित नहीं हैं, लेकिन उन्हें यूपी में पार्टी को दिशा देने का काम सौंपा गया है।”

‘लोकतांत्रिक मानदंडों की धज्जियाँ उड़ाई जा रहीं’

इसमें आगे कहा गया है कि ये लोग उन नेताओं के प्रदर्शन का आकलन कर रहे हैं जो 1977-80 के संकट के दौरान कॉन्ग्रेस के साथ चट्टान की तरह खड़े थे। लोकतांत्रिक मानदंडों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं और वरिष्ठ नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है, अपमानित किया जा रहा है, निकाला जा रहा है। उनका कहना है कि उन्हें उनके निष्कासन के बारे में भी मीडिया से ही पता चला था, जिससे राज्य इकाई में नई कार्य संस्कृति का पता चलता है।

नेताओं और कार्यकर्ताओं में संवाद की कमी

पत्र में आरोप लगाया गया है कि नेताओं और पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच संवाद की कमी है। इन नेताओं ने कहा है कि यूपी में एनएसयूआई और युवा कॉन्ग्रेस निष्क्रिय से हो गए हैं। कॉन्ग्रेस आलाकमान से वरिष्ठ नेताओं के साथ संवाद को बढ़ावा देने का आग्रह किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर मौजूदा मामलों की ओर आँख मूँद लिया गया तो कॉन्ग्रेस को यूपी में तगड़ा नुकसान होगा, जो कभी पार्टी का गढ़ हुआ करता था। यह पत्र ऐसे समय में आया है जब पार्टी उत्तर प्रदेश में पहले से ही गुटबाजी, मतभेदों का सामना कर रही है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों कॉन्ग्रेस के 23 नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी को चिट्ठी लिखकर ऊपर से नीचे तक बदलाव की माँग की थी। चिट्ठी लिखने वालों में 5 पूर्व सीएम, कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य, सांसद और कई पूर्व केंद्रीय मंत्री शामिल थे। 

इस चिट्ठी के बाद सोनिया गाँधी के वफादार गुट की इन नेताओं के साथ जमकर विवाद हुआ था और सोनिया के वफादार नेताओं ने इनकी तीखी आलोचना की थी। कॉन्ग्रेस कार्य समिति की बैठक में भी यह छाया रहा।

केरल: कोरोना संक्रमित लड़की से एंबुलेस ड्राइवर नौफल ने किया रेप, फिर पहुँचाया अस्पताल

केरल के पतनमतिट्टा (Pathanamthitta) जिले में कोरोना संक्रमित लड़की के साथ बलात्कार की घटना सामने आई है। आरोपित एंबुलेस चालक है और उसका नाम नौफल बताया जा रहा है। घटना रविवार (6 सितंबर 2020) देर रात 1 बजे के करीब की है। आरोपित को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।  

रिपोर्टों के अनुसार नौफल अलाप्पुझा (Alappuzha) जिले का रहने वाला है और राज्य सरकार के 108 एंबुलेंस सर्विस विभाग से जुड़ा हुआ था। 20 वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार की घटना उस वक्त हुई जब एंबुलेस के जरिए पतनमतिट्टा से कोज़ेनचेरी स्थित कोविड स्वास्थ्य केंद्र ले जाया जा रहा था।

ख़बरों के मुताबिक एंबुलेंस में दो मरीज थे। स्वास्थ्य अधिकारियों ने एक को कोज़ेनचेरी जिला अस्पताल लेकर जाने के लिए कहा और दूसरी को कोविड स्वास्थ्य केंद्र। इसके बाद नौफ़ल ने एक मरीज को जिला अस्पताल पहुँचाया और दूसरी को कोविड स्वास्थ्य केंद्र की तरफ लेकर गया। 

कोविड स्वास्थ्य केंद्र जाने से पहले उसने एर्नामुला हवाई अड्डे के पास लड़की के साथ बलात्कार किया। पीड़िता ने स्वास्थ्य केंद्र पहुँचने के बाद वहाँ मौजूद कर्मचारियों को पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद कर्मचारियों ने मामले की जानकारी पुलिस को दी। उसी वक्त पीड़िता ने अपना बयान भी दर्ज कराया। इसके बाद पुलिस ने आरोपित एम्बुलेंस चालक नौफ़ल को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को जाँच में पता चला कि आरोपित पर एक हत्या का मामला भी दर्ज है। फ़िलहाल पुलिस मामले की जाँच में जुटी हुई है और आरोपित की आपराधिक पृष्ठभूमि खँगाल रही है।

पतनमतिट्टा के पुलिस अधीक्षक केजी सिमोन ने बताया कि आरोपित नौफ़ल अलाप्पुझा का रहने वाला है। वह राज्य के स्वास्थ्य विभाग की एम्बुलेंस सेवा (108) में कार्यरत था। इसके अलावा नौफ़ल पर 2019 के दौरान हत्या का मामला भी दर्ज किया गया था। उन्होंने बताया कि नौफ़ल लड़की को एर्नामुला हवाई अड्डे के पास एक सुनसान जगह पर लेकर गया। वहीं पर उसने बलात्कार किया।  

6 से 8 महीने का काम 14 दिन में: कोरोना से लड़ाई में Caring Indians का कमाल, डेवलप किया देशी वेंटिलेटर और मास्क

कोरोना महामारी के प्रकोप के कारण देश में लॉकडाउन लगना निस्संदेह बेहद जरूरी कदम था। मगर उतना ही आवश्यक था कि इससे प्रभावित वर्ग का भरण-पोषण और उनकी जरूरतें पूरी करना। कई जगह सरकार की मदद पहुँच रही थी। लेकिन कई जगह निम्न वर्ग के लोग इससे अछूते भी थे। इस बीच कई संस्थाएँ जरूरतमंद लोगों की मदद करने के लिए सामने आईं। 

उन्होंने लॉकडाउन के कारण प्रभावित वर्ग को हर संभव मदद पहुँचाने का काम किया। इनमें अधिकांश संस्थाएँ उस वंचित वर्ग की बुनियादी जरूरतों जैसे राशन आदि को पूरा कर रही थीं। इसी दौरान स्वयंसेवकों के समूह वाली एक संस्था ‘केयरिंग इंडियन्स-बेटर टुगेदर (Caring Indians-Better Together)’ नाम से अस्तित्व में आई। इसने न केवल कोरोना प्रभावित समय में लोगों की बुनियादी जरूरतों को समझा बल्कि जरा हटकर उनके बचाव के लिए काम भी किया।

इस संस्था का उद्देश्य समाज के वंचित वर्ग का न केवल पेट भरना था बल्कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी था। इसके लिए इन्होंने मास्क से लेकर वेंटिलेटर और पीपीई किट तक डेवलप कर डाले और उसका वितरण भी किया।

Caring Indians की सबसे खास बात यह है कि ये बुद्धिजीवियों के प्रयासों का फलितार्थ है। IIT से कई शिक्षाविद इससे जुड़े हैं। इसके अलावा कई इंजीनियर, डॉक्टर, वैज्ञानिक, कृषक, व स्वयंसेवक भी इसका जरूरी हिस्सा हैं। इन्हीं सबके सहयोग से Caring Indians देश के कई कोनों में अपनी सुविधा पहुँचाने में सफल रहा।

ऑपइंडिया ने इन्हीं प्रयासों के मद्देनजर केयरिंग इंडियन्स से जुड़े प्रोफेसर हर्ष चतुर्वेदी से बात की। उन्होंने इस संस्था पर जानकारी देते हुए हमें बताया, “यह एक वॉलिंटियरी ग्रुप है। इसकी शुरुआत राहुल राज और अनुराग दीक्षित ने की थी। फिर अलग-अलग क्षेत्र के लोग इससे जुड़ते गए। कुछ इसमें विनिर्माण क्षेत्र से थे और कुछ डिजाइन एक्सपर्स्ट्स भी थे। हम सब मिल कर केयरिंग इंडियन्स से जुड़े। हमारा काम कोरोना स्थिति से निबटने के लिए उत्पाद तैयार करना था। हमने सबसे अहम काम मास्क पर किया।”

बतौर मास्क डिजाइन करने वाली टीम का हिस्सा होने के नाते प्रोफेसर हर्ष कहते हैं, “इस मास्क को बहुत यूनिकली डिजाइन किया गया है। इसकी खासियत है कि ये वाटरप्रूफ है। इसमें फिल्ट्रेशन की क्षमता है। साथ ही इसकी कीमत भी बहुत कम है। शायद सिर्फ़ 95 रुपए के आसपास। इन सबके अलावा इसके फिल्टर्स को आसानी से बदला भी जा सकता है।” 

Caring Indians के द्वारा डिजाइन किए मास्क पहने लोग

प्रोफेसर हर्ष के अनुसार, डिजाइन टीम में उनके अलावा मुख्य रूप से IIT गुवाहटी की चारू मोंगा, राहुल राज और अनुराग शामिल थे। वह बताते हैं कि इन मास्कों का दिल्ली से लेकर यूपी और बिहार तक में वितरण किया गया है।

गौरतलब है कि केयरिंग इंडियन्स द्वारा निर्मित इस मास्क की महत्ता और विश्वसनीयता को इस बात से परखा जा सकता है कि हाल ही में इसे बिहार विधान परिषद में भी देखा गया।

बिहार विधान परिषद में पहुँचा केयरिंग इंडियन्स का मास्क

इसकी जानकारी स्वयं राहुल राज ने अपने ट्विटर पर दी  थी। उन्होंने अपने ट्वीट में इस बात को मुख्य रूप से उल्लेखित किया था कि प्रोफेसर हर्ष चतुर्वेदी और चारू मोंगा द्वारा बनाया गया मास्क बिहार विधान परिषद में भी पहने देखा गया।

मई महीने में भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने भी केयरिंग इंडियन्स के प्रयास को ट्विटर पर साझा करते हुए सराहा था। तेजस्वी सूर्या के मई वाले ट्वीट में लिखा था, “केयरिंग इंडियन्स दिल्ली, मुंबई, पुणे, जयपुर जैसे जगहों पर वंचितों को खाना पहुँचा रही है। अब इन्होंने बेंगलुरु में भी अपना काम शुरू कर दिया है। टास्क फोर्स प्रतिदिन नयंदाहल्ली में 500 से ज्यादा लोगों को खाना देती है।”

आरजे श्रुति ने भी इस पहल के संबंध में ट्वीट किया था। उन्होंने लिखा था कि देश में महामारी का प्रकोप परखते हुए कुछ लोगों का समूह आगे आया। वे केवल जरूरी उपकरणों के साथ नहीं तैयार हैं बल्कि एक जागरूक नागरिक होने के नाते जरूरतमंदों को बड़ी तादाद में मास्क, थर्मामीटर और सस्ते वेंटिलेटर बनाकर मुहैया करवा रहे हैं। श्रुति ने 7 अप्रैल को ट्वीट करते हुए यह लिखा था। अब केयरिंग इंडियन्स के नाम से पहचाने जाने वाले समूह के साथ लोग स्वयंसेवकों (वॉलिंटियर्स) के रूप में जुड़ रहे हैं।

केयरिग इंडियन्स की पहल करने वाले राहुल राज ने ट्विटर से की शुरुआत

राहुल राज C2C नाम के यूट्यूब चैनल को दिए एक इंटरव्यू में इस रचनात्मक पहल की शुरुआत पर बताते हैं। वे कहते हैं कि केयरिंग इंडियन्स की शुरुआत सोशल मीडिया से हआ प्रयास था। जहाँ कोरोना के समय में प्रभावित जनता को मदद पहुँचाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को सोशल मीडिया के जरिए जोड़ा गया। 

वह साक्षात्कार में बताते हैं कि उन्हें मालूम था कि वे सब मिलकर लोगों के लिए खाने का प्रबंध आदि करवा सकते थे। मगर उन्हें यह भी एहसास था कि यह आपदा कोई सामान्य आपदा नहीं। यह स्वास्थ्य आपदा (medical disaster) है। इसमें लोगों की जरूरतें भी भिन्न हैं। और, वह उन उपकरणों से लैस नहीं थे। तो, यहीं से एक समूह को तैयार करने का विचार आया।

वो कहते हैं, “हमने इसकी शुरुआत ट्विटर से की थी। इस बारे में मैं और मेरे वरिष्ठ अनुराग दीक्षित बात कर ही रहे थे कि हम इस पर कैसे काम कर सकते हैं। तभी उसी दौरान शिक्षाविदों के समूह से भी हमने इन्हीं सवालों को लेकर बात की। उसके बाद हमें एहसास हुआ कि अगर हम इकट्ठा होकर कुछ ऐसा टेक्निकल बनाएँ, जो वाकई मदद गार साबित हो।”

उनके अनुसार, “शुरुआत में तो हमारा विचार उत्पाद का डिजाइन तैयार करना था कि हम डिजाइन बनाएँगे। उसे रिलीज करेंगे। फिर ऐसे उत्पादक (manufacturers) को ढूँढेंगे, जिन्हें हम मास्क वेंटिलेटर और पीसीआर आदि का डिजाइन देकर कहें कि अगर वो बनाना चाहतें है तो डिजाइन इस्तेमाल करें और इसे बनाएँ।”

राहुल राज कहते हैं कि जब उन्होंने इसकी शुरुआत की थी, उन्हें नहीं पता था कि यह लोगों को इतना आकर्षित करेगा। वे बताते हैं कि प्रोजेक्ट में कई ऐसे लोग उनसे जु़ड़े, जिन्हें वे कभी जानते भी नहीं थे और न मिले थे।

इसके बाद सैंकड़ों लोगों ने हाथ बढ़ाया और उन्होंने भी टीम बनानी शुरू की। उन्हें तय करना था कि वह किन-किन प्रोजेक्ट्स पर कैसे काम करेंगे। जैसे कुछ प्रोजेक्ट डिस्ट्रिब्यूशन को लेकर थे और कुछ उन उत्पादों को बनाने के संबंध में भी थे। 

‘टेक्निकल’ प्रोजेक्ट पर पहली बार इतना अधिक सहयोग

राहुल राज की मानें तो केयरिंग इंडियन्स के प्रोजेक्ट से पहले कभी सैंकड़ों की तादाद में लोग टेक्निकल प्रोजेक्ट के लिए इकट्ठा नहीं हुए थे। लोग खाना पहुँचाने या डोनेशन देने के लिए आगे आते थे। मगर, हमने इससे पहले कभी भी ऐसे इंजिनियर्स, डॉक्टर्स को नहीं देखा था कि वह किसी प्रोडक्ट को बनाने में इस तरह बड़ी तादाद में आगे आए हों।

योर स्टोरी से बात करते हुए IIT-BHU के एलुमिनी राहुल राज कहते हैं, “भारत सॉफ्टवेयर और कोडिंग स्टार्टअप का एक केंद्र है, लेकिन इतने महान प्रतिभावान लोगों की भीड़ होने के बाद, जब भौतिक उत्पादों या हाई-एंड मशीनों की बात आती है, तो हम अवसरों, सहायता प्रणाली व इकोसिस्टम की कमी के कारण आगे बढ़ने में विफल रहते हैं।”

राहुल का कहना है कि केयरिंग इंडियन्स का आइडिया शिक्षा, उद्योग व प्रयोगशाला जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञों की सहायता लेकर टेक्निकल प्रोडक्ट बनाने का था। मगर, जब ट्विटर पर इसे साझा किया गया तो IIT कानपुर के प्रोफेसर अमिताभ बंदोपाध्याय, IISc के प्रोफेसर आलोक कुमार, JNCASR प्रोफेसर संतोष कुमार का भारी समर्थन मिला। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अपने नेटवर्क्स को इकट्ठा किया। फिर सैंकड़ों लोग वॉलिंटियर के रूप में आगे आए। प्रोजेक्ट आगे बढ़ता गया। 

IIT Kanpur, IIT Guwahati, IIT Delhi, IISc, AIIMS, JNCASR जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के लोग भी साथ आए। इसके बाद केयरिंग इंडियन्स की मुख्य मैनेजिंग कॉर्डिनेशन टीम बनी। इसमें अनुराग दीक्षित, राहुल राज, नंजेश पटेल, अजेन्द्र रेड्डी, मनीष गोयल और समर्थ शामिल हैं।।

बता दें कि केयरिंग इंडियन्स ने शुरुआती समय में  इन्वेसिव वेंटिलेटर्स, कीटाणुनाशक, पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन (पीसीआर) डायगनॉस्टिक पैनल, कॉन्टैक्टलेस थर्मामीटर, IoT डिवाइस और मास्क के डिजाइन आदि पर काम किया था।

केयरिंग इंडियन्स का क्या था उद्देश्य

लॉकडाउन से पहले अस्तित्व में आ चुकी ये संस्था कोरोना से जुड़ी चुनौतियों को परख चुकी थी। 21 मार्च को राहुल राज ने ट्वीट करके संस्था की ओर से बयान जारी किया था और उद्देश्य बताया था।

इसमें उन्होंने कोरोना के साथ जंग वाली स्थिति को आँकते हुए कहा था, “इसमें कोई दो राय नहीं है कि यह कोई आम जंग नहीं है। चीन, यूएस, फ्रांस, यूके और इटली में यह चरम पर है। हमारे पास अब भी कुछ समय है। भगवान न करे कि इसका प्रकोप कुछ हफ्तों में बढे़। हमारे पास सुविधाओं और संसाधनों की कमी चल रही है। इसलिए जरूरी है कि हम खुद अपना हथियार तैयार करें और इन दानव से लड़ने की तैयारी करें।”

इसमें लिखा था, “Better Together प्रोजेक्ट के साथ हम लोगों तक पहुँचने का प्रयास कर रहे हैं, जो मशीन और जरूरत के सामान बनाने में मदद करें ताकि आवश्यकता पड़ने पर हमें उनका सपोर्ट हो।” अपने इस बयान में केयरिंग इंडियन्स ने बताया कि वह नाम, संपर्क, स्किल सेट्स संग्रहित कर रहे हैं। वह लोग छोटी मशीनों, रोबोट्स, मास्क मेकर्स, वेंटिलेटर्स आदि पर काम करेंगे, और इसे मिलकर विचारों से आखिरी स्टेज तक पहुँचाया जाएगा। अपने बयान में उन्होंने लिखा कि कच्चे माल से लेकर प्रोटोटाइप तक वह निर्णय लेंगे।  

आगे संस्था का उद्देश्य बताते हुए इससे जुड़ने के लिए लोगों को उत्साहित किया गया। इसमें लिखा गया, “हमारे पास सैंकड़ो होनहार इंजीनियर्स, डॉक्टर्स, प्रोजेक्ट मैनेजर हैं। जिन्हें सही मौका मिले तो वह चमत्कार कर सकते हैं। यही वह सही समय है।”

ट्विटर पर केयरिंग इंडियन्स की सक्रियता का सफर

21 मार्च से केयरिंग इंडियन्स पर काम होना शुरू हुआ। राहुल राज ने तभी यह जानकारी दी कि उनके साथ 180 से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं। इनमें डॉक्टर, इंजीनियर, आईटी प्रोफेशनल, सीए आदि हैं। अब आगे जिनकी इच्छा है, वह इससे जुड़ सकते हैं।

इसके बाद इस प्रोजेक्ट पर काम चलता रहा। अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों ने इसे शेयर किया। धीरे-धीरे समूह बढ़ता गया। कई लोग इससे जुड़े।

22 मार्च को इस प्रोजेक्ट के संबंध में एक मीटिंग हुई। इसकी जानकारी ट्विटर पर दी गई। बताया गया कि IIT कानपुर incubation team ने डॉक्टर, प्रोफेसर, वैज्ञानिकों के साथ वेंटिलेटर बनाने पर बहुत फलदायी बैठक की। IIT दिल्ली भी मास्क बनाने पर काम कर रही है। साथ ही आईआर थर्मोमीटर पर भी काम चल रहा है।

इसी दिन बताया गया कि उन्होंने 15 दिन में 5 लाख वेटिंलेटर की जरूरत का अंदाजा लगाया है। आपदा प्रबंधन की टीम भी महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए नक्शे चिह्नित करने के काम में लगी है। डिसइंफेक्टेंट डिजाइन ग्रुप सॉल्यूशन पर काम कर रही है। इसके अलावा 600 से अधिक मेंबरशिप हो चुकी है।

23 मार्च को केयरिंग इंडियन्स ने अपने ट्विटर पर पूरे प्रोजेक्ट का ब्लूट प्रिंट साझा किया। साथ ही बताया कि थर्मामीटर, वेटिंलेटर, फेस मास्क, थर्मल ड्रोन और हैंड सैनिटाइजर पर काम शुरू हुआ है। इसमें बताया गया कि आम तौर पर इन सबके लिए 6-8 महीने लगते हैं। लेकिन वह इस लक्ष्य को 14 दिन में पूरा करने का प्रयास करेंगे। इसलिए उन्हें स्मार्ट लोग चाहिए पूरे भारत से। 

इसमें बताया गया था कि वह अपने कार्य में एकदम पारदर्शिता रखेंगे। इसके लिए वह वेबसाइट बना रहे हैं (जो अब बन चुकी है) और उस पर प्रोजेक्ट और संसाधनों से जुड़े लाइव अपडेट देंगे। ब्लू प्रिंट में प्रोजेक्ट का उद्देश्य ऐसी चीजों को निर्मित करना बताया गया जो आसानी से उपलब्ध हों और इस्तेमाल हो सकें।

इस ब्लू प्रिंट में काम करने के तरीके को साझा किया गया और समझाया गया कि उनके पास दो ग्रुप्स हैं। एक ग्रुप में वह लोग जो कोरोना से संबंधित प्रोजेक्ट में काम कर रहे हैं। जबकि दूसरे में विभिन्न क्षेत्रों से आए वॉलिंटियर्स हैं। इनमें कुछ हार्डवेयर इंजिनियर हैं, कुछ उद्योगपति हैं, कुछ प्रोजेक्ट मैनेजर, कुछ वैज्ञानिक, कुछ डॉक्टर आदि हैं।

उद्देश्य निर्धारित व प्लान ऑफ एक्शन तैयार करने के बाद, केयरिंग इंडियन्स आगे बढ़ता गया।  कई प्रोजेक्ट्स शुरू हुए। कई लोग जुड़े। केयरिंग इंडियन्स के ट्विटर पर हर चीज का जिक्र है। वॉलिंटियर्स जुड़ने की जानकारी से लेकर कब किसने कैसे समूह को संपर्क किया, इसका भी अपडेट है।

इस पहल के बाद 25 मार्च को पुणे प्रशासन ने समूह को संपर्क किया था और कहा था कि सभी प्रकार की अनुमति और सुविधाएँ हो जाएँगी।

मात्र एक हफ्ते में यानी 29 मार्च को पता चला कि वेंटिलेटर प्रोजेक्ट के लिए डिजाइन और प्रोटोटाइप IIT कानपुर के सहयोग से तैयार हो गया है। अब इसके उत्पादन के लिए कोशिशें हो रही हैं, ताकि इसे भारी मात्रा में तैयार किया जा सके। इसके अलावा खबर आई रियल टाइम पीसीआर मशीन भी डॉ हरीश चतुर्वेदी और चारू मोंगा ने डेवलप और डिजाइन कर ली है। उसके लिए भी उत्पादक चाहिए।

धीरे धीरे केयरिंग इंडियन्स फाउंडेशन के प्रयास मीडिया तक पहुँचे। हिंदुस्तान टाइम्स, बीबीसी और इकोनॉमिक्स टाइम्स ने भी इसे कवर करना जरूरी समझा। फिर अन्य प्रोजेक्ट की जानकारी आई। 3 अप्रैल को केयरिंग इंडियन्स ने 100 से अधिक डॉक्टरों और अनुभवी मनोवैज्ञैनिकों की मदद से लोगों को फ्री काउंसलिंग देने का काम शुरू किया। 4 अप्रैल को IIT गुवाहटी टीम के सहयोग से रियूजेबल मास्क तैयार हो गया। जिसकी बैक्टेरिया फिल्टरेशन की क्षमता 99% है।

4 अप्रैल को ही इस संस्था ने 3000 लोगों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर खाने का प्रबंध किया। शुरुआत मुंबई-पुणे से हुई। आगे खाने से लेकर शहरों तक में वृद्धि होती रही। कई नए प्रोजेक्ट शुरू हुए। वॉलिंटियर बढ़े। धीरे-धीरे ये समूह डॉक्टरों के लिए भी पीपीई किट लेकर आ चुका था। इतना ही नहीं, इसके इस्तेमाल के लिए बाकायदा वीडियो जारी करके अपडेट दिया गया था। उसके बाद कुछ ही समय में सभी मशीनों के डेमो केयरिंग इंडियन्स के अंतर्गत काम कर रही अलग-अलग टीमों के पास तैयार थे।

21 अप्रैल को यह कारवाँ मुंबई पुणे से निकल कर दिल्ली आ चुका था। संस्था जरूरत मंदों को खाना दे रही थी और मनीष मुंद्रा जैसे लोग टीम को आर्थिक सहयोग करने के लिए जुड़ चुके थे।

वहीं, रॉबिनहुड आर्मी और स्विगी भी संस्था के सहयोगी हो गए थे। 25 अप्रैल की जानकारी के मुताबिक खाना वितरण का कार्य 50 हजार की संख्या तक पहुँच गया था। साथ ही खुशखबरी ये दी गई कि कुछ समय में इनमें कुछ शहर और जुड़ेगे।

5 मई को एएनआई ने बताया कि आईआईटी कानपुर के नोका रोबोटिक्स द्वारा निर्मित वेटिंलेटर की माँग भरत डायनामिक्स लिमेटिड द्वारा की गई है। इसके लिए उन्होंने ज्ञापन हस्ताक्षर भी किए हैं। ये केयरिंग इंडियन्स के लिए बड़ी सफलता थी।

गौरतलब है कि लॉकडाउन में शुरू हुआ ये सराहनीय प्रयास अपना असर अब तक दिखा रहा है। जगह जगह इनकी टीम द्वारा बने मास्क पहुँचाए जा रहे हैं। बिहार के विधानसभा में जो मास्क देखा गया, वह हाल में ट्विटर पर शेयर हुई थी।

वहीं राहुल राज ने पिछले महीने ट्विटर पर मनीष मुंद्रा, अंकित जैन को इस पूरे प्रोजेक्ट में फंड रेज करने के लिए धन्यवाद दिया था। उन्होंने सबका आभार व्यक्त करते हुए कहा था कि ऐसे अच्छे लोगों के बिना यह संभव नहीं हो पाता।

इसके अलावा उन्होंने अभिमन्यु सिंह राणा और सहयोग एनजीओ का भी धन्यवाद दिया था। साथ ही अगले ट्वीट में मास्क की खासियत पर जानकारी देते हुए कहा था कि वह करीब 2500 मास्क सफाईकर्मियों को बाँटेंगे।

ISI से जुड़ा है आतंकियों का सरगना सैयद सलाहुद्दीन, पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट करवाने की तैयारी

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किया है, जिससे आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का संबंध पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से होने का पता चलता है। यह भी पता चला है कि आतंकी संगठन का मुखिया सैयद सलाहुद्दीन ISI के लिए आधिकारिक तौर पर काम करता है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह दस्तावेज पाकिस्तान के खुफिया निदेशालय, इस्लामाबाद की ओर से जारी किया गया है। दस्तावेज में हिजबुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन को आधिकारिक तौर पर ‘पाकिस्तान की एजेंसी आईएसआई’ के साथ काम करने वाला अधिकारी बताया गया है।

निदेशक/कमांडिंग अधिकारी वजाहत अली खान के नाम एक पत्र जारी किया गया है। इसमें कहा गया है, “यह प्रमाणित है कि सैयद मुहम्मद यूसुफ शाह (सैयद सलाहुद्दीन), इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई, इस्लामाबाद) के साथ काम कर रहे हैं। वह इस विभाग के अधिकारी हैं।” सलाहुद्दीन के वाहन का विवरण साझा करते हुए निर्देश दिया गया है कि उन्हें सुरक्षा की मॅंजूरी दे दी गई है और अनावश्यक रूप से रोका नहीं जाना चाहिए। इस पत्र में यूसुफ शाह को हिजबुल मुजाहिदीन का अमीर यानी मुखिया बताया गया है।

पत्र की कॉपी (साभार: Times of India)

यह दस्तावेज़ 20 सितंबर 2019 को इस्लामाबाद से जारी किया गया है और यह 31 दिसंबर 2020 तक मान्य है। सलाउद्दीन को हाल ही में पाकिस्तान के रावलपिंडी में मारे गए हिजबुल आतंकवादी रियाज नाइकू के मारे जाने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए देखा गया था।

भारतीय एजेंसियों का मानना है कि यह दस्तावेज सितंबर में होने वाले फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) में पाकिस्तान के खिलाफ काफी महत्वपूर्ण होगा। भारत में आतंकी हमलों में पाकिस्तान की संलिप्तता को लेकर यह एक मजबूत और प्रमाणिक प्रमाण हाथ लगा है। 14 सितंबर को होने वाली समीक्षा में पाकिस्तान को टेरर फंडिंग के लिए ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है।

बता दें ब्लैकलिस्टिंग को रोकने के लिए तीन वोटों की आवश्यकता होती है, पाकिस्तान मलेशिया, तुर्की और चीन को लुभाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान ने हाल ही में वित्तीय प्रतिबंधों से बचने के लिए, आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई को दिखाने के लिए कुछ कदम उठाए है। उनमें से एक सांविधिक नियामक आदेश (एसआरओ) शामिल था। इसमें उसने 88 नामित आतंकवादियों के मूवमेंट को ‘प्रतिबंधित’ करने की बात कही है।

गौरतलब है कि सैयद सलाहुद्दीन 2016 में पंजाब में पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले के मुख्य मास्टरमाइंड हैं। 1946 में पैदा हुआ सलाउद्दीन श्रीनगर के एसपी कॉलेज से ग्रेजुएट और 1971 में कश्मीर विश्वविद्यालय से पॉलिटिकल साइंस में पोस्ट ग्रेजुएट है। उसने 1987 में मुस्लिम संयुक्त मोर्चा के टिकट पर अमीराकदल निर्वाचन क्षेत्र से जम्मू-कश्मीर विधानसभा का चुनाव लड़ा था और हार गया था।

हिजबुल आतंकी सैयद संयुक्त जिहाद परिषद (UJC) भी संचालित करता है जो लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे अन्य कट्टरपंथी इस्लामी समूहों के लिए एक छत्र संगठन के रूप में काम करता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सलाहुद्दीन भारत में प्रॉक्सी एनजीओ और आईएसआई समर्थित चैरिटी जैसे जम्मू और कश्मीर प्रभावित राहत ट्रस्ट (JKART) के माध्यम से काम करता है।

हिज्बुल आतंकवादी इन संगठनों का उपयोग वित्तीय प्रोत्साहन देकर नई नए-नवेले आतंकवादियों की भर्ती करने के लिए करता है। जेकेएआरटी का मुख्य कार्यालय रावलपिंडी में है, जबकि इसकी शाखाएँ इस्लामाबाद, मुजफ्फराबाद सहित कई जगहों पर हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पहले सलाहुद्दीन और 11 अन्य आरोपियों के खिलाफ आतंक के वित्तपोषण से जुड़े मामले में केस दर्ज किया था।

दिल्ली हिंदू विरोधी दंगे: हथियार के साथ मुस्तकीम सैफी गिरफ्तार, शिव विहार में हुई थी राहुल सोलंकी की हत्या

दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने हिंदू विरोधी दंगे के दौरान शिव विहार में राहुल सोलंकी की हत्या के आरोप में मुस्तकीम सैफी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसके पास से हथियार भी बरामद किए हैं।

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और रिकॉर्ड के आधार पर राहुल सोलंकी की हत्या के आरोप में संप्रदाय विशेष के सात युवकों को आरोपित ठहराया था। अब पुलिस ने मुस्तकीम सैफी को गिरफ्तार किया है।

राहुल सोलंकी की फरवरी में दिल्ली के शिव विहार में हिंदू विरोधी दंगों के दौरान संप्रदाय विशेष की भीड़ ने हत्या कर दी थी। जून में, दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने 27 वर्षीय राहुल सोलंकी की हत्या मामले में आरोप-पत्र दायर किया था।

आरोप-पत्र में कहा गया था कि 24 फरवरी को शाम 5 बजे के आसपास शिव विहार के पास हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान सोलंकी की दयालपुर इलाके में उनके घर के पास हत्या कर दी गई थी।

शिव विहार निवासी राहुल सोलंकी गाजियाबाद के एक निजी कॉलेज से एलएलबी कर रहे थे। वह दूध लेने के लिए अपने घर से निकले थे, तभी दंगाइयों ने उनके गले के पास दाहिने कंधे में गोली मार दी थी। जब दंगाइयों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी, उस समय वह राजधानी स्कूल से सटे पाल डेयरी गली के पास खड़े थे।

इससे पहले, आरोपितों में से एक, सलमान ने पुलिस को बताया था कि वह राहुल को अच्छी तरह से जानता था क्योंकि राहुल का भाई रोहित उसके ग्रुप के साथ क्रिकेट खेलता था। सलमान ने पुलिस से कहा था कि वह हिंसक भीड़ में शामिल हो गया और दिल्ली की सड़कों पर ‘इस्लाम को बचाने के लिए’ आतंक फैलाया। 24 फरवरी को संप्रदाय विशेष की भीड़ ने एक और हिंदू युवक दिलबर सिंह नेगी की अनिल स्वीट्स का पास जलाकर हत्या कर दी थी।

शिव विहार – हिंदू विरोधी दंगों में सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक

शिव विहार ऐसा इलाक़ा था जहाँ के हालात दंगों के वक्त बदतर  थे। शिव विहार तिराहा तीन पुलिस थानों के अंतर्गत आता है। करावल नगर, दयालपुर और गोकुलपुरी। शिव विहार तिराहे की एक सड़क मुस्तफाबाद की तरफ जाती है जो कि संप्रदाय विशेष बाहुल्य क्षेत्र है। दूसरी सड़क शिव विहार और बाबू नगर की तरफ जाती है, जहाँ मिली-जुली आबादी रहती है। जिन क्षेत्रों में हिंदू आबादी ज़्यादा है, वहाँ भी संप्रदाय विशेष के लोगों के घर बने हुए हैं। शिव विहार तिराहे पर हुई हिंसा हिंदुओं के लिए भयावह थी।

24 फरवरी की दोपहर में जिस पहले व्यक्ति का शव मिला था, वह था दिलबर नेगी। उसके हाथ-पैर काट दिए गए थे और राजधानी स्कूल के सामने स्थित अनिल स्वीट्स में उसे जला दिया गया था।    

हिंसा के दौरान भयावह नज़ारा सामने आया शिव विहार चौराहे स्थित राजधानी स्कूल की छत से। इस स्कूल के मालिक का नाम है फैजल फारुख। इस स्कूल की छत से संप्रदाय विशेष की भीड़ ने गोलियाँ चलाई, एसिड की बोतलें फेंकी और पत्थर भी चलाए। दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के मामले में जो पहली चार्जशीट दायर की गई थी, उसका संबंध राजधानी स्कूल में हुई हिंसा की घटनाओं और 24-25 फरवरी के दिन हुई घटनाओं से भी था। इस मामले में यतेन्द्र शर्मा ने शिकायत दर्ज कराई थी जो की डीआरपी स्कूल के मालिक हैं। डीआरपी स्कूल, राजधानी स्कूल के ठीक बगल में स्थित था। 

गले का निशान तिरछा क्यों नहीं? Ligature strangulation क्यों खारिज? निशान कुर्ता से क्यों? AIIMS के डॉक्टरों के सवाल

मृत्यु के बाद सुशांत सिंह राजपूत की गर्दन पर दिखे निशान को लेकर हो रही चर्चा अब सीबीआई जाँच तक पहुँच गई है। AIIMS के डॉक्टरों की टीम ने इस सम्बन्ध में कूपर हॉस्पिटल के उन डॉक्टरों से जवाब माँगा है, जिन्होंने सुशांत सिंह राजपूत का पोस्टमॉर्टम किया था। एम्स के तीन डॉक्टरों की टीम ने कूपर हॉस्पिटल के डॉक्टरों से पूछताछ की। एम्स के डॉक्टरों ने इस दौरान सुशांत के गले में बने निशान को लेकर भी सवाल दागे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सवाल यहाँ अटका हुआ है कि सुशांत के गले में दिखे जख्म के निशान उनके गले के बीच में थी और एकदम सीधी रेखा की तरह दिखाई दे रही थी। जबकि अगर कोई व्यक्ति इस तरह से आत्महत्या करता है तो ये निशान तिरछा बनता है और गर्दन के ऊपर होता है। साथ ही ये खरोंच की तरह भी दिखता है। एम्स के 3 डॉक्टरों की टीम ने सुशांत का पोस्टमॉर्टम करने वाली 5 डॉक्टरों की टीम से इस बाबत सवाल-जवाब किया।

साथ ही ये सवाल भी पूछा गया कि पोस्टमॉर्टम में Ligature strangulation की आशंका को कैसे ख़ारिज कर दिया गया? साथ ही गले पर के निशान कुर्ता से कैसे पैदा हो सकते हैं, ये भी पूछा गया। बताया गया था कि सुशांत सिंह राजपूत ने कुर्ते को ही फाँसी का फंदा बना कर आत्महत्या की थी। कई तथ्यों के आधार पर इसे हत्या कहा जा रहा है, इसे नकारने के लिए कूपर हॉस्पिटल के डॉक्टरों के पास क्या सबूत हैं, ये भी पूछा गया।

एम्स के डॉक्टर टी मिल्लव, डॉ आदर्श कुमार और डॉ अभिषेक यादव मुंबई में पोस्टमॉर्टम से जुड़े तथ्यों की तहकीकात करने के लिए मुंबई पहुँचे हुए हैं। इन डॉक्टरों को घटनास्थल और पोस्टमॉर्टम वाली जगह पर जाने का अधिकार दिया गया है। इन्होंने मॉर्चरी के कर्मचारियों से भी पूछताछ की है। 3 दिन मुंबई में रह कर जाँच करने के दौरान क्या निकला, इस बारे में उन्होंने आधिकारिक रूप से कुछ सार्वजनिक नहीं किया है।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत का मामला बॉलीवुड और भारत से निकल कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन रहा है। ब्रिटेन में मल्टीप्लेक्सों के सामने सितम्बर 14, 2020 को बड़े विरोध-प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है। प्रदर्शन की तैयारी कर रहे लोगों का कहना है कि ब्रिटेन में ऐसा कर वे बॉलीवुड को सन्देश देना चाहते हैं कि वो जनता ही है, जिसने उन लोगों को यहाँ तक पहुँचाया है। बॉलीवुड के लोग भगवान नहीं हैं, ये उन्हें याद रखना चाहिए। 

‘अगर वह लड़की महाराष्ट्र से माफी माँगती है तो…’ – कंगना रनौत पर ‘हरामखोर’ गाली वाले संजय राउत का बयान

सुशांत सिंह मामले को हत्या और गहरी साजिश बताने वाले लोगों पर लगातार महाराष्ट्र सरकार पलटवार करते हुए नजर आ रही है। इसी बीच बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत और शिवसेना नेता संजय राउत के बीच जुबानी जंग लगातार तेज होती जा रही है। वहीं राउत अब कंगना को गाली (हरामखोर) देने के बाद उन्हें धमकी देने पर उतारू हो गए हैं।

कंगना के महाराष्ट्र पुलिस और सरकार पर दिए गए बयान से संजय राउत इतना बौखला गए हैं कि वह कब क्या बोल रहे, उन्हें खुद भी नहीं पता। राउत ने अब सोशल मीडिया के जरिए कंगना पर निशाना साधा है। माना जा रहा है कि उन्होंने ट्वीट के जरिए कंगना को धमकाने की कोशिश की है।

राउत ने ट्वीट किया, “मेरी हिम्मत को परखने की गुस्ताखी न करना, पहले भी कई तूफानों का रुख मोड़ चुका हूँ”।

वहीं शिवसेना नेता संजय राउत ने कंगना पर दिए गए अपने किसी भी बयान पर माफी माँगने से साफ इनकार कर दिया है। अभिनेत्री के साथ किए गए गाली गलौच को लेकर राउत ने मीडिया से कहा, “अगर वह लड़की महाराष्ट्र से माफी माँगती है तो मैं माफी माँगने के बारे में सोचूँगा।” उन्होंने आगे कहा,”‘वह मुंबई को मिनी पाकिस्तान कहती है। क्या उसमें हिम्मत है कि वह यही बात अहमदाबाद के लिए कह दे?”

गौरतलब है कि शनिवार (सितंबर 5, 2020) को संजय राउत ने सारी हदें पार करते हुए कैमरे के सामने कंगना रनौत को गाली (हरामखोर) दे दी। इससे पहले शिवसेना के एक विधायक ने कंगना की टाँग तोड़ने की धमकी दी थी। न्यूज़ नेशन रिपोर्टर द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या वह कंगना रनौत को मुंबई में प्रवेश से रोकने के लिए गैरकानूनी कदम उठाएँगे, संजय राउत ने जवाब दिया, “महाराष्ट्र सिर्फ शिवसेना की जागीर नहीं है, सभी पार्टियों की है। हम सब मिल कर तय करेंगे।”

जब रिपोर्टर ने यह पूछा कि क्या वह कानून के खिलाफ कोई कदम उठाएँगे, संजय राउत ने कहा, “क्या होता है कानून? उस लड़की ने जिस तरह से बात किया, क्या वह कानून के लिए सम्मान था? आप क्या उस ‘हरामखोर’ लड़की की वकीली कर रहे हैं। जिसने शिवाजी महाराज का अपमान किया, जिसने महाराष्ट्र का अपमान किया है, आपका चैनल उसकी तरफदारी कर रहा है।”

उल्लेखनीय है कि संजय राउत की हर टिप्पणी पर कंगना ने मुंहतोड़ जवाब देने की कोशिश की है। कंगना रनौत ने राउत का जवाब देते हुए ट्वीट कर लिखा, “2008 में मूवी माफिया ने मुझे एक साइको घोषित कर दिया था। इतना ही नहीं 2016 में उन्होंने मुझे एक चुड़ैल कहा और 2020 में महाराष्ट्र के मंत्री ने मुझे हरामखोर लड़की का खिताब दिया। इन सभी लोगों ने मेरे साथ ऐसा इसलिए किया क्योंकि मैंने कहा कि एक हत्या के बाद मैं मुंबई में असुरक्षित महसूस करती हूँ। इस वक्त डिबेट करने वाले योद्धा कहाँ हैं?”

सेना से चिढ़ने वाले लिबरल गैंग अब रिया के पिता के आर्मी बैकग्राउंड की दे रहे दुहाई: क्या है डर, किसका साध रहे हित?

नार्कोटिक्स कण्ट्रोल ब्यूरो (NCB) ने रिया चक्रवर्ती के भाई शौविक चक्रवर्ती और सुशांत सिंह राजपूत के हाउस मैनेजर रहे सैमुअल मिरांडा को गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद रिया के पिता इंद्रजीत चक्रवर्ती ने बयान जारी किया है। इसके बाद से लिबरल गैंग ने रिया के पिता के आर्मी बैकग्राउंड से होने को भुनाना शुरू कर दिया है। इसमें राजदीप सरदेसाई और स्वरा भास्कर जैसे लोग लग भी गए हैं, जो ‘विक्टिम कार्ड’ को नए रूप में पेश कर रहे हैं।

इंद्रजीत चक्रवर्ती ने ‘इंडिया टुडे’ को ये बयान दिया, जिसे फैलाने में लिबरल गैंग के लोग जी-जान से जुट गए। ‘इंडिया टुडे/आजतक’ ने ही रिया चक्रवर्ती का भी इंटरव्यू लिया था, जिसके बाद चैनल के बॉयकॉट के लिए लोगों ने अभियान चलाया था। राजदीप सरदेसाई और राहुल कँवल जैसे पत्रकारों ने रिया के इंटरव्यू में कही गई बातों को काट-काट कर सोशल मीडिया पर खूब फैलाया। वो लोग अभी भी रिया के लिए सहानुभूति बटोरने में लगे हुए हैं।

रिया के पिता इंद्रजीत चक्रवर्ती ने कहा कि उनका परिवार मध्यम वर्गीय है, उनके बेटे को गिरफ्तार किया ही जा चुका है, अब उनकी बेटी को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ‘न्याय’ के नाम पर एक मध्यमवर्गीय परिवार को बर्बाद कर दिया गया और इसमें सब कुछ जायज बताया जा रहा है। ‘बधाई हो भारत’ कहते हुए उन्होंने अपनी बात रखी। उन्होंने ‘जय हिन्द’ से अपनी बात ख़त्म की। इसके बाद राजदीप ने उनके कर्नल होने और सेना ने रिटायर होने की बात को हाइलाइट किया।

लेकिन, यही राजदीप जैसे लोग तो चिल्ला-चिल्ला कर कहते हैं कि भाजपा समर्थक और हिंदुत्ववादी लोग बात-बात में सेना को घुसा देते हैं। अब क्या ज़रूरत आन पड़ गई कि उन्हें एक ऐसे व्यक्ति को बचाने के लिए उसके पिता के सेना में होने (भूतपूर्व ही सही) की दुहाई देनी पड़ रही है, जो तीन-तीन केंद्रीय एजेंसियों की रडार पर है। ये मामला ड्रग्स से जुड़ा है, सुशांत की मौत से जुड़ा है और रुपयों के लेनदेन से जुड़ा है- बावजूद इसके आरोपित के बचाव में उसके पिता के सेना में होने का तर्क?

ऐसे ही अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने लिखा कि ये दिल तोड़ने वाला है। उन्होंने शायद ही सुशांत सिंह राजपूत के पिता के लिए अफ़सोस जताया हो, जिनके जवान बेटे की मौत हो गई और उन्हें पता ही नहीं है कि मौत का कारण क्या था? उन्होंने आरोप लगाया कि लोग दूसरों को दर्द में देख कर आनंद ले रहे हैं, जिसके लिए उन्हें शर्म करना चाहिए। यहाँ बताना ज़रूरी है कि इसमें सुशांत के परिवार के दर्द की बात नहीं की जा रही है, उनकी नजर में वो लोग पीड़ित नहीं हैं।

जब खबर आ रही है कि बॉलीवुड के 14 बड़े नामों की चर्चा ड्रग्स के लेनदेन में हो रही है, ऐसे में इन लोगों के डर का कारण क्या है? आखिर एनसीबी की कार्रवाई से ये लोग क्यों डरे हुए हैं? ऊपर से जहाँ मामला करोड़ों और लाखों के लेनदेन का हो, वहाँ आरोपित और उसका परिवार मध्यम वर्गीय कैसे हुआ? फिर भारत ने एक मध्यम वर्गीय परिवार को कैसे बर्बाद कर दिया, जैसा कि दावा किया जा रहा है। रिया के समर्थन में इनका क्या हित है?

राजदीप जैसे लोग ही लिखते हैं कि आर्मी वाले भी तो ‘जॉब ही करते हैं’, और फिर राजदीप जैसे ही लोग किसी पिता को उसके आर्मी से होने के कारण उसके आरोपित बाल-बच्चों को संत की तरह दिखाना चाहते हैं। बेटा-बेटी ड्रग्स रैकेट का हिस्सा हो या उसमें शामिल होने का आरोप हो तो इसमें ‘बधाई हो भारत’ का एंगल कहाँ से आता है? इसी तरह रोहिणी सिंह, ज़ेबा वारसी और चैती नरूला जैसे लोगों ने भी इस मामले को ‘देशभक्ति’ से जोड़ कर दिखाने के चक्कर में इस ट्वीट को शेयर किया।

अगर राजदीप और स्वरा जैसों को डर नहीं है तो फिर वो लोग इतनी बेचैनी में क्यों हैं और रिया के पिता के आर्मी बैकग्राउंड को भुना कर लोगों की सहानुभूति बटोरने में क्यों लगे हुए हैं? किसी आरोपित के घर जाकर इंटरव्यू लेने वाले व्यक्ति से और अपेक्षा भी क्या की जा सकती है। अब जब रिया चक्रवर्ती पर गिरफ़्तारी की तलवार लटक रही है, ऐसे में इससे ऐन पहले माहौल बनाने की साजिश के पीछे कोई न कोई मंशा तो ज़रूर है।