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घर पर फहराया पाकिस्तानी झंडा, वीडियो वायरल होने के बाद पंक्चर बनाने वाला फारूक खान गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के देवास में एक व्यक्ति को पाकिस्तानी झंडा फहराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि शिप्रा गाँव में फारूक खान नामक व्यक्ति ने अपने घर की छत पर पाकिस्तानी झंडा फहराया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया। ये मकान फारूक खान का ही है, जिस पर केस दर्ज कर के आगे की कार्रवाई की जा रही है। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

जैसे ही इस घटना की सूचना प्रशासन को मिली, हड़कंप मच गया। स्थानीय इलाक़े में भी तनाव पसर गया। जानकारी मिलते ही राजस्व विभाग के लोग घटनास्थल पर पहुँचे। विभाग की टीम ने मौके पर पहुँच कर ही पंचनामा बनाया। इसके बाद औद्योगिक क्षेत्र थाना की पुलिस ने मौके पर पहुँच कर केस दर्ज किया। फारूक खान के खिलाफ धारा 153A के तहत मामला दर्ज कर के जाँच की जा रही है।

बता दें कि आईपीसी की धारा 153 () उन लोगों पर लगाई जाती है, जो धर्म, भाषा, नस्ल वगैरह के आधार पर लोगों में नफरत फैलाने की कोशिश करते हैं। इसके तहत 3 साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। अगर ये अपराध किसी धार्मिक स्थल पर किया जाए तो 5 साल तक की सजा और जुर्माना भी हो सकता है। इसी धारा के तहत पुलिस फारूक खान के खिलाफ कार्रवाई कर रही है।

पुलिस को आशंका थी कि इस झंडे के कारण सामाजिक शांति में विघ्न डाला जा सकता है, इसीलिए इस झंडे को जब्त कर लिया गया है। बताया जा रहा है कि इस झंडे को फारूक खान के बेटे ने फहराया था। पुलिस इस बात का पता लगाने में जुटी है कि आखिर ये पाकिस्तानी झंडा आया कहाँ से और इसे लगाने का मकसद क्या था। पूछताछ के बाद इस मामले में और जानकारियाँ सामने आने की सम्भावना है।

राजस्व इंस्पेक्टर लखन सिंह ने इस झंडे की पहचान कर आधिकारिक रूप से बताया कि ये पाकिस्तानी झंडा है। फारूक खान का कहना है कि उसका बेटा नाबालिग है और उसने धोखे में ऐसा किया और उसे जैसे ही अपने बेटे की करतूत का पता चला, उसने उस झंडे को जलाने की कोशिश की। फारूक खान पंक्चर बनाने की दुकान चलाता है। उसके परिवार के अन्य सदस्यों से भी पूछताछ होनी है।

हाल ही में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पंजाब के मोगा में खालिस्तानी तत्वों ने मुख्य प्रशासनिक भवन के ऊपर ही खालिस्तान का झंडा फहरा दिया था। इतना ही नहीं, खालिस्तान समर्थकों ने वहाँ लगे तिरंगे झंडे को भी हटा दिया था। मोगा स्थित जिला प्रबंधकीय कॉम्प्लेक्स में दो खालिस्तानी युवकों ने 5वीं मंजिल पर चढ़ कर छत की पाइप पर खालिस्तान का झंडा लगा दिया था।

लद्दाख में भारत और चीन की सेना के बीच फिर से झड़प: 29/30 अगस्त को भागना पड़ा चायनीज फौज को

29 और 30 अगस्त की रात को चीनी सैनिकों ने भारतीय सीमा क्षेत्र में फिर से घुसपैठ की कोशिश की। हालाँकि उन्हें मुँह की खानी पड़ी। भारतीय सैनिकों ने पैंगोंग त्सो (PangongTso) के दक्षिण तट पर घुसपैठ कर रहे चीनी सैनिकों को खदेड़ दिया।

भारत और चीन की सेनाओं के बीच हुई इस झड़प के बारे में गौरव सावंत ने ट्वीट कर जानकारी दी।

भारतीय सेना के पीआरओ, कर्नल अमन आनंद ने सोमवार (31 अगस्त) को कहा कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA, चायनीज सैनिक) के सैनिकों ने 29 और 30 अगस्त (शनिवार और रविवार) की रात को पैंगोंग त्सो झील के दक्षिणी तट पर दोनों देशों के बीच बनी आम सहमति का उल्लंघन किया।

कर्नल अमन आनंद ने बताया, “29/30 अगस्त की रात को, पीएलए सैनिकों ने दोनों देशों के बीच चल रही राजनयिक व्यस्तताओं के दौरान पिछली सर्वसम्मति का उल्लंघन किया और सीमा-स्थिति को बदलने के लिए उत्तेजक सैन्य एक्शन को अंजाम दिया।”

आगे उन्होंने बताया,

“भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों के इस दुस्साहस भरे एक्शन को समय रहते निष्क्रिय कर दिया। भारतीय सेना ने इसके बाद सीमा पर अपनी स्थिति को और मजबूत कर लिया। सीमा पर चीनी इरादों को पूरी तरह विफल कर दिया गया।

कर्नल अमन आनंद ने बताया कि मुद्दों को सुलझाने के लिए चोशुल में ब्रिगेड कमांडर स्तर की एक फ्लैग मीटिंग चल रही है।

ज्ञात हो कि इससे पहले लद्दाख बॉर्डर पर गलवान घाटी के पास हिंसक झड़प में चीन के 43 सैनिकों के हताहत होने की बात सामने आई थी, जबकि हमारे 20 सैनिक बलिदान हुए थे।

‘शांतिपूर्ण’ जुलूस पर पैलेट गन से हमला: अलजजीरा ने फैलाया झूठ, फोटो-वीडियो से सामने आया पुलिस पर हमले का सच

29 अगस्त को कई मीडिया संस्थानों ने अपनी रिपोर्ट में यह बताया कि जम्मू कश्मीर में मुहर्रम के जुलूस के दौरान पुलिस ने लोगों पर पैलट गन चलाई और आँसूगैस के गोले छोड़े। लेकिन इसी बीच अलजजीरा ने अपनी रिपोर्ट में घटना का उल्लेख करते हुए आधा सच बताया और बस यही लिखा कि सुरक्षाबल व ताजिया ले जाते शिया मुस्लिमों की झड़प में कई नागरिक घायल हो गए। जबकि सच ये है कि इस हमले में कई पुलिसकर्मी भी गंभीर रूप से घायल हुए, जिनका जिक्र भी अलजजीरा ने करना जरूरी नहीं समझा।

अलजजीरा की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि पुलिस बल और जुलूस में शामिल संप्रदाय विशेष के लोगों के बीच झड़प क्यों हुई। लेकिन, रिपोर्ट में यह जरूर लिखा गया कि यह जुलूस न केवल ‘शांतिपूर्ण’ था बल्कि हेल्थ प्रोटोकॉल को भी फॉलो कर रहा था। इसके बाद सोशल मीडिया पर हर जगह एक ही बात चलने लगी कि पुलिस ने संप्रदाय विशेष के लोगों पर हमला किया।

हालाँकि, दावे के उलट सच यह था कि जुलूस पुलिस के आदेशों के विरुद्ध निकाला जा रहा था और जब पुलिस अपनी ड्यूटी पर थी तब इन्हीं ‘शांतिपूर्ण’ जुलूसों में शामिल लोगों ने उन पर हमला भी किया, जिसकी वजह से कई पुलिसकर्मी इस घटना में घायल हुए। इसके बाद ही पुलिस ने पैलेट गन और आँसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया।

 

घटना के बाद कुछ पुलिसकर्मियों की खून से लथपथ तस्वीरें भी सामने आई हैं। इन तस्वीरों में देखा जा सकता है कि उन पर पत्थरों से हमले हुए हैं। इसके अलावा पत्रकार आदित्य राज कौल ने इस संबंध में कुछ ट्वीट करके घटना की जानकारी दी है। उनका कहना है कि श्रीनगर के जदिपाल में शिया समुदाय द्वारा जुलूस निकाले जाने के दौरान यह हमला हुआ, जिसमें कई पुलिसकर्मी बुरी तरह घायल हुए।

इस घटना के संबंध में एक वीडियो भी पत्रकार ने अपने ट्वीट में शेयर की है। वीडियो में हम देख सकते हैं कि सुरक्षाबल को पहले जुलूस में शामिल कुछ महिलाएँ और कुछ युवक उकसाते हैं। उन पर पीछे से आकर हमला भी बोलते हैं। इसके बाद जवाबी कार्रवाई में पुलिस अपनी लाठी उठाती है।

आदित्य राज कौल लिखते हैं, “श्रीनगर के जदिपाल में शिया शोक जुलूस के दौरान पुलिसकर्मियों पर पत्थरों से बुरी तरह हमला हुआ है। क्या इसे किसी ने रिपोर्ट किया या किसी कश्मीरी पत्रकार ने इस हमले की निंदा की? आखिर इस पर क्यों अंतरराष्ट्रीय मीडिया शांत है? या फिर तथ्यों को मोड़ने का इंतजार कर रही है।”

वह वीडियो शेयर करते हुए लिखते हैं, “यह वीडियो श्रीनगर के जदिबाल की है। कुछ गुंडों ने आकर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को घूँसों, मुक्कों से वार किया। जबकि हम साफ देख सकते हैं कि पुलिसकर्मियों या फिर सीआरपीएफ ने उन्हें किसी तरह से नहीं उकसाया था। क्या आप ऐसी हिंसा के बदले फूल बरसाए जाने की उम्मीद करते हैं?”

अपने अगले ट्वीट में वह कहते हैं, “मैंने हमेशा ऐसा महसूस किया है कि सुरक्षाबलों को अपने आप पर संयम रखना चाहिए और ऐसी हिंसक भीड़ के उकसाने पर उत्तेजित नहीं होना चाहिए। मगर, इस बिंदु से परे, अगर पुलिस को लात मारी जाती है, उन्हें घूँसे मारे जाते हैं, तो वह भीड़ का शिकार हो कर मरने का इंतजार नहीं कर सकते है और इसलिए उन्हें ऐसी प्रतिक्रिया देनी होती है।”

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कोरोना वायरस के कारण हर जगह मुहर्रम जुलूस निकाले जाने पर प्रतिबंध लगा था। इसलिए जम्मू कश्मीर प्रशासन ने केंद्र शासित प्रदेश में भी जुलूस न निकालने के लिए कड़ी पाबंदी लगाई और केवल कुछ ही लोगों को जुलूस की अनुमिति दी। मगर, बेमिना चौक पर जिस जुलूस के समय झड़प हुई, उसे प्रशासन की ओर से अनुमति नहीं मिली थी। इसलिए पुलिस इन जुलूस निकालने वाले लोगों को मनाकर वापस भेजना चाहती थी, लेकिन पुलिस की सुनने की बजाय वह उन पर पत्थर से हमला करने लगे और मीडिया ने भी बिना सच्चाई को जाने भारतीय सुरक्षाबल को अपनी रिपोर्ट में एक खलनायक की तरह प्रस्तुत कर दिया।

‘केजरीवाल माफी माँगो’ – उत्तराखंड की इष्ट देवी नंदा देवी की तुलना कूड़े के ढेर से, AAP के खिलाफ फूटा लोगों का गुस्सा

दिल्ली को संयुक्त राष्ट्र भी ‘पॉल्यूशन कैपिटल’ के रूप में देखता है लेकिन अरविन्द केजरीवाल की सरकार इस छवि को बदलने की बजाए आरोप-प्रत्यारोप में लगी हुई है, भले ही इससे देश की बदनामी ही क्यों न हो। ईस्ट दिल्ली के गाजीपुर में भारत का सबसे बड़ा कूड़ा-करकट का पहाड़ है, देश का सबसे बड़ा कचरे का ढेर। केजरीवाल की पार्टी ने इसकी तुलना उन पवित्र पर्वतों से की है, जिसकी लोग पूजा करते हैं। इसी क्रम में AAP ने गाजीपुर के कचरे के ढेर की तुलना उत्तराखंड की नंदा देवी से कर दी, जो राज्य की इष्ट देवी भी हैं।

आगे बढ़ने से पहले उस कचरे के पहाड़ के बारे में बता दें कि वो 40 फुटबॉल पिच से भी अधिक के क्षेत्र में फैला हुआ है। आवारा कुत्ते और गाय वहाँ घुमते रहते हैं। जानवर बीमार पड़ते हैं। 1 साल पहले ही इसकी ऊँचाई 213 फ़ीट थी। ऊँचाई में ये इस्लामी आक्रांताओं द्वारा बनाए गए ताजमहल और कुतुब मीनार को टक्कर दे रहा है। सुप्रीम कोर्ट तो यहाँ तक कह चुका है कि कुछ दिनों बाद वहाँ से गुजरने वाले हवाई जहाजों के लिए अलर्ट जारी करना पड़ेगा।

अब आते हैं आम आदमी पार्टी (AAP) की करतूत पर, जिसने गाजीपुर के उस कुड़े के पहाड़ की तुलना तीन पवित्र पर्वतों से की। उसने लिखा कि सिक्किम में कंचनजंघा सबसे बड़ा पर्वत है। इसके बाद उसने तस्वीरें डालते हुए लिखा कि इसी तरह उत्तराखंड में नंदा देवी और कामेट पर्वत शहर सबसे ऊँचा है। लेकिन इन तीनों के साथ ही उसने गाजीपुर के कचरे के पहाड़ की तस्वीर भी डाल दी और लिखा कि इसे भाजपा के एमसीडी ने बनाया है।

आम आदमी पार्टी ने अपने आधिकारिक हैंडल से ऐसा किया। इसके बाद सोशल मीडिया में आलोचना का दौर शुरू हो गया। बता दें कि आम आदमी पार्टी (AAP) ने जिन पर्वतों का जिक्र किया, वो न सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए पवित्र हैं बल्कि पूरा देश उन पर गर्व करता है और उन्हें पूजता है। भारत में हिमालय को भी देवता माना गया है, जिसके घर माँ पार्वती का जन्म हुआ था। ऐसे में AAP का ये मजाक लोगों को नागवार गुजरा। उत्तराखंड में तो नंदा देवी का विशेष महत्व है।

भारतीय जनता युवा मोर्चा की राष्ट्रीय मीडिया सह-प्रभारी नेहा जोशी ने कहा कि AAP और अरविन्द केजरीवाल ने हमेशा उत्तराखंड और यहाँ के निवासियों का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि नंदा देवी उत्तराखंड की इष्ट देवी हैं और उनके अपमान को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने केजरीवाल से इस मामले में माफ़ी माँगने को कहा। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे सीएम केजरीवाल ने बाटला हाउस एनकाउंटर में बलिदान हुए मोहन चंद्र शर्मा के शौर्य पर सवाल उठाया था।

अरविन्द केजरीवाल की पार्टी ने उत्तराखंड की इष्ट देवी का किया अपमान

नेहा जोशी ने आरोप लगाया कि सस्ती लोकप्रियता के लिए केजरीवाल और उनकी पार्टी ने जो दुस्साहस किया है, उन्हें उस हर एक व्यक्ति से माफ़ी माँगनी चाहिए, जो माँ नंदा की उपासना करते हैं। वहीं उत्तराखंड के एक अन्य ट्विटर हैंडल ‘सनातन टाइम्स’ ने पूछा कि जिन माँ नंदा देवी की हम पूजा करते हैं, उनका अपमान करना कहाँ तक उचित है? उसने AAP को सलाह दी कि वो देवभूमि को अपनी गन्दी राजनीति से दूर रखे।

नंदा देवी का अर्थ है वो देवी, जो आनंद प्रदान करती हैं। 1983 में ही नंदा देवी और इसके चारों तरफ की पहाड़ियों को पर्वतारोहण के लिए बंद कर दिया था, क्योंकि स्थानीय लोगों के लिए इसका बड़ा ही धार्मिक महत्व है। नंदा देवी नेशनल पार्क तो यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज में आता है। इसे उत्तराखंड में सुनंदा देवी के नाम से भी पुकारते हैं। पूरे उत्तराखंड के लोग नंदा देवी को अपना इष्ट मानते हैं।

नंदा देवी पर्वत की तुलना दिल्ली के कूड़े के ढेर से करने के बाद सोशल मीडिया पर हो रहे विरोध के बाद आम आदमी पार्टी ने अपने इस ट्वीट को डिलीट कर दिया है। गौरतलब है कि कुछ ही हफ्तों पहले आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविन्द केजरीवाल ने यह भी घोषणा की थी कि वह उत्तराखंड के आगामी विधानसभा चुनाव में सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी।

बशीर ने पुलवामा हमले में पहुँचाया सबसे ज्यादा नुकसान, Pak आकाओं ने जिसकी तुलना अफजल गुरु से की

पुलवामा में पिछले साल केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के काफिले पर हुए हमले में 40 जवान बलिदान हो गए थे। इस केस की जाँच कर रहे राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने अब चार्जशीट फाइल कर दी है। ये हमला कैसे हुआ? किसकी थी प्लानिंग? कौन-कौन थे शामिल? चार्जशीट में सब कुछ डिटेल में बताया गया है।

अब तक की जानकारी के अलावा जो सबसे चौंकाने वाली बात है वो है अटैक की जगह को फाइनल करने वाले शख्स का नाम। यह शख्स है – शाकीर बशीर मागरने। 22 साल इसकी उम्र है। फर्नीचर की दुकान चलाता है। किस जगह पर सबसे ज्यादा नुकसान होगा, इस बात की सटीक जानकारी देने के लिए इन आतंकियों के पाकिस्तानी आकाओं ने बशीर की तुलना संसद हमले के दोषी अफजल गुरु से की है।

पुलवामा की प्लानिंग ताकि हो मैक्सिमम नुकसान

बशीर पुलवामा के लेथपोरा में फर्नीचर की दुकान चलाता था। इस शख्स ने ही आतंकियों को बताया कि कहाँ से CRPF का काफिला निकलता है। क्योंकि इसकी दुकान हमले वाली साइट के ही पास थी। सड़क किनारे दुकान होने का इसने फायदा उठाया। क्योंकि सुरक्षाबलों के काफिले को वो हर दिन बड़ी आसानी से ध्यान से देख पाता था।

बशीर ने ही अन्य आतंकियों को बताया कि हाई-वे पर जहाँ उसकी दुकान है, वहाँ से आगे एक ढलान है, जहाँ गाड़ियों का काफिला धीमा हो जाता है। साथ ही उसने यह भी बताया कि क्यों उस जगह पर बम से भरी कार CRPF काफिले को टक्कर मार सकती है। क्योंकि उसी ढलान के पास हाइवे को जोड़ती हुई एक स्लिप रोड भी है। इतनी सटीक जानकारी के बाद आतंकियों ने इसी जगह हमला करने की प्लानिंग बनाई।

बशीर मतलब अफजल गुरु!

पुलवामा हमले की योजना बनाने वाला शख्स मोहम्मद उमर फारूक़। मैक्सिमम नुकसान के लिए लोकल इंफो देने वाला बशीर। बशीर की सूचना मोहम्मद उमर फारूक़ के लिए इतनी अहम थी कि वो उसे संसद हमले के दोषी अफजल गुरु से समान दर्जा देते हुए तुलना करने लगा था। NIA ने पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान भेजे गए ऑडियो मैसेज से यह जानकारी निकाली।

NIA ने जिस मैसेज को डिकोड किया, उसने शाकिर बशीर की जमकर तारीफ की गई थी। तारीफ के अलावा फारूक़ ने बशीर की तुलना अफजल गुरु से की थी। NIA ने 13500 पन्नों की चार्जशीट में बताया है कि बशिर हमले से कुछ दिन पहले ही जैश-ए-मोहम्मद में शामिल हुआ था।

ज्ञात हो कि NIA ने इस साल फरवरी में शाकिर बशीर को गिरफ्तार किया था। शुरुआती जाँच में इस आतंकी को NIA पुलवामा हमले को अंजाम देने वालों को एक साल तक अपने पास रखने और हमले में शामिल कार में RDX लगाने तक सीमित मान रही थी। लेकिन अब इसे सबसे अहम कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। वैसे भी बशीर हमले को अंजाम देने वाले आदिल अहमद का खास दोस्त है।

कोर्ट के निर्देश की अनदेखी कर हैदराबाद और पीलीभीत में निकला मुहर्रम जुलूस

उत्तर प्रदेश में कोरोना के बढ़ते मामले को देखते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुहर्रम के दौरान ताजिया का जुलूस निकालने और ताजिया दफनाने की अनुमति दिए जाने की माँग वाली याचिकाओं को शनिवार (अगस्त 29, 2020) को खारिज कर दिया था। इसके बावजूद प्रदेश के पीलीभीत में लॉकडाउन का उल्लंघन कर ताजिया जुलूस निकालने का मामला सामने आया है।

इसके बाद पुलिस ने 53 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। ताजियादारों ने सड़क पर ताजिया रखकर उसे सजा रहे थे, जिसकी वजह से वहाँ पर भी़ड़ इकट्ठी की हो गई थी। जुलूस निकालने वाले लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने के साथ ही बीट सिपाही सहित कोतवालों को भी फटकार लगाई गई है। 

इसके साथ ही हैदराबाद में भी लॉकडाउन का उल्लंघन करते हुए मुहर्रम का जुलूस निकाला गया। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर धज्जियाँ तो उड़ाई ही गई, साथ ही किसी ने मास्क पहनना भी उचित नहीं समझा। बताया जा रहा है कि यहाँ पर हाई कोर्ट के आदेश को ताक पर रखते हुए सैकड़ों की संख्या में लोग जुलूस में शामिल हुए।

जिस तरह से सैकड़ों की संख्या में लोगों ने इस जुलूस में हिस्सा लिया, उसके बाद से लोगों में संक्रमण फैलने का डर बढ़ गया है। बताया जा रहा है कि जुलूस निकालने के दौरान पुलिस भी वहाँ पर मौजूद थी, मगर इसके बावजूद सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का बिल्कुल भी पालन नहीं किया गया।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मुहर्रम जुलूस निकालने की माँग वाली याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि अगर जुलूस निकालने की इजाजत देंगे तो इससे अराजकता फैलेगी। कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा था, “अगर हम जुलूस निकालने की अनुमति दे देंगे तो इससे आराजकता फैलेगी और फिर एक समुदाय विशेष को कोरोना फैलाने के नाम पर लक्षित किया जाएगा, जो सुप्रीम कोर्ट नहीं चाहेगा।” अदालत ने यह भी कहा कि वह ऐसा कोई आदेश नहीं देंगे जिससे लोगों के स्वास्थ्य को खतरा हो।

इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भी आदेश जारी करते हुए कहा था कि सभी प्रकार के जुलूस एवं झाँकी पर प्रतिबंध रहेगा। गाइडलाइन में कहा गया था कि न तो सार्वजनिक स्थानों पर ताजिए रखे जाएँगे और ना ही अलम का जुलूस निकाला जाएगा। लोग ताजिया को अपने घरों में ही रखें और त्योहार मनाएँ।

उल्लेखनीय है कि कोरोना महामारी को देखते हुए तेलंगाना हाई कोर्ट ने मुहर्रम के दिन हैदराबाद के पुराने शहर में जुलूस निकालने के लिए इजाजत नहीं दी थी। इसके बावजूद यहाँ पर लोगों ने भारी संख्या में जुलूस निकाला।

सीएए विरोधी प्रदर्शन को पूरे देश में फैलाने के लिए बेताब था शरजील इमाम: दिल्ली पुलिस ने दाखिल की नई चार्जशीट

इस्लामी कट्टरपंथी शरजील इमाम के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने नई चार्जशीट दाखिल की है। इसमें दिल्ली पुलिस ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। इसमें कहा गया है कि वह नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) विरोधी प्रदर्शन को पूरे देश में फैलाने के लिए बेताब था।

आरोप-पत्र में कहा गया है कि इमाम पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के सदस्यों में से एक के संपर्क में था, जिसने उसे पीएफआई के सदस्य के रूप में विरोध करने का सुझाव दिया था। आरोप पत्र में कहा गया है, “आरोपित उस स्तर पर विरोध-प्रदर्शन को ले जाने के लिए बहुत बेताब था, जहाँ प्रदर्शनकारियों के सरगनाओं ने भीड़ को अपने हाथ में ले लिया था।”

इसमें आगे कहा गया कि इमाम ने न सिर्फ समुदाय के लोगों को जुटाया, बल्कि दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में ‘चक्का जाम’ कराने की भी कोशिश की। शरजील इमाम के बयानों और उसके कॉल डिटेल रिकॉर्ड के विश्लेषण से यह पता चला कि उसने सीलमपुर और खुरेजी में प्रदर्शन स्थलों का दौरा किया था।

इस बात की पुष्टि व्हाट्सएप चैट के माध्यम से भी हुई। आरोप-पत्र में बताया गया है कि स्थानीय मस्जिदों के इमामों की मदद लेकर उत्तर-पूर्व जिले में गलत सूचना फैलाने में कथित रूप से उसका हाथ था। इसके साथ ही इसमें कहा गया है कि शरजील इमाम और उसके समूह ने विभिन्न मस्जिदों की पहचान की थी और सीएए के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन की आड़ में बड़ी संख्या में संप्रदाय विशेष के लोगों को जुटाने के लिए कुछ लोगों को इन मस्जिदों में पर्चे बाँटने का काम सौंपा था।

ताजा आरोप-पत्र गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम के तहत नागरिकता संशोधन अधिनियम और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के खिलाफ देश विरोधी भाषण देने से संबंधित मामले में दाखिल किया गया है। आरोप पत्र में भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए (देशद्रोह), 153 (ए) (शत्रुता को बढ़ावा देना), 153 (बी) (राष्ट्रीय अखंडता के प्रति हानिकारक अभिकथन), 505 (अफवाहें फैलाना) और गैर कानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम की धारा 13 के तहत भी आरोप लगाए गए हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले UAPA के तहत गिरफ्तार जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा ने पुलिस पूछताछ के दौरान कुछ बड़े खुलासे करते हुए बताया था कि किस तरह से नागरिकता कानून (CAA) और NRC के विरोध के नाम पर उन्होंने लोगों को भड़काने के साथ बसों और घरों को जलाया था। आसिफ इकबाल तन्हा ने कहा कि वो देश को इस्लामिक राष्ट्र बनाना चाहता था और इसीलिए हिंदुओं को तंग कर धार्मिक भावनाएँ आहत करने की साज़िश रची।

आरोपित आसिफ इकबाल ने पुलिस को दिए बयान में बताया था, “12 दिसंबर को हम 2500-3000 लोग जामिया यूनिवर्सिटी के गेट नम्बर 7 पर मार्च कर रहे थे, उसके बाद 13 दिसंबर को शरजील इमाम भड़काऊ भाषण देते हुए चक्का जाम करने की बात कहता है। मैंने खुद लोगों को उकसाया। जामिया मेट्रो से पार्लियामेंट तक मार्च की कॉल दी, जिसमें कई संगठन हमें समर्थन देते हैं।”

एक टॉप स्टार की ड्रग सीक्रेट जानती थी, मुझे जेल भेजने की कोशिश हुई: कंगना को माफिया से ज्यादा मुंबई पुलिस का डर

बॉलीवुड में नेपोटिज्म और माफिया को लेकर अभिनेत्री कंगना रनौत लगातार खुलासे कर रही हैं। इसी कड़ी में उन्होंने बताया है कि एक ‘टॉप स्टार’ ने उन्हें जेल भेजने की कोशिश की थी, क्योंकि वे उसके ड्रग सीक्रेट के बारे में जानती थीं। साथ ही ट्वीट कर बताया है कि अब माफिया से ज्यादा उन्हें मुंबई पुलिस का डर है।

रिपब्लिक टीवी को दिए इंटरव्यू में कंगना रनौत ने दावा किया कि जब वह एक टॉप स्टार के साथ रिलेश्नशिप में थीं तो उस दौरान उसे ड्रग्स ओवरडोज के चलते अस्पताल में भर्ती कराना पडा था। उसके फेफड़ों में कुछ हुआ था। हालाँकि, अस्पताल ने इसे सामने नहीं आने दिया और मामले को दबा दिया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि वह स्टार खुद को एक ‘सुपरहीरो’ मानता है। कंगना ने कहा कि इस स्टार का परिवार एक फिल्म बना रहा था और उसमें उनकी एक छोटी सी भूमिका थी। उन्होंने लास वेगास में फिल्म की शूटिंग के दौरान के अपनी अनुभवों को याद करते हुए कहा कि उस समय उनकी (टॉप स्टार) गर्लफ्रेंड एक विदेशी थीं। वह उनके साथ रहती थी। हर रात पार्टी हुआ करती थी और ड्रग्स पानी की तरह बहता था। एलएसडी, कोकीन और एक्टेसी पिल्स का वो दिन में भी इस्तेमाल करते थे।

कंगना ने बताया कि इस टॉप स्टार के साथ उन्होंने एक और फिल्म की और उनकी दोस्ती एक रिश्ते में बदल गई। उन्होंने दावा किया कि इस अफेयर ने उन्हें बॉलीवुड की ‘बड़ी दुनिया’ तक पहुँचा दिया। उन्होंने कहा, “जब हमारे रिश्ते के बारे में इनर सर्कल को पता चला, तब मुझे भी वे उनकी पार्टियों में बुलाने लगे। एक आउटसाइडर के तौर पर मुझे पहले कभी नहीं बुलाया जाता था।”

एक्ट्रेस ने दावा किया, “ड्रग्स की वजह से उनकी (टॉप स्टार) पर्सनल लाइफ में दूरियाँ आई और बाद में उनका तलाक हुआ। फिर उन दोनों ने मिलकर मुझे जेल में डालने की साजिश रची। तलाक के बावजूद वे अभी भी साथ रह रहे हैं।”

आगे कंगना ने कहा, “अगर वह इतने पावरफुल लोग हैं तो मैं उन्हें कैसे नुकसान पहुँचा सकती हूँ? फिर भी वे मुझे सलाखों के पीछे भेजना चाहते हैं? क्योंकि उन्हें पता है कि मैं इन रहस्यों को जानती हूँ इसलिए उन्होंने मुझे बदनाम करने की कोशिश की।”

इसी क्रम में कंगना ने आगे कहा कि बॉलीवुड में जितने भी ड्रग्स एडिग्टस हैं वह एक दूसरे के सिक्रेट्स जानते हैं। सबके डीलर सेम हैं। वह ड्रग्स माफिया इनको बेस्ट ड्रग्स उपलब्ध कराते हैं। बॉलीवुड में सुपरस्टार की पत्नियाँ ऐसी पार्टियाँ होस्ट करती हैंऔर उस पार्टी में आपको इसी तरह के लोग मिलेंगे जो किसी तरह के ड्रग्स करते हैं।

कंगना रनौत के बयान के बाद बीजेपी नेता राम कदम ने अभिनेत्री की सुरक्षा की माँग की थी। इस पर अभिनेत्री ने कहा कि उन्हें मुंबई पुलिस की सुरक्षा नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार या केंद्र सरकार सुरक्षा दे सकती है। कंगना ने कहा कि उन्हें अब मूवी माफिया से ज्यादा मुंबई पुलिस से डर लगता है।

बीजेपी नेता राम कदम ने महाराष्ट्र की सरकार से माँग की थी कि कंगना को सुरक्षा दी जाए। उन्होंने कहा था, “सौ घंटे और चार दिन से ज्यादा हो गए हैं, कंगना रनौत बॉलीवुड-ड्रग्स माफिया के साँठगाँठ का पर्दाफाश करने के लिए तैयार है, लेकिन उन्हें सुरक्षा की जरूरत है। दुर्भाग्य से महाराष्ट्र सरकार ने अभी तक कोई सुरक्षा नहीं दी है।”

इसके जवाब में कंगना ने कहा, “सर आपकी चिंता के लिए धन्यवाद। मुझे अब मुंबई में मूवी माफिया से ज्यादा मुंबई पुलिस से डर है। मैं हिमाचल प्रदेश सरकार या सीधे केंद्र से सुरक्षा चाहूँगी। मुंबई पुलिस नहीं।”

इसके बाद राम कदम ने अभिनेत्री के ट्वीट का जवाब देते हुए कहा, “आपकी हिम्मत को सलाम। विनम्रतापूर्वक कहना चाहूँगा कि मुंबई पुलिस बहुत ही कुशल है, लेकिन यह महाराष्ट्र सरकार का रुखापन है जो उनकी छवि प्रभावित कर रही है। इस सरकार के स्वार्थ ने मुंबई पुलिस के गौरवशाली अतीत को खत्म कर दिया है।”

गौरतलब है कि इससे पहले कंगना ने ट्वीट कर कहा था कि यदि बॉलीवुड में नॉरकोटिक्स टेस्ट हो गया तो कई सितारे जेल में होंगे। इसके अलावा एक ट्वीट में उन्होंने ये भी बताया था जब वे बॉलीवुड में आईं थी तो उन्हें ड्रिंक में ड्रग्स दिए जाते थे।

माँ और भाई-बहनों संग छिपी नाबालिग मारिया, अगवा कर मोहम्मद नक्श ने कर लिया था निकाह

लाहौर हाई कोर्ट द्वारा नाबालिग ईसाई लड़की मारिया शाहबाज़ को उसके अपहरणकर्ता और ‘पति’ मुहम्मद नक्श के पास लौटने का हुक्म देने के तीन सप्ताह बाद कथित तौर पर लड़की पाकिस्तान के फैसलाबाद में अपने परिवार के साथ छिप गई है। 

14 साल की इस लड़की का नाम है मारिया शहबाज़ (Maria Shahbaz)। बता दें कि इस साल अप्रैल में मोहम्मद नक्श और उसके साथियों ने फैसलाबाद में उसे अगवा कर लिया था और जबरन शादी कर ली। जानकारी के मुताबिक मारिया शहबाज़, अपहरणकर्ता की पकड़ से भाग निकली है और पाकिस्तान के फैसलाबाद में अपनी माँ और तीन भाई-बहनों के साथ छिप गई है

पत्रकार सचिन जोस ने इसकी पुष्टि करते हुए ट्वीट किया, “14 साल की पाकिस्तानी ईसाई लड़की मारिया शहबाज़ अपने अपहरणकर्ता, मोहम्मद नक्श के घर से भाग गई है। हिरासत में रहते हुए उसने अपने कैथोलिक विश्वास को त्यागने से इनकार कर दिया। मारिया के परिवार ने उसके अपहरणकर्ता के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज की है।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि लड़की ने स्वेच्छा से इस्लाम धर्म कबूल किया। उसने अपनी मर्ज़ी से ही अपहरण करने वाले व्यक्ति से शादी भी की। इसलिए उसे एक “अच्छी बेगम” होने के नाते अपने पति के साथ रहना चाहिए।

बता दें कि मारिया शहबाज़ को 28 अप्रैल 2020 को काम पर जाते वक्त अगवा किया गया था। इसके बाद जबरन उसका धर्म परिवर्तन करवाकर अपहरणकर्ता के साथ ही उसका निकाह करवा दिया गया। चश्मदीद परवेज मसीह, युनूस मसीह और नईम मसीह ने बताया था कि अपराधियों ने उसे जबरन कार में बिठाया। चश्मदीदों का कहना था कि वे मारिया की मदद नहीं कर सके, क्योंकि अपहरण करने वाले हथियारबंद थे। अपराधियों ने हवाई फायरिंग भी की थी।

कथित तौर पर, उसे ब्लैंक पेपर पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया था जो बाद में नक्श द्वारा नकली शादी और धर्मांतरण प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल किया गया। मारिया को अपहरणकर्ता द्वारा सोशल मीडिया पर उसके ‘बलात्कार वीडियो’ को जारी करने की धमकी के साथ चुप रहने के लिए मजबूर किया गया था। मारिया ने कबूल किया था, “उन्होंने मेरे पूरे परिवार को मारने की धमकी दी। मेरी जान दाँव पर थी और नक्श ने बार-बार मेरे साथ जबरदस्ती बलात्कार किया।”

National Database and Registration Authority (NADRA) द्वारा जारी किए गए प्रमाण-पत्र के अनुसार मारिया की उम्र 18 साल से कम है। लेकिन मोहम्मद नक्श ने शादी के दस्तावेज़ों में उसे 18 से ज़्यादा का दिखाया है। इसके अलावा लड़की को भी अपना पक्ष सही से नहीं रखने दिया गया था।   

ACN (Aid to the Church in Need) से बात करते हुए मारिया के एक पारिवारिक मित्र ने कहा, “मारिया को आघात पहुँचा है। वह बोल नहीं सकती। हम उसे डॉक्टर के पास ले जाना चाहते हैं, लेकिन हमें डर है कि हमें पकड़ा जा सकता है। हम सभी बहुत भयभीत हैं, लेकिन हमें ईश्वर पर भरोसा है।”

क्रिश्चियन संगठन ने मारिया के वकील, खलील ताहिर संधू के साथ भी संपर्क किया था और पुलिस से बयान की प्रति ली थी। ताहिर संधू ने यौन अपराध के लिए नक्श की गिरफ्तारी और विवाह प्रमाण-पत्र को रद्द करने की माँग की थी, वहीं आरोपित ने मारिया के परिवार को ‘लड़की का अपहरण करने’ और उसे उससे दूर ले जाने के लिए गिरफ्तार करने की माँग की है।

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक लड़कियों का अपहरण कर उनका जबरन धर्म परिवर्तन करवाने का यह पहला मामला नहीं है। पाक से लगातार ऐसी नापाक खबरें सामने आती रहती है। वहाँ के हिन्दू, सिख और ईसाई लड़कियों से जबरन इस्लाम कबूल करवाया जाता है।

दिल्ली दंगों पर किताब के 30,000 से अधिक प्रीऑर्डर, ब्लूम्सबरी के हाथ खींचने के बाद गरुड़ कर रहा है प्रकाशित

पब्लिशिंग हाउस ब्लूम्सबरी द्वारा ‘Delhi Riots 2020: The Untold Story’ पुस्तक का प्रकाशन रद्द करने के बाद गरुड़ ने इसे प्रकाशित करने का फैसला किया था। बता दें कि पुस्तक के लिए 30,000 से अधिक प्रीऑर्डर आ चुके हैं।

भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने ट्वीट कर बताया है, “किताब की 30,000 प्रतियों के ऑर्डर पहले ही दिए जा चुके हैं। मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि मैं दिल्ली दंगे की अनकही कहानी की 100 प्रतियाँ खरीदूँगा। मैं इस किताब की 100 कॉपी खरीद कर लोगों को पढ़ने को दूँगा। आइए हम सब मिलकर 50,000 बुकिंग का रिकॉर्ड बनाएँ। 50,000 किताब – करारा जवाब।”

यह पुस्तक लेखकों की पड़ताल और इंटरव्यू पर आधारित है। इसे ब्लूम्सबरी द्वारा सिंतबर 2020 में प्रकाशित किया जाना था। पुस्तक की 100 प्रतियाँ प्रिंट की गईं और लेखकों को सौंप दी गईं। यह अमेज़ॅन पर प्री-ऑर्डर के लिए भी उपलब्ध था। हालाँकि, इस्लामी और वामपंथियों के दबाव में आकर ब्लूम्सबरी ने एक बयान जारी कर पुस्तक को वापस लेने की घोषणा की। 

22 अगस्त 2020 को इस किताब के वर्चुअल विमोचन के दौरान ब्लूम्सबरी यूके मुख्यालय से दबाव बनाया गया। जिसके बाद प्रकाशन समूह ने अचानक ही किताब प्रकाशित करने से मना कर दिया था। बाद में पुस्तक की लेखिका मोनिका अरोड़ा ने बताया कि उन्होंने गरुड़ प्रकाशन के माध्यम से पुस्तक प्रकाशित करने का फैसला किया है। अब पुस्तक हिंदी में भी प्रकाशित हो रही है।

इस बात की पुष्टि करते हुए गरुड़ प्रकाश ने भी ट्वीट किया था। साथ ही उन्होंने किताब की लेखिका मोनिका अरोड़ा का आभार भी जताया था। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा था, “दोस्तों! आप सभी के सहयोग के लिए धन्यवाद। आइए इस किताब को घर-घर तक पहुँचाते हैं।” इसके बाद प्रकाशन समूह ने ट्वीट करके यह जानकारी भी दी थी कि किताब हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषा में विमोचित की जाएगी। जल्द ही यह किताब उपलब्ध कराई जाएगी। 

ब्लूम्सबरी पर इस किताब की मैनुस्क्रिप्ट (पांडुलिपि) लीक करने के आरोप भी लग रहे हैं। इस किताब की मैनुस्क्रिप्ट व्हाट्सएप पर वायरल हो रही है। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाया कि कैसे पूरी पुस्तक को अवैध रूप से जारी किया गया है। उनका कहना है कि इस तरह से पुस्तक को सोशल मीडिया पर सर्कुलेट नहीं किया जा सकता। बताया जा रहा है कि यह वही कॉपी है जो ब्लूम्सबरी के पास थी। मैनुस्क्रिप्ट का दूसरे पन्ने पर स्पष्ट रूप से लिखा है कि यह एक कॉपी है। इसे ब्लूम्सबरी द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है।