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भारत को ‘इस्लामिक देश’ में बदलना चाहता था दिल्ली दंगों का आरोपित आसिफ़ इक़बाल तन्हा: अदालत ने खारिज की जमानत

हाल ही में दिल्ली दंगों एक आरोपित आसिफ़ इक़बाल तन्हा ने दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के सामने स्वीकार किया था कि वह भारत को इस्लामिक मुल्क में तब्दील करना चाहता था। बुधवार 2 सितंबर 2020 को दिल्ली की एक अदालत ने आसिफ़ की जमानत खारिज कर दी थी। आसिफ़ जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय का छात्र है और साल 2014 से स्टूडेंट इस्लामिक आर्गेनाईजेशन (SIO) का सदस्य भी है। 

आसिफ़ पर फरवरी महीने में उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों की साज़िश रचने और उनमें शामिल होने का आरोप है। जिसके बाद उसे गैर क़ानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) संशोधन विधेयक (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया गया था। इस मामले की सुनवाई करते हुए एडिशनल सेशन जज अमिताभ रावत ने कहा कि प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर इतना स्पष्ट है कि आसिफ़ षड्यंत्र रचने से लेकर चक्का जाम की गतिविधि में शामिल था। इन दो घटनाओं की वजह से उत्तर पूर्वी दिल्ली में दंगों की रफ़्तार अनियंत्रित हुई। इस मामले के एक अहम गवाह ने बयान दिया है कि आसिफ़ दंगों की साज़िश रचने वाले मुख्य लोगों में शामिल था। 

घटना के संबंध में गवाहों के बयान विस्तृत न होने के चलते न्यायाधीश ने कहा, “वर्तमान हालातों में गवाहों की विश्वसनीयता को यूँ ही नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है। गवाहों ने अपने बयान में जिस तरह दिल्ली दंगों में आसिफ़ और अन्य की भूमिका का उल्लेख किया है। उसके आधार पर मुझे यह बात कहने में ज़रा भी संकोच नहीं है कि ऐसी तमाम वजहें हैं जिनके आधार पर लगाए गए आरोपों को प्राथमिक रूप से सत्य माना जाएगा।”

इस मामले में अमिताभ रावत ने कहा कि भारतीय संविधान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है लेकिन उस स्वतंत्रता का भी एक दायरा है। अदालत ने अपने आदेश में कहा पूरे घटनाक्रम में उल्लेखनीय है कि जिस तरह असहमति जताई गई है। उससे इतना ज़रूर साफ़ होता है कि घटना के पीछे किसी न किसी तरह की साज़िश ज़रूर है। अदालत ने इन आरोपों का ज़िक्र करते हुए कहा ऐसी गतिविधि जिससे देश की एकता पर प्रभाव पड़े। किसी की जान को ख़तरा हो या कोई घायल हो, सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान हो या लोगों के मन में दहशत फैले। इस तरह की सभी गतिविधियाँ यूएपीए की धारा 15 और 18 के दायरे में आती हैं। इसलिए आरोपित पर यूएपीए के यह प्रावधान लगाए जा रहे हैं। 

अदालत ने यह भी कहा, “क्योंकि मामला दंगों की साज़िश से जुड़ा हुआ है इसलिए बयान और सबूत पूरी तरह पढ़े और समझे जाएँगे। इस तरह दावे भी किए गए थे कि आरोपित किसी भी तरह की हिंसा में खुद शामिल नहीं हुआ था लेकिन ऐसे दावे के आधार पर इस बात को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है कि आसिफ़ समेत कई लोगों ने खुद पूरे दंगों का षड्यंत्र रचा।”

ख़बरों के अनुसार आसिफ़ ने यह बात मानी कि उसने पहले दंगों को बढ़ावा दिया। इसके बाद उसने जामिया मिलिया इस्लामिया के गेट नंबर 7 से निकली 2500-3000 लोगों की भीड़ को दिशा निर्देश दिए। दोनों घटनाएँ 12 दिसंबर की हैं। आसिफ़ ने यह बात भी मानी कि शर्जील इमाम ने 13 दिसंबर को भड़काऊ भाषण दिए। जिससे प्रदर्शन में शामिल हुए लोग चक्काजाम करें। 

आसिफ़ ने 15 दिसंबर को गाँधी पीस मार्च का आयोजन कराने की बात भी स्वीकार की। यह मार्च जामिया मेट्रो स्टेशन से शुरू हुई फिर जाकिर नगर और बाटला हाउस होते हुए संसद तक चली। उसने इस मार्च का नाम महात्मा गाँधी इसलिए रखा जिससे मार्च में ज़्यादा भीड़ इकट्ठा हो। दिल्ली पुलिस ने सूर्या होटल के पास बैरीकेडिंग तक लगा दिए थे जिससे प्रदर्शनकारियों को वहीं पर रोका जा सके। 

इसके बाद आसिफ़ ने माना कि उसने प्रदर्शनकारियों को बैरीकेडिंग तोड़ने के लिए भी भड़काया और कहा कि पुलिस के पास उन्हें रोकने की हिम्मत नहीं है। लेकिन वह अपने इरादों में कामयाब नहीं हो पाया क्योंकि पुलिस ने भीड़ को अलग करने के लिए लाठी चार्ज कर दिया। इसके बाद जामिया के छात्रों ने पत्थर चलाना शुरू कर दिया, बसों में आग लगाई और दिल्ली की सड़कों पर निर्दोष लोगों से हाथापाई की। जिसकी वजह से पुलिस वाले और प्रदर्शनकारी दोनों ही घायल हुए था।  

अंत में आसिफ़ इक़बाल ने यह भी बताया कि उसने देश के कई शहरों में भड़काऊ भाषण दिए। जिसमें कोलकाता, लखनऊ, कोटा, इंदौर, कानपुर, उज्जैन, जयपुर, पटना, सब्ज़ीबाग़ अररिया, समस्तीपुर और अहमदाबाद जैसे शहर शामिल हैं। उसने संप्रदाय विशेष के लोगों से इस बात का निवेदन किया वह बड़े पैमाने पर विरोध करें और हिंसा की ज़रूरत पड़ने पर हिंसा भी करें। उसने कहा कि सड़क पर चक्का जाम करने की बात जेएनयू के एक्टिविस्ट उमर खालिद ने कही थी। 

सारी योजनाएं ठीक उस दौरान तैयार की गई थीं जब डोनाल्ड ट्रंप भारत यात्रा पर थे। इस पूरी योजना को अंजाम देने वालों में मीरान हैदर और सफूरा ज़रगर अहम नाम थे जिसके वजह से बाद में हिंसात्मक दंगे हुए थे। आसिफ़ भारत को न सिर्फ इस्लामिक देश में बदलना चाहता था बल्कि उसका कहना था कि सीएए संप्रदाय विशेष के लोगों का विरोधी है। नतीजतन उसने जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ मिल कर साज़िश रची। 

इंडिया टुडे का दावा- CBI ने हत्या की आशंका को किया खारिज, CBI ने कहा- फर्जी अटकलें न चलाए मीडिया

हाल ही में समाचार चैनल ‘इंडिया टुडे’ ने दावा किया था कि तीन सीबीआई अधिकारियों ने उन्हें कथित तौर पर सूचित किया है कि 34 वर्षीय अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत में किसी भी तरह का कोई ‘मर्डर एंगल’ यानी, हत्या का मामला नहीं है। लेकिन केंद्रीय जाँच एजेंसी (सीबीआई) ने ऐसे सभी दावों को खारिज कर दिया है।

मंगलवार (सितम्बर 02, 2020) को, इंडिया टुडे ने एक एक्सक्लूसिव समाचार रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसका शीर्षक था, “विशेष: सीबीआई अधिकारियों ने इंडिया टुडे को बताया – सुशांत सिंह राजपूत मामले में हत्या का कोई सबूत नहीं, जाँच अभी भी जारी।”

इंडिया टुडे ने तीन अनाम सीबीआई अधिकारियों का हवाला देते हुए इस रिपोर्ट में दावा किया कि जाँच एजेंसी को कोई भी ऐसा सबूत नहीं मिला है, जो अभिनेता की मौत में हत्या की संभावना को साबित कर सके।

इंडिया टुडे का दावा – सीबीआई अधिकारियों को नहीं मिला हत्या का कोई सबूत

इस रिपोर्ट में जोर देकर कहा गया है, “जाँच करने वाली टीम के अनुसार, कोई भी फॉरेंसिक रिपोर्ट, प्रमुख संदिग्धों के बयान या घटनास्थल के साक्ष्य इस बात को प्रमाणित नहीं करते हैं कि सुशांत सिंह की हत्या हुई थी।”

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘जबकि सीबीआई ने आधिकारिक तौर पर ‘हत्या’ की जाँच को ‘बंद’ नहीं किया है, अधिकारियों ने ‘आत्महत्या के नजरिए’ की जाँच करने पर ध्यान केंद्रित किया है।

इंडिया टुडे के इस एक्सक्लूसिव लेख में दोहराया गया है, “सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि वे आत्महत्या के कोण पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और यह जाँच कर रहे हैं कि उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाया गया या नहीं।”

इंडिया टुडे की विशेष रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

CBI ने इंडिया टुडे के दावों को खारिज किया है

इंडिया टुडे द्वारा अपनी ’एक्सक्लूसिव’ रिपोर्ट प्रकाशित करने के दो दिन बाद, केंद्रीय जाँच ब्यूरो ने बृहस्पतिवार (सितम्बर 03, 2020) को एक बयान जारी कर इंडिया टुडे के दावों को खारिज कर दिया और कहा कि किसी भी प्रवक्ता या टीम के सदस्य द्वारा मीडिया द्वारा चलाए जा रहे ‘खोजी डिटेल्स’ को साझा नहीं किया गया है। उन्होंने दोहराया कि कोई भी डिटेल शेयर नहीं की गई हैं।

सीबीआई के बयान के अनुसार, “सीबीआई सुशांत सिंह राजपूत की मौत से संबंधित व्यवस्थित और पेशेवर तरीके से जाँच कर रही है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स, जो सीबीआई के हवाले से बताई जा रही हैं, सिर्फ अटकलें हैं और तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। यह दोहराया गया है कि हमारी पॉलिसी के अनुसार, सीबीआई जाँच का विवरण शेयर नहीं करती है। सीबीआई के प्रवक्ता या किसी भी टीम के सदस्य ने मीडिया के साथ जाँच का कोई विवरण शेयर नहीं किया है। सीबीआई के नाम से चलाई जा रही मीडिया रिपोर्ट्स विश्वसनीय नहीं हैं। मीडिया से अनुरोध है कि सीबीआई के हवाले से खबर चलाने से पहले सीबीआई प्रवक्ता से इसकी पुष्टि करें।”

इंडिया टुडे ने रिया के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू प्रसारित कर कहा था कि सुशांत मानसिक रूप से अस्वस्थ थे

इससे पहले, इंडिया टुडे ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत में रिया चक्रवर्ती की कथित भूमिका को व्हाइट वॉश करने के लिए मुख्य आरोपित रिया चक्रवर्ती का इंटरव्यू चलाया। इस इंटरव्यू और इसके बाद के कई समाचारों के दौरान, यह चैनल इस बात पर जोर देता रहा है कि सुशांत सिंह मानसिक रूप से बीमार थे और इस कारण यह आत्महत्या का ही मामला है।

हाल ही में, इंडिया टुडे ने रिया चक्रवर्ती की पीआर टीम की तरह काम करते हुए एक लेख प्रकाशित किया था, जिसका शीर्षक था, “विशेष: आगरा से रिया चक्रवर्ती की स्कूल फोटो, शिक्षकों का कहना है कि वह एक प्रतिभाशाली छात्रा थी।”

हालाँकि, अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती के स्कूली जीवन का सुशांत के मामले से कोई लेना-देना नहीं था, फिर भी, इंडिया टुडे द्वारा आरोपित के बचाव में एक भावनात्मक अपील करने के लिए इस प्रकार की कहानी को प्रकाशित किया गया।

पश्चिम बंगाल में BJP कार्यकर्ता की हिरासत में पिटाई से मौत: धरने पर बैठे पार्टी के लोग, पुलिस पर लगाया हत्या का आरोप

पश्चिम बंगाल के दिनाजपुर जिले स्थित रायगंज इलाके में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता अनूप रॉय की मृत्यु हो गई। यह घटना गुरूवार 3 सितंबर 2020 की है। पार्टी के लोगों का आरोप है कि इस मौत के लिए पुलिस ज़िम्मेदार है। उनका कहना है कि पुलिस ने कार्यकर्ता की पिटाई की और उसके बाद गोली मार दी। इस मौत के विरोध में भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान बंगाल भाजपा प्रमुख दिलीप घोष भी मौजूद थे। 

दिलीप घोष ने आरोप लगाया है कि अनूप रॉय को पहले पीटा गया। अंत में पुलिस ने उन्हें गोली मार दी जिससे उनकी मृत्यु हो गई। घोष का कहना है कि यह मृत्यु नहीं है बल्कि हत्या है। इस मामले की स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए और आरोपितों को दंड मिलना चाहिए। वहीं पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक़ अनूप रॉय के शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं मौजूद हैं। घटना के विरोध में दिलीप घोष समेत भारतीय जनता पार्टी के कई कार्यकर्ता रायगंज में धरने पर भी बैठे। इस विरोध प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं के अलावा अनूप रॉय के परिवार वाले भी मौजूद थे।

इसके अलावा भाजपा ने इस घटना पर कई तरह के सवाल भी खड़े किए हैं। उनका कहना है कि हत्या के महज़ 3 घंटे बाद ही क्यों पोस्टमार्टम कर दिया गया। इसके अलावा भाजपा का यह भी कहना था पुलिस ने अनूप को बुरी तरह प्रताड़ित भी किया था, उस पर ऐसा अत्याचार किया गया जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती है। पश्चिम बंगाल की न्याय और क़ानून व्यवस्था दिन प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। इसके अलावा मृतक की माँ ने भी पुलिस को पत्र लिख कर कई अहम बातें कही हैं, उनके मुताबिक़ पोस्टमार्टम सही से नहीं किया गया है। वह इस गलत पोस्टमार्टम रिपोर्ट को स्वीकार नहीं करेंगी।

दरअसल, दिनाजपुर जिले के रायगंज क्षेत्र में डकैती की एक घटना हुई थी। इस घटना के संबंध में स्थानीय पुलिस ने 24 वर्षीय अनूप रॉय को पूछताछ के लिए बुलाया था। मामले पर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का यह कहना है ‘डकैती की जानकारी मिलने पर हमने कुल 4 लोगों को गिरफ्तार किया था। उन लोगों ने अनूप रॉय का नाम लिया जिसके बाद हमने पूछताछ के लिए उसे भी तलब किया। वह थाने में पहुँचते ही बेहोश हो गया, उसकी यह हालत देखने के बाद हम उसे एक सरकारी अस्पताल लेकर गए। जहाँ उसे कुछ समय बाद मृत घोषित कर दिया गया। शरीर को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया जहाँ इस बात का खुलासा हुआ कि अनूप की मृत्यु मस्तिष्क की नस फटने की वजह से हुई है।’    

मृतक अनूप रॉय भारतीय जनता पार्टी की स्थानीय ईकाई का कार्यकर्ता था। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के अलावा अनूप के परिवार वालों ने भी मामले की स्वतंत्र जाँच की माँग उठाई है। वहीं तृणमूल कॉन्ग्रेस ने भी इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखा है। पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ता के अग्रवाल ने कहा कि इस घटना का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। 

पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ होने वाली हिंसा की यह पहली घटना नहीं है। इसके पहले भी ऐसी तमाम घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। हाल ही में कथित तौर पर तिरंगा फहराने को लेकर हुए विवाद में बीजेपी के एक कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई थी। घटना हुगली के आरामबाग स्थित खनकुल में हुई थी। सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के गुंडों पर हमला करने का आरोप था।

मृतक भाजपा कार्यकर्ता का नाम सुदर्शन प्रमाणिक था। उन पर झंडोत्तोलन के दौरान गुंडों ने धारदार हथियारों से हमला किया था। उन्हें स्थानीय हेल्थ सेंटर ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस हत्याकांड के बाद क्षेत्र में काफी तनाव के हालात भी बने थे। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं ने विरोध-प्रदर्शन भी किया था। 

तृणमूल कॉन्ग्रेस पर भारत के राष्ट्रीय ध्वज का विरोध करने के आरोप लगाए गए थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शनिवार (अगस्त 15, 2020) को दौलतचक में भाजपा और तृणमूल के कार्यकर्ता झण्डा फहरा रहे थे। अचानक सुबह 9 बजे दोनों के बीच संघर्ष शुरू हो गया। बाद में संघर्ष हिंसक हो गया। स्थानीय लोगों का तो यहाँ तक कहना है कि बमबारी भी शुरू हो गई थी। इसी दौरान सुदर्शन प्रमाणिक पर हमला किया गया और वे जमीन पर गिर पड़े।

UP के किसी भी प्रोजेक्ट में टेंडर नहीं डाल पाएगी कोई भी चीनी कम्पनी: योगी सरकार ने सभी विभागों को जारी किया आदेश

गलवान घाटी में भारत-चीन सीमा पर चीनी सेना द्वारा दोबारा शुरू की गई खुराफात के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने फैसला लिया है कि अब चीन की कोई भी कंपनी उत्तर प्रदेश के किसी सरकारी प्रोजेक्ट में टेंडर नहीं डाल पाएँगी। योगी आदित्यनाथ सरकार ने सभी विभागों से इस पर प्रतिबंध लगाने को कहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार की नजर उन जापानी, अमेरिकी और यूरोपिय कंपनियों पर है, जो अब चीन से बाहर निकलने की सोच रही हैं।

इस आदेश के अंतर्गत, सरकारी खरीद में कुछ निश्चित देशों के बिडर्स या कंपनियों के शामिल होने पर रोक के संबंध में सभी विभागों से आवश्यक कार्यवाही करने को कहा गया है। इस मामले में योगी सरकार की ओर से प्रदेश के सभी विभागों को एक पत्र भेजा गया है।

इस आदेश में पीपीपी यानी, पब्लिक, प्राइवेट पार्टनरशिप वाली परियोजनाएँ, राज्य द्वारा संचालित परियोजनाएँ, सार्वजनिक उपक्रम और निगमों के साथ ही स्थानीय निकायों की परियोजनाएँ और सरकारी खरीद भी शामिल हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले से निपटने के लिए अब प्रदेश सरकार एक सक्षम प्राधिकरण तैयार करेगी। इस प्राधिकरण के तहत संबंधित देशों की कंपनियों को रजिस्ट्रेशन कराना होगा। पहले इन कंपनियों को रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय से राजनीतिक सहमति के अलावा गृह मंत्रालय से सुरक्षा संबंधी अनुमति लेनी होगी। इसके बाद ही रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू होगी।

हर तीन माह के अंतराल पर राज्य की ओर से एक रिपोर्ट इस कंपनी को लेकर केंद्र को भेजी जाएगी। प्राधिकरण के पास इस बात का विवरण रहेगा कितनी कंपनियों के आवेदन आए, कितनों के निरस्त किए गए और कितने आवेदन मंजूर किए गए। केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा व देश की रक्षा के लिए इस तरह के कदम उठाए गए हैं। 

गौरतलब है कि गत मई माह से ही चीन द्वारा गलवान घाटी में की जा रही घुसपैठ के चलते केंद्र सरकार भी कई बड़े चीनी प्रोजेक्ट्स को रद्द कर चुकी है। इसके अलावा भारत सरकार ने सुरक्षा और गोपनीयता का हवाला देते हुए कुछ ही दिन पहले 118 मोबाइल ऐप पर प्रतिबंध लगाया है, जिसमें PUBG भी शामिल है। इसके पहले चरण में भारत सरकार ने 59 मोबाइल ऐप पर प्रतिबंध लगाया था।

रिया चक्रवर्ती और सैमुएल मिरांडा के घर छापा: मिरांडा को NCB ने हिरासत में लिया, शौविक चक्रवर्ती को भेजा समन

सुशांत सिंह राजपूत मामले में नार्कोटिक्स ब्यूरो की तरफ से बड़ी कार्रवाई की गई। नार्कोटिक्स ब्यूरो इस मामले में ड्रग्स के पहलू पर जाँच कर रही है इसी कड़ी में आज रिया चक्रवर्ती के घर में छापेमारी की है। रिया के घर में लगभग 3 घंटे से पूछताछ जारी है और इसके अलावा सैमुएल मिरांडा के घर भी छापेमारी हुई। सैमुएल के घर कई घंटे चली छापेमारी के बाद नार्कोटिक्स ब्यूरो सैमुएल मिरांडा को हिरासत में ले लिया है। साथ ही रिया के भाई शौविक चक्रवर्ती को भी NCB ने समन भेजा है।

ख़बरों के मुताबिक़ नार्कोटिक्स ब्यूरो ने मामले के इस पहलू पर जाँच करते हुए रिया के घर से कई अहम सबूत भी इकट्ठा कर लिए हैं। नार्कोटिक्स ब्यूरो की एक और टीम ने सैमुएल मिरांडा के घर भी छापेमारी की। आज (4 सितंबर 2020) को सुबह के लगभग 6:30 बजे NCB की टीम छापा मारने के लिए रिया चक्रवर्ती के घर पहुँची। छापा मारने वाले नार्कोटिक्स ब्यूरो के इस समूह में कुल 8 सदस्य हैं और उनके साथ मुंबई पुलिस के लोग भी मौजूद हैं। 

वहीं रिया के घर जारी छापेमारी के समानांतर नार्कोटिक्स ब्यूरो की एक और टीम ने सैमुएल मिरांडा के घर छापा मारा है। कई घंटे चली छापेमारी के बाद एनसीबी सैमुएल मिरांडा को अपने साथ हिरासत में लेकर गई। फिलहाल रिया चक्रवर्ती के घर पर खोजबीन जारी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नार्कोटिक्स ब्यूरों के अधिकारियों द्वारा यह कार्रवाई ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट (NDPS) के तहत की जा रही है। नार्कोटिक्स ब्यूरो के डिप्टी डायरेक्टर केपीएस मल्होत्रा इस अभियान की अगुवाई कर रहे हैं। 

अभी तक सामने आई ख़बरों के मुताबिक़ इस अभियान के दौरान रिया चक्रवर्ती के पास मौजूद लैपटॉप और हार्ड डिस्क खँगालें जा रहे हैं। छापेमारी के बाद नार्कोटिक्स ब्यूरो NDPS अधिनियम की धारा 67 के तहत एक समन भी भेज सकता है। इसके अलावा नार्कोटिक्स ब्यूरो ने जिन तीन आरोपित ड्रग सप्लायर्स को गिरफ्तार किया है उनमें से दो अब्दुल बासित परिहार और जैद विलात्रा का शोविक से कनेक्शन सामने आया है। दोनों आरोपित शोविक और सैमुएल मिरांडा के साथ मिल कर काम करने की बात कह चुके हैं।

हाल ही में नार्कोटिक्स ब्यूरो ने जैद विलात्रा और बासित परिहार नाम के दो संदिग्ध ड्रग पेडलर गिरफ्तार किए थे। जिसमें जैद विलात्रा ने पूछताछ के दौरान कई बड़े नामों का ज़िक्र किया था। गुरूवार 3 सितंबर को जैद विलात्रा अदालत में भी पेश किया गया था इसके बाद नार्कोटिक्स ब्यूरो ने उसे 7 दिन की रिमांड पर लिया। जैद के पास से 9.55 लाख रूपए भी बरामद किए थे। उसने पूछताछ में यह भी बताया था कि मुंबई के जुहू, बांद्रा और लोखंडवाला समेत कई इलाकों में होने वाली पार्टी में ड्रग्स की सप्लाई होती थी।   

PAK की हथियार आपूर्ति बंद करेगा रूस, भारत को दिया हर रक्षा सहयोग में मदद का आश्वासन: चीनी रक्षा मंत्री ने जताई मुलाकात की इच्छा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में हिस्सा लेने के लिए बुधवार (सितम्बर 02, 2020) को रूस की राजधानी मॉस्को पहुँचे। जहाँ रूस में राजनाथ सिंह के समकक्ष ने भारत को यह आश्वासन दिया है कि वह भारत के अनुरोध का पालन करते हुए पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति नहीं करेंगे।

रूस ने भारत को रक्षा मामलों में सहयोग का भी आश्वासन दिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रूस के तीन दिवसीय दौरे पर है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके रूसी समकक्ष जनरल सर्गेई शोइगू के बीच मॉस्को में एक बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि मॉस्को ताजा घटनाक्रम से परिचित है।

इसके साथ ही, भारत और रूस ने अमेठी में एक AK203 असॉल्ट राइफल कारखाने की स्थापना में तेजी लाने और अपने रक्षा उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि यह मेक-इन-इंडिया में रूसी रक्षा उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए एक बहुत ही सकारात्मक आधार प्रदान करता है।

दोनों पक्षों ने ‘AK203 असॉल्ट राइफल’ के उत्पादन के लिए भारत-रूसी संयुक्त उद्यम की स्थापना के लिए चर्चा के अग्रिम चरण का स्वागत किया है। ‘AK203 असॉल्ट राइफल’ को पैदल सेना के लिए सबसे आधुनिक हथियारों में से एक माना जाता है। यह एके-47 राइफल का नवीनतम और सर्वाधिक उन्नत प्रारूप है। यह ‘इंडियन स्मॉल ऑ‌र्म्स सिस्टम’ (इनसास) 5.56 गुना 45 मिमी राइफल की जगह लेगा।

अधिकारियों ने कहा कि राजनाथ सिंह रूसी पक्ष से भारत को एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणालियों की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भी अनुरोध करेंगे। भारत को एस-400 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली की पहले खेप की आपूर्ति 2021 के अंत तक निर्धारित है। जून के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की यह दूसरी मॉस्को यात्रा है।

वहीं, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि भारत-चीन तनाव के बीच रूस की राजधानी मॉस्को में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक से अलग, चीन के रक्षा मंत्री जरनल वे फेंघे (Wei Fenghe) ने भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ मुलाकात की इच्छा जाहिर की है। चीनी पक्ष ने भारतीय मिशन के समक्ष सीमा गतिरोध के सम्बन्ध में यह इच्छा व्यक्त की है।

कुरान फाड़ने के बाद अब अर्मिन नवाबी ने किया हिन्दू देवी का अपमान, लोगों ने कहा- यह नास्तिकता नहीं बलात्कारी मानसिकता है

कुरान के पन्नों पर थूकने और उन्हें फाड़ने के एक दिन बाद एथीस्ट रिपब्लिक के संस्थापक अर्मिन नवाबी ने हिन्दुओं की आस्था को अपमानित करने का काम किया है। अर्मिन नवाबी ने हिन्दुओं की आराध्य माँ काली की एक भद्दी और बेहूदा तस्वीर ट्विटर पर शेयर की है।

अर्मिन नवाबी ने ट्विटर पर माँ काली की एक बेहूदा तस्वीर ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा है, “मैं हिन्दू धर्म से प्यार करने। मुझे पहले नहीं पता था कि तुम्हारी देवियाँ इतनी कामुक हैं। कोई व्यक्ति कोई और धर्म क्यों अपनाएगा?”

जिस तरह से इस तस्वीर में देवी काली को चित्रित किया गया है और अर्मिन नवाबी ने सन्देश दिया है, उस ओर कई लोगों ने आपत्ति जताई है कि यह नास्तिकता नहीं बल्कि बलात्कारी मानसिकता को दर्शाता है। एक अन्य ट्विटर यूजर ने लिखा है कि अर्मिन नवाबी यह सिर्फ इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वह भी जानता है कि उसे हिन्दुओं से कभी भी जान का खतरा नहीं हो सकता। इस ट्विटर यूजर ने लिखा है कि उसे इस बात पर गर्व भी है, और अर्मिन नवाबी अब हिन्दुओं को सिर्फ इसलिए निशाना बना रहा है क्योंकि वह कुरान को अपमानित करने के बाद मुस्लिम्स का ध्यान भटकना चाहता है।

गौरतलब है कि कुछ ही दिन पहले अर्मिन नवाबी, जो कि एक पूर्व ईरानी मुस्लिम और AtheistRepublic.com (एथीस्ट रिपब्लिक) का संस्थापक है, ने मुस्लिमों की पाक किताब कुरान पर थूककर उसे फाड़ दिया था और साथ ही लोगों से अपनी निजी जिम्मेदारी पर ऐसा ही करने की सलाह भी दी थी।

अर्मिन नवाबी ने मंगलवार (सितम्बर 01, 2020) को ट्विटर पर एक वीडियो ट्वीट किया, जिसमें वह कुरान के पन्नों पर थूकते हैं और फिर उसके पन्ने फाड़ देते हैं। इसके साथ ही उन्होंने एक हैशटैग लिखा है – “कुरान का अपमान करो।”

अर्मिन नवाबी का यह ट्वीट ऐसे समय में आया है जब स्वीडन और नॉर्वे मुस्लिमों द्वारा भड़काए गए दंगों का शिकार हुए और इसी समय पर पेरिस की शार्ली एब्दो मैगजीन पर वर्ष 2015 में हुए आतंकी हमले की सुनवाई शुरू हो रही है।

USISPF को मोदी ने आत्मनिर्भर भारत के फायदे गिनाए, कहा- भारत दुनिया के लिए निवेश का सबसे अच्छा केंद्र

पीएम नरेंद्र मोदी आज भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी के लिए कार्य करने वाले गैर लाभकारी संगठन ‘अमेरिका-भारत सामरिक साझेदारी फोरम’ (USISPF) के तीसरे वार्षिक नेतृत्व शिखर सम्मेलन को संबोधित कर रहे हैं।

31 अगस्त से शुरू हुए इस पाँच दिवसीय शिखर सम्मेलन की इस बार की थीम ‘यूएस-इंडिया: नेविगेटिंग न्यू चैलेंजेज़’ (US-India Navigating New Challenges) है। USISPF एक गैर-लाभकारी संगठन है, जो भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी के लिए काम करता है। पीएम मोदी इस कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संबोधित कर रहे हैं।

बृहस्पतिवार (सितम्बर 03, 2020) शाम वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और CDS बिपिन रावत ने भी समिट को सम्बोधित किया। CDS रावत ने USSIPF के कार्यक्रम में भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद को लेकर कहा कि हमें ताजा हालात से निपटने की और आने वाले समय की चुनौतियों से निपटने की तैयारी करने की जरूरत है। इसके साथ ही CDS रावत ने पाकिस्तान को भी चेताते हुए कहा कि किसी भी तरह का दुस्साहस उसके लिए ठीक नहीं होगा।

प्रमुख बातें –

  1. USISPF विविधता से भरे लोगों को एक साथ लेकर आया था। इसका काम प्रशंसनीय है।
  2. जब 2020 शुरू हो रहा था तो किसी ने सोचा नहीं था कि ऐसी महामारी आएगी। जनवरी में हमारे पास कोरोना का 1 टेस्टिंग लैब था, अभी देशभर में 1600 टेस्टिंग लैब हैं। हमारे यहाँ डेथ रेट दुनियाभर के मुकाबले काफी कम है। हम अभी दुनिया के दूसरे सबसे बड़े पीपीई किट के निर्माता हैं।
  3. पूरे कोरोना पीरियड के दौरान लॉकडाउन के समय भारत सरकार का एक ही मकसद था – गरीबों की रक्षा करना। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना पूरे विश्व की सबसे बड़ी समर्थन प्रणाली है। इसके तहत लगभग 800 मिलियन लोगों को खाद्यान्न उपलब्ध करवाया गया।
  4. भारत में 80 करोड़ लोगों को फ्री में अनाज दिया जा रहा है। फ्री कुकिंग गैस 80 मिलियन लोगों को दिया जा रहा है।
  5. महामारी ने कई चीजों के प्रभावित किया है, लेकिन भारत के लोगों की आकांक्षाओं को यह प्रभावित नहीं कर सका है।
  6. वर्तमान स्थिति एक नई मानसिकता की माँग करती है। एक मानसिकता जिसका दृष्टिकोण विकास के लिए मानव केंद्रित हो।
  7. हालिया महीनों में काफी सारे सुधार हुए हैं। इनसे बिजनस को आसान बनाया है। विश्व के सबसे बड़ें हाउसिंग प्रोग्राम पर काम जारी है। रेल, रोड और एयर कनेक्टिविटी को बढ़ाया जा रहा है। इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में काफी काम हो रहा है।
  8. हम बेहतरीन फाइनेंसियल टेक्नॉलजी का इस्तेमाल लोगों तक बैंकिंग, क्रेडिट, डिजिटल पेमेंट और इंश्योरेंस की सुविधा पहुँचाने के लिए कर रहे हैं।
  9. इस महामारी ने दुनिया को दिखाया है कि ग्लोबल सप्लाई चैन को विकसित करने में केवल कॉस्ट ही नहीं बल्कि ट्रस्ट भी महत्वपूर्ण है।
  10. हमारा टैक्स सिस्टम पारदर्शी है। हमारा सिस्टम ईमानदार टैक्सपेयर्स को आगे बढ़ाया है। हमारा जीएसटी एकीकृत है।
  11. भारत अमेरिकी संबंध को और मजबूत करने पर जोर दे रहा है। हमने अपने बैंकिंग सिस्टम को मजबूत किया। आज दुनिया हम पर भरोसा कर रही है। भारत दुनिया के लिए निवेश का सबसे अच्छा केंद्र है।
  12. 1.3 अरब भारतीय ‘आत्मनिर्भर भारत’ के मिशन में जुटे हैं। ‘आत्मनिर्भर भारत’ लोकल और ग्लोबल के साथ मर्ज करता है।
  13. आगे का रास्ता पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर में अवसरों से भरा पड़ा है। इसमें कोर इकनॉनमिक सेक्टर और सोशल सेक्टर भी शामिल है। हाल ही में रेलवे, डिफेंस, स्पेस और अटॉमिक एनर्जी के क्षेत्र को खोला गया।
  14. भारत में चुनौतियों के लिए आपके पास एक सरकार है जो परिणाम देने में विश्वास रखती है जिसके लिए जीवन जीने में आसानी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितना व्यवसाय करने में आसानी। आप एक युवा देश को देख रहे हैं जिसकी 65% आबादी 35 वर्ष से कम है।
  15. 2019 में भारत में FDI 20% बढ़ा, ऐसा ऐसे वक्त में हुआ जब दुनिया में इसमें फीसदी की गिरावट देखी गई है। यह हमारी FDI स्कीम की सफलता को दिखाता है

‘Kill नरेंद्र मोदी’: पीएम की हत्या की रची जा रही साजिश, NIA ने गृह मंत्रालय को सतर्क किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या को लेकर बड़ी साजिश रची जाने की बात सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस संबंध में राष्ट्रीय जॉंच एजेंसी (NIA) ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर आगाह किया है। गृह मंत्रालय ने इससे एसपीजी को अवगत कराया है जिस पर प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी है।

एनआईए को धमकी भरे कुछ ई-मेल मिले हैं। इनमें PM मोदी की हत्या की बात कही गई है। इस ई मेल में 3 शब्द लिखे गए हैं- किल नरेंद्र मोदी (Kill Narendra Modi)। फिलहाल ई-मेल के कंटेंट की जाँच की जा रही है।

टाइम्स नाउ की रिपार्ट के अनुसार, एनआईए ने गृह मंत्रालय एक पत्र लिखकर पीएम मोदी को हत्या वाले ई-मेल की जानकारी दी है। एजेंसी ने अपने पत्र में लिखा, “एनआईए को एक ईमेल आईडी मिली है जिसमें कुछ गणमान्य लोगों की हत्या की बात कही गई है। ई-मेल में मौजूद कंटेंट इसकी तस्दीक करते हैं। इस पत्र के साथ ही ई-मेल की कॉपी भी लगाई गई है। इस मामले में एनआईए ने उचित कार्रवाई करने का अनुरोध भी किया है।

बता दें यह मेल 8 अगस्त को जारी किया गया था। जिसमें सभी सुरक्षा एजेंसियों के खतरे के साथ प्रधानमंत्री के जीवन पर भी सीधे खतरे की बात की गई है। ई-मेल का पता लगने के बाद सुरक्षा एजेन्सियाँ चौकन्नी हो गई हैं। खतरे के मद्देनजर पीएम मोदी की सुरक्षा कवच को बढ़ा दिया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार एनआईए ने इस मामले में अपनी ओर से किसी भी प्रकार से की जाँच नहीं की है। बता दें इस पूरे मामले से गृह मंत्रालय ने एसपीजी को अवगत कराया है। स्पेशल प्रोटक्शन ग्रुप यानी एसपीजी ही पीएम मोदी की सुरक्षा करता है।

एनआईए कई प्रमुख सुरक्षा एजेंसियों के भी संपर्क में है। इनमें रॉ, खुफिया ब्यूरो (आईबी), डिफेंस इंटेलिजेंस के प्रतिनिधि शामिल हैं। गौरतलब है कि यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब पीएम मोदी के प्रति नफरत की राजनीतिक को बढ़ावा दिया जा रहा है। ई-मेल का खुलासा होने के बाद बाहरी तत्वों पर सख्ती से नजर रखी जा रही है। आतंकी हमलों को लेकर सुरक्षा एजेंसियॉं पहले ही अलर्ट कर चुकी हैं।

सुशांत को मानसिक बीमार साबित करना चाहता है इंडिया टुडे? बगैर लाइसेंस वाली मनोवैज्ञानिक का बयान लीक किया

इंडिया टुडे ने एक बार फिर दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत को मानसिक तौर पर अस्वस्थ दिखाने की कोशिश की है। उसने सुशांत के कथित मनोवैज्ञानिक सुसैन वॉकर (Susan Walker) के उन बयानों की रिपोर्ट सार्वजनिक की है, जो वॉकर ने मुंबई पुलिस को दिए थे। उन्होंने तीन मनोचिकित्सकों और एक मनोवैज्ञानिक के बयान दर्ज किए हैं, जो कथित तौर पर सुशांत का इलाज कर रहे थे।

‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के अनुसार, सुशांत सिंह राजपूत को ‘बायपोलर डिसऑर्डर’ था, और उनकी हालत अक्टूबर और नवंबर 2019 में बिगड़ गई थी। कथित तौर पर, वॉकर ने कहा कि रिया ने बताया कि सुशांत के विचार आत्मघाती हैं। वह नवंबर 2019 में पहली बार सुशांत से मिलीं। हालाँकि पहली अपॉइंटमेंट रद्द कर दी गई थी। जब वॉकर को सुशांत की स्थिति के बारे में पता चला, तो उन्होंने रिया को तुरंत सलाह दी।

सुशांत से बात करने के बाद, उसने निष्कर्ष निकाला कि उन्हें गंभीर बेचैनी (एंग्जाइटी) होती है। यहाँ तक ​​कि दवाइयाँ भी काम नहीं कर रही थीं। उन्होंने आगे कहा कि जब वह युवा थे, तब ‘अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर’ (एडीएचडी) के लिए दवा लेते थे।

उन्होंने जिक्र किया है कि दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की माँ की भी घबराहट और बेचैनी के कारण ही मृत्यु हुई थी। वॉकर ने कहा कि उसे यकीन है कि सुशांत बायपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित थे। उन्होंने सुझाव दिया था कि उन्हें इसके इलाज के के लिए डॉ. परवीन दादाचंजी से मिलना चाहिए।

अपने बयान में, उन्होंने कहा कि सुशांत बिना किसी कारण के रोते थे। वह मूडी प्रवृति के थे और अक्सर ड्राइविंग के दौरान ओवर स्पीडिंग करते थे। जब वो अपनी इस बीमारी के चरम पर थे, तब वह लगातार 4-5 दिनों तक सो नहीं पा रहे थे। जून 07, 2020 को, रिया चक्रवर्ती के सुशांत के जाने से एक दिन पहले, उसने डॉ. वॉकर को फोन किया और राजपूत के बिगड़ते स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दी। उसने उन्हें 8 जून का समय दिया, लेकिन रिया ने बाद में अपॉइंटमेंट रद्द कर दिया।

बयान और रिपोर्ट के साथ समस्याएँ

‘मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017’ के अनुसार, असाधारण परिस्थितियों में, जैसे कि जीवन या मृत्यु, या न्यायालय के आदेशों के सम्बन्ध में, किसी व्यक्ति की बीमारी के विवरण को बिना पूर्व अनुमति के इस्तेमाल करना या प्रकाशित करना गैरकानूनी है। समाचार एजेंसी द्वारा प्राप्त बयान को ‘इंडिया टुडे’ द्वारा प्रकाशित किया जाना अनैतिक और गैरकानूनी था।

सुसैन वॉकर एक क़्वालिफ़ाइड मनोचिकित्सक नहीं, बल्कि एक कंसल्टिंग मनोवैज्ञानिक है। उन्हें पेशेवर और कानूनी रूप से एक संभावित मानसिक विकार वाले रोगियों का इलाज करने की अनुमति नहीं है। वह दवाओं को बदलने, या जाँच के बारे में जानकारी नहीं दे सकती हैं। उन्होंने सुशांत को एक क्लिनिकल चेकअप के लिए जाने के लिए कहा, जो वह नहीं कर सकती। रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि क्या वह सुशांत की दवाओं या मनोचिकित्सक को बदलने वाली थी?

अपने बयान में, उन्होंने कहा, “मुझे लगा कि जब से सुशांत सिंह ने दवाइयाँ लेनी बंद कर दी है, तब से बायपोलर डिसऑर्डर व्यापक स्तर तक बढ़ गया था और हो सकता है कि उन्हें बीमारी से छुटकारा मिल गया हो, क्योंकि दवाइयाँ नहीं लेने से यह बीमारी हर बार बढ़ती रहती है। मेरे अनुभव के अनुसार यह और भी गंभीर हो जाता है।”

उन्होंने बार-बार सुशांत को बताया कि उसे ठीक किया जा सकता है, लेकिन बायपोलर डिसऑर्डर का कोई इलाज नहीं है, और मरीज को जीवन भर इस बीमारी के नियमित इलाज से गुजरना पड़ता है। रोग का कोई इलाज नहीं है, लेकिन लक्षण, उचित दवा और जीवनशैली में परिवर्तन के साथ इसका इलाज किया जा सकता है, जैसा कि डॉक्टर द्वारा राय दी गई है।

इंडिया टुडे ने भी सुसैन वॉकर के हवाले से कहा कि रिया चक्रवर्ती ने उन्हें बताया था कि सुशांत को आत्मघाती विचार आते हैं। ऐसे समय में, जब रिया सुशांत की मौत के मामले में जाँच का सामना कर रही है और उनकी भूमिका पर सवाल उठाया गया है, इंडिया टुडे रिया चक्रवर्ती के दावों के आधार पर फिर से यह साबित करने की कोशिश कर रहा है कि सुशांत मानसिक रूप से अस्वस्थ थे। हाल ही में रिया चक्रवर्ती को राजदीप सरदेसाई के साथ दिए गए कुख्यात इंटरव्यू में कई मुद्दों पर झूठ बोलते हुए पाया गया है, और इसलिए उनके दावे वर्तमान में विश्वसनीय नहीं हैं।

गौरतलब है कि इस इंटरव्यू में भी राजदीप सरदेसाई ने सुशांत सिंह की कथित मानसिक बीमारी पर ज़ोर दिया था। उन्होंने इसे इस तरह पेश किया जैसे मानसिक बीमारी का आरोप वास्तविक तथ्य हो। जबकि सुशांत सिंह का परिवार इस मुद्दे पर अपना पक्ष पहले ही रखा चुका है। उन्होंने कहा था कि पहले कभी सुशांत सिंह को इस तरह की कोई दिक्कत नहीं हुई थी। न ही किसी विशेषज्ञ ने उनके संबंध में ऐसा कुछ कहा था। सुशांत पर मानसिक रूप से बीमार होने का आरोप अभी तक सिर्फ और सिर्फ रिया चक्रवर्ती ने लगाया है, जिन पर खुद इस मामले के संबंध में जाँच चल रही है। इसके अलावा वॉकर का ऐसा दावा है, जिनके पास ऐसे मामलों को देखने के लिए उचित योग्यता तक नहीं है।